RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 28 भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ एवं गुटनिरपेक्षता

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Class 12 Political Science Chapter 28 भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ एवं गुटनिरपेक्षता RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ एवं गुटनिरपेक्षता

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. सह – अस्तित्व का भावार्थ है
(अ) जीओ और जीनो दो।
(ब) साथ-साथ संघर्ष करो।
(स) सबके साथ राष्ट्र की सीमाएँ मिला दो
(द) अपना अस्तित्व बनाए रखो
Answer: (अ) जीओ और जीनो दो।
In simple words: सह-अस्तित्व का मतलब है कि सभी को शांति से एक साथ रहने दिया जाए।

 

Question 2. भा वाला कथन है
(अ) उपानवशवाद का।वराघ
(ब) [विकल्प पाठ उपलब्ध नहीं]
Answer: (ब) [विकल्प पाठ उपलब्ध नहीं]
In simple words: यह प्रश्न अस्पष्ट है और विकल्प पाठ उपलब्ध नहीं है।

 

Question 3. 'शील' शब्द का भावार्थ है
(अ) मोहर
(ब) लिफाफा बंद करना
(स) आचरण
(द) शिलालेख
Answer: (स) आचरण
In simple words: 'शील' शब्द का अर्थ है अच्छा व्यवहार या आचरण।

 

Question 4. भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के किस अंग की स्थाई सदस्यता की माँग कर रखी है
(अ) महासभा
(ब) न्यास परिषद्
(स) सुरक्षा परिषद्
(द) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
Answer: (स) सुरक्षा परिषद्
In simple words: भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में एक स्थायी सदस्य बनना चाहता है।

 

Question 5. गुट – निरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक थे
(अ) नेहरू
(ब) नासिर
(स) टीटो।
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत नेहरू, नासिर और टीटो जैसे नेताओं ने मिलकर की थी।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय विदेश नीति की दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: भारत की विदेश नीति की दो मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
1. यह पंचशील के सिद्धांतों पर आधारित है, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देता है।
2. यह गुट-निरपेक्षता से जुड़ी हुई है, जिसका अर्थ है किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होना।
In simple words: भारत की विदेश नीति पंचशील के नियमों और गुट-निरपेक्ष रहने के सिद्धांत पर चलती है।

 

Question 2. पंच
Answer: यह प्रश्न अधूरा है, इसलिए पूरा उत्तर देना संभव नहीं है। पंचशील के सिद्धांत भारतीय विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
In simple words: प्रश्न अधूरा है, इसलिए उत्तर नहीं दिया जा सकता।

 

Question 3. गुट निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक सदस्य राष्ट्र कौन-से हैं ?
Answer: गुट निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक सदस्य राष्ट्र मुख्य रूप से ये हैं:
1. भारत
2. मिस्र
3. यूगोस्लाविया
In simple words: भारत, मिस्र और यूगोस्लाविया ने मिलकर गुट-निरपेक्ष आंदोलन शुरू किया था।

 

Question 4. बांग्लादेश को स्वतंत्रता कब मिली ?
Answer: बांग्लादेश को स्वतंत्रता वर्ष 1971 में मिली थी।
In simple words: बांग्लादेश को 1971 में आज़ादी मिली।

 

Question 5. यू.एन.ओ का पूरा नाम बताइए।
Answer: UNO का पूरा नाम 'United Nations Organization' है, जिसे हिंदी में संयुक्त राष्ट्र संघ कहा जाता है।
In simple words: यू.एन.ओ का पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र संघ है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पंचशील के सिद्धांतों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: पंचशील के सिद्धांत आचरण के पाँच मुख्य सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. एक-दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और सर्वोच्च सत्ता का सम्मान करना।
2. किसी भी देश पर बिना कारण के आक्रमण या युद्ध न करना।
3. एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, यानी अपनी सीमाओं में रहना।
In simple words: पंचशील में पाँच नियम हैं: एक-दूसरे की सीमा और ताकत का सम्मान करो, हमला मत करो और दूसरे के देश के अंदरूनी मामलों में दखल मत दो।

 

Question 2. उपनिवेशवाद क्या है ?
Answer: उपनिवेशवाद एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जहाँ एक विदेशी समाज दूसरे समाज पर राजनैतिक रूप से हावी होता है। यह सांस्कृतिक प्रभुत्व के साथ जबरदस्ती सामाजिक बदलाव लाता है। यह खासकर एक औद्योगिक पूँजीवाद से जुड़ा है, जहाँ वित्तीय एकाधिकार के साथ पूँजी का प्रवाह एक देश से दूसरे देश में होता है। प्रादेशिक विस्तार के रूप में, उपनिवेशवाद विकासशील वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था में असमान विकास के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय श्रम-विभाजन को भी दर्शाता है। उपनिवेशवाद का युग एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और विश्व के अन्य हिस्सों में 15वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं से शुरू हुआ था।
In simple words: उपनिवेशवाद में एक ताकतवर देश दूसरे कमजोर देश पर राज करता है, उनकी संस्कृति बदलता है और उनके धन का इस्तेमाल करता है।

 

Question 3. रंगभेद से आप क्या समझते हैं ?
Answer: रंगभेद एक ऐसी व्यवस्था है जो भेदभाव की नीति पर आधारित है। इसे प्रजाति-पार्थक्य भी कहते हैं, जिसमें कठोर जातीय आधार पर लोगों को अलग किया जाता है, उनका शोषण होता है और उन्हें दबाया जाता है। इसका सबसे पहले बड़े पैमाने पर इस्तेमाल 1948 में दक्षिणी अफ्रीका में हुआ था, लेकिन 1994 के बाद वहाँ एक लोकतांत्रिक सरकार बनने के बाद इसे आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया गया। पश्चिमी देशों और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी पहले काले-गोरे के आधार पर भेदभाव और शोषण होता था। नेल्सन मंडेला को भी रंगभेद का सामना करना पड़ा था।
In simple words: रंगभेद का मतलब है लोगों को उनकी त्वचा के रंग या जाति के आधार पर अलग करना और उनके साथ बुरा व्यवहार करना।

 

Question 4. गुट – निरपेक्षता का अर्थ बताइए।
Answer: गुट-निरपेक्षता के लिए असंलग्नता और तटस्थता जैसे कई शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब है कि कोई देश किसी भी युद्ध में दोनों पक्षों में से किसी का भी साथ नहीं देता, यानी वह किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं होता। गुट-निरपेक्षता का साफ मतलब है किसी भी देश के साथ सैनिक गुटबंदी में शामिल न होना, पश्चिमी या पूर्वी गुट से सैन्य दृष्टि से न बंधना, किसी भी आक्रामक संधि से दूर रहना, शीत युद्ध से अलग रहना और अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायपूर्ण ढंग से विदेश नीति चलाना।
In simple words: गुट-निरपेक्षता का मतलब है किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होना और युद्ध के समय किसी भी पक्ष का साथ न देना, बल्कि अपने देश के हित में सही फैसले लेना।

 

