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Detailed व्याकरण शब्द शक्ति RBSE Solutions for Class 12 Hindi
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Class 12 Hindi व्याकरण शब्द शक्ति RBSE Solutions PDF
परिभाषा: शब्द के अर्थ को जिस माध्यम से ग्रहण किया जाता है, वह माध्यम शब्द-शक्ति कहलाता है।
भारतीय काव्य-शास्त्र के प्रकांड विद्वान् मम्मट ने अपनी पुस्तक 'काव्यप्रकाश' में तीन प्रकार के शब्द और तीन प्रकार के अर्थ का निर्देश किया है। उन्होंने वाच्य, लक्ष्य और व्यंग्य तीन प्रकार के अर्थ माने हैं।
शब्द के उपर्युक्त विभाजन को हम इस प्रकार समझ सकते हैं -
(1) वाचक शब्द – (वाच्य अर्थी): वक्ता द्वारा बोले गए वाक्य का सीधा अर्थ ग्रहण करना। जैसे-'मैं राजस्थानी हूँ।' इसमें वक्ता के इस वाक्य का सीधा (वाच्य) अर्थ होगा कि वह राजस्थान का रहने वाला है।
(2) लक्षक शब्द – (लक्ष्य अर्थ): जहाँ वक्ता द्वारा बोले गए शब्द का लक्षणों के आधार पर अर्थ ग्रहण किया जाए। जैसे-मैं राजस्थानी हूँ। इस वाक्य में यदि 'राजस्थानी' को राजस्थान की संस्कृति का द्योतक माना जाए, तो यह लक्षण शब्द होगा और राजस्थानी संस्कृति इसका लक्ष्यार्थ होगा।
(3) व्यंजक शब्द – (व्यंग्य अर्थ): जहाँ वक्ता का भाव लक्षणों द्वारा भी अभिव्यक्त नहीं हो पाता और अन्य अर्थ की कल्पना करनी पड़ती है।
1. अभिधा-शक्ति
वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) का बोध कराने वाली शक्ति को अभिधा शक्ति कहा जाता है। अभिधा का संबंध शब्द का एक ही अर्थ ग्रहण करने से है।
उदाहरणार्थ: किसी ने कहा- पानी दो, इस वाक्य का अर्थ अभिधा के माध्यम से केवल इतना ही होगा कि पानी पीने के लिए माँगा गया है। वस्तुतः अभिधा में जो बोला जाता है और सुनकर प्रथम बार में ही जो अर्थ ग्रहण किया जाता है, वही अर्थ-ग्रहण की प्रक्रिया इसके अंतर्गत आती है।
अन्य उदाहरण -
1. 'किसान फसल काट रहा है।' इस वाक्य में अभिधा शब्द-शक्ति के माध्यम से यही प्रकट होता है कि फसल किसान द्वारा काटी जा रही है।
2. बिल्ली भाग रही है। इस वाक्य में केवल बिल्ली का भागना ही प्रकट होता है। अतः वाच्यार्थ का ही ग्रहण होने से अभिधा शब्द शक्ति प्रकट होती है।
3. 'जयपुर राजस्थान की राजधानी है।' यहाँ भी वाच्यार्थ का सीधे ही अर्थ ग्रहण हो रहा है। अतः अभिधा शब्द शक्ति है।
2. लक्षणा-शक्ति
जब शब्द के वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) का अतिक्रमण कर किसी दूसरे अर्थ को ग्रहण किया जाता है, तब उसे लक्ष्यार्थ कहते हैं। लक्ष्यार्थ का बोध कराने वाली शक्ति को लक्षणा-शक्ति कहा जाता है। जब वक्ता अपने वाक्य में मुख्यार्थ से हटकर कुछ अन्य अर्थ भरने की कोशिश करता है, तब लक्षणों के आधार पर अर्थ-ग्रहण किया जाता है।
लक्षणा के भेद: काव्यशास्त्र के आचार्यों ने लक्षण के दो प्रमुख भेद माने हैं –
1. रूढ़ा लक्षणा
2. प्रयोजनवती लक्षणा।
(1) रूढ़ा लक्षणा: जब किसी काव्य-रूढ़ि (परम्परा) को आधार बनाकर लक्षणा-शक्ति का प्रयोग किया जाता है, तो वहाँ रूढ़ा लक्षणा मानी जाती है । जैसे- 'भारत जाग उठा' इस वाक्य में 'भारत' से वक्ता का तात्पर्य 'भारत देश' न होकर भारतवासी हैं। 'भारत' शब्द यहाँ अपने सामान्य अर्थ में प्रयोग न होकर भारतवासियों के अर्थ में प्रयोग किया गया है, जो एक परंपरा पर आधारित है।
3. वहाँ लाठियाँ चल रही हैं।
4. बड़े हरिश्चन्द्र बनते हो।
5. कश्मीर रक्त में डूबा हुआ है।
यहाँ 'इंग्लैण्ड' शब्द से इंग्लैण्ड के क्रिकेट खिलाड़ी, 'हंस' से गुण-दोष का ज्ञाता, 'लाठियाँ' से लाठी चलाते व्यक्ति, 'हरिश्चन्द्र' से सत्य बोलने वाला तथा 'कश्मीर' से कश्मीर निवासियों का तात्पर्य रूढ़ि पर आधारित है । अतः उपर्युक्त वाक्यों में रूढ़ा लक्षणा-शक्ति का प्रयोग है।
(2) प्रयोजनवती लक्षणा: जहाँ विशेष प्रयोजन से प्रेरित होकर शब्द का प्रयोग लक्ष्यार्थ में किया जाता है, तो वहाँ प्रयोजनवती लक्षणा मानी जाती है। जैसे-'तुम तो निरे गधे हो।' इस वाक्य में 'गधा' शब्द का 'मूर्ख' के अर्थ में प्रयोग विशेष प्रयोजन से हुआ है। अतः यहाँ प्रयोजनवती लक्षणा है। इसी प्रकार अन्य उदाहरण हैं –
1. आओ मेरे शेर।
2. उसका मन पत्थर का बना है।
3. हम तो गंगावासी हैं।
4. यह ताजमहल कब तक पूरा होगा?
