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Detailed Chapter 20 संसद, लोकसभा एवं राज्यसभा RBSE Solutions for Class 12 Political Science
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Class 12 Political Science Chapter 20 संसद, लोकसभा एवं राज्यसभा RBSE Solutions PDF
Question 1. हमारी संसद मुख्य रूप से कौन-सा कार्य करती है?
(a) कानून लागू करना
(b) कानून बनाना
(c) कानून तोड़ने वालों को दंडित करना
(d) पंचायतों के चुनाव कराना
Answer: (b) कानून बनाना
In simple words: भारत की संसद का मुख्य काम देश के लिए नए कानून बनाना है. यह देश के शासन के लिए नियम और कायदे तय करती है.
🎯 Exam Tip: संसद के मुख्य कार्य को हमेशा स्पष्ट रूप से लिखें, क्योंकि यह सरकार के विधायी अंग की प्राथमिक भूमिका है.
Question 2. संसद के दो सदन हैं
(a) राज्यसभा व लोकसभा
(b) राष्ट्रपति व विधानसभा
Answer: (a) राज्यसभा व लोकसभा
In simple words: भारतीय संसद के दो मुख्य हिस्से हैं - राज्यसभा और लोकसभा. ये दोनों सदन मिलकर संसद का काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम याद रखें और समझें कि वे क्यों महत्वपूर्ण हैं.
Question 4. राजस्थान से राज्यसभा के लिए अधिकतम कितने सदस्य निर्वाचित हो सकते हैं?
(a) 25
(b) 15
(c) 250
(d) 10
Answer: (d) 10
In simple words: राजस्थान राज्य से कुल 10 सदस्य ही राज्यसभा में चुने जा सकते हैं. हर राज्य के लिए राज्यसभा में सदस्यों की संख्या तय होती है.
🎯 Exam Tip: विभिन्न राज्यों से राज्यसभा में सदस्यों की संख्या अक्सर पूछी जाती है; महत्वपूर्ण राज्यों की संख्या याद रखें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय संसद के कितने सदन है?
Answer: भारतीय संसद के दो सदन हैं - राज्यसभा और लोकसभा. यह दोनों सदन मिलकर भारत के विधायी कार्यों को पूरा करते हैं.
In simple words: भारतीय संसद में दो सदन होते हैं: राज्यसभा और लोकसभा.
🎯 Exam Tip: भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम हमेशा याद रखें और बताएं कि वे कौन से हैं.
Question 2. लोकसभा सदस्य की न्यूनतम आयु क्या है?
Answer: लोकसभा सदस्य बनने के लिए कम से कम 25 वर्ष की आयु होनी चाहिए. यह भारत में चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण नियम है.
In simple words: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए सबसे कम उम्र 25 साल है.
🎯 Exam Tip: संसद के सदस्यों के लिए न्यूनतम आयु योग्यताएं याद रखें, खासकर लोकसभा के लिए 25 वर्ष.
Question 3. राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्य मनोनीत करता है?
Answer: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है. ये सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से चुने जाते हैं ताकि हर वर्ग का प्रतिनिधित्व हो सके.
In simple words: राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 खास लोगों को चुनता है, जो अलग-अलग क्षेत्रों से होते हैं.
🎯 Exam Tip: मनोनीत सदस्यों की संख्या (12) और वे किस क्षेत्र से आते हैं, यह दोनों बिंदु महत्वपूर्ण हैं.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. संसद सदस्य बनने की योग्यता बताइए।
Answer: संसद का सदस्य बनने के लिए किसी व्यक्ति में कुछ खास योग्यताएं होनी चाहिए, जो इस प्रकार हैं:
1. वह भारत का नागरिक हो. यह सबसे पहली और जरूरी शर्त है.
2. लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उसकी न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए.
3. वह भारत राज्य में सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर कार्यरत न हो, ताकि निष्पक्षता बनी रहे.
4. वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया न ठहराया गया हो और न ही पागल हो.
5. वह संसद द्वारा कानून के अन्तर्गत निर्धारित अन्य योग्यताएं पूरी करता हो.
In simple words: संसद का सदस्य बनने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है, लोकसभा के लिए कम से कम 25 साल की उम्र होनी चाहिए. उसे सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए, दिवालिया या पागल नहीं होना चाहिए और बाकी सभी नियम पूरे करने चाहिए.
🎯 Exam Tip: संसद सदस्य की योग्यताओं को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और मुख्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें, जैसे नागरिकता और आयु.
Question 2. संसद के दो कार्य लिखिए।
Answer: संसद के मुख्य दो कार्य निम्नलिखित हैं:
(1) विधि निर्माण करना: संसद का मुख्य काम देश के लिए कानून बनाना है. इसे संघीय सूची और समवर्ती सूची के सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति मिली है. यह सुनिश्चित करती है कि देश में व्यवस्थित शासन हो.
* संकटकाल में, संसद राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकती है.
* यदि दो या अधिक राज्य विधानसभाएं प्रस्ताव पास करें, तो संसद उन विषयों पर भी कानून बना सकती है.
(2) कार्यपालिका पर नियंत्रण संबंधी कार्य: संसद कार्यपालिका (सरकार) पर नजर रखती है और उसे नियंत्रित करती है. यह अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, जैसे प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और काम रोको प्रस्ताव. लोकसभा को कार्यपालिका पर नियंत्रण की सबसे बड़ी शक्ति मिली है, क्योंकि यह विश्वास प्रस्ताव और अविश्वास प्रस्ताव पारित करके सरकार को नियंत्रित करती है.
In simple words: संसद का पहला काम कानून बनाना है. दूसरा काम सरकार पर नजर रखना और उसे नियंत्रित करना है, ताकि सरकार ठीक से काम करे.
🎯 Exam Tip: संसद के कार्यों को हमेशा स्पष्ट रूप से दो मुख्य शीर्षकों (विधि निर्माण और कार्यपालिका पर नियंत्रण) के तहत बताएं और प्रत्येक के तहत कुछ उदाहरण दें.
Question 4. संविधान संशोधन विधेयक क्या है?
Answer: संविधान संशोधन विधेयक वह विधेयक होता है जिसका उद्देश्य संविधान की विभिन्न धाराओं में बदलाव करना होता है. भारत में संशोधन प्रक्रिया का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 368 में किया गया है. यह भारतीय लोकतंत्र की लचीलेपन को दर्शाता है.
संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को बराबर शक्ति मिली है. यदि एक सदन इसे पारित कर दे और दूसरा सदन इसे पारित न करे, तो यह विधेयक समाप्त माना जाता है. संविधान संशोधन विधेयक किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है. इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित करना जरूरी है. इसमें संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है. दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाता है. राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करने से मना नहीं कर सकते.
In simple words: संविधान संशोधन विधेयक वो बिल है जो संविधान में बदलाव करने के लिए लाया जाता है. इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पास होना जरूरी है और फिर राष्ट्रपति उस पर दस्तखत करते हैं.
🎯 Exam Tip: संविधान संशोधन विधेयक की प्रक्रिया को हमेशा अनुच्छेद 368 के साथ जोड़कर बताएं और उल्लेख करें कि इसमें संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं है.
Question 5. गणपूर्ति (कोरम) से आप क्या समझते हैं?
Answer: गणपूर्ति (कोरम) का मतलब सदस्यों की वह न्यूनतम संख्या है जिनकी उपस्थिति में सदन की कार्यवाही कानूनी रूप से वैध मानी जाती है. यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय लेते समय पर्याप्त सदस्य मौजूद हों.
1. गणपूर्ति प्रत्येक सदन (लोकसभा/राज्यसभा) में पीठासीन अधिकारी सहित कुल सदस्य संख्या का दसवां भाग होता है.
2. लोकसभा की कार्यवाही चलाने के लिए कम से कम 55 सदस्य (कुल सदस्य संख्या 545 का दसवां भाग) होने चाहिए.
3. राज्यसभा की कार्यवाही चलाने के लिए कम से कम 25 सदस्य (कुल सदस्य संख्या 245 का दसवां भाग) होने चाहिए.
In simple words: गणपूर्ति या कोरम का मतलब है कि सदन में काम शुरू करने के लिए कम से कम कितने सदस्य मौजूद होने चाहिए. यह संख्या कुल सदस्यों का दसवां हिस्सा होती है.
🎯 Exam Tip: गणपूर्ति की परिभाषा और प्रत्येक सदन (लोकसभा, राज्यसभा) के लिए आवश्यक सदस्य संख्या का दसवां भाग स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 1. भारतीय संसद के गठन व संरचना को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संसद का गठन और उसकी संरचना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के तीन अंगों (व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) में से एक है. भारत में व्यवस्थापिका को संसद कहा जाता है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 79 में बताया गया है. अनुच्छेद 79 कहता है कि भारतीय संघ के लिए एक संसद होगी, जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन (राज्यसभा और लोकसभा) शामिल होंगे. संविधान के भाग V के अनुच्छेद 79-122 में संसद के गठन, संरचना, अवधि, अधिकार और शक्तियों का पूरा विवरण दिया गया है.
(अ) लोकसभा: लोकसभा के गठन और संरचना का वर्णन निम्नलिखित बिंदुओं में किया गया है:
1. सदस्य संख्या: लोकसभा को संघीय संसद का निचला सदन कहा जाता है. इसमें अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से 530 सदस्य राज्यों से, 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से और 2 सदस्य एंग्लो इंडियन समुदाय से होते हैं. वर्तमान में लोकसभा में 545 सदस्य हैं, जिनमें 530 सदस्य राज्यों से, 13 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत एंग्लो इंडियन समुदाय से हैं.
2. निर्वाचन: लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा सीधे तौर पर होता है. वयस्क मताधिकार के आधार पर गुप्त मतदान किया जाता है. कुछ सीटें अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित हैं ताकि सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व मिल सके.
3. कार्यकाल: लोकसभा एक अस्थायी सदन है, जिसका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति इसे समय से पहले भी भंग कर सकते हैं.
4. सदस्यों की योग्यताएं: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं:
* वह भारत का नागरिक हो.
* उसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक हो.
* वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो.
* वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया या पागल न ठहराया गया हो.
* वह संसद द्वारा कानून के अन्तर्गत निर्धारित अन्य योग्यताएं पूरी करता हो.
5. पदाधिकारी: लोकसभा सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष चुनते हैं. अध्यक्ष लोकसभा की बैठकों का संचालन करता है. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष उसके सभी कार्य करता है. लोकसभा के सदस्य को संसद सदस्य या एम.पी. कहा जाता है.
In simple words: भारतीय संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा होते हैं. लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा 5 साल के लिए चुने जाते हैं, जिनकी उम्र कम से कम 25 साल होनी चाहिए. राष्ट्रपति एंग्लो इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को भी मनोनीत करते हैं.
