NCERT Solutions for Class 12 Computer Science: Chapter 05 लिंक्ड लिस्ट
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Practice Class 12 Computer Science Solutions: Chapter 05 लिंक्ड लिस्ट
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RBSE Class 12 Computer Science Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. लिंक लिस्ट सबसे उपयुक्त हैं
(a) डेटा के स्थायी संग्रह के लिए।
(b) लगातार बदल रहे स्ट्रक्चर के आकार और डेटा के लिए
(c) ऊपर की दोनों स्थिति के लिए
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (b) लगातार बदल रहे स्ट्रक्चर के आकार और डेटा के लिए
In simple words: लिंक लिस्ट ऐसे डेटा स्ट्रक्चर के लिए सबसे अच्छी होती हैं जिनका आकार लगातार बदलता रहता है। वे आसानी से बढ़ या घट सकती हैं, जिससे डेटा को प्रबंधित करना आसान हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ऑब्जेक्टिव सवालों में, 'सबसे उपयुक्त' विकल्प का चुनाव करते समय, लिंक लिस्ट के मुख्य लाभ (गतिशील आकार) पर ध्यान दें।
Question 2. आमतौर पर नोड्स के संग्रह को लिंक्ड लिस्ट कहा जाता है
Answer: आमतौर पर नोड्स के संग्रह को लिंक्ड लिस्ट कहा जाता है। प्रत्येक नोड में डेटा और अगले नोड का पता होता है, जो उन्हें एक साथ जोड़ता है।
In simple words: नोड्स को जब एक साथ जोड़ा जाता है तो उसे लिंक्ड लिस्ट कहते हैं। यह एक चेन की तरह होती है जहां हर नोड अगले को जानता है।
🎯 Exam Tip: लिंक्ड लिस्ट डेटा स्ट्रक्चर का मूल तत्व 'नोड' है, जो डेटा और एक पॉइंटर को रखता है।
Question 3. निम्न में से कौन सा लिंक्ड लिस्ट का एक प्रकार नहीं है
(a) डबल लिंक लिस्टम
(b) सिंगल लिंक्ड लिस्ट
(c) सरक्यूलर लिंक्ड लिस्ट
(d) हाइब्रिड लिंक्ड लिस्ट
Answer: (d) हाइब्रिड लिंक्ड लिस्ट
In simple words: हाइब्रिड लिंक्ड लिस्ट लिंक्ड लिस्ट का एक सामान्य प्रकार नहीं है, जबकि सिंगल, डबल और सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट मुख्य प्रकार हैं।
🎯 Exam Tip: लिंक्ड लिस्ट के मुख्य प्रकारों को याद रखें: सिंगल (एक-तरफा), डबल (दोनों-तरफा), और सर्कुलर (जहां आखिरी नोड पहले नोड से जुड़ता है)।
Question 4. लिंक लिस्ट आमतौर पर डायनेमिक स्मृति आवंटन के उदाहरण के रूप में जाना जाता है।
(a) स्थिर
(b) डायनेमिक
(c) कम्पाईल टाईम
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) डायनेमिक
In simple words: लिंक लिस्ट डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन का एक अच्छा उदाहरण है। इसका मतलब है कि मेमोरी की जरूरत के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती है, प्रोग्राम शुरू होने से पहले ही तय नहीं होती।
🎯 Exam Tip: डायनेमिक आवंटन तब होता है जब प्रोग्राम चलते समय मेमोरी की मांग करता है, जो लिंक लिस्ट के लचीलेपन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 5. एक सरक्युलर लिंक लिस्ट में
(a) सभी तत्त्व सिक्केंशियल तरीके से जुड़े होते हैं।
(b) इसमें कोई शुरुआत और कोई अंत नहीं होता है।
(c) अवयव पदानुक्रम में व्यवस्थित होते हैं।
(d) सूची के भीतर आगे और पीछे चंक्रमण की अनुमति होती है।
Answer: (b) इसमें कोई शुरुआत और कोई अंत नहीं होता है।
In simple words: एक सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट में, आखिरी नोड पहले नोड से जुड़ा होता है, जिससे डेटा एक चक्र में चलता रहता है और कोई स्पष्ट शुरुआत या अंत नहीं होता।
🎯 Exam Tip: सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट की पहचान उसका चक्रवाती स्वभाव है, जहाँ अंतिम नोड वापस पहले नोड से जुड़ जाता है।
RBSE Class 12 Computer Science Chapter 5 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. लिंक लिस्ट को परिभाषित करें।
Answer: लिंक लिस्ट एक लीनियर डेटा स्ट्रक्चर है जिसमें तत्वों की एक श्रृंखला होती है। इसमें प्रत्येक तत्व, जिसे नोड कहते हैं, अपने अगले तत्व का पता रखता है। आसान शब्दों में, यह डेटा तत्वों की एक लिस्ट है जहाँ तत्व एक-दूसरे से पॉइंटर (pointers) के ज़रिए जुड़े होते हैं। इससे लिस्ट को बढ़ाना या घटाना आसान हो जाता है।
In simple words: लिंक लिस्ट एक खास तरह की लिस्ट है जहाँ डेटा के हर हिस्से को नोड कहते हैं। हर नोड अपने से अगले नोड का पता रखता है, जिससे वे सब एक चेन की तरह जुड़े होते हैं।
🎯 Exam Tip: परिभाषा में 'नोड्स', 'पॉइंटर' और 'लीनियर डेटा स्ट्रक्चर' जैसे कीवर्ड्स का उपयोग करें, और बताएं कि प्रत्येक नोड अगले नोड का पता रखता है।
Question 2. हैडर लिंक लिस्ट क्या है?
