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Detailed Chapter 4 पादप जनन की विशिष्ट विधियाँ RBSE Solutions for Class 12 Biology
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Class 12 Biology Chapter 4 पादप जनन की विशिष्ट विधियाँ RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 12 Biology Chapter 4 पादप जनन की विशिष्ट विधियाँ
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. बिना निषेचन के नव पादपों के विकास को कहते हैं -
(अ) अनिषेचन
(ब) अनिषेकजनन
(स) असंगजनन
(द) सूक्ष्मप्रवर्धन
Answer: (स) असंगजनन
In simple words: जब बिना निषेचन के ही नया पौधा बनता है, तो इस प्रक्रिया को असंगजनन कहते हैं। यह एक प्रकार का अलैंगिक जनन है।
🎯 Exam Tip: असंगजनन की परिभाषा और इसके उदाहरणों को ध्यान से याद रखें, क्योंकि यह प्रजनन का एक महत्वपूर्ण तरीका है जिसमें यौन प्रजनन के चरण शामिल नहीं होते हैं।
Question 3. एक बीजाण्ड में एक से अधिक भ्रूणकोष निर्माण का उदाहरण है -
(अ) आर्जिमोन
(ब) एरिस्टोलोकिया
(स) कैजुएराइना
(द) कैलोट्रॉपिस
Answer: (स) कैजुएराइना
In simple words: जब एक ही बीज के अंदर एक से ज़्यादा भ्रूणकोष बन जाते हैं, तो कैजुएराइना इसका एक अच्छा उदाहरण है। यह पौधों में एक खास तरह की प्रजनन प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता और एक से अधिक भ्रूणकोष निर्माण के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें और प्रत्येक के लिए विशिष्ट उदाहरण याद रखें।
Question 4. बहुभ्रूणता सामान्यतः पायी जाती है -
(अ) एकबीजपत्रियों में
(ब) द्विबीजपत्रियों में
(स) आवृतबीजियों में
(द) अनावृतबीजियों में
Answer: (द) अनावृतबीजियों में
In simple words: अनावृतबीजी पौधों में, एक बीज के अंदर एक से ज़्यादा भ्रूण (बच्चे पौधे) होना आम बात है। यह पौधों में एक खास विशेषता है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता की व्यापकता को पौधों के विभिन्न समूहों-एकबीजपत्री, द्विबीजपत्री, आवृतबीजी और अनावृतबीजी-के संदर्भ में याद रखें ताकि यह स्पष्ट रहे कि यह किस समूह में अधिक सामान्य है।
Question 5. परिवर्धनशील भ्रूण (प्राकभ्रूण) या युग्मनज के विभाजन से उत्पन्न बहुभ्रूणता को कहते हैं -
(अ) विदलन बहुभ्रूणता
(ब) सामान्य बहुभ्रूणता
(स) असामान्य बहुभ्रूणता
(द) अनिषेक बहुभ्रूणता
Answer: (अ) विदलन बहुभ्रूणता
In simple words: जब एक ही भ्रूण या युग्मनज बार-बार बँटकर कई भ्रूण बनाता है, तो इस प्रक्रिया को विदलन बहुभ्रूणता कहते हैं। यह एक बीज से एक से ज़्यादा पौधे बनने का तरीका है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता के विभिन्न प्रकारों-जैसे विदलन, सरल और मिश्रित-को उनकी परिभाषाओं और उत्पन्न होने के तरीकों के साथ समझें, क्योंकि ये अक्सर भ्रमित कर सकते हैं।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. बहुभ्रूणता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बहुभ्रूणता का अर्थ है कि आमतौर पर एक बीज में केवल एक ही भ्रूण (नन्हा पौधा) पाया जाता है, लेकिन कभी-कभी एक ही बीज के अंदर एक से ज़्यादा भ्रूण विकसित हो जाते हैं। एक ही बीज में कई भ्रूणों का पाया जाना बहुभ्रूणता कहलाता है। यह पौधों में एक विशेष जैविक घटना है।
In simple words: एक बीज में एक से अधिक भ्रूणों के विकास को बहुभ्रूणता कहते हैं। यह आमतौर पर सिर्फ एक भ्रूण के बजाय कई भ्रूणों के बनने की प्रक्रिया है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता की परिभाषा को सटीक रूप से याद करें और यह भी समझें कि यह कैसे सामान्य एक भ्रूण वाली स्थिति से भिन्न है।
