RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 3 धर्म

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Detailed Chapter 3 धर्म RBSE Solutions for Class 12 Political Science

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Class 12 Political Science Chapter 3 धर्म RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. “धर्म मनुष्य में पहले से व्याप्त देवत्व व आध्यात्मिकता का विस्तार मात्र हैं”– यह कथन किसका है?
(अ) कन्फ्यूशियस
(ब) स्वामी विवेकानन्द
(स) प्लेटो
(द) महात्मा गाँधी
Answer: (ब) स्वामी विवेकानन्द
In simple words: स्वामी विवेकानन्द का मानना था कि धर्म हमारे अंदर की पवित्रता और आध्यात्मिक भावना को बाहर निकालने जैसा है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्न अक्सर प्रसिद्ध व्यक्तियों के कथनों या परिभाषाओं पर आधारित होते हैं। सही उत्तर के लिए प्रमुख दार्शनिकों और विचारकों के विचारों को याद रखें।

 

Question 2. मैथिलीशरण गुप्त किस हृदय को पत्थर मानते हैं?
(अ) धर्म विहीन हृदय
(ब) स्वदेश का प्यारविहीन हृदय
Answer: (ब) स्वदेश का प्यारविहीन हृदय
In simple words: कवि मैथिलीशरण गुप्त ने उस दिल को पत्थर के समान कहा है जिसे अपने देश से प्यार नहीं होता।

🎯 Exam Tip: कवियों और लेखकों के विचारों पर आधारित प्रश्नों में, आपको उनकी रचनाओं के मुख्य संदेश को समझना चाहिए।

 

Question 3. निम्नलिखित में से कौन-सा धर्म का लक्षण नहीं है?
(अ) क्षमा
(ब) धैर्य
(स) संचय करना
(द) क्रोध नहीं करना
Answer: (स) संचय करना
In simple words: धर्म का मतलब होता है अच्छे गुण जैसे माफ़ करना और शांत रहना, लेकिन चीज़ें जमा करना धर्म का हिस्सा नहीं है।

🎯 Exam Tip: धर्म के मूल सिद्धांतों और विशेषताओं पर आधारित प्रश्नों के लिए प्रमुख ग्रंथों में वर्णित लक्षणों को ध्यान से पढ़ें।

 

Question 4. धर्म निरपेक्ष राज्य से तात्पर्य है
(अ) धर्मविहीन राज्य
(ब) राज्य एक धर्म को मान्यता दें
(स) राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हों
(द) धार्मिक राज्य।
Answer: (स) राज्य की दृष्टि में सभी धर्म समान हों
In simple words: एक धर्मनिरपेक्ष देश में सरकार के लिए सभी धर्म बराबर होते हैं और किसी के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।

🎯 Exam Tip: धर्मनिरपेक्षता की सही परिभाषा को समझें, जहाँ राज्य किसी धर्म को बढ़ावा या विरोध नहीं करता।

 

Question 5. इस्लाम धर्म के संस्थापक हैं
(अ) पैगम्बर मोहम्मद
(ब) अबू बकर
(स) हसन व हुसैन
(द) मोहम्मद बिन कासिम।
Answer: (अ) पैगम्बर मोहम्मद
In simple words: पैगम्बर मोहम्मद ने इस्लाम धर्म को शुरू किया और लोगों को इसकी बातें सिखाईं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख धर्मों के संस्थापकों के नाम और उनके समयकाल को याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आध्यात्मिकता को धर्म का अभिकेन्द्र किस विद्वान ने माना है?
Answer: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् ने यह माना है कि धर्म का मुख्य आधार आध्यात्मिकता है, यानी धर्म का केंद्र हमारी आत्मा और आध्यात्मिक विकास होना चाहिए।
In simple words: डॉ. राधाकृष्णन् के अनुसार, धर्म का सबसे ज़रूरी हिस्सा आध्यात्मिकता है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण विचारकों के विचारों को उनके मूल शब्दों में याद रखने का प्रयास करें, या उनके मुख्य संदेश को सरल शब्दों में समझें।

 

Question 2. धर्म शब्द का अंग्रेजी अनुवाद लिखें।
Answer: हिंदी के 'धर्म' शब्द का अंग्रेजी अनुवाद 'Religion' (रिलीजन) होता है। इस शब्द का मतलब आस्था, किसी चीज़ पर विश्वास या अपनी खुद की मान्यताएँ हो सकता है।
In simple words: 'धर्म' को अंग्रेजी में 'Religion' कहते हैं, जिसका मतलब विश्वास या मान्यताएँ हैं।

🎯 Exam Tip: कुछ शब्दों के शाब्दिक अर्थ और उनके सांस्कृतिक संदर्भ को समझना आवश्यक है, खासकर जब वे अलग-अलग भाषाओं में हों।

 

Question 4. ईसाई धर्म के प्रवर्तक कौन थे?
Answer: ईसाई धर्म की शुरुआत ईसा मसीह ने की थी, इसलिए उन्हें इस धर्म का प्रवर्तक माना जाता है।
In simple words: ईसा मसीह ने ईसाई धर्म को शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: धर्मों के संस्थापकों के नाम जानना ऐतिहासिक और धार्मिक ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. गौतम बुद्ध ने किस धर्म का प्रादुर्भाव किया?
Answer: गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी, जो उनके द्वारा सिखाई गई शिक्षाओं पर आधारित है।
In simple words: गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म को शुरू किया।

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न भी धर्मों के संस्थापकों पर आधारित है; ऐसे तथ्यों को याद रखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. धर्म क्या है? बताइये।
Answer: भारतीय संस्कृति और दर्शन में धर्म एक बहुत ही ज़रूरी विचार है। भारत में धर्म का मतलब कर्तव्य निभाना, अहिंसा का पालन करना, न्याय करना, अच्छे व्यवहार और गुणों को अपनाना है। 'धर्म' शब्द संस्कृत की 'धृ' धातु से आया है, जिसका मतलब 'धारण करना' है। इसका मतलब यह है कि धर्म वह सिद्धांत या तत्व है जिसे हम किसी खास मकसद के लिए अपनाते हैं। अंग्रेजी में 'धर्म' के लिए 'Religion' (रिलीजन) शब्द का उपयोग होता है, जिसका मतलब आस्था, विश्वास या अपनी मान्यताएँ हैं। धर्म को एक ऐसी व्यवस्था कहा जा सकता है जो अपनी परंपराओं और विश्वासों के ज़रिए एक समुदाय को नैतिकता से जोड़ती है। मनुस्मृति में धर्म के दस खास लक्षण बताए गए हैं: धैर्य, माफ़ करना, मन को कंट्रोल करना, चोरी न करना, साफ़-सफाई रखना, अपनी इंद्रियों को काबू में रखना, बुद्धिमान होना, पढ़ाई करना, सच बोलना और गुस्सा न करना।
In simple words: धर्म का अर्थ है कर्तव्य निभाना, अच्छे गुण अपनाना और नैतिक नियमों का पालन करना। यह संस्कृत शब्द 'धृ' से आया है जिसका मतलब धारण करना है। मनुस्मृति के अनुसार, धैर्य, क्षमा, चोरी न करना और सच बोलना धर्म के मुख्य लक्षण हैं।

🎯 Exam Tip: धर्म की परिभाषा देते समय उसकी व्युत्पत्ति, भारतीय संदर्भ और मनुस्मृति जैसे ग्रंथों में वर्णित लक्षणों का उल्लेख करना पूरे अंक दिलाता है।

 

Question 2. धर्म निरपेक्षता की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: धर्मनिरपेक्षता का मतलब है कि सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाए और किसी के साथ भी उसके धर्म के आधार पर भेदभाव न किया जाए। धर्म का मुख्य उद्देश्य सभी इंसानों की सेवा करना है। यह हमें अच्छे व्यवहार, दया, संयम और अहिंसा सिखाता है। धर्म हमें बुराइयों से दूर रहने और अच्छे व सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। इसका असली रूप आध्यात्मिक होता है और इसमें कोई दिखावा नहीं होता। धर्म का काम हमेशा भलाई करना है और यह एक नैतिक विचार भी है। इंसानों की सेवा करना ही सबसे बड़ी नैतिकता है, और यही नैतिकता के मुख्य गुण भी हैं। असल में, वही धर्म सबसे अच्छा होता है जो नैतिक मूल्यों पर खरा उतरे और सभी लोगों की भलाई के लिए काम करे। सच्चाई और नैतिकता को किसी देश या समय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। नैतिकता हमेशा सच्चाई, सभी धर्मों के बीच प्यार, दया और करुणा का संदेश देती है। असल में, नैतिकता के नियमों का पालन करना ही धर्म का असली रूप है।
In simple words: धर्मनिरपेक्षता का मतलब है कि राज्य सभी धर्मों को बराबर माने और किसी से भेदभाव न करे। धर्म का लक्ष्य मानव सेवा, अहिंसा और सदाचार सिखाना है। सच्चा धर्म वही है जो नैतिक मूल्यों पर खरा उतरे और सब की भलाई करे।

