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Detailed छन्दोज्ञानम् RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit
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Class 12 Sanskrit छन्दोज्ञानम् RBSE Solutions PDF
वस्तुनिष्ठप्रश्नाः
Question 1. छन्द शास्त्रस्य प्रणेता अस्ति
(क) लगधमुनिः
(ख) पिङ्गलमुनिः
(ग) सायणाचार्यः।
(घ) पाणिनिः
Answer: (ख) पिङ्गलमुनिः
In simple words: छन्द शास्त्र को सबसे पहले पिङ्गल मुनि ने बनाया था। वे इस क्षेत्र के पहले गुरु थे।
🎯 Exam Tip: छन्द शास्त्र के प्रणेता का नाम याद रखना एक महत्वपूर्ण तथ्य है जो अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 2. छन्दः शास्त्रस्य नाम न वर्तते
(क) छन्दोविचितिः
(ख) छन्दोविवृत्तिः
(ग) छन्दोनुशासनम्।
(घ) छन्दाचरणम्
Answer: (घ) छन्दाचरणम्
In simple words: छन्द शास्त्र के अलग-अलग नाम हैं जैसे छन्दोविचिति, छन्दोविवृत्ति और छन्दोनुशासनम्, लेकिन 'छन्दाचरणम्' इसका नाम नहीं है।
🎯 Exam Tip: छन्द शास्त्र के विभिन्न पर्याय और अनुपयोगी नामों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 3.
(क) लघुः
(ख) गुरु:
(ग) यादृच्छिकः
(घ) नियमः नास्ति।
Answer: (ख) गुरु:
In simple words: गुरु स्वर वह होता है जिसमें दो मात्राएँ होती हैं, जबकि लघु स्वर में एक मात्रा होती है। छंदों में गुरु और लघु का ज्ञान बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: छन्दों में गुरु और लघु की पहचान ही सही गण-निर्धारण का आधार है, इसलिए इसके नियमों को ध्यान से समझें।
Question 4. तगणस्य स्वरूपमस्ति-
(क) आदिलघुः
(ख) मध्यगुरुः
(ग) अन्तगुरु:
(घ) अन्तलघुः
Answer: (घ) अन्तलघुः
In simple words: तगण का स्वरूप होता है कि उसके आखिरी अक्षर में लघु मात्रा होती है। यह गणों को पहचानने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: गणों के स्वरूप (आदिगुरु, मध्यगुरु, अन्तगुरु, आदिलघु, मध्यलघु, अन्तलघु, सर्वगुरु, सर्वलघु) को याद रखें ताकि गण-निर्धारण में आसानी हो।
अतिलघूत्तरात्मकाः प्रश्नाः
Question 1. गणः कः कथ्यते?
Answer: तीन वर्णों के समूह को गण कहा जाता है। यह समूह छन्दों के मात्रा-विन्यास को समझने में मदद करता है।
In simple words: तीन अक्षरों के एक समूह को गण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गणों का उपयोग वर्णिक छन्दों में होता है, जहाँ इनकी सही पहचान से छन्द का निर्धारण होता है।
Question 2. गणाः कति भवन्ति?
Answer: गण कुल आठ प्रकार के होते हैं। वे हैं: यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण और सगण। ये सभी गण छन्द-रचना में सहायक होते हैं।
In simple words: गण आठ होते हैं: यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण।
🎯 Exam Tip: आठों गणों के नाम और उनके गुरु-लघु स्वरूप को याद रखना छन्द ज्ञान के लिए बहुत ज़रूरी है।
Question 3. मगणस्य स्वरूपम् लिख्यताम्?
Answer: मगण का स्वरूप 'मस्त्रिगुरुः' होता है, जिसका अर्थ है कि मगण में तीनों वर्ण गुरु मात्रा वाले (SSS) होते हैं। यह गण छन्द की गति और लय में विशिष्ट भूमिका निभाता है।
In simple words: मगण में तीनों अक्षर गुरु होते हैं (SSS)।
🎯 Exam Tip: गणों के गुरु-लघु स्वरूप को सूत्र ('यमाताराजभानसलगा') के माध्यम से याद करना आसान होता है।
Question 4. छन्दः शास्त्रे 'यतिः' शब्दस्य कः अर्थः अस्ति?
Answer: छन्द शास्त्र में 'यति' शब्द का अर्थ है जहाँ कविता पढ़ते समय रुकना होता है, यानी विराम का स्थान। यह कविता को सही लय और अर्थ के साथ पढ़ने में मदद करता है।
In simple words: छन्द में 'यति' का मतलब है जहाँ पढ़ते समय थोड़ा रुकना होता है, यानी विराम।
🎯 Exam Tip: यति का सही ज्ञान छन्दों का शुद्ध उच्चारण और अर्थ समझने के लिए आवश्यक है।
Question 5. मगणः त्रिगुरुः भवति।
Answer: मगण में तीनों वर्ण गुरु होते हैं। यह संस्कृत छन्दों में एक महत्वपूर्ण गण है, जो विशेष वर्ण-विन्यास को दर्शाता है।
In simple words: मगण में तीन गुरु अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: गणों की पहचान के लिए उनके नाम के साथ उनके गुरु-लघु क्रम को भी याद रखें।
Question 6. प्रतिचरणं चत्वारः यगणाः कस्मिन् छन्दसि भवन्ति?
