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Detailed Chapter 7 राज्य की उत्पत्ति के सिद्धान्त RBSE Solutions for Class 11 Political Science
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Class 11 Political Science Chapter 7 राज्य की उत्पत्ति के सिद्धान्त RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मानव स्वभाव के विषय में शक्ति सिद्धान्त के क्या विचार हैं?
Answer: शक्ति सिद्धान्त के अनुसार, मानव स्वभाव में दूसरों पर हावी होने की इच्छा और आक्रामक व्यवहार होता है। यह सिद्धान्त मानता है कि लोग हमेशा ताकत और प्रभुत्व की तलाश में रहते हैं।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि इंसान में हमेशा दबदबा बनाने और लड़ने की इच्छा होती है।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी सिद्धान्त के विचारों पर प्रश्न हो, उसकी मुख्य बातों को स्पष्ट और संक्षिप्त शब्दों में लिखें, खासकर मानव स्वभाव के बारे में उसकी धारणा।
Question 2. मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार का मुखिया कौन होता है?
Answer: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार की मुखिया 'माँ' या घर की सबसे बड़ी महिला सदस्य होती है। इस व्यवस्था में अधिकार और वंश माता के नाम से चलता है।
In simple words: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार की मुखिया माँ या सबसे बड़ी महिला होती है।
🎯 Exam Tip: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त से जुड़े प्रश्नों में हमेशा मुखिया की पहचान और वंश के नियम को स्पष्ट करें।
Question 4. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त का दोष क्या है?
Answer: पितृ सत्तात्मक व्यवस्था पूरी दुनिया में एक जैसी नहीं पाई जाती है। इसके अलावा, यह सिद्धान्त महिलाओं की भूमिका को कम आँकता है और राज्य के विकास में केवल पुरुषों के योगदान पर जोर देता है।
In simple words: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की एक कमी यह है कि यह व्यवस्था पूरे विश्व में समान रूप से नहीं पाई जाती।
🎯 Exam Tip: सिद्धान्तों के दोषों को बताते समय, उनके सार्वभौमिकता की कमी या किसी विशेष पक्षपात को उजागर करें।
Question 5. दैवीय सिद्धान्त शासन के किस रूप को श्रेष्ठ मानता है?
Answer: दैवीय सिद्धान्त राजतन्त्र को शासन का सबसे अच्छा रूप मानता है। इस सिद्धान्त के अनुसार, राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है और उसके आदेशों का पालन करना धार्मिक कर्तव्य होता है।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त राजतन्त्र को सबसे अच्छा शासन मानता है।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त से जुड़े प्रश्नों में हमेशा राजतन्त्र और राजा की ईश्वरीय सत्ता के सम्बन्ध को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की आलोचना कीजिए।
Answer: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की प्रमुख आलोचनाएँ इस प्रकार हैं-
1. यह सिद्धान्त ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह साबित नहीं है। इतिहास में यह साफ नहीं है कि शुरुआती परिवार पुरुष प्रधान थे या स्त्री प्रधान।
2. यह सिद्धान्त राज्य के विकास में परिवार के अलावा दूसरे ज़रूरी तत्वों पर ध्यान नहीं देता है।
3. यह सिद्धान्त ज़्यादा सामाजिक है और राजनीतिक कम, क्योंकि यह सिर्फ समाज के विकास की बात करता है, राज्य की नहीं।
4. इसे बहुत सीधा-सादा सिद्धान्त माना जाता है, जबकि राज्य बहुत ही जटिल तरीके से विकसित हुआ है।
5. यह व्यवस्था पूरी दुनिया में नहीं थी। कई जगहों पर मातृ प्रधान और पितृ प्रधान दोनों तरह की व्यवस्थाएँ साथ में देखी गई हैं।
6. इस सिद्धान्त में स्त्री को पुरुष से कमज़ोर माना जाता है, इसलिए वंश को स्त्री से चलाना सही नहीं लगता।
In simple words: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की आलोचना इस आधार पर की जाती है कि यह ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह सही नहीं है, राज्य के विकास के अन्य कारकों की उपेक्षा करता है, और महिलाओं को कमज़ोर मानता है।
🎯 Exam Tip: जब किसी सिद्धान्त की आलोचना करनी हो, तो उसके ऐतिहासिक प्रमाणों की कमी, अन्य कारकों की उपेक्षा, और किसी पक्षपातपूर्ण धारणा पर ध्यान दें।
Question 2. शक्ति सिद्धान्त की कमियों का उल्लेख करो।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के शक्ति सिद्धान्त की प्रमुख कमियाँ इस प्रकार हैं-
1. यह सिद्धान्त मानता है कि राज्य निर्माण में शक्ति ही सब कुछ है, जबकि इच्छा, धर्म और रक्त सम्बन्ध जैसे अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं। यह सिद्धान्त शक्ति को ही एकमात्र निर्णायक तत्व मानता है, जो सही नहीं है।
2. यह सिद्धान्त मानव स्वभाव को केवल एक ही नज़रिए से देखता है, जैसे कि मनुष्य सिर्फ प्रभुत्व और आक्रामकता चाहता है, जबकि मानव में सहयोग और सामाजिकता भी होती है।
7. यह सिद्धान्त अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और विश्व भाईचारे का विरोध करता है, क्योंकि यह हमेशा ताकत और संघर्ष पर जोर देता है।
8. यह सिद्धान्त सिर्फ भौतिक शक्ति को महत्व देता है, जबकि आज के समय में आध्यात्मिक, तकनीकी और कानूनी शक्तियाँ भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त की कमियाँ हैं कि यह शक्ति को ही सब कुछ मानता है, मानव स्वभाव को एकतरफा दिखाता है, और शान्ति व अन्य आधुनिक शक्तियों को नज़रअंदाज़ करता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त की कमियाँ बताते समय, इसकी एकतरफा प्रकृति, शान्ति विरोधी रवैया, और अन्य शक्तियों को नज़रअंदाज़ करने की प्रवृत्ति पर फोकस करें।
Question 3. दैवीय सिद्धान्त राज्य के क्या कर्त्तव्य बताता है?
Answer: दैवीय सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति का एक बहुत पुराना और काल्पनिक विचार है। यह कहता है कि राज्य ईश्वर ने लोगों की भलाई के लिए बनाया है। राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है और वह सिर्फ ईश्वर के प्रति जवाबदेह होता है, किसी कानून के अधीन नहीं। राजा ही कानून बनाता है।
इस सिद्धान्त के अनुसार, कोई भी शक्ति राजा की इच्छा और ताकत को रोक नहीं सकती। राज्य के आदेश ही कानून होते हैं और उसके काम हमेशा न्यायपूर्ण और उदार होते हैं। राज्य की सत्ता परिवार से मिलती है; राजा के मरने के बाद उसका बेटा ही अगला राजा बनता है। राजा को जनता की भलाई के लिए अच्छे काम करने चाहिए। यदि राजा अत्याचार करता है, तो जनता को उसका विरोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि ईश्वर खुद उसके बुरे कामों का हिसाब लेगा।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त के अनुसार, राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है, जो ईश्वर की इच्छा से शासन करता है और सिर्फ ईश्वर के प्रति जवाबदेह होता है। जनता को राजा का विरोध नहीं करना चाहिए, भले ही वह अत्याचार करे।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के सन्दर्भ में राजा के कर्त्तव्यों को स्पष्ट करते समय, उसकी ईश्वरीय उत्पत्ति, निरंकुश सत्ता और जनता के प्रति उसकी गैर-जवाबदेही पर बल दें।
Question 4. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की विशेषताएँ बताइए।
Answer: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. पुराने समय में परिवार ही समाज की सबसे छोटी इकाई था।
2. परिवार का आधार पक्का शादी-सम्बन्ध होता था।
3. परिवार में पुरुष ही घर का मुखिया होता था।
4. वंश सिर्फ पुरुषों के नाम से चलता था। स्त्रियों को परिवार में कोई उत्तराधिकार नहीं मिलता था।
5. पितृसत्तात्मक परिवार में मुखिया के बड़े और असीमित अधिकार ही राजनीतिक शक्ति का मूल कारण थे।
6. पितृसत्तात्मक परिवारों से ही छोटे समुदाय (कुल), उनसे बड़े समुदाय (जनपद) और फिर राज्य का विकास हुआ।
7. परिवार के सदस्यों की एकता का मुख्य सूत्र खून का रिश्ता था।
8. परिवार में मुखिया की शक्तियाँ एकदम असीमित थीं।
9. राज्य के विकास का आधार पितृ प्रधान व्यवस्था ही थी।
In simple words: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की विशेषताएँ हैं कि परिवार समाज की इकाई था, पुरुष मुखिया होता था, वंश पुरुषों से चलता था, और परिवार से ही राज्य का विकास हुआ।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की विशेषताएँ बताते समय, परिवार की संरचना, मुखिया की भूमिका, वंश परम्परा और राज्य के विकास में इसके योगदान को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 political science Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. राज्य की उत्पत्ति के सन्दर्भ में शक्ति सिद्धान्त का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति का शक्ति सिद्धान्त मानता है कि राज्य शक्ति या बल के उपयोग से बना है। राज्य का उदय तब हुआ जब ताकतवर लोगों ने कमज़ोर लोगों को अपने अधीन कर लिया। आसान शब्दों में, युद्ध राज्य की उत्पत्ति का मुख्य कारण था। युद्ध में जीतने वाला शासक बन गया और हारने वाले नागरिक बन गए।
