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Detailed Chapter 17 इदं न मम RBSE Solutions for Class 11 Sanskrit
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Class 11 Sanskrit Chapter 17 इदं न मम RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्ना
Question 1. 'इदं न मम' इति पाठः कस्मात् रूपकात् संकलितः? ('इदं न मम' पाठ किस रूपक से संकलित है।)
(अ) अभिज्ञान शाकुन्तलात्
(ब) स्वप्नवासवदत्तात्
(स) नाट्यकल्पात्
(द) वेणीसंहारात्
Answer: (स) नाट्यकल्पात्
In simple words: 'इदं न मम' पाठ नाट्यकल्प नाम के नाटक से लिया गया है। यह नाटक डॉ. शिवसागर त्रिपाठी ने लिखा है।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका जवाब सही है, लेखक और पाठ के स्रोत को हमेशा याद रखें।
Question 3. रिक्तस्थानानि पूरयत – (रिक्तस्थान पूर्ति करें)
(i) नानादेशसमागतानां ............ सञ्चरणम्
(ii) अतः ............ प्राप्य वरान्निबोधत ।
(iii) मम मनसि कापि ............ समुत्पन्ना शंका जिज्ञासा वा वर्तते।
Answer:
(i) नानादेशसमागतानां च सञ्चरणम् स्वः।
(ii) अतः उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।
(iii) मम मनसि कापि हवन कर्मकाले समुत्पन्ना शंका जिज्ञासा वी वर्तते।
In simple words: रिक्त स्थानों को भरने के लिए, पाठ में दिए गए सही शब्दों का उपयोग करें। यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक वाक्य किस विषय पर बात कर रहा है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, आपको पाठ के संदर्भ को समझना चाहिए ताकि सही शब्द का चयन किया जा सके।
Question 4. 'क' खण्ड 'ख' खण्डेन सह योजयत् – (क खण्ड को ख खण्ड के साथ मिलाओ)
'क'
(अ) शिवसागरः
(ब) स्वार्थानन्दः
(स) आनन्दमयी
'ख'
छात्रः
आचार्या
लेखकः
Answer:
1. शिवसागरः - लेखकः
2. स्वार्थानन्दः - छात्रः
3. आनन्दमयी - आचार्या
In simple words: सही जोड़ी बनाने के लिए, प्रत्येक व्यक्ति को उसके सही काम या रिश्ते से मिलाएं। शिवसागर लेखक थे, स्वार्थानन्द छात्र थे, और आनन्दमयी आचार्या थीं।
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक नाम या शब्द का संबंध ध्यान से देखें और उसे उचित श्रेणी से जोड़ें।
Question 1. व्याकरणे आचार्यशब्दात् कस्मिन् प्रत्यये आचार्यानी पदं साधुः? (व्याकरण में आचार्य शब्द से किस प्रत्यय में आचार्या जी पद सिद्ध होता है)
Answer: आनुक् प्रत्ययः
In simple words: व्याकरण में 'आचार्य' शब्द से 'आचार्यानी' शब्द 'आनुक्' प्रत्यय का उपयोग करके बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: व्याकरण के प्रत्यय वाले प्रश्नों के लिए, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कौन सा प्रत्यय किस शब्द में कैसे जुड़ता है।
Question 3. व्यक्तिषु मनोवृत्तिः कीदृशी दृश्यते? (व्यक्तियों में मनोवृत्ति कैसी होती है?)
Answer: व्यक्तिषु संकुचिता मनोवृत्तिः दृश्यते। (व्यक्तियों में संकुचित मनोवृत्ति होती है।)
In simple words: लोगों में सोच अक्सर संकुचित होती है, मतलब वे केवल अपने बारे में सोचते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सीधे जवाब दें और यदि संभव हो तो प्रश्न में दिए गए महत्वपूर्ण शब्दों का उपयोग करें।
Question 4. न मानुषाच्छेष्ठतरं किंचित् इति केनोक्तम्? (मनुष्य से बढ़कर कोई नहीं है। यह किसने कहा?)
