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Detailed Chapter 20 सुरक्षित पेयजल व खाद्य स्वच्छता RBSE Solutions for Class 12 Home Science
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Class 12 Home Science Chapter 20 सुरक्षित पेयजल व खाद्य स्वच्छता RBSE Solutions PDF
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Part-1)
Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें –
(i) असुरक्षित पेयजल के सेवन से प्राय...........बीमारियाँ हो सकती हैं –
(अ) चर्म से सम्बन्धित
(ब) पेट से सम्बन्धित
(स) बाल से सम्बन्धित
(द) आँख, नाक व कान से सम्बन्धित।
Answer: (ब) पेट से सम्बन्धित
In simple words: गंदा पानी पीने से अक्सर पेट से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं। यह शरीर के अंदर की सेहत को खराब करता है।
🎯 Exam Tip: जलजनित रोगों के बारे में लिखते समय, पाचन तंत्र से संबंधित सामान्य बीमारियों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 1. (ii) अमीबा रुग्णता किस रोगकारक रोगाणु के कारण होता है?
(अ) कोरोना वायरस
(ब) ऐन्टामीबा हिस्टोलिटिका
Answer: (ब) ऐन्टामीबा हिस्टोलिटिका
In simple words: अमीबा रोग एक छोटे कीटाणु के कारण होता है जिसे ऐन्टामीबा हिस्टोलिटिका कहते हैं। यह आमतौर पर दूषित पानी या भोजन से फैलता है।
🎯 Exam Tip: रोगजनक रोगाणुओं के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सीधे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 1. (iii) जल का पी.एच. मान है -
(अ) 3.5-5.8
(ब) 9.00-10.00
(स) इनमें से कोई नहीं
(द) 6.5-8.5
Answer: (द) 6.5-8.5
In simple words: पीने वाले पानी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। यह मान बताता है कि पानी कितना अम्लीय या क्षारीय है, और इस सीमा में पानी पीने के लिए सबसे अच्छा होता है।
🎯 Exam Tip: पीने योग्य पानी के आदर्श pH मान को याद रखें, क्योंकि यह पानी की गुणवत्ता से संबंधित एक बुनियादी तथ्य है।
Question 1. (iv) यदि जल में सूक्ष्म जीवाणुओं और रोगाणुओं की उपस्थिति हो तो उसे किस प्रकार का जल कहते हैं?
(अ) संदूषित
(ब) प्रदूषित
(स) असुरक्षित
(द) ये सभी।
Answer: (अ) संदूषित
In simple words: अगर पानी में छोटे-छोटे कीटाणु या बीमारी फैलाने वाले रोगाणु हों, तो ऐसे पानी को संदूषित जल कहते हैं। यह पानी पीने या इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित नहीं होता।
🎯 Exam Tip: 'संदूषित' और 'प्रदूषित' जल के बीच के अंतर को समझें; 'संदूषित' विशेष रूप से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को संदर्भित करता है।
Question 1. (v) जल में कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए कौन-सी विधि अपनाई जाती है?
(अ) अल्ट्रा वायलेट किरणों द्वारा
(ब) क्लोरीन द्वारा
(स) उबालना
(द) ये सभी।
Answer: (स) उबालना
In simple words: पानी में से कीटाणुओं को मारने के लिए उसे उबालना एक बहुत ही आसान और असरदार तरीका है। जब पानी को अच्छे से उबाला जाता है, तो उसमें मौजूद ज़्यादातर हानिकारक जीवाणु मर जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल को शुद्ध करने के विभिन्न तरीकों को जानें, विशेष रूप से घरेलू उपयोग के लिए सबसे सामान्य और प्रभावी विधियाँ।
Question 2. सुरक्षित पेयजल से आपका क्या तात्पर्य है? समझाइए।
Answer: सुरक्षित पेयजल वह पानी है जो जैविक और रासायनिक गन्दगी से पूरी तरह मुक्त होता है। यह स्वादहीन, रंगहीन, पारदर्शी और गंधहीन होता है। यह पानी इंसानों के पीने के लिए एकदम सुरक्षित होता है। गंदा और प्रदूषित पानी इंसानों के इस्तेमाल के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होता। सुरक्षित पानी पीने से लोगों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर नहीं रहता, इसीलिए इसे सुरक्षित जल कहा जाता है।
In simple words: सुरक्षित पेयजल वह पानी होता है जिसमें कोई गंदगी या कीटाणु नहीं होते। यह साफ, रंगहीन, और गंधहीन होता है, जिसे पीने से कोई बीमारी नहीं होती।
🎯 Exam Tip: सुरक्षित पेयजल की परिभाषा लिखते समय, उसकी मुख्य विशेषताओं जैसे गंधहीनता, रंगहीनता, और हानिकारक पदार्थों से मुक्ति का उल्लेख करना न भूलें।
Question 3. जल प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?
Answer: जल प्रदूषण के कई मुख्य कारण होते हैं, जो पानी को पीने और अन्य उपयोग के लिए असुरक्षित बनाते हैं:
(1) कुओं को ढककर न रखना: गाँवों में पीने के पानी के लिए कुओं पर निर्भर रहते हैं, लेकिन उनकी साफ-सफाई के लिए कुओं पर मुँडेर और छत की व्यवस्था नहीं की जाती है। इस कारण धूल, मिट्टी और पत्ते आदि पानी में मिल जाते हैं और पानी दूषित हो जाता है।
(2) अस्थि विसर्जन: धार्मिक अंधविश्वास के कारण लोग नदियों में हड्डियों का विसर्जन और शवों का जल-समाधि देते हैं। यह सभी चीजें पानी को गंदा करती हैं।
(3) मल-मूत्र का पानी में बहाना: बड़े और छोटे शहरों में ज़्यादातर मल-मूत्र को सीधे नदियों या तालाबों में बहा दिया जाता है। इससे पानी में कई तरह के रोगाणु पैदा हो जाते हैं, जिससे पानी प्रदूषित हो जाता है।
(4) साबुन का प्रयोग: हम अपने शरीर और कपड़ों की सफाई के लिए साबुन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन साबुन का गंदा पानी नालियों के ज़रिए नदियों और तालाबों में मिल जाता है, जिससे पानी प्रदूषित होता है।
(5) दहन: पेट्रोल, डीजल, लकड़ी और कोयले जैसे ईंधन के जलने से हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड और अन्य कई तरह की गैसें निकलती हैं। ये गैसें बारिश के पानी में घुलकर अम्ल और दूसरे लवण बनाती हैं, जिससे पानी प्रदूषित हो जाता है।
(6) औद्योगीकरण: बड़े-बड़े उद्योग नदियों से पानी लेते हैं और इस्तेमाल के बाद अपने बचे हुए कचरे को वापस नदियों या नालों में डाल देते हैं। यह प्रक्रिया पानी को बहुत गंदा करती है।
(7) गोबर, कूड़ा-करकट: जल स्रोतों के पास गोबर और कूड़ा-करकट डालने से पानी में कीटाणु मिल जाते हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है।
(8) उर्वरकों व कीटनाशकों का जल में मिलाना: खेती में ज़्यादा फसल उगाने के लिए उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ गया है। फसलें इन सभी रसायनों का पूरा उपयोग नहीं कर पातीं। बचा हुआ हिस्सा बारिश के पानी के साथ नदियों और तालाबों में मिल जाता है, जिससे जल दूषित होता है।
In simple words: जल प्रदूषण कई कारणों से होता है, जैसे कुओं को खुला छोड़ना, नदियों में कचरा और शव डालना, मल-मूत्र बहाना, साबुन का उपयोग, कारखानों का कचरा, और खेतों से बहकर आने वाले रसायन।
🎯 Exam Tip: जल प्रदूषण के कारणों को बिंदुवार तरीके से स्पष्ट करें और प्रत्येक कारण का संक्षिप्त विवरण दें।
Question 4. जल को शुद्ध करने की विभिन्न घरेलू विधियाँ कौन-सी हैं?
