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Detailed Chapter 23 वस्त्रों की सिलाई RBSE Solutions for Class 12 Home Science
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Class 12 Home Science Chapter 23 वस्त्रों की सिलाई RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Home Science Chapter 23 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) सिंगर मशीन का आविष्कार कब किया गया था?
(अ) सन् 1830 में
(ब) सन् 1848 में
(स) सन् 1891 में
(द) सन् 1935 में
Answer: (स) सन् 1891 में
In simple words: सिंगर मशीन का आविष्कार साल 1891 में हुआ था. इस मशीन ने सिलाई को बहुत आसान बना दिया.
🎯 Exam Tip: आविष्कार से जुड़े प्रश्नों में आपको सही साल और आविष्कारक का नाम याद रखना चाहिए.
Question 1. (ii) सन 1935 में किस मशीन का कारखाना भारत में स्थापित किया गया था?
(अ) साधारण मशीन
(ब) सिंगर मशीन
(स) उषा मशीन
(अ) बॉबिन
(ब) बॉबिन केस
(स) स्पूल पिन
(द) बॉबिन वाइंडर
Answer: (स) उषा मशीन
In simple words: साल 1935 में भारत में उषा मशीन का कारखाना खोला गया था. यह एक महत्वपूर्ण कदम था जिससे देश में सिलाई मशीनें आसानी से मिलने लगीं.
🎯 Exam Tip: भारत में हुए प्रमुख औद्योगिक विकास और उनके वर्षों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 1. (iv) वस्त्र की उत्तम सिलाई के आवश्यक चरण है –
(अ) नाप लेना
(ब) ड्राफ्टिंग करना
(स) ले-आउट करना
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: अच्छे कपड़े सिलने के लिए पहले नाप लेना, फिर ड्राफ्ट बनाना और आखिर में कपड़े पर ले-आउट करना, ये तीनों ही काम बहुत ज़रूरी होते हैं. हर कदम सही हो तो ही कपड़ा अच्छा बनता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई प्रक्रिया के सभी मुख्य चरणों को क्रम से याद रखें, क्योंकि प्रत्येक चरण अगले पर निर्भर करता है.
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. हाथ की सिलाई करते समय दायें हाथ की बड़ी अंगुली में...........पहना जाता है।
2. सूई को मशीन में फिट करने की चुटकी को..........कहते हैं।
3. वस्त्र पर पेपर पैटर्न के सभी हिस्सों को सही ढंग से बिछाना.....हलाता है।
4. नाप लेने हेतु............का प्रयोग करते हैं।
5. मशीन में समय-समय पर .............देना आवश्यक है।
Answer:
1. अंगुस्तान
2. क्लैम्प स्क्रू
3. ले - आउट
4. इंची टेप
5. तेल ।
In simple words: इन खाली जगहों में सही शब्द भरकर हम सिलाई के ज़रूरी कामों को समझ सकते हैं. जैसे अंगुली में अंगुस्तान पहनते हैं, सूई को क्लैम्प स्क्रू से कसते हैं, कपड़े पर पैटर्न बिछाना ले-आउट कहलाता है, नाप के लिए इंची टेप और मशीन के लिए तेल ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: सिलाई से जुड़े उपकरणों और प्रक्रियाओं के सही नाम और उनके उपयोग को याद रखें.
Question 3. स्पूल पिन किसे कहते हैं?
Answer: स्पूल पिन दो लम्बी पिनों की तरह दिखती है. यह सिलाई मशीन के ऊपरी हिस्से में लगी होती है. जब हम सिलाई करते हैं, तो धागे की रील को इसी पिन पर रखते हैं ताकि धागा सही से खुलता रहे. यह धागे को आसानी से निकलने में मदद करती है.
In simple words: स्पूल पिन एक लम्बी डंडी होती है जो सिलाई मशीन पर लगी होती है. इस पर धागे की रील रखी जाती है.
🎯 Exam Tip: मशीन के हर छोटे-बड़े पुर्जे का काम समझना महत्वपूर्ण है.
Question 4. सिलाई मशीन के निम्नलिखित अंगों का क्या महत्त्व है? प्रेशर फुटवारलिफ्टर, टेकअप लीवर, बॉबिन वाइन्डर।
Answer:
**प्रेशर फुटवारलिफ्टर:** यह एक घुमावदार डंडी जैसा होता है जो दबाव पद की छड़ पर लगा होता है. इसे ऊपर-नीचे करने से दबाव पद भी ऊपर-नीचे होता है. सिलाई पूरी होने पर इसे ऊपर उठाना चाहिए ताकि कपड़ा आसानी से निकाला जा सके. यह कपड़े को सही जगह पर रोकने में मदद करता है.
**टेकअप लीवर:** यह मशीन की मुख प्लेट पर लगा होता है. धागे को थ्रेड टेंशन डिस्कस से निकालकर इसमें से गुज़ारा जाता है. सिलाई के दौरान जब 'फ्लाई व्हील' घूमता है, तो यह लीवर भी ऊपर-नीचे होता है और बखिया बनाने में मदद करता है.
**बॉबिन वाइन्डर:** यह एक पिन जैसा हिस्सा होता है जो फ्लाईव्हील के सहारे लगा होता है. इसका काम बॉबिन, जिसे फिरकी भी कहते हैं, में धागा भरना होता है. यह सुनिश्चित करता है कि बॉबिन में सही मात्रा में धागा लपेटा जाए.
In simple words: प्रेशर फुटवारलिफ्टर कपड़े को दबाकर रखता है. टेकअप लीवर धागे को ऊपर-नीचे करके सिलाई बनाने में मदद करता है. बॉबिन वाइन्डर से बॉबिन में धागा भरा जाता है. ये सब मशीन के ज़रूरी हिस्से हैं.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के मुख्य भागों और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें और लिखें.
Question 5. कैंचियाँ तथा शिअर्स से आप क्या समझती हैं ?
Answer:
**कैंचियाँ:** कपड़े काटने के लिए अलग-अलग तरह की कैंचियाँ इस्तेमाल की जाती हैं. साधारण पतले कपड़ों के लिए 4 से 6 इंच की कैंची का उपयोग होता है. यह कैंची धागा काटने और छोटे कपड़ों के टुकड़ों को काटने में काम आती है.
