RBSE Solutions Class 11 Political Science Chapter 15 असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्द

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Detailed Chapter 15 असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्द RBSE Solutions for Class 11 Political Science

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Class 11 Political Science Chapter 15 असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा आन्द RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Political Science Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Political Science Chapter 15 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. असहयोग आन्दोलन का अर्थ समझाइए।
Answer: अंग्रेजी सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने के लिए चलाए गए आंदोलन को असहयोग आंदोलन कहते हैं। इस आंदोलन के दो हिस्से थे- नकारात्मक और सकारात्मक। ब्रिटिश राज जनता के सहयोग पर निर्भर था, इसलिए इस सहयोग को खत्म करना ही असहयोग कहलाया, और यही एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया.
In simple words: असहयोग आंदोलन का मतलब था ब्रिटिश सरकार की नीतियों का विरोध करना और उनसे सहयोग न करना, ताकि सरकार कमजोर हो जाए और भारत को आजादी मिले।

🎯 Exam Tip: असहयोग आन्दोलन की परिभाषा बताते समय उसके दो मुख्य पहलुओं – नकारात्मक और सकारात्मक – को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. चौरी-चौरा काण्ड क्या है? व्याख्या कीजिए।
Answer: चौरी-चौरा कांड उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नाम के एक गांव में 5 फरवरी, 1922 को हुआ था। इस दिन असहयोग आंदोलन के तहत कांग्रेस का एक जुलूस निकल रहा था। पुलिस ने इस जुलूस को रोकने की कोशिश की। इसके बाद कुछ गुस्साए लोगों ने पुलिसकर्मियों को खदेड़कर थाने में आग लगा दी। इस घटना में 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इसी घटना को चौरी-चौरा कांड कहते हैं.
In simple words: चौरी-चौरा कांड 1922 में हुआ था, जब एक भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिससे 22 पुलिसकर्मी मारे गए। यह घटना असहयोग आंदोलन के दौरान हुई थी।

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा कांड के बारे में लिखते समय घटना की तारीख, स्थान और मुख्य परिणाम (पुलिसकर्मियों की मौत और आंदोलन पर प्रभाव) का उल्लेख करें।

 

Question 3. जलियाँवाला बाग हत्या कांड कहाँ हुआ था?
Answer: जलियाँवाला बाग हत्याकांड अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुआ था.
In simple words: जलियाँवाला बाग हत्याकांड अमृतसर शहर में हुआ था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं के स्थान को सटीकता से याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्रमुख घटनाओं के लिए।

 

Question 4. रोलेट एक्ट का सम्बंध किस पर प्रतिबन्ध से है?
Answer: रोलेट एक्ट का संबंध भारतीयों की स्वशासन की मांग के संघर्ष और उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने से था। यह कानून लोगों को बिना मुकदमे के कैद करने की अनुमति देता था.
In simple words: रोलेट एक्ट भारतीय लोगों की आजादी और राजनीतिक कामों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: रोलेट एक्ट के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करें, खासकर भारतीयों के अधिकारों और राजनीतिक गतिविधियों पर इसके प्रतिबंधात्मक प्रभाव को।

 

Question 5. प्रिंस ऑफ वेल्स भारत में कब आया?
Answer: प्रिंस ऑफ वेल्स 17 नवम्बर 1921 को भारत आया था.
In simple words: प्रिंस ऑफ वेल्स 17 नवंबर 1921 को भारत आए थे।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तिथियों को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर सीधे प्रश्नों में पूछी जाती हैं।

 

Question 6. यंग इण्डिया क्या था?
Answer: यंग इंडिया एक अंग्रेजी समाचार पत्र था जिसे महात्मा गांधी ने 1919 में अहमदाबाद से प्रकाशित किया था। यह अखबार उनके विचारों और आंदोलनों को लोगों तक पहुँचाने का माध्यम था.
In simple words: यंग इंडिया महात्मा गांधी का एक अंग्रेजी अखबार था, जो 1919 में अहमदाबाद से शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के प्रकाशनों और उनके उद्देश्य को संक्षेप में बताएं।

 

Question 7. 9 अगस्त 1947 के दिन का महत्व बताइए।
Answer: 9 अगस्त 1947 को भारत छोड़ो आन्दोलन का बहुत प्रसिद्ध नारा दिया गया था, जो देश की आजादी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था.
In simple words: 9 अगस्त 1947 को भारत छोड़ो आंदोलन का प्रसिद्ध नारा दिया गया था।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष तिथि के महत्व को बताते समय, उससे जुड़ी प्रमुख घटना या घोषणा को स्पष्ट करें।

 

Question 8. "मरो नहीं, मारो!' का नारा किसने दिया?
Answer: "मरो नहीं, मारो!" का नारा लाल बहादुर शास्त्री ने दिया था.
In simple words: लाल बहादुर शास्त्री ने "मरो नहीं, मारो!" का नारा दिया था।

🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध नारों और उनके देने वाले नेताओं को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 9. "दिल्ली चलो” का नारा किसने दिया?
Answer: "दिल्ली चलो" का नारा महात्मा गाँधी ने दिया था.
In simple words: महात्मा गाँधी ने "दिल्ली चलो" का नारा दिया था।

🎯 Exam Tip: नारों और उनके प्रवर्तकों को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

Question 11. "काकोरी कांड" स्मृति दिवस कब मनाया जाता है?
Answer: "काकोरी कांड" स्मृति दिवस 9 अगस्त को मनाया जाता है.
In simple words: काकोरी कांड का स्मृति दिवस 9 अगस्त को मनाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखना जरूरी है।

 

Question 12. "काकोरी कांड" स्मृति दिवस मनाने की परम्परा किसने प्रारम्भ की?
Answer: "काकोरी कांड" स्मृति दिवस मनाने की परम्परा भगत सिंह ने प्रारम्भ की थी.
In simple words: भगत सिंह ने काकोरी कांड स्मृति दिवस मनाने की शुरुआत की थी।

🎯 Exam Tip: किसी परंपरा या पहल की शुरुआत किसने की, यह जानकारी अक्सर पूछी जाती है।

 

Question 13. भारत कोकिला किसे कहा जाता है?
Answer: भारत कोकिला सरोजिनी नायडू को कहा जाता है.
In simple words: सरोजिनी नायडू को भारत कोकिला कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण व्यक्तियों के उपनामों और उपाधियों को याद रखना उपयोगी है।

 

Question 14. केबिनेट मिशन भारत कब आया?
Answer: केबिनेट मिशन 1946 में भारत आया था.
In simple words: केबिनेट मिशन 1946 में भारत पहुंचा था।

