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Detailed Chapter 2 गुरूपदेशः RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit
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Class 12 Sanskrit Chapter 2 गुरूपदेशः RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्नाः
Question 1. चन्द्रापीडस्य पितुर्नाम किमासीत्?
(क) शुकनासः
(ख) तारापीडः
(ग) बाणभट्टः
(घ) शूद्रक
Answer: (ख) तारापीडः
In simple words: चन्द्रापीड के पिता का नाम तारापीड था। यह उनके परिचय से संबंधित एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
🎯 Exam Tip: पाठ में वर्णित मुख्य पात्रों और उनके संबंधों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. अनर्थपरम्परायां विद्यते विद्यन्ते वा
Answer: (अपूर्ण प्रश्न)
In simple words: (The question is incomplete in the source.)
🎯 Exam Tip: Ensure you read the full question to understand what is being asked before attempting to answer.
Question 3. 'भवादृशाः एव भवन्ति भाजनानि' वाक्येऽस्मिन् 'भवादृशा' कस्य कृते प्रयुक्तः?
(क) शुकनासस्य कृते
(ख) तारापीडस्य कृते
(ग) चन्द्रापीडस्य कृते
(घ) सेवाकस्य कृते
Answer: (ग) चन्द्रापीडस्य कृते
In simple words: इस वाक्य में 'भवादृशा' शब्द चन्द्रापीड के लिए इस्तेमाल किया गया है, जो उनकी योग्यता और पात्रता को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत वाक्यों में सर्वनाम और विशेषण शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया गया है, इसका ध्यान रखें।
Question 4. 'वडवानलः कस्याग्निः कथ्यते?
(क) समुद्रस्य
(ख) वनस्य
(ग) गृहस्य
(घ) भूगर्भस्य
Answer: (क) समुद्रस्य.
In simple words: वडवानल समुद्र में लगने वाली आग को कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत शब्दों के अर्थ और उनके संदर्भों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी विशेष प्राकृतिक घटना से संबंधित हों।
Question. रिक्तस्थानपूर्तिः क्रियताम् उत्तरम्
(क) अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमदः
(ख) यौवनारम्भे चे प्रायः शास्त्रजलप्रक्षालननिर्मलापि कालुष्यमुपयाति बुद्धिः
(ग) अयमेव चानास्वादितविषयरसस्य ते कालः उपदेशस्य।
(घ) विशेषेण तु राज्ञाम्विरला हि तेषामुपदेष्टारः
Answer:
(क) अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमदः
(ख) यौवनारम्भे चे प्रायः शास्त्रजलप्रक्षालननिर्मलापि कालुष्यमुपयाति बुद्धिः
(ग) अयमेव चानास्वादितविषयरसस्य ते कालः उपदेशस्य।
(घ) विशेषेण तु राज्ञाम्विरला हि तेषामुपदेष्टारः
In simple words: ऊपर दिए गए वाक्यों में रिक्त स्थानों को भरकर पाठ के अनुसार पूरा किया गया है, जिससे उनका सही अर्थ स्पष्ट होता है।
🎯 Exam Tip: पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण सूक्तियों और वाक्यों को याद रखें ताकि रिक्त स्थान की पूर्ति आसानी से कर सकें।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक-प्रश्नाः
Question 1. निसर्गत एव अतिगहनं तमोबहूलं किम्भवति?
Answer: यौवनप्रभवम्
In simple words: स्वाभाविक रूप से बहुत गहरा और घना अंधकार यौवन से उत्पन्न होता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के सीधे प्रश्नों के लिए, एक सटीक और संक्षिप्त उत्तर देना चाहिए जो सीधे प्रश्न का समाधान करता हो।
Question 2. रा अनर्थपरम्पराः का?
Answer: (अपूर्ण प्रश्न)
In simple words: (The question seems incomplete as per the OCR.)
🎯 Exam Tip: Always double-check the completeness of a question before answering. If it's incomplete, state that clearly.
Question 4. अजलं स्नानं किमस्ति?
Answer: गुरूपदेशः
In simple words: बिना जल का स्नान गुरु का उपदेश है, जो मन को शुद्ध करता है।
🎯 Exam Tip: उपदेश के गुणों को याद रखें, विशेषकर उसके शुद्धिकरण प्रभाव को।
Question 5. अलीकाभिमान उन्मादश्च केन भवति?
Answer: 'राजलक्ष्मीः 'इत्यनेन धनेन वा
In simple words: झूठा अभिमान और उन्माद राजलक्ष्मी या धन के कारण होता है।
🎯 Exam Tip: लक्ष्मी के मद और उससे उत्पन्न दोषों को समझें।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्नाः
Question 1. रागमलस्य अवलेपः बलवान् कथम्?
Answer: नित्यमस्नानशौचबाध्यः
In simple words: राग (मोह) का मैल इसलिए बलवान है क्योंकि वह प्रतिदिन स्नान और शुद्धि से भी दूर नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: मोह जैसे आंतरिक दोषों की शक्ति और उन्हें नियंत्रित करने की कठिनाई पर ध्यान दें।
Question 2. अनर्थपरम्पराः का?