Answer: जल को शुद्ध करने की कई घरेलू विधियाँ हैं जो पानी को पीने योग्य बनाने में मदद करती हैं:
(1) उबालकर: पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा करने से उसकी अस्थायी कठोरता दूर हो जाती है। इस विधि से पानी में मौजूद कीटाणु और गैसें नष्ट हो जाती हैं। उबालने से पानी से थोड़ी ऑक्सीजन निकल जाती है। इसलिए, पानी को खुली हवा में रखने से उसमें ज़रूरी मात्रा में ऑक्सीजन वापस घुल जाती है और पानी का स्वाद भी अच्छा हो जाता है।
(2) छानकर: इस विधि में पानी को सूती कपड़े से छानकर शुद्ध किया जाता है। हालांकि, यह विधि बहुत प्रभावी नहीं है, क्योंकि कपड़े में से छोटे मिट्टी के कण और जीवाणु भी पानी के साथ निकल सकते हैं।
(3) फिटकरी द्वारा: इस विधि में फिटकरी के एक टुकड़े को 4-5 बार पानी में घुमाया जाता है। पानी के बर्तन को ढककर बिना हिलाए रखा जाता है। पानी में मौजूद धूल, मिट्टी के कण और अन्य गंदगियां बर्तन के नीचे बैठ जाती हैं, फिर ऊपर से साफ पानी को दूसरे बर्तन में ले लिया जाता है। फिटकरी आसानी से मिलने वाला और सस्ता पदार्थ है।
(4) क्लोरीन की गोली: इस विधि में पानी में मौजूद जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए क्लोरीन की गोली का उपयोग किया जाता है। यह विधि सस्ती, भरोसेमंद, उपयोग में आसान, हानिकारक नहीं और तेज़ी से काम करती है। आमतौर पर 0.5 ग्राम क्लोरीन की गोली 20 लीटर पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। आजकल पानी को शुद्ध करने के लिए कई उपकरण भी बाज़ार में उपलब्ध हैं। ये उपकरण छानने, अल्ट्रा वायलेट किरणों और आधुनिक झिल्ली तकनीक से सुरक्षित पानी तैयार करते हैं।
(5) विपरीत परासरण विधि: यह पानी को शुद्ध करने की एक तकनीक है जिसमें उच्च दाब का उपयोग करके पानी को एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली (membran) से गुज़ारा जाता है। इससे पानी में मौजूद अनावश्यक आयन और अणु पानी से अलग हो जाते हैं और पानी शुद्ध हो जाता है।
(6) अल्ट्रा वॉयलेट किरणें: इस विधि में एक मशीन का उपयोग किया जाता है जिसमें पारे के वाष्प-युक्त बल्ब लगे होते हैं। इस मशीन से अल्ट्रा वायलेट किरणें निकलती हैं जो पानी में मौजूद जीवाणुओं को नष्ट करके पानी को शुद्ध करती हैं।
In simple words: घर पर पानी को शुद्ध करने के लिए उबालना, कपड़े से छानना, फिटकरी मिलाना, क्लोरीन की गोलियां डालना, विपरीत परासरण और अल्ट्रा वायलेट किरणों का इस्तेमाल किया जाता है। उबालने और क्लोरीन से पानी के कीटाणु मर जाते हैं, जबकि फिटकरी गंदगी को नीचे बिठा देती है।
🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण की हर विधि के नाम और वह कैसे काम करती है, इसका एक-दो लाइन में स्पष्टीकरण दें।
Question 5. संदूषित जल के मानव शरीरों पर दुष्प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
Answer: जिस प्रकार विभिन्न जीवाणु दूषित पानी पीने पर शरीर में जाकर पेट और आंतों से संबंधित कई रोग पैदा करते हैं, ठीक उसी तरह विशेषकर अजमेर, जयपुर, अलवर, जोधपुर, बाड़मेर, उदयपुर, नागौर, पाली और बीकानेर जैसे जिलों में पानी में फ्लोराइड प्रदूषण की वजह से फ्लोरोसिस रोग की समस्या बहुत ज़्यादा है। दूषित जल पीने से कई तरह की बीमारियाँ हो सकती हैं जैसे दस्त, पेचिश, हैजा, टाइफाइड, पेट में कीड़े, और पीलिया। यह सभी रोग पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं और शरीर को कमजोर बना देते हैं।
In simple words: गंदा पानी पीने से पेट और आंतों से जुड़ी कई बीमारियाँ हो जाती हैं, जैसे दस्त, हैजा, और पीलिया। कुछ जगहों पर फ्लोराइड वाला पानी पीने से फ्लोरोसिस नाम का रोग भी हो सकता है।
🎯 Exam Tip: संदूषित जल से होने वाली बीमारियों के नाम याद रखें और फ्लोरोसिस जैसे विशिष्ट रोगों का उल्लेख करना न भूलें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Part-1)
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Part-1)
Question 1. पृथ्वी पर उपलब्ध जल का सिर्फ........... प्रतिशत जल ही पीने योग्य है –
(अ) 1
(ब) 1.2
(स) 3
(द) 4
Answer: (ब) 1.2
In simple words: पृथ्वी पर जितना पानी है, उसका केवल 1.2 प्रतिशत हिस्सा ही हम इंसान पीने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बाकी का पानी खारा होता है या बर्फ के रूप में होता है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी पर पीने योग्य पानी के प्रतिशत को याद रखें, यह एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय तथ्य है।
Question 2. गुणवत्ता के आधार पर जल को कितने भागों में बाँटा गया है?
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
Answer: (द) चार
In simple words: पानी की गुणवत्ता के हिसाब से उसे चार अलग-अलग हिस्सों में बाँटा गया है। इससे यह समझने में आसानी होती है कि कौन सा पानी किस काम के लिए ठीक है।
🎯 Exam Tip: जल की गुणवत्ता के आधार पर उसके प्रकारों की संख्या को सटीक रूप से याद रखें।
Question 3. जल की अस्थाई कठोरता दूर की जा सकती है –
(अ) उबालकर
(ब) छानकर
(स) ढककर
(द) ये सभी।
Answer: (अ) उबालकर
In simple words: पानी को उबालने से उसकी अस्थायी कठोरता को आसानी से दूर किया जा सकता है। उबालने पर पानी में घुले हुए कुछ खनिज पदार्थ अलग हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल की अस्थायी कठोरता को दूर करने के लिए उबालने की विधि सबसे सरल और प्रभावी है।
Question 4. पानी के बर्तन में पानी निकालने के लिए क्या नहीं करना चाहिए?