Answer: 'भुजङ्गप्रयातम्' छन्द में प्रत्येक चरण में चार यगण होते हैं। यह एक वर्णिक छन्द है जिसकी पहचान इसके गण-विन्यास से होती है।
In simple words: भुजङ्गप्रयातम् छन्द में हर लाइन में चार यगण होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न छन्दों के लक्षणों को याद करते समय उनके गणों की संख्या और क्रम पर विशेष ध्यान दें।
Question 7. नगणस्य स्वरूपं लिख्यताम्।
Answer: नगण का स्वरूप 'त्रिलघुश्च नकारो' होता है, जिसका अर्थ है कि नगण में तीनों वर्ण लघु मात्रा वाले होते हैं। यह एक ऐसा गण है जिसमें कोई भी अक्षर गुरु नहीं होता।
In simple words: नगण में तीनों अक्षर लघु होते हैं।
🎯 Exam Tip: नगण और मगण जैसे गणों के बिल्कुल विपरीत स्वरूप होते हैं, इन्हें तुलना करके याद रखें।
लघूत्तरात्मकाः प्रश्नाः
Question 1. भुजङ्गप्रयातछन्दसः लक्षणं लिख्यताम्।
Answer: भुजङ्गप्रयात छन्द का लक्षण है कि इसके प्रत्येक चरण में चार यगण होते हैं। यह एक द्रुतगति वाला छन्द है जो अपने गेय गुणों के लिए जाना जाता है।
In simple words: भुजङ्गप्रयात छन्द में हर लाइन में चार यगण होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षण और उदाहरणों को साथ-साथ याद करने से उन्हें समझना और पहचानना आसान हो जाता है।
Question 2. अधोलिखितोदाहरणेषु निर्धारणं कृत्वा तेषां लक्षणं लिखत
(क) 'वसन्ततिलका तभजा जगौ गः' इत्यस्यार्थः स्पष्टीक्रियताम्।
(ख) 'गणसूचक-चक्र स्पष्टीकरणीयम्।
(ग) शिखरिणी छन्दसः उदाहरणं लिख्यताम्।
Answer:
(क) इसका अर्थ है कि जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रम से तगण, भगण, जगण, फिर से जगण और अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं, वह चौदह वर्णों वाला छन्द 'वसन्ततिलका' कहलाता है। यह अपने मधुर और प्रवाहमय संगीत के लिए प्रसिद्ध है।
(ख) गणसूचक-चक्र तालिका नीचे दी गई है:
| 1. गणः | यगणः | य-माता- | ISS |
|---|---|---|---|
| 2. गणः | मगणः | मा-तारा- | SSS |
| 3. गणः | तगणः | ता-राज- | SSI |
(ग) शिखरिणी छन्द का एक उदाहरण:
"रसा रुद्रैश्छिन्ना यमनसभलागः शिखरिणी।" यह छन्द सत्रह अक्षरों का होता है।
In simple words: (क) वसन्ततिलका छन्द में तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु होते हैं, कुल 14 अक्षर होते हैं। (ख) गणसूचक-चक्र गणों के गुरु-लघु स्वरूप को दिखाता है, जैसे यगण (ISS), मगण (SSS), तगण (SSI)। (ग) शिखरिणी छन्द सत्रह अक्षरों का होता है और इसका अपना विशिष्ट गण-विन्यास होता है।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षण और गण-चक्र को याद करने के लिए 'यमाताराजभानसलगा' सूत्र का अभ्यास करें। शिखरिणी जैसे बड़े छन्दों के लक्षणों को भी याद रखना महत्वपूर्ण है।
निबन्धात्मकप्रश्नाः
Question 1. छन्दोभेदाः निरूप्यताम्?
Answer: पिङ्गल के छन्दःसूत्रों में लौकिक छन्दों को दो मुख्य भेदों में बांटा गया है: 1. वर्णच्छन्द (वृत्त) और 2. मात्रिकच्छन्द (जाति)। वर्णच्छन्द में अक्षरों की संख्या गिनी जाती है, जैसे इन्द्रवज्रा और शिखरिणी, जबकि मात्रिकच्छन्द में मात्राओं की गणना की जाती है, जैसे आर्या। छन्दों के ये भेद उनके स्वरूप और रचना-विधि को स्पष्ट करते हैं।
In simple words: छन्द दो तरह के होते हैं: वर्णिक (वृत्त) जहाँ अक्षर गिने जाते हैं, और मात्रिक (जाति) जहाँ मात्राएँ गिनी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों के मुख्य दो भेदों को उनकी परिभाषा और एक-एक उदाहरण के साथ स्पष्ट करना सुनिश्चित करें।
Question 2. छन्दसः लक्षणं सोदाहरणं निरूपयत?
Answer: इस छन्द के लक्षण और उदाहरणों का विवेचन पहले ही किया जा चुका है। इसमें विभिन्न प्रकार के छन्दों की पहचान उनके लक्षण और उदाहरण से होती है। (यह उत्तर छात्र को पूर्व में दिए गए विवेचन को देखने के लिए निर्देशित करता है, जहाँ विशिष्ट छन्दों के लक्षण और उदाहरण विस्तृत रूप से बताए गए हैं।) एक छन्द का लक्षण उसकी पहचान होती है, जिसमें गण-क्रम, अक्षरों की संख्या और यति का स्थान शामिल होता है।
In simple words: छन्द का लक्षण वह नियम है जिससे उसे पहचाना जाता है (जैसे गण और अक्षर संख्या)। उदाहरण देकर इसे समझाया जाता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी छन्द का लक्षण बताते समय उसके मुख्य गणों, अक्षरों की संख्या और यति के स्थान को अवश्य बताएं।
अतिलघूत्तरात्मकप्रश्नाः
Question 1. निम्नलिखितपंक्तिषु छन्दसः नामोल्लेखं कुरुत
1. आपद्गतं च न जहाति ददाति काले।
2. सा निन्दन्ति स्वानि भाग्यानि बाला।
3. दीर्घग्रीवः स भवति, खुरास्तस्य चत्वार एव।
Answer:
1. यह पंक्ति **मालिनी** छन्द की है।
2. यह पंक्ति **मालिन** छन्द की है।
3. यह पंक्ति **मालिन** छन्द की है।
In simple words: इन पंक्तियों में 'मालिनी' छन्द है, जो एक विशिष्ट गण-विन्यास और अक्षर संख्या वाला छन्द है।
🎯 Exam Tip: छन्दों की पहचान के लिए पंक्तियों के वर्णों की गणना और गण-विन्यास का अभ्यास करें।
Question 9. फलं स्वेच्छालभ्यं प्रतिवनमखेदं क्षितिरुहाम्।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्द की पहचान के लिए कुल अक्षरों की संख्या और गणों के क्रम को ध्यान से देखें।
Question 10. पयः स्थाने स्थाने शिशिर मधुरं पुण्यसरिताम्।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: जब एक ही प्रकार के छन्द के कई उदाहरण दिए हों, तो उन सभी के गण-विन्यास का अभ्यास करें।
Question 11. मृदुस्पर्शा शय्या सुललितलता पल्लवमयी।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी छन्द के यमनसभलागः गणों का क्रम याद रखें ताकि ऐसे उदाहरणों को आसानी से पहचान सकें।
Question 12. सहन्ते सन्तापं तदपि धनिनां द्वारि कृपणाः।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: संस्कृत के श्लोकों में छन्द की पहचान करते समय शब्दों के सही उच्चारण और संधि-विच्छेद पर ध्यान दें।
Question 13. पद्माकरं दिनकरो विकेचीकरोति।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसन्ततिलका छन्द के लक्षण 'तभजा जगौ ग:' को याद रखें, जो 14 अक्षरों और विशिष्ट गण-क्रम को दर्शाता है।
