RBSE Solutions Class 12 Home Science Chapter 15 वृद्धावस्था में पोषण

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Detailed Chapter 15 वृद्धावस्था में पोषण RBSE Solutions for Class 12 Home Science

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Class 12 Home Science Chapter 15 वृद्धावस्था में पोषण RBSE Solutions PDF

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्नलिखित में से सही उत्तर चुनें -
(i) मानव जीवन के विकास क्रम में उम्र का आखिरी पड़ाव कहलाता है –
(अ) बाल्यावस्था
(ब) वृद्धावस्था
(स) शैशवावस्था
(द) युवावस्था।
Answer: (ब) वृद्धावस्था
In simple words: मानव जीवन के विकास में वृद्धावस्था अंतिम चरण है। यह जीवन का वह हिस्सा है जब व्यक्ति बूढ़ा हो जाता है।

🎯 Exam Tip: मानव विकास की विभिन्न अवस्थाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे बाल्यावस्था, युवावस्था, और वृद्धावस्था, क्योंकि इनसे जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 1. (ii) वृद्धावस्था के दौरान अस्थि से सम्बन्धित रोग को कहते हैं –
(अ) एनीमिया
(ब) ऑस्टियोपोरोसिस
(स) ऑस्टियोमलेशिया
(द) रिकेट्स
Answer: (ब) ऑस्टियोपोरोसिस
In simple words: वृद्धावस्था में हड्डियों से जुड़ी बीमारी को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। इसमें हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: अस्थियों (हड्डियों) से संबंधित बीमारियों के नामों और उनके कारणों को याद रखें, विशेषकर वृद्धावस्था में होने वाले रोगों पर ध्यान दें।

 

Question 1. (iii) शरीर की ऊतकों की टूट-फूट को ठीक करने वाले पदार्थों को कहते हैं –
(अ) विघटनात्मक
(ब) सृजनात्मक
(स) मानसिक
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) सृजनात्मक
In simple words: शरीर के ऊतकों की मरम्मत करने वाले पदार्थों को सृजनात्मक पदार्थ कहा जाता है। ये शरीर को बनाने और ठीक करने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: 'सृजनात्मक' और 'विघटनात्मक' शब्दों के अर्थ को समझें, खासकर शरीर में होने वाली प्रक्रियाओं के संदर्भ में।

 

Question 1. (iv) वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय दर में आ जाती है –
(अ) कमी
(ब) तीव्रता
(स) समानता
(द) ये सभी।
Answer: (अ) कमी
In simple words: बूढ़े होने पर शरीर की ऊर्जा जलाने की रफ्तार धीमी हो जाती है। इसका मतलब है कि शरीर को कम ऊर्जा की जरूरत होती है।

🎯 Exam Tip: आधारीय उपापचय दर (BMR) का वृद्धावस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आहार संबंधी आवश्यकताओं को प्रभावित करता है।

 

Question 1. (v) वृद्धावस्था में शरीर में तन्तुओं की मरम्मत हेतु मुख्य रूप से आवश्यक होता होती है -
(अ) ऊर्जा
(ब) वसा
(स) प्रोटीन
(द) जल
Answer: (स) प्रोटीन
In simple words: वृद्धावस्था में शरीर के टूटे-फूटे ऊतकों को ठीक करने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। प्रोटीन शरीर के निर्माण खंड होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन की भूमिका और वृद्धावस्था में इसकी बढ़ी हुई आवश्यकता को समझें, क्योंकि यह शरीर की मरम्मत और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (vi) लौह तत्व की कमी से हो सकता है -
(अ) कुपोषण
(ब) रक्ताल्पता
(स) ऑस्टियोपोरोसिस
(द) रिकेट्स।
Answer: (ब) रक्ताल्पता
In simple words: शरीर में लोहे की कमी होने से खून की कमी हो जाती है, जिसे रक्ताल्पता कहते हैं। यह कमजोरी और थकावट का कारण बन सकती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोगों के नाम और उनके लक्षण याद रखें, जैसे लौह तत्व की कमी से रक्ताल्पता होती है।

 

Question 4. वृद्धजनों का भोजन सादा, सात्विक, हल्का एवं..........होना चाहिए।
Answer: सुपाच्य
In simple words: बूढ़े लोगों का खाना ऐसा होना चाहिए जो आसानी से पच सके। आसानी से पचने वाला खाना उनके पेट के लिए अच्छा होता है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में आहार के मुख्य गुणों को याद रखें, जैसे सादा, हल्का, और सुपाच्य होना।

 

