RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा

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Detailed Chapter 7 नन्दिनीकथा RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit

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Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 7 वस्तुनिष्ठात्मकाः प्रश्नाः

 

प्रश्न 1. दिलीपस्य सहधर्मचारिणी आसीत्
(क) नन्दिनी।
(ख) सुदक्षिणा
(ग) कामिनी
(घ) सन्ततिः
Answer: (ख) सुदक्षिणा
In simple words: राजा दिलीप की पत्नी का नाम सुदक्षिणा था, जो उनके साथ धर्म का पालन करती थीं। वह नन्दिनी की सेवा में उनकी सहधर्मचारिणी थीं।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सही विकल्प का चुनाव करते समय सुनिश्चित करें कि आपने पाठ में दिए गए मुख्य पात्रों के विवरण को ठीक से समझा है।

 

प्रश्न 2. दिलीपस्य परीक्षार्थं नन्दिनी हिमालयगहायां प्रविशती
Answer: नन्दिनी दिलीप की परीक्षा लेने के लिए हिमालय की गुफा में प्रवेश करती है। यह घटना उसकी भक्ति और समर्पण को दर्शाती है।
In simple words: नन्दिनी दिलीप की परीक्षा लेने के लिए हिमालय की गुफा में चली गई।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य मोड़ और पात्रों के उद्देश्यों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे प्रश्नों के रूप में आते हैं।

 

प्रश्न 3. पाठेऽस्मिन् भूतेश्वरपार्श्ववर्ती विशेषणं अस्ति
(क) शिवस्य
(ख) सिंहस्य
(ग) राज्ञः।
(घ) भूतानाम्
Answer: (ख) सिंहस्य
In simple words: 'भूतेश्वरपार्श्ववर्ती' विशेषण पाठ में सिंह के लिए प्रयोग किया गया है। यह बताता है कि सिंह भगवान शिव के पास रहता था।

🎯 Exam Tip: संस्कृत पाठों में विशेषणों को ध्यान से पढ़ें, वे अक्सर किसी पात्र या वस्तु की विशेषता बताते हैं और सीधे प्रश्नों में पूछे जा सकते हैं।

 

प्रश्न 4. अस्मिन् पाठे 'मनुष्यदेवः' इत्यस्य शब्दस्य प्रयोगः अस्ति
(क) रूपकम्।
(ख) उपमा
(ग) श्लेषः
(घ) यमकम्
Answer: (क) रूपकम्।
In simple words: 'मनुष्यदेवः' शब्द का प्रयोग इस पाठ में रूपक के तौर पर किया गया है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को देवता के समान बताया गया है।

🎯 Exam Tip: अलंकारों (जैसे रूपक, उपमा) को पहचानना साहित्यिक प्रश्नों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे पाठ की सुंदरता और गहराई बढ़ाते हैं।

अधोलिखितेषु रिक्त स्थानं पूरयत

 

Question. अधोलिखितेषु रिक्त स्थानं पूरयत
(i) स्ववीर्य गुप्ता हिः .................................
(ii) राजा गविस्थितमेकं ................................. अपश्यत्
(iii) ................................. प्रतिभासि मे त्वम्।
(iv) क्षतात् किल ................................. इत्युदग्रः।
(v) प्रजावत्सलस्योपरि ................................. मुक्तहस्तैः सुमनवृष्टिः कृताः।
Answer:
(i) स्ववीर्य गुप्ता हिः मनोप्रसूतिः
(ii) राजा गविस्थितमेकं सिंहम् अपश्यत्
(iii) विचारमूढः प्रतिभासि मे त्वम्।
(iv) क्षतात् किल त्रायत इत्युदग्रः।
(v) प्रजावत्सलस्योपरि मुक्तहस्तैः सुमनवृष्टिः कृताः।
In simple words: इन वाक्यों में खाली जगहों को सही शब्दों से भरा गया है, जिससे वाक्य का अर्थ पूरा हो जाता है। यह पाठ के मुख्य विचारों को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, पूरे वाक्य को ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि भरा गया शब्द व्याकरणिक और अर्थ के अनुसार सही है।

 

प्रश्न 2. सर्गस्थितिप्रत्यवहार हेतुः कः अस्ति?
Answer: सर्ग, स्थिति और प्रत्यवहार का हेतु भगवान शिव हैं। वे सृष्टि की रचना, पालन और संहार के स्वामी हैं।
In simple words: संसार को बनाने, बनाए रखने और खत्म करने का कारण भगवान शिव हैं।

🎯 Exam Tip: धार्मिक या दार्शनिक संदर्भों वाले प्रश्नों में, मुख्य देवता या सिद्धांत को सही ढंग से पहचानें।

 

प्रश्न 3. दिलीपः आमिषपिण्डमिव सिंहाय किं समर्पितवान्?
Answer: दिलीप ने सिंह को अपने शरीर को मांस के लोथड़े के समान समर्पित कर दिया। उन्होंने नन्दिनी की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
In simple words: दिलीप ने सिंह को अपना शरीर मांस के टुकड़े की तरह दे दिया।

🎯 Exam Tip: चरित्र के बलिदान या महत्वपूर्ण कार्यों से संबंधित प्रश्नों में, उनके कार्यों का सटीक उल्लेख करें।

 

प्रश्न 4. मातुः दुग्धे प्रथमाधिकारः कस्य भवति?
Answer: माता के दूध पर पहला अधिकार उसके शिशु का होता है। यह प्राकृतिक नियम और ममता का प्रतीक है।
In simple words: मां के दूध पर सबसे पहला हक उसके बच्चे का होता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य नैतिक या प्राकृतिक सिद्धांतों से संबंधित प्रश्नों में, सार्वभौमिक सत्य को सरल भाषा में व्यक्त करें।

 

प्रश्न 5. नन्दिनी प्रसादात् कस्य जन्मः अभवत्?
Answer: नन्दिनी के आशीर्वाद से राजा रघु का जन्म हुआ। रघु एक महान और पराक्रमी राजा बने।
In simple words: नन्दिनी के आशीर्वाद से रघु का जन्म हुआ।

🎯 Exam Tip: कथा में महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके परिणामों को याद रखें, जैसे कि किसी पात्र का जन्म या किसी वरदान का प्रभाव।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 7 निबन्धात्मकाः प्रश्नाः

 