**शिअर्स:** मोटे, भारी और ऊनी कपड़ों को काटने के लिए 6 से 9 इंच तक लंबी कैंचियाँ उपयोग की जाती हैं, जिन्हें शिअर्स कहते हैं. इन शिअर्स के हैंडल विशेष रूप से थोड़े झुके होते हैं और एक सिरा काफी बड़ा होता है जिससे पकड़ अच्छी बनती है. इससे कपड़ा काटते समय कपड़े को उठाना नहीं पड़ता है, जिससे कटाई आसान और सटीक होती है. शिअर्स का उपयोग कपड़े को सही आकार देने के लिए होता है.
In simple words: कैंचियाँ छोटी और हल्की होती हैं, पतले कपड़े और धागे काटने के लिए. शिअर्स बड़ी और मज़बूत होती हैं, भारी कपड़ों को काटने के लिए.
🎯 Exam Tip: कैंची और शिअर्स के बीच के अंतर को उनके आकार, उपयोग और हैंडल डिज़ाइन के आधार पर स्पष्ट करें.
Question 6. सिलाई मशीन के विभिन्न पुर्जा तथा उनकी उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
Answer: सिलाई मशीन के मुख्य पुर्जे और उनके काम इस प्रकार हैं:
(1) **दबाव पद छड़:** यह धातु की बनी छड़ होती है जिसके नीचे दबाव पद लगा होता है. इसका काम कपड़े को मशीन के नीचे सही जगह पर दबाकर रखना है ताकि सिलाई के दौरान कपड़ा खिसके नहीं. यह ऊपर-नीचे होने वाला हिस्सा है.
(2) **दबाव पद:** यह दबाव पद छड़ के नीचे लगा होता है. इसे एक पेंच की मदद से छड़ से जोड़ा जाता है. इसका आकार छोटे जूते जैसा होता है और इसे 'पैर' भी कहते हैं. यह सुई की डंडी में लगा होता है और सिलाई के समय कपड़े को दबाने का काम करता है.
(3) **नीडल बार:** यह धातु की एक पतली छड़ होती है जिसमें सुई लगाई जाती है. इसमें एक पेंच होता है जिससे सुई को कसकर लगाया या ढीला करके निकाला जा सकता है. सुई का गोल हिस्सा बाहर और चपटा हिस्सा अंदर की ओर फिट होता है.
(4) **थ्रेड गाइड:** यह मशीन में धागे को सही रास्ते से ले जाने के लिए होता है, जिससे धागा उलझता नहीं है और सीधा मशीन के अंदर जाता है.
(5) **स्पूल पिन:** यह दो लंबी पिनों जैसी संरचना होती है जो मशीन के ऊपरी हिस्से में लगी होती है. सिलाई के समय धागे की रील इसी पर रखी जाती है.
(6) **प्रेशर फुटवार लिफ्टर:** यह एक घूमने वाली रॉड होती है. इसे ऊपर-नीचे करके दबाव पद को नियंत्रित किया जाता है. जब सिलाई खत्म हो जाए, तो इसे ऊपर उठाकर कपड़े को आसानी से निकालने में मदद मिलती है.
(7) **थ्रेड टेंशन डिवाइस एवं डिस्कस:** यह धागे के तनाव को नियंत्रित करने वाला हिस्सा है. इसमें एक स्प्रिंग और दो गोल पत्तियां होती हैं जिनके बीच एक पेंच लगा होता है. इस पेंच को कसने या ढीला करने से धागे का तनाव कम या ज़्यादा किया जा सकता है. इसके पीछे दो गोल चकरियां (थ्रेड टेंशन डिस्कस) होती हैं. सामने का धागा इन्हीं चकरियों के बीच से निकालकर टेकअप लीवर और फिर सुई में पिरोया जाता है.
(8) **टेकअप लीवर:** यह मशीन की मुखप्लेट पर लगा होता है. धागे को थ्रेड टेंशन डिस्कस से निकालकर इसमें डाला जाता है. सिलाई के दौरान फ्लाईव्हील के घूमने से यह लीवर ऊपर-नीचे होकर बखिया बनाने में सहायता करता है.
(9) **मुखपट:** यह मशीन का सामने वाला हिस्सा है. इस पर टेकअप लीवर, थ्रेड टेंशन और डिस्कस जैसे पुर्जे लगे होते हैं. सुई की डंडी इसी के नीचे होती है.
(10) **स्लाइड प्लेट:** यह स्टील का बना एक चौकोर हिस्सा है जो नीडिल प्लेट के साथ लगा होता है. इसे बाईं ओर खिसकाकर बॉबिन को आसानी से निकाला और लगाया जा सकता है.
(11) **निडिल प्लेट:** यह सुई और प्रेशर फुट के नीचे स्टील की बनी प्लेट है. इसमें एक छेद होता है जिसमें से सुई अंदर-बाहर आती-जाती है और टाँके लगाती है. इसके नीचे कपड़े को खिसकाने वाले दाँते लगे होते हैं.
(12) **बॉबिन वाइन्डर:** यह फ्लाई व्हील के सहारे लगा एक छड़ जैसा पिन है. इसका उपयोग बॉबिन में धागा भरने के लिए किया जाता है.
(13) **टाँका नियामक:** यह मशीन में लगे टाँकों की लंबाई को नियंत्रित करता है. इसमें अलग-अलग नंबर होते हैं. 5 नंबर पर सबसे मोटी बखिया (टाँका) बनती है और 3 नंबर से नीचे जाने पर बखिया पतली होती जाती है.
(14) **फ्लाई व्हील:** यह एक गोल पहिया होता है जिसे घुमाने पर ही मशीन चलती है. इसे हैंडल से घुमाकर मशीन को गति दी जाती है, जिससे सिलाई संभव होती है.
(15) **बॉबिन और बॉबिन केस:** बॉबिन धागा लपेटने वाली फिरकी को कहते हैं और जिस डब्बी में इसे रखा जाता है, उसे बॉबिन केस कहते हैं. यह सिलाई के लिए धागे को नीचे से ऊपर लाने में मदद करता है.
