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Detailed Chapter 8 अवकलजों के अनुप्रयोग RBSE Solutions for Class 12 Mathematics
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Class 12 Mathematics Chapter 8 अवकलजों के अनुप्रयोग RBSE Solutions PDF
प्रश्न 1. यदि बेलन की त्रिज्या \( r \) तथा ऊँचाई \( h \) हैं तब त्रिज्या के सापेक्ष पृष्ठीय क्षेत्रफल में परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए।
Answer: मान लीजिए बेलन की त्रिज्या \( r \) है और उसकी ऊँचाई \( h \) है। बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल \( S = 2\pi r^2 + 2\pi rh \) होता है। इस क्षेत्रफल में त्रिज्या के संबंध में बदलाव की दर ज्ञात करने के लिए, हम \( S \) का \( r \) के सापेक्ष अवकलन करेंगे। यह प्रक्रिया बताती है कि त्रिज्या में छोटे से बदलाव का क्षेत्रफल पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
\( S = 2\pi r^2 + 2\pi rh \)
अब, \( r \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( \frac { dS }{ dr } = \frac { d }{ dr } (2\pi r^2 + 2\pi rh) \)
\( \implies \frac { dS }{ dr } = 2\pi \frac { d }{ dr } (r^2) + 2\pi h \frac { d }{ dr } (r) \)
\( \implies \frac { dS }{ dr } = 2\pi (2r) + 2\pi h (1) \)
\( \implies \frac { dS }{ dr } = 4\pi r + 2\pi h \)
In simple words: यदि आपको एक बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल दिया गया है, तो उसकी त्रिज्या बदलने पर क्षेत्रफल कितनी तेज़ी से बदलेगा, यह जानने के लिए हम उसके क्षेत्रफल सूत्र का त्रिज्या के सापेक्ष अवकलन करते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, सबसे पहले सही सूत्र लिखें (जैसे यहाँ बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल), फिर दिए गए चर के सापेक्ष अवकलन करें। सूत्र में सभी स्थिरांकों को ध्यान में रखें।
प्रश्न 3. सिद्ध कीजिए कि चरघातांकी फलन \( e^x \) वर्धमान फलन है।
Answer: किसी फलन को वर्धमान (बढ़ता हुआ) सिद्ध करने के लिए, हमें यह दिखाना होता है कि उसका पहला अवकलन (डेरिवेटिव) हमेशा धनात्मक है। जब भी \( e^x \) का अवकलन किया जाता है, तो हमें वापस \( e^x \) ही मिलता है, और यह मान हमेशा शून्य से बड़ा होता है।
मान लीजिए \( y = e^x \) है।
\( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( \frac { dy }{ dx } = e^x \)
हम जानते हैं कि चरघातांकी फलन \( e^x \) का मान \( x \) के किसी भी वास्तविक मान के लिए हमेशा धनात्मक होता है। (जैसे \( e^1 \approx 2.718 \), \( e^0 = 1 \), \( e^{-1} \approx 0.368 \), सभी धनात्मक हैं।)
अतः, \( x \in R \) के लिए, \( \frac { dy }{ dx } > 0 \) है।
इसका मतलब है कि \( x \) के किसी भी वास्तविक मान के लिए, फलन \( e^x \) एक वर्धमान फलन है। यह सिद्ध हो गया।
In simple words: \( e^x \) एक ऐसा फलन है जिसका अवकलन करने पर वही फलन मिलता है। क्योंकि \( e^x \) का मान हमेशा धनात्मक होता है, इसलिए यह फलन हमेशा बढ़ता रहता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी फलन को वर्धमान या हासमान सिद्ध करने के लिए, उसका प्रथम अवकलन ज्ञात करें। यदि अवकलन का मान धनात्मक हो तो वर्धमान, और ऋणात्मक हो तो हासमान होता है।
प्रश्न 4. सिद्ध कीजिए कि फलन \( f(x) = \log (\sin x) \) अन्तराल \( \left(0,\frac {\pi }{2} \right) \) में वर्धमान तथा अन्तराल \( \left(\frac {\pi }{2},\pi \right) \) में हासमान है।