Answer: हैडर लिंक्ड लिस्ट एक ऐसी लिंक्ड लिस्ट है जो हमेशा लिस्ट की शुरुआत में एक खास नोड, जिसे हैडर नोड कहते हैं, रखती है। यह हैडर नोड डेटा को नहीं रखता बल्कि लिस्ट को प्रबंधित करने में मदद करता है। यह दो प्रकार की होती है:
• ग्राउंडेड हैडर लिस्ट – इसमें लिस्ट का अंतिम नोड NULL पॉइंटर रखता है।
• सर्कुलर हैडर लिस्ट – इसमें लिस्ट का अंतिम नोड वापस हैडर नोड को पॉइंट करता है। यह लिस्ट के संचालन को ज़्यादा व्यवस्थित बनाती है।
In simple words: हैडर लिंक्ड लिस्ट वह लिस्ट है जिसकी शुरुआत में एक खास नोड होता है। यह नोड लिस्ट को संभालने में मदद करता है और लिस्ट को ग्राउंडेड या सर्कुलर बना सकता है।
🎯 Exam Tip: हैडर नोड का मुख्य कार्य लिस्ट के प्रबंधन में सहायता करना है, न कि डेटा को स्टोर करना। इसके दो प्रकारों का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 3. ऐरे और लिंक लिस्ट में कौन बेहतर है?
Answer: ऐरे में प्रत्येक तत्व स्वतंत्र होता है और उसका अपने से पहले या उसकी मेमोरी लोकेशन से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। जबकि लिंक्ड लिस्ट में तत्वों की मेमोरी लोकेशन या एड्रेस एक 'लिंक' भाग में स्टोर रहते हैं। केवल पॉइंटर की वैल्यू बदलनी होती है, इसलिए लिंक लिस्ट ऐरे से बेहतर होती है क्योंकि इसमें डेटा को कहीं भी इन्सर्ट या डिलीट करना आसान होता है। ऐरे में तत्वों को हटाना या जोड़ना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए कई तत्वों को शिफ्ट करना पड़ सकता है।
In simple words: लिंक लिस्ट आमतौर पर ऐरे से बेहतर होती है क्योंकि यह डेटा को आसानी से जोड़ और हटा सकती है। ऐरे में डेटा को जोड़ने या हटाने पर बहुत सारे बदलाव करने पड़ते हैं।
🎯 Exam Tip: दोनों की तुलना करते समय, लिंक लिस्ट के 'डायनेमिक' गुण और ऐरे के 'स्थिर' गुणों पर ध्यान दें, खासकर इंसर्शन और डिलीशन ऑपरेशंस के संदर्भ में।
Question 4. सर्कुलर लिंक लिस्ट को परिभाषित करें।
Answer: सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट वह लिंक्ड लिस्ट है जिसमें अंतिम नोड का 'नेक्स्ट' पॉइंटर NULL को पॉइंट करने के बजाय, लिस्ट के पहले नोड या 'स्टार्ट' नोड को पॉइंट करता है। इसका मतलब है कि आखिरी नोड वापस लिस्ट की शुरुआत से जुड़ जाता है, जिससे डेटा एक चक्र में लगातार चलता रहता है। ऐसी लिस्ट में कोई स्पष्ट शुरुआत या अंत नहीं होता है। हम जिस सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट की बात कर रहे हैं, वह सिंगल सर्कुलर लिस्ट कहलाती है क्योंकि इसे हम केवल आगे की दिशा में ही प्रिंट करा सकते हैं। डबली लिंक्ड लिस्ट एक खास प्रकार की लिस्ट है जिसे हम आगे और पीछे दोनों तरफ से प्रिंट कर सकते हैं। सामान्य लिस्ट की तरह ही, सिंगल सर्कुलर लिस्ट में भी नोड जोड़ने, नोड मिटाने, नोड खोजने और प्रिंट करने के लिए सभी चारों फंक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
In simple words: सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट में लिस्ट का आखिरी नोड वापस पहले नोड से जुड़ जाता है। इससे लिस्ट एक गोल चक्र में चलती रहती है और उसका कोई असली अंत या शुरुआत नहीं होती।
