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Detailed Chapter 5 पादप-जल संबंध RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 5 पादप-जल संबंध RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Biology Chapter 5 पादप-जल संबंध
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. पर्णो द्वारा वायुमण्डल से \( \text{CO}_{2} \) व \( \text{O}_{2} \) के विनिमय की क्रिया को कहते है –
(अ) परासरण
(ब) विसरण
(स) अंतःशोषण
(द) अंत:परासरण
Answer: (ब) विसरण
In simple words: पत्तियों और हवा के बीच कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन जैसी गैसों का आदान-प्रदान विसरण की प्रक्रिया से होता है। यह तब होता है जब गैसें अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाती हैं।
🎯 Exam Tip: विसरण एक निष्क्रिय प्रक्रिया है; इसका मतलब है कि गैसों के इस आदान-प्रदान के लिए पौधे को ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ती है।
Question 2. निम्न में से पारगम्य है –
Answer: (द) अर्द्धपारगम्य झिल्ली (Semi-permeable membrane)
In simple words: पारगम्य वह झिल्ली होती है जो कुछ पदार्थों को अपने में से निकलने देती है जबकि अन्य को रोकती है। कोशिका झिल्ली इसका एक अच्छा उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की झिल्लियों - पारगम्य, अपारगम्य, अर्द्धपारगम्य और चयनात्मक पारगम्य - के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. श्लथ अवस्था में DPD का मान होगा –
(अ) OP के बराबर
(ब) OP से अधिक
(स) शून्य
(द) OP से कम
Answer: (अ) OP के बराबर
In simple words: DPD का मतलब विसरण दाब न्यूनता है। जब एक कोशिका श्लथ (पानी की कमी) होती है, तो उसका DPD, उसके परासरण दाब (OP) के बराबर हो जाता है, क्योंकि उसमें स्फीति दाब (TP) नहीं होता।
🎯 Exam Tip: DPD, OP और TP के बीच के संबंध को याद रखें: DPD = OP - TP। श्लथ कोशिका में TP शून्य होता है।
Question 4. श्लथ कोशिका में कौनसा दाब शून्य होता है?
(अ) चूषण दाब
(ब) विसरण दाब
(स) स्फीति
(द) परासरण दाब
Answer: (स) स्फीति
In simple words: जब किसी कोशिका में पानी की कमी होती है और वह श्लथ हो जाती है, तो उसके अंदर कोई स्फीति दाब नहीं होता, यानी यह दाब शून्य हो जाता है। स्फीति दाब वह दाब है जो कोशिका की आंतरिक सामग्री कोशिका भित्ति पर डालती है।
🎯 Exam Tip: स्फीति दाब पानी से भरी हुई (स्फोत) कोशिकाओं में अधिकतम होता है, लेकिन जब कोशिका में पानी की कमी होती है तो यह शून्य हो जाता है।
Question 5. जलस्नेही कोलॉइडी पदार्थों द्वारा जल का अधिशोषण कर फूलने की क्रिया को कहते हैं –
(अ) अंत: शोषण
(ब) परासरण
(स) विसरण
(द) जीवद्रव्यविकुंचन
Answer: (अ) अंत: शोषण
In simple words: जब सूखे बीज या लकड़ी जैसे पदार्थ पानी को सोखकर बिना घोल बनाए फूल जाते हैं, तो इस क्रिया को अंतःशोषण कहते हैं। यह जल के अणुओं को अवशोषित करने का एक विशेष तरीका है।
🎯 Exam Tip: अंतःशोषण की प्रक्रिया में, अवशोषक (पानी सोखने वाला पदार्थ) और पानी के बीच कोई अर्धपारगम्य झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अर्द्धपारगम्य झिल्ली का उदाहरण दीजिए।
Answer: अर्द्धपारगम्य झिल्ली का एक उदाहरण चर्म पत्र (Parchment paper) है। यह झिल्ली केवल विलायक (जैसे पानी) के अणुओं को अपने में से गुजरने देती है, लेकिन विलेय के अणुओं को रोक लेती है।
In simple words: चर्म पत्र एक ऐसी झिल्ली है जो पानी को तो निकलने देती है, पर उसमें घुली हुई चीनी जैसे बड़े कणों को नहीं।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली और टोनोप्लास्ट भी अर्द्धपारगम्य या चयनात्मक पारगम्य झिल्लियों के अच्छे उदाहरण हैं।
Question 3. विसरण को परिभाषित कीजिए।
Answer: विसरण (Diffusion) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ के अणु अपनी अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर तब तक गति करते हैं जब तक कि पूरे माध्यम में एक समान सांद्रता न हो जाए। यह अणुओं की स्वाभाविक गति के कारण होता है।
In simple words: विसरण तब होता है जब कोई चीज (जैसे इत्र की खुशबू) उस जगह से फैलती है जहाँ वह बहुत ज्यादा है, उस जगह की ओर जहाँ वह कम है, जब तक कि वह हर जगह एक जैसी न हो जाए।
🎯 Exam Tip: विसरण ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में हो सकता है और इसके लिए किसी झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती है।
Question 4. अन्तः शोषण की परिभाषित कीजिए।