(द) इनमें से कोई नहीं।
(अ) हाथ नहीं डालें
Answer: (अ) हाथ नहीं डालें
In simple words: पानी निकालने के लिए बर्तन में सीधे हाथ नहीं डालने चाहिए। ऐसा करने से पानी गंदा हो सकता है और कीटाणु फैल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पानी के बर्तनों को साफ रखने और संदूषण से बचाने के लिए बुनियादी स्वच्छता नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
Question 5. दाँतों पर धब्बे किस तत्व के जल में मिले होने के कारण पड़ जाते हैं?
(अ) क्लोराइड
(ब) फ्लोराइड
(स) सल्फेट
(द) ब्रोमाइड
Answer: (ब) फ्लोराइड
In simple words: अगर पीने के पानी में बहुत ज़्यादा फ्लोराइड (एक तरह का रसायन) मिला हो, तो इससे दाँतों पर धब्बे पड़ सकते हैं। इसे फ्लोरोसिस कहते हैं।
🎯 Exam Tip: फ्लोराइड की अधिक मात्रा से होने वाले दाँतों के रोगों को याद रखें और पानी में इस तत्व की पहचान करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. राजस्थान के किस जिले में फ्लोरोसिस रोग जल द्वारा नहीं होता है?
(अ) जयपुर
(ब) जोधपुर
(स) भरतपुर
(द) अजमेर
Answer: (स) भरतपुर
In simple words: राजस्थान के भरतपुर जिले में फ्लोरोसिस नाम की बीमारी पानी से नहीं होती। यह बीमारी पानी में ज़्यादा फ्लोराइड होने के कारण होती है, लेकिन भरतपुर में यह समस्या कम है।
🎯 Exam Tip: भौगोलिक संदर्भ में विशिष्ट बीमारियों और उनके कारणों से जुड़े प्रश्नों के लिए सही जिले या स्थान को याद रखना आवश्यक है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
Question. 1. "जीवनदाता जल...........भी हो सकता है।”
Answer: मृत्युदाता
In simple words: पानी जो हमें जीवन देता है, अगर वह साफ न हो तो मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
🎯 Exam Tip: जल के दोहरे पहलू (जीवन-दाता और विनाशक) को समझाते हुए शब्दों का सही चयन करें।
Question. 2. शुद्ध जल को ...........जल भी कहते हैं।
Answer: प्राकृतिक
In simple words: साफ पानी को प्राकृतिक जल भी कहते हैं क्योंकि यह जैसा प्रकृति में पाया जाता है, वैसा ही होता है।
🎯 Exam Tip: शुद्ध जल के पर्यायवाचियों को याद रखें, जैसे 'प्राकृतिक जल'।
Question. 3. पीने के लिए शुद्ध व ...........जल स्वास्थ्य के लिए नितान्त आवश्यक है।
Answer: सुरक्षित
In simple words: पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: जल और स्वास्थ्य के संबंध को समझाते हुए सही विशेषण (जैसे 'सुरक्षित') का उपयोग करें।
Question. 4. क्लोरीन की गोली 5 ग्राम की मात्राएँ ...........लीटर पानी को भी संक्रमित कर सकती है।
Answer: 20
In simple words: क्लोरीन की 5 ग्राम गोली 20 लीटर पानी को कीटाणुमुक्त कर सकती है, जिससे वह पीने के लिए सुरक्षित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण में क्लोरीन की मात्रा और उसकी क्षमता के अनुपात को याद रखें।
Question. 5. 100°C-121°C तक जल को उबालने से जल में उपस्थित जीवाणु व उनके ...........नष्ट हो जाते हैं।
Answer: बीजाणु
In simple words: जब पानी को बहुत ऊँचे तापमान (100°C-121°C) तक उबाला जाता है, तो उसमें मौजूद जीवाणु और उनके बीजाणु (जो गर्मी में भी बच सकते हैं) नष्ट हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण के लिए उबलते पानी के प्रभाव और जीवाणु बीजाणुओं पर उसके असर को जानें।
Question. 6. मिट्टी में हानिकारक जीवाणु होते हैं जो कि पानी को ...........कर सकते हैं।
Answer: दूषित
In simple words: मिट्टी में नुकसानदायक कीटाणु होते हैं जो पानी में मिलकर उसे गंदा कर सकते हैं, इसलिए पानी को मिट्टी से बचाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: मिट्टी से जल के संदूषण के जोखिम और उसके परिणामों को स्पष्ट करें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 अति लघूत्तरीय प्रश्न (Part-1)
Question 1. सुरक्षित पेयजल के गुण बताइए।
Answer: सुरक्षित पेयजल जैविक और रासायनिक पदार्थों से मुक्त, मिट्टी व गंदगी रहित, गंधहीन, रंगहीन और स्पष्ट पारदर्शी होता है। इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक सूक्ष्मजीव नहीं होते।
In simple words: सुरक्षित पेयजल साफ होता है, उसमें कोई गंध या रंग नहीं होता, और वह कीटाणुओं और गंदगी से मुक्त होता है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षित पेयजल के मुख्य गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे उसकी पहचान से जुड़ा है।
Question 2. जल विषाक्त कब हो जाता है?
Answer: जब पानी में इंसानों और जानवरों का कचरा (अपशिष्ट पदार्थ) और रासायनिक यौगिक मिल जाते हैं, तो वह विषाक्त (ज़हरीला) हो जाता है। ऐसा पानी पीने या इस्तेमाल करने लायक नहीं रहता।
In simple words: पानी तब ज़हरीला हो जाता है जब उसमें मानव या पशुओं का मल-मूत्र और रासायनिक कचरा मिल जाता है।
🎯 Exam Tip: जल के विषाक्त होने के दो मुख्य कारणों - जैविक और रासायनिक संदूषण - का उल्लेख करें।
Question 3. अशुद्ध जल के सेवन से किन रोगों के होने का खतरा रहता है ?
Answer: अशुद्ध जल पीने से अतिसार (दस्त), पेचिश, हैजा, टायफाइड, पेट में कीड़े, और पीलिया जैसे कई रोगों का खतरा रहता है। ये सभी रोग पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
In simple words: गंदा पानी पीने से दस्त, पेचिश, हैजा, टायफाइड और पीलिया जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: अशुद्ध जल से होने वाली कम से कम पाँच मुख्य बीमारियों के नाम याद रखें।
Question 4. पृथ्वी पर जल का वितरण किस प्रकार है?