🎯 Exam Tip: धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को स्पष्ट करते समय राज्य के दृष्टिकोण और धर्म के नैतिक लक्ष्यों के बीच संबंध बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. ईसाई धर्म में धार्मिक अवधारणा क्या है?
Answer: ईसाई धर्म की धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसके संस्थापक ईसा मसीह थे। यह एक ऐसा धर्म है जो केवल एक ईश्वर में विश्वास रखता है (एकेश्वरवादी)। दुनिया की आबादी के हिसाब से, इसके अनुयायी सबसे ज़्यादा हैं। यह धर्म अहिंसा का समर्थन करता है, लेकिन कई बार धार्मिक और राजनीतिक वजहों से इसमें हिंसा का भी इस्तेमाल हुआ है। पश्चिमी ईसाई राजनीतिक सोच में, धर्म और राजनीति को अलग-अलग ताकतें माना गया है। ईसाई धर्म में ईश्वर, राजा (कैसर), चर्च, राज्य, पादरी और समाज को एक साथ और बराबर का दर्जा मिला हुआ है।
In simple words: ईसाई धर्म ईसा मसीह ने शुरू किया था और यह एक ही ईश्वर में विश्वास रखता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है और अहिंसा को मानता है, हालांकि इसमें हिंसा का भी उपयोग हुआ है। इस धर्म में ईश्वर और राज्य की अपनी-अपनी जगह है।

🎯 Exam Tip: किसी धर्म की अवधारणा समझाते समय उसके संस्थापक, प्रमुख सिद्धांत (जैसे एकेश्वरवाद, अहिंसा), और समाज व राजनीति में उसकी भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 5. इस्लाम धर्म के सर्वाधिक प्रसार वाले पाँच देशों के नाम लिखिए।
Answer: इस्लाम दुनिया के नए धर्मों में से एक है और भौगोलिक रूप से, यह दुनिया के बीच के हिस्सों में फैला हुआ है। इस्लाम धर्म सबसे ज़्यादा जिन पाँच देशों में फैला है, वे हैं:
1. इंडोनेशिया
2. भारत
3. ईरान
4. इराक
5. सऊदी अरब
In simple words: इस्लाम एक नया धर्म है और यह दुनिया के मध्य क्षेत्रों में ज़्यादा फैला है। सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले पाँच देश इंडोनेशिया, भारत, ईरान, इराक और सऊदी अरब हैं।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक प्रसार वाले देशों की सूची को सटीक रूप से याद रखें। ऐसे प्रश्नों में तथ्यों को सही क्रम में लिखना भी महत्वपूर्ण होता है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. धर्म और राजनीति के दायरे अलग-अलग हैं परन्तु दोनों की जड़े एक हैं। धर्म दीर्घकालीन राजनीति है जबकि राजनीति अल्पकालीन धर्म है। धर्म का काम भलाई करना और उसकी स्तुति करना है जबकि राजनीति का कार्य बुराई से लड़ना और बुराई की निन्दा करना है।
Answer: जब राजनीति और धर्म के बीच नकारात्मक संबंध होते हैं, तो समस्याएँ पैदा होती हैं। बर्ट्रेंड रसेल और ई-एम-फोस्टर जैसे विद्वानों ने कहा है कि धर्म के नाम पर की जाने वाली राजनीति हमेशा समाज में नफ़रत और झगड़े पैदा करती है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद, कई शासकों ने एक खास धर्म को अपना राजधर्म घोषित किया। धर्म का इस्तेमाल साम्राज्यों को बढ़ाने और युद्ध करने के लिए किया गया। पिछले लगभग दो हज़ार सालों में धर्म के नाम पर कई खूनी संघर्ष हुए हैं। 20वीं शताब्दी के बाद के हिस्से में, धार्मिक श्रेष्ठता साबित करने के लिए धर्म की आड़ में आतंकवादी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं, जिसका एक उदाहरण भारत का पड़ोसी देश है। 21वीं सदी में समाज में ऐसे कट्टर धार्मिक समूह उभरे हैं जो अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए धर्म का गलत इस्तेमाल करते हैं। जब धर्म में दिखावा और स्वार्थ आ जाता है, तो इंसान गलत रास्ते पर चला जाता है और समाज के लिए बुरा बन जाता है। दरअसल, धर्म और राजनीति का सही तालमेल मानव कल्याण के लिए अच्छा है, जबकि इसका गलत इस्तेमाल विनाशकारी होता है। धर्म और राजनीति को अपना-अपना काम अलग-अलग ढंग से करना चाहिए ताकि उनका गलत उपयोग न हो। विश्व शांति के लिए नैतिक धर्म और धर्म-आधारित राजनीति का पालन करना ज़रूरी है।
In simple words: धर्म और राजनीति में नकारात्मक संबंध होने से समाज में नफ़रत और झगड़े बढ़ते हैं। इतिहास में धर्म के नाम पर कई युद्ध हुए हैं और आतंकवाद भी बढ़ा है। अगर धर्म में दिखावा और स्वार्थ आ जाए, तो यह इंसान को गलत रास्ते पर ले जाता है। धर्म और राजनीति को अलग-अलग रहकर अच्छे से काम करना चाहिए ताकि वे मानव कल्याण में मदद कर सकें और दुनिया में शांति बनी रहे।

🎯 Exam Tip: धर्म और राजनीति के संबंधों पर निबंध लिखते समय, उनके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं, ऐतिहासिक उदाहरणों और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए आवश्यक शर्तों का विश्लेषण करें।

 

Question 2. राष्ट्रधर्म के सम्बन्ध में मैथिलीशरण गुप्त की कविता के सन्दर्भों में स्वराष्ट्र की अवधारणा की मीमांसा कीजिए।
Answer: मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं के अनुसार स्वराष्ट्र की अवधारणा का मतलब है कि जिस देश की मिट्टी में हमने जन्म लिया है, पले-बढ़े हैं और जिसके वातावरण में हम आज़ादी से घूमते हैं, उस देश के प्रति हमें समर्पित रहना चाहिए। ज़रूरत पड़ने पर उसके लिए अपनी जान भी दे देना ही राष्ट्र धर्म है। एक कवि ने लिखा है कि 'तुम जिसका जल, अन्न खाकर बड़े हुए, जिसकी धूल में खेले, शरीर में जान रहते उसे कैसे छोड़ दोगे, अरे वीरों के वंशज!' असल में, हम किसी भी धर्म या संप्रदाय को मानते हों, जिस देश में हम रहते हैं, वह हमारे लिए सबसे बढ़कर है। हम किसी भी मत, भाषा या मान्यता को मान सकते हैं, लेकिन राष्ट्र धर्म व्यक्ति के लिए सबसे ऊपर है। मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है कि अपनी मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के इस वाक्य से राष्ट्र धर्म और भी स्पष्ट होता है: 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' (जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं)। वास्तव में, भारत माता की अच्छे कर्मों से सेवा करना और उनकी पूजा करना ही हमारा धर्म है। जैसे एक सैनिक सीमा पर अपनी आखिरी साँस तक लड़कर देश की रक्षा करता है, वैसे ही हर भारतीय का कर्तव्य है कि हम इंसानियत के पुजारी बनें और धर्म, संप्रदाय और भाषा के भेदभावों को भूलकर पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ देश की सेवा करें। दूसरों की भलाई करना और निःस्वार्थ सेवा करना ही धर्म का असली रूप है। धर्म सिखाता है कि हमें अपने धर्म, समुदाय, वर्ग और आश्रम के अनुसार काम करते हुए राष्ट्र धर्म को सबसे ऊपर रखना चाहिए और दूसरों की भलाई करनी चाहिए। युद्ध या आतंकवादी हमलों के समय, हमें अपनी व्यक्तिगत धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर देश के प्रति निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए, यही हमारा सच्चा राष्ट्र धर्म है।
In simple words: मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं के अनुसार, राष्ट्र धर्म का मतलब है अपने देश के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना और ज़रूरत पड़ने पर उसके लिए जान दे देना। जिस देश में हम जन्म लेते हैं और पलते-बढ़ते हैं, वह हमारे लिए सबसे ऊपर है। श्रीराम के वाक्य 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' से भी यही स्पष्ट होता है। हमें सभी भेदभाव भुलाकर देश की सेवा करनी चाहिए और संकट के समय निस्वार्थ भाव से राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र धर्म पर निबंध लिखते समय, मैथिलीशरण गुप्त जैसे कवियों की रचनाओं और उद्धरणों का उपयोग आपके उत्तर को मज़बूत बनाता है। राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण के भाव को स्पष्ट करें।