Question 14. चन्द्रो विकासयति कैरवचक्रवालम्।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: एक ही छन्द के विभिन्न उदाहरणों का अभ्यास करके आप उसकी पहचान में निपुण हो सकते हैं।
Question 15. नाभ्यर्थितो जलधरोऽपि जलं ददाति।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्द-निर्धारण में विसर्ग (:) और अनुस्वार (ं) की मात्रा गणना पर विशेष ध्यान दें।
Question 16. सन्तः स्वयं परहिते विहिताभियोगाः।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षणों को याद करते समय उनके उदाहरणों को मन में दोहराएँ ताकि वे स्थायी रूप से याद हो जाएं।
Question 17. मौनान्मूकः प्रवचनपटुर्वातुलो जल्पको वा।
Answer: इस पंक्ति में **मन्दाक्रान्ता** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में मन्दाक्रान्ता नाम का छन्द है। इस छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: मन्दाक्रान्ता छन्द 'मभनततगग' गण-विन्यास और 17 अक्षरों वाला होता है, जो इसे विशिष्ट पहचान देता है।
Question 18. धृष्टः पाश्र्वे वसति च सदा दूरतश्चाऽप्रगल्भः।
Answer: इस पंक्ति में **मन्दाक्रान्ता** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में मन्दाक्रान्ता नाम का छन्द है। इस छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: बड़े छन्दों (जैसे मन्दाक्रान्ता, शिखरिणी) की यति (विराम) स्थानों को भी याद रखें, क्योंकि यह उनकी पहचान का हिस्सा है।
Question 19. क्षान्त्यो भीरुर्यदि न सहते प्रायशो नाभिजातः।
Answer: इस पंक्ति में **मन्दाक्रान्ता** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में मन्दाक्रान्ता नाम का छन्द है। इस छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्णिक छन्दों में गुरु-लघु का निर्धारण करते समय संयुक्त अक्षरों और अनुस्वार-विसर्ग के नियमों को ध्यान में रखें।
Question 20. सेवाधर्मः परमगहनो योगिनामप्यगम्यः।
Answer: इस पंक्ति में **मन्दाक्रान्ता** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में मन्दाक्रान्ता नाम का छन्द है। इस छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: मन्दाक्रान्ता छन्द की धीमी और गंभीर गति को भी उसके लक्षण के रूप में समझा जा सकता है।
Question 21. पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरसाः।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी छन्द में यति 6 और 11 अक्षरों पर होती है, जो इसे पढ़ने में मदद करती है।
Question 22. परं तेषां मध्ये विरलतरलोऽहं तव सुतः।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: जब दो अलग-अलग छन्दों (जैसे मन्दाक्रान्ता और शिखरिणी) में समान अक्षर संख्या हो, तो गण-विन्यास ही उनकी पहचान का मुख्य आधार होता है।
Question 23. मदीयोऽयं त्यागः समुचितमिदं नो तव शिवे।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: किसी भी छन्द की पहचान के लिए 'अक्षर गणना' पहला और 'गण-विन्यास' दूसरा महत्वपूर्ण कदम होता है।
Question 24. कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी छन्द संस्कृत साहित्य में उपदेशात्मक और भावुक श्लोकों में अक्सर प्रयोग किया जाता है।
Question 25. विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रभात धनम्
Answer: इस पंक्ति में **शार्दूलविक्रीडितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शार्दूलविक्रीडितम् नाम का छन्द है। यह छन्द 19 अक्षरों का होता है।
🎯 Exam Tip: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द के 'सूर्याश्वैर्यदिमः' लक्षण को याद रखें, जो इसमें सूर्य (12) और अश्व (7) पर यति दर्शाता है।
Question 26. विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरुणां गुरुः।
Answer: इस पंक्ति में **शार्दूलविक्रीडितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शार्दूलविक्रीडितम् नाम का छन्द है। यह छन्द 19 अक्षरों का होता है।
🎯 Exam Tip: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द का प्रयोग अक्सर किसी विषय के महत्व का वर्णन करने वाले श्लोकों में होता है।
Question 27. विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता।
Answer: इस पंक्ति में **शार्दूलविक्रीडितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शार्दूलविक्रीडितम् नाम का छन्द है। यह छन्द 19 अक्षरों का होता है।
🎯 Exam Tip: शार्दूलविक्रीडितम् जैसे बड़े छन्दों में प्रत्येक चरण के अंत में एक गुरु वर्ण होता है।
Question 28. विद्या राजसु पूज्यते न तु धनं विद्याविहीनः पशुः।
Answer: इस पंक्ति में **शार्दूलविक्रीडितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शार्दूलविक्रीडितम् नाम का छन्द है। यह छन्द 19 अक्षरों का होता है।
🎯 Exam Tip: छन्दों को पहचानते समय, यदि कोई शब्द संयुक्त अक्षर से शुरू होता है तो उसके पहले का अक्षर गुरु माना जाता है।
Question 29. निन्दन्तु नीतिनिपुणाः यदि वा स्तुवन्तु।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसन्ततिलका जैसे छन्द, जिनमें अपेक्षाकृत कम अक्षर होते हैं, अक्सर नीतिपरक या प्रेरक श्लोकों में पाए जाते हैं।
Question 30. लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्द की पहचान करते समय, मात्रा गणना या गण-निर्धारण के लिए हर शब्द का सही उच्चारण महत्वपूर्ण है।
Question 31. अद्यैव वा मरणमस्तु युगान्तरे वा।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न छन्दों में एक ही भाव को कैसे व्यक्त किया जा सकता है, यह समझने के लिए तुलनात्मक अध्ययन करें।
Question 32. न्यायात्पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।
Answer: इस पंक्ति में **वसन्ततिलका** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में वसन्ततिलका नाम का छन्द है। इस छन्द में 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसन्ततिलका छन्द का अंतिम वर्ण प्रायः गुरु होता है, यह एक त्वरित पहचान बिंदु है।