Question 5. सह – अस्तित्व के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारतीय विदेश नीति का सार “शान्तिपूर्ण सह – अस्तित्व” है। इसका मतलब है कि बिना किसी मनमुटाव के सभी देश मैत्रीपूर्ण ढंग से एक-दूसरे के साथ रहें। अगर अलग-अलग राष्ट्र पड़ोसियों की तरह शांति से नहीं रहेंगे तो दुनिया में शांति नहीं आ सकती। शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि देशों के बीच व्यवहार करने का एक तरीका भी है। भारत एशिया की महाशक्ति बनने की इच्छा नहीं रखता है और पंचशील तथा गुट-निरपेक्षता की नीति के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है। पंचशील के सिद्धांत हमारी विदेश नीति की नींव हैं। पंचशील के ये सिद्धांत ऐसे हैं कि यदि इन पर विश्व के देश अमल करें तो शांति स्थापित हो सकती है। पंचशील के सिद्धांतों में से एक मुख्य सिद्धांत “शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत को मानना” है। पंचशील के पाँच सिद्धांतों की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और चीन के प्रमुख चाऊ एन लाई ने मिलकर 29 अप्रैल, 1954 को की थी।
In simple words: सह-अस्तित्व का मतलब है कि सभी देश मिलजुलकर शांति से रहें। भारत की नीति है कि सभी देश एक-दूसरे के साथ दोस्ती रखें और बिना लड़ाई-झगड़े के रहें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है:
1. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति: भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति का समर्थन करता है। इसका मतलब है कि भारत सभी पड़ोसी देशों के साथ दोस्तीपूर्ण संबंध रखता है ताकि समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहे। "जीओ और जीने दो" हमारी भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है, जो आज भी हमारी आंतरिक और विदेश नीति को दिशा देता है।
2. साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध: साम्राज्यवाद वे देश होते हैं जो दूसरे देशों की स्वतंत्रता छीनकर उनका शोषण करते हैं। यह संघर्ष और युद्धों का सबसे बड़ा कारण है। भारत खुद साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का शिकार रहा है, इसलिए भारत की विदेश नीति इन दोनों अवधारणाओं का विरोध करती है। उपनिवेशवादी सोच व्यक्ति और समाज को संकीर्ण बनाती है, जिससे समाज का पूरा विकास रुक जाता है और वह आगे नहीं बढ़ पाता है।
3. रंगभेद का विरोध: भारत की विदेश नीति रंगभेद की नीति का जोरदार विरोध करती है। यह इस भावना को सभी देशों में गलत मानती है और इसे पूरी तरह नकार देती है। इसके तहत लोगों के साथ रंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और सभी को समान रूप से स्वीकार किया जाता है।
4. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का समर्थन: भारत की विदेश नीति अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का खुलकर समर्थन करती है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने इन संस्थाओं की सदस्यता स्वीकार की और उनके विभिन्न कार्यक्रमों व एजेंसियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसका समर्थन हमारी विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है।
In simple words: भारत की विदेश नीति शांति से रहने, दूसरों पर राज न करने, रंगभेद का विरोध करने और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का साथ देने पर आधारित है।

 

Question 2. “शक्ति गुटों के विधुवीकरण के पश्चात् गुट – निरपेक्षता की नीति अप्रासंगिक होती जा रही है।” इस कथन के आलोक में गुट – निरपेक्षता की नीति का विवेचन कीजिए।
Answer: गुट-निरपेक्षता की नीति शीत युद्ध के दौरान विकसित हुई थी। शीत युद्ध के खत्म होने और सोवियत संघ के विघटन के बाद, गुट-निरपेक्ष आंदोलन के औचित्य पर सवाल उठने लगे थे। आलोचकों का मानना था कि गुट-निरपेक्षता की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता थोड़ी कम हो गई है। हालांकि, सच्चाई यह है कि गुट-निरपेक्ष का मतलब विदेश नीति की स्वतंत्रता से है और इसका उद्देश्य संप्रभु राष्ट्रों की समानता और उनकी संप्रभुता व अखंडता को सुरक्षित रखना है। इस संदर्भ में यह अभी भी महत्वपूर्ण है। पहले, शीत युद्ध के समय, या कहें कि दो-ध्रुवीय व्यवस्था में, नव-स्वतंत्र देशों ने गुट-निरपेक्ष आंदोलन की सदस्यता इसलिए ली ताकि संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ जैसे दो महाशक्तियों के गुटों से अलग रह सकें। इससे इन देशों पर अनुचित प्रभाव नहीं पड़ पाता था और दुनिया में शांति बनी रहती थी। दोनों गुटों के बीच संतुलन बना रहता था और युद्ध की स्थिति पैदा नहीं होती थी। लेकिन शीत युद्ध के बाद और एक-ध्रुवीय विश्व में, गुट-निरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्यों में बदलाव आया और यह आज भी प्रासंगिक है क्योंकि:
1. विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं और चुनौतियों, मानवाधिकारों, विश्व-व्यापार, जलवायु परिवर्तन या संयुक्त राष्ट्र संघ के सुधारों के संबंध में सदस्य विकासशील देशों का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए एक प्रभावी मंच की जरूरत है। गुट-निरपेक्ष आंदोलन इसी मंच के रूप में काम कर रहा है।
2. सोवियत संघ के विघटन के बाद शीत युद्ध खत्म हो गया और दो-ध्रुवीय व्यवस्था भी समाप्त हो गई, लेकिन गरीब और कमजोर राष्ट्रों की सुरक्षा और संप्रभुता की चुनौतियाँ कम नहीं हुई हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में एक ध्रुवीय व्यवस्था के लक्षण उभर रहे हैं। इसलिए, विकासशील देशों की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए भी गुट-निरपेक्ष आंदोलन को जारी रखना जरूरी है।
3. भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं और गुट-निरपेक्षता की विभिन्न संस्थाओं में विकासशील देशों को अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व देने की आवश्यकता है। इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं पर गुट-निरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
4. गुट-निरपेक्ष आंदोलन दुनिया के विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक मूल्यों के आदान-प्रदान के लिए भी महत्वपूर्ण है।
5. गुट-निरपेक्षता का अर्थ है सैन्य गुटों से अलग रहना। दुनिया में नि:शस्त्रीकरण की आवश्यकता आज भी है, जिसे गुट-निरपेक्ष आंदोलन दोहराता रहा है ताकि दुनिया में शांति बनी रहे।
6. बड़े और पूँजीवादी देशों से सुरक्षा के लिए भी विकासशील देशों को एक आंदोलन की आवश्यकता है।
7. अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में अपने अस्तित्व और पहचान को बनाए रखने के लिए भी गुट-निरपेक्ष आंदोलन वर्तमान एक-ध्रुवीय विश्व में प्रासंगिक है।
In simple words: शीत युद्ध के बाद गुट-निरपेक्ष आंदोलन पर सवाल उठे थे, लेकिन यह अभी भी जरूरी है। यह गरीब देशों को ताकत देता है, शांति बनाए रखने में मदद करता है और उन्हें बड़े देशों से बचाता है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'स्वतंत्र विदेश नीति' का संकल्प किसका था?
(अ) पं. नेहरू का
(ब) गाँधी जी का
(स) भगत सिंह का
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) पं. नेहरू का
In simple words: स्वतंत्र विदेश नीति का विचार पं. नेहरू का था।

 

Question 2. विश्व का दो गुटों में विभाजन किस युद्ध के पश्चात् हुआ?
(अ) प्रथम विश्व युद्ध
(ब) द्वितीय विश्व युद्ध
(स) तृतीय विश्व युद्ध
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) द्वितीय विश्व युद्ध
In simple words: दुनिया दो बड़े गुटों में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बँटी।

 

Question 3. अरत्त दत्तरादल राट किस वर्ष हसा था?
(अ) 1989
(ब) 1961
(स) 1955
(द) 1950
Answer: (स) 1955
In simple words: यह एक अस्पष्ट प्रश्न है, पर उत्तर के अनुसार यह घटना 1955 में हुई थी।

 

Question 4. भारत – पाक युद्ध कब हुआ था?
(अ) 1935
(ब) 1945
(स) 1955
(द) 1965
Answer: (द) 1965
In simple words: भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में युद्ध हुआ था।

 

Question 5. भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र क्या है?
(अ) करो या मरो
(ब) जैसे के साथ तैसा व्यवहार
(स) जीओ और जीने दो।
(द) कोई भी नहीं।
Answer: (स) जीओ और जीने दो।
In simple words: भारतीय संस्कृति का मुख्य विचार है कि सब शांति से मिलजुलकर रहें।

 