Answer: गर्भेश्वरत्वम्, अभिनवयौवनत्वम्, अप्रतिमरूपत्वम्, अमानुषशक्तित्वं चेति महतीयं खल्वनर्थपरम्परा
In simple words: जन्म से ही ईश्वरता, नया यौवन, अनुपम सौंदर्य, और अमानवीय शक्ति का होना ये सभी महान अनर्थों की श्रृंखला हैं।
🎯 Exam Tip: अनर्थकारी गुणों की सूची को याद रखें, जो व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं।
Question 3. गुरुवचनस्य प्रभावः अशिष्टस्य शिष्टस्य च कृते कीदृशः भवति?
Answer: गुरुवचनस्य प्रभावः अशिष्टस्य कृते श्रवणस्थितं शूलमिव कष्टदायकं तथा शिष्टस्य कृते करिणः शंखाभरणमिव आननशोभाजनकं भवति
In simple words: गुरु के वचन बुरे लोगों को सुनने में काँटे जैसे लगते हैं और अच्छे लोगों के लिए हाथी के शंखाभरण की तरह मुख की शोभा बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: गुरु के उपदेश के भिन्न-भिन्न प्रभावों को याद रखें कि वह सज्जन और दुर्जन व्यक्तियों पर कैसे असर करता है।
Question 4. गुरूपदेशः दोषजातं हत्वा तं गुणरूपेण किमिव परिणमयति?
Answer: गु. इव पलितरूपेण शिरसिजजालममली कुर्वन् गुणरूपेण परिणमयति
In simple words: गुरु का उपदेश दोषों को नष्ट करके उन्हें गुणों में बदल देता है, जैसे बाल सफेद होकर सिर के बालों को स्वच्छ करते हैं।
🎯 Exam Tip: गुरु के उपदेश की परिवर्तनकारी शक्ति पर ध्यान दें कि वह कैसे नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलता है।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्नाः
Question 1. 'भवादृशाः एव भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्' इति शुकनासः कथमब्रवीत्?
Answer: यतोहि अपगतमले हि मनसि सुखेनोपदेशगुणाः विशन्ति अतः चन्द्रपीडसदृशाः सततशास्त्रचिन्तनेन कामक्रोधादिदोषाणां मलरहिताः सहृदयाः एव उपदेशानां भाजनानि भवन्ति।
In simple words: शुकनास ने यह इसलिए कहा क्योंकि स्वच्छ मन में उपदेश के गुण आसानी से प्रवेश करते हैं। चंद्रपीड जैसे लोग, जो शास्त्रों का लगातार अध्ययन करते हैं और काम, क्रोध आदि दोषों से रहित होते हैं, सच्चे हृदय वाले होते हैं और उपदेशों के पात्र बनते हैं।
🎯 Exam Tip: शुकनास के उपदेश के पीछे के तर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं, जिसमें चंद्रपीड की योग्यता और शुद्ध मन का महत्व बताया गया है।
Question 2. गुरूपदेशस्य के के लाभाः?
Answer: गुरूपदेशः दोषजातं हत्वा गुणरूपेण परिणमयतिसः मनः निर्मल करोति, पुरुषाणामखिलमलप्रक्षालनं करोति तेन जरारहितज्ञानवृद्धत्वम् आयाति, सः कर्णाभरणमस्ति, अतीतज्योतिरालोकः, नोद्वेगकरः प्रजागरः वर्तते
In simple words: गुरु का उपदेश दोषों को मिटाकर उन्हें गुणों में बदल देता है। यह मन को शुद्ध करता है और सभी मनुष्यों के सभी दोषों को धो देता है। इससे व्यक्ति बुढ़ापे से रहित ज्ञानवान और अनुभवी बनता है। यह कान का आभूषण है, भूतकाल का प्रकाश है, और यह कभी बेचैन न करने वाली जागृति है।
🎯 Exam Tip: गुरु उपदेश के सभी प्रमुख लाभों की सूची बनाएं और प्रत्येक लाभ को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 3. राजप्रकृतेः वर्णनं कुरुत
Answer: अहंकारदाहज्वरेण मूच्छान्धकारिता विह्वला हि राजप्रकृतिः भवति अलीकाभिमानेन राजानः उन्मादकारिणः भवन्ति उपदिश्यमानमपि ते न शृण्वन्ति, प च हितोपदेशदायिनो गुरून् खेदयन्ति।
In simple words: अहंकार के दाहक बुखार से मूर्छित और अंधकार से व्याकुल, राजप्रकृति विचलित हो जाती है। झूठे अभिमान के कारण राजा उन्मादी हो जाते हैं। वे उपदेश दिए जाने पर भी नहीं सुनते और हितकारी गुरुओं को दुखी करते हैं।
🎯 Exam Tip: राजाओं के स्वभाव में अहंकार और उन्माद के प्रभावों को स्पष्ट रूप से बताएं, और यह भी कि वे अच्छे उपदेशों को कैसे अस्वीकार करते हैं।
