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Detailed Chapter 4 काकी कृष्णसर्पकथा RBSE Solutions for Class 11 Sanskrit
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Class 11 Sanskrit Chapter 4 काकी कृष्णसर्पकथा RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. (क) न्यग्रोधपादपे कौ प्रतिवसतः? (वट-वृक्ष पर कौन रहते थे?)
(अ) वायसदम्पती
(ब) कृष्णसर्पदम्पती
(स) कर्कटदम्पती
(द) जलचरदम्पती
Answer: (अ) वायसदम्पती
In simple words: बरगद के पेड़ पर कौवों का जोड़ा रहता था। वे वहाँ अपना घोंसला बनाकर रहते थे।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों और उनके निवास स्थान को हमेशा याद रखें। यह कहानी की शुरुआत का महत्वपूर्ण विवरण है।
Question 1. (ख) क. तारासटमात्याः बालकान भक्षयतिः (तारास दंपत्ती के बच्चों को कौन खा जाता?)
Answer: (अ) वायसदम्पती
In simple words: प्रश्न के अनुसार, तारास दंपत्ति के बच्चों को वायसदम्पती खा जाता था। यह कहानी में एक मुख्य घटना थी जो समस्या का कारण बनी।
🎯 Exam Tip: भले ही विकल्पों को सूचीबद्ध न किया गया हो, दिए गए उत्तर को ध्यान से पढ़ें और उसे प्रश्न के संदर्भ में समझने का प्रयास करें।
Question 1. (ग) कुलीरकः कस्य ग्रीवां समादाय जलाशयमाससाद? (केकड़ा किसकी गर्दन लेकर जलाशय पर पहुँचा?)
(अ) वायसः
(ब) मत्स्यस्य
(स) बकस्य
(द) सर्पस्य
Answer: (स) बकस्य
In simple words: केकड़ा बगुले की गर्दन पकड़कर तालाब तक पहुँचा। यह बगुले की धोखाधड़ी का अंत था।
🎯 Exam Tip: कहानी में पात्रों के बीच के संबंधों और उनकी गतिविधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे किसी को नुकसान पहुँचाने या बचाने की कोशिश कर रहे हों।
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 4 अति लघूत्तरात्मक प्रश्नाः
Question 2. अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तरं लिखत-(निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) कः शूरैः न परिभूयते? (कौन-शूरवीर द्वारा पराजित नहीं किया जाता?)
Answer: उपायज्ञाल्पकायः शूरैः न परिभूयते। (उपाय को जानने वाला शूरवीर द्वारा भी पराजित नहीं किया जाता।)
In simple words: जो व्यक्ति उपाय या तरकीब जानता है, भले ही वह शरीर से छोटा हो, उसे वीर पुरुष भी हरा नहीं सकते। बुद्धिमत्ता शारीरिक बल से अधिक शक्तिशाली होती है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, मुख्य शब्द "उपायज्ञ" (उपाय जानने वाला) है। इसे उत्तर में शामिल करना न भूलें।
Question 2. (ख) बकः कुत्र निवसति स्म? (बगुला कहाँ रहता था?)
Answer: बकः नानाजलचर सनाथे जलाशये निवसति स्म। (बगुला अनेक जलचरों से युक्त महान सरोवर पर रहता था।)
In simple words: बगुला एक बड़े तालाब में रहता था, जहाँ कई दूसरे पानी के जीव भी रहते थे। वह वहीं रहकर मछलियों का शिकार करता था।
🎯 Exam Tip: निवास स्थान बताते समय, केवल जगह का नाम नहीं, बल्कि उसकी विशेषता (जैसे 'नानाजलचर सनाथे' - अनेक जलचरों से युक्त) भी लिखें।
Question 2. (ग) बकः कान् शिलातले प्रक्षिप्य भक्षितवान्? (बगुला किनको शिला पर डालकर खाता था?)
Answer: बकः जलचरान् शिलातले प्रक्षिप्य भक्षितवान्। (बगुला जलचरों को शिला पर डालकर खा जाता।)
In simple words: बगुला पानी के जीवों को पत्थर पर पटककर खा जाता था। यह उसकी भोजन की रणनीति थी, जिसमें वह अपनी चाल से शिकार करता था।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न बगुले की धूर्तता और उसके शिकार के तरीके को दर्शाता है। "शिलातले प्रक्षिप्य" (पत्थर पर पटककर) वाक्यांश महत्वपूर्ण है।
Question 2. (घ) वायसी किमादाय स्वगृहाभिमुखं प्रतस्थे? (काकी क्या लेकर अपने घर की ओर प्रस्थान कर गई?)
