RBSE Solutions Class 12 Political Science Chapter 21 संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति निर

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Detailed Chapter 21 संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति निर RBSE Solutions for Class 12 Political Science

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Class 12 Political Science Chapter 21 संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति निर RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 बहुंचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए इनमें से कौन-सी योग्यता होनी चाहिए?
(अ) वह भारत का नागरिक हो।
(ब) उसकी आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो
(स) वह लोकसभा सदस्य की योग्यता रखता हो।
(द) उपरोक्त सभी।
Answer: (द) उपरोक्त सभी।
In simple words: भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति को भारतीय नागरिक होना चाहिए, कम से कम 35 साल का होना चाहिए, और लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता भी रखनी चाहिए। ये सभी गुण राष्ट्रपति पद के लिए ज़रूरी हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति पद के लिए आवश्यक योग्यताओं को याद रखें: नागरिकता, आयु सीमा और सदन की सदस्यता के लिए पात्रता।

 

Question 2. मृत्युदण्ड का उम्र कद म बदलना।
Answer: (ब) मृत्युदण्ड का उम्र कैद में बदलना।
In simple words: मृत्युदण्ड को उम्र कैद में बदलने का मतलब है कि किसी व्यक्ति की फाँसी की सज़ा को जीवन भर की जेल में बदल देना। यह राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों में से एक है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें विभिन्न प्रकार की सज़ाओं को बदलने या कम करने का अधिकार शामिल है।

 

Question 3. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के प्रावधानों के तहत आज तक आपातकाल की घोषणा नहीं हुई है?
(अ) अनुच्छेद 352
(ब) अनुच्छेद 356
(स) अनुच्छेद 360
(द) अनुच्छेद 75
Answer: (स) अनुच्छेद 360
In simple words: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से जुड़ा है। भारत में अभी तक कभी भी वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है।

🎯 Exam Tip: आपातकाल से संबंधित विभिन्न अनुच्छेदों (352, 356, 360) को याद रखें और प्रत्येक का महत्व जानें।

 

Question 4. इनमें से कौन मंत्री परिषद का हिस्सा नहीं है?
(अ) कैबिनेट मंत्री
(ब) संसदीय सचिव
(स) राज्यमंत्री
(द) उपमंत्री
Answer: (ब) संसदीय सचिव
In simple words: मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और उपमंत्री शामिल होते हैं। संसदीय सचिव मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे मंत्रियों की सहायता के लिए नियुक्त किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मंत्रिपरिषद की संरचना को समझें और जानें कि कौन से पद इसके अंतर्गत आते हैं और कौन से नहीं।

 

Question 5. राष्ट्रपति संविधान के किस अनुच्छेद के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है?
(अ) अनुच्छेद 75
(ब) अनुच्छेद 74
(स) अनुच्छेद 356
(द) अनुच्छेद 53
Answer: (अ) अनुच्छेद 75
In simple words: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75 राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का अधिकार देता है। इसी अनुच्छेद के तहत अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेदों और उनसे संबंधित प्रावधानों को याद रखना बहुत जरूरी है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय संघ की समस्त कार्यपालिका शक्तियां किसमें निहित हैं?
Answer: भारतीय संघ की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित हैं। राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख होता है।
In simple words: भारत सरकार के सभी कार्यकारी अधिकार राष्ट्रपति के पास होते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है।

 

Question 2. हमारे देश में प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?
Answer: हमारे देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। उन्होंने भारत के संविधान सभा की अध्यक्षता भी की थी।
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे।

🎯 Exam Tip: भारत के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर आसीन पहले व्यक्तियों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान का एक हिस्सा है।

 

Question 4. प्रधानमंत्री की दो प्रमुख शक्तियाँ लिखिए।
Answer: प्रधानमंत्री की दो मुख्य शक्तियाँ इस प्रकार हैं:
1. प्रधानमंत्री मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन करता है।
2. प्रधानमंत्री सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में राष्ट्रपति को सलाह देता है। प्रधानमंत्री सरकार का मुख्य चेहरा होता है और सभी बड़े फैसलों में उसकी अहम भूमिका होती है।
In simple words: प्रधानमंत्री मंत्रियों को उनके विभाग देते हैं और बड़ी नियुक्तियों पर राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की शक्तियों को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर मंत्रिपरिषद के गठन और राष्ट्रपति को सलाह देने के संबंध में।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत के राष्ट्रपति की निर्वाचन की प्रक्रिया बताइए।
Answer: भारत के राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्यों और सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति का चुनाव एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है। इस पद्धति में जीतने वाले उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोट मिलना ज़रूरी होता है, जिसे 'कोटा' कहते हैं। यह कोटा कुल डाले गए वोटों का बहुमत होता है। कोटा निकालने का सूत्र इस प्रकार है:
\[ \text{कोटा} = \frac{\text{डाले गये वैध मतों की संख्या}}{\text{निर्वाचित किये जाने वाले सदस्यों की संख्या} + 1} + 1 \]
इसका मतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार को कुल वोटों का कम से कम स्पष्ट बहुमत मिलना चाहिए ताकि वह जीत सके। यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति को व्यापक समर्थन प्राप्त हो।
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव संसद और विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य करते हैं। इसमें 'एकल संक्रमणीय मत प्रणाली' का उपयोग होता है, जहाँ जीतने के लिए उम्मीदवार को वोटों का एक निश्चित कोटा प्राप्त करना होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया, खासकर एकल संक्रमणीय मत प्रणाली और कोटा सूत्र को विस्तार से समझें।

 

Question 2. राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियाँ भारत संघ की सर्वोच्च कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित हैं। राष्ट्रपति इन शक्तियों का उपयोग या तो खुद करते हैं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करते हैं। संघ के सभी अधिकारी राष्ट्रपति के अधीनस्थ होते हैं। संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को उसके कामों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान है, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है। राष्ट्रपति केवल संवैधानिक प्रमुख होते हैं। उनकी कार्यपालिका शक्तियों का उपयोग वास्तव में मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति को कई मुख्य कार्यपालिका शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिनमें महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ करना और प्रशासकीय निर्णय लेना शामिल है।
In simple words: राष्ट्रपति के पास संघ की सर्वोच्च कार्यपालिका शक्ति होती है। वे अपनी शक्तियों का उपयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं, जिसमें नियुक्तियाँ करना और प्रशासकीय कार्य करना शामिल है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की कार्यपालिका शक्तियों को संक्षेप में बताएं और यह स्पष्ट करें कि वे मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।

 

Question 3. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति के अधिकारों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति के अधिकार, जिन्हें 'राज्य आपातकाल' या 'राष्ट्रपति शासन' भी कहते हैं, निम्नलिखित हैं:
1. राष्ट्रपति शासन के दौरान, राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में राज्य का शासन चलाता है। राष्ट्रपति सलाह देने के लिए कुछ प्रतिनिधियों को भी नियुक्त कर सकता है।
2. राज्य विधानमंडल की सभी शक्तियाँ संसद को मिल जाती हैं। इस समय राज्य का कानून बनाने का अधिकार संसद के पास होता है।
3. यदि लोकसभा का सत्र नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति संचित निधि से खर्च करने की अनुमति दे सकता है।
4. राज्य की शासन व्यवस्था पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन आ जाती है, क्योंकि राज्य का मंत्रिमंडल भंग हो जाता है और राज्य की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति के हाथों में आ जाती है। यह प्रावधान राज्यों में संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए होता है।
In simple words: अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति किसी राज्य में संवैधानिक संकट होने पर शासन अपने हाथ में ले सकते हैं। इससे राज्यपाल राष्ट्रपति का प्रतिनिधि बन जाता है, राज्य विधानमंडल की शक्तियाँ संसद को मिल जाती हैं, और केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन के मुख्य प्रभावों और राष्ट्रपति की भूमिका को विस्तार से समझाएं।

 

Question 4. राष्ट्रपति को कौन-कौन से विशेषाधिकार प्राप्त हैं?
Answer: राष्ट्रपति को निम्नलिखित विशेषाधिकार प्राप्त हैं:
1. जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर होता है, तब उसके खिलाफ किसी भी दीवानी या फौजदारी अदालत में कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। यह पद की गरिमा के लिए ज़रूरी है।
2. राष्ट्रपति के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट भी जारी नहीं किया जा सकता है। उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
3. गिरफ्तारी से छूट के बावजूद, दो महीने का लिखित नोटिस देने के बाद राष्ट्रपति के खिलाफ केवल दीवानी कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
4. पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु होने पर, उनकी पत्नी को सेवानिवृत्त राष्ट्रपति को मिलने वाली पेंशन की आधी राशि और सरकारी मकान आजीवन मिलता है।
In simple words: राष्ट्रपति को उनके पद पर रहते हुए किसी भी अदालत में मुक़दमे और गिरफ्तारी से छूट मिलती है। कुछ शर्तों के साथ दीवानी कार्रवाई हो सकती है, और पूर्व राष्ट्रपति की पत्नियों को पेंशन व सरकारी मकान की सुविधा मिलती है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति को प्राप्त विशेषाधिकारों, विशेष रूप से कानूनी कार्यवाही से छूट, को स्पष्ट रूप से समझाएं।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. राष्ट्रपति के निर्वाचन व सामान्य शक्तियों की व्याख्या कीजिए।
Answer:
राष्ट्रपति का निर्वाचन: भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है, यानी जनता सीधे नहीं चुनती, बल्कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि चुनते हैं। यह चुनाव एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर होता है। इस चुनाव में गुप्त मतदान होता है और सफलता के लिए न्यूनतम कोटा प्राप्त करना ज़रूरी होता है। न्यूनतम कोटा का सूत्र है:
\[ \text{न्यूनतम कोटा} = \frac{\text{डाले गये वैध मतों की संख्या}}{\text{निर्वाचित किये जाने वाले सदस्यों की संख्या} + 1} + 1 \]
यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति को व्यापक जनसमर्थन मिले।
राष्ट्रपति की सामान्य शक्तियाँ:
1. मंत्रियों को पद संभालने से पहले राष्ट्रपति ही शपथ दिलाते हैं।
2. राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों के अधिवेशनों को बुलाते हैं और स्थगित भी कर सकते हैं।
3. वे लोकसभा को भंग कर सकते हैं, यदि सरकार बहुमत खो दे।
4. राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों की अलग-अलग या संयुक्त बैठक में भाषण देने का अधिकार है।
5. यदि किसी विधेयक पर संसद के सदनों में मतभेद होता है, तो राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुला सकते हैं।
6. राष्ट्रपति किसी खास मंत्री के निर्णय के बारे में प्रधानमंत्री को आदेश जारी कर सकते हैं।
7. संसद द्वारा पास किया गया कोई भी विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना कानून नहीं बन सकता। वे धन विधेयकों को छोड़कर अन्य विधेयकों को संसद को फिर से विचार करने के लिए लौटा सकते हैं।
8. जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता है और कानून की ज़रूरत होती है, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं। इन अध्यादेशों का वही प्रभाव होता है जो संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का होता है। ये शक्तियां राष्ट्रपति को देश की शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से 'एकल संक्रमणीय मत प्रणाली' द्वारा होता है, जहाँ न्यूनतम कोटा पाना ज़रूरी है। उनकी सामान्य शक्तियों में मंत्रियों को शपथ दिलाना, संसद के सत्र बुलाना-स्थगित करना, लोकसभा भंग करना, विधेयक पर हस्ताक्षर करना और अध्यादेश जारी करना शामिल है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया और उनकी सामान्य शक्तियों के प्रत्येक बिंदु को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

 