Answer: वेदव्यासेन उक्तम्
In simple words: यह बात वेदव्यास ने कही थी कि मनुष्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहां एक उद्धरण दिया गया हो, उद्धरण के वक्ता को ठीक से पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 5. स्वदेशो भुवनत्रयम् इति केन उद्घोषितम्। (‘तीनों भुवन स्वदेश हैं।' यह किसने कहा ?)
Answer: आचार्य शङ्करेण।
In simple words: आचार्य शंकर ने कहा कि तीनों लोक हमारा अपना देश हैं।
🎯 Exam Tip: जब कोई उद्धरण या कथन दिया गया हो, तो आपको पता होना चाहिए कि वह किसने कहा था।
Question 6. स्वाध्यायस्य कः क्रमः? (स्वाध्याय का क्या क्रम है?)
Answer: शंका समाधान जिज्ञासा शान्तिर्वा स्वाध्यायस्य एव क्रमः। (शंका-समाधान और जिज्ञासा की शान्ति स्वाध्याय का ही क्रम है।)
In simple words: स्वाध्याय का सही तरीका यह है कि आप अपनी शंकाओं को दूर करें और अपनी जिज्ञासा को शांत करें।
🎯 Exam Tip: किसी प्रक्रिया या क्रम से संबंधित प्रश्नों के लिए, सभी चरणों को सही क्रम में और स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 7. आहुतयः केभ्यः भवन्ति? (आहुतियाँ किनके लिए होती हैं?)
Answer: आहुतयः देवेभ्यः भवन्ति। (आहुति देवताओं के लिए होती हैं।)
In simple words: आहुतियाँ देवताओं को दी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे सीधे प्रश्नों का उत्तर सीधे और सटीक दें, बिना किसी अनावश्यक जानकारी के।
Question 8. कः स्वार्थं समीहते? (कौन स्वार्थ की अभिलाषा करता है?)
Answer: सर्वेजनाः स्वार्थम् इच्छन्ति। (सभी मनुष्य स्वार्थ को चाहते हैं।)
In simple words: सभी लोग अपने स्वार्थ की इच्छा रखते हैं।
🎯 Exam Tip: सामान्य सत्य वाले प्रश्नों का उत्तर देते समय, उस सत्य को स्पष्ट रूप से और संक्षिप्त रूप में व्यक्त करें।
व्याकरणात्मक प्रश्नोत्तराणि
Question 1. इमानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत (इन पदों का उपयोग करके वाक्य बनाइये)
(अ) स्वाहा
(ब) सह
(स) का
(द) अपि
Answer:
(अ) स्वाहा - इन्द्राय स्वाहा।
(ब) सह - छात्राः अध्यापकेन सह क्रीडन्ति
(स) का - इन्दिरा का आसीत् ?
(द) अपि - अद्य सोऽपि आगच्छति।
In simple words: दिए गए शब्दों का उपयोग करके वाक्य बनाएं। प्रत्येक वाक्य में शब्द का सही अर्थ और उपयोग होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: वाक्य बनाते समय, शब्द के अर्थ और व्याकरण के नियमों का ध्यान रखें ताकि वाक्य सही और स्पष्ट हो।
Question 3. निम्नलिखितानां पदानां लिङ्ग परिवर्तनं करणीयम् (निम्न पदों का लिंग बदलना है)
Answer:
| पदम् | परिवर्तित पदम् |
|---|---|
| (अ) आचार्या (पुंल्लिंगे) | (अ) आचार्यः |
| (ब) भगवान् (स्त्रीलिंगे) | (ब) भगवती |
| (स) कीदृशः (स्त्रीलिङ्ग) | (स) कीदृशी |
| (द) श्रद्धेया (पुंल्लिंगे) | (द) श्रद्धेय |
| (य) स्वार्थमयः (नपुं.) | (य) स्वार्थमयी |
| (र) भयावहः (नपुं.) | (र) भयावहा। |
🎯 Exam Tip: लिंग परिवर्तन के प्रश्नों में, संस्कृत व्याकरण के लिंग नियमों को सटीक रूप से लागू करें ताकि सही रूप मिल सके।