Question 3. वृद्धावस्था को जरावस्था क्यों कहते हैं?
Answer: वृद्धावस्था में शरीर में निर्माण कार्य बहुत कम हो जाता है और शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इस अवस्था में दांत कमजोर हो जाते हैं, पाचन रस कम बनते हैं जिससे खाना पचाने और सोखने में दिक्कत होती है। जोड़ों में कठोरता आ जाती है, स्वाद कलिकाएं कमजोर हो जाती हैं, याददाश्त कम हो जाती है, ऊंचा सुनाई देता है और कम दिखाई देता है। इन्हीं सब समस्याओं के कारण वृद्धावस्था को जरावस्था कहा जाता है। बुढ़ापे में शरीर के कई हिस्से ठीक से काम नहीं कर पाते।
In simple words: वृद्धावस्था को जरावस्था कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर कमजोर हो जाता है, दांत, पाचन, जोड़, याददाश्त और इंद्रियां कमजोर पड़ने लगती हैं।

🎯 Exam Tip: जरावस्था की परिभाषा और उसके कारणों को विस्तार से समझाएं, जिसमें शारीरिक और संवेदी परिवर्तनों का उल्लेख हो।

 

Question 4. एक वृद्ध को किस प्रकार की पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है? समझाइए।
Answer: वृद्धावस्था में शरीर में उल्टा विकास (Regressive Development) तेजी से होता है, जिससे शरीर के अलग-अलग अंगों के काम करने की क्षमता कम होने लगती है। इसी वजह से कुछ पोषण संबंधी समस्याएं हो सकती हैं:

  • वृद्धावस्था में पाचन नली से निकलने वाले पाचक रस, जैसे-आमाशयी, अग्न्याशयी, आंत्र और पित्त रस, कम हो जाते हैं। इससे भोजन ठीक से नहीं पचता, और अपच की समस्या होती है।
  • आमाशय का संवरणी (Cardiac Sphincter) कमजोर हो जाने से पेट का अम्लीय भोजन बार-बार गले तक पहुँचता है, जिससे डकार और छाती में जलन होती है।
  • पाचन नली द्वारा भोजन के पाचन के साथ-साथ पोषक तत्वों को सोखने की दर भी कम हो जाती है, जिससे कुपोषण का खतरा बढ़ता है।
  • पाचन नली की मांसपेशियों के कमजोर होने से आंतों की क्रमाकुंचन गति धीमी हो जाती है। इससे अपशिष्ट पदार्थ समय पर बाहर नहीं निकलते और कब्ज की शिकायत बनी रहती है। पाचन तंत्र की कमजोरी से पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित होता है।

In simple words: बूढ़े लोगों को पाचन, अपच, पोषक तत्वों का कम अवशोषण और कब्ज जैसी पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये समस्याएं शरीर के कमजोर होने के कारण होती हैं।

🎯 Exam Tip: पोषण संबंधी समस्याओं की सूची बनाते समय, हर समस्या के पीछे के शारीरिक कारणों को समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. एक वृद्ध महिला का आहार-आयोजन करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Answer: एक वृद्ध महिला के लिए आहार बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • भोजन में तले-भुने खाद्य पदार्थों की जगह ताजे और मुलायम फल, हरी सब्जियां, दूध और दूध से बने पदार्थ अधिक मात्रा में देने चाहिए।
  • रात का खाना सोने से कुछ घंटे पहले देना चाहिए, और भूख बढ़ाने के लिए सूप भी दे सकते हैं।
  • रात का भोजन सोने से 2-3 घंटे पहले खा लेना चाहिए।
  • वृद्ध महिला के आहार में तरल पदार्थ जैसे सब्जियों का सूप, शिकंजी, छाछ, दाल-चावल का पानी, जल आदि का अधिक उपयोग करना चाहिए।
  • भोजन में प्रोटीन और विटामिन युक्त पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वृद्ध महिलाओं को पौष्टिक आहार की विशेष आवश्यकता होती है।

In simple words: वृद्ध महिला के आहार में ताजे फल, सब्जियां, दूध और तरल पदार्थ ज्यादा होने चाहिए। तला-भुना खाना कम देना चाहिए और खाने में प्रोटीन-विटामिन का ध्यान रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: वृद्ध व्यक्तियों के लिए आहार योजना बनाते समय, भोजन की बनावट (मुलायम, तरल), पाचन क्षमता और पोषक तत्व (प्रोटीन, विटामिन) पर विशेष ध्यान दें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

 

Question 1. वृद्ध व्यक्तियों में हॉर्मोन के असन्तुलन के कारण अस्थियों में किस तत्व की कमी हो जाती है?
(अ) जल की
(ब) खनिजों की
(स) रक्त की
(द) प्रोटीन की
Answer: (ब) खनिजों की
In simple words: हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से बूढ़े लोगों की हड्डियों में खनिज कम हो जाते हैं। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में हार्मोनल परिवर्तनों और उनका अस्थियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को समझें।

 