🎯 Exam Tip: संसद के गठन को समझाते समय हमेशा राष्ट्रपति और दोनों सदनों का उल्लेख करें. लोकसभा के गठन के लिए सदस्य संख्या, निर्वाचन विधि, और योग्यताएं स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 2. संसद की विधि निर्माण प्रक्रिया को समझाइए।
Answer: संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया एक निश्चित चरणबद्ध तरीके से होती है, जिसमें विधेयक कानून बनने तक कई अवस्थाओं से गुजरता है. यह प्रक्रिया भारत के लोकतांत्रिक शासन का आधार है.
सामान्यतः विधेयक दो प्रकार के होते हैं:
1. साधारण विधेयक
2. धन विधेयक
(अ) साधारण विधेयक के पारित होने की प्रक्रिया:
साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किए जा सकते हैं. किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए तीन वाचन (पढ़ाई) से गुजरना पड़ता है और उसे सदन में पांच अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है. ये अवस्थाएं इस प्रकार हैं:
(1) विधेयक की प्रस्तुति तथा प्रथम वाचन: विधेयक का सदन में पेश होना ही उसका पहला वाचन माना जाता है. इस चरण में कोई बड़ी बहस नहीं होती, लेकिन अगर विधेयक महत्वपूर्ण हो, तो पेश करने वाला सदस्य संक्षिप्त भाषण दे सकता है और विरोधी सदस्य उसका जवाब दे सकते हैं.
(2) द्वितीय वाचन: यह विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है. इस अवस्था में विधेयक पर एक विशेष समिति (प्रवर समिति) बनाई जाती है, जो विधेयक पर विचार करती है. यह समिति विधेयक की हर धारा पर चर्चा करती है और अपनी रिपोर्ट तय समय में सदन को देती है. इस रिपोर्ट पर सदन में बहस और विचार-विमर्श होता है और हर धारा पर मतदान होता है. यह पूरी प्रक्रिया द्वितीय वाचन कहलाती है.
(3) तृतीय वाचन: इस चरण में विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है. इस दौरान विधेयक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाता, केवल भाषा की गलतियों को सुधारा जा सकता है.
(4) दूसरे सदन में विधेयक: एक सदन से पारित होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है. दूसरे सदन में भी विधेयक के तीन वाचन होते हैं. यदि दूसरा सदन भी विधेयक को पास कर देता है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित मानकर राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है.
* यदि दूसरा सदन विधेयक को अस्वीकार कर दे, या उसमें ऐसे बदलाव करे जिससे पहला सदन सहमत न हो, या विधेयक पर 6 महीने तक चर्चा न करे, तो दोनों सदनों में मतभेद हो जाता है.
* ऐसे गतिरोध को सुलझाने के लिए संयुक्त बैठक बुलाई जाती है, जिसकी अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है. इसमें उपस्थित और मतदान करने वाले कुल सदस्यों के बहुमत से निर्णय लिया जाता है.
(5) राष्ट्रपति की स्वीकृति: दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है. राष्ट्रपति विधेयक को स्वीकार कर सकते हैं, या उसे अपनी सिफारिशों के साथ संसद को दोबारा विचार करने के लिए लौटा सकते हैं. यदि संसद विधेयक को फिर से, बदलाव के साथ या बिना बदलाव के, दोबारा पास कर देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर हस्ताक्षर करने ही होते हैं. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद विधेयक कानून बन जाता है.
In simple words: कानून बनाने के लिए पहले विधेयक को किसी भी सदन में पेश किया जाता है. फिर उस पर तीन बार चर्चा होती है, समिति विचार करती है और वोटिंग होती है. दोनों सदनों से पास होने के बाद राष्ट्रपति के दस्तखत से वह कानून बन जाता है.
🎯 Exam Tip: विधि निर्माण प्रक्रिया को समझाते समय, साधारण विधेयक और धन विधेयक के बीच अंतर को स्पष्ट करें और राष्ट्रपति की भूमिका को हाइलाइट करें.
Question 3. भारतीय संसद दुनिया की शक्तिशाली विधायिकाओं में से एक है। इसके कार्यों एवं शक्तियों के आलोक में समीक्षा कीजिए।
Answer: भारतीय संसद को विश्व की शक्तिशाली विधायिकाओं में से एक माना जाता है. भारत में संसद का मतलब राज्यसभा, लोकसभा और राष्ट्रपति से है. हालांकि राष्ट्रपति सीधे संसद से नहीं जुड़े होते, लेकिन संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून बनते हैं, इसलिए राष्ट्रपति को संसद का अभिन्न अंग माना गया है. भारतीय संसद के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ इस प्रकार हैं:
1. विधि निर्माण: सरकार के विधायी अंग का मुख्य कार्य कानून बनाना है. संसद भारत की व्यवस्थापिका है. इसे संघीय सूची और समवर्ती सूची में दिए गए विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है. यह देश के कानूनी ढांचे को मजबूत करती है.
2. वित्तीय शक्तियाँ: संसद को देश के वित्त पर पूरा नियंत्रण होता है. सरकार संसद की मंजूरी के बिना कोई कर नहीं लगा सकती और न ही कोई पैसा खर्च कर सकती है. लोकसभा को धन विधेयक के संबंध में विशेष शक्तियां मिली हैं.
3. संविधान में संशोधन की शक्ति: संसद को संविधान में संशोधन करने की भी महत्वपूर्ण शक्ति मिली है. संविधान के कुछ हिस्सों में अकेले संसद साधारण बहुमत से बदलाव कर सकती है, जबकि अन्य हिस्सों के लिए विशेष बहुमत और कुछ राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है. यह संविधान को समय के साथ बदलने की क्षमता देती है.
4. कार्यपालिका पर नियंत्रण का कार्य: संविधान के अनुसार, संघीय कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) संसद के प्रति जवाबदेह होती है. संसद कई तरीकों से कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है, जैसे प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव आदि. लोकसभा को अविश्वास प्रस्ताव पारित करके मंत्रिपरिषद को हटाने की सबसे बड़ी शक्ति प्राप्त है.
5. निर्वाचन संबंधी शक्तियाँ: भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के सदस्य भाग लेते हैं. राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य शामिल होते हैं. उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं. लोकसभा अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव भी करती है.
6. न्यायिक शक्तियाँ: संसद के दोनों सदन सर्वोच्च या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को अक्षमता या दुराचार के आधार पर हटाने का प्रस्ताव पास कर सकते हैं. इस प्रकार का प्रस्ताव प्रत्येक सदन में दो-तिहाई बहुमत से पास होना जरूरी है. यह सरकार के विभिन्न अंगों पर नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण तरीका है.
उपरोक्त कार्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि भारतीय संसद विश्व की शक्तिशाली विधायिकाओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है.
In simple words: भारतीय संसद कानून बनाती है, देश के पैसे पर कंट्रोल रखती है, संविधान में बदलाव करती है और सरकार पर नजर रखती है. इसके सदस्य राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को चुनने में भी मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: संसद की शक्तियों और कार्यों का वर्णन करते समय, प्रत्येक शक्ति को एक अलग बिंदु में स्पष्ट रूप से लिखें और महत्वपूर्ण उदाहरणों का उपयोग करें.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. लोकतांत्रिक शासन में सरकार के कितने अंग होते हैं?
(a) तीन
(b) चार
(c) पाँच
(d) छः
Question 2. जापान में व्यवस्थापिका को क्या कहा जाता है?
(a) कांग्रेस
(b) डायट
(c) बुण्डेस्टांग
(d) पार्लियामेंट
Question 3. भारत में व्यवस्थापिका को कहते हैं
(a) कार्यपालिका
(b) न्यायपालिका
(c) संसद
(d) कांग्रेस
Question 4. 'अष्टाध्यायी' किसकी रचना है?
(a) कौटिल्य की
(b) तलसीटास की
Question 6. भारत सरकार अधिनियम किस वर्ष अस्तित्व में आया?
(a) 1819
(b) 1919
(c) 1920
(d) 1921
Question 7. 'राष्ट्रपति के अलावा संसद में दो सदन होंगे। यह संविधान किस अनुच्छेद में वर्णित है?
(a) अनुच्छेद 59 में
(b) अनुच्छेद 69 में
(c) अनुच्छेद 79 में
(d) अनुच्छेद 89 में
Question 8. लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित है
(a) 6 वर्ष
(b) 4 वर्ष
(c) 7 वर्ष
(d) 5 वर्ष
Question 9. राज्यसभा का सभापति कौन होता है?
(a) उप राष्ट्रपति
(b) राष्ट्रपति
(c) लोकसभाध्यक्ष
Question 11. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल होता है
(a) 5 वर्ष
(b) 4 वर्ष
(c) 6 वर्ष
(d) 8 वर्ष
Question 12. संसद के सदस्यों को क्या कहा जाता है?
(a) अध्यक्ष
(b) लोकसभाध्यक्ष
(c) सभापति
(d) सांसद
Question 13. राज्यसभा का गठन किस अनुच्छेद के तहत हुआ है
(a) अनुच्छेद 80
(b) अनुच्छेद 81
(c) अनुच्छेद 82
(d) अनुच्छेद 83
Question 14. लोकसभा का गठन किस अनुच्छेद के तहत् हुआ है?
(a) अनुच्छेद 71
(b) अनुच्छेद 81
(c) अनुच्छेद 83
(d) अनुच्छेद 85
Question 15. अनुसूचित जाति के लिए लोकसभा में कितने स्थान आरक्षित हैं?
(a) 21
Question 17. राष्ट्रपति किसकी सलाह पर लोकसभा को भंग कर सकता है?
(a) प्रधानमंत्री
(b) उप राष्ट्रपति
(c) मंत्री
(d) सभापति
Question 18. लोकसभा का अध्यक्ष अपना त्यागपत्र किसे देगा?
(a) राष्ट्रपति को
(b) उपाध्यक्ष को
(c) सभापति को
(d) इनमें से कोई नहीं
Question 19. अब तक कितने विधेयक संसद की संयुक्त बैठक में पास किए गए है?
(a) 1
(b) 2
(c) 4
Question 20. विधेयक कितने प्रकार के होते हैं?
(a) 5
(b) 6
(c) 4
(d) 3
Question 1. सरकार के तीन अंग कौन-कौन से हैं?
Answer: सरकार के मुख्य तीन अंग होते हैं, जो व्यवस्था को बनाए रखते हैं. ये अंग हैं: व्यवस्थापिका (जो कानून बनाती है), कार्यपालिका (जो कानून लागू करती है) और न्यायपालिका (जो कानून की रक्षा करती है).
In simple words: सरकार के तीन हिस्से हैं - कानून बनाने वाली, कानून लागू करने वाली और कानून का फैसला करने वाली.