Question 3. पादपों में जनन की विशिष्ट विधियों के नाम लिखिए।
Answer: पादपों में जनन की कुछ खास विधियाँ इस प्रकार हैं:
• असंगजनन (Apomixis): इसमें बिना निषेचन के बीज या भ्रूण बनता है।
• अनिषेकबीजता (Agamospermy): यह बिना निषेचन के बीज बनने की प्रक्रिया है।
• सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation): यह प्रयोगशाला में छोटे पौधों के टुकड़ों से बड़ी संख्या में पौधे बनाने का तरीका है।
• कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation): यह पौधों के अंगों (जैसे तना, पत्ती, जड़) से नए पौधे उगाने की प्रक्रिया है।
In simple words: पौधों में प्रजनन के विशेष तरीके हैं असंगजनन, अनिषेकबीजता, सूक्ष्म प्रवर्धन और कायिक प्रवर्धन। ये सामान्य प्रजनन से अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: पादपों में जनन की प्रत्येक विशिष्ट विधि का नाम और उसकी एक छोटी सी परिभाषा याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर एक-दूसरे से भिन्न होती हैं।
Question 4. असंगजनन के कोई दो महत्व बताइए।
Answer: असंगजनन के दो मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
1. असंगजनन से उत्पन्न होने वाले नए पौधे बिल्कुल अपने मातृ पौधों (जनक पौधों) के समान होते हैं। इससे हम उन पौधों को बना सकते हैं जिनके गुण हमें पसंद हैं।
2. इस तरीके से, पौधों के अच्छे गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह खेती के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि वांछित गुणों वाली फसलें बनाई जा सकती हैं।
In simple words: असंगजनन से ऐसे पौधे मिलते हैं जो माता-पिता के जैसे होते हैं, और यह अच्छे पौधों के गुणों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: असंगजनन के महत्व को समझते समय, क्लोन बनाने और वांछित आनुवंशिक गुणों को बनाए रखने पर जोर दें, क्योंकि ये मुख्य फायदे हैं।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. अनावर्ती व पुनरावर्ती असंगजनन को स्पष्ट कीजिए।
Answer:
**अनावर्ती असंगजनन (Non-recurrent apomixis):** इस प्रकार के असंगजनन में, गुरुबीजाणु मातृ कोशिका में सामान्य अर्द्धसूत्री विभाजन (मायोसिस) होता है। इससे एक अगुणित (सिंगल सेट क्रोमोसोम) भ्रूणकोष बनता है। यदि इस अगुणित भ्रूणकोष में मौजूद अण्ड कोशिका बिना निषेचन के एक अगुणित भ्रूण बना लेती है, तो इसे अनावर्ती असंगजनन कहते हैं। यह पौधों में प्रजनन का एक अनोखा तरीका है।
**पुनरावर्ती असंगजनन (Recurrent apomixis):** इसमें, मातृ पादप (जनक पौधे) के समान गुणसूत्रों की संख्या वाला मादा युग्मकोद्भिद् (फीमेल गेमेटोफाइट) बनता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यहाँ अर्द्धसूत्री विभाजन पूरा नहीं हो पाता। इस प्रकार के असंगजनन में, भ्रूण का विकास सीधे द्विगुणित (डबल सेट क्रोमोसोम) कोशिकाओं से होता है, जिससे मातृ पौधे के समान आनुवंशिक रूप से समान संतति उत्पन्न होती है।
In simple words: अनावर्ती असंगजनन में बिना निषेचन के अगुणित भ्रूण बनता है, जबकि पुनरावर्ती असंगजनन में मातृ पौधे के समान गुणसूत्र संख्या वाले भ्रूण बनते हैं क्योंकि अर्द्धसूत्री विभाजन पूरा नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: अनावर्ती और पुनरावर्ती असंगजनन के बीच के मुख्य अंतर को याद रखें, खासकर गुणसूत्र संख्या (अगुणित/द्विगुणित) और अर्द्धसूत्री विभाजन की प्रक्रिया के संदर्भ में।
