Official RBSE Solutions for Class 11 Sanskrit: Chapter 09 विदुरनीतिसुधा
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Chapter-wise Solutions for Sanskrit: Chapter 09 विदुरनीतिसुधा
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RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. यः पक्कं फलं चिनोति सः किं प्राप्नोति ? (जो पका फल तोड़ता है वह क्या प्राप्त करता है?)
(अ) रसं बीजं च
(ब) वृक्षं
(स) काले
(द) रुग्णतां
Answer: (अ) रसं बीजं च
In simple words: जो व्यक्ति पके हुए फल तोड़ता है, उसे फल का रस और उसके बीज दोनों मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: इस प्रकार के संस्कृत प्रश्नों में, प्रश्न के मूल अर्थ को समझकर सही विकल्प का चुनाव करें जो सीधे तौर पर प्रश्न का उत्तर देता हो।
Question 2. विद्या केन रक्ष्यते – (विद्या किसके द्वारा सुरक्षित की जाती है?)
Answer: विद्या अभ्यास से सुरक्षित रहती है। इसका अर्थ है कि ज्ञान को बनाए रखने के लिए लगातार अभ्यास करना जरूरी है।
In simple words: ज्ञान को बचाने के लिए हमें हमेशा उसका अभ्यास करते रहना चाहिए।
🎯 Exam Tip: विद्या की रक्षा से संबंधित प्रश्नों में 'अभ्यास' शब्द महत्वपूर्ण है। इसे याद रखें।
Question 3. शीलवान् जनः कं जयति ? (शीलवान् मनुष्य किसको जीतता है?)
(अ) मार्ग
(ब) सभा
(स) फलं
(द) सर्वं
Answer: (द) सर्वं
In simple words: एक अच्छे स्वभाव वाला व्यक्ति सब कुछ जीत लेता है, क्योंकि उसका व्यवहार सभी को पसंद आता है।
🎯 Exam Tip: 'शील' (अच्छा स्वभाव) के महत्व पर आधारित प्रश्नों में, व्यापक परिणाम जैसे 'सर्वं' (सब कुछ) अक्सर सही उत्तर होता है।
Question 4. उत्तमम् अन्नं के खादन्ति – (श्रेष्ठ अन्न कौन खाते हैं?)
(अ) धनिकाः
(ब) दरिद्राः
(स) व्यवसायिनः
(द) सुसम्पन्नाः
Answer: (ब) दरिद्राः
In simple words: उत्तम भोजन गरीब लोग खाते हैं, क्योंकि उन्हें मुश्किल से भोजन मिलता है और वे उसे बहुत महत्त्व देते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न जीवन के दर्शन पर आधारित है कि कौन वास्तव में भोजन का मूल्य समझता है। 'दरिद्राः' (गरीब) इसका सही उत्तर है।
Question 5. मनुष्यस्य इन्द्रियाणि कीदृशानि सन्ति-(मनुष्य की इन्द्रियाँ कैसी होती हैं?)
(अ) अश्वसदृशानि
(ब) रथसदृशानि
(स) भूमिसदृशानि
(द) पल्लवसदृशानि ।
Answer: (अ) अश्वसदृशानि
In simple words: मनुष्य की इंद्रियां घोड़ों जैसी होती हैं, जो हमेशा इधर-उधर भागती रहती हैं और जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के उपमा वाले प्रश्नों में, सबसे उपयुक्त और प्रचलित तुलना को पहचानें। 'अश्वसदृशानि' इंद्रियों की चंचलता को दर्शाता है।
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्नाः
Question 1. पुरुषेण कार्यारम्भे किं चिन्तनीयम्? (मनुष्य को कार्य के आरम्भ में क्या सोचना चाहिए?)
Answer: मनुष्य को कोई भी काम शुरू करने से पहले यह सोचना चाहिए कि 'यह काम करने से मुझे क्या लाभ होगा और इसे न करने से क्या हानि होगी।' काम का उद्देश्य, परिणाम और अपना भला हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
In simple words: कोई भी काम शुरू करने से पहले व्यक्ति को सोचना चाहिए कि इससे क्या फायदा होगा और क्या नुकसान।
🎯 Exam Tip: कार्य के आरंभ में चिंतन संबंधी प्रश्नों में, लाभ-हानि, उद्देश्य और परिणाम पर विचार करना महत्वपूर्ण है।
Question 3. जनस्य प्रमाणं कि वर्तते? (व्यक्ति का श्रेष्ठ क्या है ?)
