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Detailed Chapter 21 संविधान सभा का गठन, उद्देश्य व कार्यप्रणाली RBSE Solutions for Class 11 Political Science
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Class 11 Political Science Chapter 21 संविधान सभा का गठन, उद्देश्य व कार्यप्रणाली RBSE Solutions PDF
Question 1. मिलान कीजिए।
समिति
1. संघ शक्ति समिति
2. मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यक सम्बन्धी समिति
3. प्रारूप समिति
4. प्रक्रिया नियम समिति
अध्यक्ष
(अ) डॉ. भीमराव अम्बेडकर
(ब) पं. जवाहरलाल नेहरू
(स) बल्लभ भाई पटेल
(द) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
Answer:
1. (ब) पं. जवाहरलाल नेहरू
In simple words: यहाँ दी गई समितियों में से, संघ शक्ति समिति के अध्यक्ष पं. जवाहरलाल नेहरू थे। यह संविधान सभा की एक महत्वपूर्ण समिति थी।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की प्रमुख समितियों और उनके अध्यक्षों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे प्रश्न अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 1. संविधानसभा के एकमात्र काँग्रेसी सदस्य का नाम लिखो।
Answer: संविधान सभा की प्रारूप समिति में डॉ. के. एम. मुंशी ही एकमात्र सदस्य थे जो काँग्रेस पार्टी से थे।
In simple words: प्रारूप समिति में सिर्फ डॉ. के. एम. मुंशी ही काँग्रेस के सदस्य थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की संरचना और प्रमुख सदस्यों से संबंधित जानकारी याद रखें, खासकर महत्वपूर्ण समितियों के संदर्भ में।
Question 2. संविधान सभा के चुनाव के परिणाम बताइए।
Answer: संविधान सभा के चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में ब्रिटिश भारत के 296 सदस्यों के लिए प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा कराए गए। ये चुनाव मुख्य रूप से दलों के आधार पर लड़े गए थे। इसमें भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस को 208 सीटें मिलीं। मुस्लिम लीग ने 73 सीटें जीतीं, और छोटे दलों को 15 सीटें मिलीं। देशी रियासतों ने शुरू में इन चुनावों से खुद को अलग रखा, जिससे उनकी सभी 93 सीटें खाली रहीं। हालांकि, बाद में धीरे-धीरे इन रियासतों के प्रतिनिधियों को नामित किया गया और वे भी संविधान सभा में शामिल हो गए।
In simple words: संविधान सभा के चुनाव जुलाई-अगस्त 1946 में हुए थे। काँग्रेस को 208 सीटें मिलीं, मुस्लिम लीग को 73 और छोटे दलों को 15 सीटें मिलीं। शुरू में देशी रियासतें शामिल नहीं हुईं, पर बाद में उनके प्रतिनिधि भी आ गए।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के चुनाव परिणामों में प्रमुख राजनीतिक दलों की सीटों की संख्या और देशी रियासतों की स्थिति को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. कैबिनेट मिशन के सदस्यों के नाम लिखो।
Answer: 24 मार्च 1946 को भारत आए तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन के सदस्य थे:
• लॉर्ड पैथिक लॉरेंस
• सर स्टेफोर्ड क्रिप्स
• ए. वी. एलेक्जेंडर
In simple words: 24 मार्च 1946 को भारत आए कैबिनेट मिशन में तीन सदस्य थे: लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, सर स्टेफोर्ड क्रिप्स और ए. वी. एलेक्जेंडर।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सभी सदस्यों के नाम सही वर्तनी के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. संविधान सभा में सीटों का निर्धारण किस आधार पर किया गया?
Answer: संविधान सभा में सीटों का निर्धारण निम्नलिखित आधार पर किया गया था:
• प्रत्येक प्रांत और रियासत से भेजे जाने वाले सदस्यों की संख्या उस क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर तय की गई थी। हर 10 लाख (एक मिलियन) लोगों पर एक प्रतिनिधि चुना जाना था।
• प्रांतों में संविधान सभा के लिए दिए गए स्थानों को, उनमें रहने वाले समुदायों के आधार पर बांटा गया था। मुख्य मतदाता वर्ग सामान्य, मुस्लिम और पंजाब में सिख थे।
• प्रांतीय विधानसभाओं में हर समुदाय के सदस्यों ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से अपने प्रतिनिधियों को चुना।
In simple words: संविधान सभा में सीटें जनसंख्या के हिसाब से तय की गईं थीं। हर 10 लाख लोगों पर एक प्रतिनिधि चुना गया। सीटों को धर्म (सामान्य, मुस्लिम, सिख) के आधार पर बांटा गया, और सदस्यों को प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से चुना गया।
🎯 Exam Tip: सीटों के निर्धारण के लिए जनसंख्या अनुपात (10 लाख पर एक प्रतिनिधि) और समुदाय विभाजन के आधार को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 6. संविधान के कुल कितने वाचन हुए लिखो?
Answer: संविधान के कुल तीन वाचन हुए जो निम्न प्रकार से हैं -
1. प्रथम वाचन: संविधान सभा में संविधान का पहला वाचन 4 नवम्बर, 1948 को शुरू हुआ, जो 9 नवम्बर, 1948 तक चला। इस दौरान प्रारूप संविधान के प्रकाशित होने के बाद संविधान में संशोधन के लिए कई सुझाव मिले और एक खास संस्करण छापा गया।
2. द्वितीय वाचन: संविधान सभा में संविधान का दूसरा वाचन 15 नवम्बर, 1948 को शुरू हुआ, जो 17 अक्टूबर, 1949 तक चला। इस अवधि में संविधान के हर खंड पर विस्तार से चर्चा की गई और 7653 संशोधन प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 2473 को स्वीकार करके उन पर विचार किया गया।
3. तृतीय वाचन: संविधान सभा में संविधान का तीसरा वाचन 14 नवम्बर, 1949 को शुरू हुआ, जो 26 नवम्बर, 1949 तक चला। इसी दिन संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित घोषित कर दिया गया।
In simple words: संविधान के तीन वाचन हुए। पहला वाचन (4-9 नवंबर 1948) मसौदे पर सुझाव लेने के लिए था। दूसरा वाचन (15 नवंबर 1948 - 17 अक्टूबर 1949) हर हिस्से पर विस्तार से चर्चा करने के लिए था, जिसमें कई बदलाव स्वीकार किए गए। तीसरा वाचन (14-26 नवंबर 1949) संविधान को अंतिम रूप से पारित करने के लिए था।
🎯 Exam Tip: संविधान के तीनों वाचनों की तिथियां और प्रत्येक वाचन में हुई मुख्य घटनाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 7. संविधान की प्रस्तावना के महत्व को बताइये।
Answer: संविधान की प्रस्तावना का महत्व इस प्रकार है:
हर संविधान की शुरुआत में प्रस्तावना का होना एक मूलभूत आवश्यकता है। संविधान की प्रस्तावना से हमें संविधान के मूल दर्शन और उद्देश्यों के बारे में पता चलता है। प्रस्तावना का कानूनी महत्व भी होता है। जब संविधान का कोई कानूनी हिस्सा स्पष्ट न हो, तो प्रस्तावना उसे स्पष्ट करने और उसकी संवैधानिक शक्ति को समझने में मदद करती है।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना बहुत ज़रूरी है। यह संविधान के मुख्य विचारों को बताती है। इसका कानूनी महत्व भी है क्योंकि यह संविधान के मुश्किल हिस्सों को समझने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: प्रस्तावना को संविधान की 'आत्मा' या 'कुंजी' के रूप में संदर्भित किया जाता है; इसके महत्व को बताते समय इस बिंदु को शामिल करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 21 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. प्रारूप समिति के सदस्यों के नाम लिखते हुए समिति के कार्यों का विवरण दीजिए।
Answer: प्रारूप समिति के सदस्य- संविधान सभा की प्रारूप समिति के सदस्यों के नाम निम्नलिखित हैं:
1. डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (अध्यक्ष)
2. अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
3. एम. गोपाल स्वामी अयंगर
4. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
5. डॉ. के. एम. मुंशी (एकमात्र काँग्रेस सदस्य)
6. टी. टी. कृष्णामाचारी
7. एन. माधवराव
प्रारूप समिति के कार्य- संविधान सभा द्वारा 19 अगस्त, 1947 को एक प्रस्ताव पारित करके प्रारूप समिति का गठन किया गया था, और इसके अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को चुना गया। इस समिति का मुख्य कार्य संविधान की परामर्श शाखा द्वारा तैयार किए गए संविधान का परीक्षण करना, संविधान का प्रारूप तैयार करना और उसे शामिल करके, विचार-विमर्श के लिए संविधान सभा के सामने प्रस्तुत करना था। इस समिति ने संविधान निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस समिति ने संविधान का प्रारूप तैयार करके 21 फरवरी, 1948 को अपनी रिपोर्ट संविधान सभा के सामने पेश की। संविधान सभा में इस रिपोर्ट पर तीन वाचन हुए, जो इस प्रकार हैं:
(1) प्रथम वाचन: यह 4 नवम्बर, 1948 को शुरू हुआ, जो 9 नवम्बर, 1948 तक चला। इसमें प्रारूप संविधान के प्रकाशित होने के बाद संविधान में संशोधन के लिए कई सुझाव मिले और एक विशिष्ट संस्करण प्रकाशित हुआ।
(2) द्वितीय वाचन: संविधान सभा का दूसरा वाचन 15 नवम्बर, 1948 को शुरू हुआ, जो 17 अक्टूबर, 1949 तक चला। इस समय में 7653 संशोधन प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 2473 को स्वीकार करके उन पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
(3) तृतीय वाचन: संविधान सभा में संविधान का तीसरा वाचन 14 नवम्बर, 1949 को शुरू हुआ, जो 26 नवम्बर, 1949 तक चला। 26 नवम्बर, 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित घोषित कर दिया गया।
अर्थात, संविधान के अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 372, 380, 388, 391, 392 तथा 393 उसी दिन यानी 26 नवम्बर, 1949 को ही लागू कर दिए गए थे। संविधान का बाकी हिस्सा 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था, क्योंकि 26 जनवरी, 1930 को भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस ने 'पूर्ण स्वतंत्रता' की मांग की थी और स्वतंत्रता से पहले तक हर 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी, 1950 को हुई और उसी दिन संविधान सभा द्वारा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का पहला राष्ट्रपति चुना गया।
In simple words: प्रारूप समिति में 7 सदस्य थे, जिनके अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अम्बेडकर थे। इस समिति का मुख्य काम संविधान का कच्चा मसौदा तैयार करना था, जो सलाह शाखा से मिली जानकारी पर आधारित था। इसने 21 फरवरी 1948 को अपनी रिपोर्ट दी, जिस पर संविधान सभा में तीन बार बहस हुई। पहला वाचन सुझावों के लिए, दूसरा विस्तृत चर्चा के लिए, और तीसरा अंतिम रूप से संविधान को पारित करने के लिए था। कुछ अनुच्छेद 26 नवंबर 1949 को ही लागू हुए, जबकि बाकी संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति के सदस्यों के नाम और समिति के कार्य, साथ ही संविधान के तीनों वाचनों की तिथियां और मुख्य बातें याद रखें।
Question 2. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख करो।
Answer: भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
(1) लोकप्रिय प्रभुसत्ता पर आधारित संविधान: भारत का संविधान लोगों की प्रभुसत्ता पर आधारित है, जिसका मतलब है कि इसे भारतीय जनता ने ही बनाया, अधिनियमित किया और अपनाया है। संविधान द्वारा अंतिम शक्ति भारतीय जनता को ही दी गई है। इसकी प्रस्तावना में साफ कहा गया है कि "हम भारत के लोग... दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवम्बर, 1949 को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
(2) विश्व का सबसे बड़ा संविधान: लिखित संविधानों में, भारत का संविधान दुनिया के सभी संविधानों में सबसे विस्तृत है। मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं। संवैधानिक संशोधनों के बाद वर्तमान में इसमें 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं। इसकी तुलना में, संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान में 7, कनाडा के संविधान में 147, ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 128, दक्षिण अफ्रीका के संविधान में 153 और स्विट्जरलैंड के संविधान में 195 ही अनुच्छेद हैं।
(3) सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतान्त्रात्मक गणराज्य: संविधान में स्पष्ट किया गया है कि भारत अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र है, यानी यह एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न देश है। देश की प्रभुसत्ता जनता में निहित है। शासन जनता का है और जनता द्वारा जनता के लिए चलाया जाता है। यहां लोकतांत्रिक पद्धति अपनाई गई है। भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है क्योंकि यहां का राष्ट्राध्यक्ष वंशानुगत नहीं होता, बल्कि जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है।
(5) सम्पूर्ण देश के लिए एक संविधान: संघात्मक शासन व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग संविधानों की व्यवस्था होती है। लेकिन भारत का संविधान केंद्र और राज्यों दोनों में समान रूप से लागू होता है।
(6) संसदीय शासन व्यवस्था: भारतीय संविधान में ब्रिटिश मॉडल का पालन करते हुए संसदीय राजनीतिक व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत संसद पूरी राजनीतिक व्यवस्था का केंद्र है। मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से विधानसभा और लोकसभा के प्रति सीधे तौर पर जवाबदेह होता है। देश के राष्ट्राध्यक्ष यानी राष्ट्रपति का पद केवल नाममात्र की कार्यपालिका का प्रतीक है और वास्तविक शक्तियों का प्रयोग मंत्रिमंडल द्वारा किया जाता है। इसी तरह, भारत के राज्यों में भी संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई है, जहाँ राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।
(7) मौलिक अधिकार तथा कर्तव्य: भारतीय संविधान के तीसरे भाग में मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गई है। मौलिक अधिकार वे आवश्यक अधिकार होते हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए ज़रूरी होते हैं। मूल रूप से भारतीय संविधान में ऐसे 7 अधिकारों का प्रावधान था। ये अधिकार थे -
• समानता का अधिकार
• शोषण के विरुद्ध अधिकार
• शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार
• स्वतंत्रता का अधिकार
• संपत्ति का अधिकार
• धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
• संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