Question 2. नाड़ी संस्थान के कमजोर होने से वृद्धों में स्वाद कलिकाओं में तीव्रता हो जाती है –
(अ) अधिक
(ब) कम
(स) सामान्य
(द) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
Answer: (ब) कम
In simple words: जब नाड़ी तंत्र कमजोर होता है, तो बूढ़े लोगों की स्वाद कलिकाएं (स्वाद लेने की क्षमता) कम हो जाती है। उन्हें खाने का स्वाद उतना अच्छा नहीं लगता।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में संवेदी अंगों (जैसे स्वाद कलिकाओं) में होने वाले परिवर्तनों और उनके प्रभावों को याद रखें।

 

Question 3. शारीरिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है –
(अ) पोषण स्तर पर
(ब) शारीरिक स्तर पर
(स) मानसिक स्तर पर
(द) भावनात्मक स्तर पर
Answer: (अ) पोषण स्तर पर
In simple words: शारीरिक, सामाजिक और मानसिक बदलावों का बूढ़े व्यक्ति के पोषण पर बुरा असर पड़ता है। इससे उनकी खाने की आदतें बदल सकती हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों के पोषण पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों को समझें।

 

Question 4. वृद्धावस्था में संक्रमण के कारण किस रोग की संभावना बढ़ जाती है?
(अ) दस्त
(ब) अतिसार
(स) दस्त व अतिसार
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) दस्त व अतिसार
In simple words: बुढ़ापे में संक्रमण होने से दस्त और अतिसार जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी और उससे बढ़ने वाले संक्रमण के खतरों को ध्यान में रखें।

 

Question 5. वृद्धावस्था में प्रतिदिन अधिकतम कितनी वसा आहार में लेनी चाहिए?
(अ) 40 ग्राम
(ब) 30 ग्राम
(स) 50 ग्राम
(द) 60 ग्राम
Answer: (ब) 30 ग्राम
In simple words: बूढ़े लोगों को अपने खाने में ज्यादा से ज्यादा 30 ग्राम वसा लेनी चाहिए। ज्यादा वसा उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में वसा की अनुशंसित दैनिक मात्रा को याद रखें और इसके अधिक सेवन से होने वाले खतरों से अवगत रहें।

 

Question 6. वृद्ध व्यक्तियों को प्रतिदिन कम-से-कम कितना पानी पीना चाहिए?
(अ) 1 - 1.5 लीटर
(ब) 1.5 से 2 लीटर
(स) 2-3 लीटर
(द) 500 मिली.से 1 लीटर
Answer: (ब) 1.5 से 2 लीटर
In simple words: बूढ़े लोगों को हर दिन कम से कम 1.5 से 2 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी पीना शरीर को ठीक से काम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में पर्याप्त जल सेवन के महत्व और उसकी दैनिक मात्रा को समझें, क्योंकि निर्जलीकरण एक गंभीर समस्या हो सकती है।

 

Question. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. वृद्धावस्था में शारीरिक वजन में कमी तथा मांसपेशियों की.......... में गिरावट आती है।
2. मांसपेशियों का क्षय होने के कारण त्वचा............हो जाती है।
3. वृद्धावस्था में आंत............ का खतरा बढ़ जाता है।
Answer:
1. शक्ति
2. झुरींदार
3. संक्रमण
In simple words: वृद्धावस्था में शरीर का वजन घटता है, मांसपेशियों की शक्ति कम हो जाती है। मांसपेशियां कमजोर होने से त्वचा झुरींदार हो जाती है। साथ ही आंत में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों और उनसे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को समझने के लिए रिक्त स्थान वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 अति लघूत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. वृद्धावस्था कब प्रारम्भ होती है?
Answer: वृद्धावस्था सामान्यतः 60 वर्ष की उम्र से प्रारम्भ होती है। यह जीवन का अंतिम चरण माना जाता है।
In simple words: बुढ़ापा आमतौर पर 60 साल की उम्र के बाद शुरू होता है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था की सामान्य आयु सीमा याद रखें।

 

Question 2. वृद्धावस्था को जरावस्था क्यों कहते हैं ?
Answer: वृद्धावस्था में शरीर के निर्माण का काम लगभग बंद हो जाता है और शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इसीलिए इसे जरावस्था कहते हैं। शरीर की मरम्मत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
In simple words: इसे जरावस्था कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर कमजोर होने लगता है और टूट-फूट की मरम्मत कम होती है।

🎯 Exam Tip: जरावस्था की परिभाषा में शरीर की क्षीणता और निर्माण कार्य में कमी को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 3. ओस्टियोपोरोसिस रोग शरीर के किस अंग को प्रभावित करता है ?
Answer: ओस्टियोपोरोसिस नामक रोग हड्डियों को प्रभावित करता है। इसमें हड्डियां कमजोर होकर आसानी से टूट सकती हैं।
In simple words: ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों को कमजोर करता है।

🎯 Exam Tip: ओस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों का शरीर के किस अंग पर प्रभाव पड़ता है, यह याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. वृद्धावस्था में जोड़ों के दर्द की समस्या का क्या कारण है ?
Answer: वृद्धावस्था में हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले ऊतकों में कोलेजन फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है। इस वृद्धि के कारण जोड़ों में कठोरता आ जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द होने लगता है।
In simple words: बुढ़ापे में जोड़ों के ऊतकों में कोलेजन बढ़ने से जोड़ कड़े हो जाते हैं और दर्द करते हैं।