Answer: व्यक्ति की श्रेष्ठता उसका चरित्र है। यह उसकी ईमानदारी और व्यवहार को दर्शाता है।
In simple words: आदमी का चरित्र ही उसकी पहचान है।
🎯 Exam Tip: मानवीय गुणों से संबंधित प्रश्नों में 'चरित्र' या 'वृत्त' जैसे शब्द उत्तर में महत्वपूर्ण होते हैं।
Question 4. कस्य करणेन कस्य चे त्यजनेन भेतव्यम्? (किसके करने से और किसके न करने से डरना चाहिए?)
Answer: व्यक्ति को उन कामों को करने से डरना चाहिए जो गलत हैं (अकार्य) और उन कामों को छोड़ने से डरना चाहिए जो सही हैं और करने योग्य हैं (कार्य)। गलत काम करने से बुरा परिणाम मिलता है, और सही काम न करने से अवसर छूट जाते हैं।
In simple words: हमें गलत काम करने और सही काम छोड़ने से डरना चाहिए।
🎯 Exam Tip: नैतिक कार्यों से संबंधित प्रश्नों में 'अकार्य' (गलत कार्य) और 'कार्य' (सही कार्य) के संदर्भ में उत्तर दें।
Question 5. कस्य नाशेन जीवनस्य सार्थकत्वं नश्यति? (किसके नाश से जीवन की सार्थकता नष्ट हो जाती है ?)
Answer: शील (चरित्र) के नष्ट होने से जीवन की सार्थकता नष्ट हो जाती है। चरित्रहीन व्यक्ति का जीवन अर्थहीन हो जाता है।
In simple words: चरित्र खराब होने से जीवन बेकार हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जीवन की सार्थकता से जुड़े प्रश्नों में 'शील' (चरित्र) का महत्व रेखांकित करें।
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्नाः
Question 1. पाठमिमनुसृत्य मानवः व्यवहार-गुणान् वर्णयत-(इस पाठ का अनुसरण करके मानव के व्यवहार के गुणों का वर्णन कीजिए)
Answer: मनुष्य को असफलता मिलने पर निराश नहीं होना चाहिए। उसे कोई भी काम हमेशा उसके उद्देश्य, परिणाम और अपने हित को जानकर ही करना चाहिए। संतुष्ट व्यक्ति को ही अच्छा फल मिलता है। काम हमेशा विवेकपूर्वक करना चाहिए। अच्छी बातें सभी जगह से सीखनी चाहिए। व्यक्ति को हमेशा विनम्र स्वभाव का होना चाहिए। सत्य से धर्म की, योग से विद्या की, सफाई से सुंदरता की, और चरित्र से कुल की रक्षा करनी चाहिए। व्यक्ति को हमेशा सच्चा और ईमानदार रहना चाहिए। जो काम करने योग्य है, वही करना चाहिए और जो नहीं है, उसे नहीं करना चाहिए। अच्छा स्वभाव (शील) बहुत जरूरी गुण है। व्यक्ति को हमेशा मेहनती होना चाहिए। अपनी इंद्रियों को वश में करके जीवन जीना चाहिए। खुद का अवलोकन करना चाहिए। जो व्यक्ति धर्म और धन के बारे में सोचकर साधनाएं इकट्ठा करके जीवन जीता है, वह सुख पाता है। क्रोध और शिकायतें नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को हमेशा क्षमाशील होना चाहिए। हमेशा मधुर और हितकारी बातें ही बोलनी चाहिए।
In simple words: व्यक्ति को असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। उसे विवेकपूर्वक काम करना चाहिए, अच्छा स्वभाव रखना चाहिए, मेहनती होना चाहिए, इंद्रियों को नियंत्रित करना चाहिए, और हमेशा सच व अच्छी बातें बोलनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में, पाठ से संबंधित सभी मुख्य गुणों और व्यवहारों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और उदाहरणों या स्पष्टीकरणों से समझाएं।