🎯 Exam Tip: भारत में हुए प्रमुख मिशनों और उनके आगमन की तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. गाँधीजी को राष्ट्रपिता की उपाधि से किसने संबोधित किया?
Answer: गाँधीजी को राष्ट्रपिता की उपाधि से सुभाष चन्द्र बोस ने संबोधित किया था.
In simple words: सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी को राष्ट्रपिता कहा था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक हस्तियों को दी गई उपाधियों और उन्हें देने वाले व्यक्तियों को याद रखें।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 15 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. असहयोग आन्दोलन का अर्थ समझाइए।
Answer: असहयोग आंदोलन वह आंदोलन था जो ब्रिटिश सरकार की नीतियों के बहिष्कार के लिए चलाया गया था। इसमें दो प्रमुख पक्ष थे: एक नकारात्मक पक्ष, जिसमें सरकारी पदों और उपाधियों का त्याग करना शामिल था, और एक सकारात्मक पक्ष, जिसमें स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देना शामिल था। ब्रिटिश शासन जनता के सहयोग पर निर्भर था, इसलिए इस सहयोग को खत्म करना ही असहयोग आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था.
In simple words: असहयोग आंदोलन का मतलब था ब्रिटिश सरकार से हर तरह का सहयोग बंद कर देना, ताकि वह कमजोर पड़ जाए और भारत को आजादी मिल सके।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन को परिभाषित करते समय उसके नकारात्मक और सकारात्मक पहलुओं को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 2. चौरी-चौरा कांड पर प्रकाश डालिए।
Answer: चौरी-चौरा कांड 5 फरवरी, 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक गांव में हुआ था। यह घटना असहयोग आंदोलन के चरम पर हुई थी। उस दिन कांग्रेस के सदस्यों ने एक जुलूस निकाला था, जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को खदेड़कर थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए। इस हिंसा से गांधीजी बहुत दुखी हुए और उन्होंने तुरंत असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला कर लिया.
In simple words: चौरी-चौरा कांड 1922 में गोरखपुर के चौरी-चौरा गांव में हुआ था, जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस स्टेशन जला दिया और 22 पुलिसकर्मी मारे गए, जिससे गांधीजी ने असहयोग आंदोलन रोक दिया।

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा कांड की व्याख्या करते समय घटना की तारीख, स्थान, कारण और महात्मा गांधी पर इसके प्रभाव का उल्लेख करें।

 

Question 3. रौलट एक्ट क्या था? विवरण दीजिए।
Answer: रौलट एक्ट 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित एक कानून था, जिसे न्यायाधीश रौलट की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर बनाया गया था। इस कानून का मुख्य उद्देश्य बिना किसी मुकदमे के भारतीयों को दो साल तक जेल में डालना, उनके नागरिक अधिकारों पर रोक लगाना और स्वशासन के लिए उनके संघर्ष को दबाना था। इस एक्ट को "न अपील, न दलील, न वकील" वाला कानून कहा गया और पूरे देश में इसका कड़ा विरोध हुआ.
In simple words: रौलट एक्ट 1919 में बना एक कड़ा ब्रिटिश कानून था, जो सरकार को भारतीयों को बिना मुकदमे के कैद करने की इजाजत देता था और उनके अधिकारों को छीनता था।

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट का वर्णन करते समय उसके मुख्य प्रावधानों (बिना मुकदमे के कैद) और इसके उद्देश्य (भारतीय आंदोलन को दबाना) पर ध्यान दें।

 

Question 4. गाँधी जी ने खेड़ा और अहमदाबाद में क्या किया?
Answer: गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद साबरमती में अपना आश्रम बनाया। उन्होंने चंपारण और खेड़ा में गरीब किसानों के हक के लिए काम किया, जहां उन्होंने नील की खेती करने वाले किसानों और भू-राजस्व के खिलाफ सत्याग्रह किया। अहमदाबाद में उन्होंने मिल मजदूरों के अधिकारों के लिए भी सत्याग्रह किया। ये शुरुआती सत्याग्रह उनके बड़े आंदोलनों की नींव बने.
In simple words: गांधीजी ने भारत आकर चंपारण और खेड़ा में किसानों के लिए और अहमदाबाद में मजदूरों के लिए सत्याग्रह आंदोलन चलाए, जिससे उन्होंने लोगों को एकजुट किया।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के शुरुआती सत्याग्रहों का उल्लेख करते समय, उनके स्थानों (चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद) और उनके उद्देश्यों (किसान और मजदूर) को बताएं।

 

Question 5. जलियाँवाला बाग हत्याकांड पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ था। ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट का विरोध कर रहे प्रसिद्ध नेताओं डॉ. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को गिरफ्तार करके अमृतसर से बाहर निकाल दिया था। इसके विरोध में सत्याग्रहियों ने 13 अप्रैल को अमृतसर में हड़ताल बुलाई। वैशाखी मेले के अवसर पर लगभग 20,000 लोग जलियाँवाला बाग में इकट्ठा हुए। शहर में मार्शल लॉ लागू होने के बावजूद, लोग वहां जमा थे। जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थे भीड़ पर गोलियां चलवा दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। यह घटना पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ गहरे असंतोष का कारण बनी.
In simple words: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 में अमृतसर में हुआ था, जब जनरल डायर ने शांतिपूर्ण भीड़ पर गोलियां चलाईं, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए। यह घटना ब्रिटिश अत्याचार का एक प्रतीक बन गई।

🎯 Exam Tip: जलियाँवाला बाग हत्याकांड की व्याख्या करते समय तारीख, स्थान, जनरल डायर की भूमिका और घटना के प्रभाव को अवश्य शामिल करें।

 

Question 6. खिलाफत आन्दोलन का अर्थ एवं कारण बताइए।
Answer: खिलाफत आंदोलन – खिलाफत आंदोलन प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान शुरू हुआ था। इस युद्ध में तुर्की जर्मनी के साथ अंग्रेजों के खिलाफ था। भारतीय मुसलमानों को डर था कि युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटेन तुर्की के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा। ब्रिटिश प्रधान मंत्री ने भारतीय मुसलमानों को युद्ध में सहयोग के बदले आश्वासन दिया था कि वे तुर्की के प्रति बदले की भावना नहीं रखेंगे और उसके साम्राज्य को नहीं तोड़ेंगे। लेकिन युद्ध के बाद ब्रिटेन ने अपना वादा नहीं निभाया और तुर्की के साम्राज्य को बांट दिया गया। साथ ही तुर्की के सुल्तान, जो खलीफा के पद पर थे, उन्हें अपमानित किया गया। ब्रिटेन के इस धोखे से भारतीय मुसलमानों को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने एक शक्तिशाली खिलाफत आंदोलन शुरू कर दिया। इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य खलीफा के पद और उसकी धार्मिक सत्ता को बचाना था.
In simple words: खिलाफत आंदोलन तुर्की के खलीफा को बचाने के लिए भारतीय मुसलमानों द्वारा शुरू किया गया था, क्योंकि ब्रिटेन ने प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की के सुल्तान (खलीफा) को अपमानित किया और उनके साम्राज्य को बांट दिया था।