Answer: अंतःशोषण (Imbibition) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई ठोस पदार्थ (कोलॉइड) किसी द्रव (जैसे पानी) को बिना विलयन बनाए सोखकर फूल जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव ठोस पदार्थ के अंदर अधिशोषित हो जाता है। उदाहरण के लिए, सूखी लकड़ी का पानी सोखकर फूल जाना।
In simple words: जब कोई सूखा पदार्थ (जैसे बीज या लकड़ी) बिना घुले पानी सोखकर बड़ा हो जाता है, तो उसे अंतःशोषण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अंतःशोषण पौधों के जीवन में महत्वपूर्ण है, खासकर बीज अंकुरण के दौरान जहाँ बीज पानी सोखकर अंकुरित होते हैं।
Question 5. TP, WP को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
1. स्फीतिदाब (Turgor Pressure, TP) – यह वह दाब है जो कोशिका के अंदर की कोशिका द्रव्य (प्रोटोप्लास्ट) द्वारा कोशिका भित्ति पर बाहर की ओर लगाया जाता है। यह कोशिका को स्फीत (फूला हुआ) बनाए रखता है।
2. भित्तिदाब (Wall Pressure, WP) – यह वह दाब है जो कोशिका भित्ति द्वारा कोशिका के अंदर की ओर कोशिका कला पर लगाया जाता है। यह स्फीतिदाब के ठीक बराबर और विपरीत होता है।
In simple words: स्फीतिदाब कोशिका के अंदर का दबाव है जो उसे मोटा रखता है, जबकि भित्तिदाब कोशिका की दीवार का दबाव है जो उसे सिकोड़ने से रोकता है।
🎯 Exam Tip: स्फीतिदाब और भित्तिदाब हमेशा समान होते हैं लेकिन विपरीत दिशा में कार्य करते हैं, जिससे कोशिका की संरचनात्मक अखंडता बनी रहती है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जलविभव को स्पष्ट करें
Answer: जलविभव (Water Potential, \( \Psi_w \)) जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा का माप है। यह शुद्ध जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा और किसी विशेष विलयन में जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा के बीच के अंतर को दर्शाता है। आर. के. स्लेटियर और एस. ए. टायलर (1960) ने यह अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिसमें शुद्ध जल का विभव सबसे अधिक (शून्य) माना जाता है। जल हमेशा उच्च जलविभव वाले क्षेत्र से निम्न जलविभव वाले क्षेत्र की ओर गति करता है।
In simple words: जलविभव बताता है कि पानी में कितनी ऊर्जा है और यह कहाँ से कहाँ बहेगा। शुद्ध पानी में सबसे ज्यादा ऊर्जा होती है, और पानी हमेशा ज्यादा ऊर्जा वाली जगह से कम ऊर्जा वाली जगह जाता है।
🎯 Exam Tip: जलविभव तापमान, दाब और विलेय सांद्रता से प्रभावित होता है, जिसमें विलेय मिलाने से जलविभव कम हो जाता है।
अन्तः परासरण तथा बहिः परासरण में अन्तर
| अन्तः परासरण | बहिः परासरण | |
|---|---|---|
| 1. | यह क्रिया पादप कोशिकाओं में उस स्थिति में होती है जब बाह्य विलयन अल्पपरासरी (Hypotonic) होता है। | यह क्रिया उस स्थिति में होती है जब बाह्य विलयन अतिपरासरी (Hypertonic) होता है। |
| 2. | इस प्रक्रिया के फलस्वरूप जल सजीव कोशिकाओं एवं ऊतकों में प्रवेश करता है। | इसमें जल कोशिकाओं एवं ऊतकों से बाहर निष्कासित होता है। |
| 3. | इस प्रक्रिया में कोशिकाएँ आयतन में वृद्धि करके स्फीत (Turgid) हो जाती हैं। | इसके परिणामस्वरूप कोशिकाएँ स्लथ (Flaccid) हो जाती हैं। |
| 4. | परासरण द्वारा उत्पन्न दाब 100 बार से भी कम होता है। | यह दाब 500 – 100 बार तक हो सकता है। |
Question 3. जीवद्रव्य कुंचन तथा जीवद्रव्य विकुंचन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: जीवद्रव्य कुंचन और जीवद्रव्य विकुंचन के बीच अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है।
In simple words: जीवद्रव्य कुंचन में कोशिका का अंदरूनी हिस्सा सिकुड़ जाता है, जबकि जीवद्रव्य विकुंचन में वह फिर से फूल जाता है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रक्रियाओं के कारण और कोशिका पर उनके प्रभावों को समझना, पादप कोशिकाओं में जल संबंध को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
| जीवद्रव्य कुंचन | जीवद्रव्य विकुंचन | |
|---|---|---|
| 1. | इस प्रक्रिया में जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से अलग दिखता है। | इसमें जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से लगा होता है। |
| 2. | यह कोशिका को अतिपरासरी विलयन में रखने के कारण होता है। | यह कोशिका को अल्पपरासरी विलयन में रखने के कारण होता है। |
| 3. | इसमें बहिः परासरण क्रिया होती है। | इसमें अन्तःपरासरण क्रिया होती है। |
Question 4. अतिपरासरी तथा अल्पपरासरी विलयन में विभेद कीजिए।
Answer: अतिपरासरी और अल्पपरासरी विलयन में अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है।