Question 3. अधोलिखितानां पद्यानां सप्रसंग व्याख्या कार्या – (निम्नलिखित पद्यों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए)
(i) वनस्पतेरपक्कानि ... विनश्यति ॥
Answer: इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ में श्लोक सं. 3 की सप्रसंग संस्कृत व्याख्या देखें।
In simple words: इस श्लोक की व्याख्या पाठ के तीसरे श्लोक में दी गई है।
🎯 Exam Tip: यदि किसी प्रश्न का उत्तर सीधे तौर पर उपलब्ध न हो और किसी अन्य पाठ्य भाग का संदर्भ दिया गया हो, तो उस संदर्भ का सटीक उल्लेख करें।
(ii) सत्येन ते................वृत्तेन रक्ष्यते ॥
Answer: श्लोक सं. 8 की सप्रसंग संस्कृत-व्याख्या देखें।
In simple words: यह श्लोक पाठ के आठवें श्लोक की व्याख्या के लिए है।
🎯 Exam Tip: व्याख्या-आधारित प्रश्नों में, यदि उत्तर पाठ के किसी विशिष्ट श्लोक में दिया गया है, तो उस श्लोक संख्या का उल्लेख करना पर्याप्त होता है।
(iii) आत्मनात्मानम्
Answer: श्लोक सं. 15 की सप्रसंग संस्कृत-व्याख्या देखें।
In simple words: इस श्लोक की व्याख्या पाठ के पंद्रहवें श्लोक में मिलेगी।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, केवल संदर्भित श्लोक संख्या का उल्लेख करें, यदि उसकी विस्तृत व्याख्या पाठ में पहले ही दी गई है।
Question 4. अधोलिखिते श्लोके छन्दो निर्देशं कृत्वां लक्षणेन संगमयत यदतप्तं प्रणमति ने तत् संतापयन्त्यपि। यच्च स्वयं नतं दारु न तत् संनमयन्त्यपि ॥
Answer: इसमें पथ्यावक्त्र छन्द है। पथ्यावक्त्र छन्द में चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में आठ वर्ण होते हैं। उन आठ वर्षों में पाँचवाँ वर्ण लघु, छठा वर्ण गुरु होता है। सातवाँ वर्ण दूसरे और चौथे चरण में लघु तथा पहले-दूसरे में गुरु होता है। इस श्लोक में दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में तो वर्णों की व्यवस्था लक्षण के अनुसार है, परंतु प्रथम चरण में नियम के विरुद्ध है।
In simple words: यह श्लोक पथ्यावक्त्र छन्द में लिखा गया है। इस छन्द में वर्णों की एक खास गिनती होती है, जो इस श्लोक में दिखती है।
🎯 Exam Tip: छन्द निर्देश वाले प्रश्नों में, छन्द का नाम बताएं और उसके मुख्य लक्षण संक्षेप में समझाएं।
व्याकरणात्मक-प्रश्नाः
Question 6. अधोलिखित पदेषु धातु-लकार-पुरुष-वचनानां निर्देशं कुरुत – (निम्नलिखित पदों में धातु-लकार-पुरुष और वचन बताइए-)
Answer:
| पदम् | धातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| 1. सिध्यति | सिध् | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| 2. कुर्वीत | कृ | विधिलिङ् | प्रथमः | एकवचनम् |
| 3. कुर्यात् | कृ | विधिलिङ् | प्रथमः | एकवचनम् |
| 4. प्रणमति | प्र + नम् | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
| 5. विमुच्यते | वि + मुच् (कर्म) | लट् | प्रथमः | एकवचनम् |
In simple words: दिए गए शब्दों में उनकी मूल धातु, काल (लकार), कर्ता का पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) को पहचानना चाहिए।
🎯 Exam Tip: धातु-लकार-पुरुष-वचन संबंधी प्रश्नों में, प्रत्येक पद के व्याकरणिक रूपों को सही ढंग से वर्गीकृत करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. अधोलिखितेषु पदेषु शब्द-विभक्ति-लिंग-वचनानां निर्देशं कुरुत – (निम्नलिखित पदों में शब्द, विभक्ति, लिंग और वचन बताइए-)