🎯 Exam Tip: जोड़ों के दर्द के कारण में कोलेजन फाइबर की भूमिका को समझाएं।

 

Question 5. तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के क्षीण होने से वृद्धावस्था में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं? ।
Answer: वृद्धावस्था में तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं कमजोर होने पर स्वाद कलिकाओं की तीव्रता में कमी आती है, याददाश्त कमजोर हो जाती है, और ऊंचा सुनाई देने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ये परिवर्तन रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं।
In simple words: तंत्रिका तंत्र कमजोर होने से स्वाद कम आता है, याददाश्त घटती है और सुनने में दिक्कत होती है।

🎯 Exam Tip: तंत्रिका तंत्र के क्षीण होने से वृद्धावस्था में होने वाले प्रमुख संवेदी और संज्ञानात्मक परिवर्तनों को सूचीबद्ध करें।

 

उम्र बढ़ने के साथ – साथ वृद्ध व्यक्तियों में श्वसन सम्बन्धी तकलीफें, हृदय सम्बन्धी रोग, मधुमेह, अपच, छाती में जलन एवं कब्ज आदि रोग शरीर में पनपने लगते हैं।

 

Question 7. वृद्धावस्था में मानसिक परेशानियाँ किन-किन कारणों से बढ़ती हैं?
Answer: वृद्धावस्था में शारीरिक कष्टों के बढ़ने के कारण, आर्थिक तंगी के कारण और अकेलेपन के कारण मानसिक परेशानियाँ बढ़ती हैं। सामाजिक अलगाव भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
In simple words: शारीरिक दर्द, पैसों की कमी और अकेलापन बुढ़ापे में मानसिक परेशानियों को बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: मानसिक परेशानियों के शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक कारकों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 8. वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ किन पर निर्भर करती हैं?
Answer: वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताएँ मुख्य रूप से व्यक्ति के शारीरिक परिवर्तनों पर निर्भर करती हैं। इसमें उनकी गतिविधि का स्तर और मौजूदा स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।
In simple words: बूढ़े व्यक्ति की पोषण की जरूरतें उनके शरीर की हालत और कितनी मेहनत करते हैं, इस पर निर्भर करती हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में पौषणिक आवश्यकताओं को प्रभावित करने वाले कारकों को समझें, जैसे शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति।

 

Question 9. वृद्धावस्था में ऊर्जा की माँग में कमी क्यों आती है?
Answer: वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय दर में कमी आ जाती है और शारीरिक क्रियाशीलता में भी कमी आने लगती है। इन दोनों कारणों से ऊर्जा की माँग में कमी आती है।
In simple words: बुढ़ापे में शरीर की ऊर्जा की जरूरत कम हो जाती है क्योंकि शरीर की उपापचय दर धीमी हो जाती है और लोग कम चलते-फिरते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की माँग में कमी के पीछे के दो मुख्य कारणों (कम BMR और कम शारीरिक क्रियाशीलता) को स्पष्ट करें।

 

Question 10. वृद्धावस्था में अधिक वसा का प्रयोग हानिकारक क्यों है?
Answer: वृद्धावस्था में अधिक वसा के प्रयोग से मोटापा, मधुमेह, हृदय संबंधी रोग, कब्ज और वमन आदि बीमारियाँ हो जाती हैं। वसा का अधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक होता है।
In simple words: बुढ़ापे में ज्यादा वसा खाने से मोटापा, शुगर, दिल की बीमारी और पेट की दिक्कतें हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में वसा के अधिक सेवन से होने वाले विभिन्न स्वास्थ्य जोखिमों को याद रखें।

 

Question 11. शारीरिक थकान एवं कब्ज को दूर करने हेतु वृद्ध व्यक्तियों को किस प्रकार का आहार लेना चाहिए? अथवा कब्ज की स्थिति में वृद्ध व्यक्तियों को किस प्रकार का आहार लेना चाहिए।
Answer: शारीरिक थकान और कब्ज को दूर करने के लिए वृद्ध व्यक्तियों को प्रतिदिन के आहार में विटामिन युक्त भोज्य पदार्थों जैसे ताजे फल और हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए। इससे उनका पाचन बेहतर होता है और शरीर को ऊर्जा मिलती है।
In simple words: थकान और कब्ज दूर करने के लिए बूढ़े लोगों को अपने खाने में ताजे फल और हरी सब्जियां ज्यादा लेनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: कब्ज और थकान दूर करने वाले आहार में रेशेदार और विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों के महत्व पर जोर दें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 लघुत्तरीय प्रश्न (SA-I)

 