Question 2. जनन अपबीजाणुता तथा कायिक अपबीजाणुता में विभेद कीजिए।
Answer: जनन अपबीजाणुता और कायिक अपबीजाणुता में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
| जनन अपबीजाणुता (Generative apospory) | कायिक अपबीजाणुता (Somatic apospory) |
|---|---|
| इस प्रकार के असंगजनन में भ्रूणकोष का विकास प्रपसूतक (Archesporium) की द्विगुणित कोशिकाओं से होता है। | इस प्रकार के असंगजनन में बीजांडकाय अथवा अध्यावरण की द्विगुणित कोशिकाओं से भ्रूणकोष बनता है। |
| भ्रूणकोष की द्विगुणित कोशिकाओं से द्विगुणित भ्रूण का निर्माण होता है। | इस द्विगुणित भ्रूणकोष की कोशिकाओं से द्विगुणित भ्रूण का विकास होता है। |
In simple words: जनन अपबीजाणुता में भ्रूणकोष प्रपसूतक कोशिकाओं से बनता है, जबकि कायिक अपबीजाणुता में यह बीजांडकाय या अध्यावरण की कोशिकाओं से बनता है। दोनों में भ्रूण का विकास होता है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रकार की अपबीजाणुता में भ्रूणकोष और भ्रूण की उत्पत्ति की कोशिकाओं को विशेष रूप से याद रखें ताकि उनके बीच का अंतर स्पष्ट रहे।
Question 3. बहुभ्रूणता के कारण लिखिए।
Answer: बहुभ्रूणता के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. **युग्मनज अथवा प्राक्भ्रूण में विदलन (Cleavage in zygote or Proembryo):** इस तरह की बहुभ्रूणता तब होती है जब एक ही युग्मनज या शुरुआती भ्रूण में विभाजन होता है। यह विभाजन बीज में एक से अधिक भ्रूणों को जन्म देता है।
2. **अण्डकोशिका के अतिरिक्त भ्रूणकोष की अन्य कोशिकाओं से भ्रूण का निर्माण (Development of embryo from cells of embryo sac other than egg cell):** इस प्रकार की बहुभ्रूणता में, अण्ड कोशिका के अलावा, भ्रूणकोष की सहायक कोशिकाओं से भ्रूण बन जाते हैं। ये कोशिकाएँ निषेचित या अनिषेचित हो सकती हैं।
In simple words: एक बीज में कई भ्रूण बनने के दो मुख्य कारण हैं: एक तो शुरुआती भ्रूण का बँटना, और दूसरा यह कि अण्ड कोशिका के अलावा भ्रूणकोष की दूसरी कोशिकाएँ भी भ्रूण बना लें।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता के कारणों को उनके नाम (जैसे विदलन) और उसमें शामिल कोशिकाओं (युग्मनज, प्राक्भ्रूण, सहायक कोशिकाएँ) के साथ याद रखें, यह आपको प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।
Question 4. विदलन बहुभ्रूणता को समझाइए।
Answer: विदलन बहुभ्रूणता एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ एक ही युग्मनज (जायगोट) या शुरुआती भ्रूण (प्रोएम्ब्रियो) में विभाजन होता है, जिससे एक बीज के अंदर एक से अधिक भ्रूण विकसित हो जाते हैं। यह बहुभ्रूणता का एक सामान्य प्रकार है।
1. जब शुरुआती भ्रूण की कोशिकाएँ बढ़ती हैं, तो वे कई भ्रूणों का निर्माण करती हैं।
2. शुरुआती भ्रूण से छोटी कलिकाएँ या उभार निकलते हैं, जिनसे नए भ्रूण बनते हैं।
3. कभी-कभी, तंतुमय भ्रूण में शुरुआती भ्रूण शाखित हो जाता है, और उसकी हर शाखा से एक नया भ्रूण बन जाता है। इससे एक ही बीज में कई पूर्ण पौधे बन सकते हैं।
In simple words: विदलन बहुभ्रूणता वह प्रक्रिया है जहाँ एक शुरुआती भ्रूण या युग्मनज बँटकर कई भ्रूण बनाता है। यह भ्रूणों के बढ़ने, कलिकाएँ निकलने या शाखित होने से हो सकता है।
🎯 Exam Tip: विदलन बहुभ्रूणता को परिभाषित करते समय, यह स्पष्ट करें कि यह एक एकल युग्मनज या भ्रूण से कई भ्रूणों का विकास है और इसके विभिन्न तरीकों को भी ध्यान में रखें।
Question 5. सूक्ष्म प्रवर्धन का महत्व बताइए।
