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Detailed Chapter 2 राजनीति विज्ञान का परम्परागत व आधुधुनिक दृष्टिकोण RBSE Solutions for Class 11 Political Science
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Class 11 Political Science Chapter 2 राजनीति विज्ञान का परम्परागत व आधुधुनिक दृष्टिकोण RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 राजनीति विज्ञान का परम्परागत व आधुनिक दृष्टिकोण (व्यवहारवाद एवं उत्तर व्यवहारवाद)
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. व्यवहारवाद के कोई चार लक्षण बताइए।
Answer: व्यवहारवाद के चार मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
1. यह मानता है कि राजनीतिक व्यवहार के अध्ययन से नियमों और सिद्धांतों को बनाना संभव है।
2. यह अनुभववादी मानकों के आधार पर तथ्यों की जांच और पुष्टि करता है।
3. इसमें तथ्यों को इकट्ठा करने और उनका विश्लेषण करने के लिए सांख्यिकी, सर्वेक्षण और साक्षात्कार जैसी वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
4. यह इकट्ठा किए गए डेटा और विवरणों को साफ-सुथरा और सटीक बनाने पर जोर देता है ताकि उनमें निश्चितता और स्पष्टता रहे।
In simple words: व्यवहारवाद राजनीतिक अध्ययन को वैज्ञानिक बनाने के लिए नियमों, जांच, तकनीकों और डेटा की सटीकता पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: जब भी लक्षण या विशेषताएँ पूछी जाएँ, तो उन्हें हमेशा बिंदुवार लिखें और प्रत्येक बिंदु को एक छोटे, स्पष्ट वाक्य में समझाएँ।
Question 2. व्यवहारवाद की किन्हीं तीन सीमाओं को गिनायें।
Answer: व्यवहारवाद की तीन मुख्य सीमाएँ या कमियाँ इस प्रकार हैं:
1. राजनीतिक व्यवहार की गलत समझ: यह मानव के राजनीतिक व्यवहार को पूरी तरह से समझ नहीं पाया।
2. बहुत महंगी प्रक्रिया: इसके अध्ययन तरीके बहुत खर्चीले होते हैं और इनमें बहुत समय लगता है।
3. बहुत ज्यादा कठिन शब्द: इसमें बहुत जटिल और मुश्किल शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे समझना कठिन हो जाता है।
In simple words: व्यवहारवाद मानव व्यवहार को पूरी तरह नहीं समझा पाया, यह बहुत महंगा है और इसकी भाषा बहुत जटिल है।
🎯 Exam Tip: सीमाएँ या दोष बताते समय हमेशा सटीक बिंदुओं का उल्लेख करें और संक्षिप्त रहें।
Question 3. व्यवहारवाद की किन्हीं दो उपलब्धियों को गिनायें।
Answer: व्यवहारवाद की दो मुख्य उपलब्धियाँ या सफलताएँ इस प्रकार हैं:
1. नया राजनीति विज्ञान स्थापित किया: इसने राजनीति विज्ञान को एक नया और आधुनिक रूप दिया।
2. कई विषयों को एक साथ देखने का तरीका बनाया: इसने राजनीति विज्ञान को अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ जोड़कर अध्ययन करने पर जोर दिया।
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को नया बनाया और इसे दूसरे विषयों से जोड़ा ताकि बेहतर समझा जा सके।
🎯 Exam Tip: उपलब्धियाँ बताते समय, सबसे महत्वपूर्ण और सीधे प्रभाव वाले बिंदुओं को चुनें।
Question 4. व्यवहारवाद के किन्हीं दो प्रतिपाटकों के नाम बताइए।
Answer: व्यवहारवाद के दो प्रमुख समर्थक ये हैं:
1. डेविड ईस्टन
2. चार्ल्स मेरियम
In simple words: डेविड ईस्टन और चार्ल्स मेरियम व्यवहारवाद के मुख्य विचारों को फैलाने वाले लोग थे।
🎯 Exam Tip: जब भी किन्हीं दो नाम पूछे जाएँ, तो सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख नामों का ही उल्लेख करें।
Question 5. उत्तर व्यवहारवाद क्या है?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह व्यवहारवाद को सुधारने का एक आंदोलन है, जिसमें "कर्म" (काम करने) और "प्रासंगिकता" (वर्तमान समय के लिए उपयोगी होने) पर जोर दिया जाता है। इसका मतलब है कि सिर्फ तथ्यों को इकट्ठा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए भी होना चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद एक आंदोलन है जो कहता है कि राजनीतिक अध्ययन सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि समस्याओं को सुलझाने और समाज के लिए उपयोगी होने वाला होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद की परिभाषा में 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' इन दो मुख्य शब्दों को हमेशा शामिल करें।
Question 6. उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति के दो प्रमुख कारण बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवादी क्रांति के दो मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. व्यवहारवाद की कमियाँ: व्यवहारवाद सिर्फ तथ्यों पर जोर देता था और मूल्यों (अच्छे-बुरे के विचार) को अनदेखा करता था, जिससे कई समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा था।
2. समाज की बदलती ज़रूरतें: 1960 के दशक में समाज में कई नई और बड़ी समस्याएँ जैसे युद्ध और गरीबी सामने आईं, जिनके लिए व्यवहारवाद के तरीके पर्याप्त नहीं थे।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद इसलिए आया क्योंकि व्यवहारवाद में कुछ कमियाँ थीं और समाज की बदलती समस्याओं को हल करने के लिए नए तरीकों की ज़रूरत थी।
🎯 Exam Tip: क्रांति के कारणों में हमेशा पहले वाले दृष्टिकोण की कमियों और समय की ज़रूरतों का उल्लेख करें।
Question 7. उत्तर व्यवहारवाद किस प्रकार परम्परावाद से अलग है?
Answer: परम्परावाद राजनीति विज्ञान के पुराने, पारंपरिक तरीकों को दिखाता है, जहाँ सिर्फ इतिहास और संस्थाओं का अध्ययन होता था। वहीं, उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के आधुनिक विकास को दर्शाता है, जहाँ वर्तमान की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने पर जोर दिया जाता है। यह सिर्फ सिद्धांत नहीं बल्कि क्रियात्मक ज्ञान पर केंद्रित है।
In simple words: परम्परावाद राजनीति के पुराने विचारों पर ध्यान देता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद आधुनिक समस्याओं को हल करने और उपयोगी ज्ञान बनाने पर केंद्रित है।
🎯 Exam Tip: दोनों के बीच अंतर बताते समय, परम्परावाद को 'पुराना' और 'सैद्धांतिक' जबकि उत्तर व्यवहारवाद को 'नया' और 'क्रियात्मक' बताना महत्वपूर्ण है।
Question 8. उत्तर व्यवहारवाद तथ्य अथवा मूल्य में से किस पर अधिक जोर देता है?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद "मूल्यों" पर अधिक जोर देता है। यह मानता है कि सिर्फ तथ्यों को जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें यह भी देखना चाहिए कि कौन से मूल्य (जैसे न्याय, समानता) समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं और उन्हें कैसे लागू किया जा सकता है।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद कहता है कि सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि अच्छे-बुरे के विचारों (मूल्यों) को समझना और लागू करना ज्यादा जरूरी है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद की मुख्य पहचान 'मूल्यों' पर उसका जोर है, इसे याद रखें।
Question 9. उत्तर व्यवहारवादी उपागम में मूल्यों की क्या भूमिका है?
Answer: उत्तर व्यवहारवादी उपागम के अनुसार, मूल्यों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। यह मानता है कि मानव समाज के लिए केवल वही ज्ञान उपयोगी है जो 'मूल्यों' पर आधारित हो। यानी, ज्ञान सिर्फ तथ्यों को इकट्ठा करना नहीं, बल्कि समाज की भलाई और नैतिकता से जुड़ा होना चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद कहता है कि ज्ञान तभी अच्छा है जब वह समाज के अच्छे मूल्यों पर आधारित हो।
🎯 Exam Tip: मूल्यों की भूमिका बताते समय 'ज्ञान की उपयोगिता' और 'समाज की भलाई' को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।
Question 10. उत्तर व्यवहारवाद के दो आधारभूत लक्षण बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवाद के दो मुख्य लक्षण ये हैं:
1. सामाजिक परिवर्तन पर जोर: यह समाज में बदलाव लाने और समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
2. मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका: यह मानता है कि ज्ञान को हमेशा नैतिक मूल्यों और आदर्शों से जुड़ा होना चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद समाज को बदलने और मूल्यों को महत्व देने पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: 'सामाजिक परिवर्तन' और 'मूल्यों की भूमिका' ये दो मुख्य लक्षण उत्तर व्यवहारवाद को परिभाषित करते हैं।
Question 11. व्यवहारवाद एवं उत्तर व्यवहारवाद के बीच दो प्रमुख अन्तर बताइए।
Answer: व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद के बीच दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
1. व्यवहारवाद केवल तथ्यों पर जोर देता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद मूल्यों को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानता है।
2. व्यवहारवाद प्रासंगिकता (यानी ज्ञान का वर्तमान समस्याओं के लिए उपयोगी होना) के सिद्धांत को अनदेखा करता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद इस सिद्धांत को बहुत महत्व देता है।
In simple words: व्यवहारवाद सिर्फ तथ्यों पर ध्यान देता है, लेकिन उत्तर व्यवहारवाद तथ्यों के साथ-साथ मूल्यों और आज की समस्याओं के समाधान पर भी जोर देता है।
🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय, दोनों दृष्टिकोणों के मुख्य फोकस (तथ्य बनाम मूल्य और प्रासंगिकता) को सामने रखें।
Question. परम्परावाद राजनीति विज्ञान के शास्त्रीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के वर्तमान समय के विकास को प्रकट करता है।
Answer: यह कथन सही है। परम्परावाद राजनीति विज्ञान के इतिहास, संस्थागत ढाँचे और दार्शनिक पहलुओं पर जोर देता है, जो इसके सैद्धांतिक पक्ष को दिखाता है। जबकि उत्तर व्यवहारवाद वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए क्रियात्मक और मूल्य-आधारित दृष्टिकोण पर बल देता है, जो राजनीति विज्ञान के आधुनिक विकास को दर्शाता है।
In simple words: परम्परावाद राजनीति के पुराने सिद्धांतों की बात करता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद आज की समस्याओं को सुलझाने के लिए नए तरीकों और मूल्यों को अपनाता है।
🎯 Exam Tip: परम्परावाद को हमेशा 'सैद्धांतिक' और 'ऐतिहासिक' पक्ष से जोड़ें, जबकि उत्तर व्यवहारवाद को 'आधुनिक' और 'क्रियात्मक' पक्ष से।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. व्यवहारवाद के प्रमुख लक्षण बताइए।
अथवा
व्यवहारवादी उपागम की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
अथवा
व्यवहारवाद की आधारभूत मान्यताओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
डेविड ईस्टन के अनुसार व्यवहारवाद की प्रमुख मान्यताएँ कौन-कौन सी हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
व्यवहारवादी उपागम के प्रमुख आधारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सम्पूर्ण व्यवहारवाद की बौद्धिक आधारशिला का वर्णन कीजिए।
Answer: व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान को वैज्ञानिक बनाने का एक तरीका है। यह अध्ययन मानव व्यवहार पर आधारित होता है। इसके मुख्य लक्षण या मान्यताएँ इस प्रकार हैं:
(1) नियमन: व्यवहारवाद मानता है कि मनुष्य के राजनीतिक व्यवहार में कुछ सामान्य पैटर्न या नियम होते हैं। इन नियमों को खोजकर हम राजनीति के बारे में सिद्धांत बना सकते हैं, भले ही मानव व्यवहार बदलता रहता हो।
(2) सत्यापन: यह कहता है कि राजनीतिक तथ्यों को वैज्ञानिक तरीकों से जांचा जा सकता है। यानी, हम मानव व्यवहार से जुड़ी जानकारी को दोबारा परख कर उसकी सच्चाई जान सकते हैं। यह वैज्ञानिकता का आधार है।
(3) तकनीक: व्यवहारवादी शोध में तथ्यों को इकट्ठा करने और उनका विश्लेषण करने के लिए आधुनिक और सटीक तरीकों का उपयोग करते हैं। वे प्राकृतिक विज्ञानों की तरह सांख्यिकी, सर्वेक्षण, गणितीय मॉडल और साक्षात्कार जैसी तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
(4) परिमाणीकरण: इसका मतलब है कि इकट्ठा किए गए सभी डेटा और विवरणों को संख्यात्मक रूप में बदलना ताकि वे सटीक और स्पष्ट हों। व्यवहारवादी मानते हैं कि सटीकता के लिए यह जरूरी है।
(5) मूल्य निर्धारण (या मूल्यांकन): व्यवहारवादी मूल्यों और तथ्यों को अलग-अलग रखते हैं। वे मानते हैं कि शोधकर्ता को अपने व्यक्तिगत मूल्यों से हटकर निष्पक्ष रूप से अध्ययन करना चाहिए, तभी विज्ञान और सच्चाई मिल सकती है।
(6) समग्रता (या एकीकरण): मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, और उसका राजनीतिक व्यवहार आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है। इसलिए, मानव व्यवहार का अध्ययन टुकड़ों में नहीं, बल्कि पूरे समाज के संदर्भ में किया जाना चाहिए। राजनीतिक घटनाओं को समझने के लिए समाज की अन्य घटनाओं का भी अध्ययन जरूरी है।