Question 2. “क्या आपातकालीन शक्तियाँ कभी राष्ट्रपति को तानाशाह तो नही बना देंगीं “-कथन की मीमांसा भारतीय राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के संदर्भ में कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक में आपातकालीन प्रावधानों का उल्लेख है। इसके अनुसार राष्ट्रपति तीन प्रकार के आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं:
1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352 के तहत): युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण।
2. राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता (अनुच्छेद 356 के तहत): राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर।
3. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360 के तहत): देश की वित्तीय स्थिरता खतरे में होने पर।
राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों की आलोचना इस आधार पर की जाती है कि कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रपति इनका दुरुपयोग कर सकते हैं, जिससे तानाशाह बनने की आशंका रहती है। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों में संवैधानिक विफलता की स्थिति में केंद्र सरकार राष्ट्रपति के माध्यम से विरोधी दलों की सरकारों को हटा सकती है। संकटकाल में केंद्रीय कार्यपालिका को व्यापक वित्तीय अधिकार मिल जाते हैं, जिससे राज्य सरकारों पर नियंत्रण बढ़ सकता है। व्यवहार में भी, आपातकालीन प्रावधानों का उपयोग संविधान निर्माताओं की अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। राष्ट्रीय आपातकाल कई बार अनावश्यक रूप से लंबे समय तक लागू किया गया है, और अनुच्छेद 356 का उपयोग भी राज्यों में मनमाने तरीके से राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए हुआ है। ये उदाहरण दिखाते हैं कि इन शक्तियों का दुरुपयोग संभव है, जिससे राष्ट्रपति एक तानाशाह की तरह काम कर सकते हैं, हालांकि संविधान में ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ सुरक्षा उपाय भी मौजूद हैं।
In simple words: राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियाँ (अनुच्छेद 352, 356, 360) उन्हें युद्ध, राज्य की संवैधानिक विफलता या वित्तीय संकट में विशेष अधिकार देती हैं। इनकी आलोचना इसलिए होती है क्योंकि केंद्र सरकार इनका दुरुपयोग करके राज्यों पर नियंत्रण कर सकती है या विरोधी सरकारों को हटा सकती है, जिससे राष्ट्रपति के तानाशाह बनने का खतरा रहता है।

🎯 Exam Tip: आपातकालीन शक्तियों के प्रकारों और उनके दुरुपयोग की आशंका पर विस्तार से चर्चा करें, साथ ही संवैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लेख करें।

 

Question 3. “प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद में मेहराब की तरह है, जिसके इर्द – गिर्द समस्त शक्तियाँ घूमती हैं।” कथन के परिप्रेक्ष्य में भारतीय प्रधानमंत्री के पद व शक्तियों पर लेख लिखिए।
Answer:
भारतीय प्रधानमंत्री का पद एवं शक्तियाँ: भारत में प्रधानमंत्री सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। संविधान के अनुच्छेद 74 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति की सहायता और परामर्श के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करेगा। प्रधानमंत्री की नियुक्ति मंत्रिपरिषद के निर्माण में पहला कदम होता है। मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद की सभी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। संसदात्मक शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद में एक मेहराब की तरह होते हैं, जिसके चारों ओर सभी शक्तियाँ घूमती हैं।
प्रधानमंत्री मंत्रियों के बीच के मतभेदों को सुलझाते हैं। वे राष्ट्रपति को मंत्रियों की नियुक्ति, विभागों का आवंटन, परिवर्तन या उनके त्यागपत्र स्वीकार/अस्वीकार करने की सलाह देते हैं। प्रधानमंत्री की स्थिति के बारे में डॉ. जैनिंग्स का कथन बहुत सही है कि "प्रधानमंत्री को सम्पूर्ण संविधान की आधारशिला कहना उपयुक्त है। प्रधानमंत्री न केवल अपने समकक्षों में प्रथम होता है, वह न केवल तारों के बीच चंद्रमा के समान है, बल्कि वह तो सूर्य के समान होता है, जिसकी परिक्रमा अन्य ग्रह करते हैं।” यह दिखाता है कि शासन में प्रधानमंत्री का केंद्रीय महत्व है। ग्लैडस्टन ने भी प्रधानमंत्री के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री का पद बहुत शक्तिशाली होता है। प्रधानमंत्री देश का मुख्य नीति निर्माता और कार्यान्वयनकर्ता होता है।
2. लोकसभा में बहुमत दल का नेता होने के कारण प्रधानमंत्री देश का नेता होता है। वह देश का मार्गदर्शन करता है और चुनावों के समय चुनाव घोषणा-पत्र तैयार करता है।
3. यदि किसी विषय पर दो या दो से अधिक मंत्रियों में मतभेद हो जाता है तो प्रधानमंत्री मध्यस्थता करके उस मतभेद को दूर करते हैं और उनके बीच सामंजस्य बनाए रखते हैं।
4. प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का अध्यक्ष होता है। इस नाते वह मंत्रिमंडल की सभी बैठकों की अध्यक्षता करता है। उसकी अनुपस्थिति में सबसे वरिष्ठ मंत्री मंत्रिमंडल की अध्यक्षता करते हैं।
5. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद तथा राष्ट्रपति के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों की सूचना राष्ट्रपति को देते हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र के प्रशासकीय मामलों तथा कानून बनाने के प्रस्तावों की सूचना भी राष्ट्रपति को देना प्रधानमंत्री का मुख्य कर्तव्य है। वे राष्ट्रपति के विचारों को मंत्रिपरिषद तक पहुँचाते हैं। इस प्रकार वे मंत्रिपरिषद और राष्ट्रपति के बीच बातचीत की कड़ी का कार्य करते हैं।
6. प्रधानमंत्री संघीय मंत्रिपरिषद का निर्माता है जिसे राष्ट्रपति सामान्यतः स्वीकार करते हैं। प्रधानमंत्री जिस मंत्री को जब चाहे उससे त्याग-पत्र देने को कह सकता है। यदि मंत्री त्याग-पत्र नहीं देता है तो प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का त्याग-पत्र देकर नया मंत्रिमंडल बना सकता है, जिसमें वह किसी भी पुराने मंत्री को छोड़ सकता है।
7. केंद्रीय मंत्रिमंडल और अन्य नीति निर्माणक संस्थाओं से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णय उसकी देखरेख में लिए जाते हैं। वह नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है।
8. किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय की प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के कहने पर फिर से मंत्रिपरिषद में विचार के लिए रखवा सकते हैं।
9. प्रधानमंत्री संसद के कार्य संचालन में नेतृत्व प्रदान करते हैं। सभी सरकारी विधेयक उनके निरीक्षण में और उनकी सलाह के अनुसार तैयार किए जाते हैं।
10. संसद में प्रधानमंत्री सरकार का मुख्य प्रवक्ता होता है। शासकीय नीति से संबंधित अधिकृत घोषणा प्रधानमंत्री के अधिकार क्षेत्र में ही आती है।
11. वे सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में राष्ट्रपति को परामर्श देते हैं।
12. प्रधानमंत्री लोकसभा एवं राज्यसभा के मध्य भी संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करते हैं। वे राष्ट्रपति को परामर्श देते हैं कि संसद कब बुलाया जाए और कब भंग किया जाए। ये सभी शक्तियां प्रधानमंत्री को भारतीय शासन व्यवस्था में एक केंद्रीय और प्रभावशाली व्यक्ति बनाती हैं।
In simple words: प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का मुखिया होता है और सभी महत्वपूर्ण फैसलों में उसकी अहम भूमिका होती है। वह मंत्रियों में विभाग बांटता है, मतभेद सुलझाता है, संसद में सरकार का प्रतिनिधित्व करता है, और राष्ट्रपति व मंत्रिपरिषद के बीच कड़ी का काम करता है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की भूमिका को 'मेहराब' के रूपक से समझाते हुए, उनकी प्रमुख शक्तियों और कार्यों को विस्तृत रूप से लिखें।

 

Question 1. सरकार के कितने अंग होते हैं?
(अ) 5
(ब) 4
(स) 3
Answer: (स) 3
In simple words: सरकार के तीन मुख्य अंग होते हैं: विधायिका (जो कानून बनाती है), कार्यपालिका (जो कानून लागू करती है), और न्यायपालिका (जो कानून की व्याख्या करती है)।

🎯 Exam Tip: सरकार के तीन अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - को उनके मुख्य कार्यों सहित याद रखें।

 

Question 2. संघ की कार्यपालिका की शक्ति निहित है
(अ) राष्ट्रपति में
(ब) प्रधानमंत्री में
(स) संसद में
(द) मंत्रिमंडल में
Answer: (अ) राष्ट्रपति में
In simple words: भारत संघ की सभी कार्यकारी शक्तियाँ संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति के पास होती हैं। हालाँकि, उनका वास्तविक उपयोग प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि भारत में संघीय कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति होता है।

 

Question 3. कार्यपालिका अपने कार्यों के लिए किसके प्रति जवाबदेह रहती है?
(अ) संसद के
(ब) न्यायपालिका के
(स) लोकसभाध्यक्ष के
(द) राष्ट्रपति के
Answer: (अ) संसद के
In simple words: भारत में कार्यपालिका, विशेषकर मंत्रिपरिषद, अपने सभी कार्यों के लिए संसद के प्रति जवाबदेह होती है। इसका मतलब है कि उसे संसद में अपने फैसलों और नीतियों का हिसाब देना होता है।

🎯 Exam Tip: संसदीय प्रणाली में, कार्यपालिका हमेशा विधायिका (संसद) के प्रति उत्तरदायी होती है।

 

Question 4. निम्न में से संसदीय व्यवस्था वाला देश कौन - सा है?
(अ) जर्मनी
(ब) फ्रांस
(स) रूस
(द) श्रीलंका
Answer: (द) श्रीलंका
In simple words: संसदीय प्रणाली एक ऐसी सरकार होती है जहाँ कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। श्रीलंका एक ऐसा देश है जो संसदीय व्यवस्था का पालन करता है।

🎯 Exam Tip: संसदीय और अध्यक्षात्मक शासन प्रणालियों के बीच अंतर को समझें और विभिन्न देशों के उदाहरण याद रखें।

 

Question 5. अध्यक्षात्मक व्यवस्था निम्न में से किस देश में पायी जाती है?
(अ) रूस
(ब) ब्राजील
(स) फ्राँस
(द) जापान
Answer: (ब) ब्राजील
In simple words: अध्यक्षात्मक व्यवस्था में राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होता है और सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। ब्राजील में यह व्यवस्था लागू है।

🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक प्रणाली की विशेषताओं को जानें, जैसे कि राष्ट्रपति का सीधा चुनाव और विधायिका से उसका स्वतंत्र होना।

 

Question 7. राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल के सदस्य होते हैं
(अ) प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री
(ब) संसद के सभी सदस्य
(स) विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
(द) संसद एवं राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य।
Answer: (द) संसद एवं राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य।
In simple words: राष्ट्रपति के चुनाव में संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के चुने हुए सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य वोट डालते हैं। इसमें मनोनीत सदस्य शामिल नहीं होते।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में कौन-कौन शामिल होते हैं, इसे स्पष्ट रूप से याद रखें, विशेषकर निर्वाचित सदस्यों पर जोर दें।

 

Question 8. राष्ट्रपति का निर्वाचन कितने वर्षों के लिए होता है?
(अ) 5 वर्ष
(ब) 4 वर्ष
(स) 3 वर्ष
(द) 2 वर्ष
Answer: (अ) 5 वर्ष
In simple words: भारत में राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है। वे इस अवधि के लिए चुने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पदों के कार्यकाल की अवधि याद रखें।

 