5. यह यमुना-पुत्रों का नगर है।
इन वाक्यों में प्रयुक्त काले छपे शब्दों का प्रयोग विशेष प्रयोजन से हुआ है। यहाँ 'शेर' अर्थात् 'शेर' जैसे गुणों वाला, निर्भीक और बलशाली, 'पत्थर' अर्थात् पत्थर जैसे कठोर हृदय वाला, 'गंगावासी' अर्थात् गंगा जैसी पवित्रता से युक्त, 'ताजमहल' अर्थात् ताजमहल जैसा भव्य भवन और 'यमुना-पुत्र' अर्थात् यमुना पर आधारित आजीविका वाला होगा।
3. व्यंजना-शक्ति
वाच्यार्थ (मुख्यार्थ) लक्ष्यार्थ (लक्ष्य) और संकेतित अर्थ के पश्चात् जब किसी विलक्षण अर्थ की प्रतीति होती है, उसे व्यंग्यार्थ (व्यंजनार्थ, ध्वन्यार्थ) कहते हैं। जिस शब्द शक्ति से व्यंग्यार्थ का बोध होता है, उसे व्यंजना शक्ति कहते हैं।
जब यह कहा जाए, 'क्यों क्या समय हुआ है ? 'तो वक्ता का तात्पर्य न तो घड़ी का समय पूछना है और न समय का आभास देना है, अपितु उसका तात्पर्य है यह कोई समय है आने का ? यह अर्थ न मुख्यार्थ ग्रहण करने से प्राप्त होगा, न लक्ष्यार्थ से। यही व्यंग्यार्थ है।
व्यंजना के भेद: व्यंजना शक्ति के दो भेद होते हैं- शाब्दी व्यंजना व आर्थी व्यंजना।
1. शाब्दी व्यंजना: जहाँ व्यंग्यार्थ किसी विशेष शब्द के प्रयोग पर आश्रित रहता है, वहाँ शाब्दी व्यंजना होती है। इसका प्रयोग अनेकार्थवाची शब्दों के प्रयोग में होता है।
2. आर्थी व्यंजना: जहाँ व्यंग्यार्थ अर्थ पर ही आश्रित रहता है, वहाँ आर्थी व्यंजना होती है ।
इसके कई व्यंग्यार्थ हैं, जैसे- गायों के आने का समय हो गया है। बत्ती जलाने का समय है। हमें मन्दिर चलना है। आदि।
(3) दस बज गए हैं।
इस वाक्य के व्यंग्यार्थ हैं – विद्यालय की घंटी बजने वाली है। बस आने का समय हो गया है । पिताजी कार्यालय जाने वाले हैं। आदि।
अभिधा तथा लक्षणा से प्राप्त अर्थ में अन्तर
अभिधा शक्ति से शब्द का मुख्य या सामान्यतया प्रचलित अर्थ व्यक्त होता है। अभिधा से व्यक्त अर्थ को यथावत् ग्रहण किया जाता है । पाठक या श्रोता को अपनी कल्पना या अनुमान का प्रयोग नहीं करना पड़ता। अभिधेयार्थ अपने आप में स्पष्ट और पूर्ण होता है, जबकि लक्षणा से प्राप्त होने वाले अर्थ को मुख्यार्थ से हटकर लक्षणों के आधार पर निश्चित किया जाता है। पाठक या श्रोता को प्रसंगानुसार अपनी कल्पना और तर्क-शक्ति के उपयोग से अभीष्ट अर्थ तक पहुँचना होता है । इस प्रकार शब्द के मुख्य अर्थ से हटकर, लक्षणों के आश्रय से प्राप्त होने वाला भिन्न या नवीन अर्थ लक्षणा-शक्ति से ही व्यक्त होता है। जैसे –
(क) ढल रही है रात, आता है सवेरा।
(ख) जीवन में 'रात' विदा होती, शीघ्र 'सवेरा' आयेगा।
यहाँ प्रथम वाक्य में 'रात' तथा 'सवेरा' शब्दों का प्रयोग अपने सामान्य या मुख्य अर्थ में हुआ है, जबकि द्वितीय वाक्य में 'रात' का अर्थ 'कष्ट' या 'अज्ञान' लेना होगा और 'सवेरा' का अर्थ 'सुख के दिन या ज्ञानोदय' ग्रहण किया जाएगा। अतः प्रथम वाक्य में अभिधा-शक्ति का प्रयोग हुआ है और द्वितीय वाक्य में लक्षणा-शक्ति का।
लक्षणा तथा व्यंजना शक्ति में अन्तर
मुख्य या प्रचलित अर्थ से हटकर जब अर्थ ग्रहण करना पड़ता है तो वहाँ लक्षणा शब्द-शक्ति कार्य करती है। जब 'मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ' दोनों ही वक्ता के इच्छित अर्थ को प्रकट नहीं कर पाते, तो वहाँ प्रसंग के आधार पर अन्य अर्थ की कल्पना या अनुमान करना पड़ता है । इस प्रकार प्राप्त होने वाला अर्थ व्यंग्यार्थ होता है । यहाँ शब्द की व्यंजना शक्ति कार्य करती है। यथा –
'तने की अटरिया पै चढ़ि आई घाम'।