Answer: हमें दिया गया फलन \( f(x) = \log (\sin x) \) है। फलन की वृद्धि या कमी जानने के लिए, हम उसका प्रथम अवकलन ज्ञात करेंगे। यह अवकलन हमें बताता है कि फलन किस दिशा में बदल रहा है।
दिया गया फलन: \( f(x) = \log (\sin x) \)
\( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( f'(x) = \frac { d }{ dx } (\log (\sin x)) \)
\( \implies f'(x) = \frac { 1 }{ \sin x } \times \cos x \)
\( \implies f'(x) = \cot x \)
अब, हम विभिन्न अंतरालों में \( \cot x \) के चिह्न की जाँच करेंगे:
(i) अन्तराल \( \left(0,\frac {\pi }{2} \right) \) में:
इस अन्तराल में (प्रथम चतुर्थांश), \( \sin x \) और \( \cos x \) दोनों धनात्मक होते हैं, इसलिए \( \cot x \) भी धनात्मक होता है।
अतः, \( f'(x) > 0 \) है।
इसलिए, फलन \( f(x) = \log (\sin x) \) इस अन्तराल में वर्धमान (बढ़ता हुआ) है।
(ii) अन्तराल \( \left(\frac {\pi }{2},\pi \right) \) में:
इस अन्तराल में (द्वितीय चतुर्थांश), \( \sin x \) धनात्मक होता है, लेकिन \( \cos x \) ऋणात्मक होता है।
अतः, \( \cot x = \frac{\cos x}{\sin x} \) ऋणात्मक होता है।
इसलिए, \( f'(x) < 0 \) है।
अतः, फलन \( f(x) = \log (\sin x) \) इस अन्तराल में हासमान (घटता हुआ) है। यह सिद्ध हो गया।
In simple words: किसी फलन का अवकलन निकालकर हम देख सकते हैं कि वह किस अंतराल में बढ़ता है और किसमें घटता है। \( \log (\sin x) \) फलन पहले चतुर्थांश में बढ़ता है क्योंकि उसका अवकलन (cot x) धनात्मक होता है, और दूसरे चतुर्थांश में घटता है क्योंकि वहाँ अवकलन ऋणात्मक होता है।
🎯 Exam Tip: त्रिकोणमितीय फलन वाले वृद्धि-ह्रास प्रश्न में, अवकलन के बाद त्रिकोणमितीय अनुपात के चतुर्थांश में चिह्न को ध्यान से देखें। यह याद रखें कि \( \cot x \) प्रथम चतुर्थांश में धनात्मक और द्वितीय चतुर्थांश में ऋणात्मक होता है।
प्रश्न 5. यदि वक्र \( \sqrt{x} - \sqrt{y} = \sqrt{a} \) के किसी बिन्दु पर स्पर्श रेखा OX तथा OY को क्रमशः बिन्दुओं P तथा Q पर काटे तो सिद्ध कीजिए \( OP + OQ = a \), जहाँ O मूल बिन्दु है।
Answer: हमें दिया गया वक्र का समीकरण \( \sqrt{x} - \sqrt{y} = \sqrt{a} \) है। हम इस वक्र पर किसी बिंदु \( (h,k) \) पर स्पर्श रेखा का समीकरण ज्ञात करेंगे और फिर दिखाएंगे कि उसके x और y अंतःखंडों का योग \( a \) के बराबर है।
दिया है, वक्र का समीकरण: \( \sqrt{x} - \sqrt{y} = \sqrt{a} \) ...(i)
मान लीजिए कि वक्र के बिंदु \( (h,k) \) पर स्पर्श रेखा OX और OY अक्षों को क्रमशः P और Q बिंदुओं पर काटती है।
चूंकि बिंदु \( (h,k) \) वक्र पर स्थित है, इसलिए यह समीकरण को संतुष्ट करेगा:
\( \sqrt{h} - \sqrt{k} = \sqrt{a} \) ...(ii)
समीकरण (i) का \( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( \frac { d }{ dx } (\sqrt{x} - \sqrt{y}) = \frac { d }{ dx } (\sqrt{a}) \)
\( \implies \frac { 1 }{ 2\sqrt{x} } - \frac { 1 }{ 2\sqrt{y} } \frac { dy }{ dx } = 0 \)
\( \implies \frac { 1 }{ 2\sqrt{x} } = \frac { 1 }{ 2\sqrt{y} } \frac { dy }{ dx } \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } = \frac { \sqrt{y} }{ \sqrt{x} } \)
वक्र के बिंदु \( (h,k) \) पर स्पर्श रेखा की प्रवणता \( m = \left[ \frac { dy }{ dx } \right]_{(h,k)} = \frac { \sqrt{k} }{ \sqrt{h} } \) है।
अतः, बिंदु \( (h,k) \) पर स्पर्श रेखा का समीकरण \( y - y_1 = m(x - x_1) \) सूत्र से:
\( y - k = \frac { \sqrt{k} }{ \sqrt{h} } (x - h) \)
