RBSE Solutions Class 12 Sanskrit रचनाकार्यम् कथासंयोजनम्

Official RBSE Solutions for Class 12 Sanskrit: रचनाकार्यम् कथासंयोजनम्

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Chapter-wise Solutions for Sanskrit: रचनाकार्यम् कथासंयोजनम्

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प्रश्नः-प्रदत्तरूपरेखया कथासंयोजनं करणीयम्।

 

Question 1. (1) वृद्धः व्याघ्रः ................. जाले बद्धः ................. न मुक्तः ................. मूषकः ................. मोचयितु प्रयासः ................. अट्टहासम् ................. क्षुदः जीवः ................. जालकर्तनं ................. बहिः कृतवान्।
Answer: एक जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। उसने एक खरगोश को जाल में फंसा देखा। खरगोश ने बहुत कोशिश की, पर निकल नहीं पाया। जाल में फँसे खरगोश को देखकर एक चूहा वहाँ आया। उस चूहे ने खरगोश को बचाने की कोशिश की। चूहे का यह काम देखकर दूसरे जानवर हँसने लगे। बाद में उन्हें पता चला कि एक छोटा जीव भी प्रयास कर सकता है। चूहे ने जाल काट दिया और खरगोश को बाहर निकाल दिया। इससे यह सीख मिलती है कि आकार मायने नहीं रखता, बल्कि साहस और प्रयास महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: एक बूढ़ा बाघ जाल में फँस गया था। एक चूहे ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की। दूसरे जानवर चूहे पर हँसे। पर चूहे ने जाल काटकर बाघ को बचा लिया। इससे पता चलता है कि छोटे जीव भी बड़ा काम कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: कहानी को पूरा करते समय, दिए गए बिंदुओं को एक तार्किक और प्रवाहपूर्ण क्रम में जोड़ना महत्वपूर्ण है ताकि एक सुसंगत कथा बन सके।

 

अभ्यास-कार्य

 

Question 2. (2) विशालः वृक्षः ................. खगाः वसन्ति ................. बुभुक्षिताः ................. इतस्ततः भ्रमन्ति ................. तण्डुलकणान् अपश्यन् ................. खादन्ति ................. जालेन बद्धाः .................
Answer: भूखे कबूतर जंगल में इधर-उधर भटक रहे थे। जंगल में एक सुनसान जगह पर कबूतरों ने चावल के दाने देखे। जब वे दाने खा रहे थे, तभी सारे कबूतर जाल में फँस गए। अब क्या करें, यह सोचकर सारे कबूतर जाल के साथ ही अपने एक दोस्त के पास गए। उनका दोस्त एक चूहा था। उसने अपने दाँतों से जाल काट दिया। उसके बाद सारे कबूतर आज़ाद हो गए। सच तो यह है कि सुख हमेशा एकता में ही होता है। यह कहानी दिखाती है कि एकजुट होकर काम करने से बड़ी मुश्किलों से भी निपटा जा सकता है।
In simple words: भूखे कबूतरों ने जंगल में चावल के दाने देखे। दाने खाते ही वे जाल में फँस गए। उन्होंने जाल के साथ ही अपने चूहे दोस्त के पास जाकर मदद माँगी। चूहे ने जाल काट दिया और कबूतर आज़ाद हो गए। इस कहानी से हमें एकता की शक्ति पता चलती है।

🎯 Exam Tip: जब कहानी की रूपरेखा दी गई हो, तो उसमें एकता, धैर्य या चतुराई जैसे नैतिक मूल्यों को शामिल करने का प्रयास करें, क्योंकि ऐसी कहानियाँ अक्सर एक सीख देती हैं।

 

Question 3. (3) नरः सरोवरतटे अभ्रमतू. ................. चिन्तने रतः ................. वानराणां शब्दैः तस्य ध्यानभङ्गः अभवत् ................. वानराः नातिदूरे ................. धावितुम् आरभत् ................. वानराः अपि ................. अनुधावितवन्तः ................. मा धाव, भयं त्यक्त्वा ................. स्थिरः भव ................. वृद्धजनस्य ................. उच्चस्वर ................. तत्रैव स्थितवन्तः ................. वानरसमूहः पलायितः ................. ज्ञानचक्षुषी ................. उन्मीलिते ................. आपयः मुक्तिः दृढ़सङ्कल्पेन, ................. न ताभ्यः ................. एषः आसीत् स्वामी .................
Answer: कोई व्यक्ति तालाब के किनारे घूम रहा था। वह सोच-विचार में डूबा हुआ था। अचानक बंदरों की आवाज़ से उसका ध्यान टूट गया। बंदर ज़्यादा दूर नहीं थे। डरकर वह व्यक्ति भागने लगा। उसके बाद बंदर भी उसके पीछे भागने लगे। यह देखकर एक बूढ़े व्यक्ति ने ऊँची आवाज़ में कहा- 'भागो मत, डर छोड़ो और स्थिर खड़े हो जाओ'। तब उस बूढ़े व्यक्ति की ऊँची आवाज़ सुनकर वे सभी वहीं रुक गए। उस व्यक्ति के डरने से बंदरों का झुंड वहाँ से भाग गया। इससे उस व्यक्ति की समझ खुल गई कि मुसीबतों से छुटकारा दृढ़ निश्चय से मिलता है, न कि भागने से। क्या आप जानते हैं कि यह कौन थे? यह स्वामी विवेकानन्द थे। यह घटना स्वामी विवेकानंद के जीवन का एक प्रसिद्ध प्रसंग है जो हमें साहस और आत्म-विश्वास का महत्व सिखाता है।
In simple words: एक आदमी तालाब किनारे सोच रहा था। बंदरों की आवाज़ सुनकर उसका ध्यान टूटा और वह डरकर भागने लगा। बंदर भी उसके पीछे भागे। एक बूढ़े आदमी ने उसे रुकने और निडर होने को कहा। जैसे ही वह आदमी रुका, बंदर भाग गए। इससे उसे समझ आया कि डर से भागने के बजाय हिम्मत से खड़े रहना चाहिए। वह आदमी स्वामी विवेकानंद थे।

