RBSE Solutions Class 12 Home Science Chapter 26 शोधक पदार्थ

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Detailed Chapter 26 शोधक पदार्थ RBSE Solutions for Class 12 Home Science

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Class 12 Home Science Chapter 26 शोधक पदार्थ RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 शोधक पदार्थ

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) गंदे वस्त्रों की धुलाई के लिए इस्तेमाल होते हैं –
(अ) नील
(ब) कलफ
(स) विरंजक
(द) शोधक पदार्थ
Answer: (ब) कलफ
In simple words: कलफ एक पदार्थ है जिसका उपयोग गंदे कपड़ों को धोने के लिए किया जाता है ताकि वे साफ और कड़े हो जाएँ।

🎯 Exam Tip: कपड़ों की धुलाई के लिए विभिन्न पदार्थों का उपयोग उनके प्रकार और अपेक्षित परिणाम के अनुसार किया जाता है। कलफ विशेष रूप से कपड़ों को कड़ा करने और नया दिखाने के लिए होता है।

 

प्रश्न 1. (ii) कठोर व मृदु जल में क्रियाशीलता कम हो जाती है वो –
(अ) अपमार्जक
(ब) साबुन
(स) सोडियम सिलिकेट
(द) सोडा ऐश
Answer: (ब) साबुन
In simple words: साबुन कठोर पानी में ठीक से काम नहीं कर पाता क्योंकि वह झाग नहीं बनाता और सफाई भी कम करता है।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि साबुन और अपमार्जक दोनों की जल के प्रकार के साथ अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ होती हैं। कठोर जल में साबुन की प्रभावशीलता कम हो जाती है, जिससे सफाई कम होती है।

 

प्रश्न 1. (iii) प्राणिज वसा से बने शोधक होते हैं –
(अ) वनस्पति वसा
(ब) रसायन
(स) प्राणिज वसा
(द) ये सभी
Answer: (स) प्राणिज वसा
In simple words: प्राणिज वसा से बने शोधक वे होते हैं जिनमें जानवरों की चर्बी का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: शोधक पदार्थों के निर्माण में उपयोग होने वाले मुख्य घटकों को जानें, जैसे कि प्राणिज वसा या वनस्पति वसा, क्योंकि ये उनके गुणों को निर्धारित करते हैं।

 

प्रश्न 1. (iv) अधिक आर्द्रक क्षमता वाले शोधक हैं –
(अ) साबुन
(ब) नील
(स) विरंजक
(द) अपमार्जक
Answer: (द) अपमार्जक
In simple words: अपमार्जक में बहुत अधिक आर्द्रक क्षमता होती है, जिसका मतलब है कि वे पानी को अच्छे से सोखते हैं और सफाई करने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: आर्द्रक क्षमता का अर्थ और इसका शोधक पदार्थों के लिए महत्व समझें, क्योंकि यह सफाई प्रक्रिया में उनकी प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करती है।

 

प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(i) ...... एवं ....... जल में समान रूप से क्रियाशील होते हैं।
(ii) वसा व क्षार ...... निर्माण के मुख्य अंग हैं।
(iii) डिटर्जेंट जल के सतही दबाव को ...... करते हैं।
(iv) अपमार्जकों के प्रमुख ....... संघटक हैं।
Answer:
(i) कठोर एवं मृदु
(ii) साबुन
(iii) कम
(iv) छः
In simple words: कठोर और मृदु पानी में एक जैसे काम करने वाले पदार्थ अपमार्जक होते हैं। साबुन, वसा और क्षार से बनता है। डिटर्जेंट पानी के ऊपरी दबाव को कम करता है, जिससे वह अच्छे से सफाई कर पाता है। अपमार्जक बनाने के लिए छह मुख्य चीजें इस्तेमाल होती हैं।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, यह सुनिश्चित करें कि आपके उत्तर विषय के मुख्य सिद्धांतों से मेल खाते हों और रासायनिक प्रक्रियाओं और पदार्थों के गुणों को सही ढंग से दर्शाते हों।

 

प्रश्न 3. शोधक पदार्थ किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: शोधक पदार्थ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनका उपयोग कपड़ों पर लगे मैल, धूल, दाग और चिकनाई को हटाने के लिए किया जाता है। ये कपड़े को साफ, सफेद, चमकदार, नया और ताजा बनाते हैं। ये गंदगी को घोलने या हटाने में मदद करते हैं, जिससे कपड़े पहनने लायक हो जाते हैं।
In simple words: शोधक पदार्थ वे होते हैं जो कपड़ों को साफ करके उनमें लगी गंदगी और दाग हटाते हैं, जिससे कपड़े स्वच्छ और चमकदार दिखें।

🎯 Exam Tip: शोधक पदार्थों की परिभाषा बताते समय, उनके मुख्य कार्य और उनके उपयोग से प्राप्त होने वाले परिणामों को स्पष्ट रूप से शामिल करें।

 

प्रश्न 5. उत्तम साबुन व डिटर्जेण्ट के गुण बताइए।
Answer:
(1) उत्तम साबुन के गुण –
• साबुन में क्षार नहीं होना चाहिए।
• साबुन चिकना और मुलायम होना चाहिए।
• उपयोग करने पर साबुन नहीं चटकना चाहिए।
• साबुन एल्कोहल में घुलनशील होना चाहिए।
• अच्छे साबुन में 30 प्रतिशत पानी और 61-65 प्रतिशत वसा अम्ल होते हैं।
(2) उत्तम डिटर्जेंट के गुण –
• अच्छे अपमार्जक में क्षार नहीं होता है।
• ये ठंडे और गर्म, कठोर और मृदु दोनों तरह के पानी में समान रूप से काम करते हैं।
• डिटर्जेंट में अधिक आर्द्रक क्षमता होती है।
• ये हाथों की सुरक्षा करते हैं।
In simple words: एक अच्छे साबुन में क्षार नहीं होता, वह चिकना और मुलायम होता है, उपयोग करने पर टूटता नहीं और एल्कोहल में घुल जाता है। इसमें सही मात्रा में पानी और वसीय अम्ल होते हैं। एक अच्छा डिटर्जेंट भी क्षार रहित होता है, हर तरह के पानी में काम करता है, उसकी सफाई करने की शक्ति ज्यादा होती है और वह हाथों को नुकसान नहीं पहुँचाता।