Question 4. वर्तमानसमये अस्योपदेशस्य उपादेयतायाः समीक्षां कुरुत।
Answer: वर्तमानसमये शिक्षायां जीवनमूल्यानां कर्तव्याकर्त्तव्यस्य बोधस्य च नितान्तमभावो दृश्यतेअस्य प्रमुखकारणमस्ति यत् वर्तमानसमये तादृशानां गुरुकुलानां, गुरूणाम्, शिष्याणां च अभावः वर्तते तथा अन्धानुकरणं भौतिकवादस्य प्रभावः वर्तते गुरुशिष्यपरम्परानष्टप्रायावस्तुतः गुरोः ज्ञानम् अमूल्यं भवति प्रस्तुतपाठे गुरूपदेशंस्य यद् महत्त्वं वर्णितं तस्योपादेयता नितान्तमावश्यकी उचिता चास्तिअद्य कर्तव्याकर्त्तव्यस्य ज्ञानमावश्यकम् समाजे प्रायशः सर्वे जनाः स्वार्थभावनया धनार्जनकामनया वा कार्यरताः सन्ति अत एव पारस्परिकप्रेमभाव नष्टप्रायःअतः वर्तमानसमये समाजस्य सर्वविधविकासाय दोषाणां विनाशाय चास्योपदेशस्य सर्वथा उपादेयता अस्तीति नात्र संशयः
In simple words: वर्तमान में शिक्षा में जीवन मूल्यों और कर्तव्य-अकर्तव्य के ज्ञान की कमी है। इसका मुख्य कारण गुरुकुलों, गुरुओं और शिष्यों का अभाव है, साथ ही भौतिकवाद का अंधानुकरण भी है। गुरु-शिष्य परंपरा लगभग नष्ट हो गई है। वास्तव में, गुरु का ज्ञान अनमोल होता है। इस पाठ में गुरु के उपदेश का जो महत्व बताया गया है, वह आज भी बहुत आवश्यक और उचित है। समाज में कर्तव्य-अकर्तव्य का ज्ञान आज आवश्यक है क्योंकि लोग स्वार्थ और धन कमाने की इच्छा में लगे हैं, जिससे आपसी प्रेम नष्ट हो गया है। इसलिए, वर्तमान में समाज के सभी प्रकार के विकास और दोषों के विनाश के लिए इस उपदेश की उपयोगिता निर्विवाद है।
🎯 Exam Tip: वर्तमान संदर्भ में प्राचीन उपदेशों की प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत करें, जिसमें समाज की समस्याओं और उनके समाधान पर प्रकाश डाला गया हो।
अधोलिखितवाक्येषु कालाङ्कितान् पदान् आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
Question. अधोलिखितवाक्येषु कालाङ्कितान् पदान् आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) निसर्गतः एवातिगहनं तमो यौवनप्रभवम्
(ख) शास्त्रजलनिर्मलापि बुद्धिः कालुष्यमुपयाति
(ग) भवादृशा एव भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्
(घ) अपगतमले हि मनसि विशन्ति उपदेशगुणाः।
(ङ) यौवनारम्भे प्रायः कालुष्यमुपयाति बुद्धिः
(च) स्फटिकमणौ सुखेन विशन्ति रजनिकरगभस्तयः
(छ) अतिमलिनमपि दोषजातं हरति
(ज) अयमेव ते कालः उपदेशस्य
(झ) हृदि जलमिव गलत्युपदिष्टम्
(ञ) अकारणं भवति दुष्प्रकृतेरन्वयः।
(ट) चन्दनप्रभवोऽपि अनलः दहति
(ठ) गुरूपदेशः पुरुषाणाम् अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्
(ड) असुवर्णविरचनं कर्णाभरणं वर्तते
(ढ) तेषाम् उपदेष्टारः विरलाः भवन्ति
(ण) जनः भयात् राजवचनर्मनुगच्छति
Answer:
(क) कीदृशं तमो यौवनप्रभवम्?”
(ग) के भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्?
(झ) कस्मिन् जलमिव गलत्युपदिष्टम्?
(अ) कथं भवति दुष्प्रकृतेरन्वयः?
(ट) चन्दनप्रभवोऽपि कः दहति?
(ठ) गुरूपदेशः पुरुषाणां कीदृशं स्नानाम्?
(ड) कीदृशं कर्णाभरणं वर्तते?
(ढ) तेषां के विरलाः भवन्ति?
(ण) जनः कस्मात् राजवचनमनुगच्छति?
In simple words: दिए गए वाक्यों में रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्नवाचक वाक्य बनाए गए हैं, जैसे 'कैसा अंधकार', 'कौन', 'किसमें' आदि प्रश्न शब्दों का प्रयोग करके।
🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित पद के लिंग, वचन और विभक्ति के अनुसार उचित प्रश्नवाचक शब्द का चयन करें।
Question. कुसुमशरप्रहार जर्जरिते हि हृदि कथमिव गलत्युपदिष्टम्?
(घ) असुवर्णविरचनम् अग्राम्यं कर्णाभरणम्
Answer: (अपूर्ण प्रश्न)
In simple words: (The question and sub-parts appear incomplete or fragmented in the source.)