🎯 Exam Tip: कहानी के अंत में यदि कोई प्रसिद्ध व्यक्ति या शिक्षा का ज़िक्र हो, तो उसे सटीक रूप से प्रस्तुत करें और कहानी का नैतिक सार स्पष्ट करें।

 

प्रश्न-प्रदत्तरूपरेखया कथासंयोजनं करणीयम्

 

Question 1. (1) वृद्धा। ................. पुत्राः। ज्येष्ठपुत्रं सा युद्धं .................। सः ................. मृतः। द्वितीय, तृतीयं च प्रेषयति। ................. मृतौ। ................. रोदिति। वृद्धा कथयति चतुर्थः ................. नास्ति खलु इति रोदिमि।
Answer: एक बूढ़ी महिला थी। उसके तीन बेटे थे। उसने अपने सबसे बड़े बेटे को युद्ध में भेजा। वह युद्ध में मर गया। उसने फिर दूसरे और तीसरे बेटे को भी युद्ध में भेजा। वे दोनों बेटे भी मर गए। वह रोने लगी। बूढ़ी महिला ने कहा कि मेरा चौथा बेटा तो है ही नहीं, इसलिए मैं रो रही हूँ। यह कहानी युद्ध के विनाशकारी परिणामों और माताओं के असीम दुख को दर्शाती है।
In simple words: एक बूढ़ी माँ के तीन बेटे थे। उसने तीनों को युद्ध में भेजा, और तीनों ही मारे गए। वह बहुत रो रही थी और कहने लगी, 'मेरा चौथा बेटा तो है ही नहीं, मैं तो उसी के लिए रो रही हूँ'।

🎯 Exam Tip: युद्ध या दुःख से संबंधित कहानियों में भावनाओं को सरल और प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का प्रयास करें, जिससे पाठक कहानी के संदेश को आसानी से समझ सकें।

 

Question 2. (2) गुरुकुलम्। गुरुः ................। शिष्यः भवितुम् ................ परीक्षा। देवः कुत्र
Answer: स्रोत में इस प्रश्न का उत्तर प्रदान नहीं किया गया है।
In simple words: इस कहानी का उत्तर मूल पाठ में नहीं दिया गया है।

🎯 Exam Tip: कहानी पूरी करने वाले प्रश्नों में, यदि कोई भाग छोड़ दिया गया है, तो उसे अपनी कल्पना से पूरा करना चाहिए या उपलब्ध जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त कहानी लिखनी चाहिए।

 

Question 3. (3) एकदा ................. आहारार्थी कश्चित् ................. ग्रामं प्रविष्टः। तत्रत्याः ................. जम्बुकदर्शनेन ................. जातरोषाः तं ................. प्रत्यधावन्। सोऽपि ................. प्राणरक्षणायै ................. रजकगृहं प्रविष्टः तत्र स्थापिते नीलीभाण्डे च पतितः। अनन्तरं नीलवर्णमनोहरं स्वशरीरं मन्यमानः ................. मुदितमनाः शनैः बहिः। ................. निष्क्रान्तः विचित्रवर्णं तं अपूर्वसत्त्वम् ................. विलोक्य कुक्कुराः अपि भूयात् दूरं पलायिताः।
Answer: एक शाम को, एक भूखा सियार एक गाँव में घुस गया। वहाँ के कुत्तों ने सियार को देखकर गुस्से में उसका पीछा किया। अपनी जान बचाने के लिए वह सियार एक धोबी के घर में घुस गया और वहाँ रखे नीले रंग के एक बड़े बर्तन में गिर गया। उसके बाद, अपने शरीर को नीले रंग का और सुंदर मानकर वह खुशी-खुशी धीरे-धीरे बाहर निकला। उस अजीब रंग के अनोखे जीव को देखकर कुत्ते भी डरकर बहुत दूर भाग गए। यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी दिखावा लोगों को भ्रमित कर सकता है।
In simple words: एक भूखा सियार गाँव में आया और कुत्तों से बचने के लिए धोबी के नीले रंग में गिर गया। उसका शरीर नीला हो गया। उसे देखकर कुत्ते डरकर भाग गए। सियार ने अपने नए रंग से खुद को अनोखा मान लिया।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी पात्र के रूप-परिवर्तन या भेष बदलने का प्रसंग हो, तो उसके परिणामों और उससे मिलने वाली सीख पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 4. (4) कस्मिंश्चिद् वने" वृक्षात् ................. एक सिंहः निद्रया ................. आसीत्। तस्य सिंहस्य उपरि कश्चित् मूषकः ................. सिंहः प्रबुद्धोऽभवत्। मूषकं च ................. प्रावर्तत तदा मूषको न्यवेदयत्-” भवान् ................. अस्ति। मां दीनं प्रति ................. आपतितः। मूषकः प्रत्युपकारेण ................. जालम् ................. सिंहो मूषकं ................. प्रशंसन् गतः। सत्यमिदं यत् कस्यापि कृते कृतः ................. उपकारो निरर्थको न भवति।
Answer: एक जंगल में एक पेड़ के नीचे एक शेर सो रहा था। उस सोते हुए शेर के ऊपर एक चूहा नाचने लगा। शेर जाग गया और चूहे को मारने लगा। तब चूहे ने विनती की- 'आप जंगल के राजा हैं, मुझ गरीब पर दया करो'। शेर ने उसे छोड़ दिया। एक बार वही शेर एक जाल में फँस गया। चूहे ने एहसान चुकाने के लिए जाल काट दिया और शेर चूहे की प्रशंसा करते हुए चला गया। यह सच है कि किसी पर किया गया उपकार कभी बेकार नहीं जाता। यह कहानी हमें सिखाती है कि दयालुता का फल हमेशा अच्छा होता है, भले ही वह छोटे से छोटे जीव के प्रति क्यों न हो।
In simple words: एक शेर पेड़ के नीचे सो रहा था, चूहा उस पर नाचने लगा। शेर जागा और चूहे को मारना चाहा, पर चूहे ने दया की भीख माँगी। शेर ने उसे छोड़ दिया। बाद में वही शेर जाल में फँस गया। चूहे ने जाल काटकर शेर को बचाया। इस तरह, चूहे का उपकार शेर के काम आया।