Answer: पृथ्वी पर उपलब्ध कुल पानी का 97 प्रतिशत हिस्सा समुद्रों में है, 1.8 प्रतिशत बर्फ के रूप में है, और केवल 1.2 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है। यह दिखाता है कि पीने योग्य पानी कितना सीमित है।
In simple words: पृथ्वी का ज़्यादातर पानी समुद्रों में (97%) है, कुछ बर्फ में (1.8%), और बहुत थोड़ा सा (1.2%) ही पीने लायक है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी पर जल के वितरण के प्रतिशत आंकड़ों को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. जल को शुद्ध करने की दो घरेलू विधिबताइए।
Answer: जल को शुद्ध करने की दो घरेलू विधियाँ हैं:
1. उबालकर
2. छानकर।
ये विधियाँ घर पर पानी को साफ करने के लिए सबसे आसान और प्रभावी मानी जाती हैं।
In simple words: पानी को साफ करने के दो आसान घरेलू तरीके हैं: उसे उबालना या फिर साफ कपड़े से छानना।
🎯 Exam Tip: जल शुद्धिकरण की सबसे सामान्य और सुलभ घरेलू विधियों को याद रखें।
Question 7. जल को शुद्ध करने की सबसे अच्छी विधि कौन-सी है ?
Answer: जल को उबालकर शुद्ध करना सबसे अच्छी विधि मानी जाती है। उबालने से पानी के लगभग सभी कीटाणु मर जाते हैं।
In simple words: पानी को उबालना उसे साफ करने का सबसे अच्छा तरीका है।
🎯 Exam Tip: पानी को शुद्ध करने के सर्वोत्तम घरेलू तरीके के रूप में 'उबालने' को याद रखें।
Question 8. जल को उबालने से क्या लाभ है?
Answer: जल को उबालने से उसमें मौजूद कीटाणु और जीवाणु पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, और ठंडा होने के बाद वह पानी पीने योग्य हो जाता है। उबालना पानी को सुरक्षित बनाता है।
In simple words: पानी को उबालने से उसके अंदर के सारे कीटाणु और जीवाणु मर जाते हैं, जिससे वह पीने के लिए सुरक्षित हो जाता है।
🎯 Exam Tip: उबालने के मुख्य लाभ को स्पष्ट करें: जीवाणुओं का विनाश और पीने योग्य बनाना।
Question 9. फिटकरी मिलाने से जल किस प्रकार शुद्ध हो जाता है?
Answer: फिटकरी मिलाने से पानी में घुले हुए और न घुले हुए पदार्थ नीचे बैठ जाते हैं (अवक्षेपित हो जाते हैं), जिन्हें बाद में छानकर आसानी से अलग किया जा सकता है। यह विधि गंदगी को साफ करने में मदद करती है।
In simple words: फिटकरी डालने से पानी की सारी गंदगी नीचे बैठ जाती है, जिसे बाद में छानकर साफ पानी अलग कर लिया जाता है।
🎯 Exam Tip: फिटकरी के काम करने के तरीके (अवक्षेपण) को समझें और इसे अपने उत्तर में स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 10. प्रकृति में जल किस प्रकार शुद्ध होता रहता है ?
Answer: प्रकृति में जल सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी (UV) किरणों द्वारा लगातार शुद्ध होता रहता है। सूर्य की किरणें पानी में मौजूद कई सूक्ष्मजीवों को नष्ट करती हैं।
In simple words: सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें प्रकृति में पानी को अपने आप साफ करती रहती हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक जल शुद्धिकरण में सूर्य के प्रकाश और पराबैंगनी किरणों की भूमिका को याद रखें।
Question 11. वर्षा के जल में कौन-सी अशुद्धियाँ होती
Answer: वर्षा के जल में कार्बन डाइऑक्साइड \( \left( \text{CO}_{2} \right) \), धूल के कण, जीवाणु और धुआँ आदि मिले रहते हैं। यह अशुद्धियाँ हवा में मौजूद प्रदूषण के कारण आती हैं।
In simple words: बारिश के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड, धूल, कीटाणु और धुएँ जैसे गंदे कण होते हैं।
🎯 Exam Tip: वर्षा के जल में सामान्य रूप से पाई जाने वाली अशुद्धियों को सूचीबद्ध करें।
Question 12. किन साधारण विधियों द्वारा जल को शुद्ध पीने योग्य बनाया जा सकता है?
Answer: जल को पीने योग्य बनाने के लिए कुछ साधारण विधियाँ हैं:
1. उबालकर,
2. छानकर,
ये दोनों तरीके पानी को साफ करने में बहुत मददगार होते हैं।
In simple words: पानी को साफ करके पीने लायक बनाने के लिए उसे उबालना या छानना सबसे आसान तरीके हैं।
🎯 Exam Tip: सरल जल शुद्धिकरण विधियों को याद रखें जो आसानी से घर पर अपनाई जा सकती हैं।
Question 13. संदूषित जल किसे कहते हैं?
Answer: यदि जल में सूक्ष्म जीवाणुओं और रोगाणुओं की उपस्थिति हो, तो उसे संदूषित जल कहते हैं। ऐसा पानी पीने या इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित नहीं होता है।
In simple words: जिस पानी में छोटे-छोटे कीटाणु और बीमारी फैलाने वाले रोगाणु हों, उसे संदूषित पानी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संदूषित जल की परिभाषा को स्पष्ट और संक्षिप्त रखें, विशेष रूप से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति पर जोर दें।
Question 14. पीलिया रोग किस कारण से होता है?
Answer: पीलिया रोग दूषित पानी और भोजन का सेवन करने से होता है। यह एक वायरस या जीवाणु के कारण हो सकता है जो दूषित माध्यम से फैलता है और लिवर को प्रभावित करता है।
In simple words: पीलिया बीमारी गंदा पानी और दूषित खाना खाने से होती है।
🎯 Exam Tip: पीलिया के मुख्य कारण के रूप में दूषित जल और भोजन का उल्लेख करें।
Question 15. जल की अस्थाई कठोरता कैसे दूर की जा सकती है?
Answer: जल की अस्थाई कठोरता को उबालकर, या कास्टिक सोडा, अमोनिया डाइआक्साइड को डालकर दूर किया जा सकता है। उबालना सबसे सरल तरीका है।
In simple words: पानी की अस्थायी कठोरता को दूर करने के लिए उसे उबालना या उसमें कुछ रसायन जैसे कास्टिक सोडा मिलाना एक आसान तरीका है।
🎯 Exam Tip: जल की अस्थायी कठोरता को दूर करने के विभिन्न तरीकों को याद रखें, खासकर घरेलू विधियों को।
Question 16. जल में तैरने वाली अशुद्धियों को कैसे दूर किया जाता है?
Answer: जल में तैरने वाली अशुद्धियों को छानकर और निथारकर दूर किया जाता है। छानने से बड़े कण अलग हो जाते हैं, जबकि निथारने से निलंबित कण तल पर बैठ जाते हैं।
In simple words: पानी में तैरती गंदगी को हटाने के लिए उसे छानना या निथारना चाहिए, जिससे ठोस कण अलग हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: जल से ठोस अशुद्धियों को हटाने के लिए 'छानना' और 'निथारना' जैसी विधियों को समझें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 लघूत्तरीय प्रश्न (Part-1)
Question 1. मानवीय क्रियाकलापों द्वारा जल कैसे प्रदूषित होता है?