Question 9. राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग लाया जा सकता है
(अ) लोकसभा में
(ब) राज्यसभा में
(स) संसद के किसी भी सदन में
(द) विधानसभा में।
Answer: (स) संसद के किसी भी सदन में
In simple words: राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन, चाहे वह लोकसभा हो या राज्यसभा, में शुरू की जा सकती है। यह संविधान के उल्लंघन के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग की प्रक्रिया और इसे संसद के किस सदन में शुरू किया जा सकता है, यह जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. महाभियोग की प्रक्रिया में राष्ट्रपति को कितने दिन पहले सूचित किया जाता है?
(अ) 15 दिन
(ब) 14 दिन
(स) 12 दिन
(द) 10 दिन
Answer: (ब) 14 दिन
In simple words: राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने से पहले उन्हें 14 दिन का लिखित नोटिस दिया जाता है। यह उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका देता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया में दी जाने वाली सूचना की अवधि को याद रखें।

 

Question 11. सं
Answer: (ब) अनुच्छेद 61
In simple words: राष्ट्रपति के महाभियोग का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 61 में है। यह अनुच्छेद महाभियोग की पूरी प्रक्रिया बताता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के महाभियोग से संबंधित अनुच्छेद को याद रखना बहुत ज़रूरी है।

 

Question 12. भारत में तीनों सेनाओं का प्रधान कौन है?
(अ) राष्ट्रपति
(ब) प्रधानमंत्री
(स) मंत्री
(द) थल सेना अध्यक्ष।
Answer: (अ) राष्ट्रपति
In simple words: भारत में तीनों सेनाओं - थल सेना, नौसेना और वायु सेना - के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति होते हैं। वे ही रक्षा बलों के प्रमुख होते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की शक्तियों में तीनों सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होना भी शामिल है, यह महत्वपूर्ण बिंदु है।

 

Question 13. संसद के अधिवेशन के प्रारम्भ में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को कौन सम्बोधित करता है?
(अ) प्रधानमंत्री
(ब) लोकसभाध्यक्ष
(स) राष्ट्रपति
(द) सभापति।
Answer: (स) राष्ट्रपति
In simple words: संसद के नए सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हैं। वे सरकार की नीतियों और योजनाओं के बारे में बताते हैं।

🎯 Exam Tip: संसद के सत्रों को बुलाने और संबोधित करने में राष्ट्रपति की भूमिका को याद रखें।

 

Question 14. निम्न में कौन-सी शक्ति राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों के अंतर्गत सम्मिलित है?
(अ) प्रधानमंत्री की नियुक्ति
(ब) राज्यपाल की नियुक्ति
(स) दण्डित व्यक्तियों को क्षमा करना
(द) सर्वोच्च न्यायालय को परामर्श देना।
Answer: (स) दण्डित व्यक्तियों को क्षमा करना
In simple words: राष्ट्रपति के पास न्यायिक शक्ति होती है कि वह किसी दोषी व्यक्ति की सज़ा को माफ कर सके, कम कर सके या बदल सके। यह उनकी क्षमादान शक्ति कहलाती है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों, विशेष रूप से क्षमादान शक्ति के विभिन्न पहलुओं को समझें।

 

Question 15. युद्ध, बाहरी आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह सम्बन्धी आपातकालीन घोषणा संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत की जाती है?
(अ) अनुच्छेद 356
(ब) अनुच्छेद 352
(स) अनुच्छेद 360
(द) अनुच्छेद 75
Answer: (ब) अनुच्छेद 352
In simple words: जब देश में युद्ध, बाहरी हमला या सशस्त्र विद्रोह जैसी स्थिति होती है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं। यह देश की सुरक्षा के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित अनुच्छेद 352 को उसके कारणों के साथ याद रखें।

 

Question 16. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत भारत में आपातकाल कितनी बार घोषित हो चुका है?
(अ) एक बार
(ब) दो बार
(स) तीन बार
Answer: (स) तीन बार
In simple words: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत अब तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जा चुकी है। यह देश के इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाएं रही हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की संख्या और उनके कारणों को याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।

 

Question 18. लोकसभा में बहुमत दल का नेता कौन होता है?
(अ) प्रधानमंत्री
(ब) राष्ट्रपति
(स) मंत्रिमंडल
(द) इनमें से कोई भी नहीं
Answer: (अ) प्रधानमंत्री
In simple words: लोकसभा में जिस राजनीतिक दल को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं और वह बहुमत हासिल करता है, उसका नेता ही देश का प्रधानमंत्री बनता है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की पहचान लोकसभा में बहुमत दल के नेता के रूप में करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 19. भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे?
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) लाल बहादर शास्त्री
(स) राजेन्द्र प्रसाद
(द) पं. जवाहर लाल नेहरू
Answer: (द) पं. जवाहर लाल नेहरू
In simple words: पं. जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। उन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

🎯 Exam Tip: भारत के पहले प्रधानमंत्री का नाम याद रखना एक बुनियादी ऐतिहासिक तथ्य है।

 

Question 20. वर्तमान में नरेन्द्र मोदी सहित मंत्रिपरिषद में कितने मंत्री शामिल हैं?
(अ) 75
(ब) 76
(स) 77
(द) 78
Answer: (द) 78
In simple words: वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में कुल 78 मंत्री शामिल हैं। इसमें कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री होते हैं।

🎯 Exam Tip: मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर आधारित होती है, और यह संख्या बदल सकती है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किन देशों में अध्यक्षात्मक व्यवस्था पायी जाती है?
Answer: संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ब्राजील में अध्यक्षात्मक व्यवस्था पाई जाती है। इस व्यवस्था में राष्ट्रपति सीधे जनता द्वारा चुना जाता है और कार्यपालिका का प्रमुख होता है।
In simple words: संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में अध्यक्षात्मक सरकार होती है, जहाँ राष्ट्रपति के पास ज़्यादा शक्ति होती है।

🎯 Exam Tip: अध्यक्षात्मक व्यवस्था वाले प्रमुख देशों के नाम याद रखें और इसकी विशेषताओं को भी समझें।

 

Question 3. कार्यपालिका का औपचारिक प्रधान कौन है?
Answer: राष्ट्रपति कार्यपालिका का औपचारिक तथा संवैधानिक प्रधान होता है। वह देश का सर्वोच्च पदाधिकारी होता है लेकिन वास्तविक शक्तियां मंत्रिपरिषद के पास होती हैं।
In simple words: राष्ट्रपति सरकार का औपचारिक या नाममात्र का मुखिया होता है।

🎯 Exam Tip: औपचारिक और वास्तविक प्रधान के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 4. भारत की संसदीय प्रणाली में कितने प्रकार की कार्यपालिका होती है
Answer: भारत की संसदीय प्रणाली में दो प्रकार की कार्यपालिका होती है:
1. औपचारिक कार्यपालिका (राष्ट्रपति)
2. वास्तविक कार्यपालिका (प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद)
यह विभाजन शक्तियों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: भारत में दो तरह की कार्यपालिका होती है: नाम के लिए राष्ट्रपति और असली काम करने वाली प्रधानमंत्री की टीम।

🎯 Exam Tip: औपचारिक और वास्तविक कार्यपालिका के कॉन्सेप्ट को स्पष्ट रूप से समझें, जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की भूमिकाएं शामिल हैं।

 

Question 5. देश का प्रथम नागरिक कौन होता है।
Answer: राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। वह भारतीय संघ का सर्वोच्च पद धारण करता है।
In simple words: भारत का राष्ट्रपति देश का पहला नागरिक होता है।

🎯 Exam Tip: यह एक बुनियादी तथ्य है कि राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है।

 

Question 6. राष्ट्रपति का निर्वाचन किस आधार पर होता है?
Answer: राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर होता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जो सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति को व्यापक समर्थन मिले।
In simple words: राष्ट्रपति को आनुपातिक प्रतिनिधित्व की 'एकल संक्रमणीय मत प्रणाली' से चुना जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति चुनाव की विधि (आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत) को याद रखें।

 

Question 7. भारत में राष्ट्रपति के चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति क्यों अपनायी गयी है?
Answer: भारत में राष्ट्रपति के चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति इसलिए अपनायी गयी है ताकि निर्वाचन मंडल के बहुमत का समर्थन प्राप्त व्यक्ति ही राष्ट्रपति निर्वाचित हो सके। यह पद्धति सुनिश्चित करती है कि राष्ट्रपति किसी एक क्षेत्र या समूह के बजाय पूरे देश का प्रतिनिधित्व करें।
In simple words: राष्ट्रपति चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व का इस्तेमाल इसलिए होता है ताकि राष्ट्रपति को ज़्यादा लोगों का समर्थन मिले।

🎯 Exam Tip: आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के उद्देश्य को बताएं - यानी व्यापक समर्थन प्राप्त राष्ट्रपति का चुनाव।

 

Question 8. राष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?
Answer: राष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए। यह संविधान में निर्धारित एक महत्वपूर्ण योग्यता है।
In simple words: राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 35 साल का होना ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति पद के लिए आयु संबंधी योग्यता को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 10. राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल का निर्णय किस प्रकार होता है?
Answer: राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं और संघीय क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य सम्मिलित होते हैं। प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य उसकी जनसंख्या के आधार पर तय होता है, जिससे सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व समानुपातिक रहे।
In simple words: राष्ट्रपति को संसद के चुने हुए सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्य मिलकर चुनते हैं।

🎯 Exam Tip: निर्वाचक मंडल के सदस्यों की सूची और उनके मत मूल्य के सिद्धांत को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. भारत में राष्ट्रपति को उसके पद से किस प्रकार हटाया जा सकता है?
Answer: भारत में राष्ट्रपति को उसके पद से महाभियोग प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 61 में वर्णित है और संविधान के उल्लंघन के आधार पर शुरू की जाती है।
In simple words: राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए महाभियोग नाम की एक खास प्रक्रिया का इस्तेमाल होता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया को राष्ट्रपति को पद से हटाने का एकमात्र संवैधानिक तरीका मानें।

 

Question 12. राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग किन आधारों पर लगाया जा सकता है?
Answer: राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग शक्तियों के दुरुपयोग, कदाचार एवं संविधान के उल्लंघन के आधार पर लगाया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का उपयोग संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही करें।
In simple words: राष्ट्रपति पर महाभियोग तभी लगता है जब वह अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करे या संविधान के नियमों को तोड़े।

🎯 Exam Tip: महाभियोग के आधारों को स्पष्ट रूप से याद रखें: संविधान का उल्लंघन, शक्तियों का दुरुपयोग, या कदाचार।

 

Question 13. राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की पुष्टि हेतु संसद के किस प्रकार के बहुमत की आवश्यकता होती है?
Answer: राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग की पुष्टि हेतु संसद के दोनों सदनों में पृथक-पृथक दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। यह एक विशेष बहुमत होता है जो प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।
In simple words: राष्ट्रपति को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग के लिए आवश्यक बहुमत (दो-तिहाई) और दोनों सदनों में अलग-अलग स्वीकृति की शर्त को याद रखें।

 

Question 14. राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति में न्यूनतम मतों का कोटा निर्धारित करने का सूत्र बताइए। डाले गये वैध मतों की संख्या
Answer: राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति में न्यूनतम मतों का कोटा निर्धारित करने का सूत्र निम्नलिखित है:
\[ \text{न्यूनतम कोटा} = \frac{\text{डाले गये वैध मतों की संख्या}}{\text{निर्वाचित किये जाने वाले सदस्यों की संख्या} + 1} + 1 \]
यह सूत्र सुनिश्चित करता है कि जीतने वाले उम्मीदवार को बहुमत प्राप्त हो, जिससे उसके पद की वैधता बढ़ती है।
In simple words: राष्ट्रपति चुनाव में जीतने के लिए जितने वोटों की ज़रूरत होती है, उसे 'कोटा' कहते हैं, जिसे कुल वैध वोटों को निर्वाचित सदस्यों की संख्या से भाग देकर और एक जोड़कर निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति चुनाव के कोटा सूत्र को याद रखें और समझें कि यह कैसे काम करता है।

 