Question 33. करे श्लाघ्यस्त्यागः शिरसि गुरुपादप्रणयिता।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी छन्द में 6 और 11 पर यति होती है। इस विराम को पहचानकर आप सही छन्द का निर्धारण कर सकते हैं।
Question 34. मुखे सत्या वाणी विजयिभुजयोर्वीर्यमतुलम्।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों को पहचानते समय, दीर्घ स्वरों (आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) को गुरु और ह्रस्व स्वरों (अ, इ, उ, ऋ) को लघु मानें।
Question 35. हृदि स्वच्छा वृत्तिः श्रुतिमधिगतं च श्रवणयोः।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी जैसे छन्दों में 'यमाताराजभानसलगा' सूत्र का प्रयोग करके गण-निर्धारण करें।
Question 36. विनाऽप्यैश्वर्येण प्रकृतिमहतां मण्डनमिदम्।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) से युक्त अक्षर गुरु होते हैं, भले ही वे ह्रस्व हों।
Question 37. स्त्रीसंस्थानं चाप्सरस्तीर्थमारा।
Answer: इस पंक्ति में **शालिनी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शालिनी नाम का छन्द है। शालिनी छन्द में 11 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शालिनी छन्द में मगण, तगण, तगण और दो गुरु होते हैं, जो 11 अक्षरों का होता है।
Question 38. अनाघ्रातं पुष्पं किसलयमलूनं कररुहैः।
Answer: इस पंक्ति में **शिखरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शिखरिणी नाम का छन्द है। शिखरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिणी छन्द का लक्षण 'रसै रुद्राश्छिन्ना यमनसभलागः शिखरिणी' है, इसे याद रखें।
Question 39. क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्।
Answer: इस पंक्ति में **शार्दूलविक्रीडितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में शार्दूलविक्रीडितम् नाम का छन्द है। यह छन्द 19 अक्षरों का होता है।
🎯 Exam Tip: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द में 'माः स जः स त् तः गः' गणों का क्रम होता है, इसे भी ध्यान में रखें।
Question 40. त्वमेकं शरण्यं त्वमेकं वरेण्यम्।
Answer: इस पंक्ति में **भुजङ्गप्रयातम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में भुजङ्गप्रयातम् नाम का छन्द है। इस छन्द में 12 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: भुजङ्गप्रयातम् छन्द में प्रत्येक चरण में चार यगण (ISS, ISS, ISS, ISS) होते हैं।
Question 41. शिरसि मा लिख मा लिख मा लिख।
Answer: इस पंक्ति में **द्रुतविलम्बितम्** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में द्रुतविलम्बितम् नाम का छन्द है। इस छन्द में 12 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: द्रुतविलम्बितम् छन्द में 'नभौ भरौ' गणों का क्रम होता है, यानी नगण, भगण, भगण, रगण।
Question 42. मम विरहजा न तवं वत्से शुचं गणयिष्यसि।
Answer: इस पंक्ति में **हरिणी** छन्द है।
In simple words: इस कविता की लाइन में हरिणी नाम का छन्द है। हरिणी छन्द में 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: हरिणी छन्द का लक्षण 'नसमरसलागः षड्वेदैर्हरिणी मता' है, जिसका अर्थ है कि इसमें नगण, सगण, मगण, रगण, सगण, लघु, गुरु होते हैं और 6, 4, 7 पर यति होती है।
Question 43. स्रग्धरा
Answer: इस पंक्ति में **स्रग्धरा** छन्द है।
In simple words: यह पंक्ति स्रग्धरा छन्द का एक उदाहरण है। स्रग्धरा एक बड़ा छन्द होता है।
🎯 Exam Tip: स्रग्धरा छन्द में कुल 21 अक्षर होते हैं और यह 'म्रेर्भनैर्ययानां' गण-विन्यास का पालन करता है।
Question 44. वंशस्थम्
Answer: इस पंक्ति में **वंशस्थम्** छन्द है।
In simple words: यह पंक्ति वंशस्थम् छन्द का एक उदाहरण है। वंशस्थम् छन्द में 12 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वंशस्थम् छन्द 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ' लक्षण वाला होता है, जिसमें जगण, तगण, जगण, रगण का क्रम होता है।
Question 46. मालिनी,
Answer: इस पंक्ति में **मालिनी** छन्द है।
In simple words: यह पंक्ति मालिनी छन्द का एक उदाहरण है। मालिनी छन्द में 15 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द का लक्षण 'ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकैः' है, जिसमें नगण-नगण-मगण-यगण-यगण का क्रम होता है।
Question 47. मालिनी ।
Answer: इस पंक्ति में **मालिनी** छन्द है।
In simple words: यह पंक्ति भी मालिनी छन्द का एक उदाहरण है। मालिनी छन्द अपने विशिष्ट गणों से पहचाना जाता है।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द की यति 8 और 7 अक्षरों पर होती है, जो इसके प्रवाह को निर्धारित करती है।
लघूत्तरात्मकप्रश्नाः
Question 1. अन्तगुरूः कः गणः कथ्यते?
Answer: जिस गण के अंत में गुरु वर्ण होता है, उसे 'सगणः' कहते हैं। सगण का स्वरूप (ISS) होता है, जिसमें पहला लघु, दूसरा लघु और तीसरा गुरु होता है।
In simple words: जिस गण के आखिरी अक्षर में गुरु मात्रा हो, उसे 'सगण' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: 'सगण' (लघु-लघु-गुरु) और 'यगण' (लघु-गुरु-गुरु) जैसे गणों के स्वरूपों को याद रखें।
Question 2. प्रतिचरणं एकविंशतिःवर्णाः कस्मिन् छन्दसि भवन्ति?
Answer: प्रत्येक चरण में इक्कीस (21) वर्ण **स्रग्धरा** छन्द में होते हैं। स्रग्धरा एक बड़ा और गंभीर छन्द है, जिसका प्रयोग महाकाव्यों में होता है।
In simple words: जिस छन्द के हर लाइन में 21 अक्षर होते हैं, उसे स्रग्धरा छन्द कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्रग्धरा छन्द की पहचान उसकी बड़ी अक्षर संख्या और विशेष गण-विन्यास से होती है।
Question 3. त्रिलघुः कः गणः भवति?
Answer: तीनों लघु वर्णों वाला गण **नगणः** होता है। नगण का स्वरूप (III) होता है, जिसमें कोई भी वर्ण गुरु नहीं होता।
In simple words: जिसमें तीनों अक्षर लघु हों, उसे नगण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नगण (III) और मगण (SSS) एक-दूसरे के विपरीत होते हैं, इन्हें ऐसे याद रखना आसान है।
Question 5. कस्मिन् गणे सर्वे वर्णाः लघवः भवन्ति?