Question 6. पंचशील का सिद्धान्त किससे संबंधित है?
(अ) असमानता
(ब) समानता
(स) भेदभाव की नीति
(द) कोई भी नहीं
Answer: (ब) समानता
In simple words: पंचशील के सिद्धांत समानता और शांतिपूर्ण संबंधों से जुड़े हैं।

 

Question 7. निम्न में से कौन - सा कथन असत्य है
(अ) किसी देश की विदेश नीति उस देश के विश्व के अन्य देशों के साथ संबंध पर आधारित होती है।
(ब) भारत की विदेश नीति की जड़ें 1947 में हैं जब भारत स्वतंत्र हुआ था।
(स) राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक सभी मुद्दे विदेश नीति के तहत आते हैं।
(द) शीत युद्ध के मध्य में स्वतंत्र प्रभुसत्ता संपन्न राज्य के रूप में भारत के जन्म ने विदेश, नीति को प्रभावित किया।
Answer: (स) राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक सभी मुद्दे विदेश नीति के तहत आते हैं।
In simple words: यह कहना गलत है कि विदेश नीति में सभी प्रकार के मुद्दे आते हैं, क्योंकि इसमें केवल कुछ खास मुद्दे ही शामिल होते हैं।

 

Question 8. निम्न में से कौन - सा कथन गुट – निरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्यों पर प्रकाश नहीं डालता?
(अ) उपनिवेशवाद से मुक्त हुए देशों को स्वतंत्र नीति अपनाने में समर्थ बनाना।
(ब) वैश्विक मामलों में तटस्थता की नीति अपनाना।
(द) अमेरिका और सोवियत संघ सीधे युद्ध में शामिल थे।
Answer: (द) अमेरिका और सोवियत संघ सीधे युद्ध में शामिल थे।
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य किसी भी युद्ध में सीधे तौर पर शामिल न होना है, इसलिए यह कथन उसके उद्देश्य के विपरीत है।

 

Question 10. गुट – निरपेक्ष देशों का पहला शिखर सम्मेलन कब हुआ?
(अ) 1961
(ब) 1955
(स) 1989
(द) 1960
Answer: (अ) 1961
In simple words: गुट-निरपेक्ष देशों की पहली बड़ी बैठक 1961 में हुई थी।

 

Question 11. गुट – निरपेक्ष देशों का पहला शिखर सम्मेलन कहाँ हुआ था?
(अ) बैडिंग
(ब) बेलग्रेड
(स) नई दिल्ली
(द) यूगोस्लाविया
Answer: (ब) बेलग्रेड
In simple words: गुट-निरपेक्ष देशों की पहली शिखर बैठक बेलग्रेड में हुई थी।

 

Question 12. कितने विकासशील देशों ने बेलग्रेड सम्मेलन में मुलाकात की?
(अ) 23
(ब) 24
(स) 25
(द) 28
Answer: (स) 25
In simple words: बेलग्रेड सम्मेलन में 25 विकासशील देशों ने हिस्सा लिया था।

 

Question 13. सोवियत संघ का विघटन किस वर्ष हुआ?
(अ) 1988
(ब) 1989
(स) 1990
(द) 1991
Answer: (स) 1990
In simple words: सोवियत संघ का अंत 1990 में हुआ था।

 

Question 15. 'विमुद्रीकरण' क्या है?
(अ) समझौता
(ब) निर्णय
(स) लक्ष्य
(द) नीति
Answer: (ब) निर्णय
In simple words: विमुद्रीकरण एक तरह का फैसला या नीति है।

 

Question 16. किस देश के लिए 'ऑपरेशन नीर' संचालित किया गया था?
(अ) मालद्वीप
(ब) रूस
(स) भूटान
(द) कोई भी नहीं
Answer: (अ) मालद्वीप
In simple words: 'ऑपरेशन नीर' मालदीव देश के लिए चलाया गया था।

 

Question 17. सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला कौन - सा देश है?
(अ) भारत
(ब) चीन
(स) जापान
(द) कोरिया
Answer: (अ) भारत
In simple words: भारत में मुस्लिम आबादी सबसे अधिक है।

 

Question 18. किस देश में शिया विचारधारा का वर्चस्व अधिक है?
(अ) इराक
(ब) ईरान
(स) सऊदी अरब
(द) कोई भी नहीं।
Answer: (ब) ईरान
In simple words: ईरान में शिया विचार को मानने वाले लोग ज़्यादा हैं।

 

Question 19. नि है?
Answer: (स) [विकल्प पाठ उपलब्ध नहीं]
In simple words: प्रश्न और विकल्प पाठ अस्पष्ट होने के कारण सटीक उत्तर देना संभव नहीं है।

 

Question 20. भारत का परम्परागत मित्र रहा है
(अ) रूस
(ब) चीन
(स) संयुक्त राज्य अमेरिका
(द) जर्मनी।
Answer: (अ) रूस
In simple words: भारत का पुराना और करीबी दोस्त रूस है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत की विदेश नीति के दो लक्ष्य बताइए।
Answer: भारत की विदेश नीति के दो मुख्य लक्ष्य इस प्रकार हैं:
1. राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुरक्षित रखना।
2. साम्राज्यवाद, नस्लवाद, तानाशाही और सैन्यीकरण का विरोध करना।
In simple words: भारत अपनी विदेश नीति से देश को एकजुट रखता है और साम्राज्यवाद तथा नस्लवाद जैसी गलत चीजों का विरोध करता है।

 

Question 2. भारतीय विदेश नीति का मूल मंत्र क्या है?
Answer: भारतीय विदेश नीति का मूल मंत्र गुट-निरपेक्षता है। गुट-निरपेक्षता का अर्थ है किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होना।
In simple words: भारत की विदेश नीति का मुख्य सिद्धांत गुट-निरपेक्ष रहना है, यानी किसी फौजी गुट का हिस्सा न बनना।

 

Question 3. भारत में विदेश नीति का निर्माता किसे माना जाता है ?
Answer: पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारत में विदेश नीति का निर्माता माना जाता है।
In simple words: पं. जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेश नीति बनाई थी।

 

Question 4. मिस्र पर हमला कब हुआ था ?
Answer: मिस्र पर हमला 1956 में हुआ था।
In simple words: 1956 में मिस्र पर हमला हुआ था।

 

Question 6. गुट – निरपेक्ष आंदोलन को आरंभ करने वाले देशों व उनके नेताओं के नाम बताइए।
Answer: गुट-निरपेक्ष आंदोलन को शुरू करने वाले देश और उनके नेता थे:
1. भारत (जवाहरलाल नेहरू)
2. मिस्र (नासिर)
3. यूगोस्लाविया (मार्शल टीटो)
In simple words: भारत के नेहरू, मिस्र के नासिर और यूगोस्लाविया के टीटो ने मिलकर गुट-निरपेक्ष आंदोलन शुरू किया था।

 

Question 7. गुट – निरपेक्ष आंदोलन सर्वप्रथम कब अस्तित्व में आया था ?
Answer: गुट-निरपेक्ष आंदोलन सबसे पहले 1955 में बांडुंग सम्मेलन में सामने आया था।
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत 1955 के बांडुंग सम्मेलन में हुई थी।

 

Question 8. बेलग्रेड सम्मेलन कब आयोजित हुआ था?
Answer: बेलग्रेड सम्मेलन 1961 ईस्वी में आयोजित हुआ था।
In simple words: बेलग्रेड सम्मेलन 1961 में हुआ था।

 

Question 9. 7वाँ गुट – निरपेक्ष आंदोलन किस वर्ष हुआ था?
Answer: 7वाँ गुट-निरपेक्ष आंदोलन 1988 ईस्वी में हुआ था।
In simple words: सातवाँ गुट-निरपेक्ष आंदोलन 1988 में आयोजित किया गया था।

 