 

Question 3. भारतीय सनातन संस्कृति में धर्म की अवधारणा को एक समन्वयवादी दृष्टिकोण माना गया है। कैसे? धर्म के अर्थ को स्पष्ट करते हुए बताइए।
Answer: भारतीय संस्कृति और दर्शन में धर्म का विचार बहुत महत्वपूर्ण रहा है। धर्म के बारे में सबसे पहले पूर्वी संस्कृतियों में सोचा गया था, जहाँ धर्म का अर्थ बहुत व्यापक था। भारत में इसे कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, अच्छे व्यवहार और गुणों के रूप में देखा जाता है। धर्म को पवित्र और असाधारण माना गया है। अंग्रेजी में धर्म के लिए 'Religion' शब्द का प्रयोग होता है, जिसका अर्थ है आस्था, विश्वास या मान्यता। गीता में श्रीकृष्ण ने अपनी समझ के आधार पर सबसे अच्छे को जानने और करने को 'स्वधर्म' कहा है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार, धर्म सिर्फ़ वह देवत्व और आध्यात्मिकता है जो इंसान में पहले से मौजूद है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् ने आध्यात्मिकता को धर्म का मुख्य केंद्र माना और कहा कि धर्म का सार आत्मा को बेहतर बनाने और जीवन को धर्मनिरपेक्षता की ओर ले जाने में है। भारतीय सनातन संस्कृति में धर्म को एक व्यापक विचार के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसमें सभी की भलाई और दूसरों की मदद का भाव शामिल है। भारतीय धर्म ग्रंथों में कहा गया है, “यतो अभ्युदय निःश्रेयस सिद्धी सः धर्म” (जिससे जीवन में उन्नति और मोक्ष दोनों प्राप्त हों, वही धर्म है)। सनातन धर्म को दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। सनातन धर्म वेदों पर आधारित है जिसमें अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय व दर्शन सम्मिलित हैं। भले ही इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है किन्तु वह मूलतः एकेश्वरवादी धर्म है जिसे सनातन हिन्दू धर्म कहा जाता है। बौद्ध धर्म, जैन धर्म व सिक्ख धर्म की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से ही मानी जाती है। सभी धर्मों में तालमेल की भावना दिखाते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है: “श्रूयतां धर्म सर्वस्वं श्रुत्वा चाप्यवधार्यताम। आत्मेन: प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत ।। ” (धर्म का सार सुनो और समझो: जो चीज़ अपने लिए प्रतिकूल हो, वैसा व्यवहार दूसरों के साथ न करो।) सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों पर विचार करें। सभी धर्मों का मूल तत्व यही है कि जो व्यवहार हमें बुरा लगे, वह दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए। भारतीय धर्म में 'सबकी भलाई' को जीवन का लक्ष्य माना गया है, यह इसकी खास विशेषता है। गीता में कहा गया है: “न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्ग नापुनर्भवम्। कामये दुःख तप्तानां प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्।।” (मैं न तो राज्य की इच्छा करता हूँ, न स्वर्ग की और न ही मोक्ष की। मैं तो सिर्फ़ दुखी प्राणियों के कष्टों को दूर करना चाहता हूँ।) यह दिखाता है कि धर्म का असली मकसद दुखी लोगों की मदद करना है।
In simple words: भारतीय सनातन संस्कृति में धर्म को कर्तव्य, अहिंसा, न्याय और सद्गुण के रूप में देखा जाता है। यह एक व्यापक अवधारणा है जो आस्था और विश्वास को दर्शाती है। गीता में स्वधर्म को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। स्वामी विवेकानंद और डॉ. राधाकृष्णन् ने धर्म को आध्यात्मिकता का विस्तार बताया है। सनातन धर्म सबसे पुराना है, जिसमें अनेक देवी-देवताओं की पूजा होते हुए भी यह मूलतः एक ही ईश्वर में विश्वास रखता है। इसमें सभी धर्मों के साथ तालमेल का भाव है, जैसा कि श्रीकृष्ण ने कहा कि जो अपने लिए बुरा हो, वह दूसरों के साथ न करें। इसका मुख्य लक्ष्य मानव मात्र का कल्याण और दुखी प्राणियों की सहायता करना है।

🎯 Exam Tip: सनातन संस्कृति में धर्म की समन्वयवादी अवधारणा को समझाते समय, उसकी व्यापकता, प्रमुख दार्शनिकों के विचार (स्वामी विवेकानंद, राधाकृष्णन्), गीता के स्वधर्म की अवधारणा और 'सर्व धर्म समभाव' के महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. धर्म का सबसे पहले चिन्तन हुआ
(अ) पाश्चात्य संस्कृति में
(ब) पूर्वी संस्कृतियों में
(स) उक्त दोनों में
(द) दोनों में से कोई नहीं।
Answer: (ब) पूर्वी संस्कृतियों में
In simple words: धर्म के बारे में सोचना सबसे पहले पूर्वी देशों में शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित प्रश्नों के लिए सही सांस्कृतिक संदर्भ को याद रखना ज़रूरी है।

 

Question 2. गीता में श्रीकृष्ण के अनुसार व्यक्ति को प्रकृति प्रदत्त उपहार मिला है
(अ) बुद्धि
(ब) परमार्थ की भावना
(स) तार्किक शक्ति
(द) विवेक।
Answer: (द) विवेक।
In simple words: गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि हमें प्रकृति से 'विवेक' (सही-गलत समझने की शक्ति) मिली है।

🎯 Exam Tip: गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों के प्रमुख शिक्षाओं और अवधारणाओं को समझना आवश्यक है।

 

Question 4. नैतिक सत्य के तत्व माने गये हैं
(अ) प्रेम
(ब) करुणा
(c) दया
(द) ये सभी।
Answer: (द) ये सभी।
In simple words: नैतिक सच्चाई के लिए प्रेम, करुणा और दया, ये सभी गुण ज़रूरी हैं।

🎯 Exam Tip: नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रश्नों में, सभी संबंधित गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब 'ये सभी' विकल्प में हो।

 

Question 5. जो दूसरों के लिए जीते, वे सच में जीते हैं, शेष तो जीते हुए भी मरे जैसे हैं' यह कथन है
(अ) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् का
(ब) श्रीकृष्ण का
(स) स्वामी विवेकानन्द का
(द) राममनोहर लोहिया का।
Answer: (स) स्वामी विवेकानन्द का
In simple words: स्वामी विवेकानन्द ने कहा है कि दूसरों के लिए जीने वाले ही सच में जीते हैं।

🎯 Exam Tip: महापुरुषों के प्रेरणादायक कथनों को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

 

Question 6. अहिंसा और धर्म के आधार तत्व हैं
(अ) क्षमा
(ब) दया
(स) करुणा
(द) ये सभी।
Answer: (द) ये सभी।
In simple words: अहिंसा और धर्म के लिए माफ़ करना, दया दिखाना और करुणा रखना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रश्नों के लिए उसके सभी मुख्य घटकों को याद रखें।

 

Question 7. सभी व्यक्तियों के लिए सर्वोपरि है
(अ) अर्थलाभ
(ब) विद्याध्ययन करना
(स) सत्य बोलना
(द) राष्ट्रधर्म का पालन।
Answer: (द) राष्ट्रधर्म का पालन।
In simple words: हर इंसान के लिए अपने देश के प्रति कर्तव्य निभाना सबसे ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में अक्सर नैतिक प्राथमिकताएँ पूछी जाती हैं; राष्ट्र के प्रति निष्ठा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।