Answer:
| पदम् | शब्दः | विभक्तिः | लिङ्गम् | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| 1. धीरः | धीर | प्रथमा | पुंल्लिंग | एकवचनम् |
| 2. मनः | मनस् | प्रथमा, द्वितीया | नपुंसकलिंग | एकवचनम् |
| 3. कर्माणि | कर्मन् | प्रथमा, द्वितीया | नपुंसकलिंग | बहुवचनम् |
| 4. आद्येषु | आद्य | सप्तमी | पुंल्लिंग | बहुवचनम् |
| 5. आत्मनः | आत्मन् | प्रथमा, द्वितीया | पुंल्लिंग | बहुवचनम् |
In simple words: दिए गए संस्कृत शब्दों के मूल रूप, कारक (विभक्ति), लिंग और वचन की पहचान करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: शब्द रूप और विभक्ति से जुड़े प्रश्नों में, मूल शब्द, उसके कारक और वचन को सही ढंग से पहचानें। लिंग का ध्यान रखना भी जरूरी है।
Question 8. अधोलिखित पदेषु उपसर्ग, धातु, प्रत्ययानां निर्देशं कुरुत – (निम्नलिखित पदों में उपसर्ग, धातु, और प्रत्यय बताइये)
Answer:
| पदम् | उपसर्ग | धातु | प्रत्यय |
|---|---|---|---|
| 4. उत्थानम् | उद् | स्था | ल्युट् |
| 5. परिणतम् | परि | नम् | क्त |
In simple words: दिए गए शब्दों में उपसर्ग, मूल धातु और प्रत्यय को अलग-अलग पहचानना चाहिए।
🎯 Exam Tip: उपसर्ग, धातु और प्रत्यय के प्रश्नों में, शब्द के निर्माण को समझें और हर हिस्से को सही ढंग से अलग करें।
Question 9. अधोलिखितानां शब्दानां सन्धि-विच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम निर्देशं कुरुते (अधोलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम बताइये।)
Answer:
| पदम् | सन्धि-विच्छेद | सन्धि-नाम |
|---|---|---|
| 1. चैव | च + एव | वृद्धि सन्धि |
| 2. ततस्ततः | ततः + ततः | विसर्ग सन्धि |
| 3. सन्तापयन्त्यपि | सन्तापयन्ति + अपि | यण् सन्धि |
| 4. अन्तेस्वपि | अन्त्येषु + अपि | यण् सन्धिः |
| 5. रिपुरात्मनः | रिपुः + आत्मनः | विसर्ग सन्धि |
In simple words: शब्दों को उनके मूल भागों में तोड़कर सन्धि का प्रकार बताना चाहिए।
🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद में, शब्दों को तोड़ते समय सही नियमों का पालन करें और सन्धि का नाम पहचानें।
Question 10. अधोलिखित पदेषु समास विग्रहं कृत्वा समासस्य नाम निर्देशं कुरुत- (निम्नलिखित पदों में समास-विग्रह करके समास का नाम बताइये-)
Answer:
| पदम् | समास-विग्रह | समास नाम |
|---|---|---|
| 1. योगविहितम | योगेन विहितम् | तृतीया तत्पुरुषः |
| 2. शिलाहारी | शिलम् आहरति यः सः | बहुव्रीहि |
| 3. सुभाषिता | सुष्ठु भाषिता | कर्मधारयः |
| 4. धर्मार्थों | धर्मः च अर्थः च | द्वन्द्वः |
| 5. सम्भृतसम्भारः | सम्भूतं सम्भारं येन सः | बहुव्रीहि |
In simple words: दिए गए शब्दों का समास विग्रह करके समास का नाम पहचानना चाहिए।
🎯 Exam Tip: समास-विग्रह में, समस्त पद को उसके घटकों में अलग करें और फिर समास के प्रकार को सही ढंग से पहचानें।
Question 11. अधोलिखितानि वाक्यानि शुद्धानि कर्तव्यानि – (निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए-)