Question 15. राष्टपति को कितना वेतन मिलता है?
Answer: भारत सरकार द्वारा 11 सितंबर 2008 से राष्ट्रपति का वेतन ₹1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपये) प्रतिमाह निर्धारित किया गया था। वर्तमान में यह वेतन ₹5 लाख प्रतिमाह है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति को कई अन्य भत्ते और सुविधाएँ भी मिलती हैं।
In simple words: राष्ट्रपति को हर महीने 5 लाख रुपये वेतन मिलता है, साथ ही उन्हें कई अन्य भत्ते भी दिए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के वेतन और भत्तों की जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 17. राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आवास कहाँ स्थित है?
Answer: राष्ट्रपति का ग्रीष्मकालीन आवास शिमला के निकट छरबरा में स्थित है। इसे 'द रिट्रीट' के नाम से भी जाना जाता है।
In simple words: राष्ट्रपति का गर्मी का निवास शिमला के पास छरबरा में है, जिसे 'द रिट्रीट' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के विभिन्न आधिकारिक आवासों और उनके स्थानों को याद रखें।

 

Question 18. छरवरा में स्थित राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन आवास को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: छरबरा में स्थित राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन आवास को 'द रिट्रीट' के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐतिहासिक इमारत है।
In simple words: छरबरा में राष्ट्रपति के गर्मी के घर को 'द रिट्रीट' कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के आधिकारिक आवासों के नाम और उनके विशेष महत्व को समझें।

 

Question 19. राष्ट्रपति निलयन कहाँ स्थित है?
Answer: राष्ट्रपति निलयम हैदराबाद में स्थित है। यह राष्ट्रपति का एक अन्य आधिकारिक आवास है जो दक्षिण भारत में स्थित है।
In simple words: राष्ट्रपति निलयम हैदराबाद में है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के विभिन्न आधिकारिक निवासों (जैसे राष्ट्रपति भवन, द रिट्रीट, राष्ट्रपति निलयम) के स्थानों को याद रखें।

 

Question 20. राष्ट्रपति किन – किन की नियुक्ति करता है?
Answer: राष्ट्रपति भारत के महान्यायवादी, विदेशों में राजदूत तथा राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति करता है। इसके अलावा वह अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां करते हैं जैसे मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश।
In simple words: राष्ट्रपति भारत के महान्यायवादी, विदेशों में राजदूत और राज्यों के राज्यपालों जैसे कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को नियुक्त करते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की प्रमुख नियुक्तियों की सूची को याद रखें, क्योंकि यह उनकी कार्यपालिका शक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

 

Question 21. राष्ट्रपति की शक्तियाँ किस प्रकार की हैं?
Answer: राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ औपचारिक ही हैं। उसे मंत्रिपरिषद की सलाह से ही कार्य करना पड़ता है। इसका मतलब है कि वास्तविक निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं और राष्ट्रपति उन्हें संवैधानिक रूप से अनुमोदित करते हैं।
In simple words: राष्ट्रपति की शक्तियाँ केवल नाममात्र की होती हैं, और उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की औपचारिक शक्तियों और मंत्रिपरिषद की वास्तविक शक्तियों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 22. “राष्ट्रपति का अभिभाषण” किसे कहते हैं?
Answer: राष्ट्रपति प्रतिवर्ष संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को संयुक्त रूप से संबोधित करते हैं, जिसे "राष्ट्रपति का अभिभाषण" कहते हैं। यह आमतौर पर बजट सत्र की शुरुआत में और नई लोकसभा के गठन के बाद होता है, जिसमें सरकार की नीतियों और भविष्य की योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया जाता है।
In simple words: हर साल राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करते हैं, जिसे 'राष्ट्रपति का अभिभाषण' कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के अभिभाषण के महत्व को समझें और जानें कि यह कब और क्यों होता है।

 

Question 24. राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के कितने सदस्यों को मनोनीत करता है?
Answer: राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत करता है। ये वो सदस्य होते हैं जिन्हें राष्ट्रपति विशेष योगदान के लिए चुनता है।
In simple words: राष्ट्रपति दो लोगों को लोकसभा में चुन सकता है जो आंग्ल-भारतीय समुदाय से होते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि आंग्ल-भारतीय समुदाय के सदस्यों का मनोनयन अब 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा बंद कर दिया गया है।

 

Question 25. 'पॉकेट वीटो' किसे कहते हैं?
Answer: 'पॉकेट वीटो' का मतलब है जब राष्ट्रपति किसी विधेयक पर न तो अपनी सहमति देते हैं और न ही उसे संसद के पास पुनर्विचार के लिए वापस भेजते हैं, बल्कि उसे अपनी जेब में रख लेते हैं। ऐसे में वह विधेयक कानून नहीं बन पाता। यह शक्ति राष्ट्रपति को विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देती है।
In simple words: पॉकेट वीटो तब होता है जब राष्ट्रपति किसी कानून को न तो पास करते हैं और न ही मना करते हैं, बस उसे अपने पास रख लेते हैं ताकि वह कानून न बन सके।

🎯 Exam Tip: पॉकेट वीटो का इस्तेमाल आमतौर पर ऐसे विधेयकों के लिए किया जाता है जिन पर राष्ट्रपति तत्काल निर्णय नहीं लेना चाहते या विवाद से बचना चाहते हैं।

 

Question 26. संविधान के किन अनुच्छेदों में आपातकाल की घोषणा का प्रावधान किया गया है?
Answer: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352, अनुच्छेद 356 और अनुच्छेद 360 में आपातकाल की घोषणा का प्रावधान किया गया है। ये अनुच्छेद देश की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए विशेष शक्तियां प्रदान करते हैं।
In simple words: संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 में देश में इमरजेंसी लगाने के नियम बताए गए हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीनों अनुच्छेदों के तहत अलग-अलग प्रकार के आपातकाल (राष्ट्रीय, राज्य और वित्तीय) घोषित किए जाते हैं, उनके कारणों और प्रभावों में भिन्नता होती है।

 

Question 27. किस परिस्थिति में राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है?
Answer: राष्ट्रपति तब अध्यादेश जारी कर सकता है जब संसद का अधिवेशन नहीं चल रहा हो और देश में तुरंत किसी कानून की आवश्यकता हो। यह अध्यादेश संसद द्वारा बनाए गए कानून के बराबर ही प्रभावी होता है। राष्ट्रपति की यह शक्ति देश में विधायी निरंतरता सुनिश्चित करती है।
In simple words: अगर संसद काम नहीं कर रही हो और कोई कानून तुरंत चाहिए, तो राष्ट्रपति एक आदेश (अध्यादेश) निकाल सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश की अधिकतम अवधि संसद के पुनः अधिवेशन के छह सप्ताह बाद तक होती है, जिसके भीतर इसे संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।

 

Question 28. भारत के 15 वें प्रधानमंत्री कौन हैं?
Answer: भारत के 15वें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं। उन्होंने इस पद को 2014 से संभाला है और लगातार दो बार प्रधानमंत्री रहे हैं।
In simple words: भारत के 15वें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी हैं।

🎯 Exam Tip: ऐसे सीधे सवालों के जवाब में नाम और पद की संख्या (जैसे 15वें) सही ढंग से लिखें।

 

Question 29. संसद के सत्रावसान के समय राष्ट्रपति किस विशेष आदेश को जारी करता है, उसे किस नाम से जाना जाता है?
Answer: संसद के सत्रावसान के समय जब सत्र नहीं चल रहा होता है, राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए विशेष आदेश को अध्यादेश कहते हैं। यह आदेश कानून के समान ही होता है। राष्ट्रपति इस शक्ति का उपयोग तब करते हैं जब तत्काल कानून बनाने की जरूरत हो।
In simple words: जब संसद काम नहीं कर रही होती, तो राष्ट्रपति जो खास आदेश निकालते हैं, उसे अध्यादेश कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश को संसद सत्र शुरू होने के बाद 6 सप्ताह के भीतर संसद से मंजूरी मिलनी जरूरी है, नहीं तो वह खत्म हो जाता है।

 

Question 31. कौन – से मंत्री कैबिनेट की बैठक में भाग नहीं लेते हैं?
Answer: राज्य स्तर के मंत्री कैबिनेट की बैठक में भाग नहीं लेते हैं। कैबिनेट में केवल कैबिनेट मंत्री ही शामिल होते हैं, जो महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। राज्य मंत्री और उपमंत्री विशेष आमंत्रण पर ही कैबिनेट की बैठकों में शामिल हो सकते हैं, अन्यथा नहीं।
In simple words: राज्य मंत्री और उपमंत्री आमतौर पर कैबिनेट की बैठकों में शामिल नहीं होते हैं।

🎯 Exam Tip: कैबिनेट, राज्य मंत्री और उपमंत्री के बीच का अंतर उनके पद और भूमिका के आधार पर स्पष्ट करें।

 

Question 32. गोपनीयता से क्या तात्पर्य है?
Answer: गोपनीयता से तात्पर्य है कि शपथ लेने के दौरान प्रत्येक व्यक्ति, खासकर मंत्रिमंडल के सदस्य, मंत्रिमंडल के निर्णयों और चर्चाओं को गुप्त रखेंगे। यह सरकार के कामकाज की अखंडता और विश्वास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक करना सरकारी नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
In simple words: गोपनीयता का मतलब है कि सभी मंत्री कैबिनेट के फैसलों और बातों को गुप्त रखेंगे।

🎯 Exam Tip: गोपनीयता मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो मंत्रियों को एकजुट होकर काम करने में मदद करता है।

 

Question 33. सरकार को वास्तविक अध्यक्ष कौन है?
Answer: सरकार का वास्तविक अध्यक्ष 'प्रधानमंत्री' होता है। हालांकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होता है, लेकिन असली कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री के हाथ में होती हैं, जो मंत्रिपरिषद के मुखिया भी होते हैं।
In simple words: प्रधानमंत्री ही सरकार के असली मुखिया होते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में संसदीय प्रणाली है, जहां राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख और प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख होता है।

 

Question 34. देश में 'शासनाध्यक्ष' तथा 'राज्याध्यक्ष कौन होता है?
Answer: देश में 'शासनाध्यक्ष' प्रधानमंत्री होता है, क्योंकि वह सरकार का वास्तविक मुखिया होता है और नीतियों को लागू करता है। 'राज्याध्यक्ष' राष्ट्रपति होता है, क्योंकि वह देश का संवैधानिक प्रमुख होता है और राज्य का प्रतिनिधित्व करता है। यह पद देश की सर्वोच्च गरिमा का प्रतीक है।
In simple words: प्रधानमंत्री सरकार चलाते हैं (शासनाध्यक्ष), और राष्ट्रपति देश के संवैधानिक मुखिया (राज्याध्यक्ष) होते हैं।

🎯 Exam Tip: शासनाध्यक्ष और राज्याध्यक्ष के बीच का अंतर संसदीय लोकतंत्र की प्रमुख विशेषता है, जिसमें शक्तियां बंटी होती हैं।

 

Question 35. राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के नाम लिखिए।
Answer: राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं, जो देश की विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए होती हैं:
1. राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद 352 के तहत) – यह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में लगता है।
2. किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (राज्य आपात/राष्ट्रपति शासन, अनुच्छेद 356 के तहत) – यह तब लगता है जब राज्य में सरकार संविधान के अनुसार काम न कर पा रही हो।
3. वित्तीय आपात (अनुच्छेद 360 के तहत) – यह तब लगता है जब देश की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में हो।
In simple words: राष्ट्रपति तीन तरह की इमरजेंसी लगा सकते हैं: राष्ट्रीय इमरजेंसी, राज्यों में राष्ट्रपति शासन, और पैसों से जुड़ी इमरजेंसी (वित्तीय आपात)।