🎯 Exam Tip: परोपकार और कृतज्ञता पर आधारित कहानियों में, छोटे और बड़े पात्रों के बीच के संबंध और उनके आपसी सहयोग को स्पष्ट रूप से उजागर करें।

 

Question 5. (5) कस्मिंश्चित् स्थाने ................. प्रतिवसति स्म। तस्य पाश्र्वे एकः दुर्बलः गर्दभः ................. सः रजकः कुतश्चित् ................. व्याघ्रचर्म ................. अचिन्तयत्। अज्ञेन चर्मणा प्रच्छाद्य रासभं ................. यवक्षेत्रेषु प्रेषयानि। क्षेत्रपालश्च तं ................. व्याघ्रं मत्वा क्षेत्रात् न ................. एवं च कृते सः गर्दभः बहुकालं यावत् करोति स्म। एकदा सः गर्दभः गर्दभीशब्दं श्रुत्वा स्वयमपि ................. आरब्धः। अथ ते क्षेत्रपालाः तं ................. ज्ञात्वा लगुडग्रहाः तं हृतवन्तः।
Answer: एक जगह पर एक धोबी रहता था। उसके पास एक कमज़ोर गधा था। उस धोबी ने कहीं से एक बाघ की खाल लाकर सोचा, 'मैं इस खाल से गधे को ढँक कर रात में जौ के खेतों में भेजूँगा'। खेतों के रखवाले उसे बाघ समझकर खेत से नहीं निकालेंगे। ऐसा करने पर वह गधा लंबे समय तक जौ खाता रहा। एक बार उस गधे ने एक गधी की आवाज़ सुनी और खुद ही आवाज़ निकालना शुरू कर दिया। तब खेतों के रखवालों ने उसे गधा जानकर लाठियों से पीट दिया। यह कहानी दिखाती है कि अपनी असली पहचान को ज़्यादा देर तक नहीं छुपाया जा सकता।
In simple words: एक धोबी के पास एक गधा था। उसने गधे को बाघ की खाल पहनाकर खेतों में जौ खाने भेजा। रखवाले उसे बाघ समझकर कुछ नहीं कहते थे। एक दिन गधे ने गधी की आवाज़ सुनकर खुद भी आवाज़ निकाली। रखवालों को पता चला कि यह गधा है, तो उन्होंने उसे लाठियों से पीटा।

🎯 Exam Tip: यह कहानी 'छद्मवेश' के बारे में है। ऐसी कहानियों में पात्र के असली स्वभाव और उसके दिखावे के बीच के अंतर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. अत्रान्तरे तृतीयः वञ्चकोऽपि आगत्य अवदत्-भो ब्राह्मण! कुक्कुर कृत्वा न गच्छ। एवं ब्राह्मणः छागं तत्रैव अगच्छत्। वञ्चकाः छागं अनयन्।
Answer: एक नगर में मित्रशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। एक बार किसी ब्राह्मण ने उसे एक बकरी दी। जब वह बकरी को कंधे पर रखकर जा रहा था, तब उसे तीन ठग मिले। उनमें से एक ठग सामने आया और बोला- 'हे ब्राह्मण! इस कुत्ते को कंधे पर रखकर कहाँ जा रहे हो?' वह क्रोधित होकर बोला- 'क्या तुम अंधे हो कि बकरी को कुत्ता कह रहे हो?' तब दूसरा ठग आया और बोला- 'मुझे लगता है कि तुम्हें यह कुत्ता प्यारा है, पर फिर भी इसे कंधे पर नहीं ले जाना चाहिए'। इसी बीच तीसरा ठग भी आया और बोला- 'हे ब्राह्मण! कुत्ते को कंधे पर लेकर मत जाओ'। इस तरह ब्राह्मण ने बकरी को वहीं छोड़ दिया और चला गया। ठग बकरी को ले गए। यह कहानी दिखाती है कि कैसे कुछ लोग धोखे से दूसरों को गुमराह कर अपना काम निकलवा लेते हैं।
In simple words: एक ब्राह्मण को एक बकरी मिली। रास्ते में तीन ठगों ने उसे कुत्ता कहकर भ्रमित कर दिया। ब्राह्मण ने सोचा शायद यह सच में कुत्ता है और वह उसे वहीं छोड़कर चला गया। ठग बकरी ले गए।