(i) कर्मः संचिन्त्य मनुष्यः उपाययुक्त भवेत्।
Answer: कर्म संचिन्त्य मनुष्यः उपाययुक्तवित्।
(ii) वृक्ष फलानि गृह्यते।
Answer: वृक्षात् फलानि गृह्यन्ते।
(iii) सर्वं कल्याणं शोभना वाणी प्रयोक्तव्यः।
Answer: सर्वैः कल्याणाय शोभना वाणी प्रयोक्तव्याः।
In simple words: वाक्यों में व्याकरण की अशुद्धियों को सही करके उन्हें शुद्ध रूप में लिखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: वाक्य शुद्धिकरण में, कारक, लिंग, वचन, पुरुष और लकार की त्रुटियों पर विशेष ध्यान दें।
Question 12. अधोलिखितानां पदानां प्रयोगं कृत्वा वाक्यनिर्माणं कुरुत – (निम्नलिखित पदों का प्रयोग करके वाक्य निर्माण कीजिए-)
Answer:
| पदम् | वाक्यम् |
|---|---|
| 1. परिणामम् | परिणामं ज्ञात्वा एवं कार्यं कुर्यात्। (परिणाम को जानकर कार्य करना चाहिए।) |
| 2. बुद्धिमान् | बुद्धिमान् मनुष्यः सर्वं समीक्ष्य एवं कार्यम् आरभते। (विद्वान मनुष्य सब सोच-समझकर कार्य आरम्भ करता है।) |
| 3. मार्जनेन | मार्जनेन सर्व शोभनं भवति। (सफाई से सब शोभा देता है।) |
| 4. प्रयोजनम् | श्रीमताम् अत्रागमनस्य किं प्रयोजनम् ? (श्रीमान जी का यहाँ आने का प्रयोजन) |
| 5. धनिषु | धनिषुबुभुक्षा न भवति। (धनवानों में भूख नहीं होती।) |
In simple words: दिए गए शब्दों का प्रयोग करके संस्कृत में सही वाक्य बनाने चाहिए।
🎯 Exam Tip: वाक्य-निर्माण करते समय, शब्द के अर्थ और उसके उचित व्याकरणिक प्रयोग पर ध्यान दें।
Question 13. अधोलिखिते श्लोके अलङ्कार निर्देशं कृत्वा लक्षणेन संगमयत्। (निम्नलिखित श्लोक में अलंकार बताकर लक्षण के साथ मिलाइए-) रथं शरीरं पुरुषस्य राजन्नात्मा नियतेन्द्रियाण्यस्य चाश्वाः। तैरप्रमत्तः कुशली सदश्वर्यान्त सुखं याति रथीव धीरः ॥
Answer: इस श्लोक में रूपक अलंकार है। इसका लक्षण है कि जहाँ उपमान (जिससे तुलना की जाए) और उपमेय (जिसकी तुलना की जाए) में अत्यंत समानता के कारण कोई अंतर न हो, वहाँ रूपक अलंकार होता है। इस श्लोक में रथ, नियन्ता (सारथी) और अश्व (घोड़े) पद क्रमशः शरीर, आत्मा और इंद्रियों के उपमान हैं। यहाँ उपमान और उपमेयों में कोई भेद नहीं है। इसलिए यहाँ रूपक अलंकार है।
In simple words: इस श्लोक में रूपक अलंकार है, जहाँ शरीर को रथ, आत्मा को सारथी और इंद्रियों को घोड़ों जैसा बताया गया है, बिना किसी अंतर के।
🎯 Exam Tip: अलंकार से संबंधित प्रश्नों में, अलंकार का नाम बताएं, उसका लक्षण (परिभाषा) दें और फिर श्लोक में उसकी सार्थकता (उदाहरण) समझाएं।
'विदुरनीतिः' ग्रन्थः महाभारतस्य चतुविशद् अध्यायाद् उद्धृतः। (विदुरनीति ग्रन्थ महाभारत के 24वें अध्याय से लिया गया है।)
Question 2. 'महाभारत' इति ग्रन्थः केन रचितः? (महाभारत ग्रन्थ किसने रचा?)
Answer: 'महाभारत' नामक ग्रंथ महर्षि वेदव्यास ने रचा है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथ है।
In simple words: महाभारत को महर्षि वेदव्यास ने लिखा था।
🎯 Exam Tip: ग्रंथों और उनके रचयिताओं से संबंधित प्रश्नों में, सही नाम और ग्रंथ का उल्लेख करें।
Question 3. विदुरनीतिः' इति ग्रन्थे केन कस्मै उपदिष्टम्? (विदुरनीति ग्रन्थ में किसके द्वारा किसके लिए उपदेश दिया गया है?)