Answer: निम्न मानवीय क्रियाकलापों द्वारा जल प्रदूषित होता है –
- जल में नहाना, पशुओं को नहलाना, जिससे जल में गंदगी और जीवाणु मिलते हैं।
- मानव एवं पशुओं का मल-मूत्र विसर्जित करना, जो जल को संदूषित करता है।
- कारखानों का अपशिष्ट प्रवाहित करना, जिसमें हानिकारक रसायन होते हैं।
- मृत शवों को जल में प्रवाहित करना, जो जैविक प्रदूषण का कारण बनता है।
In simple words: इंसान पानी को नहाकर, पशुओं को नहलाकर, मल-मूत्र त्याग कर, कारखानों का कचरा डालकर, और मरे हुए जानवरों को पानी में फेंककर गंदा करते हैं।
🎯 Exam Tip: मानवीय गतिविधियों को सूचीबद्ध करें जो जल प्रदूषण का कारण बनती हैं और प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दें।
Question 2. प्रदूषित जल किस प्रकार हमें नुकसान पहुँचाता है?
Answer: प्रदूषित जल हमें कई तरह से नुकसान पहुँचाता है। इसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु और रसायन पेट और आंतों से संबंधित कई गंभीर बीमारियाँ पैदा कर सकते हैं, जैसे हैजा, टाइफाइड, पेचिश, दस्त और पीलिया। यह बीमारियाँ शरीर को कमजोर कर देती हैं और कभी-कभी जानलेवा भी हो सकती हैं। फ्लोराइड जैसे तत्वों की अधिकता से दांतों और हड्डियों में समस्याएँ (फ्लोरोसिस) हो सकती हैं। यह पानी सीधे पीने या इससे बना खाना खाने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।
In simple words: गंदा पानी पीने से पेट की बीमारियाँ, जैसे दस्त और हैजा हो सकती हैं। इसमें मौजूद रसायन हमारे दांतों और हड्डियों को भी खराब कर सकते हैं, जिससे हमारा स्वास्थ्य बिगड़ जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रदूषित जल से होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों को विस्तार से बताएं, जिसमें पाचन संबंधी रोग और दीर्घकालिक प्रभाव शामिल हों।
Question 3. गुणवत्ता के आधार पर जल को कितने प्रकारों में बाँटा गया है?
Answer: गुणवत्ता के आधार पर जल को निम्नलिखित चार प्रकारों में बाँटा गया है –
- शुद्ध जल: वह जल जिसमें कोई अवांछनीय तत्व नहीं होता, शुद्ध जल कहलाता है। इसे प्राकृतिक जल भी कहते हैं क्योंकि यह अपने शुद्धतम रूप में पाया जाता है।
- सुरक्षित जल: शुद्ध जल का उपचार करके उसे पीने योग्य बनाया जाता है, इसे उपचारित जल भी कहते हैं। इस जल में किसी प्रकार के अवांछनीय पदार्थ नहीं होते हैं और यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होता है।
- संदूषित जल: यदि जल में सूक्ष्म जीवाणु और रोगाणु उपस्थित हों तो इसे संदूषित जल कहते हैं। ऐसा पानी बीमारी का कारण बन सकता है।
- प्रदूषित जल: यदि जल में कार्बनिक, अकार्बनिक, विकिरण और जैविक जैसी अशुद्धियाँ घुली हुई हों तो वह प्रदूषित जल कहलाता है। यह सबसे खतरनाक प्रकार का जल होता है।
In simple words: पानी को उसकी गुणवत्ता के हिसाब से चार तरह का माना जाता है: शुद्ध जल (एकदम साफ), सुरक्षित जल (पीने लायक बनाया गया), संदूषित जल (कीटाणु वाला) और प्रदूषित जल (रसायन और गंदगी वाला)।
🎯 Exam Tip: जल के चारों प्रकारों (शुद्ध, सुरक्षित, संदूषित, प्रदूषित) को याद रखें और प्रत्येक की परिभाषा को संक्षिप्त में समझाएं।
Question 4. शुद्ध तथा अशुद्ध जल में अन्तर बताइए।
Answer:
| शुद्ध जल | अशुद्ध जल | |
|---|---|---|
| 1. | शुद्ध जल गन्धहीन, रंगहीन तथा पारदर्शी होता है। | अशुद्ध जल गन्धयुक्त, रंगीन तथा पारदर्शी या अपारदर्शी होता है। |
| 2. | शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है। | अशुद्ध जल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। |
| 3. | शुद्ध जल के साथ साबुन रगड़ने से झाग पैदा होता है। | अशुद्ध जल के साथ साबुन अधिक रगड़ने पर भी झाग बहुत कम उत्पन्न होते हैं। |
| 4. | शुद्ध जल दूषित नहीं होता है। | अशुद्ध जल में विभिन्न प्रकार के दूषित पदार्थ मिले रहते हैं। |
| 5. | शुद्ध जल में फ्लोराइडस, नाइट्रेट आदि की एक निर्धारित मात्रा होती है। | अशुद्ध जल में फ्लोराइड्स, नाइट्रेट अधिक मात्रा में होते हैं। |
In simple words: शुद्ध पानी साफ, गंधहीन और सेहतमंद होता है, जबकि अशुद्ध पानी बदबूदार, रंगीन और स्वास्थ्य के लिए खराब होता है। शुद्ध पानी में साबुन से झाग बनता है, पर अशुद्ध पानी में कम।
🎯 Exam Tip: शुद्ध और अशुद्ध जल के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए एक तुलनात्मक तालिका का उपयोग करें, जिसमें भौतिक और स्वास्थ्य संबंधी गुणों को शामिल किया जाए।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 निबन्धात्मक प्रश्न (Part-1)
Question 1. घर पर जल को सुरक्षित रखने हेतु आप क्या सावधानियाँ रखेंगे और क्यों?