In simple words: अतिपरासरी विलयन में नमक या चीनी ज्यादा होती है, जबकि अल्पपरासरी विलयन में पानी ज्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: कोशिका पर इन दोनों प्रकार के विलयनों के प्रभावों को समझने से परासरण और कोशिका के जल संतुलन को समझने में मदद मिलती है।
| अतिपरासरी विलयन | अल्पपरासरी विलयन | |
|---|---|---|
| 1. | ऐसा विलयन जिसकी सान्द्रता दूसरे विलयन या कोशिका द्रव्य की तुलना में अधिक हो, अतिपरासरी विलयन (Hypertonic solution) कहलाता है। | ऐसा विलयन जिसकी सान्द्रता दूसरे विलयन या कोशिका द्रव्य की सान्द्रता की तुलना में कम हो, अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic solution) कहलाता है। |
| 2. | यदि किसी कोशिका को ऐसे विलयन में रखा जाये तो बहिः परासरण क्रिया द्वारा जल कोशिका से बाहर आ जाता है तथा कोशिका सिकुड़ जाती है। | यदि किसी कोशिका को ऐसे विलयन में रखा जाये तो अन्तः परासरण क्रिया द्वारा जल कोशिका में प्रवेश करती है तथा कोशिका फूल जाती है। |
Question 5. विसरण दाब प्रवणता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: विसरण दाब प्रवणता (Diffusion Pressure Gradient, DPG) वह अंतर है जो किसी प्रणाली में दो बिंदुओं के बीच विसरण दाब में होता है। विसरण की दर इस प्रवणता के सीधे आनुपातिक होती है और दोनों बिंदुओं के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है। यह अणुओं को अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाने के लिए प्रेरित करती है।
In simple words: विसरण दाब प्रवणता बताती है कि किसी पदार्थ के फैलने की ताकत कितनी है। जहाँ अंतर ज्यादा होगा, वहाँ वह तेजी से फैलेगा।
🎯 Exam Tip: DPG जितना अधिक होगा, विसरण की दर उतनी ही तेज होगी, क्योंकि अणुओं को गति करने के लिए एक मजबूत प्रेरणा मिलती है।
Question 6. विसरण दाब न्यूनता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: विसरण दाब न्यूनता (Diffusion Pressure Deficit, DPD) एक विलयन के विसरण दाब में शुद्ध विलायक (जैसे जल) की तुलना में होने वाली कमी को दर्शाता है। इसे चूषण दाब (Suction Pressure, SP) भी कहते हैं। यह कोशिका में पानी के अवशोषण की क्षमता को इंगित करता है और इसे \( \text{DPD = OP - TP} \) सूत्र से दर्शाया जाता है।
In simple words: DPD बताता है कि एक घोल को शुद्ध पानी की तुलना में कितना पानी चाहिए। इसे चूषण दाब भी कहते हैं, और यह OP (परासरण दाब) में से TP (स्फीति दाब) घटाने पर मिलता है।
🎯 Exam Tip: DPD एक कोशिका की जल अवशोषण शक्ति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है; उच्च DPD का मतलब है कि कोशिका में पानी अवशोषित करने की अधिक क्षमता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. परासरणी विभव, दाब विभव तथा जल विभव की व्याख्या कीजिए तथा इनके पारस्परिक सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
1. परासरणी विभव (Osmotic Potential, \( \Psi_s \)) – यह विलेय के अणुओं की सांद्रता के कारण होता है और यह दर्शाता है कि विलयन का जल विभव शुद्ध जल से कितना कम है। इसका मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और यह घोल में विलेय की मात्रा बढ़ने पर और अधिक ऋणात्मक हो जाता है।
2. दाब विभव (Pressure Potential, \( \Psi_p \)) – यह वह दाब है जो कोशिका के अंदरूनी प्रोटोप्लास्ट द्वारा कोशिका भित्ति पर लगाया जाता है, जिसे स्फीति दाब भी कहते हैं। यह जल के अणुओं को कोशिका में प्रवेश करने से रोकता है और जल विभव को बढ़ाता है। इसका मान आमतौर पर धनात्मक होता है, लेकिन जाइलम वाहिकाओं में ऋणात्मक भी हो सकता है।
3. जल विभव (Water Potential, \( \Psi_w \)) – यह जल के अणुओं की गतिज ऊर्जा का माप है। यह शुद्ध जल के विभव (जो शून्य होता है) की तुलना में किसी प्रणाली में जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा को दर्शाता है। जल हमेशा उच्च जलविभव से निम्न जलविभव की ओर गति करता है।
4. परासरण विभव, दाब विभव तथा जल विभव में सम्बन्ध (Relation between osmotic potential, pressure potential and water potential) – इन तीनों विभवों के बीच का संबंध इस सूत्र से दर्शाया जाता है:
\( \text{जल विभव} \ (\Psi_w) = \text{परासरणी विभव} \ (\Psi_s) + \text{दाब विभव} \ (\Psi_p) \)
यह सूत्र यह समझने में मदद करता है कि विभिन्न कारक जल की गति को कैसे प्रभावित करते हैं।
In simple words: परासरणी विभव बताता है कि घोल में कितना नमक है, दाब विभव कोशिका पर अंदर से कितना दबाव है, और जल विभव बताता है कि पानी में कितनी ऊर्जा है। ये तीनों मिलकर तय करते हैं कि पानी कहाँ जाएगा।
🎯 Exam Tip: यह सूत्र, \( \Psi_w = \Psi_s + \Psi_p \), पादप शरीर क्रिया विज्ञान में जल की गति को समझने के लिए एक मूलभूत अवधारणा है।