\( \implies y\sqrt{h} - k\sqrt{h} = x\sqrt{k} - h\sqrt{k} \)
पदों को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
\( x\sqrt{k} - y\sqrt{h} = h\sqrt{k} - k\sqrt{h} \)
दोनों पक्षों को \( \sqrt{h}\sqrt{k} \) से भाग देने पर (स्पर्श रेखा के अंतःखंड रूप में बदलने के लिए):
\( \frac { x\sqrt{k} }{ \sqrt{h}\sqrt{k} } - \frac { y\sqrt{h} }{ \sqrt{h}\sqrt{k} } = \frac { h\sqrt{k} }{ \sqrt{h}\sqrt{k} } - \frac { k\sqrt{h} }{ \sqrt{h}\sqrt{k} } \)
\( \implies \frac { x }{ \sqrt{h} } - \frac { y }{ \sqrt{k} } = \sqrt{h} - \sqrt{k} \)
समीकरण (ii) से, हम जानते हैं कि \( \sqrt{h} - \sqrt{k} = \sqrt{a} \)।
इसलिए, स्पर्श रेखा का समीकरण है:
\( \frac { x }{ \sqrt{h} } - \frac { y }{ \sqrt{k} } = \sqrt{a} \)
इस समीकरण को अंतःखंड रूप \( \frac{x}{A} + \frac{y}{B} = 1 \) में बदलने के लिए, दोनों पक्षों को \( \sqrt{a} \) से भाग दें:
\( \frac { x }{ \sqrt{a}\sqrt{h} } - \frac { y }{ \sqrt{a}\sqrt{k} } = 1 \)
इसकी तुलना \( \frac{x}{A} + \frac{y}{B} = 1 \) से करने पर:
X-अंतःखंड \( A = OP = \sqrt{ah} \)
Y-अंतःखंड \( B = OQ = -\sqrt{ak} \)
अब, \( OP + OQ \) ज्ञात करें:
\( OP + OQ = \sqrt{ah} - \sqrt{ak} \)
\( \implies OP + OQ = \sqrt{a}(\sqrt{h} - \sqrt{k}) \)
समीकरण (ii) से \( \sqrt{h} - \sqrt{k} = \sqrt{a} \) का मान रखने पर:
\( OP + OQ = \sqrt{a}(\sqrt{a}) \)
\( \implies OP + OQ = a \)
इति सिद्धम्।
In simple words: हमने पहले वक्र पर एक बिंदु पर स्पर्श रेखा का ढलान ज्ञात किया। फिर, उस ढलान का उपयोग करके स्पर्श रेखा का समीकरण निकाला। इस समीकरण के x- और y-अक्ष के अंतःखंडों को जोड़कर हमने दिखाया कि उनका योग दिए गए स्थिरांक \( a \) के बराबर है।
🎯 Exam Tip: अंतःखंडों से संबंधित प्रश्नों में, स्पर्श रेखा का समीकरण \( \frac{x}{A} + \frac{y}{B} = 1 \) रूप में प्राप्त करें, जहाँ A और B क्रमशः x- और y-अंतःखंड हैं। ध्यान रखें कि अंतःखंडों का योग पूछा गया है, न कि दूरियों का, इसलिए चिह्न महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 6. वक्र \( y = \cos (x + y), x \in [- 2\pi, 2\pi] \) की स्पर्श रेखाओं के समीकरण कीजिए जो रेखा \( x + 2y = 0 \) के समान्तर है।
Answer: हमें वक्र \( y = \cos (x + y) \) दिया गया है और हमें उन स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात करने हैं जो रेखा \( x + 2y = 0 \) के समानांतर हैं। सबसे पहले, हम वक्र की प्रवणता (ढलान) ज्ञात करेंगे और उसे दी गई रेखा की प्रवणता के बराबर रखेंगे।
दिया गया वक्र: \( y = \cos (x + y) \)
\( x \) के सापेक्ष अवकलन करने पर (निहित अवकलन द्वारा):
\( \frac { dy }{ dx } = -\sin(x + y) \left( \frac { d }{ dx } (x + y) \right) \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } = -\sin(x + y) \left( 1 + \frac { dy }{ dx } \right) \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } = -\sin(x + y) - \sin(x + y) \frac { dy }{ dx } \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } + \sin(x + y) \frac { dy }{ dx } = -\sin(x + y) \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } (1 + \sin(x + y)) = -\sin(x + y) \)
\( \implies \frac { dy }{ dx } = \frac { -\sin(x + y) }{ 1 + \sin(x + y) } \)
दी गई रेखा \( x + 2y = 0 \) की प्रवणता \( m_l = -\frac { 1 }{ 2 } \) है।