Answer: विदुरनीति नामक ग्रंथ में विदुर द्वारा धृतराष्ट्र को नीति और धर्म का उपदेश दिया गया है। यह उपदेश धृतराष्ट्र के मन को शांत करने के लिए था।
In simple words: विदुरनीति में विदुर ने राजा धृतराष्ट्र को सही नियम और धर्म सिखाए थे।
🎯 Exam Tip: उपदेश और उपदेशक से जुड़े प्रश्नों में, उपदेशक (किसने) और उपदेश ग्रहण करने वाला (किसको) दोनों का नाम बताएं।
Question 4. महात्मा विदुरः कीदृशः आसीत्? (महात्मा विदुर कैसे थे ?)
Answer: महात्मा विदुर विद्वान, नीतिमान, सज्जन और भगवान के भक्त थे। वे धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति थे।
In simple words: महात्मा विदुर बहुत ज्ञानी, समझदार, अच्छे और भगवान को मानने वाले व्यक्ति थे।
🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण वाले प्रश्नों में, व्यक्ति के मुख्य गुणों का उल्लेख करें।
Question 5. मनः कुत्र न ग्लपयेत् ? (मन में ग्लानि कहाँ नहीं करनी चाहिए ?)
Answer: यदि उपायपूर्वक और विधिपूर्वक किया गया कर्म सफल न हो, तो बुद्धिमान व्यक्ति को अपने मन में ग्लानि नहीं करनी चाहिए। असफलता के बाद भी प्रयास करते रहना चाहिए।
In simple words: अगर किसी काम को सही तरीके से करने पर भी सफलता न मिले, तो मन में दुखी नहीं होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: असफलता या ग्लानि से संबंधित प्रश्नों में, 'उचित प्रयास' और 'मनोबल बनाए रखने' का महत्व बताएं।
Question 6. धीरः कीदृशं कर्म कुर्वीत् ? (धीर पुरुष कैसा कर्म करे ?)
Answer: धीर पुरुष को काम का परिणाम, उसके फायदे और अपनी उन्नति को देखकर ही कोई काम करना चाहिए। वह भविष्य के प्रभावों पर विचार करता है।
In simple words: समझदार आदमी को कोई भी काम करने से पहले उसके फायदे, नुकसान और अपने विकास के बारे में सोचना चाहिए।
🎯 Exam Tip: धीर पुरुष के कर्म से संबंधित प्रश्नों में, दूरदर्शिता और आत्म-उन्नति के कारकों पर बल दें।
Question 7. कः मनुष्य फलानि, रसं बीजं च न लभते? (कौन मनुष्य फल, रस और बीज प्राप्त नहीं करता ?)
Answer: जो मनुष्य पेड़ के कच्चे फलों को तोड़ लेता है, उसे फल, रस और बीज प्राप्त नहीं होते। धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा न करने से नुकसान होता है।
In simple words: जो आदमी पेड़ से कच्चे फल तोड़ लेता है, उसे फल, उसका रस या बीज कुछ भी नहीं मिलता।
🎯 Exam Tip: प्रकृति और परिणाम से संबंधित प्रश्नों में, धैर्य और उचित समय का महत्व स्पष्ट करें।
Question 9. किं सञ्चिन्त्य कर्म कुर्यात् ? (क्या सोचकर कर्म करना चाहिए?)
Answer: मनुष्य को कोई भी काम शुरू करने से पहले यह सोचना चाहिए कि 'यह काम करने से मुझे क्या लाभ होगा और इसे न करने से क्या हानि होगी।' काम का उद्देश्य, परिणाम और अपना भला हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
In simple words: कोई भी काम शुरू करने से पहले व्यक्ति को सोचना चाहिए कि इससे क्या फायदा होगा और क्या नुकसान।
🎯 Exam Tip: कार्य के आरंभ में चिंतन संबंधी प्रश्नों में, लाभ-हानि, उद्देश्य और परिणाम पर विचार करना महत्वपूर्ण है।
Question 10. धीरः किं सर्वतः चिन्वीत? (धीर को क्या सभी जगह से चुनना चाहिए?)