Question 2. परासरण क्रिया को परिभाषित करते हुए एक प्रयोग का वर्णन कीजिए। जिसके द्वारा इसको प्रदर्शित किया जा सकता है।
Answer:
परासरण एक विशेष प्रकार की विसरण प्रक्रिया है जिसमें विलायक के अणु (जैसे पानी) एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से अपनी उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र (या कम विलेय सांद्रता वाले क्षेत्र) से अपनी निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र (या उच्च विलेय सांद्रता वाले क्षेत्र) की ओर गति करते हैं। इस प्रक्रिया में विलेय के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली को पार नहीं कर पाते। पौधों में जल का अवशोषण परासरण द्वारा ही होता है। परासरण की खोज एबे नॉलेट (Abbe Nollet) ने की थी।
परासरण की क्रियाविधि का प्रदर्शन (Mechanism of Osmosis Demonstration):
एक कीप (थिसिल कीप) में शर्करा का गाढ़ा विलयन भरते हैं और उसके मुँह पर चर्म पत्र (Parchment paper) या कोई अन्य अर्धपारगम्य झिल्ली बाँध देते हैं। इस कीप को पानी से भरे एक बीकर में रखते हैं।
जल के अणु, जो बीकर में अधिक सांद्रता में हैं, अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से कीप में शर्करा विलयन की ओर गति करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शर्करा विलयन में पानी की सांद्रता कम होती है। इस प्रक्रिया के कारण, कीप में शर्करा विलयन का स्तर धीरे-धीरे ऊपर उठने लगता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि परासरण की क्रिया हो रही है। इस प्रयोग को नीचे दिए गए चित्र में दर्शाया गया है।
In simple words: परासरण में पानी एक खास दीवार (झिल्ली) के आर-पार वहाँ से जाता है जहाँ पानी ज्यादा है, वहाँ जहाँ पानी कम है। थिसिल कीप के प्रयोग में, कीप में पानी का स्तर ऊपर उठ जाता है क्योंकि पानी बीकर से कीप में चला जाता है।
🎯 Exam Tip: थिसिल कीप प्रयोग परासरण की अवधारणा और अर्धपारगम्य झिल्ली की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
Answer: (continued from previous page)
**(ii) परासरण के प्रकार (Types of Osmosis)** – परासरण दो प्रकार का होता है:
(i) अन्त:परासरण (Endosmosis) – यह वह प्रक्रिया है जिसमें जल के अणु अपनी उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से कोशिका या प्रणाली के अंदर प्रवेश करते हैं। यह तब होता है जब कोशिका को अल्पपरासरी (Hypotonic) विलयन में रखा जाता है।
(ii) बहिः परासरण (Exosmosis) – यह वह प्रक्रिया है जिसमें जल के अणु एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से कोशिका या प्रणाली से बाहर निकलते हैं। यह तब होता है जब कोशिका को अतिपरासरी (Hypertonic) विलयन में रखा जाता है।
**(iii) परासरण का महत्व (Significance of Osmosis)**
1. मूलरोमों (Root hairs) द्वारा जल का अवशोषण तथा पौधों के अन्दर जल का एक कोशिका से दूसरी कोशिका में विसरण परासरण क्रिया द्वारा होता है। यह पौधों में जल के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।
2. कोशिका की स्फीति दशा (Turgidity) परासरण पर निर्भर करती है। यह अवस्था सभी कोशिकीय क्रियाओं के लिए आवश्यक है, क्योंकि स्फीत कोशिकाएँ अपनी सामान्य जैविक प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से कर पाती हैं।
3. परासरण क्रिया द्वारा जल का पौधों के विभिन्न अंगों में वितरण होता है। यह जल को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाने में मदद करता है।
4. तरुण कोशिकाओं की वृद्धि इसी क्रिया पर निर्भर करती है। कोशिकाएँ जल अवशोषित करके आकार में बढ़ती हैं, जिससे पौधों में वृद्धि होती है।
5. परासरण क्रिया पौधों को हिमीकरण (Freezing) तथा शुष्कन (Desiccation) के प्रति प्रतिरोधी बनाती है। यह कोशिकाओं को अत्यधिक ठंड या पानी की कमी से बचाने में मदद करता है।
In simple words: परासरण दो तरह का होता है: अंतःपरासरण जब पानी कोशिका के अंदर आता है, और बहिःपरासरण जब पानी कोशिका से बाहर जाता है। परासरण पौधों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह उन्हें पानी सोखने, बढ़ने और ठंड या सूखे से बचाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: परासरण के प्रकार और महत्व को उदाहरणों के साथ याद करें, जैसे कि किशमिश का पानी में फूलना (अंतःपरासरण) और नमक के पानी में सिकुड़ना (बहिः परासरण)।
Question 3. परासरण, विसरण तथा अन्तः शोषण का संक्षेप में वर्णन करते हुए इनका पादप कार्यिकी में महत्व बताइए।
Answer:
**विसरण (Diffusion):** यह अणुओं का अपनी उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर स्वतः गति करना है। इसके लिए किसी झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती।
पादप कार्यिकी में महत्व:
1. वायुमंडल और पौधों के बीच ऑक्सीजन (O₂) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का आदान-प्रदान विसरण द्वारा होता है।
2. वायुमंडल में जलवाष्प का विसर्जन भी विसरण से होता है।
3. खनिज लवणों का निष्क्रिय अवशोषण (Passive absorption) विसरण द्वारा होता है।
**परासरण (Osmosis):** यह एक विशेष प्रकार का विसरण है जिसमें विलायक के अणु एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से अपनी उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करते हैं।
पादप कार्यिकी में महत्व:
1. मूलरोमों (Root hairs) द्वारा जल का अवशोषण और पौधों के अंदर एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जल का स्थानांतरण परासरण द्वारा होता है।
2. कोशिका की स्फीति दशा (Turgidity) परासरण पर निर्भर करती है, जो सभी कोशिकीय क्रियाओं के लिए आवश्यक है।
3. परासरण क्रिया द्वारा पौधों के विभिन्न अंगों में जल का वितरण होता है।
4. तरुण कोशिकाओं की वृद्धि इसी क्रिया पर निर्भर करती है।
5. यह क्रिया पौधों को हिमीकरण (Freezing) तथा शुष्कन (Desiccation) के प्रति प्रतिरोधी बनाती है।
**अंतःशोषण (Imbibition):** यह वह प्रक्रिया है जिसमें ठोस पदार्थ (कोलॉइड) बिना विलयन बनाए द्रव (जैसे जल) को सोखकर फूल जाते हैं।
पादप कार्यिकी में महत्व:
1. अंकुरित बीजों द्वारा जल का अवशोषण मुख्य रूप से अंतःशोषण द्वारा होता है। यह बीज के स्फुटन (फटने) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: विसरण गैसों का फैलना है, परासरण पानी का एक खास झिल्ली से आर-पार जाना है, और अंतःशोषण सूखे पदार्थ का पानी सोखकर फूलना है। ये सभी क्रियाएँ पौधों को पानी लेने, गैस बदलने और बढ़ने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रक्रियाओं के बीच के मुख्य अंतरों पर ध्यान दें, विशेषकर झिल्ली की आवश्यकता और विसरित होने वाले पदार्थ के प्रकार के संदर्भ में।
Question 1. किन्हीं दो अधिशोषकों के नाम बताइए।
Answer: दो अधिशोषक (Imbibants) हैं:
• सेलुलोस
• अगार
ये पदार्थ जल को अवशोषित करके फूल सकते हैं।
In simple words: सेलुलोस और अगार ऐसे पदार्थ हैं जो पानी सोखकर बड़े हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: अधिशोषक आमतौर पर कोलॉइडी पदार्थ होते हैं जिनमें पानी को अवशोषित करने की उच्च क्षमता होती है।
Question 2. पानी में रखने पर किशमिश क्यों फूल जाती है?
Answer: पानी में रखने पर किशमिश अंतःपरासरण (Endosmosis) की क्रिया के कारण फूल जाती है। किशमिश के अंदर चीनी की सांद्रता पानी की तुलना में अधिक होती है। इसलिए, पानी के अणु किशमिश की अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से अंदर प्रवेश करते हैं, जिससे वह फूल जाती है।
In simple words: किशमिश के अंदर ज्यादा चीनी होती है, इसलिए जब उसे पानी में डालते हैं, तो पानी किशमिश के अंदर चला जाता है और वह फूल जाती है।
🎯 Exam Tip: अंतःपरासरण हमेशा तब होता है जब एक कोशिका को अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic solution) में रखा जाता है।
Question 3. बीज अंकुरण के समय बीज तथा जल के बीच क्या क्रिया होती है?
Answer: बीज अंकुरण के समय, बीज और जल के बीच अंतःशोषण की क्रिया होती है। आरंभ में, बीज पानी को सोखकर फूल जाते हैं। पानी के अवशोषण से बीज के अंदर का दाब बढ़ता है, जिससे बीज का आवरण फट जाता है और अंकुरण शुरू होता है। इसके बाद, अन्य जैविक क्रियाएँ जैसे श्वसन और उपापचय शुरू होती हैं।
In simple words: बीज जब उगना शुरू करते हैं, तो वे पहले पानी सोखकर फूलते हैं। यह क्रिया अंतःशोषण कहलाती है। पानी मिलने पर बीज के अंदर की जान की प्रक्रियाएँ शुरू हो जाती हैं।
🎯 Exam Tip: अंतःशोषण बीज अंकुरण का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बिना अन्य उपापचयी प्रक्रियाएँ शुरू नहीं हो सकतीं।
Question 4. विसरण दाब न्यूनता (DPD) किसके बराबर होती है?
Answer: विसरण दाब न्यूनता (DPD) परासरण दाब (OP) तथा स्फीति दाब (TP) के अंतर के बराबर होती है। इसे सूत्र \( \text{DPD = OP - TP} \) द्वारा व्यक्त किया जाता है। यह एक कोशिका की पानी अवशोषित करने की क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: DPD का मतलब है, परासरण दाब में से स्फीति दाब को घटाना। यह बताता है कि एक कोशिका को कितना पानी चाहिए।
🎯 Exam Tip: शुद्ध जल के लिए DPD शून्य होता है, क्योंकि इसमें कोई विलेय और स्फीति दाब नहीं होता है।
Question 5. यदि पादप कोशिका को अतिपरासरी विलयन में डाल दिया जाय तो वह किस दशा को प्राप्त होगी?
