Official RBSE Solutions for Class 12 Home Science: Chapter 06 वयस्कावस्था और वृद्धावस्था
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Chapter-wise Solutions for Home Science: Chapter 06 वयस्कावस्था और वृद्धावस्था
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RBSE Class 12 Home Science Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) युवावस्था प्रायः होती है -
(अ) 18 - 19 से 40 वर्ष तक की
(ब) 19 - 20 से 40 वर्ष तक की
(स) 18 - 20 से 40 वर्ष तक की
(द) 20 - 21 से 40 वर्ष तक की।
Answer: (द) 20 - 21 से 40 वर्ष तक की।
In simple words: युवावस्था आमतौर पर 20 से 21 साल की उम्र से शुरू होकर 40 साल तक चलती है। इस दौरान व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व हो जाता है।
🎯 Exam Tip: आयु समूहों को याद रखने के लिए, प्रमुख जीवन अवस्थाओं जैसे युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था की सामान्य आयु सीमाओं पर ध्यान दें।
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(ii) आर्थिक व सामाजिक स्थिरता की अवस्था होती है -
(अ) युवावस्था
(ब) प्रौढ़ावस्था
(स) बाल्यावस्था
Answer: (ब) प्रौढ़ावस्था
In simple words: प्रौढ़ावस्था वह समय है जब व्यक्ति अपने जीवन में आर्थिक और सामाजिक रूप से स्थिर हो जाता है। इस अवस्था में लोग करियर बनाते हैं और परिवार स्थापित करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक जीवन अवस्था की मुख्य विशेषताओं को जानें, जैसे कि आर्थिक स्थिरता, जो प्रौढ़ावस्था से जुड़ी है।
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(iv) वृद्धों का आहार निम्नानुसार दिया जाना चाहिए।
(अ) शारीरिक परिवर्तनों
(ब) स्वास्थ्य
(स) रुचि
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: बुजुर्गों को खाना उनके शरीर में हुए बदलाव, उनकी सेहत और उनकी पसंद के हिसाब से देना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें सही पोषण मिले और वे खाने का आनंद ले सकें।
🎯 Exam Tip: वृद्धों के आहार संबंधी प्रश्नों में, हमेशा उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कारकों पर विचार करें।
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(v) वृद्धावस्था में हड्डियों के जोड़ों में उपस्थित स्नेहक द्रव की मात्रा हो जाती है -
(अ) कम
(ब) यथावत्
(स) अधिक
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) कम
In simple words: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हड्डियों के जोड़ों में चिकनाई वाले द्रव की मात्रा कम हो जाती है। इसी कारण से जोड़ों में दर्द और अकड़न महसूस होती है।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था से संबंधित शारीरिक परिवर्तनों और उनके प्रभावों को समझने पर ध्यान दें, जैसे जोड़ों में स्नेहक द्रव की कमी।
Question 3. टिप्पणी लिखो
1. युवावस्था
2. प्रौढ़ावस्था
Answer:
(1) युवावस्था:
यह अवस्था 21 से 40 वर्ष तक चलती है। इसे शुरुआती प्रौढ़ावस्था भी कहते हैं। इस उम्र में लोग अपना व्यवसाय चुनते हैं और शादी के क्षेत्र में खुद को ढालते हैं। युवा इस अवस्था में अपने खास लक्ष्यों को चुनते हैं और उन्हें पाने के लिए अपनी ताकत लगाते हैं। युवावस्था जीवन का वह पड़ाव है जब किशोर अपनी पढ़ाई पूरी कर लेते हैं या करने वाले होते हैं। इस अवस्था में खुश रहना ज्यादातर संतोषजनक काम और सामाजिक मेलजोल पर निर्भर करता है। यदि कोई अपने काम से खुश नहीं है, तो वह घर और जीवन के हर पहलू में उदास रहता है। युवावस्था ही वह समय है जब जीवन में स्थिरता के लिए सही जीवनसाथी का चुनाव किया जाता है। यह अवस्था शारीरिक बदलावों की भी होती है। इस अवस्था में देश की उत्पादन क्षमता और खुशी बढ़ती है।
(2) प्रौढ़ावस्था:
प्रौढ़ावस्था को मध्य आयु भी कहते हैं। यह अवस्था 40 वर्ष से 60 वर्ष तक चलती है। इस उम्र की शुरुआत और अंत में शरीर और मन में बदलाव आते हैं। इस अवस्था में बच्चे पैदा करने की शक्ति, शारीरिक ताकत और फुर्ती कम हो जाती है। यह समय आर्थिक और सामाजिक उन्नति का सबसे अच्छा समय होता है। इस अवस्था में व्यक्ति अपनी सफलताओं में स्थिर हो जाता है। अब व्यक्ति भावनाओं में स्थिर, शांत और अनुभवी हो जाता है। शारीरिक बदलावों के रूप में व्यक्ति का वजन बढ़ जाता है। बाल और त्वचा में बदलाव आते हैं, बाल सफेद हो जाते हैं। आंखों के नीचे झुर्रियां पड़ जाती हैं और आंखों की रोशनी कम हो जाती है। यह अवस्था यौन शक्ति में कमी और रजोनिवृत्ति का समय भी होती है।
In simple words: युवावस्था 21 से 40 साल तक चलती है, जहाँ लोग करियर और परिवार में स्थिरता पाते हैं। प्रौढ़ावस्था 40 से 60 साल तक रहती है, जिसमें शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं, पर व्यक्ति आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक जीवन अवस्था की प्रमुख शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक विशेषताओं को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
Question 4. सेवानिवृत्त होने के बाद व्यक्ति को प्रायः किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
Answer: वृद्धावस्था की शुरुआत लगभग 60 साल की उम्र से मानी जाती है। इस उम्र में व्यक्ति अपनी सेवाओं से रिटायर हो जाता है। वह परिवार के सदस्यों के साथ पूरा समय बिताना चाहता है और एक शांत व स्थिर जीवन जीना चाहता है। वृद्धावस्था की इस शांतिपूर्ण स्थिति में कई तरह की समस्याएं आती हैं। ये समस्याएं शारीरिक, आर्थिक और मानसिक होती हैं। रिटायर होने के बाद उनकी हर महीने की आय, जैसे पेंशन, कम हो जाती है या कई बार पूरी तरह बंद हो जाती है। इस समय घर के बाकी सदस्य अपने-अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। इसलिए बुजुर्ग घर में बिल्कुल अकेले पड़ जाते हैं। जीवनसाथी की कमी से यह अकेलापन उदासी और तनाव को बढ़ाता है। वृद्धावस्था में रिटायर होने के बाद उनके दोस्त भी उनसे मिलने नहीं आ पाते। रिटायर होने के बाद उनके पास कोई काम नहीं रहता। इसलिए खाली समय काटना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। परिवार के सदस्यों से विचारों में मतभेद होने के कारण उनके रिश्ते भी बिगड़ जाते हैं। पत्नी के साथ भी तनाव और दुश्मनी हो सकती है। वृद्धावस्था की समस्याओं के प्रति परिवार के सभी सदस्यों को खास ध्यान देना चाहिए और बुजुर्गों को भी परिवार के सदस्यों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए ताकि उनका सम्मान बना रहे।
In simple words: रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों को कई समस्याएं आती हैं, जैसे आय कम होना, अकेलापन महसूस करना, दोस्तों से मिलना-जुलना कम होना और परिवार से वैचारिक मतभेद होना। उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: सेवानिवृत्ति के बाद की समस्याओं को शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक श्रेणियों में बांटकर समझाना अधिक प्रभावी होता है।
Question 5. वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन व उससे सम्बन्धित समस्याओं के बारे में विस्तार से लिखिए।
Answer: वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन और उनसे जुड़ी समस्याएं नीचे दी गई हैं:
(1) वृद्धावस्था में नई कोशिकाओं के बनने की दर कम हो जाती है, जबकि पुरानी कोशिकाओं के टूटने की दर तेज हो जाती है। इसलिए वृद्धावस्था में शरीर का वजन कम होने लगता है। वसा ऊतक, तेल और पसीने की ग्रंथियों की सक्रियता घट जाती है, जिससे त्वचा पतली, सूखी और झुर्रीदार होकर ढीली पड़ जाती है।
(2) वृद्धावस्था में दांत गिरना शुरू हो जाते हैं या दांतों में संक्रमण के कारण उन्हें निकलवाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उन्हें बोलने और खाना खाने में समस्या होती है।
(3) सिर के बाल या तो कम होने लगते हैं या सिर गंजा हो जाता है। हाथों-पैरों के नाखून मोटे, सख्त और भंगुर हो जाते हैं। इससे व्यक्ति मानसिक तनाव महसूस करता है।