🎯 Exam Tip: साबुन और डिटर्जेंट के गुणों को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें। उनके मुख्य घटकों और जल के विभिन्न प्रकारों में उनकी प्रतिक्रिया का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 6. साबुन की विशेषता बताते हुए इनका वर्गीकरण कीजिए।
Answer:
साबुन की विशेषताएँ:
• कपड़े धोने के लिए साबुन सबसे आम शोधक पदार्थ है।
• यह कपड़ों की सतह से गंदगी को आसानी से हटा देता है।
• साबुन वसा अम्ल और क्षार से मिलकर बनता है।
• साबुन पानी में जल्दी घुल जाता है और खूब झाग बनाता है।
• अच्छी गुणवत्ता वाला साबुन त्वचा और कपड़ों पर मुलायम और चिकना होता है।
साबुन का वर्गीकरण:
उपयोग के आधार पर साबुन 5 प्रकार के होते हैं –
1. कपड़े धोने का साबुन – यह कास्टिक सोडे से बनता है और कठोर होता है।
2. नहाने का साबुन – यह कॉस्टिक पोटाश से बनता है और इसमें सुगंध व रंग मिलाया जाता है।
3. विसंक्रामक साबुन – जब साबुन में लेड ओलिएट मिलाया जाता है, तो यह कीटाणुनाशक का काम करता है।
4. दाढ़ी बनाने का साबुन – इसमें ग्लिसरीन, रेजिन और गोंद जैसे पदार्थ होते हैं, जिससे झाग देर तक नहीं सूखता। इसे दाढ़ी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
5. पारदर्शी साबुन – यह साधारण साबुन को एल्कोहल में घोलकर और फिर एल्कोहल को वाष्पित करके बनाया जाता है।
In simple words: साबुन गंदगी साफ करता है, वसा और क्षार से बनता है, पानी में घुलता है और कपड़ों को मुलायम बनाता है। यह पांच तरह का होता है: कपड़े धोने वाला (कठोर), नहाने वाला (सुगंधित), कीटाणुनाशक (लेड ओलिएट मिलाया जाता है), दाढ़ी बनाने वाला (झाग को देर तक बनाए रखता है), और पारदर्शी (एल्कोहल से बनता है)।

🎯 Exam Tip: साबुन की विशेषताओं का वर्णन करते समय, उसके रासायनिक संरचना और सफाई क्षमता पर ध्यान दें। वर्गीकरण में प्रत्येक प्रकार के साबुन की मुख्य पहचान और उपयोग को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 7. अपमार्जक एवं साबुन की कार्यप्रणाली बताइए।
Answer: साबुन और अपमार्जक दोनों कपड़ों को साफ करने के लिए पानी में मिलकर काम करते हैं। जब साबुन या अपमार्जक पानी में घुलते हैं, तो वे अपनी रासायनिक संरचना के कारण कपड़ों पर लगी चिकनाई, मैल और गंदगी के छोटे-छोटे कणों को तोड़ देते हैं। ये कण पानी में तैरने लगते हैं या कपड़ों से अलग होकर पानी में मिल जाते हैं। फिर जब कपड़ों को साफ पानी में धोया जाता है, तो ये गंदगी के कण पानी के साथ निकल जाते हैं और कपड़े साफ हो जाते हैं। साबुन विशेष रूप से वसा और क्षार से बनता है और चिकनाई को हटाने में प्रभावी होता है, जबकि अपमार्जक अक्सर सिंथेटिक होते हैं और कठोर जल में भी अच्छे से काम करते हैं।
In simple words: साबुन और अपमार्जक पानी में मिलकर कपड़ों से गंदगी हटाते हैं। वे चिकनाई और मैल को छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं, जो पानी के साथ बह जाते हैं, जिससे कपड़े साफ हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: कार्यप्रणाली समझाते समय, यह महत्वपूर्ण है कि आप साबुन और अपमार्जक के पानी के साथ मिलकर गंदगी हटाने की प्रक्रिया को स्पष्ट करें। उनके रासायनिक घटकों और उनके कार्य करने के तरीके को सरल शब्दों में बताएं।

 

प्रश्न 8. साबुन का संगठन बताइए।
Answer: साबुन मुख्य रूप से वसा और क्षार से बनता है। वसा पशुओं या पौधों से प्राप्त हो सकती है, और क्षार आमतौर पर कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) या कास्टिक पोटाश (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) होता है। इसके अलावा, साबुन की मात्रा बढ़ाने, उसे ठोस बनाने और भराव के लिए इसमें सोडियम सिलिकेट, फ्रेंच चॉक (सोप स्टोन), स्टार्च, नमक और रेजिन जैसे पदार्थ भी मिलाए जाते हैं। ये अतिरिक्त सामग्री साबुन के गुणों को भी प्रभावित करती हैं, जैसे कि झाग की मात्रा और कठोरता।
In simple words: साबुन वसा (जैसे तेल) और क्षार (जैसे कास्टिक सोडा) से बनता है। इसमें कभी-कभी सोडियम सिलिकेट, स्टार्च और नमक जैसे दूसरे पदार्थ भी मिलाए जाते हैं ताकि यह ज्यादा बने और ठोस हो।

🎯 Exam Tip: साबुन के संगठन का वर्णन करते समय, उसके मुख्य घटक (वसा और क्षार) और सहायक घटक (जैसे फिलर्स) दोनों को शामिल करें, और उनके उद्देश्य को स्पष्ट करें।

 

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. वस्त्रों की धुलाई के लिए सर्वाधिक प्रचलित शोधक पदार्थ है -
(अ) साबुन
(ब) डिटर्जेण्ट
(स) साबुन की जेली
(द) सर्फ पाउडर
Answer: (अ) साबुन
In simple words: कपड़ों की धुलाई के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला पदार्थ साबुन है।

🎯 Exam Tip: सबसे आम या प्रचलित विकल्पों की पहचान करने के लिए सामान्य ज्ञान और अभ्यास का उपयोग करें।

 

प्रश्न 2. मृदु साबुन बनाने में प्रयुक्त होता है –
(अ) कास्टिक सोडा
(ब) कास्टिक पोटाश
(स) कास्टिक सोडा व कास्टिक पोटाश
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) कास्टिक पोटाश
In simple words: मुलायम साबुन बनाने के लिए कास्टिक पोटाश का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के साबुनों के निर्माण में उपयोग होने वाले क्षार के प्रकार को याद रखें, क्योंकि यह साबुन की कठोरता या मृदुता को निर्धारित करता है।

 