राज्य ताकतवर लोगों द्वारा कमज़ोरों पर अधिकार और प्रभुत्व का नतीजा है। प्रभुत्व की इच्छा के कारण लोग आपस में लड़ने लगे, और इस संघर्ष में जिसने अपनी अजेय शक्ति से दूसरों को गुलाम बनाया, वही सबसे पहले राजा बना। ताकतवर लोग बड़ी संख्या में कमज़ोर लोगों को अपनी बहादुरी के दम पर अपना अनुयायी बना लेते हैं। वह इन अनुयायियों को एक समूह या कबीले के रूप में संगठित करता है और खुद उनका मुखिया बन जाता है।
शक्ति सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ
शक्ति सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ या मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
1. शक्ति ही राज्य की उत्पत्ति का एकमात्र आधार है। यहाँ शक्ति का मतलब आर्थिक, भौतिक और सैनिक शक्ति से है।
2. प्रभुत्व की लालसा और आक्रामक व्यवहार मानव स्वभाव का अनिवार्य हिस्सा है।
3. प्रकृति का यह नियम है कि 'शक्ति ही न्याय' है। शक्ति ही सबसे ऊपर होती है।
4. हर राज्य में हमेशा कम संख्या में ताकतवर लोग ही शासन करते हैं और ज़्यादातर कमज़ोर लोग बस उनका अनुकरण करते हैं।
5. आज भी सभी राज्यों का अस्तित्व शक्ति पर ही निर्भर करता है।
6. राज्य का लक्ष्य शक्ति को बढ़ाना और उसका सही इस्तेमाल करना है।
शक्ति सिद्धान्त का प्रयोग:
1. मध्यकाल में ईसाई धर्मगुरुओं ने इस सिद्धान्त का उपयोग राज्य को बुरा और चर्च को श्रेष्ठ संस्था बताने में किया।
3. समाजवादी और अराजकतावादी विचारकों ने भी व्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए इस सिद्धान्त का बहुत उपयोग किया, ताकि सरकार के हस्तक्षेप को रोका जा सके।
शक्ति सिद्धान्त की निम्नलिखित आधारों पर आलोचना की जाती है:
1. शक्ति राज्य के निर्माण में एक सहायक तत्व है, पर एकमात्र निर्णायक तत्व नहीं। राज्य की उत्पत्ति में शक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन चेतना, धर्म, रक्त-सम्बन्ध जैसे अन्य कारण भी रहे।
2. यह सिद्धान्त सिर्फ शक्ति को राज्य का आधार मानता है, जबकि राज्य का आधार इच्छा है, शक्ति नहीं। लोगों की इच्छा के बिना न तो राज्य बन सकता है और न ही टिका रह सकता है। लोग राजा के आदेशों का पालन शक्ति के डर से नहीं, बल्कि अपनी समझ और विवेक से करते हैं।
3. यह सिद्धान्त मानव स्वभाव की एकतरफा व्याख्या करता है।
4. यह सिद्धान्त युद्ध और क्रान्ति को बढ़ावा देता है, इसलिए यह लोकतन्त्र का विरोधी है।
5. यह सिद्धान्त उग्र राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद को बढ़ावा देता है।
6. यह सिद्धान्त सिर्फ भौतिक शक्ति पर जोर देता है। आधुनिक युग में आध्यात्मिक, तकनीकी और कानूनी शक्ति को भी महत्व दिया जाता है।
शक्ति सिद्धान्त का महत्त्व:
शक्ति सिद्धान्त में कई कमियाँ होने के बावजूद, इसकी अपनी उपयोगिता है:
1. पुराने समय से ही राज्य के निर्माण और विकास में शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
2. पुराने समय में अराजकता वाले समाज को व्यवस्थित करने और उसमें अनुशासन व आज्ञापालन का विचार शक्ति के कारण ही आया।
3. आज के समय में भी यह देखा जाता है कि अगर राज्य शक्तिशाली नहीं होता, तो वह अराजकता और बँटवारे का शिकार हो जाता है।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि शक्ति सिद्धान्त ने राज्य की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने राज्य के विकास में शक्ति के व्यापक महत्व को दिखाया है।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि राज्य ताकतवर लोगों द्वारा कमज़ोरों को अपने अधीन करने से बना है, जहाँ युद्ध ने राजाओं को सत्ता दिलाई। इसकी खासियतें हैं कि यह शक्ति को ही आधार मानता है और मानव स्वभाव को आक्रामक बताता है। आलोचना यह है कि यह सिर्फ शक्ति पर ज़ोर देता है, अन्य कारकों को अनदेखा करता है, और युद्ध को बढ़ावा देता है। फिर भी, इसने समाज में व्यवस्था लाने में मदद की है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त का मूल्यांकन करते समय, उसकी मुख्य मान्यताएँ, उपयोग, और आलोचनाओं को स्पष्ट रूप से लिखें। निष्कर्ष में उसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों को संक्षेप में बताएं।
Question 2. राज्य की उत्पत्ति का सबसे प्राचीन सिद्धान्त कौन-सा है? उसे विस्तार से समझाइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति का सबसे पुराना सिद्धान्त दैवीय सिद्धान्त है। इसका वर्णन इस प्रकार है:
दैवीय सिद्धान्त का उदय एवं विकास – 'दैवीय सिद्धान्त' के अनुसार, राज्य को देवताओं और ईश्वर ने बनाया है। इस सम्बन्ध में प्राचीन भारतीय विचारों के साथ-साथ पश्चिमी और अन्य कई देशों के विचारों में भी जानकारी मिलती है, जैसे:
(i) पाश्चात्य चिन्तन – पश्चिमी राजनीतिक विचारों में भी राज्य को ईश्वरीय रूप माना गया है, जिसका विवरण निम्न प्रकार है:
1. यहूदी धर्म – इस सिद्धान्त को सबसे पहले यहूदियों ने समर्थन दिया था। यहूदी धर्म की किताबों में खुद ईश्वर को राजा माना गया है।
(ii) भारतीय चिन्तन – प्राचीन भारतीय विचारकों के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर द्वारा हुई है। भारतीय परम्परा में महाभारत के शान्तिपर्व में दैवीय सिद्धान्त का ज़िक्र मिलता है। मनुस्मृति में कहा गया है कि जब दुनिया में अराजकता फैल गई और लोग इधर-उधर भाग रहे थे, तब ईश्वर ने राजा बनाया। भारत में राजा को सूर्य-पुत्र कहा गया है। इसी तरह नेपाल में राजा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
दैवीय सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ
दैवीय सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• राज्य ईश्वर द्वारा बनाई गई संस्था है। यह न तो अपने आप विकसित हुई है और न ही इंसान द्वारा बनाई गई है।
• राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है। राजा में ईश्वरीय गुण होते हैं और उसकी शक्तियाँ ईश्वर से मिली होती हैं।
• राजा की शक्ति असीमित होती है और वह निरंकुश होता है। जनता को उसके खिलाफ कोई अधिकार नहीं मिलता और वे उसका विरोध नहीं कर सकते।
• राजतन्त्र सबसे अच्छा शासन होता है। राज्य का यह रूप ईश्वर के नियमों के अनुसार ही है।
• राजा का पद वंशानुगत होता है। जनता इस अधिकार को छीन नहीं सकती।
• इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य, राजा और शासन में कोई अन्तर नहीं है।
• राजा सिर्फ ईश्वर के प्रति जवाबदेह होता है, जनता के प्रति नहीं। ईश्वर की तरह राजा के आदेश सबसे ऊपर, सही और न्यायसंगत होते हैं।
• इस सिद्धान्त के अनुसार, राजा के आदेशों का पालन करना जनता का अनिवार्य कर्तव्य है। इसका उल्लंघन करना धार्मिक दृष्टि से पाप माना जाता है।
दैवीय सिद्धान्त की आलोचना-
दैवीय सिद्धान्त की आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. अवैज्ञानिक सिद्धान्त – दैवीय सिद्धान्त की मान्यताओं को सिर्फ धार्मिक विश्वासों के आधार पर ही सही माना जा सकता है, वैज्ञानिक तर्कों के आधार पर नहीं।
2. निरंकुशता का पोषक – राजा जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होता था, इसलिए राजसत्ता पूरी तरह निरंकुश और तानाशाही बन गई।
3. लोकतान्त्रिक भावनाओं के विपरीत – यह सिद्धान्त लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था के खिलाफ है।
4. अतिवादी दृष्टिकोण – इस सिद्धान्त में राजा को पूरी तरह शक्तिशाली और ईश्वरीय गुणों से भरपूर बताया गया है, जो एक अतिवादी सोच है।
5. धार्मिक सिद्धान्त – आज के युग में जहाँ बहुत से लोग ईश्वर और धर्म में विश्वास नहीं रखते, उनके लिए इस सिद्धान्त की कोई उपयोगिता नहीं है।
6. ऐतिहासिक प्रमाणों का अभाव- इतिहास के अध्ययन से कोई ऐसा सबूत नहीं मिलता कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि था। यह सिद्धान्त राजनीतिक चेतना, आर्थिक ज़रूरतों और रक्त सम्बन्धों जैसे कारकों को भी अनदेखा करता है।
In simple words: राज्य की उत्पत्ति का दैवीय सिद्धान्त सबसे पुराना है, जो कहता है कि ईश्वर ने लोगों की भलाई के लिए राज्य बनाया और राजा उसका प्रतिनिधि है। इसमें राजा की शक्ति असीमित होती है और जनता को उसका विरोध करने का अधिकार नहीं होता। इसकी आलोचना वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी और निरंकुशता को बढ़ावा देने के कारण की जाती है।
🎯 Exam Tip: किसी भी सिद्धान्त को विस्तार से समझाने के लिए, उसके उदय, विकास, प्रमुख विशेषताओं और आलोचनाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें। ऐतिहासिक और आधुनिक सन्दर्भों का भी उल्लेख करें।
Question 3. दैवीय सिद्धान्त का महत्व इस प्रकार है
Answer: दैवीय सिद्धान्त का महत्व इस प्रकार है:
• यह सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति की क्रमबद्ध व्याख्या करने का पहला प्रयास था। इसी आधार पर आगे चलकर राज्य की उत्पत्ति के नए-नए सिद्धान्त विकसित हुए।