In simple words: सिलाई मशीन में कई छोटे-छोटे हिस्से होते हैं, जैसे कपड़े को दबाने वाला दबाव पद, धागे को सही करने वाला टेंशन डिवाइस, सुई चलाने वाला लीवर और धागा लपेटने वाला बॉबिन वाइन्डर. हर हिस्से का अपना खास काम होता है जो सिलाई को आसान और अच्छा बनाता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के प्रत्येक पुर्जे का नाम और उसकी कार्यप्रणाली को विस्तार से समझने से आपको उसके महत्व को याद रखने में मदद मिलेगी.
Question 7. आरेखन या ड्राफ्टिग किसे कहते हैं?
(क) छोटे स्केल की ड्राफ्टिगः
(2) पूरे स्केल की ड्राफ्टिगः
Answer:
वस्त्र काटने से पहले, नाप लेने के बाद, कपड़े की आकृति बनाने को आरेखन या ड्राफ्टिंग कहते हैं. यह काम पुराने अख़बार या भूरे कागज़ पर इंच टेप और पेंसिल की मदद से किया जाता है. इस प्रक्रिया से कपड़े को सही आकार मिलता है.
**ड्राफ्टिंग के प्रकार:**
**(क) छोटे स्केल की ड्राफ्टिंग:** यह ड्राफ्टिंग नोटबुक या फाइल पर बनाई जाती है. इसमें 1 इंच को 1 सेमी. मानकर ड्राफ्ट तैयार किया जाता है. बार-बार अभ्यास करके सही ड्राफ्ट बनाना चाहिए. इस तैयार ड्राफ्ट को काटकर पेपर पैटर्न बनाया जाता है जिससे कपड़े की कटिंग आसान हो जाती है.
**(ख) पूरे स्केल की ड्राफ्टिंग:** यह ड्राफ्टिंग इंच और सेंटीमीटर के असली नापों से भूरे कागज़ या अख़बार पर तैयार की जाती है. इसमें माप को छोटा नहीं किया जाता बल्कि हूबहू नाप के अनुसार पैटर्न बनता है.
In simple words: ड्राफ्टिंग का मतलब है, कपड़ा काटने से पहले नाप के हिसाब से कागज़ पर कपड़े का डिज़ाइन बनाना. यह छोटे या पूरे स्केल पर बन सकता है.
🎯 Exam Tip: ड्राफ्टिंग की परिभाषा को उसके उद्देश्य और उपयोग के साथ समझाएं, साथ ही दोनों प्रकारों का अंतर स्पष्ट करें.
Question 9. कटाई के निमित्त वस्त्र को तैयार करने से आप क्या समझती हैं?
Answer: कपड़े की कटाई और सिलाई से पहले उसे तैयार करना बहुत ज़रूरी है. ज़्यादातर सूती कपड़े धुलने के बाद सिकुड़ जाते हैं. अगर बिना सिकुड़न निकाले कपड़े को काटा और सिला जाए, और फिर उसे धोया जाए तो वह सिकुड़ जाएगा. ऐसे में कपड़े की लंबाई कम हो जाएगी और चौड़ाई सिकुड़कर शरीर में तंग हो जाएगी. इसलिए, कपड़े को पहले पानी की बाल्टी में कम-से-कम दो घंटे तक डुबोकर रखना चाहिए ताकि वह अच्छे से भीग जाए. फिर उसे निचोड़कर सुखा लेना चाहिए और सूखने के बाद हल्का इस्त्री कर देना चाहिए. इससे कपड़ा अपनी असली स्थिति में आ जाता है और फिर सिलने के बाद सिकुड़ता नहीं है.
In simple words: सिलाई से पहले कपड़े को धोना और इस्त्री करना ज़रूरी है. इससे कपड़ा बाद में सिकुड़ता नहीं और फिटिंग अच्छी आती है.
🎯 Exam Tip: सूती कपड़ों की सिलाई से पहले की तैयारी के चरणों को क्रम से याद रखें, विशेषकर सिकुड़न रोकने के महत्व को.
Question 10. ले-आउट से आप क्या समझती हैं? इसके महत्त्व की चर्चा कीजिए।
Answer: कपड़े की कटिंग करने के लिए, तैयार पेपर पैटर्न के सभी हिस्सों को टेबल या किसी सपाट जगह पर कपड़े के ताने की दिशा में रखकर चॉक से निशान लगाने को ले-आउट कहते हैं. ऐसा करने से कपड़े की बचत होती है और कटाई आसान हो जाती है. कटिंग से पहले यह ज़रूर ध्यान देना चाहिए कि पैटर्न के सभी हिस्से सीधे और सही दिशा में रखे हों, नहीं तो कपड़ा गलत कट सकता है. सिलाई रेखा के बाद दबाव या तुरपाई के लिए 1/2 इंच से लेकर 2 इंच तक के अतिरिक्त निशान लगाए जाते हैं, जिन्हें कटिंग रेखाएँ कहते हैं. सही कटाई और अच्छी फिटिंग का रहस्य इसी ले-आउट में छिपा होता है. ले-आउट से कम से कम कपड़े में ज़्यादा से ज़्यादा पैटर्न निकल जाते हैं.
In simple words: ले-आउट का मतलब है, कपड़े पर पैटर्न के हिस्सों को सही तरीके से बिछाकर निशान लगाना. इससे कपड़े की बचत होती है और कटाई आसान हो जाती है, जिससे कपड़े की फिटिंग अच्छी आती है.
🎯 Exam Tip: ले-आउट की परिभाषा, उसके महत्व और सही तरीके से निशान लगाने के नियमों को याद रखें.
Question 1. धागे की रील मशीन में लगायी जाती है –
(अ) स्पूल पिन में
(ब) सुई छड़ में
(स) दबाव पद में
(द) बॉबिन वाइन्डर में
Answer: (अ) स्पूल पिन में
In simple words: धागे की रील को स्पूल पिन पर रखा जाता है, ताकि धागा आसानी से मशीन में जाए.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के हर पुर्जे का सही स्थान और काम याद रखना चाहिए.