(7) विशुद्ध विज्ञान: व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान को एक 'शुद्ध विज्ञान' बनाना चाहता है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीकों से मानव व्यवहार का अध्ययन करके राजनीतिक समस्याओं के समाधान के लिए विश्वसनीय सिद्धांत बनाना है, जैसे प्राकृतिक विज्ञानों में होता है।
In simple words: व्यवहारवाद राजनीति को वैज्ञानिक बनाने के लिए नियमों को खोजने, तथ्यों को जांचने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने, डेटा को सटीक बनाने, मूल्यों को अलग रखने, पूरे मानव व्यवहार को समझने और इसे एक शुद्ध विज्ञान बनाने पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: यह एक निबंधात्मक प्रश्न है। इसमें सभी 'अथवा' विकल्पों का सार एक ही विस्तृत उत्तर में समाहित करें। प्रत्येक लक्षण को स्पष्ट और संक्षिप्त वाक्यों में समझाएँ।
Question 2. व्यवहारवाद से आप क्या समझते हैं? व्यवहारवाद के उदय के कारणों का विवेचन कीजिए।
Answer: व्यवहारवाद एक खास तरीका है जिससे राजनीतिक तथ्यों को समझा और उनका विश्लेषण किया जाता है। इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी राजनीति वैज्ञानिकों ने विकसित किया था। यह परम्परागत राजनीतिक विचारों की कमियों से नाखुश होकर शुरू हुआ एक बौद्धिक आंदोलन था। इसका मुख्य लक्ष्य समाजशास्त्रीय सोच को अधिक अनुभव आधारित, विश्वसनीय और वैज्ञानिक बनाना था। डेविड ईस्टन के अनुसार, व्यवहारवाद असल व्यक्तियों पर ध्यान देता है, और डेविड टूमैन के अनुसार, यह शोध को व्यवस्थित बनाने और अनुभव से जुड़े तरीकों पर जोर देता है। संक्षेप में, व्यवहारवाद एक सोच, अध्ययन का तरीका, आंदोलन और विचार है जो मानव व्यवहार का अनुभव आधारित अध्ययन करके राजनीति विज्ञान को एक शुद्ध विज्ञान बनाना चाहता है।
व्यवहारवाद के उदय के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(1) परम्परागत अध्ययन पद्धतियों से असंतोष: 20वीं सदी की शुरुआत में राजनीति शास्त्री परम्परागत तरीकों से निराश हो गए थे। इन तरीकों से राजनीतिक जीवन की असली तस्वीर साफ नहीं हो पा रही थी। वे शासन की नीतियों को बनाने में महत्व नहीं देते थे और फासीवाद, नाजीवाद जैसी प्रवृत्तियों को समझाने में भी असमर्थ थे।
(2) द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव: दूसरे विश्व युद्ध की घटनाओं ने राजनीति वैज्ञानिकों को नए शोध और सिद्धांतों की तलाश करने के लिए प्रेरित किया। उन्हें लगा कि राजनीतिक जीवन की जटिलताओं को समझने के लिए संस्थाओं के बजाय व्यक्तियों के व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी है।
(3) अन्य सामाजिक विज्ञानों से प्रेरणा: दूसरे सामाजिक विज्ञानों में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल बहुत पहले से हो रहा था। इससे प्रेरणा लेकर राजनीति विज्ञान ने भी अध्ययन के नए और वैज्ञानिक तरीके अपनाने शुरू कर दिए।
In simple words: व्यवहारवाद राजनीति को वैज्ञानिक रूप से समझने का एक तरीका है, जो पारंपरिक तरीकों की कमियों, दूसरे विश्व युद्ध के प्रभावों और अन्य विज्ञानों से प्रेरणा के कारण शुरू हुआ था।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की परिभाषा में उसके मुख्य लक्ष्य (वैज्ञानिक बनाना) और उदय के कारणों में पारंपरिक पद्धतियों की सीमाएँ, ऐतिहासिक घटनाएँ और अन्य विषयों का प्रभाव शामिल करें।
Question 3. व्यवहारवादी उपागम का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
अथवा
व्यवहारवाद की सीमाएँ बताइए।
अथवा
व्यवहारवाद की आलोचना किन-किन आधारों पर की जाती है? विस्तार से उल्लेख कीजिए।
Answer: व्यवहारवादी आंदोलन ने राजनीति विज्ञान को एक नई दिशा देने की कोशिश की, लेकिन यह अपनी सभी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। व्यवहारवाद की आलोचनाएँ या सीमाएँ इस प्रकार हैं:
(1) अत्यधिक शब्दाडंबर: व्यवहारवादियों ने बहुत जटिल और मुश्किल शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे डॉ. एस.पी. वर्मा ने 'फूहड़ शब्दजाल' कहा है। इससे यह समझना मुश्किल हो गया।
(2) मानव राजनीतिक व्यवहार को समझना असंभव: व्यवहारवादी मानव के राजनीतिक व्यवहार में नियमितता खोजने में सफल नहीं हुए, जबकि वे कहते थे कि राजनीति विज्ञान को मानव व्यवहार के आधार पर पढ़ना चाहिए।
(3) तकनीक और तरीकों पर ज्यादा जोर: व्यवहारवादी शोध के उद्देश्यों से ज्यादा उसके उपकरणों को बेहतर बनाने पर ध्यान देते थे। इससे राजनीति विज्ञान का मुख्य विषय पीछे रह गया, जो कि सही नहीं था।
(4) मूल्य-निरपेक्ष अध्ययन संभव नहीं: आलोचक कहते हैं कि राजनीति विज्ञान में पूरी तरह से मूल्य-निरपेक्ष अध्ययन संभव नहीं है और न ही यह उचित है, क्योंकि हर शोधकर्ता के अपने मूल्य होते हैं।
(5) बहुत खर्चीली प्रक्रिया: व्यवहारवादी अध्ययन बहुत महंगा होता है। इसमें तकनीकों और तरीकों के इस्तेमाल के लिए बहुत पैसा, समय और विशेषज्ञता चाहिए होती है। इसलिए, गरीब या विकासशील देश इस पद्धति को अपना नहीं सकते।
(6) कथन और आचरण में विरोध: व्यवहारवादी एक तरफ मूल्य-निरपेक्ष अध्ययन की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे तानाशाही की तुलना में उदार लोकतंत्र की अच्छाइयों को स्वीकार करते हैं, जो उनके कथनों में विरोध दिखाता है।
(7) अन्य पद्धतियों को अनदेखा करना गलत: व्यवहारवादी विचारक अध्ययन के लिए सिर्फ व्यवहारवादी तरीकों को ही मानते हैं और अन्य महत्वपूर्ण पद्धतियों को महत्व नहीं देते।
(8) राजनीति विज्ञान के अस्तित्व को खतरा: व्यवहारवादियों ने राजनीति विज्ञान को ठीक से परिभाषित नहीं किया और न ही उसका अध्ययन क्षेत्र तय किया। उन्होंने अन्य सामाजिक विज्ञानों के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे यह डर पैदा हो गया कि राजनीति विज्ञान अपना अलग अस्तित्व खो सकता है।
(9) निश्चित सिद्धांत और भविष्यवाणी संभव नहीं: व्यवहारवादी मानते हैं कि मानव के राजनीतिक व्यवहार के बारे में सही भविष्यवाणी संभव है, लेकिन वे अभी तक ऐसे विश्वसनीय सिद्धांत नहीं बना पाए हैं जिनसे यह हो सके।
(10) नीति-निर्माण में असमर्थता: व्यवहारवाद केवल तथ्यों को महत्व देता है और मूल्यों को अनदेखा करता है। इसलिए, वह नीतियों को बनाने में मदद नहीं कर पाता।
(11) छोटी और बड़ी इकाइयों की समस्या: व्यवहारवादी अध्ययन की सुविधा के लिए छोटे समूहों का अध्ययन करते हैं और फिर उनके निष्कर्षों को पूरे समाज पर लागू करते हैं, जो अक्सर गलत और मुश्किल होता है।
In simple words: व्यवहारवाद की आलोचना इसलिए होती है क्योंकि यह समझने में मुश्किल, महंगा, मूल्य-निरपेक्ष नहीं हो सकता, तकनीक पर ज्यादा जोर देता है, और कभी-कभी राजनीति विज्ञान के अपने अस्तित्व के लिए खतरा बन जाता है।
🎯 Exam Tip: आलोचनात्मक परीक्षण में हमेशा दृष्टिकोण की कमजोरियों और उनके प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करें। बिंदुओं को स्पष्ट और तार्किक क्रम में प्रस्तुत करें।
Question 4. व्यवहारवाद के अर्थ, उद्देश्य एवं सीमाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer:
व्यवहारवाद का अर्थ: व्यवहारवाद राजनीतिक तथ्यों को व्यवस्थित करने और उनका विश्लेषण करने का एक खास तरीका है। इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी राजनीति वैज्ञानिकों ने विकसित किया था। यह राजनीति विज्ञान में खास तौर पर राजनीतिक व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करता है और कहता है कि राजनीतिक गतिविधियों को केवल व्यक्तियों के राजनीतिक व्यवहार के आधार पर ही समझा जा सकता है।
व्यवहारवाद का उद्देश्य: व्यवहारवाद का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक जीवन को अनुभव-आधारित तरीकों से स्पष्ट करना है। यह ऐसे सिस्टम, सिद्धांत, तकनीक और मान्यताओं का उपयोग करता है जो अनुभवजन्य हों। इसका लक्ष्य राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञानों की तरह एक शुद्ध विज्ञान बनाना है। यह मानव के राजनीतिक व्यवहार का वैज्ञानिक विश्लेषण करके सामान्य सिद्धांत बनाने की कोशिश करता है। रॉबर्ट ए. डहल के अनुसार, व्यवहारवाद का उद्देश्य प्रशासन से जुड़ी सभी घटनाओं को मानव व्यवहार के रूप में दिखाना है, जिसका हम अवलोकन और परीक्षण कर सकें।
व्यवहारवाद की सीमाएँ: व्यवहारवाद की कुछ प्रमुख कमियाँ इस प्रकार हैं:
1. व्यवहारवादी मानव व्यवहार को विज्ञान के रूप में समझने में असफल रहे हैं।
2. मानव के राजनीतिक व्यवहार का गणितीय रूप में आकलन और गणना मुश्किल है।
3. तकनीकी तरीकों पर बहुत ज्यादा जोर देना गलत है।
4. व्यवहारवादी खुद को मूल्य-निरपेक्ष कहते हैं, लेकिन शोध के विषय चुनते समय वे मूल्यों से प्रभावित होते हैं।
5. व्यवहारवादियों ने बहुत जटिल शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिससे यह समझना मुश्किल लगता है।
6. व्यवहारवादी अध्ययन पद्धति बहुत खर्चीली है।
In simple words: व्यवहारवाद राजनीति को वैज्ञानिक तरीके से समझने का एक तरीका है, जिसका लक्ष्य मानव के राजनीतिक व्यवहार से जुड़े सिद्धांत बनाना है। लेकिन इसकी सीमाएँ हैं, जैसे यह महंगा है, बहुत जटिल शब्दों का उपयोग करता है, और मूल्यों को पूरी तरह से अनदेखा नहीं कर सकता।
🎯 Exam Tip: जब अर्थ, उद्देश्य और सीमाएँ एक साथ पूछी जाएँ, तो प्रत्येक भाग को अलग-अलग शीर्षकों के तहत संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 5. उत्तर व्यवहारवाद से आप क्या समझते हैं? उत्तर: व्यवहारवाद के प्रमुख लक्षण बताइए।
Answer:
उत्तर व्यवहारवाद का अर्थ: उत्तर व्यवहारवाद एक बौद्धिक क्रांति है। यह व्यवहारवाद को सुधारने का एक आंदोलन है जो 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' पर जोर देता है। 1960 के दशक के अंत तक व्यवहारवादियों को अपने ही तरीकों की उपयोगिता पर सवाल उठने लगे थे। इसके परिणामस्वरूप एक नया आंदोलन शुरू हुआ, जिसे उत्तर व्यवहारवाद कहा गया। यह व्यवहारवादी शोध में सुधार का एक प्रगतिशील कदम है। इसका उद्देश्य समाज और राजनीतिक व्यवस्था की समस्याओं और चुनौतियों का अध्ययन और समाधान करना है। उत्तर व्यवहारवादी मानते हैं कि शोध के तरीकों से ज्यादा उसकी 'प्रासंगिकता' महत्वपूर्ण है। डेविड ईस्टन ने इसे 'प्रासंगिकता का सिद्धांत' या 'प्रासंगिकता का धर्म' कहा है। उत्तर व्यवहारवादियों के दो मुख्य नारे हैं- कर्म और प्रासंगिकता। उत्तर व्यवहारवाद इस बात पर जोर देता है कि राजनीति विज्ञान का शोध समाज की वास्तविक जरूरतों के लिए प्रासंगिक होना चाहिए। यह राजनीति वैज्ञानिकों से कहता है कि वे तटस्थ रहने के बजाय सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के प्रति उदासीन न रहें और समाज को नेतृत्व प्रदान करें।
उत्तर व्यवहारवाद के प्रमुख लक्षण: राजनीति विज्ञान में व्यवहारवाद के प्रबल समर्थक डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद के दो प्रमुख लक्षण बताए हैं:
1. शोध की प्रासंगिकता: इसका मतलब है कि राजनीतिक अनुसंधान का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए होना चाहिए।
2. व्यापक परिप्रेक्ष्य: इसमें अन्य कई लक्षण भी शामिल हैं, जैसे:
(1) प्रविधि से पहले सार: राजनीतिक शोध में तकनीक से ज्यादा शोध के मूल उद्देश्य और विषय-वस्तु का महत्व है। अगर शोध सामाजिक समस्याओं को हल नहीं करता, तो उसका कोई फायदा नहीं।
(2) सामाजिक परिवर्तन पर जोर: व्यवहारवाद सिर्फ स्थिरता पर ध्यान देता था, लेकिन उत्तर व्यवहारवाद समाज में बदलाव लाने पर जोर देता है और चाहता है कि राजनीति विज्ञान सामाजिक परिवर्तनों को समझे और बड़े सामाजिक संदर्भ से जोड़े।
(3) समस्याओं के विश्वसनीय समाधान की आवश्यकता: उत्तर व्यवहारवादी वर्तमान सामाजिक समस्याओं के समाधान पर जोर देते हैं। वे मानते हैं कि राजनीति विज्ञान तभी उपयोगी है जब वह महामारियों, कुपोषण, गरीबी, प्रदूषण और युद्ध के डर जैसी समस्याओं को हल करने की कोशिश करे।
(4) बुद्धिजीवियों की महत्वपूर्ण भूमिका: बुद्धिजीवियों का विशेष कर्तव्य है कि वे सिर्फ वैज्ञानिक शोधकर्ता न बनें, बल्कि समाज को रास्ता भी दिखाएँ।
(5) कर्मनिष्ठ ज्ञान: उत्तर व्यवहारवादी 'कर्म' पर जोर देते हैं। वे कहते हैं कि राजनीति विज्ञान को समाज के पुनर्निर्माण में शामिल होना चाहिए और ज्ञान को व्यावहारिक रूप से उपयोगी बनाना चाहिए ताकि सामाजिक समस्याओं का समाधान हो सके।