प्रश्न 3. सामान्य धुलाई के लिए साबुन में जल की मात्रा कितनी होती है?
(अ) 10 – 15 प्रतिशत
(ब) 20 – 25 प्रतिशत
(स) 15 – 20 प्रतिशत
(द) 25 – 30 प्रतिशत
Answer: (स) 15 – 20 प्रतिशत
In simple words: आम तौर पर कपड़े धोने वाले साबुन में 15 से 20 प्रतिशत तक पानी होता है।

🎯 Exam Tip: साबुन के निर्माण में विभिन्न घटकों की सही प्रतिशत मात्राओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसके गुणों को प्रभावित करता है।

 

प्रश्न 4. अपमार्जक का निर्माण हुआ है –
(अ) 1807 में
(ब) 1897 में
(स) 1997 में
(द) 1907 में
Answer: (द) 1907 में
In simple words: अपमार्जक का आविष्कार वर्ष 1907 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों को याद रखें, जैसे कि किसी प्रमुख उत्पाद का आविष्कार वर्ष।

 

प्रश्न 5. साबुन निर्माण की प्रक्रिया में स्टार्च पाउडर के रूप में मिलाया जाता है
(अ) मैदा
(ब) अरारोट
(स) बेसन
(द) ये तीनों
Answer: (द) ये तीनों
In simple words: साबुन बनाने में स्टार्च पाउडर के तौर पर मैदा, अरारोट और बेसन तीनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

🎯 Exam Tip: साबुन बनाने में उपयोग होने वाले विभिन्न भराव पदार्थों और उनके उद्देश्यों को जानें, जैसे कि स्टार्च पाउडर के रूप में मैदा, अरारोट या बेसन।

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. साबुन वस्त्रों की सतह से आसानी से ..........हटाने में सक्षम है।
2. साबुन को आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न .......... व रंगों का प्रयोग किया जाता है।
3. वसा का प्रमुख भाग वसीय अम्ल तथा .......... होता है।
4. द्वितीय श्रेणी के अपमार्जकों में .......... नहीं की जा सकती है।
5. अकार्बनिक वर्ग के निर्माण तत्त्व मुख्यतः .......... होते हैं।
6. अपमार्जक अत्यधिक .......... क्षमता वाले होते हैं।
Answer:
1. गंदगी
2. सुगंध
3. ग्लिसरीन
4. मिलावट
5. सोडियम सिलिकेट
6. आर्द्रक
In simple words: साबुन कपड़ों से गंदगी आसानी से हटाता है। इसे सुंदर बनाने के लिए सुगंध और रंग मिलाए जाते हैं। साबुन का मुख्य वसीय अम्ल ग्लिसरीन होता है। अच्छी गुणवत्ता वाले अपमार्जकों में मिलावट नहीं होती। सोडियम सिलिकेट अकार्बनिक अपमार्जक बनाने में काम आता है। अपमार्जक बहुत अच्छी तरह से पानी को सोखते और साफ करते हैं।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, सुनिश्चित करें कि आप उन विशिष्ट शब्दों का उपयोग करें जो वाक्य के संदर्भ में सही अर्थ देते हों और तकनीकी रूप से सटीक हों।

 

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. वस्त्रों में शोधक पदार्थों का प्रयोग क्यों किया जाता है?
Answer: वस्त्रों को फिर से पहनने लायक बनाने के लिए, यानी उन्हें साफ-सुथरा, स्वच्छ और दाग रहित बनाने के लिए शोधक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। ये कपड़े से गंदगी और दाग हटाने में मदद करते हैं।
In simple words: कपड़ों को साफ और दाग-धब्बे रहित बनाने के लिए शोधक पदार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि उन्हें फिर से पहना जा सके।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में शोधक पदार्थों के प्राथमिक कार्य और उनके उपयोग से प्राप्त होने वाले परिणाम को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 2. शोधक पदार्थ कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: शोधक पदार्थ कई प्रकार के होते हैं, जैसे-साबुन, डिटर्जेण्ट, रीठे का सत, चोकर और समुद्री झाग। इन सभी का उपयोग सफाई के अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है।
In simple words: शोधक पदार्थ कई तरह के होते हैं, जैसे साबुन, डिटर्जेंट, रीठा, चोकर और समुद्री झाग।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के शोधक पदार्थों के कुछ उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि यह आपके उत्तर को अधिक व्यापक बनाता है।

 

प्रश्न 3. सर्वाधिक लोकप्रिय शोधक पदार्थ कौन-सा है?
Answer: 'साबुन' सर्वाधिक लोकप्रिय शोधक पदार्थ है। यह सदियों से घरों में इस्तेमाल होता आ रहा है और इसकी पहुंच तथा उपयोगिता इसे सबसे पसंदीदा बनाती है।
In simple words: साबुन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला और पसंद किया जाने वाला सफाई का पदार्थ है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में सीधा और सटीक उत्तर दें। लोकप्रिय शोधक पदार्थ का नाम सीधे बताएं।

 

प्रश्न 4. साबुन के निर्माण में मुख्यतः किसका प्रयोग किया जाता है?
Answer: साबुन के निर्माण में मुख्यत: वसा और क्षार का प्रयोग किया जाता है। वसा साबुन को उसका चिकनापन देती है, जबकि क्षार रासायनिक प्रतिक्रिया करके उसे ठोस रूप में बदलता है।
In simple words: साबुन बनाने के लिए मुख्य रूप से वसा और क्षार का उपयोग होता है।

🎯 Exam Tip: साबुन बनाने के लिए आवश्यक दो मुख्य घटकों (वसा और क्षार) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 5. साबुन की मात्रा को बढ़ाने एवं ठोस बनाने के लिए किन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है?
Answer: साबुन की मात्रा को बढ़ाने और उसे ठोस बनाने के लिए सोडियम सिलिकेट, फ्रेंच चॉक, सोप स्टोन, स्टार्च एवं रेजिन आदि का प्रयोग किया जाता है। ये पदार्थ साबुन को अधिक किफायती भी बनाते हैं।
In simple words: साबुन को ज्यादा बनाने और ठोस करने के लिए सोडियम सिलिकेट, फ्रेंच चॉक, सोप स्टोन, स्टार्च और रेजिन जैसे पदार्थ मिलाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन में मिलाए जाने वाले भराव पदार्थों और उनके उद्देश्यों (जैसे मात्रा बढ़ाना और ठोस बनाना) को याद रखें।