इस पंक्ति का साधारण अर्थ होगा कि शरीर की अट्टालिका पर धूप चढ़ रही है। लेकिन लक्ष्य के अनुसार इसका अर्थ होगा कि 'अब वृद्धावस्था आ गई है।' जब वक्ता इस कथन द्वारा यह भाव व्यक्त कराना चाहेगा कि 'अब सांसारिक मोह त्याग दो, भजन करने का समय आ गया है, तो यह व्यंग्यार्थ होगा और व्यंजना-शक्ति के द्वारा ही व्यक्त होगा।
अभिधा तथा व्यंजना शक्ति में अंतर
RBSE Class 12 Hindi शब्द शक्ति वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित वाक्यों में व्यंजना शब्द शक्ति का प्रयोग किस वाक्य में हुआ है –
(क) वह तो निरी गाय है।
(ख) राजस्थान भारत का एक राज्य है।
(ग) गिरधारी शेर है
(घ) “अँधेरा हो गया है”, सेठ ने नौकर से कहा।
Answer: (घ) “अँधेरा हो गया", सेठ ने नौकर से कहा।
In simple words: जब सेठ ने नौकर से "अँधेरा हो गया" कहा, तो इसका सीधा मतलब सिर्फ़ समय बताना नहीं था, बल्कि यह भी था कि अब काम ख़त्म करो। यह एक छिपा हुआ संदेश था।
🎯 Exam Tip: व्यंजना शक्ति में वाक्य का सीधा अर्थ कुछ और होता है, लेकिन उसका छिपा हुआ या विशेष अर्थ ही मुख्य होता है। यह अर्थ प्रसंग पर निर्भर करता है।
Question 2. यहाँ लक्षणा-शक्ति का प्रयोग किसे वाक्य में हुआ है –
(क) मैं पूर्णतः स्वस्थ हूँ।
(ख) उस अबोध को मत मारो।
(ग) रमा ने कहा, 'मालिक घर पर नहीं हैं।
(घ) रोटी के लिए दुनिया क्या नहीं करती। (रोटी-पेट भरना।)
Answer: (घ) रोटी के लिए दुनिया क्या नहीं करती। (रोटी-पेट भरना।)
In simple words: यहाँ 'रोटी' का सीधा मतलब सिर्फ़ अनाज नहीं है, बल्कि 'रोटी' से मतलब पेट भरने या अपनी ज़रूरतों को पूरा करने से है। इसमें एक गहरा भाव छिपा है।
🎯 Exam Tip: लक्षणा शक्ति में शब्द का सीधा अर्थ काम नहीं करता, बल्कि उससे मिलता-जुलता या संबंधित कोई दूसरा अर्थ ग्रहण किया जाता है।
Question 3. राम ने मोहन से कहा, "तुम्हारे चेहरे से शठता झलक रही है।" मोहन ने तत्काल उत्तर दिया, "ओह! तो मेरा चेहरा दर्पण है"? इस वार्तालाप में किस शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है -
(क) अभिधा।
(ख) लक्षणा
(ग) व्यंजना
(घ) व्यंजना प्रधान अभिधा।
Answer: (ग) व्यंजना
In simple words: जब राम ने मोहन को शठ कहा, तो मोहन ने 'चेहरा दर्पण है' कहकर व्यंग्य किया कि असल में राम खुद ही शठ हैं। इसमें सीधे अर्थ से हटकर एक छिपा हुआ मतलब है।
🎯 Exam Tip: व्यंजना शक्ति में कही गई बात का अर्थ बोलने वाले और सुनने वाले के मूड और हालात पर निर्भर करता है, जिससे एक अलग ही बात समझ आती है।
Question 4. इस बुढ़िया को न सताओ, यह तो निरी गाय है।” इस वाक्य में किस शब्द-शक्ति का चमत्कार है –
(क) अभिधा
Answer: (क) अभिधा
In simple words: यह वाक्य बताता है कि बुढ़िया स्वभाव से बहुत सीधी-सादी और शांत है, जैसे एक गाय होती है। यहां 'गाय' शब्द का सीधा और सामान्य अर्थ ही लिया गया है।
🎯 Exam Tip: अभिधा शक्ति में शब्द का सीधा और प्रचलित अर्थ ही लिया जाता है, इसमें कोई गहरा या छिपा हुआ मतलब नहीं होता।
Question 5. व्यंजना-शक्ति का प्रयोग किस वाक्य में हुआ है –
(क) मोहन धनुर्विद्या में प्रवीण है।
(ख) राजस्थान वीरभूमि है।
(ग) लाल पगड़ी के आते ही सब भाग गये।
(घ) बातें करती गृहिणी ने कहा, 'सन्ध्या हो गयी।”
Answer: (घ) बातें करती गृहिणी ने कहा, 'सन्ध्या हो गयी।”
In simple words: जब गृहिणी ने 'सन्ध्या हो गयी' कहा, तो उसका मतलब सिर्फ़ शाम होने से नहीं था, बल्कि यह भी था कि अब बातें बंद करके घर के काम शुरू कर देने चाहिए। यह एक परोक्ष संदेश था।
🎯 Exam Tip: व्यंजना शक्ति में एक ही वाक्य के कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं, जो बोलने वाले या सुनने वाले के संदर्भ पर निर्भर करते हैं।
