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Detailed व्याकरणम् शब्दरूप प्रकरणम् RBSE Solutions for Class 11 Sanskrit
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Class 11 Sanskrit व्याकरणम् शब्दरूप प्रकरणम् RBSE Solutions PDF
अभ्यासः 1
Question 1. अधोलिखितेषु रिक्तस्थानेषु कोष्ठकांकितः निर्देशानुसार पूर्ति कुरुत (निम्नलिखित रिक्त स्थानों को कोष्ठक में अंकित निर्देशानुसार पूर्ति करिए)
(i) ______ तत्र गमिष्यामि। (अस्मद् शब्द, प्रथमा-विभक्ति-एकवचनम्)
(ii) मोहनः ______ खंजः। (पाद-शब्द-तृतीया-विभक्ति-एकवचनम्)
(iii) ______ पितुः नाम मोहनः अस्ति। (अस्मदः-षष्ठी-विभक्ति-एकवचनम्)
(iv) ______ रोयते भक्तिः। (हरि-शब्द-चतुर्थी-विभक्ति-एकवचनम्)
(v) ______ आत्मा अस्ति। (सर्व-शब्द-सप्तमी-विभक्ति-एकवचनम्)
(vi) ______ विश्वस्य मातरः (गो-शब्द-प्रथमा-विभक्ति-एकवचनम्)
(vii) रामस्य ______ किं नाम असीत्? (पितृ-शब्द-प्रथमा-विभक्ति-एकवचनम्)
(viii) ______ मानवः श्रेष्ठतमः। (प्राणिन-शब्द-सप्तमी-विभक्ति-एकवचनम्)
(ix) ______ विना नाहं जीवामि। (युष्मद्-शब्द-तृतीया-विभक्ति-एकवचनम्)
(x) ______ अहम् बहिरागतः। (तत्-शब्द, पुल्लिंग-पंचमी-विभक्ति-एकवचनम्)
Answer:
(i) अहम्
(ii) पादेन
(iii) मम
(iv) हरये
(v) सर्वस्मिन्
(vi) गौः
(vii) पिता
(viii) प्राणिषु
(ix) त्वया
(x) तस्मात्
यह अभ्यास आपको संस्कृत शब्दों के सही व्याकरणिक रूपों का उपयोग करके खाली स्थान भरने में मदद करता है। यह सुनिश्चित करता है कि आप विभक्ति, वचन और लिंग के अनुसार शब्दों का सही प्रयोग करना सीखें।
In simple words: आपको दिए गए शब्दों का सही रूप चुनकर खाली जगह भरनी है, ताकि वाक्य व्याकरण के अनुसार सही हो।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थानों की पूर्ति करते समय, कोष्ठक में दिए गए मूल शब्द, उसकी विभक्ति और वचन पर ध्यान दें ताकि आप वाक्य में सही रूप का प्रयोग कर सकें।
अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तराणि
अभ्यास: 2
Question 1. अधोलिखितानां शब्दरूपाणां वाक्येषु प्रयोगं कुरुत (निम्नलिखित शब्दरूपों का वाक्यों में प्रयोग करो-)
पूर्वस्यां, द्वितीयम्, सखा, रमायै, पूर्वेः, हरिः, पितृभ्यः, सखिषु, स्वसुः, राज्ञाम्, भवान्, भवती, विद्वांसः, अमूः, दिशु, सरितः, कर्मणा, नवे, वाक्, पञ्च।
Answer:
1. सूर्य पूर्व दिशा में उगता है।
2. कक्षा में मेरा दूसरा स्थान है।
3. रमेश मेरा दोस्त है।
4. रमा के लिए फल हैं।
5. मोहन पहले कर्णपुर नगर में रहता था।
6. हरि विद्यालय जाता है।
7. राकेश अपने पिता के लिए जल अर्पित करता है।
8. सखियों में रमा सबसे सुंदर है।
9. राम कल बहन के घर जाएगा।
10. राजाओं का व्यवहार सुंदर होता है।
11. आप कहाँ रहते हैं?
12. आप क्या पढ़ती हैं?
13. राजा अपने देश में पूजे जाते हैं, पर विद्वान हर जगह पूजे जाते हैं।
14. वे (ये) कहाँ रहते हैं?