Answer: सूक्ष्म प्रवर्धन (माइक्रोप्रोपैगेशन) के महत्व इस प्रकार हैं:
1. सूक्ष्म प्रवर्धन का उपयोग करके कम समय में और सीमित जगह में बड़ी संख्या में पौधों को उगाया जा सकता है। यह व्यावसायिक खेती के लिए बहुत उपयोगी है।
2. यह तकनीक बाहरी वातावरण के प्रभावों से मुक्त होती है। इसका मतलब है कि किसी भी मौसम में पौधे तैयार किए जा सकते हैं, जिससे साल भर उत्पादन संभव होता है।
3. इस विधि से रोग-मुक्त और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों को आसानी से उगाया जा सकता है। यह पौधों के रोगों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
4. इस विधि से जो पौधे मिलते हैं, वे अपने मातृ पौधों के समान गुणों वाले होते हैं। इससे वांछित गुणों वाली फसलें लगातार मिलती रहती हैं।
In simple words: सूक्ष्म प्रवर्धन से कम समय में बहुत सारे पौधे मिलते हैं, यह मौसम पर निर्भर नहीं करता, रोग-मुक्त पौधे देता है, और सभी पौधे जनक के समान होते हैं।
🎯 Exam Tip: सूक्ष्म प्रवर्धन के महत्व को याद करते समय, इसके मुख्य लाभों जैसे तेजी से उत्पादन, रोग-मुक्त पौधे, और आनुवंशिक एकरूपता पर ध्यान केंद्रित करें।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. असंगजनन पर एक सारगर्भित लेख लिखिए।
Answer: असंगजनन (Apomixis) पौधों में लैंगिक जनन का एक खास विकल्प है, जिसमें अलैंगिक तरीकों से नई संतति का विकास होता है। इस प्रक्रिया में युग्मकों का संलयन नहीं होता, यानी नर और मादा युग्मक आपस में नहीं मिलते, फिर भी नए पौधे बन जाते हैं। विंकलर (Winkler) ने 1908 में बताया कि असंगजनन प्रजनन की वह विधि है जिसमें अर्द्धसूत्री विभाजन (मायोसिस) और युग्मक संलयन (फर्टिलाइजेशन) नहीं होता। ऐसे पौधे 'एपोमिक्टिक' कहलाते हैं। भ्रूणविज्ञानियों ने कायिक प्रवर्धन और अनिषेकबीजता (एगमोस्पर्मि) को भी असंगजनन के तहत रखा है।
**असंगजनन के प्रकार:** असंगजनन मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
1. **बीजाणुभिद् असंगजनन (Sporophytic apomixis):** इसे अपस्थानिक भ्रूणता (एडवेंटिव एम्ब्रायोनी) भी कहते हैं। इस प्रकार के असंगजनन में भ्रूण बीजांडकाय (न्यूसेलस) या अध्यावरण की किसी भी द्विगुणित कोशिका से विकसित होता है। इस प्रक्रिया के दौरान न तो अर्द्धसूत्री विभाजन होता है और न ही निषेचन।
2. **युग्मकोद्भिद् असंगजनन (Gametophytic apomixis):** इस प्रकार के असंगजनन में भ्रूण का विकास अगुणित भ्रूणकोष (एम्ब्रियोसैक) की किसी कोशिका से होता है। यह दो प्रकार का होता है:
(i) **अनिषेकजनन (Parthenogenesis):** जब भ्रूण अनिषेचित अण्ड कोशिका (अनफर्टिलाइज्ड एग सेल) से बनता है, तो इस प्रक्रिया को अनिषेकजनन कहते हैं।
(ii) **अनावर्ती असंगजनन (Non-recurrent apomixis):** इस प्रकार के असंगजनन में गुरुबीजाणु मातृ कोशिका में अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा एक अगुणित भ्रूणकोष बनता है। यदि इसके अगुणित अण्ड से बिना निषेचन के अगुणित भ्रूण का निर्माण होता है, तो इसे अगुणित असंगजनन कहते हैं।
(iii) **पुनरावर्ती असंगजनन (Recurrent apomixis):** इसे युग्मकोद्भिद् असंगजनन भी कहते हैं। अर्द्धसूत्री विभाजन के पूरा न होने के कारण इसमें मादा युग्मकोद्भिद् में गुणसूत्रों की संख्या मातृ पादप के समान ही द्विगुणित होती है।
(iv) **अपस्थानिक भ्रूणता (Adventive embryony):** यह भ्रूण जनन की वह प्रक्रिया है जिसमें भ्रूण का निर्माण भ्रूणकोष के बाहर स्थित बीजांड की किसी भी द्विगुणित कोशिका जैसे-बीजांडकाय या अध्यावरण की कोशिका से होता है।
