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Detailed Chapter 14 भारत और वैश्वीकरण RBSE Solutions for Class 12 Political Science
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Class 12 Political Science Chapter 14 भारत और वैश्वीकरण RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 भारत और वैश्वीकरण
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 बहुंचयनात्मक प्रश्न
Question 1. वैश्वीकरण के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(अ) यह बाजारोन्मुखी अवधारणा है।
(ब) इसकी शुरूआत 1960 में हुई है।
(स) वैश्वीकरण और पूँजीवाद एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
(द) यह एक बहुआयामी परिघटना है।
Answer: (ब) इसकी शुरूआत 1960 में हुई है।
In simple words: वैश्वीकरण बाजार को बढ़ावा देने वाली सोच है, वैश्वीकरण और पूँजीवाद एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और यह कई तरह से दुनिया को बदलता है। लेकिन इसकी शुरुआत 1960 के दशक में नहीं हुई थी।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की परिभाषा, विशेषताएं और शुरुआत का समय याद रखें ताकि ऐसे कथनात्मक प्रश्नों का सही उत्तर दे सकें।
Question 3. वैश्वीकरण के कारणों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
(अ) इसका एकमात्र कारण आर्थिक धरातल पर पारस्परिक निर्भरता है।
(ब) इसमें सिर्फ वस्तुओं की आवाजाही होती है।
(स) इसका कारण एक विशेष समुदाय है।
(द) वैश्वीकरण का जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ।
Answer: (अ) इसका एकमात्र कारण आर्थिक धरातल पर पारस्परिक निर्भरता है।
In simple words: वैश्वीकरण का मुख्य कारण यह है कि देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर बहुत निर्भर हो गए हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ चीजें ही नहीं बल्कि लोग, विचार और पैसा भी एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के मूल कारणों को समझें, विशेषकर आर्थिक निर्भरता पर ध्यान दें। यह केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।
Question 4. वैश्वीकरण के बारे में कौन - सा कथन सही है?
(अ) वैश्वीकरण का संबंध सिर्फ वस्तुओं की आवाजाही से है
(ब) वैश्वीकरण में मूल्यों का संघर्ष नहीं होता है।
(स) वैश्वीकरण के अंग के रूप में सेवाओं का महत्व गौण है
(द) वैश्वीकरण का संबंध विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव से है
Answer: (द) वैश्वीकरण का संबंध विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव से है
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है कि पूरी दुनिया के लोग और देश आपस में जुड़ गए हैं। इसमें सिर्फ चीजें नहीं, बल्कि विचार और सेवाएं भी शामिल हैं, और कई बार मूल्यों में टकराव भी होता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण को सिर्फ वस्तुओं के लेन-देन तक सीमित न समझें, यह एक व्यापक प्रक्रिया है जो देशों और लोगों को कई स्तरों पर जोड़ती है।
Question 5. वैश्वीकरण के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(अ) वैश्वीकरण के पक्षधरों का तर्क है कि इससे आर्थिक विकास व समृद्धि बढ़ती है।
(ब) वैश्वीकरण के समर्थक मानते हैं कि इससे सांस्कृतिक समरूपता आयेगी।
(स) वैश्वीकरण के आलोचकों का तर्क है कि इससे सांस्कृतिक समरूपता जायेगी।
(द) वैश्वीकरण के आलोचकों का तर्क है कि इससे आर्थिक असमानता और ज्यादा बढ़ेगी।
Answer: (द) वैश्वीकरण के आलोचकों का तर्क है कि इससे आर्थिक असमानता और ज्यादा बढ़ेगी।
In simple words: वैश्वीकरण के समर्थक सोचते हैं कि इससे आर्थिक सुधार आएगा और संस्कृति एक जैसी हो जाएगी। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह असमानता बढ़ाएगा और हमारी अपनी संस्कृति को कमजोर करेगा।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के पक्ष और विपक्ष में दिए गए तर्कों को ध्यान से समझें, खासकर आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभावों से संबंधित मतभेदों को।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है?
Answer: वैश्वीकरण का अर्थ है विश्व के सभी हिस्सों को एक साथ जोड़ने की प्रक्रिया। यह एक बड़ा विचार है जो जीवन के हर पहलू से जुड़ा है। इसके द्वारा दुनिया एक छोटे से गाँव में बदल गई है, क्योंकि दूर-दराज के देश अब एक-दूसरे के करीब महसूस करते हैं।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है जब दुनिया के सभी देश और लोग आपस में जुड़ जाते हैं, जैसे कि एक बड़ा गाँव बन गया हो।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की सटीक और संक्षिप्त परिभाषा याद रखें, जिसमें इसका विश्वव्यापी जुड़ाव का पहलू शामिल हो।
Question 3. निजीकरण से क्या तात्पर्य है?
Answer: निजीकरण का मतलब है कि आर्थिक कामों में सरकार का दखल धीरे-धीरे कम हो और निजी कंपनियों को काम करने के लिए ज्यादा बढ़ावा मिले। इसमें प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा पर आधारित निजी क्षेत्र को महत्व दिया जाता है।
In simple words: निजीकरण मतलब है कि सरकार की जगह निजी कंपनियां ज्यादा काम करें और सरकार का दखल कम हो।
🎯 Exam Tip: निजीकरण की परिभाषा में 'सरकारी हस्तक्षेप में कमी' और 'निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।
Question 4. वैश्वीकरण के क्या - क्या लाभ हैं?
Answer: वैश्वीकरण के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
1. वैश्वीकरण ने पूरी दुनिया को एक वैश्विक गाँव की तरह जोड़ दिया है, जिससे लोग और देश करीब आए हैं।
2. निजीकरण और उदारवाद (आर्थिक आजादी) के कारण आर्थिक विकास बहुत तेजी से बढ़ा है।
3. वैश्वीकरण से सांस्कृतिक समानता आती है, क्योंकि विभिन्न संस्कृतियाँ एक-दूसरे से मिलती हैं।
In simple words: वैश्वीकरण ने दुनिया को करीब लाया है, आर्थिक विकास तेज किया है, और संस्कृतियों को मिलाया है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के लाभों को सूची में याद रखें, जैसे वैश्विक जुड़ाव, आर्थिक उन्नति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
Question 5. भारत में आर्थिक सुधार कब और क्यों प्रारम्भ हुआ?
Answer: भारत में आर्थिक सुधार की प्रक्रिया सन् 1991 में वैश्वीकरण की नीति अपनाने के बाद शुरू हुई। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए उठाया गया था।
In simple words: भारत में आर्थिक सुधार 1991 में वैश्वीकरण की वजह से शुरू हुए, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
🎯 Exam Tip: भारत में आर्थिक सुधारों के प्रारंभ का वर्ष (1991) और मुख्य कारण (वैश्वीकरण अपनाना) याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. वैश्वीकरण के राजनीतिक पक्ष का राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Answer: वैश्वीकरण के कारण राष्ट्रीय राज्य (देश) की सोच में बदलाव आया है। लोक कल्याणकारी राज्य (जो लोगों की भलाई पर ज्यादा ध्यान देते थे) की जगह अब ऐसे राज्य आ गए हैं जो कम से कम दखल देते हैं। उनका काम मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सुरक्षा देना है।
In simple words: वैश्वीकरण से देशों का तरीका बदल गया है; अब वे लोगों की भलाई से ज्यादा आर्थिक मामलों में कम दखल देते हैं।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभावों में 'लोक कल्याणकारी राज्य' से 'न्यूनतम अहस्तक्षेपकारी राज्य' में बदलाव को प्रमुखता से बताएं।
Question 7. वैश्वीकरण का सर्वाधिक प्रभाव किन देशों पर पड़ा?
Answer: वैश्वीकरण का प्रभाव चीन, भारत और ब्राजील जैसे विकासशील देशों पर बहुत पड़ा है। हालांकि, वैश्वीकरण का सबसे ज्यादा फायदा विकसित देशों को मिला है, क्योंकि उनके पास पहले से ही बेहतर संसाधन और आर्थिक क्षमताएं थीं।
In simple words: वैश्वीकरण का सबसे ज्यादा असर चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ा है, लेकिन इसका फायदा अमीर देशों को ज्यादा मिला है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि वैश्वीकरण का प्रभाव विकासशील देशों पर अधिक था, लेकिन इसके मुख्य लाभार्थी विकसित देश रहे हैं।
Question 8. वैश्वीकरण का जीवन प्रत्याशा पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों के लोगों की जीवन प्रत्याशा (जीने की औसत उम्र) दोगुनी हो गई है और शिशु मृत्यु दर (बच्चों के मरने की संख्या) कम हो गई है। यह स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में सुधार का संकेत है।
In simple words: वैश्वीकरण की वजह से गरीब देशों के लोग अब ज्यादा समय तक जीते हैं और बच्चों की मृत्यु दर कम हो गई है।
🎯 Exam Tip: जीवन प्रत्याशा और शिशु मृत्यु दर पर वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताएं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वैश्वीकरण के सांस्कृतिक पक्ष से आप क्या समझते हैं?
Answer: वैश्वीकरण का सांस्कृतिक पक्ष - वैश्वीकरण का राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ हमारी संस्कृति पर भी असर पड़ा है। इसका दुनिया भर के देशों की स्थानीय संस्कृतियों पर मिला-जुला प्रभाव पड़ा है। इससे दुनिया की पुरानी संस्कृतियों को सबसे ज्यादा खतरा होने की आशंका है। वैश्वीकरण सांस्कृतिक समानता पैदा करता है, जिससे हमारी अपनी संस्कृतियों पर बुरा असर पड़ता है। पश्चिमी संस्कृतियों को दूसरों पर थोपा जा रहा है। इसका एक अच्छा पहलू यह भी है कि तकनीक के विकास के साथ एक नई वैश्विक संस्कृति के आने की मजबूत संभावनाएं बन गई हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया, फैक्स और केबल टीवी ने देशों के बीच की सांस्कृतिक रुकावटों को खत्म करने में मदद की है।
In simple words: वैश्वीकरण से हमारी संस्कृतियों में बदलाव आया है। कुछ लोग डरते हैं कि हमारी अपनी संस्कृति खत्म हो जाएगी और पश्चिमी संस्कृति हावी हो जाएगी। लेकिन तकनीक ने संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब भी लाया है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के सांस्कृतिक पक्ष में 'सांस्कृतिक समरूपता' (पश्चिमीकरण) और 'सांस्कृतिक विविधता के लिए खतरा' जैसे मुख्य बिंदुओं को उजागर करें।
Question 2. वैश्वीकरण के प्रमुख प्रभाव क्या रहे हैं?