लेकिन बाद में, 42वें संविधान संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की श्रेणी से हटा दिया गया और अब बाकी 6 मौलिक अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं। ये सभी अधिकार वाद योग्य हैं, यानी इनके उल्लंघन पर नागरिक न्यायालय का सहारा ले सकते हैं। ये अधिकार विधानमंडल और कार्यपालिका की शक्तियों को भी सीमित करते हैं। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा भारत के संविधान में नागरिकों के 10 मूल कर्तव्यों को शामिल किया गया है। इसमें संविधान का पालन करना, भारत की संप्रभुता की रक्षा करना, और 2002 के संविधान संशोधन द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने संबंधी 11वां मूल कर्तव्य जोड़ा गया है।
(8) एकात्मक और संघात्मक तत्वों का सम्मिश्रण: संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे संघ का निर्माण करना चाहा था जिसमें केंद्र सरकार भारत की एकता बनाए रखे और राज्यों को भी स्वायत्तता मिले। संविधान के कुछ भागों में संशोधन करना आसान है और कुछ में कठिन। भारत के संविधान में संशोधन की तीन विधियां हैं:
• कुछ विषय संसद के दोनों सदनों के साधारण बहुमत से संशोधित किए जाते हैं, जैसे राज्यों का पुनर्गठन।
• भारत के संविधान के कुछ अनुच्छेदों को संशोधित करने के लिए संसद के दोनों सदनों के पूर्ण बहुमत और उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। संविधान के भाग तीन और चार के अनुच्छेद इसी श्रेणी में आते हैं।
• संविधान के कुछ अनुच्छेदों में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों के पूर्ण बहुमत, उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की विधानसभाओं का समर्थन आवश्यक है। राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति, केंद्र व राज्यों के बीच शक्ति विभाजन जैसे विषयों के संशोधन के लिए यह प्रक्रिया जटिल है। उपरोक्त संशोधन की तीनों विधियों से यह स्पष्ट होता है कि संविधान संशोधन के लिए लचीले, अर्ध कठोर और कठोर तरीकों को अपनाया गया है।
(10) समाजवादी राज्य की स्थापना: 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' शब्द को शामिल किया गया। समाजवादी राज्य का मतलब यह है कि उत्पादन और वितरण के साधनों पर किसी एक व्यक्ति का नियंत्रण न होकर पूरे समाज का अधिकार हो।
(11) पंथनिरपेक्ष राज्य की स्थापना: 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान की प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष' शब्द को जोड़ा गया है। धर्मनिरपेक्ष का मतलब यह है कि राज्य का अपना कोई एक राज्य धर्म नहीं है और राज्य धार्मिक मामलों में पूरी तरह तटस्थ रहता है। साथ ही, यह सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखता है। हर नागरिक को धार्मिक मामलों में पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है और राज्य कई धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। भारतीय संविधान के भाग तीन में अनुच्छेद 25 से 28 तक नागरिकों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में दिया गया है।
(12) नीति - निर्देशक सिद्धान्तों की व्यवस्था: भारतीय संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें संघीय और प्रांतीय सरकारों को यह आदेश दिया गया है कि उन्हें नागरिकों की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति के लिए क्या काम करना चाहिए। इन सिद्धांतों के माध्यम से राज्य के कल्याणकारी स्वरूप को प्राप्त करने का प्रयास किया गया है।
(13) आपातकालीन व्यवस्था: संविधान में आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए भारत के राष्ट्राध्यक्ष को कुछ संकटकालीन शक्तियां दी गई हैं, जिनका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 360 में किया गया है। इन शक्तियों का प्रयोग राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद और प्रधानमंत्री की सलाह से करते हैं।
(15) शक्तिशाली केंद्र की स्थापना: भारत एक नया और विकासशील राज्य है। इसी बात को ध्यान में रखकर संविधान निर्मात्री सभा ने केंद्र सरकार को शक्तिशाली बनाया, ताकि भारत की एकता और अखंडता को मजबूत किया जा सके।
(16) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: भारतीय संविधान सत्ता की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित करता है। इसी कारण से हमारे देश में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले हर स्त्री-पुरुष को बिना किसी भेदभाव के वयस्क मताधिकार दिया गया है, ताकि वे शासन सत्ता में भागीदारी निभा सकें।
(17) एक राष्ट्र भाषा का प्रावधान: भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है। संविधान द्वारा देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी भाषा को देश की राष्ट्र भाषा घोषित किया गया है। हालांकि, यह अभी तक पूरी तरह से संभव नहीं हो पाया है। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल किया गया है।
(18) राष्ट्रपति राष्ट्र की एकता का प्रतीक: भारतीय संविधान में देश की सभी शक्तियों को सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रपति में निहित करके राष्ट्र की एकता का प्रतीक बनाया गया है। राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
(19) विश्व शांति की कामना: भारतीय संविधान विश्व समुदाय में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शांति की कामना करता है। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' हमारी प्राचीन संस्कृति की विशेषता है। इसीलिए संविधान के भाग चार के अनुच्छेद 51 में अंतर्राष्ट्रीय शक्ति और सुरक्षा की अभिव्यक्ति को शामिल किया गया है।
In simple words: भारतीय संविधान की कई मुख्य बातें हैं। यह लोगों की ताकत पर बना है, दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, और भारत को एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाता है। इसमें पूरे देश के लिए एक ही संविधान है और संसद वाला शासन है। लोगों को मौलिक अधिकार और कर्तव्य मिले हैं। यह केंद्र और राज्यों की मिली-जुली व्यवस्था है। संविधान 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' राज्य की बात करता है। इसमें राज्य के लिए दिशा-निर्देश और आपातकाल के नियम भी हैं। केंद्र सरकार को मजबूत बनाया गया है, और 18 साल के सभी लोगों को वोट देने का अधिकार है। इसमें एक राष्ट्रीय भाषा (हिंदी) है, राष्ट्रपति देश की एकता का प्रतीक है, और यह दुनिया में शांति बनाए रखने की इच्छा रखता है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान की प्रत्येक विशेषता का संक्षिप्त और सटीक विवरण दें, खासकर उन शब्दों पर जोर दें जो बाद में संशोधनों के माध्यम से जोड़े गए थे।
Question 3. संविधान की प्रस्तावना लिखिए।
Answer: संविधान की प्रस्तावना का अर्थ है, "किसी भाषण अथवा लेख में प्रारंभिक और परिचयात्मक कथन।" हर संविधान की शुरुआत में उसकी प्रस्तावना होती है जिसमें संविधान के मुख्य उद्देश्य और प्रयोजनों को स्पष्ट किया जाता है। संविधान के सभी प्रावधान प्रस्तावना में निहित होते हैं। प्रस्तावना में जिन तथ्यों, सिद्धांतों और आदर्शों का निरूपण हुआ है, वे पूरे संविधान में मौजूद हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में संविधान के आदर्शों, मूल्यों और आकांक्षाओं को स्पष्ट किया गया है।
42वें संवैधानिक संशोधन द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' जैसे नए शब्द जोड़े गए। संविधान निर्माताओं के अनुसार, प्रस्तावना निम्नलिखित महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करती है:
1. संविधान का स्रोत क्या है, यानी 'भारत के लोग'।
2. संविधान का उद्देश्य क्या है? यानी इसमें उन महान अधिकारों और स्वतंत्रताओं की घोषणा की गई है जिन्हें भारत के लोगों ने सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित बनाने की इच्छा की थी।
3. इसमें संविधान के लागू होने की विधि का उल्लेख है।
4. भारत के सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थापना करना, यानी स्त्रियों सहित सभी वंचित वर्गों के विकास के लिए विशेष प्रयास करना, प्रस्तावना के प्रमुख अवयव हैं।
42वें संशोधन के बाद जिस रूप में प्रस्तावना इस समय हमारे संविधान में मौजूद है, उसके अनुसार संविधान निर्माताओं के सर्वोच्च या मूलभूत संवैधानिक मूल्यों को निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किया जा सकता है:
(1) हम भारत के लोग- प्रस्तावना के इन शब्दों में तीन बातें निहित हैं:
• संविधान द्वारा अंतिम सत्ता जनता में निहित है।
• संविधान के निर्माता जनता के प्रतिनिधि थे।
• भारतीय संविधान भारतीय जनता की इच्छा का परिणाम है।
(2) सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतान्त्रात्मक गणराज्य- 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष', 'लोकतांत्रिक गणराज्य' शब्द भारतीय संविधान की प्रस्तावना के आधार स्तंभ हैं, जिनका अभिप्राय इस प्रकार है:
(i) सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न: इसका अर्थ यह है कि भारत अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में पूरी तरह स्वतंत्र है। वह किसी भी दूसरे देश के साथ संबंध जोड़ सकता है, यह उसकी इच्छा पर निर्भर है।
(ii) समाजवादी: संविधान निर्माता नहीं चाहते थे कि संविधान किसी खास विचारधारा या वाद से जुड़ा हो या किसी आर्थिक सिद्धांत तक सीमित रहे। इसलिए मूल प्रस्तावना में 'समाजवाद' शब्द नहीं जोड़ा गया था, लेकिन सभी नागरिकों को आर्थिक न्याय, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता देने पर जोर दिया गया। धार्मिक मामलों में पूर्णतः तटस्थ रहता है। 42वें संवैधानिक संशोधन द्वारा इस शब्द को प्रस्तावना में जोड़ा गया जिससे भविष्य के भारत की धर्मनिरपेक्ष नीति को बल मिला।
(iv) लोकतंत्र: इसका अर्थ यह है कि भारत में राजसत्ता का प्रयोग जनता द्वारा किया जाता है। भारतीय जनता इसका प्रयोग अप्रत्यक्ष रूप से करती है। यानी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि शासन चलाते हैं।
(v) गणराज्य: भारत के राष्ट्रपति वंशानुगत आधार पर मनोनीत नहीं होते, बल्कि जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं, इसी कारण भारत को गणराज्य कहते हैं।
(3) सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय: प्रस्तावना के अंतर्गत इन शब्दों के आधार पर संविधान के लक्ष्य का वर्णन किया गया है।
(i) सामाजिक न्याय: यह एक बदलती हुई अवधारणा है। इसका अर्थ है कि समाज में व्यक्ति को व्यक्ति के नाते महत्व दिया जाना चाहिए। जाति, लिंग, वर्ण, धर्म, नस्ल, या संपत्ति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
(ii) आर्थिक न्याय: इससे अर्थ है कि "ऐसी व्यवस्था को खत्म कर दिया जाना चाहिए जिसमें साधन-संपन्न व्यक्ति साधनहीन व्यक्तियों का शोषण करते हैं, यानी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी होनी चाहिए। अमीरी-गरीबी का अंतर कम से कम होना चाहिए।"
(iii) राजनीतिक न्याय: इससे अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को शासन व्यवस्था में भाग लेने के समान अवसर मिलने चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
(4) स्वतंत्रता, समानता एवं भ्रातृत्व-स्वतंत्रता: भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के सकारात्मक स्वरूप को अपनाया गया है। इसी के आधार पर व्यक्तियों के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास संभव है, स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है।
(i) समानता – हमारे संविधान निर्माताओं ने समानता के दो आयामों को अपनाया है। ये हैं प्रतिष्ठा की समानता और अवसर की समानता। अवसर की समानता वह साधन है जिसके आधार पर प्रतिष्ठा की समानता को प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना एक परिचय है, जो संविधान के मुख्य मकसद और मूल्यों को बताती है। 42वें संशोधन के बाद इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' जैसे शब्द जोड़े गए। यह बताता है कि संविधान की शक्ति जनता में है, और इसका लक्ष्य सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा देना है। 'हम भारत के लोग' का मतलब है कि भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, गणराज्य है, जहाँ धर्म के मामले में राज्य तटस्थ है, और हर नागरिक को बिना भेदभाव के सरकार में शामिल होने का मौका मिलता है। यह गरीबी और अमीरी का फर्क कम करने और सभी की मूलभूत ज़रूरतें पूरी करने पर ज़ोर देता है।
🎯 Exam Tip: प्रस्तावना के प्रमुख शब्दों जैसे 'संप्रभुता', 'समाजवाद', 'पंथनिरपेक्ष', 'लोकतंत्र', 'गणराज्य', 'न्याय', 'स्वतंत्रता' और 'समानता' को विस्तार से समझाएं। 42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए शब्दों का विशेष उल्लेख करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 21 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा में सदस्य थे
(a) 389
(b) 390
(c) 380
(d) 385
Answer: (a) 389
In simple words: कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा की सदस्य संख्या एक महत्वपूर्ण तथ्य है; इसे याद रखें।
Question 2. कैबिनेट मिशन में सदस्य थे –
(a) 1
(b) 3
(c) 2
(d) 4
Answer: (b) 3
In simple words: कैबिनेट मिशन में 3 सदस्य शामिल थे।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन के सदस्यों की संख्या एक सीधा तथ्य है, जिसे याद रखना आसान है।
Question 3. देशी रियासतों के लिए संविधान सभा में निर्धारित सीटों की संख्या थी –
(a) 389
(b) 390
(c) 93
(d) 385
Answer: (c) 93
In simple words: देशी रियासतों के लिए संविधान सभा में 93 सीटें तय की गई थीं।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा में ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों के लिए आवंटित सीटों की संख्या को अलग-अलग याद रखें।
Question 4. संविधान दिवस कब मनाया जाता है –
(a) 26 नवम्बर
(b) 26 जनवरी
(c) 27 नवम्बर
(d) 15 अगस्त।
Answer: (a) 26 नवम्बर
In simple words: संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: 'संविधान दिवस' (26 नवंबर) और 'गणतंत्र दिवस' (26 जनवरी) की तिथियों को भ्रमित न करें, दोनों महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. संविधान सभा की प्रथम बैठक के अध्यक्ष थे –
(a) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(b) सच्चिदानन्द सिन्हा
(c) जवाहर लाल नेहरू
(d) डॉ. अम्बेडकर।
Answer: (b) सच्चिदानन्द सिन्हा
In simple words: संविधान सभा की पहली बैठक के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे, जो अस्थायी अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के पहले अस्थायी और स्थायी अध्यक्षों के बीच का अंतर याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. संविधान सभा के चुनावों में काँग्रेस को सीटें मिलीं –
(a) 208
(b) 220
(c) 270
(d) 216.