15. दिशाओं में काले बादल हैं।
16. नदी का जल ठंडा होता है।
17. कर्म के बिना जीवन नहीं है।
18. उस विद्यालय में नौ छात्र हैं।
यह अभ्यास संस्कृत शब्दों के विभिन्न रूपों को सही व्याकरण के साथ वाक्यों में प्रयोग करना सिखाता है, जिससे भाषा की समझ बढ़ती है और आप वाक्य रचना में पारंगत होते हैं।
In simple words: आपको दिए गए संस्कृत शब्दों का उपयोग करके वाक्य बनाने हैं। हर वाक्य में शब्द का सही व्याकरण रूप इस्तेमाल होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: वाक्य प्रयोग करते समय, शब्द का अर्थ और उसका वाक्य में सही स्थान समझें। विभक्ति और वचन का उचित प्रयोग ही सही वाक्य बनाता है।
अभ्यासः 3
Question 1. अधोलिखितानां शब्दरूपाणां वाक्येषु प्रयोगं कुरुत- (निम्नलिखित शब्द-रूपों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-)
पूर्वस्याम्, सर्वेषाम्, षष्ठी, प्रथमः, हरिः, हरये, पितुः, हे हरे, रमायाः, स्वसा, गावः, गो:, राजभिः, भवतीभ्याम्, भवान्, विद्वत्सु, विदुषी, सरित्सु, दिशः, कर्माणि।
Answer:
1. सूर्य सुबह पूर्व दिशा में उगता है।
2. सभी का कल्याण हो।
3. इस शब्द में षष्ठी विभक्ति है।
4. राकेश बातचीत में पहले स्थान पर था।
5. हरि संसार का आधार है।
6. लता हरि के लिए फल देती है।
7. उसके पिता का नाम रमेश है।
8. हे हरि, हमारा कल्याण करो।
9. सरोज रमा की अध्यापिका है।
10. मनोज की बहन गीता है।
11. खेत में गायें घास चर रही हैं।
12. गाय का दूध मीठा होता है।
13. राजाओं द्वारा प्रजा का कल्याण किया जाता है।
14. दो आदरणीय महिलाओं से माँ कहाँ रहती है?
15. आप हमारे बहनोई हैं।
16. कालिदास विद्वानों में श्रेष्ठ थे।
17. गार्गी विदुषी महिला थी।
18. नदियों में गंगा पवित्र है।
19. दस दिशाएं होती हैं।
20. श्रीकृष्ण ने कहा-अर्जुन, कर्म करो।
यह अभ्यास संस्कृत शब्दों के विभिन्न रूपों को सही व्याकरण के साथ वाक्यों में प्रयोग करना सिखाता है, जिससे भाषा की समझ बढ़ती है। यह अभ्यास छात्रों को शब्द-रूपों के व्यावहारिक उपयोग में सहायता करता है।
In simple words: आपको दिए गए संस्कृत शब्दों को सही रूप में इस्तेमाल करके वाक्य बनाने हैं, ताकि आप उनके अलग-अलग व्याकरण रूपों को सीख सकें।
🎯 Exam Tip: शब्द-रूपों का वाक्य प्रयोग करते समय, शब्द की विभक्ति (case) और वचन (number) का विशेष ध्यान रखें ताकि वाक्य का अर्थ सही रहे।
अभ्यास: 4
Question 1. कोष्ठके प्रदत्तशब्दरूपेण उचितविभक्तिवचनानुसारेण रिक्तस्थानानि पूरयत (कोष्ठक में दिये गये शब्द-रूप से उचित विभक्ति तथा वचन के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-)
1. अहं जनकस्य चक्षुषा ______ भूतानि समीक्षे। (सर्व)
2. ______ अपि उद्यानस्य शोभाम् आलोकयतु। (भवत् पु.)