चूंकि स्पर्श रेखा दी गई रेखा के समानांतर है, इसलिए उनकी प्रवणताएँ समान होंगी:
\( \frac { -\sin(x + y) }{ 1 + \sin(x + y) } = -\frac { 1 }{ 2 } \)
\( \implies 2\sin(x + y) = 1 + \sin(x + y) \)
\( \implies \sin(x + y) = 1 \)
जब \( \sin(x + y) = 1 \) होता है, तो \( x + y \) का मान \( 2n\pi + \frac{\pi}{2} \) (या \( n\pi + (-1)^n \frac{\pi}{2} \)) होता है, जहाँ \( n \) एक पूर्णांक है।
वक्र के समीकरण \( y = \cos (x + y) \) में \( \sin(x + y) = 1 \) रखने पर:
\( y = \cos(x+y) = \pm \sqrt{1 - \sin^2(x+y)} = \pm \sqrt{1 - 1^2} = 0 \)
तो, \( y = 0 \) है।
अब, \( x+y = 2n\pi + \frac{\pi}{2} \) और \( y=0 \) रखने पर:
\( x = 2n\pi + \frac{\pi}{2} \)
हमें \( x \in [-2\pi, 2\pi] \) की आवश्यकता है।
यदि \( n = 0 \), तो \( x = \frac{\pi}{2} \)। बिंदु है \( \left(\frac{\pi}{2}, 0\right) \)।
यदि \( n = -1 \), तो \( x = -2\pi + \frac{\pi}{2} = -\frac{3\pi}{2} \)। बिंदु है \( \left(-\frac{3\pi}{2}, 0\right) \)।
अब, इन बिंदुओं पर स्पर्श रेखाओं के समीकरण ज्ञात करें (प्रवणता \( m = -\frac{1}{2} \)):
(i) बिंदु \( \left(-\frac{3\pi}{2}, 0\right) \) पर:
\( y - 0 = -\frac{1}{2} \left( x - \left(-\frac{3\pi}{2}\right) \right) \)
\( \implies y = -\frac{1}{2} \left( x + \frac{3\pi}{2} \right) \)
\( \implies 2y = -x - \frac{3\pi}{2} \)
\( \implies 2x + 4y + 3\pi = 0 \)
(ii) बिंदु \( \left(\frac{\pi}{2}, 0\right) \) पर:
\( y - 0 = -\frac{1}{2} \left( x - \frac{\pi}{2} \right) \)
\( \implies y = -\frac{1}{2} \left( x - \frac{\pi}{2} \right) \)
\( \implies 2y = -x + \frac{\pi}{2} \)
\( \implies 2x + 4y - \pi = 0 \)
अतः, समीकरण \( 2x + 4y + 3\pi = 0 \) और \( 2x + 4y - \pi = 0 \) ही अभीष्ट स्पर्श रेखाओं के समीकरण हैं।
In simple words: हमने पहले वक्र के लिए ढलान का सूत्र निकाला। फिर, इस ढलान को दी गई समांतर रेखा के ढलान के बराबर रखकर, हमने उन बिंदुओं को ढूंढा जहाँ स्पर्श रेखाएँ समांतर हैं। अंत में, उन बिंदुओं और ढलान का उपयोग करके स्पर्श रेखाओं के समीकरण लिखे।
🎯 Exam Tip: निहित अवकलन का उपयोग करते समय, \( \frac{dy}{dx} \) वाले सभी पदों को एक साथ समूहबद्ध करना और फिर उसे उभयनिष्ठ गुणनखंड लेना महत्वपूर्ण है। यह भी याद रखें कि समानांतर रेखाओं की प्रवणताएँ समान होती हैं।
प्रश्न 7. एक घनाकार सन्दूक के आयतन की गणना में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए, जबकि घन की कोर की लम्बाई में त्रुटि 5 प्रतिशत होती है।
Answer: हमें घन की भुजा की लंबाई में प्रतिशत त्रुटि दी गई है और हमें उसके आयतन में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात करनी है। हम अवकलन का उपयोग करके एक छोटी सी त्रुटि के प्रभाव को अनुमानित कर सकते हैं।
मान लीजिए घन की भुजा \( x \) है और उसका आयतन \( V \) है।
हमें दिया गया है कि घन की कोर की लंबाई में प्रतिशत त्रुटि \( \frac {\Delta x }{ x } \times 100 = 5\% \) है।
घन का आयतन का सूत्र है: \( V = x^3 \)
\( x \) के सापेक्ष आयतन का अवकलन करने पर:
\( \frac { dV }{ dx } = 3x^2 \)
आयतन में लगभग त्रुटि \( \Delta V \) को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( \Delta V \approx \frac { dV }{ dx } \times \Delta x \)
\( \implies \Delta V \approx 3x^2 \Delta x \)