(6) व्यवसायों का राजनीतिकरण: उत्तर व्यवहारवाद वैज्ञानिकों को निष्क्रिय रहने के बजाय सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। उनका मानना है कि राजनीति वैज्ञानिकों को समाज में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए ताकि समाज के उद्देश्यों को व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद एक आंदोलन है जो कहता है कि राजनीतिक ज्ञान को समाज के लिए उपयोगी होना चाहिए, न कि सिर्फ तथ्यों को इकट्ठा करना। इसके मुख्य लक्षण हैं कि ज्ञान समाज के बदलाव लाए, मूल्यों को महत्व दे, और वैज्ञानिकों को समाज में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
🎯 Exam Tip: यह एक लंबा प्रश्न है; उत्तर को हिस्सों में बाँटें, जैसे 'अर्थ', और फिर 'लक्षण' या 'सिद्धांत' के रूप में। प्रत्येक लक्षण को एक-दो वाक्यों में स्पष्ट करें। 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' को प्रमुखता से बताएँ।
Question 6. व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद में अन्तर बताइए।
अथवा
व्यवहारवाद तथा व्यवहारवाद की तुलना कीजिए।
Answer: व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान में दो महत्वपूर्ण दृष्टिकोण हैं, और उनके बीच के मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
(1) विकास की विभिन्न अवस्थाओं में अंतर: व्यवहारवाद पारंपरिक राजनीतिक सोच के खिलाफ एक बौद्धिक प्रतिक्रिया थी, जो राजनीति विज्ञान के विकास को दर्शाती है। वहीं, उत्तर व्यवहारवाद व्यवहारवाद में ही एक बड़ा सुधार है, जो राजनीति विज्ञान के आगे के विकास को दिखाता है।
(2) प्रकृति में अंतर: व्यवहारवाद की मूल प्रकृति रचनात्मक नहीं है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद की प्रकृति रचनात्मक है। उत्तर व्यवहारवाद ने व्यवहारवाद का सिर्फ विरोध ही नहीं किया, बल्कि नए प्रयोग करके उसे विकसित भी किया।
(3) मान्यता में अंतर: व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञानों के समान मानता है, जबकि उत्तर व्यवहारवादी राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञानों के बराबर नहीं मानते। वे इसे एक सामाजिक विज्ञान के रूप में पहचानते हैं।
(4) दृष्टिकोण में अंतर: व्यवहारवाद राजनीतिक अध्ययन में केवल तथ्यों के महत्व को स्वीकार करता है और मूल्यों को अनदेखा करता है। वहीं, उत्तर व्यवहारवाद राजनीतिक अध्ययन में मूल्यों और तथ्यों दोनों को महत्वपूर्ण मानता है।
In simple words: व्यवहारवाद एक पुरानी प्रतिक्रिया थी जो तथ्यों पर जोर देती थी, जबकि उत्तर व्यवहारवाद एक नया और रचनात्मक सुधार है जो तथ्यों के साथ-साथ मूल्यों और समाज के लिए ज्ञान के उपयोग पर भी जोर देता है।
🎯 Exam Tip: दोनों के बीच अंतर बताते समय, उनके उद्भव का समय, प्रकृति, मान्यताओं और अध्ययन के दृष्टिकोण को शामिल करें। तुलनात्मक बिंदुओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 7. उत्तर व्यवहारवाद पर एक निबन्ध लिखिए।
Answer:
उत्तर व्यवहारवाद का अर्थ: उत्तर व्यवहारवाद एक महत्वपूर्ण वैचारिक क्रांति है। यह व्यवहारवाद को सुधारने का एक आंदोलन है जो 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' पर जोर देता है। 1960 के दशक के अंत में व्यवहारवादियों को अपने ही तरीकों की उपयोगिता पर संदेह होने लगा, जिससे एक नए आंदोलन का जन्म हुआ जिसे उत्तर व्यवहारवाद कहा गया। यह व्यवहारवादी शोध में सुधार और एक प्रगतिशील कदम है।
उत्तर व्यवहारवाद का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजनीति विज्ञान का शोध और अध्ययन समाज की वास्तविक जरूरतों के लिए प्रासंगिक हो। उत्तर व्यवहारवादी राजनीति वैज्ञानिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे तटस्थ रहने के बजाय सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के प्रति उदासीन न रहें और समाज को नेतृत्व प्रदान करें।
उत्तर व्यवहारवाद के उदय के कारण: उत्तर व्यवहारवाद पारंपरिक और व्यवहारवादी दृष्टिकोणों की कमियों के कारण अस्तित्व में आया। इसके उदय के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(i) व्यवहारवाद के विरुद्ध एक प्रतिक्रिया: उत्तर व्यवहारवादी आंदोलन व्यवहारवाद की एक प्रतिक्रिया थी। व्यवहारवादी आंदोलन ने राजनीति विज्ञान को वैज्ञानिक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रयास अधूरे और अपूर्ण माने गए।
(ii) अध्ययन पद्धतियों से असहमति: उत्तर व्यवहारवादी मानते हैं कि राजनीति विज्ञान में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह अध्ययन पद्धतियों को लागू करना ठीक नहीं है, क्योंकि समाज और व्यक्तियों का स्वभाव बदलता रहता है। इसलिए, प्राकृतिक विज्ञानों के मानदंडों के आधार पर राजनीति विज्ञान का अध्ययन संभव नहीं है।
(iii) व्यवहारवादी शोध के प्रति निराशा: व्यवहारवादी शोध में मूल्यों को अनदेखा किया जाता था और केवल तथ्यों पर जोर दिया जाता था। उत्तर व्यवहारवाद ने तथ्यों और मूल्यों दोनों को ही प्रासंगिक और उपयोगी माना है। राजनीति विज्ञान के अध्ययन में मूल्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
(iv) विश्व मानवता के प्रति दायित्वों की उपेक्षा: जब व्यवहारवादी विचारक सिद्धांतों और मॉडलों के निर्माण में लगे थे, तब दुनिया में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संकट बढ़ रहे थे। व्यवहारवादी विचारक इन संकटों से अनजान थे और समाज में विघटन हो रहा था।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद एक आंदोलन है जो कहता है कि राजनीतिक अध्ययन को समाज की समस्याओं को हल करने के लिए उपयोगी होना चाहिए। यह व्यवहारवाद की कमियों, पुराने अध्ययन के तरीकों से असहमति, और समाज के संकटों को दूर करने की ज़रूरत के कारण शुरू हुआ।
🎯 Exam Tip: एक निबंध लिखते समय, मुख्य विचारों को साफ-साफ लिखें, जैसे अर्थ, उद्देश्य और उदय के कारण। प्रत्येक भाग को तार्किक क्रम में व्यवस्थित करें और सरल भाषा का प्रयोग करें।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. व्यवहारवादी उपागम मुख्यतः सम्बन्धित होते हैं
(अ) राजनीतिक व्यवहार से
(ब) संस्थाओं से
(स) संविधान से
(द) राज्य से
Answer: (अ) राजनीतिक व्यवहार से
In simple words: व्यवहारवादी उपागम मुख्य रूप से यह समझने पर केंद्रित है कि लोग राजनीति में कैसे व्यवहार करते हैं।
🎯 Exam Tip: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में, सही विकल्प का चुनाव करते समय प्रश्न की मूल अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. व्यवहारवाद का अर्थ है
(अ) समाजवाद
(ब) उदारवाद
(स) साम्यवाद
(द) अनुभववाद
Answer: (द) अनुभववाद
In simple words: व्यवहारवाद का मतलब उन चीज़ों का अध्ययन करना है जिन्हें हम अनुभव कर सकते हैं या देख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की परिभाषा और उसके मुख्य सिद्धांतों को याद रखना सुनिश्चित करें।
Question 4. 'कर्म' व 'प्रासंगिकता' सम्बन्धित है
(अ) व्यवहारवाद से
(ब) उत्तर व्यवहारवाद से
(स) अराजकतावाद से
(द) राजनेतिक विकास से
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवाद से
In simple words: 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' का विचार उत्तर व्यवहारवाद से जुड़ा है, जो समस्याओं को हल करने और उपयोगी ज्ञान पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के प्रमुख विचारों, जैसे कि 'प्रासंगिकता' (relevance) और 'कर्म' (action) को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. व्यवहारवाद किस प्रकार की अध्ययन की इकाई पर जोर देता है?
(अ) लघु इकाई
(ब) बड़ी इकाई
(स) लघु एवं बड़ी इकाई
(द) बड़े-बड़े विषयों के गम्भीर अध्ययन
Answer: (अ) लघु इकाई
In simple words: व्यवहारवाद छोटी-छोटी चीजों, जैसे कि व्यक्तियों के व्यवहार पर ध्यान देता है, ताकि उन्हें अच्छे से समझा जा सके।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद मानव व्यवहार की छोटी इकाइयों पर ध्यान केंद्रित करता है, जो उसके अध्ययन का मुख्य बिंदु है।
Question 6. व्यवहारवाद का जनक किसे कहा जाता है?
(अ) राबर्ट डहल
(ब) डेविड ईस्टन
(स) चार्ल्स मेरियम
(द) हेराल्ड लॉसवेल
Answer: (ब) डेविड ईस्टन
In simple words: डेविड ईस्टन को व्यवहारवाद की शुरुआत करने वाला माना जाता है।
🎯 Exam Tip: राजनीति विज्ञान में डेविड ईस्टन के योगदान और व्यवहारवाद से उनके संबंध को याद रखें।
Question 7. 'तकनीक से पहले तथ्य' इस पर कौन अधिक जोर देता है?
(अ) व्यवहारवादी
(ब) उत्तर व्यवहारवादी
(स) मनोवैज्ञानिक
(द) अनुभववादी।
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवादी
In simple words: उत्तर व्यवहारवादी कहते हैं कि शोध के तरीके से ज्यादा, सही और महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: 'तकनीक से पहले तथ्य' उत्तर व्यवहारवाद का एक प्रमुख सिद्धांत है, जो शोध के वास्तविक महत्व पर केंद्रित है।
Question 8. 'प्रासंगिकता' का सिद्धान्त किससे सम्बन्धित है?
(अ) वैज्ञानिक समाजवाद।
(ब) उदारवाद
(स) प्रजातान्त्रिक समाजवाद
(द) उत्तर व्यवहारवाद
Answer: (द) उत्तर व्यवहारवाद
In simple words: प्रासंगिकता का सिद्धान्त उत्तर व्यवहारवाद से जुड़ा है, जो कहता है कि अध्ययन ऐसा होना चाहिए जो असली दुनिया की समस्याओं को हल करने में मदद करे।
🎯 Exam Tip: प्रासंगिकता का सिद्धान्त उत्तर व्यवहारवाद का एक केंद्रीय स्तंभ है, जो शोध को समाज के लिए उपयोगी बनाने पर जोर देता है।
Question 9. कर्म तथा प्रासंगिकता पर किसने जोर दिया है?
(अ) व्यवहारवाद
(ब) उत्तर व्यवहारवाद
(स) मार्क्सवाद
(द) उदारवाद
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवाद
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति विज्ञान को केवल अध्ययन ही नहीं, बल्कि समस्याओं को सुलझाने के लिए 'कर्म' करना चाहिए और 'प्रासंगिक' होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के प्रमुख सिद्धांतों, जैसे 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 10. डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद के कितने लक्षण बताये हैं?
(अ) 7
(ब) 8
(स) 9
(द) 10.
Answer: (ब) 8
In simple words: डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद की आठ मुख्य बातों के बारे में बताया है।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन द्वारा बताए गए उत्तर व्यवहारवाद के आठ लक्षणों को जानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. 'प्रविधि से पूर्व सार' पर कौन अधिक बल देता है?
(अ) व्यवहारवाद
(ब) उत्तर व्यवहारवाद
(स) अनुभववाद
(द) समाजवाद
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवाद
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद का मानना है कि किसी काम को करने के तरीके से ज़्यादा, उस काम का असली मतलब और उसकी उपयोगिता ज़्यादा ज़रूरी है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के सिद्धांतों को याद रखें, विशेषकर 'प्रविधि से पूर्व सार' का अर्थ और महत्व।
Question 12. उत्तर व्यवहारवाद का लक्षण नहीं है
(अ) कर्मनिष्ठ विज्ञान
(ब) प्रविधि से पूर्व सार
(स) तकनीक पर जोर
(द) मूल्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका
Answer: (स) तकनीक पर जोर
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद में काम करने के तरीके (तकनीक) पर बहुत ज़्यादा जोर नहीं दिया जाता है, बल्कि काम के असली अर्थ और मूल्यों को ज़्यादा महत्व दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के मुख्य लक्षणों को जानें और पहचानें कि कौन सा विकल्प उसके सिद्धांत के विपरीत है।
Question 13. उत्तर व्यवहारवाद किस पर जोर देता है?
(अ) राजनीतिक तटस्थता
(ब) मूल्य निरपेक्षता
(स) ज्ञान का क्रियात्मक होना
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (स) ज्ञान का क्रियात्मक होना
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद कहता है कि ज्ञान ऐसा होना चाहिए जिससे वास्तविक समस्याओं को हल किया जा सके और समाज में बदलाव लाया जा सके।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद का केंद्रीय विचार ज्ञान की क्रियात्मकता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि अध्ययन केवल सैद्धांतिक न होकर व्यावहारिक भी हो।
Question 14. व्यवहारवाद की सीमाओं का उल्लेख किया है
(अ) अर्नाल्ड ब्रेश्ट ने
(ब) लियो स्ट्रास ने
(स) सिबली ने
(द) उपर्युक्त सभी ने
Answer: (द) उपर्युक्त सभी ने
In simple words: अर्नाल्ड ब्रेश्ट, लियो स्ट्रास और सिबली जैसे कई विद्वानों ने व्यवहारवाद की कमियों के बारे में बताया है।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की आलोचना करने वाले प्रमुख विचारकों के नाम और उनकी आलोचना के मुख्य बिंदुओं को याद रखें।
Question 16. यह किस राजनीति शास्त्री का कथन है कि 'व्यवहारवादियों ने राजनीति विज्ञान में अनुसन्धान के लिए नए क्षेत्रों को निकाला है और नई, अध्ययन तकनीकों का विकास किया है?”