Answer: यदि एक पादप कोशिका को अतिपरासरी विलयन (Hypertonic solution) में रखा जाता है, तो कोशिका में से बहिःपरासरण (Exosmosis) की क्रिया द्वारा जल बाहर निकल जाएगा। इसके परिणामस्वरूप कोशिका सिकुड़ जाएगी और जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) की स्थिति में आ जाएगी।
In simple words: अगर किसी पौधे की कोशिका को नमक वाले पानी में डाल दें, तो उसका पानी बाहर निकल जाएगा और वह सिकुड़ जाएगी, जिसे जीवद्रव्यकुंचन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: अतिपरासरी विलयन में विलेय की सांद्रता कोशिका रस की तुलना में अधिक होती है, जिससे जल का बहाव बाहर की ओर होता है।
Question 6. क्या होता है जबकि शुद्ध जल या विलयन पर पर्यावरण के दाब की अपेक्षा अधिक दाब लागू किया जाता है।
Answer: जब शुद्ध जल या किसी विलयन पर पर्यावरण के दाब की अपेक्षा अधिक दाब लगाया जाता है, तो उसका जल विभव (Water Potential) बढ़ जाता है। दाब बढ़ने से जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा भी बढ़ती है, जिससे जल की गति की प्रवृत्ति भी बदल सकती है।
In simple words: अगर शुद्ध पानी या किसी घोल पर बाहर से ज्यादा दबाव डालेंगे, तो पानी की ऊर्जा बढ़ जाएगी।
🎯 Exam Tip: दाब का जल विभव पर सीधा प्रभाव पड़ता है; सकारात्मक दाब जल विभव को बढ़ाता है, जबकि नकारात्मक दाब (तनाव) इसे कम करता है।
Question 8. जीवद्रव्य विकुंचन किस विधि द्वारा किया जा सकता है?
Answer: जीवद्रव्य विकुंचन (Deplasmolysis) जीवद्रव्य कुंचित कोशिका को पुनः शुद्ध जल या अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic solution) में रखकर किया जा सकता है। जब कुंचित कोशिका को ऐसे विलयन में रखा जाता है, तो जल अंतःपरासरण द्वारा कोशिका में प्रवेश करने लगता है और कोशिका फिर से फूल जाती है।
In simple words: जब सिकुड़ी हुई कोशिका को फिर से पानी में डालते हैं, तो वह पानी सोखकर वापस फूल जाती है, जिसे जीवद्रव्य विकुंचन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: जीवद्रव्य विकुंचन एक प्रतिवर्ती प्रक्रिया है, जो यह दर्शाती है कि कोशिकाएँ गंभीर जल तनाव के बाद भी ठीक हो सकती हैं।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जल के उन गुणों को लिखिए जो इसे असाधारण यौगिक बनाते हैं।
Answer: जल एक असाधारण यौगिक है जिसके निम्नलिखित अद्वितीय गुण इसे जैविक प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं:
1. ध्रुवीय प्रकृति (Polar nature): जल के अणु ध्रुवीय होते हैं, जिससे यह एक उत्कृष्ट विलायक बनता है।
2. हाइड्रोजन बन्धन (Hydrogen bonding): जल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंधन के कारण इसकी उच्च ससंजक (Cohesive) और आसंजक (Adhesive) बल होते हैं।
3. सार्वत्रिक विलायक (Universal solvent): यह कई पदार्थों को घोलने की क्षमता रखता है।
4. उच्च विशिष्ट ऊष्मा (High specific heat): जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा इसे तापमान में बड़े बदलावों के बावजूद अपने तापमान को स्थिर रखने में मदद करती है।
5. उदासीन pH (pH = 7): शुद्ध जल का pH 7 होता है, जो इसे उदासीन बनाता है।
6. उच्चतम घनत्व: जल का उच्चतम घनत्व \(4^\circ \text{C}\) पर होता है।
7. तीनों अवस्थाओं में उपलब्धता: यह ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में तापमान के सीमित परास में उपलब्ध होता है।
8. उच्च डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक: इसका उच्च डाइइलेक्ट्रिक स्थिरांक आयनिक यौगिकों को घोलने में मदद करता है।
In simple words: पानी एक खास चीज है क्योंकि यह बहुत सी चीजों को घोल सकता है, खुद को जोड़ कर रख सकता है, तापमान को स्थिर रख सकता है और तीनों रूपों (बर्फ, पानी, भाप) में रह सकता है।
🎯 Exam Tip: जल के ये गुण जीवन के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि वे जैविक प्रणालियों में रासायनिक प्रतिक्रियाओं और तापमान के विनियमन के लिए एक स्थिर वातावरण प्रदान करते हैं।
Question 2. स्वतन्त्र विसरण (Independent Diffusion) किसे कहते है?