3. ______ नाहं ददामि। (हरि)
4. ______ दुग्धं मधुरं भवति। (गो)
5. ______ प्रजानां कल्याणं क्रियते। (राजन्)
6. ______ अध्यापिका अस्ति। (रमा)
7. ______ अस्माकं कल्याणं कुरु। (हरि)
8. ______ सुखं तिष्ठति। (सर्व)
9. ______ सूर्योदयः भवति। (पूर्व)
10. अस्य उत्सवस्य ______ सज्जा दर्शनीया। (सर्व)
11. पुत्रः ______ उपगच्छति। (पितृ)
12. प्रतिदिनं ______ गोग्रास देयम्। (गो)
13. ______ जनाः आपणं गमिष्यन्ति। (सर्व)
14. श्वः ______ तिथि आगमिष्यति। (द्वितीय)
15. सुदामाकृष्णौ ______ आस्ताम्। (सखि)
16. इमानि पुस्तकानि ______ सन्ति। (रमा)
17. ______ सर्वोत्तमं धनं भ्राता भवति। (स्वसृ)
18. सर्वे ______ सम्पत्तिशालिनः भवन्ति। (राज)
19. ______ विद्यालयस्य नाम किम् अस्ति? (भवत्)
20. लालबहादुरशास्त्रिः ______ पुरुषः आसीत्। (विद्वस्)
Answer:
1. अहं जनकस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे।
2. भवान् अपि उद्यानस्य शोभाम् आलोकयतु।
3. हरेः नाहं ददामि।
4. गोः दुग्धं मधुरं भवति।
5. राज्ञः प्रजानां कल्याणं क्रियते।
6. रमायाः अध्यापिका अस्ति।
7. हरिः अस्माकं कल्याणं कुरु।
8. सर्वेभ्यः सुखं तिष्ठति।
9. पूर्वस्मिन् सूर्योदयः भवति।
10. अस्य उत्सवस्य सर्वा सज्जा दर्शनीया।
11. पुत्रः पितरम् उपगच्छति।
12. प्रतिदिनं गवे गोग्रास देयम्।
13. सर्वे जनाः आपणं गमिष्यन्ति।
14. श्वः द्वितीया तिथि आगमिष्यति।
15. सुदामाकृष्णौ सखायौ आस्ताम्।
16. इमानि पुस्तकानि रमायै सन्ति।
17. स्वसुः सर्वोत्तमं धनं भ्राता भवति।
18. सर्वे राजानः सम्पत्तिशालिनः भवन्ति।
19. भवतः विद्यालयस्य नाम किम् अस्ति?
20. लालबहादुरशास्त्रिः विद्वान् पुरुषः आसीत्।
यह अभ्यास आपको संस्कृत शब्दों के सही व्याकरणिक रूपों का उपयोग करके रिक्त स्थान भरने में मदद करता है। यह छात्रों को विभक्ति, वचन और लिंग के अनुसार शब्द रूपों को समझने में सहायता करता है।
In simple words: आपको कोष्ठक में दिए गए शब्द का सही रूप चुनकर खाली जगह भरनी है, ताकि वाक्य सही और व्याकरण के अनुसार हो।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के अर्थ और कोष्ठक में दिए गए मूल शब्द, विभक्ति तथा वचन पर ध्यान दें। यह सुनिश्चित करता है कि आप सही रूप का प्रयोग करें।
(i) अजन्त-शब्दरूपाणि
(1) 'सर्व' शब्द (पुल्लिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वः | सर्वो | सर्वे |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वो | सर्वान् |
| तृतीया | सर्वेण | सर्वाभ्याम् | सर्वैः |
| चतुर्थी | सर्वस्मै | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| पंचमी | सर्वस्मात् | सर्वाभ्याम् | सर्वेभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्य | सर्वयोः | सर्वेषाम् |
| सप्तमी | सर्वस्मिन् | सर्वयोः | सर्वेषु |
[नोट-सर्वनाम शब्दों का सम्बोधन नहीं होता।]
'सर्व' शब्द (स्त्रीलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वा | सर्वे | सर्वाः |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वे | सर्वाः |
| तृतीया | सर्वया | सर्वाभ्याम् | सर्वाभिः |
| चतुर्थी | सर्वस्यै | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| पंचमी | सर्वस्याः | सर्वाभ्याम् | सर्वाभ्यः |
| षष्ठी | सर्वस्याः | सर्वयोः | सर्वासाम् |
| सप्तमी | सर्वस्याम् | सर्वयोः | सर्वासु |