🎯 Exam Tip: धोखाधड़ी और विश्वासघात से संबंधित कहानियों में, ठगों की चाल और पात्र की मूर्खता या सरलता को उजागर करें, ताकि कहानी का नैतिक संदेश स्पष्ट हो सके।

 

Question 7. (7) कस्मिश्चितु ................. हरिदत्तः नाम ब्राह्मणः प्रतिवसति स्म। एकदा सः ................. क्षेत्रे वृक्षस्य छायायाम्। ................. तदा सः समीपे सर्प ................. अचिन्तयत्-एषः ................. मया कदापि न पूजितः अतः एव मम ................. निष्फलमभवत्। अद्यैव इमं। एवं चिन्तयित्वा सः दु......... ................. तत्र च स्थापयित्वा .................। अग्रिम ................. प्रातः तत्रागत्य सः तस्मिन पात्रे ................. एकमपश्यत्। एवं सः ................. प्रतिदिनं तथैव दुग्धं दत्त्वा दीनारं ................. अलभत।
Answer: एक नगर में हरिदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह खेत में एक पेड़ की छाया में बैठा था। तब उसने पास में एक साँप देखा और सोचा- 'यह खेत का रक्षक है, मैंने इसकी कभी पूजा नहीं की, इसलिए मेरा खेती का काम सफल नहीं हुआ'। 'आज ही मैं इसकी पूजा करूँगा'। ऐसा सोचकर वह दूध लाकर वहाँ रखकर चला गया। अगले दिन सुबह वहाँ आकर उसने उस पात्र में एक दीनार देखा। इस तरह वह रोज़ दूध देता रहा और उसे एक दीनार मिलता रहा। यह कहानी दिखाती है कि जब हम दूसरों का सम्मान करते हैं, तो बदले में हमें भी कुछ अच्छा मिलता है।
In simple words: एक ब्राह्मण हरिदत्त खेत में बैठा था। उसने एक साँप देखा और सोचा कि यह खेत का रक्षक है, जिसकी पूजा न करने से मेरा काम नहीं बन रहा। उसने साँप के लिए दूध रखा। अगले दिन उसे वहाँ एक सोने का सिक्का मिला। इस तरह वह रोज़ दूध रखता और उसे रोज़ एक सिक्का मिलता।

🎯 Exam Tip: भाग्य और कृतज्ञता पर आधारित कहानियों में, पात्रों के अच्छे कर्मों और उन्हें मिलने वाले सकारात्मक परिणामों को जोड़कर लिखें।

 

Question 8. (8) ऐकदा मुनि काकेन ................. एकं दुर्बलं मूषक-शावकमपश्यत्। दयालुः ................. तं मूषकं नीवार कणैः ................. सम्वर्धयति स्म। मुनिना ................. मूषकः प्रसन्नः आसीत्। एकदा कोऽपि विडालः तं मूषकं ................. ऐच्छत्। तदा मुनि तं मूषकं विडालम् अकरोत्। एकदा सः विडालः कुक्कुरात् भीतः आसीत्। मुनि तद् भीतं तं विडालं कुक्कुरमकरोत्। अन्ततः एकः सिंह कुक्कुरं प्रत्यवधावत्। मुनिः तं कुक्कुरं सिंहा भीतं दृष्ट्वा तं कुक्करं व्याघ्रं कृतवान्। सिंहः भूत्वा सः मूषकः मुनिं एवं खादितुं प्रयतते स्म। तदा मुनिः उवाच-'पुनर्मूषको भव'। मुनी इति उक्तवति एव सः सिंहः पुनर्मूषकः जातः।
Answer: एक बार एक मुनि ने एक कमज़ोर चूहे के बच्चे को देखा जिसे कौआ ले जा रहा था। दयालु मुनि ने उस चूहे को धान के दानों से पाला। मुनि द्वारा पाला गया चूहा बहुत खुश था। एक बार एक बिल्ली उस चूहे को खाना चाहती थी। तब मुनि ने उस चूहे को बिल्ली बना दिया। एक बार वह बिल्ली एक कुत्ते से डर गई। मुनि ने उस डरी हुई बिल्ली को कुत्ता बना दिया। अंत में एक शेर कुत्ते के पीछे भागा। मुनि ने शेर से डरे हुए उस कुत्ते को बाघ बना दिया। बाघ बनने के बाद भी वह चूहा मुनि को ही खाने की कोशिश करने लगा। तब मुनि ने कहा- 'फिर से चूहा बन जाओ'। जैसे ही मुनि ने ऐसा कहा, वह बाघ फिर से चूहा बन गया। यह कहानी दिखाती है कि भले ही कोई अपना रूप बदल ले, उसका मूल स्वभाव नहीं बदलता।
In simple words: एक मुनि ने एक चूहे को पाला और उसकी जान बचाई। चूहा बिल्ली, फिर कुत्ता, फिर बाघ बन गया। लेकिन हर बार वह डरता रहा या मुनि को ही खाना चाहा। आखिर में मुनि ने उसे फिर से चूहा बना दिया।