Question 2. टाँका नियामक के खाँचे में कितने अंक अंकित होते हैं?
(अ) 0 - 10 तक
(ब) 0 - 5 तक
(स) 1 - 5 तक
(द) 0 - 20 तक
Answer: (ब) 0 - 5 तक
In simple words: टाँका नियामक में 0 से 5 तक अंक होते हैं, जिनसे सिलाई की लंबाई बदली जा सकती है.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के टाँका नियामक के अंक और उनके काम को याद रखें, यह सिलाई की गुणवत्ता को प्रभावित करता है.
Question 3. इंची टेप पर चिह्न लगे होते हैं –
(अ) 1 – 100 इंच तक
(ब) 1 – 50 इंच तक
(स) 1 – 60 इंच तक
(द) 1 – 40 इंच तक
Answer: (स) 1 – 60 इंच तक
In simple words: इंची टेप पर 1 से 60 इंच तक के निशान होते हैं, जिनका उपयोग नाप लेने के लिए होता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई में उपयोग होने वाले औजारों की मानक इकाइयों और उनकी सीमाओं को याद रखें.
Question 4. शिअर्स की लम्बाई होती है –
(अ) 6 – 9 इंच
(ब) 4 - 6 इंच
(स) 3 – 6 इंच
(द) 9 - 12 इंच
Answer: (अ) 6 – 9 इंच
In simple words: शिअर्स आमतौर पर 6 से 9 इंच लंबी होती हैं, क्योंकि ये भारी कपड़ों को काटने के लिए इस्तेमाल होती हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की कैंचियों के आकार और उनके विशिष्ट उपयोग को जानें.
Question 5. किस कैंची के किनारे दाँतेदार होते हैं ?
(अ) साधारण कैंची के
(ब) छोटी कैंची के
(स) शिअर्स के
(द) पिंकिंग शिअर्स के
Answer: (द) पिंकिंग शिअर्स के
In simple words: पिंकिंग शिअर्स के किनारे दाँतेदार होते हैं, जो कपड़े के किनारों को झड़ने से बचाने के लिए उपयोग की जाती हैं.
🎯 Exam Tip: विशेष प्रयोजन वाली कैंचियों के प्रकार और उनके किनारों की बनावट को याद रखें.
Question 6. सिलाई के चरण होते हैं –
(अ) 3
(ब) 4.
(स) 5
(द) 6
Answer: (स) 5
In simple words: सिलाई करने में 5 मुख्य कदम होते हैं, जो कपड़े बनाने की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: सिलाई प्रक्रिया के प्रमुख चरणों की संख्या और उनके क्रम को जानना ज़रूरी है.
Question 7. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. स्पूल पिन की कील में धागे की ............ लगायी जाती है।
2. मशीन के सभी ............ पों तथा ............ में भी तेल लगाना चाहिए।
3. मापक फीता को सामान्य भाषा में ............ कहा जाता है।
4. पिंकिंग शिअर्स के दोनों किनारे ............ भारी के समान होते हैं।
5. कपड़े की...........को दूर करने के लिये प्रेस की आवश्यकता होती है।
6. नाप लेते समय व्यक्ति को...........खड़ा रहना चाहिए।
Answer:
1. रील
2. गतिशील, जोड़ों
3. इंचीटेप
4. दाँतेदार
5. दाँतेदार (This seems like a typo in the source, as 5 and 6 are related to different concepts. Assuming 5. कपड़े की सिकुड़न को दूर करने के लिये प्रेस की आवश्यकता होती है।)
6. सीधा।
In simple words: इन खाली जगहों में सही शब्द भरने से सिलाई से जुड़ी ज़रूरी बातें पता चलती हैं, जैसे स्पूल पिन पर धागे की रील लगाते हैं, मशीन के हिस्सों में तेल डालते हैं, इंची टेप से नापते हैं, पिंकिंग शिअर्स दाँतेदार होती हैं, कपड़े की सिकुड़न के लिए प्रेस और नाप लेते समय सीधा खड़ा होना ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: सिलाई के सामान्य नियमों और उपकरणों के नामकरण को सटीक रूप से याद करें.
Question 1. सिलाई मशीन का सर्वप्रथम आविष्कार कब और कहाँ हुआ?
Answer: सिलाई मशीन का आविष्कार सबसे पहले 1830 में फ्रांस में एक दर्जी द्वारा किया गया था. यह एक साधारण सिलाई मशीन थी. यह एक महत्वपूर्ण आविष्कार था जिसने कपड़ों के उत्पादन को बदल दिया.
In simple words: सिलाई मशीन सबसे पहले 1830 में फ्रांस में बनी थी, एक दर्जी ने इसे बनाया था.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण आविष्कार के वर्ष और स्थान को याद रखना आवश्यक है.
Question 2. भारत में सर्वप्रथम कौन-सी सिलाई मशीन का कारखाना स्थापित हुआ?
Answer: भारत में सबसे पहले 1935 में उषा मशीन का कारखाना स्थापित किया गया था. यह कारखाना भारतीय बाज़ार में सिलाई मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण था.
In simple words: भारत में पहला सिलाई मशीन का कारखाना 1935 में उषा कंपनी ने शुरू किया था.
🎯 Exam Tip: देश में किसी विशेष उद्योग की शुरुआत से संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों को याद रखें.
Question 3. "फैशन मेकर" क्या है?
Answer: "फैशन मेकर" एक विशेष प्रकार की मशीन है जिसका उपयोग सिलाई के खास कामों के लिए किया जाता है. इसमें सजावट वाले टाँके बनाना, बटन लगाना, और काज बनाना जैसे काम शामिल हैं. यह साधारण सिलाई से ज़्यादा रचनात्मक कार्य करती है.
In simple words: "फैशन मेकर" एक खास मशीन है जिससे कपड़े पर सजावट, बटन और काज जैसे काम किए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: विशेष मशीनों और उनके अद्वितीय कार्यों को उनकी परिभाषा के साथ स्पष्ट करें.
Question 4. सिलाई मशीन में प्रेशर फुट का क्या कार्य है?