Answer: स्वतंत्र विसरण (Independent Diffusion) वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्रणाली में विभिन्न पदार्थों के अणु एक-दूसरे की उपस्थिति से अप्रभावित रहते हुए अपनी-अपनी सांद्रता प्रवणता के अनुसार स्वतंत्र रूप से विसरित होते हैं। दूसरे शब्दों में, एक गैस या विलेय का विसरण दूसरे गैस या विलेय की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता है। उदाहरण के लिए, पौधों में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प का विसरण वातावरण में उनकी अपनी सांद्रता पर निर्भर करता है, न कि किसी अन्य गैस की सांद्रता पर।
In simple words: स्वतंत्र विसरण का मतलब है कि जब कई चीजें एक साथ फैल रही हों, तो वे एक-दूसरे को परेशान नहीं करतीं। हर चीज अपनी मर्जी से फैलती है, जैसे हवा में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड।
🎯 Exam Tip: स्वतंत्र विसरण की अवधारणा डाल्टन के आंशिक दाब के नियम से संबंधित है, जिसमें कहा गया है कि गैसों का आंशिक दाब एक-दूसरे से स्वतंत्र होता है।
Question 3. विसरण क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Answer: विसरण की क्रिया को कई कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें से मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
1. तापमान (Temperature): तापमान बढ़ने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है, जिससे विसरण की दर भी बढ़ जाती है। उच्च तापमान पर अणु अधिक तेजी से गति करते हैं और अधिक तेज़ी से फैलते हैं।
2. विसरित होने वाले पदार्थ का घनत्व (Density of diffusing particles): विसरण की दर विसरित होने वाले पदार्थ के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional to the square root of density) होती है। इसका अर्थ है कि हल्के अणु भारी अणुओं की तुलना में तेजी से फैलते हैं (ग्राहम का विसरण का नियम)।
In simple words: तापमान बढ़ने पर चीजें तेजी से फैलती हैं, और हल्की चीजें भारी चीजों से ज्यादा तेजी से फैलती हैं।
🎯 Exam Tip: ग्राहम का विसरण का नियम याद रखें, जो विसरण की दर और घनत्व के बीच के संबंध को स्पष्ट करता है।
Question 4. पारगम्यता (permeability) के आधार पर झिल्लियाँ कितने प्रकार की होती हैं? समझाइए।
Answer: किसी भी पदार्थ का कोशिका में प्रवेश और उससे बाहर निकलने की प्रक्रिया कोशिका कला (Cell membrane) के एक विशेष गुण पारगम्यता (Permeability) पर निर्भर करती है। इस गुण के आधार पर जैविक झिल्लियाँ निम्न प्रकार की होती हैं:
(i) पारगम्य झिल्लियाँ (Permeable membranes) – ये वे झिल्लियाँ होती हैं जो विलेय (Solute) और विलायक (Solvent) दोनों के अणुओं को अपने में से गुजरने देती हैं। उदाहरणार्थ- कोशिका भित्ति (Cell wall)।
(ii) अपारगम्य झिल्लियाँ (Impermeable membranes) – ये वे झिल्लियाँ होती हैं जो विलेय और विलायक दोनों के अणुओं को अपने में से नहीं गुजरने देतीं। उदाहरणार्थ- अधिचर्म (Cuticle), काग (Cork)।
(iii) विभेदात्मक या चयनात्मक पारगम्य झिल्लियाँ (Differentially or selectively permeable membranes) – ये झिल्लियाँ जल के अणुओं (विलायक) के लिए अधिक पारगम्य होती हैं, लेकिन जल में घुले पदार्थों (विलेय) के लिए अपेक्षाकृत कम पारगम्य होती हैं। ये कुछ पदार्थों को चयनित रूप से गुजरने देती हैं। उदाहरणार्थ- प्लाज्मा झिल्ली (Plasma membrane), टोनोप्लास्ट (Tonoplast) आदि।
(iv) अर्द्ध पारगम्य झिल्लियाँ (Semipermeable membranes) – ये वे झिल्लियाँ होती हैं जो केवल विलायक (जल) के अणुओं के लिए पारगम्य होती हैं, लेकिन विलेय के अणुओं के लिए पूरी तरह से अपारगम्य होती हैं। उदाहरणार्थ- चर्म पत्र (Parchment paper) या कुछ कृत्रिम झिल्लियाँ।
In simple words: झिल्लियाँ चार तरह की होती हैं: पारगम्य (सबको जाने दे), अपारगम्य (किसी को न जाने दे), चयनात्मक (कुछ खास को जाने दे) और अर्धपारगम्य (सिर्फ पानी को जाने दे)।
🎯 Exam Tip: प्लाज्मा झिल्ली चयनात्मक पारगम्यता दर्शाती है, जिसका अर्थ है कि यह अपनी आवश्यकता के अनुसार पदार्थों के प्रवेश को नियंत्रित करती है।
Question 5. अन्त:परासरण किसे कहते हैं? समझाइए।
Answer: अंतःपरासरण (Endosmosis) वह प्रक्रिया है जिसमें जल के अणु एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से बाहरी अल्पपरासरी विलयन (Hypotonic solution) से कोशिका के अंदर प्रवेश करते हैं। यह तब होता है जब कोशिका को ऐसे विलयन में रखा जाता है जिसकी सांद्रता कोशिका रस की सांद्रता से कम होती है। दूसरे शब्दों में, यह जल का किसी भी तंत्र में परासरणीय प्रवेश है। इसके कारण कोशिका फूल जाती है और स्फीत अवस्था में आ जाती है।
In simple words: अंतःपरासरण तब होता है जब बाहर का पानी कोशिका के अंदर चला जाता है, जिससे कोशिका फूल जाती है। यह तब होता है जब कोशिका को कम नमक वाले पानी में रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: अंतःपरासरण पौधों में जल अवशोषण और स्फीति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. जीवद्रव्य कुंचन क्रिया का प्रदर्शन किस प्रकार किया जा सकता है? समझाइए।