Answer: **नगण** में सभी वर्ण लघु होते हैं। नगण ही एकमात्र ऐसा गण है जहाँ तीनों अक्षर लघु मात्रा वाले होते हैं (III)।
In simple words: नगण में सारे अक्षर लघु होते हैं।
🎯 Exam Tip: गणों के गुरु-लघु स्वरूप को याद करने के लिए 'यमाताराजभानसलगा' सूत्र का प्रयोग करें।
Question 6. त्रिवर्णानां समूहः कः कथ्यते?
Answer: तीन वर्णों के समूह को **गणः** कहा जाता है। छन्दों की रचना में इन गणों का बहुत महत्व होता है।
In simple words: तीन अक्षरों के समूह को गण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गण की परिभाषा एक मूलभूत अवधारणा है, जिसे याद रखना आवश्यक है।
Question 7. गणाः कति भवन्ति? नामानि लिखत।
Answer: गण कुल **आठ** होते हैं। उनके नाम हैं: यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण और सगण। ये सभी गण छन्दों के मात्रा-विन्यास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: गण आठ प्रकार के होते हैं: यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण।
🎯 Exam Tip: आठों गणों के नाम याद रखना छन्दों को समझने और पहचानने के लिए अनिवार्य है।
Question 8. छन्दः शास्त्रे 'पाद' शब्दस्य अर्थः कः अस्ति?
Answer: छन्द शास्त्र में 'पाद' शब्द का अर्थ है छन्द का चौथा भाग या चरण। इसे 'चरण' भी कहा जाता है। प्रत्येक श्लोक में सामान्यतः चार पाद होते हैं।
In simple words: छन्द में 'पाद' का मतलब है कविता की एक लाइन या उसका चौथा हिस्सा।
🎯 Exam Tip: 'पाद' और 'चरण' पर्यायवाची हैं; इन्हें अक्सर एक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता है।
Question 9. कः गणः त्रिगुरुः भवति?
Answer: **मगणः** तीनों गुरु वर्णों वाला गण होता है। मगण का स्वरूप (SSS) होता है।
In simple words: मगण वह गण है जिसमें तीनों अक्षर गुरु होते हैं।
🎯 Exam Tip: मगण (SSS) और नगण (III) गणों के स्वरूपों को विशेष रूप से याद रखें, क्योंकि वे विपरीत हैं।
Question 10. छन्दः शास्त्रे 'यतिः' शब्दस्य कः अर्थः अस्ति?
Answer: छन्द शास्त्र में 'यति' शब्द का अर्थ है कविता पाठ करते समय जिह्वा के लिए इष्ट विश्राम स्थान, यानी जहाँ थोड़ा रुकना होता है। यह पढ़ने में लय और स्पष्टता लाता है।
In simple words: छन्द में 'यति' का मतलब है पढ़ते समय रुकने की जगह।
🎯 Exam Tip: यति का सही स्थान छन्द के अर्थ और सौंदर्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. 'यमाताराजभानसलगाः' इति सूत्रम् कस्य स्वरूपं परिज्ञातुं वर्तते?
Answer: 'यमाताराजभानसलगाः' यह सूत्र **गणों के स्वरूप** को जानने के लिए प्रयोग किया जाता है। इस सूत्र के माध्यम से आठों गणों के गुरु-लघु स्वरूप को आसानी से समझा और याद रखा जा सकता है।
In simple words: यह सूत्र गणों के गुरु-लघु स्वरूप को जानने के लिए है।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को कंठस्थ कर लें, यह गण-निर्धारण का सबसे प्रभावी तरीका है।
Question 13. प्रतिचरणं चत्वारः यगणाः कस्मिन् छन्दसि भवन्ति?
Answer: प्रत्येक चरण में चार यगण **भुजङ्गप्रयातम्** छन्द में होते हैं। यह छन्द अपनी द्रुत गति और लय के लिए जाना जाता है।
In simple words: भुजङ्गप्रयातम् छन्द में हर लाइन में चार यगण होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षणों में गणों की संख्या और उनका क्रम हमेशा याद रखें।
Question 14. वर्णः कः कथ्यते?
Answer: 'वृणोति वाङ्गयमिति वर्ण:' अर्थात् जो वाणी को ढकता है, उसे वर्ण कहते हैं। यही वर्ण क्षरणरहित होने के कारण 'अक्षर' भी कहलाता है। वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है।
In simple words: जो वाणी को व्यक्त करे, उसे वर्ण कहते हैं, इसे अक्षर भी कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: वर्ण और अक्षर की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि ये छन्दशास्त्र की मूलभूत अवधारणाएं हैं।
Question 15. हरिणी छन्दसः लक्षणं लिख्यताम्।
Answer: हरिणी छन्द का लक्षण है: "नसमरसलागः षड्वेदैर्हरिणी मता।" इसका अर्थ है कि इस छन्द में नगण, सगण, मगण, रगण, सगण, लघु और गुरु होते हैं, और यति 6 और 4 तथा 7 अक्षरों पर होती है। यह एक 17 अक्षरों का छन्द है।
In simple words: हरिणी छन्द में नगण, सगण, मगण, रगण, सगण, लघु, गुरु होते हैं और 6, 4, 7 अक्षरों पर रुकना होता है।
🎯 Exam Tip: हरिणी छन्द के लक्षण को गणों के क्रम और यति स्थानों के साथ याद करें।
Question 16. शार्दूलविक्रीडितम् छन्दसि कति वर्णान्ते यतिः वर्तते?
Answer: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द में द्वादश (12) वर्णों के अंत में और सप्त (7) वर्णों के अंत में यति होती है। यह छन्द कुल 19 वर्णों का होता है।
In simple words: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द में 12वें और 7वें अक्षर पर रुकना होता है।
🎯 Exam Tip: शार्दूलविक्रीडितम् छन्द की यति को 'सूर्याश्वैर्यदिमः' सूत्र से भी याद किया जा सकता है, जहाँ सूर्य 12 और अश्व 7 का प्रतीक है।
Question 17. मन्दाक्रान्ता छन्दसि कति वर्णाः भवन्ति?
Answer: मन्दाक्रान्ता छन्द में सत्रह (17) वर्ण होते हैं। यह एक दीर्घ और गंभीर छन्द है, जो अपनी धीमी गति के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: मन्दाक्रान्ता छन्द में कुल 17 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: मन्दाक्रान्ता छन्द के अक्षर और गणों का क्रम 'मभनततगग' याद रखें, साथ ही उसकी यति 4, 6, 7 पर होती है।
Question 18. कस्मिन् छन्दसि अन्ते गुरुद्वयं भवेत्?