Answer: (a) 208
In simple words: संविधान सभा के चुनाव में काँग्रेस को 208 सीटें मिली थीं।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा चुनावों में प्रमुख दलों द्वारा जीती गई सीटों की संख्या याद रखें।
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Question 2. संविधान सभा का निर्वाचन किस योजना के आधार पर हुआ?
(a) साइमन कमीशन
(b) क्रिप्स प्रस्ताव
(c) केबिनेट मिशन योजना
(d) माउण्टबेटन योजना।
Answer: (b) क्रिप्स प्रस्ताव
In simple words: संविधान सभा का चुनाव क्रिप्स प्रस्ताव के आधार पर हुआ था।
🎯 Exam Tip: भारत के संवैधानिक विकास में विभिन्न योजनाओं और प्रस्तावों की भूमिका को याद रखें।
Question 3. कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा का गठन हुआ
(a) नवम्बर 1946 को
(b) दिसम्बर 1945 को
(c) जनवरी 1947 को
(d) 15 अगस्त 1947 को
Answer: (a) नवम्बर 1946 को
In simple words: कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन नवंबर 1946 में हुआ था।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन योजना और संविधान सभा के गठन की तारीखों को सटीकता से याद रखें।
Question 4. कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा के चुनाव हुए -
(a) जुलाई 1947 को
(b) अगस्त 1948 को
(c) जुलाई 1946 को
(d) जनवरी 1950 को।
Answer: (c) जुलाई 1946 को
In simple words: कैबिनेट मिशन योजना के हिसाब से संविधान सभा के चुनाव जुलाई 1946 में हुए थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के चुनाव की तारीख (जुलाई 1946) को कैबिनेट मिशन योजना से जोड़कर याद रखें।
Question 6. 11 दिसम्बर, 1946 को संविधान सभा के लिए स्थायी सभापति निर्वाचित हुए -
(a) एच. सी. मुखर्जी
(b) सच्चिदानन्द सिन्हा
(c) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(d) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (c) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद) और उनकी निर्वाचन तिथि को याद रखें।
Question 7. विधायिका की बैठक की अध्यक्षता कौन करता था?
(a) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(b) दुर्गाबाई
(c) पं. जवाहर लाल नेहरू
(d) जी. वी. मावलंकर।
Answer: (d) जी. वी. मावलंकर।
In simple words: विधायिका की बैठकों की अध्यक्षता जी. वी. मावलंकर करते थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के विधायी कार्यों के अध्यक्ष का नाम याद रखें, जो बाद में लोकसभा के पहले अध्यक्ष बने।
Question 8. संविधान का उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत किया गया?
(a) 22 जनवरी, 1947
(b) 13 दिसम्बर, 1946
(c) 22 दिसम्बर, 1946
(d) 26 जनवरी, 1950
Answer: (b) 13 दिसम्बर, 1946
In simple words: संविधान का उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर 1946 को पेश किया गया था।
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव की प्रस्तुति तिथि (13 दिसंबर 1946) और इसे प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति (पं. जवाहरलाल नेहरू) को याद रखें।
Question 10. भारत का संविधान, अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया -
(अ) 26 नवम्बर, 1949 को
(ब) 15 अगस्त, 1947 को
(स) 26 जनवरी, 1947 को
(द) 26 जनवरी, 1950 को।
Answer: (अ) 26 नवम्बर, 1949 को
In simple words: भारत के संविधान को 26 नवम्बर, 1949 को स्वीकार किया गया, लागू किया गया और देश को समर्पित किया गया था।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था, लेकिन पूरी तरह से 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।
Question 11. 'इण्डियन कान्स्टीट्यूशन कॉर्नर स्टोन ऑफ ए नेशन' पुस्तक के लेखक हैं
(अ) पं. जवाहर लाल नेहरू
(ब) ग्रेनविल आस्टिन
(स) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
(द) महात्मा गाँधी।
Answer: (ब) ग्रेनविल आस्टिन
In simple words: ग्रेनविल आस्टिन ने 'भारतीय संविधान: एक राष्ट्र की आधारशिला' नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखना सामान्य ज्ञान और इतिहास के प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
Question 12. संविधान में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय था –
(अ) संघीय व्यवस्था से सम्बन्धित प्रावधान
(ब) भाषा से सम्बन्धित प्रावधान
(स) संसद के सम्बन्ध में प्रावधान
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: संविधान सभा में संघीय व्यवस्था, भाषा और संसद से जुड़े सभी बड़े फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा में लिए गए सर्वसम्मत निर्णयों के मुख्य क्षेत्रों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भारत के शासन के आधार स्तंभ हैं।
Question 14. 11 दिसम्बर, 1946 को संविधान सभा के लिए स्थायी सभापति निर्वाचित हुए -
(अ) एच. सी. मुखर्जी
(ब) सच्चिदानन्द सिन्हा
(स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(द) सर. बी. एन. राव।
Answer: (स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 11 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के पहले स्थायी अध्यक्ष का नाम याद रखना एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य है।
Question 15. संविधान सभा की प्रथम बैठक में कितने सदस्यों ने भाग लिया?
(अ) 211
(ब) 289
(स) 389
(द) 299
Answer: (अ) 211
In simple words: संविधान सभा की पहली बैठक में कुल 211 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की पहली बैठक में उपस्थित सदस्यों की संख्या अक्सर पूछी जाती है, इसे याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. संविधान सभा के उपाध्यक्ष थे –
(अ) बी. एम. राव
(ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
(स) एच. सी. मुखर्जी
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (स) एच. सी. मुखर्जी
In simple words: एच. सी. मुखर्जी संविधान सभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के प्रमुख पदों पर नियुक्त व्यक्तियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 17. संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे –
(अ) सर बी. एम. राव
(ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
(स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(द) गोविन्द बल्लभपन्त।
Answer: (अ) सर बी. एम. राव
In simple words: सर बी. एम. राव संविधान सभा के कानूनी सलाहकार थे।
🎯 Exam Tip: संवैधानिक सलाहकार की भूमिका और उनका नाम याद रखना भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।
Question 19. प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष थे –
(अ) सरदार बल्लभ भाई पटेल
(ब) पं. जवाहर लाल नेहरू
(स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(द) लाला लाजपत राय।
Answer: (स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा की प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष थे, जो सभा के कामकाज के नियम बनाते थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की विभिन्न समितियों और उनके अध्यक्षों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 20. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे –
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
(स) बाल गंगाधर तिलक
(द) सरदार बल्लभ भाई पटेल।
Answer: (ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
In simple words: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया था।
🎯 Exam Tip: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का नाम और प्रारूप समिति में उनकी भूमिका भारतीय संविधान के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 21. भारतीय संविधान का रचयिता किसे कहा जाता है?
(अ) सरदार बल्लभ भाई पटेल को
(ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को
(स) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को
In simple words: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को भारतीय संविधान का मुख्य निर्माता या रचयिता माना जाता है।
🎯 Exam Tip: यह एक बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर हर भारतीय नागरिक को पता होना चाहिए।
Question 1. संविधान सभा के गठन का विचार सर्वप्रथम बाल गंगाधर तिलक के स्वराज्य विधेयक में कब प्रस्तुत किया गया?
Answer: 1895 ई. में।
In simple words: बाल गंगाधर तिलक ने सबसे पहले 1895 में अपने स्वराज्य विधेयक में संविधान सभा बनाने का विचार रखा था।
🎯 Exam Tip: यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में संविधान सभा की मांग का पहला औपचारिक उल्लेख था, जो एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक बिंदु है।
Question 2. 1938 ई. में पं. जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा के गठन के सम्बन्ध में क्या कहा था?
Answer: 1938 ई. में पं. जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि संविधान सभा का गठन निर्वाचित संविधान सभा के माध्यम से वयस्क मताधिकार के द्वारा किया जाएगा एवं इसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा।
In simple words: जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में कहा था कि संविधान सभा वयस्कों द्वारा चुनी जाएगी और इसमें कोई बाहरी दखल नहीं होगा।
🎯 Exam Tip: जवाहरलाल नेहरू के बयान से संविधान सभा के स्वरूप और उसकी स्वतंत्रता के प्रति भारत की आकांक्षा स्पष्ट होती है।
Question 3. संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव सैद्धान्तिक रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा कब स्वीकार किया गया?
Answer: 1940 ई. में ब्रिटिश सरकार ने संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव स्वीकार किया था। इसे अगस्त प्रस्ताव के रूप में जाना जाता है।
In simple words: ब्रिटिश सरकार ने 1940 में संविधान सभा बनाने का विचार 'अगस्त प्रस्ताव' के ज़रिए सैद्धांतिक रूप से मान लिया था।
🎯 Exam Tip: अगस्त प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने भारतीय संविधान सभा की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
Question 4. कैबिनेट मिशन भारत कब आया?
Answer: 24 मार्च, 1946 को।
In simple words: कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1946 को भारत आया था।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन की तारीख और उद्देश्य भारतीय संविधान के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. वह कौन - सी योजना थी, जिसके तहत् संविधान सभा का गठन किया गया था?
Answer: केबिनेट (मन्त्रिमण्डल) मिशन योजना।
In simple words: संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा का गठन किस योजना के तहत हुआ, यह जानना परीक्षा के लिए आवश्यक है।
Question 6. कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार ब्रिटिश भारत एवं देशी रियासतों को संविधान सभा में कितनी सीटें में आवंटित की जानी थीं?
Answer: 296 ब्रिटिश भारत एवं 93 सीटें देशी रियासतों को आवंटित की जानी थीं।
In simple words: कैबिनेट मिशन योजना में ब्रिटिश भारत को 296 और देशी रियासतों को 93 सीटें संविधान सभा में दी गई थीं।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा में ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों की सीटों का बंटवारा याद रखना संविधान निर्माण की संरचना को समझने में मदद करता है।
Question 8. संविधान सभा के किन्हीं 4 सदस्यों के नाम लिखिए।
Answer:
• पं. जवाहर लाल नेहरू
• डॉ. भीमराव अम्बेडकर
• सरदार बल्लभ भाई पटेल
• आचार्य जे. बी. कृपलानी।
In simple words: जवाहरलाल नेहरू, डॉ. अम्बेडकर, सरदार पटेल और जे. बी. कृपलानी संविधान सभा के कुछ प्रमुख सदस्य थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों के नाम याद रखना भारतीय इतिहास और राजनीति विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. संविधान सभा की किन्हीं दो महिला सदस्यों के नाम लिखिए।
Answer:
• श्रीमती दुर्गाबाई
• श्रीमती सरोजनी नायडू।
In simple words: श्रीमती दुर्गाबाई और श्रीमती सरोजनी नायडू संविधान सभा की दो महिला सदस्य थीं।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा में महिलाओं की भागीदारी को दर्शाने वाले नाम अक्सर पूछे जाते हैं, इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. संविधान सभा में विधायिका की बैठक की अध्यक्षता कौन करता था?
Answer: जी. वी. मावलंकर।
In simple words: संविधान सभा की विधायिका (कानून बनाने वाली सभा) की बैठकों की अध्यक्षता जी. वी. मावलंकर करते थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के अध्यक्ष के साथ-साथ विधायिका की बैठकों के अध्यक्ष का नाम भी जानना महत्वपूर्ण है।
Question 11. संविधान के उद्देश्यों की झलक किस प्रस्ताव में मिलती है?
Answer: उद्देश्य प्रस्ताव में।
In simple words: संविधान के लक्ष्य और उद्देश्य 'उद्देश्य प्रस्ताव' में साफ दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव भारतीय संविधान की मूल आत्मा है, इसे अच्छे से समझें।
Question 12. उद्देश्य प्रस्ताव की भाषा किसमें निहित है?
Answer: संविधान की प्रस्तावना में।
In simple words: उद्देश्य प्रस्ताव की बातें बाद में संविधान की प्रस्तावना में शामिल की गईं।
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव और संविधान की प्रस्तावना के बीच के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 14. संविधान की प्रस्तावना में किसकी व्याख्या की गई है?
Answer: संविधान निर्माण के उद्देश्य एवं लक्ष्यों की।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना में बताया गया है कि संविधान किस लक्ष्य और उद्देश्य को प्राप्त करना चाहता है।
🎯 Exam Tip: प्रस्तावना भारतीय संविधान का सार है, जो उसके मूल दर्शन को दर्शाता है।
Question 15. समाजवादी शब्द से क्या अभिप्राय है?
Answer: समाजवादी शब्द का अभिप्राय है कि असमानताओं का निराकरण करने, सभी लोगों की न्यूनतम मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने, समान कार्य करने के लिए समान वेतन देने जैसे आदर्शों की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध हो।
In simple words: समाजवादी का मतलब है कि समाज में बराबरी हो, सबको ज़रूरत की चीज़ें मिलें और सबको बराबर काम के लिए बराबर वेतन मिले।
🎯 Exam Tip: 'समाजवादी' शब्द का अर्थ और उसके उद्देश्य को याद रखना, विशेष रूप से संविधान में उसके शामिल होने के संदर्भ में, महत्वपूर्ण है।
Question 16. उद्देश्य प्रस्ताव कब प्रस्तुत किया गया?
Answer: 13 दिसम्बर, 1946 को।
In simple words: उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर, 1946 को पेश किया गया था।
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव की तिथि भारतीय संविधान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
Question 17. उद्देश्य प्रस्ताव को कब स्वीकृत किया गया?