Answer: वायसी एक कनकं सूत्रमेकमादाय स्वगृहाभिमुखं प्रतस्थे? (काकी एक स्वर्णसूत्र लेकर अपने घर की ओर प्रस्थान कर गई।)
In simple words: कौवी एक सोने का हार लेकर अपने घर की ओर चल पड़ी। यह साँप से बदला लेने की योजना का हिस्सा था।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में "कनकं सूत्रम्" (सोने का हार) मुख्य शब्द है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कौवी ने क्या चीज उठाई थी।
Question 2. (ङ) किं न किंचिदिह असाध्यमस्ति ? (यहाँ क्या असाध्य नहीं है?)
Answer: बुद्धिमानों के लिए इस संसार में कुछ भी असाध्य नहीं है।
In simple words: बुद्धिमान लोगों के लिए दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं होता। वे अपनी समझदारी से किसी भी मुश्किल को हल कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: यह उत्तर कहानी का एक महत्वपूर्ण नैतिक संदेश है। "बुद्धिमानों" शब्द को उत्तर में शामिल करना सुनिश्चित करें।
Question 3. (क) अस्ति कस्मिंश्चित् प्रदेशे..............बालकान् भक्षयति।
Answer: किसी प्रदेश में एक विशाल बरगद का पेड़ था। वहाँ कौवों का एक जोड़ा रहता था। उनके बच्चे पैदा होने के समय, एक काला साँप बिल से निकलकर आता था और हमेशा उनके बच्चों को खा जाता था। यह कौवों के लिए एक बड़ी समस्या थी।
In simple words: एक बड़े बरगद के पेड़ पर कौवे रहते थे। एक काला साँप हमेशा उनके बच्चों को खा जाता था।
🎯 Exam Tip: इस तरह के अधूरे वाक्यों को पूरा करते समय, कहानी की शुरुआत और मुख्य समस्या को याद रखें।
Question 3. (ख) स आह-वत्स! सत्यमुपलक्षितं...............सम्पद्यते लग्ना।।
Answer: उसने कहा, "बेटा! तुमने ठीक समझा। मुझे मछली खाने से बहुत घृणा हो गई है, इसलिए अब मैंने प्राण त्यागने का व्रत लिया है। इस वजह से मैं अपने पास आने वाली मछलियों को भी नहीं खाता हूँ।" यह सुनकर केकड़े ने कहा, "मामाजी, इस वैराग्य का क्या कारण है?" बगुले ने कहा, "बेटा! मैं इसी तालाब में पैदा हुआ और बड़ा हुआ हूँ। मैंने सुना है कि बारह साल तक बारिश नहीं होगी।" इस प्रकार, बगुले ने अपनी चाल चली।
In simple words: बगुले ने कहा कि वह मछली खाने से थक गया है और अब कुछ नहीं खाता। जब केकड़े ने उससे कारण पूछा, तो बगुले ने झूठ कहा कि बारह साल तक बारिश नहीं होगी, इसलिए वह उदास है।
🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, कौन क्या कह रहा है और उसका उद्देश्य क्या है, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। बगुले के झूठ को उजागर करें।
Question 3. (ग) अथ ते .............रंजयन्नित्यमेवाहारवृत्तिमकरोत्।
Answer: इसके बाद वे आश्वस्त हो गए। "तात, मामा, भैया" कहते हुए, बगुला एक-एक करके उन्हें अपनी पीठ पर बिठाकर (जलाशय के पास) पत्थर पर ले जाता था। वहाँ उन्हें पटककर अपनी इच्छा से खा लेता था। फिर वापस तालाब में पहुँचकर, वह जलचरों को झूठी कहानियाँ सुनाकर मन ही मन प्रसन्न होता हुआ रोज़ाना यही आहार वृत्ति करता था। इस तरह वह सबको धोखा देता रहा।
In simple words: बगुले ने जलचरों को भरोसा दिलाया। फिर वह उन्हें एक-एक करके अपनी पीठ पर बिठाकर पत्थर पर ले जाता और खा लेता था। वापस आकर वह झूठी बातें बताता और रोज यही करता रहता था।
🎯 Exam Tip: बगुले की धोखेबाजी की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से समझाएं। उसके कृत्यों और उसके द्वारा कही गई झूठी बातों पर ध्यान दें।
Question 3. (घ) अथ यावद्राजपुरुषास्तं...............बुद्धिमतामसाध्यमस्ति।
Answer: जब राजपुरुष जैसे ही पेड़ पर चढ़कर उस कोटर (बिल) को देखते हैं, वैसे ही काला साँप फन फैलाए हुए दिखाई देता है। तब राजपुरुषों ने लाठी के प्रहार से साँप को मारकर सोने का हार लेकर अपनी इच्छानुसार स्थान पर चले गए। कौवों का जोड़ा भी तब से बहुत सुख से रहने लगा। इसलिए मैं कहता हूँ, "उपाय से जो काम किया जाना चाहिए, वह बुद्धिमानों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।" इस घटना ने साबित किया कि बुद्धिमत्ता से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है।