Answer: घर पर जल को सुरक्षित रखने के लिए कई सावधानियाँ बरतनी चाहिए, क्योंकि स्वच्छ जल अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है। ये सावधानियाँ निम्नलिखित हैं:
1. पानी को ढककर रखें: पानी के बर्तनों को हमेशा ढककर रखना चाहिए ताकि धूल, मिट्टी और कीटाणु उसमें न गिरें।
2. पानी निकालने के लिए साफ डंडी या लुटिया का प्रयोग करें: पानी निकालने के लिए हमेशा एक लंबी डंडी वाली लुटिया या मग का उपयोग करें, और सुनिश्चित करें कि वह साफ हो। कभी भी हाथ से पानी नहीं निकालना चाहिए।
3. पानी के बर्तन को ऊँचे स्थान पर रखें: पानी के बर्तनों को ज़मीन से ऊँचाई पर रखना चाहिए ताकि वे धूल और गंदगी से सुरक्षित रहें और पालतू जानवर या बच्चे आसानी से उन तक न पहुँच सकें।
4. पानी के बर्तन में हाथ नहीं डालना चाहिए: पानी निकालने या लेने के लिए सीधे हाथ डालने से बचें। इससे हाथ पर मौजूद कीटाणु पानी में जा सकते हैं।
इन सावधानियों को रखने से कई लाभ होते हैं:
- पानी का बर्तन ढका होने से पानी पीने का मन करता है और संतुष्टि का अनुभव होता है।
- पानी कीटाणुरहित रहता है।
- पानी को ढककर रखने से मिट्टी, धूल आदि के कण उसमें नहीं पहुँच पाते हैं।
- पानी के शुद्ध व स्वच्छ होने से अनेक जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा हो जाती है।
- जल का पूर्ण उपयोग होता है।
In simple words: घर पर पानी को साफ रखने के लिए उसे ढककर रखना चाहिए, पानी निकालने के लिए साफ डंडी या लुटिया का इस्तेमाल करना चाहिए और बर्तन को ऊँचाई पर रखना चाहिए। इससे पानी साफ रहता है और बीमारियाँ नहीं फैलतीं।
🎯 Exam Tip: जल को सुरक्षित रखने की सभी प्रमुख सावधानियों को बिंदुवार तरीके से सूचीबद्ध करें और उनके महत्व को स्पष्ट करें।
Question 2. जल की भौतिक एवं रासायनिक गुणवत्ता के मानक एक तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer:
| क्र.सं. | पैरामीटर्स | अधिकतम सीमा अनापत्तिजनक | सहमत अनापत्तिजनक |
|---|---|---|---|
| 1. | गंध | ||
| 2. | स्वाद | ||
| 3. | पी.एच. मान (pH - power of Hydrogen) | 6.5-8.5 | |
| 4. | घुलनशील ठोस पदार्थ मि. ग्राम/लिटर | 500 | |
| 5. | कुल कठोरता मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 200 | |
| 6. | कैल्सियम मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 75 | |
| 7. | मैग्नीशियम मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 30 | |
| 8. | क्लोराइड मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 250 | |
| 9. | फ्लोराइड मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 1.0 | |
| 10. | लौह लवण मि. ग्राम/लिटर अधिकतम | 0.3 | |
| 11. | कोलीफोर्म MPN/100 मिली जल (coliform) (Most probable number) | न्यून उपस्थिति | |
| 12. | मैलापन, NTU, अधिकतम (Turbidity) (Nephelometric turbidity unit) | 1 |
पानी की गुणवत्ता को मापने के लिए भौतिक और रासायनिक मानकों का पालन किया जाता है। इन मानकों में पानी का स्वाद, गंध, पीएच मान, घुलनशील ठोस पदार्थ, कठोरता और विभिन्न खनिजों की मात्रा शामिल होती है। तालिका इन सभी मानकों की स्वीकार्य सीमाएं दिखाती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पानी पीने के लिए सुरक्षित है। उदाहरण के लिए, पीने योग्य पानी का पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए।
In simple words: पानी कितना अच्छा है, यह जानने के लिए उसके रंग, गंध, स्वाद और उसमें घुली चीजों को मापा जाता है। एक तालिका इन सब की सही मात्रा बताती है, ताकि पानी पीने के लिए सुरक्षित हो।
🎯 Exam Tip: जल गुणवत्ता के मानकों से संबंधित तालिका को याद रखें, विशेष रूप से pH मान, कठोरता और फ्लोराइड की स्वीकार्य सीमाएं।
Question 3. संदूषित जल से उत्पन्न होने वाले रोगों को एक तालिका द्वारा समझाइए।
Answer:
| रोग | रोगकारक जीवाणु | रोग फैलने का कारण | लक्षण | |
|---|---|---|---|---|
| 3. | पेचिश | कोलेरे, सालमोनेला एवं शीजेला | कोलेरे से संदूषित जल, सालमोनेला एवं शीजेला जीवाणु से संदूषित जल | रक्त प्रवाह तेज होना, खूनी पेचिश व किन्हीं को खूनी उल्टी की संभावना |
| 4. | टायफाइड | सालमोनेला टायफी | रोगी वाहक के संक्रमित मल द्वारा संदूषित जल | तेज व लगातार बुखार (140°F तक), खूब पसीना आना, दस्त की संभावना, प्लीहा एवं यकृत के आकार में वृद्धि। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाता है तो प्रलाप व मृत्यु हो जाती है। पेट व छाती पर लाल दानें। |
| 5. | गंभीर तीक्ष्ण श्वसन लक्षण | कोरोना वायरस | संदूषित जल | बुखार, कफ, खाँसी, गले में खराश, शारीरिक शिथिलता, थकान, पाचन सम्बन्धी विकार |
| 6. | पीलिया | हिपेटाइटिस ए वायरस | संदूषित जल एवं भोजन | शारीरिक थकान, बुखार, पेट दर्द, वजन कम होना, खुजली, पीलिया एवं असवाद |
| 7. | पोलियो | पोलियो वायरस | रोगी वाहक के संक्रमित मल के द्वारा संदूषित जल | प्रलाप, सिरदर्द, बुखार, मानसिक पक्षाघात (लकवा) |
| 8. | लेप्टोस्पाइरोसिस | बेक्टीरियम लेप्टोस्पाइरा | जानवरों के मूत्र में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा संदूषित जल | प्रथम चरण-फ्लू, द्वितीय चरण-मैनेंजाइटिस, पीलिया, यकृत क्षय एवं वृक्क घात |
संदूषित जल कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। पेचिश, टाइफाइड, पीलिया और पोलियो जैसी बीमारियाँ दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलती हैं। ये बीमारियाँ विभिन्न जीवाणुओं और वायरस के कारण होती हैं और इनके लक्षण गंभीर हो सकते हैं, जैसे बुखार, दर्द, दस्त, और आंतरिक अंगों को नुकसान। यह तालिका संदूषित जल से होने वाले रोगों, उनके कारक जीवाणुओं और लक्षणों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे इन बीमारियों की गंभीरता समझी जा सकती है।
In simple words: गंदे पानी से कई बीमारियाँ होती हैं, जैसे पेचिश, टाइफाइड, पीलिया और पोलियो। ये बीमारियाँ कीटाणुओं और वायरस से फैलती हैं और इनके लक्षण बुखार, दर्द, और अंगों के खराब होने जैसे होते हैं।
🎯 Exam Tip: जलजनित रोगों की तालिका बनाते समय, रोग का नाम, कारक रोगाणु, फैलने का तरीका और मुख्य लक्षणों को सटीक रूप से लिखें।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (Part-II)
Question 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. भोज्य पदार्थों को स्वच्छ रखने के लिए आवश्यक है कि उन्हे...........होने से बचायें।
2. गेहूं, चावल, दालों आदि को...........व...........साफ एवं सूखे डिब्बों में संगृहीत करें।
3. भोजन को सदैव...........रखना चाहिए।
4. भोजन के दूषित होने के तापमान की परिधि...........है।
5. रसोइया स्वयं...........व...........होना चाहिए।
Answer:
1. दूषित / अस्वच्छ
2. छानकर, बीनकर
3. ढककर,
4. 5°C-60°C
5. स्वच्छ व स्वस्थ
खाद्य पदार्थों को साफ और सुरक्षित रखने के लिए ये सभी बातें बहुत ज़रूरी हैं।
In simple words: खाना साफ रखने के लिए उसे खराब होने से बचाना चाहिए। अनाज को छानकर और बीनकर सूखे डिब्बों में रखना चाहिए। खाने को हमेशा ढककर रखना चाहिए। खाना दूषित होने का तापमान 5°C से 60°C के बीच होता है। रसोइए को साफ और स्वस्थ होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय खाद्य स्वच्छता से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दों और तापमान जैसी संख्याओं को याद रखें।
Question 2. खाद्य स्वच्छता से आप क्या समझते हैं?