Answer: **वसन्ततिलका** छन्द में अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं। यह इस छन्द की एक विशिष्ट पहचान है।
In simple words: वसन्ततिलका छन्द के आखिर में दो गुरु अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: वसन्ततिलका छन्द के लक्षण 'तभजा जगौ गः' में 'गौ गः' (दो गुरु) अंत में आते हैं।
Question 19. 'वसन्ततिलका तभजा जगौ गः' इत्यस्यार्थः स्पष्टीक्रियताम्।
Answer: इसका अर्थ है कि जिस छन्द के प्रत्येक चरण में क्रम से तगण, भगण, जगण, फिर से जगण और अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं, वह चौदह वर्णों वाला छन्द 'वसन्ततिलका' कहलाता है। यह छन्द अपने मधुर प्रवाह और गेयता के लिए संस्कृत काव्य में लोकप्रिय है।
In simple words: वसन्ततिलका छन्द में तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु होते हैं, और इसमें 14 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षणों को उनके गण-क्रम और कुल अक्षर संख्या के साथ पूर्ण रूप से याद रखें।
Question 21. 'मन्दाक्रान्ताम्बुधिरसनगै भनौ तौ गयुग्मम्' इत्यस्य अर्थः संस्कृते लेखनीयः।
Answer: यस्य छन्दसः प्रतिचरणं क्रमशः मगणः भगणः नगणः द्वौ तगणौ, अन्ते च गुरुद्वयं भवेत्, तच्छन्दः मन्दाक्रान्ता नाम। अस्मिन् छन्दसि अम्बुधिभिः = चतुर्भिः वर्णैः (चतुर्वर्णान्ते), रसैः = षड्वर्णेः (षड्वर्णान्ते), नगैः = सप्तवर्णैः (सप्तवर्णान्ते) यतिः = विरामो भवति। यह लक्षण मन्दाक्रान्ता छन्द के गण-विन्यास और यति-स्थानों को स्पष्ट रूप से बताता है।
In simple words: मन्दाक्रान्ता छन्द में मगण, भगण, नगण, दो तगण और अंत में दो गुरु होते हैं। इसमें 4, 6 और 7 अक्षरों पर विराम होता है।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षणों को संस्कृत में याद करने का प्रयास करें, क्योंकि यह छन्दशास्त्र को गहराई से समझने में मदद करता है।
Question 22. कः गणः आदिगुरुः भवति?
Answer: **भगणः** आदिगुरु होता है, अर्थात् उसके प्रथम वर्ण में गुरु मात्रा होती है। भगण का स्वरूप (S II) होता है, जिसमें पहला गुरु और बाकी दो लघु होते हैं।
In simple words: भगण में पहला अक्षर गुरु होता है।
🎯 Exam Tip: गणों के आदि, मध्य, अंत में गुरु या लघु होने के स्वरूपों को ध्यान में रखकर याद करें।
Question 23. 'मध्य-गुरुः' इति नाम्ना कः गणः ख्यातः?
Answer: 'मध्य-गुरुः' नाम से **जगणः** ख्यात है, क्योंकि उसके मध्य वर्ण में गुरु मात्रा होती है। जगण का स्वरूप (ISI) होता है।
In simple words: जगण को 'मध्य-गुरु' कहते हैं क्योंकि इसके बीच का अक्षर गुरु होता है।
🎯 Exam Tip: जगण का स्वरूप (लघु-गुरु-लघु) होता है, जो इसे विशिष्ट पहचान देता है।
Question 24. गण-विधायकं सूत्रं लिखत।
Answer: गण-विधायकं सूत्रम् है: **यमाताराजभानसलगाः**। यह सूत्र संस्कृत छन्दशास्त्र में गणों के गुरु-लघु स्वरूप को पहचानने का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी तरीका है।
In simple words: गणों को बनाने वाला सूत्र 'यमाताराजभानसलगाः' है।
🎯 Exam Tip: इस सूत्र को याद करना छन्दों के सभी गणों के स्वरूप को समझने की कुंजी है।
Question 25. 'गायत्री' इति पदे को गणः अस्ति?
Answer: 'गायत्री' इस पद में **मगणः** गण है। 'गाय' गुरु, 'त्रि' गुरु, 'ई' गुरु, अतः (SSS) स्वरूप बनता है। यह एक वैदिक छन्द है जिसमें मात्राओं का विशेष महत्व होता है।
In simple words: 'गायत्री' शब्द में मगण होता है, क्योंकि इसके सभी अक्षर गुरु हैं।
🎯 Exam Tip: वैदिक छन्दों में वर्णों की संख्या और मात्राओं के साथ-साथ उच्चारण पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
Question 26. अधोलिखितपरिभाषासु रिक्तस्थानपूर्ति कुरुत
(i) उक्ता वसन्ततिलका ............................ जगौ गः।
(ii) रसै रुद्वैश्छिन्ना ............................ शिखरिणी।
(iii) मन्दाक्रान्ताम्बुधिरसनगै ............................ गयुग्मम्।
(iv) सूर्याश्वर्यदिम ............................ शार्दूलविक्रीडितम्।
Answer:
(i) उक्ता वसन्ततिलका **तभजा** जगौ गः।
(ii) रसै रुद्वैश्छिन्ना **यमनसभलागः** शिखरिणी।
(iii) मन्दाक्रान्ताम्बुधिरसनगै **भनौ तौ** गयुग्मम्।
(iv) सूर्याश्वर्यदिम **मः स जः स त् तः गः** शार्दूलविक्रीडितम्।
In simple words: इन रिक्त स्थानों में संबंधित छन्दों के लक्षण सूत्र के आवश्यक पद भरे गए हैं। यह उनके गण-विन्यास को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: छन्दों के लक्षणों को पूर्ण रूप से याद रखें, जिससे रिक्त स्थान भरने जैसे प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सके।
Question 27. उपजाति-वृत्तस्य उदाहरणं लेख्यम्।
Answer: उपजाति-वृत्त का उदाहरण है: येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति। यह श्लोक अज्ञानियों की तुलना पशुओं से करता है, जो पृथ्वी पर बोझ हैं।
In simple words: उपजाति छन्द का उदाहरण वह श्लोक है जिसमें अज्ञानी लोगों को धरती पर बोझ कहा गया है।
🎯 Exam Tip: उपजाति छन्द में इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा छन्दों का मिश्रण होता है, जो इसे पहचानने में सहायता करता है।
Question 28. वंशस्थस्य लक्षणं लेखनीयम्।