 

Question 8. विश्व का जो प्राचीनतम धर्म माना गया है, वह है
(अ) बौद्ध धर्म
(ब) ईसाई धर्म
(स) इस्लाम धर्म
(द) सनातन धर्म
Answer: (द) सनातन धर्म
In simple words: दुनिया का सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है।

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख धर्मों के ऐतिहासिक उद्भव और प्राचीनता से जुड़े तथ्यों को जानें।

 

Question 9. याज्ञवल्क्य ने धर्म के कितने लक्षणों का उल्लेख किया है?
(अ) पाँच
(ब) सात
(स) नौ
(द) ग्यारह।
Answer: (स) नौ
In simple words: याज्ञवल्क्य ने धर्म के 9 गुण बताए हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न दार्शनिकों द्वारा धर्म या नीति के लक्षणों की संख्या को सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 10. ईसाई धर्म के संस्थापक थे
(अ) मोहम्मद पैगम्बर
(ब) ईसा मसीह
(स) महात्मा गाँधी
(द) गौतम बुद्ध ।।
Answer: (ब) ईसा मसीह
In simple words: ईसा मसीह ने ईसाई धर्म की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: यह एक सीधा तथ्यात्मक प्रश्न है, धर्मों के संस्थापकों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 बहुंचयनात्मक प्रश्न

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आज के वैज्ञानिक व तर्कप्रधान भौतिकवादी युग में धर्म पर बात करने वाला व्यक्ति क्या माना जा सकता है?
Answer: आज के वैज्ञानिक और तर्क पर आधारित भौतिकवादी दौर में, अगर कोई व्यक्ति धर्म की बात करता है, तो उसे आमतौर पर पुनरुत्थानवादी (पुरानी बातों को फिर से लाने वाला), परम्परावादी (परंपराओं को मानने वाला) या प्रतिक्रियावादी (बदलाव का विरोध करने वाला) समझा जा सकता है।
In simple words: आज के वैज्ञानिक युग में धर्म की बात करने वाले को लोग पुरानी सोच वाला या बदलाव विरोधी मान सकते हैं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक धारणाओं पर आधारित प्रश्नों में, मौजूदा विचारों और उन्हें देखने के नज़रिए को स्पष्ट करें।

 

Question 2. स्वामी विवेकानंद ने आध्यात्मिकता और बाह्य औपचारिक धर्म में अंतर करते हुए क्या कहा है?
Answer: स्वामी विवेकानन्द ने समझाया है कि सच्चा धर्म केवल बाहरी दिखावा या औपचारिक रस्मों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, “धर्म मनुष्य में पहले से मौजूद देवत्व और आध्यात्मिकता का ही विस्तार मात्र है।” यानी धर्म हमारे भीतर की पवित्रता और आध्यात्मिक शक्ति को विकसित करने का साधन है।
In simple words: स्वामी विवेकानन्द ने कहा कि धर्म सिर्फ़ बाहर का दिखावा नहीं, बल्कि हमारे अंदर की पवित्रता और आध्यात्मिकता को बढ़ाना है।

🎯 Exam Tip: स्वामी विवेकानन्द जैसे प्रमुख विचारकों के कथनों को याद रखें और उनके पीछे के अर्थ को समझाएँ, विशेषकर जब वे आध्यात्मिकता और धर्म के मूल अंतर पर हों।

 

Question 3. प्राचीन प्रमुख धर्मगुरुओं एवं आध्यात्मवादी विचारकों के नाम बताइये।
Answer: प्राचीन काल के कुछ प्रमुख धर्मगुरु और आध्यात्मिक विचारक हैं: कन्फ्यूशियस, मोजेस, पाइथागोरेस, बुद्ध, महावीर स्वामी, मोहम्मद पैगम्बर, मार्टिन लूथर, केल्विन और गुरुनानक।
In simple words: पुराने समय के बड़े धर्मगुरु और आध्यात्मिक विचारक थे कन्फ्यूशियस, बुद्ध, महावीर, मोहम्मद पैगम्बर आदि।

🎯 Exam Tip: विश्व इतिहास के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं के नामों की एक सूची तैयार करें और उन्हें याद रखें।

 

Question 5. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के अनुसार धर्म का सार क्या है?
Answer: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के अनुसार, धर्म का सार दो मुख्य बातों में है:
1. अपनी आत्मा को बेहतर बनाने के लिए आध्यात्मिक विकास पर ज़ोर देना।
2. जीवन को धर्मनिरपेक्षता की दिशा में आगे बढ़ाना, जहाँ सभी धर्मों का सम्मान हो।
In simple words: डॉ. राधाकृष्णन् के मुताबिक, धर्म का मुख्य काम आत्मा का आध्यात्मिक विकास करना और जीवन को धर्मनिरपेक्षता की राह पर ले जाना है।

🎯 Exam Tip: दार्शनिकों के विचारों को उनके मुख्य बिंदुओं में याद रखें, खासकर जब वे किसी अवधारणा के 'सार' पर हों।

 

Question 6. भारत में धर्म का सम्बन्ध किन पाँच अर्थों से है?
Answer: भारत में धर्म का संबंध मुख्य रूप से पाँच अर्थों से जोड़ा गया है: कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण (अच्छा व्यवहार) और सगुण (ईश्वरीय गुणों सहित)।
In simple words: भारत में धर्म का मतलब कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, अच्छा व्यवहार और ईश्वरीय गुणों से है।

🎯 Exam Tip: भारतीय संदर्भ में धर्म के विभिन्न अर्थों को स्पष्ट रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. भारतीय धर्मग्रन्थों में व्यक्ति का उच्चस्थ विकास क्या माना गया है?
Answer: भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार, किसी व्यक्ति का सबसे ऊँचा विकास तब होता है जब वह 'स्व' यानी अपनी आत्मा को पहचान लेता है या आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है।
In simple words: भारतीय ग्रंथों में खुद को जानना ही व्यक्ति का सबसे बड़ा विकास माना गया है।

🎯 Exam Tip: आत्मज्ञान की अवधारणा भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; इसे याद रखें।

 

Question 8. गीता में श्रीकृष्ण ने धर्म (स्वधर्म) किसे माना है?
Answer: गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने 'स्वधर्म' उसे कहा है, जहाँ व्यक्ति अपने प्राकृतिक विवेक का उपयोग करके यह जानता है कि उसके लिए सबसे अच्छा क्या है और फिर उसी के अनुसार काम करता है।
In simple words: गीता में श्रीकृष्ण ने 'स्वधर्म' का मतलब बताया है कि अपने विवेक से सबसे अच्छा जानकर उसी के हिसाब से काम करना।

🎯 Exam Tip: गीता की 'स्वधर्म' की अवधारणा को ध्यान से समझें, जो व्यक्तिगत कर्तव्य और विवेक पर आधारित है।

 

Question 9. धर्मानुसार आचरण क्या है?
Answer: धर्मानुसार आचरण का अर्थ है कि एक अच्छे समाज को बनाए रखने के लिए, समाज के हर वर्ग और हर व्यक्ति को अपने तय किए गए कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना चाहिए।
In simple words: धर्म के अनुसार व्यवहार करने का मतलब है कि सभी लोग अपने तय किए गए कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएँ, ताकि समाज अच्छा बना रहे।

🎯 Exam Tip: सामाजिक व्यवस्था में धर्म की भूमिका पर आधारित प्रश्नों के लिए कर्तव्यों के निष्ठापूर्ण पालन पर ज़ोर दें।

 

Question 10. धर्मानुसार आचरण कब सम्भव है?
Answer: भारतीय संदर्भ में, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि किसी भी धर्म को मानने वाले लोगों के साथ कोई भेदभाव न हो और सभी धर्मों को बराबर सम्मान की दृष्टि से देखा जाए।
In simple words: भारतीय धर्मनिरपेक्षता का मतलब है कि सभी धर्मों को मानने वालों से भेदभाव न हो और सबको बराबर माना जाए।