Question 10. भारत ने किस शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी?
Answer: भारत ने 1988 में दिल्ली में आयोजित 7वें गुट-निरपेक्ष आंदोलन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
In simple words: भारत ने 1988 में दिल्ली में हुए 7वें गुट-निरपेक्ष आंदोलन की बैठक की मेजबानी की थी।

 

Question 11. 17 वाँ गुट – निरपेक्ष आंदोलन किस शहर में हुआ था ?
Answer: 17वाँ गुट-निरपेक्ष आंदोलन वेनेजुएला के मारगरीता शहर में संपन्न हुआ था।
In simple words: 17वाँ गुट-निरपेक्ष आंदोलन वेनेजुएला के मारगरीता में हुआ था।

 

Question 13. विश्व में अमेरिका केन्द्रित एक ध्रुवीय व्यवस्था कब स्थापित हुई ?
Answer: सोवियत संघ के नेतृत्व वाले साम्यवादी गुट के 1990 में विघटन के बाद विश्व में अमेरिका-केंद्रित एक ध्रुवीय व्यवस्था स्थापित हुई।
In simple words: सोवियत संघ के टूटने के बाद 1990 में दुनिया में अमेरिका ही सबसे बड़ी ताकत बन गया।

 

Question 14. 16वाँ शिखर सम्मेलन कहाँ हुआ था ?
Answer: 16वाँ शिखर सम्मेलन अगस्त 2012 में ईरान की राजधानी तेहरान में हुआ था।
In simple words: 16वाँ शिखर सम्मेलन 2012 में तेहरान, ईरान में हुआ था।

 

Question 15. भारत की विदेश नीति में गुट – निरपेक्षता को अपनाने का एक प्रमुख कारण लिखिए।
Answer: भारत किसी एक गुट से जुड़कर विश्व में तनाव की स्थिति पैदा करने का पक्षधर नहीं रहा है। इसलिए भारत ने गुट-निरपेक्षता की नीति अपनाई ताकि वह स्वतंत्र फैसले ले सके और किसी भी गुट के प्रभाव में न आए।
In simple words: भारत ने गुट-निरपेक्षता इसलिए अपनाई ताकि वह दुनिया में तनाव न बढ़ाए और स्वतंत्र रह सके।

 

Question 16. वर्तमान सरकार किस परम्परा के अनुरूप विदेश नीति के अनुपालन पर बल देती है?
Answer: वर्तमान सरकार 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की परम्परा के अनुरूप विदेश नीति के अनुपालन पर बल देती है, जिसका अर्थ है 'पूरी पृथ्वी एक परिवार है'।
In simple words: आज की सरकार 'पूरी दुनिया एक परिवार है' के विचार पर अपनी विदेश नीति चलाती है।

 

Question 17. भारत की वर्तमान विदेश नीति किस नीति का अनुसरण करेगी?
Answer: भारत की वर्तमान विदेश नीति आतंकवाद के प्रति शून्य सहृदयता (जीरो टॉलरेंस) की नीति का अनुसरण करेगी। इसका मतलब है कि भारत आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
In simple words: भारत की विदेश नीति आतंकवाद को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगी।

 

Question 18. वर्तमान सरकार की विदेश नीति को प्रेरित करने वाले कोई दो मूल सिद्धान्त लिखिए।
Answer: वर्तमान सरकार की विदेश नीति को प्रेरित करने वाले दो मुख्य सिद्धांत हैं:
1. निरन्तर वार्ता: समस्याओं को बातचीत से हल करना।
2. राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन: देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देना।
In simple words: सरकार की विदेश नीति के दो खास सिद्धांत हैं - हमेशा बातचीत करना और देश की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना।

 

Question 20. विश्व का तीसरा सबसे बड़ा खनिज तेल आयातक देश कौन - सा है?
Answer: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा खनिज तेल आयातक देश है।
In simple words: भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा कच्चा तेल खरीदता है।

 

Question 21. ISIS का पूर्ण नाम क्या है ?
Answer: ISIS का पूर्ण नाम 'Islamic State of Iraq & Syria' है। यह एक आतंकवादी समूह है जो इराक और सीरिया में सक्रिय है।
In simple words: ISIS का पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया है, जो इराक और सीरिया में सक्रिय एक आतंकी समूह है।

 

Question 22. भारत और रूस के परम्परागत संबंधों में पुरानी प्रगाढ़ता में कमी आने के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: भारत और रूस के पारंपरिक संबंधों में कमी आने के दो मुख्य कारण ये हैं:
1. सोवियत संघ का विघटन: सोवियत संघ के टूटने से रूस के साथ भारत के पुराने मजबूत संबंध थोड़े कमजोर हुए।
2. भारत द्वारा बाजारोन्मुखी वैश्वीकरण की अर्थव्यवस्था को अपनाना: भारत ने समाजवादी अर्थव्यवस्था से हटकर खुली बाजार व्यवस्था को अपनाया, जिससे वैश्विक स्तर पर उसके अन्य देशों से भी संबंध मजबूत हुए।
In simple words: रूस और भारत के संबंध सोवियत संघ के टूटने और भारत के आर्थिक बदलाव के कारण थोड़े कमज़ोर हुए हैं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 28 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएं / लक्षण लिखिए।
Answer: भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ या लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति: भारत शांति से सभी के साथ रहने में विश्वास रखता है।
2. उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध करना: भारत दूसरे देशों पर राज करने या उनके शोषण के खिलाफ है।
3. रंगभेद का विरोध करना: भारत रंग या जाति के आधार पर किसी भी भेदभाव के विरुद्ध है।
4. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को समर्थन प्रदान करना: भारत दुनिया भर की संस्थाओं को सहयोग देता है।
5. पंचशील के सिद्धान्तों में आस्था रखना: भारत पंचशील के पाँच नियमों का पालन करता है।
6. गुट-निरपेक्षता की नीति का पालन करना: भारत किसी भी सैन्य गुट में शामिल नहीं होता।
7. नि:शस्त्रीकरण का समर्थन करना: भारत हथियारों की दौड़ कम करने का समर्थन करता है।
8. समय के अनुरूप गतिशील विदेश नीति: भारत अपनी नीति को समय के अनुसार बदलता रहता है।
In simple words: भारत की विदेश नीति शांति, समानता, गुट-निरपेक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है, और यह समय के साथ बदलती रहती है।

 

Question 2. भारत का विदश नाात क प्रमुख लक्ष्या अथवा उद्दश्यों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: भारत की विदेश नीति के प्रमुख लक्ष्य और उद्देश्य संक्षेप में निम्नलिखित हैं:
1. हथियारों की होड़ का विरोध: विशेषकर आण्विक हथियारों की होड़ का विरोध करना और व्यापक नि:शस्त्रीकरण का समर्थन करना।
2. राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देना: राष्ट्र की स्वतंत्रता और अखंडता पर मंडराने वाले सभी प्रकार के खतरों को रोकना।
3. विश्वव्यापी तनाव दूर करना: विभिन्न देशों के बीच पारस्परिक समझौते को बढ़ावा देना और संघर्ष-नीति व सैन्य-गुटबाजी का विरोध करना।
4. साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद, नस्लवाद, पृथकतावाद और सैन्यवाद का विरोध करना: ये सभी चीजें शोषण और असमानता को बढ़ाती हैं।
5. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पंचशील के आदर्शों को बढ़ावा देना: भारत शांति और सह-अस्तित्व के सिद्धांत में विश्वास रखता है।
6. विश्व के समस्त राष्ट्रों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना: विशेषकर पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अच्छे संबंध बनाना।
7. राष्ट्रों के बीच संघर्ष पूर्ण वातावरण को कम करना: देशों के बीच समझ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना।
In simple words: भारत की विदेश नीति का मुख्य लक्ष्य परमाणु हथियारों को रोकना, देश को सुरक्षित रखना, शांति को बढ़ावा देना, और सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना है।

 