Question 6. किस वाक्य में 'पर्वत' शब्द अभिधेयार्थ प्रकट कर रहा है –
(क) पर्वत पर चढ़ना सरल कार्य नहीं है।
(ख) पर्वत जाग रहे हैं।
(ग) खोदा पहाड़ निकली चुहिया।
(घ) 'देहरिया पर्वत भई, आँगन भयौ विदेस।
Answer: (क) पर्वत पर चढ़ना सरल कार्य नहीं है।
In simple words: इस वाक्य में 'पर्वत' शब्द का सीधा मतलब पहाड़ ही है, जिस पर लोग चढ़ते हैं। यहाँ कोई और अर्थ नहीं छिपा है।
🎯 Exam Tip: अभिधेयार्थ का मतलब है शब्द का सीधा, सरल और सबसे प्रचलित अर्थ, जिसे सुनकर तुरंत समझा जा सके।
Question 7. अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग किस वाक्य में हुआ है –
(क) आओ सूरदास जी।
(ख) मैं तो आपकी गाय हूँ।
(ग) वह आस्तीन का साँप है।
(घ) विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
Answer: (घ) विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
In simple words: इस वाक्य में 'विद्यार्थी' का अर्थ छात्र और 'पढ़ रहे हैं' का अर्थ अध्ययन करना ही है। इसमें किसी भी शब्द का कोई छिपा हुआ या दूसरा मतलब नहीं है।
🎯 Exam Tip: अभिधा शक्ति सबसे सीधी होती है, जहाँ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही लिया जाता है, बिना किसी घुमावदार अर्थ के।
RBSE Class 12 Hindi शब्द शक्ति अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. रूढ़ा लक्षणा तथा प्रयोजनवती लक्षणा शब्द-शक्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: रूढ़ा लक्षणा में किसी प्रसिद्ध या पुरानी परंपरा के आधार पर शब्द का अर्थ लिया जाता है, जैसे 'भारत जाग उठा' में 'भारत' का मतलब भारतवासी। यह अर्थ पहले से ही तय होता है। दूसरी ओर, प्रयोजनवती लक्षणा में किसी खास मकसद से शब्द का अर्थ बदला जाता है, जैसे 'तुम तो निरे गधे हो' में 'गधा' का अर्थ मूर्ख होता है। इसमें एक नया अर्थ किसी खास वजह से अपनाया जाता है। रूढ़ा लक्षणा में अर्थ परंपरा पर आधारित होता है, जबकि प्रयोजनवती लक्षणा में अर्थ किसी विशेष उद्देश्य से बदला जाता है।
In simple words: रूढ़ा लक्षणा में शब्द का अर्थ किसी पुरानी परंपरा के अनुसार लेते हैं, जबकि प्रयोजनवती लक्षणा में हम किसी खास वजह से शब्द का अलग अर्थ निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: दोनों में मुख्य अंतर 'परंपरा' और 'विशेष प्रयोजन' का है; इन्हें उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. व्यंजना शब्द-शक्ति की परिभाषा लिखकर उसका एक उदाहरण दीजिए।
Answer: शब्द की वह शक्ति जो किसी वाक्य के सीधे अर्थ (मुख्यार्थ) या लक्षणा से निकलने वाले अर्थ (लक्ष्यार्थ) से हटकर कोई तीसरा और खास अर्थ प्रकट करती है, उसे व्यंजना शब्द-शक्ति कहा जाता है। यह तीसरा अर्थ अक्सर संदर्भ के अनुसार बदल जाता है।
उदाहरण: 'पता है, सात बज गए।' इस वाक्य का सीधा अर्थ केवल समय बताना है, लेकिन व्यंजना शक्ति से इसका मतलब 'बहुत देर हो गई है' या 'अब घर जाने का समय हो गया है' जैसा कुछ भी हो सकता है। यह अर्थ सुनने वाले के हालात पर निर्भर करेगा।
In simple words: व्यंजना शक्ति वह है जब एक बात के सीधे मतलब के अलावा कोई और खास छिपा हुआ मतलब भी निकलता हो, जो स्थिति के हिसाब से बदलता रहे।
🎯 Exam Tip: व्यंजना शक्ति में अर्थ हमेशा अस्पष्ट या बहुआयामी होता है और वह बोलने वाले के इरादे या सुनने वाले की समझ पर निर्भर करता है।
Question 3. निम्नलिखित शब्द-शक्ति को प्रकट करने वाली एक पंक्ति उसके सामने लिखिए –
1. व्यंजनी