🎯 Exam Tip: सरकार के तीनों अंगों के नाम और उनके मुख्य कार्य को संक्षिप्त में बताएं.
Question 2. मजलिस किसे कहते हैं?
Answer: इराक में व्यवस्थापिका को मजलिस कहते हैं. अलग-अलग देशों में संसद को अलग-अलग नामों से जाना जाता है.
In simple words: मजलिस इराक की संसद का दूसरा नाम है.
🎯 Exam Tip: अलग-अलग देशों की संसद के नामों का ज्ञान होने से आप अधिक जानकारी दिखा सकते हैं.
Question 3. संसद क्या है?
Answer: संसद भारत की व्यवस्थापिका है. यह भारत में कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्था है और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का केंद्र है.
In simple words: संसद भारत की वो जगह है जहाँ कानून बनाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: संसद को भारत की सर्वोच्च विधायी संस्था के रूप में स्पष्ट करें.
Question 4. भारतीय संघ की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख कौन है?
Answer: राष्ट्रपति भारतीय संघ की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है. वह देश का प्रथम नागरिक होता है और सभी कार्यकारी कार्य उसके नाम पर किए जाते हैं.
In simple words: भारत में राष्ट्रपति ही सरकार के मुखिया होते हैं, संविधान के अनुसार.
🎯 Exam Tip: संवैधानिक प्रमुख और वास्तविक प्रमुख (प्रधानमंत्री) के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 5. 'सभा' व 'समिति' का उल्लेख किस वेद में देखने को मिलता है?
Answer: 'ऋग्वेद' में 'सभा' व 'समिति' नामक दो प्राचीन संस्थाओं का उल्लेख देखने को मिलता है. ये प्राचीन भारत में शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थीं.
In simple words: 'सभा' और 'समिति' नाम की दो पुरानी संस्थाओं के बारे में 'ऋग्वेद' में लिखा है.
🎯 Exam Tip: भारतीय इतिहास और प्राचीन राजनीतिक संस्थाओं से जुड़े ऐसे तथ्यों को याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है.
Question 6. भारतीय संसद के तीन अंग कौन-कौन से हैं?
Answer: भारतीय संसद के तीन मुख्य अंग हैं जो मिलकर कार्य करते हैं:
1. लोकसभा
2. राज्य सभा
3. राष्ट्रपति
ये तीनों मिलकर देश के लिए कानून बनाते हैं और शासन को चलाते हैं.
In simple words: भारतीय संसद के तीन भाग हैं: लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति.
🎯 Exam Tip: संसद के तीनों अंगों के नाम हमेशा एक साथ और क्रमबद्ध तरीके से लिखें.
Question 8. एम. पी. किसे कहा जाता है?
Answer: 'एम. पी.' (मेम्बर ऑफ पार्लियामेण्ट) संसद के सदस्यों को कहा जाता है. ये वे लोग होते हैं जिन्हें जनता चुनकर संसद में भेजती है ताकि वे उनके हितों का प्रतिनिधित्व कर सकें.
In simple words: एम. पी. उन लोगों को कहते हैं जो संसद में चुने जाते हैं, यानी सांसद.
🎯 Exam Tip: 'एम. पी.' का पूरा नाम (Member of Parliament) और उसका अर्थ स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 9. भारतीय संसद के प्रतिवर्ष कितने सत्र होते हैं?
Answer: भारतीय संसद के प्रतिवर्ष तीन सत्र होते हैं. ये सत्र अलग-अलग समय पर आयोजित होते हैं और देश के विधायी कार्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.
In simple words: भारतीय संसद में हर साल तीन बार बैठकें होती हैं, जिन्हें सत्र कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भारतीय संसद के तीनों सत्रों के नाम (बजट, मानसून, शीतकालीन) याद रखें, भले ही प्रश्न में सिर्फ संख्या पूछी गई हो.
Question 10. पीठासीन अधिकारी' किसे कहते हैं?
Answer: लोकसभा में अध्यक्ष (स्पीकर) और राज्यसभा में सभापति को पीठासीन अधिकारी कहते हैं. इनका मुख्य काम सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना और अनुशासन बनाए रखना है.
In simple words: सदन में कार्यवाही चलाने वाले मुख्य अधिकारी को पीठासीन अधिकारी कहते हैं, जैसे लोकसभा में अध्यक्ष और राज्यसभा में सभापति.
🎯 Exam Tip: प्रत्येक सदन (लोकसभा और राज्यसभा) के पीठासीन अधिकारी का नाम स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 11. सत्रावसान करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
Answer: 'सत्रावसान' करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति को प्राप्त है. सत्रावसान का मतलब सत्र के समाप्त होने की घोषणा करना है.
In simple words: संसद के सत्र को खत्म करने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है.
🎯 Exam Tip: सत्रावसान और स्थगन के बीच का अंतर याद रखें; सत्रावसान राष्ट्रपति करता है, जबकि स्थगन पीठासीन अधिकारी.
Question 12. भारतीय संसद के सदनों में गणपूर्ति (कोरम) का आधार क्या है?
Answer: भारतीय संसद के सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में गणपूर्ति (कोरम) का आधार उसकी कुल सदस्य संख्या का 1/10वां भाग है. इतने सदस्य उपस्थित होने पर ही सदन की कार्यवाही वैध मानी जाती है.
In simple words: संसद में कोई काम शुरू करने के लिए कम से कम कुल सदस्यों का दसवां हिस्सा मौजूद होना चाहिए, इसे गणपूर्ति कहते हैं.
🎯 Exam Tip: गणपूर्ति को हमेशा कुल सदस्य संख्या के दसवें भाग के रूप में परिभाषित करें.
Question 13. राज्यसभा में कार्यवाही का संचालन करने के लिए कितने सदस्य होने चाहिए?
Answer: राज्यसभा में कार्यवाही का संचालन करने के लिए कम से कम 25 सदस्य अवश्य होने चाहिए. यह राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या (245) का लगभग दसवां हिस्सा है.
In simple words: राज्यसभा का काम चलाने के लिए कम से कम 25 सदस्य मौजूद होने चाहिए.
🎯 Exam Tip: राज्यसभा के लिए गणपूर्ति संख्या (25) को याद रखना लोकसभा की गणपूर्ति से अलग है.
Question 15. राज्यसभा को किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: राज्यसभा को संसद का उच्च सदन, स्थायी सदन और राज्यों के सदन के नाम से जाना जाता है. यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है.
In simple words: Rajya Sabha is known as the Upper House, Permanent House, or the House of States in the Parliament.
🎯 Exam Tip: Remember these three alternative names for Rajya Sabha, as they highlight its key characteristics: its position, stability, and representative nature for states.
Question 16. राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा नाम निर्देशित व्यक्तियों का प्रावधान किस देश के संविधान से प्रेरित है?
Answer: राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा कुछ व्यक्तियों को मनोनीत करने का प्रावधान आयरलैंड के संविधान से लिया गया है. यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी संसद का हिस्सा बन सकें.
In simple words: The idea of the President nominating members to the Rajya Sabha comes from the Constitution of Ireland.
🎯 Exam Tip: When asked about constitutional inspirations, always specify the country and the exact provision to score full marks.
Question 17. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन अधिकार किस संस्था को है?
Answer: राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव करने का अधिकार राज्यों की विधानसभाओं को होता है. इन चुनावों में विधायक मतदान करते हैं.
In simple words: State Legislative Assemblies have the power to elect Rajya Sabha members.
🎯 Exam Tip: Note that Rajya Sabha members are not directly elected by the public, but by elected representatives from state assemblies.
Question 18. राजस्थान से राज्यसभा के कितने सदस्य चुने जाते हैं?
Answer: राजस्थान से राज्यसभा के लिए 10 सदस्य चुने जाते हैं. इन सदस्यों का चुनाव राज्य के विधायकों द्वारा किया जाता है.
In simple words: 10 members are elected from Rajasthan to the Rajya Sabha.
🎯 Exam Tip: Specific numbers related to state representation are often tested. Always remember the quota for your state if applicable.
Question 19. राष्ट्रपति लोकसभा में कितने सदस्य मनोनीत कर सकता है?
Answer: राष्ट्रपति लोकसभा में दो आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) सदस्यों को मनोनीत कर सकता था, यदि उसे लगता था कि इस समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है. हालांकि, इस प्रावधान को अब समाप्त कर दिया गया है.
In simple words: The President could nominate two Anglo-Indian members to the Lok Sabha if their community was not properly represented. This rule is no longer in effect.
🎯 Exam Tip: Be aware of constitutional amendments; some past provisions might no longer be valid. Always state the current status if there have been changes.
Question 20. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस पद्धति के आधार पर होता है?
Answer: राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के आधार पर होता है. इस तरीके से अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व मिल पाता है.
In simple words: Rajya Sabha members are elected using the system of proportional representation with a single transferable vote.
🎯 Exam Tip: This election method ensures fair representation for smaller groups and parties, making it different from the direct elections for Lok Sabha.
Question 21. राष्ट्रपति का निर्वाचन कौन करता है?
Answer: राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं. इस प्रकार, राष्ट्रपति का चुनाव एक अप्रत्यक्ष विधि से होता है.
In simple words: The President is elected by an electoral college, which includes elected members from both houses of Parliament and state assemblies.
🎯 Exam Tip: Understand that the President's election is indirect, involving representatives rather than direct public voting, which underscores the federal nature of the Indian political system.
Question 23. राजस्थान से लोकसभा के कितने सदस्य चुने जाते हैं?
Answer: राजस्थान से लोकसभा के लिए 25 सदस्य चुने जाते हैं. इन सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है.
In simple words: 25 members are elected from Rajasthan to the Lok Sabha.
🎯 Exam Tip: Differentiate between the number of members sent to Lok Sabha (direct election) and Rajya Sabha (indirect election) from each state.
Question 24. लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है?
Answer: लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर सीधे और गुप्त मतदान से होता है. इसमें 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं.
In simple words: Lok Sabha members are chosen by direct and secret vote from the public who are 18 years or older.
🎯 Exam Tip: Highlight "प्रत्यक्ष (direct)" and "गुप्त (secret)" मतदान as key characteristics of Lok Sabha elections, reflecting popular sovereignty.
Question 25. 16वीं लोकसभा का गठन कब हुआ?
Answer: 16वीं लोकसभा का गठन मई, 2014 में हुआ था. इस लोकसभा ने अगले पाँच वर्षों तक कार्य किया.
In simple words: The 16th Lok Sabha was formed in May 2014.
🎯 Exam Tip: Dates of formation for different Lok Sabhas are factual recall points; memorizing them can be useful for objective questions.
Question 26. स्वतंत्र भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष कौन थे?