(अ) राबर्ट डहल
(ब) डेविड ईस्टन
(स) डॉ. एस. पी. वर्मा
(द) स्ट्रास
Answer: (अ) राबर्ट डहल
In simple words: राबर्ट डहल ने कहा था कि व्यवहारवादी अध्ययन ने राजनीति विज्ञान में नए शोध के रास्ते खोले और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया।
🎯 Exam Tip: राजनीति विज्ञान के प्रमुख विचारकों के कथनों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Question 17. राजनीति विज्ञान के किस दृष्टिकोण ने परम्परागत राजनीति विज्ञान की कमियों को उजागर किया?
(अ) व्यवहारवाद ने
(ब) उत्तर व्यवहारवाद ने
(स) उदारवाद ने
(द) फासीवाद ने।
Answer: (अ) व्यवहारवाद ने
In simple words: व्यवहारवाद ने पारंपरिक राजनीति विज्ञान की पुरानी सोच और उसकी कमजोरियों को सामने लाया।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद पारंपरिक राजनीति विज्ञान के दोषों के प्रति एक प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, जिसने एक नए अध्ययन दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
Question 18. किस विचारधारा ने राजनीति विज्ञान का वैज्ञानीकरण करने का प्रयत्न किया?
(अ) उत्तर व्यवहारवाद ने
(ब) व्यवहारवाद ने
(स) उदारवाद ने
(द) नाजीवाद ने
Answer: (ब) व्यवहारवाद ने
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को और अधिक वैज्ञानिक बनाने की कोशिश की, ताकि इसका अध्ययन सही और तथ्यों पर आधारित हो सके।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद का मुख्य उद्देश्य राजनीति विज्ञान को एक वैज्ञानिक विषय के रूप में स्थापित करना था, जिसमें अनुभवजन्य अध्ययन और व्यवस्थित पद्धतियों का उपयोग किया जाता है।
Question 20. निम्न में से कौन-सा राजनीतिक विचारक राजनीति विज्ञान में व्यवहारवाद तथा उत्तर व्यवहारवाद दोनों से ही समान रूप से सम्बद्ध है
(अ) डेविड ईस्टन
(ब) चार्ल्स मेरियम
(स) डॉ. एस. पी. वर्मा
(द) थर्स्टन
Answer: (अ) डेविड ईस्टन
In simple words: डेविड ईस्टन एक ऐसे विचारक थे जो व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद दोनों से जुड़े रहे और उन्होंने इन दोनों विचारों को समझने में मदद की।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन का योगदान व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद दोनों के लिए केंद्रीय है, यह तथ्य महत्वपूर्ण है।
Question 21. उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति के उदय का प्रमुख कारण नहीं है
(अ) व्यवहारवाद के विरुद्ध प्रतिक्रिया
(ब) अध्ययन पद्धतियों से असहमति
(स) व्यवहारवादी शोध के प्रति असन्तोष
(द) द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव
Answer: (द) द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव
In simple words: उत्तर व्यवहारवादी क्रांति इसलिए नहीं हुई कि दूसरा विश्व युद्ध हुआ था, बल्कि यह व्यवहारवाद की अपनी कुछ समस्याओं और असंतोष के कारण शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवादी क्रांति के असली कारणों को समझें और उन्हें उन घटनाओं से अलग पहचानें जिनका इससे सीधा संबंध नहीं था।
Question 22. राजनीति विज्ञान को एक 'कर्मनिष्ठ विज्ञान' के रूप में कौन सा दृष्टिकोण प्रतिनिधित्व करता है?
(अ) उत्तर व्यवहारवाद
(ब) समाजवाद
(स) साम्यवाद
(द) उदारवाद
Answer: (अ) उत्तर व्यवहारवाद
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद का मानना है कि राजनीति विज्ञान केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं, बल्कि एक ऐसा विज्ञान है जो समाज की समस्याओं को हल करने के लिए काम करता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के 'कर्मनिष्ठ विज्ञान' के विचार को समझें, जिसका अर्थ है कि ज्ञान को समस्याओं के समाधान के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।
Question 23. राजनीति विज्ञान के शास्त्रीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है
(अ) उत्तर व्यवहारवाद
(ब) व्यवहारवाद
(स) परम्परावाद
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (स) परम्परावाद
In simple words: पारंपरिक विचार राजनीति विज्ञान के पुराने, शास्त्रीय तरीकों पर ध्यान केंद्रित करता है।
🎯 Exam Tip: पारंपरिक दृष्टिकोण राजनीति विज्ञान के दार्शनिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर बल देता है।
Question 24. 'व्यवहारवाद वास्तविक व्यक्तियों पर अपना समस्त ध्यान केन्द्रित करता है' यह कथन किस विचारक का है?
(अ) डेविड ईस्टन ने
(ब) डेविड ट्रमैन ने
(स) हज यूलाऊ ने
(द) मोरिस जानोबिज ने
Answer: (अ) डेविड ईस्टन ने
In simple words: डेविड ईस्टन ने कहा था कि व्यवहारवाद का मुख्य फोकस लोगों के वास्तविक राजनीतिक व्यवहार को समझना है।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन की परिभाषा व्यवहारवाद के मूल सिद्धांतों को समझने में महत्वपूर्ण है।
Question 25. मूल्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया है
(अ) उत्तर व्यवहारवाद ने
(ब) व्यवहारवाद ने
(स) परम्परावाद ने
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) उत्तर व्यवहारवाद ने
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद इस बात पर जोर देता है कि समाज और राजनीति में मूल्यों की बहुत अहम भूमिका होती है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद की पहचान मूल्यों के महत्व पर उसके जोर से होती है, जो इसे व्यवहारवाद से अलग करता है।
Question 26. राजनीति विज्ञान का उद्देश्य ऐसे ज्ञान की प्राप्ति करना है, जो समाज के पुनर्निर्माण में सहायक हो। यह कथन किस विचारधारा से सम्बन्धित है
(अ) व्यवहारवाद से
(ब) उत्तर व्यवहारवाद से
(स) प्रजातान्त्रिक समाजवाद से
(द) उदारवाद से
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवाद से
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद मानता है कि राजनीति विज्ञान का लक्ष्य ऐसा ज्ञान हासिल करना है जो समाज को बेहतर बनाने में मदद करे।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के अनुसार, राजनीति विज्ञान को केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए एक उपकरण होना चाहिए।
Question 27. व्यवसायों के राजनीतिकरण की अनिवार्यता पर जोर देते हैं
(अ) व्यवहारवादी
(ब) उत्तर व्यवहारवादी
(स) परम्परावादी
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (ब) उत्तर व्यवहारवादी
In simple words: उत्तर व्यवहारवादी यह मानते हैं कि शिक्षा और अन्य पेशेवर लोगों को भी राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद शिक्षाविदों और पेशेवरों से सक्रिय राजनीतिक भागीदारी की अपेक्षा करता है ताकि ज्ञान को समाज की समस्याओं के समाधान के लिए उपयोग किया जा सके।
Question 29. राजनीति विज्ञान की सन्तुलित एवं आधुनिकतम विकास की अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है
(अ) उत्तर व्यवहारवाद
(ब) शक्ति सन्तुलन
(स) परम्परावाद
(द) उदारवाद
Answer: (अ) उत्तर व्यवहारवाद
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के ऐसे रूप को दर्शाता है जो पुराने विचारों और नए तरीकों को मिलाकर आगे बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद को राजनीति विज्ञान के आधुनिक और संतुलित विकास का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह अनुभवजन्य अध्ययन और मूल्यों दोनों को महत्व देता है।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. राबर्ट ए. डहल के अनुसार व्यवहारवादी क्रान्ति को परिभाषित कीजिए।
Answer: राबर्ट ए. डहल के अनुसार, व्यवहारवादी क्रांति का मतलब है कि यह पारंपरिक राजनीति विज्ञान की कमियों से पैदा हुआ असंतोष था. इस क्रांति का मुख्य लक्ष्य राजनीति विज्ञान को और अधिक वैज्ञानिक बनाना था.
In simple words: राबर्ट डहल ने कहा कि व्यवहारवादी क्रांति पुराने राजनीति विज्ञान से नाखुशी का नतीजा थी, जिसका मकसद इसे ज़्यादा वैज्ञानिक बनाना था।
🎯 Exam Tip: राबर्ट डहल की परिभाषा व्यवहारवादी क्रांति के उद्भव और उद्देश्य को संक्षेप में बताती है, जिसे याद रखना चाहिए।
Question 2. व्यवहारवाद का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Answer: व्यवहारवाद का मुख्य लक्ष्य राजनीति विज्ञान को एक शुद्ध विज्ञान बनाना है. यह इंसानों के राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन करता है, जिसमें खास बौद्धिक सोच, अध्ययन के तरीके और वास्तविक अनुभव पर जोर दिया जाता है.
In simple words: व्यवहारवाद का उद्देश्य इंसानों के राजनीतिक व्यवहार को वैज्ञानिक तरीके से पढ़कर राजनीति विज्ञान को एक 'शुद्ध विज्ञान' बनाना है।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, जिसमें मानव व्यवहार का अध्ययन और राजनीति विज्ञान का वैज्ञानिकरण शामिल है।
Question 3. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् परम्परागत राजनीति विज्ञान के विरोध में एक व्यापक क्रान्ति हुई। इस क्रान्ति को किस नाम से जाना जाता है?
Answer: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पारंपरिक राजनीति विज्ञान के खिलाफ एक बड़ी क्रांति हुई, जिसे व्यवहारवाद के नाम से जाना जाता है. इस क्रांति ने राजनीति विज्ञान के अध्ययन के तरीकों को बदल दिया.
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, पारंपरिक राजनीति विज्ञान के खिलाफ जो बड़ा बदलाव आया, उसे व्यवहारवाद कहते हैं।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद के उद्भव के ऐतिहासिक संदर्भ, विशेष रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की घटनाओं को याद रखें।
Question 5. 'व्यवहारवादी विज्ञान' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाने लगा है?
Answer: 'व्यवहारवादी विज्ञान' शब्द का उपयोग सभी सामाजिक विज्ञानों के लिए किया जाने लगा है. इसका मतलब है कि समाज से जुड़े सभी विषयों को वैज्ञानिक तरीके से पढ़ा जाएगा.
In simple words: 'व्यवहारवादी विज्ञान' अब सभी सामाजिक विज्ञानों के लिए इस्तेमाल होता है, जहाँ वैज्ञानिक तरीकों से अध्ययन किया जाता है।
🎯 Exam Tip: 'व्यवहारवादी विज्ञान' की व्यापकता को समझें, जो इसे केवल राजनीति विज्ञान तक सीमित न रखकर अन्य सामाजिक विज्ञानों तक फैलाता है।
Question 6. व्यवहारवादी उपागम क्या है?
Answer: व्यवहारवादी उपागम राजनीति से जुड़ी जानकारियों को समझने और उनका विश्लेषण करने का एक खास तरीका है. यह तरीका दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी राजनीति वैज्ञानिकों ने विकसित किया था.
In simple words: व्यवहारवादी उपागम वह तरीका है जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी वैज्ञानिकों ने राजनीतिक तथ्यों को समझने के लिए नए नियम बनाए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवादी उपागम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके मूल उद्देश्य को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 7. व्यवहारवाद का प्रणेता किसे माना जाता है?
Answer: डेविड ईस्टन को व्यवहारवाद का मुख्य प्रणेता या जनक माना जाता है. उन्होंने इस विचार को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी.
In simple words: डेविड ईस्टन ही वह व्यक्ति हैं जिन्हें व्यवहारवाद का संस्थापक माना जाता है।
🎯 Exam Tip: राजनीति विज्ञान में डेविड ईस्टन के योगदान और व्यवहारवाद से उनके संबंध को हमेशा याद रखें।
Question 8. डेविड ट्रमैन के अनुसार व्यवहारवादी उपागम को परिभाषित कीजिए।
Answer: डेविड ट्रमैन के अनुसार, व्यवहारवादी उपागम का मतलब है कि शोध को एक क्रम में होना चाहिए और इसमें मुख्य रूप से वास्तविक अनुभवों पर आधारित तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
In simple words: डेविड ट्रमैन के मुताबिक, व्यवहारवाद में शोध ठीक से और असली अनुभवों के साथ होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: डेविड ट्रमैन की परिभाषा व्यवहारवाद के व्यवस्थित और अनुभवजन्य पहलुओं पर जोर देती है, इसे ध्यान में रखें।
Question 9. व्यवहारवाद का लक्ष्य क्या है?
Answer: व्यवहारवाद का लक्ष्य नए तरीकों, नई तकनीकों और नए तथ्यों का उपयोग करके राजनीतिक विश्लेषण के लिए एक मजबूत और व्यवस्थित सिद्धांत बनाना है. यह राजनीति विज्ञान को एक उन्नत दिशा देना चाहता है.
In simple words: व्यवहारवाद का लक्ष्य है कि राजनीति को समझने के लिए नए तरीके, तकनीक और तथ्यों का इस्तेमाल करके एक अच्छा सिद्धांत बनाया जाए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद के प्रमुख लक्ष्यों को जानें, जिसमें नए अध्ययन इकाइयों, पद्धतियों और सिद्धांतों का विकास शामिल है।
Question 10. व्यवहारवाद की आधारभूत मान्यता बताइए।
Answer: व्यवहारवाद का मुख्य विचार यह है कि प्राकृतिक विज्ञान (जैसे भौतिकी) और सामाजिक विज्ञान (जैसे राजनीति विज्ञान) के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं है. दोनों में वैज्ञानिक अध्ययन के समान तरीके अपनाए जा सकते हैं.