Answer: जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis) क्रिया का प्रदर्शन रोहियो डिसकलर (Rhoeo discolor) पौधे की पत्ती की निचली बैंगनी अधिचर्म (Epidermis) की कोशिकाओं की सहायता से आसानी से किया जा सकता है।
**प्रयोग विधि:**
1. रोहियो डिसकलर पत्ती की निचली अधिचर्म की दो छोटी परतें (टुकड़े) लें।
2. इन कोशिकाओं में बैंगनी रंग का कोशिकाद्रव्य होता है।
3. एक टुकड़े को शुद्ध जल में रखें और दूसरे टुकड़े को चीनी के गाढ़े विलयन (अतिपरासरी विलयन) में रखें।
4. कुछ समय बाद, इन टुकड़ों को सूक्ष्मदर्शी से देखें।
**अवलोकन:**
* जो टुकड़ा शुद्ध जल में रखा गया था, उसकी कोशिकाएँ स्फीत (Turgid) दिखाई देंगी, क्योंकि जल अंतःपरासरण द्वारा अंदर प्रवेश करेगा।
* जो टुकड़ा चीनी के विलयन में रखा गया था, उसकी अधिचर्म कोशिकाओं का बैंगनी रंगयुक्त कोशिकाद्रव्य सिकुड़कर कोशिका के केंद्र में या एक कोने में इकट्ठा हो जाता है। इस क्रिया को जीवद्रव्य कुंचन (Plasmolysis) कहते हैं, क्योंकि बहिःपरासरण द्वारा जल बाहर निकल गया है।
**जीवद्रव्य विकुंचन:**
यदि इस जीवद्रव्य कुंचित अधिचर्म के टुकड़े को वापस शुद्ध जल में रखा जाए और फिर सूक्ष्मदर्शी से देखा जाए, तो संकुचित जीवद्रव्य पुनः फैल जाता है और कोशिका अपनी सामान्य अवस्था में लौट आती है। इस प्रक्रिया को जीवद्रव्य विकुंचन (Deplasmolysis) कहते हैं।
In simple words: पौधे की पत्ती को नमक वाले पानी में डालने पर उसका अंदरूनी हिस्सा सिकुड़ जाता है, यह जीवद्रव्य कुंचन है। फिर, अगर उसे सादे पानी में डालें, तो वह फिर से फूल जाता है, यह जीवद्रव्य विकुंचन है।
🎯 Exam Tip: रोहियो पत्ती का बैंगनी वर्णक जीवद्रव्य के सिकुड़ने और फैलने को स्पष्ट रूप से देखने में मदद करता है, जिससे यह प्रयोग बहुत प्रभावी होता है।
Question 8. विसरण तथा परासरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: विसरण और परासरण के बीच अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है।
In simple words: विसरण में चीजें कहीं भी फैल सकती हैं, जबकि परासरण में पानी एक खास दीवार से होकर गुजरता है।
🎯 Exam Tip: विसरण एक सामान्य भौतिक प्रक्रिया है, जबकि परासरण एक विशिष्ट प्रकार का विसरण है जो जैविक झिल्लियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
| विसरण | परासरण | |
|---|---|---|
| 1. | इस क्रिया के लिए अर्द्धपारगम्य झिल्ली की आवश्यकता नहीं होती है। | इस क्रिया के लिए अर्द्धपारगम्य झिल्ली की आवश्यकता होती है। |
| 2. | विसरण तीनों भौतिक अवस्थाओं ठोस, द्रव तथा गैस में संभव है। | परासरण केवल द्रव माध्यम से संभव है। |
| 3. | इसमें विलेय विभव उत्पन्न नहीं होता है। | इसमें विलेय विभव उत्पन्न होता है। |
| 4. | विसरण में पदार्थ के अणु अधिक सान्द्रता के क्षेत्र से निम्न सान्द्रता के क्षेत्र की ओर गति करते हैं। | यह जल या विलायक अणुओं की गति है जिसका निर्धारण रासायनिक विभव गुणांक के आधार पर होता है। |
| 5. | इसमें ऊर्जा का व्यय नहीं होता है तथा विसरित कणों में उपस्थित स्वतन्त्र ऊर्जा विसरण के लिए उत्तरदायी है। | इसमें सामान्यतः ऊर्जा का व्यय होता है तथा विलायक अणुओं में उपस्थित ऊर्जा की मात्रा में होने वाला ह्रास परासरण क्रिया के लिए उत्तरदायी होता है। |
अन्तः शोषण तथा जीवद्रव्य कुंचन में अन्तर
| अन्तः शोषण | जीवद्रव्य कुंचन | |
|---|---|---|
| 1. | यह प्रक्रिया किसी ठोस पदार्थ के द्वारा जल के अधिशोषण के कारण उत्पन्न होती है। | यह प्रक्रिया किसी पादप कोशिका को अतिपरासरी विलयन में रखने से उत्पन्न होती है। |
| 2. | इस प्रक्रिया में जलयोजन ऊष्मा मुक्त होती है। | इसमें जलयोजन ऊष्मा मुक्त नहीं होती है। |
| 3. | इस क्रिया के परिणामस्वरूप आयतन व आकार में वृद्धि होती है। | इसमें आयतन में कमी आती है। |
| 4. | इसमें जल की गति बाहर से अन्दर की ओर होती है। | इसमें जल की गति अन्दर से बाहर की ओर होती है। |
Question 10. जल विभव तथा विसरण दाब न्यूनता में अन्तर लिखिए।
Answer: जल विभव और विसरण दाब न्यूनता (DPD) के बीच अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है।
In simple words: जल विभव बताता है कि पानी में कितनी ऊर्जा है और DPD बताता है कि पानी को कितना खींचा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: दोनों ही अवधारणाएँ कोशिका के जल संतुलन और जल अवशोषण क्षमता को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके मान और दिशा विपरीत होती हैं।
| जल विभव | विसरण दाब न्यूनता | |
|---|---|---|
| 1. | शुद्ध जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा तथा किसी विलयन में जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा के अन्तर को जल विभव (Water potential) कहते हैं। | किसी विलयन तथा इसके शुद्ध विलायक के विसरण दाब के अन्तर को विसरण दाब न्यूनता (Diffusion pressure deficit, DPD) कहते हैं। |
| 2. | इसमें जल की गति अधिक जल विभव से कम जल विभव की ओर होती है। | इसमें जल की गति कम विसरण दाब न्यूनता से अधिक विसरण दाब न्यूनता की ओर होती है। |
| 3. | इसका मान ऋणात्मक होता है। | इसका मान धनात्मक होता है। |
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