Answer: स्वतंत्र भारत के पहले लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे. उन्हें "लोकसभा के जनक" के रूप में भी जाना जाता है.
In simple words: Ganesh Vasudev Mavalankar was the first Speaker of the Lok Sabha in independent India.
🎯 Exam Tip: Important personalities and their roles, especially the first holders of key offices, are frequently asked in general knowledge sections.
Question 27. सरकारी विधेयक किसे कहते हैं?
Answer: ऐसा विधेयक जो सरकार की ओर से किसी मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है, उसे सरकारी विधेयक कहते हैं. इन विधेयकों का उद्देश्य आमतौर पर सरकार की नीतियों को लागू करना होता है.
In simple words: A government bill is one introduced in Parliament by a minister from the government.
🎯 Exam Tip: Distinguish clearly between a "सरकारी विधेयक" (Government Bill) and a "गैर-सरकारी विधेयक" (Private Member's Bill) by who introduces it.
Question 28. धन विधेयक सर्वप्रथम किसे सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
Answer: धन विधेयक को सबसे पहले लोकसभा में पेश किया जाता है. राज्यसभा इसमें बहुत सीमित भूमिका निभाती है.
In simple words: A money bill is first introduced in the Lok Sabha.
🎯 Exam Tip: Remember that money bills originate exclusively in the Lok Sabha, highlighting its primary role in financial matters.
Question 30. धन विधेयक को प्रमाणीकरण किसके द्वारा किया जाता है?
Answer: धन विधेयक को लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित किया जाता है. अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं.
In simple words: The Speaker of the Lok Sabha certifies a money bill.
🎯 Exam Tip: The Speaker's role in certifying a money bill is crucial, as this classification determines the legislative process it will follow.
Question 31. राज्यसभा धन विधेयक पर अधिकतम कितने समय तक विचार कर सकती है?
Answer: राज्यसभा धन विधेयक पर अधिकतम 14 दिन तक ही विचार कर सकती है. यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर इसे वापस नहीं करती, तो इसे पारित मान लिया जाता है.
In simple words: The Rajya Sabha can only consider a money bill for a maximum of 14 days.
🎯 Exam Tip: This limited power of the Rajya Sabha over money bills emphasizes the Lok Sabha's financial supremacy.
Question 32. संविधान के किस अनुच्छेद में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है?
Answer: संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है. यह अनुच्छेद बताता है कि किस प्रकार के प्रावधानों वाले विधेयक को धन विधेयक माना जाएगा.
In simple words: Article 110 of the Constitution defines what a money bill is.
🎯 Exam Tip: Knowing specific articles related to key parliamentary procedures like money bills is important for detailed answers.
Question 33. किस प्रकार के विधेयक के सम्बन्ध में लोकसभा और राज्यसभा को समान शक्ति प्राप्त होती है?
Answer: संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में लोकसभा और राज्यसभा दोनों को समान शक्ति प्राप्त होती है. इन विधेयकों को दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित करना आवश्यक है.
In simple words: Both the Lok Sabha and Rajya Sabha have equal power when it comes to Constitution Amendment Bills.
🎯 Exam Tip: Remember that for most ordinary bills, both houses have equal power, but money bills and constitutional amendments have distinct rules for each house.
Question 34. ऐसे दो क्षेत्र बताइए जिनमें राज्यसभा, लोकसभा की तुलना में कम शक्तिशाली है।
Answer: राज्यसभा, लोकसभा की तुलना में दो क्षेत्रों में कम शक्तिशाली है:
1. कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने के क्षेत्र में.
2. वित्त विधेयक के क्षेत्र में. (धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किए जाते हैं और राज्यसभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं).
In simple words: The Rajya Sabha has less power than the Lok Sabha in controlling the government (executive) and in matters related to money bills.
🎯 Exam Tip: Focus on financial matters and executive accountability as the key areas where the Lok Sabha holds greater power.
Question 35. विधेयक कितने प्रकार के होते हैं? नाम बताइए।
Answer: विधेयक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
1. साधारण विधेयक
2. धन विधेयक
3. संविधान संशोधन विधेयक
ये तीनों प्रकार के विधेयक संसद में अलग-अलग प्रक्रियाओं से पारित होते हैं.
In simple words: There are three main types of bills: Ordinary Bills, Money Bills, and Constitution Amendment Bills.
🎯 Exam Tip: Clearly listing the types and briefly knowing their defining features (like where they originate or the majority needed) is essential.
Question 37. संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता किसके द्वारा की जाती है?
Answer: संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है. यह बैठक दोनों सदनों के बीच किसी विधेयक पर गतिरोध को तोड़ने के लिए बुलाई जाती है.
In simple words: The Speaker of the Lok Sabha presides over a joint session of Parliament.
🎯 Exam Tip: Remember that while the President summons the joint session, the Lok Sabha Speaker is the one who chairs it.
Question 38. भारतीय संसद का निम्न सदन किसे कहा जाता है?
Answer: भारतीय संसद का निम्न सदन लोकसभा को कहा जाता है. इसे लोकप्रिय सदन भी कहते हैं क्योंकि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं.
In simple words: The Lok Sabha is called the lower house of the Indian Parliament.
🎯 Exam Tip: "निम्न सदन" (Lower House) refers to the Lok Sabha, and "उच्च सदन" (Upper House) refers to the Rajya Sabha.
Question 39. राजस्थान विधानसभा में कितने विधायक हैं?
Answer: राजस्थान विधानसभा में 200 विधायक हैं. ये विधायक सीधे जनता द्वारा अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं.
In simple words: There are 200 Members of Legislative Assembly (MLAs) in the Rajasthan Legislative Assembly.
🎯 Exam Tip: Knowing the total number of assembly seats for important states like Rajasthan is useful for general knowledge questions.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम एवं उनके कार्यकाल का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम और उनके कार्यकाल इस प्रकार हैं:
1. ऊपरी सदन या उच्च सदन राज्यसभा कहलाता है. यह एक स्थायी सदन है, जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता. इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, और हर दो वर्ष बाद एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं.
2. निम्न सदन या प्रथम सदन लोकसभा है. इस सदन का कार्यकाल 5 वर्ष होता है, लेकिन राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर इसे 5 वर्ष से पहले भी भंग कर सकते हैं. इस सदन में बहुमत प्राप्त दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है.
In simple words: The two houses of the Indian Parliament are the Rajya Sabha (Upper House, permanent, 6-year term for members) and the Lok Sabha (Lower House, 5-year term, can be dissolved early).
🎯 Exam Tip: When comparing the two houses, always mention their names, whether they are permanent or temporary, and the term length for their members.
Question 2. राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए कौन-कौन सी योग्यताएँ होनी आवश्यक हैं?
Answer: राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए एक व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी आवश्यक हैं:
1. वह भारत का नागरिक हो.
2. उसकी आयु कम से कम 30 वर्ष हो.
3. वह कोई भी ऐसी अन्य योग्यताएँ रखता हो जो संसद द्वारा कानून के तहत निश्चित की जाएँ.
4. वह उस राज्य के संसदीय क्षेत्र का मतदाता हो, जिस राज्य से वह चुनाव लड़ रहा है.
5. वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर कार्यरत न हो.
6. उसे किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया या पागल घोषित न किया गया हो.
In simple words: To be a Rajya Sabha member, a person must be an Indian citizen, at least 30 years old, have other qualifications set by law, be a voter in the state they represent, not hold any office of profit, and not be bankrupt or insane by court order.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the age requirement (30 years for Rajya Sabha vs. 25 years for Lok Sabha) as it's a common distinguishing factor.
Question 3. कौन-कौन सी निर्योग्यताओं वाला व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं बन सकता।
Answer: निम्नलिखित निर्योग्यताओं वाला व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं बन सकता:
1. कोई विकृत चित्त (मानसिक रूप से अस्वस्थ) व्यक्ति या पागल व दिवालिया व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं बन सकता है.
2. कोई व्यक्ति एक ही समय में संसद के दोनों सदनों का सदस्य नहीं बन सकता.
3. संसद सदस्य के चुनावी अपराध या चुनाव में भ्रष्ट आचरण का दोषी पाए जाने पर उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है.
4. कोई व्यक्ति अधिकतम दो स्थानों से लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है, लेकिन यदि वह दोनों स्थानों से निर्वाचित होता है, तो उसे एक महीने के अंदर एक स्थान खाली करना होता है. (यह सुनिश्चित करता है कि एक व्यक्ति केवल एक ही सीट का प्रतिनिधित्व करे).
5. किसी संसद सदस्य को दल-बदल कानून का दोषी पाए जाने पर सदस्यता से बर्खास्त किया जा सकता है.
In simple words: A person cannot be a Member of Parliament if they are mentally unsound, bankrupt, a convicted electoral offender, elected from two seats (and don't resign one within a month), or disqualified under anti-defection law.
🎯 Exam Tip: Disqualification rules are important for understanding the integrity of parliamentary membership. Anti-defection law is a key point to remember.
Question 4. संसद के सत्र (अधिवेशन) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: संसद के सत्र पर संक्षिप्त टिप्पणी:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 85 के अनुसार, राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को अधिवेशन के लिए बुलाते हैं. संसद के एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए. भारत की संसद में प्रतिवर्ष तीन सत्र (अधिवेशन) होते हैं:
1. बजट सत्र (फरवरी-मई)
2. मानसून सत्र (जुलाई-सितंबर)
3. शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर)
संसद की कार्यवाही को स्थगित करने का अधिकार पीठासीन अधिकारियों (लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति) को होता है. हालांकि, सत्र को समाप्त करने (सत्रावसान) का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त होता है, जो अधिवेशन की समाप्ति का आदेश जारी करते हैं.
In simple words: The President calls Parliament sessions, ensuring no more than a six-month gap between them. India has three sessions: Budget, Monsoon, and Winter. Presiding officers can adjourn sessions, but only the President can prorogue (end) them.
🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between "स्थगित करना" (adjournment) by presiding officers and "सत्रावसान करना" (prorogation) by the President.
Question 5. मंत्रिपरिषद के कार्य व भूमिका को बताइए।
Answer: मंत्रिपरिषद के कार्य और भूमिकाएँ:
मंत्रिपरिषद, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, देश के शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह सरकार की नीतियों का निर्माण करती है, कानूनों को लागू करवाती है, और विभिन्न सरकारी विभागों का संचालन करती है. मंत्रिपरिषद संसद के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है. इसका मतलब है कि अगर लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाए, तो पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है. यह देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक विकास के लिए योजनाएँ बनाती है और उन्हें क्रियान्वित करती है. मंत्रिपरिषद आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की नीतियों पर काम करती है, जैसे कि बजट बनाना, अंतर्राष्ट्रीय समझौते करना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना. यह देश को सही दिशा में चलाने और जनता की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है.