अब, आयतन में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात करने के लिए, हम \( \Delta V \) को \( V \) से भाग देंगे और 100 से गुणा करेंगे:
\( \frac { \Delta V }{ V } \times 100 = \frac { 3x^2 \Delta x }{ x^3 } \times 100 \)
\( \implies \frac { \Delta V }{ V } \times 100 = 3 \frac { \Delta x }{ x } \times 100 \)
हमें \( \frac { \Delta x }{ x } \times 100 = 5\% \) दिया गया है।
\( \implies \frac { \Delta V }{ V } \times 100 = 3 \times 5\% \)
\( \implies \frac { \Delta V }{ V } \times 100 = 15\% \)
अतः, घन के आयतन की गणना में प्रतिशत त्रुटि 15% होगी। यह विधि यह समझने में मदद करती है कि मूल माप में एक छोटी सी त्रुटि गणना किए गए मान में कितनी बड़ी त्रुटि पैदा कर सकती है।
In simple words: घन का आयतन उसकी भुजा की लंबाई पर निर्भर करता है। यदि भुजा की लंबाई में 5% की गलती होती है, तो अवकलन के नियम के अनुसार, आयतन में लगभग तीन गुना, यानी 15% की गलती होगी।
🎯 Exam Tip: प्रतिशत त्रुटि वाले प्रश्नों में, पहले फलन (जैसे आयतन या क्षेत्रफल) का अवकलन ज्ञात करें। फिर, \( \frac{\Delta y}{y} \times 100 = \frac{dy}{dx} \times \frac{\Delta x}{y} \times 100 \) सूत्र का उपयोग करके प्रतिशत त्रुटि निकालें। \( y \) को \( x \) के पद में व्यक्त करना न भूलें।
प्रश्न 8. धातु की एक वृत्ताकार चादर का ताप से इस प्रकार विस्तार होता है कि इसकी त्रिज्या में 2 प्रतिशत की वृद्धि होती है, इसके क्षेत्रफल में निकटतम वृद्धि ज्ञात कीजिए, जबकि ताप से पूर्व चद्दर की त्रिज्या 10 सेमी है।
Answer: हमें एक वृत्ताकार चादर की त्रिज्या में प्रतिशत वृद्धि दी गई है और हमें उसके क्षेत्रफल में होने वाली निकटतम वृद्धि ज्ञात करनी है। हम अवकलन का उपयोग करके त्रिज्या में छोटे बदलाव के कारण क्षेत्रफल में होने वाले बदलाव का अनुमान लगा सकते हैं।
मान लीजिए वृत्ताकार चादर की त्रिज्या \( r \) सेमी है और उसका क्षेत्रफल \( S \) है।
हमें दिया गया है कि त्रिज्या में प्रतिशत वृद्धि \( \frac {\Delta r }{r} \times 100 = 2\% \) है।
इससे \( \frac{\Delta r}{r} = \frac{2}{100} \) या \( \Delta r = \frac{2r}{100} \) मिलता है।
वृत्ताकार चादर का क्षेत्रफल का सूत्र है: \( S = \pi r^2 \)
\( r \) के सापेक्ष क्षेत्रफल का अवकलन करने पर:
\( \frac { dS }{ dr } = 2\pi r \)
क्षेत्रफल में लगभग वृद्धि \( \Delta S \) को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
\( \Delta S \approx \frac { dS }{ dr } \times \Delta r \)
\( \implies \Delta S \approx 2\pi r \Delta r \)
अब, \( \Delta r \) का मान रखने पर:
\( \Delta S \approx 2\pi r \left( \frac{2r}{100} \right) \)
\( \implies \Delta S \approx \frac{4\pi r^2}{100} \)
हमें ताप से पूर्व की त्रिज्या \( r = 10 \) सेमी दी गई है। \( r \) का मान रखने पर:
\( \Delta S \approx \frac{4\pi (10)^2}{100} \)
\( \implies \Delta S \approx \frac{4\pi \times 100}{100} \)
\( \implies \Delta S \approx 4\pi \) वर्ग सेमी।
अतः, क्षेत्रफल में निकटतम वृद्धि \( 4\pi \) वर्ग सेमी होगी। यह सिद्धांत माप के उपकरणों में त्रुटियों के कारण होने वाले परिणामों में परिवर्तन का अनुमान लगाने के लिए बहुत उपयोगी है।