🎯 Exam Tip: खिलाफत आंदोलन के कारणों को बताते समय प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की और खलीफा के पद के साथ ब्रिटिश व्यवहार का उल्लेख करें।

 

Question 7. गाँधी जी के स्वराज को समझाइए।
Answer: गांधीजी के पूर्ण स्वराज का लक्ष्य रखने वाला यह आंदोलन असहयोग आंदोलन से अलग था। इसमें कानून का उल्लंघन करने का निश्चय किया गया था, ताकि भारतीय जनता में स्वशासन की भावना मजबूत हो। गांधीजी चाहते थे कि देशप्रेमी भारतीय पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह करें ताकि पूर्ण स्वराज हासिल किया जा सके। यह आंदोलन अहिंसक तरीकों से अपनी मांगें मनवाने का एक नया तरीका था.
In simple words: गांधीजी के स्वराज का मतलब था भारत की पूर्ण आजादी, जिसे पाने के लिए उन्होंने कानून तोड़ने और देशव्यापी अहिंसक विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के स्वराज की अवधारणा को स्पष्ट करते समय उसके मुख्य लक्ष्य (पूर्ण स्वतंत्रता) और इसे प्राप्त करने के तरीके (कानून का उल्लंघन, सत्याग्रह) को शामिल करें।

 

Question 8. लुई फिशर ने किसकी जीवनी लिखी?
Answer: लुई फिशर ने महात्मा गाँधी की जीवनी "दि लाइफ ऑफ महात्मा गाँधी" शीर्षक से पुस्तक लिखी थी.
In simple words: लुई फिशर ने महात्मा गांधी की जीवनी "द लाइफ ऑफ महात्मा गांधी" लिखी थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा लिखी गई प्रसिद्ध जीवनी या पुस्तकों का उल्लेख करना अक्सर उपयोगी होता है।

 

Question 9. भारत में प्रिंस ऑफ वेल्स कब और कहाँ आया?
Answer: असहयोग आंदोलन सरकार की उम्मीद से ज्यादा सफल हो रहा था, जिससे सरकार ने कड़ा दमन शुरू कर दिया। सरकार ने राजसभा अधिनियम का खुलकर इस्तेमाल किया और आंदोलन के नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। कुछ जगहों पर तो सरकार ने बहुत ज्यादा हिंसा का इस्तेमाल भी किया। सरकार के वादे के बाद भी अली बंधुओं जैसे प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसलिए कांग्रेस ने अपनी बैठक में अली बंधुओं की गिरफ्तारी का विरोध किया और प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का विरोध करने का फैसला किया.
In simple words: प्रिंस ऑफ वेल्स भारत में तब आए जब असहयोग आंदोलन अपनी चरम सीमा पर था और ब्रिटिश सरकार उसका दमन कर रही थी।

🎯 Exam Tip: प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन के संदर्भ में, तत्कालीन राजनीतिक स्थिति और भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया को स्पष्ट करें।

 

Question 10. यंग इण्डिया क्या था? विवरण दीजिए।
Answer: "यंग इण्डिया" महात्मा गांधी द्वारा 1919 में अहमदाबाद से प्रकाशित एक साप्ताहिक अंग्रेजी पत्र था। इस अखबार में छपे लेखों के आधार पर ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया था। इस पत्र के जरिए गांधीजी ने वायसराय को 11 शर्तें मानने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार ये शर्तें मान लेती है, तो सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू नहीं किया जाएगा। यह पत्र गांधीजी के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रचार का एक महत्वपूर्ण साधन था.
In simple words: यंग इंडिया महात्मा गांधी का 1919 में शुरू किया गया एक अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार था, जिससे उन्होंने अपने विचार और आंदोलन की शर्तें सरकार तक पहुंचाईं।

🎯 Exam Tip: "यंग इंडिया" के संदर्भ में, उसके प्रकाशन का वर्ष, स्थान और महात्मा गांधी द्वारा उसके उपयोग (जैसे 11 शर्तें) का उल्लेख करें।

 

Question 11. सविनय अवज्ञा आन्दोलन का अर्थ बताइए।
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूर्ण स्वराज्य की मांग को लेकर चलाया गया एक आंदोलन था। यह असहयोग आंदोलन से अलग था क्योंकि इसमें कानून तोड़ने का सीधा इरादा था। इस आंदोलन में पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को पाने के लिए कानूनों का उल्लंघन करने का फैसला किया गया। इसका उद्देश्य था कि आजादी चाहने वाले भारतीय पूरे देश में विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह करें, ताकि ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया जा सके.
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन का अर्थ था पूर्ण आजादी के लिए गांधीजी के नेतृत्व में शांतिपूर्वक कानूनों को तोड़ना और सरकार का विरोध करना।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन की परिभाषा में, 'पूर्ण स्वराज्य की मांग' और 'कानून का उल्लंघन' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 12. काकोरी कांड को समझाइए।
Answer: काकोरी कांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक ऐतिहासिक घटना थी, जो 9 अगस्त, 1925 को हुई थी। इस घटना में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हथियार खरीदने के लिए ब्रिटिश सरकार का खजाना लूट लिया था। इस ट्रेन डकैती में जर्मनी में बने चार माउजर पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था, और इसे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के केवल दस सदस्यों ने अंजाम दिया था। इस कांड में रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां जैसे प्रमुख क्रांतिकारी शामिल थे.
In simple words: काकोरी कांड 1925 में क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने की घटना थी, ताकि आजादी की लड़ाई के लिए हथियार खरीदे जा सकें।

🎯 Exam Tip: काकोरी कांड का वर्णन करते समय तारीख, घटना, शामिल क्रांतिकारियों और उसके उद्देश्य को स्पष्ट करें।

 

Question 13. केबिनेट मिशन पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: 26 जुलाई, 1945 को ब्रिटेन में क्लीमेंट एटली के नेतृत्व में ब्रिटिश मंत्रिमंडल ने सत्ता संभाली। 15 फरवरी, 1946 को प्रधानमंत्री एटली ने भारतीय संविधान बनाने और भारत की तत्कालीन ज्वलंत समस्याओं पर भारतीयों से बात करने के लिए "केबिनेट मिशन" को भारत भेजने की घोषणा की। इस मिशन में तीन ब्रिटिश कैबिनेट सदस्य शामिल थे: भारत सचिव लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, बोर्ड ऑफ ट्रेड के अध्यक्ष सर स्टैफोर्ड क्रिप्स, और नौसेना प्रमुख ए. वी. अलेक्जेंडर। यह मिशन 24 मार्च, 1946 को दिल्ली पहुंचा और इसका मुख्य काम भारत को शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए रास्ते खोजना था.
In simple words: केबिनेट मिशन 1946 में भारत आया था, जिसमें तीन ब्रिटिश मंत्री थे। इसका लक्ष्य भारतीय संविधान के निर्माण और भारत को शांतिपूर्वक सत्ता सौंपने के तरीकों पर भारतीयों से बातचीत करना था।