प्रश्न 1. पाठस्थितयोः प्रथम-द्वितीयपद्ययोः सप्रसङ्गव्याख्या विधेया।
Answer:
प्रथम पद्य की सप्रसङ्ग व्याख्या:
(1) \( \text{स्थितः स्थितमुच्चलितः ................................. गच्छत ॥} \)
प्रसंग: यह पद्य 'नन्दिनी कथा' पाठ से लिया गया है। इस पाठ में राजा दिलीप द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए नन्दिनी गाय की सेवा का वर्णन है। गुरु वसिष्ठ की आज्ञा से राजा दिलीप कामधेनु की पुत्री नन्दिनी की सेवा करते हैं। महाकवि कालिदास इस पद्य में बताते हैं कि वन में गाय चराते समय राजा दिलीप नन्दिनी का अनुसरण छाया की तरह करते थे।
अर्थ: राजा दिलीप नन्दिनी के रुकने पर रुक जाते थे, चलने पर चलने लगते थे, बैठने पर बैठ जाते थे और पानी पीने की इच्छा होने पर भी तब तक पानी नहीं पीते थे जब तक नन्दिनी न पी ले। इस तरह वह हमेशा नन्दिनी के पीछे-पीछे रहते थे।
In simple words: इस प्रश्न में राजा दिलीप द्वारा नन्दिनी गाय की भक्तिपूर्ण सेवा का वर्णन है, जिसमें वह गाय के हर काम में उसका पीछा करते थे, जैसे एक छाया। यह उनकी अटूट श्रद्धा को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: पद्य की व्याख्या करते समय, पहले प्रसंग बताएं (पाठ का नाम, कवि, विषय), फिर अन्वय या सीधा अर्थ स्पष्ट करें और अंत में उसका भावार्थ सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 1. (2) द्वितीयपद्यस्य सप्रसङ्ग व्याख्या
\( \text{पुरस्कृता वर्मनिः ................................. सन्ध्या} \)
Answer:
प्रसंग: यह पद्य 'नन्दिनी कथा' पाठ से लिया गया है। इस पाठ में पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दिलीप की नन्दिनी सेवा का वर्णन है। इस पद्य में कालिदास बताते हैं कि तपोवन से वसिष्ठ के आश्रम लौटते समय नन्दिनी, सुदक्षिणा और दिलीप के बीच में कैसी सुंदर दिखती है।
अर्थ: मार्ग में, राजा दिलीप द्वारा आगे की गई और रानी सुदक्षिणा द्वारा अगवानी की गई वह नन्दिनी गाय उन दोनों के बीच में स्थित होकर, दिन और रात के बीच की संध्या के समान बहुत सुंदर लग रही थी। यह दृश्य राजा के समर्पण और रानी के स्वागत भाव को दर्शाता है।
In simple words: दूसरे पद्य में बताया गया है कि नन्दिनी गाय, राजा दिलीप और रानी सुदक्षिणा के बीच में, शाम की तरह सुंदर दिख रही थी।

🎯 Exam Tip: पद्य की व्याख्या करते समय, पहले प्रसंग बताएं (पाठ का नाम, कवि, विषय), फिर अन्वय या सीधा अर्थ स्पष्ट करें और अंत में उसका भावार्थ सरल शब्दों में प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 2. चतुर्थ-पैञ्चमयोः सप्रसङ्गव्याख्या विधेया।
Answer:
चतुर्थ पद्य की सप्रसङ्ग व्याख्या:
\( \text{एकातपत्रं जगतःः ................................. मे त्वम॥} \)
प्रसंग: इस पद्य में जब राजा दिलीप नन्दिनी की रक्षा के लिए सिंह को अपना शरीर अर्पित करने को तैयार होते हैं, तब सिंह उन्हें मूर्ख बताते हुए कहता है। यह राजा के परोपकार और कर्तव्यनिष्ठा के भाव को दर्शाता है।
अर्थ: (सिंह कहता है) तुम इस पूरी पृथ्वी के एकमात्र शासक हो, तुम्हारी जवानी नई है और यह सुंदर शरीर भी तुम्हारा है। इतने छोटे से कारण (एक गाय) के लिए इतनी सारी चीजों को छोड़ना चाहते हो, तुम मुझे मूर्ख लगते हो।
In simple words: सिंह राजा दिलीप से कहता है कि एक छोटी गाय के लिए अपना राज्य, जवानी और सुंदर शरीर छोड़ना मूर्खता है। यह सिंह की चालाकी और राजा की दृढ़ता को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: व्याख्या करते समय, पात्रों के संवादों के पीछे के तर्क और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं को उजागर करें।

 

प्रश्न 2. पञ्चमपद्यस्य सप्रसंग-व्याख्याक्षतात्किल त्रायत
\( \text{मसैर्वा॥} \)
Answer:
प्रसंग: इस पद्य में, जब दिलीप सिंह को नन्दिनी की रक्षा के लिए अपना शरीर देने को तैयार होते हैं, तो सिंह उन्हें मूर्ख बताते हुए राजा दिलीप क्षत्रिय धर्म का महत्व बताते हैं। यह राजा के कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव को दर्शाता है।
अर्थ: क्षत्रिय शब्द का अर्थ ही यह है कि जो घावों से रक्षा करे, यह बात संसार में प्रसिद्ध है। जो इस क्षत्रिय धर्म के विपरीत काम करता है, उसे राज्य या निंदा से भरे हुए प्राणों से क्या लाभ? यानी क्षत्रिय का मुख्य धर्म संकट से दूसरों की रक्षा करना है।
In simple words: राजा दिलीप सिंह को समझाते हैं कि क्षत्रिय का धर्म रक्षा करना है, और जो यह धर्म नहीं निभाता, उसके राज्य या जीवन का कोई मूल्य नहीं। यह राजा की कर्तव्यपरायणता को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: पद्य व्याख्या में, मुख्य शब्दों (जैसे 'क्षत्रस्य शब्दः') का अर्थ स्पष्ट करें और बताएं कि वे कैसे पूरे पद्य के संदेश को बल देते हैं।

गोभक्तिः, तपोवृत्तिः सांस्कृतिकमूल्यान् प्रति श्रद्धाश्च वर्णिताः। राज्ञः दिलीपस्य गुरुभक्तिः, गौसेवा च प्रेरणास्पदा वर्तते।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 7 व्याकरणात्मकाः प्रश्नाः

 

प्रश्न 1. अधोलिखितपदेषु नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिकार्यः
Answer:

पदम्सन्धिःसन्धिनाम
नन्दिनी \( + \) अनुचरःनन्दिन्यनुचरःयण्सन्धिः
भक्त्या \( + \) उपपन्नेषुभक्त्योपपन्नेषुगुणसन्धिः
रात्रौ \( + \) अपिरात्रावपिअयादिसन्धिः
तृप्ति \( + \) एवतृप्त्येवयण्सन्धिः
प्रजा \( + \) अधिपःप्रजाधिपःदीर्घसन्धिः
भूपतिः \( + \) असौभूपतिरसौविसर्ग-रुत्वसन्धिः
भवन्ति \( + \) इतिभवन्तीतिदीर्घसन्धिः
अस्ति \( + \) एकःअस्त्येकःयण्सन्धिः
आवयोः \( + \) उभयोःआवयोरुभयोःरुत्वसन्धिः
In simple words: इस तालिका में दिए गए शब्दों का सन्धि विच्छेद और सन्धि के प्रकार बताए गए हैं। सन्धि दो शब्दों के मेल से नए शब्द बनाने का नियम है।

🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद और प्रकारों को याद रखने के लिए, प्रत्येक सन्धि नियम के उदाहरणों का अभ्यास करें।

 

प्रश्न 2. अधस्तनेषु पदेषु सन्धिविच्छेदं विधेयः
Answer:

पदम्सन्धि विच्छेदः
प्राप्तीच्छ्याप्राप्ति \( + \) इच्छ्या
गुरोराज्ञयागुरोः \( + \) आज्ञया
भूपतिरन्वगच्छत्भूपतिः \( + \) अनु \( + \) अगच्छत्
पयस्वन्यपिपयस्विनि \( + \) अपि
श्रद्धेवश्रद्धा \( + \) इव
दिगन्तराणिदिक् \( + \) अन्तराणि
तामनूपविश्यताम् \( + \) अनु \( + \) उपविश्य
नोपेक्षणीयम्न \( + \) उपेक्षणीयम्
In simple words: इस तालिका में दिए गए शब्दों का सन्धि विच्छेद दिखाया गया है। सन्धि विच्छेद का मतलब है शब्द को उसके मूल घटकों में अलग करना।

🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद करते समय, स्वर और व्यंजन सन्धि के नियमों को ध्यान में रखें ताकि सही मूल शब्द प्राप्त हो सकें।

 

Question. अधोलिखितेषु पदानां विग्रहं समासनाम च लिखत।
Answer:

पदम्विग्रहःसमासनाम
अष्टमूर्तिःअष्ट मूर्तयः यस्य सःबहुव्रीहिः
चराचराणाम्चराणाम् च अचराणाम् चद्वन्द्वः
प्राणोत्सर्गःप्राणानाम् उत्सर्गःतत्पुरुषः
भूतेश्वरःभूतानाम् ईश्वरःतत्पुरुषः
In simple words: यह तालिका शब्दों के समास विग्रह और उनके समास के प्रकार को दर्शाती है। समास शब्दों को छोटा और सार्थक बनाने की एक विधि है।

🎯 Exam Tip: समास पहचानते समय, विग्रह करके देखें और फिर नियम के अनुसार समास के प्रकार का निर्धारण करें।

 

प्रश्न 4. अधोलिखितेषु सुबन्तप्रयोगेषु रिक्त स्थानानि पूरयन्तु
Answer:

पदम्मूलशब्दःविभक्तिःवचनम्
त्रिकालदर्शिनःत्रिकालदर्शीषष्ठीएकवचनम्
कामिन्याकामिनीतृतीयाएकवचनम्
आत्मानम्आत्मन्द्वितीयाएकवचनम्
वनायवनचतुर्थीएकवचनम्
दयिताम्दयिताद्वितीयाएकवचनम्
व्यवहारणाम्व्यवहारषष्ठीबहुवचनम्
मनसामनस्तृतीयाएकवचनम्
आवयोःअस्मद्षष्ठीद्विवचनम्
सुदक्षिणायाम्सुदक्षिणासप्तमीएकवचनम्
In simple words: इस तालिका में दिए गए शब्दों के मूल रूप, विभक्ति और वचन बताए गए हैं। यह संस्कृत व्याकरण में शब्द रूपों को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: सुबन्त प्रयोगों को याद करने के लिए, महत्वपूर्ण शब्दों के तीनों वचनों और सभी विभक्तियों का अभ्यास करें।

 

प्रश्न 5. निम्नलिखितानां भूतकालिक रूपाणां वर्तमानकालिकं रूपं लिखत
Answer:

भूतकालिकःवर्तमानकालिकः
आसीत्अस्ति
अभवत्भवति
शोभते स्मशोभते
भवति स्मभवति
अलभेताम्लभते
ऐच्छत्इच्छति
अपश्यत्पश्यति
In simple words: इस तालिका में भूतकाल के क्रिया रूपों को वर्तमान काल के क्रिया रूपों में बदला गया है। यह क्रियाओं के काल परिवर्तन को समझने में सहायक है।

🎯 Exam Tip: क्रियाओं के काल बदलने का अभ्यास करें और धातुओं के विभिन्न लकारों को याद रखें।

 

प्रश्न 6. अधोलिखितेषु प्रकृतिप्रत्यययोः निर्धारणं कुरुत
Answer:

पदम्प्रकृतिःप्रत्ययः
स्थितःस्थाक्त
हातुम्हातुमुन्
दमनीयादम्अनीयर्
धार्यःधृण्यत्
दुग्ध्वादुहक्त्वा
In simple words: इस तालिका में शब्दों के मूल प्रकृति (धातु) और प्रत्यय को बताया गया है। यह संस्कृत शब्दों की रचना को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: प्रकृति और प्रत्यय को अलग करते समय, धातु के मूल रूप और प्रत्यय के अर्थ को ध्यान में रखें।

 

प्रश्न 7. अधोलिखितेषु धातूपसर्गप्रत्ययानां निर्धारणं कुरुत
Answer:

पदम्उपसर्गःधातुःप्रत्ययः
अनुरक्तअनुरम्क्त
निवर्त्यनिवृत्ल्यप्
प्रत्यावर्तमानाःप्रति, आवर्तशानच्
अवलोकयन्तीअवलोक्शतृ (स्त्रीलिङ्ग)
समाप्यसम्आप्ल्यप्
अनूपविश्यअनु, उपविश्ल्यप्
प्रतिश्रुत्यप्रतिश्रुल्यप्
अधिगम्यअधिगम्ल्यप्
विज्ञाप्यविज्ञप्ल्यप्
In simple words: यह तालिका शब्दों में उपसर्ग, धातु और प्रत्यय को अलग-अलग दिखाती है। यह संस्कृत शब्दों की बनावट को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: उपसर्ग, धातु और प्रत्यय को सही ढंग से पहचानने से शब्दों के अर्थ और व्याकरणिक संरचना को समझने में आसानी होती है।

 

प्रश्न 8. अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितपदानां शुद्धिः विधेया
Answer:
(क) राजा दिलीपः सुदक्षिणायाः सह नन्दिन्याः सेवकः अभवत्।
सही: राजा दिलीपः सुदक्षिणया सह नन्दिन्याः सेवकः अभवत्।
(ख) अलं महीपाल तव श्रमस्य।
सही: अलं महीपाल तव श्रमेण
(ग) राजा गुरोः प्रति दर्शितभक्तिः आसीत्।
सही: राजा गुरुं प्रति दर्शितभक्तिः आसीत्।
(घ) अल्पस्य हेतुः बहु हातुमिच्छन् त्वं विचारमूढः असि।
सही: अल्पस्य हेतोः बहु हातुमिच्छन् त्वं विचारमूढः असि।
(ङ) राजा सिंहम् प्राणान् दत्तवान्।
सही: राजा सिंहम् प्राणान् दत्तवान्।
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों को सही विभक्ति या रूप में बदलकर वाक्यों को शुद्ध किया गया है। यह व्याकरणिक शुद्धता के लिए आवश्यक है।

🎯 Exam Tip: वाक्य शुद्धि करते समय, कारक, विभक्ति और वचन के नियमों का पालन करें।

रचनात्मकं कार्यम्

 

प्रश्न 1. अस्मिन् पाठे आगतानां राज्ञः, पत्न्याः गोः सिंहस्य च वाचकान् पदानि चित्वा तेषामर्थभेदं लिखत।
Answer:
(i) राज्ञः (राजा के): भूपतिः (पृथ्वी का रक्षक या स्वामी), सम्राट् (चक्रवर्ती राजा), प्रजाधिपः (प्रजा का स्वामी), नृपः (मनुष्यों का पालक), पार्थिवः (पृथ्वी का ईश्वर), महीपालः (पृथ्वी का पालन करने वाला), पुरुषाधिराजः (पुरुषों का अधिराज), प्रजानाथः (प्रजा का स्वामी), मनुष्यदेवः (मनुष्यों का देवता), भूपालः (पृथ्वी का पालन करने वाला)।
(ii) पल्या (पत्नी के): सहधर्मचारिणी (जो हमेशा धर्म का पालन करती है), कामिनी (सुंदर पत्नी), दयिता (प्रियतमा), धर्मपत्नी (धर्मानुकूल पत्नी), गृहिणी, जाया।
(iii) गोः (गाय के): धेनुः, पयस्विनी (जिसके पास उत्तम दूध हो), दोग्ध्री (जो दूध देने वाली हो)।
(iv) सिंहस्य (सिंह के): मृगेन्द्रः (मृगों का राजा), मृगाधिराजः (मृगों का अधिराज)।
In simple words: इस उत्तर में राजा, पत्नी, गाय और सिंह के लिए पाठ में आए विभिन्न संस्कृत शब्दों और उनके अर्थ बताए गए हैं। यह शब्दावली को समृद्ध करता है।

🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्दों को याद रखना और उनके सूक्ष्म अर्थों को समझना संस्कृत में अनुवाद और व्याख्या के लिए महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 7 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. शब्दार्थाः

 