Answer: 22 जनवरी, 1947 को।
In simple words: उद्देश्य प्रस्ताव को 22 जनवरी, 1947 को स्वीकार कर लिया गया था।
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति की तारीख को भी याद रखना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उसके प्रस्तुतीकरण की तारीख को।
Question 18. सम्प्रभुता शब्द से आपका क्या तात्पर्य है?
Answer: सम्प्रभुता किसी स्वराज्य का एक अत्यन्त अनिवार्य तत्व होता है। इसका अर्थ होता है-बिना किसी आन्तरिक और बाहरी दबाव, प्रभाव अथवा हस्तक्षेप के राज्य की निर्णय लेने की क्षमता।
In simple words: संप्रभुता का मतलब है कि कोई देश बिना किसी बाहरी या अंदरूनी दबाव के अपने फैसले खुद ले सकता है।
🎯 Exam Tip: 'संप्रभुता' शब्द का अर्थ और महत्व भारतीय संविधान की प्रस्तावना के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 19. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित किन्हीं दो लक्ष्यों को लिखिए।
Answer:
• जनता का प्रभुत्व एवं भारत की स्वतन्त्रता का उल्लेख।
• राष्ट्र की सुरक्षा एवं सांस्कृतिक बहुलवाद पर बल।
In simple words: प्रस्तावना में कहा गया है कि शक्ति जनता के हाथ में होगी और भारत आज़ाद होगा, साथ ही देश की सुरक्षा और अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान किया जाएगा।
🎯 Exam Tip: प्रस्तावना में दिए गए लक्ष्यों को समझना, भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए आवश्यक है।
Question 21. ग्रेनविल ऑस्टिन द्वारा लिखित पुस्तक का नाम लिखिए।
Answer: 'इण्डियन कॉन्स्टीट्यूशन कॉर्नर स्टोन ऑफ ए नेशन'।
In simple words: ग्रेनविल ऑस्टिन की किताब का नाम 'भारतीय संविधान: एक राष्ट्र की आधारशिला' है।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम याद रखें।
Question 22. भारत की संविधान सभा का दृष्टिकोण कितने सिद्धान्तों पर आधारित था?
अथवा
भारतीय संविधान सभा की कार्यप्रणाली के आधार लिखिए।
Answer:
• सर्वसम्मतता
• समायोजन
• परिवर्तन के साथ चयन।
In simple words: भारतीय संविधान सभा ने सर्वसम्मति, समायोजन और बदलाव के साथ चुनाव के सिद्धांतों पर काम किया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के काम करने के इन तीन प्रमुख सिद्धांतों को समझना भारतीय संविधान की प्रकृति को उजागर करता है।
Question 23. संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मतता से निर्णित विषय के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Answer:
• संघीय व्यवस्था से सम्बन्धित प्रावधान
• भाषा से सम्बन्धित प्रावधान।
In simple words: संविधान सभा ने संघीय व्यवस्था और भाषा संबंधी नियम सभी की सहमति से बनाए थे।
🎯 Exam Tip: सर्वसम्मति से लिए गए इन निर्णयों के उदाहरण भारतीय संविधान के लचीलेपन और समावेशी प्रकृति को दर्शाते हैं।
Question 24. भारतीय संघीय प्रणाली का निर्धारण किस सिद्धान्त के माध्यम से हुआ?
Answer: सर्वसम्मतता के सिद्धान्त के माध्यम से।
In simple words: भारत में संघीय व्यवस्था का चुनाव सभी सदस्यों की सहमति के सिद्धांत के आधार पर किया गया था।
🎯 Exam Tip: संघीय प्रणाली के निर्धारण में सर्वसम्मति का सिद्धांत भारतीय संविधान के निर्माण की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
Question 25. किन्हीं दो विषयों के नाम लिखिए जिनमें संविधान सभा में समायोजन के सिद्धान्त को अपनाया गया ?
Answer:
• मौलिक अधिकार
• राष्ट्रपति का निर्वाचन।
In simple words: संविधान सभा ने मौलिक अधिकारों और राष्ट्रपति के चुनाव जैसे विषयों पर समायोजन का तरीका अपनाया, जहाँ अलग-अलग विचारों को मिलाकर एक रास्ता निकाला गया।
🎯 Exam Tip: समायोजन के सिद्धांत को समझने के लिए, उन विषयों के उदाहरण जानना महत्वपूर्ण है जहां इस सिद्धांत का प्रयोग किया गया था।
Question 26. 'राष्ट्रमण्डल' की सदस्यता ग्रहण करने के प्रश्न का समाधान किस सिद्धान्त द्वारा किया गया?
Answer: समायोजन के सिद्धान्त द्वारा।
In simple words: राष्ट्रमंडल का सदस्य बनने का फैसला 'समायोजन' के सिद्धांत से किया गया था।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रमंडल की सदस्यता पर भारत के रुख को समझना भारतीय विदेश नीति के शुरुआती चरणों को समझने में मदद करता है।
Question 27. संविधान सभा में पंचायत प्रश्न के समाधान हेतु कौन - सा दृष्टिकोण अपनाया गया?
Answer: समायोजन सिद्धान्त।
In simple words: पंचायत से जुड़े सवाल को सुलझाने के लिए संविधान सभा ने 'समायोजन' का सिद्धांत अपनाया था।
🎯 Exam Tip: पंचायत व्यवस्था के संबंध में समायोजन के सिद्धांत का उपयोग भारतीय संविधान की विकेंद्रीकरण की सोच को दर्शाता है।
Question 28. संविधान सभा द्वारा परिवर्तन के साथ चयन से निर्णित विषय का नाम लिखिए।
Answer: संविधान संशोधन प्रणाली।
In simple words: संविधान संशोधन प्रणाली को 'परिवर्तन के साथ चयन' के सिद्धांत से तय किया गया था।
🎯 Exam Tip: यह सिद्धांत दर्शाता है कि भारतीय संविधान समय के साथ बदलने और अनुकूलित होने की क्षमता रखता है।
Question 29. ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार किन-किन बातों ने संविधान सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लेने में सहायता प्रदान की?
Answer: एकता, आदर्शवाद एवं राष्टीय वातावरण ने।
In simple words: ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार, भारत की एकता, आदर्शवादी सोच और देश का माहौल ऐसी बातें थीं, जिन्होंने संविधान सभा में सर्वसम्मति से फैसले लेने में मदद की।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के निर्माण में एकता और आदर्शवाद की भूमिका को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 30. विश्व का प्रथम देश कौन – सा था, जिसमें राष्ट्रमण्डल की सदस्यता के प्रश्न पर दो विरोधी व्यवस्थाओं यथा गणतन्त्र एवं राजतन्त्र में मेल स्थापित किया।
Answer: भारत।
In simple words: भारत पहला देश था जिसने एक गणराज्य होते हुए भी राष्ट्रमंडल का सदस्य बनकर राजशाही के साथ तालमेल बिठाया।
🎯 Exam Tip: भारत की राष्ट्रमंडल सदस्यता एक अद्वितीय संवैधानिक स्थिति को दर्शाती है और इसे याद रखना चाहिए।
Question 31. संविधान सभा द्वारा निश्चित किए गए किन्हीं दो आदर्शों का नाम लिखिए।
Answer:
• जनता का प्रभुत्व एवं भारत की स्वतन्त्रता का उल्लेख।
• राष्ट्र की सुरक्षा एवं सांस्कृतिक बहुलवाद पर बल।
In simple words: संविधान सभा के मुख्य आदर्शों में जनता की सर्वोच्चता और भारत की आज़ादी, साथ ही देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना शामिल था।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के मूल आदर्शों को समझना उसके दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 33. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब व कहाँ हुई?
Answer: संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित वर्तमान संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में 9 दिसम्बर, 1946 को हुई।
In simple words: संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को नई दिल्ली में संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में हुई थी।
🎯 Exam Tip: यह भारतीय संविधान के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तारीख और स्थान है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 34. मुस्लिम लीग ने किस माँग को लेकर संविधान सभा का बहिष्कार किया?
Answer: मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की माँग को लेकर संविधान सभा का बहिष्कार किया।
In simple words: मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की अलग राष्ट्र की मांग के कारण संविधान सभा का बहिष्कार किया।
🎯 Exam Tip: मुस्लिम लीग के बहिष्कार का कारण और उसके परिणाम भारतीय विभाजन और संविधान निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
Question 35. संविधान सभा की प्रथम बैठक में कितने सदस्यों ने भाग लिया?
Answer: 211 सदस्यों ने।
In simple words: संविधान सभा की पहली बैठक में 211 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।
🎯 Exam Tip: पहली बैठक में उपस्थित सदस्यों की संख्या संविधान सभा के शुरुआती स्वरूप को दर्शाती है।
Question 36. संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष किसे बनाया गया?
अथवा
संविधान के अन्तरिम सभापति कौन थे?
Answer: डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा को।
In simple words: डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया था।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के पहले अस्थायी अध्यक्ष का नाम याद रखना एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
Question 37. भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष कौन थे?
Answer: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद।
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: स्थायी अध्यक्ष का नाम और उनकी भूमिका भारतीय संविधान के निर्माण में केंद्रीय महत्व रखती है।
Question 38. संविधान सभा के विभिन्न कार्यों के सम्पादन के लिए कितनी समितियों का गठन किया गया?
Answer: संविधान सभा के विभिन्न कार्यों के सम्पादन के लिए 8 बड़ी समितियों एवं लगभग 15 छोटी समितियों का गठन किया गया।
In simple words: संविधान सभा ने अपना काम करने के लिए 8 बड़ी और करीब 15 छोटी समितियां बनाई थीं।
🎯 Exam Tip: संविधान निर्माण की जटिल प्रक्रिया को संभालने के लिए समितियों का महत्व और उनकी संख्या को याद रखें।
Question 40. संघीय संविधान समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: पं. जवाहर लाल नेहरू।
In simple words: जवाहरलाल नेहरू संघीय संविधान समिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: संघीय संविधान समिति के अध्यक्ष का नाम भारतीय संघ के स्वरूप को तय करने में उनकी भूमिका के कारण महत्वपूर्ण है।
Question 41. संघ शक्ति समिति में कितने सदस्य थे तथा इसका क्या कार्य था?
Answer: संघ शक्ति समिति में पं. जवाहर लाल नेहरू (अध्यक्ष) के अतिरिक्त 15 अन्य सदस्य थे। इस समिति का कार्य संघ शक्ति के विषय में प्रतिवेदन देना था।
In simple words: संघ शक्ति समिति में जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष थे और उनके साथ 15 सदस्य थे। इसका काम संघ की शक्तियों के बारे में रिपोर्ट देना था।
🎯 Exam Tip: समिति के सदस्यों की संख्या और उसके मुख्य कार्य को समझना उसकी भूमिका को स्पष्ट करता है।
Question 42. संघीय संविधान समिति का क्या कार्य था?
Answer: संघीय संवैधानिक विषयों में परामर्श देना।
In simple words: संघीय संवैधानिक समिति का काम संघीय मामलों से जुड़े संवैधानिक मुद्दों पर सलाह देना था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न समितियों के विशिष्ट कार्यों को याद रखना संविधान निर्माण की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।
Question 43. प्रान्तीय संविधान समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: सरदार बल्लभ भाई पटेल।
In simple words: सरदार वल्लभ भाई पटेल प्रान्तीय संविधान समिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: प्रांतीय संविधान समिति के अध्यक्ष का नाम प्रांतों के एकीकरण में उनकी भूमिका के कारण महत्वपूर्ण है।
Question 44. प्रान्तीय संविधान समिति का प्रमुख कार्य क्या था?
Answer: प्रान्तों के संविधानों के सम्बन्ध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।
In simple words: इस समिति का मुख्य काम राज्यों के संविधानों के लिए रिपोर्ट बनाना था।
🎯 Exam Tip: प्रांतीय संविधान समिति का कार्य भारतीय संघ में राज्यों की भूमिका को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण था।
Question 45. प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: डॉ. भीमराव अम्बेडकर।
In simple words: डॉ. भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति के अध्यक्ष का नाम भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Question 47. मौलिक अधिकार उप समिति के अध्यक्ष कौन थे? इनका कार्य क्या था?
Answer: जे. बी. कृपलानी। इस समिति का मुख्य कार्य मूल अधिकारों के सम्बन्ध में प्रतिवेदन प्रस्तुत करना था।
In simple words: जे. बी. कृपलानी मौलिक अधिकार उप समिति के अध्यक्ष थे, और उनका काम मौलिक अधिकारों पर रिपोर्ट तैयार करना था।
🎯 Exam Tip: मौलिक अधिकार उप समिति के अध्यक्ष का नाम और उसका कार्य भारतीय नागरिकों के अधिकारों को समझने में महत्वपूर्ण है।
Question 48. अल्पसंख्यक अधिकार उपसमिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: एच. सी. मुखर्जी।
In simple words: एच. सी. मुखर्जी अल्पसंख्यक अधिकार उपसमिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: अल्पसंख्यक अधिकार उपसमिति के अध्यक्ष का नाम भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण था।
Question 49. अल्पसंख्यक अधिकार उपसमिति का प्रमुख कार्य क्या था?
Answer: अल्पसंख्यक अधिकार उपसमिति का प्रमुख कार्य अल्पसंख्यकों की रक्षा सम्बन्धी धाराओं एवं कबायली तथा वर्जित क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रतिवेदन देना था।
In simple words: इस समिति का मुख्य काम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, जनजातीय और प्रतिबंधित क्षेत्रों के शासन से जुड़ी धाराओं पर रिपोर्ट देना था।
🎯 Exam Tip: समिति के कार्य को समझना भारत के विविधतापूर्ण समाज में न्याय सुनिश्चित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Question 50. संविधान सभा की प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद।
In simple words: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा की प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: प्रक्रिया नियम समिति के अध्यक्ष का नाम संविधान सभा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका को दर्शाता है।
Question 51. प्रक्रिया नियम समिति का मुख्य कार्य क्या था?