'सर्व' शब्द (नपुंसकलिंग)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सर्वम् | सर्वे | सर्वाणि |
| द्वितीया | सर्वम् | सर्वे | सर्वाणि |
[नोट-शेष तृतीया विभक्ति से सप्तमी विभक्ति तक के रूप पुल्लिंग के समान चलेंगे।]
(2) पूर्व (पूर्व दिशा अथवा पहला) पुल्लिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पूर्वः | पूर्वे | पूर्वाः |
| द्वितीया | पूर्वम् | पूर्वे | पूर्वान् |
| तृतीया | पूर्वेण | पूर्वाभ्याम् | पूर्वैः |
| चतुर्थी | पूर्वस्मै | पूर्वाभ्याम् | पूर्वेभ्यः |
| पंचमी | पूर्वस्मात्, पूर्वेः | पूर्वाभ्याम् | पूर्वेभ्यः |
| षष्ठी | पूर्वस्य | पूर्वयोः | पूर्वेषाम् |
| सप्तमी | पूर्वस्मिन्, पूर्वे | पूर्वयोः | पूर्वेषु |
पूर्व (पूर्व दिशा अथवा पहला) नपुंसकलिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पूर्वम् | पूर्वे | पूर्वाणि |
| द्वितीया | पूर्वम् | पूर्वे | पूर्वाणि |
| तृतीया | पूर्वया | पूर्वाभ्याम् | पूर्वाभिः |
| चतुर्थी | पूर्वस्यै | पूर्वाभ्याम् | पूर्वाभ्यः |
| पंचमी | पूर्वस्याः | पूर्वाभ्याम् | पूर्वाभ्यः |
| षष्ठी | पूर्वस्याः | पूर्वयोः | पूर्वासाम् |
| सप्तमी | पूर्वस्याम् | पूर्वयोः | पूर्वासु |
'एक' शब्द
| विभक्ति | पुल्लिंग (एकवचन) | स्त्रीलिंग (एकवचन) | नपुंसकलिंग (एकवचन) |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | एकः | एका | एकम् |
| द्वितीया | एकम् | एकाम् | एकम् |
| तृतीया | एकेन | एकया | एकेन |
| चतुर्थी | एकस्मै | एकस्यै | एकस्मै |
| पंचमी | एकस्मात् | एकस्याः | एकस्मात् |
| षष्ठी | एकस्य | एकस्याः | एकस्य |
| सप्तमी | एकस्मिन् | एकस्याम् | एकस्मिन् |
[नोट-'एक' शब्द के रूप तीनों लिंगों में केवल एकवचन में ही चलते हैं। संख्यावाचक शब्दों के सम्बोधन-विभक्ति में रूप नहीं चलते हैं।]
(4) संख्यावाची द्वि (दो) शब्द [तीनों लिंगों में द्विवचनान्त]
| विभक्ति | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | द्वौ | द्वे | द्वे |
| द्वितीया | द्वौ | द्वे | द्वे |
| तृतीया | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| पंचमी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
[नोट – द्वि (दो) शब्द के रूप तीनों लिंगों में केवल द्विवचन में ही चलते हैं।]
(ii) क्रम संख्या-बोधक विशेषण शब्द-रूपः
| क्रम | संख्या | पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | नपुंसकलिंग |
|---|---|---|---|---|
| 1. | एक | प्रथमः | प्रथमा | प्रथमम् |
| 2. | द्वि | द्वितीयः | द्वितीया | द्वितीयम् |
| 3. | त्रि | तृतीयः | तृतीया | तृतीयम् |
| 4. | चतुर्थ | चतुर्थः | चतुर्थी | चतुर्थम् |
| 5. | पञ्च् | पञ्चमः | पञ्चमी | पञ्चमम् |
| 6. | षट् | षष्ठः | षष्ठी | षष्ठम् |
| 7. | सप्तन् | सप्तमः | सप्तमी | सप्तम् |
| 8. | अष्टन् | अष्टमः | अष्टमी | अष्टम् |
| 9. | नव | नवमः | नवमी | नवम् |
| 10. | दशन् | दशमः | दशमी | दशम् |
[नोट-क्रम संख्या-बोधक विशेषणों के रूप तीनों लिंगों में अलग-अलग होते हैं। पाठ्यक्रम में केवल प्रथम तथा। द्वितीय शब्दों के रूप ही शब्द तक के रूपों को दिया गया है।]
(5) इकारान्त पुल्लिंग 'हरि' (भगवान्) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | हरिः | हरी | हरयः |
| द्वितीया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभिः |
| चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पंचमी | हरेः | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| षष्ठी | हरेः | हर्योः | हरीणाम् |
| सप्तमी | हरौ | हर्योः | हरिषु |
| सम्बोधन | हे हरे ! | हे हरी ! | हे हरयः ! |
(6) इकरान्त पुल्लिंग 'सखि' (मित्र) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सखा | सखायौ | सखायः |
| द्वितीया | सखायम् | सखायौ | सखीन् |
| तृतीया | सख्या | सखिभ्याम् | सखिभिः |
| चतुर्थी | सख्ये | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| पंचमी | सख्युः | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| षष्ठी | सख्युः | सख्योः | सखीनाम् |
| सप्तमी | सख्यौ | सख्योः | सखिषु |
| सम्बोधन | हे सखे ! | हे सखायौ ! | हे सखायः ! |
(7) ऋकारान्त पुल्लिंग 'पितृ' (पिता) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पिता | पितरौ | पितरः |
| द्वितीया | पितरम् | पितरौ | पितृन् |
| तृतीया | पित्रा | पितृभ्याम् | पितृभिः |
| चतुर्थी | पित्रे | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| पंचमी | पितुः | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| षष्ठी | पितुः | पित्रोः | पितृणाम् |
| सप्तमी | पितरि | पित्रोः | पितृषु |
| सम्बोधन | हे पितः ! | हे पितरौ ! | हे पितरः ! |
[नोट-इसी प्रकार ह्रस्व 'ऋ' से अन्त होने वाले अन्य पुल्लिग शब्दों-भ्रातृ (भाई) और जामातृ (जमाई, दामाद) आदि के रूप चलेंगे।]
(8) आकारान्त स्त्रीलिंग 'रमा' (लक्ष्मी) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रमा | रमे | रमाः |
| द्वितीया | रमाम् | रमे | रमाः |
| तृतीया | रमया | रमाभ्याम् | रमाभिः |
| चतुर्थी | रमायै | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| पंचमी | रमायाः | रमाभ्याम् | रमाभ्यः |
| षष्ठी | रमायाः | रमयोः | रमाणाम् |
| सप्तमी | रमायाम् | रमयोः | रमासु |
| सम्बोधन | हे रमे ! | हे रमे ! | हे रमाः ! |
[नोट-इसी प्रकार 'आ' से अन्त होने वाले अन्य स्त्रीलिंग शब्दों-बाला (लड़की), लता, कन्या (लड़की), रक्षा, कथा (कहानी), क्रीडा (खेल), पाठशाला (विद्यालय), शीला, लीला, सीता, गीता, विमला, प्रमिला, प्रभा, विभा, सुधी (अमृत), चेष्टा (यत्न), विद्या, कक्षा, व्यथा (कष्ट) और बालिका (लड़की) आदि के रूप चलते हैं।]
विशेष – जिन शब्दों में र, ऋ अथवा ५ वर्ण होता है, उनमें षष्ठी बहुवचन में 'न्' के स्थान पर 'ए' हो जाता है। जैसे- रमा शब्द में 'र' है। अतः षष्ठी बहुवचन में 'रमाणाम्' रूप बनेगा।
(9) ऋकारान्त स्त्रीलिंग 'स्वसृ' (बहिन) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | स्वसा | स्वसारौ | स्वसारः |
| द्वितीया | स्वसारम् | स्वसारौ | स्वसृः |
| तृतीया | स्वस्रा | स्वसृभ्याम् | स्वसृभिः |
| चतुर्थी | स्वस्रे | स्वसृभ्याम् | स्वसृभ्यः |
| पंचमी | स्वसुः | स्वसृभ्याम् | स्वसृभ्यः |
| षष्ठी | स्वसुः | स्वस्रोः | स्वसृणाम् |
| सप्तमी | स्वसरि | स्वस्रोः | स्वसृषु |
| सम्बोधन | हे स्वसः ! | हे स्वसारौ ! | हे स्वसारः ! |
(10) औकारान्त पुल्लिंग 'गौ' (गाय अथवा बैल) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गौः | गावौ | गावः |
| द्वितीया | गाम् | गावौ | गाः |
| तृतीया | गवा | गोभ्याम् | गोभिः |
| चतुर्थी | गवे | गोभ्याम् | गोभ्यः |
| पंचमी | गोः | गोभ्याम् | गोभ्यः |