प्रश्न 1. अधोलिखितपदानां शब्दार्थान् लिखत।
Answer:
(iv) निवत्य - लौटाकर।
(v) अनुचरः - सेवक।
(vi) दिगन्तराणि - दिशाओं को।
(vii) पूतानि - पवित्र।
(viii) वर्त्मनि - मार्ग में।
(ix) स्तिमिता - निश्चल होकर।
(x) सपर्याम् - पूजा को।
(xi) निशम्य - सुनकर।
(xii) शासनम् - आज्ञा को।
(xiii) वयः - आयु।
(xiv) कल्पयित्वा - बनाकर।
(xv) पत्रपुटे - पत्ते के दोने में।
In simple words: इस सूची में महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दों के अर्थ दिए गए हैं। इन अर्थों को जानने से पाठ को समझना आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: शब्दार्थों को याद करने के लिए फ्लैशकार्ड का उपयोग करें या उन्हें वाक्यों में प्रयोग करें।

2. प्रश्ननिर्माणम

 

प्रश्न 2. रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
Answer:
1. सुदक्षिणा दिलीपस्य सहधर्मचारिणी आसीत।
प्रश्न: सुदक्षिणा कस्य सहधर्मचारिणी आसीत?
2. दिलीपः आत्मानं नन्दिन्याः सेवायां नियोजितवान्।
प्रश्न: दिलीपः आत्मानं कस्याः सेवायां नियोजितवान्?
3. गुरोः आज्ञया स प्रजाधिपः धेनुं वनाय मुक्तवान्।
प्रश्न: कस्य आज्ञया स प्रजाधिपः धेनुं वनाय मुक्तवान्?
4. दिलीपः नन्दिनीं छायेव अन्वगच्छत्।
प्रश्न: दिलीपः नन्दिनीं कथमिव अन्वगच्छत्?
5. नन्दिनी स्वपरिभ्रमणेन दिगन्तराणि पूतानि करोति स्म।
प्रश्न: नन्दिनी केन दिगन्तराणि पूतानि करोति स्म?
6. सा साक्षात् श्रद्धेव शोभते स्म।
प्रश्न: सा साक्षात् कथम् शोभते स्म?
7. राज्ञः धर्मपत्न्यपि तम् अवलोकयन्ती तृप्तिं न लेभे।
प्रश्न: राज्ञः धर्मपत्न्यपि तम् अवलोकयन्ती किम् न लेभे?
8. प्रत्यावर्तनकालस्य दृश्यं दिव्यं भवति स्म।
प्रश्न: कस्य दृश्यं दिव्यं भवति स्म?
9. सुदक्षिणा प्रतिसायं तस्या श्रृंङ्गान्तरं पूजयति स्म।
प्रश्न: सुदक्षिणा प्रतिसायं तस्या किम् पूजयति स्म?
10. सा पयस्विनी तां सपर्या स्वीकरोति स्म।
प्रश्न: सा पयस्विनी काम् स्वीकरोति स्म?
11. गोसेवावृत्तं पालयतः तस्य एकविंशति दिनानि व्यपगतानि।
प्रश्न: गोसेवावृत्तं पालयतः तस्य कति दिनानि व्यपगतानि?
12. नन्दिनी हिमालयगुहायां प्रविष्टवती।
प्रश्न: नन्दिनी कुत्र प्रविष्टवती?
13. राजा अद्रिशोभादर्शने तत्परोऽभवत्।
प्रश्न: राजा कुत्र तत्परोऽभवत्?
14. मृगेन्द्रकः नन्दिनीं बलादाकृष्य वधाय प्रवृत्तः।
प्रश्न: कः नन्दिनीं बलादाकृष्य वधाय प्रवृत्तः?
15. अहम् अष्टमूर्तेः किङ्करोऽस्मि।
प्रश्न: अहम् कस्य किङ्करोऽस्मि?
16. भवान् मदीयेन देहेन स्ववृत्तिं साधयतु।
प्रश्न: भवान् केन स्ववृत्तिं साधयतु?
17. त्वम् मे कीदृशः प्रतिभासि।
प्रश्न: त्वम् मे कीदृशः प्रतिभासि?
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करके प्रश्न बनाए गए हैं। यह संस्कृत में प्रश्न निर्माण का अभ्यास है।

🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण के लिए, रेखांकित शब्द की विभक्ति, वचन और लिंग को देखकर उचित प्रश्नवाचक शब्द का चुनाव करें।

 

Question 1. का दिलीपस्य सहधर्मचारिणी आसीत?
Answer: सुदक्षिणा दिलीप की सहधर्मचारिणी थीं। वह राजा के साथ धर्म के कार्यों में सहयोग करती थीं।
In simple words: दिलीप की पत्नी सुदक्षिणा थीं।

🎯 Exam Tip: सीधे प्रश्नों के उत्तर में मुख्य जानकारी को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. दिलीपः आत्मानं कस्य सेवायां नियोजितवान्?
Answer: दिलीप ने अपने आप को नन्दिनी गाय की सेवा में लगाया। वह पुत्र प्राप्ति के लिए गुरु वसिष्ठ के निर्देश पर ऐसा कर रहे थे।
In simple words: दिलीप ने खुद को नन्दिनी गाय की सेवा में लगा दिया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के कार्यों के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करें, जैसा कि पाठ में वर्णित है।

 

Question 3. केस्य आज्ञया से प्रजाधिपः धेनुं वनाय मुक्तवान्?
Answer: प्रजाधिप दिलीप ने गुरु वसिष्ठ की आज्ञा से गाय को वन में चरने के लिए छोड़ दिया। यह गुरु के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
In simple words: राजा दिलीप ने गुरु की आज्ञा से गाय को जंगल में छोड़ा।

🎯 Exam Tip: कहानी के महत्वपूर्ण निर्णयों और उनके प्रेरक कारकों पर ध्यान दें।

 

Question 4. दिलीपः नन्दिनीं कथमिव अन्वगच्छत्?
Answer: दिलीप नन्दिनी का अनुसरण छाया की तरह करते थे। वह नन्दिनी के हर कदम का पालन करते थे।
In simple words: दिलीप नन्दिनी के पीछे छाया की तरह चलते थे।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में, उपमा के अर्थ और उसके महत्व को बताएं।

 

Question 5. नन्दिनी केन दिगन्तराणि पूतानि करोति स्म?
Answer: नन्दिनी अपने स्वयं के विचरण (घूमने) से दिशाओं को पवित्र करती थी। उसकी पवित्रता से सभी दिशाएं शुद्ध हो जाती थीं।
In simple words: नन्दिनी अपने घूमने से सभी दिशाओं को पवित्र करती थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों की दैवीय शक्तियों या गुणों का उल्लेख करते समय, उनके प्रभावों को स्पष्ट करें।

 

Question 6. सा साक्षात् कथम् शोभते स्म?
Answer: वह (नन्दिनी) साक्षात् श्रद्धा के समान शोभित होती थी। उसकी सेवा में दिलीप का पूरा विश्वास और समर्पण था।
In simple words: वह सीधे श्रद्धा की तरह दिखती थी।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक वर्णन को पहचानें और बताएं कि पात्र किस गुण का प्रतीक है।

 

Question 7. राज्ञः धर्मपत्न्यपि तम् अवलोकयन्ती किम् न लेभे?
Answer: राजा की धर्मपत्नी सुदक्षिणा भी उसे (राजा को नन्दिनी की सेवा करते हुए) देखकर तृप्ति नहीं पाती थी। वह राजा के सेवाभाव से संतुष्ट नहीं होती थी, बल्कि और अधिक करने की इच्छा रखती थी।
In simple words: राजा की पत्नी उसे देखकर संतुष्ट नहीं होती थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों की भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करते समय, उनके आंतरिक भावों को स्पष्ट करें।

 