 

प्रश्न 6. साबुन बनाने के लिए किस प्रकार की वसा का प्रयोग किया जाता है ?
Answer: साबुन बनाने के लिए प्राणिज और वनस्पतिज दोनों स्रोतों से प्राप्त वसा का प्रयोग किया जाता है। प्राणिज वसा में जानवरों की चर्बी और वनस्पतिज वसा में विभिन्न प्रकार के तेल (जैसे नारियल, जैतून, मूंगफली का तेल) शामिल होते हैं।
In simple words: साबुन बनाने के लिए जानवरों की चर्बी और पौधों के तेल, दोनों तरह की वसा का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: साबुन बनाने में उपयोग होने वाले वसा के दो मुख्य स्रोतों (प्राणिज और वनस्पतिज) को पहचानें।

 

प्रश्न 8. साबुन में कड़ापन लाने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है?
Answer: साबुन में कड़ापन लाने के लिए 2 – 4% मात्रा में स्टार्च मिलायी जाती है। यदि स्टार्च की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो साबुन और कठोर हो जाता है और उसका वजन भी बढ़ जाता है। ऐसे साबुन कम प्रभावी होते हैं।
In simple words: साबुन को कड़ा बनाने के लिए उसमें थोड़ी मात्रा में स्टार्च मिलाया जाता है।

🎯 Exam Tip: साबुन की बनावट को प्रभावित करने वाले घटकों को जानें, जैसे कड़ापन के लिए स्टार्च का उपयोग, और उसकी सही मात्रा के महत्व को समझें।

 

प्रश्न 9. साबुन की लागत कम करने के लिए किस क्षार का प्रयोग किया जाता है?
Answer: साबुन की लागत कम करने के लिए रेजिन का प्रयोग साबुन बनाने में किया जाता है। रेजिन मिलाने से सफेद कपड़ों में पीलापन आ सकता है, लेकिन इससे साबुन की मात्रा और आकार बढ़ जाता है।
In simple words: साबुन सस्ता बनाने के लिए उसमें रेजिन मिलाया जाता है, जिससे उसकी मात्रा बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: साबुन के निर्माण में लागत कम करने वाले घटकों को पहचानें और समझें कि वे उत्पाद के गुणों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

 

प्रश्न 10. डिटर्जेण्ट का निर्माण सर्वप्रथम कब किया गया ?
Answer: सर्वप्रथम सन् 1907 में डिटर्जेण्ट का निर्माण किया गया। यह एक महत्वपूर्ण रासायनिक आविष्कार था जिसने सफाई उत्पादों में क्रांति ला दी।
In simple words: डिटर्जेंट सबसे पहले साल 1907 में बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट के आविष्कार का वर्ष जैसे प्रमुख ऐतिहासिक तथ्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 11. सोडियम सिलिकेट का डिटर्जेण्ट में क्या महत्त्व है?
Answer: सोडियम सिलिकेट का उपयोग डिटर्जेण्ट में वाशिंग मशीन के पुर्जों की सुरक्षा और धुलाई के बर्तनों की सुरक्षा करता है। यह मशीन के धातु के हिस्सों को जंग लगने से बचाता है और पानी को मुलायम बनाने में भी मदद करता है।
In simple words: डिटर्जेंट में सोडियम सिलिकेट मशीनों और बर्तनों को जंग से बचाता है और सफाई में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट में सोडियम सिलिकेट के दोहरे महत्व (मशीन की सुरक्षा और सफाई में सहायता) को समझें।

 

प्रश्न 12. डिटर्जेण्ट का अत्यधिक प्रयोग वातावरण के लिए क्यों हानिकारक है?
Answer: डिटर्जेण्ट के अत्यधिक प्रयोग से जल प्रदूषण उत्पन्न होता है और यह पारितंत्र में सूक्ष्मजीवों पर बुरा प्रभाव डालता है। डिटर्जेंट में मौजूद रसायन पानी में घुलने से जलीय जीवन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
In simple words: बहुत ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने से पानी गंदा होता है और पर्यावरण में छोटे जीवों को नुकसान पहुँचता है, जो प्रकृति के लिए बुरा है।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट के पर्यावरणीय प्रभावों को स्पष्ट करें, विशेष रूप से जल प्रदूषण और सूक्ष्मजीवों पर इसके नकारात्मक प्रभाव पर ध्यान दें।

 

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 लघूत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. साबुन निर्माण में क्षार का क्या महत्त्व है?
Answer: साबुन निर्माण में क्षार एक बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ है। क्षार के लिए मुख्य रूप से कॉस्टिक सोडे (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) या कॉस्टिक पोटाश (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) का प्रयोग किया जाता है। क्षार वसा के साथ प्रतिक्रिया करके साबुन बनाता है, जिसे साबुनीकरण की प्रक्रिया कहते हैं। कॉस्टिक पोटाश साबुन को नरम और अधिक झाग वाला बनाता है, जिसका उपयोग घरेलू साबुन में अधिक होता है, जबकि कॉस्टिक सोडा कठोर साबुन बनाता है।
In simple words: साबुन बनाने के लिए क्षार (कास्टिक सोडा या पोटाश) बहुत जरूरी है। यह वसा के साथ मिलकर साबुन बनाता है और यह तय करता है कि साबुन नरम होगा या कठोर।

🎯 Exam Tip: साबुन के निर्माण में क्षार की भूमिका को स्पष्ट करें, जिसमें साबुनीकरण की प्रक्रिया और विभिन्न प्रकार के क्षार (सोडा और पोटाश) के उपयोग से होने वाले प्रभाव शामिल हैं।

 

प्रश्न 2. प्राणिज वसा एवं वनस्पतिज वसा से निर्मित साबुन में क्या अन्तर है?
Answer: प्राणिज वसा से बने साबुन और वनस्पतिज वसा से बने साबुन में मुख्य अंतर यह है कि प्राणिज वसा (जैसे जानवरों की चर्बी) से बना साबुन कम झाग देता है, लेकिन उसकी सफाई करने की क्षमता अच्छी होती है। वहीं, वनस्पतिज वसा (जैसे पौधों के तेल) से बना साबुन अधिक झाग देता है, उसकी धुलाई क्षमता भी अच्छी होती है, और वे आमतौर पर कम दाम के होते हैं।
In simple words: जानवरों की चर्बी से बना साबुन कम झाग देता है पर साफ अच्छा करता है, जबकि पौधों के तेल से बना साबुन ज्यादा झाग देता है, साफ भी अच्छा करता है और सस्ता होता है।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार की वसा से बने साबुनों के बीच मुख्य अंतरों को स्पष्ट करें, जैसे झाग की मात्रा, सफाई क्षमता और लागत, क्योंकि ये उनकी उपयोगिता को प्रभावित करते हैं।