Answer: धीर पुरुष को सभी जगह से अच्छी तरह कही गई बातें (सुव्याहृतानि), अच्छे वचन (सूक्तानि) और अच्छे कर्म (सुकृतानि) चुनने चाहिए। वह हर जगह से ज्ञान और अच्छाई को ग्रहण करता है।
In simple words: समझदार आदमी को हर जगह से अच्छी बातें और अच्छे काम सीखने चाहिए।
🎯 Exam Tip: धीर पुरुष के गुणों से संबंधित प्रश्नों में, ज्ञान और अच्छाई को ग्रहण करने की उसकी प्रवृत्ति को उजागर करें।
Question 11. धीरः सूक्तानि सुकृतानि कथं चिन्वीत् ? (धीर पुरुष को सूक्ति और सत्कर्म कैसे चुन लेने चाहिए?)
Answer: जैसे शिला बीनने वाली (शिलाहारी) पत्थर चुनती है, वैसे ही धीर पुरुष को सूक्तियाँ (अच्छे वचन) और सत्कर्म (अच्छे काम) सभी जगह से चुनने चाहिए। उसे हर अच्छी चीज को ध्यान से चुनना चाहिए।
In simple words: समझदार आदमी को अच्छे वचन और अच्छे काम वैसे ही चुनने चाहिए, जैसे कोई पत्थर बीनने वाला सही पत्थर चुनता है।
🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में, उपमा को स्पष्ट करें और उसके पीछे छिपे अर्थ को समझाएं।
Question 12. को न सन्ताप्यते ? (किसको सन्तप्त नहीं किया जाता है?)
Answer: जो बिना तपाये झुक जाता है, उसे सन्तप्त नहीं किया जाता है। अर्थात, जो विनम्र स्वभाव का होता है, उसे परेशान नहीं किया जाता।
In simple words: जो व्यक्ति आसानी से झुक जाता है, उसे कोई तंग नहीं करता।
🎯 Exam Tip: विनम्रता और उसके लाभों से संबंधित प्रश्नों में, 'झुकने' या 'नम्रता' के महत्व पर प्रकाश डालें।
Question 13. किं न नम्यते? (कौन नहीं नबाया (झुकाया) जाता है?)
Answer: जो लकड़ी स्वयं झुकी हुई होती है, उसे और नहीं झुकाया जाता है। इसी तरह, जो व्यक्ति स्वभाव से ही विनम्र होता है, उसे और विनम्र बनाने की आवश्यकता नहीं होती।
In simple words: जो लकड़ी पहले से झुकी हुई होती है, उसे और झुकाया नहीं जा सकता।
🎯 Exam Tip: इस तरह के दार्शनिक प्रश्नों में, भौतिक उदाहरणों के माध्यम से गहरे नैतिक या सामाजिक अर्थ को समझाएं।
Question 14. सत्येन किं रक्ष्यते? (सत्य से किसकी रक्षा की जाती है ?)
Answer: सत्य से धर्म की रक्षा की जाती है। जब कोई व्यक्ति सच बोलता है, तो धर्म के सिद्धांतों का पालन होता है।
In simple words: सच बोलने से धर्म बचा रहता है।
🎯 Exam Tip: धर्म और सत्य के संबंध वाले प्रश्नों में, 'सत्य' को 'धर्म' का रक्षक बताएं।
Question 16. रूपं केन रक्ष्यते? (रूप की रक्षा किससे की जाती है ?)
Answer: रूप की रक्षा सफाई से की जाती है। शारीरिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है।
In simple words: सुंदरता को सफाई से बचा कर रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: शारीरिक गुणों से संबंधित प्रश्नों में, 'स्वच्छता' या 'सफाई' को सुंदरता का संरक्षक बताएं।
Question 17. कुलं केन रक्षणीयम् ? (कुल किससे रक्षा करने योग्य है?)
Answer: कुल की रक्षा चरित्र से करनी चाहिए। परिवार की प्रतिष्ठा उसके सदस्यों के अच्छे व्यवहार और नैतिक मूल्यों पर निर्भर करती है।
In simple words: परिवार की इज्जत को अच्छे चरित्र से बचाना चाहिए।
🎯 Exam Tip: परिवार और उसके संरक्षण से संबंधित प्रश्नों में, 'चरित्र' या 'सदाचार' को सबसे महत्वपूर्ण कारक बताएं।
Question 18. कस्य कुलं प्रमाणं न भवति? (किसका कुल प्रमाण नहीं होता ?)