🎯 Exam Tip: For fragmented questions, understand the context from the lesson. If the question remains unclear, it's best to state that it's incomplete.
Question. किम् अग्राम्यं कर्णाभरणम्?
Answer: (अपूर्ण प्रश्न)
In simple words: (This question is incomplete and needs more context from the source material.)
🎯 Exam Tip: Incomplete questions should be clearly identified. If possible, infer the full question from the surrounding text or chapter context for a more complete answer.
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 व्याकरणात्मक-प्रश्नाः
Question 1. अधोलिखितेषु पदेषु नामोल्लेखपुरस्सरसन्धिः कार्यः
Answer:
| पदानि | सन्धिः | सन्धिनाम |
|---|---|---|
| (क) एव + अतिगहनम् | = एवातिगहनम् | दीर्घसन्धिः |
| (ख) खलु + अनर्थपरम्परा | = खल्वनर्थपरम्परा | यण्सन्धिः |
| (ग) एक + एकम् | = एकैकम् | वृद्धिसन्धिः |
| (घ) गुरु + उपदेशः | = गुरूपदेशः | दीर्घसन्धिः |
| (ङ) दुष्प्रकृतेः + अन्वयः | = दुष्प्रकृतेरन्य | रुत्व सन्धिः |
In simple words: दिए गए पदों को उनके सही सन्धि नियमों के अनुसार जोड़ा गया है और प्रत्येक सन्धि का नाम भी बताया गया है।
🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद और सन्धि के प्रकार को समझने के लिए सन्धि के नियमों को अच्छी तरह से याद करें, खासकर स्वर, व्यंजन और विसर्ग सन्धियों के।
Question 2. अधोनिर्दिशनां सचि उअकृतेरन्य
Answer:
| सन्धिपदम् | विच्छेदः | सन्धिनाम |
|---|---|---|
| (क) स्फटिकमणाविव | = स्फटिकमणौ इव | अयादि० |
| (ख) ज्योतिरालोकः | = ज्योतिः+ आलोकः | रुत्व-विसर्ग० |
| (ग) नोद्वेगकरः | = न+उद्वेगकरः | गुण० |
| (घ) गर्भेश्वरत्वम् | = गर्भ+ईश्वरत्वम् | गुण० |
| (ङ) शृण्वन्तोऽपि | = शृण्वन्तः + अपि | ओत्व-विसर्ग ० |
In simple words: इस तालिका में सन्धि पदों का विच्छेद करके और प्रत्येक सन्धि का प्रकार बताया गया है।
🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद के नियमों को सावधानीपूर्वक लागू करें और पहचानें कि कौन सी सन्धि किस नियम के तहत आती है।
Question 3. अधोलिखितानां पदानां नाम-निर्देशपूर्वक-समासो विधेयः
Answer: (अपूर्ण प्रश्न)
In simple words: (This question is incomplete in the source. It asks for compound words to be identified.)
🎯 Exam Tip: जब समास के बारे में पूछा जाए, तो समास के प्रकार और उसके विग्रह को ध्यान से देखें।
Question. (ङ) न आरोपितः
Answer: = अनारोपितः नञ् तत्पुरुषः
In simple words: 'न आरोपितः' का समास 'अनारोपितः' है, और यह नञ् तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: नञ् तत्पुरुष समास को पहचानने के लिए, यह ध्यान रखें कि इसमें 'न' या 'अ' से निषेध या अभाव दिखाया जाता है।
Question 4. निम्नलिखितानां समस्तपदानां नाम-निर्देश-पुरस्सर-विग्रहो विधेयः
Answer:
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
|---|---|---|
| (क) तिमिरान्धत्वम् | = तिमिरेण अन्धत्वम् | तृ. तत्पुरुषः |
| (ख) अभव्यस्य | = न भव्यस्य | नञ् तत्पुरुषः |
| (ग) राजलक्ष्मीः | = राज्ञः लक्ष्मीः | ष. तत्पुरुषः |
| (घ) अनास्वादितविषयरसस्य | = न आस्वादितविषयरसस्य | नञ् तत्पुरुषः |
| (ङ) गुरूपदेशः | = गुरोः उपदेशः | ष. तत्पुरुषः |
In simple words: इस तालिका में दिए गए समस्त पदों का विग्रह और समास के प्रकार को सही ढंग से समझाया गया है।
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, मूल शब्दों के अर्थ और उनके बीच के संबंध को समझें, और फिर सही समास का नाम लिखें।
Question 5. अधोनिर्दिष्टेषु पदेषु शब्द-विभक्ति-वचन-निर्देशं कुरुत
Answer:
| पदम् | शब्दः | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|---|
| (क) बुद्धिः | बुद्धि | प्रथमा | एकवचनम् |
| (ख) विषयेषु | विषय | सप्तमी | बहुवचनम् |
| (ग) मनसि | मनस् | सप्तमी | एकवचनम् |
| (घ) उपदेशस्य | उपदेश | षष्ठी | एकवचनम् |
| (ङ) वारिणा | वारि | तृतीया | एकवचनम् |
| (च) उपदेष्टारः | उपदेष्टा | प्रथमा | बहुवचनम् |
In simple words: तालिका में दिए गए शब्दों के मूल रूप, विभक्ति और वचन को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
🎯 Exam Tip: शब्द रूपों को याद करने से आपको किसी भी पद की विभक्ति और वचन की पहचान करने में मदद मिलेगी।
Question 6. निम्नलिखितानां तिङन्तपदानां धातुः-लकारः-पुरुषः-वचनञ्च पृथक् निर्दिश्यताम्