(v) **कायिक असंगजनन (Somatic apomixis):** इस प्रकार के असंगजनन में पौधों में पुष्पों के स्थान पर पत्र प्रकलिकाएँ (बुल्बिल) और कायिक प्रवर्ध (प्रोपैगुल्स) का निर्माण होता है। ये पौधे पर रहते हुए ही अंकुरित हो जाते हैं।
In simple words: असंगजनन पौधों में बिना निषेचन के नया पौधा बनाने का एक तरीका है। इसमें दो मुख्य प्रकार हैं: बीजाणुभिद् असंगजनन (जहाँ भ्रूण बीजांडकाय जैसी कोशिकाओं से बनता है) और युग्मकोद्भिद् असंगजनन (जहाँ भ्रूण अगुणित भ्रूणकोष की कोशिकाओं से बनता है, जिसमें अनिषेकजनन भी शामिल है)।
🎯 Exam Tip: असंगजनन पर विस्तृत लेख लिखते समय, इसकी परिभाषा, प्रकारों (बीजाणुभिद् और युग्मकोद्भिद्) और प्रत्येक प्रकार के उदाहरणों को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. बहुभ्रूणता पर विस्तृत निबन्ध लिखिए।
Answer: बहुभ्रूणता (Polyembryony) वह स्थिति है जहाँ एक बीजांड (ओव्यूल) या बीज में एक से अधिक भ्रूण (एम्ब्रियो) विकसित हो जाते हैं। सामान्यतः, अण्ड कोशिका के निषेचन के बाद एक बीजांड में केवल एक ही भ्रूण बनता है। लेकिन, कई कारणों से एक ही बीजांड या बीज में एक से अधिक भ्रूण बन सकते हैं। यह प्रक्रिया बहुभ्रूणता कहलाती है। अनेक अनावृतबीजी पौधों (जिम्नोस्पर्म्स) में बहुभ्रूणता एक सामान्य घटना है, जबकि आवृतबीजी पौधों में यह अपेक्षाकृत कम पाई जाती है। पौधों के साथ-साथ यह कुछ जंतुओं में भी देखी जाती है।
सबसे पहले, एण्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने 1719 में संतरे के बीजों में बहुभ्रूणता का पता लगाया था। संतरे और नींबू कुल के अन्य पौधों में अतिरिक्त भ्रूण बीजांडकाय (न्यूसेलस) में अबीजाणुता द्वारा बनते हैं। लेकिन, कुछ पौधों में यह युग्मनज (जायगोट) के विदलन (क्लीवेज), भ्रूण के बढ़ते समय अतिरिक्त वृद्धि (आउट ग्रोथ) बनने, या भ्रूण के विकास के दौरान शाखित होने से भी बहुभ्रूणता होती है। उदाहरण के लिए, यूलोफिया, सिम्बोडियम और एरिस्टोलोकिया में प्रतिध्रुवीय (एंटीपोडल) कोशिकाओं से भी भ्रूण बनते देखे गए हैं।
अतिरिक्त भ्रूण बनने की विधि और जिस कोशिका से वे विकसित होते हैं, उसके आधार पर बहुभ्रूणता को निम्नलिखित प्रकारों में बांटा गया है:
1. **सरल बहुभ्रूणता (Simple polyembryony):** जब बीजांड में किन्हीं कारणों से एक से अधिक भ्रूणकोष होते हैं और निषेचन के बाद प्रत्येक की अण्ड कोशिका से एक भ्रूण बन जाता है, तो इसे सरल बहुभ्रूणता कहते हैं। यह ब्रेसिका (Brassica) की कुछ जातियों में देखी जाती है।
2. **मिश्रित बहुभ्रूणता (Mixed polyembryony):** जब अण्ड कोशिका के अलावा, उसी भ्रूणकोष की अन्य कोशिकाएँ भी निषेचित होकर भ्रूण बना लेती हैं, तो इसे मिश्रित बहुभ्रूणता कहते हैं। यह एलियम (Allium) की जातियों में मिलती है। श्नार्फ (Schnarf) ने इसे वास्तविक बहुभ्रूणता माना है।
In simple words: बहुभ्रूणता का मतलब है एक बीज में एक से ज़्यादा भ्रूण का होना। यह कई वजहों से हो सकता है, जैसे शुरुआती भ्रूण का बँटना या अण्ड कोशिका के अलावा अन्य कोशिकाओं से भ्रूण बनना। यह सरल या मिश्रित प्रकार की हो सकती है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता पर निबंध लिखते समय, इसकी खोज, होने के कारण, और विभिन्न प्रकारों (जैसे सरल और मिश्रित बहुभ्रूणता) को उदाहरणों सहित स्पष्ट करना चाहिए।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. हेन्स विन्कलर ने असंगजनन को किस प्रकार परिभाषित किया हैं?