Question 4. निम्नलिखितानां पदानां प्रकृति-प्रत्ययौ लेखनीयौ (निम्न पदों में प्रकृति-प्रत्यय बताइये)।
Answer:
| पदम् | प्रकृतिः + प्रत्ययः |
|---|---|
| (अ) संचरणम् | (अ) सम् चर् + ल्युट् |
| (ब) समागता | (ब) सम् आ गम् + क्त |
| (स) प्रष्टुम् | (स) पृच्छ् + तुमुन् |
| (द) विस्मृत्य | (द) विस्मृ + ल्यप् |
| (य) उक्तम् | (य) वच् + क्त |
| (र) निमज्जितम् | (र) निमज्ज् + क्त । |
🎯 Exam Tip: प्रकृति-प्रत्यय के प्रश्नों के लिए, धातु रूपों और विभिन्न प्रत्ययों के नियमों का अच्छा ज्ञान होना आवश्यक है।
Question 5. निम्नलिखित पदानां समास-विग्रहः करणीयः (निम्न पदों का समास विग्रह करें)।
Answer:
| पदम् | समास-विग्रह |
|---|---|
| (अ) गुरुकुलम् | (अ) गुरोः कुलम् |
| (ब) मन्त्रोच्चारणम् | (ब) मन्त्राणाम् उच्चारणम् |
| (स) बुद्धि चातुर्यम् | (स) बुद्धेः चातुर्यम् |
| (द) वार्षिकोत्सवः | (द) वार्षिकः च असौ उत्सवः |
| (य) स्वराज्य भावना | (य) स्वस्य राज्यस्य भावना |
| (र) विश्व परिवारः | (र) विश्वः एव परिवारः। |
🎯 Exam Tip: समास विग्रह करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप समास के प्रकार को समझें और सभी घटक शब्दों को सही विभक्ति में लिखें।
Question 6. निम्न पदों का सन्धि-विच्छेद करना है)
(य) मनुष्यस्त्वद्य
(र) सम्प्रत्यस्माकम्
Answer:
| पदम् | सन्धि-विच्छेद |
|---|---|
| (य) मनुष्यस्त्वद्य | (य) मनुष्यः + तु + अद्य |
| (र) सम्प्रत्यस्माकम् | (र) सम्प्रति + अस्माकम् । |
🎯 Exam Tip: सन्धि-विच्छेद के प्रश्नों में, विभिन्न सन्धि नियमों (स्वर, व्यंजन, विसर्ग) को याद रखना और उन्हें सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. निम्नलिखितानां वाक्यानां निर्देशानुसारं वाच्य परिवर्तनम् कुरुत – (निम्न वाक्यों का निर्देश के अनुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए-)
Answer:
| मूलवाक्य | परिवर्तित वाच्यम् |
|---|---|
| (अ) अस्माभिः श्लोकाः श्रूयन्ते (कर्तृवाच्ये)। | (अ) वयं श्लोकान् शृणामः। |
| (ब) भवता कथं न स्मर्यते (कर्तृवाच्यम्) । | (ब) भवान् कथं न स्मरति । |
| (स) भवान् नित्यं पश्यति (कर्मवाच्यम्)। | (स) भवतां नित्यं दृश्यते । |
| (द) तेन मनोवृत्तिः दृश्यते (कर्तृवाच्यम्) । | (द) सः मनोवृत्तिं पश्यति। |
🎯 Exam Tip: वाच्य परिवर्तन के प्रश्नों के लिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि कर्ता, कर्म और क्रिया के रूप कैसे बदलते हैं जब आप वाच्य बदलते हैं।
RBSE Class 11 Sanskrit सत्प्रेरिका Chapter 17 अन्य महत्वपूर्ण प्रजोत्तराणि
Question 1. भारतीयानां मनसि कस्य प्रतिष्ठा सर्वोपरि वर्तते? (भारतीयों के मन में किसकी प्रतिष्ठा सर्वोपरि है?)
Answer: भारतीयानां मनसि मानव-प्रतिष्ठा सर्वोपरि वर्तते। (भारतीयों के मन में मानव की प्रतिष्ठा सबसे ऊपर है।)
In simple words: भारतीयों के मन में हमेशा इंसान का सम्मान सबसे ऊपर रहता है।
🎯 Exam Tip: सीधे उत्तर वाले प्रश्नों में, मुख्य विषय और उसकी विशेषता को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 2. जीवदया केषां चेतसि वर्तते? (जीवदया किसके हृदय में होती है?)