🎯 Exam Tip: इस कहानी में पात्रों के रूप-परिवर्तन के बाद भी उनके मूल स्वभाव के न बदलने के सार को स्पष्ट करें। परिवर्तन की सीमा को दर्शाने के लिए शब्दों का चयन सावधानी से करें।

 

Question 9. विहस्याकथयत्-एततु त्वं कदापि न शक्नोषि। चमरपुच्छा अकथयत्-अहं दृढ़तया सततं ............ भविष्यामि इति। ततः भगवान् बुद्धः एकं महान्तं ............ अशिक्षत्।
Answer: भगवान बुद्ध सत्य की खोज में निकले। इस खोज में इतना समय बीत गया कि उन्होंने घर लौटने का निश्चय किया। लेकिन जैसे ही वे लौटने को तैयार हुए, उन्होंने तालाब के किनारे एक गिलहरी को देखा। वह अपनी पूँछ को बार-बार पानी में डुबोकर ज़मीन पर तेज़ी से हिला रही थी। भगवान बुद्ध ने कहा- 'अरे, छोटी गिलहरी, तुम क्या कर रही हो?' गिलहरी ने कहा- 'मैं इस तालाब को पानी से खाली कर रही हूँ'। भगवान बुद्ध हँसे और बोले- 'तुम यह कभी नहीं कर सकती'। गिलहरी ने कहा- 'मैं दृढ़ता से लगातार प्रयास करती रहूँगी'। तब भगवान बुद्ध को एक बड़ा पाठ सीखने को मिला। यह कहानी हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से असंभव लगने वाले लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
In simple words: सत्य की खोज में निकले भगवान बुद्ध ने एक गिलहरी को तालाब का पानी अपनी पूँछ से खाली करते देखा। बुद्ध ने पूछा कि वह क्या कर रही है, तो गिलहरी ने कहा कि वह तालाब खाली कर रही है। बुद्ध हँसे और कहा कि यह असंभव है। पर गिलहरी ने कहा कि वह लगातार कोशिश करेगी। इससे बुद्ध को लगन का महत्व सीखने को मिला।

🎯 Exam Tip: दृढ़ संकल्प और अटूट प्रयास की कहानियों में, छोटे पात्र द्वारा बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के असंभव लगने वाले प्रयास को स्पष्ट रूप से लिखें और उससे मिलने वाली सीख को उभारें।

 

Question 10. (10) कस्मिश्चिद् ग्रामे धर्मदत्तो नाम ................. प्रतिवसति स्म। एकदा स पालितं ................. अन्यं ग्रामं अगच्छत्। मार्गे सः सरमेकं ................. दध्योदनपात्रमेकस्य वृक्षस्य मूले ................. आगच्छत्। दुष्टः वानरः तत्र स्थापितं दध्योदनं ................. दूरं ................. उपाविशत्। ब्राह्मणः ................. परं दण्डेन परान् योजयति।
Answer: एक गाँव में धर्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह अपने पाले हुए बंदर के साथ किसी काम से दूसरे गाँव जा रहा था। रास्ते में उसने एक तालाब देखा और आराम करने के लिए वहीं रुक गया। उसने अपने दही-चावल का बर्तन एक पेड़ के नीचे रखा और हाथ धोने के लिए तालाब के किनारे गया। शरारती बंदर ने वहाँ रखा दही-चावल खा लिया। और अपने हाथों से दही पास खड़ी एक बकरी के मुँह पर लगाकर दूर जाकर बैठ गया। ब्राह्मण ने बकरी को देखा और उसे लाठी से मारा। दुष्ट ने अपराध खुद किया, पर सज़ा दूसरों को मिली। यह कहानी बताती है कि कभी-कभी हमें जल्दीबाज़ी में निर्णय लेने से पहले सच्चाई का पता लगाना चाहिए।
In simple words: एक ब्राह्मण अपने बंदर के साथ दूसरे गाँव जा रहा था। रास्ते में उसने आराम करने के लिए दही-चावल का बर्तन पेड़ के नीचे रखा और हाथ धोने गया। बंदर ने दही-चावल खाकर बकरी के मुँह पर लगा दिया। ब्राह्मण ने बकरी को दोषी समझकर मारा। इस तरह, अपराधी कोई और था, पर सज़ा किसी और को मिली।

🎯 Exam Tip: न्याय और अन्याय पर आधारित कहानियों में, गलतफ़हमी और उसके परिणामों पर जोर दें। हमेशा निष्कर्ष में यह बताएं कि अपराधी कौन था और सज़ा किसे मिली।

 