(4) इस अवस्था में व्यक्ति की कमर और कंधे आगे की ओर झुक जाते हैं। इससे उनकी ऊंचाई कम लगने लगती है। इसी कारण उन्हें चलने-फिरने में समस्या होती है।
(5) सक्रिय मांसपेशियां कम हो जाती हैं। हड्डियों के जोड़ों में मौजूद चिकनाई वाला द्रव कम हो जाता है, जिससे जोड़ों की सक्रियता घट जाती है, उनमें दर्द रहता है और उठने-बैठने व चलने-फिरने में परेशानी होती है।
(6) वृद्धावस्था में तंत्रिका तंत्र कमजोर हो जाता है। इस कारण से उनकी देखने, सुनने, सूंघने, छूने और स्वाद की शक्ति कम हो जाती है। आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है। स्वादिष्ट भोजन भी बेस्वाद लगता है। याददाश्त कमजोर हो जाती है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं। बुढ़ापे में वृद्धों के गिरने और लड़खड़ाने का खतरा भी बढ़ जाता है।
(9) वृद्धावस्था में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इससे उन्हें अलग-अलग शारीरिक बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
(10) वृद्धावस्था में व्यक्ति को पूरी नींद नहीं आती है। नींद की मात्रा में एक या दो घंटे की कमी आ जाती है, जिससे ज्यादातर वृद्धों को अनिद्रा (नींद न आने) का रोग हो जाता है।
In simple words: वृद्धावस्था में शरीर में कई बदलाव आते हैं, जैसे वजन कम होना, दांतों की समस्या, बालों का झड़ना, शरीर का झुकना और जोड़ों में दर्द। तंत्रिका तंत्र भी कमजोर हो जाता है, जिससे इंद्रियों की शक्ति घट जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: शारीरिक परिवर्तनों को सूचीबद्ध करते समय, उनके प्रत्यक्ष प्रभावों और संबंधित समस्याओं को भी संक्षेप में बताएं।
Question 6. एक वृद्ध महिला की देखभाल आप कैसे करेंगे? समझाइये।
Answer: एक वृद्ध महिला की देखभाल इस प्रकार की जा सकती है -
1. वृद्धावस्था में वृद्ध महिला को संतुलित आहार देना चाहिए जिससे उसे संतुष्टि मिल सके। भोजन से संतुष्ट न होने के कारण वृद्धों में चिड़चिड़ापन आ जाता है।
2. वृद्ध महिला को शोरगुल से दूर रखना चाहिए और उनका कमरा इस तरह का होना चाहिए कि वह आराम से अपनी नींद पूरी कर सकें।
3. वृद्धों का कमरा ज्यादा ठंडा नहीं होना चाहिए और उसमें मनोरंजन के लिए पर्याप्त साधन भी होने चाहिए।
4. वृद्धों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। इसलिए उन्हें नियमित रूप से डॉक्टर को दिखाते रहना चाहिए, चिकित्सा सुविधा घर के पास हो तो वहां तक जाना आसान हो जाता है।
5. वृद्ध व्यक्ति को सम्मान और स्नेह देना चाहिए, जिससे वे खुद को उपेक्षित महसूस न करें।
6. आज वृद्धों को लोग बोझ समझने लगे हैं और वृद्धाश्रमों में रखने की सलाह देते हैं। वृद्धावस्था की इन संस्थाओं में उन्हें परिवार के साथ रहने का सुख नहीं मिलता है। इसलिए वृद्ध व्यक्ति को परिवार के साथ ही रखना चाहिए और उन्हें संतुष्ट रखना चाहिए ताकि वे खुद को उपेक्षित न समझें।
7. वृद्धों के पास समय-समय पर परिवार के सदस्यों को बैठना चाहिए, जिससे उनकी मानसिक पीड़ा कम हो और उन्हें आत्मसंतुष्टि मिले।
8. वृद्ध महिला यदि स्वयं शौच या स्नान नहीं कर सकती है, तो उसे इस कार्य के लिए सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
9. वृद्धा की असहाय अवस्था में उनकी साफ-सफाई करते रहना चाहिए और उनकी रुचियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
In simple words: वृद्ध महिला की देखभाल के लिए उन्हें संतुलित आहार, शांत और आरामदायक माहौल, नियमित चिकित्सा सहायता, सम्मान और स्नेह देना चाहिए। परिवार के सदस्यों को उनके साथ समय बिताना चाहिए और उनकी व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: देखभाल के उपायों को व्यावहारिक और संवेदनशील दृष्टिकोण से समझाएं, जिसमें शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक पहलू शामिल हों।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 2. उचित जीवन साथी का चुनाव किस अवस्था में होता है?