Answer: सिलाई मशीन में प्रेशर फुट का मुख्य कार्य सिलाई करते समय कपड़े को दबाकर रखना है. यह सुनिश्चित करता है कि कपड़ा मशीन के नीचे स्थिर रहे और सिलाई सीधी और समान हो. यह कपड़े को फिसलने से रोकता है.
In simple words: प्रेशर फुट सिलाई करते समय कपड़े को ज़मीन पर दबाकर रखता है ताकि वह हिले नहीं.
🎯 Exam Tip: मशीन के प्रत्येक पुर्जे के प्राथमिक कार्य को उसकी उपयोगिता के साथ याद रखें.
Question 5. बॉबिन वाइण्डर क्या है? इसका क्या कार्य
Answer: बॉबिन वाइंडर फ्लाई व्हील के सहारे लगा एक छड़ जैसा पिन होता है. इसका मुख्य काम बॉबिन, जिसे फिरकी भी कहते हैं, में धागा भरना होता है. यह सुनिश्चित करता है कि बॉबिन में पर्याप्त और समान रूप से धागा लपेटा जाए, जो सिलाई के लिए ज़रूरी है.
In simple words: बॉबिन वाइंडर एक पिन है जो बॉबिन में धागा भरता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के विशिष्ट पुर्जों के नाम और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से बताएं.
Question 6. फ्लाई व्हील का क्या कार्य है?
Answer: फ्लाई व्हील एक गोल पहिया होता है जिसे घुमाने पर सिलाई मशीन चलती है. जब इस पहिये को हाथ से घुमाया जाता है, तो मशीन के सभी हिस्से काम करना शुरू कर देते हैं, जिससे सिलाई करना संभव हो पाता है. यह मशीन को गति प्रदान करता है.
In simple words: फ्लाई व्हील मशीन का गोल पहिया है जिसे घुमाने से मशीन चलती है और सिलाई होती है.
🎯 Exam Tip: मशीन के मुख्य गति देने वाले भाग के काम को उसकी भूमिका के साथ समझें.
Question 7. सिलाई मशीन को कहाँ रखना चाहिए?
Answer: सिलाई मशीन को ड्राफ्टिंग टेबल पर रखना चाहिए. ड्राफ्टिंग टेबल की लंबाई पाँच फुट और ऊँचाई 3 से 3.5 फुट होनी चाहिए. यह ऊंचाई काम करने के लिए आरामदायक होती है.
In simple words: सिलाई मशीन को ड्राफ्टिंग टेबल पर रखना चाहिए जो 5 फुट लंबा और 3-3.5 फुट ऊंचा हो.
🎯 Exam Tip: सिलाई के उपकरण रखने के लिए सही कार्यस्थल के मानक आयामों को याद रखें.
Question 9. सिलने वाले कपड़ों पर निशान टेलर्स चॉक से ही क्यों लगाते हैं?.
Answer: सिलने वाले कपड़ों पर निशान टेलर्स चॉक से इसलिए लगाते हैं क्योंकि टेलर्स चॉक से निशान लगाना आसान होता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन निशानों को आसानी से मिटाया भी जा सकता है, जिससे कपड़े पर कोई दाग नहीं रहता. यह कपड़े को खराब होने से बचाता है.
In simple words: टेलर्स चॉक से निशान लगाना आसान होता है और इन्हें कपड़े से आसानी से मिटाया जा सकता है.
🎯 Exam Tip: कपड़ों पर निशान लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण और उनके फायदे को जानें.
Question 10. पिकिंग सिअर्स क्या काम आती है?
Answer: पिकिंग सिअर्स का उपयोग वस्त्रों के किनारों को परिसज्जित करने के काम आता है. इसके दाँतेदार किनारे कपड़े के किनारों को ज़िग-ज़ैग आकार में काटते हैं, जिससे कपड़े के धागे नहीं निकलते और किनारा साफ-सुथरा दिखता है. यह कपड़ों को ज़्यादा समय तक टिकाऊ बनाता है.
In simple words: पिकिंग शिअर्स कपड़ों के किनारों को साफ और सुंदर बनाने के काम आती हैं ताकि धागे न निकलें.
🎯 Exam Tip: विशेष कैंचियों के उपयोग और उनके प्रभाव को स्पष्ट करें.
Question 11. इस्त्री कितने प्रकार की होती है ? केवल नाम लिखिए।
Answer: इस्त्री तीन प्रकार की होती है -
• साधारण
• स्वचालित
• वाष्पयुक्त।
वाष्पयुक्त इस्त्री दो प्रकार की होती है –
• कोयले से गर्म होने वाली
• बिजली से गर्म होने वाली।
In simple words: इस्त्री तीन तरह की होती है: साधारण, खुद चलने वाली और भाप वाली. भाप वाली इस्त्री भी दो तरह की होती है: कोयले से चलने वाली और बिजली से चलने वाली.
🎯 Exam Tip: इस्त्री के मुख्य प्रकारों और उनके उप-प्रकारों के नामों को याद रखें.
Question 12. पेपर पैटर्न किसे कहते हैं?
Answer: कटिंग के बाद जो आकृति हमें प्राप्त होती है उसे पेपर पैटर्न कहते हैं. यह कपड़े को काटने के लिए एक खाका होता है. इस पैटर्न का उपयोग करके कपड़े को सही आकार में काटा जाता है.
In simple words: जब हम कागज़ पर कपड़े का डिज़ाइन काट लेते हैं, तो उसे पेपर पैटर्न कहते हैं.
🎯 Exam Tip: पेपर पैटर्न की परिभाषा और उसके महत्व को संक्षेप में बताएं.
Question 14. पोशाक बनाने हेतु कौन-कौन सी नाप ली जाती है?
Answer: पोशाक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण नाप ली जाती हैं, जैसे - लंबाई, चौड़ाई, तीरा (कंधे की चौड़ाई), कमर, बाँहों की लंबाई, मोहरी की लंबाई (आस्तीन का किनारा) और गले की गहराई आदि. इन सभी नापों को सही ढंग से लेना ज़रूरी है ताकि पोशाक अच्छी तरह से फिट हो.
In simple words: पोशाक बनाने के लिए लंबाई, चौड़ाई, कंधे, कमर, बाँह की लंबाई और गले की गहराई जैसी कई नाप लेते हैं.