Question 13. कैल्सियम युक्त भोज्य पदार्थों की कमी से वृद्धावस्था में कौन-सा रोग हो जाता है ?
Answer: कैल्सियम युक्त भोज्य पदार्थों की कमी से वृद्धावस्था में ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है। इस रोग से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
In simple words: कैल्शियम की कमी से बुढ़ापे में ऑस्टियोपोरोसिस होता है।

🎯 Exam Tip: कैल्शियम की कमी से होने वाले रोग का नाम और उसके प्रभाव को याद रखें।

 

Question 14. वृद्धावस्था किसे कहते हैं?
Answer: प्रौढ़ावस्था के बाद आने वाली अवस्था को वृद्धावस्था या जरावस्था कहते हैं। इस अवस्था में शारीरिक और मानसिक क्षमताएं कम होने लगती हैं।
In simple words: जवानी के बाद का समय जब शरीर कमजोर होता है, उसे वृद्धावस्था या बुढ़ापा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था की सरल और स्पष्ट परिभाषा दें।

 

Question 1. वृद्धावस्था में दांत कमजोर होने एवं स्वाद नलिकाओं की क्षीणता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
Answer: वृद्धावस्था में मसूड़े कमजोर होने के कारण दांत कमजोर हो जाते हैं और गिरने लगते हैं। ऐसे में ठोस और सख्त भोजन को काटने और चबाने में परेशानी आती है। साथ ही, स्वाद कलिकाओं की संवेदनशीलता कम होने और लार के कम स्रावित होने के कारण वृद्ध लोग भोजन का पूरा स्वाद नहीं ले पाते हैं। इससे मुंह में होने वाला आंशिक पाचन भी प्रभावित होता है।
In simple words: बुढ़ापे में दांत कमजोर होकर गिर जाते हैं, जिससे खाना चबाना मुश्किल होता है। स्वाद कम आता है और लार भी कम बनती है, जिससे खाने का स्वाद बिगड़ जाता है।

🎯 Exam Tip: दांत और स्वाद कलिकाओं की क्षीणता के सीधे प्रभावों को बताएं, जैसे भोजन चबाने और स्वाद लेने में कठिनाई।

 

Question 2. वृद्धावस्था में प्रोटीन की अधिक आवश्यकता क्यों होती है
Answer: वृद्धावस्था में शरीर के ऊतकों में टूट-फूट की प्रक्रिया अधिक होती है, इसलिए इन ऊतकों की मरम्मत के लिए प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है। चूंकि वृद्ध व्यक्तियों की भूख में कमी आती है और पाचन भी कमजोर होने लगता है, वे अक्सर प्रोटीन युक्त भोजन जैसे दालें कम खाते हैं। लेकिन उनकी प्रोटीन की आहारिक आवश्यकता में कमी नहीं आती है, इसलिए उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन पदार्थ जैसे दूध और दूध के उत्पाद अधिक मात्रा में लेने चाहिए।
In simple words: बुढ़ापे में शरीर के ऊतक ज्यादा टूटते-फूटते हैं, इसलिए उन्हें ठीक करने के लिए प्रोटीन की अधिक जरूरत होती है। भले ही भूख कम लगे, प्रोटीन जरूरी है।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में प्रोटीन की बढ़ी हुई आवश्यकता के पीछे शरीर की टूट-फूट की प्रक्रिया और कम भोजन सेवन को मुख्य कारण बताएं।

 

Question 3. वृद्ध व्यक्तियों के लिए आहार – आयोजन करने से पूर्व किन-किन बातों की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए?
Answer: वृद्ध व्यक्तियों के लिए आहार-आयोजन करने से पूर्व निम्न बातों की ओर ध्यान देना चाहिए:

  • आहार में कम मिर्च-मसाला का प्रयोग होना चाहिए।

वृद्धावस्था में उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन पदार्थ, जैसे-दूध एवं दूध से बने पदार्थ ग्रहण करने चाहिए। वृद्धावस्था में वसा का प्रयोग भी कम करना चाहिए, क्योंकि वसा का प्रयोग भी मोटापा एवं अनेक बीमारियों, जैसे – मधुमेह, हृदय सम्बन्धित रोगों को जन्म दे सकता है। वसा के अत्यधिक प्रयोग से वमन या कै एवं कब्ज भी हो सकता है।
इस अवस्था में आमाशय से स्रावित होने वाले पाचक रस में कमी आने पर लौह तत्वों एवं कैल्सियम का अवशोषण कम हो जाता है, जिससे लौह लवणयुक्त भोज्य पर्याप्त मात्रा में सम्मिलित किये जाने चाहिए। शारीरिक क्रिया तंत्र सुचारु एवं सामान्य बनाये रखने हेतु विटामिनों का समावेश करने के लिए ताजे फल व हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए, अन्यथा वृद्ध अनेक प्रकार की शारीरिक समस्याओं; जैसे – थकान हो जाना, कब्ज होना आदि से ग्रसित हो सकते हैं। एक संतुलित और पौष्टिक आहार वृद्धावस्था में स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: वृद्धों के लिए आहार योजना बनाते समय कम मसाले, उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कम वसा और पर्याप्त विटामिन-खनिज का ध्यान रखना चाहिए। ताजे फल और सब्जियां भी जरूरी हैं।