(अ) किशोरावस्था में
(ब) उत्तर किशोरावस्था में
(स) युवावस्था में
(द) प्रौढ़ावस्था में
Answer: (स) युवावस्था में
In simple words: जीवनसाथी चुनने का सही समय युवावस्था होती है। इस उम्र में लोग अक्सर भविष्य के लिए गंभीर रिश्ते बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: जीवन की प्रमुख अवस्थाओं को उनके संबंधित विकास कार्यों जैसे कि जीवनसाथी का चुनाव से जोड़कर याद रखें।
Question 3. जनन क्षमता व शारीरिक शक्ति कम हो जाती है -
(अ) युवावस्था में
(ब) प्रौढ़ावस्था में
(स) वृद्धावस्था में
(द) इनमें से किसी में नहीं
Answer: (ब) प्रौढ़ावस्था में
In simple words: प्रौढ़ावस्था में व्यक्ति की जनन क्षमता और शारीरिक ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। यह उम्र बढ़ने का एक प्राकृतिक हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: यह ध्यान रखें कि शारीरिक क्षमताओं में कमी प्रौढ़ावस्था में शुरू होती है, न कि सीधे वृद्धावस्था में अचानक आती है।
Question 4. सेवाओं से सेवानिवृत्ति की आयु क्या होती है -
(अ) 60 वर्ष
(ब) 62 वर्ष
(स) 55 वर्ष
(द) 58 वर्ष
Answer: (अ) 60 वर्ष
In simple words: भारत में ज्यादातर लोग 60 साल की उम्र में अपनी नौकरी से रिटायर हो जाते हैं। यह उनकी सेवा से छुट्टी लेने की सामान्य उम्र है।
🎯 Exam Tip: सेवानिवृत्ति की मानक आयु अक्सर सरकारी नियमों और सामान्य प्रथाओं पर आधारित होती है।
Question 6. वृद्धों का कमरा होना चाहिए -
(अ) शोरगुल से दूर
(ब) बच्चों के कमरों के निकट
(स) अत्यधिक ठंडा
(द) परिवार से अलग
Answer: (अ) शोरगुल से दूर
In simple words: बुजुर्गों का कमरा शांत जगह पर होना चाहिए ताकि उन्हें आराम मिल सके और वे शोर से परेशान न हों। यह उनकी शांति और नींद के लिए जरूरी है।
🎯 Exam Tip: वृद्ध व्यक्तियों के लिए एक आरामदायक और शांतिपूर्ण वातावरण का महत्व समझाएं।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
Question 1. किशोरावस्था के समाप्त होते - होते युवावस्था प्रारम्भ हो जाती है।
Answer: युवावस्था
In simple words: किशोरावस्था खत्म होते ही युवावस्था शुरू हो जाती है। यह एक प्राकृतिक बदलाव है।
🎯 Exam Tip: जीवन अवस्थाओं के क्रम और उनके प्रमुख परिवर्तनों को याद रखें।
Question 2. युवावस्था में सुखी होना अधिकांशतः संतोषजनक व्यावसायिक समायोजन पर निर्भर करता है।
Answer: व्यावसायिक
In simple words: युवावस्था में खुश रहने के लिए अच्छे करियर और काम में संतुष्टि बहुत जरूरी है। यह जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: युवावस्था के प्रमुख लक्ष्यों में से एक सफल व्यावसायिक समायोजन है।
Question 3. प्रौढ़ावस्था में शरीर और शारीरिक क्रियाओं में कुछ परिवर्तन होते हैं।
Answer: क्रियाओं
In simple words: प्रौढ़ावस्था में शरीर और उसकी कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव आते हैं। यह उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: प्रौढ़ावस्था में शारीरिक परिवर्तनों का ज्ञान रखें, जैसे कि चयापचय और शारीरिक कार्यों में बदलाव।
Question 4. वृद्धावस्था में आयु वृद्धि के साथ-साथ व्यक्ति के बल और स्फूर्ति की रफ्तार कम हो जाती है।
Answer: आयु
In simple words: उम्र बढ़ने के साथ ही बुजुर्गों की ताकत और फुर्ती कम हो जाती है। यह वृद्धावस्था का एक स्वाभाविक लक्षण है।
🎯 Exam Tip: आयु बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमताओं में होने वाली कमी पर ध्यान दें।
Question 5. वृद्धावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
Answer: प्रतिरोधक
In simple words: वृद्धावस्था में शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है। इसलिए बुजुर्गों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: रोग प्रतिरोधक क्षमता का महत्व और वृद्धावस्था में इसकी कमी के प्रभावों को समझें।
Question 6. वृद्धावस्था में होने वाले परिवर्तन एवं समस्याओं को देखते हुए उनकी विशेष देखभाल करनी चाहिए।
Answer: समस्याओं
In simple words: बुजुर्गों में होने वाले बदलावों और मुश्किलों को देखकर उनकी खास देखभाल करनी चाहिए। यह उनके स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए आवश्यक है।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में विशेष देखभाल की आवश्यकता को रेखांकित करें, क्योंकि इस उम्र में कई शारीरिक और सामाजिक चुनौतियां आती हैं।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 6 अति लघूत्तरीय प्रश्न
Question 3. जरत्व किसे कहते हैं?
Answer: जरत्व वृद्धावस्था की वह अवस्था है जिसमें शरीर में गिरावट धीमी और धीरे-धीरे होती है। इस गिरावट की भरपाई की जा सकती है। यह उम्र बढ़ने की एक सामान्य प्रक्रिया है।
In simple words: जरत्व उम्र बढ़ने की वह स्थिति है जब शरीर में बदलाव धीरे-धीरे होते हैं और उनकी भरपाई भी संभव होती है।
🎯 Exam Tip: जरत्व को परिभाषित करते समय धीमी और क्रमिक गिरावट पर जोर दें।
Question 4. जरावस्था किस कहते हैं?