Question 11. (11) कस्मिश्चित् वने कश्चित् लोमशः ................. पीडित इतस्ततः ................. स्म। एकस्मिन् ................. स्थले तेन मधुराभिः ................. परिपूरिता लता दृष्टा। लतायां ................. उच्चाः आसन्। उत्कृर्दनेनापि लोमशः ................. किमपि नसः अगच्छत् .................। अन्ते सः अगच्छत् अकथयत् च लतायां द्राक्षाफलानि अम्लानि। उक्तं च चतुरः चातुर्यं न त्यजति।
Answer: एक जंगल में एक लोमड़ी भूख से परेशान होकर इधर-उधर भटक रही थी। एक जगह पर उसने मीठे अंगूरों से लदी एक बेल देखी। बेल पर अंगूर बहुत ऊँचे थे। कूदने के बाद भी लोमड़ी को कुछ नहीं मिला। आखिर में वह चली गई और कहा कि 'अंगूर खट्टे हैं', उसने अपनी हार नहीं मानी। यह कहानी 'अंगूर खट्टे हैं' वाली प्रसिद्ध लोकोक्ति का स्रोत है, जो यह दर्शाती है कि जब हम कुछ प्राप्त नहीं कर पाते, तो उसे बुरा कह देते हैं।
In simple words: एक भूखी लोमड़ी को ऊँचे पेड़ पर मीठे अंगूर दिखे। उसने कूद-कूदकर पाने की कोशिश की, पर नहीं मिले। आखिर में वह बोली, 'अंगूर तो खट्टे हैं' और चली गई।

🎯 Exam Tip: इस प्रसिद्ध कहानी में पात्र के व्यवहार और उसकी अंतिम प्रतिक्रिया पर ध्यान दें, जो 'अंगूर खट्टे हैं' लोकोक्ति के अर्थ को समझाती है।

 

Question 12. (12) कस्मिन् देवालये ताम्रचूड नाम ................. वसति स्म। सः ................. देशाटनं कृत्वा जीविका निर्वाहं करोति ................. स्म। एकदा भिक्षां ................. संस्थाप्य नागदन्ते अवलम्ब्य सः .................। एकः मूषकः उत्कृत्य उत्कृत्य .................
Answer: एक मंदिर में ताम्रचूड नाम का एक संन्यासी रहता था। वह यात्रा करके अपना जीवन यापन करता था। एक दिन उसने अपनी भिक्षा एक खूँटी पर टाँग दी और सो गया। एक चूहा बार-बार उछलकर उसका भोजन खा जाता था। संन्यासी ने अपनी चारपाई के पास एक डंडा रखा। जब चूहा आता, तो वह डंडे से उसे मारता। चूहा डर गया। एक दिन चूहे ने ज़मीन में खोदा। उसे वहाँ गड़ा धन मिला, जिसे लेकर वह सो गया। तब चूहा खोद नहीं पा रहा था। संन्यासी चूहे का धन चुराकर प्रसन्न हो गया। यह कहानी दिखाती है कि लालच कभी-कभी अवांछित परिणाम दे सकता है और धोखेबाज लोग दूसरों के परिश्रम का लाभ उठा सकते हैं।
In simple words: एक संन्यासी मंदिर में रहता था। एक चूहा उसका भोजन खा जाता था। संन्यासी ने चूहे को डंडे से डराया। एक दिन चूहे को ज़मीन में धन मिला, जिसे संन्यासी ने चुरा लिया और खुश हो गया।

🎯 Exam Tip: यह कहानी एक भिक्षापात्र और चूहे के बीच के संबंध को दिखाती है। कहानी को पूरा करते समय, चूहे के व्यवहार और संन्यासी की प्रतिक्रिया को तार्किक रूप से जोड़ें।

 

Question 13. (13) एकदा एकः व्याघ्रः – बद्धः - न मुक्तः - मूषकः - मोचयितुं - क्षुद्रजीवः – जालकर्तनं – बहिः कृतवान्।
Answer: एक जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। एक बार जंगल में घूमते हुए वह बाघ एक शिकारी द्वारा फैलाए गए जाल में फँस गया। उसे देखकर डर के मारे किसी ने उसे जाल से नहीं छोड़ा। जाल में फँसे बाघ को देखकर एक चूहा वहाँ आया और उसने बाघ को छुड़ाने की कोशिश की। उस चूहे के प्रयास को देखकर दूसरे जानवर हँसने लगे, लेकिन तभी उन्हें पता चला कि उस छोटे जीव चूहे ने जाल काटकर बाघ को जाल से बाहर निकाल दिया। सच तो यह है कि ज़रूरत पड़ने पर एक छोटा जीव भी बड़ा परोपकार कर सकता है। यह कहानी 'छोटे की शक्ति' को दर्शाती है और सिखाती है कि किसी को भी उसके आकार से कम नहीं आँकना चाहिए।
In simple words: एक बूढ़ा बाघ जाल में फँस गया। किसी ने उसे नहीं बचाया। एक चूहा आया और जाल काटकर बाघ को आज़ाद कर दिया। दूसरे जानवर पहले हँसे, पर बाद में उन्हें समझ आया कि छोटा जीव भी बड़ा काम कर सकता है।

🎯 Exam Tip: इस कहानी में छोटे जीव के बड़े काम करने के महत्व को स्पष्ट करें, खासकर जब सभी बड़े जानवर असहाय हों। परोपकार के संदेश को कहानी के अंत में उभारें।

 