In simple words: अगर एक गोल चीज़ की त्रिज्या 2% बढ़ जाती है, तो उसके क्षेत्रफल में लगभग \( 4\pi \) वर्ग सेमी की वृद्धि होगी, खासकर जब मूल त्रिज्या 10 सेमी हो। यह हमें बताता है कि क्षेत्रफल त्रिज्या के वर्ग पर निर्भर करता है, इसलिए छोटा बदलाव भी बड़ा असर डालता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, प्रतिशत वृद्धि या कमी को हमेशा \( \frac{\Delta x}{x} \) के रूप में लिखें, न कि सीधे \( \Delta x \)। फिर सूत्र \( \Delta y = \frac{dy}{dx} \Delta x \) का उपयोग करके अनुमानित परिवर्तन की गणना करें।
प्रश्न 9. सिद्ध कीजिए कि गोले के अन्तर्गत सबसे बड़े शंकु का आयतन, गोले के आयतन का \( \frac {8}{27} \) होता है।
Answer: हमें यह सिद्ध करना है कि एक गोले के अंदर बनाए जा सकने वाले सबसे बड़े शंकु का आयतन, गोले के कुल आयतन का \( \frac{8}{27} \) गुना होता है। हम शंकु के आयतन को गोले की त्रिज्या और एक सहायक चर के रूप में व्यक्त करेंगे, फिर अवकलन का उपयोग करके अधिकतम आयतन ज्ञात करेंगे।
हल: मान लीजिए कि एक शंकु ABC है, जो एक \( R \) त्रिज्या वाले गोले के अंदर बना हुआ है।
मान लीजिए गोले का केंद्र O है और उसकी त्रिज्या R है। शंकु का शीर्ष A गोले की परिधि पर है और शंकु का आधार गोले के अंदर एक वृत्त है।
मान लीजिए शंकु की ऊँचाई \( h \) और आधार की त्रिज्या \( r \) है।
चित्र के अनुसार, मान लीजिए केंद्र O से शंकु के आधार तक की दूरी \( x \) है। (यह दूरी शंकु के आधार से गोले के केंद्र तक है)
तब, शंकु की ऊँचाई \( h = R + x \) (यदि शीर्ष गोले के ऊपरी बिंदु पर है) या \( h = R - x \) (यदि शीर्ष गोले के निचले बिंदु पर है)।
यदि शंकु का शीर्ष गोले के शीर्ष पर है, तो आधार से गोले के केंद्र तक की दूरी \( x \) होने पर, शंकु की ऊँचाई \( h = R - x \)।
और, शंकु के आधार की त्रिज्या \( r = \sqrt{R^2 - x^2} \)।
शंकु का आयतन \( V = \frac{1}{3} \pi r^2 h \)
\( V = \frac{1}{3} \pi (R^2 - x^2)(R - x) \)
यह फलन \( x \) के सापेक्ष अधिकतम या न्यूनतम आयतन देगा। यहाँ, OCR के अनुसार, \( x \) को \( R - \text{distance from center to base} \) के रूप में परिभाषित किया गया है।
OCR के संकेतन का पालन करते हुए:
गोले का केंद्र O है। \( OB = R \) (गोले की त्रिज्या)।
मान लीजिए शंकु की ऊँचाई को \( h \) से दर्शाते हैं।
माना शीर्ष से आधार तक की दूरी (शंकु की ऊँचाई) \( h \) है।
यदि \( x \) गोले के केंद्र से शंकु के आधार तक की दूरी है, तो शंकु की ऊँचाई \( h = R+x \) या \( h = R-x \) होगी।
OCR के अनुसार, \( OP = (R - \text{एक अन्य चर}) \) और \( AP = 2R - \text{वही चर} \)।
मान लीजिए \( x \) एक ऐसा चर है कि \( OP = R - x \)।
तब, शंकु की ऊँचाई \( h = AP = AO + OP = R + (R-x) = 2R - x \)।
शंकु के आधार की त्रिज्या \( r = PB \)। त्रिभुज OPB में, \( OB^2 = OP^2 + PB^2 \)।
\( R^2 = (R-x)^2 + r^2 \)
\( \implies r^2 = R^2 - (R-x)^2 = R^2 - (R^2 - 2Rx + x^2) \)
\( \implies r^2 = 2Rx - x^2 \)
शंकु का आयतन \( V = \frac{1}{3} \pi r^2 h \)
\( V = \frac{1}{3} \pi (2Rx - x^2)(2R - x) \)
\( x \) के सापेक्ष \( V \) का अवकलन करने पर:
\( \frac{dV}{dx} = \frac{1}{3} \pi \left[ \frac{d}{dx}(2Rx - x^2)(2R - x) \right] \)
उत्पाद नियम का उपयोग करके:
\( \frac{dV}{dx} = \frac{1}{3} \pi \left[ (2R - 2x)(2R - x) + (2Rx - x^2)(-1) \right] \)
\( \implies \frac{dV}{dx} = \frac{1}{3} \pi \left[ (2R - 2x)(2R - x) - x(2R - x) \right] \)
महत्तम आयतन के लिए, \( \frac{dV}{dx} = 0 \) सेट करें:
\( \frac{1}{3} \pi \left[ (2R - x) ( (2R - 2x) - x ) \right] = 0 \)
\( \implies (2R - x) (2R - 3x) = 0 \)
इसलिए, या तो \( 2R - x = 0 \implies x = 2R \) या \( 2R - 3x = 0 \implies x = \frac{2R}{3} \)।