Answer: जरावस्था वृद्धावस्था की वह स्थिति है जिसमें शरीर लगभग पूरी तरह से टूट जाता है और मानसिक रूप से व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है। यह अक्सर बहुत अधिक उम्र में होता है।
In simple words: जरावस्था उम्र बढ़ने की वह गंभीर स्थिति है जब शरीर बहुत कमजोर हो जाता है और मन भी अस्थिर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जरावस्था को जरत्व से अलग बताएं, जहां गिरावट ज्यादा गंभीर और व्यापक होती है।
Question 5. सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या क्या होती है?
Answer: सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या अकेले घर पर समय बिताना होता है। काम से छुट्टी मिलने के बाद अचानक खाली समय आ जाता है, जिससे अकेलापन और ऊब महसूस होती है।
In simple words: रिटायरमेंट के बाद लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत अकेले समय बिताने में आती है।
🎯 Exam Tip: सेवानिवृत्ति के बाद की भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों पर ध्यान दें, विशेषकर अकेलेपन पर।
Question 6. वृद्धावस्था में नाड़ी संस्थान के कमजोर होने से क्या समस्यायें आती हैं?
Answer: नाड़ी संस्थान के कमजोर होने से बुजुर्गों की देखने, सूंघने, सुनने, छूने और स्वाद लेने की शक्ति कम हो जाती है। साथ ही, उनकी याददाश्त भी कमजोर हो जाती है और हाथ-पैर कांपने लगते हैं।
In simple words: वृद्धावस्था में नाड़ी संस्थान कमजोर होने से इंद्रियों की शक्ति कम हो जाती है, याददाश्त कमजोर होती है और हाथ-पैर कांपने लगते हैं।
🎯 Exam Tip: नाड़ी संस्थान की कमजोरी के विशिष्ट प्रभावों को बताएं, जैसे कि इंद्रियों का क्षीण होना और मोटर कौशल पर असर।
Question 7. हड्डियों से कैल्शियम तथा फास्फोरस निकलने की दर अधिक होने से कौन-सा रोग हो जाता है?
Answer: हड्डियों से कैल्शियम और फास्फोरस ज्यादा मात्रा में निकलने से ऑस्टियोपोरोसिस रोग हो जाता है। यह हड्डियों को कमजोर बना देता है।
In simple words: जब हड्डियों से बहुत ज्यादा कैल्शियम और फास्फोरस निकल जाता है, तो ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी हो जाती है।
🎯 Exam Tip: हड्डियों के स्वास्थ्य और खनिजों के महत्व को समझें, विशेषकर कैल्शियम और फास्फोरस का संतुलन।
Question 10. वृद्धावस्था में किस प्रकार का आहार देना चाहिए?
Answer: वृद्धावस्था में संतुलित आहार देना चाहिए। इस आहार में सभी जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में होने चाहिए, जो उनकी उम्र और शारीरिक जरूरतों के हिसाब से हों।
In simple words: बुजुर्गों को ऐसा खाना देना चाहिए जिसमें सभी पोषक तत्व सही मात्रा में हों।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में पोषण के महत्व पर जोर दें और समझाएं कि आहार व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार क्यों होना चाहिए।
Question 11. वृद्धावस्था में नींद पूरी न होने पर क्या समस्या आती है?
Answer: वृद्धावस्था में नींद पूरी न होने पर व्यक्ति तनावग्रस्त और चिड़चिड़ा हो जाता है। नींद की कमी से उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
In simple words: अगर बुजुर्गों की नींद पूरी नहीं होती, तो वे बहुत तनाव में और चिड़चिड़े हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: नींद की कमी के भावनात्मक और व्यवहारिक प्रभावों पर प्रकाश डालें।
Question 12. वृद्धावस्था में अधिकतर कौन कौन से रोग हो जाते हैं?
Answer: वृद्धावस्था में अधिकतर श्वसन रोग (सांस संबंधी), हृदय संबंधी रोग, मधुमेह (शुगर), ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) तथा गठिया (जोड़ों का दर्द) रोग हो जाते हैं। इन रोगों का प्रबंधन नियमित चिकित्सा देखभाल से ही संभव है।
In simple words: वृद्धावस्था में सांस की बीमारियां, दिल की बीमारियां, शुगर, हड्डियों का कमजोर होना और जोड़ों में दर्द जैसी बीमारियां ज्यादा होती हैं।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में होने वाले सामान्य रोगों की सूची बनाएं और उनके कारणों या प्रभावों को संक्षेप में समझें।
Question 13. वृद्धावस्था में शरीर के भार में कमी क्यों हो जाती है?