Answer: प्रक्रिया नियम समिति का मुख्य कार्य प्रक्रिया सम्बन्धी नियमों, अध्यक्ष की शक्तियों, संविधान सभा के कार्य के संगठन एवं अधिकारियों की नियुक्ति तथा सभा में होने वाले रिक्त स्थानों को भरने की प्रक्रिया के सम्बन्ध में सिफारिश करना था।
In simple words: इस समिति का काम संविधान सभा के नियम बनाना, अध्यक्ष की शक्तियां तय करना, कर्मचारियों की नियुक्ति करना और खाली सीटों को भरने के तरीके बताना था।
🎯 Exam Tip: इस समिति के कार्य संविधान सभा के संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली के लिए आधारशिला थे।
Question 52. राज्यों से समझौता करने वाली समिति के अध्यक्ष कौन थे?
Answer: पं. जवाहर लाल नेहरू।
In simple words: जवाहरलाल नेहरू राज्यों से समझौता करने वाली समिति के अध्यक्ष थे।
🎯 Exam Tip: इस समिति के अध्यक्ष का नाम राज्यों के एकीकरण और संघ के गठन में उनकी भूमिका के कारण महत्वपूर्ण है।
Question 54. संचालन समिति को मुख्य कार्य क्या था?
Answer: संचालन समिति का मुख्य कार्य सूची का निर्धारण तथा सभा, अनुमान समितियों तथा अध्यक्ष के लिए। व्यापक सम्पर्क साधन के रूप में कार्य करना था।
In simple words: संचालन समिति का मुख्य काम बैठकों का एजेंडा तय करना, अनुमान समितियों और अध्यक्ष के लिए संपर्क सूत्र का काम करना था।
🎯 Exam Tip: संचालन समिति के कार्य संविधान सभा के दैनिक कामकाज और प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण थे।
Question 55. संविधान सभा की सबसे महत्वपूर्ण समिति कौन-सी थी?
Answer: प्रारूप समिति।
In simple words: संविधान सभा की सबसे खास समिति प्रारूप समिति थी, जिसने संविधान का मसौदा तैयार किया।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति का नाम और उसकी केंद्रीय भूमिका भारतीय संविधान के निर्माण में सर्वोपरि है।
Question 56. प्रारूप समिति का गठन कब हुआ?
Answer: 29 अगस्त, 1947 को।
In simple words: प्रारूप समिति 29 अगस्त, 1947 को बनाई गई थी।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति के गठन की तारीख भारतीय स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Question 57. प्रारूप समिति का मुख्य कार्य क्या था?
Answer: परामर्श शाखा द्वारा तैयार किए गए संविधान का परीक्षण कर संविधान का प्रारूप तैयार करने एवं उसको समाविष्ट करके विचार के लिए संविधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत करना।
In simple words: प्रारूप समिति का मुख्य काम कानूनी सलाह शाखा द्वारा तैयार किए गए संविधान की जांच करना, उसका मसौदा बनाना और फिर उसे संविधान सभा के सामने विचार के लिए रखना था।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति का कार्य संविधान के अंतिम रूप को आकार देने में महत्वपूर्ण था।
Question 58. प्रारूप समिति के किन्हीं दो सदस्यों का नाम लिखिए।
Answer:
• डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
• डॉ. के. एम. मुंशी।
In simple words: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और डॉ. के. एम. मुंशी प्रारूप समिति के दो प्रमुख सदस्य थे।
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति के प्रमुख सदस्यों के नाम याद रखना भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका को समझने में मदद करता है।
Question 59. प्रारूप समिति ने भारत में संविधान का प्रारूप तैयार कर संविधान सभा के अध्यक्ष के समक्ष कब प्रस्तुत किया?
Answer: 21 फरवरी, 1948 को।
In simple words: प्रारूप समिति ने संविधान का मसौदा 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष को सौंपा था।
🎯 Exam Tip: संविधान के मसौदे के प्रस्तुतीकरण की तारीख संविधान निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण था।
Question 61. भारतीय संविधान के निर्माण में कुल कितना समय लगा?
Answer: 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन।
In simple words: भारतीय संविधान को बनाने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।
🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है और भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया की अवधि को दर्शाता है।
Question 62. भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान कितने देशों के संविधानों का अवलोकन किया गया?
Answer: लगभग 60 देशों के संविधानों का।
In simple words: भारतीय संविधान बनाते समय, लगभग 60 देशों के संविधानों को देखा और समझा गया था।
🎯 Exam Tip: यह तथ्य भारतीय संविधान के व्यापक शोध और विभिन्न संवैधानिक प्रणालियों से प्रेरणा लेने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
Question 63. संविधान की आत्मा किसे कहा जाता है?
Answer: संविधान की प्रस्तावना को।
In simple words: संविधान की प्रस्तावना को ही संविधान की आत्मा कहते हैं क्योंकि इसमें सभी मुख्य सिद्धांत हैं।
🎯 Exam Tip: 'संविधान की आत्मा' के रूप में प्रस्तावना का महत्व भारतीय संविधान के दर्शन को समझने के लिए केंद्रीय है।
Question 64. 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान की प्रस्तावना में किन-किन शब्दों को सम्मिलित किया गया है?
Answer: समाजवादी, पंथ निरपेक्ष शब्दों को।
In simple words: 42वें संशोधन से संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'पंथनिरपेक्ष' शब्द जोड़े गए थे।
🎯 Exam Tip: 42वें संशोधन को 'लघु संविधान' भी कहा जाता है, और प्रस्तावना में जोड़े गए ये शब्द इसके महत्वपूर्ण परिवर्तन थे।
Question 65. भाषा का निर्धारण किस सिद्धान्त के माध्यम से हुआ?
Answer: सर्वसम्मतता के सिद्धान्त के आधार पर।
In simple words: भाषा का फैसला 'सर्वसम्मति' के सिद्धांत से किया गया था।
🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान में भाषा संबंधी निर्णय की प्रक्रिया को समझना देश की भाषाई विविधता और एकता को दर्शाता है।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. संविधान सभा का महत्व बताइए।
Answer: संविधान सभा में सौमनस्य, सद्भाव एवं समन्वय की भावना ने एक अद्भुत परिचय दिया। रियासतों अल्पसंख्यकों एवं भाषा की समस्या को जिस रूप में सुलझाया गया, वे इस भावना के सफल परिचायक थे। संविधान सभा के सदस्यों का दृष्टिकोण रूढ़िवादी अथवा संकीर्ण न होकर पूर्णत: उदार था। उन्होंने विश्व के विभिन्न संविधानों से अच्छी बातों को ग्रहण कर उनके आदर्शों एवं सिद्धान्तों को भारतीयकरण किया। संविधान सभा द्वारा संविधान में संशोधन की प्रक्रिया भी अनोखे रूप में प्रस्तुत की गयी है। इसमें एक ओर संघवाद तो दूसरी ओर ब्रिटिश संसदीय जनतन्त्र को अपनाया गया है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि संविधान सभा ने भारत के लिए एक जनतान्त्रिक संविधान का निर्माण किया जो विश्व के लिए एक आदर्श है।
In simple words: संविधान सभा ने आपसी समझ और उदारता से काम किया, जिससे रियासतों, अल्पसंख्यकों और भाषा जैसे मुश्किल मुद्दों को सुलझाया गया। इसने दुनिया के अच्छे संविधानों से सीख लेकर भारत के लिए एक ऐसा लोकतांत्रिक संविधान बनाया जो सबके लिए एक मिसाल है।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के महत्व को लिखते समय, उसकी समावेशिता, दूरदर्शिता और विश्व के अन्य संविधानों से प्रेरणा लेने की क्षमता पर ध्यान दें।
Question 2. कैबिनेट मिशन क्या था? संक्षेप में बताइए।
Answer: ब्रिटेन में क्लीमेंट एटली की सरकार ने ब्रिटिश संसद में 19 फरवरी 1946 को यह घोषणा की थी कि ब्रिटेन के कैबिनेट मन्त्रियों का एक विशेष मिशन भारत भेजा जायेगा, जो भारत की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इस मिशन को मुख्य उद्देश्य भारत को यथाशीघ्र एवं पूर्ण स्वतन्त्रता की प्राप्ति में सहायता करना होगा। इस कैबिनेट मिशन के अध्यक्ष भारत सचिव लॉर्ड पैथिक लारेन्स तथा सर स्टेफर्ड क्रिप्स एवं ए. वी. एलेक्जेण्डर इसके सदस्य थे। कैबिनेट मिशन 29 मार्च, 1946 को भारत पहुँचा और इसने 16 मई, 1946 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मिशन के प्रस्तावों में संघीय व्यवस्था, संविधान सभा, सत्ता हस्तान्तरण एवं अन्तरिम सरकार से सम्बन्धित मुद्दों पर व्यापक सुझाव प्रस्तावित किया गए। इन प्रस्तावों में पाकिस्तान निर्णय की माँग को अस्वीकार किया गया। कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के अनुसार नवम्बर, 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ।
In simple words: कैबिनेट मिशन 1946 में भारत आया, जिसका उद्देश्य भारत को जल्दी आज़ादी दिलाना था। इसके सदस्यों में लॉर्ड पैथिक लॉरेंस (अध्यक्ष), सर स्टैफ़ोर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर शामिल थे। इस मिशन ने भारत के लिए संघीय व्यवस्था, संविधान सभा और अंतरिम सरकार बनाने का सुझाव दिया, और पाकिस्तान की मांग को खारिज कर दिया। इसी के आधार पर नवंबर 1946 में संविधान सभा बनी।
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन की तारीख, सदस्य और उसके मुख्य प्रस्तावों को याद रखना भारतीय संविधान के गठन की पृष्ठभूमि के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों का नाम लिखिए।
Answer: संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों में पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, गोपाल स्वामी आयंगर, के. एम. मुंशी, पट्टाभिसीतारमैया, मौलाना अबुल कलाम आजाद, श्रीमती दुर्गाबाई, ठाकुरदास भार्गव, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पी. के. सेन, पुरुषोत्तम दास टण्डन, आचार्य जे. बी. कृपलानी, श्रीमती सरोजनी नायडू एवं गोविन्द बल्लभ पन्त आदि प्रमुख थे।
In simple words: संविधान सभा के मुख्य सदस्यों में जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, डॉ. अम्बेडकर, गोपाल स्वामी आयंगर, के. एम. मुंशी, मौलाना आज़ाद और सरोजनी नायडू जैसे बड़े नेता शामिल थे।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के विभिन्न सदस्यों के नाम याद रखना भारतीय इतिहास में उनके योगदान को समझने में मदद करता है।
Question 5. उद्देश्य प्रस्ताव क्या था? बताइए। अथवा उद्देश्य प्रस्ताव के प्रमुख प्रावधान क्या थे?
Answer: उद्देश्य प्रस्ताव वह प्रस्ताव था जिसमें संविधान सभा ने संविधान बनाने का इरादा दिखाया। यह प्रस्ताव पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में रखा था। 22 जनवरी, 1947 को इसे सभी ने मान लिया। इस प्रस्ताव में भारत के भविष्य के लोकतांत्रिक गणराज्य की रूपरेखा बताई गई थी।
उद्देश्य प्रस्ताव में मुख्य बातें ये थीं:
1. संविधान बनाना.
2. भारत संघ बनाना.
3. संविधान की सीमाएँ तय करना.
4. सत्ता का स्रोत जनता को बनाना.
5. सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता लाना.
6. अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, जनजातीय क्षेत्रों और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना.
7. देश की संप्रभुता की रक्षा करना.
8. दुनिया में शांति और मानवता की भलाई में योगदान देना.
In simple words: उद्देश्य प्रस्ताव वह प्रस्ताव था जिसमें संविधान सभा ने भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का फैसला किया था और इसके मुख्य नियम बताए थे.
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव की मुख्य बातों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भारतीय संविधान के आदर्शों और लक्ष्यों की नींव हैं.
Question. भारतीय संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान की प्रस्तावना किसी भी भाषण या लेख की शुरुआत और परिचय को बताती है। हर संविधान की शुरुआत में एक प्रस्तावना होती है जो उसके मुख्य उद्देश्यों को समझाती है। संविधान के सभी नियम प्रस्तावना में ही शामिल होते हैं। प्रस्तावना में जिन विचारों, सिद्धांतों और आदर्शों का उल्लेख है, वे पूरे संविधान में दिखते हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में संविधान के आदर्शों, मूल्यों और इच्छाओं को साफ-साफ बताया गया है।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना इस प्रकार है:
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतान्त्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बन्धुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26.11.1949 ई. (मिती मार्गशीष शुक्ल सप्तमी संवत 2006 विक्रमी) को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
In simple words: प्रस्तावना संविधान की शुरुआती बातें हैं, जिसमें इसके मुख्य लक्ष्य और सिद्धांत बताए जाते हैं. यह भारत को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के संकल्प को दर्शाती है.
🎯 Exam Tip: प्रस्तावना को हमेशा एक शुरुआती घोषणा के रूप में समझें जो संविधान के पूरे दर्शन को संक्षेप में बताती है.
Question 8. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित शब्द लोकतन्त्रात्मक गणराज्य से क्या अभिप्राय है?
Answer: लोकतांत्रिक गणराज्य का मतलब है कि उस देश में सरकार जनता की होती है, जनता के लिए होती है और जनता द्वारा चलाई जाती है। सरकार को जनता चुनती है। भारत के संविधान में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार, मौलिक अधिकारों की गारंटी और सरकार के प्रति जवाबदेह होना शामिल है। भारत में संसदीय लोकतंत्र प्रणाली को अपनाया गया है, जहां राष्ट्रपति जनता द्वारा चुना जाता है। भारत में कोई भी पद विरासत में नहीं मिलता; सभी पद जनता के लिए खुले हैं। संविधान लागू होने से पहले भारत ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का सदस्य था, लेकिन 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद भारत का अध्यक्ष एक राष्ट्रपति होता है, जिसे सीधे नहीं चुना जाता, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।
In simple words: लोकतांत्रिक गणराज्य का मतलब है कि सरकार जनता की है, जनता के लिए है, और जनता द्वारा चुनी जाती है, जिसमें कोई भी पद विरासत में नहीं मिलता.