Answer: हेन्स विन्कलर के अनुसार, "सामान्य लैंगिक जनन का ऐसी किसी विधि द्वारा प्रतिस्थापन जिसमें अर्द्धसूत्री विभाजन व निषेचन न हो असंगजनन कहलाता है।" इसका अर्थ है कि बिना लैंगिक जनन के चरणों के ही नया पौधा बन जाता है।
In simple words: हेन्स विन्कलर ने कहा कि असंगजनन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें यौन प्रजनन (अर्द्धसूत्री विभाजन और निषेचन) नहीं होता, लेकिन फिर भी नया पौधा बन जाता है।
🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को हमेशा उनके मूल लेखक के नाम के साथ सटीक रूप से याद करें, खासकर जब पूछा जाए कि किसी विशिष्ट व्यक्ति ने क्या परिभाषित किया है।
Question 2. असंगजनन के दो मुख्य प्रकारों का नाम लिखिए।
Answer: असंगजनन के दो मुख्य प्रकार हैं:
1. बीजाणुभिद् असंगजनन (Sporophytic apomixis)
2. युग्मकोद्भिद् असंगजनन (Gametophytic apomixis)
In simple words: असंगजनन के दो मुख्य प्रकार बीजाणुभिद् और युग्मकोद्भिद् असंगजनन हैं।
🎯 Exam Tip: असंगजनन के मुख्य प्रकारों के नाम याद रखें और यह भी समझें कि वे किस प्रकार भिन्न होते हैं।
Question 3. बीजाणुभिदी तथा युग्मकोभिदी असंगजनन की गुणिता बताइए।
Answer: बीजाणुभिद् असंगजनन में कोशिकाओं की गुणिता द्विगुणित (2n) होती है, क्योंकि यह सीधे द्विगुणित ऊतकों से विकसित होता है। वहीं, युग्मकोद्भिद् असंगजनन में कोशिकाओं की गुणिता अगुणित (n) होती है, क्योंकि यह अगुणित भ्रूणकोष की कोशिकाओं से विकसित होता है।
In simple words: बीजाणुभिद् असंगजनन द्विगुणित (2n) होता है, जबकि युग्मकोद्भिद् असंगजनन अगुणित (n) होता है।
🎯 Exam Tip: असंगजनन के विभिन्न प्रकारों में गुणसूत्रों की संख्या (प्लाइडी स्तर-n या 2n) को स्पष्ट रूप से याद रखें, यह समझना महत्वपूर्ण है कि वे कैसे विकसित होते हैं।
Question 4. अनिषेक जनन किसे कहते हैं ?
Answer: जब भ्रूण का निर्माण बिना निषेचन के अण्ड कोशिका (मादा युग्मक) से होता है, तो इस प्रक्रिया को अनिषेक जनन (Parthenogenesis) कहते हैं। इसमें नर युग्मक की आवश्यकता नहीं होती है।
In simple words: अनिषेक जनन तब होता है जब भ्रूण बिना निषेचन के सीधे अण्ड कोशिका से बनता है।
🎯 Exam Tip: अनिषेक जनन की परिभाषा को सही ढंग से याद करें और इसे असंगजनन के एक विशिष्ट उप-प्रकार के रूप में पहचानें।
Question 5. अपयुग्मन किसे कहते हैं?
Answer: अपयुग्मन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें भ्रूण का विकास अण्ड कोशिका के अलावा भ्रूणकोष की किसी अन्य अगुणित कोशिका (जैसे-सहायक कोशिका या प्रतिध्रुवीय कोशिका) से बिना निषेचन के होता है। इस प्रक्रिया में भी लैंगिक प्रजनन के चरण शामिल नहीं होते हैं।
In simple words: अपयुग्मन वह है जब भ्रूण, अण्ड कोशिका के बजाय भ्रूणकोष की किसी और अगुणित कोशिका से बिना निषेचन के बनता है।
🎯 Exam Tip: अपयुग्मन को अनिषेक जनन से अलग करके समझें, विशेषकर भ्रूण के विकास में शामिल कोशिका के प्रकार के आधार पर।
Question 7. प्याज और अगेव में किस प्रकार का असंगजनन पाया जाता हैं?
Answer: प्याज और अगेव में कायिक असंगजनन (Somatic apomixis) पाया जाता है। इस प्रकार में, पुष्पों के बजाय कायिक भागों से नए पौधे विकसित होते हैं।
In simple words: प्याज और अगेव में कायिक असंगजनन होता है, जहाँ पौधे के सामान्य अंग से नया पौधा बनता है, फूल से नहीं।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट पौधों में पाए जाने वाले असंगजनन के प्रकारों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर उदाहरण-आधारित प्रश्नों में पूछा जाता है।
Question 8. अनिषेकबीजता किसे कहते हैं?