🎯 Exam Tip: सर्कुलर लिंक्ड लिस्ट में अंतिम नोड का पहले नोड से जुड़ना इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। इसका उपयोग उन परिदृश्यों में किया जाता है जहाँ डेटा को बार-बार दोहराने की आवश्यकता होती है।
RBSE Class 12 Computer Science Chapter 5 निबंधात्मक प्रश्न
Question 1. डबल लिंक लिस्ट को समझाओ।
Answer: डबल लिंक्ड लिस्ट, जिसे 'टू-वे लिंक्ड लिस्ट' भी कहते हैं, एक डेटा संरचना है जिसमें प्रत्येक नोड में डेटा के साथ-साथ दो पॉइंटर होते हैं। इनमें से एक पॉइंटर पिछले नोड का पता रखता है (इसे 'बैक' या 'प्रीवियस' पॉइंटर कहते हैं) और दूसरा अगले नोड का पता रखता है (इसे 'नेक्स्ट' पॉइंटर कहते हैं)। दो पॉइंटर होने के कारण हम लिस्ट में सूचनाओं को दोनों तरफ (आगे और पीछे) से प्रिंट कर सकते हैं। यह लिस्ट उन जगहों पर ज़्यादा इस्तेमाल होती है जहाँ हमें डेटा को दोनों दिशाओं में एक्सेस करना होता है। एक नोड की संरचना में आमतौर पर एक 'बैक' पॉइंटर, 'इन्फो' (डेटा) और एक 'नेक्स्ट' पॉइंटर शामिल होते हैं।
struct node *back;
int info;
struct node*next;
जिस प्रकार एक साधारण लिस्ट में नोड्स को जोड़ने, मिटाने और प्रिंट करने जैसी क्रियाएं होती हैं, उसी प्रकार डबल लिंक्ड लिस्ट में भी ये ऑपरेशंस किए जा सकते हैं। डबल लिंक्ड लिस्ट में एक नया नोड चार मुख्य स्थानों पर जोड़ा जा सकता है:
• लिस्ट के प्रारम्भ में
• लिस्ट के अंत में
• लिस्ट में दी गई किसी सूचना के बाद
• लिस्ट में वांछित स्थान (Desired Location) के बाद डबल लिंक्ड लिस्ट डेटा प्रबंधन में अधिक लचीलापन प्रदान करती है।
In simple words: डबल लिंक्ड लिस्ट में डेटा के हर हिस्से (नोड) के पास दो पॉइंटर होते हैं - एक पिछले नोड का पता बताता है और दूसरा अगले नोड का। इससे हम लिस्ट में डेटा को आगे और पीछे दोनों तरफ से देख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: डबल लिंक्ड लिस्ट में दो पॉइंटर्स (पिछला और अगला) इसकी मुख्य विशेषता है, जो दोनों दिशाओं में ट्रैवर्सल की अनुमति देता है।
Question 2. सिंगल और डबल लिंक लिस्ट के बीच अन्तर को बताओ।
Answer: सिंगल और डबल लिंक्ड लिस्ट के बीच कुछ मुख्य अंतर होते हैं:
1. **पॉइंटर की संख्या:** सिंगल लिंक्ड लिस्ट में हर नोड केवल एक पॉइंटर रखता है जो अगले नोड को पॉइंट करता है। जबकि डबल लिंक्ड लिस्ट में हर नोड में दो पॉइंटर होते हैं - एक पिछले नोड के लिए और दूसरा अगले नोड के लिए।
2. **ट्रैवर्सल (Traversal):** सिंगल लिंक्ड लिस्ट में हम केवल एक दिशा में ही आगे बढ़ सकते हैं। डबल लिंक्ड लिस्ट में हम लिस्ट में आगे और पीछे दोनों दिशाओं में जा सकते हैं, जिससे डेटा को एक्सेस करना ज़्यादा लचीला होता है।
3. **मेमोरी की खपत:** डबल लिंक्ड लिस्ट में हर नोड में एक अतिरिक्त पॉइंटर होने के कारण, सिंगल लिंक्ड लिस्ट की तुलना में ज़्यादा मेमोरी की आवश्यकता होती है।
4. **ऑपरेशंस की जटिलता:** डबल लिंक्ड लिस्ट में नोड जोड़ने (इंसर्शन) या हटाने (डिलीशन) जैसे ऑपरेशंस सिंगल लिंक्ड लिस्ट की तुलना में थोड़े ज़्यादा जटिल होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनमें दो पॉइंटर (पिछला और अगला) को अपडेट करना पड़ता है।