Answer:
| तिङन्तपदम् | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| (क) नाशयति | नश् | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| (ख) भवन्ति | भू | लट् | प्रथमः | बहुवचनम् |
| (ग) हरति | हृ | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| (घ) शृण्वन्ति | श्रृ | लट् | प्रथमः | बहुवचनम् |
| (ङ) अनगच्छन्ति | अन+गम | लट् | प्रथमः | बहुवचनम् |
In simple words: यह तालिका दिए गए तिङन्त पदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: धातु रूपों को याद करें और अभ्यास करें ताकि आप किसी भी तिङन्त पद के व्याकरणिक गुणों को सही ढंग से पहचान सकें।
Question. (ख) इच्छन्
Answer: इच्छ शतृ
In simple words: 'इच्छन्' का धातु 'इच्छ' है और यह शतृ प्रत्यय से बना है।
🎯 Exam Tip: प्रत्यय लगाकर शब्दों को पहचानना संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; धातुओं के साथ विभिन्न प्रत्ययों के संयोजन का अभ्यास करें।
Question. (ग) कर्तुम्
Answer: कृ तुमुन्
In simple words: 'कर्तुम्' का धातु 'कृ' है और यह तुमुन् प्रत्यय से बना है।
🎯 Exam Tip: तुमुन् प्रत्यय का प्रयोग 'के लिए' अर्थ में होता है, जो क्रिया को उद्देश्य के रूप में दर्शाता है।
Question. (घ) अवलेपः
Answer: अव+लिप् घञ्
In simple words: 'अवलेपः' का धातु 'अव+लिप्' है और यह घञ् प्रत्यय से बना है।
🎯 Exam Tip: घञ् प्रत्यय से भाववाचक संज्ञाएं बनती हैं, जो क्रिया के भाव को दर्शाती हैं।
Question. (ङ) प्रहारः
Answer: प्र+ह घञ्
In simple words: 'प्रहारः' का धातु 'प्र+ह' है और यह घञ् प्रत्यय से बना है।
🎯 Exam Tip: उपसर्गों के साथ धातुओं का संयोजन करके बनने वाले शब्दों और उनके प्रत्ययों को समझें।
Question 8. अधोनिर्दिष्टान् पदान् आश्रित्य वाक्यानि रचयत्
Answer:
| पदम् | वाक्यम् |
|---|---|
| (क) लक्ष्मीमदः | = लक्ष्मीमदः अतीव तीव्रः भवति। |
| (ख) यौवनारम्भे | = यौवनारम्भे प्रायः बुद्धिः कालुष्यमायाति । |
| (ग) दहति | = अग्निः समूलं तं दहति । |
| (घ) अजलं स्नानम् | = गुरूपदेशः अजलं स्नानं वर्तते । |
| (ङ) राजलक्ष्मीः | = राजलक्ष्मीः राजविषविकारतन्द्राप्रदा |
In simple words: दी गई तालिका में प्रत्येक पद का उपयोग करके एक पूर्ण वाक्य बनाया गया है, जो उस पद के अर्थ को स्पष्ट करता है।
🎯 Exam Tip: वाक्य रचना करते समय, पद के अर्थ, विभक्ति और वचन का सही उपयोग करें ताकि वाक्य व्याकरणिक रूप से सही और अर्थपूर्ण हो।
RBSE Class 12 Sanskrit विजेत्री Chapter 2 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1. शब्दार्थाः
Question. अर्थं लिखत
Answer:
| शब्दः | अर्थः |
|---|---|
| (iv) जर्जरीकृत पार हुए। | परिश्रम से पार हुए |
| (v) दारुणः | भयंकर। |
| (vi) कालुष्यम् | मलिनता को। |
| (vii) विशन्ति | प्रवेश करते हैं। |
| (viii) प्रजागरः | विशेष जागरण। |
| (ix) आलोकः | प्रकाश। |
| (x) तमः | अन्धकार। |
| (xi) उद्भावयति | प्रकट करता है। |
| (xii) निसर्गतः | स्वाभाविक रूप से। |
| (xiii) उपदेष्टारः | उपदेश देने वाले। |
| (xiv) अत्यासङ्ग: | अधिक आसक्ति। |
| (xv) अवबुध्यते | जान जाती है। |
| (xvi) प्रतार्यमाणाः | ठगे गये। |
In simple words: इस तालिका में संस्कृत शब्दों और उनके हिंदी अर्थों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है, जिससे पाठ को समझना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत पाठ को समझने के लिए शब्दों के अर्थ को याद रखना बहुत जरूरी है। यह आपको प्रश्नों का उत्तर देने में भी मदद करेगा।
2. प्रश्न-निर्माणम्
Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) निसर्गतः एवातिगहनं तमो यौवनप्रभवम्
(ख) शास्त्रजलनिर्मलापि बुद्धिः कालुष्यमुपयाति
(ग) भवादृशा एव भवन्ति भांजनान्युपदेशानाम्
(घ) अपगतमले हि मनसि विशन्ति उपदेशगुणाः।
(ङ) यौवनारम्भे प्रायः कालुष्यमुपयाति बुद्धिः
(च) स्फटिकमणौ सुखेन विशन्ति रजनिकरगभस्तयः
(छ) अतिमलिनमपि दोषजातं हरति
(ज) अयमेव ते कालः उपदेशस्य
(झ) हृदि जलमिव गलत्युपदिष्टम्
(ञ) अकारणं भवति दुष्प्रकृतेरन्वयः।
(ट) चन्दनप्रभवोऽपि अनलः दहति
(ठ) गुरूपदेशः पुरुषाणाम् अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्
(ड) असुवर्णविरचनं कर्णाभरणं वर्तते
(ढ) तेषाम् उपदेष्टारः विरलाः भवन्ति
(ण) जनः भयात् राजवचनर्मनुगच्छति
Answer:
(क) कीदृशं तमो यौवनप्रभवम्?”