Question 3. 'शान्तिपूर्ण सह - अस्तित्व' से आप क्या समझते हैं? अथवा भारतीय विदेश नीति के सार 'शान्तिपूर्ण सह - अस्तित्व' का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत की विदेश नीति का मुख्य विचार 'शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व' है। इसका मतलब है कि बिना झगड़े के एक देश दूसरे देश के साथ दोस्ताना तरीके से रहे। अगर अलग-अलग देश एक-दूसरे के साथ पड़ोसियों की तरह शांति से नहीं रहेंगे, तो दुनिया में शांति नहीं आ सकती। शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि यह देशों के बीच संबंध बनाने का एक तरीका भी है। भारत एशिया की बड़ी शक्ति बनने की इच्छा नहीं रखता है और पंचशील तथा गुट-निरपेक्षता की नीति के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है। पंचशील के सिद्धांत हमारी विदेश नीति के मुख्य आधार हैं। पंचशील का एक बड़ा सिद्धांत 'शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व' को मानना है। पंचशील के पांच सिद्धांत, जिनकी घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एन लाई ने 29 अप्रैल, 1954 को की थी, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित हैं।
In simple words: भारत की विदेश नीति 'शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व' पर आधारित है, जिसका अर्थ है बिना झगड़े के देशों का मिल-जुलकर रहना। यह दुनिया में शांति के लिए जरूरी है और पंचशील सिद्धांतों का हिस्सा है, जिसकी घोषणा नेहरू और चाऊ एन लाई ने 1954 में की थी।

🎯 Exam Tip: जब भी 'सह-अस्तित्व' या 'पंचशील' जैसे शब्दों का जिक्र हो, तो शांतिपूर्ण सह-जीवन और आपसी सम्मान के सिद्धांतों को प्रमुखता से लिखें, साथ ही संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं को भी शामिल करें।

 

Question 4. भारत की विदेश नीति जातिवाद एवं रंगभेद का विरोध करती है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत की विदेश नीति का एक खास पहलू जाति-भेदभाव और रंगभेद का विरोध करना है। भारत एक ऐसा देश है जिसने संयुक्त राष्ट्र संघ में भी जातीयता और रंगभेद की नीति का जोरदार विरोध किया है। भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति के कारण ही जातीय भेदभाव के खिलाफ इतनी मजबूत और प्रभावी प्रतिक्रिया संभव हो पाई। यह नीति सभी को समान मानती है और किसी भी तरह के रंग या जाति के आधार पर भेदभाव को अस्वीकार करती है।
In simple words: भारत की विदेश नीति जातिवाद और रंगभेद के खिलाफ है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी इसका विरोध किया है, और इसकी गुट-निरपेक्ष नीति ने इस विरोध को सफल बनाया है।

🎯 Exam Tip: नस्लीय भेदभाव के विरोध में भारत की भूमिका को दर्शाते समय, संयुक्त राष्ट्र और नेल्सन मंडेला के प्रयासों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. भारत की विदेश नीति की एक विशेषता के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय विवादों के शान्तिपूर्ण समाधान पर एक टिप्पणी लिखिए।
Answer: आज के समय में हर देश को दूसरे देशों से संबंध बनाने के लिए अपनी विदेश नीति बनानी पड़ती है। आसान शब्दों में कहें तो, विदेश नीति वह तरीका है जिससे एक देश दूसरे देशों के साथ व्यवहार करता है। भारत ने भी अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है, जिसकी कई विशेषताओं में से एक है अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांति से सुलझाना। इस काम को अच्छे से करने के लिए भारत ने दुनिया को पंचशील के सिद्धांत दिए और हमेशा संयुक्त राष्ट्र संघ का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा समय-समय पर किए गए शांति प्रयासों में भारत ने हमेशा सहयोग दिया है। जैसे, स्वेज नहर, हिन्द-चीन, वियतनाम, कांगो, साइप्रस की समस्याओं, भारत-पाकिस्तान युद्ध, ईरान-इराक युद्ध जैसे कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए भारत ने बहुत कोशिशें कीं और ज्यादातर प्रयासों में सफलता भी पाई।
In simple words: भारत की विदेश नीति की एक मुख्य बात अंतरराष्ट्रीय झगड़ों को शांति से सुलझाना है। भारत ने पंचशील सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करके कई बड़े विवादों को सुलझाने में मदद की है।

🎯 Exam Tip: जब अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान की बात हो, तो भारत की मध्यस्थता भूमिका और पंचशील सिद्धांतों को याद रखें।

 

Question 6. पं. जवाहरलाल नेहरू के अनुसार गुट-निरपेक्षता का क्या अर्थ है?
Answer: पंडित जवाहरलाल नेहरू के अनुसार, गुट-निरपेक्षता का मतलब सिर्फ चुप रहना या किसी का पक्ष न लेना नहीं है। यह एक सकारात्मक नीति है। इसका मतलब है सही और न्यायपूर्ण चीजों का समर्थन करना और गलत व अन्यायपूर्ण चीजों की आलोचना करना। नेहरू जी ने समझाया कि अगर स्वतंत्रता या न्याय खतरे में हो, या कहीं हमला हो, तो हम तटस्थ नहीं रह सकते और न ही भविष्य में रहेंगे। इसका अर्थ है कि हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
In simple words: नेहरू जी के अनुसार, गुट-निरपेक्षता का मतलब सही का साथ देना और गलत का विरोध करना है, न कि सिर्फ चुप रहना।

🎯 Exam Tip: नेहरू की गुट-निरपेक्षता की परिभाषा में 'सकारात्मक' और 'न्यायपूर्ण' जैसे शब्दों का प्रयोग करें ताकि पूर्ण अंक मिलें।

 

Question 7. क्या गुट - निरपेक्षता और तटस्थता एक ही हैं ? बताइए।
Answer: ज़्यादातर लोग गुट-निरपेक्षता को तटस्थता मान लेते हैं, लेकिन यह बिल्कुल गलत है। गुट-निरपेक्षता एक विदेश नीति है, जबकि तटस्थता एक खास स्थिति होती है। तटस्थता तभी होती है जब दो या उससे अधिक देशों के बीच युद्ध चल रहा हो, उस समय किसी का पक्ष न लेना तटस्थता है। इसके अलावा तटस्थ रहने का कोई मतलब नहीं होता। गुट-निरपेक्षता का दायरा बहुत बड़ा है, जबकि तटस्थता एक छोटा सा शब्द है जो सिर्फ युद्ध की स्थिति में लागू होता है। गुट-निरपेक्षता का अर्थ है हर स्थिति में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना।
In simple words: नहीं, गुट-निरपेक्षता और तटस्थता एक नहीं हैं। गुट-निरपेक्षता एक व्यापक नीति है, जबकि तटस्थता केवल युद्ध के समय किसी का पक्ष न लेने की स्थिति है।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्षता को तटस्थता से अलग करते समय, इसके व्यापक दायरे और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर जोर दें।

 

Question. भारत की विदेश नीति में गुट-निरपेक्षता को अपनाने के कारण बताइए।
Answer: भारत की विदेश नीति में गुट-निरपेक्षता अपनाने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं: 1. भारत के शुरुआती नेताओं को गुट-निरपेक्षता की नीति पर पूरा भरोसा था। 2. गुट-निरपेक्षता की नीति भारत की सैनिक, सामाजिक, भौगोलिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जरूरतों के हिसाब से सही थी। 3. गुट-निरपेक्षता की नीति भारत के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अलग-अलग संस्कृतियों वाले समाज के लिए उपयुक्त थी। 4. भारत कभी नहीं चाहता था कि किसी एक गुट से जुड़कर दुनिया में तनाव बढ़े। 5. भारत अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्वतंत्र नीति अपनाना (जो किसी दूसरी शक्ति के प्रभाव से मुक्त हो) अपने लिए ज़्यादा फायदेमंद लगा। 6. भारत अपने आर्थिक विकास के लिए दोनों बड़ी शक्तियों के साथ बराबरी के संबंध बनाए रखने का समर्थक रहा है।
In simple words: भारत ने गुट-निरपेक्षता को इसलिए अपनाया क्योंकि नेताओं को इस पर विश्वास था, यह भारत की जरूरतों के अनुकूल थी, ऐतिहासिक रूप से सही थी, भारत विश्व में तनाव नहीं बढ़ाना चाहता था, स्वतंत्र नीति अपनाना फायदेमंद था और आर्थिक विकास के लिए सभी से समान संबंध बनाना जरूरी था।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्षता अपनाने के कारणों को बताते समय, भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता और बहुलवादी संस्कृति पर ध्यान दें।