🎯 Exam Tip: केबिनेट मिशन पर टिप्पणी करते समय इसके गठन का उद्देश्य, सदस्यों और आगमन की तारीख का उल्लेख करें।

 

Question 15. भारत का विभाजन किस योजना के अधीन हुआ?
Answer: भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना के आधार पर बने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अधीन हुआ था। इस अधिनियम में यह कहा गया था कि 15 अगस्त 1947 को भारत में पाकिस्तान अधिराज्य नामक दो आजाद उपनिवेश बनेंगे, और ब्रिटिश सरकार उन्हें सत्ता सौंप देगी.
In simple words: भारत का विभाजन 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत माउंटबेटन योजना के अनुसार हुआ, जिससे भारत और पाकिस्तान दो अलग देश बने।

🎯 Exam Tip: भारत के विभाजन से संबंधित योजना और अधिनियम का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 15 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. असहयोग आन्दोलन में गाँधी जी की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Answer: असहयोग आंदोलन में गांधीजी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए ही हिंदू-मुस्लिम एकता में रुचि लेनी शुरू कर दी थी। उनका मानना था कि लखनऊ समझौता एकता का मजबूत आधार नहीं बन पाया था, और खिलाफत का मुद्दा हिंदू-मुस्लिम एकता का एक ऐसा मौका था जो सदियों में नहीं मिलेगा। नवंबर 1919 में गांधीजी खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटेन ने तुर्की के साथ न्याय नहीं किया तो बहिष्कार और असहयोग शुरू किया जाएगा, लेकिन इसकी सफलता के लिए कांग्रेस का सहयोग जरूरी था। सितंबर 1920 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में अहिंसक असहयोग की नई योजना को स्वीकार किया गया।

1921 में असहयोग आंदोलन ने ब्रिटिश भारत की सभी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संस्थाओं का बहिष्कार करने का संदेश दिया, ताकि सरकारी तंत्र ठप हो जाए। गांधीजी का मानना था कि सरकार जनता के सहयोग से चलती है, और असहयोग के जरिए ही स्वराज दिलाया जा सकता है।

गांधीजी ने अपनी 'केसर-ए-हिंद' की उपाधि वापस कर दी। हजारों छात्रों ने स्कूल और कॉलेज छोड़ दिए, वकीलों ने वकालत छोड़ दी, जिनमें लाला लाजपत राय, चितरंजन दास, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे कई प्रमुख नेता शामिल थे।

असहयोग आंदोलन ने पूरे भारत को नई ऊर्जा दी। इस बड़े आंदोलन को देखकर सरकार हैरान और परेशान थी। ब्रिटिश सरकार को गांधीजी की इस रणनीति का सामना करना मुश्किल हो गया था। 1857 से अब तक ब्रिटिश सरकार ही राजनीतिक मामलों में नेतृत्व कर रही थी, लेकिन अब गांधीजी ने पहल करनी शुरू कर दी थी।

लाला लाजपत राय ने जेल से गांधीजी को पत्र लिखा और कहा कि एक जगह की गलती के कारण पूरे देश को दंडित किया गया है। आंदोलन स्थगित करने के दूसरे ही दिन गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर 6 साल की जेल हुई.
In simple words: असहयोग आंदोलन में गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर बहिष्कार, उपाधियां लौटाने और शिक्षा-वकालत छोड़ने जैसे कार्यक्रमों का नेतृत्व किया, जिससे पूरे देश में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

🎯 Exam Tip: गांधीजी की भूमिका का वर्णन करते समय खिलाफत आंदोलन से उनके जुड़ाव, असहयोग के पीछे की उनकी रणनीति और आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रमों को शामिल करें।

 

Question 2. भारत छोड़ो आन्दोलन में गाँधी जी की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का बहुत प्रसिद्ध नारा दिया था। गांधीजी के आह्वान पर यह आंदोलन पूरे भारत में एक आम जनता का आंदोलन बन गया, जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का एक अहम हिस्सा था।

क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन चलाने का फैसला किया। 8 अगस्त 1942 की शाम को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का नाम दिया गया। गांधीजी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन देश भर के युवा कार्यकर्ताओं ने हड़तालों और तोड़फोड़ करके आंदोलन को जारी रखा।

गांधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए सही मौके को ध्यान में रखते हुए 8 अगस्त 1942 की रात को ही मुंबई से अंग्रेजों को भारत छोड़ने और भारतीयों को "करो या मरो" का नारा दिया। यह नारा लोगों को छूने वाला और आंदोलन को मजबूत करने वाला था। रणनीति के तहत, सरकारी सुरक्षा से बचने के लिए वे पुणे में यरवदा स्थित आगा खां पैलेस चले गए।

9 अगस्त 1942 को सूरज निकलने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे और कांग्रेस को गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया। गांधीजी के साथ सरोजनी नायडू को यरवदा पुणे के आगा खां पैलेस में, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को पटना जेल और अन्य सभी सदस्यों को अहमदनगर के किले में नजरबंद किया गया.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी ने 1942 में "करो या मरो" का नारा देकर पूरे देश को एकजुट किया। उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उनके आह्वान पर युवाओं ने हड़तालें और तोड़फोड़ करके आंदोलन को जारी रखा।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी की भूमिका का विश्लेषण करते समय "करो या मरो" नारे, उनकी गिरफ्तारी और आंदोलन पर उसके तत्काल प्रभाव को शामिल करें।

 

Question 3. जलियाँवाला बाग हत्याकांड की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
Answer: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुआ था। ब्रिटिश सरकार ने रोलेट एक्ट का विरोध कर रहे प्रसिद्ध नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. किचलू को 9 अप्रैल को गिरफ्तार कर अमृतसर से निष्कासित करने का आदेश दिया। उन्होंने दिल्ली और पंजाब में महात्मा गांधी के प्रवेश पर भी रोक लगा दी। उस समय पंजाब का गवर्नर माइकल ओ. डायर था, जो भारतीयों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का मजाक उड़ाता था।

सत्याग्रहियों ने इन नेताओं की रिहाई के लिए अमृतसर में हड़ताल घोषित कर दी। 13 अप्रैल, 1919 को, वैशाखी मेले में भाग लेने के लिए अमृतसर के आसपास के कई गांवों से लगभग 20,000 लोग जलियाँवाला बाग में इकट्ठा हुए। इनमें से कई लोग ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए दमनकारी कानूनों का विरोध करने के लिए जमा हुए थे। शहर में पहले से ही मार्शल लॉ लागू था। जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंचा और मैदान से बाहर निकलने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया.