(ग) के भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्?
In simple words: दिए गए वाक्यों में रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्नवाचक वाक्य बनाए गए हैं, जिससे मूल वाक्य का प्रश्न रूप स्पष्ट होता है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न निर्माण करते समय, रेखांकित पद के लिंग, वचन और विभक्ति का ध्यान रखते हुए सही प्रश्नवाचक शब्द का प्रयोग करें।
3. भावार्थ लेखनम्
Question. अधोलिखित गद्यांशानां भावार्थं हिन्दीभाषया लिखत
(i) गर्भेश्वरत्वमभिनवयौवनत्वम्, अप्रतिमरूपत्वममानुषशक्तित्वञ्चेति महतीयं खल्वनर्थ परम्परा।'
(ii) गुरूपदेशश्च नाम अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्।
(iii) हरति अतिमलिनमपि दोषजातं गुरूपदेशः
(iv) अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमदः
Answer:
(i) गर्भेश्वरत्वमभिनवयौवनत्वम् खल्वनर्थ परम्पर
भावार्थ- प्रस्तुत गद्यांश में अमात्य शुकनास युवराज चन्द्रापीड़ को उपदेश देते हुए कह रहे हैं कि जन्म से ही स्वामी होना, अनुपम नवयौवन होना, अप्रतिम सौन्दर्य का होना तथा अलौकिक शक्ति का होना ये सब महान् अनर्थ की परम्परा हैं। इनमें से एक के होने से ही व्यक्ति अविनयी बन जाता है। यदि किसी को बिना कमाये विशाल पैतृक धन-सम्पत्ति प्राप्त हो जाए या राजा के घर में जन्म लेने के कारण, जिसका बाद में पिता की मृत्यु के बाद राजा बनना निश्चित हो, तो यही एक बात मनुष्य को पथभ्रष्ट करने के लिए पर्याप्त होती है। अकेली चढ़ती जवानी भी मनुष्य से कई बुराइयाँ करा सकती है। अकेला अनुपम सौन्दर्य भी मनुष्य को सुन्दरियों के आकर्षण का केन्द्र बनकर उसका विनाश कर सकता है। अकेला अमानुष बल भी मनुष्य को पतन के गर्त में डाल सकता है तथा यदि ये चारों इकट्ठे आ जाएँ फिर तो कहना ही क्या?
(ii) गुरूपदेशश्च नाम अखिलमेलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्।
भावार्थ- प्रस्तुत गद्यांश में अमात्य शुकनास ने युवराज चन्द्रापीड़ के समक्ष गुरु के उपदेश का महत्त्व प्रतिपादित किया है। शुकनास का कथन है कि गुरु का उपदेश समस्त मलों को धो डालने वाला जल-रहित स्नान है। भाव यह है कि सामान्यतः शरीर के मैल को पानी से स्नान किये बिना दूर नहीं किया जा सकता परन्तु गुरु का उपदेश एक ऐसा विलक्षण जलरहित स्नान है, जिसमें मनुष्य के समस्त मलों (विकारों) को धो डालने की क्षमता होती है। साधारण स्नान मनुष्य की बाह्य गन्दगी को दूर करता है, परन्तु गुरु का उपदेश बाहरी तथा आन्तरिक दोनों प्रकार के विकारों को हर लेता है।
(iii) हरति अतिमलिनमपि दोषजातं गुरूपदेशः।
भावार्थ- शुकनास युवराज चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व उपदेश प्रदान करते हैं। वे उपदेश के अन्तर्गत गुरु के उपदेश की महिमा बताते हुए कहते हैं कि गुरु का उपदेश अत्यंत गंदे दोषों को भी दूर कर देता है।
(iv) अपरिणामोपशमो दारुणो लक्ष्मीमदः