🎯 Exam Tip: कपड़े सिलने के लिए ज़रूरी सभी मुख्य नापों को याद रखें और उन्हें क्रम से लिखें.
Question 15. सूती वस्त्रों को सिलने से पहले पानी में धोना क्यों आवश्यक है?
Answer: सूती वस्त्रों को सिलने से पहले पानी में धोना इसलिए ज़रूरी है ताकि वे सिलने के बाद सिकुड़ें नहीं. सूती कपड़ा अक्सर पहली धुलाई में सिकुड़ता है. अगर उसे बिना धोए सिला जाए, तो सिलाई के बाद कपड़ा छोटा हो जाएगा और फिटिंग खराब हो जाएगी.
In simple words: सूती कपड़ों को सिलने से पहले पानी में धोना ज़रूरी है ताकि वे बाद में सिकुड़ें नहीं और फिटिंग सही रहे.
🎯 Exam Tip: कपड़ों को सिलने से पहले की तैयारी के कारणों और लाभों को स्पष्ट करें.
Question 16. अंगुश्तान का क्या उपयोग है?
Answer: अंगुश्तान का उपयोग हाथ से सिलाई करते समय सुई को अंगुली में चुभने से बचाने के लिए किया जाता है. इसे अंगुली में पहना जाता है जिससे सुई अंगुली में नहीं चुभती और त्वचा भी खुरदरी नहीं होती. यह सिलाई के काम को सुरक्षित बनाता है.
In simple words: अंगुश्तान अंगुली में पहना जाता है ताकि सिलाई करते समय सुई न चुभे.
🎯 Exam Tip: सिलाई के सुरक्षा उपकरणों के नाम और उनके उपयोग को याद रखें.
Question 17. ट्रेसिंग व्हील का क्या कार्य है?
Answer: ट्रेसिंग व्हील लकड़ी के हैंडल में लगा एक छोटा धातु का पहिया होता है जिसमें दाँते होते हैं. इसका उपयोग कपड़े पर ड्राफ्टिंग उतारने और सिलाई के लिए निशान लगाने के काम आता है. इससे कपड़े पर निशान लगाना आसान हो जाता है और वे स्पष्ट दिखते हैं.
In simple words: ट्रेसिंग व्हील एक पहिया है जो कपड़े पर निशान लगाने के काम आता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई के सहायक उपकरणों के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों को जानें.
RBSE Class 12 Home Science Chapter 23 लघूत्तरीय प्रश्न
Question 1. थ्रेड टेंशन डिवाइस एवं डिस्कस का क्या उपयोग है?
Answer: थ्रेड टेंशन डिवाइस और डिस्कस का उपयोग सिलाई मशीन में धागे के तनाव को नियंत्रित करने के लिए होता है. थ्रेड टेंशन डिवाइस में एक स्प्रिंग और दो गोल पत्तियां होती हैं जिनके बीच एक पेच लगा होता है. इस पेच को कसने या ढीला करने पर धागे का तनाव कम या ज़्यादा किया जा सकता है. पेच के पीछे वाली गोल चकरियों को थ्रेड टेंशन डिस्कस कहते हैं. यह धागे को सही दबाव में रखकर समान टाँके लगाने में मदद करता है.
In simple words: थ्रेड टेंशन डिवाइस और डिस्कस धागे के तनाव को सही रखते हैं ताकि सिलाई अच्छी और समान आए.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के उन पुर्जों पर विशेष ध्यान दें जो टाँके की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करते हैं.
Question 2. स्टिच रेगुलेटिंग स्क्रू किस काम आता है?
Answer: स्टिच रेगुलेटिंग स्क्रू सिलाई मशीन में टाँके की लंबाई को नियंत्रित करने के काम आता है. इसे घुमाने से टाँके छोटे या बड़े किए जा सकते हैं, जिससे कपड़े और सिलाई के प्रकार के अनुसार टाँकों को समायोजित किया जाता है. यह सिलाई को विभिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने में मदद करता है.
In simple words: स्टिच रेगुलेटिंग स्क्रू टाँके को छोटा या बड़ा करने के काम आता है.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के नियंत्रक भागों और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखें.
Question 3. कैंची कितने प्रकार की होती है?
Answer: कैंची मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है –
• **छोटी कैंची:** इसके दोनों हिस्से नुकीले होते हैं और इसकी धार तेज़ होती है. इसका उपयोग छोटे कपड़े या धागे काटने में किया जाता है. यह बारीक़ काम के लिए ज़्यादा उपयोगी होती है.
• **बड़ी कैंची:** यह कैंची कपड़ा काटने के काम में आती है. इसकी लंबाई 20 सेमी. से 25 सेमी. तक होती है. यह मोटे और बड़े कपड़ों को आसानी से काट सकती है.
In simple words: कैंची दो तरह की होती है - छोटी कैंची धागा और छोटे कपड़े काटने के लिए, और बड़ी कैंची बड़े कपड़े काटने के लिए.
🎯 Exam Tip: कैंची के प्रकारों को उनके आकार और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत करें.
Question 4. सिलाई मशीन का ऐतिहासिक विवरण दीजिए।
Answer: कपड़ों का आविष्कार होने और उन्हें अच्छे ढंग से पहनने की इच्छा बढ़ने के साथ ही सिलाई-कटाई का जन्म हुआ. मशीनी युग में सिलाई मशीन का आविष्कार सबसे पहले 1830 में फ्रांस के एक दर्जी ने एक साधारण मशीन बनाकर किया. 1848 में इसमें काफी सुधार हुए. 1881 में सिंगर नामक व्यक्ति ने एक अच्छी किस्म की मशीन का आविष्कार किया, जिसने सिलाई की दुनिया में एक क्रांति ला दी. भारत में सबसे पहले 1935 में उषा मशीन का कारखाना स्थापित हुआ. आज के समय में कई कारखाने हैं जो हाथ, पैर और बिजली से चलने वाली सिलाई मशीनें बनाते हैं, जिससे यह तकनीक सभी के लिए सुलभ हो गई है.