जब लगभग 20 हजार लोग वहां जमा हो गए, तो जनरल डायर के आदेश पर बिना किसी चेतावनी के गोली चलाना शुरू कर दिया। यह गोलीबारी तब तक नहीं रुकी जब तक कारतूस खत्म नहीं हो गए। यह बाग चारों ओर से इमारतों से घिरा हुआ था और बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था। डायर के आदेशानुसार, घायलों को रात भर कराहते हुए छोड़ दिया गया और उन्हें कोई मदद नहीं मिली.
In simple words: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 में अमृतसर में हुआ, जहां जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाईं, जिससे भारी संख्या में लोग मारे गए। यह ब्रिटिश सरकार के क्रूर दमन का एक बड़ा उदाहरण था।

🎯 Exam Tip: जलियाँवाला बाग हत्याकांड की व्याख्या करते समय, घटना की पृष्ठभूमि (रोलेट एक्ट, नेताओं की गिरफ्तारी), घटना का विवरण (भीड़, जनरल डायर, गोलीबारी) और उसके तत्काल परिणामों को शामिल करें।

 

Question 4. चौरी-चौरा कांड को समझाइए।
Answer: चौरी-चौरा कांड दिसंबर 1921 में कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में असहयोग आंदोलन को व्यापक रूप देने के निर्णय के बाद हुआ था। गांधीजी को इस आंदोलन के सभी अधिकार सौंपे गए थे। गांधीजी ने 1 फरवरी 1922 को वायसराय को एक चेतावनी भरा पत्र भी लिखा। बारडोली में इस आंदोलन की पूरी तैयारी की जा चुकी थी, लेकिन 5 फरवरी 1922 को हुई चौरी-चौरा घटना ने पूरी राजनीतिक स्थिति को बदल दिया।

असहयोग आंदोलन अपने चरम पर था, उसी समय 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा गांव में कांग्रेस की ओर से एक जुलूस निकाला गया। पुलिस ने इस जुलूस को रोकने की कोशिश की। इससे गुस्साए लोगों ने पुलिसकर्मियों को खदेड़कर थाने में आग लगा दी। इस घटना में पुलिस के 22 सिपाही मारे गए। चौरी-चौरा घटना से गांधीजी का अहिंसावादी हृदय बहुत आहत हुआ और उन्होंने हिंसा के उपयोग के कारण आंदोलन वापस ले लिया। हालांकि गांधीजी की गिरफ्तारी हुई और अन्य असहयोग आंदोलनकारियों को आंदोलन वापस लेने का दुख भी हुआ.
In simple words: चौरी-चौरा कांड 1922 में हुआ, जब भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी और 22 पुलिसकर्मी मारे गए। इस हिंसक घटना के कारण गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तुरंत रोक दिया।

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा कांड की व्याख्या करते समय घटना की तिथि, स्थान, कारण, और महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन को वापस लेने के निर्णय पर इसके प्रभाव पर विशेष जोर दें।

 

Question 5. भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में गाँधीजी के योगदान का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में गाँधीजी ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसका वर्णन निम्नलिखित बिंदुओं में किया गया है।
1. भारत के राष्ट्रपिता – राष्ट्रवाद के इतिहास में अक्सर एक ही व्यक्ति को राष्ट्र निर्माता का श्रेय दिया जाता है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की आजादी में जॉर्ज वाशिंगटन, इटली के निर्माण में गैरीबाल्डी और वियतनाम को आजाद कराने में हो ची मिन्ह का नाम जुड़ा है। इसी तरह महात्मा गांधी को भारतीय राष्ट्र का पिता माना जाता है, क्योंकि वे स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले सभी राष्ट्रवादी नेताओं में सबसे प्रभावशाली और सम्मानित थे।
2. देशहित में सर्वस्व न्योछावर – गांधीजी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया। उन्होंने देश को अंग्रेजी गुलामी से आजादी दिलाने के लिए भूख हड़तालें कीं और जेल भी गए। अंग्रेजों द्वारा उन्हें कई तरह के लालच दिए जाने के बावजूद, उन्होंने देशहित के साथ कोई समझौता नहीं किया.
3. देश को सत्याग्रह एवं अहिंसा रूपी हथियार प्रदान करना – गांधीजी के दो मुख्य हथियार थे- सत्याग्रह और अहिंसा। अपनी बात मनवाने के लिए गांधीजी धरना देते थे या कुछ दिनों का उपवास रखते थे। उन्होंने कई बार आमरण अनशन भी किया। सत्याग्रह से गांधीजी को पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचने की क्षमता मिली.
इनके सत्याग्रह रूपी हथियारों से अंग्रेज सरकार भी कांपती थी। इसके अलावा, गांधीजी अपनी बात मनवाने के लिए कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं करते थे, बल्कि अहिंसक तरीके से विरोध करते थे। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि अंग्रेज सरकार हर तरह से शक्तिशाली है, और उससे लड़कर नहीं जीता जा सकता।
4. भारतीय राष्ट्रवाद से समाज के सभी वर्गों को जोड़ना – गांधीजी ने स्वतंत्रता के लिए चलाए गए राष्ट्रीय आंदोलन को एक जन आंदोलन में बदल दिया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद से समाज के सभी वर्गों, जैसे- वकील, डॉक्टर, जमींदार, किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा, महिलाएं, निम्न जाति के लोग, हिंदू, मुसलमान, सिख आदि को जोड़ा और उनमें आपसी एकता स्थापित की। उन्होंने पूरे जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़कर उसे एक जन आंदोलन बना दिया।
5. समाज सुधारक – गांधीजी ने भारतीयों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए कई काम किए। भारत की गरीबी दूर करने के लिए उन्होंने लोगों को खादी पहनने का संदेश दिया। समाज में छुआछूत, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने की कोशिश की। अछूतों के उत्थान के लिए उन्हें हरिजन नाम दिया। देश में सांप्रदायिक दंगों को खत्म करने के लिए गांधीजी ने गांव-गांव घूमकर लोगों को भाईचारे का संदेश दिया।
6. हिंदू मुस्लिम एकता के समर्थक – अंग्रेजों ने भारतीयों को एक-दूसरे से अलग रखने के लिए कई कोशिशें की थीं। हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास किए, जिससे अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति सफल नहीं हो सकी.
In simple words: गांधीजी ने भारत को आजादी दिलाने में बहुत अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह को मुख्य हथियार बनाया, समाज के हर वर्ग को आंदोलन से जोड़ा, सामाजिक सुधार किए और हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया, जिससे ब्रिटिश शासन को बहुत कमजोर कर दिया।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के योगदान का वर्णन करते समय, उनके प्रमुख आंदोलनों (सत्याग्रह, अहिंसा), समाज के सभी वर्गों को जोड़ने, सामाजिक सुधारों और हिंदू-मुस्लिम एकता पर उनके प्रयासों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 9. असहयोग आन्दोलन के सकारात्मक पक्ष के प्रमुख कार्यक्रम थे:
(अ) राष्ट्रीय स्कूलों व कॉलेजों की स्थापना
(ब) स्वदेशी का व्यापक प्रचार
(स) अस्पृश्यता का अंत
(द) उपर्युक्त सभी।
Answer: (द) उपर्युक्त सभी।
In simple words: असहयोग आंदोलन में लोगों को अपने स्कूल-कॉलेज बनाने, अपने देश की चीजें इस्तेमाल करने और छुआछूत जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए कहा गया था।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के सकारात्मक पहलुओं में उन रचनात्मक कार्यों को शामिल करें जिनसे भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