Question 8. कस्य दृश्यं दिव्यं भवति स्म?
Answer: प्रत्यावर्तन काल (आश्रम लौटने के समय) का दृश्य दिव्य होता था। उस समय का वातावरण अत्यंत मनमोहक और पवित्र होता था।
In simple words: आश्रम लौटने का समय दिव्य लगता था।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक या विशेष समय के वर्णनों में, उसके महत्व या सुंदरता को उजागर करें।

 

Question 9. सुदक्षिणा प्रतिसायं तस्य किम् पूजयति स्म?
Answer: सुदक्षिणा हर शाम उसकी (नन्दिनी की) सींगों के बीच की जगह को पूजती थी। यह नन्दिनी के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है।
In simple words: सुदक्षिणा हर शाम गाय की सींगों के बीच की जगह को पूजती थी।

🎯 Exam Tip: विशेष रीति-रिवाजों या पूजा पद्धतियों का उल्लेख करते समय, उनके अर्थ और महत्व को समझाएं।

 

Question 10. सा पयस्विनी काम् स्वीकरोति स्म?
Answer: वह पयस्विनी (दूध देने वाली गाय) सुदक्षिणा की पूजा स्वीकार करती थी। नन्दिनी उनकी भक्ति से प्रसन्न होती थी।
In simple words: वह गाय सुदक्षिणा की पूजा स्वीकार करती थी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आपसी संबंध और उनकी स्वीकृति या अस्वीकृति को स्पष्ट करें।

 

Question 11. गोसेवावृत्तं पालयतः तस्य कति दिनानि व्यपगतानि?
Answer: गोसेवा के व्रत का पालन करते हुए उसके (दिलीप के) इक्कीस दिन बीत गए थे। वह पूरी निष्ठा से सेवा कर रहे थे।
In simple words: गोसेवा करते हुए दिलीप के इक्कीस दिन बीत गए थे।

🎯 Exam Tip: संख्यात्मक जानकारी वाले प्रश्नों में, संख्या को सटीक रूप से बताएं।

 

Question 12. नन्दिनी कुत्र प्रविष्टवती?
Answer: नन्दिनी हिमालय की गुफा में प्रविष्ट हुई। यह घटना राजा की परीक्षा का एक हिस्सा थी।
In simple words: नन्दिनी हिमालय की गुफा में चली गई।

🎯 Exam Tip: स्थान से संबंधित प्रश्नों में, सही जगह का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

 

Question 13. राजा कुत्र तत्परोऽभवत्?
Answer: राजा अद्रिशोभा (पहाड़ की सुंदरता) देखने में तत्पर थे। वह प्रकृति की सुंदरता में लीन थे।
In simple words: राजा पहाड़ की सुंदरता देखने में लगे हुए थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के तात्कालिक कार्यों या ध्यान को स्पष्ट करें।

 

Question 14. कः नन्दिनीं बलादाकृष्य वधाय प्रवृत्तः?
Answer: मृगेन्द्रक (सिंह) ने नन्दिनी को बलपूर्वक खींचकर वध करने का प्रयास किया। यह राजा दिलीप के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
In simple words: सिंह ने नन्दिनी को मारकर खाने की कोशिश की।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संघर्ष और उसमें शामिल पात्रों को याद रखें।

 

Question 15. अहम् कस्य किङ्करोऽस्मि?
Answer: सिंह ने कहा कि वह अष्टमूर्ति भगवान शिव का सेवक है। इसलिए वह नन्दिनी पर अपना अधिकार मानता था।
In simple words: मैं भगवान शिव का सेवक हूँ।

🎯 Exam Tip: पात्रों के कथनों और उनके पीछे के कारणों को ध्यान से समझें।

 

Question 16. भवान् केन स्ववृत्तिं साधयतु?
Answer: दिलीप ने सिंह से कहा कि वह मेरे शरीर से अपनी वृत्ति (भूख) को शांत करे। यह दिलीप के महान बलिदान को दर्शाता है।
In simple words: आप मेरे शरीर से अपनी भूख मिटा लो।

🎯 Exam Tip: त्याग और बलिदान से संबंधित संवादों में, पात्रों के संकल्प को उजागर करें।

 

Question 17. त्वम् मे कीदृशः प्रतिभासि?
Answer: सिंह ने दिलीप से कहा कि तुम मुझे विचारमूढ (मूर्ख) प्रतिभासित होते हो। सिंह को लगता था कि राजा एक गाय के लिए अपना जीवन क्यों दे रहा है।
In simple words: तुम मुझे मूर्ख जैसे लगते हो।

🎯 Exam Tip: पात्रों के एक-दूसरे के प्रति दृष्टिकोण को समझें और उनके विचारों को स्पष्ट करें।

 

Question 18. भूपालः स्वदेहं कस्मै समर्पितवान्?
Answer: भूपाल दिलीप ने अपना शरीर सिंह को समर्पित कर दिया। उन्होंने नन्दिनी की रक्षा के लिए यह महान त्याग किया।
In simple words: राजा ने अपना शरीर सिंह को दे दिया।

🎯 Exam Tip: प्रमुख घटनाओं में शामिल पात्रों और उनके द्वारा किए गए त्याग को याद रखें।

 

Question 19. तस्योपरि कैः सुमनवृष्टिः कृता?
Answer: उसके (दिलीप के) ऊपर देवताओं द्वारा फूलों की वर्षा की गई। यह उनके बलिदान की प्रशंसा में था।
In simple words: दिलीप के ऊपर फूलों की बारिश की गई।

🎯 Exam Tip: दैवीय हस्तक्षेप या प्रशंसा को दर्शाने वाली घटनाओं को स्पष्ट करें।

 

Question 20. राजा किम् प्रीत्या पीतवान्?
Answer: राजा दिलीप ने नन्दिनी का दूध प्रसन्नतापूर्वक पीया। यह उनकी तपस्या के सफल होने का प्रतीक था।
In simple words: राजा ने खुशी से गाय का दूध पीया।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंत या संकल्प से संबंधित विवरणों पर ध्यान दें।

3. भावार्थलेखनम्

 

Question. अधोलिखितपद्यानां हिन्दीभाषया भावार्थं लिखत
(i) न च चान्यतस्तस्य शरीररक्षा स्ववीर्यगुप्ता हि मनोप्रसूतिः।
(ii) छायेव तां भूपतिरन्वगच्छत्।
(iii) तदन्तरे सा विरराजधेनुः दिनक्षपामध्यगतेव सन्ध्या।
(iv) भक्त्योपपन्नेषु तद्विधानां प्रसादचिह्नानि पुरः फलानि भवन्ति।
(v) न पादपोन्मूलनशक्ति रंहः शिलोच्चये मूच्छति मारुतस्य।
(vi) कृते प्रयत्ने शस्त्ररक्ष्यस्य रक्षणे विफले जातेऽपि शस्त्रभृतां यशः न क्षिणोति।
(vii) क्षतात् किल जायत इत्युदग्रः क्षत्रस्य शब्दः भुवनेषु रूढः।
Answer:
(i) भावार्थ: सूर्यवंशी राजा अपनी रक्षा अपने पराक्रम से करते थे। जो व्यक्ति स्वयं वीर और साहसी होता है, उसे अपनी रक्षा के लिए दूसरों की आवश्यकता नहीं होती। वे अपनी रक्षा स्वयं ही करने में सक्षम होते हैं। इस पंक्ति का अर्थ है कि आत्मरक्षा व्यक्ति के स्वयं के बल पर आधारित होती है, बाहरी सहायता पर नहीं। यह स्वावलंबन के महत्व को उजागर करता है।
In simple words: सूर्यवंशी राजा अपनी रक्षा खुद करते थे। वीर व्यक्ति को दूसरों की मदद की जरूरत नहीं होती, वह खुद ही अपनी रक्षा कर लेता है।

🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, मूल वाक्य के गहरे अर्थ और निहित संदेश को स्पष्ट करें, साथ ही उसका व्यावहारिक महत्व भी बताएं।

Answer:
(ii) भावार्थ: राजा दिलीप ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से गोसेवा का व्रत लिया था और वे महर्षि वसिष्ठ की नन्दिनी गाय की सेवा में लगे हुए थे। वन में नन्दिनी के सभी कार्यों का अनुसरण वे उसकी छाया के समान करते थे। जैसे छाया किसी प्राणी के हर व्यवहार का अनुसरण करती है, उसी प्रकार राजा दिलीप भी नन्दिनी का अनुसरण करते थे। नन्दिनी के रुकने पर वे रुक जाते थे, उसके चलने पर चलने लगते थे, उसके बैठने पर बैठ जाते थे और पानी पीने पर भी वे तब तक पानी नहीं पीते थे जब तक नन्दिनी न पी ले। इस प्रकार वे छाया की तरह नन्दिनी की सेवा करते थे। इस कथन से कवि ने गो-सेवा का एक बहुत ही उत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह उनकी अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।
In simple words: राजा दिलीप नन्दिनी गाय की सेवा ऐसे करते थे जैसे कोई अपनी छाया का पीछा करता है, उसके हर काम में उसका साथ देते थे।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक भावार्थों में, उपमा को स्पष्ट करें और बताएं कि यह किस विशेषता को दर्शाती है।

Answer:
(iii) भावार्थ: पुत्र प्राप्ति की इच्छा से गुरु वसिष्ठ की आज्ञा से राजा दिलीप अपनी पत्नी के साथ कामधेनु की पुत्री नन्दिनी-गाय की सेवा में तत्पर थे। इस पंक्ति में सायंकाल आश्रम की ओर लौटती हुई नन्दिनी की शोभा का वर्णन किया गया है। तपोवन से वसिष्ठाश्रम के रास्ते में राजा दिलीप से आगे और रानी सुदक्षिणा द्वारा अगवानी की गई वह नन्दिनी गाय उन दोनों के बीच में स्थित होकर, दिन और रात के बीच की संध्या के समान बहुत सुंदर लग रही थी। यहां कवि ने नन्दिनी की तुलना दिन से, रानी सुदक्षिणा की तुलना चंद्रमायुक्त रात्रि से और पाटल वर्ण वाली नन्दिनी की तुलना पाटलवर्णयुक्त सायंकाल से की है। यह दृश्य अत्यंत मनमोहक और पवित्र था।
In simple words: नन्दिनी गाय, राजा दिलीप और सुदक्षिणा के बीच में, शाम के समय की तरह सुंदर दिख रही थी। यह दृश्य उनकी सेवा और भक्ति को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: प्राकृतिक या समय-आधारित वर्णनों में, कवि द्वारा की गई तुलनाओं और उनके सौंदर्य को स्पष्ट करें।

Answer:
(iv) भावार्थ: पुत्र प्राप्ति की कामना से राजा दिलीप अपनी पत्नी सुदक्षिणा के साथ नन्दिनी गाय की सेवा में लगे हुए थे। राजा दिलीप सुबह नन्दिनी का अनुसरण करते हुए उसे तपोवन में ले जाते थे। शाम को वसिष्ठाश्रम लौटते समय रानी सुदक्षिणा नन्दिनी की अगवानी करती थीं और उसकी पूजा करती थीं। उसकी भक्ति भावना से प्रसन्न होकर नन्दिनी द्वारा अपने बछड़े को देखने के लिए उत्सुक होने पर भी निश्चल भाव से उनकी पूजा को स्वीकार किया गया। इससे राजा और रानी बहुत प्रसन्न होते थे। इसी कथन का समर्थन करते हुए कवि ने इस पंक्ति में कहा है कि भक्तों के प्रति नन्दिनी जैसे महानुभावों की श्रद्धा से युक्त प्रसन्नता के चिह्न निश्चित रूप से अभीष्ट फलों की तुरंत प्राप्ति का कारण होते हैं। अर्थात्, अपने भक्तों की श्रद्धा और सेवा से जब महापुरुष प्रसन्न होते हैं, तो निश्चित रूप से यह समझ लेना चाहिए कि उस भक्त की मनोकामना शीघ्र ही पूरी होने वाली है। यह भक्ति और विश्वास के फल को दर्शाता है।
In simple words: जब भक्त पूरी श्रद्धा से सेवा करते हैं, तो उन्हें उनकी इच्छा के अनुसार फल अवश्य मिलता है। यह नन्दिनी की सेवा का परिणाम था।

🎯 Exam Tip: नैतिक या दार्शनिक भावार्थों में, मुख्य सिद्धांत को स्पष्ट करें और बताएं कि वह कहानी में कैसे सिद्ध होता है।

Answer:
(v) भावार्थ: पुत्र प्राप्ति की कामना से राजा दिलीप कामधेनु की पुत्री नन्दिनी-गाय की सेवा करते हैं। गोसेवा करते हुए राजा दिलीप के इक्कीस दिन बीत जाने पर बाईसवें दिन नन्दिनी उसकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से हिमालय की गुफा में प्रवेश करती है और राजा दिलीप उस नन्दिनी पर आक्रमण करते हुए एक सिंह को बैठा हुआ देखते हैं। इस संदर्भ में यह पंक्ति आती है। वायु में पेड़ों को उखाड़ने की शक्ति नहीं होती, बल्कि वह पहाड़ों पर ही कमजोर पड़ जाती है। इसी प्रकार, बड़े-बड़ों की शक्ति भी परिस्थितियों के सामने कमजोर पड़ सकती है।
In simple words: जैसे हवा पेड़ों को तो उखाड़ सकती है, पर पहाड़ को नहीं हिला सकती, उसी तरह कुछ शक्तियाँ बड़ी चीजों के सामने बेअसर हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: उपमाओं और दृष्टांतों का उपयोग करते हुए, भावार्थ को सरल और सुबोध बनाएं, और यह बताएं कि वे मूल संदर्भ से कैसे संबंधित हैं।

Answer:
(vi) भावार्थ: पुत्र प्राप्ति की कामना से राजा दिलीप अपनी पत्नी के साथ गुरु वसिष्ठ की आज्ञानुसार नन्दिनी गाय की सेवा करते हैं। एक दिन नन्दिनी हिमालय की गुफा में प्रवेश करती है, जहाँ अचानक एक सिंह उस पर आक्रमण कर देता है। राजा दिलीप उस सिंह को मारने के लिए जैसे ही तरकस से बाण निकालने का प्रयास करते हैं, उनका हाथ वहीं चिपक जाता है। इस प्रकार नन्दिनी गाय की रक्षा करने में स्वयं को असमर्थ देख राजा दिलीप लज्जित होते हैं। इसी क्रम में सिंह राजा से कहता है कि जो रक्षा करने योग्य धन आदि वस्तु शस्त्र से रक्षा नहीं की जा सकती है, वह नष्ट होने पर भी शस्त्रधारियों की कीर्ति को दूषित नहीं कर सकती। अर्थात्, शस्त्र द्वारा रक्षा करने पर भी यदि वस्तु की रक्षा नहीं हो सके, तो इससे शस्त्रधारी का अपयश नहीं होता है। सिंह भगवान शिव का सेवक था, इसलिए सामान्य मानव द्वारा उस पर क्रोध करना निष्फल बताया गया है। राजा को यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया।
In simple words: जब किसी चीज की रक्षा के लिए प्रयास किया जाता है और वह असफल हो जाए, तब भी कोशिश करने वाले का यश कम नहीं होता। मेहनत करना ही महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: नैतिक शिक्षा वाले भावार्थों में, यह स्पष्ट करें कि असफल प्रयास के बावजूद भी कर्तव्य पालन का महत्व क्या है।