In simple words: जब सिपाही पेड़ पर चढ़े, तो उन्होंने फन फैलाए साँप को देखा। उन्होंने साँप को लाठी से मारकर सोने का हार लिया और चले गए। कौवे खुशी से रहने लगे। इसलिए कहा जाता है कि बुद्धिमानों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
🎯 Exam Tip: इस भाग में कहानी का समाधान और उसका नैतिक संदेश शामिल है। राजपुरुषों के कार्य और साँप के मारे जाने को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 4. 'यस्य क्षेत्र स्यात्तस्य निवृत्ति।' अस्मिन् पद्ये कः छन्दः तल्लक्षणं च लिखित्वा संगमयत-(इस पद्य में कौन-सा छन्द है उसका लक्षण लिखकर संगति कीजिए-)
Answer: अस्मिन् पद्ये अनुष्टुप् छन्दः आस्ति। (इस पद्य में अनुष्टुप् छन्द है।)
लक्षणम् – श्लोके षष्टं गुरुर्जेयं सर्वत्र लघु पञ्चमम्। द्विचतुष्पादयोर्हस्वं, सप्तमं दीर्घमन्ययोः॥
प्रस्तुत उदाहरण में पाँचवां चारों चरणों में लघु है, छटा गुरु है तथा सातवाँ दूसरे और चौथे चरण में लघु है, शेष में गुरु है। यह छन्द की मात्राओं और वर्णों के नियम को दर्शाता है।
In simple words: इस श्लोक में 'अनुष्टुप्' छन्द है। इसके नियम के अनुसार, हर श्लोक में छठे अक्षर को गुरु (लंबा), पाँचवे अक्षर को लघु (छोटा) होना चाहिए। दूसरे और चौथे चरण में सातवाँ अक्षर लघु होता है, और बाकी सभी गुरु होते हैं।
🎯 Exam Tip: छन्द के प्रश्न में छन्द का नाम और उसका लक्षण (नियम) स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य है। उदाहरण के साथ संगति करना भी आवश्यक है।
Question 5. कथायाः सारं प्रतिपादयत्। (कथा का सार लिखिए।)
Answer: एक बरगद के पेड़ पर कौवों का एक जोड़ा रहता था। एक साँप उनके बच्चों को खा जाता था। कौवे ने गीदड़ से उपाय पूछा। गीदड़ ने धूर्त बगुले की कहानी सुनाकर उपाय बताया। कहानी के अनुसार, सूखे के कारण एक तालाब सूख गया था। एक बगुला पास के बड़े जलाशय के बारे में झूठ बोलकर, जलचरों को अपनी पीठ पर बिठाकर पत्थरों पर पटककर खा जाता था। एक बार एक केकड़ा उसके साथ गया और उसने बगुले की गर्दन पकड़कर उसे मार दिया। गीदड़ ने कौवे से कहा कि वह किसी का सोने का हार चुराकर साँप के बिल में डाल दे। सिपाही साँप को चोर मानकर मार देंगे। कौवी ने राजमहल से सोने का हार लाकर साँप के बिल में रख दिया। खोजने वाले सिपाहियों ने साँप को चोर समझकर लाठियों से मार दिया। इस प्रकार, बुद्धिमत्ता से शत्रु का नाश हुआ।
In simple words: एक साँप कौवों के बच्चों को खा जाता था। गीदड़ ने कौवों को बगुले की कहानी सुनाई, जो जलचरों को धोखा देता था। गीदड़ ने कहा कि कौवी सोने का हार चुराकर साँप के बिल में डाल दे। सिपाहियों ने साँप को चोर समझकर मार दिया, और कौवे खुश हो गए।
🎯 Exam Tip: कथा का सार लिखते समय, मुख्य घटनाओं, पात्रों और नैतिक शिक्षा को क्रमबद्ध तरीके से संक्षेप में प्रस्तुत करें।
व्याकरणात्मक प्रश्नोत्तराणि –
Question 6. (क) अधोलिखितानां पदानां सन्धि-विच्छेदं कृत्वा सन्धि नाम निर्देशं कुरुत-(निम्नलिखित पदों की। संधिविच्छेद कर संधि का नाम लिखिए-)
Answer:
| पदम् | सन्धि विच्छेद | नाम सन्धि |
|---|---|---|
| 4. अभ्युपत्य | अभि + उपेत्य | यण् सन्धि |
| 5. स्वेच्छ्या | स्व + इच्छया | गुण सन्धि |
| 6. इत्युक्तवति | इति + उक्तवति | यण् सन्धि |
In simple words: संस्कृत में शब्दों को अलग-अलग करने को सन्धि विच्छेद कहते हैं। इससे शब्दों का मूल रूप और उनके जुड़ने का तरीका पता चलता है।
🎯 Exam Tip: सन्धि विच्छेद करते समय, स्वर और व्यंजन सन्धियों के नियमों को ध्यान में रखें। मूल शब्दों को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 6. (ख) अधोलिखितानां पदानां सन्धिं कुरुत-(निम्नलिखित पदों की सन्धि कीजिए-)
Answer:
| सन्धि विच्छेद | सन्धि पदम् | नाम सन्धि |
|---|---|---|
| 1. विवराद् + निष्क्रम्य | विवरान्निष्क्रम्य | हल् सन्धि |
| 2. जलचराः + ते | जलचरास्ते | विसर्ग सन्धि |
| 3. अपि + अस्य | अप्यस्य | यण् सन्धि |
| 4. सः + अपि | सोऽपि | विसर्ग पूर्वरूप |