Question 14. (14) हरियाणागरि यमुनानगरमण्डले एकः (i) ................. अस्ति। तस्मिन् गृहे सर्वे संस्कृतेन (ii) ................. कुर्वन्ति। तत्र (iii) ................. संस्कृतम् अवबोद्धं समर्थाः सन्ति। तस्मिन् गृहे अभिमन्युः नाम एकः (iv) .................। सोऽपि ................. संस्कृतं वदति। एकदा तत्र (v) ................. “संस्कृतआगतवान्। तेन सह अभिमन्युः संस्कृतेन सम्भाषणं कृतवान्। तस्य ................. युवकस्य (G) ................. दृष्ट्रा (vii) ................. तस्मै शतं रुप्यकाणि दत्तवान्। तस्मात् दिनात् तस्य मनसि ................. संस्कृतं प्रति (viii) ................. अभिरुचिः समुत्पन्ना। सः प्रतिदिनं (ix) ................. श्लोकान् पठित्वापठित्वा ................. सर्वान् (x) ................. अस्मरत्।
Answer:
(i) संस्कृतपरिवारः
(ii) सम्भाषणं
(iii) पश्वोऽपि
(iv) युवकः
(v) एकः
(vi) प्रतिभां
(vii) प्राध्यापकः
(viii) महती
(ix) गीतायाः
(x) श्लोकान्।
इस तरह की कहानियाँ भाषा सीखने के महत्व को दर्शाती हैं, जहाँ अभ्यास और रुचि से हर कोई संस्कृत बोल सकता है।
In simple words: खाली स्थानों को भरने के लिए सही शब्द हैं: (i) संस्कृतपरिवारः, (ii) सम्भाषणं, (iii) पश्वोऽपि, (iv) युवकः, (v) एकः, (vi) प्रतिभां, (vii) प्राध्यापकः, (viii) महती, (ix) गीतायाः, (x) श्लोकान्।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरने वाले प्रश्नों में, कहानी के संदर्भ को समझें और व्याकरण की दृष्टि से सही तथा अर्थपूर्ण शब्द चुनें। सुनिश्चित करें कि प्रत्येक रिक्त स्थान के लिए सबसे उपयुक्त शब्द ही चुना गया हो।

 

Question 15. (15) निषधदेशे अतीव सुन्दरः सर्वगुणसम्पन्नः राजा (i) ................. आसीत्। एकदा राजा नलः स्वस्य (ii) ................. एकं विशालं सरः अपश्यत्। तत्र (iii) ................. हिरण्यमयं विचित्रं (iv) ................. दृष्ट्वा राजा कुतूहलेन तं ................. स्वपाणिना (v) ................. करपञ्जरस्थितः हंसः स्वस्य दयनीय दशां वर्णयन् (vi) ................. विलापं कृतवान्। ................. राजा हंसस्य विलापं श्रुत्वा (vii) ................. अभवत्। तस्य (viii) ................. अश्रूणि अवहन्। अश्रुसेकं प्राप्य ................. करमध्ये स्थितः सुवर्णहंसः (ix) ................. अलभत। ततः राजा अवदत्-'तव ईदृशम् अपूर्वं रूपं दष्टुम् एव अहं त्वां .................
Answer: स्रोत में इस प्रश्न का उत्तर प्रदान नहीं किया गया है। यह कहानी राजा नल और दमयंती के प्रसिद्ध उपाख्यान का एक हिस्सा है, जहाँ एक हंस उनके प्रेम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: इस कहानी का उत्तर मूल पाठ में नहीं दिया गया है। यह नल और दमयंती की कहानी का एक हिस्सा है, जिसमें हंस उनके प्रेम का संदेशवाहक बनता है।

🎯 Exam Tip: ऐसी प्रसिद्ध कहानियों में, यदि रिक्त स्थान भरने के लिए शब्द उपलब्ध न हों, तो कहानी के मुख्य पात्रों और उनके संबंधों का संक्षिप्त परिचय देना उचित होता है।

 

Question 16. (16) एकदा गुरुः द्रोणाचार्यः स्वस्य सर्वान् (i) ................. धनुर्विद्याम् अशिक्षयत्। सः वृक्षे स्थितं कश्चित् खगं (ii) ................. शिष्यान् अवदत्- अस्य (iii) ................. लक्ष्यं साधयत। गुरोः (iv) ................. प्राप्य ................. सर्वे शिष्याः लक्ष्यं साधितं प्रयत्नम् (v) .................। तदानीं द्रोणाचार्यः तान् अपृच्छत्- यूयं किं (vi) .................? ................. शिष्याः उत्तरं दत्तवन्तः-गुरुदेव! वयं (vii) ................. पश्यामः। इति (viii) ................. श्रुत्वा गुरोः सन्तोषः न ................. अभवत्। तदा सः (ix) ................. आहूय अपृच्छत्-भो अर्जुन! त्वं किं पश्यसि? अर्जुनः (x) ................. " हे गुरो! ................. अहं खगस्य नेत्रं पश्यामि। ................. (xi) .................।" दृष्ट्ा गुरुः द्रोणाचार्यः अतिप्रसन्नः भूत्वा तस्मै आशिष दत्तवान् यत् त्वं श्रेष्ठः (xii) ................. भविष्यसि। अर्जुनः गुरवे अनमत्। अत एव अर्जुनः (xiii) ................. प्रियः शिष्यः अभवत्।
Answer:
(i) शिष्यान्
(ii) दर्शयित्वा
(iii) नेत्रे
(iv) आज्ञां
(v) अकुर्वन्
(vi) पश्यथ
(vii) खगं
(viii) उत्तरं
(ix) अर्जुनम्
(x) अवदत्
(xi) एकाग्रता
(xii) धनुर्धरः
(xiii) द्रोणाचार्यस्य।
यह कहानी अर्जुन के एकाग्रता के प्रसिद्ध उदाहरण को दर्शाती है, जो उसे एक महान धनुर्धर बनाता है।
In simple words: खाली स्थानों को भरने के लिए सही शब्द हैं: (i) शिष्यान्, (ii) दर्शयित्वा, (iii) नेत्रे, (iv) आज्ञां, (v) अकुर्वन्, (vi) पश्यथ, (vii) खगं, (viii) उत्तरं, (ix) अर्जुनम्, (x) अवदत्, (xi) एकाग्रता, (xii) धनुर्धरः, (xiii) द्रोणाचार्यस्य।