In simple words: व्यवहारवाद का मुख्य मानना है कि विज्ञान के सभी क्षेत्रों में अध्ययन के तरीके समान हो सकते हैं, चाहे वे प्राकृतिक हों या सामाजिक।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की इस मान्यता को समझें कि वैज्ञानिक पद्धतियाँ प्राकृतिक और सामाजिक दोनों विज्ञानों पर लागू होती हैं।
Question 12. व्यवहारवादी उपागम के जन्म और विकास में कौन-कौन से तत्व सहायक रहे हैं?
Answer: व्यवहारवादी उपागम के बनने और बढ़ने में दो मुख्य बातें सहायक थीं: पहला, दूसरे विश्व युद्ध से पहले का अनुभव, जिसमें चीजों को वैज्ञानिक ढंग से समझने की कोशिश की गई थी. दूसरा, दूसरे विश्व युद्ध के समय राजनीति वैज्ञानिकों को जो वास्तविक अनुभव मिले, उन्होंने भी इस विचार को बढ़ावा दिया.
(1) द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व का अनुभववाद।
(2) द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान राजनीति शास्त्रियों के यथार्थवादी अनुभव।
In simple words: व्यवहारवाद को विकसित करने में विश्व युद्ध से पहले के अनुभव और युद्ध के दौरान के वास्तविक राजनीतिक अनुभवों ने बहुत मदद की।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद के उदय में विश्व युद्ध और उसके अनुभवों की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 13. किन - किन विद्वानों ने राजनीति विज्ञान में संस्थाओं के अध्ययन और विश्लेषण के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने का विरोध किया?
Answer: ग्राह्म वालेस और ए. एफ. बेन्टले जैसे विद्वानों ने इस बात का विरोध किया कि राजनीति विज्ञान में केवल संस्थाओं का अध्ययन करके ही राजनीतिक नतीजे निकाले जाएँ. वे मानव व्यवहार के अध्ययन पर जोर देते थे.
In simple words: ग्राह्म वालेस और ए. एफ. बेन्टले ने कहा कि राजनीति को सिर्फ संस्थाओं से समझना गलत है, असली चीज़ तो लोगों का व्यवहार है।
🎯 Exam Tip: उन विचारकों के नामों को याद रखें जिन्होंने संस्थागत अध्ययन के बजाय व्यवहारगत अध्ययन पर जोर दिया।
Question 14. व्यवहारवादी उपागम के सन्दर्भ में ग्राह्म वालेस का क्या मत है?
Answer: ग्राह्म वालेस का मानना है कि राजनीति विज्ञान को केवल सरकारी संस्थाओं के बारे में नहीं पढ़ा जाना चाहिए, बल्कि लोगों के राजनीतिक व्यवहार को गहराई से समझना चाहिए. उनके अनुसार, व्यक्तियों का व्यवहार ही राजनीति का असली आधार है.
In simple words: ग्राह्म वालेस मानते थे कि राजनीति को संस्थाओं के बजाय लोगों के व्यवहार से समझना चाहिए।
🎯 Exam Tip: ग्राह्म वालेस के विचार व्यवहारवाद के विकास में महत्वपूर्ण थे, विशेष रूप से मानव व्यवहार के अध्ययन पर उनके जोर के कारण।
Question 15. व्यवहारवाद के विकास में किस पुस्तक का विशेष महत्त्व है?
Answer: व्यवहारवाद के विकास में 1925 में छपी चार्ल्स मेरियम की किताब 'न्यू ऑस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस किताब ने व्यवहारवादी सोच को आगे बढ़ाया.
In simple words: चार्ल्स मेरियम की 'न्यू ऑस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' किताब व्यवहारवाद को विकसित करने में बहुत खास थी।
🎯 Exam Tip: चार्ल्स मेरियम की इस पुस्तक का नाम और उसका महत्व व्यवहारवाद के संदर्भ में याद रखें।
Question 16. 'न्यू ऑस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' किसकी रचना है?
Answer: 'न्यू ऑस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' नामक किताब चार्ल्स मेरियम ने लिखी थी.
In simple words: 'न्यू ऑस्पेक्ट्स ऑफ पॉलिटिक्स' चार्ल्स मेरियम ने लिखी है।
🎯 Exam Tip: लेखकों और उनकी महत्वपूर्ण कृतियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए सहायक होता है।
प्रश्न 19. व्यवहारवाद के विकास से सम्बन्धित किन्हीं दो ग्रन्थों के नाम लिखिए।
Answer: व्यवहारवाद के विकास से जुड़े दो प्रमुख ग्रन्थ हैं:
1. डेविड ईस्टन की पुस्तक 'दी पॉलिटिकल सिस्टम’
2. हर्बर्ट साइमन की पुस्तक 'एडमिनिस्ट्रेटिव बिहेवियर’
In simple words: डेविड ईस्टन की 'दी पॉलिटिकल सिस्टम' और हर्बर्ट साइमन की 'एडमिनिस्ट्रेटिव बिहेवियर' व्यवहारवाद के बारे में दो महत्वपूर्ण किताबें हैं।
🎯 Exam Tip: जब भी किन्हीं दो ग्रन्थों या लेखकों के नाम पूछे जाएं, तो उनके नाम और रचनाओं को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 20. शिकागो विश्वविद्यालय के कौन-कौन से विद्वानों को व्यवहारवादी उपागम का संस्थापक माना जाता है?
Answer: शिकागो विश्वविद्यालय के पी.वी. स्मिथ, चार्ल्स मेरियम और हेराल्ड लॉसवेल जैसे विद्वानों को व्यवहारवादी उपागम का संस्थापक माना जाता है।
In simple words: शिकागो विश्वविद्यालय के पी.वी. स्मिथ, चार्ल्स मेरियम और हेराल्ड लॉसवेल को व्यवहारवाद शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख सिद्धांतों के संस्थापकों और उनके योगदान को याद रखें। शिकागो स्कूल व्यवहारवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
प्रश्न 21. व्यवहारवाद के उदय के कोई दो कारण लिखिए।
Answer: व्यवहारवाद के उदय के दो मुख्य कारण ये थे:
1. परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के प्रति असन्तोष: पुराने तरीकों से राजनीति विज्ञान को समझने में कमी महसूस की गई।
2. अन्य सामाजिक विज्ञानों से प्रेरणा: समाजशास्त्र जैसे अन्य विषयों में इस्तेमाल की जा रही वैज्ञानिक पद्धतियों से प्रेरणा मिली।
In simple words: व्यवहारवाद इसलिए आया क्योंकि पुराने पढ़ाई के तरीके ठीक नहीं थे, और दूसरे सामाजिक विज्ञानों के नए तरीकों से प्रेरणा मिली।
🎯 Exam Tip: किसी भी नए सिद्धांत के उदय के पीछे के कारणों को जानना उस सिद्धांत को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।
प्रश्न 22. ऐतिहासिक दृष्टि से राजनीतिक चिन्तन में व्यवहारवादी मान्यताओं के कुछ तथ्य किन-किन प्राचीन विद्वानों के चिन्तन में मिलते हैं?
Answer: ऐतिहासिक रूप से, राजनीतिक चिंतन में व्यवहारवादी विचारों के कुछ अंश अरस्तू, मैकियावेली, जॉन लॉक और मांटेस्क्यू के विचारों में भी देखे जा सकते हैं।
In simple words: व्यवहारवाद के कुछ विचार पहले भी अरस्तू, मैकियावेली, जॉन लॉक और मांटेस्क्यू जैसे पुराने विचारकों में पाए गए थे।
🎯 Exam Tip: राजनीतिक सिद्धांतों की ऐतिहासिक जड़ों को समझना उनके विकास को बेहतर ढंग से दिखाता है।
प्रश्न 23. 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में राजनीति शास्त्रियों में परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के प्रति असन्तोष क्यों उत्पन्न हुआ?
Answer: 20वीं शताब्दी की शुरुआत में राजनीति शास्त्रियों में परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के प्रति असंतोष इसलिए उत्पन्न हुआ क्योंकि पुरानी पद्धतियों से राजनीतिक जीवन की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह समझा नहीं जा पा रहा था। ये पद्धतियाँ नीति-निर्माण में नेताओं की भूमिका को ही महत्व देती थीं और शोधकर्ताओं के ज्ञान को नजरअंदाज करती थीं। साथ ही, परम्परागत उपागम फासीवाद और नाजीवाद जैसी नई प्रवृत्तियों को समझाने में भी नाकाम रहा, और वर्णनात्मक शैली को अपर्याप्त माना गया।
In simple words: राजनीति शास्त्रियों को पुराने तरीकों से निराशा हुई क्योंकि वे राजनीति की असली समस्याओं को नहीं समझ पा रहे थे। पुराने तरीके सिर्फ नेताओं पर ध्यान देते थे और नई समस्याओं जैसे फासीवाद को नहीं समझा पाए।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी भी नए दृष्टिकोण का जन्म अक्सर पुराने तरीकों की कमियों और वर्तमान समस्याओं को हल करने में उनकी अक्षमता के कारण होता है।
प्रश्न 25. डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद या व्यवहारवादी उपागम के कितने प्रमुख आधार बताए हैं?
Answer: डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद के आठ प्रमुख आधार बताए हैं।
In simple words: डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद के आठ मुख्य सिद्धांत बताए हैं।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन व्यवहारवाद के प्रमुख विचारक हैं, इसलिए उनके द्वारा बताए गए आधारों की संख्या और मुख्य बिन्दु याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 26. डेविड ईस्टन ने सम्पूर्ण व्यवहारवाद की बौद्धिक आधारशिला किसे कहा है?
Answer: डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद के आठ प्रमुख आधारों को ही सम्पूर्ण व्यवहारवाद की बौद्धिक आधारशिला कहा है।
In simple words: डेविड ईस्टन ने व्यवहारवाद के आठ सिद्धांतों को ही उसकी नींव बताया है।
🎯 Exam Tip: 'बौद्धिक आधारशिला' का अर्थ है किसी सिद्धांत की बुनियादी सोच या बुनियाद, जिस पर पूरा विचार टिका होता है।
प्रश्न 27. डेविड ईस्टन के अनुसार व्यवहारवाद की कोई चार मान्यताएँ लिखिए।
Answer: डेविड ईस्टन के अनुसार व्यवहारवाद की चार प्रमुख मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
1. नियमन: राजनीतिक व्यवहार में कुछ नियम होते हैं।
2. सत्यापन: इन नियमों को जांचा और साबित किया जा सकता है।
3. परिमाणीकरण: जानकारी को मापा जा सकता है।
4. मूल्य निर्धारण: मूल्यों और तथ्यों को अलग रखना चाहिए।
In simple words: डेविड ईस्टन के अनुसार, व्यवहारवाद मानता है कि राजनीति में नियम होते हैं जिन्हें मापा और परखा जा सकता है, और मूल्यों को तथ्यों से अलग रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की प्रमुख मान्यताओं को उनके तकनीकी नामों के साथ समझना और याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 28. व्यवहारवाद के सन्दर्भ में सत्यापन से क्या तात्पर्य है?
Answer: व्यवहारवाद के संदर्भ में सत्यापन का अर्थ है कि मानव व्यवहार के बारे में जो नियम या सिद्धांत बनाए गए हैं, उनकी सत्यता की जाँच करके पुष्टि की जानी चाहिए।
In simple words: सत्यापन का मतलब है कि जो भी नियम बनाए गए हैं, उन्हें यह देखने के लिए परखा जाए कि वे सच हैं या नहीं।
🎯 Exam Tip: सत्यापन वैज्ञानिक विधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो किसी भी सिद्धांत को विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 29. राजनीति विज्ञान का कौन-सा उपागम मानव को एक सामाजिक प्राणी मानता है?
Answer: राजनीति विज्ञान में व्यवहारवादी उपागम मानव को एक सामाजिक प्राणी मानता है। यह उपागम 'समग्रता' की धारणा पर बल देता है, जिसका अर्थ है कि मानव व्यवहार को उसके सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारकों के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।
In simple words: व्यवहारवाद मानव को एक सामाजिक प्राणी मानता है, जिसका मतलब है कि उसके व्यवहार को कई सामाजिक पहलुओं से जोड़कर समझना चाहिए।
🎯 Exam Tip: 'समग्रता' व्यवहारवाद की एक प्रमुख मान्यता है जो बताती है कि मानव व्यवहार को टुकड़ों में नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक संदर्भ में देखना चाहिए।
प्रश्न 31. व्यवहारवाद की आलोचना करने वाले किन्हीं चार विद्वानों के नाम लिखिए।
Answer: व्यवहारवाद की आलोचना करने वाले चार प्रमुख विद्वान हैं:
1. अर्नाल्ड ब्रेस्ट
2. लियो स्ट्रास
3. सिबली
4. राबर्ट ए. डहल
In simple words: अर्नाल्ड ब्रेस्ट, लियो स्ट्रास, सिबली और राबर्ट ए. डहल जैसे विद्वानों ने व्यवहारवाद की आलोचना की है।
🎯 Exam Tip: किसी भी प्रमुख सिद्धांत के आलोचकों के नाम याद रखना आपके ज्ञान को गहराई देता है और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 32. मानव व्यवहार की नियमितता खोजना क्यों असम्भव है?
Answer: मानव व्यवहार की नियमितता खोजना मुश्किल है क्योंकि मनुष्य एक सजीव और चेतनशील प्राणी है। उसका व्यवहार उसके अनुभव, आशाओं और परिस्थितियों के अनुसार लगातार बदलता रहता है, जिससे उसमें एक निश्चित पैटर्न खोजना कठिन हो जाता है।
In simple words: इंसान का व्यवहार बदलता रहता है क्योंकि वह भावनाओं और अनुभवों से प्रभावित होता है, इसलिए उसके व्यवहार में हमेशा एक जैसी चीज़ें खोजना मुश्किल है।
🎯 Exam Tip: मानव व्यवहार की परिवर्तनशीलता व्यवहारवाद की एक प्रमुख आलोचना है, क्योंकि यह उसके वैज्ञानिक मापन को चुनौती देती है।
प्रश्न 33. व्यवहारवाद का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण दोष (सीमा) कौन-सा है?