🎯 Exam Tip: धर्मानुसार आचरण से जुड़े प्रश्नों में, इसकी व्यावहारिकता और सामाजिक सामंजस्य के लिए आवश्यक शर्तों को समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. आज भारतीय जीवनधारा प्रदूषित हो गयी है-क्यों?
Answer: आज भारतीय जीवनशैली इसलिए दूषित हो गई है क्योंकि हमने अपने पुराने धार्मिक और जीवन के अच्छे मूल्यों को छोड़ दिया है और उनकी जगह साम्प्रदायिकता जैसी तोड़ने वाली बातों को अपना लिया है।
In simple words: भारतीय जीवनशैली इसलिए खराब हो गई है क्योंकि हमने अपने पुराने अच्छे मूल्यों को छोड़कर साम्प्रदायिकता जैसी बुरी बातों को अपना लिया है।

🎯 Exam Tip: समाज की समस्याओं पर आधारित प्रश्नों में, सामाजिक मूल्यों में गिरावट और उसके कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 13. धर्म का मूल लक्ष्य है?
Answer: धर्म का सबसे मुख्य उद्देश्य सभी इंसानों की सेवा करना है, जो सभी जीवों के कल्याण की भावना पर आधारित है।
In simple words: धर्म का मुख्य लक्ष्य है सभी लोगों की सेवा करना।

🎯 Exam Tip: धर्म के मूल उद्देश्य को हमेशा मानव सेवा और कल्याण से जोड़कर समझाएँ।

 

Question 14. धर्म किन बातों पर बल देता है?
Answer: धर्म हमें अच्छे व्यवहार, दया, संयम और अहिंसा जैसे गुणों को अपनाने पर ज़ोर देता है।
In simple words: धर्म अच्छी आदतों, दया, संयम और अहिंसा पर ज़ोर देता है।

🎯 Exam Tip: धर्म की शिक्षाओं को बताते समय उसके नैतिक गुणों और व्यवहार पर केंद्रित करें।

 

Question 15. धर्म क्या शिक्षा देता है?
Answer: धर्म हमें सिखाता है कि हम बुरी आदतों से दूर रहें और हमेशा दूसरों की भलाई करें तथा अच्छे और सही रास्ते पर चलें।
In simple words: धर्म हमें बुराई से दूर रहने और अच्छा काम करने की सीख देता है।

🎯 Exam Tip: धर्म की शिक्षाओं को स्पष्ट करते हुए उसके सकारात्मक प्रभावों और मार्गदर्शन को हाइलाइट करें।

 

Question 16. धर्म और राजनीति के विवेकपूर्ण मिलन के क्या परिणाम हैं?
Answer: जब धर्म और राजनीति बुद्धिमानी से एक साथ आते हैं, तो इसका नतीजा यह होता है कि यह मानव समाज की भलाई के लिए मददगार साबित होता है।
In simple words: अगर धर्म और राजनीति समझदारी से मिलें, तो इससे इंसानों का भला होता है।

🎯 Exam Tip: धर्म और राजनीति के आदर्श संबंध पर आधारित प्रश्नों में, उनके सकारात्मक परिणाम (जैसे मानवीय कल्याण) पर ज़ोर दें।

 

Question 17. धर्म में क्या अन्तर्निहित माना गया है?

🎯 Exam Tip: धर्म में निहित अवधारणाओं को समझने के लिए उसके नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार करें।

 

Question 18. वर्तमान समय में धार्मिक संघर्ष के मूल कारण क्या हैं?
Answer: आजकल धार्मिक संघर्षों का मुख्य कारण यह है कि अलग-अलग धर्म और पंथ अपनी-अपनी मान्यताओं को दूसरों से बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से उनमें आपस में दुश्मनी, नफ़रत और झगड़े बढ़ गए हैं।
In simple words: आज के धार्मिक झगड़ों का कारण यह है कि अलग-अलग धर्म खुद को दूसरों से बेहतर मानते हैं, जिससे आपस में लड़ाई-झगड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: धार्मिक संघर्षों के कारणों को बताते समय, धार्मिक श्रेष्ठता की भावना और उससे उपजे विरोध को मुख्य बिंदु के रूप में समझाएँ।

 

Question 19. धर्म की सत्यता की कसौटी क्या है?
Answer: किसी धर्म की सच्चाई को परखने के लिए दो मुख्य कसौटियाँ हैं:
1. वह धर्म सभी लोगों द्वारा स्वीकार्य हो (सार्वभौमिक रूप से मान्य हो)।
2. वह धर्म समाज के लिए उपयोगी और हितकारी हो (सार्वजनिक रूप से उपयोगी हो)।
In simple words: धर्म की सच्चाई यह देखकर तय होती है कि वह सभी को मान्य हो और समाज के लिए उपयोगी हो।

🎯 Exam Tip: धर्म की सत्यता को मापने के लिए उसके सार्वभौमिक स्वीकार्यता और सामाजिक उपयोगिता जैसे मानदंडों को प्रस्तुत करें।

 

Question 20. सत्य व नैतिकता देश व काल की परिधि से बाहर है, क्यों?
Answer: सत्य और नैतिकता किसी देश या समय की सीमाओं में बंधे नहीं होते, क्योंकि नैतिक सच्चाई के बुनियादी सिद्धांत जैसे प्रेम, करुणा और सभी जीवों के प्रति दया, सभी धर्मों में समान रूप से पाए जाते हैं। इन सार्वभौमिक बातों पर किसी जगह या समय का कोई असर नहीं पड़ता।
In simple words: सच्चाई और नैतिकता किसी जगह या समय से बंधी नहीं हैं, क्योंकि प्रेम, करुणा और दया जैसे नैतिक सिद्धांत हर धर्म में एक जैसे होते हैं।

🎯 Exam Tip: नैतिकता की सार्वभौमिक प्रकृति पर ज़ोर दें और समझाएँ कि ये मानवीय मूल्य सीमाओं से परे क्यों हैं।

 

Question 21. नैतिक सत्य क्या संदेश देता है?
Answer: नैतिक सच्चाई हमें प्रेम, करुणा और दया का संदेश देती है। यह हमें सिखाता है कि हमें दूसरों के प्रति संवेदनशील और सहायक होना चाहिए।
In simple words: नैतिक सच्चाई हमें प्यार, दया और करुणा का संदेश देती है।

🎯 Exam Tip: नैतिक सत्य के मूल संदेश को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 22. विश्व में श्रेष्ठ राज्य की स्थापना किस प्रकार सम्भव है।
Answer: विश्व में एक श्रेष्ठ और आदर्श राज्य तभी बन सकता है जब सभी धर्मों के साझा और अच्छे मूल्यों को अपनाया जाए।
In simple words: दुनिया में अच्छा राज्य तभी बन सकता है जब सभी धर्मों के अच्छे विचारों को साथ लाया जाए।

🎯 Exam Tip: एक आदर्श राज्य की स्थापना में धार्मिक सद्भाव और साझा मूल्यों की भूमिका को स्पष्ट करें।

 

Question 23. धर्म के प्रतीक बताइए।
Answer: धर्म का प्रतीक असल में नैतिकता के नियमों का पालन करना है। यानी, जब हम नैतिक नियमों का पालन करते हैं, तो वही हमारे धार्मिक होने का प्रमाण होता है।
In simple words: नैतिकता के नियमों का पालन करना ही धर्म का प्रतीक है।

🎯 Exam Tip: धर्म को केवल बाहरी अनुष्ठानों के बजाय नैतिक आचरण से जोड़कर समझाएँ।

बर्टेण्ड रसेल एवं ई-एम-फोस्टर जैसे विद्वानों ने धर्म की आलोचना इस बात के लिए की है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने से विश्व में सदैव रक्तपात हुआ है जो आज भी जारी है।

 

Question 25. राजनीति का मूल तत्व क्या है?
Answer: राजनीति का मुख्य सिद्धांत 'नीति के अनुसार शासन करना' है। यह नीति नैतिक मूल्यों और अच्छी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होती है।
In simple words: राजनीति का मुख्य हिस्सा है नियमों के हिसाब से शासन करना, और ये नियम अच्छे नैतिक और धार्मिक विचारों पर आधारित होते हैं।

🎯 Exam Tip: राजनीति के मूल तत्वों को समझाते समय उसके नैतिक और धार्मिक आधार को स्पष्ट करें।

 