| 5. अद्य + एनम् | अद्यैनम् | वृद्धि सन्धि |
| 6. कृत + आश्रयः | कृताश्रयः | दीर्घ सन्धि |
In simple words: जब दो शब्द आपस में जुड़कर एक नया शब्द बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को सन्धि कहते हैं। यह संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण नियम है।
🎯 Exam Tip: सन्धि करते समय, दो पदों के अंतिम और प्रारंभिक वर्णों में होने वाले परिवर्तन को ध्यान से देखें। यह आपको सही सन्धि और उसका नाम पहचानने में मदद करेगा।
Question 6. (ग) अधोलिखित पदेषु मूलधातु-लकार-पुरुष-वचनानां निर्देशं कुरुत-(निम्नलिखित पदों में मूल धातु, लकार, पुरुष और वचने बताइए-)
Answer:
| पदम् | मूलधातुः | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| 1. भक्षयति | भक्ष् | लट् | प्रथम | एकवचनम् |
| 2. स्यात् | अस् | विधिलिङ् | प्रथम | एकवचनम् |
| 3. अस्ति | अस् | लट् | प्रथम | एकवचनम् |
| 4. भवति | भू | लट् | प्रथम | एकवचनम् |
| 5. यास्यति | या | लृट् | प्रथम | एकवचनम् |
| 6. करोमि | कृ | लट् | उत्तम | एकवचनम् |
| 7. अब्रवीत् | ब्रू | लङ् | प्रथम | एकवचनम् |
| 8. बध्यते | वध् | लट् (कर्मणि, प्रथम) | एकवचनम् |
In simple words: किसी क्रियापद में उसकी मूल धातु, किस काल (लकार) में है, कौन सा पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और कौन सा वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) है, यह बताना व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे हमें शब्द के सही अर्थ और प्रयोग को समझने में मदद मिलती है।
🎯 Exam Tip: धातु, लकार, पुरुष और वचन की पहचान करते समय, धातु रूप के विभिन्न प्रत्ययों और उनके परिवर्तनों पर ध्यान दें। यह संस्कृत व्याकरण में एक आधारभूत कौशल है।
Question 6. (घ) अधोलिखितपदेषु मूलशब्द विभक्ति-लिङ्ग-वचनानां निर्देशं कुरुत-(निम्न पदों में मूल शब्द, विभक्ति, लिंग, वचन का निर्देश कीजिए-)
Answer:
| पदम् | मूलशब्द | विभक्ति | लिंग | वचनम् |
|---|---|---|---|---|
| 4. तस्य | तत् | षष्ठी | पु. न. | एकवचनम् |
| 5. अस्माकम् | अस्मद् | षष्ठी | - | बहुवचनम् |
| 6. ग्रीवायाम् | ग्रीवा | सप्तमी | स्त्रीलिंग | एकवचनम् |
| 7. त्वाम् | युष्मद् | द्वितीया | - | एकवचनम् |
| 8. त्वम् | युष्मद् | प्रथमा | - | एकवचनम् |
In simple words: किसी भी शब्द का मूल रूप, उसमें लगी विभक्ति (कारक चिन्ह), उसका लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसक लिंग) और वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) जानना बहुत ज़रूरी है। यह संस्कृत में शब्दों को सही तरह से प्रयोग करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: शब्द रूप और उनके प्रयोग को याद रखें। सर्वनाम शब्दों (जैसे तत्, अस्मद्, युष्मद्) में लिंग का निर्धारण वाक्य के अनुसार होता है, इसलिए कई बार तालिका में लिंग नहीं दिया जाता।
Question 6. (ङ) अधोलिखित पदेषु उपसर्ग-प्रकृति-प्रत्ययानां निर्देशं कुरुत-(निम्नलिखित पदों में उपसर्ग, प्रकृति, प्रत्यय का निर्देश कीजिए-)
Answer:
| पदम् | उपसर्गः | प्रकृतिः | प्रत्ययः |
|---|---|---|---|
| 1. निष्क्रम्य | निस् | क्रम् | ल्यप् |
| 2. सञ्जातः | सम् | जन् | क्त |
| 3. वध्य | - | वध् | यत् |
| 4. व्यापादयितुम् | वि + आ | पद् + णिच् | तुमुन् |
| 5. वृत्तिः | - | वृत् | क्तिन् |
| 6. उपवेशनम् | उप + | विश् | ल्युट् |
| 7. कृतम् | - | कृ | क्त |
| 8. भित्वा | - | भिद् | क्त्वा |
In simple words: उपसर्ग शब्द के पहले लगते हैं, धातु मूल क्रिया होती है, और प्रत्यय शब्द के अंत में लगकर उसका अर्थ बदल देते हैं। इन तीनों को पहचानना शब्द रचना को समझने के लिए जरूरी है।
🎯 Exam Tip: उपसर्ग, प्रकृति और प्रत्यय को अलग-अलग पहचानना सीखें। कुछ शब्दों में एक से अधिक उपसर्ग या प्रत्यय भी हो सकते हैं।
Question 6. (च) अधोलिखित पदेषु समास विग्रहं कृत्वा समासस्य नाम निर्देशं कुरुत-(निम्नलिखित पदों में समास विग्रह करके समास का नाम बताइये !)