Answer: व्यवहारवाद का सबसे महत्वपूर्ण दोष या सीमा मूल्यों की निरपेक्षता पर अत्यधिक बल देना है। व्यवहारवाद यह मानता है कि शोधकर्ताओं को मूल्यों से दूर रहना चाहिए, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
In simple words: व्यवहारवाद की सबसे बड़ी कमी यह है कि वह कहता है कि मूल्यों को पूरी तरह नजरअंदाज करना चाहिए, जो कि सही नहीं है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक अध्ययन में मूल्यों की भूमिका को पूरी तरह से अलग करना अक्सर मुश्किल होता है, क्योंकि वे मानवीय निर्णय और समाज को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 34. राजनीति विज्ञान का कौन-सा उपागम प्रविधि एवं तकनीकों पर अत्यधिक बल देता है?
Answer: राजनीति विज्ञान में व्यवहारवादी उपागम प्रविधि (तकनीक) और तकनीकों पर अत्यधिक बल देता है। यह शोध के उपकरणों को परिष्कृत करने को महत्व देता है, जिससे कभी-कभी विषयवस्तु गौण हो जाती है।
In simple words: व्यवहारवाद नामक तरीका राजनीति में रिसर्च करने के लिए नए-नए औजारों और तरीकों पर बहुत जोर देता है।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की एक आलोचना यह भी है कि वह शोध के लक्ष्यों की बजाय तकनीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।
प्रश्न 35. व्यवहारवाद में क्या अन्तर्विरोध दिखाई पड़ता है?
Answer: व्यवहारवाद में यह विरोधाभास दिखाई पड़ता है कि शुद्धता और पूर्णता के नाम पर बार-बार सर्वेक्षण और डेटा इकट्ठा करने में बहुत अधिक पैसा और समय लगता है। यह पूरी प्रक्रिया महंगी और लंबी होती है, जो व्यवहारवाद के व्यावहारिक लक्ष्य के विपरीत है।
In simple words: व्यवहारवाद में एक विरोधाभास यह है कि डेटा इकट्ठा करने में बहुत पैसा और समय लगता है, जो इसकी दक्षता के विचार के खिलाफ है।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की खर्चीली और समय-साध्य प्रकृति उसकी प्रमुख व्यावहारिक सीमाओं में से एक है।
प्रश्न 37. व्यवहारवाद किस प्रकार नीति-निर्माण में सहायता प्रदान करने में असमर्थ है?
Answer: व्यवहारवाद नीति-निर्माण में सहायता प्रदान करने में असमर्थ है क्योंकि यह केवल तथ्यों पर ध्यान देता है और मूल्यों की उपेक्षा करता है। नीतियों को बनाते समय तथ्यों के साथ-साथ मूल्यों को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
In simple words: व्यवहारवाद नीतियाँ बनाने में मदद नहीं कर पाता क्योंकि यह सिर्फ तथ्यों पर ध्यान देता है, जबकि अच्छी नीतियाँ बनाने के लिए मूल्यों को भी देखना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: नीति-निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें केवल वैज्ञानिक डेटा ही नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक मूल्यों का भी समावेश होता है।
प्रश्न 38. व्यवहारवाद के राजनीति विज्ञान में महत्त्व के कोई दो बिन्दु बताइए।
Answer: व्यवहारवाद के राजनीति विज्ञान में महत्त्व के दो बिन्दु इस प्रकार हैं:
1. नवीन राजनीति विज्ञान की स्थापना: इसने राजनीति विज्ञान को आधुनिक रूप दिया।
2. अन्तर-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण की स्थापना: इसने अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ मिलकर अध्ययन करने पर जोर दिया।
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को नया रूप दिया और इसे दूसरे विषयों के साथ मिलकर पढ़ने पर जोर दिया।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को अधिक वैज्ञानिक और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 39. राबर्ट ए. डहल ने व्यवहारवाद के किस दृष्टिकोण को राजनीति विज्ञान की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना है?
Answer: राबर्ट ए. डहल ने व्यवहारवाद के अन्तर-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण को राजनीति विज्ञान की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना है। इसका मतलब है कि राजनीति विज्ञान को समझने के लिए अन्य सामाजिक विज्ञानों से भी ज्ञान लेना चाहिए।
In simple words: राबर्ट डहल का मानना था कि राजनीति विज्ञान को दूसरे विषयों से जोड़कर समझना सबसे अच्छा है।
🎯 Exam Tip: अन्तर-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण एक विषय को व्यापक संदर्भ में देखने में मदद करता है।
प्रश्न 40. व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को कौन-कौन सी वैकल्पिक धारणाएँ प्रदान की हैं? नाम लिखिए।
Answer: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को कई वैकल्पिक धारणाएँ दी हैं, जैसे:
शक्ति, समूह, व्यवस्था, इच्छा शक्ति, मतदान व्यवहार और खोज सिद्धान्त।
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को समझने के लिए शक्ति, समूह, व्यवस्था, इच्छा, मतदान और खोज जैसे नए विचार दिए।
🎯 Exam Tip: इन अवधारणाओं ने राजनीतिक व्यवहार को विश्लेषण करने के लिए नए ढांचे प्रदान किए।
प्रश्न 41. किस राजनीति शास्त्री ने उत्तर व्यवहारवाद को व्यवहारवाद के प्रति एक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं अपितु मूल व्यवहारवादी आन्दोलन में सार्थक सुधार के रूप में स्वीकार किया है?
Answer: डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद को व्यवहारवाद के प्रति केवल एक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि मूल व्यवहारवादी आन्दोलन में एक सार्थक सुधार के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने इसे व्यवहारवाद को बेहतर बनाने का एक तरीका माना।
In simple words: डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद को व्यवहारवाद का विरोध नहीं, बल्कि उसमें सुधार का एक तरीका माना।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन का दृष्टिकोण दिखाता है कि कैसे एक सिद्धांत अपने भीतर की कमियों को दूर करके विकसित होता है।
प्रश्न 43. उत्तर व्यवहारवाद में प्रासंगिकता एवं धर्म शब्द का प्रयोग किस राजनीति शास्त्री ने किया?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद में प्रासंगिकता और धर्म शब्द का प्रयोग डेविड ईस्टन ने किया। उन्होंने 'प्रासंगिकता का सिद्धांत' दिया, जिसका अर्थ है कि शोध समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए।
In simple words: डेविड ईस्टन ने 'प्रासंगिकता' और 'धर्म' शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब था कि पढ़ाई समाज के लिए उपयोगी होनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन उत्तर व्यवहारवाद के प्रमुख विचारक थे और उनके दिए गए शब्द इस सिद्धांत की मुख्य पहचान हैं।
प्रश्न 44. उत्तर व्यवहारवाद में प्रासंगिकता का धर्म क्या है?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद में प्रासंगिकता का धर्म यह है कि शोध को किसी भी पद्धति से क्यों न किया जाए, उसे समाज की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को हल करने में प्रासंगिक या उपयोगी होना चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद के अनुसार, कोई भी रिसर्च तभी अच्छी है जब वह समाज के लिए उपयोगी हो।
🎯 Exam Tip: प्रासंगिकता का धर्म उत्तर व्यवहारवाद का केंद्रीय विचार है, जो ज्ञान को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ता है।
प्रश्न 45. उत्तर व्यवहारवाद के कोई दो आधार बताइए। अथवा उत्तर व्यवहारवादियों के दो नारे कौन-कौन से हैं?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद के दो आधार या नारे निम्नलिखित हैं:
1. कर्म (Action)
2. शोध की प्रासंगिकता (Relevance)
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद के दो मुख्य नारे हैं - 'कर्म' और 'प्रासंगिक शोध'।
🎯 Exam Tip: ये दो नारे उत्तर व्यवहारवाद के मूल सिद्धांतों को दर्शाते हैं कि ज्ञान केवल क्रियाशील और प्रासंगिक होना चाहिए।
प्रश्न 46. उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति की उत्पत्ति का मूल कारण बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति की उत्पत्ति का मूल कारण व्यवहारवाद में मौजूद कमियों और दोषों के प्रति गहरा असंतोष था। व्यवहारवाद की सीमाओं को दूर करने और राजनीति विज्ञान को अधिक उपयोगी बनाने के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि व्यवहारवाद में कुछ कमियाँ थीं, जिनसे लोग नाखुश थे।
🎯 Exam Tip: किसी भी क्रांतिकारी आंदोलन का जन्म अक्सर मौजूदा प्रणाली की विफलताओं या सीमाओं के कारण होता है।
प्रश्न 47. परम्परावाद और उत्तर व्यवहारवाद में कोई दो अन्तर बताइए।
Answer: परम्परावाद और उत्तर व्यवहारवाद में दो प्रमुख अन्तर ये हैं:
1. परम्परावाद राजनीति विज्ञान की वर्तमान स्थिति से संतुष्ट है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के लगातार विकास में विश्वास रखता है।
2. परम्परावाद राजनीति विज्ञान को समझने के लिए मूल्यात्मक दृष्टिकोण का उपयोग करता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद मूल्यात्मक और यथार्थवादी दोनों दृष्टिकोणों को अपनाता है।
In simple words: परम्परावाद मौजूदा राजनीतिक स्थिति से खुश है, पर उत्तर व्यवहारवाद बदलाव चाहता है। परम्परावाद सिर्फ मूल्यों पर ध्यान देता है, जबकि उत्तर व्यवहारवाद मूल्यों और तथ्यों दोनों को देखता है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों दृष्टिकोणों के बीच के अंतर को समझना राजनीति विज्ञान के विकास को जानने में मदद करता है।
प्रश्न 49. प्रासंगिकता के सिद्धान्त से क्या आशय है?
Answer: प्रासंगिकता के सिद्धांत से आशय है कि डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद की सात मान्यताओं का प्रतिपादन किया, जिन्हें सामूहिक रूप से प्रासंगिकता का सिद्धांत कहा जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार ज्ञान को समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने में उपयोगी होना चाहिए।
In simple words: प्रासंगिकता का सिद्धांत यह बताता है कि डेविड ईस्टन के सात नियमों के अनुसार, हमारा ज्ञान समाज की समस्याओं को हल करने वाला होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: प्रासंगिकता का सिद्धांत उत्तर व्यवहारवाद की मूल भावना को दर्शाता है कि ज्ञान का उद्देश्य केवल शोध नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं का समाधान भी है।
प्रश्न 50. उत्तर व्यवहारवाद की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवाद की दो प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. सामाजिक परिवर्तन पर बल: यह समाज में बदलाव लाने पर जोर देता है।
2. कर्मनिष्ठ विज्ञान: यह ज्ञान को केवल समझने के बजाय उसे लागू करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद समाज में बदलाव लाने और ज्ञान को सिर्फ समझने के बजाय उसे इस्तेमाल करने पर जोर देता है।
🎯 Exam Tip: ये विशेषताएँ दर्शाती हैं कि उत्तर व्यवहारवाद केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और परिणाम-उन्मुख है।
प्रश्न 51. मूल्यों के सन्दर्भ में उत्तर व्यवहारवादियों का क्या मत है?
Answer: मूल्यों के संदर्भ में उत्तर व्यवहारवादियों का मत है कि मानव समाज के लिए केवल उसी ज्ञान का महत्व है जो मूल्यों पर आधारित हो। वे मानते हैं कि ज्ञान को नैतिक सिद्धांतों और सामाजिक उद्देश्यों से अलग नहीं किया जा सकता।
In simple words: उत्तर व्यवहारवादियों का मानना है कि ज्ञान तभी उपयोगी है जब वह सही मूल्यों पर आधारित हो, क्योंकि मूल्य समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद मूल्यों को राजनीतिक अध्ययन का एक अभिन्न अंग मानता है, जो व्यवहारवाद के मूल्य-निरपेक्ष दृष्टिकोण से अलग है।
प्रश्न 52. उत्तर व्यवहारवादियों के अनुसार राजनीति विज्ञान का क्या उद्देश्य है?
Answer: उत्तर व्यवहारवादियों के अनुसार राजनीति विज्ञान का उद्देश्य ऐसा ज्ञान प्राप्त करना है जो समाज के पुनर्निर्माण में सहायक हो। इसका मतलब है कि राजनीति विज्ञान को केवल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं करना चाहिए, बल्कि सामाजिक समस्याओं को हल करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवादियों का कहना है कि राजनीति विज्ञान का लक्ष्य ऐसा ज्ञान पाना है जिससे समाज को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद का यह उद्देश्य इसे केवल सैद्धांतिक अध्ययन से आगे बढ़कर सामाजिक परिवर्तन के उपकरण के रूप में प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 53. राजनीति विज्ञान का कौन-सा उपागम राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान के समान नहीं मानता है?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान के समान नहीं मानता है। यह मानता है कि मानव समाज और व्यक्ति की प्रवृत्ति परिवर्तनशील होती है, इसलिए प्राकृतिक विज्ञानों की तरह कठोर वैज्ञानिक पद्धतियों को सीधे तौर पर राजनीति विज्ञान पर लागू नहीं किया जा सकता।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद यह नहीं मानता कि राजनीति विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञानों जैसा समझा जाए, क्योंकि मानव व्यवहार बहुत बदलता रहता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक विज्ञानों की कार्यप्रणाली सामाजिक विज्ञानों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है।
प्रश्न 55. उत्तर व्यवहारवाद की आलोचना के कोई दो बिन्दु लिखिए।
Answer: उत्तर व्यवहारवाद की आलोचना के दो बिन्दु इस प्रकार हैं:
1. अवैज्ञानिक दृष्टिकोण: आलोचकों का मानना है कि 'सार' को 'प्रविधि' से पहले महत्व देना वैज्ञानिक पद्धति के खिलाफ है।
2. अमरीकी राष्ट्रीय हितों का प्रतिनिधित्व: इस पर आरोप लगता है कि यह अमेरिकी राजनीतिक विचारकों की उपज है और उनके राष्ट्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करता है।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद की आलोचना की जाती है क्योंकि इसे अवैज्ञानिक माना जाता है और यह अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व करता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी सिद्धांत की आलोचनाओं को जानना उसके व्यापक संदर्भ और सीमाओं को समझने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 56. राजनीति विज्ञान की सन्तुलित एवं आधुनिकतम् विकास की अवस्था का प्रतिनिधित्व कौन-सा उपागम करता है?