Answer: वंशस्थ छन्द का लक्षण है: “जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ।” इसका अर्थ है कि जिस छन्द के प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण और रगण का क्रम होता है, वह वंशस्थ छन्द कहलाता है। यह एक 12 अक्षरों का छन्द है।
In simple words: वंशस्थ छन्द का लक्षण है 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ', मतलब इसमें जगण, तगण, जगण, रगण होते हैं।
🎯 Exam Tip: वंशस्थ छन्द के गण-क्रम को याद रखना इसकी पहचान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 29. वंशस्थस्य उदाहरणं दीयताम्।
Answer: वंशस्थ छन्द का उदाहरण है: भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः नवाम्बुभिः दूरविलम्बिनो घनाः। अनद्धता: समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥ इस श्लोक में फल से लदे वृक्षों और जल से भरे बादलों की नम्रता का वर्णन किया गया है।
In simple words: वंशस्थ छन्द का उदाहरण वह श्लोक है जो फलदार वृक्षों और जल भरे बादलों की नम्रता बताता है।
🎯 Exam Tip: छन्द के उदाहरणों को उनके लक्षणों के साथ बार-बार दोहराएं ताकि वे अच्छी तरह से याद हो जाएं।
Question 30. मालिनीवृत्तस्य लक्षणं लक्षणं लेख्यम्।
Answer: मालिनी वृत्त का लक्षण है: ननमयय-युतेयं मालिनी भोगिलोकैः। इसका अर्थ है कि जिस छन्द के प्रत्येक चरण में नगण, नगण, मगण, यगण और यगण का क्रम होता है, उसे मालिनी छन्द कहते हैं। इसमें 15 वर्ण होते हैं।
In simple words: मालिनी छन्द का लक्षण है कि इसमें नगण, नगण, मगण, यगण, यगण होते हैं और इसमें 15 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द में 8 और 7 अक्षरों पर यति होती है, जो इसके वाचन में सहायता करती है।
Question 31. मालिनीवृत्तस्य उदाहरणं लेख्यम्।
Answer: मालिनी वृत्त का उदाहरण है: अतुलितबलधामं स्वर्णशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। यह श्लोक हनुमान जी के अतुलनीय बल, स्वर्ण पर्वत जैसे शरीर और ज्ञानियों में अग्रणी होने का वर्णन करता है।
In simple words: मालिनी छन्द का उदाहरण हनुमान जी के बल, शरीर और ज्ञान का वर्णन करने वाला श्लोक है।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द का प्रयोग अक्सर देवताओं की स्तुति या किसी विशेष व्यक्ति के गुणों का वर्णन करने में होता है।
Question 33. 'ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकैः' इत्यस्यार्थः स्पष्टीक्रियताम्।
Answer: इसका अर्थ है कि जिस छन्द के सभी पादों में क्रमशः नगण, नगण, मगण, यगण और यगण का क्रम होता है, वह मालिनी नामक वृत्त कहलाता है। इस छन्द में प्रत्येक चरण में आठवें (भोगिभिः) और सातवें (लोकैः) अक्षर पर यति होती है। यह गणों और यति के माध्यम से छन्द की पहचान बताता है।
In simple words: इस सूत्र का मतलब है कि मालिनी छन्द में नगण, नगण, मगण, यगण, यगण होते हैं, और 8वें तथा 7वें अक्षर पर रुकना होता है।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द के लक्षण को याद करते समय उसके गणों का क्रम और यति के स्थान को विशेष रूप से ध्यान में रखें।
Question 34. 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' अत्र किं छन्दः? तल्लक्षणमपि अत्रे घटयत।
Answer: यहाँ **वंशस्थं** छन्द है। इस पंक्ति में क्रमशः जगण, तगण, जगण, रगण गण हैं, और इसमें कुल 12 वर्ण हैं। वंशस्थ छन्द का लक्षण है: 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ।' इसका अर्थ है कि जिस छन्द के प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण और रगण का क्रम होता है, वह वंशस्थ छन्द कहलाता है।
In simple words: इस पंक्ति में वंशस्थ छन्द है। इसका लक्षण है कि इसमें जगण, तगण, जगण, रगण होते हैं और कुल 12 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्द की पहचान के लिए पहले वर्णों की संख्या गिनें, फिर गणों का निर्धारण करें, और अंत में यति स्थान की पुष्टि करें।
Question 35. अधोलिखितेषु छन्दोनिया
(अ) विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय। खलस्य साधोः विपरीतमेतत्। ज्ञानाय दानाय च रक्षणाये ॥
Answer: (अ) इस श्लोक में **उपजातिः वृत्तम्** अस्ति। उपजाति छन्द, इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा छन्दों के मिश्रण से बनता है, जिसमें जगण, तगण, जगण, गुरु-गुरु का क्रम होता है।
In simple words: इस श्लोक में उपजाति छन्द है, जो दो अलग-अलग छन्दों को मिलाकर बनता है।
🎯 Exam Tip: उपजाति छन्द की पहचान के लिए प्रत्येक चरण में इन्द्रवज्रा (तगण-तगण-जगण-गुरु-गुरु) और उपेन्द्रवज्रा (जगण-तगण-जगण-गुरु-गुरु) के लक्षण देखें।
Question 35. (ब) वयमिह-परितुष्टा वल्कलैस्त्वं दुकूलैः सम इह परितोषो निर्विशेषो विशेषः। स तु भवति दरिद्रो यस्य तृष्णा विशाला। मनसि च परितुष्टे कोऽर्थवान् को दरिद्रः॥
Answer: (ब) इस श्लोक में **मालिनी-वृत्तम्** अस्ति। मालिनी छन्द में नगण, नगण, मगण, यगण और यगण गणों का क्रम होता है, और इसमें कुल 15 अक्षर होते हैं।
In simple words: इस श्लोक में मालिनी छन्द है, जिसमें नगण, नगण, मगण, यगण, यगण गण होते हैं।
🎯 Exam Tip: मालिनी छन्द में यति 8वें और 7वें अक्षर पर होती है, जो इसके वाचन में लय प्रदान करती है।
Question 35. (स) अत्र वंशस्थवृत्तम् अस्ति।