| षष्ठी | गोः | गवोः | गवाम् |
| सप्तमी | गवि | गवोः | गोषु |
| सम्बोधन | हे गौ ! | हे गावौ ! | हे गावः ! |
(1) नकारान्त पुल्लिंग 'राजन्' (राजा) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | राजा | राजानौ | राजानः |
| द्वितीया | राजानम् | राजानौ | राज्ञः |
| तृतीया | राज्ञा | राजभ्याम् | राजभिः |
| चतुर्थी | राज्ञे | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| पंचमी | राज्ञः | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| षष्ठी | राज्ञः | राज्ञोः | राज्ञाम् |
| सप्तमी | राज्ञि, राजनि | राज्ञोः | राजसु |
| सम्बोधन | हे राजन् ! | हे राजानौ ! | हे राजानः ! |
[नोट-सभी नकारान्त शब्द रूप (पुल्लिंग) राजन् के समान ही चलते हैं।]
(2) 'भवत्' (आप-प्रथम पुरुष) पुल्लिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भवान् | भवन्तौ | भवन्तः |
| द्वितीया | भवन्तम् | भवन्तौ | भवतः |
| तृतीया | भवता | भवद्भ्याम् | भवद्भिः |
| चतुर्थी | भवते | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| पंचमी | भवतः | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| षष्ठी | भवतः | भवतोः | भवताम् |
| सप्तमी | भवति | भवतोः | भवत्सु |
[नोट – यह संज्ञा शब्द नहीं है। सर्वनाम शब्दों में सम्बोधन नहीं होता।]
भवत् (आप) नपुंसकलिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भवत् | भवती | भवन्ती |
| द्वितीया | भवत् | भवती | भवन्ती |
[नोट – शेष सभी विभक्तियों के रूप पुल्लिंग के समान ही चलेंगे।]
(3) 'भवत्' (आप-प्रथम पुरुष) स्त्रीलिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भवती | भवत्यौ | भवत्यः |
| द्वितीया | भवन्तीम् | भवत्यौ | भवतीः |
| तृतीया | भवत्या | भवतीभ्याम् | भवतीभिः |
| चतुर्थी | भवत्यै | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| पंचमी | भवत्याः | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| षष्ठी | भवत्याः | भवत्योः | भवतीनाम् |
| सप्तमी | भवत्याम् | भवत्योः | भवतीषु |
(3) तादृश (वैसा) पुल्लिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | तादृक्-ग् | तादृशौ | तादृशः |
| द्वितीया | तादृशम् | तादृशौ | तादृशः |
| तृतीया | तादृशा | तादृग्भ्याम् | तादृग्भिः |
| चतुर्थी | तादृशे | तादृग्भ्याम् | तादृग्भ्यः |
| पंचमी | तादृशः | तादृग्भ्याम् | तादृग्भ्यः |
| षष्ठी | तादृशः | तादृशोः | तादृशाम् |
| सप्तमी | तादृशि | तादृशोः | तादृक्षु |
| सम्बोधन | हे तादृक् - ग् ! | हे तादृशौ ! | हे तादृशः ! |
(4) विद्वस् (विद्वान्) शब्द पुल्लिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | विद्वान् | विद्वांसौ | विद्वांसः |
| द्वितीया | विद्वांसम् | विद्वांसौ | विदुषः |
| तृतीया | विदुषा | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भिः |
| चतुर्थी | विदुषे | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| पंचमी | विदुषः | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| षष्ठी | विदुषः | विदुषोः | विदुषाम् |
| सप्तमी | विदुषि | विदुषोः | विद्वत्सु |
| सम्बोधन | हे विद्वान् ! | हे विद्वांसौ ! | हे विद्वांसः ! |
(5) सर्वनाम अदस् (वह) पुल्लिंग
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | असौ | अमू | अमी |
| द्वितीया | अमुम् | अमू | अमून् |