🎯 Exam Tip: यह कहानी अर्जुन की एकाग्रता और गुरु द्रोणाचार्य के शिक्षण की महानता को दर्शाती है। रिक्त स्थानों को भरते समय, शिक्षा और शिष्यत्व के संदर्भ में शब्दों का चयन करें।

 

Question 17. (17) कश्चित् (i) ................. एका विडाली अवसत्। सा प्रतिदिनं बहून् मूषकान् (ii) ................. एवं स्वविनाशं दृष्ट्वा ................. (iii) ................. स्वप्राणरक्षार्थं एकां (iv) ................. आयोजितवन्तः। सभायां मूषकाः इमं निर्णयम् (v) ................. यत् यदि विडाल्याः (vi) ................. घण्टिकाबन्धनं भविष्यति तदा तस्याः नादं (vii) ................. वयं स्वबिलं गमिष्यामः। एवं भूत्वा तेषु मूषकेषु एकः (viii) ................. मूषकः किञ्चित् विचारयन् ................. तान् अपृच्छत्-कः तस्य ग्रीवाय (ix) ................. करिष्यति ? तदानीम् एव (x) ................. आगता। तां (xi) ................. दृष्दै व। ................. सर्वे मूषकाः स्वबिलं पलायिताः।
Answer:
(i) ग्रामे
(ii) अभक्षत्
(iii) मूषकाः
(iv) सभाम्
(v) अकुर्वन्
(vi) ग्रीवायां
(vii) श्रुत्वा
(viii) वृद्धः
(ix) घण्टिकाबन्धनं
(x) विडाली
(xi) दृष्दै व।
यह कहानी 'बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधेगा' लोकोक्ति का मूल है, जो एक समस्या का सैद्धांतिक समाधान होने के बावजूद उसके व्यावहारिक कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है।
In simple words: खाली स्थानों को भरने के लिए सही शब्द हैं: (i) ग्रामे, (ii) अभक्षत्, (iii) मूषकाः, (iv) सभाम्, (v) अकुर्वन्, (vi) ग्रीवायां, (vii) श्रुत्वा, (viii) वृद्धः, (ix) घण्टिकाबन्धनं, (x) विडाली, (xi) दृष्दै व।

🎯 Exam Tip: इस लोकोक्ति वाली कहानी में, समस्या की पहचान और उसके समाधान के व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें। खाली स्थानों को भरते समय, घटनाक्रम और पात्रों की प्रतिक्रियाओं का ध्यान रखें।

 

Question 18. (18) जीवने ................. अत्यधिकं महत्त्वम् अस्ति। धनेन ................. भवति। विना ................. वयं कथं ................. भोजनम् अपि ................. शक्नुमः? वयं लोभेन अन्धो ................. प्राप्तुम् इच्छामः। ................. साधनानां ................. कुर्मः। तर्हि तेन ................. भविष्यति। तस्य रक्षणे ................. व्यतीतः भवति। तस्करः ................. हरिष्यति। तदा ................. वर्धते। अभिमानं ................. च नाशयति ।।
Answer: जीवन में धन का बहुत ज़्यादा महत्व है। धन के बिना जीवन जीना संभव नहीं है। धन के बिना हम अच्छा भोजन भी कैसे कर सकते हैं? हम लालच में अंधे होकर धन पाना चाहते हैं। हम बहुत सारे साधन इकट्ठा करते हैं। तब उस धन की सुरक्षा की समस्या होती है। उसकी रक्षा में बहुत समय बर्बाद होता है। चोर धन चुरा लेते हैं। तब (धन की) इच्छाएँ और बढ़ जाती हैं। अभिमान मनुष्य को नष्ट कर देता है। यह दर्शाता है कि धन आवश्यक है, पर उसके प्रति अत्यधिक लालच और मोह अंततः दुःख और विनाश का कारण बन सकता है।
In simple words: जीवन में धन बहुत ज़रूरी है। इसके बिना जीना मुश्किल है और हम अच्छा खाना भी नहीं खा सकते। हम लालच में अंधे होकर बहुत धन इकट्ठा करते हैं। लेकिन फिर उसकी सुरक्षा की चिंता होती है, चोर उसे चुरा सकते हैं। धन की चाहत बढ़ती जाती है और यह घमंड इंसान को खत्म कर देता है।

🎯 Exam Tip: धन के महत्व और उसके लालच के परिणामों पर आधारित निबंध-शैली के प्रश्नों में, तार्किक बिंदुओं और नैतिक सीख को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।

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