 

Question 9. गुट - निरपेक्ष आंदोलन के उदय के लिए उत्तरदायी परिस्थितियों पर प्रकाश डालिए।
Answer: गुट-निरपेक्ष आंदोलन कुछ खास परिस्थितियों में शुरू हुआ था। शुरुआत में यह भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। लेकिन, जब दुनिया दो बड़े गुटों (अमेरिकी और सोवियत संघ) में बंट गई, तब गुट-निरपेक्षता एक आंदोलन बन गया। कुछ और देशों ने भी इसे सैनिक गुटों में बंटे विश्व में शांति लाने का जरिया माना। युद्ध के करीब आती दुनिया को गुट-निरपेक्षता की जरूरत थी। जिन देशों में सैनिक हथियार बनाने की होड़ थी, उन्हें भी गुट-निरपेक्षता की आवश्यकता महसूस हुई। भारत ने यह विदेश नीति और आंदोलन दोनों दुनिया को दिए, जिससे शांति और संतुलन बना रहे।
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन तब शुरू हुआ जब दुनिया दो गुटों में बंट गई और शांति तथा संतुलन की जरूरत महसूस हुई। भारत ने इसे एक महत्वपूर्ण विदेश नीति के रूप में शुरू किया।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्ष आंदोलन के उदय की परिस्थितियों को समझाते समय, शीत युद्ध और परमाणु हथियारों की होड़ के संदर्भ में लिखें।

 

Question 10. गुट - निरपेक्ष आंदोलन के उदय में भारत की क्या भूमिका रही?
Answer: जब भारत आज़ाद हुआ, तब उसने गुट-निरपेक्षता को अपनी विदेश नीति का मुख्य हिस्सा बना लिया। इसका मतलब था कि भारत ने अपनी विदेश नीति में यह बात शामिल कर ली कि वह किसी भी सैन्य गुट का हिस्सा नहीं बनेगा। भारत ने अपनी गुट-निरपेक्षता की विदेश नीति को एक नया रूप और दिशा दी, जिससे यह एक आंदोलन बन गया। भारत के जवाहरलाल नेहरू ने मिस्र के नासिर, इंडोनेशिया के डॉ. सुकर्णो और यूगोस्लाविया के मार्शल टीटो के साथ मिलकर गुट-निरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत की। पहला गुट-निरपेक्ष आंदोलन 1961 में हुआ था, जिसमें 25 देशों ने भाग लिया था। यह आंदोलन काफी बढ़ चुका है। गुट-निरपेक्षता की नीति मुख्य रूप से इन सिद्धांतों पर आधारित है: 1. गुट-निरपेक्ष राष्ट्र दोनों गुटों से अलग रहकर अपनी स्वतंत्र नीति अपनाते हैं। वे गुण-दोष के आधार पर दोनों गुटों का समर्थन या आलोचना करते हैं। 2. गुट-निरपेक्ष राष्ट्र सभी देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश करते हैं। उन्हें तटस्थ रहने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं करनी पड़ती। 3. गुट-निरपेक्ष राष्ट्र युद्ध में किसी पक्ष के प्रति सहानुभूति रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में वे सैनिक सहायता के बजाय घायलों के लिए दवाइयां और चिकित्सा सुविधाएँ दे सकते हैं। 4. गुट-निरपेक्ष राष्ट्र निष्पक्ष रहते हैं। वे युद्धरत देशों को अपने क्षेत्र में युद्ध करने की अनुमति नहीं देते और न ही उन्हें किसी अन्य देश के साथ युद्ध करने के लिए सैन्य सुविधाएँ प्रदान करते हैं। 5. गुट-निरपेक्ष राष्ट्र किसी भी प्रकार की सैन्य संधि या गुप्त समझौते में शामिल नहीं होते हैं।
In simple words: भारत ने आजादी के बाद गुट-निरपेक्षता को अपनी विदेश नीति का आधार बनाया। नेहरू जी ने कई अन्य नेताओं के साथ मिलकर 1961 में पहले गुट-निरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत की। इस नीति के तहत देश स्वतंत्र रहकर निर्णय लेते हैं, सभी से मैत्रीपूर्ण संबंध रखते हैं, युद्ध में मानवतावादी सहायता देते हैं, निष्पक्ष रहते हैं, और किसी सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं होते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत की भूमिका को बताते समय, प्रमुख नेताओं के नाम, आंदोलन की स्थापना वर्ष और इसके मूल सिद्धांतों का उल्लेख करें।

 

Question 12. गुट - निरपेक्ष आंदोलन के मुख्य उद्देश्य या सिद्धान्त कौन से हैं?
Answer: गुट-निरपेक्ष आंदोलन के मुख्य उद्देश्य और सिद्धांत निम्नलिखित हैं: 1. विश्व-शांति बनाए रखना - गुट-निरपेक्ष देश सैन्य गुटों से दूर रहते हैं ताकि दुनिया में अशांति को रोक सकें। यदि कोई संघर्ष होता है, तो वे दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर शांति स्थापित करने की कोशिश करते हैं। 2. उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद को खत्म करना - उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद शोषण को बढ़ावा देते हैं। इसलिए, गुट-निरपेक्ष आंदोलन इन्हें जड़ से खत्म करने के लिए लगातार प्रयास करता है। 3. सह-अस्तित्व या सभी देशों के साथ मिलकर रहना - गुट-निरपेक्ष आंदोलन लड़ाई-झगड़े के खिलाफ है। यह मेलजोल और सह-अस्तित्व की भावना में विश्वास रखता है। 4. रंगभेद नीति का खंडन - गुट-निरपेक्ष आंदोलन समानता के सिद्धांत पर आधारित है। यह रंगभेद का कड़ा विरोधी है और इसका खंडन करता है। इसी आंदोलन के दबाव के कारण दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने रंगभेद की नीति छोड़कर नेल्सन मंडेला को रिहा किया और रंगभेद के कई कानूनों को रद्द किया। 5. मानवाधिकारों में विश्वास - गुट-निरपेक्ष आंदोलन मानवाधिकारों का पूरा सम्मान करता है, क्योंकि अगर इंसान आज़ाद नहीं है तो उसकी बाकी सभी उपलब्धियां बेकार हैं।
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन का लक्ष्य विश्व शांति, उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का अंत, सह-अस्तित्व, रंगभेद का विरोध और मानवाधिकारों का सम्मान करना है।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्यों को समझाते समय, विश्व शांति, स्वतंत्रता, समानता और मानवाधिकार जैसे प्रमुख मूल्यों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question. वर्तमान विश्व के संदर्भ में गुटनिरपेक्षता का व्यापक महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्तमान विश्व में गुट-निरपेक्षता का महत्व इन बातों से समझा जा सकता है: 1. गुट-निरपेक्षता ने तीसरे विश्व युद्ध की संभावना को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2. गुट-निरपेक्ष राष्ट्रों ने साम्राज्यवाद को खत्म करने और दुनिया में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। 3. गुट-निरपेक्षता के कारण ही दुनिया की दोनों बड़ी शक्तियों के बीच शांति बनी रही। 4. गुट-निरपेक्ष सम्मेलनों में सदस्य देशों के बीच होने वाले झगड़ों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया गया है। 5. गुट-निरपेक्ष राष्ट्रों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक-दूसरे को काफी मदद दी है। 6. गुट-निरपेक्षता ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर डाला है। 7. यह आंदोलन गरीब और पिछड़े देशों के आर्थिक विकास पर जोर दे रहा है। 8. गुट-निरपेक्ष आंदोलन ने दुनिया के गुलाम देशों को आज़ाद कराने और रंगभेद की नीति का विरोध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
In simple words: गुट-निरपेक्षता ने विश्व युद्धों को रोकने, शांति बनाए रखने, साम्राज्यवाद और रंगभेद का विरोध करने, और गरीब देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्षता के महत्व को दर्शाते समय, विश्व शांति, साम्राज्यवाद-विरोध और विकासशील देशों के सहयोग पर इसके प्रभावों को हाइलाइट करें।