Answer: जीवदया भारतीयानाम् चेतसि वर्तते। (जीवदया भारतीयों के हृदय में होती है।)
In simple words: जीवों पर दया भारतीयों के मन में होती है।
🎯 Exam Tip: जब किसी समूह की विशेषता पूछी जाए, तो उस समूह को उत्तर में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 3. शंकरमतानुसारेण कः स्वदेशः? (शंकराचार्य के अनुसार स्वदेश क्या है?)
Answer: शङ्करमतानुसारेण भुवनत्रयम् स्वदेशः। (शंकर के अनुसार तीनों भुवन स्वदेश हैं।)
In simple words: शंकराचार्य के अनुसार, तीनों लोक ही अपना देश हैं।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष व्यक्ति या दर्शन के अनुसार पूछे गए प्रश्नों में, उस व्यक्ति या दर्शन के दृष्टिकोण को सटीक रूप से बताएं।
Question 4. शङ्करः पार्वती-परमेश्वरौ किम् कथयति? (शंकराचार्य पार्वती परमेश्वर को क्या कहते हैं?)
Answer: शङ्करः पार्वती-परमेश्वरी स्व पितरौ कथयति। (शंकराचार्य पार्वती परमेश्वर को अपना माता-पिता कहते हैं।)
In simple words: शंकराचार्य पार्वती और परमेश्वर को अपने माता-पिता मानते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहां किसी व्यक्ति के संबंध या विश्वास के बारे में पूछा गया हो, उस संबंध को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।
Question 6. अस्माकम् आदर्शी किम् अस्ति? (हमारा आदर्श क्या है?)
Answer: अस्माकम् आदर्शः अस्ति वसुधैव कुटुम्बुकम्। (सारी वसुधा ही परिवार है, यही हमारा आदर्श वाक्य है।)
In simple words: हमारा आदर्श 'वसुधैव कुटुम्बकम्' है, जिसका अर्थ है पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
🎯 Exam Tip: आदर्श वाक्य वाले प्रश्नों में, उस आदर्श को स्पष्ट रूप से बताएं और उसका संक्षिप्त अर्थ भी दें।
Question 7. मानवः कीदृशः प्राणी? (मनुष्य कैसा प्राणी है?)
Answer: मानवः एकः सामाजिकः प्राणी। (मानव एक सामाजिक प्राणी है।)
In simple words: मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जो किसी की प्रकृति के बारे में पूछते हैं, उस प्रकृति को एक या दो शब्दों में संक्षेप में बताएं।
Question 8. संसारे कस्य प्राबल्यम् ? (संसार में किसकी प्रबलता है?)
Answer: संसारे स्वार्थस्यैव प्राबल्यम्। (संसार में स्वार्थ की ही प्रबलता है।)
In simple words: संसार में स्वार्थ ही सबसे प्रबल है।
🎯 Exam Tip: किसी विचार की प्रमुखता के बारे में पूछे गए प्रश्नों में, उस प्रमुख विचार को स्पष्ट रूप से इंगित करें।
Question 9. मानवमूल्यानि कुत्रगतानि? (मानव मूल्य कहाँ गये?)
Answer: मानवमूल्यानि विलुप्तानि। (मानव मूल्य विलुप्त हो गये।)
In simple words: मानव मूल्य अब खो गए हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जो किसी वस्तु की स्थिति के बारे में पूछते हैं, उस स्थिति को सीधे और संक्षिप्त रूप से बताएं।
Question 10. सर्वक्षेत्रेषु कस्य वर्चस्वं दृश्यते। (सभी क्षेत्रों किसका वर्चस्व दिखाई दे रहा है?)