Answer: जब बीज का निर्माण बीजांड की किसी भी द्विगुणित (2n) कोशिका से, या फिर किसी असामान्य द्विगुणित भ्रूणपोष की कोशिका से बिना निषेचन के होता है, तो इसे अनिषेकबीजता कहते हैं। इस प्रक्रिया में बीज के विकास के लिए परागण और निषेचन की आवश्यकता नहीं होती।
In simple words: अनिषेकबीजता वह है जब बीज बिना निषेचन के बीजांड या भ्रूणपोष की कोशिकाओं से बनता है।
🎯 Exam Tip: अनिषेकबीजता की परिभाषा को स्पष्ट रूप से याद करें और इसे अनिषेक जनन से भिन्न करें-अनिषेकबीजता बीज के निर्माण से संबंधित है जबकि अनिषेक जनन भ्रूण के निर्माण से।
Question 9. ग्लेडियोलस एवं गुलदाउदी में व्यापारिक स्तर पर प्रजनन की आधुनिक विधि बताइए।
Answer: ग्लेडियोलस और गुलदाउदी जैसे पौधों में व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रजनन के लिए सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation) की आधुनिक विधि का उपयोग किया जाता है। यह विधि कम समय में बड़ी संख्या में आनुवंशिक रूप से समान पौधे पैदा करती है।
In simple words: ग्लेडियोलस और गुलदाउदी जैसे फूलों को उगाने के लिए सूक्ष्म प्रवर्धन (माइक्रोप्रोपैगेशन) नाम की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: व्यावसायिक स्तर पर पौधों के उत्पादन के लिए सूक्ष्म प्रवर्धन की भूमिका को समझें और उन पौधों के उदाहरणों को याद रखें जिनमें इसका उपयोग किया जाता है।
Question 10. किसने सर्वप्रथम बहुभ्रूणता का पता लगाया था?
Answer: सर्वप्रथम बहुभ्रूणता का पता एन्टॉनी वॉन ल्यूवेनहॉक (Antony van Leeuwenhoek) ने 1719 में संतरे के बीजों में लगाया था। वे एक डच वैज्ञानिक थे जो अपनी सूक्ष्मदर्शी के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: एन्टॉनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने सबसे पहले पता लगाया था कि संतरे के बीजों में एक से ज़्यादा भ्रूण होते हैं।
🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण खोजों के साथ वैज्ञानिकों के नाम याद रखना परीक्षा में मदद करता है।
RBSE Solutions for Class 12 Biology Chapter 4 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जनन अपबीजाणुता तथा कायिक अपबीजाणुता को समझाइए।
Answer:
**जनन अपबीजाणुता (Generative apospory):** असंगजनन का एक प्रकार जिसमें भ्रूणकोष का विकास प्रपसूतक (Archesporium) की द्विगुणित कोशिकाओं से होता है। इन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी (2n) होती है। इसके बाद, इसी भ्रूणकोष की द्विगुणित कोशिकाओं से एक द्विगुणित भ्रूण का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में लैंगिक जनन के चरण शामिल नहीं होते हैं।
**कायिक अपबीजाणुता (Somatic apospory):** इस प्रकार की अपबीजाणुता में, भ्रूणकोष का विकास बीजांडकाय (Nucellus) या अध्यावरण (इंटेगुमेंट्स) की द्विगुणित कोशिकाओं से होता है। ये कोशिकाएँ सीधे ही भ्रूणकोष के रूप में कार्य करना शुरू कर देती हैं। बाद में, इन द्विगुणित भ्रूणकोष की कोशिकाओं से एक द्विगुणित भ्रूण का विकास होता है। इस प्रक्रिया में भी सामान्य लैंगिक प्रजनन के चरण नहीं होते हैं।
In simple words: जनन अपबीजाणुता में भ्रूणकोष प्रपसूतक से और कायिक अपबीजाणुता में यह बीजांडकाय या अध्यावरण से बनता है। दोनों में ही द्विगुणित भ्रूण बनते हैं।
🎯 Exam Tip: जनन और कायिक अपबीजाणुता के बीच के अंतर को समझने के लिए, भ्रूणकोष और भ्रूण की उत्पत्ति की कोशिकाओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 2. असंगजनन का महत्व लिखिए।
Answer: असंगजनन के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:
1. असंगजनन की प्रक्रिया में अर्द्धसूत्री विभाजन (मायोसिस) और गुणसूत्रों का पुनर्योजन (रीकॉम्बिनेशन) नहीं होता है। इसलिए, इस तरीके से बनने वाले सभी पौधे अपने मातृ पौधे के समान गुणों वाले होते हैं। इसका उपयोग क्लोन बनाने और वांछित आनुवंशिक गुणों को बनाए रखने के लिए किया जा सकता है।