भावार्थ- प्रस्तुत अंश 'शुकनासोपदेशः' शीर्षक पाठ से उधृत है। चन्द्रापीड़ के युवराज पद पर अभिषेक से पूर्व वृद्ध मंत्री शुकनास उसे उपदेश देते हैं। इसी क्रम में प्रस्तुत वाक्य के द्वारा लक्ष्मी (ऐश्वर्य) के मद की भयानकता को दर्शाया गया है। तदनुसार शुकनास का कहना है कि ऐश्वर्य से उत्पन्न होने वाला मद (गर्व) बहुत भयानक होता है तथा या वृद्धावस्था में भी शान्त नहीं होता है। इस मद के कारण राजा लोग अनेक प्रकार के दोषों से ग्रसित हो जाते हैं। ऐश्वर्य का मद व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है। अतः इससे सावधान रहना चाहिए।
In simple words: इन गद्यांशों में शुकनास ने चंद्रपीड को राज्याभिषेक से पहले कई महत्वपूर्ण बातें समझाई हैं। उन्होंने बताया कि जन्म से उच्च पद, नया यौवन, सुंदर रूप और अलौकिक शक्ति जैसे गुण अनर्थकारी हो सकते हैं। गुरु का उपदेश मन के सभी दोषों को दूर करने वाला जल-रहित स्नान है, जो सबसे गंदे दोषों को भी मिटा देता है। अंत में, उन्होंने लक्ष्मी के अहंकार रूपी मद के भयंकर परिणामों के बारे में चेतावनी दी, जिससे राजाओं में उन्माद और दोष उत्पन्न होते हैं।
🎯 Exam Tip: भावार्थ लिखते समय, मूल संस्कृत अंश के प्रत्येक महत्वपूर्ण विचार को हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में समझाएं, और पाठ के केंद्रीय संदेश को बनाए रखें।
4. पाठ्यपुस्तकाधारितं भाषिककार्यम्
Question. (i) कर्तृक्रियापदचयनम्प्रश्नः-अधोलिखितवाक्येषु कर्तृक्रियापदचयनम् कुरुत
(क) अनेन कारणेन त्वं विस्तरेण अभिधीयसे
(ख) भवादृशा एव उपदेशानाम् भाजनानि भवन्ति
(ग) गुरूपदेशः अतिमलिनमपि दोषजातं हरति
(घ) कदाचिद् शुकनासः सविस्तरमुवाच
(ङ) यौवनारम्भे च प्रायः कालुष्यमुपयाति बुद्धिः
(च) अपगतमले मनसि विशन्ति सुखेनोपदेशगुणाः
(छ) अकारणं भवति श्रुतम् अविनयस्य
(ज) राजवचनमनुगच्छति जनो भयात्
Answer:
| कर्तृपदम् | अभिधीयसे |
|---|---|
| (क) त्वम् | भवन्ति |
| (ख) भवादृशाः | हरति |
| (ग) गुरूपदेशः | उवाच |
| (घ) शुकनासः | उपयाति |
| (ङ) बुद्धिः | विशन्ति |
| (च) उपदेशगुणाः | भवति |
| (छ) श्रुतम् | अनुगच्छति |
| (ज) जनः |
In simple words: इस तालिका में प्रत्येक वाक्य के लिए कर्ता और क्रिया पद की पहचान की गई है, जो वाक्य संरचना को समझने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: संस्कृत वाक्यों में कर्ता और क्रिया की पहचान करते समय, क्रिया के वचन और पुरुष के अनुसार कर्ता को ढूंढें।
Question. (ii) विशेषणविशेष्यचयनम्
प्रश्न (क) एवं समतिक्रामत्सु दिवसेषु राजा चन्द्रापीड़स्य यौवराज्याभिषेक चिकीर्षुः प्रतीहारान् आदिदेश इत्यत्र दिवसेषु' इत्यस्य विशेषणपदं लिखत
प्रश्न (ख) विदितवेदितव्यस्य अधीतसर्वशास्त्रस्यते।' अस्मिन् वाक्ये विशेष्यपदं हरति किम्?
प्रश्न (ग) अप्रबोधा घोरा चे राज्यसुखसन्निपातनिद्रा भवतिअत्र विशेषणपदं किम्?
प्रश्न (घ) अपगतमले हि मनसि विशन्ति उपदेशगुणाःइत्यत्र विशेषणपदं किम्?
प्रश्न (ङ) उपदिश्यमानमपि ते न शृण्वन्ति इत्यत्र विशेष्यपदं किम्?