🎯 Exam Tip: आहार आयोजन में कम मसाले, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज के संतुलन पर ध्यान केंद्रित करें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 लघू उत्तरीय प्रश्न (SA-II)

 

Question 1. वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को लिखिए।
Answer: वृद्धावस्था में निम्नलिखित शारीरिक परिवर्तन उत्पन्न होते हैं:

  • शरीर के अंगों की क्रियाशीलता में कमी आती है।
  • उपापचय, वजन तथा मांसपेशियों की क्रियाशीलता में भी कमी हो जाती है।
  • मुख में काटने एवं चबाने के दांत कमजोर हो जाते हैं या टूट जाते हैं।
  • आहारनाल में पाचक रस कम बनते हैं। अतः भोजन का पाचन एवं अवशोषण कम हो जाता है।
  • हड्डियों को मांसपेशियों से जोड़ने वाले ऊतकों में कोलेजन की मात्रा बढ़ने से जोड़ों में कठोरता आ जाती है।
  • तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के क्षीण होने से स्वाद कलिकाओं की तीव्रता में कमी आ जाती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने के कारण वृद्ध बार-बार बीमार हो जाते हैं।
  • आयु बढ़ने के साथ-साथ श्वसन संबंधी तकलीफें एवं हृदय सम्बन्धी रोग तथा मधुमेह आदि रोग हो जाते हैं। वृद्धावस्था में शारीरिक परिवर्तन जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

In simple words: बुढ़ापे में अंगों की काम करने की क्षमता, पाचन, दांत, हड्डियां, स्वाद और रोग से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है। सांस और दिल की बीमारियां भी बढ़ जाती हैं।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध करें, जिसमें पाचन, अस्थि और संवेदी अंगों पर प्रभाव शामिल हो।

 

Question 2. वृद्धावस्था में अपच, डकार, छाती में जलन एवं कब्ज की शिकायत क्यों रहती है ?
Answer: वृद्धावस्था में अपच, डकार, छाती में जलन और कब्ज की शिकायत के कई कारण होते हैं:

  • वृद्धों में आहार नाल से स्रावित होने वाले पाचक रसों-आमाशयी, अग्न्याशयी एवं आंत्र व पित्तरस में कमी आने के कारण भोजन का पाचन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। फलस्वरूप अपच की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • आमाशयिक संवरणी (Cardiac Sphincter) के क्षीण हो जाने के कारण अम्लीय भोजन बार-बार ग्रसनी तक पहुँचता है जिससे डकार (Belching) व छाती में जलन (Heart - Burn) की समस्याएँ हो जाती हैं।
  • आहार नाल की माँसपेशियों की क्षीणता के कारण आंतों की क्रमाकुंचन की गति में कमी आती है व अपशिष्ट समय-समय पर निष्कासित नहीं हो पाता और कब्ज की समस्या बनी रहती है। पाचन तंत्र की कमजोरी इन समस्याओं का मूल कारण है।

In simple words: बुढ़ापे में पाचक रस कम बनते हैं, पेट का वॉल्व कमजोर हो जाता है, और आंत की मांसपेशियां धीमी हो जाती हैं। इन्हीं कारणों से अपच, डकार, छाती में जलन और कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं।

🎯 Exam Tip: पाचन संबंधी समस्याओं के पीछे के शारीरिक कारणों को स्पष्ट करें, जैसे पाचक रस की कमी और मांसपेशियों की शिथिलता।

 

Question 4. वृद्धावस्था में दिये जाने वाले आहार का विवरण प्रस्तुत करिए।
Answer: वृद्धावस्था में आहार का निर्धारण करते समय इस अवस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। वृद्धावस्था में आधारीय उपापचय की दर घट जाती है। इस परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आहार में वसा की मात्रा को कम करना आवश्यक होता है। शरीर की अस्थियों तथा दांतों में कुछ संरचनात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, इस अवस्था में आहार में कैल्शियम तथा कुछ अन्य खनिज लवणों की अधिक मात्रा का समावेश होना चाहिए। इसके अतिरिक्त इस अवस्था में लार ग्रंथियों का स्राव भी कुछ घट जाता है। पाचन तंत्र में आवश्यक अन्य पाचक रसों की मात्रा एवं सक्रियता भी कुछ घटने लगती है। वृद्धावस्था में कार्बोहाइड्रेट का पाचन भी कठिन हो जाता है। पाचन तंत्र के अतिरिक्त वृद्धावस्था में उत्सर्जन तंत्र तथा अन्तःस्रावी ग्रंथियों की सक्रियता भी प्रभावित होने लगती है। वृद्धावस्था में आहार में प्रोटीन युक्त खाद्य-पदार्थों का अनिवार्य रूप से समावेश होना चाहिए। वृद्धावस्था में आहार – नियोजन के समय खनिज – लवणों की अतिरिक्त मात्रा का भी समावेश होना चाहिए। इसका एक मुख्य कारण वृद्धावस्था में अवशोषण की दर घट जाना भी होता है।
In simple words: वृद्धावस्था में आहार को शरीर के बदलावों को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए। वसा कम, कैल्शियम और खनिज ज्यादा होने चाहिए। प्रोटीन भी जरूरी है। पाचन कमजोर होने से हल्का खाना देना चाहिए।