🎯 Exam Tip: इन तीनों आपातकालों के कारणों, घोषणा की प्रक्रिया और प्रभावों को स्पष्ट रूप से याद रखें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत में कार्यपालिका के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में संसदीय शासन व्यवस्था को अपनाया गया है, जिसमें राष्ट्रपति कार्यपालिका का औपचारिक और संवैधानिक प्रधान होता है। वहीं, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका होती है। संविधान के अनुच्छेद 74 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका मुखिया प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार ही काम करेगा। प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, लेकिन वह उस व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है जो लोकसभा में बहुमत दल का नेता होता है। यदि किसी एक पार्टी को बहुमत न मिले, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है और उसे एक निश्चित समय-सीमा में बहुमत सिद्ध करने का आदेश देता है। प्रधानमंत्री को लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक का सदस्य होना अनिवार्य होता है। यदि प्रधानमंत्री नियुक्त होते समय वह किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता लेनी पड़ती है।
In simple words: भारत में राष्ट्रपति नाममात्र का मुखिया होता है और प्रधानमंत्री असली मुखिया। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं। प्रधानमंत्री को लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल से चुना जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्यपालिका के दोहरे स्वरूप (नाममात्र और वास्तविक) को स्पष्ट रूप से समझाएं और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री की भूमिकाओं को अलग-अलग बताएं।

 

Question 2. “भारत में राष्ट्रपति को पद से किस प्रकार हटाया जा सकता है?” संक्षेप में बताइए।
Answer: भारत में राष्ट्रपति को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया को महाभियोग कहते हैं। यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करते हैं। उनका कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग लगाकर उन्हें समय से पहले हटाया जा सकता है। महाभियोग लगाने का अधिकार संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) को प्राप्त है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए, आरोप लगाने वाले सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। राष्ट्रपति को कम से कम 14 दिन पहले लिखित सूचना दी जाती है। प्रस्ताव पास होने के 14 दिन बाद, आरोप लगाने वाला सदन इस पर विचार करता है और यदि कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है, तो इसे दूसरे सदन में भेज दिया जाता है। दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है या जांच के लिए एक विशेष समिति बनाता है। यदि दूसरे सदन द्वारा भी कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से आरोप सिद्ध और स्वीकार हो जाते हैं, तो प्रस्ताव पास होने की तारीख से राष्ट्रपति को अपने पद से हटा हुआ मान लिया जाता है।
In simple words: राष्ट्रपति को संविधान तोड़ने पर महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है। संसद के किसी भी सदन में एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर से आरोप लगते हैं। 14 दिन पहले राष्ट्रपति को सूचना दी जाती है। फिर दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से आरोप पास करें तो राष्ट्रपति को पद से हटना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों (सूचना, बहुमत, दोनों सदनों की भूमिका) और अनुच्छेद 61 का उल्लेख करना सुनिश्चित करें।

 

Question 3. राष्ट्रपति पद की योग्यताएँ बताइए।
Answer: राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए:
1. उसे भारत का नागरिक होना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि देश का सर्वोच्च पद किसी विदेशी व्यक्ति के पास न हो।
2. उसकी आयु न्यूनतम 35 वर्ष पूरी हो चुकी हो। यह पद की परिपक्वता और अनुभव की आवश्यकता को दर्शाता है।
3. वह लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो। इसका अर्थ है कि उसमें सभी आवश्यक क्षमताएं होनी चाहिए जो एक सांसद के लिए जरूरी होती हैं।
4. उसे किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य और राज्य विधानसभा एवं संघीय क्षेत्र की विधानसभा के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य निम्नलिखित सूत्रों द्वारा निर्धारित होता है:
1. राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य =
\[ \frac{\text{समस्त राज्यों और संघीय क्षेत्रों की विधानसभाओं के कुल सदस्यों के प्राप्त मतों की संख्या का योग}}{\text{संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या}} \]
2. राज्य/संघीय विधानसभा के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य =
\[ \frac{\text{राज्य की कुल जनसंख्या}}{\text{राज्य विधानसभा, संघीय क्षेत्रों की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या}} \times 1000 \]
In simple words: राष्ट्रपति बनने के लिए व्यक्ति भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 साल का हो और लोकसभा सदस्य बनने लायक हो। साथ ही, वोटों की गिनती के लिए कुछ खास नियम होते हैं जिसमें राज्यों की जनसंख्या और विधायकों की संख्या को देखा जाता है।

🎯 Exam Tip: योग्यताएं याद रखें: नागरिकता, आयु और लोकसभा सदस्य बनने की क्षमता। साथ ही, मत मूल्य के लिए जनसंख्या और सदस्यों की संख्या का अनुपात महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 5. राष्ट्रपति के वेतन, विशेषाधिकार, नियुक्तियाँ एवं अन्य सुविधाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: राष्ट्रपति को पद पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण वेतन, विशेषाधिकार, नियुक्तियां और सुविधाएं मिलती हैं। भारत सरकार ने 11 सितंबर 2008 को राष्ट्रपति का वेतन 1,50,000 Rs प्रतिमाह निर्धारित किया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया। जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर होता है, तो उसके खिलाफ किसी भी दीवानी या फौजदारी अदालत में कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट भी जारी नहीं किया जा सकता। पद पर रहते हुए उसे गिरफ्तार भी नहीं किया जा सकता है। हालांकि, दो महीने का लिखित नोटिस देने के बाद उसके खिलाफ केवल दीवानी कार्यवाही की जा सकती है। पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी को सेवानिवृत्त राष्ट्रपति को मिलने वाली पेंशन की आधी राशि और सरकारी मकान आजीवन मिलता है। राष्ट्रपति के निवास स्थान को राष्ट्रपति भवन कहते हैं, जो रायसीना हिल्स, दिल्ली में स्थित है। इसके अलावा, शिमला के पास 'छरबरा' में उनका ग्रीष्मकालीन निवास 'द रिट्रीट' और हैदराबाद में 'राष्ट्रपति निलयम' भी है। ये सुविधाएं राष्ट्रपति को स्वतंत्र रूप से कार्य करने और पद की गरिमा बनाए रखने में मदद करती हैं।
In simple words: राष्ट्रपति को अच्छी सैलरी मिलती है और पद पर रहते हुए उन्हें किसी मुकदमे से सुरक्षा मिलती है। उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकती। पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी को भी आधी पेंशन और सरकारी घर मिलता है। राष्ट्रपति भवन, द रिट्रीट और राष्ट्रपति निलयम उनके रहने की जगहें हैं।

🎯 Exam Tip: वेतन, कानूनी सुरक्षा (मुकदमा/गिरफ्तारी से छूट), निवास स्थान और सेवानिवृत्ति लाभ जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 6. राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि वह भारत के संघीय विधानमंडल (संसद) का एक अभिन्न अंग होता है। ये शक्तियां इस प्रकार हैं:
1. वह संसद के दोनों सदनों को बुलाता है, स्थगित करता है और उनका सत्रावसान कर सकता है। उसके पास लोकसभा को भंग करने की शक्ति भी होती है।
2. किसी विवादित विधेयक पर दोनों सदनों के बीच मतभेद होने पर वह संयुक्त बैठक बुला सकता है।
3. वह लोकसभा में दो और राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामांकित करता है, खासकर उन लोगों को जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला या किसी अन्य क्षेत्र में विशेष सेवा की हो।
4. प्रत्येक वर्ष नए सत्र की शुरुआत में और नई लोकसभा के गठन के बाद पहले सत्र में वह दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करता है (अभिभाषण देता है)।
5. संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना कानून नहीं बन सकता। वह साधारण विधेयक को कुछ सुझावों के साथ संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। यदि संसद उसे दोबारा बिना संशोधन के पास कर दे, तो राष्ट्रपति को उसे मंजूरी देनी ही होती है।
6. जिस समय संसद का अधिवेशन नहीं चल रहा हो, उस समय राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। ये अध्यादेश संसद के अधिवेशन शुरू होने के छह सप्ताह बाद तक लागू रहते हैं, जब तक कि संसद उन्हें कानून के रूप में अनुमोदित न कर दे या समाप्त न कर दे। यह शक्ति आपातकालीन स्थितियों में तुरंत कानून बनाने में सहायता करती है।
In simple words: राष्ट्रपति संसद के सत्र बुलाते हैं, रोकते हैं और लोकसभा को भंग भी कर सकते हैं। वे विधेयक पर हस्ताक्षर करते हैं तभी वह कानून बनता है। जब संसद नहीं चल रही होती, तो वे अध्यादेश (एक तरह का कानून) भी जारी कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियों में अध्यादेश जारी करने और विधेयकों पर हस्ताक्षर करने की शक्ति को विशेष रूप से उजागर करें।

 

Question 7. अध्यादेश किसे कहते हैं? उसे कौन जारी करता है?
Answer: अध्यादेश एक ऐसा कानून होता है जिसे राष्ट्रपति किसी संकट या असामान्य स्थिति में लागू करता है, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता और किसी विषय पर तुरंत कानून बनाने की जरूरत होती है। अध्यादेश सामान्य विधि निर्माण प्रक्रिया द्वारा पारित कानून के समान ही प्रभावी होता है। यह एक निश्चित अवधि तक प्रभावी रहता है। संसद का सत्र शुरू होने पर इसे दोनों सदनों के सामने रखा जाता है। संसद इसे कानून में बदल सकती है या समाप्त कर सकती है, अन्यथा यह संसद सत्र के छह सप्ताह बाद अपने आप खत्म हो जाता है। केंद्र के समान ही, राज्यों में राज्यपाल भी अध्यादेश जारी करते हैं जब विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा हो। यह शक्ति सुनिश्चित करती है कि विधायी प्रक्रिया में कोई रुकावट न आए।
In simple words: अध्यादेश एक खास कानून है जो राष्ट्रपति तब निकालते हैं जब संसद काम नहीं कर रही होती और तुरंत कोई कानून चाहिए होता है। राज्यपाल भी ऐसा ही कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अध्यादेश की परिभाषा, इसे कौन जारी करता है और इसकी समय-सीमा (छह सप्ताह) को ठीक से समझाएं।

 

Question 8. राष्ट्रपति को कौन – कौन से वित्तीय अधिकार प्राप्त हैं? बताइए।
Answer: राष्ट्रपति को निम्नलिखित वित्तीय अधिकार प्राप्त हैं:
1. अनुच्छेद 112 के तहत, राष्ट्रपति संसद के समक्ष संघ का वार्षिक आय-व्यय का विवरण (बजट) प्रस्तुत करवाता है।
2. अनुच्छेद 113 के तहत, राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संसद से किसी प्रकार की धन की मांग नहीं की जा सकती है। यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय प्रस्ताव राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना पेश न हों।
3. अनुच्छेद 117 (1) में यह व्यवस्था है कि वित्त से संबंधित कोई विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति के बिना संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
4. वह राज्यों और केंद्र के बीच आयकर की प्राप्तियों का वितरण करता है।
5. आपात स्थिति में आकस्मिक निधि से धन निकालने का कार्य संसद के नियंत्रण में राष्ट्रपति करता है।
6. उसे वित्त आयोग नियुक्त करने का अधिकार प्राप्त है, जो केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों की जांच करता है।
In simple words: राष्ट्रपति संसद में बजट पेश करवाते हैं, उनकी मर्जी के बिना कोई पैसा नहीं मांग सकता। वित्त से जुड़े बिल पहले उनकी मंजूरी से ही आते हैं। वे राज्यों और केंद्र के बीच पैसे बांटने का काम भी करते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के वित्तीय अधिकारों में बजट प्रस्तुति, धन की मांग पर नियंत्रण और वित्त आयोग की नियुक्ति जैसे मुख्य कार्य शामिल होते हैं।

 