• इस सिद्धान्त ने शुरुआती अराजकतापूर्ण समाज में शान्ति और व्यवस्था स्थापित करने में मदद की।
• इस सिद्धान्त ने जनता के मन में आज्ञापालन और अनुशासन की भावना विकसित की।
• इस सिद्धान्त ने राज्य के विकास में धर्म के प्रभाव को स्थापित किया।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त ने राज्य की उत्पत्ति की शुरुआती व्याख्या की, समाज में शान्ति लाई, जनता में आज्ञापालन की भावना जगाई, और राज्य के विकास में धर्म के महत्व को स्थापित किया।
🎯 Exam Tip: किसी सिद्धान्त का महत्व बताते समय, उसके ऐतिहासिक योगदान, सामाजिक प्रभाव और वैचारिक विकास में उसकी भूमिका पर ध्यान दें।
Question 3. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति का एक पुराना सिद्धान्त है। इसका उल्लेख यूनान, रोम और यहूदियों के पुराने इतिहास में मिलता है। यहूदियों की धार्मिक पुस्तक ओल्ड टेस्टामेंट, ईसाइयों की बाईबिल और रोम-भारत के कई धर्मग्रन्थों में भी इस सिद्धान्त की बातें मिलती हैं। इस सिद्धान्त के मुख्य व्याख्याकार हेनरीमेन हैं। हेनरीमेन के अनुसार, पुराने समय में समाज परिवारों का समूह था।
परिवार का मुखिया वृद्ध पुरुष को 'पिता' के रूप में असीमित शक्तियाँ मिली थीं। वह अपनी इच्छा से सम्पत्ति का लेन-देन कर सकता था, अपनी सन्तान को सम्पत्ति से वंचित कर सकता था और उनका जहाँ चाहे विवाह कर सकता था। इसी क्रम में परिवार का विस्तार और विघटन हुआ, जिससे कई परिवार बने, लेकिन इन परिवारों पर मूल परिवार के मुखिया का अधिकार बना रहा। धीरे-धीरे पितृ प्रधान परिवार विकसित हुआ। परिवार से गोत्र, और गोत्र से कबीले बने, और कबीलों से राज्य की उत्पत्ति हुई।
पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. प्राचीन समय में समाज की इकाई परिवार था।
2. परिवार का आधार स्थायी वैवाहिक सम्बन्ध था।
3. परिवार में पुरुष ही परिवार का मुखिया होता था एवं पितृसत्तात्मक तत्वों की प्रधानता थी।
4. वंशावली केवल पुरुषों से खोजी जाती थी। स्त्री पक्ष को कोई भी उत्तराधिकार परिवार में प्राप्त नहीं था।
5. पितृसत्तात्मक परिवार में मुखिया के व्यापक तथा असीमित अधिकार राजनीतिक सत्ता के मूल स्रोत थे।
6. पितृसत्तात्मक परिवारों से ही कुल, कुलों से ही जनपद और जनपदों से ही राज्य का विकास हुआ है।
पितृसत्तात्मक सिद्धान्त की आलोचना – पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की आलोचना निम्नलिखित है:
1. यह सिद्धान्त सभी जगह लागू नहीं होता क्योंकि यह विश्वव्यापी नहीं था।
2. शुरुआती सामाजिक इकाई कबीला थी, परिवार नहीं।
3. यह सिद्धान्त महिलाओं को कमज़ोर और शक्तिहीन मानता है, जबकि वे परिवार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
4. यह सिद्धान्त अन्य कारकों की उपेक्षा करता है जो राज्य के विकास के लिए ज़िम्मेदार थे।
5. इस सिद्धान्त के अनुसार, स्त्री परिवार में पहचान का माध्यम तो थी लेकिन शक्ति का सक्रिय धारक बिल्कुल नहीं थी।
6. दुनिया में मातृ प्रधान और पितृ प्रधान दोनों प्रकार के उदाहरण देखने को मिलते हैं।
In simple words: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त कहता है कि परिवार समाज की शुरुआत था, जहाँ पुरुष मुखिया होता था, और इसी से राज्य बना। इसकी आलोचना है कि यह सभी जगह लागू नहीं हुआ, महिलाओं की भूमिका को कम आँका, और केवल परिवार को ही राज्य के विकास का आधार माना।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त का मूल्यांकन करते समय, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रमुख विशेषताएँ और उसकी आलोचनाओं को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।
Question 4. मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त का मूल्यांकन कीजिए।
Answer: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति का एक महत्वपूर्ण पुराना सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक मेक्लेन, मॉर्गन और जैक्स हैं। उनका मानना था कि राज्य की उत्पत्ति पितृमूलक समाज से नहीं, बल्कि मातृमूलक समाज से हुई है। आदिमकाल में विवाह की संस्था सही से स्थापित नहीं थी, और इसी कारण वैवाहिक सम्बन्ध अस्थायी थे। इसलिए पति-पत्नी के सम्बन्ध स्थिर और विकसित होते थे।
समाज में स्थायी विवाह की संस्थाएँ नहीं थीं। समाज में एक से ज़्यादा पति रखने की व्यवस्था थी। इस व्यवस्था में महिला के कई पति होते थे। उनके बच्चे पिता के नहीं, बल्कि माता के वंश के नाम से जाने जाते थे। सम्पत्ति और सत्ता पर महिला का ही अधिकार था। इस व्यवस्था के विकास ने आगे चलकर राज्य को जन्म दिया।
मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की विशेषताएँ / मान्यताएँ – मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
1. स्थायी विवाह सम्बन्धों की कमी थी। इस कारण वंश माता से ही चलता था। अतः सम्बन्धों का मुख्य माध्यम स्त्री थी।
2. सम्पत्ति और सत्ता पर स्त्रियों का ही पूरा अधिकार और उत्तराधिकार था। अतः परिवार का मुखिया पुरुष नहीं, स्त्री होती थी।
3. मातृ सत्तात्मक परिवारों में माता ही शक्ति का केंद्र थी। उसके द्वारा चलाए गए घरेलू शासन में राज्य के शुरुआती रूप मौजूद थे।
सिद्धान्त की आलोचना – मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की आलोचना निम्नलिखित है:
1. अत्यन्त सरल सिद्धान्त – यह एक बहुत ही सरल सिद्धान्त है, जबकि राज्य की उत्पत्ति एक जटिल प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें कई छोटे और बड़े कारक योगदान करते हैं।
4. अन्य तत्वों की उपेक्षा – यह सिद्धान्त राज्य के विकास के लिए ज़िम्मेदार अन्य तत्वों की अनदेखी करता है।
5. स्त्री, पुरुष की अपेक्षा निर्बल – स्त्री परिवार में पहचान का माध्यम तो थी, लेकिन वह शक्ति का सक्रिय वाहक बिल्कुल नहीं थी।
6. दुनिया में मातृ प्रधान और पितृ प्रधान दोनों प्रकार के उदाहरण देखने को मिलते हैं।
मातृ प्रधान सिद्धान्त का महत्त्व – राज्य के विकास में मातृ प्रधान सिद्धान्त का महत्व निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट है:
• राज्य की उत्पत्ति के मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त राज्य के विकास में रक्त सम्बन्धों के योगदान को सही तरीके से समझाते हैं, क्योंकि राज्य को परिवारों का विकसित रूप माना जाता है।
• इन सिद्धान्तों के कारण राज्य में आज्ञापालन और अनुशासन की भावना का महत्व स्थापित हुआ है।
In simple words: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त कहता है कि राज्य की शुरुआत मातृ प्रधान समाज से हुई, जहाँ माता मुखिया होती थी और वंश उसी से चलता था। इसकी आलोचना है कि यह ज़्यादा सरल है, सभी कारकों को नहीं मानता, और स्त्री की शक्ति को कम आँकता है।
🎯 Exam Tip: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त का मूल्यांकन करते समय, उसके मुख्य विचारकों, समाज की संरचना, स्त्री की भूमिका, और साथ ही उसकी आलोचनाओं को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. राज्य की उत्पत्ति का कौन-सा सिद्धान्त मध्ययुग में लोकप्रिय रहा।
(अ) शक्ति सिद्धान्त
(ब) सामाजिक समझौता सिद्धान्त
(स) दैवीय सिद्धान्त
(द) पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त
Answer: (अ) शक्ति सिद्धान्त
In simple words: मध्ययुग में लोग यह मानते थे कि राज्य की शुरुआत ताकत और बल के उपयोग से हुई थी।
🎯 Exam Tip: सिद्धान्तों और उनके लोकप्रिय होने के समयकाल को याद रखना ज़रूरी है, खासकर मध्ययुग में शक्ति सिद्धान्त के प्रभाव को।
Question 2. प्रथम राजा एक भाग्यशाली योद्धा था, यह कथन है
(अ) बिस्मार्क
(ब) ओपेन हाइमर
(स) गेटल
(द) वाल्टेयर
Answer: (द) वाल्टेयर
In simple words: वाल्टेयर ने कहा था कि पहला राजा एक किस्मत वाला सैनिक था, जो ताकत के बल पर शासक बना।
🎯 Exam Tip: महत्त्वपूर्ण राजनीतिक विचारकों के कथनों और उद्धरणों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 3. निम्न में से किस राजनीतिक विचारक ने "शक्ति के बिना कानून व्यर्थ है" का समर्थन किया।
(अ) वाल्टेयर
Answer: (अ) वाल्टेयर
In simple words: वाल्टेयर ने माना कि अगर कानून को लागू करने की ताकत न हो तो वह बेकार है।
🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि कौन से विचारक शक्ति और कानून के सम्बन्ध में क्या विचार रखते हैं, क्योंकि यह विभिन्न सिद्धान्तों का आधार है।
Question 4. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त का प्रमुख समर्थक है।
(अ) लीकाक
(ब) हेनरी मेन
(स) गिल क्राइस्टे
(द) हाब्स।
Answer: (ब) हेनरी मेन
In simple words: हेनरी मेन पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त के मुख्य समर्थक थे, जिन्होंने इस विचार को आगे बढ़ाया कि परिवार में पिता का ही अधिकार होता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख सिद्धान्तों और उनके समर्थकों के नाम याद रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न होते हैं।
Question 5. बहुपति प्रथा किस सिद्धान्त में मानी जाती है?