Answer: वैश्वीकरण के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं:
1. राजनीतिक प्रभाव - वैश्वीकरण ने दुनिया के राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। राष्ट्रीय राज्य की अवधारणा में बदलाव आया है। लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब ऐसे राज्य आ गए हैं जो कम से कम दखल देते हैं।
2. आर्थिक प्रभाव - वैश्वीकरण का सबसे ज्यादा प्रभाव दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उदारवाद की नीतियों को अपनाया जा रहा है और आयात पर लगे प्रतिबंध कम कर दिए गए हैं। धनी देशों के निवेशक अब दूसरे देशों में पैसा लगा रहे हैं। बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और व्यापारिक लेनदेन अब इंटरनेट की वजह से आसान हो गए हैं।
3. सांस्कृतिक प्रभाव - वैश्वीकरण सांस्कृतिक समानता पैदा करता है, लेकिन इससे हमारी अपनी संस्कृतियों पर बुरा असर पड़ता है। पश्चिमी संस्कृति को दूसरों पर थोपा जा रहा है।
इसके अलावा, वैश्वीकरण से विकासशील देशों के लोगों की जीवन प्रत्याशा दोगुनी हो गई है और शिशु मृत्यु दर कम हुई है। वयस्क मताधिकार का व्यापक विस्तार हुआ है, लोगों के भोजन में पौष्टिकता बढ़ी है और बालश्रम में कमी आई है। प्रति व्यक्ति बिजली, कार, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, मोबाइल फोन जैसी सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ी है। स्वच्छ पानी की उपलब्धता बढ़ी है और सेवा क्षेत्रों में बहुत सुधार हुआ है, जिससे जीवन अधिक खुशहाल बना है।
In simple words: वैश्वीकरण ने राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को बदला है। इससे देशों की सरकारें कम दखल देती हैं, व्यापार आसान हो गया है और लोगों की जीवनशैली भी बदली है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के विभिन्न प्रभावों (राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक) को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें और साथ में इसके सकारात्मक व नकारात्मक परिणामों को भी बताएं।
Question 4. भारत में भूमण्डलीकरण क्यों अपनाया गया? कोई चार कारण बताइए।
Answer: भारत में भूमंडलीकरण (वैश्वीकरण) अपनाने के चार मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. आर्थिक गतिविधियों की क्षमता बढ़ाने और उनसे मिलने वाले लाभ को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने के लिए इसे अपनाया गया।
2. औपनिवेशिक काल के प्रभाव से उत्पन्न वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए इस नीति का उपयोग किया गया।
3. सन् 1991 में वैश्वीकरण से जुड़ने के बाद भारत ने नई आर्थिक प्रक्रिया के तहत उदारवाद को अपनाया। 1992-93 में रुपये को पूरी तरह से परिवर्तनीय बनाया गया, आयात-निर्यात नीति से प्रतिबंध हटाए गए और जनवरी 1995 को भारत विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बन गया। भारत ने उन सभी नियमों को खत्म करना शुरू कर दिया जो आर्थिक विकास में बाधा डाल रहे थे।
4. प्रशासनिक क्षेत्र में भी कई सुधार किए गए ताकि व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सके।
In simple words: भारत ने वैश्वीकरण को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पुराने वित्तीय संकट से निकलने, व्यापार के नियम आसान बनाने और प्रशासन में सुधार लाने के लिए अपनाया।
🎯 Exam Tip: भारत द्वारा भूमंडलीकरण अपनाने के कारणों में आर्थिक संकट, व्यापार उदारीकरण और वैश्विक संस्थाओं से जुड़ाव जैसे प्रमुख बिंदुओं को याद रखें।
Question 5. वैश्वीकरण के विरोध के मुख्य आधार क्या हैं? समझाइए।
Answer: वैश्वीकरण के विरोध के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:
1. वैश्वीकरण से राष्ट्र की आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित होने का डर रहता है, क्योंकि देश अपनी नीतियों को तय करने में कम आजाद महसूस करते हैं।
2. यह डर रहता है कि अर्ध-विकसित और विकासशील देश, विकसित देशों के पिछलग्गू बनकर रह जाएंगे और उन पर निर्भर हो जाएंगे।
3. वैश्वीकरण एक देश की संप्रभुता (स्वयं शासन करने की शक्ति) और आत्मनिर्भरता को प्रभावित कर सकता है।
4. भूमंडलीकरण भारत जैसे विकासशील और अन्य पिछड़े देशों के लिए कभी-कभी बहुत हानिकारक साबित हो सकता है, क्योंकि यह असमानता बढ़ा सकता है।
In simple words: वैश्वीकरण का विरोध करने वाले मानते हैं कि यह देशों की आर्थिक आजादी, आत्मनिर्भरता को कम करता है, गरीब देशों को अमीर देशों का पिछलग्गू बनाता है और उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के विरोध के आधारों में 'आर्थिक संप्रभुता का हनन', 'विकासशील देशों का पिछलग्गू बनना' और 'असमानता में वृद्धि' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को याद रखें।
Question. वैश्वीकरण ने राष्ट्रीय सम्प्रभुता को किस प्रकार प्रभावित किया है? बताइए।
Answer: वैश्वीकरण के कारण राष्ट्रीय राज्य की अवधारणा में बदलाव आया है। पूरे विश्व में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की स्थापना से विभिन्न राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है। हालांकि, राजनीतिक समुदाय के रूप में राज्य की प्रधानता को अभी भी कोई चुनौती नहीं मिली है और राज्य इस मायने में आज भी महत्वपूर्ण है। विश्व राजनीति में आज भी राष्ट्रीय राज्य की अहमियत बनी हुई है। यह भी सच है कि वैश्वीकरण राष्ट्रीय राज्यों को कमजोर कर रहा है, लेकिन राष्ट्रीय राज्यों का अस्तित्व खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिए जो अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं बनी हैं, वे राष्ट्रीय राज्यों की भागीदारी पर आधारित हैं और राष्ट्रीय संप्रभुता के मूल सिद्धांतों का सम्मान करती हैं।
In simple words: वैश्वीकरण ने देशों की आजादी पर असर डाला है, क्योंकि बड़ी कंपनियां और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं प्रभावशाली हो गई हैं। फिर भी, देश अभी भी महत्वपूर्ण हैं और उनकी अपनी ताकत बनी हुई है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय संप्रभुता पर वैश्वीकरण के प्रभावों को समझाते हुए, यह बताएं कि कैसे यह राज्य की भूमिका को बदलता है लेकिन उसके अस्तित्व को पूरी तरह से समाप्त नहीं करता।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. वैश्वीकरण क्या है? इसके राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों की समीक्षा कीजिए।
Answer: **वैश्वीकरण का अर्थ:**
वैश्वीकरण या भूमंडलीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो विश्व के सभी हिस्सों को एक साथ जोड़ती है। यह एक बड़ी अवधारणा है और जीवन के हर पहलू से जुड़ी है। वैश्वीकरण ने दुनिया को एक छोटे से गाँव में बदल दिया है, क्योंकि दुनिया के दूर-दराज के देश अब एक-दूसरे के करीब महसूस करते हैं। वैश्वीकरण की गति को तेज करने में तकनीक ने बहुत मदद की है। दूसरे शब्दों में, वैश्वीकरण का अर्थ है अंतर्राष्ट्रीय एकीकरण, विश्व व्यापार का खुलना, उन्नत संचार साधनों का विकास, वित्तीय बाजारों का अंतर्राष्ट्रीयकरण, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का महत्व बढ़ना, जनसंख्या का एक जगह से दूसरी जगह जाना, व्यक्तियों, वस्तुओं, पूँजी, डेटा और विचारों की तेजी से आवाजाही। वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने दुनिया को विविधता से एक समाज में बदल दिया है।
**वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव:**
विश्व का राजनीतिक माहौल वैश्वीकरण के प्रभाव में आ गया है, जिसमें पर्यावरणीय बदलाव और एक एकीकृत अर्थव्यवस्था शामिल है। विकसित देशों में लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा की जगह अब न्यूनतम अहस्तक्षेपकारी राज्य (जो कम से कम दखल देते हैं) ने ले ली है। पूरी दुनिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थापित हो चुकी हैं। इससे सरकारों की स्वतंत्रता पर असर पड़ा है, लेकिन फिर भी राष्ट्रीय राज्य की अहमियत अभी भी बनी हुई है। तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों ने बहुत प्रगति की है। वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं ताकि विभिन्न बाजार विदेशी वस्तुओं की बिक्री के लिए खुलें। 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' और 'विश्व व्यापार संगठन' विश्व में आर्थिक नीतियों को तय करने में सीधे और परोक्ष रूप से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है जब दुनिया के सारे देश और लोग आपस में जुड़ जाते हैं। राजनीति में सरकारों का दखल कम हुआ है और बड़ी कंपनियां प्रभावशाली हो गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं भी देशों की आर्थिक नीतियों पर असर डालती हैं।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की परिभाषा को राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों के साथ जोड़ते हुए लिखें। इसमें 'अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव', 'राज्य की बदलती भूमिका' और 'आर्थिक उदारीकरण' जैसे मुख्य बिंदु शामिल करें।
Question 2. भारत व वैश्वीकरण पर निबन्ध लिखिए।
Answer: **भारत व वैश्वीकरण:**
भारत में वैश्वीकरण की शुरुआत जुलाई 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने की थी। अमेरिका-उन्मुख वैश्वीकरण का पालन करने के लिए उन्हें कई बार आलोचना का सामना करना पड़ा। वास्तव में, उस समय के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने नई आर्थिक नीतियों (वैश्वीकरण, निजीकरण और उदारीकरण) की शुरुआत की थी।
**नई आर्थिक नीति:**
सन् 1991 में भारत ने नई आर्थिक नीति के तहत उदारीकरण की प्रक्रिया को अपनाया। 1992-93 में रुपये को पूरी तरह परिवर्तनीय बनाया गया। पूंजी बाजार और वित्तीय सुधारों के लिए कदम उठाए गए। आयात-निर्यात नीति में सुधार किया गया और प्रतिबंध हटाए गए। दिसंबर 1994 में एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने उन नियमों और औपचारिकताओं को समाप्त कर दिया जो वर्षों से आर्थिक विकास में बाधा बन रहे थे। जनवरी 1995 में विश्व व्यापार संगठन की स्थापना होने पर भारत इसका सदस्य बन गया। सरकारी तंत्र की जटिलताओं को कम करने के लिए प्रशासनिक सुधार भी किए गए।
**भारतीय राजनीति पर वैश्वीकरण का प्रभाव:**
भारतीय राजनीति पर वैश्वीकरण के प्रभाव से संबंधित निम्नलिखित विचार व्यक्त किए जाते रहे हैं:
1. वैश्वीकरण ने भारत के संघीय ढांचे को कमजोर किया है, क्योंकि केंद्र सरकार की शक्तियां कम हुई हैं और क्षेत्रीय पहचान पर आधारित पार्टियां मजबूत हुई हैं।
2. वैश्वीकरण की प्रवृत्ति वैधता का संकट पैदा करती है। एक तरफ राष्ट्रीय राज्य अपनी आर्थिक संप्रभुता को कम कर देता है, लेकिन आंतरिक संप्रभुता का त्याग करने में हिचकिचाता है। घरेलू संप्रभुता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राज्य को स्थानीय लोकतांत्रिक संरचनाओं का निर्माण करना पड़ता है ताकि राज्य की वैधता बनी रहे।
3. भारतीय संघवाद के सामने वैश्वीकरण की एक चुनौती नागरिक समाज संगठनों की तेजी से वृद्धि है। इनमें से कुछ संगठन लोकतांत्रिक शासन की समानांतर और क्षैतिज संरचनाएं बनाते हैं। इससे लोकतंत्र के संचालन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
**सामाजिक क्षेत्र पर वैश्वीकरण का प्रभाव:**
भारत में वैश्वीकरण का आर्थिक क्षेत्र में तो सकारात्मक प्रभाव हुआ है, लेकिन सामाजिक क्षेत्र में इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। देश के युवाओं ने पश्चिमी प्रभाव में आकर मान-मर्यादा, रीति-रिवाज का त्याग कर दिया है। सामाजिकता की जगह स्वार्थपरता ने ले ली है। वैश्वीकरण के प्रभाव से व्यक्ति के नैतिक चरित्र में गिरावट आई है और मूल्यों का अभाव बढ़ा है।
In simple words: भारत में 1991 में वैश्वीकरण शुरू हुआ, जिससे नई आर्थिक नीतियां अपनाई गईं और व्यापार आसान हुआ। हालांकि, इससे राजनीति में केंद्र सरकार की शक्तियां कम हुईं और समाज में पश्चिमी संस्कृति का असर बढ़ा, जिससे नैतिक मूल्यों में गिरावट आई।
🎯 Exam Tip: भारत में वैश्वीकरण की शुरुआत, नई आर्थिक नीतियों और इसके राजनीतिक-सामाजिक प्रभावों को बिंदुवार और व्यवस्थित तरीके से समझाएं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 बहुँचयनात्मक प्रश्न
Question 1. सोवियत संघ व उसके समर्थक निम्न में से किस संगठन के सदस्य नहीं थे?