Answer:
| पदम् | समास विग्रहः | समास |
|---|---|---|
| 1. कृष्णसर्पः | कृष्णः च असौ सर्पः | कर्मधारय |
| 2. दुष्टात्मा | दुष्टः च असौ आत्मा | कर्मधारय |
| 3. जलचरः | जले चरति इति | उपपद तत्पुरुष |
| 4. अनावृष्टिः | न आवृष्टिः | नञ् तत्पुरुष |
| 5. प्राणत्राणम् | प्राणानां त्राणम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| 6. राजपुरुषाः | राज्ञः पुरुषः | षष्ठी तत्पुरुष |
In simple words: समास विग्रह का मतलब है कि एक बड़े शब्द को उसके छोटे-छोटे भागों में तोड़ना और उनका अर्थ बताना। यह हमें बताता है कि दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया अर्थ कैसे बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, प्रत्येक पद का अर्थ और उनके संबंध को सही ढंग से पहचानें। समास के विभिन्न प्रकारों (जैसे तत्पुरुष, कर्मधारय) के नियमों को याद रखना सहायक होगा।
Question 6. (छ) पंच-उपसर्गपदानाश्रित्य वाक्यनिर्माणं कुरुत-(पाँच उपसर्ग पदों पर आश्रित वाक्यों का निर्माण कीजिए-)
Answer:
1. अहम् आचार्यं कर्म से निवेदन करता है।
2. आचार्याय शिष्याय उपादशाता। (आचार्य शिष्य को उपदेश देता है।)
In simple words: उपसर्गों का उपयोग करके वाक्य बनाने से शब्दों का अर्थ बदल जाता है। यह भाषा को और अधिक विविध और प्रभावी बनाता है।
🎯 Exam Tip: उपसर्गों को क्रियाओं या संज्ञाओं के साथ जोड़कर सही और सार्थक वाक्य बनाने का अभ्यास करें। उपसर्ग के कारण शब्द के अर्थ में क्या बदलाव आता है, यह समझना महत्वपूर्ण है।
प्रश्नोत्तराणि
Question 1. वायसदम्पती कुत्र प्रतिवसतः स्म? (काकदम्पती कहाँ रहती थी ?)
Answer: काकदम्पती न्यग्रोध पादपे निवसति स्म। (काक दम्पती वटवृक्ष पर रहती थी।)
In simple words: कौवों का जोड़ा एक बरगद के पेड़ पर रहता था। बरगद का पेड़ उनका घर था।
🎯 Exam Tip: निवास स्थान से संबंधित प्रश्नों में, सटीक जगह (जैसे 'न्यग्रोध पादपे') का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. काक दम्पती कम् उपायम् अपृच्छताम्? (काक दम्पती ने किससे उपाय पूछा ?)
Answer: काकंदम्पती अन्य वृक्षमूले निवासिने प्रिय सुहृदं शृगालमयपृच्छत्। (काक दम्पती ने अन्य वृक्ष के मूल में निवास करने वाले प्रिय मित्र गीदड़ से पूछा।)
In simple words: कौवों के जोड़े ने अपने दोस्त गीदड़ से उपाय पूछा। गीदड़ दूसरे पेड़ के नीचे रहता था।
🎯 Exam Tip: पात्रों के बीच के संबंधों (जैसे 'प्रिय सुहृदम्') को दर्शाना उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question 3. कस्य निवृत्ति न भवति? (किसकी निवृत्ति नहीं होती?)