(अ) मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त
(ब) पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त
(स) दैवीय सिद्धान्त
(द) शक्ति सिद्धान्त।
Answer: (अ) मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त
In simple words: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में, यह माना जाता है कि एक महिला के कई पति हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सामाजिक प्रथाओं को राज्य की उत्पत्ति के सिद्धान्तों से जोड़ना सीखें, जैसे बहुपति प्रथा का मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त से सम्बन्ध।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. राज्य की उत्पत्ति का सबसे प्राचीन सिद्धान्त है
(अ) दैवीय सिद्धान्त
(ब) मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त
(स) शक्ति सिद्धान्त
(द) सामाजिक समझौता सिद्धान्त।
Answer: (अ) दैवीय सिद्धान्त
In simple words: दैवीय सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति का सबसे पुराना विचार है, जिसमें माना जाता है कि ईश्वर ने राज्य बनाया।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सिद्धान्तों के ऐतिहासिक क्रम को याद रखें, जिसमें दैवीय सिद्धान्त को अक्सर सबसे पुराना माना जाता है।
Question 3. "राज्य ईश्वरीय संस्था है।” इस मान्यता का प्रतिपादन किस सिद्धान्त के द्वारा किया गया है?
(अ) दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त
(ब) मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त
(स) शक्ति सिद्धान्त
(द) सामाजिक समझौता सिद्धान्त।
Answer: (अ) दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त
In simple words: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त कहता है कि राज्य को भगवान ने बनाया है।
🎯 Exam Tip: जब भी "ईश्वरीय संस्था" या "ईश्वरीय रचना" जैसे शब्द आएँ, तो तुरंत दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त को पहचानें।
Question 4. 'पैट्रियाकी' पुस्तक के लेखक हैं
(अ) गार्नर
(ब) लास्की
(स) राबर्ट फिल्मर
(द) जैक्स।
Answer: (स) राबर्ट फिल्मर
In simple words: 'पैट्रियाकी' नाम की किताब राबर्ट फिल्मर ने लिखी थी।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सिद्धान्तों से जुड़ी महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
Question 5. 'टूल्स ऑफ की मोनार्कीज' के रचयिता हैं
(अ) रॉबर्ट फिल्मर
(ब) जेम्स प्रथम
(स) लुई 14 वाँ
(द) मॉर्गन
Answer: (ब) जेम्स प्रथम
In simple words: जेम्स प्रथम ने 'टूल्स ऑफ की मोनार्कीज' नामक पुस्तक लिखी थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख शासकों और उनके साहित्यिक या राजनीतिक योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर इतिहास से जुड़े सवालों में।
Question 7. "राजा की आज्ञाओं का पालन करना प्रजा के लिए अनिवार्य है।" यह कथन राज्य की उत्पत्ति के किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है
(अ) दैवीय उत्पत्ति का सिद्धान्त
(ब) शक्ति सिद्धान्त
(स) सामाजिक समझौता, सिद्धान्त
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (अ) दैवीय उत्पत्ति का सिद्धान्त
In simple words: यह बात दैवीय उत्पत्ति के सिद्धान्त से जुड़ी है, जिसमें प्रजा को राजा की आज्ञा माननी ज़रूरी होती है।
🎯 Exam Tip: राजा के आदेशों का अनिवार्य पालन दैवीय सिद्धान्त का मुख्य गुण है, क्योंकि राजा को ईश्वरीय प्रतिनिधि माना जाता है।
Question 8. प्रजातान्त्रिक विचारधारा के उदय के कारण राज्य उत्पत्ति के किस सिद्धान्त ने अपना महत्व खो दिया
(अ) शक्ति सिद्धान्त
(ब) सामाजिक समझौता सिद्धान्त
(स) मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त
(द) दैवीय सिद्धान्त
Answer: (द) दैवीय सिद्धान्त
In simple words: प्रजातन्त्र आने के बाद दैवीय सिद्धान्त का महत्व कम हो गया, क्योंकि यह राजा की असीमित शक्ति पर ज़ोर देता था।
🎯 Exam Tip: जानें कि कैसे आधुनिक लोकतान्त्रिक विचार पुराने राजतन्त्रीय सिद्धान्तों, जैसे दैवीय सिद्धान्त, के प्रभाव को कम करते हैं।
Question 9. राज्य परिवारों का विकसित रूप है, इस विचार को कौन-से सिद्धान्त वाले विचारक मानते हैं?
(अ) शक्ति सिद्धान्त वाले
(ब) पितृ / मातृ सत्ता सिद्धान्त वाले
(स) दैवीय सिद्धान्त वाले
(द) विकासवादी सिद्धान्त वाले
Answer: (ब) पितृ / मातृ सत्ता सिद्धान्त वाले
In simple words: पितृ और मातृ सत्ता सिद्धान्त मानने वाले सोचते हैं कि राज्य परिवारों के बड़े होने से बना है।
🎯 Exam Tip: पितृ और मातृ सत्ता सिद्धान्तों का मुख्य आधार परिवार को राज्य की शुरुआती इकाई मानना है, जो विकासवादी दृष्टिकोण का एक हिस्सा है।
Question 10. निम्न में से किस राजनीतिक विचारक ने कहा कि “प्राचीन समय में समाज परिवारों का समूह था और उस परिवार का सबसे वृद्ध सदस्य ही मुखिया होता था।”
(स) हेनरीमेन ने
Answer: (स) हेनरीमेन ने
In simple words: हेनरीमेन ने कहा था कि पुराने समय में समाज परिवारों से बनता था, और सबसे बुज़ुर्ग सदस्य ही मुखिया होता था।
🎯 Exam Tip: यह कथन हेनरीमेन के पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त को दर्शाता है, जहाँ परिवार और वरिष्ठ पुरुष मुखिया की भूमिका पर ज़ोर दिया जाता है।
Question 11. निम्न में से किस विद्वान ने परिवार से राज्य के विकास को बताया है
(अ) लीकॉक ने
(ब) मॉर्गन ने
(स) जैक्स ने
(द) ग्रीन ने।
Answer: (अ) लीकॉक ने
In simple words: लीकॉक ने समझाया कि राज्य का विकास परिवारों के बढ़ने और मिलकर रहने से हुआ है।
🎯 Exam Tip: राज्य की उत्पत्ति के विकासवादी सिद्धान्त से जुड़े विद्वानों के नाम याद रखें, जो परिवार को राज्य के विकास की आधारशिला मानते हैं।
Question 12. पितृ सत्ता सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक हैं
(अ) हीगल
(ब) हेनरीमेन
(स) प्लेटा
(द) ग्रीन।
Answer: (ब) हेनरीमेन
In simple words: हेनरीमेन पितृ सत्ता सिद्धान्त के मुख्य समर्थकों में से एक हैं।
🎯 Exam Tip: प्रमुख राजनीतिक सिद्धान्तों और उनके समर्थकों को सही ढंग से याद रखना वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 13. निम्न में से राज्य उत्पत्ति के किस सिद्धान्त से यहूदियों की धार्मिक पुस्तक 'ओल्ड टेस्टमेंट' का सम्बन्ध है
(अ) मातृप्रधान सिद्धान्त से
(ब) शक्ति सिद्धान्त से
(स) पितृ सत्ता सिद्धान्त से
(द) समझौता सिद्धान्त से।
Answer: (स) पितृ सत्ता सिद्धान्त से
In simple words: यहूदियों की किताब 'ओल्ड टेस्टमेंट' पितृ सत्ता सिद्धान्त से जुड़ी है, जो परिवार में पुरुष प्रधानता को दर्शाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न धर्मग्रन्थों को राजनीतिक सिद्धान्तों से जोड़ना सीखें, जैसे 'ओल्ड टेस्टमेंट' का पितृ सत्ता सिद्धान्त से सम्बन्ध।
Question 14. मातृ - प्रधान सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक हैं
(3 मॉर्गन और जैक्स।
Answer: (3) मॉर्गन और जैक्स।