2. लक्षणी।
Answer:
1. व्यंजना – 'सूर्य सिर पर आ गया'। (इसका मतलब है कि बहुत देर हो चुकी है या काम खत्म होने का समय हो गया है।)
2. लक्षणा – 'कुत्ते तो भौंकते ही रहते हैं'। (यहाँ 'कुत्ते' का मतलब सिर्फ़ जानवर नहीं, बल्कि बेफालतू शोर मचाने वाले लोग हैं।)
In simple words: व्यंजना में बात का छिपा अर्थ होता है, जैसे 'सूरज ऊपर आ गया' का मतलब 'देर हो गई है'। लक्षणा में सीधा मतलब नहीं होता, बल्कि उससे मिलता-जुलता अर्थ होता है, जैसे 'कुत्ते भौंकते हैं' का मतलब 'बुरी बातें करने वाले लोग बोलते रहते हैं'।
🎯 Exam Tip: व्यंजना और लक्षणा में भेद करने के लिए देखें कि क्या शब्द का अर्थ सीधे तौर पर नहीं, बल्कि किसी संदर्भ या गुण के कारण लिया जा रहा है।
Question 4. प्रयोजनवती लक्षण शब्द-शक्ति की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: जब किसी शब्द का सीधा अर्थ न लेकर उसे किसी खास मकसद से किसी दूसरे अर्थ में प्रयोग किया जाता है, तो उसे प्रयोजनवती लक्षणा कहते हैं। इसमें वक्ता का कोई विशेष उद्देश्य होता है जिसके लिए वह शब्द को उसके सामान्य अर्थ से हटाकर प्रयोग करता है।
उदाहरण -
1. अशोक गधा है। (यहाँ 'गधा' का मतलब मूर्ख है, न कि जानवर, क्योंकि अशोक को मूर्ख बताना वक्ता का प्रयोजन है।)
2. श्यामू सिंह है। (यहाँ 'सिंह' का मतलब बहादुर या निडर है, न कि शेर जानवर, श्यामू की बहादुरी दिखाना यहाँ प्रयोजन है।)
In simple words: प्रयोजनवती लक्षणा तब होती है जब हम कोई शब्द किसी खास इरादे से इस्तेमाल करते हैं, ताकि उसका सीधा मतलब न लेकर कोई दूसरा, छिपा हुआ अर्थ निकल सके।
🎯 Exam Tip: प्रयोजनवती लक्षणा में हमेशा एक 'प्रयोजन' या 'मकसद' छिपा होता है, जो शब्द के लक्ष्यार्थ को जन्म देता है।
Question 5. आर्थी-व्यंजना शब्द-शक्ति की परिभाषा सोदाहरण लिखिए।
Answer: आर्थी व्यंजना शब्द-शक्ति वह होती है जहाँ वाक्य का छिपा हुआ या विशेष अर्थ (व्यंग्यार्थ) किसी खास शब्द पर निर्भर न करके, पूरे वाक्य के अर्थ पर निर्भर करता है। इसमें व्यंग्यार्थ वक्ता, श्रोता, संदर्भ, या स्थिति के कारण उत्पन्न होता है। यह अक्सर किसी मुहावरे या लोकोक्ति में देखा जाता है, जहाँ पूरा वाक्य एक गहरा अर्थ देता है।
उदाहरण: 'तिल भर ने आगे बढ़ रहे हाँ वीर हो निश्चय बड़े।' इस पंक्ति का सीधा अर्थ तो यह है कि वीर आगे नहीं बढ़ रहे, लेकिन व्यंग्यार्थ यह है कि वे डरकर या आलस्य के कारण आगे नहीं बढ़ रहे हैं, जो उनकी 'वीरता' पर सवाल उठाता है। यहाँ 'वीर' शब्द का प्रयोग व्यंग्य के साथ किया गया है।
In simple words: आर्थी व्यंजना तब होती है जब वाक्य का छिपा हुआ अर्थ किसी एक शब्द पर नहीं, बल्कि पूरी बात के मतलब पर निर्भर करता है, और यह अर्थ बोलने वाले या स्थिति के हिसाब से बदल सकता है।
🎯 Exam Tip: आर्थी व्यंजना में, व्यंग्यार्थ समझने के लिए पूरे वाक्य और उसके संदर्भ को ध्यान में रखना होता है, न कि केवल एक शब्द को।
Question 7. लक्षणा और व्यंजनी शब्द-शक्ति के अंतर को स्पष्ट कीजिए।
Answer: लक्षणा शब्द-शक्ति में किसी शब्द का मुख्य अर्थ बाधित होने पर, उससे संबंधित किसी दूसरे अर्थ को ग्रहण किया जाता है, जो लक्षणों पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, 'मोहन तो गधा है' में 'गधा' का अर्थ मूर्ख है। जबकि व्यंजना शब्द-शक्ति में शब्द के मुख्य और लक्ष्यार्थ से भी परे कोई तीसरा और विशेष अर्थ ग्रहण किया जाता है, जो संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, 'अँधेरा हो गया' कहने का मतलब सिर्फ़ समय बताना नहीं, बल्कि 'अब काम बंद कर दो' भी हो सकता है। लक्षणा में सीधा अर्थ बदल जाता है, व्यंजना में सीधा अर्थ भी रहता है पर एक छिपा अर्थ भी होता है।