सिंगल लिंक्ड लिस्ट सरल होती है, लेकिन डबल लिंक्ड लिस्ट अधिक कार्यक्षमता देती है।
In simple words: सिंगल लिंक्ड लिस्ट में नोड सिर्फ आगे के नोड को जानता है, जबकि डबल लिंक्ड लिस्ट में नोड आगे और पीछे दोनों नोड को जानता है। इसलिए डबल लिस्ट में ज़्यादा मेमोरी लगती है और काम थोड़ा मुश्किल होता है, पर वह ज़्यादा सुविधाएं देती है।
🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करने के लिए पॉइंटर्स की संख्या, ट्रैवर्सल दिशा और ऑपरेशंस की जटिलता जैसे प्रमुख पहलुओं पर ध्यान दें।
Question 3. लिंक लिस्ट किस प्रकार की स्मृति आवंटन से जुड़ा हुआ है?
Answer: लिंक लिस्ट आमतौर पर डायनेमिक स्मृति आवंटन (Dynamic Memory Allocation) से जुड़ा होता है। इसका मतलब है कि लिंक लिस्ट को बनाने या उसका आकार बदलने के लिए मेमोरी की आवश्यकता प्रोग्राम के चलने के दौरान ही तय होती है, न कि प्रोग्राम के शुरू होने से पहले। डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन से लिंक लिस्ट को ज़रूरत के हिसाब से घटाया या बढ़ाया जा सकता है, जिससे मेमोरी का कुशल उपयोग होता है।
यहां एक C प्रोग्राम का उदाहरण दिया गया है जो सिंगली लिंक्ड लिस्ट को बनाता और दिखाता है:
c
#include <stdio.h>
#include <stdlib.h>
struct node
{
int data;
struct node* next;
};
struct node* head;
void createList(int n);
void traverseList();
int main()
{
int n;
printf("Enter the total no. of nodes: ");
scanf("%d", &n);
createList(n);
printf("\nData in the list:\n");
traverseList();
return 0;
}
void createList(int n)
{
struct node* newNode, *temp;
int data, i;
head = (struct node *) malloc(sizeof(struct node));
if (head == NULL)
{
printf("Unable to allocate memory\n");
return;
}
printf("Enter the data of node 1: ");
scanf("%d", &data);
head->data = data;
head->next = NULL;
temp = head;
for (i = 2; i <= n; i++)
{
newNode = (struct node *) malloc(sizeof(struct node));
if (newNode == NULL)
{
printf("Unable to allocate memory\n");
break;
}
else
{
printf("Enter the data of node %d: ", i);
scanf("%d", &data);
newNode->data = data;
newNode->next = NULL;
temp->next = newNode;
temp = newNode;
}
}
}
void traverseList()
{
struct node *temp;
if (head == NULL)
{
printf("List is empty.\n");
}
else
{
temp = head;
while (temp != NULL)
{
printf("Data = %d\n", temp->data);
temp = temp->next;
}
}
}
लिंक लिस्ट का यह गुण इसे अत्यधिक उपयोगी बनाता है।
In simple words: लिंक लिस्ट डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन का उपयोग करती है। इसका मतलब है कि मेमोरी की जरूरत प्रोग्राम चलते समय तय होती है, जिससे लिस्ट का आकार आसानी से बदला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: डायनेमिक मेमोरी एलोकेशन और कुशल मेमोरी उपयोग को लिंक लिस्ट का एक मुख्य लाभ मानें, क्योंकि यह रनटाइम पर आकार बदलने की सुविधा देता है।
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RBSE Solutions for Class 12 Computer Science Chapter 05 लिंक्ड लिस्ट
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