Answer: चरित्रहीन व्यक्ति का कुल प्रमाण नहीं होता। अर्थात, जिसका चरित्र अच्छा नहीं होता, उसके परिवार की कोई प्रतिष्ठा नहीं होती।
In simple words: जिसका चरित्र खराब होता है, उसके परिवार की कोई पहचान नहीं होती।
🎯 Exam Tip: परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़े प्रश्नों में, चरित्रहीनता को परिवार की अप्रतिष्ठा का मुख्य कारण बताएं।
Question 19. अन्त्येष्वपि किं दृश्यते? (निम्न कुलोत्पन्नों में क्या देखा जाता है ?
Answer: निम्न कुल में उत्पन्न लोगों में भी चरित्र ही देखा जाता है। उनकी जाति या कुल से ज्यादा उनके अच्छे स्वभाव का महत्व होता है।
In simple words: निचले तबके के लोगों में भी उनका अच्छा चरित्र ही देखा जाता है।
🎯 Exam Tip: सामाजिक समानता और गुणों से संबंधित प्रश्नों में, व्यक्ति के 'चरित्र' को उसके कुल या स्थिति से अधिक महत्वपूर्ण बताएं।
Question 20. केभ्यः भीतो भवेत्? (किसे भयभीत रहना चाहिए ?)
Answer: व्यक्ति को उन कामों से डरना चाहिए जो गलत हैं (अकार्य), जो काम करने योग्य हैं उन्हें न करने से, गलत समय पर भेद खुल जाने से और शराब पीने से डरना चाहिए। ये सभी चीजें व्यक्ति को नुकसान पहुँचाती हैं।
In simple words: हमें गलत काम करने, सही काम न करने, रहस्य खुलने और शराब पीने से डरना चाहिए।
🎯 Exam Tip: भय या डर से संबंधित प्रश्नों में, उन कार्यों और स्थितियों को बताएं जिनसे व्यक्ति को बचना चाहिए।
Question 21. वस्त्रवान् कां जयति? (वस्त्राभूषण वाला किसे जीत लेता है?)
Answer: सुंदर वस्त्राभूषण वाला व्यक्ति सभा को जीत लेता है। उसका अच्छा पहनावा दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
In simple words: अच्छे कपड़े पहनने वाला आदमी सभा में सबका मन जीत लेता है।
🎯 Exam Tip: पहनावे और उसके प्रभाव से संबंधित प्रश्नों में, 'सभा' या 'लोगों' पर सकारात्मक प्रभाव का उल्लेख करें।
Question 22. मिष्टाशां कः जयते? (मीठे की इच्छा को कौन जीत लेता है ?)
Answer: मार्ग को वाहन वाले ने जीता।
In simple words: रास्ते को वाहन वाले व्यक्ति ने जीता।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, यदि उत्तर स्पष्ट रूप से प्रश्न से संबंधित न लगे, तो दिए गए उत्तर को ही सटीक रूप से प्रस्तुत करें।
Question 24. सर्वं केन जितम् ? (सब कुछ किसने जीत लिया?)
Answer: सब कुछ शीलवान व्यक्ति जीत लेता है। उसका अच्छा चरित्र और व्यवहार उसे सभी पर विजय दिलाता है।
In simple words: शीलवान व्यक्ति सब कुछ जीत लेता है।
🎯 Exam Tip: 'सर्वं जितम्' वाले प्रश्नों में, 'शील' (चरित्र) को विजेता के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 25. कस्य जीवितं निरर्थकम्? (किसका जीवन निरर्थक है?)
Answer: जिसका शील (चरित्र) नष्ट हो जाता है, उसका जीवन निरर्थक है। चरित्रहीन जीवन का कोई मूल्य नहीं होता।
In simple words: जिसका चरित्र खराब हो जाता है, उसका जीवन बेकार हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जीवन की सार्थकता और निरर्थकता से संबंधित प्रश्नों में, 'शील' (चरित्र) के महत्व पर विशेष बल दें।
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