(अ) विश्व बैंक
(ब) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
(स) व्यापार व टैरिफ सामान्य समझौता (गैट)
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: सोवियत संघ और उसके सहयोगी देश विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और गैट जैसे किसी भी बड़े वैश्विक आर्थिक संगठन के सदस्य नहीं थे।
🎯 Exam Tip: शीतयुद्ध काल में सोवियत संघ के आर्थिक अलगाव और उसकी गैर-सदस्यता वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को याद रखें।
Question 2. सोवियत संघ का विभाजन किस वर्ष हुआ?
(अ) 1990
(ब) 1991
(स) 1992
(द) 1993
Answer: (ब) 1991
In simple words: सोवियत संघ का बंटवारा 1991 में हुआ, जिससे कई नए देश बने।
🎯 Exam Tip: सोवियत संघ के विघटन का वर्ष (1991) एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 3. वैश्वीकरण का अर्थ है
(अ) अन्तर्राष्ट्रीय एकीकरण
(ब) वित्तीय बाजारों का अन्तर्राष्ट्रीयकरण
Answer: (ब) वित्तीय बाजारों का अन्तर्राष्ट्रीयकरण
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है जब देशों के बीच पैसे का लेन-देन (बाजार) बिना किसी रोक-टोक के होता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के आर्थिक आयामों को समझें, विशेषकर वित्तीय बाजारों के अंतर्राष्ट्रीयकरण को।
Question 5. वैश्वीकरण में सांस्कृतिक समरूपता के नाम पर किस संस्कृति को थोपा जा रहा है?
(अ) भारतीय संस्कृति
(ब) पाश्चात्य संस्कृति
(स) यूरोपीय संस्कृति
(द) चीनी संस्कृति
Answer: (ब) पाश्चात्य संस्कृति
In simple words: वैश्वीकरण के कारण, दुनिया भर में लोगों को पश्चिमी देशों की संस्कृति को अपनाने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उनकी अपनी पुरानी संस्कृतियां प्रभावित हो रही हैं।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक समरूपता के संदर्भ में 'पश्चिमी संस्कृति के वर्चस्व' के विचार को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. निम्न में से किस वर्ष भारत ने नई आर्थिक नीति को अपनाया था?
(अ) सन् 1991
(ब) सन् 1992
(स) सन् 2011
(द) सन् 1916
Answer: (अ) सन् 1991
In simple words: भारत ने 1991 में एक नई आर्थिक नीति लागू की, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए।
🎯 Exam Tip: भारत में नई आर्थिक नीति (LPG reforms) की शुरुआत का वर्ष (1991) महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. विश्व का वैचारिक आधार पर विभाजन कब हुआ?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व वैचारिक आधार पर दो भागों में बंट गया। ये विचारधाराएं पूंजीवादी विचारधारा और साम्यवादी विचारधारा थीं।
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया दो बड़े विचारों (पूंजीवाद और साम्यवाद) में बंट गई थी।
🎯 Exam Tip: विश्व के वैचारिक विभाजन का समय (द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद) और मुख्य विचारधाराएं (पूंजीवाद, साम्यवाद) याद रखें।
Question 2. द्वि
Answer: साम्यवादी देश संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य थे, लेकिन विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और गैट (GATT) जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सदस्य नहीं थे। इन देशों में निरंकुश सत्ता और स्वामित्व वाली अर्थव्यवस्था प्रचलित थी, जबकि पूंजीवादी गुट में निजी स्वामित्व और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था थी।
In simple words: साम्यवादी देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य थे, लेकिन वैश्विक आर्थिक संस्थाओं के नहीं। साम्यवादी देशों में सरकार सब चलाती थी, जबकि पूंजीवादी देशों में निजी लोग और बाजार सब तय करते थे।
🎯 Exam Tip: शीतयुद्ध के दौरान दोनों गुटों (साम्यवादी और पूंजीवादी) की आर्थिक और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में स्थिति के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 4. साम्यवादी और पूँजीवादी गुट की अर्थव्यवस्थाओं में क्या अन्तर था?
Answer: साम्यवादी देशों में निरंकुश सत्ता (एक व्यक्ति या समूह का पूरा नियंत्रण) और सरकार के स्वामित्व वाली अर्थव्यवस्था थी, जहाँ सभी निर्णय राज्य लेता था। जबकि पूंजीवादी गुट में निजी स्वामित्व (लोगों या कंपनियों का चीजों पर अधिकार) और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था थी, जहाँ बाजार के नियम फैसले करते थे।
In simple words: साम्यवादी देशों में सरकार सब कुछ नियंत्रित करती थी, जबकि पूंजीवादी देशों में निजी लोग और बाजार अर्थव्यवस्था को चलाते थे।
🎯 Exam Tip: साम्यवादी और पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाओं के मुख्य अंतरों को स्पष्ट करें, जैसे 'स्वामित्व' (सरकारी बनाम निजी) और 'नियंत्रण' (निरंकुश सत्ता बनाम बाजार)।
Question 5. शीत युद्ध का क्या अर्थ है?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच जो तनाव की स्थिति बनी, उसे शीत युद्ध कहा गया। इसमें असली युद्ध तो नहीं हुआ, लेकिन युद्ध की संभावना हमेशा बनी रही। दोनों गुट सीधे एक-दूसरे से नहीं लड़े, बल्कि दूसरे देशों को समर्थन देकर एक-दूसरे का विरोध करते रहे।
In simple words: शीत युद्ध मतलब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच की ऐसी लड़ाई जिसमें असली युद्ध नहीं हुआ, बस तनाव और डर का माहौल बना रहा।
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध की परिभाषा में 'तनाव' और 'वास्तविक युद्ध का न होना' जैसे मुख्य तत्वों को शामिल करें।
Question 6. साम्यवाद के पतन के क्या कारण थे?
Answer: साम्यवादी देशों के पास इतने साधन नहीं थे कि वे गरीबी और असमानता को खत्म कर सकें। इन देशों में प्रशासनिक व्यवस्था खराब थी और हथियारों की होड़ के कारण आर्थिक विषमता लगातार बढ़ रही थी। इस वजह से साम्यवाद का अंत निश्चित था। मिखाइल गोर्बाचोव की नीतियों ने भी इसे गति दी।
In simple words: साम्यवाद इसलिए खत्म हुआ क्योंकि साम्यवादी देश गरीबी और असमानता दूर नहीं कर पाए, उनका प्रशासन खराब था, और वे हथियारों पर बहुत पैसा खर्च कर रहे थे।
🎯 Exam Tip: साम्यवाद के पतन के कारणों में 'आर्थिक अक्षमता', 'प्रशासनिक अव्यवस्था' और 'हथियारों की दौड़' जैसे कारकों पर जोर दें।
Question 7. सोवियत संघ का विभाजन कब हुआ?
Answer: सोवियत संघ का विभाजन सन् 1991 में हुआ।
In simple words: सोवियत संघ 1991 में अलग-अलग देशों में बंट गया।
🎯 Exam Tip: सोवियत संघ के विभाजन का वर्ष (1991) एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Question 8. वैश्वीकरण से क्या आशय है?
Answer: वैश्वीकरण से आशय है किसी वस्तु, सेवा, पूंजी और विचारों का एक देश से दूसरे देश में बिना किसी रोक-टोक के आदान-प्रदान करना। यह प्रक्रिया देशों को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से जोड़ती है।
In simple words: वैश्वीकरण मतलब है चीजों, सेवाओं, पैसों और विचारों का एक देश से दूसरे देश में आसानी से आना-जाना।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की परिभाषा में 'वस्तु, सेवा, पूंजी और विचारों के मुक्त प्रवाह' को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।
Question 9. वैश्वीकरण के लिए जिम्मेदार कोई दो कारण बताइए।
Answer: वैश्वीकरण के लिए जिम्मेदार कोई दो कारण निम्नलिखित हैं:
1. प्रौद्योगिकी: इंटरनेट, कंप्यूटर और संचार साधनों के विकास ने दुनिया भर में सूचना और व्यापार को आसान बना दिया है।
2. लोगों की सोच में विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव को बढ़ाना: लोग अब यह समझने लगे हैं कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में होने वाली घटनाएं एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं, जिससे वैश्विक एकजुटता बढ़ी है।
In simple words: वैश्वीकरण के दो मुख्य कारण हैं नई तकनीकें (जैसे इंटरनेट) और लोगों की यह बढ़ती सोच कि हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
🎯 Exam Tip: प्रौद्योगिकी और वैश्विक जुड़ाव की भावना को वैश्वीकरण के प्रमुख प्रेरक कारकों के रूप में याद रखें।
Question 11. वैश्वीकरण की प्रक्रिया में विश्व में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के स्थान पर किस अवधारणा ने ले ली है?