 

प्रश्न 3. उत्तम साबुन के गुण बताइये।
Answer: एक उत्तम साबुन के निम्नलिखित गुण होते हैं:
• उत्तम साबुन पानी में जल्दी घुल जाता है।
• इसमें क्षार और रेजिन की मात्रा अधिक नहीं होती, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित रहता है।
• उत्तम साबुन में 30 प्रतिशत पानी और 61-64 प्रतिशत वसीय अम्ल होते हैं, जो उसकी गुणवत्ता को बनाए रखते हैं।
• यह चिकना और मुलायम होता है, उपयोग करने पर चटकता नहीं।
In simple words: एक अच्छा साबुन पानी में जल्दी घुलता है, उसमें कम क्षार और रेजिन होता है, सही मात्रा में पानी और वसा होती है, और वह चिकना व मजबूत होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तम साबुन के गुणों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें, जिसमें उसकी घुलनशीलता, क्षार की मात्रा, रासायनिक संरचना और उपयोग संबंधी विशेषताएं शामिल हों।

 

प्रश्न 4. डिटर्जेण्ट किसे कहते हैं ?
Answer: डिटर्जेंट एक विशेष प्रकार के कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जिनमें साबुन के समान ही सफाई करने की क्षमता होती है, लेकिन ये स्वयं साबुन नहीं होते। ये कठोर जल के साथ भी खूब झाग देते हैं। साधारण अपमार्जक को सोडियम लौरिल सल्फेट कहते हैं। इनका उपयोग महंगे कपड़ों, कांच, स्टील के बर्तनों, सनमाइका के फर्नीचर आदि को साफ करने के लिए किया जाता है, क्योंकि ये कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं।
In simple words: डिटर्जेंट खास रासायनिक पदार्थ होते हैं जो साबुन की तरह साफ करते हैं, पर साबुन नहीं होते। ये कठोर पानी में भी अच्छे झाग बनाते हैं और महंगे कपड़े, कांच आदि साफ करने में काम आते हैं।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट की परिभाषा बताते समय, साबुन से उसके अंतर और कठोर जल में उसकी प्रभावशीलता पर विशेष ध्यान दें।

 

प्रश्न 5. बाजार में डिटर्जेण्ट कितने रूपों में मिलता है?
Answer: बाजार में डिटर्जेण्ट निम्नलिखित तीन रूपों में मिलता है –
• डिटर्जेण्ट पाउडर: यह सबसे सामान्य रूप है, जिसे कपड़ों की धुलाई के लिए पानी में घोला जाता है।
• डिटर्जेण्ट केक: यह ठोस रूप में होता है और सीधे कपड़ों पर रगड़कर उपयोग किया जाता है।
• तरल डिटर्जेण्ट: यह तरल अवस्था में होता है और इसे पानी में मिलाकर या सीधे दाग पर लगाकर उपयोग किया जाता है।
In simple words: डिटर्जेंट बाजार में तीन तरह से मिलता है: पाउडर, टिकिया (केक) और तरल रूप में।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट के विभिन्न रूपों को याद रखें और प्रत्येक के उपयोग को संक्षेप में बताएं।

 

प्रश्न 6. डिटर्जेण्ट बनाने में कौन-कौन से पदार्थ प्रयुक्त किये जाते हैं ?
Answer: डिटर्जेण्ट बनाने में कई पदार्थ प्रयुक्त किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:
• कॉस्टिक सोडा: यह एक महत्वपूर्ण क्षार है जो डिटर्जेंट के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है।
• सोडियम एश एवं सोडा बाई कार्ब: इनका उपयोग डिटर्जेंट के भार को बढ़ाने और सफाई क्षमता में सुधार के लिए किया जाता है।
• सोडियम सिलिकेट का बारीक बुरादा: यह डिटर्जेंट को ठोस बनाने और मशीनों को जंग से बचाने में मदद करता है।
• सोडियम ट्राई पॉली फॉस्फेट: यह पानी को मुलायम बनाने और सफाई क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है।
• रेजिन: यह डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाता है और उसे ठोस बनाता है।
• व्हाइटनर और फोम बूस्टर: ये डिटर्जेंट की सफेदी और झाग उत्पन्न करने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
• सुगंधित पदार्थ: ये डिटर्जेंट को खुशबूदार बनाते हैं, जिससे कपड़े धोने के बाद अच्छी महक आती है।
In simple words: डिटर्जेंट बनाने में कॉस्टिक सोडा, सोडा एश, सोडियम सिलिकेट, सोडियम ट्राई पॉली फॉस्फेट, रेजिन, व्हाइटनर, फोम बूस्टर और खुशबू वाले पदार्थ इस्तेमाल होते हैं।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट बनाने में उपयोग होने वाले प्रमुख पदार्थों और प्रत्येक घटक के कार्य को याद रखें। यह उनके कार्यों को समझने में मदद करेगा।

 

प्रश्न 7. साबुन किसे कहते हैं?
Answer: साबुन वे पदार्थ हैं जिनका उपयोग हम रोज कपड़े धोने और नहाने के लिए करते हैं। मनुष्य को साबुन का ज्ञान लगभग 2000 साल पहले से है। पुराने समय में रोम के लोग बकरी की चर्बी और करेन्ज की लकड़ी की राख से साबुन बनाते थे। आज हम जिस साबुन का उपयोग करते हैं, वह पुराने समय के साबुन से अधिक सुधरा हुआ रूप है। यह सबसे लोकप्रिय शोधक पदार्थ है, जो क्षार के वसा के साथ मिलकर बनता है। हम कह सकते हैं कि किसी भी वसा या तेल को कॉस्टिक क्षार के साथ गर्म करने पर प्राप्त ग्लिसरीन और सोडियम लवण को साबुन कहते हैं। यह प्रक्रिया साबुनीकरण कहलाती है।
In simple words: साबुन वह चीज है जिससे हम रोज नहाते और कपड़े धोते हैं। यह वसा और क्षार को मिलाकर बनता है। यह गंदगी साफ करने वाला सबसे जाना-माना पदार्थ है।