In simple words: मॉर्गन और जैक्स मातृ प्रधान सिद्धान्त के मुख्य समर्थक हैं।
🎯 Exam Tip: मातृ प्रधान सिद्धान्त के मुख्य समर्थकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए।
Question 15. "प्राचीन समाज में स्थायी विवाह संस्थाएँ नहीं थीं।” यह मत राज्य उत्पत्ति के किस सिद्धान्त से सम्बन्ध रखता
(अ) मातृ प्रधान सिद्धान्त से
(ब) पितृ प्रधान सिद्धान्त से
(स) शक्ति सिद्धान्त से
(द) सामाजिक समझौता सिद्धान्त से
Answer: (अ) मातृ प्रधान सिद्धान्त से
In simple words: यह विचार कि पुराने समाज में स्थायी विवाह नहीं थे, मातृ प्रधान सिद्धान्त से जुड़ा है।
🎯 Exam Tip: मातृ प्रधान सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताओं में से एक यह धारणा है कि शुरुआती समाजों में विवाह सम्बन्ध स्थायी नहीं थे।
Question 16. राज्य की उत्पत्ति का जो सिद्धान्त 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' के सिद्धान्त पर आधारित है, वह है
(अ) सामाजिक समझौता सिद्धान्त
(ब) शक्ति सिद्धान्त
(स) दैवीय सिद्धान्त
(द) ऐतिहासिक सिद्धान्त
Answer: (ब) शक्ति सिद्धान्त
In simple words: 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली कहावत शक्ति सिद्धान्त पर आधारित है, जो बल के आधार पर राज्य की उत्पत्ति मानता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त को पहचानते समय, उसके मूल विचार पर ध्यान दें कि ताकत ही शासन का आधार है, जैसा कि कहावत "जिसकी लाठी उसकी भैंस" से स्पष्ट होता है।
Question 17. “शक्ति के बिना न कोई राज्य जीवित रहता है और न जीवित रह सकता है।” यह कथन है
(अ) ब्लंटशली का
(ब) अरस्तू का
(स) लीकॉक को
(द) ग्रीन का
Answer: (अ) ब्लंटशली का
In simple words: ब्लंटशली ने कहा था कि कोई भी राज्य बिना ताकत के न तो बन सकता है और न ही चल सकता है।
🎯 Exam Tip: यह कथन शक्ति सिद्धान्त के महत्व को दर्शाता है और इसे ब्लंटशली जैसे विचारक से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
Question 18. युद्ध का समर्थन करता है
(अ) समझौता सिद्धान्त
Answer: (अ) शक्ति सिद्धान्त
In simple words: शक्ति सिद्धान्त युद्ध का समर्थन करता है क्योंकि यह मानता है कि राज्य बल के प्रयोग से बनता है।
🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि शक्ति सिद्धान्त संघर्ष और बल प्रयोग को राज्य की उत्पत्ति और अस्तित्व का अनिवार्य हिस्सा मानता है, इसलिए वह युद्ध का समर्थन करता है।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. मानव स्वभाव के विषय में शक्ति सिद्धान्त के क्या विचार हैं?
Answer: शक्ति सिद्धान्त का मानना है कि मानव स्वभाव में दूसरों पर हावी होने की इच्छा और आक्रामक व्यवहार होता है। यह सिद्धान्त मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति को मानता है कि वह शक्ति की लालसा रखता है।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि इंसान के स्वभाव में ताकत की इच्छा और झगड़ालूपन होता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त के अनुसार मानव स्वभाव के प्रमुख घटकों (प्रभुत्व की लालसा, आक्रामकता) को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार का मुखिया कौन होता है?
Answer: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार की मुखिया माता (स्त्री) होती है। इस व्यवस्था में माँ को परिवार का मुख्य अधिकारी माना जाता है।
In simple words: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त में माँ परिवार की प्रमुख होती है।
🎯 Exam Tip: मातृ सत्तात्मक सिद्धान्त की मुख्य विशेषता - परिवार के मुखिया की पहचान - को सही ढंग से बताएं।
Question 3. दैवीय सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति कैसे हुई?
Answer: दैवीय सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर ने की है, यानी राज्य एक दैवीय संस्था है। इसे ईश्वर ने लोगों के लाभ के लिए बनाया था।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त मानता है कि राज्य को भगवान ने बनाया है।
🎯 Exam Tip: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त को समझाते समय "ईश्वर निर्मित संस्था" और "जन कल्याण" जैसे प्रमुख शब्दों का प्रयोग करें।
Question 5. राबर्ट फिल्मर ने अपनी पुस्तक 'पैट्रियाकी' में पृथ्वी का प्रथम राजा किसने माना है?
Answer: राबर्ट फिल्मर ने अपनी पुस्तक 'पैट्रियाकी' में पृथ्वी का प्रथम राजा आदम को माना है। उन्होंने आदम को सभी मनुष्यों का पहला पिता और शासक बताया।
In simple words: राबर्ट फिल्मर ने अपनी किताब 'पैट्रियाकी' में कहा कि आदम ही पृथ्वी के पहले राजा थे।
🎯 Exam Tip: विचारक और उसकी पुस्तक में दिए गए विशिष्ट नाम का उल्लेख सटीक रूप से करें।
Question 6. इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम द्वारा लिखित पुस्तक का नाम बताइए।
Answer: इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम द्वारा लिखित पुस्तक का नाम 'टूल्स ऑफ फ्री मोनार्कीज' है। इस पुस्तक में उन्होंने दैवीय उत्पत्ति के सिद्धान्त का समर्थन किया था।
In simple words: राजा जेम्स प्रथम ने 'टूल्स ऑफ फ्री मोनार्कीज' नामक किताब लिखी थी।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष विचारक द्वारा लिखी गई पुस्तक का नाम सही और पूर्ण लिखें।
Question 7. दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त के अनुसार राजा को किस नाम से जाना जाता था?
Answer: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त के अनुसार राजा को सूर्यपुत्र के नाम से जाना जाता था। यह मान्यता थी कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त के अनुसार राजा को 'सूर्यपुत्र' कहते थे।
🎯 Exam Tip: इस सिद्धान्त में राजा के स्थान और उसकी दैवीय स्थिति को स्पष्ट करने वाले प्रमुख पद का उल्लेख करें।
Question 8. नेपाल में राजा को किसका अवतार माना जाता था?
Answer: नेपाल में राजा को विष्णु का अवतार माना जाता था। यह मान्यता थी कि राजा दैवीय शक्ति से युक्त होता है।
In simple words: नेपाल में राजा को भगवान विष्णु का रूप मानते थे।
🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार राजा को दिए गए विशिष्ट दैवीय उपाधि या अवतार का उल्लेख करें।
Question 9. “राजसत्ता पूर्ण निरकुंश सर्वोच्च एवं असीमित होती है। ऐसा ईश्वर की इच्छा से होता है।" यह मान्यता किस सिद्धान्त की है?
Answer: यह मान्यता दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त की है। इस सिद्धान्त के अनुसार राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है और उसकी शक्तियाँ असीमित होती हैं।
In simple words: यह विचार दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त का है, जो कहता है कि राजा की शक्ति भगवान की मर्जी से होती है।
🎯 Exam Tip: दिए गए कथन को सही सिद्धान्त से जोड़ें और सिद्धान्त के मुख्य तर्क को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 10. दैवीय सिद्धान्त सत्ता के उत्तराधिकार की किस रूप में व्याख्या करता है?