Answer: उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान की संतुलित और आधुनिकतम विकास की अवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। इसने परम्परागत दृष्टिकोण और व्यवहारवाद दोनों की कमियों को दूर करके उनके गुणों को मिलाकर एक बेहतर मार्ग प्रस्तुत किया।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के सबसे आधुनिक और संतुलित विकास को दर्शाता है।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद को व्यवहारवाद और परम्परावाद के बीच एक पुल के रूप में देखा जाता है।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. डेविड ईस्टन के अनुसार व्यवहारवाद की परिभाषा दीजिए।
Answer: डेविड ईस्टन के अनुसार, "व्यवहारवाद वास्तविक व्यक्तियों पर अपना समस्त ध्यान केन्द्रित करता है। व्यवहारवाद के अध्ययन की इकाई मानव का ऐसा व्यवहार है, जिसका प्रत्येक व्यक्ति द्वारा पर्यवेक्षण, मापन और सत्यापन किया जा सकता है। व्यवहारवाद राजनीतिक व्यवहार के अध्ययन से राजनीति की संरचनाओं तथा प्रतिक्रियाओं आदि के बारे में वैज्ञानिक व्याख्याएँ विकसित करना चाहता है।"
In simple words: डेविड ईस्टन कहते हैं कि व्यवहारवाद लोगों के असली राजनीतिक व्यवहार को समझने पर केंद्रित है, जिसे देखा, मापा और परखा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख विचारकों द्वारा दी गई परिभाषाओं को ज्यों का त्यों याद रखना अच्छा रहता है, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।
प्रश्न 2. व्यवहारवाद के अर्थ को राबर्ट ए. डहल ने किस प्रकार विश्लेषित किया है?
Answer: राबर्ट ए. डहल ने व्यवहारवाद के अर्थ का विश्लेषण इस प्रकार किया है:
1. यह राजनीति विज्ञान के अंतर्गत एक विरोध आंदोलन है, जो उन अमेरिकी वैज्ञानिकों से जुड़ा है जो परम्परागत राजनीति विज्ञान से खुश नहीं थे।
2. यह पुराने अध्ययन तरीकों, जैसे ऐतिहासिक, दार्शनिक, वर्णनात्मक और संस्थागत तरीकों के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है।
3. व्यवहारवादी वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ नए तरीके और उपागम विकसित किए जा सकते हैं।
4. यह एक ऐसा आंदोलन है जिसका लक्ष्य राजनीति विज्ञान के अध्ययन को आधुनिक मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में विकसित सिद्धांतों, तरीकों और दृष्टिकोणों के करीब लाना है।
5. यह आनुभविक तथ्यों को अधिक वैज्ञानिक बनाने की कोशिश है।
In simple words: राबर्ट डहल ने बताया कि व्यवहारवाद पुराने तरीकों का विरोध था, जो नए वैज्ञानिक तरीके लाना चाहता था और राजनीति को दूसरे विषयों के करीब लाना चाहता था ताकि तथ्यों को और वैज्ञानिक बनाया जा सके।
🎯 Exam Tip: किसी भी अवधारणा के विभिन्न आयामों को जानना उसके अर्थ को गहराई से समझने में मदद करता है।
व्यवहारवाद की मान्यताएँ
प्रश्न. व्यवहारवाद की प्रमुख मान्यताओं को समझाइए।
Answer: व्यवहारवाद की प्रमुख मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) नियमन: व्यवहारवादी विचारकों का मानना है कि राजनीति के अध्ययन के लिए नियम या सिद्धांत बनाना संभव है। उनका मत है कि मानव के राजनीतिक व्यवहार में कुछ सामान्य तथ्य होते हैं जिनके आधार पर सिद्धांत बनाए जा सकते हैं।
(ii) मूल्य निर्धारण: व्यवहारवादी विचारक मूल्यों और तथ्यों को अलग-अलग रखते हैं। उनका मानना है कि नैतिक आदर्शों और मूल्यों का तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। शोध को वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ बनाने के लिए शोधकर्ता को मूल्य-निरपेक्ष रहना चाहिए। व्यक्तिगत मूल्यों से तटस्थ रहकर ही वैज्ञानिक अध्ययन संभव है। इस प्रकार व्यवहारवादी मूल्य-निरपेक्ष दृष्टिकोण पर बल देते हैं।
In simple words: व्यवहारवाद मानता है कि राजनीति के लिए नियम बनाए जा सकते हैं और उन्हें परखा जा सकता है। यह यह भी कहता है कि वैज्ञानिक अध्ययन के लिए हमें अपने मूल्यों को अलग रखना चाहिए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद की इन मान्यताओं को समझना उसके मूल विचारों को जानने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. 'समग्रता' व्यवहारवाद की एक प्रमुख मान्यता है। व्याख्या कीजिए।
Answer: 'समग्रता' या 'एकीकरण' व्यवहारवाद की एक प्रमुख मान्यता है। व्यवहारवाद के अनुसार मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, और उसका राजनीतिक व्यवहार कई गैर-राजनीतिक कारकों, जैसे-सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और संस्कृति से प्रभावित होता है। इसलिए, मानव व्यवहार का अध्ययन टुकड़ों में नहीं किया जा सकता। राजनीतिक घटनाओं और व्यवहार को समझने के लिए समाज में होने वाली अन्य घटनाओं के संदर्भ में अध्ययन आवश्यक है। व्यवहारवादी उपागम राजनीति विज्ञान को अन्य सामाजिक विज्ञानों से जोड़कर, अंतर-अनुशासनात्मक अध्ययन पर बल देता है ताकि ज्ञान को समन्वित किया जा सके।
In simple words: 'समग्रता' का मतलब है कि इंसान का राजनीतिक व्यवहार कई सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक बातों से जुड़ा होता है। इसलिए राजनीति को समझने के लिए इसे दूसरे विषयों से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
🎯 Exam Tip: समग्रता की अवधारणा दर्शाती है कि राजनीति विज्ञान एक अलग-थलग विषय नहीं है, बल्कि यह बड़े सामाजिक संदर्भ का हिस्सा है।
प्रश्न 5. व्यवहारवादी विचारकों ने अन्य पद्धतियों के महत्त्व को स्वीकार नहीं किया। इस सम्बन्ध में प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक सिबली ने क्या कहा है?
Answer: व्यवहारवादी विचारक अध्ययन के लिए केवल व्यवहारवादी पद्धति को ही स्वीकार करते हैं और अन्य अध्ययन पद्धतियों को महत्व नहीं देते। इस संबंध में प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक सिबली का मत है कि, "यदि राजनीति का अध्ययन केवल इसी आधार पर नहीं करना है कि व्यक्ति का व्यवहार किसी खास परिस्थिति में कैसा हो सकता है, बल्कि यह भी देखना है कि वह आज क्या है, कल क्या था, भविष्य में क्या होगा और कैसा होना चाहिए, तो हमारा काम केवल व्यवहारवाद से नहीं चलेगा। हमें राजनीतिक चिंतन के इतिहास को भी देखना होगा।"
In simple words: सिबली ने कहा कि राजनीति को सिर्फ व्यवहारवाद से नहीं समझा जा सकता। हमें इसके इतिहास और दूसरे पहलुओं को भी जानना होगा।
🎯 Exam Tip: सिबली का कथन व्यवहारवाद की एक प्रमुख सीमा को दर्शाता है, यानी अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन पद्धतियों की उपेक्षा करना।
प्रश्न. व्यवहारवादी अध्ययन के प्रभाव के कारण ही राजनीति विज्ञान को नवीन राजनीति विज्ञान की संज्ञा दी जाने लगी है। क्यों?
Answer: व्यवहारवादी अध्ययन के प्रभाव के कारण ही राजनीति विज्ञान को 'नवीन राजनीति विज्ञान' कहा जाने लगा। व्यवहारवाद ने परम्परागत राजनीति विज्ञान की कमियों को उजागर करके उसकी जगह एक नए राजनीति विज्ञान की स्थापना की। जहाँ पुराने तरीके मूल्यों और व्यक्तिनिष्ठ अध्ययन पर केंद्रित थे, वहीं व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को मूल्य-निरपेक्ष, यथार्थवादी और वस्तुनिष्ठ बनाने की कोशिश की। इस आंदोलन के कारण राजनीति शास्त्र में नई अध्ययन पद्धतियाँ, नई शब्दावली और नई मान्यताएँ आईं, जिससे यह एक विकसित विज्ञान बन गया।
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को नया रूप दिया। इसने पुराने तरीकों की कमियाँ बताईं और राजनीति को और वैज्ञानिक बनाने की कोशिश की, जिससे इसमें नए तरीके और विचार आए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि एक अनुभवात्मक और वैज्ञानिक विषय के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 7. उत्तर व्यवहारवाद के सम्बन्ध में डेविड ईस्टन के विचार लिखिए। अथवा उत्तर व्यवहारवादी बनने के लिए डेविड ईस्टन ने कौन – कौन से तर्क प्रस्तुत किए?
Answer: डेविड ईस्टन ने उत्तर व्यवहारवाद को व्यवहारवाद के खिलाफ प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि व्यवहारवादी आंदोलन में एक सार्थक सुधार के रूप में देखा। डेविड ईस्टन के अनुसार, "उत्तर व्यवहारवाद भविष्योन्मुखी है, जो राजनीति विज्ञान को विकास की नई दिशा में बढ़ाना चाहता है। यह व्यवहारवाद की उपलब्धियों को स्वीकार करते हुए उसमें कुछ नया जोड़ना चाहता है।" ईस्टन ने तर्क दिया कि व्यवहारवादियों का विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान की तरह बनाने का प्रयास गलत था, क्योंकि मानव और सामाजिक व्यवहार जटिल होते हैं और उन्हें पूरी तरह से मापना संभव नहीं है। उनका मानना था कि राजनीतिक अध्ययन को तथ्यों और मूल्यों दोनों के संदर्भ में प्रासंगिक और उपयोगी होना चाहिए, और मूल्यों को अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
In simple words: डेविड ईस्टन ने कहा कि उत्तर व्यवहारवाद व्यवहारवाद को सुधारने का एक तरीका है। उनका मानना था कि राजनीति विज्ञान को सिर्फ विज्ञान की तरह नहीं देखा जा सकता क्योंकि मानव व्यवहार जटिल है, और मूल्यों को भी महत्व देना चाहिए।
🎯 Exam Tip: डेविड ईस्टन के विचार उत्तर व्यवहारवाद के मूल आधार हैं। उनके मुख्य तर्क, जैसे 'प्रासंगिकता' और 'क्रिया' को याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 9. परम्परावाद एवं उत्तर व्यवहारवाद में दो प्रमुख अन्तर बताइए।
Answer: परम्परावाद और उत्तर व्यवहारवाद में दो प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:
(i) विकास की विभिन्न अवधारणाओं में अंतर: परम्परावाद 19वीं शताब्दी के राजनीति विज्ञान के विकास को दर्शाता है, जो इसके शास्त्रीय पक्ष पर केंद्रित था। वहीं, उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के वर्तमान समय के विकास और समस्याओं के समाधान पर जोर देता है।
(ii) अध्ययन के दृष्टिकोण में अंतर: परम्परावाद राजनीति विज्ञान का अध्ययन मूल्यात्मक दृष्टिकोण से करता है, यानी वह मूल्यों पर अधिक ध्यान देता है। जबकि उत्तर व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान के अध्ययन में मूल्यात्मक दृष्टिकोण के साथ-साथ यथार्थवादी दृष्टिकोण को भी अपनाता है, यानी वह मूल्यों और तथ्यों दोनों को महत्व देता है।
In simple words: परम्परावाद पुराने समय के राजनीति विज्ञान को दिखाता है और सिर्फ मूल्यों पर ध्यान देता है। उत्तर व्यवहारवाद आज के राजनीति विज्ञान को दर्शाता है और मूल्यों तथा तथ्यों दोनों को महत्वपूर्ण मानता है।
🎯 Exam Tip: यह अंतर राजनीति विज्ञान के विकास और विभिन्न विचार पद्धतियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 10. उत्तर व्यवहारवाद की कोई दो आधारभूत मान्यताएँ बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवाद की दो आधारभूत मान्यताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) प्रविधि से पूर्व सार: उत्तर व्यवहारवाद का मानना है कि राजनीति विज्ञान के शोध में तकनीक की तुलना में सार-वस्तु (विषय का महत्व) अधिक महत्वपूर्ण है। यदि कोई तकनीक समकालीन सामाजिक समस्याओं के लिए प्रासंगिक और उपयोगी नहीं है, तो उस पर काम करना बेकार है।
(ii) मूल्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका: उत्तर व्यवहारवादी मूल्यों की निर्णायक भूमिका स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार, मानव समाज के लिए केवल उसी ज्ञान का महत्व है जो मूल्यों पर आधारित है। वे मानते हैं कि मूल्य ज्ञान की प्रेरक शक्ति हैं और समाज को भयमुक्त कर सकते हैं। वे मूल्य-निरपेक्ष ज्ञान की अवधारणा का विरोध करते हैं, क्योंकि यह मानवता विरोधी है। सामाजिक विज्ञानों का उद्देश्य एक श्रेष्ठ मानव समाज की कल्पना करना है, इसलिए उन्हें मूल्य-सापेक्ष ज्ञान प्राप्त करना चाहिए।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद मानता है कि रिसर्च का विषय (सार) तकनीक से ज्यादा महत्वपूर्ण है, और ज्ञान तभी अच्छा है जब वह मूल्यों पर आधारित हो।
🎯 Exam Tip: ये मान्यताएँ उत्तर व्यवहारवाद के 'कर्म' और 'प्रासंगिकता' के नारों को और स्पष्ट करती हैं।
प्रश्न 11. उत्तर व्यवहारवादियों के अनुसार व्यवसायों का राजनीतिकरण क्यों आवश्यक है?