Answer: वैश्वीकरण की प्रक्रिया में विश्व में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के स्थान पर 'न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य' की अवधारणा ने ले ली है। इस अवधारणा के तहत राज्य का कार्यक्षेत्र सीमित हो जाता है।
In simple words: वैश्वीकरण के बाद, सरकारें लोगों की भलाई के कामों में कम दखल देती हैं, और उनका मुख्य काम सिर्फ कानून-व्यवस्था देखना हो गया है।
🎯 Exam Tip: 'कल्याणकारी राज्य' से 'न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य' में बदलाव को वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव के रूप में याद रखें।
Question 12. विश्व में आर्थिक नीतियों के निर्धारण में किन अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है?
Answer: विश्व में आर्थिक नीतियों के निर्धारण में 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' और 'विश्व व्यापार संगठन' जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने सीधे और परोक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये संस्थाएं देशों की आर्थिक नीतियों को प्रभावित करती हैं।
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व व्यापार संगठन जैसी बड़ी संस्थाएं दुनिया के देशों की आर्थिक नीतियां बनाने में बहुत मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी प्रमुख वैश्विक आर्थिक संस्थाओं के नाम याद रखें।
Question 13. विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव हुआ है?
Answer: विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्वीकरण का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ये देश विदेशी निवेश (बाहर से आने वाले पैसे) को आकर्षित करने के प्रमुख केंद्र बन गए हैं, जिससे उनके आर्थिक विकास को गति मिली है।
In simple words: वैश्वीकरण से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है, क्योंकि अब वहां बाहर के देशों से ज्यादा पैसा आ रहा है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों में बढ़े हुए विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को उसके सकारात्मक प्रभाव के रूप में बताएं।
Question 14. वैश्वीकरण का सांस्कृतिक जीवन पर क्या प्रभाव हुआ है?
Answer: वैश्वीकरण सांस्कृतिक समानता को जन्म देता है, जिससे स्थानीय संस्कृतियों को खतरा पहुंचता है। सांस्कृतिक समानता के नाम पर पश्चिमी संस्कृति को दूसरों पर थोपा जा रहा है, जिससे हमारी अपनी परंपराएं कमजोर हो रही हैं।
In simple words: वैश्वीकरण ने हमारी अपनी संस्कृतियों को खतरे में डाला है, क्योंकि पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों में 'सांस्कृतिक समरूपता' और 'स्थानीय संस्कृतियों के लिए खतरा' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर करें।
Question 15. किन्हीं तीन अन्तर्राष्ट्रीय समाचार सेवाओं के नाम लिखिए।
Answer: किन्हीं तीन अंतर्राष्ट्रीय समाचार सेवाओं के नाम हैं:
1. सी.एन.एन. (संयुक्त राज्य अमेरिका)
2. बी.बी.सी. (ब्रिटेन) और
3. अल जजीरा (मध्य पूर्व)
In simple words: कुछ मशहूर अंतर्राष्ट्रीय समाचार चैनल सी.एन.एन., बी.बी.सी. और अल जजीरा हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समाचार चैनलों के नाम याद रखें जो वैश्विक सूचना प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 17. क्या कारण है कि चीन के उत्पाद विश्व के अधिकांश देशों में हैं?
Answer: चीन के उत्पाद दुनिया के ज्यादातर देशों के बाजारों में उपलब्ध हैं क्योंकि वहां मजदूरी सस्ती है। इस सस्ती मजदूरी के कारण चीन के उत्पाद अन्य देशों के मुकाबले कम कीमत पर बनते हैं, जिससे उसे बाकी देशों से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलती है।
In simple words: चीन के सामान दुनिया भर में बहुत दिखते हैं क्योंकि वहां काम करने वाले लोगों को कम पैसे मिलते हैं, जिससे सामान सस्ता बनता है।
🎯 Exam Tip: चीन के उत्पादों की वैश्विक उपस्थिति का मुख्य कारण 'सस्ती मजदूरी' और 'प्रतिस्पर्धात्मकता' है।
Question 18. वैश्वीकरण का लोक संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Answer: वैश्वीकरण के कारण आज किसी भी देश का गीत-संगीत दुनिया के हर कोने में सुना जा सकता है। इसने स्थानीय संस्कृति को फैलाने में मदद की है, लेकिन इसने राष्ट्रीय संगीत को भी प्रभावित किया है। पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे स्थानीय कला और संगीत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
In simple words: वैश्वीकरण की वजह से अब दुनिया का संगीत हर जगह सुना जाता है, लेकिन इसने हमारी अपनी संस्कृति और संगीत को बदल दिया है, खासकर पश्चिमी संगीत के असर से।
🎯 Exam Tip: लोक संस्कृति पर वैश्वीकरण के प्रभावों में 'वैश्विक पहुंच' के साथ-साथ 'पश्चिमीकरण' और 'स्थानीय पहचान के लिए चुनौती' दोनों पहलुओं को बताएं।
Question 19. वैश्वीकरण का भारत के सामाजिक क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Answer: वैश्वीकरण का भारत के सामाजिक क्षेत्र पर बुरा प्रभाव पड़ा है। सामाजिकता की जगह अब स्वार्थपरता ने ले ली है। युवाओं पर पश्चिमी प्रभाव पड़ा है, जिससे उन्होंने मान-मर्यादा और रीति-रिवाजों को त्याग दिया है और उनके नैतिक चरित्र में गिरावट आई है।
In simple words: वैश्वीकरण ने भारत के समाज पर बुरा असर डाला है। लोग ज्यादा स्वार्थी हो गए हैं और युवा पश्चिमी संस्कृति अपनाने से अपनी परंपराएं भूल रहे हैं, जिससे नैतिक मूल्य कम हुए हैं।
🎯 Exam Tip: भारत के सामाजिक क्षेत्र पर वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभावों में 'स्वार्थपरता में वृद्धि' और 'पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभाव' को शामिल करें।
Question 20. वैश्वीकरण की कोई दो उपलब्धियाँ लिखिए।
Answer: वैश्वीकरण की कोई दो उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
1. विकासशील देशों के लोगों की जीवन प्रत्याशा दोगुनी हो गई है और शिशु मृत्यु दर कम हुई है, जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का परिणाम है।
2. वयस्क मताधिकार (वोट डालने का अधिकार) का व्यापक विस्तार हुआ है, जिससे ज्यादा लोग राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल हो पाए हैं।
In simple words: वैश्वीकरण से लोगों की औसत उम्र बढ़ी है और बच्चों की मौतें कम हुई हैं। साथ ही, अब ज्यादा लोगों को वोट देने का अधिकार मिला है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की उपलब्धियों में 'मानव विकास संकेतकों में सुधार' और 'लोकतांत्रिक भागीदारी में वृद्धि' को मुख्य बिंदुओं के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 21. मिखाइल गोर्बाचोव के विषय में आप क्या जानते हैं?
Answer: मिखाइल गोर्बाचोव सोवियत संघ के आखिरी राष्ट्रपति थे। उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए पेरेस्त्रोइका (पुनर्गठन) और ग्लासनोस्त (खुलेपन) की नीतियां शुरू कीं, लेकिन इन नीतियों ने सोवियत संघ के विघटन (टूटने) का काम किया और सन् 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया।
In simple words: मिखाइल गोर्बाचोव सोवियत संघ के आखिरी नेता थे, जिन्होंने कुछ नई नीतियां शुरू कीं, लेकिन उन्हीं की वजह से 1991 में सोवियत संघ टूट गया।
🎯 Exam Tip: मिखाइल गोर्बाचोव की भूमिका, उनकी नीतियां (पेरेस्त्रोइका, ग्लासनोस्त) और सोवियत संघ के विघटन में उनके योगदान को संक्षेप में बताएं।
RBSE Class 12 Political Science Chapter 14 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व परिदृश्य क्या था? संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व वैचारिक आधार पर दो भागों में बंट गया। एक ओर पूंजीवाद, निजीकरण और उदारवाद का समर्थन करने वाले देश थे, जिनका नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा था। दूसरी ओर सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवादी और समाजवादी विचारधारा के देश थे। दोनों गुट संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य थे, लेकिन सोवियत संघ के नेतृत्व में साम्यवादी गुट के सदस्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और गैट के सदस्य नहीं थे। सोवियत संघ के नेतृत्व वाले साम्यवादी देशों में निरंकुश सत्ता और सरकारी स्वामित्व वाली अर्थव्यवस्था प्रचलित थी, वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले पूंजीवादी देशों में निजी स्वामित्व वाली बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था थी। साम्यवादी व्यवस्था में गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और शोषण को दूर करने की संभावनाएं तो थीं, लेकिन स्वतंत्रता, प्रेरणा और खुशहाली की संभावना बहुत कम थी। नौकरशाही तंत्र साम्यवादी व्यवस्थाओं पर पूरी तरह हावी था। वहीं पूंजीवाद अर्ध-विकसित और विकासशील देशों को स्वतंत्रता, प्रेरणा और विकास का सपना दिखाकर अपनी ओर आकर्षित कर रहा था, लेकिन यह गरीबी और शोषण को खत्म करने के प्रति उदासीन था।
In simple words: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दुनिया पूंजीवादी (अमेरिका के साथ) और साम्यवादी (सोवियत संघ के साथ) दो भागों में बंट गई। पूंजीवादी देशों में निजी व्यापार था, जबकि साम्यवादी देशों में सरकार सब नियंत्रित करती थी। दोनों व्यवस्थाओं के अपने फायदे और नुकसान थे।
🎯 Exam Tip: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के विश्व परिदृश्य को दो वैचारिक गुटों (पूंजीवादी और साम्यवादी) की विशेषताओं, उनकी अर्थव्यवस्थाओं और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में उनकी भूमिका के संदर्भ में समझाएं।
Question 2. सोवियत संघ का विघटन किन परिस्थितियों में हुआ?