Question 9. राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान राष्ट्रपति को कुछ न्यायिक शक्तियां प्रदान करता है, जिनका प्रयोग वह मंत्रिपरिषद की सलाह से ही करता है। अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति के पास क्षमादान की शक्ति है। वह किसी सजा पाए हुए व्यक्ति को क्षमा कर सकता है, उसकी सजा को कम कर सकता है, या उसकी प्रकृति को बदल सकता है। राष्ट्रपति इन शक्तियों का प्रयोग तीन प्रकार के मामलों में कर सकता है:
1. उन सभी मामलों में जहां दंड किसी सैनिक न्यायालय द्वारा दिया गया हो।
2. उन सभी मामलों में जहां दंड ऐसे अपराधों के लिए दिया गया हो जो संघ की कार्यपालिका शक्ति के अंतर्गत आते हैं।
3. उन सभी मामलों के लिए जिनमें मृत्युदंड मिला हो।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति की क्षमादान संबंधी शक्ति का राज्यों के राज्यपालों और सैनिक न्यायालयों के सैनिक अधिकारियों की क्षमादान संबंधी शक्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, जिसका अर्थ है कि राज्यपाल की शक्तियां सीमित होती हैं।
In simple words: राष्ट्रपति के पास किसी को माफ करने, उसकी सजा कम करने या बदलने की शक्ति है। वे यह शक्ति सैनिक अदालतों के, केंद्र सरकार के और मृत्युदंड के मामलों में इस्तेमाल कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) के प्रकार (पूर्ण क्षमा, परिहार, लघुकरण आदि) और उन मामलों को याद रखें जिनमें इसका प्रयोग होता है।

 

Question 10. अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति के अधिकारों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मूल संविधान के अनुच्छेद 352 में यह व्यवस्था थी कि यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति के कारण भारत या उसके किसी भाग की शांति या व्यवस्था नष्ट होने का भय है, तो वह संकटकालीन व्यवस्था की घोषणा कर सकता था। संसद की स्वीकृति के बिना भी यह घोषणा दो महीने तक लागू रहती थी, और संसद से स्वीकृति मिलने पर शासन इसे तब तक लागू रख सकता था जब तक वह चाहे।
44वें संवैधानिक संशोधन (1978) के बाद, वर्तमान व्यवस्था इस प्रकार है:
(i) अब इस प्रकार का आपातकाल केवल युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की आशंका होने पर ही घोषित किया जा सकेगा। केवल आंतरिक अशांति के नाम पर आपातकाल घोषित नहीं किया जा सकता है।
(ii) राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा तभी की जा सकेगी, जब मंत्रिमंडल लिखित रूप में राष्ट्रपति को ऐसा परामर्श दे। यह नियम राष्ट्रपति की शक्ति पर नियंत्रण रखता है।
अनुच्छेद 352 के तहत अब तक तीन बार आपातकाल की घोषणा की गई है: 1962 में चीन के आक्रमण के समय, 1971 में पाकिस्तान के आक्रमण के समय और जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर।
In simple words: अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति देश में राष्ट्रीय इमरजेंसी लगा सकते हैं। अब यह सिर्फ युद्ध या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में ही लग सकती है, और तभी जब कैबिनेट लिखित में सलाह दे। पहले यह आंतरिक अशांति पर भी लगती थी।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 352 के मूल प्रावधानों और 44वें संशोधन के बाद हुए बदलावों को स्पष्ट करें, खासकर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को।

 

Question 11. संवैधानिक आपात किसे कहते हैं? इसके राज्य पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
Answer: संवैधानिक आपात को 'राष्ट्रपति शासन' भी कहते हैं। यह तब लगता है जब राष्ट्रपति को राज्यपाल के प्रतिवेदन पर या अन्य स्रोतों से यह पता चले कि किसी राज्य का प्रशासन संविधान के नियमों के अनुसार चलाना मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 356 का उपयोग करते हुए संबंधित राज्य में संवैधानिक आपात घोषित कर सकता है।
किसी राज्य पर संवैधानिक आपात के निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
1. राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है और राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के हाथ में आ जाता है।
2. राज्य विधानमंडल की शक्तियां संसद को मिल जाती हैं। संसद उस राज्य के लिए कानून बना सकती है।
3. राष्ट्रपति उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर राज्य की किसी भी सत्ता की शक्तियों को स्थगित या सीमित कर सकता है।
4. संबंधित राज्य में किसी भी नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को निलंबित किया जा सकता है। यह आपातकाल की एक गंभीर स्थिति है।
In simple words: संवैधानिक आपात या राष्ट्रपति शासन तब लगता है जब राज्य में सरकार संविधान के अनुसार काम न कर पाए। इसके बाद राज्यपाल राष्ट्रपति के अधीन काम करता है, राज्य की विधानसभा की शक्तियां संसद को मिल जाती हैं, और लोगों के कुछ मौलिक अधिकार रुक जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुच्छेद 356 और इसके प्रभावों को ठीक से समझें, खासकर राज्यपाल की भूमिका और राज्य विधायिका की शक्तियों के निलंबन पर।

 

Question 12. अनुच्छेद 360 के अन्तर्गत राष्ट्रपति को प्राप्त अधिकारों का उल्लेख कीजिए।
Answer: अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति को वित्तीय आपातकाल घोषित करने का अधिकार मिलता है। यह तब होता है जब राष्ट्रपति को विश्वास हो जाए कि पूरे देश या उसके किसी विशेष भाग की आर्थिक स्थिति या वित्तीय साख खतरे में है। इस घोषणा को भी अन्य आपातकाल घोषणाओं की तरह संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक होता है।
वित्तीय आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति को कई महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त होती हैं:
1. वह केंद्र और राज्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कमी कर सकता है।
2. राष्ट्रपति राज्य सरकारों को उनकी आर्थिक नीतियों को अपने निर्देशानुसार चलाने के लिए बाध्य कर सकता है।
3. वह राज्यों को वित्तीय विधेयक और बजट प्रस्तुत करने के लिए निर्देश दे सकता है।
इस प्रकार, वित्तीय संकट की स्थिति में राज्यों की आर्थिक नीति पर केंद्र का पूरा नियंत्रण स्थापित हो जाता है। अभी तक भारत में वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने का अवसर नहीं आया है।
In simple words: अनुच्छेद 360 राष्ट्रपति को देश में वित्तीय इमरजेंसी लगाने की शक्ति देता है अगर देश की आर्थिक हालत खराब हो। इसमें राष्ट्रपति सरकारी कर्मचारियों का वेतन कम कर सकते हैं और राज्यों की आर्थिक नीतियों पर कंट्रोल कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: वित्तीय आपातकाल के कारण (वित्तीय स्थिरता का खतरा), घोषणा की प्रक्रिया और राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियों (वेतन में कमी, राज्यों पर नियंत्रण) पर ध्यान दें।

 

Question 14. भारतीय शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री की स्थिति ब्रिटिश प्रधानमंत्री के समान ही बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री कार्यपालिका और व्यवस्थापिका दोनों का नेतृत्व करते हैं। यह सच है कि प्रधानमंत्री की स्थिति और शक्ति उसके व्यक्तित्व पर बहुत निर्भर करती है। प्रधानमंत्री के पद का महत्व उस व्यक्ति पर निर्भर करता है जो इसे संभालता है। संवैधानिक रूप से, प्रधानमंत्री की स्थिति संसद, उसके दल और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर निर्विवाद होती है। 'मार्ले' ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को 'कैबिनेट रूपी भवन की आधारशिला' कहा था, और यह बात भारतीय प्रधानमंत्री पर भी लागू होती है, क्योंकि दोनों देशों में संसदीय सरकारें हैं। प्रधानमंत्री देश की सरकार के मुखिया होते हैं और विश्व के शक्तिशाली शासनाध्यक्षों में से एक हैं। राष्ट्रपति औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष होते हैं, जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक शासनाध्यक्ष होते हैं।
In simple words: भारत में प्रधानमंत्री बहुत ताकतवर होते हैं। वे सरकार के असली मुखिया होते हैं और संसद में भी नेतृत्व करते हैं। उनकी ताकत उनके काम करने के तरीके पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री को शासनाध्यक्ष और मंत्रिपरिषद का मुखिया के रूप में प्रस्तुत करें, साथ ही उनके व्यक्तित्व के महत्व को भी समझाएं।

 

Question 15. प्रधानमंत्री के कोई दो कार्य लिखिए।
Answer: प्रधानमंत्री के दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. मंत्रिपरिषद का निर्माण करना: पदभार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री का पहला काम मंत्रिपरिषद का गठन करना होता है। प्रधानमंत्री तय करता है कि कानून के अनुसार मंत्रिपरिषद में कितने मंत्री होंगे और कौन-कौन से मंत्री होंगे।
2. राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के बीच संबंध स्थापित करना: सार्वजनिक महत्व के विषयों पर राष्ट्रपति से संपर्क केवल प्रधानमंत्री के माध्यम से ही हो सकता है। प्रधानमंत्री ही राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल के फैसलों से परिचित कराते हैं और राष्ट्रपति के परामर्श को मंत्रिमंडल तक पहुंचाते हैं। यह संचार का एक महत्वपूर्ण सूत्र है।
In simple words: प्रधानमंत्री का मुख्य काम मंत्री परिषद बनाना और राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के बीच बातचीत का पुल बनना है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री के कार्यों को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करें, जिससे उन्हें याद रखना आसान हो।

 

Question 17. मंत्रिपरिषद् में प्रधानमंत्री के स्थान को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मंत्रिपरिषद् में प्रधानमंत्री का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वह मंत्रिपरिषद का मुखिया होता है। उसके कुछ प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
1. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का निर्माण करता है और मंत्रियों को विभागों का आवंटन करता है।
2. वह मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करता है ताकि सभी काम व्यवस्थित रूप से हों।
3. प्रधानमंत्री मंत्रियों से त्यागपत्र मांग सकता है और नए मंत्रियों की नियुक्ति कर सकता है। जिन मंत्रियों से वह त्यागपत्र मांगता है, उन्हें इस्तीफा देना पड़ता है।
4. वह मंत्रिमंडल की सभी बैठकों की अध्यक्षता करता है और महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करता है।
5. वह मंत्रिमंडल की ओर से संसद में बोलता है और महत्वपूर्ण घोषणाएं करता है।
6. वह शासन के विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करता है और मंत्रियों के मतभेदों को दूर करके उनमें सामंजस्य बनाए रखता है।
7. वह मंत्रियों के विभागों में परिवर्तन भी कर सकता है ताकि दक्षता बनी रहे।
In simple words: प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के मुखिया होते हैं। वे मंत्री चुनते हैं, विभाग बांटते हैं, बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और मंत्रियों के बीच तालमेल बनाए रखते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की भूमिका को मंत्रिपरिषद के नेता, संयोजक और प्रवक्ता के रूप में उजागर करें।

 

Question 18. मंत्रियों की नियुक्ति एवं उनके विभागों का आवंटन किस प्रकार किया जाता है?
Answer: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति करते हैं। 91वें संवैधानिक संशोधन (जो 2003 में पारित हुआ और 2004 में राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत हुआ) के अनुसार, मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री स्वयं मंत्रियों के विभागों का आवंटन करते हैं। प्रधानमंत्री अपने साथी मंत्रियों की सूची राष्ट्रपति को भेजते हैं, जिसे राष्ट्रपति अपनी मंजूरी दे देते हैं और उन्हें शपथ भी दिलवाते हैं। वर्तमान केंद्र सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 78 है, जो निर्धारित उच्चतम सीमा के करीब है।
मंत्री-परिषद का कार्यकाल: संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बने रह सकते हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद तब तक अपने पद पर रहते हैं जब तक उन्हें लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो। सामान्यतः, मंत्रिपरिषद का कार्यकाल लोकसभा के कार्यकाल के साथ ही चलता है, जो कि पांच वर्ष होता है।
In simple words: प्रधानमंत्री ही मंत्रियों को चुनते हैं और उनके विभाग बांटते हैं। कुल मंत्रियों की संख्या लोकसभा के 15% से ज्यादा नहीं हो सकती। मंत्री तब तक पद पर रहते हैं जब तक लोकसभा में उन्हें विश्वास हासिल हो।