 

Question 14. गुट - निरपेक्षता की नीति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Answer: गुट-निरपेक्षता की नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: 1. यह नीति अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्वतंत्र रूप से अपनी नीतियाँ बनाने पर जोर देती है। 2. यह नीति निष्पक्ष, पूर्वाग्रह से मुक्त, स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करती है। 3. यह नीति सिर्फ तटस्थ नहीं है, बल्कि विश्व राजनीति की जटिल गुटीय प्रभावों से मुक्त एक स्वतंत्र नीति है। 4. यह नीति अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से सुलझाने का समर्थन करती है। 5. यह नीति शीत युद्ध के दौरान दो शक्तिशाली गुटों से दूर रहने पर जोर देती थी। 6. यह नीति अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल्यांकन उनके गुण-दोष के आधार पर, वस्तुनिष्ठ रूप से करने का पक्षधर रही है। 7. गुट-निरपेक्षता की नीति विरोधी गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल देती है। 8. यह नीति अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिलताओं से अलग रहने की नहीं, बल्कि विश्व-राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली नीति है।
In simple words: गुट-निरपेक्षता एक स्वतंत्र, निष्पक्ष नीति है जो विश्व शांति, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, शीत युद्ध के गुटों से दूरी, और अंतरराष्ट्रीय संतुलन पर जोर देती है, साथ ही मानवाधिकारों का समर्थन करती है।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्षता की विशेषताओं का वर्णन करते समय, स्वतंत्र नीति, वस्तुनिष्ठता और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दें।

 

Question 15. 'आज भी विश्व की प्रमुख चुनौतियों का सामना करने के लिए गुटनिरपेक्षता आंदोलन प्रभावशाली है।' कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह बात सही है कि आज भी दुनिया की बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए गुट-निरपेक्षता आंदोलन बहुत असरदार है। यह एक ऐसा मंच है जो दुनिया के विकासशील देशों को एक साथ मिलकर काम करने का मौका देता है, जिससे वे विश्व की प्रमुख चुनौतियों, जैसे सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी बात रख सकें। यह आंदोलन दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विचारों के आदान-प्रदान के लिए भी बहुत उपयोगी है।
In simple words: गुट-निरपेक्ष आंदोलन आज भी दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विकासशील देशों को एक साथ मिलकर काम करने का मंच देता है।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्ष आंदोलन की वर्तमान प्रासंगिकता को दर्शाते समय, विकासशील देशों के लिए एक मंच और साझा चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर जोर दें।

 

Question 16. वैश्वीकरण के युग में गुटनिरपेक्षता आंदोलन अपनी परम्परागत महत्ता खो चुका है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: गुट-निरपेक्षता की नीति का मतलब है किसी भी सैन्य गुट जैसे नाटो, सीटो या वारसा संगठनों में शामिल न होकर उनसे अलग रहना। यह एक ऐसी नीति है जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्वतंत्र निर्णय लेने पर जोर देती है। यह नीति सभी गंभीर अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर बिना पक्षपात, पूर्वाग्रह के, स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करती है। यह सिर्फ तटस्थ रहने की नीति नहीं है, बल्कि जटिल राजनीतिक गुटों के प्रभाव से मुक्त एक स्वतंत्र नीति है। राजनीतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि गुट-निरपेक्षता की नीति शीत युद्ध के दौरान पैदा हुई थी, जब दुनिया दो शक्ति केंद्रों - अमेरिका और सोवियत संघ - में बंटी हुई थी। सोवियत संघ के कम्युनिस्ट गुट के 1990 में विघटन के बाद, दुनिया में अमेरिकी-केंद्रित एक ध्रुवीय व्यवस्था स्थापित हो गई। उनके अनुसार, वैश्वीकरण के इस युग में गुट-निरपेक्षता आंदोलन अपनी पुरानी अहमियत खो चुका है और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जरूरतों के हिसाब से उतना प्रासंगिक नहीं रहा है।
In simple words: गुट-निरपेक्षता का अर्थ है सैन्य गुटों से अलग रहकर स्वतंत्र नीति अपनाना। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शीत युद्ध के बाद और वैश्वीकरण के दौर में, जब दुनिया एकध्रुवीय हो गई है, गुट-निरपेक्ष आंदोलन अपनी पुरानी प्रासंगिकता खो चुका है।

🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के युग में गुट-निरपेक्षता की प्रासंगिकता पर टिप्पणी करते समय, शीत युद्ध के अंत और नई विश्व व्यवस्था के प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 17. गुट - निरपेक्षता और भारत की वर्तमान सरकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: गुट-निरपेक्षता और भारत की वर्तमान सरकार: भारत गुट-निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक देशों में से एक है। भारत आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित है। पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। इस आतंकवाद से लड़ने के लिए, पाकिस्तान को अलग-थलग करने और आतंकवाद के मुद्दे पर उसे घेरने के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन एक सही मंच प्रदान करता है। इस समस्या से निपटने के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों का समर्थन बहुत जरूरी है। भारत कई सालों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है, और इसमें भी गुट-निरपेक्ष देशों के समर्थन की लगातार जरूरत है। गुट-निरपेक्ष देशों का समर्थन निश्चित रूप से भारत की इस मांग को मजबूत बनाता है। भारत जिस तरह की विदेश नीति अपना रहा है, उसे देखते हुए गुट-निरपेक्ष नीति आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आज की विदेश नीति को देखते हुए हमें इस संगठन की सदस्यता भले बनाए रखनी चाहिए।
In simple words: भारत, जो गुट-निरपेक्ष आंदोलन का संस्थापक सदस्य है, आतंकवाद जैसी चुनौतियों से लड़ने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने के लिए इस मंच का उपयोग करता है। वर्तमान सरकार भी इसकी प्रासंगिकता मानती है।

🎯 Exam Tip: भारत की वर्तमान विदेश नीति और गुट-निरपेक्षता के संबंध को बताते समय, आतंकवाद और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 19. वर्तमान सरकार की विदेश नीति को प्रेरित करने वाले पांच मूल सिद्धांत बताइए।
Answer: वर्तमान सरकार की विदेश नीति को प्रेरित करने वाले पांच मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं: 1. लगातार बातचीत करना। 2. आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना। 3. भारत की प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि करना। 4. राष्ट्रीय सुरक्षा का समर्थन करना। 5. भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल्यों को बढ़ावा देना।
In simple words: वर्तमान सरकार की विदेश नीति के पांच सिद्धांत हैं: बातचीत, आर्थिक सहयोग, देश का सम्मान बढ़ाना, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना।

🎯 Exam Tip: वर्तमान सरकार की विदेश नीति के सिद्धांतों को बताते समय, राष्ट्रीय हित, सांस्कृतिक संबंध और आर्थिक विकास के बिंदुओं को स्पष्ट करें।

 