Answer: सर्वक्षेत्रेषु विदेश-शक्तीनां बहुराष्ट्रिय कम्पनीनां च वर्चस्वं दृश्यते। (सभी क्षेत्रों में विदेशी शक्तियों और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का वर्चस्व दिखाई देता है।)
In simple words: सभी क्षेत्रों में विदेशी ताकतों और बड़ी कंपनियों का प्रभाव दिखाई देता है।
🎯 Exam Tip: जब किसी प्रवृत्ति या प्रभाव के बारे में पूछा जाए, तो उसके मुख्य कारकों को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 11. विश्व परिवारस्य कथा कीदृशी? (विश्व परिवार की कथा कैसी है?)
Answer: विश्व परिवारस्य तु कथैव विलक्षणा भयावहा च। (विश्व परिवार की तो कहानी ही विलक्षण और भयावह है।)
In simple words: विश्व परिवार की कहानी बहुत अजीब और डरावनी है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जो किसी स्थिति की प्रकृति का वर्णन करते हैं, उस प्रकृति को सटीक विशेषणों के साथ व्यक्त करें।
Question 14. देशः स्वराज्यं कथं प्राप्तवान्? (देश ने स्वराज्य कैसे प्राप्त किया?)
Answer: यदा देशे स्वातन्त्रयाय स्वराज्य-भावना समागता तदैव सर्वे समागता सर्वे समवेताः प्रयासरताः च अन्ततः स्वराज्यमपुः तदपि सत्याग्रहाहिंसादिबलेन। (जब देश में स्वतन्त्रता के लिए भावना आ गई तभी सब एकत्रित हो गये। इकट्ठे हुए प्रयासरतों ने अन्त में स्वराज्य प्राप्त कर लिया, वह भी सत्याग्रह अहिंसा आदि से।)
In simple words: जब देश में स्वतंत्रता की भावना बढ़ी, तो सब लोग एकजुट हुए और सत्याग्रह व अहिंसा के माध्यम से अंततः स्वराज्य प्राप्त किया।
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित प्रश्नों में, मुख्य कारण और परिणाम को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 15. आदर्श वाक्यानि कुत्र शोभन्ते? (आदर्श वाक्य कहाँ शोभा देते हैं?)
Answer: आदर्श वाक्यानि ग्रन्थेषु एव शोभन्ते। (आदर्श वाक्य ग्रन्थों में शोभा देते हैं।)
In simple words: आदर्श वाक्य किताबों में अच्छे लगते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जो किसी स्थान या संदर्भ के बारे में पूछते हैं, उस स्थान को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
Question 16. स्वार्थसिद्धिः कीदृशः पन्थाः? (स्वार्थ सिद्धि कैसा मार्ग है?)
Answer: स्वार्थसिद्धिः तु संकुचितः पन्थाः। (स्वार्थ सिद्धि तो संकीर्ण रास्ता है।)
In simple words: स्वार्थ पूरा करने का रास्ता बहुत संकीर्ण होता है।
🎯 Exam Tip: किसी अवधारणा की प्रकृति के बारे में पूछे गए प्रश्नों में, उस प्रकृति को एक विशेषण के साथ बताएं।
Question 17. स्वार्थानन्दानुसारेण किं सर्वोपरि वर्तते ? (स्वार्थानन्द के अनुसार सर्वोपरि क्या है?)
Answer: स्वार्थानन्दानुसारेण आत्मसन्तुष्टिरेव सर्वोपरि। (स्वार्थानन्द के अनुसार आत्मसन्तुष्टि सबसे ऊपर है।)
In simple words: स्वार्थानन्द के अनुसार, आत्मसंतुष्टि सबसे बढ़कर है।
🎯 Exam Tip: जब किसी विशेष व्यक्ति के दृष्टिकोण के बारे में पूछा जाए, तो उसके नाम का उल्लेख करें और उसके विचार को सीधे बताएं।
Question 18. स्वार्थानन्दानुसारेण किं विना जीवन यात्रा नैव सम्भवति? (स्वार्थानन्द के अनुसार किसके बिना जीवन यात्रा सम्भव नहीं है।)
Answer: स्वार्थानन्दानुसारेण स्वार्थ सिद्धि विना जीवनयात्रैव न सम्भवति। (स्वार्थानन्द के अनुसार स्वार्थ सिद्धि के बिना जीवन-यात्रा सम्भव नहीं है।)
In simple words: स्वार्थानन्द का मानना है कि स्वार्थ पूरा किए बिना जीवन चलना मुश्किल है।
🎯 Exam Tip: 'किसके बिना' जैसे प्रश्नों में, उस आवश्यक तत्व को स्पष्ट रूप से पहचानें और बताएं।
Question 21. अस्मिन् युगे मनुष्यः कीदृशः जातः? (इस युग में मनुष्य कैसा हो गया है?)