🎯 Exam Tip: मंत्रियों की संख्या की सीमा (15%), प्रधानमंत्री की भूमिका और मंत्रिपरिषद के कार्यकाल को स्पष्ट करें।

 

Question 20. भारत में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के मध्य संबंधों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में मंत्रिपरिषद और प्रधानमंत्री के मध्य संबंधों को निम्नलिखित बिंदुओं के तहत स्पष्ट किया जा सकता है:
1. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का आधार और केंद्र बिंदु: प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का आधार और केंद्र बिंदु होता है। मंत्रिपरिषद का बने रहना प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने पर निर्भर करता है। यदि प्रधानमंत्री इस्तीफा दे दें या उनके खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना होता है।
2. मंत्रियों में समन्वय स्थापित करना: प्रधानमंत्री विभिन्न मंत्रियों के कार्यकलापों में समन्वय स्थापित करता है। वह सुनिश्चित करता है कि सरकार के सभी विभाग एक साथ मिलकर काम करें।
3. निर्णयों में पहल और आधिकारिक वक्तव्य: प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल के निर्णयों में पहल करता है और मंत्रिपरिषद की ओर से आधिकारिक वक्तव्य देता है। वह सरकार की नीतियों और निर्णयों को जनता के सामने प्रस्तुत करता है।
In simple words: प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद के मुखिया होते हैं। वे मंत्रियों में तालमेल बैठाते हैं, सरकार के फैसले लेते हैं और उन्हें जनता के सामने रखते हैं। अगर प्रधानमंत्री इस्तीफा दें तो पूरी मंत्रिपरिषद को हटना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री को मंत्रिपरिषद का नेता और प्रमुख प्रवक्ता के रूप में दर्शाएं, और यह भी समझाएं कि मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री पर निर्भर करती है।

 

Question 21. मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व से आप क्या समझते हैं?
Answer: मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य एक टीम के रूप में काम करते हैं। इसके तहत, मंत्रिपरिषद के विभिन्न सदस्यों के बीच काम का बंटवारा होता है और प्रत्येक मंत्री अपने विभाग के कामों के लिए प्रशासनिक रूप से जिम्मेदार होता है। हालांकि, नीति संबंधी मामलों में संसद के प्रति उत्तरदायित्व व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक होता है। यदि लोकसभा किसी एक विभाग की नीतियों के प्रति अविश्वास व्यक्त करे या बजट पर विचार करते समय किसी एक विभाग की मांगों के संबंध में कटौती प्रस्ताव पारित कर दे, तो इसे संपूर्ण मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास माना जाता है और पूरे मंत्रिमंडल को इस्तीफा देना पड़ता है। यह सिद्धांत सरकार की एकता और एकजुटता सुनिश्चित करता है।
In simple words: सामूहिक उत्तरदायित्व का मतलब है कि मंत्रिपरिषद के सभी मंत्री मिलकर काम करते हैं और एक साथ संसद के प्रति जिम्मेदार होते हैं। अगर एक मंत्री के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए, तो पूरी सरकार को हटना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ 'एक साथ तैरना या एक साथ डूबना' होता है। यह दर्शाता है कि एक सदस्य के कार्य या असफलता का प्रभाव पूरे मंत्रिपरिषद पर पड़ता है।

 

Question 22. मंत्रिमण्डल व मंत्रिपरिषद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: मंत्रिमण्डल और मंत्रिपरिषद के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
1. मंत्रिपरिषद एक बड़ी संस्था है, जिसमें कैबिनेट स्तर के मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री शामिल होते हैं। इसमें संसदीय सचिवों की एक श्रेणी भी हो सकती है। वहीं, मंत्रिमंडल एक छोटी संस्था है, जिसमें आमतौर पर 20-22 सदस्य होते हैं और इसमें केवल कैबिनेट स्तर के मंत्री ही शामिल होते हैं।
2. प्रायः मंत्रिमंडल में सभी वरिष्ठ मंत्री होते हैं जो महत्वपूर्ण विभागों के अध्यक्ष होते हैं, जबकि मंत्रिपरिषद कैबिनेट के सहायक के रूप में कार्य करती है।
3. मंत्रिमंडल की बैठकें नियमित रूप से होती हैं और उनमें केवल कैबिनेट मंत्री ही भाग लेते हैं। वहीं, मंत्रिपरिषद की बैठकें कभी-कभी होती हैं और राज्य मंत्री एवं उपमंत्री विशेष आमंत्रण पर ही मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होते हैं।
4. मंत्रिमंडल प्रशासन का केंद्र होता है, जबकि मंत्रिपरिषद मंत्रिमंडल की सहायक संस्था के रूप में कार्य करती है।
5. मंत्रिमंडल के सदस्यों का वेतन अधिक होता है, जबकि मंत्रिपरिषद के सदस्यों (राज्य मंत्री एवं उपमंत्री) का वेतन कम होता है।
In simple words: मंत्रिपरिषद एक बड़ा समूह है जिसमें सभी मंत्री (कैबिनेट, राज्य, उपमंत्री) आते हैं, जबकि मंत्रिमंडल एक छोटा समूह है जिसमें केवल मुख्य कैबिनेट मंत्री होते हैं। मंत्रिमंडल प्रशासन का मुख्य केंद्र होता है।

🎯 Exam Tip: आकार, सदस्यों की प्रकृति (वरिष्ठता), बैठकों की आवृत्ति, और प्रशासन में उनकी भूमिका के आधार पर इन दोनों के बीच अंतर को स्पष्ट करें।

 

Question 23. प्रधानमंत्री और संसद के मध्य संबंधों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रधानमंत्री और संसद के मध्य संबंध निम्नलिखित बिंदुओं के तहत प्रस्तुत किए जा सकते हैं:
1. सामान्यतः प्रधानमंत्री का चुनाव संसद के निचले सदन (लोकसभा) में से होता है।
2. प्रधानमंत्री संसद में बहुमत दल का नेता होता है, उसके प्रति उत्तरदायी होता है और उसके विश्वास पर्यंत पद पर बना रहता है। इस प्रकार, संसद और प्रधानमंत्री के बीच अनिवार्य पारस्परिक संबंध होते हैं।
3. संसदीय शासन प्रणाली में कार्यपालिका और व्यवस्थापिका के मध्य शक्तियों का पृथक्करण नहीं होता। वास्तविक कार्यपालिका, यानी मंत्रिपरिषद, संसद में से ही ली जाती है और मंत्रिपरिषद का मुखिया प्रधानमंत्री होता है।
4. देश के प्रशासन को चलाने और नीति संबंधी विषयों में वह संसद के दोनों सदनों के प्रति उत्तरदायी होता है।
5. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को सलाह देता है कि संसद का सत्र कब बुलाया जाए, कब स्थगित किया जाए और कब भंग किया जाए।
6. प्रधानमंत्री यह भी सुनिश्चित करता है कि कैबिनेट के निर्णयानुसार कौन से विधेयक संसद में पेश किए जाएं और विपक्ष के विरोध का किस प्रकार सामना किया जाए। यह संसदीय कामकाज में उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
In simple words: प्रधानमंत्री लोकसभा से आते हैं और संसद में बहुमत दल के नेता होते हैं। वे संसद के प्रति जवाबदेह होते हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को संसद के सत्रों को बुलाने या भंग करने की सलाह देते हैं और संसद में सरकार की नीतियों का बचाव करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की भूमिका को संसद के नेता, सरकार के प्रवक्ता और विधायी प्रक्रिया के समन्वयक के रूप में उजागर करें।

 

Question 24. शासनाध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत का प्रधानमंत्री विश्व के शक्तिशाली शासनाध्यक्षों में से एक है। वह सरकार का मुखिया होता है। संसदीय प्रणाली अपनाए जाने के कारण राष्ट्रपति औपचारिक राष्ट्राध्यक्ष है और प्रधानमंत्री वास्तविक शासनाध्यक्ष है। शासनाध्यक्ष के रूप में वह व्यक्तिगत रूप से राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।
1. वह देश का मार्गदर्शन करता है और चुनावों के समय चुनाव घोषणा-पत्र तैयार करता है जिसके आधार पर चुनाव लड़ा जाता है।
2. यदि किसी विषय पर दो या दो से अधिक मंत्रियों में मतभेद हो, तो प्रधानमंत्री मध्यस्थता करके उस मतभेद को दूर करता है और उनके बीच सामंजस्य बनाए रखता है।
3. प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का अध्यक्ष होता है और मंत्रिमंडल की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करता है। उसकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम मंत्री अध्यक्षता करते हैं।
4. केंद्रीय मंत्रिमंडल और अन्य नीति निर्माणक संस्थाओं से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णय उसकी देखरेख में लिए जाते हैं। वह नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष होता है।
In simple words: प्रधानमंत्री सरकार के मुखिया होते हैं और देश की सभी नीतियों का नेतृत्व करते हैं। वे मंत्रियों के बीच मतभेद सुलझाते हैं, मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और नीति आयोग के अध्यक्ष भी होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री को सरकार के नेता, नीति निर्धारक और मंत्रिपरिषद के समन्वयक के रूप में समझाएं।

 

Question 25. प्रधानमंत्री किस प्रकार राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के मध्य सम्पर्क सूत्र के रूप में कार्य करता है। बताइए।
Answer: प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करता है। सार्वजनिक महत्व के मामलों पर राष्ट्रपति से संपर्क केवल प्रधानमंत्री के माध्यम से ही हो सकता है। प्रधानमंत्री ही राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल के निर्णयों से अवगत कराता है और राष्ट्रपति के परामर्श को मंत्रिमंडल तक पहुंचाता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मध्य जो भी विचार-विमर्श होता है, उसे पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है। इस प्रकार, प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के मध्य एक पुल का काम करता है, जिससे दोनों संवैधानिक संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय बना रहता है।
In simple words: प्रधानमंत्री राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के बीच बातचीत का मुख्य माध्यम होता है। वे राष्ट्रपति को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हैं और राष्ट्रपति की सलाह को मंत्रिमंडल तक पहुंचाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की भूमिका को राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच सेतु (पुल) के रूप में स्पष्ट करें, जो दोनों के बीच सूचना और सलाह का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है।

 

Question 26. “प्रधानमंत्री संसद और कैबिनेट के मध्य कड़ी है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रधानमंत्री संसद और कैबिनेट के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है। वह संसद में सरकार की ओर से मुख्य प्रवक्ता होता है और लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या दलों के समूह का नेता होने के कारण संसद का नेतृत्व करता है। यदि प्रधानमंत्री लोकसभा का सदस्य न होकर राज्यसभा का सदस्य हो, तो भी वह औपचारिक रूप से लोकसभा में अपने दल का नेता नहीं होता, फिर भी व्यवहार में लोकसभा का नेतृत्व वही करता है। प्रधानमंत्री को यह जिम्मेदारी है कि वह महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों की घोषणा करे और संसद में सामान्य महत्व की बहस में हस्तक्षेप कर सरकार की नीति को स्पष्ट करने के लिए अपना पक्ष रखे। इस तरह, वह सरकार की नीतियों और कार्यों को संसद में प्रस्तुत करने और उसका बचाव करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: प्रधानमंत्री संसद और कैबिनेट के बीच एक सेतु की तरह काम करते हैं। वे संसद में सरकार के मुख्य प्रवक्ता होते हैं और सरकार की नीतियों को संसद में पेश करते हैं, साथ ही उनका बचाव भी करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रधानमंत्री की दोहरी भूमिका को उजागर करें - कैबिनेट के प्रमुख के रूप में और संसद में सरकार के नेता के रूप में।