In simple words: लक्षणा में शब्द का सीधा मतलब छोड़ कर उससे मिलता-जुलता अर्थ लेते हैं। व्यंजना में सीधा मतलब भी होता है, पर उसके साथ एक और गहरा या छिपा हुआ मतलब भी निकलता है।
🎯 Exam Tip: लक्षणा में अर्थ का संबंध मुख्य अर्थ से होता है, जबकि व्यंजना में अर्थ मुख्य और लक्ष्यार्थ दोनों से अलग और प्रसंगवश होता है।
Question 8. “तिल भर ने आगे बढ़ रहे हाँ वीर हो निश्चय बड़े।” प्रस्तुत वाक्य में निहित शब्द-शक्ति का नाम लिखते हुए उक्त शब्द-शक्ति की परिभाषा लिखिए।
Answer: यहाँ 'व्यंजना शब्द शक्ति' है।
परिभाषा: बुद्धि के जिस व्यापार से संदर्भ, व्यक्ति व स्थिति के अनुसार शब्द के कल्पना आधारित अर्थ निकले तथा जो अभिधेय अर्थ और लक्ष्यार्थ से परे हो, व्यंजना शब्द शक्ति है। यह शक्ति एक ही वाक्य के अनेक संभव अर्थों को प्रकट करती है, जो सुनने वाले के मनोभाव और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
In simple words: इस वाक्य में 'व्यंजना शक्ति' है। व्यंजना वह शक्ति है जो शब्द के सीधे अर्थ से हटकर, स्थिति के हिसाब से कोई खास और छिपा हुआ मतलब बताती है।
🎯 Exam Tip: व्यंजना शक्ति को पहचानने के लिए देखें कि क्या वाक्य का अर्थ सिर्फ़ शाब्दिक नहीं, बल्कि किसी खास संदर्भ में कुछ और गहरा संदेश दे रहा है।
Question 9. अभिधा एवं लक्षणा का अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
अभिधा
1. इसमें शब्द का सीधा और प्रचलित अर्थ प्रकट होता है।
2. मूल अर्थ वही रहता है, उसमें कोई बदलाव नहीं होता।
3. यह वाच्यार्थ पर आधारित उक्ति होती है, जिसे सुनकर तुरंत समझा जा सकता है।
लक्षणा
1. इसमें लाक्षणिक अर्थ प्रकट होता है, जो शब्द के सीधे अर्थ से भिन्न होता है।
2. मूल अर्थ बाधित होता है, यानी उसका सीधा अर्थ लागू नहीं होता।
3. यह लक्ष्यार्थ पर आधारित उक्ति होती है, जिसे समझने के लिए लक्षणों या गुणों का सहारा लेना पड़ता है।
अभिधा एक शब्द का सिर्फ एक अर्थ बताती है, जबकि लक्षणा एक शब्द का अप्रत्यक्ष अर्थ समझाती है जो उसके गुणों पर आधारित होता है।
In simple words: अभिधा में शब्द का सीधा मतलब होता है, जैसे 'पानी दो'। लक्षणा में शब्द का सीधा मतलब नहीं होता, बल्कि उससे जुड़ा कोई दूसरा मतलब लेते हैं, जैसे 'वह तो गाय है' में 'गाय' का मतलब सीधी है।
🎯 Exam Tip: अभिधा प्राथमिक शक्ति है, जो शब्दकोश का अर्थ देती है, जबकि लक्षणा द्वितीयक है, जो किसी खास गुण या प्रयोजन के आधार पर अर्थ बदलती है।
RBSE Class 12 Hindi शब्द शक्ति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. (i) 'राम सदा चौकन्ना रहता है।'
(ii) 'सीताहरण की बात जनि, कहियो पितु सन जाइ।
जो मैं राम तो कुल सहित, कहहि दसानन आइ।।
उक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्द-शक्तियों का नामोल्लेख कर उनका पारस्परिक अन्तर बताइए।
Answer: प्रथम उदाहरण में 'लक्षणा शब्द-शक्ति' तथा द्वितीय उदाहरण में 'व्यंजना शब्द-शक्ति' का प्रयोग हुआ है।
अंतर: लक्षणा शब्द-शक्ति से व्यक्त अर्थ मुख्यार्थ से हटकर हुआ करता है। उपर्युक्त उदाहरण में 'चौकन्ना' का अर्थ 'चार कानों वाला' न होकर 'सतर्क' लिया जाएगा। यहाँ 'चौकन्ना' का सीधा अर्थ नहीं लिया जा रहा है, बल्कि सतर्कता के गुण के कारण यह अर्थ ग्रहण किया जा रहा है।