🎯 Exam Tip: "लोकतांत्रिक" का अर्थ जनता का शासन और "गणराज्य" का अर्थ वंशानुगत शासन की अनुपस्थिति है; ये दोनों भारत के शासन के मूल स्तंभ हैं.
Question 9. ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार संविधान सभा द्वारा अपनाए गए किन्हीं दो सिद्धान्तों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
Answer: ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार संविधान सभा ने तीन मुख्य सिद्धांत अपनाए:
• सर्वसम्मतता: इसका मतलब था कि मुद्दों पर आम सहमति से निर्णय लिए जाते थे, जहाँ सभी की बात सुनी जाती थी.
• समायोजन: यह सिद्धांत बताता है कि संविधान सभा ने विरोधाभासी विचारों को एक साथ लाकर उनमें संतुलन बनाया. उदाहरण के लिए, मौलिक अधिकारों और संघीय व संसदीय प्रणालियों से जुड़े मामलों में ऐसा ही किया गया.
• परिवर्तन के साथ चयन: इसका अर्थ है कि संविधान निर्माता एक ऐसा व्यावहारिक संविधान बनाना चाहते थे जो भारत की परिस्थितियों के अनुकूल हो. उन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों से अच्छी बातों को चुना और उन्हें भारतीय संदर्भ में ढाला. यह भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया था.
In simple words: ग्रेनविल ऑस्टिन के अनुसार, संविधान सभा ने सहमति, समायोजन, और बदलाव के साथ चयन जैसे सिद्धांतों का पालन किया, ताकि भारत के लिए एक अच्छा और व्यावहारिक संविधान बन सके.
🎯 Exam Tip: संविधान निर्माण में "समायोजन" का अर्थ है विभिन्न, कभी-कभी विरोधी, विचारों को एक साथ लाना और उनके बीच संतुलन बनाना.
Question 10. भारतीय संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए किसी एक़ निर्णय का वर्णन कीजिए।
Answer: संघीय व्यवस्था से संबंधित प्रावधान: संघीय ढांचे के बारे में संविधान सभा में विचार-विमर्श करने के लिए एक संघीय शक्ति समिति बनाई गई थी। इस समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इस संघ की पहली बैठक 1947 में हुई, जिसमें भारत के संघीय ढांचे पर विचार-विमर्श शुरू हुआ जो नवंबर 1949 में पूरा हुआ। संघीय ढांचे से संबंधित प्रावधानों में ऐसे फैसले लिए जाने थे जिससे एक तरफ संघ के प्रतिनिधियों को और दूसरी तरफ प्रांतीय सरकारों के प्रतिनिधियों को संतुष्ट किया जा सके। संघवाद जैसी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना था।
In simple words: संविधान सभा ने संघीय व्यवस्था पर आम सहमति से फैसला लिया, जिसमें जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति ने भारत के संघीय ढांचे के लिए नियम बनाए.
🎯 Exam Tip: आम सहमति से लिए गए निर्णय भारतीय संविधान की मजबूत नींव का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सभी हितधारकों की स्वीकार्यता सुनिश्चित करते हैं.
Question 11. संघात्मक और एकात्मक व्यवस्था के सम्बन्ध में किस प्रकार समायोजन समायोजन के सिद्धान्त को अपनाया गया?
Answer: संघात्मक और एकात्मक व्यवस्था के संबंध में समायोजन का सिद्धांत: देश के शासन के लिए संविधान सभा में संविधान निर्माताओं ने संघात्मक और एकात्मक शासन प्रणालियों को एक साथ स्थापित करने के लिए समायोजन के सिद्धांत का उपयोग किया। इस सिद्धांत के तहत संघात्मक और एकात्मक शासन प्रणालियों को एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है। लेकिन भारत में इसे परिस्थितियों के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया। भारतीय संविधान ने संघात्मक प्रणाली और एकात्मक प्रणाली को एक साथ सुनिश्चित किया है, जो देश की विविधता और एकता दोनों को बनाए रखता है. यह राज्यों को स्वायत्तता देता है जबकि केंद्र को मजबूत बनाए रखता है.
In simple words: भारतीय संविधान ने देश की जरूरतों के हिसाब से संघीय और एकात्मक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाया, जिससे दोनों प्रणालियाँ एक साथ काम कर सकें.
🎯 Exam Tip: समायोजन के सिद्धांत का अर्थ है विरोधी तत्वों को एक साथ मिलाना ताकि वे एक-दूसरे के पूरक बन सकें, जैसा कि भारत के संघीय और एकात्मक ढांचे में देखा जाता है.
Question 12. राष्ट्रमण्डल की सदस्यता ग्रहण करने के प्रश्न को संविधान सभा में किस प्रकार सुलझाया गया?
Answer: राष्ट्रमंडल की सदस्यता ग्रहण करने के प्रश्न को संविधान निर्माताओं ने समायोजन के सिद्धांत का उपयोग करके सुलझाया। 1946 में संविधान सभा ने तय किया था कि भारत एक गणतंत्र होगा। गणतंत्र का मतलब है जहाँ राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है। इसके बाद 1949 में संविधान सभा ने यह भी तय किया कि भारत एक ऐसे संगठन-राष्ट्रमंडल का सदस्य होगा, जिसका अध्यक्ष ब्रिटिश राजा है। इस तरह, भारत पहला देश बन गया जिसने गणतंत्र और राजतंत्र जैसी दो विरोधी व्यवस्थाओं को एक साथ मिलाया। यह दिखाता है कि भारत ने अपनी संप्रभुता बनाए रखते हुए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए लचीलापन दिखाया. भारत का गणतंत्र बना रहना संप्रभुता का प्रतीक था, जबकि राष्ट्रमंडल में शामिल होना वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को दर्शाता था.
In simple words: संविधान सभा ने भारत को गणतंत्र घोषित किया और साथ ही राष्ट्रमंडल का सदस्य भी बनाया, जिससे राजशाही और गणतंत्र के बीच संतुलन स्थापित हुआ.
🎯 Exam Tip: राष्ट्रमंडल की सदस्यता को संप्रभुता से समझौता किए बिना अपनाया गया था, जो भारत के व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है.
Question. “भारतीय संविधान सभा का दृष्टिकोण कुछ विषयों में परिवर्तन के साथ चयन के सिद्धान्त पर आधारित था।” कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान सभा के सामने संविधान बनाते समय कई सवाल आए। कुछ सवालों को सभी की सहमति से सुलझाया गया, तो कुछ सवालों को 'समायोजन' के सिद्धांत से। संविधान बनाते समय, संविधान सभा का दृष्टिकोण कुछ मामलों में 'परिवर्तन के साथ चयन' के सिद्धांत पर आधारित था। संविधान सभा के सदस्य पुराने विचारों वाले नहीं थे, बल्कि बहुत खुले विचारों के थे। उन्होंने दुनिया के किसी भी संविधान की अच्छी बातें अपनाने से हिचकिचाया नहीं। संविधान निर्माता एक ऐसा व्यावहारिक संविधान बनाना चाहते थे जिसमें ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के संविधानों की अच्छी व्यवस्थाओं को भारत की परिस्थितियों के अनुसार शामिल किया जा सके। उन्होंने विदेशी संविधानों से लिए गए विभिन्न आदर्शों और सिद्धांतों को भारतीयकरण किया। संविधान निर्माताओं को यह सब चुनते समय भविष्य की संभावनाओं का भी ध्यान रखना पड़ा। भारतीय संविधान के निर्माता इसमें सफल भी हुए हैं। संविधान की संशोधन प्रणाली 'परिवर्तन के साथ चयन' के सिद्धांत का एक अच्छा उदाहरण है, जो जरूरत पड़ने पर संविधान में बदलाव की अनुमति देता है.
In simple words: संविधान सभा ने अलग-अलग देशों से अच्छी बातें लीं और उन्हें भारत के हिसाब से बदला, ताकि एक व्यावहारिक और समय के साथ बदल सकने वाला संविधान बन सके.
🎯 Exam Tip: "परिवर्तन के साथ चयन" का सिद्धांत यह सुनिश्चित करता है कि संविधान समय के साथ प्रासंगिक बना रहे और नई चुनौतियों का सामना कर सके.
Question 17. संविधान सभा द्वारा निश्चित किए गए आदर्श और उनकी प्राप्ति के साधनों का उल्लेख कीजिए।
Answer: संविधान सभा द्वारा तय किए गए आदर्श और उनकी प्राप्ति के साधन:
संविधान सभा ने अपने सामने ये चार आदर्श रखे:
1. जनता की संप्रभुता और भारत की स्वतंत्रता का उल्लेख.
2. व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक-आर्थिक न्याय का संतुलन.
3. राष्ट्र की सुरक्षा और सांस्कृतिक विविधता पर जोर.
4. विश्व समुदाय के साथ सहयोग, सह-अस्तित्व और शांति के आदर्श को अपनाना.
इन आदर्शों को प्राप्त करने के लिए अपनाई गई व्यवस्था की विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. पूर्ण संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य.
2. संघीय और संसदीय व्यवस्थाएं.
3. अधिकार और स्वतंत्रता का उल्लेख.
4. पंथ-निरपेक्ष राज्य.
5. स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था.
6. लोकहितकारी राज्य की व्यवस्था.
In simple words: संविधान सभा ने जनता की संप्रभुता, स्वतंत्रता, न्याय और विश्व शांति जैसे आदर्श तय किए, जिन्हें प्राप्त करने के लिए भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनाने और स्वतंत्र न्यायपालिका स्थापित करने का रास्ता चुना.
🎯 Exam Tip: संविधान के आदर्शों और उन्हें प्राप्त करने के साधनों को जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये संविधान के मूल दर्शन को दर्शाते हैं.
Question 19. प्रारूप समिति के प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए। अथवा संविधान पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: संविधान की प्रारूप समिति: प्रारूप समिति संविधान बनाने में सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक थी। डॉ. भीमराव अंबेडकर इसके अध्यक्ष थे। यह समिति 19 अगस्त, 1947 को बनाई गई थी। इसका मुख्य काम परामर्श शाखा द्वारा तैयार किए गए संविधान की जांच करना और उसका प्रारूप तैयार करके संविधान सभा के सामने विचार के लिए प्रस्तुत करना था। इस समिति ने भारत के संविधान का प्रारूप फरवरी 1948 में संविधान सभा के अध्यक्ष के सामने प्रस्तुत किया।
प्रारूप समिति के प्रमुख सदस्य इस प्रकार थे:
1. डॉ. बी. आर. अंबेडकर
2. एन. गोपाल स्वामी आयंगर
3. अल्लादि कृष्णा स्वामी अय्यर
4. डॉ. के. एम. मुंशी (जो एकमात्र कांग्रेसी सदस्य थे)
5. सैयद मोहम्मद सादुल्ला
6. एन. माधवराव (जिन्हें बी. एल. मित्र के बीमार होने पर मनोनीत किया गया)
7. टी. टी. कृष्णामाचारी (जो 1948 में डी. पी. खेतान की मृत्यु पर मनोनीत हुए)
In simple words: प्रारूप समिति, जिसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, ने संविधान का पहला मसौदा तैयार किया और इसमें सात प्रमुख सदस्य थे.
🎯 Exam Tip: प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक माना जाता है, इसलिए उनके नाम और समिति के अन्य सदस्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 20. “संविधान निर्माण प्रक्रिया की कुछ विद्वानों द्वारा की गयी आलोचनाओं को बताइए।
Answer: संविधान निर्माण प्रक्रिया की कुछ विद्वानों द्वारा की गई आलोचनाएँ इस प्रकार हैं:
• कुछ लोगों का मानना है कि संविधान को एक सामान्य विधेयक की तरह ही पारित किया गया था, न कि किसी विशेष प्रक्रिया से.
• संविधान सभा में कई संशोधनों को प्रस्तुत तो किया गया, लेकिन उनमें से अधिकांश पर विचार नहीं हुआ.
• संविधान की प्रारूप समिति की स्थिति साफ नहीं थी; वास्तव में, कांग्रेस के प्रमुख सदस्य संविधान के मुख्य प्रावधानों पर निर्णय लेते थे और उसी निर्णय को संविधान सभा द्वारा पुष्टि कर दी जाती थी.
• कुछ विद्वानों का यह भी कहना है कि संविधान सभा ने दुनिया के संविधानों से नकल की थी, और इसमें कोई मौलिकता नहीं थी.
ग्रेनविल ऑस्टिन ने संविधान सभा की निर्णय प्रक्रिया के तीन सिद्धांतों को बताया है – सहमति, समायोजन और परिवर्तन के साथ चयन.
In simple words: कुछ विद्वानों ने संविधान निर्माण प्रक्रिया की आलोचना की, यह कहते हुए कि यह एक सामान्य विधेयक की तरह था, इसमें पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं हुआ, और यह अन्य संविधानों की नकल था.
🎯 Exam Tip: संविधान की आलोचनाओं को जानना महत्वपूर्ण है ताकि आप इसके निर्माण प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को समझ सकें और संतुलित दृष्टिकोण रख सकें.
Question. RBSE Class 11 Political Science Chapter 21 निबन्धात्मक प्रश्न
Answer: RBSE Class 11 Political Science Chapter 21 निबंधात्मक प्रश्न एक महत्वपूर्ण अनुभाग है जो छात्रों को विस्तृत और विश्लेषणात्मक उत्तर लिखने के लिए तैयार करता है। ये प्रश्न छात्रों को संविधान सभा के गठन, उसके उद्देश्यों और कार्यप्रणाली से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद करते हैं। इन प्रश्नों का उद्देश्य छात्रों की विषय-वस्तु की समझ, तार्किक सोच और उत्तर प्रस्तुतिकरण कौशल को बढ़ाना है।
In simple words: यह एक महत्वपूर्ण अनुभाग है जो छात्रों को संविधान सभा के गठन और कार्यप्रणाली से संबंधित बड़े प्रश्नों के लिए तैयार करता है.
🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों के उत्तर देते समय, मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लिखें और उन्हें उदाहरणों व तर्कों के साथ समर्थन दें.
Question 1. भारत में संविधान सभा के निर्माण की माँग के विकास क्रम को बताइए।
Answer: भारत में संविधान सभा के निर्माण की माँग सिर्फ एक राजनीतिक माँग नहीं थी, बल्कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ विकसित हुई एक सोच थी। यह भारत में एक तरह से राष्ट्रीय स्वतंत्रता की माँग थी। भारत में संविधान सभा के निर्माण की माँग का विकास क्रम इस प्रकार है:
1. संविधान सभा के सिद्धांत का पहला विचार: संविधान सभा का पहला विचार राष्ट्रीय आंदोलन के चरमपंथी युग के नेता बाल गंगाधर तिलक ने 1895 में अपने स्वराज विधेयक में प्रस्तुत किया था.
2. महात्मा गांधी के विचार: महात्मा गांधी ने 5 फरवरी, 1922 को कहा था कि स्वराज ब्रिटिश संसद का उपहार नहीं होगा, बल्कि यह भारत की पूरी अभिव्यक्ति की घोषणा होगा. उन्होंने कहा कि भारत का राजनीतिक भविष्य भारतीय जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा तय होगा.
3. श्रीमती एनी बेसेंट की पहल: 1922 में श्रीमती एनी बेसेंट की पहल पर केंद्रीय विधानमंडल के दोनों सदनों की एक संयुक्त बैठक शिमला में आयोजित की गई, जिसमें संविधान निर्माण के लिए एक सम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया गया. जनवरी 1925 में 'कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल' प्रस्तुत किया गया, जो संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करने का पहला बड़ा प्रयास था.
4. पंडित मोतीलाल नेहरू द्वारा संविधान सभा के निर्माण की माँग: 1924 में पंडित मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सामने संविधान सभा के निर्माण की माँग रखी.
5. सर्वदलीय सम्मेलन और नेहरू रिपोर्ट: 19 मई, 1928 को बंबई में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई, जिसने 10 अगस्त, 1928 को 'नेहरू रिपोर्ट' पेश की. यह भारतीयों द्वारा अपने देश के लिए एक संपूर्ण संविधान बनाने का पहला प्रयास था.
6. साम्यवादी नेता एम. एन. राय के विचार: संविधान सभा का विचार औपचारिक रूप से साम्यवादी नेता एम. एन. राय द्वारा 1934 में प्रस्तुत किया गया, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मूर्ति रूप दिया.
7. पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रयास: 1934 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि यदि भारत के भाग्य का एकमात्र निर्णायक भारतीय जनता है, तो भारतीय जनता को अपना संविधान बनाने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए. 1938 में उन्होंने कहा कि संविधान सभा का गठन वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचित संविधान सभा के माध्यम से होगा और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं होगा.
8. कांग्रेस अधिवेशन में संविधान सभा की माँग के प्रस्ताव: 18 दिसंबर, 1936 को कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में घोषणा की गई कि कोई भी बाहरी सत्ता द्वारा थोपा गया संविधान भारत स्वीकार नहीं करेगा. यह माँग 1937 और 1938 के कांग्रेस अधिवेशनों में दोहराई गई. 17 सितंबर, 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कांग्रेस कार्यकारिणी ने भी इस माँग को दोहराया.
9. अगस्त प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार द्वारा संविधान सभा की माँग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करना: कांग्रेस की संविधान सभा के गठन की माँग को ब्रिटिश सरकार द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध की जरूरतों और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दबावों के कारण ब्रिटिश सरकार इस बात पर सहमत हो गई कि भारतीयों द्वारा भारतीय संविधान का निर्माण अपेक्षित है.
10. 6 अगस्त, 1940 के 'अगस्त वक्तव्य' में ब्रिटिश सरकार ने संविधान सभा की माँग को पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया, भले ही यह स्वीकार किया गया कि संविधान निर्माण मुख्य रूप से भारतीयों का दायित्व है लेकिन यह काम युद्ध के बाद ही शुरू होगा। इस दौरान गवर्नर-जनरल की कार्यकारिणी परिषद में कुछ और भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा.
11. कैबिनेट मिशन प्रस्ताव: ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली ने 1946 में एक कैबिनेट मिशन नियुक्त किया, जिसने भारतीय संविधान सभा के गठन के संबंध में प्रस्ताव दिए. इन प्रस्तावों को स्वीकार कर नवंबर 1946 में भारत के संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा का गठन हुआ.
In simple words: भारत में संविधान सभा की माँग बाल गंगाधर तिलक के स्वराज विधेयक से शुरू हुई, जिसे गांधीजी, एनी बेसेंट, नेहरू और कांग्रेस ने आगे बढ़ाया, और अंततः कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के तहत 1946 में इसे स्वीकार कर लिया गया.
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की माँग के विकास क्रम को कालानुक्रमिक क्रम में याद रखें, क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था.
Question 2. कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के अनुसार संविधान सभा के गठन की योजना को बताइए। अथवा कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के अनुसार गठित संविधान सभा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
Answer: कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव के अनुसार संविधान सभा का गठन 24 मार्च, 1946 को तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन नई दिल्ली पहुँचा। इस मिशन ने 16 मई, 1946 को अपनी योजना प्रकाशित की। इसमें कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में वयस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा का गठन संभव नहीं है। इसलिए, 1935 के भारत सरकार अधिनियम के तहत गठित प्रांतीय विधानसभा का उपयोग निर्वाचनकारी संस्थाओं के रूप में किया जाना चाहिए। मंत्रिमंडल/कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के अनुसार, नवंबर 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ, जिसकी निम्नलिखित विशेषताएं थीं:
1. संविधान सभा में कुल 389 सदस्य होने थे, जिनमें से 296 सदस्य ब्रिटिश भारत के क्षेत्रों से (292 ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि और 4 मुख्य आयुक्त क्षेत्रों के प्रतिनिधि) और 93 सदस्य देशी रियासतों के प्रतिनिधि होंगे। योजना के अनुसार, ब्रिटिश भारत को आवंटित 296 में से 292 सदस्यों का चयन 11 राज्यपालों के प्रांतों (मद्रास, बंबई, असम, संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत, उड़ीसा, पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत, सिंध, बंगाल) से और चार मुख्य आयुक्तों के प्रांतों (दिल्ली, अजमेर, मोरवाड़ा और कुर्ग-ब्रिटिश बलूचिस्तान) से किया जाना चाहिए।
इनमें से ब्रिटिश भारत के लिए आवंटित 296 सीटों के चुनाव जुलाई-अगस्त, 1946 में हुए। इसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 और छोटे समूहों को 15 सीटें (पांच अलग-अलग दलों) मिलीं। देशी रियासतों ने खुद को इन चुनावों से दूर रखा। शुरुआत में सभी 93 सीटें खाली रहीं, लेकिन धीरे-धीरे इन रियासतों के प्रतिनिधियों का मनोनयन भी हो गया और वे संविधान सभा में शामिल हो गए।
2. सभी प्रांतों और रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में लगभग 10 लाख पर एक सीट आवंटित की जानी थी.
3. प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत को आवंटित सीटों का निर्धारण मुस्लिम, केवल पंजाब में सिख और अन्य विशेष समुदायों के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार किया जाना था.
In simple words: कैबिनेट मिशन योजना के तहत, संविधान सभा में कुल 389 सदस्य थे, जिनमें ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों के प्रतिनिधि जनसंख्या के आधार पर चुने जाने थे.
🎯 Exam Tip: कैबिनेट मिशन योजना के प्रमुख प्रावधानों और सीटों के आवंटन को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसने संविधान सभा के गठन की नींव रखी थी.
Question 3. भारतीय संविधान सभा के गठन की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए। अथवा संविधान निर्मात्री सभा के संगठन को बताइए।
Answer: भारतीय संविधान सभा के गठन की प्रक्रिया इस प्रकार है:
24 मार्च, 1946 को तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन नई दिल्ली पहुँचा। इस मिशन ने 16 मई, 1946 को अपनी योजना प्रकाशित की। इसमें कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में वयस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा का गठन संभव नहीं है। अतः 1935 के भारत सरकार अधिनियम के तहत गठित प्रांतीय विधानसभा का उपयोग निर्वाचनकारी संस्थाओं के रूप में किया जाए। मंत्रिमंडल/कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के अनुसार, नवंबर 1946 को संविधान सभा का गठन हुआ, जिसकी निम्नलिखित विशेषताएं थीं:
• प्रत्येक प्रांत द्वारा भेजे गए सदस्यों की संख्या उस प्रांत की जनसंख्या के आधार पर तय की जानी चाहिए। 10 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि चुना जाना था.
• प्रांतों को ऊपर बताए गए आधार पर संविधान सभा में दिए गए स्थानों को उनमें रहने वाले समुदायों के आधार पर बांटा जाना था। मतदाताओं के मुख्य वर्ग- सामान्य और मुस्लिम, और केवल पंजाब में सिख थे.
• विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर किया जाना था। इस चुनाव में उसी समुदाय के लोगों को भाग लेना था.
• देशी रियासतों को भी जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व दिया जाना था, लेकिन उनके प्रतिनिधित्व के निर्वाचन का आधार और स्वरूप ब्रिटिश भारत के प्रांतों से संविधान सभा के लिए चुने गए सदस्यों की समिति और देशी रियासतों की ओर से नियुक्त समिति के बीच आपसी विचार-विमर्श से तय किया जाना था.
• इस योजना में प्रांतों के लिए अलग संविधानों की व्यवस्था की गई.
संविधान सभा के गठन की प्रक्रिया: संविधान सभा का गठन दो चरणों में पूरा हुआ –
पहला चरण: पहले चरण में, जुलाई 1946 में प्रांतों के लिए निर्धारित 296 सदस्यों के चुनाव हुए। इसमें कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीटें मिलीं। 20 नवंबर, 1946 को वायसराय ने निर्वाचित प्रतिनिधियों को 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.
अपनी पहली बैठक के समय से ही काम करती रही। उसके प्रक्रियागत और सारभूत, दोनों भागों में क्रांतिकारी परिवर्तन हो गया।
दूसरा चरण: दूसरे चरण में, माउंटबेटन योजना के अनुसार देश का बँटवारा हो जाने के बाद भारतीय संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 324 रह गई, जिसमें 235 स्थान प्रांतों के लिए और 89 देशी रियासतों के लिए थे। पंजाब और बंगाल के जो भाग भारत में रह गए थे, उनके लिए नए सिरे से चुनाव हुए और उनके निर्वाचित सदस्यों ने 14 जुलाई, 1947 को संविधान सभा में स्थान ग्रहण किया। देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चुनाव की पद्धति के संबंध में यह तय हुआ कि रियासतें कोशिश करेंगी कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या कुल सदस्य संख्या का 50 प्रतिशत हो जाए। देशी रियासतों के लिए संविधान सभा में निर्धारित स्थानों का स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद जनसंख्या के अनुपात में कई बार बँटवारा हुआ। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने अपना संविधान निर्माण का महान काम पूरा किया। यह ध्यान देने योग्य है कि हैदराबाद के 16 प्रतिनिधि इसमें अंत तक शामिल नहीं हुए। इस प्रकार प्रांतों के लिए 235 प्रतिनिधियों के अलावा देशी रियासतों के लिए केवल 73 प्रतिनिधि ही संविधान सभा में वास्तव में सम्मिलित हुए। संविधान के अंतिम मूल मसौदे पर इन्हीं 308 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे।
In simple words: संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत दो चरणों में हुआ, जिसमें ब्रिटिश भारत और देशी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल थे, और विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या में बदलाव आया.
🎯 Exam Tip: संविधान सभा के गठन की प्रक्रिया के दोनों चरणों और सदस्य संख्या में हुए परिवर्तनों को याद रखें, क्योंकि यह संवैधानिक विकास की महत्वपूर्ण जानकारी है.
Question 4. भारतीय संविधान का निमाण किस प्रकार हुआ? विस्तारपूर्वक बताइए।
Answer: भारतीय संविधान का निर्माण: संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर, 1946 को शुरू हुआ। इसमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए। इसी अधिवेशन में 13 दिसंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया, और यहीं से संविधान निर्माण की यात्रा शुरू हुई। नेहरू ने कहा था कि, "इस प्रस्ताव में हमारी वे आकांक्षाएँ व्यक्त की गई हैं, जिनके लिए हमने इतने कठोर संघर्ष किए हैं, संविधान सभा इन्हीं उद्देश्यों को लेकर हमारे संविधान का निर्माण करेगी।" उद्देश्य प्रस्ताव 22 जनवरी, 1947 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
समितियाँ: उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद संविधान सभा ने कुछ समितियाँ नियुक्त कीं। प्रमुख समितियाँ थीं-संघ संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति, संघ शक्ति समिति, मूल अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों संबंधी समिति आदि। इन समितियों ने अपने-अपने विषय से संबंधित सभी बातों पर गहन विचार-विमर्श करके संविधान सभा को अपनी-अपनी रिपोर्ट भेज दी। इस बीच 3 जून, 1947 को माउंटबेटन योजना की घोषणा हुई, जिससे पूरा नक्शा ही बदल गया; देश का विभाजन होना था.