Answer: पूंजीवादी गुट के अग्रणी देश संयुक्त राज्य अमेरिका को यह आभास था कि जहाँ-जहाँ गरीबी, असमानता और पूंजीवाद के तत्व मौजूद होंगे, वहाँ-वहाँ साम्यवाद तेजी से पनप सकता है। इसलिए अमेरिकी गुट ने प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के माध्यम से इन देशों में गरीबी और असमानता दूर करने के प्रयास किए। साम्यवादी गुट के पास न तो इतने साधन थे और न ही क्षमता कि वे गरीबी और असमानता दूर कर सकें। प्रशासनिक अव्यवस्था और हथियारों की होड़ के कारण साम्यवादी देशों में आर्थिक विषमता बढ़ रही थी। मिखाइल गोर्बाचोव की पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त की नीति ने इस काम को आगे बढ़ाया और सन् 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया।
In simple words: सोवियत संघ इसलिए टूटा क्योंकि वह गरीबी और असमानता को खत्म नहीं कर पाया, उसका प्रशासन खराब था और हथियारों की होड़ में बहुत पैसा खर्च हुआ। साथ ही, गोर्बाचोव की नई नीतियों ने भी इसे तोड़ने में मदद की।
🎯 Exam Tip: सोवियत संघ के विघटन की परिस्थितियों में आर्थिक अक्षमता, प्रशासनिक कमजोरी और मिखाइल गोर्बाचोव की नीतियों के योगदान को स्पष्ट करें।
Question 3. शीतयुद्ध क्या है? इसका अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: शीतयुद्ध का आशय उस स्थिति से है जब दो या दो से अधिक देशों के बीच तनावपूर्ण माहौल तो होता है, लेकिन कोई सीधा और बड़ा युद्ध नहीं होता। इसमें शामिल देशों को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर समझौता करना पड़ा और जो किसी गुट में शामिल नहीं हुए, उन पर अपने गुट में शामिल होने के लिए दोनों महाशक्तियों द्वारा दबाव डाला गया। शीतयुद्ध में हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिला और परमाणु युद्ध का डर भी पैदा हो गया। यह तनाव और टकराव की एक लंबी अवधि थी, जिसमें दोनों महाशक्तियां (अमेरिका और सोवियत संघ) एक-दूसरे को सीधे चुनौती देने के बजाय अप्रत्यक्ष रूप से लड़ती रहीं।
In simple words: शीतयुद्ध का मतलब है जब दो बड़े देश सीधे नहीं लड़ते, बस तनाव और डर का माहौल बनाए रखते हैं। इसका मतलब था कि छोटे देशों को किसी एक गुट का साथ देना पड़ता था, जिससे हथियारों की दौड़ बढ़ी और परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया।
🎯 Exam Tip: शीतयुद्ध की परिभाषा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर इसके प्रभावों को भी बताएं, जिसमें 'गुटों में बंटवारा', 'हथियारों की होड़' और 'परमाणु युद्ध का खतरा' शामिल हो।
Question 4. वैश्वीकरण की अवधारणा से आप क्या समझते हैं?
Answer: **वैश्वीकरण की अवधारणा** - जब कोई देश विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के साथ वस्तु, सेवा, पूंजी और बौद्धिक संपदा आदि का बिना किसी प्रतिबंध के आदान-प्रदान करता है, तो इसे वैश्वीकरण या भूमंडलीकरण कहते हैं। दूसरे शब्दों में, वर्तमान समय में संचार क्रांति ने पूरे विश्व की दूरियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी कारण पूरा विश्व एक वैश्विक गांव में बदल गया है। विश्व में संचार क्रांति की प्रभावशाली भूमिका के कारण एक नई विचारधारा का जन्म हुआ है। वैश्वीकरण की मुख्य बात है - प्रवाह। प्रवाह कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे - विचारों का प्रवाह, वस्तुओं का प्रवाह, पूंजी का प्रवाह और लोगों का आना-जाना आदि। इन सभी प्रवाहों की निरंतरता से विश्वव्यापी आपसी जुड़ाव पैदा हुआ है और यह जुड़ाव लगातार बना हुआ है। इन सबका मिला-जुला रूप वैश्वीकरण की अवधारणा है।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है जब चीजें, सेवाएं, पैसा और विचार बिना किसी रोक-टोक के एक देश से दूसरे देश में जाते हैं। संचार तकनीक ने इसे आसान बना दिया है, जिससे पूरी दुनिया एक वैश्विक गांव की तरह जुड़ गई है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की अवधारणा में 'वस्तु, सेवा, पूंजी, विचारों और लोगों के मुक्त प्रवाह' को शामिल करें और संचार क्रांति की भूमिका को भी बताएं।
Question 5. वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: **वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा** - वैश्वीकरण को एक बहुआयामी अवधारणा कहा जा सकता है, क्योंकि यह कई पहलुओं से संबंधित है, जैसे- राजनीतिक पक्ष, आर्थिक पक्ष, सांस्कृतिक पक्ष आदि। वैश्वीकरण से विचारों का प्रवाह, पूंजी का प्रवाह, वस्तुओं और सेवाओं का प्रवाह तथा लोगों का आना-जाना बढ़ता है, जिससे व्यापार में वृद्धि होती है और पूंजी निवेश बढ़ता है। वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान एक देश से दूसरे देश में बढ़ता है। इससे वैश्वीकरण के आर्थिक पक्ष की जानकारी मिलती है, लेकिन यह मानना गलत है कि वैश्वीकरण एकमात्र आर्थिक घटना है। वैश्वीकरण का राजनीतिक पक्ष भी है, क्योंकि वैश्वीकरण एकमात्र आर्थिक घटना नहीं है। वैश्वीकरण का राजनीतिक पक्ष भी है, क्योंकि वैश्वीकरण के कारण कल्याणकारी राज्य की धारणा अब पुरानी पड़ चुकी है और इसके स्थान पर न्यूनतम हस्तक्षेप राज्य की अवधारणा स्थापित हुई है। वैश्वीकरण के राजनीतिक तथा आर्थिक पक्ष के साथ-साथ एक सांस्कृतिक पक्ष भी है। वैश्वीकरण से हमारी पसंद-नापसंद तय होती है। हम जो कुछ खास खाते-पीते और पहनते हैं या सोचते हैं, इन सभी पर इसका प्रभाव दिखाई देता है।
In simple words: वैश्वीकरण सिर्फ पैसे या व्यापार की बात नहीं है। यह राजनीति, अर्थव्यवस्था और हमारी संस्कृति को भी बदलता है। हमारी सोच, खान-पान और पहनावे पर भी इसका असर दिखता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण को 'बहुआयामी अवधारणा' के रूप में समझाएं, जिसमें इसके राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभावों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
Question 7. वैश्वीकरण को एक विश्वव्यापी प्रवाह के रूप में समझाइए।
Answer: वैश्वीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो दुनिया के दूर-दराज के हिस्सों को एक साथ जोड़ती है। इससे एक हिस्से का दूसरे पर असर पड़ता है। राज्यों के बीच बढ़ती बातचीत और निर्भरता इसी का नतीजा है। वैश्वीकरण को एक विश्वव्यापी प्रवाह के रूप में समझा जाना चाहिए जो दुनिया भर के जुड़ाव से पैदा हुआ है। विश्वव्यापी प्रवाह के कुछ उदाहरण हैं:
1. दुनिया के एक हिस्से के विचार दूसरे हिस्सों में पहुँचते हैं।
2. पूंजी एक से ज़्यादा देशों में जाती है।
3. वस्तुएँ अलग-अलग देशों में पहुँचती हैं।
4. बेहतर कमाई की तलाश में लोग दुनिया के अलग-अलग देशों में जाते हैं। वैश्वीकरण एक बहुआयामी विचार है जिसने दुनिया को एक छोटे से गाँव में बदल दिया है।
इससे दुनिया के दूर-दराज के देश अब एक-दूसरे के करीब महसूस करते हैं। यातायात और संचार के साधन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने इस विश्वव्यापी प्रवाह में बहुत मदद की है।
In simple words: वैश्वीकरण का मतलब है कि दुनिया के लोग, विचार, पैसा और सामान एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं। इससे दूर के देश भी करीब आ गए हैं और एक जगह की घटना का असर दूसरी जगह भी होता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण को समझाते समय, विचारों, पूंजी, वस्तुओं और लोगों के प्रवाह को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें कि यह कैसे विश्वव्यापी जुड़ाव बनाता है।
Question 8. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों को संक्षेप में बताइए।
Answer: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों में शामिल हैं:
(i) विचारों के लिए राष्ट्र की सीमाओं की कोई बाधा नहीं रही है। इंटरनेट और कंप्यूटर जैसी सेवाओं का विस्तार इसका एक बड़ा उदाहरण है।
(iv) व्यक्तियों के आवागमन में बढ़ोतरी हुई है। लोग काम-धंधे के लिए दूसरे देशों में जा रहे हैं, हालांकि लोगों का आना-जाना वस्तुओं और पूंजी के प्रवाह जितना नहीं बढ़ा है।
(v) आर्थिक समृद्धि बढ़ी है। खुलेपन के कारण लोगों की संख्या और खुशहाली बढ़ी है।
(vi) आपसी जुड़ाव बढ़ा है। लोगों में आपसी निर्भरता अब तेज हो गई है। वैश्वीकरण के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सरकारें और व्यवसाय एक-दूसरे से ज़्यादा जुड़ गए हैं।
(2) वैश्वीकरण के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
1. जनता का बँटवारा – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया के लोग बहुत गहराई से बँट गए हैं।
2. सरकारों द्वारा सामाजिक न्याय की अनदेखी – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण सरकारें अपनी कुछ जिम्मेदारियों से पीछे हट रही हैं। सामाजिक न्याय के समर्थक चिंतित हैं। उनका मानना है कि आर्थिक वैश्वीकरण से केवल एक खास वर्ग को ही फायदा हुआ है, जबकि नौकरी और जन-कल्याण पर निर्भर गरीब लोग बदहाल हो रहे हैं।
3. गरीब देशों के लिए बुरा – दुनिया भर में हो रहे कई आंदोलनों ने वैश्वीकरण को रोकने की मांग की है, क्योंकि इससे गरीब देश आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुँच रहे हैं।
4. दुनिया के फिर से उपनिवेश बनने का डर – कुछ बड़े अर्थशास्त्री चिंतित हैं कि वर्तमान आर्थिक वैश्वीकरण धीरे-धीरे दुनिया को फिर से उपनिवेशवाद की ओर ले जा रहा है।
In simple words: वैश्वीकरण से विचार, लोग और पैसा आसानी से आने-जाने लगे हैं, जिससे आर्थिक तरक्की हुई है। लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव भी हैं, जैसे लोग बँट रहे हैं, सरकारें सामाजिक न्याय को नज़रअंदाज़ कर रही हैं और गरीब देशों को नुकसान हो रहा है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक प्रभावों को लिखते समय सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को संतुलित रूप से प्रस्तुत करें। उदाहरणों के साथ अपने बिंदुओं को समझाना न भूलें।