Answer: वृद्धावस्था में नई कोशिकाओं के बनने की दर पुरानी कोशिकाओं के टूटने की दर से कम हो जाती है। इस असंतुलन के कारण शरीर के भार में कमी आ जाती है।
In simple words: वृद्धावस्था में नई कोशिकाएं कम बनती हैं और पुरानी ज्यादा टूटती हैं, इसलिए शरीर का वजन घट जाता है।
🎯 Exam Tip: कोशिकाओं के निर्माण और टूटने की प्रक्रिया को याद रखें, जो उम्र बढ़ने के साथ शरीर के वजन को प्रभावित करती है।
Question 14. युवावस्था में सुखी होना किस बात पर निर्भर करता है?
Answer: युवावस्था में सुखी होना ज्यादातर संतोषजनक व्यावसायिक समायोजन पर निर्भर करता है। एक स्थिर और संतोषजनक करियर व्यक्ति को आर्थिक सुरक्षा और मानसिक संतुष्टि प्रदान करता है।
In simple words: युवावस्था में खुश रहने के लिए संतोषजनक नौकरी और करियर बहुत जरूरी होता है।
🎯 Exam Tip: युवावस्था में व्यावसायिक संतुष्टि के महत्व को रेखांकित करें, क्योंकि यह जीवन के अन्य पहलुओं को प्रभावित करता है।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 6 लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. वृद्धावस्था में होने वाले सामाजिक परिवर्तनों का वर्णन करो।
Answer: विवाहित बुजुर्गों में सामाजिक सक्रियता ज्यादा होती है। बुजुर्ग व्यक्ति के लिए परिवार ही उनके सामाजिक जीवन का केंद्र होता है। विचारों में अंतर के कारण कम उम्र के परिवार के सदस्य अपने बुजुर्गों का खुले दिल से स्वागत नहीं कर पाते। ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ-साथ बुजुर्ग व्यक्ति की अपनी रुचियां बढ़ती जाती हैं और दूसरों में उनकी रुचि घटती जाती है।
In simple words: वृद्धावस्था में सामाजिक बदलाव आते हैं जैसे परिवार में रिश्तों में बदलाव, अकेलेपन का बढ़ना और रुचियों का बदलना।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में सामाजिक परिवर्तनों को पारिवारिक रिश्तों, अकेलेपन और व्यक्तिगत रुचियों के संदर्भ में समझाएं।
Question 2. वृद्धावस्था में होने वाले संवेगात्मक परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
Answer: उम्र बढ़ने के साथ ही बुजुर्गों की भावनात्मक स्थिरता में भी तेजी से बदलाव आते हैं। भावनात्मक बदलाव का मुख्य कारण उनका काम से रिटायर होना होता है; सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्गों के पास कोई काम नहीं रहता। इस कारण उनका खाली समय मुश्किल से कटता है। निष्क्रियता और उम्र के साथ होने वाली मृत्यु के डर का संकेत देते हैं। कभी-कभी पत्नी से भी मनमुटाव हो जाता है, जिससे बुजुर्गों के संबंध परिवार के अन्य लोगों से भी बिगड़ जाते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पैसे की कमी के कारण उन्हें अपने भविष्य से डर लगने लगता है। काम से छुट्टी, दोस्तों और जीवनसाथी की कमी से अकेलापन, आर्थिक तंगी, पारिवारिक सदस्यों से बढ़ते मतभेद, गिरता हुआ स्वास्थ्य, सीमित सामाजिक दायरा जैसे कारक बुजुर्गों में उदासीनता बढ़ाते हैं, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन, झगड़ालू, सनकी और विरोधी होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उनमें डर, घबराहट और निराशा की भावनाएं ज्यादा पाई जाती हैं। भावनात्मक स्थिरता के लिए बुजुर्गों को चाहिए कि वे किसी न किसी तरह के रुचिपूर्ण काम करें।
In simple words: वृद्धावस्था में काम से रिटायर होने, खाली समय और अकेलेपन के कारण बुजुर्गों में भावनात्मक बदलाव आते हैं। वे चिड़चिड़े, तनावग्रस्त और उदास हो सकते हैं, इसलिए उन्हें किसी काम में व्यस्त रखना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: संवेगात्मक परिवर्तनों को सेवानिवृत्ति, सामाजिक अलगाव और वित्तीय असुरक्षा जैसे कारकों से जोड़कर समझाएं।
Question 3. वृद्धावस्था की चिकित्सा सम्बन्धी क्या समस्याएँ होती हैं?