Answer:
(vii) भावार्थ: इस पंक्ति में 'क्षत्रिय' शब्द के महत्व को दर्शाया गया है। राजा दिलीप नन्दिनी गाय की रक्षा करने में असफल होने पर अपना शरीर उसके बदले में सिंह को देना चाहते हैं, तब सिंह अनेक प्रकार से उस एक गाय के बदले में अपने प्राण देने वाले राजा के प्रस्ताव को अनुचित बताता है। इसी प्रसंग में राजा दिलीप सिंह से कहते हैं कि उन्नत क्षत्रिय वर्ण का वाचक 'क्षत्र' शब्द, जिसका अर्थ 'जो नाश से रक्षा करे' है, संसार में प्रसिद्ध है। अर्थात् जो संकट से, नाश से अथवा पीड़ित लोगों की रक्षा नहीं कर सकता वह क्षत्रिय कहलाने योग्य नहीं है। क्षत्रिय का धर्म ही पीड़ितों की रक्षा करना है। इस कथन से राजा दिलीप यह कहना चाहते हैं कि प्राण देकर भी इस नन्दिनी गाय की रक्षा करना ही मेरा धर्म है। इसके विपरीत आचरण करने वाले क्षत्रिय का राज्य अथवा प्राणों से कोई भी लाभ नहीं है।
In simple words: क्षत्रिय का मतलब है जो रक्षा करे। अगर कोई क्षत्रिय रक्षा नहीं करता, तो उसका जीवन या राज्य बेकार है।

🎯 Exam Tip: परिभाषा-आधारित भावार्थों में, मुख्य शब्द की व्युत्पत्ति और उसके निहितार्थ को स्पष्ट करें।

4. अन्वय लेखनम्

 

Question. निम्नलिखितपद्यानां अन्वयं लिखत
(i) स्थितः स्थिताम्
(ii) अलं महिपाल
(iii) क्षतात् किल
(iv) वत्सस्य होमार्थ
Answer:
(i) स्थितः स्थिताम्: भूपतिः (दिलीपः) तां (नन्दिनीम्) छायेव स्थितां (सतीं) स्थितः, उच्चलितां (सतीं) उच्चलितः, निषेदुषीं (सतीं) आसनबन्धधीरः, जलम् आददानां (सतीं) जलाभिलाषी सन् अन्वगच्छत्।
(ii) अलं महिपाल: हे महिपाल! तव श्रमस्य (अलम्)।
(iii) क्षतात् किल: उदग्रः क्षत्रस्य शब्दः 'क्षतात् त्रायते' इति भुवनेषु रूढः किल।
(iv) वत्सस्य होमार्थ: वत्सस्य होमार्थं (सा) रक्षितायाः पयः दुह्यमानं चेत् सद्यः प्रसवेत् तदा (तत् पयः) होमार्थम् उपयुज्यते।
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए श्लोकांशों के अन्वय (पद्य को गद्य के क्रम में व्यवस्थित करना) दिए गए हैं। अन्वय से श्लोक का अर्थ समझना आसान हो जाता है।

🎯 Exam Tip: अन्वय लिखते समय, पदों को व्याकरणिक रूप से सही क्रम में रखें और क्रियापदों को अंत में प्रयोग करें।

 

Question. अधोलिखितेषु कर्तृपदं क्रियापदं च लिखत।
Answer:

कर्तृपदम्क्रियापदम्
स प्रजाधिपःमुक्तवान्
भूपतिःअन्वगच्छत्
नन्दिनीशोभते स्म
सुदक्षिणापूजयति स्म
तौ दम्पतीअलभेताम्
दिलीपःअभजत्
स धनुर्धरःअतप्यत्
सिंहःउक्तवान्
त्वम्प्रतिभासि
राजापीतवान्
In simple words: इस तालिका में वाक्यों से कर्तृपद (कर्ता) और क्रियापद (क्रिया) को अलग-अलग दिखाया गया है। यह वाक्य संरचना को समझने में सहायक है।

🎯 Exam Tip: कर्तृपद और क्रियापद की पहचान करते समय, क्रिया के अनुसार कर्ता की विभक्ति और वचन का ध्यान रखें।

(ख) विशेषणविशेष्यचयनम्

 

प्रश्न (i) 'लोकललामः दिलीपो नाम भूपतिः आसीत्' इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: दिलीपः।
In simple words: इस वाक्य में 'लोकललामः' विशेषण है और 'दिलीपः' विशेष्य पद है। विशेष्य वह है जिसकी विशेषता बताई जाती है।

🎯 Exam Tip: विशेषण-विशेष्य की पहचान के लिए, यह देखें कि कौन सा शब्द किसी की विशेषता बता रहा है और किसकी विशेषता बताई जा रही है।

 

प्रश्न (ii) “सः कामिन्या सुदक्षिणया सह आत्मानं नियोजितवान्'-इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: आत्मानं।
In simple words: इस वाक्य में 'नियोजितवान्' क्रिया है और 'आत्मानं' विशेष्य पद है। यह बताता है कि 'किसको' लगाया गया।

🎯 Exam Tip: क्रिया के साथ 'क्या' या 'किसको' प्रश्न पूछकर कर्म या विशेष्य पद को आसानी से पहचाना जा सकता है।

(ग) सर्वनाम-संज्ञाप्रयोगः

 

प्रश्नः अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितसर्वनामपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोग कृत्वा वाक्यं पुनः लिखत

 

प्रश्न (iv) “साक्षतपात्रहस्ता सुदक्षिणा तस्याः शृङ्गान्तरं पूजयति स्म" इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: साक्षतपात्रहस्ता।
In simple words: इस वाक्य में 'साक्षतपात्रहस्ता' विशेष्य पद है, जिसका अर्थ है 'अक्षत का पात्र हाथ में लिए हुए'। यह सुदक्षिणा की विशेषता बताता है।

🎯 Exam Tip: सामासिक पदों में विशेष्य की पहचान करते समय, पूरे पद के अर्थ को समझें और फिर देखें कि वह किसकी विशेषता बता रहा है।

 

प्रश्न (v) “तौ दोहावसाने निषण्णां दोग्ध्र असेवेताम्” इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
Answer: दोग्ध्रीम्।
In simple words: इस वाक्य में 'दोग्ध्रीम्' विशेष्य पद है, जिसका अर्थ है 'दूध देने वाली गाय को'। यह गाय को संदर्भित करता है।

🎯 Exam Tip: विशेष्य पद अक्सर संज्ञा या सर्वनाम होते हैं जिनकी विशेषता बताई जाती है, उन्हें क्रिया या अन्य शब्दों से भ्रमित न करें।

 