Answer: दैवीय सिद्धान्त सत्ता के उत्तराधिकार को वंशानुगत रूप में व्याख्या करता है। इस सिद्धान्त के अनुसार राजा की मृत्यु के बाद उसका पुत्र ही उत्तराधिकारी बनता है।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त कहता है कि राजा का पद उसके बेटे को मिलता है, यानी यह पद खानदानी होता है।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त में राजपद की विरासत के स्वरूप को 'वंशानुगत' शब्द के माध्यम से स्पष्ट करें।
Question 12. दैवीय सिद्धान्त के पतन के कारण बताइए।
Answer: दैवीय सिद्धान्त के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. सामाजिक समझौता सिद्धान्त का उदय
2. प्रजातान्त्रिक विचारधारा का उदय
3. राज्य और चर्च का संघर्ष।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त इसलिए कमज़ोर पड़ गया क्योंकि नए विचार जैसे सामाजिक समझौता और लोकतंत्र सामने आए, और राज्य-चर्च में झगड़ा शुरू हो गया।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के पतन के मुख्य कारणों को बिंदुवार और संक्षेप में समझाएं।
Question 13. दैवीय सिद्धान्त के कोई दो दोष / आलोचना लिखिए।
Answer: दैवीय सिद्धान्त के दो प्रमुख दोष या आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. निरंकुशता का पोषक: यह सिद्धान्त राजा को असीमित शक्तियाँ देता है, जिससे वह निरंकुश बन जाता है और जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रहता।
2. प्रजातन्त्र विरोधी: यह सिद्धान्त जनता की भागीदारी को नकारता है और राजतन्त्र का समर्थन करता है, जो प्रजातान्त्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
In simple words: इस सिद्धान्त से राजा तानाशाह बन जाता है और यह लोकतंत्र के खिलाफ है।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त की आलोचना करते समय उसके प्रमुख नकारात्मक प्रभावों जैसे 'निरंकुशता' और 'प्रजातन्त्र विरोधी' पहलुओं को उजागर करें।
Question 14. राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त को संक्षेप में बताइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त के अनुसार, राज्य को ईश्वर ने बनाया है और राजा उसका प्रतिनिधि है। इसलिए राजा केवल ईश्वर के प्रति ही जवाबदेह होता है, जनता के प्रति नहीं। यह सिद्धान्त निरंकुश राजतन्त्र का समर्थन करता है।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त कहता है कि राज्य भगवान ने बनाया है और राजा उसका दूत है, जो केवल भगवान के प्रति जवाबदेह है, जिससे राजा की असीमित शक्ति बनी रहती है।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के मूल विचार - ईश्वर द्वारा उत्पत्ति और राजा की दैवीय प्रतिनिधित्व - को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 15. दैवीय सिद्धान्त के कोई दो महत्व बताइए।
Answer: दैवीय सिद्धान्त के दो प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
1. दैवीय सिद्धान्त ने शुरुआती अराजक समाज में शांति और व्यवस्था स्थापित करने में मदद की।
2. इस सिद्धान्त ने राज्य के विकास में धर्म के प्रभाव को स्थापित किया और लोगों को एकजुट किया।
In simple words: इस सिद्धान्त ने पुराने समय में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में मदद की, और राज्य के विकास में धर्म के प्रभाव को दिखाया।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के सकारात्मक योगदानों को संक्षेप में बताएं, खासकर अराजकता दूर करने और धार्मिक प्रभाव के संदर्भ में।
Question 16. अरस्तु के अनुसार, "जब अनेक परिवार संयुक्त हो जाते हैं तो ग्राम का निर्माण होता है अर्थात् ग्राम से ही राज्य की उत्पत्ति होती है।"
Answer: अरस्तु के इस कथन का अर्थ है कि राज्य का विकास छोटे सामाजिक समूहों से होता है। कई परिवार मिलकर एक गाँव बनाते हैं, और कई गाँव मिलकर एक बड़े समुदाय या राज्य का निर्माण करते हैं। यह विकासवादी सिद्धान्त को दर्शाता है।
In simple words: अरस्तु कहते हैं कि बहुत सारे परिवार मिलकर गाँव बनाते हैं, और गाँवों से ही राज्य बनता है।
🎯 Exam Tip: अरस्तु के विचार को स्पष्ट करते हुए, राज्य की उत्पत्ति में क्रमिक विकास की अवधारणा पर ज़ोर दें।
Question 18. पितृ सत्ता सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक विद्वान कौन हैं?
Answer: पितृ सत्ता सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक विद्वान हेनरी मेन हैं। उन्होंने इस सिद्धान्त को विस्तृत रूप से समझाया।
In simple words: हेनरी मेन पितृ सत्ता सिद्धान्त के खास समर्थक हैं।
🎯 Exam Tip: किसी विशेष सिद्धान्त के प्रमुख समर्थक का नाम सही रूप से याद रखें।
Question 19. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार का मुखिया कौन होता है?
Answer: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार का मुखिया सबसे वृद्ध व्यक्ति, आमतौर पर पिता या पुरुष होता है। इस व्यवस्था में पुरुष को परिवार का प्रमुख माना जाता है।
In simple words: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार का सबसे बूढ़ा व्यक्ति, यानी पुरुष, मुखिया होता है।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त में परिवार के मुखिया की पहचान और स्थिति को स्पष्ट करें।
Question 20. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त के कोई दो प्रमुख लक्षण बताइए।
Answer: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. परिवार में पुरुष ही मुखिया होता था: इस सिद्धान्त में परिवार की सत्ता पुरुष के हाथों में होती थी।
2. परिवार का आधार स्थायी वैवाहिक सम्बन्ध था: परिवार एक स्थायी विवाह के रिश्ते पर आधारित होता था।
In simple words: इसमें परिवार का मुखिया पुरुष होता था और परिवार का आधार पक्के शादी के रिश्ते होते थे।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त की मुख्य विशेषताओं को बिंदुवार और स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 21. पितृ सत्ता सिद्धान्त की कोई दो आलोचनाएँ लिखिए।
Answer: पितृ सत्ता सिद्धान्त की दो आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. पितृ प्रधान सिद्धान्त सभी जगह लागू नहीं: यह सिद्धान्त हर जगह समान रूप से लागू नहीं होता क्योंकि विश्व में मातृ प्रधान समाजों के उदाहरण भी मिलते हैं।
2. प्रारम्भिक सामाजिक इकाई कबीला थी: कुछ विद्वानों का मानना है कि परिवार से पहले समाज की इकाई कबीला थी, न कि पितृ सत्तात्मक परिवार।
In simple words: यह सिद्धान्त हर जगह ठीक नहीं बैठता, क्योंकि कई जगह माँ मुखिया होती थी, और समाज की शुरुआत परिवार से नहीं, बल्कि कबीलों से हुई थी।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्ता सिद्धान्त की आलोचना करते समय उसके सार्वभौमिकता की कमी और वैकल्पिक सामाजिक संरचनाओं के तर्कों को शामिल करें।
Question 22. पितृ सत्ता सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पितृ सत्ता सिद्धान्त बताता है कि राज्य की उत्पत्ति पुरुष प्रधान परिवार से हुई है। इसमें परिवार का मुखिया पुरुष होता था, और उसी से वंश, गोत्र, कबीले और अंततः राज्य का विकास हुआ। इस सिद्धान्त में सत्ता और सम्पत्ति का उत्तराधिकार पुरुष पक्ष से चलता था।
In simple words: पितृ सत्ता सिद्धान्त कहता है कि राज्य पुरुष प्रधान परिवारों से बना है, जहाँ पुरुष मुखिया होता था, और ऐसे परिवार बढ़ते-बढ़ते कबीले और फिर राज्य बन गए।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्ता सिद्धान्त को समझाते समय, पुरुष प्रधानता, वंशानुक्रम और राज्य के क्रमिक विकास के चरणों को स्पष्ट करें।
Question 24. मातृ प्रधान सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
Answer: मातृ प्रधान सिद्धान्त के अनुसार, राज्य का विकास मातृ प्रधान परिवारों से हुआ है। इस सिद्धान्त में परिवार की मुखिया माता होती थी और वंश का निर्धारण स्त्री पक्ष से होता था। अस्थायी विवाह सम्बन्धों के कारण माता ही परिवार की मुखिया और राज्य की शासक बनी।
In simple words: मातृ प्रधान सिद्धान्त कहता है कि राज्य की शुरुआत उन परिवारों से हुई जहाँ माँ मुखिया थी, और वंश भी माँ के नाम से चलता था।
🎯 Exam Tip: मातृ प्रधान सिद्धान्त को समझाते समय, महिला की मुखिया भूमिका और वंश के निर्धारण में उसकी भूमिका पर प्रकाश डालें।
Question 25. मातृ प्रधान सिद्धान्त की कोई दो आलोचनाएँ लिखिए।
Answer: मातृ प्रधान सिद्धान्त की दो आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. अत्यधिक सरल सिद्धान्त: यह सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति को बहुत सरल तरीके से बताता है, जबकि राज्य का विकास एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई तत्व शामिल होते हैं।
2. राज्य के विकास के लिए उत्तरदायी मान्यताओं की उपेक्षा: यह सिद्धान्त राज्य के विकास में अन्य महत्वपूर्ण कारकों जैसे आर्थिक आवश्यकता, धार्मिक चेतना और रक्त सम्बन्धों की अनदेखी करता है।
In simple words: यह सिद्धान्त राज्य बनने की प्रक्रिया को बहुत सरल दिखाता है और बाकी महत्वपूर्ण कारणों को नज़रअंदाज़ करता है।
🎯 Exam Tip: मातृ प्रधान सिद्धान्त की आलोचना में, उसकी सरलता और राज्य के बहु-आयामी विकास के अन्य कारकों की उपेक्षा को स्पष्ट करें।
Question 26. शक्ति सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति का एकमात्र कारण क्या है?
Answer: शक्ति सिद्धान्त के अनुसार राज्य की उत्पत्ति का एकमात्र कारण शक्ति (या बल प्रयोग) है। इस सिद्धान्त के अनुसार, शक्तिशाली व्यक्तियों ने कमजोर लोगों पर प्रभुत्व स्थापित करके राज्य का निर्माण किया।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि राज्य केवल ताकत से बना है, जहाँ ताक़तवर लोगों ने कमज़ोरों पर राज किया।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त का केंद्रीय तर्क "शक्ति ही राज्य का एकमात्र आधार" है, इसे स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 27. शक्ति सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
Answer: शक्ति सिद्धान्त यह मानता है कि राज्य का मूल आधार शक्ति है। इसके अनुसार, राज्य का उदय शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा निर्बल लोगों को अधीन करने की प्रवृत्ति का परिणाम है। युद्ध में विजेता शासक बनते हैं और पराजित प्रजा बन जाती है।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि राज्य ताकत से बना है, जहाँ मज़बूत लोग कमज़ोरों को दबाकर शासक बन गए।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त को समझाते समय, शक्ति के उपयोग, विजय और अधीनता के माध्यम से राज्य के गठन की प्रक्रिया पर ध्यान दें।
Question 28. किसने कहा कि राज्य का आधार रक्त और लौह होना चाहिए।
Answer: यह कथन बिस्मार्क ने कहा था। उनका मानना था कि राज्य की शक्ति सैन्य बल और युद्ध में निहित होनी चाहिए।
In simple words: बिस्मार्क ने कहा था कि राज्य की नींव खून और लोहे (यानी ताकत और युद्ध) पर होनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: इस प्रसिद्ध कथन को सही विचारक से जोड़ें और उसके निहितार्थ को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 29. राज्य की उत्पत्ति का कौन - सा सिद्धान्त साम्राज्यवाद को बढ़ावा देता है?