प्रारूप समिति: 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा ने 'प्रारूप समिति' की नियुक्ति की। डॉ. भीमराव अंबेडकर इसके अध्यक्ष चुने गए। अन्य सदस्य थे- के. एम. मुंशी, मोहम्मद सादुल्ला, अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, एन. माधवराव, एन. गोपाल स्वामी आयंगर एवं टी. टी. कृष्णमाचारी। इस समिति को सलाह के लिए श्री बी. एम. राव को वैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया। 30 अगस्त, 1947 को प्रारूप समिति की पहली बैठक हुई। इसके बाद 141 दिनों तक इस समिति की बैठकें होती रहीं। इन बैठकों में प्रारूप समिति ने विभिन्न समितियों की रिपोर्टों और संविधान सभा में हुए वाद-विवाद के आधार पर संविधान का प्रारूप तैयार किया। यह प्रारूप ही भारत के भविष्य के संविधान का आधार बना। इसी वजह से प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है।
प्रारूप संविधान: प्रारूप समिति ने भारत का जो प्रारूप संविधान तैयार किया, वह 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष की सेवा में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद प्रारूप संविधान प्रकाशित कर दिया गया ताकि उसके संबंध में देशव्यापी प्रतिक्रिया जानी जा सके। संविधान सभा के कार्यालय में अगले 8 महीनों तक अनेक टिप्पणियाँ, आलोचनाएँ एवं सुझाव प्राप्त हुए। प्रारूप समिति ने इन पर विचार कर प्रारूप संविधान का एक पुनर्मुद्रित संस्करण 26 अक्टूबर, 1948 को अध्यक्ष को सौंप दिया।
संविधान की स्वीकृति: 4 नवंबर, 1948 को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने प्रारूप को संविधान सभा के विचार हेतु प्रस्तुत किया। इसके तीन वाचन हुए, जो निम्नलिखित थे –
• पहला वाचन: 4 नवंबर, 1948 से 9 नवंबर, 1948 तक प्रारूप संविधान के प्रकाशन के बाद संविधान में संशोधन के लिए अनेक सुझाव प्राप्त हुए और एक खास संस्करण प्रकाशित हुआ.
• दूसरा वाचन: 15 नवंबर, 1948 से 17 अक्टूबर, 1949 तक चला, इस दौरान संविधान के प्रत्येक खंड पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया और 7653 संशोधन प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 2473 को ही स्वीकार किया गया.
• तीसरा वाचन: 14 नवंबर, 1949 से 26 नवंबर, 1949 तक चला, और इस दिन संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित घोषित कर दिया गया.
तीन वाचनों की प्रक्रिया से गुजरते हुए 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को 'अंगीकृत, अधिनियमित एवं आत्मार्पित' किया। संविधान सभा के 11 अधिवेशन और 165 बैठकों में संविधान के निर्माण में कुल मिलाकर 2 वर्ष, 11 माह एवं 18 दिन लगे। इसमें लगभग विश्व के 60 देशों के संविधानों का अवलोकन हुआ और इनके प्रारूप पर 114 दिनों तक विचार किया गया। इसके निर्माण में लगभग 64 लाख का खर्च हुआ। संविधान के सभी अनुच्छेदों में संघ के स्थान पर भारत को राज्यों का संघ घोषित किया गया। संविधान सभा का 12वाँ अंतिम अधिवेशन 24 जनवरी, 1950 को हुआ। इस अधिवेशन में सभा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का पहला राष्ट्रपति चुना।
In simple words: भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा ने किया, जिसमें उद्देश्य प्रस्ताव, विभिन्न समितियों (जैसे प्रारूप समिति), और तीन वाचन शामिल थे, और इस प्रक्रिया में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे.
🎯 Exam Tip: संविधान निर्माण की प्रक्रिया के मुख्य चरणों - उद्देश्य प्रस्ताव, समितियों का गठन, प्रारूप संविधान और तीन वाचन - को क्रमबद्ध तरीके से याद करें.
Question 5. उद्देश्य प्रस्ताव से क्या अभिप्राय है? इसके प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए। अथवा संविधान सभा के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: उद्देश्य प्रस्ताव का मतलब संविधान सभा में संविधान बनाने का प्रस्ताव 'उद्देश्य प्रस्ताव' कहलाता था। संविधान सभा के अधिवेशन में 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को 22 जनवरी, 1947 को सभी ने मान लिया था। इस प्रस्ताव में भारत के भविष्य के एक मजबूत लोकतांत्रिक गणराज्य की रूपरेखा बताई गई थी।
उद्देश्य प्रस्ताव अथवा संविधान सभा के प्रमुख उद्देश्य संविधान सभा की पहली बैठक अनिश्चितता भरे माहौल में 9 दिसंबर, 1946 को शुरू हुई, क्योंकि मुस्लिम लीग के सदस्यों ने संविधान सभा की बैठक का बहिष्कार करने की घोषणा की थी। 9 दिसंबर, 1946 को ही संविधान सभा ने सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना, लेकिन सभा के सदस्यों ने 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष के रूप में चुना। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वतंत्र भारत के आदर्शों पर प्रकाश डाला और नए भारतीय समाज की रूपरेखा के संबंध में अपने विचार रखे। संविधान सभा की कार्यवाही 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किए गए उद्देश्य प्रस्ताव के साथ शुरू हुई। उद्देश्य प्रस्ताव में निम्नलिखित बातें शामिल थीं:
1. संविधान निर्माण करना: संविधान सभा यह घोषणा करती है कि इसका उद्देश्य भारत को लोकतांत्रिक गणराज्य बनाना है जिसके भविष्य के शासन के लिए संविधान का निर्माण करना है.
2. भारत संघ का गठन: ब्रिटिश भारत के सभी क्षेत्रों और देशी रियासतों तथा ब्रिटिश भारत एवं देशी रियासतों से बाहर के सभी क्षेत्रों, जो स्वतंत्र एवं संप्रभुता संपन्न भारत में मिलना चाहते हैं, को मिलाकर भारत संघ का गठन किया जाएगा.
3. सीमाओं का निर्धारण करना: सभी क्षेत्र अपनी मौजूदा सीमाओं सहित संविधान सभा द्वारा तय की गई सीमा में या भविष्य में तय की जाने वाली सीमा में एक स्वायत्त इकाई होंगे तथा केंद्र को सौंपे गए कार्यों के अतिरिक्त ये इकाइयाँ अन्य कार्यों का पालन करेंगी.
4. समस्त स्रोत भारत की जनता: भारतीय संघ, उसकी इकाइयाँ तथा सरकार एवं सरकार के अंगों की स्वतंत्रता एवं प्रभुत्व संपन्नता का स्रोत भारत की जनता है.
5. भारत की पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अल्पसंख्यकों को संविधान में पर्याप्त संरक्षण प्रदान किया जाएगा.
6. प्रभुत्व संपन्नता की रक्षा करना: भारतीय गणतंत्र के राज्य क्षेत्रों की अखंडता एवं उसके जल, स्थल एवं वायु क्षेत्र की प्रभुत्व संपन्नता की रक्षा सभ्य राष्ट्रों की विधियों के अनुसार की जाएगी.
7. विश्व शांति एवं मानव जाति के कल्याण में सहयोग प्रदान करना: प्राचीन देश भारत ने विश्व में हमेशा उचित और सम्मानित स्थान प्राप्त किया है, और हम सभी भारतवासी विश्व में शांति बनाए रखने तथा मानव जाति के कल्याण के कार्यों में अपना पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। उद्देश्य प्रस्ताव के ऊपर बताई गई बातों पर 8 दिन तक व्यापक विचार-विमर्श किया गया और 22 दिसंबर, 1946 को आम सहमति से पारित कर दिया गया.
In simple words: उद्देश्य प्रस्ताव संविधान सभा का एक अहम प्रस्ताव था जिसमें भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लक्ष्य और उसके मुख्य सिद्धांतों को तय किया गया था.
🎯 Exam Tip: उद्देश्य प्रस्ताव के प्रत्येक प्रावधान को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये भारतीय संविधान के मूल आदर्शों और संरचना को दर्शाते हैं.
Question 6. भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान सर्वसम्मतता से लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान संविधान सभा में आम सहमति (सर्वसम्मतता) से लिए गए निर्णय इस प्रकार हैं:
1. संघीय व्यवस्था से संबंधित प्रावधान: संघीय ढांचे के संबंध में संविधान सभा में विचार-विमर्श करने के लिए एक संघीय शक्ति समिति बनाई गई थी। इस समिति के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। इस संघ की पहली बैठक 1947 में हुई, जिसमें भारत के संघीय ढांचे के संबंध में विचार-विमर्श शुरू हुआ जो नवंबर 1949 में पूरा हुआ। संघीय ढांचे से संबंधित प्रावधानों में ऐसे निर्णय लिए जाने थे जिससे एक ओर संघ के प्रतिनिधियों को और दूसरी ओर प्रांतीय सरकारों के प्रतिनिधियों को संतुष्ट किया जा सके। संघवाद जैसी व्यवस्था को दबावकारी तरीके से लागू नहीं किया जा सकता था.
2. भाषा से संबंधित प्रावधान: संविधान सभा में देश की राष्ट्रभाषा किसे घोषित किया जाए, इस पर भी विवाद रहा, और इस प्रश्न को भी सर्वसम्मतता से हल निकालने का प्रयास किया गया। संविधान सभा में भाषा के प्रश्न पर निर्णय होने में लगभग 3 वर्ष लग गए। इतनी लंबी बहस के बाद हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया.
In simple words: संविधान सभा ने संघीय व्यवस्था और राष्ट्रभाषा के निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति से निर्णय लिए, जिसमें सभी पक्षों की बातों पर विचार किया गया.
🎯 Exam Tip: सर्वसम्मतता से लिए गए निर्णयों का महत्व यह है कि वे सभी हितधारकों की स्वीकार्यता और मजबूत संवैधानिक नींव को दर्शाते हैं.
Question 7. भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान कौन-कौन से विषयों में समायोजन के सिद्धांत को अपनाया गया? विस्तार से बताइए।
Answer: भारतीय संविधान बनाते समय कई ऐसे विषय सामने आए जहाँ संविधान सभा ने समायोजन के सिद्धांतों का पालन किया। समायोजन का अर्थ है दो विरोधी विचारों को एक साथ लेकर चलना और उनमें तालमेल बिठाना। संविधान निर्माण के दौरान जिन प्रमुख विषयों में यह सिद्धांत अपनाया गया, वे निम्नलिखित थे:
1. संघात्मक और एकात्मक व्यवस्था से संबंधित विषय: देश का शासन चलाने के लिए संविधान निर्माताओं ने संघात्मक और एकात्मक दोनों प्रणालियों को एक साथ अपनाया। इन दोनों प्रणालियों को अक्सर एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है, लेकिन भारत में इन्हें स्थितियों के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया ताकि दोनों एक साथ काम कर सकें।
2. राष्ट्रमंडल की सदस्यता ग्रहण करने का प्रश्न: संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रमंडल की सदस्यता के प्रश्न को भी समायोजन के सिद्धांत से सुलझाया। 1946 में यह तय हुआ था कि भारत एक स्वतंत्र गणराज्य होगा, जहाँ राष्ट्राध्यक्ष चुना जाएगा। लेकिन 1949 में यह निर्णय लिया गया कि भारत राष्ट्रमंडल का सदस्य भी होगा, जिसका अध्यक्ष ब्रिटिश राजा होगा। इस तरह भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने गणराज्य और राजतंत्र जैसी दो विरोधी व्यवस्थाओं को एक साथ समायोजित किया।
3. राष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधी प्रश्न: राष्ट्रपति के चुनाव की व्यवस्था को लेकर भी संविधान सभा में काफी बहस हुई। कुछ सदस्यों का मानना था कि राष्ट्रपति का चुनाव सीधे वयस्क मताधिकार से होना चाहिए, जबकि अन्य चाहते थे कि उनका चुनाव संसद के दोनों सदनों द्वारा गठित निर्वाचक मंडल से हो। अंत में, समायोजन के सिद्धांत के तहत एक समझौता किया गया, जिसके अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के चुने हुए सदस्यों और राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए सदस्यों को शामिल किया गया।
In simple words: संविधान बनाते समय, कई ऐसे मुद्दे थे जहाँ दो अलग-अलग विचारों को एक साथ जोड़ना पड़ा। जैसे, भारत में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को एक साथ लाया गया, और गणराज्य होने के बावजूद राष्ट्रमंडल का हिस्सा भी बना। राष्ट्रपति के चुनाव के तरीके को लेकर भी अलग-अलग विचारों को मिलाकर एक रास्ता निकाला गया।
🎯 Exam Tip: जब भी "समायोजन का सिद्धांत" या "विरोधी व्यवस्थाओं का मेल" जैसे प्रश्न आएं, तो हमेशा संघात्मक-एकात्मक व्यवस्था, राष्ट्रमंडल की सदस्यता और राष्ट्रपति के निर्वाचन के उदाहरणों को विस्तार से समझाएं।
Question 8. संविधान सभा की कार्यप्रणाली पर एक लेख लिखिए।
Answer: संविधान सभा ने एक ऐसे संविधान का निर्माण करने की कोशिश की जिसे लागू किया जा सके। वे किसी नई या मौलिक पुस्तक की तलाश में नहीं थे। संविधान सभा की कार्यप्रणाली के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:
संविधान सभा का दृष्टिकोण:
(1) एक समन्वित और यथार्थवादी दृष्टिकोण: संविधान सभा में सभी प्रकार के विचार रखने वाले लोग थे, जैसे कुछ दक्षिणपंथी, कुछ वामपंथी और कुछ मध्यममार्गी। इन सभी विचारों को मिलाकर एक संतुलित और वास्तविक दृष्टिकोण अपनाया गया।
(2) व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास: संविधान सभा ने लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। इसलिए, हर मौलिक अधिकार की कुछ सीमाएं तय की गईं, ताकि दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे।
In simple words: संविधान सभा ने एक ऐसा संविधान बनाने की कोशिश की जो असल में काम कर सके। उन्होंने सभी तरह के विचारों को सुना और व्यक्तिगत आज़ादी और सरकार के अधिकारों के बीच सही संतुलन बनाने की कोशिश की।
🎯 Exam Tip: संविधान सभा की कार्यप्रणाली पर लिखते समय उसके दृष्टिकोण और प्रमुख सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है, खासकर यथार्थवादी और संतुलित अप्रोच पर जोर दें।
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