Answer: वृद्धावस्था में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, इस कारण वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। वृद्धावस्था में ज्यादातर सांस संबंधी समस्याएं, दिल संबंधी रोग, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया तथा पोषण संबंधी ग्रंथियों का बढ़ना आदि रोग हो जाते हैं। इसलिए उन्हें नियमित चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होती है। यदि ये सुविधाएं घर के पास हों, तो वे स्वयं ही समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच करवा लेते हैं, वरना परिवार के किसी सदस्य को यह जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। कई बार आर्थिक संकट के कारण बुजुर्ग अपना इलाज नहीं करवा पाते हैं। हर व्यक्ति को वृद्धावस्था के लिए कुछ धन जरूर बचाकर रखना चाहिए।
In simple words: वृद्धावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सांस, दिल, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया जैसी बीमारियां आम हैं। चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच और इलाज का खर्च आर्थिक रूप से एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
🎯 Exam Tip: चिकित्सा समस्याओं को स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच, वित्तीय बाधाओं और परिवार पर पड़ने वाले बोझ के संदर्भ में बताएं।
Question 4. वृद्धावस्था में नाड़ी संस्थान के कमजोर होने से क्या समस्याएँ आती हैं?
Answer: वृद्धावस्था में नाड़ी संस्थान कमजोर हो जाता है। इस कारण उनके देखने, सुनने, सूंघने, छूने और स्वाद लेने की क्षमता कम होने लगती है। इसका सीधा असर उनकी दैनिक गतिविधियों पर पड़ता है। इससे याददाश्त और प्रतिक्रिया की गति भी प्रभावित होती है।
In simple words: वृद्धावस्था में नाड़ी संस्थान कमजोर होने से इंद्रियों की शक्ति घट जाती है, जिससे देखने, सुनने और सूंघने में दिक्कत होती है। इससे याददाश्त भी कमजोर हो सकती है और गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: नाड़ी संस्थान की कमजोरी के विशिष्ट प्रभावों को बताएं, जैसे कि संवेदी हानि, संज्ञानात्मक गिरावट और संतुलन की समस्याएं।
Question 5. 'अस्थिविकृति' ओस्टियोपोरोसिस रोग वृद्धावस्था में ही क्यों होता है?
Answer: वृद्धावस्था में व्यक्ति की अंतःस्रावी ग्रंथियों से निकलने वाले विभिन्न हार्मोनों की मात्रा कम होती चली जाती है। हार्मोनों की कम मात्रा से उनका संतुलन बिगड़ जाता है। जब पैराथाइरॉइड ग्रंथियों से निकलने वाले हार्मोन का स्राव कम हो जाता है, तो इस असंतुलन से बुजुर्गों में अस्थिविकृति रोग, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं, होने की संभावना बढ़ जाती है। इस रोग में हड्डियों से कैल्शियम और फास्फोरस निकलने की दर खनिजीकरण की दर से बहुत ज्यादा हो जाती है। हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और थोड़े से झटके से टूट जाती हैं, जो आसानी से और जल्दी ठीक भी नहीं हो पाती हैं।
In simple words: वृद्धावस्था में हार्मोनों का स्तर कम होने और पैराथाइरॉइड हार्मोन के असंतुलन के कारण हड्डियों से कैल्शियम और फास्फोरस तेजी से निकलने लगते हैं। इससे हड्डियां कमजोर होकर ऑस्टियोपोरोसिस रोग हो जाता है, जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है और वे जल्दी ठीक नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: ऑस्टियोपोरोसिस के कारण के रूप में हार्मोनल असंतुलन और हड्डियों से खनिज हानि के बीच संबंध पर ध्यान केंद्रित करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. वृद्धावस्था में होने वाले आर्थिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
Answer: स्वस्थ और सही होने की स्थिति में ज्यादातर बुजुर्ग शारीरिक रूप से सक्षम होने तक काम करना और रोजगार में बने रहना चाहते हैं। कुछ बुजुर्गों के लिए काम आत्मसम्मान और योग्यता की भावना का आधार होता है, जबकि कुछ इसे प्रतिष्ठा का साधन मानते हैं। कुछ बुजुर्ग काम के द्वारा सामाजिक मेलजोल का आनंद लेना चाहते हैं, जबकि कुछ के लिए काम सिर्फ आजीविका कमाने का एक तरीका होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति की काम करने की क्षमता घटती चली जाती है।