व्यंजना शब्द-शक्ति में मुख्यार्थ तथा लक्ष्यार्थ से भिन्न अन्यार्थ (एक नए ही अर्थ) की अभिव्यक्ति हुआ करती है। उपर्युक्त उदाहरण का भाव है, यदि मैं वास्तव में राम हूँ तो रावण का कुल सहित वध करूंगा और मेरे हाथों सद्गति पाकर रावण स्वर्ग जाएगा। वहाँ वह पिता दशरथ से स्वयं सीताहरण की बात का निवेदन करेगा।' यह अर्थ न मुख्यार्थ है और न लक्ष्यार्थ, यह अन्यार्थ या व्यंग्यार्थ है। यह अर्थ स्थिति और वक्ता के मनोभावों पर आधारित है।
In simple words: पहले वाक्य में लक्षणा शक्ति है क्योंकि 'चौकन्ना' का मतलब 'होशियार' है, सीधा 'चार कान' नहीं। दूसरे वाक्य में व्यंजना शक्ति है क्योंकि रावण की बात का सीधा मतलब नहीं है, बल्कि उसके अहंकार और परिणाम का गहरा छिपा हुआ अर्थ है।
🎯 Exam Tip: लक्षणा में शब्द का अर्थ किसी गुण के कारण बदलता है, जबकि व्यंजना में अर्थ वक्ता के मन के भाव और संदर्भ पर निर्भर करता है।
Question 2. लक्ष्यार्थ और व्यंग्यार्थ का अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
Answer: जहाँ किसी शब्द का अर्थ उसके मुख्य या प्रचलित अर्थ से भिन्न ग्रहण किया जाता है और वह अर्थ तर्क या अनुमान पर आश्रित होता है, वहाँ उसे लक्ष्यार्थ कहते हैं। यह अर्थ सामान्य अर्थ के लक्षणों पर ही आधारित होता है। जैसे-'फूल हँसे कलियाँ मुसकाईं ।' यहाँ हँसने और मुस्काने का सामान्य प्रचलित अर्थ लेने पर अभीष्ट अर्थ सिद्ध नहीं हो सकता। यहाँ तर्क द्वारा और फूलों के खिलने तथा व्यक्ति के हँसने में समता के आधार पर 'हँसे' शब्द का अर्थ 'खिले' लिया जाएगा, यह लक्ष्यार्थ कहा जाएगा। लक्ष्यार्थ हमेशा मुख्य अर्थ से जुड़ा होता है, भले ही थोड़ा अलग हो।
जहाँ अभीष्ट अर्थ न तो मुख्यार्थ से प्राप्त हो और न ही लक्ष्यार्थ से, बल्कि एक तीसरे अर्थ की कल्पना करनी पड़े, तो उसे व्यंग्यार्थ कहा जाता है। यह शब्द की व्यंजना शक्ति से प्रकट होता है। जैसे कि कोई मजदूर मालिक से कहे- 'अब तो पाँच बज गए साहब !' मजदूर का अभीष्ट अर्थ है कि अब काम बन्द करने का समय हो गया है। यह अर्थ अभिधार्थ और लक्ष्यार्थ से भिन्न है। यह व्यंग्यार्थ है। जो व्यंजना शब्द-शक्ति से व्यक्त होता है। व्यंग्यार्थ हमेशा संदर्भ और वक्ता के इरादे पर आधारित होता है।
In simple words: लक्ष्यार्थ तब होता है जब शब्द का सीधा मतलब नहीं, बल्कि उससे जुड़ा कोई दूसरा मतलब निकालते हैं, जैसे 'फूल हँसे' का मतलब 'फूल खिले'। व्यंग्यार्थ तब होता है जब कोई बात कहने का असल मकसद छिपा हो, जैसे 'पाँच बज गए' का मतलब 'छुट्टी हो गई है'।
🎯 Exam Tip: लक्ष्यार्थ मुख्य अर्थ से संबंध रखता है, जबकि व्यंग्यार्थ एक नया, अप्रत्यक्ष अर्थ होता है जो संदर्भ के आधार पर बदलता है।
Question 3. निम्नलिखित वाक्यों में किस-किस शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है ?
Answer:
(क) इस वाक्य में व्यंजना शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है।
(ख) इस वाक्य में लक्षणा शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है।
(ग) इस वाक्य में अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है।
In simple words: यह सवाल वाक्यों में शब्द-शक्ति की पहचान करने के लिए है। व्यंजना में बात का छिपा अर्थ होता है, लक्षणा में सीधा अर्थ बदल जाता है, और अभिधा में सीधा मतलब निकलता है।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, दिए गए वाक्य को ध्यान से समझें और फिर देखें कि क्या शब्द का सीधा, लक्षणात्मक या व्यंजनात्मक अर्थ लागू होता है।
Question 4. निम्नलिखित वाक्यों में किस-किस शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है ?