In simple words: सिलाई मशीन का सफर 1830 में फ्रांस से शुरू हुआ, सिंगर ने इसे बेहतर बनाया और भारत में 1935 में उषा का कारखाना खुला. अब ये हाथ, पैर या बिजली से चलती हैं.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन के विकास के महत्वपूर्ण चरणों और प्रमुख आविष्कारकों को क्रमबद्ध तरीके से याद करें.
Question 5. इस्त्री हेतु आवश्यक सामग्री बताइए।
Answer: इस्त्री करने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की ज़रूरत होती है –
• **प्रेस:** सिलाई करते समय अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी प्रेस का उपयोग कर सकते हैं. स्वचालित प्रेस सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे कपड़े की प्रकृति (जैसे ऊनी, रेशमी) के अनुसार तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है. यह सुनिश्चित करता है कि कपड़ा जले नहीं और सही से इस्त्री हो.
• **प्रेसिंग टेबल:** प्रेस करने के लिए प्रेसिंग टेबल का उपयोग करना चाहिए. यह साफ-सुथरा होना चाहिए. अगर प्रेसिंग टेबल न हो तो ज़मीन पर दरी बिछाकर उस पर साफ कपड़ा लगाकर भी प्रेस कर सकते हैं. एक समतल और स्थिर सतह इस्त्री के लिए ज़रूरी है.
In simple words: इस्त्री करने के लिए प्रेस और एक साफ प्रेसिंग टेबल की ज़रूरत होती है.
🎯 Exam Tip: इस्त्री के लिए ज़रूरी सामग्री और उनके गुणों को स्पष्ट करें.
Question 6. मापक फीता का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
Answer: मापक फीता, जिसे इंची टेप भी कहते हैं, कपड़े की नाप लेने के काम आता है. इसके दोनों तरफ इंच और सेंटीमीटर में निशान होते हैं. एक इंची टेप में आमतौर पर 162 सेमी और 60 इंच तक के निशान होते हैं. इसमें इंच और आधे इंच के साथ चौथाई इंच के निशान भी होते हैं, जिससे गोलाई की नाप लेना आसान हो जाता है. फीते के दोनों सिरों पर पीतल की पत्ती लगी होती है. यह नाप लेने में मदद करती है और टेप को लपेटकर रखने में भी सहायक होती है. यह एक लचीला फीता होता है, जिससे शरीर के घुमावदार हिस्सों की नाप आसानी से ली जा सकती है.
In simple words: मापक फीता (इंची टेप) कपड़े नापने के काम आता है. इसमें इंच और सेंटीमीटर के निशान होते हैं और यह लचीला होता है.
🎯 Exam Tip: मापक फीता की बनावट, नापने की इकाइयाँ और उसके उपयोग को संक्षेप में बताएं.
Question 7. सिलाई मशीन की देखभाल किस प्रकार की जाती है?
Answer: सिलाई मशीन की उचित देखभाल के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए –
• **नियमित तेल देना:** समय-समय पर मशीन में तेल देना ज़रूरी है, नहीं तो पुर्जे जल्दी घिस जाएंगे, मशीन भारी चलेगी और आवाज़ भी करेगी. इससे मशीन की उम्र बढ़ती है.
• **तेल लगाने का तरीका:** मशीन के ऊपरी और निचले हिस्सों में बनी जगहों पर कुप्पी की मदद से किसी अच्छी कंपनी के तेल की एक-दो बूँदें हफ़्ते में कम-से-कम एक बार ज़रूर डालें.
• **ढककर रखना:** सिलाई करने के बाद मशीन को हमेशा कपड़े या ढक्कन से ढककर रखना चाहिए, ताकि मशीन के पुर्जों में धूल न जाए. धूल जमने से मशीन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.
• **सफाई करना:** सिलाई के बाद मशीन के पुर्जों में कपड़ों के रेशे घुस जाते हैं. यदि इनकी सफाई न की जाए, तो मशीन भारी चलने लगती है और सुई टूट सकती है. इसलिए, हर बार सिलाई करने के बाद मशीन को साफ करके रखना चाहिए. इससे मशीन सुचारू रूप से काम करती है.
In simple words: सिलाई मशीन में नियमित रूप से तेल डालें, इसे धूल से बचाने के लिए ढककर रखें और हर बार इस्तेमाल के बाद रेशों को साफ करें.
🎯 Exam Tip: सिलाई मशीन की देखभाल के मुख्य बिंदुओं को उनके कारणों और प्रभावों के साथ समझाएं.
RBSE Class 12 Home Science Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. सिलाई हेतु आवश्यक उपकरण अथवा वस्तुएँ –
Answer: सिलाई के लिए कई आवश्यक उपकरण और वस्तुएँ होती हैं, जो इस प्रकार हैं:
**I. कटिंग हेतु कैंची:**
कैंची दो प्रकार की होती हैं – एक बड़ी और एक छोटी.
• **बड़ी कैंची:** इसका उपयोग कपड़ा काटने के लिए किया जाता है. इसकी लंबाई 20 सेमी. से 25 सेमी. तक होती है.
• **छोटी कैंची:** इसके दोनों सिरे नुकीले होते हैं और इसकी धार तेज़ होती है. इसका उपयोग छोटे कपड़े या धागे काटने में होता है.
**II. नाप हेतु:**
1. **इंची टेप:** यह कपड़े की नाप लेने के काम आता है. इसके दोनों तरफ इंच और सेमी. में निशान होते हैं. यह 162 सेमी. व 60" तक होता है. इसमें इंच, आधे इंच और चौथाई इंच के निशान होते हैं. इससे गोलाई की नाप लेना आसान होता है. फीते के सिरों पर पीतल की पत्ती लगी होती है जिससे नाप लेने में सहायता मिलती है और टेप को लपेटकर रखा जाता है.
2. **पेंसिल और चॉक:** इनसे कपड़े या पैटर्न पर निशान लगाए जाते हैं. टेलर्स चॉक कपड़ों पर आसानी से मिट जाते हैं.
3. **पिन:** इनकी लंबाई एक या दो सेमी होती है. इनका उपयोग कपड़ा काटते समय उसे खिसकने से रोकने के लिए किया जाता है. पिन अच्छी होनी चाहिए ताकि कपड़ा खराब न हो.