उनकी घटती हुई ताकत और शक्ति उनकी इच्छाशक्ति को कमजोर कर देती है। समाज अब उन्हें काम करने के अवसर देने से कतराने लगता है। सेवानिवृत्ति इसी व्यवस्था का परिणाम है, जो लगभग 60 वर्ष की आयु में दी जाती है। सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्गों को मिलने वाली मासिक आय में काफी कमी आती है और कई जगहों पर तो उन्हें पेंशन भी नहीं मिल पाती है। सेवानिवृत्ति पर जमा किया गया धन भी कई बार बच्चों की शिक्षा और देखभाल में खर्च हो जाता है, ऐसे में अब उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों, जैसे- फल, भोजन, अंडे आदि के लिए भी अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी तरह, व्यवसाय में जमे बुजुर्ग पुरुषों का कार्यभार भी धीरे-धीरे उनके युवा बच्चों द्वारा ले लिया जाता है। इससे बुजुर्ग आर्थिक तंगी के शिकार हो जाते हैं और उनके सामने कई आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। साथ ही, उम्र के प्रभाव से वे बीमारियों से भी ग्रस्त रहते हैं। इन बीमारियों के इलाज के लिए ज्यादा धन की जरूरत होती है। इस प्रकार, एक तरफ तो वृद्धावस्था में आय का साधन खत्म हो जाता है और दूसरी तरफ उनके चिकित्सा संबंधी खर्चे बढ़ जाते हैं। इस कारण से बुजुर्गों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है।
In simple words: वृद्धावस्था में आर्थिक बदलावों में काम करने की क्षमता घटना, सेवानिवृत्ति के बाद आय में कमी आना और बच्चों पर निर्भरता बढ़ना शामिल है। बीमारी के इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे बुजुर्गों को वित्तीय दिक्कतें होती हैं।
🎯 Exam Tip: आर्थिक परिवर्तनों को आय में कमी, खर्चों में वृद्धि और निर्भरता में बदलाव जैसे स्पष्ट बिंदुओं में समझाएं।
Question 2. वृद्धावस्था में वृद्धों की देखभाल किस प्रकार की जानी चाहिए?
Answer: हमारी प्राचीन संस्कृति में बुजुर्ग माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी बेटे-बहू बड़ी कुशलता और मनोयोग से उठाते थे, लेकिन समय और परिस्थितियों में बदलाव आने के कारण बुजुर्गों को परिवार के सदस्य अब बोझ समझने लगे हैं और उनकी देखभाल के लिए उनके पास समय नहीं होता है। अब कई बुजुर्ग अपने परिवार के साथ रहना पसंद नहीं करते हैं। वृद्धावस्था में खुश रहने का मतलब स्वस्थ रहना, आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना, अकेला न रहना, उपेक्षित न रहना और संतुष्ट रहना होता है।
वृद्धावस्था में वृद्धों की देखभाल निम्नलिखित प्रकार से करनी चाहिए -
(1) संतुलित आहार:
बुजुर्गों के शारीरिक परिवर्तनों, स्वास्थ्य और रुचि के अनुसार आहार दिया जाना चाहिए, जिससे उन्हें संतुष्टि मिल सके। यदि वे असंतुष्ट होते हैं, तो वे चिड़चिड़े हो जाते हैं।
(2) पूर्ण विश्राम व निद्रा:
वृद्धावस्था में विश्राम और नींद का महत्व ज्यादा होता है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण बुजुर्गों को पहले से कम नींद आती है। बुजुर्गों का कमरा शोरगुल से दूर होना चाहिए ताकि वे चैन की नींद सो सकें।
(3) आवास:
अपने बनाए घर में ही व्यक्ति को आत्मसंतुष्टि मिलती है। लेकिन कई बार आर्थिक परिस्थितियों और कारणों से घर छोड़ना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बुजुर्गों को नए आवास में खुद को ढालना पड़ता है। यह उनके लिए बहुत मुश्किल होता है। बुजुर्गों का कमरा ठंडा नहीं होना चाहिए और उसमें बड़ी खिड़कियां तथा पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।
(4) चिकित्सा सुविधाएं:
बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता उम्र बढ़ने के साथ कम होती चली जाती है। इसलिए बुजुर्ग जल्दी-जल्दी बीमार होने लगते हैं। उन्हें कई बीमारियां हो जाती हैं। इसलिए उन्हें नियमित चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत होती है। कई बार आर्थिक संकट के कारण वे अपना इलाज नहीं करवा पाते हैं।
(5) सक्रियता:
बुजुर्गों को यदि परिवार के सदस्यों से स्नेह और सम्मान पर्याप्त मात्रा में मिलता रहता है, तो वे सक्रिय रहते हैं। वे परिवार के सभी कामों में सहयोग भी करते रहते हैं। बुजुर्ग अपने खाली समय में छोटे-मोटे काम-धंधे करके धन भी कमा सकते हैं। इस धन से वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे समाज सेवा के कामों में भी सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। इससे उन्हें खुशी और उद्देश्य मिलता है।
In simple words: बुजुर्गों की देखभाल के लिए उन्हें संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और शांत कमरा देना चाहिए। नियमित चिकित्सा सहायता और परिवार का स्नेह व सम्मान बहुत जरूरी है। उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय रहने और अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था की देखभाल को एक समग्र दृष्टिकोण से समझाएं, जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सहायता शामिल हो।
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