Question 9. “वैश्वीकरण का अलग-अलग देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण का अलग-अलग देशों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। कुछ देशों की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ रही है, जबकि कुछ देश आर्थिक रूप से पीछे रह गए हैं। वैश्वीकरण के दौर में सामाजिक न्याय की स्थापना अभी भी खतरे में है। सरकार की सुरक्षा हटने के कारण समाज के कमजोर वर्ग को फायदा होने की बजाय नुकसान हो रहा है।
कई विद्वान वैश्वीकरण के दौर में पिछड़े लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा देने की बात कर रहे हैं। कुछ लोग वैश्वीकरण को 'नव-उपनिवेशवाद' कहकर उसकी आलोचना करते हैं। वहीं वैश्वीकरण के समर्थकों का मानना है कि वैश्वीकरण ने विकास और समृद्धि को बढ़ाया है। आम जनता की खुशहाली बढ़ी है। प्रत्येक देश वैश्वीकरण से लाभ प्राप्त कर रहा है।
In simple words: वैश्वीकरण का असर हर देश पर एक जैसा नहीं हुआ है; कुछ देश तेजी से बढ़े हैं, जबकि कुछ पिछड़ गए हैं। इससे सामाजिक न्याय पर भी असर पड़ा है। कुछ लोग इसे फायदेमंद मानते हैं, तो कुछ 'नव-उपनिवेशवाद' कहकर इसकी आलोचना करते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में हमेशा दोनों पक्षों (सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों) को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें और विभिन्न देशों पर इसके अलग-अलग प्रभावों के उदाहरण दें।
Question 10. “वैश्वीकरण का आर्थिक प्रभाव नकारात्मक रहा है।” कथन को सिद्ध कीजिए। अथवा आर्थिक वैश्वीकरण के विरोध में कौन – कौन से तर्क दिये जा सकते हैं।
Answer: आर्थिक वैश्वीकरण के विरोध में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं:
(i) विश्व जनमत का विभाजन – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया में जनमत बहुत गहराई से बँट गया है।
(ii) सरकारों द्वारा सामाजिक न्याय की उपेक्षा – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण सरकारें अपनी कुछ जिम्मेदारियों से अपना हाथ खींच रही हैं। इस कारण सामाजिक न्याय के पक्षधर लोग चिंतित हैं। उनका कहना है कि आर्थिक वैश्वीकरण से ज़्यादातर लोग बदहाल हो जाएँगे।
(iii) गरीब देशों के लिए हानिकारक – दुनिया भर में हो रहे अनेक आंदोलनों ने वैश्वीकरण को रोकने की मांग की है, क्योंकि इससे गरीब देश आर्थिक रूप से बर्बादी के कगार पर पहुँच जाएँगे। विशेषकर इन देशों के गरीब लोग एकदम बदहाल हो जाएंगे।
In simple words: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों का विरोध करने वाले तर्क देते हैं कि इसने दुनिया को बाँट दिया है, सरकारें सामाजिक न्याय की अनदेखी कर रही हैं, गरीब देशों को नुकसान हो रहा है, और यह दुनिया को फिर से उपनिवेश बना सकता है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न आने पर, इसके नकारात्मक पहलुओं को स्पष्ट रूप से उदाहरणों और तर्कों के साथ समझाएँ, जैसे गरीब देशों पर असर या सामाजिक असमानता।
Question 12. सांस्कृतिक प्रवाह बढ़ाने में किन माध्यमों का योगदान रहा है? बताइए। इन्हें दो श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है सूचनात्मक सेवाएँ:
Answer: सांस्कृतिक प्रवाह बढ़ाने में कई माध्यमों का योगदान रहा है। इन्हें दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
I. सूचनात्मक सेवाएँ:
1. इंटरनेट और ईमेल से सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान हो गया है।
2. इलेक्ट्रॉनिक क्रांति ने सूचनाओं को आम लोगों तक पहुँचाया है।
3. विचारों और धारणाओं का आदान-प्रदान सरल हो गया है।
4. सूचना तकनीक के विस्तार से डिजिटल क्रांति आई है, लेकिन इसके साथ ही डिजिटल असमानता भी बढ़ी है।
5. अविकसित, अर्धविकसित और कुछ विकासशील देशों में सूचना सेवाओं पर सरकार का नियंत्रण है।
6. एक खास समूह द्वारा सूचना माध्यमों पर कब्ज़ा कर लेना अलोकतांत्रिक है।
II. समाचार सेवाएँ – सी.एन.एन. (संयुक्त राज्य अमेरिका), बी.बी.सी. (ब्रिटिश) और अल जजीरा (मध्य पूर्व) जैसे सैकड़ों अंतर्राष्ट्रीय चैनल दुनिया भर में प्रसारित हो रहे हैं, जिससे वैश्वीकरण और भी प्रभावशाली हो गया है।
In simple words: इंटरनेट, ईमेल, और इलेक्ट्रॉनिक क्रांति जैसी सूचना सेवाओं ने सांस्कृतिक विचारों को तेजी से फैलाने में मदद की है। साथ ही, सी.एन.एन. और बी.बी.सी. जैसे अंतर्राष्ट्रीय समाचार चैनलों ने भी सांस्कृतिक प्रवाह को बढ़ाया है।
🎯 Exam Tip: सांस्कृतिक प्रवाह के माध्यमों को लिखते समय, सूचना तकनीक और संचार चैनलों दोनों को शामिल करें और स्पष्ट करें कि उन्होंने कैसे विचारों और संस्कृति के आदान-प्रदान को बढ़ाया है।
Question 13. भारत में वैश्वीकरण का सूत्रपात कब और किस प्रकार हुआ?
Answer: भारत में वैश्वीकरण की शुरुआत जुलाई 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने की थी। अमेरिकी नीतियों की ओर झुकाव के कारण उन्हें कई बार आलोचना का सामना करना पड़ा। वास्तव में, उस समय के वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने ही वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण की नई आर्थिक नीतियों को शुरू किया था। नई आर्थिक नीति को अपनाने के बाद, 1992-93 में रुपये को पूरी तरह परिवर्तनीय बनाया गया। पूंजी बाजार और वित्तीय सुधारों के लिए भी कदम उठाए गए।
प्रतिबंधों को हटाकर आयात-निर्यात नीति में सुधार किया गया। 30 दिसंबर 1994 को भारत ने एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। जनवरी 1995 में विश्व व्यापार संगठन की स्थापना हुई और भारत इसका सदस्य बन गया। समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने उन सभी नियमों और औपचारिकताओं को खत्म करना शुरू कर दिया, जो आर्थिक विकास में बाधा डाल रहे थे।
In simple words: भारत में वैश्वीकरण जुलाई 1991 में शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरसिंह राव और वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने नई आर्थिक नीतियाँ अपनाईं। इसमें रुपये को परिवर्तनीय बनाना, व्यापार के प्रतिबंध हटाना और विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बनना शामिल था।
🎯 Exam Tip: भारत में वैश्वीकरण की शुरुआत के लिए सही वर्ष (1991) और प्रमुख व्यक्तियों (नरसिंह राव, मनमोहन सिंह) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। आर्थिक सुधारों के मुख्य बिंदुओं को संक्षिप्त में बताएँ।
Question 14. भारतीय संघवाद वस्तुतः अर्द्धसंघवाद है। स्पष्ट कीजिए।
Answer: स्वतंत्र भारत की संघीय व्यवस्था एक तरफ तो औपनिवेशिक विरासत से प्रभावित थी, वहीं दूसरी तरफ यह राष्ट्र निर्माण की जरूरतों और चुनौतियों का जवाब थी। संविधान निर्माताओं को उम्मीद थी कि उनके द्वारा बनाया गया ढाँचा देश की जटिल विविधताओं और राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपट सकेगा।
भारतीय संघ में बहुलवाद और विकेंद्रीकरण की प्रवृत्तियाँ भी मौजूद हैं। इन दोनों विरोधी प्रवृत्तियों का एक साथ होना भारत के संघवाद को अर्धसंघवाद बनाता है। वर्तमान में वैश्वीकरण के भारत पर विभिन्न प्रभाव पड़े हैं, जिससे कुछ चुनौतियाँ सामने आई हैं:
1. भारत वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभावों का लाभ लेने में विकसित राष्ट्रों के बराबर नहीं आ सका है।
2. वैश्वीकरण वैधता का संकट पैदा करता है, जिसमें आर्थिक संप्रभुता को तो सीमित किया जा सकता है, लेकिन आंतरिक संप्रभुता नहीं।
3. भारतीय संघवाद के सामने वैश्वीकरण की तीसरी चुनौती नागरिक समाज संगठनों में तेजी से बढ़ोतरी है, जिनके विकास का लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
In simple words: भारतीय संघवाद को अर्धसंघवाद कहा जाता है क्योंकि इसमें कई संस्कृतियाँ और शक्तियों का बँटवारा है। वैश्वीकरण के कारण भारत को आर्थिक बराबरी में पीछे रहना पड़ा है, और नागरिक समाज संगठनों के बढ़ने से नई चुनौतियाँ पैदा हुई हैं।
🎯 Exam Tip: अर्धसंघवाद की व्याख्या करते समय, भारत के संदर्भ में बहुलवाद और विकेंद्रीकरण की भूमिका को स्पष्ट करें। वैश्वीकरण से उत्पन्न चुनौतियों को भी जोड़ें।
Question 15. वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी का क्या योगदान है? बताइए।
Answer: वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी का बहुत बड़ा योगदान है। इसमें कोई शक नहीं कि टेलीग्राम, टेलीफोन, माइक्रोचिप, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसे नए आविष्कारों ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के बीच संचार क्रांति ला दी है। इस प्रौद्योगिकी का असर हमारे सोचने के तरीके और सामूहिक जीवन की गतिविधियों पर भी पड़ रहा है, ठीक वैसे ही जैसे पहले मुद्रण तकनीक का असर राष्ट्रवादी भावनाओं पर पड़ा था।
हम जानते हैं कि वैश्वीकरण का मुख्य तत्व विचारों, वस्तुओं, पूंजी और व्यक्तियों का विश्वव्यापी प्रवाह है। तकनीकी विकास ने इन चारों चीज़ों के प्रवाह की गति और पहुँच को बढ़ाने के साथ-साथ उसे और भी आसान बना दिया है। उदाहरण के लिए, दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच पूंजी और वस्तुओं का आवागमन अब बहुत तेज और व्यापक हो गया है।
In simple words: वैश्वीकरण को बढ़ाने में टेक्नोलॉजी का बहुत बड़ा हाथ है। इंटरनेट और कंप्यूटर जैसे आविष्कारों ने संचार को तेज और आसान बना दिया है, जिससे विचार, सामान, पैसा और लोग तेजी से एक जगह से दूसरी जगह जा पा रहे हैं।
🎯 Exam Tip: प्रौद्योगिकी के योगदान को बताते समय, संचार के साधनों (जैसे इंटरनेट) और उनके माध्यम से विचारों, वस्तुओं और पूंजी के प्रवाह में आई तेजी पर विशेष जोर दें।