4. **बुश:** बुश का उपयोग कपड़े पर पड़े मिल्टन चॉक के निशानों को मिटाने के लिए किया जाता है.
5. **मिल्टन क्लाथ:** कपड़े काटने से पहले इस पर निशान लगाकर अभ्यास किया जा सकता है. इस कपड़े पर निशान आसानी से मिट जाते हैं. यह गर्म कपड़े के समान मोटा होता है.
6. **ट्रेसिंग व्हील:** यह लकड़ी की गोल लंबी छड़ के आगे दाँतों वाला पहियेनुमा एक यंत्र है, जिसे 'ट्रेसिंग व्हील' कहते हैं. यह कपड़े के एक ओर से दूसरी ओर निशान लगाने के काम आता है.
7. **ड्राफ्टिंग कागज़:** कागज़ के बड़े पैटर्न बनाने के लिए खाकी या सफेद रंग के कागज़ बाज़ार में उपलब्ध होते हैं. ये कपड़े के नाप में आसानी से मिल जाते हैं. इनकी जगह पुराने अख़बार का उपयोग भी किया जा सकता है.
8. **कटिंग व ड्राफ्टिंग टेबिल:** कटिंग और ड्राफ्टिंग करने के लिए टेबिल की ज़रूरत होती है. इस पर मिल्टन क्लॉथ को खींचकर चारों ओर से कसकर लगाया जाता है. इस टेबिल की ऊँचाई लगभग साढ़े तीन फुट तथा लंबाई चार फुट होनी चाहिए. टेबिल के बायीं या दायीं ओर एक दराज होनी चाहिए ताकि कटिंग हेतु आवश्यक सामग्री उसमें रख सकें.
**III. सिलाई हेतु:**
1. **अँगूठी:** जीन्स या मोटे कपड़े को हाथ से सिलते समय इसका उपयोग किया जा सकता है. यह अँगुली के नाप की हल्के लोहे की बनी होती है. इससे अंगुली में सुई नहीं चुभती. इसकी मोटाई के अनुसार ये 6 से 11 नंबर तक की होती हैं. यह खुली व बंद दोनों प्रकार की होती है.
2. **सुई:** मशीन और हाथ दोनों तरह की सुई की आवश्यकता पड़ती है. यह कपड़े के अनुसार अलग-अलग नंबरों की प्रयोग की जाती हैं. सुई का नंबर कपड़े के अनुसार लेना चाहिए. हाथ की सुई में 6 से 8 नंबर तक की सुई का अधिक उपयोग किया जाता है.
3. **धागा:** सिलाई करने हेतु अच्छी कंपनी का मज़बूत धागा अलग-अलग रंग में लेकर रख लेना चाहिए. धागों का रंग पक्का होना चाहिए.
4. **सिलाई का डिब्बा:** सिलाई से संबंधित छोटी-मोटी चीज़ों को सुरक्षित रखने के लिए एक प्लास्टिक, लोहे या लकड़ी का डिब्बा होना चाहिए.
In simple words: सिलाई के लिए कैंची, इंची टेप, पेंसिल, पिन, मिल्टन क्लाथ, ट्रेसिंग व्हील और ड्राफ्टिंग कागज़ जैसे उपकरण ज़रूरी होते हैं. इसके अलावा, सिलाई के लिए अंगूठी, सुई, धागा और एक सिलाई का डिब्बा भी होना चाहिए.
🎯 Exam Tip: सिलाई के लिए आवश्यक सभी उपकरणों को उनकी श्रेणियों (जैसे कटिंग, नाप, सिलाई) के अनुसार वर्गीकृत करें और उनके उपयोग का संक्षिप्त विवरण दें.
Question 4. एप्रेन मिलाने की ड्राफ्टिग कीजिए।
Answer: एप्रेन के लिए ड्राफ्टिंग बनाने के लिए, सबसे पहले ब्राउन पेपर लेना चाहिए और उसे चौड़ाई की तरफ से मोड़ना चाहिए। फिर, उस पर चित्र के अनुसार निशान लगाकर आकृति बनानी चाहिए। बिंदुओं को नाम दें: अ, ब, स, द।
माप के अनुसार:
अ से ब = 12 इंच
अ से द = 32 इंच
अद = बस (यह एक आयत की भुजाएं हैं)
अ से य = \( 5 \frac{1}{2} \) इंच (5.5 इंच)
ब से र = 10 इंच
अब य को र से एक गोलाई देते हुए मिला दें। इस तैयार ड्राफ्ट को काटकर पेपर पैटर्न बना लें। यह पैटर्न कपड़ों पर रखकर काटने में मदद करता है।
In simple words: To make an apron pattern, first fold brown paper in half. Mark points and measurements for the apron shape, like width and height. Draw a curve to connect specific points. Then cut out this pattern to use on fabric.
🎯 Exam Tip: Always draw patterns on brown paper or old newspaper first, and use clear measurements to ensure the final garment fits well.
Question 5. एप्रेन काटने व सिलाई करने की विधि लिखिए।
Answer:
एप्रेन काटने की विधि:
बनाए गए पेपर पैटर्न को कपड़े पर रखकर सावधानी से काटें। कपड़े को हमेशा सीधा (लम्बवत्) काटना चाहिए ताकि उसकी फिटिंग सही रहे। पाइपिंग के लिए 1 इंच चौड़ी उरेब पट्टियाँ (तिरछी पट्टियाँ) काट लें।
सिलाई करने की विधि:
एक लगभग 40 से 50 इंच लम्बी उरेब पट्टी तैयार कर लें। सबसे पहले 'य' से 'य' तक पाइपिंग लगाकर उसे सिल लें। यह एप्रेन की किनारों को सुंदर और मजबूत बनाता है।
In simple words: To cut an apron, place your paper pattern on the fabric and cut along the lines, making sure to cut straight. Also, cut thin strips of fabric for piping. For sewing, join the piping strips to make a long one, and then sew it along the edges of the apron, especially the curved top part.
🎯 Exam Tip: Always ensure the fabric is cut straight with the grain to prevent the apron from twisting or losing shape after washing.
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