Answer: यस्य क्षेत्रं नदी तीरे भवति, यस्य भार्या परसंगता अस्ति ससपें गृहे च वसति तस्य निवृत्ति न भवति। (जिसका खेत नदी के किनारे पर होता है। जिसकी पत्नी पर पुरुष के साथ रहती है। जो सर्प वाले घर में रहता है, उसकी निवृत्ति नहीं होती।)
In simple words: जिसकी ज़मीन नदी के किनारे हो, जिसकी पत्नी किसी और के साथ हो, या जो साँप वाले घर में रहता हो, उसे कभी शांति नहीं मिलती। ये तीनों बातें हमेशा परेशानियाँ लाती हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, तीनों स्थितियों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है जो किसी व्यक्ति को शांति नहीं देतीं।
Question 4. सर्पयुक्ते गृहे किं निश्चितम्? (सर्पयुक्त घर में क्या निश्चित है?)
Answer: सर्पयुक्ते गृहे मृत्यु निश्चितमस्ति। (सर्पयुक्त घर में मृत्यु निश्चित है।)
In simple words: जिस घर में साँप रहता है, वहाँ मौत निश्चित है। साँप हमेशा खतरा बना रहता है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "मृत्यु निश्चितमस्ति" वाक्यांश को सही ढंग से लिखना महत्वपूर्ण है।
Question 5. 'नात्रविषये स्वल्पोऽपि विषादः कार्यः' इति केन उक्तम्? ('इस विषय में थोड़ा भी शोक नहीं करना चाहिए' यह वाक्य किसने कहा ?)
Answer: 'नात्रविषये स्वल्पोऽपि विषादः कार्यः' इति वाक्यं शृगालेन उक्तम्। (यह वाक्य शृगाल ने कहा।)
In simple words: यह बात गीदड़ ने कही थी कि इस मामले में थोड़ी भी चिंता नहीं करनी चाहिए। उसने कौवों को दिलासा दिया था।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष कथन के वक्ता की पहचान करते समय, कहानी के उस हिस्से को याद करें जहाँ यह कहा गया था।
Question 6. अल्पकायोऽपि को न परिभूयते? (छोटी काया वाला भी कौन पराजित नहीं होता?)
Answer: उपायज्ञः अल्पकायोऽपि न परिभूयते। (उपाय जानने वाला छोटी काया वाला भी पराजित नहीं होता है।)
In simple words: जो व्यक्ति उपाय या तरकीब जानता है, भले ही वह शरीर में छोटा हो, उसे कोई हरा नहीं सकता। ज्ञान ही सबसे बड़ी शक्ति है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "उपायज्ञः" (उपाय जानने वाला) शब्द प्रमुख है। इसे स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 8. वञ्चकः बकः केन हतः? (छलिया बगुला किसके द्वारा मारा गया?)
Answer: वञ्चकः बकः कर्कटेन हतः। (धोखेबाज बगुला केकड़े के द्वारा मारा गया।)
In simple words: धोखेबाज बगुले को केकड़े ने मार डाला। केकड़े ने उसकी धोखेबाजी का बदला लिया था।
🎯 Exam Tip: हत्यारे और मारे गए व्यक्ति का नाम सही-सही याद रखें। यह कहानी की एक महत्वपूर्ण घटना है।
Question 9. उपायज्ञोऽल्पकायोऽपि कैर्न परिभूयते? (उपाय जानने वाला छोटा भी किनके द्वारा परास्त नहीं किया जाता ?)
Answer: उपायज्ञोऽल्पकायोऽपि शूरैः न परिभूयते। (उपाय जानने वाला छोटा भी शूरवीरों के द्वारा परास्त नहीं होता)।
In simple words: जो व्यक्ति उपाय जानता है, भले ही वह छोटा हो, उसे वीर भी हरा नहीं सकते। बुद्धिमत्ता शारीरिक शक्ति से ज़्यादा काम आती है।
🎯 Exam Tip: "शूरैः" (शूरवीरों द्वारा) शब्द को उत्तर में शामिल करना न भूलें। यह दर्शाता है कि बुद्धिमत्ता बल पर भारी पड़ती है।
Question 10. वन प्रदेशे जलाशयः कीदृशः आसीत्? (वन प्रदेश में जलाशय कैसा था ?)
Answer: वन प्रदेशे जलाशयः नानाजलचर सनाथः आसीत्। (वन प्रदेश में जलाशय अनेक जलचरों से युक्त था।)
In simple words: जंगल में तालाब बहुत सारे पानी के जीवों से भरा हुआ था। वहाँ कई प्रकार के जीव रहते थे।
🎯 Exam Tip: जलाशय की विशेषता बताते समय, 'नानाजलचर सनाथः' (अनेक जलचरों से युक्त) जैसे विशेषणों का प्रयोग करें।
Question 11. बकः कुत्र प्रतिवसति स्म? (बगुला कहाँ रहता था?)