2. असंगजनन में बीज अलैंगिक जनन द्वारा बनते हैं, जिससे मातृ पौधे के समान क्लोनीय संततियों का निर्माण होता है। यह खेती में शुद्ध वंशक्रम बनाए रखने में मददगार है।
3. फसली पौधों में, इस प्रकार के जनन से उनके लाभदायक लक्षणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि उच्च उपज या रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले गुणों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
4. इस प्रकार के जनन से संकर बीजों का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि असंगजनन संकर पौधों के विशिष्ट लक्षणों के नुकसान को रोकता है। यह संकर ओज (हाइब्रिड विगर) को बनाए रखने में सहायक है।
In simple words: असंगजनन से माता-पिता जैसे पौधे बनते हैं, अच्छे गुणों को बचाए रखता है, और संकर बीज आसानी से पैदा कर सकता है।
🎯 Exam Tip: असंगजनन के महत्व को सूचीबद्ध करते समय, आनुवंशिक एकरूपता, क्लोन उत्पादन, और संकर ओज के संरक्षण जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 3. आवृतबीजी पादपों में बहुभ्रूणता के कारण बताइए।
Answer: आवृतबीजी पादपों में बहुभ्रूणता के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. **प्राक्भ्रूण का विदलन होना:** जब शुरुआती भ्रूण (प्रोएम्ब्रियो) विभाजित होकर एक से अधिक भ्रूण बनाता है।
2. **भ्रूणकोष में अण्डकोशिका के साथ-साथ किसी अन्य कोशिका से भी भ्रूण का विकास होना:** अण्ड कोशिका के अलावा, भ्रूणकोष की सहायक कोशिकाएँ या प्रतिध्रुवीय कोशिकाएँ भी भ्रूण बना सकती हैं।
3. **एक ही बीजांड में एक से अधिक भ्रूणकोषों का विकास होना:** कभी-कभी एक बीजांड के अंदर एक से ज़्यादा भ्रूणकोष विकसित हो जाते हैं, और प्रत्येक से एक भ्रूण बन सकता है।
4. **बीजाणु की बीजाणुभिद् कोशिकाओं को सक्रिय होना:** बीजांडकाय (न्यूसेलस) या अध्यावरण की द्विगुणित कोशिकाएँ सीधे भ्रूण के रूप में विकसित होना शुरू कर देती हैं।
In simple words: आवृतबीजी पौधों में कई भ्रूण बनने के कारणों में शुरुआती भ्रूण का बँटना, अण्ड कोशिका के अलावा अन्य कोशिकाओं से भ्रूण बनना, एक ही बीज में कई भ्रूणकोष होना, और बीजांड की विशेष कोशिकाओं का सक्रिय होकर भ्रूण बनाना शामिल है।
🎯 Exam Tip: आवृतबीजी पौधों में बहुभ्रूणता के कारणों को उनके नाम और संबंधित जैविक प्रक्रियाओं के साथ स्पष्ट रूप से याद करें।
Question 4. बहुभ्रूणता की सार्थकता समझाइए।
Answer: बहुभ्रूणता (Polyembryony) का उद्यान विज्ञान, कोशिका विज्ञान, आनुवंशिकी और पादप प्रजनन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपयोग है:
1. बीजांडकाय (Nucellus) से विकसित होने वाले अपस्थानिक भ्रूण अपने मातृ पादप (जनक पौधे) के समान होते हैं। इससे वांछित गुणों वाले पौधों के क्लोन बनाने में मदद मिलती है।
2. बीजांडकाय से विकसित भ्रूणों से प्राप्त पौधे ओज (Vigour) से भरपूर होते हैं। इसका मतलब है कि ये पौधे बहुत मजबूत और स्वस्थ होते हैं, जो कृषि उत्पादन के लिए फायदेमंद है।
3. बहुभ्रूणता का उपयोग संकर बीजों (हाइब्रिड सीड्स) के उत्पादन में भी किया जाता है, जहाँ यह संकर गुणों को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखने में मदद करती है।
In simple words: बहुभ्रूणता पौधों के क्लोन बनाने, मजबूत और स्वस्थ पौधे उगाने, और संकर बीजों के अच्छे गुणों को बनाए रखने में बहुत उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: बहुभ्रूणता की सार्थकता को समझते समय, इसके कृषि और आनुवंशिकी में व्यावहारिक अनुप्रयोगों, जैसे क्लोन उत्पादन और ओजपूर्ण पौधे, पर ध्यान दें।
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