In simple words: The Council of Ministers, led by the Prime Minister, forms government policies, implements laws, and runs departments. It is responsible to Parliament and makes crucial decisions for the country's development and well-being.
🎯 Exam Tip: Highlight "सामूहिक उत्तरदायित्व" (collective responsibility) to the Lok Sabha as a core principle of the Indian parliamentary system.
Question 6. राज्यसभा के गठन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: राज्यसभा का गठन:
राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है, जिसे स्थायी सदन या राज्यों के सदन के नाम से भी जाना जाता है. यह संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत गठित होती है. इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है. इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, जो साहित्य, कला, विज्ञान, खेल या समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखते हैं. (इनका नामांकन समाज के विभिन्न हिस्सों को प्रतिनिधित्व देने के लिए किया जाता है).
शेष 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं. वर्तमान में राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 है, जिनमें से 229 सदस्य विभिन्न राज्यों से और 4 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं, जबकि 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं.
राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सीटों का आवंटन संविधान की चौथी अनुसूची के अनुसार जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत के आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है. यह एक स्थायी सदन है और इसे कभी भंग नहीं किया जा सकता. इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, और हर दो वर्ष बाद एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, और उपसभापति राज्यसभा के सदस्यों में से ही चुना जाता है.
In simple words: The Rajya Sabha is the Upper House of Parliament, with a maximum of 250 members. 12 are nominated by the President for their expertise, and the rest are elected by state assemblies. It is a permanent body, with members serving 6-year terms and one-third retiring every two years. The Vice President is its ex-officio Chairman.
🎯 Exam Tip: When describing the Rajya Sabha's formation, always include its permanent nature, the 6-year term for members, and the role of both elected and nominated members.
Question 7. राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है। बताइए।
Answer: राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन:
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत होता है. संविधान के अनुसार, राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत के आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति से होता है. यह चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है, यानी जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं. (यह पद्धति छोटे राज्यों और अल्पसंख्यक दलों को भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है).
राज्यसभा चुनाव को संपन्न कराने का कार्य भारत का निर्वाचन आयोग करता है. राज्यसभा चुनाव के लिए हाल ही में दो मुख्य संशोधन किए गए हैं:
1. उम्मीदवारों के लिए उस राज्य का निवासी होने की शर्त हटा दी गई है, जिस राज्य से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं.
2. गुप्त मतदान प्रणाली की जगह खुली मतदान प्रणाली को अपनाया गया है.
इन संशोधनों के आधार पर संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 पारित किया, जिसने राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया. यह व्यवस्था की गई कि प्रत्येक दो वर्ष बाद राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो जाता है, और उनके स्थान पर नए सदस्यों का चुनाव 6 वर्ष के लिए होता है. राज्यसभा के सदस्य को पुन:निर्वाचित होने के लिए कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं है.
In simple words: Rajya Sabha members are indirectly elected by state MLAs using proportional representation and a single transferable vote. Recent changes include removing the domicile requirement for candidates and adopting open ballot voting. Their term is 6 years, with one-third retiring every two years.
🎯 Exam Tip: Focus on "अप्रत्यक्ष चुनाव" (indirect election) and "एकल संक्रमणीय मत के आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति" (proportional representation by single transferable vote) as the defining features of Rajya Sabha elections.
Question 9. राज्यसभा के कौन-कौन से पदाधिकारी होते हैं? बताइए। अथवा राज्यसभा में कौन – कौन से पदाधिकारी होते हैं। उनके कार्य लिखिए।
Answer: राज्यसभा के पदाधिकारी एवं उनके कार्य:
संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार, भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है. (यह पद उसे स्वतः ही मिल जाता है). अनुच्छेद 89 के अनुसार, राज्यसभा का एक उपसभापति भी होता है, जिसे सदन अपने सदस्यों में से चुनता है.
उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में वेतन मिलता है. सभापति का मुख्य कार्य सदन की बैठकों का संचालन करना और अनुशासन बनाए रखना होता है.
सभापति की अनुपस्थिति में, उपसभापति राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करता है. यदि उपराष्ट्रपति भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं या सदन से अनुपस्थित रहते हैं, तो उपसभापति राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं.
In simple words: The Vice President is the ex-officio Chairman of the Rajya Sabha, presiding over its meetings and maintaining order. A Deputy Chairman, elected by the members, performs the Chairman's duties when the Chairman is absent or acting as President.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between the 'ex-officio' role of the Vice President as Chairman and the 'elected' role of the Deputy Chairman, noting their respective duties.
Question 10. लोकसभा का गठन किस प्रकार होता है? बताइए।
Answer: लोकसभा का गठन:
लोकसभा को भारतीय संसद का निम्न सदन या लोकप्रिय सदन कहा जाता है. इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार होता है. प्रारंभ में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 500 निर्धारित की गई थी. 1974 के 31वें संविधान संशोधन के बाद, लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित की गई, जिनमें से:
1. 530 सदस्य विभिन्न राज्यों से निर्वाचित होते हैं.
2. 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं.
3. इनके अतिरिक्त, राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए उस समुदाय से दो सदस्यों को मनोनीत कर सकता था, यदि आवश्यक हो. (हालांकि, यह प्रावधान अब समाप्त कर दिया गया है).
लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है. भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त व्यक्ति को वयस्क माना गया है. लोकसभा सदस्य बनने के लिए भारतीय नागरिकता के साथ न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए.
In simple words: The Lok Sabha, the Lower House, has a maximum of 552 members elected from states (530) and Union Territories (20). Previously, the President could nominate two Anglo-Indian members, but this is now abolished. Members are directly elected by adult citizens (18+ years) and must be at least 25 years old and an Indian citizen.
🎯 Exam Tip: Emphasize the direct election of Lok Sabha members by universal adult franchise and the age requirement of 25 years, contrasting it with the Rajya Sabha.
Question 11. लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है?
Answer: लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन:
लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए. भारत में लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे वयस्क मताधिकार द्वारा होता है.
संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वयस्क नागरिक जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, वे मतदान द्वारा लोकसभा के सदस्यों का चुनाव कर सकते हैं. विभिन्न राजनीतिक दल प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशियों को खड़ा करते हैं, और निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव में उम्मीदवार होते हैं.
भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित तिथि पर उस लोकसभा क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता अपने मत का प्रयोग करते हैं. जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक मत प्राप्त होते हैं, उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है. (यह 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' प्रणाली कहलाती है). वर्तमान में लोकसभा के 545 में से 543 सदस्यों का चुनाव होता है, जबकि 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते थे (यह प्रावधान अब समाप्त हो चुका है).
In simple words: Lok Sabha members are directly elected by Indian citizens aged 18 and above. Candidates must be 25+ years old and Indian citizens. The candidate with the most votes in each constituency wins, a system called 'first-past-the-post'.
🎯 Exam Tip: Clearly state the minimum age, citizenship, direct election process, and the 'first-past-the-post' system as key aspects of Lok Sabha elections.
Question 12. लोकसभा का कार्यकाल बताइए।
Answer: लोकसभा का कार्यकाल:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83 के अनुसार, लोकसभा का कार्यकाल अपनी पहली बैठक से 5 वर्ष निर्धारित किया गया है. पाँच वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद लोकसभा स्वतः ही भंग हो जाती है. हालांकि, अनुच्छेद 85 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर लोकसभा को समय से पहले भी भंग कर सकते हैं.
राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में, लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, 1976-77 में लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाया गया था. भारत की पहली लोकसभा का गठन अप्रैल 1952 में हुआ था. वर्तमान में 16वीं लोकसभा कार्यरत है, जिसका गठन मई, 2014 में हुआ है.
In simple words: The Lok Sabha's term is usually five years from its first meeting, after which it dissolves automatically. The President can dissolve it earlier on the Prime Minister's advice. During an emergency, its term can be extended by one year at a time.
🎯 Exam Tip: Remember the standard 5-year term, the President's power to dissolve it early, and the emergency provision for extension as key points for Lok Sabha's tenure.
Question 13. लोकसभा के अध्यक्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: लोकसभा के अध्यक्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी:
संसद के कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए भारतीय संविधान में संसद के लिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की व्यवस्था की गई है. संसद अपने पहले अधिवेशन में ही अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है. लोकसभा का अध्यक्ष सदन के सदस्यों और मंत्रियों तक को उसकी आज्ञा माननी पड़ती है. अध्यक्ष सदन की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है. (उसका निर्णय अक्सर निष्पक्ष और अंतिम माना जाता है).
In simple words: The Lok Sabha Speaker, elected by the members, ensures smooth parliamentary proceedings, maintains order, and acts as the final authority on many procedural matters. All members, including ministers, must respect the Speaker's authority.
🎯 Exam Tip: Focus on the Speaker's roles in maintaining order, ensuring smooth proceedings, and being the final authority on many parliamentary matters.
Question 14. सरकारी व गैर सरकारी विधेयक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: सरकारी व गैर-सरकारी विधेयक में अंतर:
सरकारी और गैर-सरकारी विधेयक में निम्नलिखित अंतर हैं:
1. यदि विधेयक संसद में मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य (मंत्री) द्वारा सदन में रखा जाता है, तो उसे सरकारी विधेयक कहते हैं. जबकि साधारण सदस्यों (जो मंत्री नहीं हैं) द्वारा सदन में रखा गया विधेयक गैर-सरकारी विधेयक कहलाता है.
2. सरकारी विधेयक को पारित करने का दायित्व मंत्रिपरिषद का होता है, जबकि निजी विधेयक को पारित कराने की मंत्रिमंडल की कोई जिम्मेदारी नहीं होती. (यह दर्शाता है कि सरकारी विधेयक सरकार की नीति का हिस्सा होते हैं).
3. सरकारी विधेयक पर किसी भी दिन विचार हो सकता है, जबकि निजी या गैर-सरकारी विधेयक पर केवल शुक्रवार के दिन ही विचार हो सकता है.
In simple words: A government bill is introduced by a minister, and its passing is the government's responsibility, debatable any day. A private member's bill is introduced by any non-minister member, is not the government's responsibility, and is usually debated only on Fridays.
🎯 Exam Tip: The key difference lies in *who* introduces the bill (minister vs. non-minister member) and the *government's responsibility* for its passage.
Question 15. धन विधेयक के पारित करने की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: धन विधेयक के पारित करने की प्रक्रिया:
धन विधेयक को पारित करना संसद का एक महत्वपूर्ण कार्य है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का वर्णन है और अनुच्छेद 110 में इसे परिभाषित किया गया है. धन विधेयक को राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सकता. इसे राष्ट्रपति की सिफारिश पर केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है. (यह लोकसभा की वित्तीय सर्वोच्चता को दर्शाता है).
लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद, यह राज्यसभा में विचार-विमर्श के लिए भेजा जाता है. राज्यसभा को यह विधेयक अपनी प्राप्ति की तिथि से 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटाना अनिवार्य है. यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक को लोकसभा को वापस नहीं लौटाती है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है. राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन का सुझाव दे सकती है, लेकिन लोकसभा उन सुझावों को मानने के लिए बाध्य नहीं है.
In simple words: Money bills, defined in Article 110, are first introduced in the Lok Sabha with the President's recommendation. The Rajya Sabha can only review them for 14 days and suggest changes, but the Lok Sabha has the final say. If not returned in 14 days, it's considered passed.
🎯 Exam Tip: Emphasize that money bills originate only in the Lok Sabha, require presidential recommendation, and Rajya Sabha has very limited power over them (14-day limit).
Question 16. साधारण विधेयक तथा धन विधेयक में अंतर स्पष्ट कीजिए। उत्तर-साधारण व धन विधेयक में निम्नलिखित अंतर हैं
Answer: साधारण व धन विधेयक में निम्नलिखित अंतर हैं:
1. साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रस्तावित किए जा सकते हैं, जबकि धन विधेयक सर्वप्रथम लोकसभा में ही प्रस्तावित किए जा सकते हैं.
2. साधारण विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक नहीं है. वहीं, धन विधेयक को प्रस्तावित करने से पहले राष्ट्रपति की स्वीकृति लेना आवश्यक है.
3. राज्यसभा साधारण विधेयक को 6 माह तक रोक सकती है. वहीं, धन विधेयक को राज्यसभा केवल 14 दिन तक अपने पास रोक सकती है. (यह लोकसभा को वित्तीय मामलों में अधिक शक्तिशाली बनाता है).
In simple words: Ordinary bills can start in either house and don't need the President's prior approval, Rajya Sabha can delay them for 6 months. Money bills start only in Lok Sabha, need the President's prior approval, and Rajya Sabha can delay them for only 14 days.
🎯 Exam Tip: Focus on the originating house, requirement of presidential recommendation, and the delaying power of the Rajya Sabha as the main points of distinction.
Question 17. विधेयक के द्वितीय वाचन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: विधेयक के द्वितीय वाचन पर संक्षिप्त टिप्पणी:
कानून बनाने के प्रस्ताव को विधेयक कहते हैं. विधेयक के प्रत्येक सदन में तीन वाचन होते हैं. द्वितीय वाचन किसी भी विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक अवस्था होती है. इस अवस्था में, विधेयक पर एक प्रवर समिति का गठन किया जाता है, जो विधेयक पर विभिन्न पक्षों की सुनवाई करती है. (यह समिति विधेयक के हर पहलू की गहराई से जाँच करती है). निर्धारित अवधि में, समिति अपनी रिपोर्ट सदन को प्रस्तुत करती है. इस रिपोर्ट पर सदन में बहस और विचार-विमर्श होता है, और उसकी प्रत्येक धारा पर मतदान होता है. यही पूरी प्रक्रिया विधेयक का द्वितीय वाचन कहलाती है.
In simple words: The second reading of a bill is its most crucial stage. A select committee reviews the bill, hears arguments, and submits a report. The house then debates and votes on each clause of the bill, leading to a decision on its passage.
🎯 Exam Tip: Highlight the role of the select committee, detailed clause-by-clause discussion, and voting on each part as key elements of the second reading.
Question 18. संविधान संशोधन की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: संविधान संशोधन की प्रक्रिया:
भारतीय संविधान में संशोधन करने की शक्ति संसद को प्राप्त है. संविधान में संशोधन की प्रक्रिया का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 368 में किया गया है. इसके अनुसार, संविधान में संशोधन मुख्य रूप से दो प्रकार से हो सकता है:
1. संविधान की अधिकांश धाराओं में परिवर्तन प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव से होता है. (यह सुनिश्चित करता है कि संशोधन के लिए व्यापक सहमति हो).
2. कुछ संशोधन ऐसे होते हैं जो संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति में परिवर्तन, राज्यों के विधायी संबंधों में परिवर्तन, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, और स्वयं अनुच्छेद 368 में संशोधन आदि से संबंधित हों. ऐसे संशोधनों वाले विधेयक के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ, कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा भी समर्थन प्राप्त होना आवश्यक होता है.
संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है. इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित करना आवश्यक होता है, अर्थात् इसमें संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं होता है. दोनों सदनों द्वारा पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद पारित माना जाता है. राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार नहीं कर सकते हैं.
In simple words: Constitutional amendments are made by Parliament under Article 368. Most amendments require a two-thirds majority in each house. Some, affecting federal structure, also need ratification by half of the state legislatures. These bills can start in either house, must be passed separately by both, and the President's assent is mandatory.
🎯 Exam Tip: Emphasize Article 368, the two main types of majorities (simple vs. special plus state ratification), and the absence of joint sessions for constitutional amendments.
Question 19. वे कौन – कौन से तरीके हैं जिनके माध्यम से संसद राजनीतिक कार्यकारिणी पर नियंत्रण रखती है? अथवा। संसद किस प्रकार कार्यपालिका पर नियंत्रण का कार्य करती है? बताइए।
Answer: संसद द्वारा कार्यपालिका पर नियंत्रण के तरीके:
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है. जनता मताधिकार के माध्यम से उसे नियंत्रित करती है, लेकिन कार्यपालिका को दिन-प्रतिदिन के कार्यों में नियंत्रित करने का कार्य जनता की प्रतिनिधि संस्था, यानी संसद को प्राप्त है. भारतीय संसद निम्नलिखित तरीकों से कार्यपालिका को नियंत्रित करती है:
1. संसद काम रोको प्रस्ताव के आधार पर सरकारी नीतियों और कार्यों की त्रुटियों पर प्रकाश डाल सकती है. (यह सरकार को उसकी गलतियों के लिए जवाबदेह ठहराने का एक महत्वपूर्ण साधन है).
2. संसद सदस्य कार्यपालिका के सदस्यों (मंत्रियों) से सरकारी नीतियों और कार्यों के संबंध में प्रश्न और पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं.
3. संसद सरकारी विधेयक को अस्वीकार करके, मंत्रियों के वेतन में कटौती का प्रस्ताव स्वीकार करके या किसी सरकारी विधेयक में संशोधन करके, जिससे सरकार सहमत न हो, अपना विरोध प्रदर्शित कर सकती है.
4. संसद बजट में कटौती कर सकती है. बजट में कटौती किए जाने पर मंत्रिपरिषद को पद त्याग करना होता है.
5. मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित कर उसे पद से हटाने की शक्ति लोकसभा के पास है. कार्यपालिका के नियंत्रण की सबसे बड़ी शक्ति लोकसभा को प्राप्त है. लोकसभा ही विश्वास तथा अविश्वास प्रस्ताव पारित करती है.
6. लोकसभा में काम रोको प्रस्ताव, निंदा प्रस्ताव और कटौती प्रस्तावों के माध्यम से भी कार्यपालिका को जवाबदेह बनाया जाता है. संसदीय समितियों के माध्यम से भी कार्यपालिका को नियंत्रित किया जाता है.
7. बजट प्रस्तावों पर बहस करके कटौती प्रस्तावों के माध्यम से लोकसभा के सदस्य कार्यपालिका के प्रति अपना विरोध व्यक्त कर सकते हैं. सरकारी विधेयकों में संशोधन प्रस्तुत करके भी लोकसभा के सदस्य सरकार की नीतियों के प्रति अपना विरोध प्रकट करते हैं.
In simple words: Parliament controls the executive through tools like calling attention motions, questions to ministers, rejecting government bills or cutting salaries, passing no-confidence motions (Lok Sabha), budget debates, and parliamentary committees. The Lok Sabha has the ultimate power to remove the executive through a no-confidence vote.
🎯 Exam Tip: Categorize the control mechanisms into legislative (bills, amendments), financial (budget, cuts), and direct accountability (no-confidence motion, questions) for a comprehensive answer.
Question 20. काम रोको प्रस्ताव का क्या अर्थ है?
Answer: काम रोको प्रस्ताव:
काम रोको प्रस्ताव का अर्थ है कि यदि कोई अचानक या गंभीर घटना घटित हो जाए, तो संसद सदस्य यह प्रस्ताव रख सकते हैं कि विचाराधीन मामले को कुछ समय के लिए रोककर उस घटना पर विचार किया जाए. उठाया जाने वाला मामला गंभीर और लोक महत्व का होना चाहिए. (यह एक आपातकालीन स्थिति पर तत्काल चर्चा करने का तरीका है).
अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह उस मामले पर वाद-विवाद की अनुमति दे या न दे. काम रोको प्रस्ताव के माध्यम से संसद सदस्यों को मंत्रियों के कार्यों और उनकी भूलों को प्रकाश में लाने का मौका मिलता है. काम रोको प्रस्ताव के आवश्यक तत्व इस प्रकार हैं:
1. मामला निश्चित स्वरूप का हो.
2. उसका आधार तथ्यात्मक हो.
3. मामला अविलंबनीय हो.
4. वह लोक महत्व का हो.
In simple words: A 'Calling Attention Motion' allows MPs to bring an urgent, factual matter of public importance to the attention of the house, halting regular proceedings for a brief discussion. The Speaker decides if it can be discussed.
🎯 Exam Tip: Focus on the "urgent public importance" and the ability to "halt proceedings" as key features of a calling attention motion, and remember the four essential elements.
RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. लोकसभा के गठन और शक्तियों का वर्णन कीजिए।
Answer: लोकसभा का गठन और शक्तियाँ:
लोकसभा, भारतीय संसद का प्रथम या निम्न सदन है, जिसे लोकप्रिय सदन भी कहा जाता है. इसके गठन को निम्नलिखित बिंदुओं के तहत स्पष्ट किया जा सकता है:
1. सदस्य संख्या – मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 300 निश्चित की गई थी, लेकिन लोकसभा की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है. वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है. इनमें 530 सदस्य 28 राज्यों से और 13 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं. पहले 2 सदस्य आंग्ल-भारतीय वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते थे, लेकिन यह प्रावधान अब समाप्त हो गया है.
2. निर्वाचन – लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है. भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु प्राप्त व्यक्ति को वयस्क माना गया है. लोकसभा सदस्य बनने के लिए भारतीय नागरिकता के साथ न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए.
3. योग्यताएँ – लोकसभा का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए, उसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए, वह किसी लाभ के पद पर न हो, और उसे किसी न्यायालय द्वारा पागल या दिवालिया न ठहराया गया हो. संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन वह योग्य हो तथा अयोग्य सिद्ध नहीं हो.