Answer: शक्ति सिद्धान्त साम्राज्यवाद को बढ़ावा देता है। यह सिद्धान्त मानता है कि शक्तिशाली राज्य कमजोर राज्यों पर प्रभुत्व स्थापित करके अपना विस्तार करते हैं।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त साम्राज्यवाद को बढ़ावा देता है, क्योंकि यह ताकतवर राज्यों को अपना क्षेत्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
🎯 Exam Tip: साम्राज्यवाद और किसी सिद्धान्त के बीच सीधा सम्बन्ध बताते हुए, उस सिद्धान्त के मुख्य विचार को दोहराएं।
Question 31. शक्ति सिद्धान्त की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Answer: शक्ति सिद्धान्त की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. शक्ति राज्य की उत्पत्ति का एकमात्र आधार है: यह सिद्धान्त मानता है कि केवल बल प्रयोग से ही राज्य का जन्म हुआ।
2. वर्तमान में राज्यों का अस्तित्व शक्ति पर ही निर्भर है: आधुनिक युग में भी राज्यों की सुरक्षा और प्रभाव उनकी सैन्य और आर्थिक शक्ति पर निर्भर करते हैं।
In simple words: इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य केवल ताकत से बना है, और आज भी राज्यों का होना उनकी शक्ति पर निर्भर करता है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
Question 32. अराजकतावादी एवं समाजवादी विचारकों ने व्यक्ति की स्वतन्त्रता हेतु किस सिद्धान्त का प्रयोग कया?
Answer: अराजकतावादी एवं समाजवादी विचारकों ने व्यक्ति की स्वतंत्रता हेतु शक्ति सिद्धान्त का प्रयोग किया। उन्होंने इसका उपयोग राज्य और सरकार के हस्तक्षेप को सीमित करने के लिए किया।
In simple words: अराजकतावादी और समाजवादी विचारकों ने व्यक्ति की आज़ादी के लिए शक्ति सिद्धान्त का इस्तेमाल किया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न में सिद्धान्त के प्रयोग और उसके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से जोड़ें।
Question 33. शक्ति सिद्धान्त की कोई दो आलोचनाएँ लिखिए।
Answer: शक्ति सिद्धान्त की दो आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. यह सिद्धान्त राज्य को निरंकुश बनाता है: शक्ति पर आधारित राज्य में शासक निरंकुश हो जाते हैं और जनता के अधिकारों की उपेक्षा करते हैं।
2. अन्तर्राष्ट्रीय क्रान्ति एवं विश्व बन्धुत्व का विरोधी है: यह सिद्धान्त राज्यों के बीच संघर्ष और युद्ध को बढ़ावा देता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय शांति और भाईचारे में बाधा आती है।
In simple words: यह सिद्धान्त राज्य को तानाशाह बना देता है और देशों के बीच शांति और दोस्ती का दुश्मन है।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त की आलोचना करते समय उसके नकारात्मक प्रभावों, जैसे निरंकुशता और अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष, पर ध्यान दें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त की प्रमुख मान्यताएँ बताइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ / मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
1. राज्य एक ईश्वर निर्मित संस्था है। राज्य न तो खुद बना है और न ही इंसान ने उसे बनाया है।
2. राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है। उसमें दैवीय गुण होते हैं और उसकी शक्तियाँ ईश्वर से मिली होती हैं।
3. राजा की शक्ति असीमित और निरंकुश होती है। जनता को उसके खिलाफ कोई अधिकार नहीं मिलता और वे विद्रोह नहीं कर सकते।
4. राजतन्त्र को सबसे अच्छी शासन प्रणाली माना जाता है, क्योंकि यह ईश्वर के नियमों के अनुसार होती है।
5. राजपद वंशानुगत होता है। जनता इस अधिकार को छीन नहीं सकती।
6. राजा केवल ईश्वर के प्रति जवाबदेह होता है, जनता के प्रति नहीं।
7. इस सिद्धान्त के अनुसार, राजा की आज्ञाओं का पालन करना जनता का अनिवार्य कर्तव्य है, और इसका उल्लंघन करना पाप माना जाता है।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त कहता है कि राज्य भगवान ने बनाया है, राजा उसका दूत है जिसकी शक्ति असीमित है। राजा सिर्फ भगवान के प्रति जवाबदेह है, और लोग उसकी आज्ञा मानने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि यह पद खानदानी होता है।
🎯 Exam Tip: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त की विशेषताओं को बिंदुवार और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करें, जिसमें राजा की शक्तियाँ और जनता के कर्तव्य शामिल हों।
Question 2. राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त का प्रयोग एवं पतन के कारण लिखिए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त का प्रयोग और उसके पतन के कारण निम्नलिखित हैं:
दैवीय सिद्धान्त का प्रयोग:
1. राजाओं ने अपनी शक्ति को मजबूत करने और आम जनता की अंधभक्ति प्राप्त करने के लिए इस सिद्धान्त का उपयोग किया।
2. इसका प्रयोग लोकतन्त्र के विरोध में किया गया, ताकि राजा की सत्ता बनी रहे।
3. राजा और पोप के संघर्ष में भी राजा को सर्वोच्च दिखाने के लिए इस सिद्धान्त का इस्तेमाल किया गया।
दैवीय सिद्धान्त के पतन के कारण:
1. सामाजिक समझौता सिद्धान्त का उदय हुआ, जिसने बताया कि राज्य एक मानवीय संस्था है, न कि दैवीय।
2. राजा तथा चर्च के बीच संघर्ष ने इस सिद्धान्त को कमजोर कर दिया।
3. प्रजातान्त्रिक विचारधारा के उदय के कारण इस सिद्धान्त का महत्व कम हो गया।
In simple words: राजाओं ने अपनी ताकत बढ़ाने और लोकतंत्र का विरोध करने के लिए इस दैवीय सिद्धान्त का इस्तेमाल किया। लेकिन नए विचारों जैसे सामाजिक समझौता और लोकतंत्र के आने से, और राजा-चर्च के झगड़ों से यह सिद्धान्त खत्म हो गया।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के प्रयोग के उद्देश्यों और उसके पतन के कारणों को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
Question 3. दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त की प्रमुख कमियों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त की आलोचनाएँ बताइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त की प्रमुख कमियाँ / आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. ऐतिहासिक प्रमाणों का अभाव: इतिहास में कोई प्रमाण नहीं मिलता कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि होता है। यह सिद्धान्त राजनीतिक चेतना, आर्थिक आवश्यकता और रक्त सम्बन्ध जैसे अन्य कारकों की उपेक्षा करता है।
2. निरंकुशता का पोषक: यह सिद्धान्त राजा को प्रजा के प्रति जवाबदेह नहीं मानता, जिससे वह पूर्णतया निरंकुश और अधिनायकवादी बन जाता है।
3. लोकतान्त्रिक भावनाओं के विपरीत: यह सिद्धान्त लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था के खिलाफ है, क्योंकि यह जनता की इच्छा को महत्व नहीं देता।
4. अतिवादी दृष्टिकोण: यह राजा को असीमित शक्ति और दैवीय गुणों से सम्पन्न बताता है, जो वास्तविकता से परे है।
5. धार्मिक सिद्धान्त: आधुनिक युग में जहाँ लोग धर्म में आस्था नहीं रखते, वहाँ इसकी कोई उपयोगिता नहीं रह जाती।
6. रूढ़िवादी सिद्धान्त: यह सिद्धान्त परिवर्तन का विरोध करता है, क्योंकि राजा का विरोध ईश्वर का विरोध माना जाता है।
7. अवैज्ञानिक: यह सिद्धान्त केवल धार्मिक विश्वासों पर आधारित है, वैज्ञानिक तर्कों पर नहीं।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त की आलोचना इसलिए की जाती है क्योंकि इसके कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं, यह राजा को तानाशाह बनाता है, लोकतंत्र के खिलाफ है, और आधुनिक समय में इसकी कोई प्रासंगिकता नहीं है।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त की आलोचनाओं को बिंदुवार स्पष्ट करें, जिसमें ऐतिहासिक साक्ष्य का अभाव, निरंकुशता को बढ़ावा और वैज्ञानिक आधार की कमी जैसे मुख्य बिंदु शामिल हों।