 

Question 10. हिन्दू-मुस्लिम एकता निम्न में से किस आन्दोलन की एक विशेष बात थी
(अ) भारत छोड़ो आन्दोलन
(ब) असहयोग आन्दोलन
(स) व्यक्तिगत सत्याग्रह
(द) सविनय अवज्ञा आन्दोलन।
Answer: (ब) असहयोग आन्दोलन
In simple words: हिंदू-मुस्लिम एकता असहयोग आंदोलन की एक खास बात थी।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि खिलाफत आंदोलन ने इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई थी।

 

Question 11. चौरी-चौरा कांड किस वर्ष हुआ-
(ब) 1925 ई.
(स) 1928 ई.
(द) 1942 ई.
Answer: (अ) 1922 ई.
In simple words: चौरी-चौरा कांड 1922 में हुआ था।

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा कांड की सही तारीख को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह असहयोग आंदोलन के स्थगन का एक प्रमुख कारण था।

 

Question 12. 'एक वर्ष में स्वराज प्राप्ति का वचन देना न केवल अविवेकपूर्ण वरन् बालक सदृश घोषणा भी थी।” यह “कथन किस स्वतंत्रता सेनानी का है
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) सुभाषचन्द्र बोस
(स) लाला लाजपत राय
(द) भगत सिंह।
Answer: (स) लाला लाजपत राय
In simple words: यह बात लाला लाजपत राय ने कही थी कि एक साल में आजादी पाने का वादा बच्चों जैसी बात थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और टिप्पणियों को याद रखें, क्योंकि वे उनके विचारों को दर्शाते हैं।

 

Question 14. निम्न में से किस नदी के तट पर 31 दिसम्बर, 1929 की मध्य रात्रि को 'वंदे मातरम्' और 'इन्कलाब जिन्दाबाद के नारों के मध्य राष्ट्रीय तिरंगा फहराया गया
(अ) झेलम नदी
(ब) गंगा नदी
(स) रावी नदी
(द) यमुना नदी।
Answer: (स) रावी नदी
In simple words: 31 दिसंबर, 1929 की आधी रात को रावी नदी के किनारे 'वंदे मातरम्' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों के बीच राष्ट्रीय झंडा फहराया गया था। यह भारत की आजादी की लड़ाई का एक अहम पल था।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों और स्थानों को हमेशा याद रखें।

 

Question 15. सविनय अवज्ञा आन्दोलन किस वर्ष प्रारम्भ किया गया
(अ) 1922 ई.
(ब) 1925 ई.
(स) 1930 ई.
(द) 1942 ई.।
Answer: (स) 1930 ई.
In simple words: महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया था। यह भारतीयों को आजादी दिलाने के लिए एक बड़ा कदम था।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत का वर्ष और गांधीजी की भूमिका को ध्यान से समझें।

 

Question 16. निम्न में से किस आन्दोलन ने भारतीय जनता को निर्भीक बना दिया
(अ) असहयोग आन्दोलन
(ब) सविनय अवज्ञा आन्दोलन
(स) खिलाफत आन्दोलन
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (अ) असहयोग आन्दोलन
In simple words: असहयोग आंदोलन ने भारतीयों को ब्रिटिश शासन का विरोध करने का साहस दिया। इस आंदोलन के बाद लोग बिना डरे अपनी बात कहने लगे।

🎯 Exam Tip: विभिन्न आंदोलनों के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को जानें, जैसे कि उन्होंने जनता को कैसे सशक्त किया।

 

Question 18. नमक कानून तोड़ते समय किसने यह कहा था कि, 'सत्याग्रहियों की कभी पराजय नहीं होती, जब तक वे सत्य का परित्याग न कर दें।'
(अ) महात्मा गाँधी ने
(ब) पं. जवाहर लाल नेहरू ने
(स) पं. मोतीलाल नेहरू ने
(द) सरदार पटेल ने।
Answer: (अ) महात्मा गाँधी ने
In simple words: गांधीजी ने कहा था कि अगर सत्याग्रही सच के रास्ते पर चलते रहें, तो उनकी हार कभी नहीं हो सकती। यह बात उन्होंने नमक कानून तोड़ते समय कही थी।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के प्रमुख विचारों और बयानों को याद रखें, खासकर वे जो आंदोलनों से संबंधित हैं।

 

Question 19. सविनय अवज्ञा आन्दोलन की समाप्ति हेतु जो समझोता हुआ, उसका नाम था
(अ) पूना समझौता
(ब) गाँधी – इरविन समझौता
(स) वायसराय समझौता
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (ब) गाँधी – इरविन समझौता
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन को खत्म करने के लिए महात्मा गांधी और वायसराय इरविन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसे गांधी-इरविन समझौता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न समझौतों के नाम, उनके पक्ष और महत्व को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. निम्न में से किस वर्ष लंदन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ था?
(अ) सन् 1931
(ब) सन् 1932
(स) सन् 1940
(द) सन् 1942.
Answer: (अ) सन् 1931
In simple words: दूसरा गोलमेज सम्मेलन 1931 में लंदन में हुआ था। यह भारतीय नेताओं और ब्रिटिश सरकार के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

🎯 Exam Tip: गोलमेज सम्मेलनों के उद्देश्यों, प्रतिभागियों और परिणामों को समझें।

 

Question 22. निम्न में से किस वर्ष मैकडोनाल्ड पंचाट में भारत की दलित जातियों के लिए भी पृथक् निर्वाचन का प्रावधान किया गया-
(अ) 1932 ई.
(ब) 1938 ई.
(स) 1941 ई.
(द) 1942 ई.।
Answer: (अ) 1932 ई.
In simple words: मैकडोनाल्ड पंचाट 1932 में आया था, जिसमें दलित जातियों के लिए अलग चुनाव की व्यवस्था की गई थी।

🎯 Exam Tip: मैकडोनाल्ड पंचाट और पूना समझौते जैसे संवेदनशील मुद्दों के बारे में सटीक जानकारी रखें।

 