Question 26. धर्म और राजनीति के परस्पर नकारात्मक प्रभाव का परिणाम बताइये।
Answer: जब धर्म और राजनीति एक-दूसरे को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, तो यह इंसानियत के लिए बहुत बुरा होता है। इसके कारण धार्मिक कट्टरता, भेदभाव, साम्प्रदायिकता और गुलामी जैसी बुरी आदतें पैदा होती हैं, जो आज़ादी और बराबरी जैसे ज़रूरी मूल्यों को नुकसान पहुँचाती हैं।
In simple words: धर्म और राजनीति का गलत मेल इंसानियत के लिए बुरा है। इससे कट्टरता, भेदभाव और गुलामी बढ़ती है, जो आज़ादी और बराबरी के लिए ख़तरा है।

🎯 Exam Tip: धर्म और राजनीति के नकारात्मक संबंधों के परिणामों में धार्मिक कट्टरता और सामाजिक मूल्यों पर उसके प्रभाव पर ज़ोर दें।

 

Question 27. अहिंसा और धर्म दोनों के आधार तत्व क्या हैं?
Answer: अहिंसा और धर्म दोनों के मुख्य आधार तत्व हैं: क्षमा (माफ़ करना), दया, करुणा (दूसरों के दुख को समझना), सत्य (सच बोलना), कर्तव्यनिष्ठा (अपने काम के प्रति ईमानदारी) और ईमानदारी।
In simple words: अहिंसा और धर्म के लिए माफ़ी, दया, करुणा, सच, कर्तव्य और ईमानदारी ज़रूरी हैं।

🎯 Exam Tip: अहिंसा और धर्म के साझा नैतिक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

Question 28. धर्म विमुख अनैतिक व्यक्ति किसे माना गया है?
Answer: जब कोई व्यक्ति अपने कर्तव्यों से भटक जाता है और गलत रास्ते पर चला जाता है, तो वह धर्म के नियमों को तोड़ता है। ऐसे व्यक्ति को अधार्मिक या धर्म विमुख अनैतिक व्यक्ति कहा जाता है।
In simple words: जो व्यक्ति अपने कर्तव्य नहीं निभाता और गलत काम करता है, उसे अधार्मिक या धर्म विमुख व्यक्ति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: नैतिक और अनैतिक व्यवहार की परिभाषा देते समय, कर्तव्य के पालन और धर्म के सिद्धांतों के उल्लंघन पर ध्यान दें।

 

Question 29. मानव के लिए कौन-सा धर्म सर्वोपरि है?
Answer: मानव के लिए 'राष्ट्रधर्म' सबसे महत्वपूर्ण धर्म है। यह अपने देश के प्रति कर्तव्य, निष्ठा और समर्पण का भाव है।
In simple words: इंसान के लिए सबसे बड़ा धर्म 'राष्ट्रधर्म' है, यानी अपने देश के प्रति समर्पित रहना।

🎯 Exam Tip: मानवीय मूल्यों के पदानुक्रम में राष्ट्रधर्म को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है; इसे स्पष्ट करें।

 

Question 30. 'धर्म' शब्द की उत्पत्ति को समझाइये।
Answer: संस्कृत भाषा के 'धृ' धातु से 'धर्म' शब्द की उत्पत्ति हुई है। यह 'धारणात' शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'धारण करना' या 'पकड़ कर रखना'। यह उन सिद्धांतों को दर्शाता है जिन्हें धारण किया जाता है।
In simple words: 'धर्म' शब्द संस्कृत की 'धृ' धातु से आया है, जिसका मतलब है 'धारण करना' या 'पकड़े रहना'।"

🎯 Exam Tip: शब्दों की व्युत्पत्ति को समझाते समय, मूल धातु और उसके अर्थ को स्पष्ट करें।

 

Question 31. विश्व का प्राचीनतम धर्म कौन-सा है?
Answer: विश्व का सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है। यह वेदों पर आधारित है और इसमें कई तरह की पूजा पद्धतियाँ, मत, संप्रदाय और दर्शन शामिल हैं। भले ही इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन यह मूल रूप से एक ईश्वर में विश्वास रखने वाला धर्म है।
In simple words: सनातन धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। यह वेदों पर आधारित है और इसमें कई पूजा विधियाँ हैं, फिर भी यह मूल रूप से एक ही ईश्वर को मानता है।

🎯 Exam Tip: विश्व के प्राचीनतम धर्मों की पहचान करते समय, उसके आधार ग्रंथों और मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करें।

 

Question 33. हिन्दू धर्म क्या है?
Answer: हिन्दू धर्म जीवन जीने की पद्धति है।
In simple words: हिन्दू धर्म जीवन जीने का एक तरीका है।

🎯 Exam Tip: हिन्दू धर्म को केवल एक धर्म के बजाय एक जीवनशैली या दर्शन के रूप में समझाएँ।

 

Question 34. 'हिन्दू' शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
Answer: संस्कृत में कहा गया है - हिंसायाम् दूयते या सा हिन्दू अर्थात जो मन, वचन व कर्म से हिंसा को दूर रखे वही हिन्दू है।
In simple words: संस्कृत के अनुसार, हिन्दू वह है जो मन, वचन और कर्म से हिंसा से दूर रहता है।

🎯 Exam Tip: 'हिन्दू' शब्द की व्युत्पत्ति और उसके मूल अर्थ को समझाते हुए अहिंसा के महत्व पर ज़ोर दें।

 

Question 35. हिन्दू धर्म से किन धर्मों की उत्पत्ति हुई है?
Answer: बौद्ध धर्म, जैन धर्म व सिक्ख धर्म की उत्पत्ति हिन्दू धर्म से हुई है।
In simple words: बौद्ध, जैन और सिख धर्म हिन्दू धर्म से ही निकले हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीय धर्मों के ऐतिहासिक संबंधों और उनके उद्भव को याद रखें।

 

Question 36. प्रसिद्ध भारतीय दार्शनिक याज्ञवल्क्य ने धर्म के कौन-कौन से लक्षण बताए हैं?
Answer: याज्ञवल्क्य ने धर्म के दस लक्षण बताए हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:
1. अहिंसा
2. क्षमा
3. संयम
4. चोरी न करना
5. स्वच्छता
6. इन्द्रियों को वश में रखना
7. बुद्धि
8. विद्या
9. सत्य
10. क्रोध न करना।
In simple words: याज्ञवल्क्य ने धर्म के दस गुण बताए हैं, जैसे अहिंसा, क्षमा, संयम, चोरी न करना, पवित्रता, इंद्रियों पर नियंत्रण, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना।

🎯 Exam Tip: याज्ञवल्क्य द्वारा वर्णित धर्म के लक्षणों को क्रमबद्ध रूप से याद रखें, क्योंकि यह उनके दर्शन का केंद्रीय भाग है।

 

Question 38. भारतीय संस्कृति की एक विशेषता बताइए।
Answer: भारतीय संस्कृति की एक खास बात यह है कि यह सभी इंसानों की भलाई पर जोर देती है. यह मानती है कि सभी को खुशी और अच्छा जीवन मिलना चाहिए.
In simple words: भारतीय संस्कृति मानव मात्र के कल्याण में विश्वास रखती है.

🎯 Exam Tip: जब भारतीय संस्कृति की विशेषता पूछी जाए, तो 'मानव कल्याण' जैसे मुख्य बिन्दु पर ध्यान दें.

 

Question 39. ईसाई धर्म के प्रमुख समुदायों के नाम बताइये।
Answer: ईसाई धर्म के कई मुख्य समुदाय हैं, जिनमें कैथोलिक, प्रोटेस्टेण्ट, आर्थोडोक्स, मॉरोनी, और एवन जीलक शामिल हैं. ये सभी ईसाई धर्म का पालन करते हैं, लेकिन इनके रीति-रिवाज और मान्यताएँ थोड़ी अलग हो सकती हैं.
In simple words: ईसाई धर्म के मुख्य समूह कैथोलिक, प्रोटेस्टेण्ट, आर्थोडोक्स, मॉरोनी और एवन जीलक हैं.

🎯 Exam Tip: प्रमुख धार्मिक समुदायों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब विश्व धर्मों पर प्रश्न आए.

 

Question 40. ईसाई धर्म के सिद्धांत मूलतः किस बात पर बल देते हैं?
Answer: ईसाई धर्म के मुख्य सिद्धांत अहिंसा पर बहुत जोर देते हैं. इसका मतलब है कि यह धर्म किसी को नुकसान न पहुँचाने और शांति से रहने की सीख देता है.
In simple words: ईसाई धर्म मुख्य रूप से अहिंसा पर बल देता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी धर्म के मूल सिद्धांतों को याद करते समय उसके मुख्य संदेश (जैसे अहिंसा, करुणा) को ध्यान में रखें.