प्रश्न (च) हरत्यतिमलिनमन्धकारमिव दोषजातम् इत्यत्र विशेषणपदं
Answer:
(ग) अप्रबोधा घोरा।
(घ) अपगतमले
(ङ) ते।
(च) अतिमलिनम्।
In simple words: यह उत्तर विशेषण और विशेष्य पदों की पहचान करने में मदद करता है, जिससे शब्दों के गुणों और उनके वर्णन को समझने में आसानी होती है।
🎯 Exam Tip: विशेषण और विशेष्य की पहचान करते समय, यह देखें कि कौन सा शब्द किसी की विशेषता बता रहा है (विशेषण) और किसकी विशेषता बताई जा रही है (विशेष्य)।
Question. (iii) सर्वनामसंज्ञा प्रयोगः
प्रश्नः अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदस्य स्थाने संज्ञापदस्य प्रयोगं कृत्वा वाक्यं पुनः लिखत
(क) तात चन्द्रापीड़! विदितवेदितव्यस्य ते नाल्पमप्युपदेष्टव्यमस्ति।
(ख) विशेषेण तु राज्ञाम् विरला हि तेषाम् उपदेष्टारः
(ग) गुरूपदेशः दोषजातं हरति स एव गुणरूपेण तं परिणमयति
(घ) चन्द्रापीड़! अयमेव ते कालः उपदेशस्य।
(ङ) गुरूपदेशः पुरुषाणाम् अजलं स्नानम्, स एव अतीत ज्योतिरालोकः
Answer:
(क) तात चन्द्रापीड ! विदितवेदितव्यस्य चन्द्रापीडस्य नाल्पमप्युपदेष्टव्यमस्ति
(ख) विशेषेण तु राज्ञाम्, विरला हि राज्ञाम् उपदेष्टारः।
(ग) गुरूपदेशः दोषजातं हरति, गुरूपदेश एवं गुणरूपेण तं परिणमयति।
(घ) चन्द्रापीड़! अयमेव चन्द्रपीडस्य कालः उपदेशस्य।
(ङ) गुरूपदेशः पुरुषाणाम् अजलं स्नानम्, गुरूपदेश एव अतीत ज्योतिरालोकः।
In simple words: इन वाक्यों में रेखांकित सर्वनामों की जगह संज्ञा शब्दों का प्रयोग करके वाक्यों को फिर से लिखा गया है, जिससे स्पष्टता बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: सर्वनाम के स्थान पर संज्ञा का प्रयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि संज्ञा उचित लिंग, वचन और विभक्ति में हो और वाक्य का अर्थ न बदले।
Question. अधोलिखितवाक्येषु सर्वनामपदचयनं कुरुत
(क) तं च विनीततरमिच्छन् कर्तुं शुकनासः उवाच
(ख) तात चन्द्रापीड! ते नाल्पमप्युपदेष्टव्यमस्ति।
(ग) उपदिश्यमानमपि ते न शृण्वन्ति।
(घ) एवंविधयापि चानया विक्लवाः भवन्ति राजानः।
Answer:
(क) तम्
(ख) ते (तव)
(ग) ते
(घ) अनया
(a) नृपः,
(b) स्वभावतः,
(c) कठोरः,
(d) मतिः,
(e) कष्टेन,
(f) समयः
(g) जलेन
In simple words: इन वाक्यों में सर्वनाम पदों को चुना गया है, जो किसी संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए गए हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वनामों को पहचानना और उनके संदर्भ को समझना वाक्य के सही अर्थ को समझने के लिए आवश्यक है।
Question. अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानां विलोमार्थकपदानि लिखत
(क) तं विनीतं कर्तुमिच्छति।
(ख) अप्रबोधा घोरा च राज्यसुखसन्निपातनिद्रा भवति
(ग) अविनयानाम् एकैकमप्येषामायतनं किमुत् समवायः।
(घ) विशन्ति सुखेन उपदेशगुणाः
(ङ) हरत्यतिमलिनमन्धकारमिव दोषजातम्
Answer:
(क) अविनीतम्
(ख) प्रबोधा
(ग) विनयानाम्
(घ) दुःखेन।
(ङ) गुणसमूहम्।
In simple words: इस उत्तर में रेखांकित पदों के विलोम (विपरीतार्थक) शब्द दिए गए हैं।
🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय, मूल शब्द के अर्थ को समझें और उसका सही विपरीत अर्थ वाला शब्द प्रस्तुत करें।
अन्ये प्रश्नाः
Question 1. "तात! चन्द्रापीड! विदितवेदितव्यस्याधीतसर्वशास्त्रस्य ते नाल्पमप्युपदेष्टव्यमस्ति।” इत्येतत् वाक्यं कः कस्मै कथयति?
Answer: शुकनासः चन्द्रापीडाय कथयति।
In simple words: यह वाक्य शुकनास चन्द्रापीड से कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पाठ के महत्वपूर्ण संवादों को याद रखें और यह भी याद रखें कि कौन सा पात्र किससे क्या कहता है।
Question 3. “भवादृशा एव भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्।” इत्येतत् वाक्यं कः कस्मै कथयति?
Answer: इति वाक्यं शुकनासः चन्द्रापीडाय कथयति
In simple words: यह वाक्य शुकनास चन्द्रापीड से कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संवादों को याद रखें और पहचानें कि कौन किससे क्या कह रहा है, खासकर जब यह उपदेश या महत्वपूर्ण सलाह हो।
Question 4. 'अयमेव चानास्वादितविषयरसस्य ते कालः उपदेशस्य।” इत्येतत् वाक्यं कः कस्मै कथयति?
Answer: इति वाक्यं शुकनासः चन्द्रापीडाय कथयति।
In simple words: यह वाक्य शुकनास चन्द्रापीड से कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख उद्धरणों और उनके वक्ता एवं श्रोता को याद रखना पाठ के विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
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