Question 23. 25 सितम्बर, 1932 को पूना समझौते पर हस्ताक्षर किए
(अ) गाँधी – इरविन ने
(ब) अम्बेडकर – गाँधीजी ने
(स) हण्टर – लाला लाजपत राय ने
(द) इनमें से कोई नहीं।
Answer: (ब) अम्बेडकर – गाँधीजी ने
In simple words: पूना समझौते पर 25 सितंबर, 1932 को डॉ. अम्बेडकर और महात्मा गांधी के बीच हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता दलितों के प्रतिनिधित्व को लेकर था।

🎯 Exam Tip: पूना समझौते के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं और उसके मुख्य प्रावधानों को याद रखें।

 

Question 24. निम्न में से किस वर्ष गाँधीजी ने व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया
(अ) 1933 ई.
(ब) 1934 ई.
(स) 1940 ई.
(द) 1942 ई.।
Answer: (स) 1940 ई.
In simple words: महात्मा गांधी ने 1940 में व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया था। यह ब्रिटिश सरकार के युद्ध प्रयासों के खिलाफ एक सांकेतिक विरोध था।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत सत्याग्रह के कारण और प्रमुख सत्याग्रहियों को समझें।

 

Question 26. निम्न में से किस वर्ष भारत छोड़ो आन्दोलन प्रारम्भ हुआ
(अ) 1928 ई.
(ब) 1942 ई.
(स) 1946 ई.
(द) 1947 ई.।
Answer: (ब) 1942 ई.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू हुआ था। इस आंदोलन में गांधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की तारीख, नारा और महत्व को याद रखना आवश्यक है।

 

RBSE Class 11 Political Science Chapter 15 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. बाल गंगाधर तिलक ने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के किस युग का नेतृत्व किया था ?
Answer: बाल गंगाधर तिलक ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अतिवादी युग का नेतृत्व किया था। वे गरम दल के प्रमुख नेता थे।
In simple words: बाल गंगाधर तिलक ने भारतीय आजादी की लड़ाई के उस दौर का नेतृत्व किया, जब नेता थोड़े सख्त तरीके अपना रहे थे।

🎯 Exam Tip: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरणों और उनके प्रमुख नेताओं के योगदान को समझें।

 

Question 2. गाँधीजी के नेतृत्व में कौन-कौन से आन्दोलन चलाए गए थे ?
Answer: गांधीजी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण आंदोलन चलाए गए थे, जिनमें प्रमुख हैं:
1. असहयोग आन्दोलन
2. सविनय अवज्ञा आन्दोलन
3. भारत छोड़ो आन्दोलन।
In simple words: गांधीजी ने भारत को आजाद कराने के लिए असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे बड़े आंदोलन चलाए थे।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के प्रमुख आंदोलनों के नाम और उनके मुख्य उद्देश्यों को याद रखें।

 

Question 3. गाँधी युग का प्रथम आन्दोलन कौन-सा था ?
Answer: गांधी युग का प्रथम बड़ा आंदोलन असहयोग आंदोलन था। यह आंदोलन 1920 में शुरू हुआ था।
In simple words: गांधीजी ने भारत में सबसे पहले असहयोग आंदोलन शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के भारत आगमन के बाद उनके पहले बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नाम याद रखें।

 

Question 4. प्रथम विश्व युद्ध कब प्रारम्भ हुआ ?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध सन् 1914 में प्रारम्भ हुआ था। यह एक वैश्विक संघर्ष था।
In simple words: पहला बड़ा विश्व युद्ध 1914 में शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं की शुरुआत और अंत की तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. 1919 ई. के किस अधिनियम ने 'फूट डालो और शासन करो' की नीति को प्रोत्साहित किया ?
Answer: 1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम ने 'फूट डालो और शासन करो' की नीति को प्रोत्साहित किया था। इस अधिनियम ने भारतीय समाज में विभाजन को बढ़ावा दिया।
In simple words: 1919 का भारत सरकार अधिनियम ऐसा कानून था जिसने अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' वाली चाल को और मजबूत किया।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश सरकार के अधिनियमों और उनकी नीतियों के प्रभावों को समझें।

 

Question 6. गाँधी दक्षिण अफ्रीका से भारत कब वापस लौटे ?
Answer: महात्मा गांधी सन् 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे। उनके लौटने के बाद भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ आया।
In simple words: गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के भारत लौटने की तारीख और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों को याद रखें।

 

Question 7. भारत में गाँधीजी ने कहाँ अपना आश्रम बनाया ?
Answer: भारत में गांधीजी ने अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे अपना आश्रम बनाया था। यह आश्रम उनके सत्याग्रह का केंद्र बना।
In simple words: गांधीजी ने अहमदाबाद में साबरमती नदी के पास अपना आश्रम बनाया था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के आश्रमों और उनके महत्व को जानें।

 

Question 8. किन्हीं तीन स्थानों के नाम बताइए जहाँ गाँधीजी ने सत्याग्रह किया था ?
Answer: गांधीजी ने भारत में जिन प्रमुख स्थानों पर सत्याग्रह आंदोलन किए, वे हैं:
1. चंपारण (बिहार)
2. खेड़ा (गुजरात)
3. अहमदाबाद (गुजरात)।
In simple words: गांधीजी ने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में सत्याग्रह किए थे।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के शुरुआती सत्याग्रहों के स्थान, कारण और परिणाम याद रखें।

 

Question 9. गाँधीजी द्वारा चंपारन एवं खेड़ा सत्याग्रह किन लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया था ?
Answer: गांधीजी द्वारा चंपारण एवं खेड़ा सत्याग्रह निर्धन किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए किया गया था। वे किसानों के शोषण के खिलाफ लड़ रहे थे।
In simple words: गांधीजी ने चंपारण और खेड़ा में गरीब किसानों की मदद के लिए आंदोलन किए थे।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के आंदोलनों के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ और उन्होंने किन वर्गों का समर्थन किया, इस पर ध्यान दें।

 

Question 10. महात्मा गाँधी ने मिल मजदूरों के हितों की रक्षा हेतु कहाँ सत्याग्रह किया था ?
Answer: महात्मा गांधी ने मिल मजदूरों के हितों की रक्षा हेतु अहमदाबाद में सत्याग्रह किया था। यह आंदोलन मजदूरों को उचित वेतन दिलाने के लिए था।
In simple words: गांधीजी ने अहमदाबाद में मिल मजदूरों के लिए सत्याग्रह किया था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के विभिन्न आंदोलनों के विशिष्ट उद्देश्यों और उनके स्थानों को याद रखें।

 

Question 12. रौलट एक्ट का क्या उद्देश्य था ?
Answer: रौलट एक्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीयों के नागरिक अधिकारों को सीमित करना था। इसके प्रमुख बिंदु थे:
1. भारतीयों को किसी भी बहाने से दो वर्ष तक बिना मुकदमा चलाए नजरबंद रखना।
2. भारतीयों के नागरिक अधिकारों को प्रतिबंधित करना।
3. स्वशासन के संघर्ष को दबाना ।
In simple words: रौलट एक्ट का मकसद भारतीयों को बिना मुकदमे के जेल में डालना, उनके हक छीनना और आजादी की लड़ाई को रोकना था।