4. कार्यकाल – लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष होता है. प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति लोकसभा को समय से पहले भी भंग कर सकते हैं.
5. अधिवेशन – लोकसभा के अधिवेशन राष्ट्रपति द्वारा बुलाए और स्थगित किए जाते हैं, लेकिन लोकसभा की दो बैठकों के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए.
6. गणपूर्ति (कोरम) – सदन के संचालन के लिए कुल सदस्यों के दसवें भाग की उपस्थिति आवश्यक है.
7. पदाधिकारी – लोकसभा के दो पदाधिकारी होते हैं: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जिनका चुनाव लोकसभा स्वयं ही करती है.
8. सदस्यों के वेतन-भत्ते – लोकसभा के सदस्यों को संसद द्वारा निर्धारित विधि के प्रावधानों के अनुसार वेतन-भत्ते प्राप्त होते हैं. संसद ने कानून बनाकर अब संसद के पूर्व सदस्यों के लिए पेंशन का प्रावधान भी कर दिया है.
लोकसभा की शक्तियाँ: लोकसभा की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
1. विधायी शक्तियाँ – लोकसभा संसद का निम्न सदन है. साधारण विधेयक लोकसभा या राज्यसभा किसी में भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं, लेकिन व्यवहार में महत्वपूर्ण विधेयक पहले लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जाते हैं. दोनों सदनों से पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए जाते हैं. यदि दोनों सदनों में किसी विधेयक पर मतभेद हो, तो राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है. संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और उपस्थित व मतदान में भाग ले रहे दोनों सदनों के कुल सदस्यों के बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करने के प्रश्न पर निर्णय किया जाता है.
2. वित्तीय शक्तियाँ – धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं. लोकसभा से पारित वित्त विधेयकों को राज्यसभा में भेजा जाता है. राज्यसभा को 14 दिन की अवधि में ऐसे विधेयकों को पारित करके या अपनी अनुशंसाओं के साथ लोकसभा को लौटाना पड़ता है. यदि राज्यसभा 14 दिन के अंदर विधेयक को पारित कर लोकसभा को वापस नहीं भेजती है, तो उसे स्वतः पारित हुआ मान लिया जाता है. लोकसभा को राज्यसभा द्वारा दी गई किसी भी अनुशंसा को स्वीकार करना या अस्वीकार करना का अधिकार है.
3. कार्यपालिका पर नियंत्रण का कार्य – संविधान के अनुसार संघीय कार्यपालिका (मंत्रिमंडल) संसद के प्रति उत्तरदायी होती है. संसद कार्यपालिका पर विभिन्न प्रकार से नियंत्रण रखती है. जैसे, काम रोको प्रस्ताव, निंदा प्रस्ताव, कटौती प्रस्ताव, प्रश्नकाल, शून्यकाल, और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से. मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित कर उसे अपदस्थ करने की शक्ति लोकसभा के पास है. (यह सुनिश्चित करता है कि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह रहे).
4. संविधान संशोधन की शक्ति – इस संबंध में दोनों सदनों को समान शक्ति प्राप्त है. संविधान में संशोधन का प्रस्ताव किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है. संशोधन प्रस्ताव तभी स्वीकृत माना जाएगा जब उसे संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग अपने कुल बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित कर दिया जाए. संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है.
5. निर्वाचन संबंधी शक्तियाँ – भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया में संसद के सदस्य भाग लेते हैं. राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल के सदस्य होते हैं. उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं. लोकसभा अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का भी निर्वाचन करती है.
6. विविध शक्तियाँ – लोकसभा, राज्यसभा के साथ मिलकर राष्ट्रपति तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों पर महाभियोग लगा सकती है. ऐसा प्रस्ताव दोनों सदनों में अलग-अलग पारित होना आवश्यक है. उपराष्ट्रपति को पदमुक्त करने के लिए राज्यसभा से पारित बहुमत का प्रस्ताव तभी पारित समझा जाएगा, जबकि लोकसभा बहुमत द्वारा उसे प्रस्ताव का अनुमोदन कर दे.
In simple words: The Lok Sabha is the directly elected lower house, with up to 552 members (formerly 550 elected + 2 nominated Anglo-Indians). Members are 25+ years old and serve 5-year terms, though it can be dissolved early. Its powers include making laws, controlling finances (money bills), holding the executive accountable (no-confidence motions), amending the constitution (with Rajya Sabha), and participating in presidential/vice-presidential elections. The Speaker leads its proceedings.
🎯 Exam Tip: Structure your answer by first detailing the formation (members, elections, qualifications, term) and then systematically listing and explaining each type of power (legislative, financial, executive, constitutional, electoral, miscellaneous).
Question 2. राज्यसभा का गठन एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।
Answer: राज्यसभा का गठन और शक्तियाँ:
भारत में व्यवस्थापिका या संसद के द्वितीय सदन को राज्यसभा कहा जाता है. इसे उच्च सदन, स्थायी सदन या राज्यों के सदन के नाम से भी जाना जाता है. यह एक स्थायी सदन है जिसका कभी विघटन नहीं होता. राज्यसभा का गठन निम्नलिखित तरीके से स्पष्ट किया जा सकता है:
1. सदस्य संख्या और निर्वाचन पद्धति – संविधान के अनुसार, राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है. वर्तमान में इसमें 245 सदस्य हैं, जिनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं. ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान या समाजसेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है. शेष 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर चुने जाते हैं.
2. सदस्यों की योग्यताएँ – राज्यसभा के सदस्यों के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ आवश्यक हैं:
(a) वह भारत का नागरिक हो.
(b) उसकी आयु 30 वर्ष से कम न हो.
(c) वह ऐसी अन्य योग्यताएँ रखता हो जो संसद समय-समय पर कानून द्वारा निर्धारित करे.
(d) प्रत्याशी को उस राज्य का संसदीय मतदाता होना चाहिए, जिस राज्य से वह चुनाव लड़ रहा हो.
(e) वह सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो.
(f) उसे किसी न्यायालय द्वारा पागल या दिवालिया घोषित न किया गया हो.
3. सदस्यों का कार्यकाल – राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता. इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है. राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं और नए सदस्य चुने जाते हैं.
4. गणपूर्ति (कोरम) – सदन में कुल सदस्यों के 1/10वें भाग के उपस्थित होने पर सदन की बैठकों को वैध माना जाता है. (यह सुनिश्चित करता है कि कार्यवाही के लिए पर्याप्त सदस्य मौजूद हों).
5. प्रमुख पदाधिकारी – राज्यसभा के दो प्रमुख पदाधिकारी होते हैं: सभापति और उपसभापति. भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और उसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है. राज्यसभा अपने सदस्यों में से किसी एक को 6 वर्ष के लिए उपसभापति निर्वाचित करती है.
राज्यसभा की शक्तियाँ/कार्य – राज्यसभा की शक्तियों एवं कार्यों का विवेचन निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत किया गया है:
6. विधायी शक्तियाँ – लोकसभा के साथ-साथ, राज्यसभा भी विधि निर्माण संबंधी कार्य करती है. संविधान द्वारा अवित्तीय विधेयकों (साधारण विधेयकों) के संबंध में लोकसभा और राज्यसभा दोनों को बराबर शक्तियाँ प्रदान की गई हैं. (दोनों सदनों की सहमति आवश्यक है).
7. संविधान संशोधन की शक्ति – संविधान संशोधन के संबंध में राज्यसभा को लोकसभा के समान ही शक्ति प्राप्त है. यदि संशोधन प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में असहमति होती है, तो संविधान में संशोधन का प्रस्ताव गिर जाएगा, क्योंकि संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है.
8. वित्तीय शक्ति – राज्यसभा को कुछ वित्तीय शक्ति प्राप्त है, यद्यपि इस संबंध में संविधान द्वारा राज्यसभा को लोकसभा की तुलना में निर्बल स्थिति प्रदान की गई है. संविधान के अनुसार, धन विधेयक पहले लोकसभा में ही प्रस्तावित किए जाएंगे. लोकसभा से स्वीकृत होने पर धन विधेयक राज्यसभा में भेजे जाएंगे, जिसके द्वारा अधिक से अधिक 14 दिन तक इस विधेयक पर विचार किया जा सकेगा. राज्यसभा धन विधेयक के संबंध में अपने सुझाव लोकसभा को दे सकती है, लेकिन यह लोकसभा की इच्छा पर निर्भर है कि वह उन प्रस्तावों को माने या न माने. (यह लोकसभा को वित्तीय मामलों में सर्वोच्च बनाता है).
9. निर्वाचन संबंधी एवं अन्य शक्तियाँ – उपर्युक्त शक्तियों के अतिरिक्त, राज्यसभा को कुछ अन्य शक्तियाँ भी प्राप्त हैं, जिनका प्रयोग वह लोकसभा के साथ मिलकर करती है. ये शक्तियाँ व कार्य इस प्रकार हैं:
(a) राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं.
(b) राज्यसभा के सदस्य लोकसभा के सदस्यों के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं.
(c) राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और कुछ अन्य पदाधिकारियों पर महाभियोग लगा सकती है. महाभियोग का प्रस्ताव तभी पारित समझा जाता है, जब दोनों सदन इस प्रकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लें.
(d) राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर बहुमत से प्रस्ताव पास कर उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटा सकती है. उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव प्रथम बार राज्यसभा में ही पारित होकर लोकसभा के पास जाता है.
10. राज्यसभा की विशिष्ट व अनन्य शक्तियाँ – राज्यसभा को निम्नलिखित ऐसे अन्य अधिकार भी प्राप्त हैं जो लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं और जिनका प्रयोग अकेले राज्यसभा ही करती है:
(a) अनुच्छेद 249 के अनुसार, राज्यसभा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित कर सकती है. (इससे संसद उस विषय पर कानून बना सकती है).
(b) अनुच्छेद 312 के अनुसार, राज्यसभा ही अपने दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास कर नई अखिल भारतीय सेवाएँ स्थापित करने का अधिकार केंद्रीय सरकार को दे सकती है.
(c) यदि आपातकालीन उद्घोषणा के समय लोकसभा का विघटन हो गया हो, अथवा ऐसी उद्घोषणा के दो महीने के अंदर वह विघटित हो जाए, तो केवल राज्यसभा की स्वीकृति से ही आपातकालीन उद्घोषणा उस समय तक प्रभावी रह सकती है, जब तक कि नई लोकसभा में उसकी पहली बैठक से एक माह के अंदर वह स्वीकार या अस्वीकार न हो जाए.