| तृतीया | अमुना | अमूभ्याम् | अमीभिः |
| चतुर्थी | अमुष्मै | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| पंचमी | अमुष्मात् | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्य | अमुयोः | अमीषाम् |
| सप्तमी | अमुष्मिन् | अमुयोः | अमीषु |
[नोट-सर्वनाम शब्दों में सम्बोधन नहीं होता है।]
स्त्रीलिङ्ग 'अदस्' (वह)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | असौ | अमू | अमूः |
| द्वितीया | अमुम् | अमू | अमूः |
| तृतीया | अमुया | अमूभ्याम् | अमूभिः |
| चतुर्थी | अमुष्यै | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| पंचमी | अमुष्याः | अमूभ्याम् | अमूभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्याः | अमुयोः | अमूषाम् |
| सप्तमी | अमुष्याम् | अमुयोः | अमूषु |
नपुंसकलिंग 'अदस्' (वह)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अदः | अमू | अमूनि |
| द्वितीया | अदः | अमू | अमूनि |
| तृतीया | अमुना | अमूभ्याम् | अमीभिः |
| चतुर्थी | अमुष्मै | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| पंचमी | अमुष्मात्/द् | अमूभ्याम् | अमीभ्यः |
| षष्ठी | अमुष्य | अमुयोः | अमीषाम् |
| सप्तमी | अमुष्मिन् | अमुयोः | अमीषु |
(6) हलन्त शकारान्त स्त्रीलिंग 'दिश्' (दिशा) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | दिक्, दिश् | दिशौ | दिशः |
| द्वितीया | दिशम् | दिशौ | दिशः |
| तृतीया | दिशा | दिग्भ्याम् | दिग्भिः |
| चतुर्थी | दिशे | दिग्भ्याम् | दिग्भ्यः |
| पंचमी | दिशः | दिग्भ्याम् | दिग्भ्यः |
| षष्ठी | दिशः | दिशोः | दिशाम् |
| सप्तमी | दिशि | दिशोः | दिक्षु |
| सम्बोधन | हे दिक्, हे दिग् ! | हे दिशौ ! | हे दिशः ! |
(7) नकारान्त नपुंसकलिंग 'कर्मन्' (कर्म) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कर्म | कर्मणी | कर्माणि |
| द्वितीया | कर्म | कर्मणी | कर्माणि |
| तृतीया | कर्मणा | कर्मभ्याम् | कर्मभिः |
| चतुर्थी | कर्मणे | कर्मभ्याम् | कर्मभ्यः |
| पंचमी | कर्मणः | कर्मभ्याम् | कर्मभ्यः |
| षष्ठी | कर्मणः | कर्मणोः | कर्मणाम् |
| सप्तमी | कर्मणि | कर्मणोः | कर्मसु |
| सम्बोधन | हे कर्मण ! | हे कर्मणी ! | हे कर्माणि ! |
[नोट-इसी प्रकार पर्वन्, शर्मन्, वर्मन् आदि नकारान्त नपुंसकलिंग शब्दों के रूप चलेंगे।]
(8) हलन्त चकारान्त स्त्रीलिंग 'वाच्' (वाणी) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | वाक् | वाचौ | वाचः |
| द्वितीया | वाचम् | वाचौ | वाचः |
| तृतीया | वाचा | वाग्भ्याम् | वाग्भिः |
| चतुर्थी | वाचे | वाग्भ्याम् | वाग्भ्यः |
| पंचमी | वाचः | वाग्भ्याम् | वाग्भ्यः |
| षष्ठी | वाचः | वाचोः | वाचाम् |
| सप्तमी | वाचि | वाचोः | वाक्षु |
| सम्बोधन | हे वाक् ! | हे वाचौ ! | हेवाचः ! |
[नोट-सृच् (भाला), त्वक् (त्वचा) के रूप भी इसी प्रकार चलते हैं।]
(9) नकारान्त नपुंसकलिंग 'पञ्चन्' (पाँच) शब्द
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पञ्च | पञ्च | पञ्च |
| द्वितीया | पञ्च | पञ्च | पञ्च |
| तृतीया | पञ्चभिः | पञ्चभ्याम् | पञ्चभिः |
| चतुर्थी | पञ्चभ्यः | पञ्चभ्याम् | पञ्चभ्यः |
| पंचमी | पञ्चभ्यः | पञ्चभ्याम् | पञ्चभ्यः |
| षष्ठी | पञ्चानाम् | पञ्चानाम् | पञ्चानाम् |
| सप्तमी | पञ्चसु | पञ्चसु | पञ्चसु |
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