🎯 Exam Tip: वृद्धावस्था के आहार विवरण में ऊर्जा की आवश्यकता में कमी, कैल्शियम और प्रोटीन की बढ़ी हुई आवश्यकता पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 5. एक वृद्ध पुरुष तथा महिला की दैनिक सन्तुलित आहार तालिका बनाइये।
Answer: एक वृद्ध पुरुष तथा महिला की दैनिक सन्तुलित आहार तालिका इस प्रकार है:

भोज्य पदार्थ का नामवृद्ध पुरुष (ग्राम)वृद्ध महिला (ग्राम)
दूध (मिली.)300300
कदमूल200200
हरी पत्तेदार सब्जियाँ100100
अन्य सब्जियाँ200100
फल200200
शक्कर2020
घी/तेल2520

In simple words: इस तालिका में वृद्ध पुरुष और महिला के लिए दूध, सब्जियां, फल, शक्कर और घी/तेल की दैनिक मात्रा बताई गई है ताकि उन्हें संतुलित आहार मिल सके।

🎯 Exam Tip: आहार तालिका बनाते समय, विभिन्न खाद्य पदार्थों की मात्रा को लिंग-वार ध्यान में रखें और संतुलन बनाए रखें।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. वृद्धावस्था में किन-किन पौष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है ? वर्णन कीजिए।
Answer: वृद्धावस्था में पोषक तत्वों की आवश्यकता प्रौढ़ावस्था के समान ही होती है, लेकिन आधारीय उपापचय की दर कम हो जाने से ऊर्जा की आवश्यकता घट जाती है तथा थायमिन भी कम मात्रा में आवश्यक होता है। प्रमुख पौष्टिक तत्व और उनकी आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ऊर्जा: पच्चीस साल की आयु तक आधारीय उपापचय की दर बढ़ती है, लेकिन पच्चीस साल के बाद यह लगातार कम होने लगती है। यह कमी काफी तेजी से होती है। वृद्ध महिला अथवा पुरुष के लिए ऊर्जा की कम आवश्यकता उनके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, क्योंकि वृद्धावस्था में अधिक कैलोरी से उनका शारीरिक भार बढ़ने लगता है जो कि अनेक प्रकार की बीमारियों को आमंत्रित करता है।
2. प्रोटीन: इस अवस्था में प्रोटीन की आवश्यकता उतनी ही होती है जितनी कि प्रौढ़ावस्था में, यानी एक ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम शारीरिक भार की आवश्यकता होती है। वृद्धावस्था में शरीर के अंदर नई कोशिकाएं अधिक नहीं बनती हैं, बल्कि कोशिकाओं की टूट-फूट पहले से अधिक ही होती है। इसलिए प्रोटीन की आवश्यकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
3. कार्बोहाइड्रेट: आहार में ऊर्जा की कमी करने के लिए कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थ भी कम मात्रा में लेने चाहिए।
4. वसा: वृद्धावस्था में वसा अधिक की मात्रा नहीं लेनी चाहिए। अधिक वसा से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो जाती हैं।
6. लौह लवण: वृद्धावस्था में आयरन की आवश्यकता प्रौढ़ावस्था के समान ही होती है। मासिक धर्म के बंद हो जाने से आयरन की हानि तो कम होती है साथ ही वृद्धावस्था में आयरन का अवशोषण भी कम हो जाता है।
7. विटामिन्स: वृद्धावस्था में विटामिन 'ए' विटामिन 'डी' एवं विटामिन 'सी' उचित मात्रा में लेना चाहिए जिससे वृद्धावस्था में महिला/पुरुष शारीरिक रूप से सही बने रहें। नाड़ी को क्रियाशील बनाये रखने के लिए विटामिन 'बी' समूह भी आहार में पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है।
In simple words: बुढ़ापे में ऊर्जा की जरूरत कम हो जाती है, लेकिन प्रोटीन की जरूरत वैसी ही रहती है। कार्बोहाइड्रेट और वसा कम लेनी चाहिए, जबकि लौह और सभी विटामिन सही मात्रा में लेने चाहिए।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक पौष्टिक तत्व की वृद्धावस्था में आवश्यकता को स्पष्ट करें, जिसमें ऊर्जा की कमी, प्रोटीन की सामान्य आवश्यकता, और विटामिन-खनिज के महत्व पर जोर दिया गया हो।