(क) देश की नाव मझधार में है।
(ख) माता ने छोटे पुत्र से कहा, 'अँधेरा हो गया है।'
(ग) मैं हँसी नहीं कर रहा हूँ, मुझे बड़े जोर की भूख लगी है।
Answer:
(क) इस वाक्य में लक्षणा शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है। ('नाव मझधार में' का मतलब है देश खतरे में है, सीधा नाव नहीं।)
(ख) इस वाक्य में व्यंजना शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है। (माता का मतलब सिर्फ़ समय बताना नहीं, बल्कि 'सो जाओ' या 'काम बंद करो' हो सकता है।)
(ग) इस वाक्य में अभिधा शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है। (यहाँ 'भूख' का सीधा और स्पष्ट अर्थ ही है।)
In simple words: पहले वाक्य में लक्षणा है क्योंकि 'नाव' का मतलब देश का संकट है। दूसरे में व्यंजना है क्योंकि 'अँधेरा' का छिपा मतलब 'सो जाओ' है। तीसरे में अभिधा है क्योंकि 'भूख' का सीधा मतलब भूख ही है।
🎯 Exam Tip: वाक्यों के संदर्भ को समझें। यदि सीधा अर्थ काम न करे तो लक्षणा देखें, और यदि सीधा अर्थ के साथ कोई और गहरा अर्थ हो तो व्यंजना देखें।
Question 5. अभिधा और लक्षणा शब्द-शक्ति का अंतर उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अभिधा शब्द-शक्ति से शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ व्यक्त हुआ करता है। जैसे-'पर्वत को पार करना कठिन होता है।' यहाँ प्रत्येक शब्द अपने सामान्य प्रचलित अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। यदि यह कहा जाए- 'जीवन में मनुष्य को अनेक पर्वत पार करने पड़ते हैं। तो यहाँ 'पर्वत' शब्द का वही अर्थ नहीं होगा जो प्रथम वाक्य में है। यहाँ 'पर्वत' का अर्थ 'बाधा' या 'कठिनाई' लेना होगा। यह अर्थ मुख्यार्थ से हटकर प्राप्त होता है। यही लक्ष्यार्थ है। अतः लक्षणा शब्द-शक्ति से शब्द का मुख्य अर्थ प्रकट नहीं होता है, अपितु लक्षणों से आरोपित अर्थ प्रकट होता है। अभिधा शब्दों का सीधा अर्थ बताती है, जबकि लक्षणा किसी गुण या प्रयोजन के कारण अर्थ बदलती है।
In simple words: अभिधा में शब्द का सीधा अर्थ लेते हैं, जैसे 'पहाड़ पर चढ़ना मुश्किल है'। लक्षणा में शब्द का सीधा अर्थ छोड़ कर कोई दूसरा अर्थ लेते हैं, जैसे 'जीवन में कई पहाड़ पार करने पड़ते हैं' में 'पहाड़' का मतलब 'मुश्किलें' हैं।
🎯 Exam Tip: अभिधा में शब्द का अर्थ सीधा और स्पष्ट होता है, जबकि लक्षणा में अर्थ छिपा हुआ या किसी विशेषता पर आधारित होता है।
Question 6. उदाहरण देते हुए अभिधा और व्यंजना शक्तियों का अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'अभिधा' शब्द की वह शक्ति मानी गयी है, जिसके द्वारा शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ प्रकट होता है। जैसे-'हिन्दी में अनुवाद करना सरल है।' यहाँ हर शब्द का प्रचलित या मुख्य अर्थ ग्रहण करके वक्ता की बात समझी जा सकती है। इसमें कोई छिपा या दूसरा अर्थ नहीं होता।
इसके विपरीत, व्यंजना शक्ति वह होती है जहाँ शब्द का अर्थ उसके सीधे अर्थ (मुख्यार्थ) और लक्षणा से निकलने वाले अर्थ (लक्ष्यार्थ) से भी अलग, कोई तीसरा विशेष अर्थ प्रकट करता है। यह अर्थ संदर्भ और बोलने वाले के इरादे पर निर्भर करता है। उदाहरण: 'पाँच बज गए।' इस वाक्य का सीधा अर्थ केवल समय बताना है (अभिधा), लेकिन इसका छिपा हुआ अर्थ 'अब काम बंद करो' या 'घर चलो' (व्यंजना) भी हो सकता है। अभिधा में सिर्फ़ एक अर्थ होता है, व्यंजना में कई अर्थ संभव होते हैं।
In simple words: अभिधा में शब्द का सीधा मतलब निकलता है, जैसे 'हिंदी सीखना आसान है'। व्यंजना में सीधे मतलब के अलावा एक छिपा हुआ मतलब भी निकलता है, जैसे 'पाँच बज गए' का मतलब 'अब छुट्टी करो' भी हो सकता है।
🎯 Exam Tip: अभिधा में शब्द का अर्थ निश्चित होता है, जबकि व्यंजना में अर्थ स्थिति के अनुसार बदलता रहता है और कई संभव अर्थ हो सकते हैं।
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