Answer: खाद्य स्वच्छता का मतलब है ऐसे खाद्य पदार्थों का उत्पादन करना जो खाने वाले के लिए सुरक्षित हों और जिन्हें लंबे समय तक अच्छी गुणवत्ता में स्टोर किया जा सके। इसलिए, खाद्य पदार्थों को साफ रखना और उन्हें दूषित होने से बचाना ही खाद्य स्वच्छता कहलाता है। इसमें खाने को बनाने, संभालने और स्टोर करने के सही तरीके शामिल होते हैं।
In simple words: खाद्य स्वच्छता का मतलब है खाने की चीजों को इस तरह से बनाना और रखना कि वे खाने वाले के लिए सुरक्षित रहें और जल्दी खराब न हों।
🎯 Exam Tip: खाद्य स्वच्छता की परिभाषा देते समय, 'सुरक्षा' और 'गुणवत्ता' शब्दों पर जोर दें।
Question 3. खाद्य पदार्थ किन-किन कारणों से अस्वच्छ हो जाता है?
Answer: खाद्य पदार्थ निम्नलिखित कारणों से अस्वच्छ हो जाता है –
- खाद्य पदार्थों को अधिक समय तक खुला रखने से उनमें धूल, मिट्टी के कण पहुँचकर उन्हें अस्वच्छ कर देते हैं।
- कच्चे भोज्य पदार्थों जैसे – फल व सब्जियों में कीटाणु पनप जाते हैं जिसके कारण वे दूषित हो जाते हैं।
- जिस बर्तन में खाना बनाया जाता है, उनके साफ व स्वच्छ न होने पर भोज्य पदार्थ अस्वच्छ व दूषित हो जाता है।
- भोज्य पदार्थ रखने का स्थान यदि अस्वच्छ है तो उस स्थान की गंदगी भोज्य पदार्थों में प्रवेश कर जाती है, जिससे भोजन अस्वच्छ व दूषित हो जाता है।
- भोजन पकाने व परोसने वाले व्यक्ति के अस्वस्थ होने से भोजन हानिकारक हो जाता है।
- जिन बर्तनों में भोजन परोसा जाता है, वे पूर्ण रूप से स्वच्छ व साफ होने चाहिए अन्यथा बर्तनों की गंदगी भोजन के साथ मिलकर पेट में चली जायेगी और व्यक्ति को रोगी बना देगी।
- रसोईये के बाल व नाखून कटे हुए न होने पर नाखूनों की गंदगी भोज्य पदार्थ में मिल जाती है जिससे भोजन अस्वच्छ हो जाता है।
In simple words: खाने की चीजें खुली रखने, गंदे बर्तनों का उपयोग करने, अस्वस्थ रसोइये द्वारा बनाने, और गंदी जगह पर रखने से खराब हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों के दूषित होने के कारणों को सूचीबद्ध करें, जिसमें पर्यावरणीय, व्यक्तिगत स्वच्छता और भंडारण संबंधी कारक शामिल हों।
Question 4. खाद्य पदार्थों को स्वच्छ कैसे रखा जा सकता है? उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: खाद्य पदार्थों को स्वच्छ रखना मानव की तीन मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है: भोजन, कपड़ा और मकान। भोजन एक बहुत महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके बिना व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता। भोजन से ही व्यक्ति को शक्ति और ऊर्जा मिलती है जिससे वह कठिन से कठिन कार्य आसानी से कर लेता है। भोजन के माध्यम से ही व्यक्ति को सभी पौष्टिक तत्व उचित मात्रा में मिलते हैं जिससे उसके शरीर की रोगों से रक्षा होती है। यदि भोजन दूषित व अस्वच्छ होगा तो व्यक्ति अनेक रोगों का शिकार होकर कमजोर हो जायेगा। अतः यह बहुत आवश्यक है कि भोजन व खाद्य पदार्थों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाये। खाद्य पदार्थों को स्वच्छ रखने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए:
(3) ताजे फल व सब्जियों का प्रयोग करें: बाजार से हमेशा ताजे फल व सब्जियाँ ही खरीदनी चाहिए। अत्यधिक पके फल व सब्जियाँ संक्रमित व दूषित हो सकते हैं। उन्हें भोज्य पदार्थों में शामिल नहीं करना चाहिए।
(4) बर्तन साफ व स्वच्छ रखें: भोजन पकाने व परोसने के बर्तन साफ व स्वच्छ रखने चाहिए जिससे किसी भी प्रकार की अस्वच्छता का भय न रहे।
(5) रसोई बनाने वाला व्यक्ति स्वस्थ हो: सर्दी, जुकाम, क्षय रोग या कोई चर्म रोग वाले व्यक्ति से न तो भोजन पकवाना चाहिए और न ही भोजन परोसवाना चाहिए, क्योंकि खाँसते व छींकते समय जीवाणु भोजन में प्रवेश कर जाते हैं और भोजन को दूषित कर देते हैं।
(6) बाल व नाखून कटे हों: जो व्यक्ति भोजन पका रहा है उसके बाल व नाखून कटे होने चाहिए, साथ ही उसके वस्त्र साफ होने चाहिए।
(7) धूम्रपान न करें: धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से कभी भी भोजन नहीं पकवाना चाहिए और न ही परोसवाना चाहिए।
(8) कूड़ेदान की सफाई-घर के कूड़े: करकट को ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालें तथा कूड़ेदान की भी नियमित सफाई करें। कूड़ादान को भी नियमित रूप से धोना और कीटाणुमुक्त करना चाहिए।
(9) नेपकिन, झाड़न को साफ रखें: रसोई के कार्य में प्रयुक्त किये जाने वाले कपड़े नेपकिन, झाड़न आदि को साबुन से धोकर धूप में सुखाकर उपयोग में लाना चाहिए।
(10) आवश्यकतानुसार भोजन बनायें: पारिवारिक सदस्यों की आवश्यकतानुसार ही भोजन पकाना चाहिए अन्यथा भोजन खराब हो जाता है। अधिक दिनों तक फ्रिज में रखे भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखा जाये तो भोज्य पदार्थों को स्वच्छ व कीटाणुरहित रखा जा सकता है।
In simple words: खाने को साफ रखने के लिए हमेशा ताजे फल-सब्जियां खरीदें, बर्तन साफ रखें, स्वस्थ व्यक्ति ही खाना बनाए, बाल-नाखून कटे हों, धूम्रपान न करें, कूड़ेदान साफ रखें, कपड़े साफ हों और ज़रूरत भर का खाना बनाएं।
🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों को स्वच्छ रखने के विभिन्न तरीकों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक के लिए एक संक्षिप्त उदाहरण या स्पष्टीकरण दें।
Question 1. ऐसे भोजन से शरीर का पोषण होता है, जो -
(अ) सन्तुलित
(ब) पौष्टिक
(स) स्वच्छ
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: संतुलित, पौष्टिक और स्वच्छ भोजन ही शरीर को सही पोषण देता है, जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और ठीक से काम करता है।
🎯 Exam Tip: पोषक तत्व, संतुलन और स्वच्छता - ये तीनों अच्छे भोजन के मुख्य गुण होते हैं।