Answer: (स) इस श्लोक में **वंशस्थवृत्तम्** अस्ति। वंशस्थ छन्द में जगण, तगण, जगण, रगण गणों का क्रम होता है, और इसमें कुल 12 अक्षर होते हैं।
In simple words: इस श्लोक में वंशस्थ छन्द है, जिसमें जगण, तगण, जगण, रगण गण होते हैं।
🎯 Exam Tip: वंशस्थ छन्द की पहचान उसके 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ' लक्षण से करें।
Question 35. (द) हिन्दवः सोदराः सर्वे। न हिन्दूः पतितो भवेत्॥ मम दीक्षा हि रक्षास्य मम मन्त्रः समानता ॥
Answer: (द) इस श्लोक में **अनुष्टुप् छन्दः** वर्तते। अनुष्टुप् छन्द एक मात्रिक छन्द है जिसमें प्रत्येक चरण में 8 वर्ण होते हैं और यह सबसे सरल तथा सामान्य छन्दों में से एक है।
In simple words: इस श्लोक में अनुष्टुप् छन्द है, जिसमें हर लाइन में 8 अक्षर होते हैं।
🎯 Exam Tip: अनुष्टुप् छन्द के प्रत्येक चरण में 8 वर्ण होते हैं और छठे, सातवें अक्षर पर विशेष नियम लागू होते हैं।
निबन्धात्मक-प्रश्नाः
Question 1. छन्दोलक्षणं प्रतिपाद्य छन्दोभेदाः निरूप्यताम्।
Answer: छन्द की परिभाषा: निश्चित वर्णों या मात्राओं को आधार मानकर रचे गए वाक्य या वाक्य समूह को छन्द कहते हैं। छन्द मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: 1. वर्णिक या वर्णवृत्त: इसमें वर्णों की संख्या पर निर्भर करते हैं, जैसे इन्द्रवज्रा। 2. मात्रिक छन्द या जाति: इसमें मात्राओं की संख्या पर निर्भर करते हैं, जैसे आर्या। इन भेदों के माध्यम से छन्दों को व्यवस्थित रूप से समझा जा सकता है।
In simple words: छन्द वह है जो वर्ण या मात्रा से बनता है। यह दो तरह का होता है: वर्णिक (वर्णों की संख्या पर आधारित) और मात्रिक (मात्राओं की संख्या पर आधारित)।
🎯 Exam Tip: छन्द की परिभाषा, उसके मुख्य भेद और प्रत्येक भेद का एक-एक उदाहरण अवश्य याद रखें।
Question 2. अनुष्टुप् छन्दसः लक्षणोदाहरणे विलिख्य, उदाहरणे लक्षणं घटयत्
Answer: अनुष्टुप् छन्द का लक्षण है कि इसके प्रत्येक चरण में आठ वर्ण होते हैं। प्रत्येक चरण का पांचवां वर्ण लघु, छठा गुरु और सातवां वर्ण पहले व तीसरे चरण में गुरु तथा दूसरे व चौथे चरण में लघु होता है। उदाहरण: 'प्रणामोऽयं मदीयोऽस्तु मुनये पिङ्गलात्मने। यन्मुखाम्भोरुहाज्जातं छन्दःशास्त्रमहार्णवम्। (यह उदाहरण पिङ्गल मुनि को प्रणाम करता है, जिनके मुख से छन्दशास्त्र का महासागर उत्पन्न हुआ।) इस उदाहरण में प्रत्येक चरण में आठ वर्ण हैं और उपरोक्त नियमों का पालन किया गया है।
In simple words: अनुष्टुप् छन्द में हर लाइन में 8 अक्षर होते हैं। पांचवां अक्षर लघु, छठा गुरु होता है। सातवां अक्षर पहले और तीसरे लाइन में गुरु, दूसरे और चौथे लाइन में लघु होता है।
🎯 Exam Tip: अनुष्टुप् छन्द के पांचवें, छठे और सातवें वर्ण के विशिष्ट नियमों को विशेष रूप से याद रखें।
Question 3. उपेन्द्रवज्रा-वृत्तस्य लक्षणम् उदाहणं च विलिख्य, उदाहरणस्य प्रत्येकस्मिन चरणे लक्षणं घटयत।
Answer: उपेन्द्रवज्रा वृत्त का लक्षण है: 'उपेन्द्रवज्रा जतजास्ततो गौ' (जिसके प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण और अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं)। इसमें कुल 11 वर्ण होते हैं। उदाहरण: त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥ इस उदाहरण के प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण और अंत में दो गुरु वर्ण हैं, तथा कुल 11 वर्ण हैं।
In simple words: उपेन्द्रवज्रा छन्द में जगण, तगण, जगण और दो गुरु होते हैं। इसमें कुल 11 अक्षर होते हैं। इसका उदाहरण 'त्वमेव माता...' श्लोक है।
🎯 Exam Tip: उपेन्द्रवज्रा और इन्द्रवज्रा छन्दों के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझें, क्योंकि वे अक्सर भ्रमित करते हैं।
Question 4. वंशस्थवृत्तस्य मालिनीवृत्तस्य च लक्षणोदाहरणं विलिख्य उदाहरणे लक्षणं घटयत्।
Answer:
**वंशस्थ वृत्त:**
* **लक्षण:** 'जतौ तु वंशस्थमुदीरितं जरौ' (जिसके प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण और रगण का क्रम होता है)। इसमें 12 वर्ण होते हैं।
* **उदाहरण:** भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः नवाम्बुभिः दूरविलम्बिनो घनाः। इस उदाहरण में 'भवन्ति' से 'घनाः' तक के वर्णों में जगण-तगण-जगण-रगण का क्रम स्पष्ट है।
**मालिनी वृत्त:**
* **लक्षण:** 'ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकैः' (जिसके प्रत्येक चरण में नगण, नगण, मगण, यगण और यगण का क्रम होता है)। इसमें 15 वर्ण होते हैं।
* **उदाहरण:** अतुलितबलधामं स्वर्णशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। इस उदाहरण में 'अतुलित' से 'गण्यम्' तक के वर्णों में नगण-नगण-मगण-यगण-यगण का क्रम देखा जा सकता है।
ये दोनों छन्द संस्कृत साहित्य में व्यापक रूप से प्रयुक्त होते हैं।
In simple words: वंशस्थ छन्द में जगण, तगण, जगण, रगण होते हैं और 12 अक्षर होते हैं। मालिनी छन्द में नगण, नगण, मगण, यगण, यगण होते हैं और 15 अक्षर होते हैं। दोनों के उदाहरण उनके लक्षणों को सही दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: वंशस्थ और मालिनी जैसे विभिन्न छन्दों के लक्षण और उदाहरणों को अलग-अलग याद करें ताकि भ्रम न हो।
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FAQs
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