Question 20. किसी देश के लिए विदेशों से संबंध स्थापित करना क्यों महत्वपूर्ण होता है?
Answer: हर स्वतंत्र देश के लिए विदेशों से संबंध बनाना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि उसकी स्वतंत्रता असल में विदेशी संबंधों पर ही निर्भर करती है। यही स्वतंत्रता की पहचान भी है। बाकी सब तो देश के अंदर की चीजें होती हैं। जिस तरह एक व्यक्ति या परिवार के व्यवहार को घर के अंदर और बाहर के हालात प्रभावित करते हैं, उसी तरह एक देश की विदेश नीति पर भी देश के अंदरूनी और अंतरराष्ट्रीय माहौल का असर पड़ता है। इस निर्भरता का असर उनकी विदेश नीति पर भी होता है। जैसे, भारत ने भी अपनी विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों के सिद्धांतों पर आधारित किया है। अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भारत ने अपने लक्ष्य मैत्रीपूर्ण रखे हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारत ने दुनिया के सभी देशों से दोस्ताना संबंध बनाए हैं। इसी वजह से भारत आज आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में तेज़ी से तरक्की कर रहा है।
In simple words: देशों के लिए विदेशों से संबंध बनाना जरूरी है क्योंकि यह उनकी स्वतंत्रता की पहचान है और अंतरराष्ट्रीय माहौल उनकी विदेश नीति को प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: विदेश नीति के महत्व पर लिखते समय, राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक विकास और वैश्विक मंच पर प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल करें।

 

Question 21. भारत और रूस के संबंधों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत और रूस दोनों हमेशा से अच्छे दोस्त रहे हैं। लेकिन, 1991 में सोवियत संघ के टूटने और भारत द्वारा समाजवादी अर्थव्यवस्था की जगह बाजार-केंद्रित वैश्वीकरण को अपनाने के बाद, दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों में थोड़ी कमी आई है। इसके बावजूद, भारत आज भी रूस से हथियार खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। रूस भारत की परमाणु योजनाओं के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत और रूस कई वैज्ञानिक परियोजनाओं में मिलकर काम करते हैं। हालांकि, दुनिया में तेजी से बदलती राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए भारत के लिए अमेरिका और जर्मनी जैसे अन्य यूरोपीय देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाना जरूरी हो गया है।
In simple words: भारत और रूस लंबे समय से मित्र हैं, लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद संबंधों में कुछ बदलाव आया है। रूस भारत का बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है और परमाणु परियोजनाओं में भी सहयोगी है, पर अब भारत अमेरिका और यूरोपीय देशों से भी संबंध मजबूत कर रहा है।

🎯 Exam Tip: भारत-रूस संबंधों को समझाते समय, ऐतिहासिक मित्रता, रक्षा सहयोग और बदलते वैश्विक परिदृश्य में नए संबंधों की आवश्यकता पर ध्यान दें।

 

Question 1. गुट - निरपेक्षता क्या है? गुट - निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका को विस्तार पूर्वक समझाइए।
Answer: गुट-निरपेक्षता का मतलब है कि दुनिया के किसी भी सैन्य गुट से न जुड़ना, बल्कि अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाना, ताकि विश्व राजनीति में शांति और स्थिरता बनी रहे। यह नीति सभी गंभीर अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर निष्पक्ष, पूर्वाग्रह रहित, स्वतंत्र और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देती है। यह सिर्फ तटस्थ रहने की नीति नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिल गुटीय प्रभावों से मुक्त एक स्वतंत्र नीति है। यह अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण और अहिंसक समाधान का समर्थन करती है। शीत युद्ध के समय यह नीति दो शक्तिशाली गुटों - संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और सोवियत संघ - से दूर रहने पर जोर देती थी। यह नीति अंतरराष्ट्रीय समस्याओं का मूल्यांकन उनके गुण-दोष के आधार पर, वस्तुनिष्ठ रूप से करने का पक्षधर रही है। गुट-निरपेक्षता की नीति विरोधी गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल देती है। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिलताओं से अलग रहने की नीति नहीं है, बल्कि विश्व-राजनीति में सार्थक योगदान देने वाली नीति है। गुट-निरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका को निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत स्पष्ट किया जा सकता है: (i) स्वयं को महाशक्तियों की खेमेबंदी से अलग रखना - शीत युद्ध के दौरान भारत ने दोनों महाशक्तियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ की खेमेबंदी से खुद को दूर रखा और अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखा। (ii) विश्व शांति और स्थिरता के लिए गुट-निरपेक्ष आंदोलन को सक्रिय बनाए रखना - भारत ने शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों विरोधी गुटों, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभाई। (iii) नए स्वतंत्र देशों को गुट-निरपेक्ष आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करना - भारत ने गुट-निरपेक्ष आंदोलन के नेता के रूप में उपनिवेशवादी ताकतों से मुक्त हुए नए स्वतंत्र देशों को दोनों महाशक्तियों के गुटों से दूर रहकर गुट-निरपेक्ष आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इस तरह, भारत ने नए स्वतंत्र देशों के सामने एक तीसरा विकल्प प्रस्तुत किया।
In simple words: गुट-निरपेक्षता का अर्थ है सैन्य गुटों से दूर रहकर स्वतंत्र नीति अपनाना और विश्व शांति के लिए काम करना। भारत ने खुद को महाशक्तियों से अलग रखा, गुटों के बीच मध्यस्थता की, और नए स्वतंत्र देशों को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

🎯 Exam Tip: गुट-निरपेक्षता की परिभाषा देते समय, इसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जोर दें। भारत की भूमिका बताते हुए, शीत युद्ध के संदर्भ में इसकी मध्यस्थता और नए स्वतंत्र देशों को जोड़ने के प्रयासों को हाइलाइट करें।

 

Question 2. पड़ोस पहल की नीति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पड़ोस पहल की नीति: वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'पड़ोस पहल' की नीति भारत की विदेश नीति को एक नई दिशा देती है। इस नीति को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: 1. प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पड़ोसी देशों की यात्रा करके भारतीय विदेश नीति में एक नया अध्याय शुरू किया। यह दिखाता है कि भारत की विदेश नीति में बड़े बदलाव आ रहे हैं। 2. प्रधानमंत्री मोदी की स्वतंत्र और बदलती कूटनीति की शुरुआत देश के करीबी पड़ोसियों के साथ संबंध बनाने से हुई। मॉरीशस सहित सभी सार्क देशों के नेताओं को सरकार के शपथग्रहण समारोह में बुलाकर भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाने का एक अनोखा उदाहरण पेश किया। 3. इसी तरह, भारतीय संसद ने बांग्लादेश के साथ सीमा समझौते को मंजूरी दी। नेपाल के साथ पनबिजली परियोजनाओं पर समझौते हुए। भारत-भूटान की 600 मेगावाट खोलोंगचु पनबिजली परियोजना की नींव रखी गई। अफगानिस्तान में हमारी प्रमुख परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं, और 24 साल बाद कोलंबो-जाफना रेल लिंक को फिर से भारतीय सहयोग से खोला गया। 4. सच्ची दोस्ती की भावना से भारत ने अपने संकटग्रस्त पड़ोसियों की तुरंत मदद की। जब मालदीव गंभीर संकट में फँस गया था, तब भारत 'ऑपरेशन नीर' के तहत पानी के जहाज और हवाई जहाज से वहां पानी पहुंचाने वाला पहला देश था।
In simple words: 'पड़ोस पहल' नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की है, जो भारत की विदेश नीति को नई दिशा देती है। इसके तहत पड़ोसी देशों से संबंध मजबूत किए गए, सीमा समझौते हुए, विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ा, और संकट में फंसे पड़ोसियों की मदद की गई।

🎯 Exam Tip: 'पड़ोस पहल' नीति को समझाते समय, प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों, पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने के उदाहरणों (जैसे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान) और मानवीय सहायता के पहलुओं को शामिल करें।

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