Question 4. राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त का महत्त्व बताइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के दैवीय सिद्धान्त का महत्व, भले ही यह आधुनिक समय में राज्य की उत्पत्ति की सही व्याख्या नहीं करता, फिर भी इसका अपना महत्व है, जो निम्नलिखित प्रकार से है:
1. राज्य की उत्पत्ति की क्रमबद्ध व्याख्या: यह सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति की व्याख्या करने का पहला प्रयास था, जिससे बाद में नए सिद्धान्त विकसित हुए।
2. शान्ति एवं व्यवस्था स्थापित करने में योगदान: इस सिद्धान्त ने शुरुआती अराजकतापूर्ण समाज में शान्ति और व्यवस्था स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने लोगों को राजा के नेतृत्व में संगठित किया।
3. आज्ञापालन एवं अनुशासन की भावना का विकास: इस सिद्धान्त ने जनता के मन में राजा के प्रति आज्ञापालन और अनुशासन की भावना पैदा की।
4. धर्म के प्रभाव को प्रतिपादित करना: जिस समय नैतिक, सामाजिक और आर्थिक आदर्शों की कमी थी, उस समय धर्म ने जनता को सुरक्षित और व्यवस्थित जीवन प्रदान किया।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त ने सबसे पहले राज्य की शुरुआत को समझाया, पुराने समय में शांति और व्यवस्था लाई, लोगों में राजा के प्रति अनुशासन सिखाया, और धर्म के प्रभाव से समाज को स्थिर किया।
🎯 Exam Tip: दैवीय सिद्धान्त के महत्व को स्पष्ट करते समय, समाज में व्यवस्था स्थापित करने और राजनीतिक सोच के विकास में इसकी शुरुआती भूमिका पर बल दें।
Question 5. पितृ सत्ता सिद्धान्त की आलोचना कीजिए।
Answer: पितृ सत्ता सिद्धान्त की आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. अत्यन्त सरल सिद्धान्त: यह सिद्धान्त राज्य की उत्पत्ति को बहुत सरल बताता है, जबकि राज्य का उदय एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई छोटे और बड़े तत्व शामिल होते हैं।
2. पितृ सत्तात्मक सिद्धान्त का सभी जगह अस्तित्व नहीं: यह सिद्धान्त पूरे विश्व में हर जगह लागू नहीं था। एशिया और ऑस्ट्रेलिया में मातृ प्रधान व्यवस्था के भी उदाहरण मिलते हैं।
3. प्रारम्भिक सामाजिक इकाई कबीला थी: मॉर्गन और मैक्सवेल जैसे विद्वानों के अनुसार, समाज की शुरुआती इकाई कबीला थी। कबीला टूटने पर गोत्र और गोत्र से परिवार बने। इनके अनुसार वंश स्त्री से चलता था, पुरुष से नहीं।
In simple words: पितृ सत्ता सिद्धान्त बहुत सरल है और हर जगह लागू नहीं होता; कुछ जगह मातृ प्रधान व्यवस्था भी थी। साथ ही, कुछ का मानना है कि परिवार से पहले कबीले थे, और वंश स्त्री से चलता था।
🎯 Exam Tip: पितृ सत्ता सिद्धान्त की आलोचना में, उसकी सरलता, गैर-सार्वभौमिकता और वैकल्पिक विकासवादी सिद्धांतों के तर्कों को शामिल करें।
Question 7. "शक्ति के कारण ही राज्य की उत्पत्ति हुई।" इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह कथन राज्य की उत्पत्ति के शक्ति सिद्धान्त से जुड़ा है। शक्ति सिद्धान्त के अनुसार, राज्य की उत्पत्ति का मुख्य कारण बल प्रयोग है। शुरुआत में, शक्तिशाली लोगों ने कमजोर व्यक्तियों को अपने अधीन कर लिया। दूसरे शब्दों में, युद्ध ने राज्य की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शक्ति के उपयोग से संगठन बनने शुरू हुए और धीरे-धीरे राज्य जैसे राजनीतिक संगठन विकसित हुए। यह सिद्धान्त बताता है कि कबीलों का संगठन भी शक्ति के आधार पर हुआ था, और कबीलों के सरदार के नेतृत्व में जो राज्य विकसित हुआ, उसका आधार केवल शक्ति ही रही। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य की उत्पत्ति का मूल कारण शक्ति ही थी।
In simple words: यह कथन शक्ति सिद्धान्त का है, जिसका मतलब है कि राज्य ताकत से बना। ताकतवर लोगों ने कमज़ोरों को अपने अधीन किया, जिससे संगठन और फिर राज्य बने।
🎯 Exam Tip: इस कथन को शक्ति सिद्धान्त से जोड़ते हुए, संघर्ष, अधीनता और संगठन के माध्यम से राज्य के निर्माण की प्रक्रिया को समझाएं।
Question 8. विभिन्न विचारकों ने शक्ति सिद्धान्त का प्रयोग किस प्रकार किया है? बताइए।
Answer: राज्य की उत्पत्ति के शक्ति सिद्धान्त का अर्थ है कि राज्य का मूल आधार शक्ति है। हर राज्य में हमेशा शक्तिशाली व्यक्तियों ने निर्बल लोगों पर शासन किया है। इतिहास इसका प्रमाण है, और आज भी राज्यों का अस्तित्व केवल शक्ति पर ही केंद्रित है। विभिन्न विचारकों ने शक्ति सिद्धान्त का प्रयोग अलग-अलग तरह से किया है:
1. मध्यकाल में धर्मगुरुओं ने इस सिद्धान्त का उपयोग राज्य को दूषित और चर्च को श्रेष्ठ संस्था बताने में किया।
2. व्यक्तिवादियों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता में सरकार के हस्तक्षेप को रोकने के लिए इसका प्रयोग किया।
3. फासीवादियों और नाजीवादियों ने भी इस सिद्धान्त का समर्थन और प्रयोग किया, ताकि अपनी सत्ता को मजबूत किया जा सके।
In simple words: शक्ति सिद्धान्त कहता है कि राज्य ताकत से बना है। धर्मगुरुओं ने इसे चर्च को श्रेष्ठ बताने, व्यक्तिवादियों ने सरकार के हस्तक्षेप को रोकने और फासीवादियों ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया।
🎯 Exam Tip: शक्ति सिद्धान्त के विभिन्न विचारकों द्वारा किए गए प्रयोगों को उनके उद्देश्यों के साथ स्पष्ट और बिंदुवार प्रस्तुत करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
Answer: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन निम्नलिखित है:
1. अवैज्ञानिक सिद्धान्त: दैवीय सिद्धान्त की मान्यताएँ केवल धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं, वैज्ञानिक तर्कों पर नहीं। यह केवल आस्था पर आधारित है।
2. निरंकुशता का पोषक: यह सिद्धान्त राजा को प्रजा के प्रति जवाबदेह नहीं बनाता, जिससे राजा निरंकुश और अधिनायकवादी बन जाता है।
3. लोकतान्त्रिक भावनाओं के विपरीत: यह सिद्धान्त प्रजातान्त्रिक शासन व्यवस्था के खिलाफ है, क्योंकि यह जनता की भागीदारी को नकारता है।
4. अतिवादी दृष्टिकोण: इस सिद्धान्त में राजा को पूर्ण शक्ति सम्पन्न और दैवीय गुणों से युक्त बताया गया है, जो एक अतिवादी और अवास्तविक विचार है।
5. धार्मिक सिद्धान्त: आज के युग में जहाँ बहुत से लोग ईश्वर और धर्म में आस्था नहीं रखते, वहाँ इस सिद्धान्त की कोई उपयोगिता नहीं है।
6. रूढ़िवादी सिद्धान्त: यह सिद्धान्त एक रूढ़िवादी विचार है। इसकी मान्यताएँ जनहितकारी परिवर्तन की अनुमति नहीं देतीं, क्योंकि राजा का विरोध ईश्वर का विरोध और पाप माना जाता है।
7. ऐतिहासिक प्रमाणों का अभाव: इतिहास के अध्ययन से इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि है। यह सिद्धान्त राजनीतिक चेतना, रक्त सम्बन्ध और आर्थिक आवश्यकताओं जैसे अन्य महत्वपूर्ण कारकों की उपेक्षा करता है।
8. प्रतिक्रियावादी सिद्धान्त: यह सिद्धान्त जनता के मन में राजा के प्रति अंधभक्ति पैदा करता है, जो प्रबुद्ध शासन के विरुद्ध है।
9. केवल राजतन्त्र पर लागू सिद्धान्त: राज्य उत्पत्ति का यह सिद्धान्त केवल राजतन्त्र पर लागू होता है, लोकतन्त्र या कुलीन तन्त्र पर लागू नहीं होता है।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि इस सिद्धान्त ने शुरुआती समय में समाज को अराजकता से बचाकर लोगों को राजा के नेतृत्व में संगठित किया था। जिस समय नैतिक, सामाजिक और आर्थिक आदर्शों की कमी थी, उस समय धर्म ने सुरक्षा और व्यवस्था प्रदान की थी।
In simple words: दैवीय सिद्धान्त की आलोचना इसलिए की जाती है क्योंकि यह अवैज्ञानिक है, राजा को तानाशाह बनाता है, लोकतंत्र के खिलाफ है, और इसके ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं। लेकिन शुरुआती समय में इसने समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में मदद की थी।
🎯 Exam Tip: दैवीय उत्पत्ति सिद्धान्त का आलोचनात्मक मूल्यांकन करते समय उसकी कमियों और एक संक्षिप्त निष्कर्ष को संतुलित रूप से प्रस्तुत करें।
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