 

Question 2. वृद्धावस्था में गतिहीन, मध्यम श्रेणी तथा परिश्रमी कार्य हेतु शाकाहारी एवं मांसाहारी भोज्य पदार्थों की तालिका बनाइए।
Answer: वृद्धावस्था में विभिन्न कार्य श्रेणियों (गतिहीन, मध्यम, परिश्रमी) के अनुसार शाकाहारी एवं मांसाहारी भोज्य पदार्थों की तालिका इस प्रकार है:

भोज्य पदार्थ का नामगतिहीन कार्यमध्यम श्रेणी का कार्यपरिश्रमी कार्य
शाकाहारी (ग्राम )मांसाहारी (ग्राम )शाकाहारी (ग्राम )मांसाहारी (ग्राम )शाकाहारी (ग्राम )मांसाहारी (ग्राम )
अनाज330300350350475475
दालें604570557055
हरी सब्जियाँ125125124125125125
अन्य सब्जियाँ75757575100100
कन्दमूल50507575100100
फल303030303030
दूध200100200100200100
वसा और तेल403545405045
शक्कर और गुड़303030304050

In simple words: यह तालिका दिखाती है कि बूढ़े लोगों को उनकी शारीरिक गतिविधि के हिसाब से कितना अनाज, दाल, सब्जियां, फल, दूध, वसा और शक्कर शाकाहारी या मांसाहारी रूप में लेनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: विभिन्न कार्य श्रेणियों के अनुसार आहार संबंधी आवश्यकताओं में अंतर को स्पष्ट करें, खासकर शाकाहारी और मांसाहारी विकल्पों के लिए।

 

RBSE Class 12 Home Science Chapter 15 प्रयोगात्मक प्रश्न

 

Question 2. एक वृद्ध व्यक्ति के लिए एक दिन का आहार, आहार-आयोजन तालिका द्वारा स्पष्ट करिए।
Answer: वृद्ध पुरुष की एक दिन की आहार – आयोजन तालिका इस प्रकार है:

समयभोजन का प्रकारमात्राखाद्य समूहमात्रा (ग्राम)इकाई
नाश्ता 9.00 बजेदूध-दलिया1 प्याला 1 कटोरीदूध गेहूँ का दलिया शक्कर100 45 51 1 1
नाश्ते के पश्चात 10.30 बजेपपीता1 प्लेटपपीता (फल)1001
दोपहर के भोजन से पूर्व 12.30 बजेलौकी का सूप1 गिलासलौकी (अन्य सब्जियाँ) टमाटर (फल)100 101 —

उपरोक्त आहार आयोजन तालिका में वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए अर्द्ध ठोस व तरल भोज्य पदार्थों का समावेश किया गया है। साथ-ही-साथ थोड़ी-थोड़ी देर में विभिन्न व्यंजनों को सम्मिलित किया गया है। उपरोक्त आहार से वृद्ध व्यक्ति की पौषणिक आवश्यकताएँ पूर्ण हो जाएँगी। वृद्ध महिला के लिए आहार आयोजन आप स्वयं कर सकते हैं।
In simple words: यह तालिका एक वृद्ध पुरुष के लिए सुबह के नाश्ते और दोपहर से पहले के भोजन का विवरण देती है, जिसमें दूध, दलिया, पपीता और लौकी का सूप जैसे आसान-से-पचने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: दैनिक आहार तालिका बनाते समय, भोजन के समय, प्रकार और मात्रा का उचित संतुलन बनाए रखें, खासकर वृद्ध व्यक्तियों की पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए।

 

प्रश्न 3. वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए दिनभर के भोजन में भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं उनके कुल योग की तालिका बनाइए।
Answer: दिनभर के भोजन में भोज्य इकाइयों का विभाजन एवं योग नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है। यह तालिका वृद्ध व्यक्तियों के लिए आवश्यक भोजन की मात्रा और उसके वितरण को समझने में मदद करती है।

खाद्य पदार्थभाग 1भाग 2भाग 3भाग 4भाग 5भाग 6भाग 7भाग 8कुल इकाइयाँ
दूध (मिली.)1/21--1+1/2--14
कंद मूल-1/2--1/2-1/2-2
हरी पत्तेदार सब्जियाँ----3/4---3/4
अन्य सब्जियाँ---1--1/2-1 1/2
फल--1--1--2
शक्कर1+11--1---5
घी/तेल1--1/2+1/21/2---4 1/2
In simple words: This table shows how different types of food, like milk, vegetables, and fruits, are divided into portions throughout the day for an elderly person. It also adds up all these portions to show the total amount of each food item needed. This helps make sure they get enough nutrition.

🎯 Exam Tip: When creating a diet plan table, clearly label each food item and ensure the units and totals are accurately presented. Pay attention to specific dietary needs of the elderly when allocating portions.

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