यदि \( x = 2R \), तो \( r^2 = 2R(2R) - (2R)^2 = 4R^2 - 4R^2 = 0 \)। यह एक अवनत शंकु (degenerate cone) होगा जिसका आयतन शून्य होगा, जो अधिकतम आयतन नहीं हो सकता।
इसलिए, हम \( x = \frac{2R}{3} \) मान चुनते हैं।
यह पुष्टि करने के लिए कि यह अधिकतम आयतन है, हम दूसरा अवकलन ज्ञात करेंगे:
\( \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{d}{dx} \left( \frac{1}{3} \pi (2R - x)(2R - 3x) \right) \)
\( \implies \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi \left[ (-1)(2R - 3x) + (2R - x)(-3) \right] \)
\( \implies \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi \left[ -2R + 3x - 6R + 3x \right] \)
\( \implies \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi (6x - 8R) \)
\( x = \frac{2R}{3} \) का मान रखने पर:
\( \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi \left( 6\left(\frac{2R}{3}\right) - 8R \right) \)
\( \implies \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi (4R - 8R) \)
\( \implies \frac{d^2V}{dx^2} = \frac{1}{3} \pi (-4R) = -\frac{4\pi R}{3} \)
चूंकि \( R > 0 \), \( -\frac{4\pi R}{3} < 0 \) है, जिसका अर्थ है कि \( x = \frac{2R}{3} \) पर आयतन अधिकतम है।
अब, शंकु की ऊँचाई और त्रिज्या ज्ञात करें:
शंकु की ऊँचाई \( h = 2R - x = 2R - \frac{2R}{3} = \frac{4R}{3} \)
शंकु के आधार की त्रिज्या \( r^2 = 2Rx - x^2 = 2R\left(\frac{2R}{3}\right) - \left(\frac{2R}{3}\right)^2 \)
\( \implies r^2 = \frac{4R^2}{3} - \frac{4R^2}{9} = \frac{12R^2 - 4R^2}{9} = \frac{8R^2}{9} \)
अधिकतम आयतन वाले शंकु का आयतन \( V_{cone} = \frac{1}{3} \pi r^2 h \)
\( V_{cone} = \frac{1}{3} \pi \left(\frac{8R^2}{9}\right) \left(\frac{4R}{3}\right) \)
\( \implies V_{cone} = \frac{32\pi R^3}{81} \)
गोले का आयतन \( V_{sphere} = \frac{4}{3} \pi R^3 \)
हमें सिद्ध करना है कि \( V_{cone} = \frac{8}{27} V_{sphere} \)।
\( \frac{8}{27} V_{sphere} = \frac{8}{27} \left(\frac{4}{3} \pi R^3\right) = \frac{32\pi R^3}{81} \)
चूंकि \( V_{cone} = \frac{32\pi R^3}{81} \), इसलिए \( V_{cone} = \frac{8}{27} V_{sphere} \)। इति सिद्धम्।
In simple words: हमने शंकु के आयतन का सूत्र लिखा और उसे गोले की त्रिज्या और एक अन्य चर के रूप में व्यक्त किया। फिर, अवकलन का उपयोग करके उस चर का मान ज्ञात किया जिस पर शंकु का आयतन अधिकतम होता है। अंत में, हमने दिखाया कि इस अधिकतम आयतन का मान गोले के आयतन का \( \frac{8}{27} \) गुना है।
🎯 Exam Tip: ज्यामितीय आकृतियों के अधिकतम-न्यूनतम मान वाले प्रश्नों में, पहले संबंधित सूत्र लिखें। फिर, एक ही चर के पदों में सभी आयामों को व्यक्त करें और अवकलन का उपयोग करके अधिकतम या न्यूनतम मान ज्ञात करें। दूसरा अवकलन परीक्षण करके पुष्टि करें कि यह वास्तव में अधिकतम या न्यूनतम है।
प्रश्न 10. सिद्ध कीजिए कि दिए हुए पृष्ठ तथा महत्तम आयतन वाले लम्बवृत्तीय शंकु का अर्द्धशीर्थ कोण \( \sin^{-1}\left(\frac {1}{3} \right) \) होता है।
Answer: हमें यह सिद्ध करना है कि अधिकतम आयतन और दिए गए कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल वाले एक लम्बवृत्तीय शंकु का अर्द्धशीर्ष कोण \( \sin^{-1}\left(\frac {1}{3} \right) \) होता है। हम शंकु के आयतन को कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल और शंकु की त्रिज्या के पदों में व्यक्त करेंगे, फिर अवकलन का उपयोग करके अधिकतम आयतन की स्थिति ज्ञात करेंगे।