Question 17. वैश्वीकरण की उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण की उपलब्धियाँ: आलोचनाओं के बावजूद वैश्वीकरण की सकारात्मक भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। वैश्वीकरण की निम्नलिखित उपलब्धियाँ रही हैं:
1. विकासशील देशों के लोगों की जीवन प्रत्याशा दोगुनी हो गई है और शिशु मृत्यु दर कम हुई है।
2. वयस्क मताधिकार का व्यापक विस्तार हुआ है।
3. लोगों के भोजन में पौष्टिकता बढ़ी है।
4. संचार सुविधाएँ उपलब्ध हुई हैं।
5. स्वच्छ जल उपलब्ध हुआ है।
6. प्रत्येक सेवा क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
7. जीवन अधिक खुशहाल बना है।
In simple words: वैश्वीकरण ने जीवन प्रत्याशा बढ़ाई है, शिशु मृत्यु दर घटाई है, पौष्टिक भोजन और स्वच्छ जल उपलब्ध कराया है, संचार और सेवा क्षेत्रों में सुधार किया है, और लोगों को अधिक खुशहाल बनाया है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण की उपलब्धियों को लिखते समय, मानव विकास संकेतकों जैसे जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर और बुनियादी सुविधाओं में सुधार पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 1. वैश्वीकरण के विभिन्न प्रभावों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़े हैं:
(1) वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव:
वैश्वीकरण के कारण राज्य की अवधारणा बदल गई है। राज्य अब सिर्फ कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुख्य काम करता है। लोक कल्याणकारी राज्य की जगह अब बाजार की आर्थिक और सामाजिक प्राथमिकताएँ तय होती हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि वैश्वीकरण से राज्य की शक्तियाँ कम नहीं हुई हैं। राज्य अभी भी कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अपने जरूरी काम कर रहा है और कुछ काम अपनी इच्छा से छोड़ रहा है। वैश्वीकरण से राज्यों को आधुनिक तकनीक मिली है, जिससे वे अपने नागरिकों के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं और बेहतर ढंग से काम कर सकते हैं।
(2) वैश्वीकरण का आर्थिक प्रभाव:
वैश्वीकरण का आर्थिक प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि आर्थिक आधार पर ही वैश्वीकरण की बात ज़्यादा हुई है। आर्थिक वैश्वीकरण में दुनिया के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक प्रवाह आसानी से होता है। कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और शक्तिशाली देश भी इसमें शामिल हैं।
वैश्वीकरण से वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, विचारों और लोगों का एक देश से दूसरे देश में आवागमन आसान हो गया है। ज़्यादातर देशों ने आयात पर प्रतिबंध हटाकर अपने बाज़ारों को खोल दिया है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विकासशील देशों में निवेश कर रही हैं।
वैश्वीकरण के समर्थकों का कहना है कि ज़्यादातर लोगों को इससे फायदा हुआ है, लेकिन आलोचक इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि विकसित देशों ने अपने वीज़ा नियमों को कड़ा कर दिया है, जिससे लोगों के वैश्विक आवागमन में कमी आई है। आर्थिक वैश्वीकरण का फायदा अमीर वर्ग को ज़्यादा मिला है और गरीब वर्ग आज भी इससे वंचित है।
(3) वैश्वीकरण का सांस्कृतिक प्रभाव:
वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों ने भी लोगों को प्रभावित किया है। वैश्वीकरण का असर हमारे खान-पान, पहनावे और सोचने के तरीके पर पड़ रहा है। इससे लगता है कि यह प्रक्रिया दुनिया की संस्कृतियों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
दुनिया की संस्कृति के नाम पर पश्चिमी संस्कृति बाकी दुनिया पर थोपी जा रही है, जिससे एक खास देश की संस्कृति के खत्म होने का डर है। लेकिन वैश्वीकरण के समर्थकों का मानना है कि संस्कृति के खत्म होने का डर गलत है, उनके अनुसार इससे एक मिश्रित संस्कृति का उदय होता है।
In simple words: वैश्वीकरण ने राज्यों की भूमिका बदली है (राजनीतिक प्रभाव), व्यापार और निवेश को आसान बनाया है लेकिन अमीर-गरीब का अंतर बढ़ाया है (आर्थिक प्रभाव), और लोगों के खान-पान व पहनावे पर असर डाला है, जिससे सांस्कृतिक विविधता पर खतरा बढ़ा है, हालांकि कुछ लोग इसे मिश्रित संस्कृति का उदय मानते हैं (सांस्कृतिक प्रभाव)।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के प्रभावों का वर्णन करते समय राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अलग-अलग शीर्षक देकर समझाएँ। प्रत्येक प्रभाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों बिंदुओं को शामिल करें।
Question. “वैश्वीकरण ने विश्व की राज व्यवथाओं को प्रभावित किया है।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव:
(1) वैश्वीकरण द्वारा कुछ क्षेत्रों में राज्य की शक्ति को कमजोर करना - वैश्वीकरण ने कुछ क्षेत्रों में राज्य की शक्ति को कम किया है। वैश्वीकरण के कारण राज्य की सरकारों की कुछ काम करने की शक्ति में कमी आती है।
1. वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया में लोक कल्याणकारी राज्य की पुरानी सोच खत्म हो गई है। इसकी जगह राज्य की एक नई सोच का विकास हुआ है जिसे 'न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य' कहा जाता है। इसे अपनाने के कारण राज्य अब कुछ ही काम करता है, जैसे- कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपने नागरिकों की सुरक्षा करना।
2. राज्य पहले कई लोक कल्याणकारी काम करता था। अब बाजार आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को तय करने वाला बन गया है।
3. कुछ राष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव में कृषि वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया, खासकर विकासशील देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने पैर फैला लिए हैं। उनकी भूमिका बढ़ी है। इससे सरकारों की अपने दम पर फैसले लेने की क्षमता में कमी आई है।
(2) कुछ क्षेत्रों में राज्य की शक्ति पर वैश्वीकरण का कोई प्रभाव नहीं- यह बात ध्यान रखने लायक है कि वैश्वीकरण से राज्य की शक्ति हमेशा कम नहीं होती है। राजनीतिक समुदाय के तौर पर राज्य की प्रधानता को वैश्वीकरण से कोई चुनौती नहीं मिली है और आज भी राज्य महत्वपूर्ण हैं।
विश्व राजनीति में आज भी विभिन्न देशों के बीच पुरानी ईर्ष्या और प्रतिद्वंद्विता है। आज भी राज्य कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे जरूरी काम कर रहे हैं। राज्य बहुत सोच-समझकर अपने कदम उन कामों से खींच रहे हैं, जहाँ उनकी मर्जी हो। राज्य आज भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
(3) वैश्वीकरण द्वारा कुछ क्षेत्रों में राज्य की शक्ति में वृद्धि- कुछ क्षेत्रों में वैश्वीकरण के कारण राज्य की शक्ति में बढ़ोतरी भी हुई है। आज की दुनिया में वैश्वीकरण के कारण राज्यों के पास आधुनिक तकनीक है, जिससे वे अपने नागरिकों के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं। इन जानकारियों से राज्य ज़्यादा बेहतर ढंग से काम कर सकते हैं। इस क्षेत्र में राज्यों की क्षमता बढ़ी है। इस तरह तकनीक के कारण राज्य अब पहले से ज़्यादा शक्तिशाली हो गए हैं।
In simple words: वैश्वीकरण ने राज्यों की शक्ति को कुछ क्षेत्रों में कम किया है, जिससे लोक कल्याणकारी राज्य की जगह 'न्यूनतम हस्तक्षेपकारी राज्य' की अवधारणा आई। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में राज्य की शक्ति बढ़ी भी है क्योंकि नई तकनीकों से वे बेहतर शासन कर पा रहे हैं।
🎯 Exam Tip: इस कथन को स्पष्ट करते हुए, राज्य की संप्रभुता पर वैश्वीकरण के पड़ने वाले मिश्रित प्रभावों (कमजोर करना, कोई प्रभाव नहीं और मजबूत करना) को उदाहरणों के साथ समझाएँ।
Question 3. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव क्या रहे? इस सन्दर्भ में वैश्वीकरण ने भारत पर कैसे प्रभाव डाला है? बताइए।
Answer: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है:
(1) वैश्वीकरण के सकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
(iii) विचारों के लिए राष्ट्र की सीमाओं की कोई बाधा नहीं रही है। वैश्वीकरण के कारण अब विचारों का प्रभाव बिना किसी रोक-टोक के बढ़ गया है। इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाओं का विस्तार इसका एक उदाहरण है।
(iv) व्यक्तियों के आवागमन में वृद्धि - वैश्वीकरण के कारण एक देश से दूसरे देश में लोगों का आना-जाना बढ़ गया है। एक देश के लोग दूसरे देश में काम-धंधे कर रहे हैं, हालांकि लोगों का आवागमन वस्तुओं और पूंजी के प्रवाह जितना तेज नहीं बढ़ा है।
(v) आर्थिक समृद्धि का बढ़ना – वैश्वीकरण के कारण लोगों की आर्थिक समृद्धि बढ़ी है और खुलेपन के कारण ज़्यादा लोगों की खुशहाली बढ़ी है।
(vi) पारस्परिक जुड़ाव का बढ़ना – आर्थिक वैश्वीकरण से लोगों में आपसी जुड़ाव बढ़ रहा है। आपसी निर्भरता की गति अब तेज हो गई है। वैश्वीकरण के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सरकारें और व्यवसाय एक-दूसरे से ज़्यादा जुड़ गए हैं।
(2) वैश्वीकरण के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
1. जनता का विभाजन – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया के लोग बहुत गहराई से बँट गए हैं।
2. सरकारों द्वारा सामाजिक न्याय की उपेक्षा – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण सरकारें अपनी कुछ जिम्मेदारियों से हाथ खींच रही हैं। इस कारण सामाजिक न्याय के समर्थक चिंतित हैं। उनका मत है कि आर्थिक वैश्वीकरण से एक ही वर्ग को खास फायदा हुआ है, जबकि नौकरी और जन-कल्याण के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो रहे हैं।
3. गरीब देशों के लिए अहितकर – दुनिया भर में हो रहे अनेक आंदोलनों ने वैश्वीकरण को रोकने की ज़ोरदार मांग की है, क्योंकि इसने गरीब देशों को आर्थिक रूप से बर्बादी की कगार पर पहुँचा दिया है।