In simple words: The Rajya Sabha is the permanent Upper House with a maximum of 250 members (12 nominated by President, rest elected by state assemblies for 6-year terms). Its powers include making laws (equal to Lok Sabha for ordinary bills), amending the constitution (equal power), limited financial power (14-day delay for money bills), participating in elections and impeachment, and special powers like declaring a state subject of national importance (Art. 249) or creating All-India Services (Art. 312). The Vice President is its ex-officio Chairman.
🎯 Exam Tip: When describing the Rajya Sabha, highlight its permanent nature, the system of indirect election, its unique powers (Articles 249 and 312), and its more limited role in financial matters compared to the Lok Sabha.
Question 12. राज्यसभा की विशिष्ट व अनन्य शक्तियाँ-राज्यसभा को निम्नलिखित ऐसे अन्य अधिकार भी प्राप्त हैं जो लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं और जिनका प्रयोग अकेले राज्यसभा ही करती है
Answer: राज्यसभा को कुछ विशेष अधिकार मिले हुए हैं जो लोकसभा के पास नहीं हैं और जिनका इस्तेमाल केवल राज्यसभा ही कर सकती है:
1. **राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति:** अनुच्छेद 249 के तहत, राज्यसभा अपने मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से यह घोषणा कर सकती है कि राज्य सूची का कोई विषय राष्ट्रीय महत्व का है. जब राज्यसभा ऐसा करती है, तो संसद को उस विषय पर कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है.
2. **नई अखिल भारतीय सेवाएँ स्थापित करने की शक्ति:** अनुच्छेद 312 के अनुसार, राज्यसभा अपने दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को नई अखिल भारतीय सेवाओं को बनाने का अधिकार दे सकती है. यह देश के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक ढांचा बनाने में मदद करता है.
3. **आपातकाल की घोषणा को जारी रखने की शक्ति:** यदि आपातकाल की घोषणा के समय लोकसभा भंग हो गई हो, या ऐसी घोषणा के दो महीने के भीतर भंग हो जाए, तो आपातकाल तब तक लागू रह सकता है जब तक नई लोकसभा अपनी पहली बैठक के एक महीने के भीतर उसे स्वीकार या अस्वीकार न कर दे. इस स्थिति में केवल राज्यसभा की मंजूरी ही पर्याप्त होती है.
In simple words: राज्यसभा के पास कुछ खास ताकतें हैं जो लोकसभा के पास नहीं हैं. इनमें राज्य सूची के विषयों पर कानून बनवाने, नई अखिल भारतीय सेवाएँ शुरू करने और लोकसभा के भंग होने पर आपातकाल को जारी रखने की अनुमति देना शामिल है.
🎯 Exam Tip: राज्यसभा की इन विशिष्ट शक्तियों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्यों के हितों की रक्षा करती हैं और संकटकाल में इसकी भूमिका को स्पष्ट करती हैं.
Question 3. राज्यसभा और लोकसभा की तुलना कीजिए।
Answer: राज्यसभा और लोकसभा की तुलना नीचे दी गई है:
| राज्यसभा | लोकसभा |
|---|---|
| 1. राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है। | 1. लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 हो सकती है। वर्तमान में सदस्यों की संख्या 545 है। |
| 2. इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। प्रत्येक दो वर्ष बाद एक-तिहाई सदस्य अवकाश ग्रहण करते हैं और उनकी जगह नए सदस्य निर्वाचित होते हैं। | 2. इसके सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर इसे 5 वर्ष से पहले भी भंग कर सकते हैं। |
| 3. यह एक स्थायी सदन है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता। | 3. यह एक अस्थायी सदन है जो समय से पहले भी भंग हो सकती है। |
| 4. राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है जो कला, साहित्य, विज्ञान आदि क्षेत्रों से होते हैं। | 4. राष्ट्रपति द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है (वर्तमान में यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है)। |
| 5. इसके सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर गुप्त मतदान से इन्हें चुनते हैं। | 5. इसके सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है। जनता सीधे वयस्क मताधिकार के आधार पर इन्हें चुनती है। |
| 6. मंत्रिपरिषद् राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती है। | 6. मंत्रिपरिषद् केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। |
| 7. धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत नहीं किए जा सकते। | 7. धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किए जा सकते हैं। |
| 8. राज्यसभा राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है। | 8. लोकसभा को यह अधिकार प्राप्त नहीं है। |
| 9. राज्यसभा अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन करने का अधिकार रखती है। | 9. लोकसभा को यह अधिकार प्राप्त नहीं है। |
| 10. उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए प्रस्ताव राज्यसभा में ही शुरू किया जाता है। | 10. लोकसभा राज्यसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव का अनुमोदन करती है। |
| 11. लोकसभा के भंग होने की स्थिति में आपातकाल की उद्घोषणा का अनुमोदन राज्यसभा द्वारा किया जा सकता है। | 11. लोकसभा को इस प्रकार के विशेषाधिकार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्यसभा कभी विघटित नहीं होती है। |
In simple words: राज्यसभा और लोकसभा संसद के दो अलग-अलग सदन हैं. राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है, स्थायी है और इसके सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं. वहीं, लोकसभा लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, अस्थायी है और इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं. दोनों के पास अलग-अलग शक्तियाँ और भूमिकाएँ हैं.
🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में हमेशा दोनों सदनों की विशेषताओं को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें. सदस्यों की संख्या, कार्यकाल, चुनाव प्रक्रिया और विशिष्ट शक्तियों को शामिल करना सुनिश्चित करें.
Question 4. लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियों के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
Answer: लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियाँ और कार्य नीचे दिए गए हैं:
1. **निर्णायक मत:** यदि किसी विधेयक पर पक्ष और विपक्ष में बराबर वोट पड़ते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष अपना निर्णायक वोट देते हैं. उनका यह वोट बहुत महत्वपूर्ण होता है.
2. **दलों को मान्यता:** अध्यक्ष को लोकसभा में अलग-अलग राजनीतिक दलों और समूहों को मान्यता देने का अधिकार है.
3. **कार्यवाही का संचालन:** अध्यक्ष लोकसभा की बैठकों का संचालन करते हैं. वह सुनिश्चित करते हैं कि बहस और कामकाज नियमों के अनुसार हो.
4. **बैठक स्थगित करना:** संविधान के अनुसार, अध्यक्ष के पास लोकसभा की बैठक स्थगित करने या कोरम (आवश्यक सदस्यों की संख्या) पूरा न होने पर उसे निलंबित करने की शक्ति है.
5. **व्यवस्था बनाए रखना:** लोकसभा में व्यवस्था बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी है, और वह सदस्यों से नियमों का पालन करवाते हैं. यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है, तो वे कार्रवाई कर सकते हैं.
6. **याचिकाओं की स्वीकृति:** लोकसभा में याचिकाएं पेश करने के लिए अध्यक्ष की अनुमति जरूरी है.
7. **चर्चा का समय तय करना:** लोकसभा के नेता से सलाह करके, अध्यक्ष बजट, विनियोग और वित्त विधेयकों पर चर्चा के लिए दिन और समय तय करते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त समय मिले.
8. **विशेषाधिकारों की सुरक्षा:** अध्यक्ष की अनुमति के बिना, किसी भी सदस्य के विशेषाधिकार के उल्लंघन से जुड़ा कोई भी प्रश्न सदन में नहीं उठाया जा सकता. वह सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करते हैं.
9. **समिति अध्यक्षों की नियुक्ति:** प्रवर समितियों (Select Committees) के अध्यक्षों की नियुक्ति भी लोकसभा अध्यक्ष ही करते हैं.
10. **दर्शकों और प्रेस पर नियंत्रण:** अध्यक्ष सदन में दर्शकों और प्रेस के प्रतिनिधियों के प्रवेश पर रोक लगा सकते हैं, खासकर जब गोपनीय चर्चा चल रही हो.
11. **लोकसभा का प्रतिनिधित्व:** सभी औपचारिक अवसरों पर अध्यक्ष ही लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं, चाहे वह देश के भीतर हो या बाहर.
12. **अन्य पदों पर नियुक्ति:** अध्यक्ष कई अन्य महत्वपूर्ण और सम्मानजनक पदों पर भी रहते हैं, जैसे विभिन्न संसदीय समितियों के प्रमुख.
13. **सदस्यों और विपक्ष के हितों की रक्षा:** अध्यक्ष का काम लोकसभा के सदस्यों के विशेषाधिकारों की रक्षा करना भी है. साथ ही, वह विपक्षी दलों के हितों का भी ध्यान रखते हैं और उन्हें अपनी बात रखने का मौका देते हैं.
14. **'काम रोको प्रस्ताव' की अनुमति:** 'काम रोको प्रस्ताव' (Adjournment Motion) भी अध्यक्ष की अनुमति मिलने पर ही सदन में लाए जा सकते हैं. यह प्रस्ताव सार्वजनिक महत्व के किसी तात्कालिक मुद्दे पर चर्चा के लिए लाया जाता है.
15. **भाषणों को संबोधित करना:** लोकसभा में दिए गए सभी भाषण अध्यक्ष को संबोधित करके दिए जाते हैं. इससे बहस व्यवस्थित रहती है.
16. **भाषणों की समय-सीमा:** बजट पर होने वाले भाषणों के लिए समय-सीमा भी अध्यक्ष ही तय करते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि बहस समय पर पूरी हो.
17. **अनुशासन स्थापित करना:** सदन में अनुशासन बनाए रखना भी अध्यक्ष का काम है. वह सदस्यों को नियमों का पालन करने के लिए कह सकते हैं.
18. **धन विधेयक का निर्णय:** कोई विधेयक 'धन विधेयक' है या नहीं, इसका अंतिम फैसला अध्यक्ष ही करते हैं. उनका निर्णय इस मामले में अंतिम होता है.
19. **सदन के निर्णयों को पहुंचाना:** अध्यक्ष सदन के फैसलों को सही अधिकारियों तक पहुंचाते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि वे लागू हों.
20. **संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता:** जब संसद का संयुक्त अधिवेशन होता है (जैसे किसी विधेयक पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध होने पर), तो उसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ही करते हैं.
In simple words: लोकसभा अध्यक्ष का काम सदन की बैठकों को चलाना, अनुशासन बनाए रखना और यह तय करना है कि नियम ठीक से माने जाएं. वह निर्णायक वोट देते हैं, दलों को मान्यता देते हैं, और यह फैसला भी करते हैं कि कौन सा विधेयक 'धन विधेयक' है. वह सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और सदन का प्रतिनिधित्व भी करते हैं.
🎯 Exam Tip: लोकसभा अध्यक्ष की शक्तियों को लिखते समय, उनकी प्रशासनिक, न्यायिक और विधायी भूमिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर समझाना मददगार होता है. निर्णायक मत और धन विधेयक पर उनका अंतिम निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.
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