Answer: उत्तर व्यवहारवादी विचारक राजनीति वैज्ञानिकों की निष्क्रियता के पक्षधर नहीं हैं। वे चाहते हैं कि राजनीति वैज्ञानिक सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज की समस्याओं को हल करने में योगदान दें। उनका मानना है कि इस स्थिति में, व्यवसायों का राजनीतिकरण आवश्यक है ताकि राजनीति विज्ञान समाज के उद्देश्यों को व्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से पूरा कर सके।
In simple words: उत्तर व्यवहारवादियों के अनुसार, राजनीति के जानकारों को चुपचाप बैठने के बजाय समाज की समस्याओं को हल करने के लिए सक्रिय होना चाहिए, इसलिए व्यवसायों का राजनीतिकरण जरूरी है।
🎯 Exam Tip: 'व्यवसायों का राजनीतिकरण' का अर्थ है कि शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों के प्रति उदासीन न रहकर सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।
प्रश्न 12. उत्तर व्यवहारवाद की कोई दो सीमाएँ लिखिए। अथवा उत्तर व्यवहारवाद की आलोचना के दो आधार बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवाद की दो प्रमुख सीमाएँ या आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
(i) अन्तर्विरोध का होना: उत्तर व्यवहारवाद अपने अध्ययन में मूल्यों और तथ्यों दोनों को महत्वपूर्ण मानता है। इसके कारण इसमें एक विरोधाभास पैदा होता है, क्योंकि यह एक साथ मूल्य-प्रधान, आदर्शवादी और व्यक्तिनिष्ठ होने के साथ-साथ मूल्य-निरपेक्ष, यथार्थवादी और वस्तुनिष्ठ भी होना चाहता है, जो कि संभव नहीं है।
(ii) अवैज्ञानिक दृष्टिकोण: उत्तर व्यवहारवादी विचारक तकनीक से पहले 'सार' (विषयवस्तु) को महत्व देते हैं। इसका मतलब है कि वे पहले शोध का उद्देश्य तय करते हैं और फिर उसकी पुष्टि के लिए तकनीक का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, उनका अध्ययन पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो सकता है, जिसे अवैज्ञानिक माना जाता है।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद में कुछ विरोधाभास हैं क्योंकि यह मूल्यों और तथ्यों दोनों को एक साथ महत्व देना चाहता है, और इसे अवैज्ञानिक भी माना जाता है क्योंकि यह तकनीक से ज्यादा विषय को महत्व देता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी सिद्धांत की आलोचनाओं को समझना उसके व्यापक संदर्भ और व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करता है।
RBSE Class 11 Political Science Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के प्रति असन्तोष के प्रमुख कारण बताइए। अथवा परम्परागत उपागम के प्रति असन्तोष के कौन-कौन से कारण माने जाते हैं?
Answer: परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के प्रति असंतोष के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
(1) शासन के नीति-निर्माण में राजनीतिज्ञों को अधिक महत्व देना: 20वीं शताब्दी की शुरुआत में राजनीति शास्त्री परम्परागत अध्ययन पद्धतियों के परिणामों से निराश थे। शासन की नीति बनाने में केवल राजनेताओं को ही महत्व दिया जाता था, और राजनीति विज्ञान के विद्वानों के ज्ञान की उपेक्षा की जाती थी। परम्परागत उपागम फासीवाद, नाजीवाद और एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों को समझाने में असमर्थ था।
(2) अध्ययन विषय में सैद्धांतिक पक्ष पर जोर: राजनीति शास्त्रियों ने महसूस किया कि परम्परागत उपागम के तहत अध्ययन सिर्फ सैद्धांतिक पक्ष पर केंद्रित था, जो विश्वसनीय नहीं था। अध्ययन में वास्तविक विषयवस्तु की कमी थी।
(3) द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव: द्वितीय विश्व युद्ध की विनाशकारी घटनाओं ने राजनीति वैज्ञानिकों को नए शोध और सिद्धांतों के लिए प्रेरित किया। उन्हें लगा कि राजनीतिक जीवन की जटिलताओं को समझने के लिए संस्थाओं की बजाय व्यक्तियों के व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी है।
(4) विभिन्न सामाजिक विज्ञानों से प्रेरणा: अन्य सामाजिक विज्ञानों में वैज्ञानिक पद्धति और व्यवहारवादी दृष्टिकोण का प्रयोग पहले से ही हो रहा था। इससे राजनीति विज्ञान को भी वैज्ञानिक और नए तरीके अपनाने की प्रेरणा मिली।
(5) नई और विश्वसनीय पद्धतियों के प्रति जिज्ञासा: प्राकृतिक विज्ञानों और समाजशास्त्र में विकसित प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप नई और विश्वसनीय पद्धतियों और तकनीकों के प्रति रुचि बढ़ी। यह महसूस किया गया कि राजनीति शास्त्र के अस्तित्व और विकास के लिए अंतर-विषयक आदान-प्रदान आवश्यक है।
(6) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की स्थिति: युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसा माहौल बना जहाँ यह महसूस किया गया कि पश्चिमी अध्ययन पद्धतियाँ सीमित क्षेत्रों में ही उपयोगी हो सकती हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नए स्वतंत्र देशों की समस्याओं का अध्ययन परम्परागत तरीकों से वास्तविक स्थिति को नहीं समझा पा रहा था। अतः, सांस्कृतिक और अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में राजनीतिक प्रक्रिया और व्यवहार के अध्ययन को उपयोगी माना गया।
In simple words: पुराने राजनीतिक अध्ययन तरीकों से लोग इसलिए नाखुश थे क्योंकि वे असली समस्याओं को नहीं समझा पाए, नेताओं को ज्यादा महत्व देते थे, सिर्फ सिद्धांत पर ध्यान देते थे, और दूसरे विश्व युद्ध जैसी घटनाओं को भी ठीक से नहीं समझा पाए। नए वैज्ञानिक तरीके और दूसरे विषयों से प्रेरणा मिलने पर बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
🎯 Exam Tip: किसी भी प्रमुख सिद्धांत के उदय के पीछे के सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक कारणों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. राजनीति विज्ञान पर व्यवहारवाद के प्रभाव को बताइए। अथवा व्यवहारवाद की उपयोगिता एवं महत्त्व का वर्णन कीजिए। अथवा व्यवहारवाद को राजनीति विज्ञान में महत्त्व स्थापित कीजिए। अथवा राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में व्यवहारवाद के योगदान का वर्णन कीजिए।
Answer: राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में व्यवहारवाद के योगदान, महत्त्व या उपयोगिता को निम्नलिखित रूपों में देखा जा सकता है:
(1) नवीन राजनीति विज्ञान की स्थापना: व्यवहारवादी अध्ययन के प्रभाव से ही राजनीति विज्ञान को 'नवीन राजनीति विज्ञान' कहा जाने लगा। इसने परम्परागत राजनीति विज्ञान की कमियों को उजागर कर उसे आधुनिक अध्ययन पद्धति, शब्दावली और मान्यताओं से युक्त एक विकसित विज्ञान बनाया।
(2) विषयवस्तु में परिवर्तन: परम्परागत राजनीति विज्ञान में राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन मुख्य था। व्यवहारवाद ने इसके स्थान पर राजनीतिक संस्थाओं के सैद्धांतिक विवेचन की बजाय मानव व्यवहार की केंद्रीय भूमिका को अपनी अध्ययन इकाई बनाया।
(3) अन्त:अनुशासनात्मक दृष्टिकोण की स्थापना: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को अंतर-अनुशासनात्मक स्वरूप प्रदान किया। इसने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति विज्ञान का अध्ययन अन्य सामाजिक विज्ञानों के संदर्भ में किया जाना चाहिए, जिससे राजनीति शास्त्रियों का दृष्टिकोण व्यापक हुआ।
(4) वैकल्पिक धारणाएँ प्रदान करना: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को कई वैकल्पिक धारणाएँ दीं, जैसे- शक्ति, समूह, व्यवस्था, इच्छा शक्ति, मतदान व्यवहार और खोज सिद्धांत। इन धारणाओं ने राजनीतिक व्यवहार के अध्ययन में विशेष महत्व प्राप्त किया।
(5) राजनीतिक अध्ययन को यथार्थवादी बनाना: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान के अध्ययन में 'क्या होना चाहिए' की बजाय 'क्या है' पर बल दिया। इस प्रकार, व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान के अध्ययन को अधिक यथार्थवादी और वस्तुनिष्ठ बनाया।
In simple words: व्यवहारवाद ने राजनीति विज्ञान को नया रूप दिया, इसे और वैज्ञानिक बनाया, अध्ययन का विषय बदल दिया, दूसरे विषयों से जोड़ा और राजनीतिक व्यवहार को समझने के लिए नए विचार दिए।
🎯 Exam Tip: व्यवहारवाद के सकारात्मक प्रभावों को बिन्दुवार समझाना और उनके महत्व को स्पष्ट करना आवश्यक है।
प्रश्न 3. उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति के कारणों का वर्णन कीजिए। अथवा उत्तर व्यवहारवाद के उदय के प्रमुख कारण बताइए। अथवा उत्तर व्यवहारवादी आन्दोलन किस प्रकार अस्तित्व में आया? बताइए।
Answer: उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति का मूल कारण व्यवहारवाद में मौजूद कमियों और दोषों के प्रति तीव्र असंतोष था। उत्तर व्यवहारवादी क्रान्ति के उदय के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
(1) व्यवहारवाद के विरुद्ध प्रतिक्रिया: उत्तर व्यवहारवाद, व्यवहारवाद के खिलाफ एक प्रतिक्रिया थी। व्यवहारवादी आंदोलन ने राजनीति विज्ञान को वैज्ञानिक स्वरूप देने की कोशिश की, लेकिन ये प्रयास अपर्याप्त और अधूरे माने गए।
(2) अध्ययन पद्धतियों से असहमति: उत्तर व्यवहारवाद के अनुसार, राजनीति विज्ञान में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह कठोर अध्ययन पद्धतियों को लागू करना उचित नहीं है, क्योंकि व्यक्ति और समाज की प्रवृत्ति परिवर्तनशील है। इसलिए, प्राकृतिक विज्ञानों के मानदंडों पर राजनीति विज्ञान का अध्ययन संभव नहीं है।
(3) विश्व मानवता के प्रति दायित्वों की उपेक्षा: जब व्यवहारवादी विचारक सिद्धांतों के निर्माण में व्यस्त थे, तब दुनिया तीव्र सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संकटों का सामना कर रही थी। व्यवहारवादी विचारक इन संकटों से अनभिज्ञ थे। उस समय समाज विघटन और टूटने की ओर बढ़ रहा था। वियतनाम संकट, परमाणु युद्ध का डर, अमेरिका में बढ़ता असंतोष, तानाशाही शासन की बढ़ती संभावनाएँ और जनसंख्या विस्फोट जैसे संकटों का आभास व्यवहारवादी विचारकों को नहीं था, और उन्होंने इन संकटों के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद इसलिए आया क्योंकि व्यवहारवाद में कई कमियाँ थीं। यह मानता था कि व्यवहारवाद पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं था, उसके अध्ययन के तरीके गलत थे, और वह दुनिया की बड़ी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा था।
🎯 Exam Tip: उत्तर व्यवहारवाद के उदय के कारणों को समझना आवश्यक है, क्योंकि यह राजनीति विज्ञान के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
प्रश्न 4. उत्तर व्यवहारवाद का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। अथवा उत्तर व्यवहारवादी उपागम की किन-किन आधारों पर आलोचना की जाती है?
Answer: यद्यपि उत्तर व्यवहारवाद ने परम्परागत राजनीतिक दृष्टिकोण और व्यवहारवादी दृष्टिकोण दोनों के दोषों को समाप्त कर राजनीति विज्ञान को एक नए विज्ञान का रूप दिया, फिर भी इसकी निम्नलिखित आधारों पर आलोचना की जाती है:
(1) अन्तर्विरोध का होना: उत्तर व्यवहारवादी अपने अध्ययन में मूल्यों और तथ्यों दोनों को महत्वपूर्ण मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह एक विरोधाभास है, क्योंकि वे एक साथ मूल्य-प्रधान, आदर्शवादी, व्यक्तिनिष्ठ होने के साथ-साथ मूल्य-निरपेक्ष, यथार्थवादी और वस्तुनिष्ठ भी होना चाहते हैं, जो संभव नहीं है।
(2) अवैज्ञानिक दृष्टिकोण का होना: उत्तर व्यवहारवादी विचारक तकनीक से पहले 'सार' (विषयवस्तु) को अधिक महत्व देते हैं। इसका अर्थ है कि वे पहले शोध का उद्देश्य तय करते हैं और फिर उसकी पुष्टि के लिए तकनीक का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, उनका अध्ययन पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो सकता है, जिसे अवैज्ञानिक माना जाता है।
(3) मात्र उदारवादी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करना: उत्तर व्यवहारवाद मानव मूल्यों की रक्षा पर बल देता है। ये मूल्य समाज और समुदायों की स्वतंत्रता को अधिक महत्व देते हैं। आलोचकों का तर्क है कि उत्तर व्यवहारवादी विचारक अपने उदारवादी मूल्यों को ही सार्वभौमिक मानव मूल्य मानकर स्वीकार करते हैं।
(4) तृतीय विश्व के लिए सीमित महत्व: उत्तर व्यवहारवाद ने अपने मानवीय मूल्यों को लोकतान्त्रिक व्यवस्था के अनिवार्य और आधारभूत मूल्यों के रूप में प्रस्तुत किया है। लेकिन आलोचक कहते हैं कि इन मूल्यों का तृतीय विश्व के देशों के लिए सीमित महत्व है, जहाँ राजनीतिक अस्थिरता, जनसंख्या विस्फोट और गरीबी जैसी समस्याएँ अधिक हैं।
In simple words: उत्तर व्यवहारवाद की आलोचना की जाती है क्योंकि इसमें कुछ विरोधाभास हैं, इसे अवैज्ञानिक माना जाता है, यह केवल उदारवादी मूल्यों को बढ़ावा देता है, और यह विकासशील देशों की समस्याओं को पूरी तरह से हल नहीं करता।
🎯 Exam Tip: किसी भी सिद्धांत की आलोचनाओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करने के लिए, हर आलोचना बिन्दु को स्पष्ट उदाहरण या कारण के साथ समझाना चाहिए।
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