Answer: बक: नानाजलचर सनाथे महासरसि प्रतिवसति स्म। (बगुला अनेक जलचरों से युक्त महान सरोवर में रहता था।)
In simple words: बगुला एक बड़े तालाब में रहता था, जहाँ कई दूसरे पानी के जीव भी रहते थे। वह वहीं अपनी शिकार करता था।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "महासरसि" (महान सरोवर) और "नानाजलचर सनाथे" (अनेक जलचरों से युक्त) जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
Question 12. सरस्तीर उपविष्टो बकः कथमरोदत्? (तालाब के किनारे बैठा बगुला कैसे रोया?)
Answer: सरस्तीर उपविष्टः बकः मुक्ताफलं प्रकरसदृशैरश्रुवाहैर्धरातलमभिसिंचिन् रुरोद। (तालाब के किनारे बैठे बगुले ने मोतियों की तरह बिखरते हुए आँसुओं से धरातल को सींचा।)
In simple words: तालाब के किनारे बैठा बगुला मोतियों की तरह आँसू बहाते हुए ज़मीन को भिगो रहा था। वह दिखावा कर रहा था कि वह बहुत दुखी है।
🎯 Exam Tip: बगुले के रोने के वर्णन में "मुक्ताफलं प्रकरसदृशैरश्रुवाहैः" (मोतियों की माला जैसे आँसुओं से) जैसे सुंदर शब्दों का प्रयोग करें।
Question 13. सरस्तीर उपविष्ट बकं प्रति कः अगच्छत्? (तालाब के किनारे बैठे बगुले की ओर कौन गया?)
Answer: सरस्तीर उपविष्टं वकं प्रति एकः कुलीरकः नानाजलचरेण समेतः अगच्छत्। (तालाब के किनारे बैठे बगुले की ओर एक केकड़ा विविध जलचरों के साथ गया।)
In simple words: तालाब के किनारे बैठे बगुले के पास एक केकड़ा, कई दूसरे पानी के जीवों के साथ, गया। वे बगुले की समस्या जानना चाहते थे।
🎯 Exam Tip: केकड़े और उसके साथ आए जलचरों का उल्लेख करना न भूलें, क्योंकि यह कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
Question 14. बकः व से दुःखी कौन हुआ?
Answer: काक दम्पती अपने बच्चों को कृष्ण सर्प द्वारा खाए जाने से दुःखी हुए। उनकी खुशी छिन गई थी।
In simple words: कौवे और कौवी अपने बच्चों को काले साँप द्वारा खाए जाने से बहुत दुखी थे। उनके लिए यह बहुत बड़ी पीड़ा थी।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य पात्रों की भावनाओं और उनकी समस्याओं को स्पष्ट रूप से समझें और व्यक्त करें।
Question 16. प्रायोपवेशनं केन कृतम् ? (प्राण त्यागने का व्रत लेकर कौन बैठ गया?)
Answer: वकुलेन प्रायोपवेशनं कृतम्। (बगुला प्राण त्यागने का व्रत लेकर बैठ गया।)
In simple words: बगुला प्राण त्यागने का व्रत लेकर बैठ गया था। यह दूसरों को धोखा देने के लिए उसकी चाल थी।
🎯 Exam Tip: "वकुलेन" (बगुले द्वारा) शब्द को सही ढंग से लिखें। यह उसके कपटपूर्ण इरादों को दर्शाता है।
Question 17. दैवज्ञेन ग्रहाणां का गतिः वर्णिता? (ज्योतिषी ने ग्रहों की क्या गति वर्णन की ?)
Answer: दैवज्ञेनोक्तम् यत् शनैश्चरः हि रोहिणी सकटं भित्वा भौमं शुक्रं च प्रयास्यति। अतोऽनावृष्टिर्भविष्यति। (ज्योतिषी ने कहा कि शनि रोहिणी के घेरे को भेदकर मंगल और शुक्र के पास जायेगा अतः अनावृष्टि होगी।)
In simple words: ज्योतिषी ने बताया कि शनि ग्रह रोहिणी नक्षत्र को भेदकर मंगल और शुक्र के पास जाएगा। इसलिए सूखा पड़ेगा। यह बगुले की एक मनगढ़ंत कहानी थी।
🎯 Exam Tip: ज्योतिषी द्वारा वर्णित ग्रहों की स्थिति और उसके परिणाम (अनावृष्टि) को याद रखें, क्योंकि यह कहानी में बगुले की चाल का आधार था।
Question 18. कुलीरकस्यगमन प्रस्तावं श्रुत्वा बकः किमचिन्तयत्? (केकड़े के जाने के प्रस्ताव को सुनकर बगुले ने क्या सोचा?)