प्रश्न (vi) अधोलिखितवाक्येषु विशेषणविशेष्यपदयोः चयनं कुरुत
Answer:
(क) भवान् मदीयेन देहेन स्ववृतिं. साधयतु
विशेषण: मदीयेन, विशेष्य: देहेन
(ख) निर्मितभीतिः सिंहः पुनरुक्तवान्
विशेषण: निर्मितभीतिः, विशेष्य: सिंहः
(ग) अतो हि रक्ष ऊर्जस्वलमात्मंदेहम्।
विशेषण: ऊर्जस्वलम्, विशेष्य: आत्मंदेहम्
(घ) एवं प्रार्थितः सिंहः राज्ञः प्रस्ताव स्वीकृतवान्
विशेषण: प्रार्थितः, विशेष्य: प्रस्ताव
(ङ) न्यस्तशस्त्रः भूपालः स्वदेहं हरये समर्पितवान्
विशेषण: न्यस्तशस्त्रः, विशेष्य: भूपालः
(च) अमृतायमानं वचः निशम्य राजा उत्तिष्ठति।
विशेषण: अमृतायमानम्, विशेष्य: वचः
(छ) राजा अनन्तकीर्ति तनयं ययाचे
विशेषण: अनन्तकीर्तिम्, विशेष्य: तनयम्
(ज) सा कामदुधा तमाज्ञापितवती
विशेषण: कामदुधा, विशेष्य: सा
(झ) एवं सा पयस्विनी प्रीतितरा जाता।
विशेषण: पयस्विनी, प्रीतितरा, विशेष्य: सा
(अ) वशी वशिष्ठः तं राजधानी प्रति प्रस्थापयामास
विशेषण: वशी, विशेष्य: वशिष्ठः
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए वाक्यों से विशेषण (जो विशेषता बताता है) और विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जाती है) पदों को चुना गया है। यह वाक्य में शब्दों के संबंधों को स्पष्ट करता है।

🎯 Exam Tip: विशेषण-विशेष्य की पहचान करते समय, विशेषण हमेशा विशेष्य के लिंग, वचन और विभक्ति का पालन करता है।

 

प्रश्नः अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोगं कृत्वा वाक्यं पुनः लिखत
(1) न चान्यतः तस्य शरीररक्षा
(2) छायेव तां भूपतिरन्वगच्छत्।
(3) दिलीपः तस्याः सपर्यायामनुरक्तोऽभवत्।
(4) तौ प्रतिदिनं ता दोग्ध्र असेवेताम्।
(5) तस्य धीरस्यैकविंशतिदिनानि व्यपगतानि।
(6) सा हिमालयगुहायां प्रविष्टवती।
(7) तू विस्मापयन् सिंहः एवमुक्तवान्।
(8) भवान् लज्जां विहाय निवर्तयतु।
(9) मम् गुरोः धनेदमपि नोपेक्षणीयम्।
(10) रुद्रौजसा भवता आक्रान्तेयं सौरभेयी।
Answer:
(1) न चान्यतः दिलीपस्य शरीररक्षा।
(2) छायेव नन्दिनीं भूपतिरन्वगच्छत्।
(3) दिलीपः नन्दिन्याः सपर्यायामनुरक्तोऽभवत्।
(4) सुदक्षिणादिलीपौ प्रतिदिनं तां दोग्ध्रम् असेवेताम्।
(5) दिलीपस्य धीरस्यैकविंशतिदिनानि व्यपगतानि।
(6) नन्दिनी हिमालयगुहायां प्रविष्टवती।
(7) दिलीप विस्मापयन् सिंहः एवमुक्तवान्।
(8) दिलीपः लज्जां विहाय निवर्तयतु।
(9) दिलीपस्य गुरोः धनेदमपि नोपेक्षणीयम्।
(10) रुद्रौजसा दिलीपेन आक्रान्तेयं सौरभेयी।
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित सर्वनाम शब्दों को हटाकर उनकी जगह सही संज्ञा शब्दों का प्रयोग किया गया है। वाक्य का अर्थ स्पष्ट करने के लिए यह बदलाव किया गया है।

🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा का प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि संज्ञा शब्द लिंग, वचन और कारक के अनुसार सही हो, ताकि वाक्य का अर्थ न बदले और व्याकरणिक रूप से सही रहे।

(घ) समान-विलोमपदचयनम्

 

प्रश्नः अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां पर्यायबोधकपदानि लिखत
(1) आसीत् लोकललामः दिलीपो नाम भूपतिः।
(2) सुदक्षिणा तस्य सहधर्मचारिणी आसीत्
(3) स सम्राट् तस्याः सपर्यायाम् अनुरक्तोऽभवत्।
(4) पुरस्कृता वर्मनि पार्थिवेन।
(5) तदन्तरे सा विरराज धेनुः।
(6) तौ तां द्रोग्ध्र असेवेताम्।
(7) मृगेन्द्रः नन्दिनीं वधाय प्रवृत्तः।
(8) धन्यास्ते भूपालाः तयो समुपासकाः।
(9) न पादपोन्मूलनशक्ति रंहः शिलोच्चये मूच्छति मारुतस्य।
(10) राजा ऋषेः आज्ञां अधिगम्य नन्दिन्याः दुग्धं पीतवान्।
Answer:
(1) नृपः, राजा
(2) धर्मपत्नी, दयिता
(3) सेवायाम्
(4) मार्गे
(5) गौः, पयस्विनी
(6) दोहनशीलाम्
(7) सिंहः हरिः
(8) भूपालः, पृथ्वीपालक
(9) वायोः, पवनस्य
(10) आज्ञाम्।
In simple words: यहाँ दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के पर्यायवाची (समान अर्थ वाले) शब्द बताए गए हैं। यह हमें एक ही अर्थ को कई तरीकों से व्यक्त करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: पर्यायवाची शब्दों का चयन करते समय वाक्य के संदर्भ और व्याकरणिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखें, ताकि सही अर्थ व्यक्त हो।

 

प्रश्नः अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विलोमार्थकपदानि लिखत
(1) गुरुं प्रति दर्शितशिष्यभक्तिः।
(2) तत् शस्त्रभृतां यशः न क्षिणोति।
(3) नवं वयः कान्तमिदं वपुश्च।
(4) तव नाशे सति गौरेका स्वस्तिमती भवेत्।
(5) सेवकस्य पारतन्त्र्यं विचार्य मे यशःशरीरे दयालुः भव।
(6) राजा अनन्तकीर्ति तनयं ययाचे।
(7) त्वं मदीयं पयः पिब।
(8) धन्याः ते भूपालाः।
Answer:
(1) शिष्यम्
(2) अपयशः
(3) पुरातनम्
(4) जीविते
(5) स्वातन्त्र्यम्
(6) तनयाम्
(7) त्वदीयम्
(8) अधन्याः।
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के विलोम (विपरीत अर्थ वाले) शब्द दिए गए हैं। यह हमें शब्दों के अर्थ के उलट को समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय यह सुनिश्चित करें कि वे मूल शब्द के ठीक विपरीत अर्थ वाले हों और लिंग, वचन तथा कारक में संगत हों।

 

प्रश्नः कः कम्/कस्मै कथयति (कौन किसको कहता है?)
Answer:

कः (कौन)कम्/कस्मै (किसको)
(i) नृपः दिलीपःअनुयायिवर्गम्
(ii) सिंहःदिलीपम्
(iii) सिंहःदिलीपम्
(iv) सिंहःदिलीपम्
(v) दिलीपःसिंहम्
(vi) दिलीपःसिंहम्
(vii) सिंहःदिलीपम्
(viii) दिलीपःसिंहम्
(ix) नन्दिनीदिलीपम्
(x) दिलीपःनन्दिनीम्

In simple words: यह तालिका दिखाती है कि पाठ में कौन सा पात्र किस दूसरे पात्र से बात कर रहा है। यह हमें संवादों को समझने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों के लिए, कहानी में प्रत्येक कथन के वक्ता और श्रोता को ठीक से पहचानें। यह कहानी के पात्रों के संबंधों और उनके विचारों को समझने में महत्वपूर्ण है।

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Using our Sanskrit solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 12 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 7 नन्दिनीकथा to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Sanskrit are as per latest RBSE curriculum.

Are the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Sanskrit concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Sanskrit. You can access RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Sanskrit RBSE solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Sanskrit Chapter 7 नन्दिनीकथा in printable PDF format for offline study on any device.