 

Question 41. इस्लाम धर्म का प्रादुर्भाव कब व किसने किया?
Answer: इस्लाम धर्म की शुरुआत 522 ईसा पूर्व में पैगम्बर मोहम्मद ने की थी. उन्होंने इस धर्म को लोगों तक पहुँचाया और इसके सिद्धांतों को स्थापित किया.
In simple words: इस्लाम धर्म की शुरुआत 522 ईसा पूर्व में मोहम्मद पैगम्बर ने की थी.

🎯 Exam Tip: धर्मों के संस्थापक और स्थापना वर्ष अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से याद करें.

 

Question 42. विश्व में मुस्लिम आबादी की स्थिति क्या है?
Answer: इस्लाम दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है. दुनिया की कुल आबादी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मुस्लिम है, जो इसे सबसे अधिक अनुयायियों वाले धर्मों में से एक बनाता है.
In simple words: मुस्लिम आबादी विश्व में बड़ी संख्या में मौजूद है और यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख धर्मों की अनुयायी संख्या और उनकी वैश्विक स्थिति के बारे में सामान्य जानकारी रखें.

 

Question 44. इस्लाम में स्वतन्त्रता और अधिकार की क्या स्थिति है?
Answer: इस्लाम में लोगों की आजादी और अधिकारों पर शासन और कर्तव्यों का प्रभाव ज़्यादा रहता है. इसका मतलब है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता कुछ हद तक नियमों और जिम्मेदारियों से बंधी होती है.
In simple words: इस्लाम में स्वतंत्रता और अधिकारों पर सत्ता और कर्तव्य का प्रभाव ज़्यादा होता है.

🎯 Exam Tip: धर्मों की सामाजिक और राजनीतिक अवधारणाओं पर ध्यान दें, खासकर स्वतंत्रता और अधिकार के सन्दर्भ में.

 

Question 45. भारतीय संस्कृति में सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का मूलाधार क्या रहा है?
Answer: भारतीय संस्कृति में सभी सांस्कृतिक और सामाजिक कामों का आधार 'धर्म' रहा है. धर्म ही समाज के रीति-रिवाजों और व्यवहारों को दिशा देता है.
In simple words: भारतीय संस्कृति में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का मुख्य आधार धर्म है.

🎯 Exam Tip: भारतीय समाज और संस्कृति में 'धर्म' की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जीवन के हर पहलू से जुड़ा है.

 

Question 46. धर्म किस प्रकार अपने उद्देश्य में सफल रहा है?
Answer: धर्म ने हमेशा इंसान को यह सोचने में मदद की है कि क्या सही है और क्या गलत. इसने हमारे व्यवहार और कार्यों को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
In simple words: धर्म ने मानव को उचित-अनुचित का भेद सिखाकर अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त की है.

🎯 Exam Tip: धर्म के सकारात्मक प्रभावों और समाज में उसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाएँ.

 

Question 47. वर्तमान युग में ईश्वर और मनुष्य का स्थान किसने ले लिया है?
Answer: आज के समय में ईश्वर की जगह पैसे ने ले ली है, और मनुष्य का स्थान मशीनों ने ले लिया है. यानी, अब लोगों के लिए पैसा और तकनीक ज़्यादा ज़रूरी हो गई है.
In simple words: आजकल ईश्वर की जगह पैसे ने और मनुष्य की जगह मशीन ने ले ली है.

🎯 Exam Tip: यह प्रश्न आधुनिक समाज के मूल्यों में आए बदलावों को दर्शाता है, इसलिए उत्तर देते समय वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखें.

 

Question 48. धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में हमारे देश की नींव किस पर आधारित है?
Answer: भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. इसकी नींव सभी धर्मों के प्रति सहनशीलता, धार्मिक सद्भाव (सभी धर्मों में मिल-जुलकर रहना) और नैतिकता पर आधारित है. इसका मतलब है कि सभी धर्मों को समान आदर मिलता है.
In simple words: हमारे देश की धर्मनिरपेक्ष नींव धार्मिक सहिष्णुता, सद्भाव और नैतिकता पर आधारित है.

🎯 Exam Tip: भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को समझाते समय उसके मुख्य आधार स्तंभों (सहिष्णुता, सद्भाव, नैतिकता) का उल्लेख करें.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. धार्मिक पवित्रता सापेक्षवादी है – स्पष्ट कीजिए।
Answer: हम धर्म को अक्सर आस्था और प्रथाओं की एक खास प्रणाली के रूप में देखते हैं, जिससे लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं. यह उनकी मान्यताओं और विश्वासों पर आधारित होती है, जो अलग-अलग समाजों में अलग-अलग हो सकती हैं. धार्मिक पवित्रता का मतलब यह है कि पवित्रता की भावना किसी एक धर्म या संस्कृति के लिए तय नहीं होती, बल्कि यह अलग-अलग संदर्भों में बदल सकती है. हर धर्म की अपनी पवित्रता की परिभाषा होती है.
In simple words: धार्मिक पवित्रता का मतलब है कि हर धर्म की अपनी मान्यताएँ और प्रथाएँ होती हैं, जो उस धर्म के लोगों के विश्वासों पर निर्भर करती हैं.

🎯 Exam Tip: सापेक्षवादी अवधारणा को समझाते समय, यह स्पष्ट करें कि पवित्रता की भावनाएँ अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों में कैसे भिन्न हो सकती हैं.

 

Question 2. आज भारतीय जीवन धारा प्रदूषित हो रही है, कैसे?
Answer: सांप्रदायिकता समाज की वह स्थिति है जहाँ अलग-अलग धार्मिक समूह एक-दूसरे से खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं. आजकल भारतीय जीवन में यह सांप्रदायिकता समाज को तोड़ रही है. सांप्रदायिकता हमेशा एक जैसी नहीं होती; जब किसी एक तरह की सांप्रदायिकता को बढ़ावा मिलता है, तो दूसरी तरह की सांप्रदायिकता भी जन्म लेती है. यह हमारे राष्ट्र के विकास में बाधा डालती है. आज हालत यह है कि हमने अपने पुराने धार्मिक मूल्यों को छोड़कर ऐसी सोच को अपना लिया है जो समाज को बाँटती है. इसी कारण आज भारतीय जीवन धारा खराब हो रही है.
In simple words: सांप्रदायिकता के कारण आज भारतीय जीवन धारा प्रदूषित हो रही है, क्योंकि लोग अपने पुराने मूल्यों को भूलकर आपस में भेदभाव कर रहे हैं.

🎯 Exam Tip: भारतीय जीवन धारा के प्रदूषण के कारण बताते समय, सांप्रदायिकता के नकारात्मक प्रभावों पर जोर दें और उसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करें.

 

Question 3. सभी धर्मों की मौलिक विशेषताएँ क्या हैं? बताइए।
Answer: सभी धर्मों की मूल भावनाएँ एक जैसी होती हैं, जिनकी मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
1. धर्म का मुख्य लक्ष्य सभी मनुष्यों की सेवा करना है.
2. धर्म अच्छे व्यवहार, दया, धैर्य और अहिंसा पर बल देता है.
3. धर्म हमें बुराइयों से दूर रहने और भलाई तथा अच्छे आचरण के रास्ते पर चलने की सीख देता है.
4. धर्म का मूल रूप आध्यात्मिक होता है, जिसमें दिखावा नहीं होता.
5. धर्म का काम लोगों का भला करना और उनकी प्रशंसा करना है.
In simple words: सभी धर्मों का लक्ष्य मानव सेवा, अच्छे आचरण, अहिंसा और आध्यात्मिक शुद्धता को बढ़ावा देना है.

🎯 Exam Tip: धर्मों की मौलिक विशेषताओं को बताते समय, सामान्य नैतिक मूल्यों और मानवीय कल्याण पर उनके साझा जोर को उजागर करें.