 

Question 27. मंत्रिपरिषद का गठन किस प्रकार होता है। बताइए।
Answer: मंत्रिपरिषद का गठन भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को उनके कार्यों में सहयोग और परामर्श देने के लिए किया गया है। मंत्रिपरिषद का गठन प्रधानमंत्री और तीन तरह के मंत्रियों - कैबिनेट, राज्यमंत्री और उपमंत्री - से मिलकर होता है। प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं। संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन का सदस्य मंत्री नियुक्त किया जा सकता है। मंत्री के लिए संसद का सदस्य होना अनिवार्य है। यदि कोई मंत्री संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 माह के भीतर मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देना पड़ता है। मंत्रिपरिषद तब तक अपने पद पर रह सकती है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त हो। 91वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2003 के अनुसार, मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
In simple words: मंत्रिपरिषद का गठन प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं, जिसमें कैबिनेट, राज्य और उपमंत्री होते हैं। मंत्रियों को संसद का सदस्य होना चाहिए, और उनकी संख्या लोकसभा के 15% से ज्यादा नहीं हो सकती।

🎯 Exam Tip: मंत्रिपरिषद के गठन में प्रधानमंत्री की केंद्रीय भूमिका, मंत्रियों के प्रकार और संख्या संबंधी संवैधानिक सीमा (15%) को स्पष्ट करें।

 

Question 29. मंत्रियों के प्रकार बताइए अथवा मंत्रिपरिषद में कितने प्रकार के मंत्री होते हैं? अथवा मंत्रिपरिषद के सदस्यों की विभिन्न श्रेणियों को संक्षेप में बताइए।
Answer: मंत्रिपरिषद में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मंत्री होते हैं, जिनकी श्रेणियां उनके पद और भूमिका के आधार पर निर्धारित होती हैं:
1. कैबिनेट मंत्री: ये कैबिनेट स्तर के मंत्री होते हैं और मंत्रिपरिषद के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य होते हैं। सामान्यतः सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ और महत्वपूर्ण सांसदों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाता है। ये उन्हें सौंपे गए विभागों के स्वतंत्र प्रभारी होते हैं और नीति निर्माण में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
2. राज्यमंत्री: राज्यमंत्री सामान्यतः कैबिनेट मंत्रियों के अधीन काम करते हैं। कई बार राज्यमंत्रियों को उनके विभागों का स्वतंत्र प्रभार भी दिया जाता है, यानी वे अपने विभाग के पूर्ण प्रभारी होते हैं।
3. उपमंत्री: ये मंत्रिपरिषद के कनिष्ठ सदस्य होते हैं। ये प्रायः विभाग के प्रभारी कैबिनेट मंत्री या राज्यमंत्री के काम में सहायता करते हैं। इनका मुख्य कार्य मंत्रियों की मदद करना होता है।
In simple words: मंत्रिपरिषद में तीन तरह के मंत्री होते हैं: कैबिनेट मंत्री (जो बड़े फैसले लेते हैं), राज्यमंत्री (जो कैबिनेट मंत्रियों की मदद करते हैं या छोटे विभागों के मुखिया होते हैं) और उपमंत्री (जो मंत्रियों की सहायता करते हैं)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के मंत्री की भूमिका, जिम्मेदारियों और कैबिनेट में उनकी स्थिति को स्पष्ट करें।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 21 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. राष्ट्रपति के निर्वाचन व सामान्य शक्तियों की व्याख्या कीजिए।
Answer: भारत में राष्ट्रपति का निर्वाचन एक अप्रत्यक्ष पद्धति द्वारा होता है, जिसे एकल संक्रमणीय मत पद्धति कहते हैं। यह चुनाव गुप्त मतदान द्वारा होता है, जिसमें सफलता के लिए न्यूनतम कोटा प्राप्त करना आवश्यक होता है। राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों की विधानसभाओं और संघीय क्षेत्रों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
मत मूल्य का निर्धारण:
1. विधानसभा के एक सदस्य के मत का मूल्य:
\[ \frac{\text{राज्य की कुल जनसंख्या}}{\text{राज्य विधानसभा, संघीय क्षेत्रों की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या}} \times 1000 \]
2. संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य:
\[ \frac{\text{समस्त राज्यों और संघीय क्षेत्रों की विधानसभाओं के कुल सदस्यों के प्राप्त मतों का योग}}{\text{संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या}} \]
राष्ट्रपति की सामान्य शक्तियाँ:
1. मंत्रियों को पदभार संभालने से पहले राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं।
2. वे संसद के दोनों सदनों के अधिवेशनों को आमंत्रित और स्थगित कर सकते हैं।
3. राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकते हैं।
4. राष्ट्रपति को दोनों सदनों की अलग-अलग या सामूहिक बैठक में अभिभाषण देने का अधिकार है।
5. यदि किसी विधेयक पर संसद के सदनों में मतभेद हो तो राष्ट्रपति दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन बुला सकते हैं।
6. राष्ट्रपति किसी मंत्री विशेष के निर्णय के संबंध में प्रधानमंत्री को आदेश जारी कर सकते हैं।
7. संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना अधिनियम नहीं बन सकता। वह धन विधेयकों के अतिरिक्त अन्य विधेयकों को संसद को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं।
8. जब संसद का अधिवेशन न चल रहा हो तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं। ये अध्यादेश संसद द्वारा पारित अधिनियम के समान ही प्रभावी होते हैं।
इस प्रकार राष्ट्रपति भारत में सामान्य परिस्थितियों में शासन की शक्तियों का उपयोग प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रिपरिषद के साथ मिलकर करते हैं और स्वयं को शासन के सामान्य कार्यों से अलग रखते हैं। वह व्यवहार में प्रधानमंत्री का हितचिंतक और पथप्रदर्शक का कार्य करते हैं। राष्ट्रपति का दायित्व है कि वह राष्ट्रपति द्वारा अपेक्षा किए जाने पर शासन से संबंधित गतिविधियों से राष्ट्रपति को अवगत कराएं। राष्ट्रपति किसी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय को मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करने के लिए प्रधानमंत्री को निर्देश भी दे सकते हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के मध्य हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं।
In simple words: राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें संसद और विधानसभाओं के सदस्य वोट देते हैं। हर सदस्य के वोट का मूल्य अलग होता है। राष्ट्रपति की सामान्य शक्तियों में शपथ दिलाना, संसद सत्र बुलाना/रोकना, विधेयक पर हस्ताक्षर करना और अध्यादेश जारी करना शामिल है। वे प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया (निर्वाचक मंडल, मत मूल्य) और उनकी सामान्य शक्तियों (विधायी, कार्यकारी) दोनों को विस्तार से बताएं।

 

प्रश्न 2. महाभियोग की प्रक्रिया का सविस्तार विवेचन कीजिए।
Answer: महाभियोग एक ऐसी कानूनी प्रक्रिया है जिससे भारत के राष्ट्रपति को उनके पद से हटाया जा सकता है। यह तब किया जाता है जब राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करें या अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करें। यह प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61 के तहत बताई गई है। महाभियोग की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में शुरू की जा सकती है। इसके लिए, जिस सदन में प्रस्ताव लाया जा रहा है, उसके कम से कम एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए। राष्ट्रपति को इस बारे में 14 दिन पहले लिखित सूचना देनी होती है। जब प्रस्ताव लाने वाला सदन इस पर विचार करता है और उसे अपनी कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई बहुमत से पास कर देता है, तो इसे दूसरे सदन में भेजा जाता है। दूसरा सदन आरोपों की जाँच करता है या इसके लिए एक विशेष समिति बनाता है। यदि दूसरा सदन भी राष्ट्रपति के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाता है और उसे अपनी कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से स्वीकार कर लेता है, तो उसी दिन से राष्ट्रपति को पद से हटा हुआ मान लिया जाता है। यह प्रक्रिया अमेरिका की महाभियोग प्रक्रिया से भी कठिन है, क्योंकि इसमें साधारण बहुमत से नहीं बल्कि विशेष बहुमत से कार्रवाई शुरू होती है।
In simple words: महाभियोग वह प्रक्रिया है जिससे राष्ट्रपति को संविधान तोड़ने या अपनी शक्तियों का गलत उपयोग करने पर पद से हटाया जाता है। संसद के दोनों सदनों को इसे दो-तिहाई बहुमत से पास करना होता है।

🎯 Exam Tip: महाभियोग प्रक्रिया के चरणों और उसमें शामिल बहुमत की आवश्यकताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर अनुच्छेद 61 का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 3. राष्ट्रपति की शक्तियों एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति देश का सबसे बड़ा अधिकारी होता है और वह राष्ट्र के मुखिया के रूप में काम करता है। राष्ट्रपति की शक्तियों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
1. सामान्यकालीन शक्तियाँ:
(अ) कार्यपालिका शक्तियाँ: राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका के प्रमुख और सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति होते हैं। उन्हें किसी भी समय युद्ध घोषित करने या शांति स्थापित करने का अधिकार है। वे मंत्रियों, राज्यपालों, विदेशों में राजदूतों, उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों, संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों, एटार्नी जनरल, निर्वाचन आयुक्त, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति - जनजाति आयोग के अध्यक्ष, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्षों आदि की नियुक्ति करते हैं।
(ब) विधायी शक्तियाँ: राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाते हैं, उनके सत्रों को रोकते हैं और लोकसभा को भंग भी कर सकते हैं। यदि किसी विधेयक पर संसद के सदनों में मतभेद हो, तो वह दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। वे राज्यसभा में 12 सदस्यों को नामांकित करते हैं। प्रत्येक वर्ष संसद के नए सत्र की शुरुआत में और नई लोकसभा के गठन के बाद पहले सत्र में राष्ट्रपति अभिभाषण देते हैं। संसद द्वारा पास किए गए सभी विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही कानून बनते हैं। अनुच्छेद 123 के तहत, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रपति राज्यों और केंद्र के बीच आयकर की कमाई को बांटने का काम भी करते हैं, और आपातकाल में संसद के नियंत्रण में आकस्मिक निधि से पैसे निकालने का काम भी कर सकते हैं। वे वित्त आयोग की नियुक्ति भी करते हैं।
2. आपातकालीन शक्तियाँ: संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 में राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों का वर्णन किया गया है।
(अ) राष्ट्रीय आपातकाल: अनुच्छेद 352 के तहत, यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि युद्ध, बाहरी आक्रमण या देश के अंदर सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत या उसके किसी भी हिस्से की सुरक्षा खतरे में है, तो वह पूरे देश या उसके किसी हिस्से में आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं।
(ब) राज्यों में संवैधानिक विफलता (राज्य आपातकाल): अनुच्छेद 356 के तहत, यदि किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था विफल हो जाए, तो राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर या स्वयं यह मानकर कि राज्य में संविधान के अनुसार शासन नहीं चल रहा है, राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं। राष्ट्रपति भारत के संविधान के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं, सुनिश्चित करते हुए कि सभी शक्तियाँ विधिसम्मत ढंग से प्रयोग की जाएँ।
In simple words: राष्ट्रपति देश के सबसे बड़े अधिकारी हैं और उनकी दो तरह की मुख्य शक्तियाँ हैं: सामान्य शक्तियाँ (जैसे कानून बनाना और अधिकारियों को नियुक्त करना) और आपातकालीन शक्तियाँ (जो देश में किसी बड़ी परेशानी, जैसे युद्ध या राज्यों में संवैधानिक संकट के समय इस्तेमाल होती हैं)।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रपति की शक्तियों को कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय और आपातकालीन श्रेणियों में बांटकर विस्तृत रूप से समझाएं, और प्रत्येक श्रेणी के तहत प्रमुख अनुच्छेदों का उल्लेख करें।

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