🎯 Exam Tip: साबुन की परिभाषा में उसके मुख्य घटकों (वसा और क्षार) और निर्माण प्रक्रिया (साबुनीकरण) को शामिल करें। इसके ऐतिहासिक महत्व को भी संक्षेप में बताएं।

 

प्रश्न 8. नहाने के साबुन एवं कपड़े धोने के साबुन में अन्तर लिखिए।
Answer:

नहाने का साबुनकपड़े धोने का साबुन
1. यह कॉस्टिक पोटाश से बनता है।1. यह कॉस्टिक सोडे से बनता है।
2. यह नरम होता है।2. यह कठोर होता है।
3. इसमें सुगन्ध व रंग मिले रहते हैं।3. इसमें सुगन्ध व रंग की कोई आवश्यकता नहीं रहती है।
4. इसमें कीटाणुनाशक पदार्थ मिलाए जा सकते हैं।4. इसमें कीटाणुनाशक पदार्थ मिलाने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
5. इसमें भार बढ़ाने वाले पदार्थ जैसे - सिलिकेट आदि नहीं मिलाया जाता है।5. इसमें भार बढ़ाने वाले पदार्थ जैसे - सिलिकेट आदि मिलाया जाता है।

In simple words: नहाने का साबुन पोटाश से बनता है, नरम होता है, खुशबूदार होता है और इसमें कीटाणुनाशक मिलाए जा सकते हैं। कपड़े धोने का साबुन सोडे से बनता है, कठोर होता है, बिना खुशबू के होता है और इसमें वजन बढ़ाने वाले पदार्थ मिलाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के साबुनों के बीच अंतर को स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करें, जिसमें उनके मुख्य घटक, कठोरता, सुगंध और अन्य विशेषताओं का उल्लेख हो।

 

प्रश्न 9. मृदु साबुन एवं कठोर साबुन में अन्तर बताइये।
Answer:

मृदु साबुनकठोर साबुन
1. धुलाई में कम साबुन, कम समय एवं कम श्रम लगता है।1. धुलाई में अधिक साबुन, अधिक समय व अधिक श्रम की आवश्यकता होती है।
2. ठंडी विधि द्वारा बनाये जाते हैं।2. गर्म विधि द्वारा बनाये जाते हैं।
3. ऊनी, रेशमी एवं पतले वस्त्रों की धुलाई हेतु उत्तम हैं।3. मोटे एवं खुरदरे वस्त्रों की धुलाई हेतु उत्तम होता है।
4. जल में शीघ्रता से घुल जाते हैं।4. जल में देरी से घुलते हैं।
5. अधिक झाग उत्पन्न करते हैं।5. कम झाग उत्पन्न करते हैं।
6. हल्के क्षार एवं हल्के वसा (जैतून व लिनसीड तेल) के प्रयोग से बनाये जाते हैं।6. तीव्र क्षार एवं कठोर वसा के प्रयोग से बनाये जाते हैं।

In simple words: मृदु साबुन से कपड़े धोने में कम साबुन, समय और मेहनत लगती है, यह ठंडी विधि से बनता है, ऊनी और रेशमी कपड़ों के लिए अच्छा है, पानी में जल्दी घुलता है और ज्यादा झाग देता है। कठोर साबुन से कपड़े धोने में ज्यादा साबुन, समय और मेहनत लगती है, यह गर्म विधि से बनता है, मोटे कपड़ों के लिए अच्छा है, पानी में धीरे घुलता है और कम झाग देता है। मृदु साबुन हल्के क्षार और वसा से, जबकि कठोर साबुन तीव्र क्षार और वसा से बनता है।