4. विश्व के फिर से उपनिवेशीकरण का डर – विश्व के कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने चिंता जताई है कि वर्तमान आर्थिक वैश्वीकरण धीरे-धीरे दुनिया को फिर से उपनिवेशीकरण की ओर ले जा रहा है।
In simple words: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों में विचारों, लोगों, पैसे और वस्तुओं की आवाजाही बढ़ी है, जिससे आर्थिक तरक्की हुई है। लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव भी हैं, जैसे लोग बँट रहे हैं, सरकारें सामाजिक न्याय को अनदेखा कर रही हैं, और गरीब देश बर्बाद हो रहे हैं, जिससे नए उपनिवेशवाद का डर है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक प्रभावों को बताते समय, विचारों, लोगों, पूंजी, वस्तुओं के प्रवाह को उदाहरणों से समझाएँ। भारत पर प्रभाव बताते हुए उदारीकरण और निजीकरण की नीतियों का जिक्र करें।
Question 4. वैश्वीकरण के सामाजिक व सांस्कृतिक प्रभावों की विवेचना कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण ने पूरी दुनिया को एक वैश्विक गाँव में बदल दिया है। दुनिया के एक हिस्से में होने वाली घटना का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। वैश्वीकरण का प्रभाव सभी देशों की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थितियों पर दिखता है। यहाँ हम सामाजिक व सांस्कृतिक क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
वैश्वीकरण के सामाजिक प्रभाव-साम्यवादी विचारधारा के पतन के बाद दुनिया में अमेरिका के नेतृत्व में एक ध्रुवीय व्यवस्था आई। धीरे-धीरे दूसरे देशों का झुकाव पूंजीवाद और बाजारोन्मुखी प्रवृत्ति की ओर बढ़ने लगा। इसी के साथ सामाजिक जीवन में भी पश्चिमी मूल्यों का प्रवेश होने लगा। जहाँ तक भारत का सवाल है, वैश्वीकरण के कारण सामाजिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ा है।
हमारे युवाओं ने पश्चिमी प्रभाव में आकर मान-मर्यादा, रीति-रिवाजों को छोड़ दिया है। सामाजिकता की जगह स्वार्थपरता ने ले ली है और मूल्यों में कमी आई है। वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव – वैश्वीकरण का लोगों के सांस्कृतिक जीवन पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। इससे भारतीय संस्कृतियों को खतरा पहुँचने की आशंका है।
वैश्वीकरण सांस्कृतिक समरूपता को जन्म देता है, जिससे विशिष्ट स्थानीय संस्कृतियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सांस्कृतिक समरूपता के नाम पर पश्चिमी सांस्कृतिक मूल्यों को अन्य स्थानीय संस्कृतियों पर थोपा जा रहा है। वैश्वीकरण का सकारात्मक पक्ष यह भी है कि प्रौद्योगिकी के विकास और प्रवाह से एक नई विश्व संस्कृति के उदय की मजबूत संभावनाएँ बन गई हैं।
इंटरनेट, सोशल मीडिया, फैक्स, उपग्रह और केबल टी.वी. ने विभिन्न राष्ट्रों के बीच मौजूद सांस्कृतिक बाधाओं को हटाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सी.एन.एन., बी.बी.सी. और अल जजीरा जैसे अंतर्राष्ट्रीय चैनलों ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। वैश्वीकरण के कारण आज किसी भी देश का गीत-संगीत दुनिया के हर कोने में सुना जा सकता है।
लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि इसने राष्ट्रीय संगीत को खराब कर दिया है। पश्चिमी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का वर्चस्व बढ़ा है। पॉप कल्चर ने शास्त्रीय संगीत परंपरा पर भी बुरा असर डाला है। पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण ने पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को खत्म किया है।
In simple words: वैश्वीकरण ने सामाजिक रूप से पश्चिमी मूल्यों को बढ़ावा दिया है, जिससे भारत में रीति-रिवाजों और नैतिक चरित्र पर बुरा असर पड़ा है। सांस्कृतिक रूप से, यह पश्चिमी संस्कृति को थोप रहा है, जिससे स्थानीय संस्कृतियों को खतरा है, हालांकि इसने संचार को बढ़ाया है और संगीत को विश्वव्यापी बनाया है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों को लिखते समय, पारंपरिक मूल्यों पर पश्चिमी प्रभाव, सांस्कृतिक समरूपता और संचार माध्यमों की भूमिका को स्पष्ट करें।
Question 5. वैश्वीकरण के परिणामों का वर्णन कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण के प्रमुख परिणाम हैं:
1. वैश्वीकरण ने यूरोप और अन्य राज्यों में शरणार्थी समस्या को जन्म दिया है। 2016 तक, 7.4 अरब आबादी में से लगभग 60 करोड़ लोग शरणार्थी हैं, यानी हर 122वाँ व्यक्ति शरणार्थी है।
2. कुछ आलोचकों का मानना है कि वैश्वीकरण केवल कॉर्पोरेट सेक्टर और उद्योगपतियों के हितों को बढ़ावा देता है और इसका गरीब वर्ग के हितों से कोई सरोकार नहीं है।
3. आलोचकों का मत है कि वैश्वीकरण की मुक्त बाजारोन्मुखी अर्थव्यवस्था से जो उम्मीदें थीं, वे पूरी नहीं हो सकी हैं।
4. वैश्वीकरण बड़े देशों के साम्राज्यवाद का एक नया रूप है।
5. वैश्वीकरण कर्ज पर आधारित अर्थव्यवस्था को थोपने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके कारण कर्ज में तेजी से वृद्धि और कर्ज संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
6. वैश्वीकरण एक राष्ट्र की स्वायत्तता, संप्रभुता और आत्म-निर्भरता को प्रभावित कर सकता है।
7. यह प्रक्रिया विकासशील देशों के लिए कभी भी घातक सिद्ध हो सकती है। यह नए उपनिवेशवाद को बढ़ावा देती है।
वैश्वीकरण की उपलब्धियाँ: आलोचनाओं के बावजूद वैश्वीकरण की सकारात्मक भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। वैश्वीकरण की निम्नलिखित उपलब्धियाँ रही हैं-
1. विकासशील देशों के लोगों की जीवन प्रत्याशा दोगुनी हो गई है और शिशु मृत्यु-दर कम हुई है।
2. वयस्क मताधिकार का व्यापक विस्तार हुआ है।
3. लोगों के भोजन में पौष्टिकता बढ़ी है।
4. संचार सुविधाएँ उपलब्ध हुई हैं।
5. स्वच्छ जल उपलब्ध हुआ है।
6. प्रत्येक सेवा क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
7. जीवन अधिक खुशहाल बना है।
वैश्वीकरण का सर्वाधिक लाभ विकसित देशों को मिला है। विकासशील देशों पर सकारात्मक प्रभाव हुए हैं, लेकिन अर्धविकसित और विकसित देशों को अपेक्षाकृत कम लाभ हुए हैं।
In simple words: वैश्वीकरण के नकारात्मक परिणामों में शरणार्थी समस्या, अमीर-गरीब का अंतर बढ़ना, कर्ज संकट और नए उपनिवेशवाद का डर शामिल हैं। वहीं, इसकी उपलब्धियों में जीवन प्रत्याशा में सुधार, बाल मृत्यु दर में कमी, बेहतर भोजन और संचार सुविधाएँ, और खुशहाल जीवन शामिल हैं, जिसका लाभ विकसित देशों को ज़्यादा मिला है।
🎯 Exam Tip: वैश्वीकरण के परिणामों का वर्णन करते समय, इसके नकारात्मक (आलोचनाएँ) और सकारात्मक (उपलब्धियाँ) दोनों पहलुओं को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें। विकासशील और विकसित देशों पर प्रभावों को अलग से उजागर करें।
Question 6. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:
(1) वैश्वीकरण के सकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
(iii) विचारों के लिए राष्ट्र की सीमाओं की कोई बाधा नहीं – वैश्वीकरण के कारण अब विचारों के लिए राष्ट्र की सीमाओं की बाधा नहीं रही है, उनका प्रभाव बिना रुकावट के बढ़ गया है। इंटरनेट और कंप्यूटर से जुड़ी सेवाओं का विस्तार इसका एक उदाहरण है।
(iv) व्यक्तियों के आवागमन में वृद्धि - वैश्वीकरण के कारण एक देश से दूसरे देश में लोगों का आना-जाना बढ़ा है। एक देश के लोग दूसरे देश में काम-धंधे कर रहे हैं, हालांकि लोगों का आवागमन वस्तुओं और पूंजी के प्रवाह जितना तेज नहीं बढ़ा है।
(v) आर्थिक समृद्धि का बढ़ना – वैश्वीकरण के कारण लोगों की आर्थिक समृद्धि बढ़ी है और खुलेपन के कारण ज़्यादा लोगों की खुशहाली बढ़ी है।
(vi) पारस्परिक जुड़ाव का बढ़ना – आर्थिक वैश्वीकरण से लोगों में आपसी जुड़ाव बढ़ रहा है। आपसी निर्भरता की गति अब तेज हो गई है। वैश्वीकरण के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सरकारें और व्यवसाय एक-दूसरे से ज़्यादा जुड़ गए हैं।
(2) वैश्वीकरण के नकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
1. जनता का विभाजन – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण पूरी दुनिया के लोग बहुत गहराई से बँट गए हैं।
2. सरकारों द्वारा सामाजिक न्याय की उपेक्षा – आर्थिक वैश्वीकरण के कारण सरकारें अपनी कुछ जिम्मेदारियों से हाथ खींच रही हैं। इस कारण सामाजिक न्याय के पक्षधर लोग चिंतित हैं। उनका मत है कि आर्थिक वैश्वीकरण से एक ही वर्ग को खास फायदा हुआ है, जबकि नौकरी और जन-कल्याण के लिए सरकार पर आश्रित रहने वाले लोग बदहाल हो रहे हैं।
3. गरीब देशों के लिए अहितकर – दुनिया भर में हो रहे अनेक आंदोलनों ने वैश्वीकरण को रोकने की ज़ोरदार मांग की है, क्योंकि इसने गरीब देशों को आर्थिक रूप से बर्बादी की कगार पर पहुँचा दिया है।
4. विश्व के फिर से उपनिवेशीकरण का भय – विश्व के कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने चिंता जताई है कि वर्तमान आर्थिक वैश्वीकरण धीरे-धीरे दुनिया को फिर से उपनिवेशीकरण की ओर ले जा रहा है।
In simple words: वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभावों में विचारों, लोगों, पैसे और वस्तुओं की आवाजाही बढ़ी है, जिससे आर्थिक तरक्की हुई है। लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव भी हैं, जैसे लोग बँट रहे हैं, सरकारें सामाजिक न्याय को अनदेखा कर रही हैं, और गरीब देश बर्बाद हो रहे हैं, जिससे नए उपनिवेशवाद का डर है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक प्रभावों को बताते समय, विचारों, लोगों, पूंजी, वस्तुओं के प्रवाह को उदाहरणों से समझाएँ। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को विस्तृत रूप से दर्शाएँ।
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