Answer: अस्मिन् युगे मनुष्यः तु अद्य सर्वसम्बन्धी विस्मृत्य स्वार्थाय एव जीवति? (इस युग में मनुष्य सब सम्बन्धों को भूलकर स्वार्थ के लिए जीवित है।)
In simple words: इस युग में मनुष्य अपने सभी रिश्तों को भूलकर केवल अपने स्वार्थ के लिए जीता है।
🎯 Exam Tip: वर्तमान सामाजिक प्रवृत्तियों पर आधारित प्रश्नों में, वर्तमान स्थिति का सटीक वर्णन करें।
Question 22. देवस्य हविः कस्य स्वार्थ साधनाय? (देवता की हवि किसकी स्वार्थ साधना के लिए होती है?)
Answer: देवस्य हविः यजमानस्य स्वार्थ साधनाय भवति। (देवता की हवि यजमान की स्वार्थ साधना के लिए होती है।)
In simple words: देवता को दी जाने वाली आहुति यजमान के अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए होती है।
🎯 Exam Tip: धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित प्रश्नों में, उस अनुष्ठान के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करें।
Question 23. 'इन्द्राय स्वाहा-इदं न मम' अत्र यजमानस्य कीदृग्भावनायाः परिचय प्राप्यते?) ('इन्द्र के लिए स्वाहा-यह मेरा नहीं है' यहाँ यजमान की कैसी भावना का परिचय मिलता है?)
Answer: वाक्येऽस्मिन् यजमानस्य नि:स्वार्थ भावनायाः परिचयः प्राप्यते। (इस वाक्य में यजमान की नि:स्वार्थ भावना का परिचय मिलता है।)
In simple words: 'इन्द्राय स्वाहा-इदं न मम' कहने से यजमान की निस्वार्थ भावना का पता चलता है।
🎯 Exam Tip: उद्धरणों से संबंधित प्रश्नों में, उस उद्धरण से प्रकट होने वाली भावना या विचार को पहचानें।
Question 24. 'इदं न मम' इति अस्य पुनरावृत्तेः का आवश्यकता वर्तते? ('इदं न मम' इसको बार-बार कहने की क्या आवश्यकता है?)
Answer: इदं वाक्यं पुनः- पुनः कथनेन यजमानस्य नि:स्वार्थ भावः समर्पणं च सिद्धयते। (यह वाक्य कहने से यजमान की नि:स्वार्थ और समर्पण भावना सिद्ध होती है।)
In simple words: 'इदं न मम' बार-बार कहने से यजमान की निस्वार्थ और समर्पण की भावना मजबूत होती है।
🎯 Exam Tip: किसी वाक्यांश की पुनरावृत्ति के महत्व के बारे में पूछे गए प्रश्नों में, उस पुनरावृत्ति के भावनात्मक या प्रतीकात्मक प्रभाव को बताएं।
Question 25. परार्थानन्द – स्वार्थानन्दौ आचार्यायाः समीपे केन प्रयोजनेन अगच्छताम्? (परार्थानन्द और स्वार्थानन्द आचार्य के समीप किस प्रयोजन से गए ?)
Answer: परानन्दः- स्वार्थानन्दः च शंका समाधानाय जिज्ञासां शमनाय च आचार्यायाः समीपेऽगच्छताम्। (परार्थानन्द और स्वार्थानन्द शंका समाधान और जिज्ञासा शान्ति के लिए आचार्या के पास गये थे।)
In simple words: परार्थानन्द और स्वार्थानन्द अपनी शंकाओं को दूर करने और अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए आचार्या के पास गए।
🎯 Exam Tip: पात्रों के उद्देश्यों से संबंधित प्रश्नों में, उनकी प्रेरणाओं को स्पष्ट रूप से बताएं।
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