🎯 Exam Tip: मृदु और कठोर साबुन के बीच तुलना करते समय, निर्माण विधि, उपयोगिता, घुलनशीलता और झाग उत्पन्न करने की क्षमता जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. साबुन के निर्माण में प्रयोग होने वाले मुख्य पदार्थों का वर्णन कीजिए।
Answer: साबुन के निर्माण में प्रयोग होने वाले मुख्य पदार्थ निम्नलिखित हैं:
1. क्षार: क्षार साबुन बनाने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ है। इसमें मुख्य रूप से कॉस्टिक सोडा (NaOH) या कॉस्टिक पोटाश (KOH) का उपयोग किया जाता है। ये दोनों पदार्थ बाजार में बट्टी, तरल या पपड़ी के रूप में मिलते हैं। कॉस्टिक पोटाश का उपयोग साबुन को नरम और अधिक झागयुक्त बनाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग घरेलू साबुन के निर्माण में अधिक होता है।
2. वसा: साबुन का मुख्य घटक वसा या तेल होते हैं, जो प्राणिज या वनस्पतिज स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
• जन्तुजन्य वसा: साबुन बनाने में लॉर्ड और टेलो वसा का उपयोग किया जाता है, जिनमें वसीय अम्ल होते हैं। ये वसीय अम्ल साबुन की बनावट को एक समान बनाते हैं। इस प्रकार के साबुन में झाग कम होता है लेकिन धुलाई अच्छी होती है।
• वनस्पतिजन्य वसा: वनस्पतिज वसा में महुआ, सोयाबीन, कपास के बीज, नारियल तेल, मूंगफली, जैतून, अरण्डी, रतनजोत जैसे तेल प्रमुख रूप से उपयोग किए जाते हैं। वनस्पतिज वसा युक्त साबुनों की धुलाई क्षमता अधिक होती है और ये अधिक झाग देते हैं। ये साबुन कम मूल्य के भी होते हैं।
3. सोप स्टोन: साबुन निर्माण में 15 - 20% तक सोप स्टोन का प्रयोग किया जाता है। सोप स्टोन में कोई सफाई का गुण नहीं होता। इसका प्रयोग केवल साबुन की मात्रा बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह साबुन की मात्रा और भार में वृद्धि करता है, जिससे साबुन का लागत मूल्य कम हो जाता है।
4. रेजिन: रेजिन का प्रयोग साबुन निर्माण की लागत कम करने के लिए किया जाता है। यह साबुन की मात्रा और आकार में वृद्धि करता है। रेजिन की उपस्थिति वाले साबुन का प्रयोग करने से सफेद कपड़ों में पीलापन आ सकता है।
5. स्टार्च: साबुन में कड़ापन लाने के लिए 2 - 4% स्टार्च की मात्रा का प्रयोग किया जाता है। स्टार्च की मात्रा अधिक हो जाने पर साबुन का वजन बढ़ जाता है और वह अधिक कठोर हो जाता है। इस प्रकार के साबुन में सफाई का गुण कम होता है और ऐसे साबुन कम प्रभावी होते हैं।
6. सोडियम सिलिकेट: सोडियम सिलिकेट एक क्षारीय पदार्थ है जो कांच जैसा दिखता है। यह एक उत्तम शोधक पदार्थ है जो ठोस तथा तरल दोनों रूपों में मिलता है। सोडियम सिलिकेट का अधिक मात्रा में प्रयोग साबुन को जल्दी गला देता है।
In simple words: साबुन बनाने के लिए क्षार (कास्टिक सोडा या पोटाश), वसा (जानवरों की चर्बी या पौधों के तेल), सोप स्टोन (मात्रा बढ़ाने के लिए), रेजिन (लागत कम करने और मात्रा बढ़ाने के लिए), स्टार्च (कड़ापन लाने के लिए) और सोडियम सिलिकेट (सफाई करने और ठोस बनाने के लिए) जैसे मुख्य पदार्थ इस्तेमाल होते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन के निर्माण में प्रत्येक मुख्य पदार्थ (क्षार, वसा, सोप स्टोन, रेजिन, स्टार्च, सोडियम सिलिकेट) का वर्णन करें और उनके विशिष्ट कार्य और साबुन के गुणों पर उनके प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 2. साबुन बनाने की ठण्डी तथा गर्म विधि का वर्णन कीजिए।
Answer:
साबुन बनाने की ठण्डी विधि:
ठण्डी विधि से साबुन बनाने के लिए कास्टिक सोडा, कोई तेल (जैसे अलसी, तिल, मूंगफली) या वसा, मैदा या बेसन, और पानी की आवश्यकता होती है।
विधि:
• मिट्टी के बर्तन में पानी और कास्टिक सोडा को 6 घंटे पहले घोलकर रख दें।
• दूसरे बर्तन में बेसन या मैदे को तेल में मिलाकर रख लें।
• अब कास्टिक सोडे वाले पानी को तेल और बेसन के मिश्रण में धीरे-धीरे धार बांधकर डालें और लकड़ी के डंडे से लगातार हिलाते रहें, जब तक घोल गाढ़ा न हो जाए।
• मिश्रण को आयताकार ट्रे या टब में डालकर टाट से ढक दें। ठंडा होने और जमने पर इसे बट्टियों या बार के रूप में काट लें। इस प्रकार साबुन बनकर तैयार हो जाता है।
गर्म विधि से साबुन बनाना:
यदि साबुन बनाते समय सोडियम सिलिकेट मिलाना हो, तो आधे पानी में सोडा कास्टिक को भिगो दें और आधे पानी में सोडियम सिलिकेट मिलाकर गर्म करें। जब यह घुल जाए, तो सोडा कास्टिक के घोल को इसमें मिला दें और ठंडा होने दें। इसके बाद तेल में सोप स्टोन डालकर मिश्रण को गाढ़ा होने पर जमा दें। इस विधि से साबुन में कड़ापन आता है। इस विधि से साबुन बनाते समय वसायुक्त अम्ल, जैसे-नारियल का तेल और कॉस्टिक सोडे का प्रयोग करना पड़ता है।
In simple words: साबुन बनाने की दो विधियां हैं: ठंडी और गर्म। ठंडी विधि में कास्टिक सोडा को पानी में घोलकर, तेल और बेसन के मिश्रण में धीरे-धीरे मिलाया जाता है और गाढ़ा होने पर सांचों में जमा दिया जाता है। गर्म विधि में सोडियम सिलिकेट और सोडा कास्टिक को पानी में घोलकर गर्म किया जाता है, फिर तेल और सोप स्टोन मिलाया जाता है और गाढ़ा होने पर जमा दिया जाता है।

🎯 Exam Tip: साबुन बनाने की ठंडी और गर्म दोनों विधियों का वर्णन करें। प्रत्येक विधि के लिए आवश्यक सामग्री और चरणों को स्पष्ट रूप से बताएं, और उनके बीच के मुख्य अंतरों को उजागर करें।

 

प्रश्न 3. डिटर्जेण्ट की श्रेणियाँ बताते हुए उसके संगठन का वर्णन कीजिए।
Answer: डिटर्जेण्ट की मुख्यतः तीन श्रेणियाँ हैं:
(i) प्रथम श्रेणी: इस श्रेणी के डिटर्जेण्ट की सफाई क्षमता और स्वच्छक गुण बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन इन डिटर्जेण्ट का मूल्य बहुत अधिक होता है। ये उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं।
(ii) द्वितीय श्रेणी: दूसरी श्रेणी के डिटर्जेण्ट वे होते हैं जिनमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती। इनकी सफाई क्षमता अच्छी होती है और इनका मूल्य भी कम होता है। ये आम उपयोग के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।
(iii) तृतीय श्रेणी: इस श्रेणी के डिटर्जेण्ट में ऐसे रसायन मिलाए जाते हैं जो इनकी सफाई क्षमता को बढ़ा देते हैं। ये डिटर्जेण्ट कम प्रभावी हो सकते हैं या विशेष सफाई के लिए बनाए जाते हैं।
डिटर्जेंट के संगठन में कई पदार्थ शामिल होते हैं:
(i) सोडियम सिलिकेट: वाशिंग मशीन के पुर्जों और धुलाई के बर्तनों की सुरक्षा के लिए डिटर्जेंट में सोडियम सिलिकेट का प्रयोग किया जाता है।
(ii) जंग विरोधी तत्त्व: हाथों की त्वचा और धुलाई के पात्रों की सुरक्षा के लिए डिटर्जेंट बनाते समय जंग विरोधी तत्व मिला दिया जाता है।
(iii) निक्षेपण प्रतिकारक तत्त्व: डिटर्जेंट में मिले निक्षेपण प्रतिकारक तत्व कपड़ों से निकली गंदगी को पानी में निलंबित कर देते हैं और उसे फिर से कपड़े पर चिपकने से रोकते हैं। इससे पानी से कपड़ों को खंगालने पर मैल, गंदगी और धूल के कण पानी में घुल कर निकल जाते हैं।
(iv) विरंजक: सफेद कपड़ों को सफेद, उज्ज्वल, नया, ताजा और जीवंत बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट बनाते समय इसमें उज्ज्वलकारी या प्रकाशीय विरंजक मिलाए जाते हैं। रंगीन कपड़ों के लिए विरंजक की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
(v) निर्माणक तत्त्व: डिटर्जेंट की सफाई क्षमता बढ़ाने के लिए कार्बनिक और अकार्बनिक निर्माणक तत्व मिलाए जाते हैं।
(vi) सुगंध: उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए डिटर्जेंट में सुगंधित तत्व मिलाए जाते हैं, जिससे धुलाई के बाद कपड़ों में ताजगी बनी रहती है।
In simple words: डिटर्जेंट तीन तरह के होते हैं: पहली श्रेणी बहुत महंगी पर सबसे अच्छी, दूसरी श्रेणी बिना मिलावट की और सस्ती, तीसरी श्रेणी में सफाई बढ़ाने वाले रसायन होते हैं। डिटर्जेंट में सोडियम सिलिकेट (मशीन बचाने के लिए), जंग विरोधी तत्व (हाथों और बर्तनों की सुरक्षा के लिए), गंदगी को दोबारा चिपकने से रोकने वाले तत्व, विरंजक (सफेदी के लिए), सफाई बढ़ाने वाले तत्व और खुशबू वाले तत्व होते हैं।