हल: मान लीजिए एक लम्बवृत्तीय शंकु की त्रिज्या \( r \), ऊँचाई \( h \), और तिर्यक ऊँचाई \( l \) है।
माना शंकु का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \( S \) है और आयतन \( V \) है।
अर्द्धशीर्ष कोण \( \alpha \) है।
शंकु का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \( S = \pi r^2 + \pi rl \)
इससे, हम तिर्यक ऊँचाई \( l \) को \( S \) और \( r \) के पदों में व्यक्त कर सकते हैं:
\( \pi rl = S - \pi r^2 \)
\( \implies l = \frac{S - \pi r^2}{\pi r} = \frac{S}{\pi r} - r \)
शंकु का आयतन \( V = \frac{1}{3} \pi r^2 h \)
हम जानते हैं कि \( h^2 = l^2 - r^2 \)।
इसलिए, \( V^2 = \frac{1}{9} \pi^2 r^4 h^2 = \frac{1}{9} \pi^2 r^4 (l^2 - r^2) \)
\( l \) का मान रखने पर:
\( V^2 = \frac{1}{9} \pi^2 r^4 \left( \left(\frac{S}{\pi r} - r\right)^2 - r^2 \right) \)
\( V^2 = \frac{1}{9} \pi^2 r^4 \left( \frac{S^2}{\pi^2 r^2} - \frac{2S}{\pi} + r^2 - r^2 \right) \)
\( V^2 = \frac{1}{9} \pi^2 r^4 \left( \frac{S^2}{\pi^2 r^2} - \frac{2S}{\pi} \right) \)
\( V^2 = \frac{1}{9} \left( S^2 r^2 - 2\pi S r^4 \right) \)
अधिकतम आयतन के लिए, हम \( V^2 \) को अधिकतम करेंगे। मान लीजिए \( Z = V^2 \)।
\( Z = \frac{1}{9} (S^2 r^2 - 2\pi S r^4) \)
\( r \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( \frac{dZ}{dr} = \frac{1}{9} (S^2 (2r) - 2\pi S (4r^3)) \)
\( \implies \frac{dZ}{dr} = \frac{1}{9} (2rS^2 - 8\pi S r^3) \)
अधिकतम आयतन के लिए, \( \frac{dZ}{dr} = 0 \) सेट करें:
\( \frac{1}{9} (2rS^2 - 8\pi S r^3) = 0 \)
\( \implies 2rS(S - 4\pi r^2) = 0 \)
चूंकि \( r \neq 0 \) और \( S \neq 0 \), हमें प्राप्त होता है:
\( S - 4\pi r^2 = 0 \)
\( \implies S = 4\pi r^2 \)
यह अधिकतम आयतन के लिए शर्त है। अब हम अर्द्धशीर्ष कोण \( \alpha \) ज्ञात करेंगे।
तिर्यक ऊँचाई \( l \) के सूत्र में \( S = 4\pi r^2 \) रखने पर:
\( l = \frac{S}{\pi r} - r = \frac{4\pi r^2}{\pi r} - r \)
\( \implies l = 4r - r \)
\( \implies l = 3r \)
एक लम्बवृत्तीय शंकु में, अर्द्धशीर्ष कोण \( \alpha \) के लिए \( \sin \alpha = \frac{r}{l} \) होता है।
\( \sin \alpha = \frac{r}{3r} \)
\( \implies \sin \alpha = \frac{1}{3} \)
\( \implies \alpha = \sin^{-1}\left(\frac{1}{3}\right) \)
अतः, दिए हुए पृष्ठ तथा महत्तम आयतन वाले लम्बवृत्तीय शंकु का अर्द्धशीर्ष कोण \( \sin^{-1}\left(\frac {1}{3} \right) \) होता है। यह सिद्ध हो गया। यह परिणाम इंजीनियरिंग और डिजाइन में महत्वपूर्ण है, जहाँ किसी दी गई सामग्री से अधिकतम क्षमता प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
In simple words: अगर हम एक शंकु को एक निश्चित मात्रा की सामग्री से बनाते हैं और चाहते हैं कि उसका आयतन सबसे ज़्यादा हो, तो उसका ऊपरी कोण ऐसा होगा कि कोण की साइन वैल्यू \( \frac{1}{3} \) होगी।
🎯 Exam Tip: अधिकतम-न्यूनतम प्रश्नों में, हमेशा दिए गए प्रतिबंध (जैसे यहाँ पृष्ठीय क्षेत्रफल) का उपयोग करके एक चर को दूसरे के पदों में बदलें। फिर उस राशि (जैसे यहाँ आयतन) का अवकलन करें जिसे अधिकतम या न्यूनतम करना है। अंत में, ज्यामितीय संबंध (जैसे \( \sin \alpha = r/l \)) का उपयोग करें।
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