 

Question 4. किसी धर्म की उपयोगिता कैसे प्रमाणित होगी? बताइए।
Answer: किसी धर्म की उपयोगिता तभी साबित होती है जब वह दूसरे धर्मों के साथ मेल-जोल बिठाए. जो धर्म दूसरे धर्मों की निंदा करता है या उनके विश्वासों को नफ़रत से देखता है, वह कभी भी सच्चा और सार्वभौमिक नहीं हो सकता. धार्मिक मान्यताओं और विश्वासों को किसी प्रयोगशाला में परखा नहीं जा सकता. असल में, धर्म की महानता इसी में है कि वह ईमानदारी, दया, सच्चाई और अहिंसा पर जोर दे, बुराइयों से दूर रहने और अच्छे रास्ते पर चलने की शिक्षा दे, नैतिकता के नियमों पर खरा उतरे, और सभी मनुष्यों की भलाई की कामना करे.
In simple words: धर्म की उपयोगिता तब साबित होती है जब वह सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखे, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दे और मानव कल्याण की कामना करे.

🎯 Exam Tip: धर्म की उपयोगिता का मूल्यांकन करते समय, उसके सार्वभौमिक मूल्यों, सहिष्णुता और नैतिक प्रभाव को शामिल करें.

 

Question 6. धर्मों के ज्ञान व मूल्यों को कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है?
Answer: सभी धर्मों की आम मान्यताएँ और मूल्य भले ही एक जैसे हों, लेकिन वे हमेशा एक साथ काम करने के लिए तैयार नहीं होते. विभिन्न धर्मों का ज्ञान और मूल्य विज्ञान से भी ज़्यादा उपयोगी हो सकते हैं. जैसे एक वैज्ञानिक सत्य को तब ज़्यादा भरोसेमंद माना जाता है जब उसे दूसरे देशों के शोधों से भी परखा जाए, वैसे ही धर्म के क्षेत्र में भी कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों को एक साथ लाकर, उनका उपयोग सभी लोगों की भलाई के लिए करना चाहिए. अगर ऐसा होता है, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि धर्म की स्थिति और प्रतिष्ठा विज्ञान के बराबर होगी, और यह लोकतंत्र की उम्मीदों के अनुरूप भी होगा.
In simple words: धर्मों के ज्ञान और मूल्यों को तब उपयोगी बनाया जा सकता है जब सभी धर्मों के लोग मिलकर काम करें और उनके मूल सिद्धांतों का उपयोग मानव कल्याण के लिए करें.

🎯 Exam Tip: धर्मों के ज्ञान और मूल्यों को उपयोगी बनाने के लिए एकता, सार्वभौमिकता और मानव कल्याण पर जोर दें.

 

Question 7. धर्म का दुरुपयोग किस प्रकार हो रहा है? बताइये।
Answer: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, कई शासकों ने अपने-अपने धर्म को राजधर्म घोषित किया और अपने अनुयायियों की संख्या बढ़ाने के लिए धर्म के नाम पर युद्ध किए. धर्म का सहारा लेकर साम्राज्यों का विस्तार करने के लिए भी कई युद्ध हुए. इस्लाम, ईसाई, यहूदी और हिंदू धर्म से अलग हुए कुछ समूहों ने बलपूर्वक अपनी मान्यताओं और धर्म का विस्तार किया. पिछले लगभग दो हज़ार सालों में धर्म के नाम पर कई बार भयंकर खून-खराबा हुआ है. आज भी धार्मिक श्रेष्ठता साबित करने के लिए धर्म की आड़ में आतंकवादी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं. आतंकवादी दूसरे धर्मों के लोगों को निशाना बना रहे हैं. भारत इन गतिविधियों से सबसे ज़्यादा प्रभावित देशों में से एक है.
In simple words: धर्म का दुरुपयोग राजधर्म घोषित करने, युद्ध छेड़ने, साम्राज्य विस्तार और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.

🎯 Exam Tip: धर्म के दुरुपयोग के ऐतिहासिक और समकालीन उदाहरणों का उल्लेख करें, जैसे कि धार्मिक युद्ध और आतंकवाद.

 

Question 8. धर्म की ईसाई परिकल्पना पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: ईसाई धर्म एक ईश्वर में विश्वास करता है. इसकी शुरुआत लगभग 2016 साल पहले ईसा मसीह ने की थी. ईसाइयों के कई समूह हैं, जैसे- कैथोलिक, प्रोटेस्टेण्ट, आर्थोडोक्स, मॉरोनी, आदि. यह धर्म दुनिया में सबसे ज़्यादा अनुयायियों वाला है. इसके सिद्धांत दया, करुणा, सेवा, ईमानदारी, सहनशीलता और अहिंसा की पवित्र भावनाओं पर आधारित हैं. ईसाई धर्म के अनुसार, ईश्वर एक है और उसकी नज़र में सभी जीव समान हैं. ईसा मसीह ने मनुष्यों की ईमानदारी पर जोर दिया. ईसाई धर्म का पवित्र ग्रंथ बाइबिल है.
In simple words: ईसाई धर्म एकेश्वरवादी है, इसकी स्थापना ईसा मसीह ने की, और यह दया, करुणा, सेवा, अहिंसा जैसे सिद्धांतों पर आधारित है, जिसका पवित्र ग्रंथ बाइबिल है.

🎯 Exam Tip: ईसाई धर्म की मुख्य विशेषताओं, सिद्धांतों और संस्थापक का स्पष्ट उल्लेख करें.

RBSE Class 12 Political Science Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. इस्लाम धर्म की विकास प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: इस्लाम दुनिया के नए धर्मों में से एक है. इसकी शुरुआत 622 ईस्वी में मोहम्मद पैगम्बर ने की थी. आज दुनिया में लगभग 1.5 अरब लोग इस्लाम को मानते हैं, जो विश्व की कुल आबादी का पाँचवाँ हिस्सा है. भौगोलिक रूप से, इस्लाम का मध्य पूर्व के इलाकों पर कब्ज़ा है. यह मोरक्को से लेकर मिंडानाओ तक फैला हुआ है, जिसमें उत्तरी उपभोक्ता देशों से लेकर दक्षिणी वंचित देश शामिल हैं. अश्वेत अफ्रीका, भारत और चीन तक इस्लाम का प्रभाव फैला हुआ है. इस्लाम किसी एक राष्ट्रीय संस्कृति या सीमा में बंधा हुआ धर्म नहीं है, बल्कि यह एक सार्वभौमिक शक्ति है जो पूरी दुनिया में फैली हुई है. इसकी उत्पत्ति सातवीं शताब्दी में मक्का और मदीना में एक छोटे से समुदाय के रूप में हुई थी. मोहम्मद पैगम्बर ने इसे अपने दो अनुयायियों के साथ शुरू किया था. कुछ समय बाद ही अरब जातियाँ इस्लाम के झंडे तले एकजुट हो गईं. शुरुआत के दो सौ सालों के भीतर इस्लाम का प्रभाव पूरी दुनिया में फैल गया. इस्लाम ने अपने लगातार विजय अभियानों के ज़रिए पूरे मध्य, पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अरेबियन प्रायद्वीप, ईरानी भूभाग, मध्य एशिया और सिन्धु घाटी के क्षेत्रों को अपने प्रभाव में ले लिया.
इस्लाम ने मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं की विरासत को अपनाया. इस्लाम ने यूनानी दर्शन और विज्ञान को स्वीकार करके अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल दिया. फारसी शासन कला की बारीकियों को सीखने के बाद, इसने यहूदियों के कानून की तर्कशीलता और ईसाई धर्म के तरीकों को भी अपना लिया. पारसी द्वैतवाद और मेनेशिया की युक्तियों को भी इस्लाम ने अपने में मिला लिया. इस्लाम के बड़े शहरी केंद्र जैसे बगदाद, काहिरा, कोरडोबा, दमिश्क और समरकंद ऐसे स्थान बन गए जहाँ इन सांस्कृतिक परंपराओं की ऊर्जा को एक नए धर्म और राजनीति में बदल दिया गया.
In simple words: इस्लाम की शुरुआत 622 ईस्वी में मोहम्मद पैगम्बर ने की. यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है, जो मध्य पूर्व से लेकर एशिया और अफ्रीका तक फैला है. इस्लाम ने कई पुरानी सभ्यताओं से विचार लिए और खुद को एक सार्वभौमिक शक्ति के रूप में विकसित किया.

🎯 Exam Tip: इस्लाम के विकास को समझाते समय, उसकी स्थापना, भौगोलिक विस्तार और अन्य सभ्यताओं के साथ उसके सांस्कृतिक आदान-प्रदान को शामिल करें.

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