Answer: सोऽचिन्तयत् यत् निर्विण्णोऽहं मत्स्यमांसादनेन, तदद्यैनं कुलीरकं व्यञ्जनस्थानें करोमि। (उसने सोचा कि मैं मछली का मांस खाने से ऊब गया हूँ, तो आज इसी केकड़े को खा जाता हूँ।)
In simple words: केकड़े के जाने का प्रस्ताव सुनकर बगुले ने सोचा कि वह मछली खाते-खाते थक गया है, इसलिए आज वह केकड़े को ही खाएगा। उसने केकड़े को भी अपना शिकार बनाने का निश्चय कर लिया।
🎯 Exam Tip: बगुले की आंतरिक सोच और उसके कपटपूर्ण इरादों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें। उसके लालच और धूर्तता पर जोर दें।
Question 19. अस्थिमवलोक्य कुलीरकः वर्क किम् पृच्छत्? (हड्डियों के ढेर को देखकर केकड़े ने बगुले से क्या पूछा?)
Answer: सोऽपृच्छत्-माम! कियद्रे स जलाशयः? मदीयभारेणाति श्रान्तस्तत्वम् ? (वह बोला-चाचा! कितनी दूर पर है वह जलाशय? मेरे बोझ से आप थक गये होंगे।)
In simple words: हड्डियों के ढेर को देखकर केकड़े ने बगुले से पूछा, "चाचा! वह तालाब कितनी दूर है? मेरे भारी होने के कारण आप थक तो नहीं गए?" केकड़ा असल में बगुले की धोखेबाजी को समझ गया था।
🎯 Exam Tip: केकड़े के प्रश्न का वास्तविक अर्थ (धोखा समझना) और उसके प्रत्यक्ष कथन में अंतर को स्पष्ट करें।
Question 20. न्यग्रोध-पादपे कौ प्रतिवसतः स्म? (बरगद के पेड़ में कौन रहते थे?)
Answer: न्यग्रोध – पादपे वायसदम्पती प्रतिवसतः स्म। (बरगद के पेड़ में काक-युगल रहता था)।
In simple words: बरगद के पेड़ पर कौवों का एक जोड़ा रहता था। वे वहाँ अपना घोंसला बनाकर रहते थे।
🎯 Exam Tip: यह कहानी की शुरुआत का मुख्य विवरण है। कौवों के निवास स्थान को सही ढंग से याद रखें।
Question 21. काक युगल के बच्चों को कौन खा जाता था ?
Answer: कृष्ण सर्पः वृक्ष विवरात् निष्क्रम्य आगच्छति स्म। (काला साँप पेड़ के विवर से निकलकर आता था।)
In simple words: एक काला साँप पेड़ के बिल से निकलकर आता था और कौवों के बच्चों को खा जाता था। यह उनकी मुख्य समस्या थी।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य खलनायक (कृष्ण सर्प) और उसके कार्यों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 23. यद् ग्रामान्ते सर्पः वसेत् तत्र किं भयम्? (जिस ग्राम के अन्त में सर्प हो, वहाँ क्या भय होता है?)
Answer: यद् ग्रामान्ते सर्पः वसेत् तत्र प्राण संशयः स्यात्। (जिस गाँव के अन्त में साँप रहे वहाँ प्राणों का संशय होना चाहिए।)
In simple words: जिस गाँव के पास साँप रहता है, वहाँ जान का खतरा हमेशा बना रहता है। साँप का होना खतरे का संकेत है।
🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "प्राण संशयः" (जान का खतरा) वाक्यांश को सही ढंग से लिखना महत्वपूर्ण है।
Question 24. यद् ऐतिभिः न जयः भवति तत् केन सम्भवति? (जो शस्त्रों से विजय नहीं होता वह किससे सम्भव होता है)।
Answer: यद् रिपुः हेतिभिः जयः न भवति सः उपायेन सम्भवति। (जो शत्रु हथियारों से नहीं जीता जाता वह उपाय से सम्भव होता है।)
In simple words: जिस दुश्मन को हथियारों से नहीं जीता जा सकता, उसे उपाय या बुद्धिमत्ता से जीता जा सकता है। बुद्धि बल से श्रेष्ठ है।
🎯 Exam Tip: "उपायेन" (उपाय द्वारा) शब्द को उत्तर में शामिल करें, क्योंकि यह कहानी का केंद्रीय संदेश भी है।
Question 25. वकः कर्कटग्रहात् कस्मात् हतः? (बगुला केकड़े की पकड़ से क्यों मारा गया?)
Answer: वकः अतिलौल्यात् कर्कटग्रहात् हतः। (बगुला अति लालसा के कारण केकड़े की पकड़ से मारा गया।)
In simple words: बगुला अपने बहुत ज़्यादा लालच के कारण केकड़े की पकड़ से मारा गया। उसका लालच ही उसकी मौत का कारण बना।
🎯 Exam Tip: बगुले की मृत्यु का कारण (अति लालच) को स्पष्ट रूप से बताएं। यह कहानी की एक महत्वपूर्ण नैतिक शिक्षा है।
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