🎯 Exam Tip: डिटर्जेंट की प्रत्येक श्रेणी का वर्णन करें, उनके मूल्य और प्रभावशीलता पर ध्यान दें। फिर उसके संगठन में शामिल प्रत्येक घटक (सोडियम सिलिकेट, जंग विरोधी तत्व, विरंजक, आदि) के कार्य को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Rbse Class 12 Home Science Chapter 26 प्रयोगात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. जल के तापमान का वस्त्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जल के तापमान का वस्त्रों पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है, जो वस्त्र के प्रकार पर निर्भर करता है:
• सूती व लिनन के रंगीन वस्त्र: ठंडे पानी से धोने पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। गर्म या गुनगुने पानी में भिगोकर रखने पर रंग खराब हो सकते हैं, अन्यथा कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
• ऊनी वस्त्र: ठंडे पानी से धोने पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। गर्म पानी ऊनी वस्त्रों को नुकसान पहुंचाता है। पानी के गर्म तापमान से रेशे आपस में जुड़ जाते हैं, जिससे उनकी लचक और बनावट खराब हो जाती है। अधिक गंदे वस्त्रों के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग किया जा सकता है।
• रेशमी वस्त्र: ठंडे पानी से धोने पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। रेशमी वस्त्रों को शुष्क धुलाई के माध्यम से ही साफ करवाना चाहिए। गर्म और गुनगुने पानी से रेशों और वस्त्रों को हानि पहुंचती है, जिससे रेशे सिकुड़ जाते हैं।
In simple words: पानी का तापमान कपड़ों पर असर डालता है। सूती कपड़ों के रंग गर्म पानी से खराब हो सकते हैं। ऊनी कपड़े गर्म पानी से सिकुड़ जाते हैं और खराब हो जाते हैं। रेशमी कपड़ों को भी गर्म पानी से नुकसान होता है, इसलिए उन्हें ठंडे पानी से या ड्राई क्लीन करवाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के वस्त्रों (सूती, ऊनी, रेशमी) पर जल के तापमान के प्रभावों को अलग-अलग बताएं। हानिकारक प्रभावों और उनके कारणों को स्पष्ट करें।

 

Question 2. साबुन व डिटर्जेंट बनाने की विधि लिखिए।
Answer:
**साबुन बनाने की ठंडी विधि:**

**आवश्यक सामग्री:** * कास्टिक सोडा: 250 ग्राम * पानी: 1 लीटर * तेल (जैसे महुआ, रतनजोत, अलसी या तिल): 1 लीटर 250 मिलीलीटर * मैदा या बेसन: 250 ग्राम (इच्छानुसार)

**बनाने का तरीका:** * सबसे पहले, एक मिट्टी के बर्तन में पानी और कास्टिक सोडा को 6 घंटे के लिए घोलकर रख दें। * एक दूसरे बर्तन में तेल के साथ मैदा या बेसन को अच्छे से मिला लें। * अब कास्टिक सोडा वाले घोल में धीरे-धीरे तेल और मैदा/बेसन के मिश्रण को डालते जाएँ। इसे लकड़ी के डंडे से एक ही दिशा में तब तक हिलाते रहें, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। * इस गाढ़े मिश्रण को एक आयताकार ट्रे या टब में डालें। इसे जूट के कपड़े से ढक दें। * ठंडा होकर जम जाने पर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों या बट्टियों में काट लें। इस तरह साबुन तैयार हो जाता है।

**डिटर्जेंट पाउडर बनाने की विधि:**

**आवश्यक सामग्री:** * सोडा ऐश: 4 किलोग्राम * सोडा बाई कार्ब (यदि उपयोग कर रहे हों)

**बनाने का तरीका:** * सुरक्षा के लिए अपने हाथों में रबर या प्लास्टिक के दस्ताने पहन लें। * सोडा ऐश और सोडा बाई कार्ब (यदि उपयोग कर रहे हों) को छलनी से छान लें। * एक प्लास्टिक की बाल्टी में गुनगुना पानी डालें। * पानी में धीरे-धीरे एसिड स्लरी मिलाते जाएँ और लकड़ी के डंडे से अच्छी तरह हिलाते रहें। * एक पत्थर के फर्श पर सोडा ऐश के मिश्रण का ढेर लगाएँ। ढेर के बीच में एक खाली जगह बनाकर उसमें स्लरी घोल डालें। * लकड़ी के डंडे और दस्ताने पहने हाथों से मिश्रण को अच्छे से मिलाएँ, इसमें रंग भी मिला सकते हैं। * तैयार पाउडर को छलनी से छानकर हवा में सुखाएँ और फिर थैलियों में पैक कर दें।
In simple words: साबुन बनाने के लिए कास्टिक सोडा और तेल को मिलाकर गाढ़ा किया जाता है, फिर जमाकर काट लिया जाता है। डिटर्जेंट बनाने के लिए सोडा ऐश और एसिड स्लरी को मिलाकर सुखाया जाता है, जिससे सफाई करने वाला पाउडर बन जाता है।

🎯 Exam Tip: साबुन या डिटर्जेंट बनाते समय, सही मात्रा में सामग्री और सुरक्षा उपायों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। मिश्रण को सही तरह से हिलाना और ठंडा होने देना अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

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