Question 2. स्वच्छ खाद्य पदार्थ वे होते हैं, जो उपभोक्ता के लिए -
(अ) सुरक्षित हों
(ब) सस्ते हों
(स) स्वादिष्ट हों
(द) पौष्टिक हो
Answer: (अ) सुरक्षित हों
In simple words: स्वच्छ खाद्य का मतलब है ऐसा खाना जो खाने वाले के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो और कोई नुकसान न पहुँचाए।
🎯 Exam Tip: खाद्य स्वच्छता का मुख्य लक्ष्य भोजन को हानिकारक तत्वों से बचाना होता है ताकि वह खाने योग्य रहे।
Question 3. भोजन पकाने व परोसने के कब-कब साफ करने चाहिए –
(अ) समय मिलने पर
(ब) जितनी जल्दी हो सके
(स) सारे दिन के एक साथ
(द) इनमें से कोई भी नहीं
Answer: (ब) जितनी जल्दी हो सके
In simple words: खाना बनाने और परोसने के बर्तनों को तुरंत धोना चाहिए ताकि उनमें गंदगी न जमे और कीटाणु न फैलें।
🎯 Exam Tip: स्वच्छता बनाए रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि इस्तेमाल के तुरंत बाद ही बर्तनों को साफ कर लिया जाए।
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. भोज्य पदार्थों को स्वच्छ रखने के लिए आवश्यक है कि उन्हें **दूषित/अस्वच्छ** होने से बचाएँ।
2. गेहूँ, चावल, दालों आदि को **छानकर व बीनकर** साफ एवं सूखे डिब्बों में संग्रहीत करें।
3. भोजन को सदैव **ढककर** रखना चाहिए।
4. रसोइया स्वयं **स्वच्छ** होना चाहिए।
Answer:
1. भोज्य पदार्थों को स्वच्छ रखने के लिए आवश्यक है कि उन्हें **दूषित/अस्वच्छ** होने से बचाएँ।
2. गेहूँ, चावल, दालों आदि को **छानकर व बीनकर** साफ एवं सूखे डिब्बों में संग्रहीत करें।
3. भोजन को सदैव **ढककर** रखना चाहिए।
4. रसोइया स्वयं **स्वच्छ** होना चाहिए।
In simple words: भोजन को खराब होने से बचाने के लिए उसे हमेशा साफ और ढँक कर रखना चाहिए। खाना बनाने वाले व्यक्ति को भी साफ-सुथरा रहना चाहिए ताकि खाना सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: खाली स्थान भरते समय, आपको दिए गए वाक्य के संदर्भ को समझना चाहिए और सबसे उपयुक्त शब्द चुनना चाहिए जो वाक्य के अर्थ को पूरा करता हो।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 अति लघूत्तरीय प्रश्न (PART-II)
Question 1. संदूषित भोजन के सेवन से कौन-सी बीमारियाँ हो सकती हैं?
Answer: संदूषित भोजन के सेवन से कई बीमारियाँ हो सकती हैं, जैसे हैजा, उल्टी, अतिसार (दस्त), और पीलिया। यह सभी बीमारियाँ पेट और पाचन तंत्र को प्रभावित करती हैं।
In simple words: गंदा खाना खाने से हैजा, उल्टी, दस्त और पीलिया जैसी पेट की बीमारियाँ हो सकती हैं।
🎯 Exam Tip: संदूषित भोजन से होने वाली मुख्य बीमारियों के नाम याद रखें और बताएँ कि ये पेट को कैसे प्रभावित करती हैं।
Question 2. खाद्य पदार्थ कैसे अस्वच्छ हो जाते हैं?
Answer: खाद्य पदार्थ कई कारणों से अस्वच्छ हो जाते हैं, जैसे उनमें गंदगी, कीटाणु और हानिकारक रासायनिक पदार्थ मिल जाना। इसके अलावा, खाना बनाने वाले व्यक्ति की साफ-सफाई न होना, खाने को रखने और इकट्ठा करने की जगह, बर्तन, उपकरण और दूसरी चीज़ों का गंदा होना भी खाद्य पदार्थों को अस्वच्छ कर देता है।
In simple words: खाने में धूल, गंदगी, कीटाणु या रसायन मिलने से वह गंदा हो जाता है। खाना बनाने वाले व्यक्ति या बर्तनों की साफ-सफाई न होने पर भी खाना खराब हो जाता है।
🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों के अस्वच्छ होने के सभी प्रमुख कारणों, जैसे गंदगी, कीटाणु, रसायन, और अस्वच्छ वातावरण, को सूचीबद्ध करें।
Question 3. स्वच्छ खाद्य से क्या अभिप्राय है?
Answer: स्वच्छ खाद्य का मतलब ऐसे भोज्य पदार्थों के उत्पादन से है जो खाने वाले व्यक्ति के लिए सुरक्षित होते हैं। इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है, और इन्हें इकट्ठा करते समय भी इनकी गुणवत्ता वैसी ही बनी रहती है। स्वच्छ खाद्य में कोई हानिकारक तत्व नहीं होता।
In simple words: स्वच्छ खाना वह है जो सुरक्षित हो, लंबे समय तक अच्छा रहे और उसकी गुणवत्ता हमेशा बनी रहे।
🎯 Exam Tip: स्वच्छ खाद्य की परिभाषा में सुरक्षा, गुणवत्ता और भंडारण (संग्रहण) को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।
Question 4. भोजन में किस प्रकार के फल व सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए?
Answer: भोजन में हमेशा ताज़े और साफ फल व सब्जियों का ही प्रयोग करना चाहिए। ताज़े फल और सब्ज़ियाँ स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी पोषक तत्व देती हैं और उनमें हानिकारक कीटाणु होने की संभावना कम होती है।
In simple words: हमेशा ताज़े फल और सब्ज़ियाँ खानी चाहिए ताकि भोजन स्वस्थ और सुरक्षित रहे।
🎯 Exam Tip: फल और सब्ज़ियों की ताजगी पर ज़ोर दें, क्योंकि यह भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 12 Home Science Chapter 20 लघूत्तरीय प्रश्न (PART-II)
Question 1. बाजार से लाये गए खाद्य पदार्थों को संग्रहण से पहले क्या करना चाहिए?
Answer: बाजार से लाए गए सभी खाद्य पदार्थों को इस्तेमाल करने या स्टोर करने से पहले साफ कर लेना बहुत ज़रूरी है। उदाहरण के लिए, फल और सब्ज़ियों को अच्छे से धोकर, सुखाकर फ्रिज में रखना चाहिए। आलू और प्याज जैसी चीज़ों से बाहरी गंदगी हटाकर उन्हें टोकरी में रखना चाहिए। गेहूँ, चावल और दालों जैसे अनाज को छानकर और बीनकर साफ, सूखे डिब्बों में रखना चाहिए ताकि वे सुरक्षित रहें।
In simple words: बाजार से लाए गए खाने को रखने से पहले हमेशा धोना, साफ करना और सही तरीके से स्टोर करना चाहिए, जैसे फलों को धोकर फ्रिज में और अनाज को छानकर डिब्बे में रखना।
🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों को स्टोर करने से पहले उनकी साफ-सफाई और उचित भंडारण विधियों के महत्व पर ध्यान दें, उदाहरणों के साथ समझाएँ।
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