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट के प्रावधानों और भारतीय जनता पर इसके प्रभावों को विस्तार से समझें।

 

Question 13. रौलट सत्याग्रह किसे कहा जाता है ?
Answer: 6 अप्रैल 1919 को पूरे देश में रौलट एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण हड़ताल हुई थी। इस देशव्यापी आंदोलन को ही रौलट सत्याग्रह कहा गया।
In simple words: 1919 में रौलट एक्ट के खिलाफ पूरे देश में हुई शांतिपूर्ण हड़ताल को रौलट सत्याग्रह कहते हैं।

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के स्वरूप और प्रभाव को समझें।

 

Question 14. जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड कब, कहाँ हुआ ?
Answer: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। यह भारतीय इतिहास की एक दुखद घटना थी।
In simple words: जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ था।

🎯 Exam Tip: जलियाँवाला बाग हत्याकांड की सही तारीख और स्थान को सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 15. जलियाँवाला बाग अमृतसर में निहत्थे लोगों पर बिना चेतावनी के ही अंधाधुंध गोलियाँ चलवाने वाला अंग्रेज गर्वनर कौन था ?
Answer: जलियाँवाला बाग अमृतसर में निहत्थे लोगों पर बिना चेतावनी के अंधाधुंध गोलियाँ चलवाने वाला अंग्रेज गवर्नर जनरल माइकल ओ- डायर था। उसने एक क्रूर आदेश दिया था।
In simple words: जलियाँवाला बाग में गोली चलाने का आदेश देने वाला अंग्रेज अधिकारी जनरल माइकल ओ- डायर था।

🎯 Exam Tip: जलियाँवाला बाग हत्याकांड से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों और उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 16. जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में किस भारतीय ने 'सर' की उपाधि को त्याग दिया था ?
Answer: जलियाँवाला बाग हत्याकांड के विरोध में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपनी 'सर' की उपाधि त्याग दी थी। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के इस क्रूर कृत्य का विरोध किया।
In simple words: जलियाँवाला बाग कांड के विरोध में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने अपनी 'सर' की उपाधि छोड़ दी थी।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण हस्तियों द्वारा उपाधियों के त्याग और उनके कारणों को याद रखें।

 

Question 17. ब्रिटिश सरकार ने जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जाँच हेतु किसकी अध्यक्षता में आयोग को गठन किया था ?
Answer: ब्रिटिश सरकार ने जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जाँच हेतु लॉर्ड हंटर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। इस आयोग को हंटर कमेटी के नाम से जाना जाता है।
In simple words: जलियाँवाला बाग हत्याकांड की जाँच के लिए ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड हंटर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी।

🎯 Exam Tip: ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित प्रमुख जाँच आयोगों और उनकी रिपोर्टों के बारे में जानकारी रखें।

 

Question 19. खिलाफत आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था ?
Answer: खिलाफत आंदोलन का मुख्य उद्देश्य खलीफा के पद को बनाए रखना था। यह लौकिक और आध्यात्मिक संस्था के रूप में खलीफा के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए चलाया गया था।
In simple words: खिलाफत आंदोलन का मुख्य उद्देश्य खलीफा के सम्मान और उनके पद को बचाना था।

🎯 Exam Tip: खिलाफत आंदोलन के कारणों और इसके मुख्य लक्ष्य को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 20. गाँधीजी ने खिलाफत आन्दोलन का समर्थन क्यों किया ?
Answer: गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर समझा। वे चाहते थे कि दोनों समुदाय मिलकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ें।
In simple words: गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता बढ़ाने के लिए खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी की नीतियों में हिंदू-मुस्लिम एकता के महत्व को दर्शाने वाले उदाहरणों को जानें।

 

Question 21. गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव कब और कहाँ रखा ?
Answer: गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव सितम्बर 1920 में कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में रखा था। इस प्रस्ताव को बाद में नागपुर अधिवेशन में स्वीकार किया गया।
In simple words: गांधीजी ने असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव सितंबर 1920 में कलकत्ता में कांग्रेस के एक अधिवेशन में रखा था।

🎯 Exam Tip: कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशनों की तिथियों, स्थानों और उनमें लिए गए प्रमुख निर्णयों को याद रखें।

 

Question 22. गाँधीजी के असहयोग आंदोलन प्रारम्भ करने के प्रस्ताव का किन-किन नेताओं ने विरोध किया ?
Answer: गांधीजी के असहयोग आंदोलन प्रारम्भ करने के प्रस्ताव का विपिन चन्द्र पाल, एनीबेसेंट, चितरंजन दास और लाला लाजपतराय जैसे नेताओं ने विरोध किया था। उन्हें आंदोलन की रणनीति पर आपत्ति थी।
In simple words: विपिन चन्द्र पाल, एनीबेसेंट, चितरंजन दास और लाला लाजपतराय ने गांधीजी के असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध किया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों के दौरान कांग्रेस के भीतर विभिन्न विचारों और विरोधों को भी समझें।

 

Question 23. गाँधीजी खिलाफत के अध्यक्ष कब चुने गए ?
Answer: गांधीजी नवंबर, 1919 में खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष चुने गए थे। उन्होंने इस मंच से हिंदू-मुस्लिम एकता का आह्वान किया।
In simple words: गांधीजी को नवंबर 1919 में खिलाफत आंदोलन का अध्यक्ष चुना गया था।

🎯 Exam Tip: खिलाफत आंदोलन में गांधीजी की भूमिका और संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखें।

 

Question 24. उस स्थान का नाम लिखिए, जहाँ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन दिसम्बर, 1920 में हुआ था ?
Answer: दिसम्बर 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता में हुआ था। इस अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के लक्ष्यों पर चर्चा हुई।
In simple words: दिसंबर 1920 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता में हुआ था।

🎯 Exam Tip: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशनों के स्थान और उनमें लिए गए निर्णयों को याद रखें।

 

Question 26. असहयोग आन्दोलन कब प्रारम्भ हुआ ?
Answer: असहयोग आंदोलन जनवरी 1921 में प्रारम्भ हुआ था। गांधीजी के नेतृत्व में यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन था।
In simple words: असहयोग आंदोलन जनवरी 1921 में शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन की शुरुआत की सटीक तिथि और उसके कारणों को जानें।

 

Question 27. असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम के दो पक्ष कौन – कौन से थे?
Answer: असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम के दो प्रमुख पक्ष थे:
1. नकारात्मक पक्ष
2. सकारात्मक पक्ष।
In simple words: असहयोग आंदोलन में दो तरह के काम थे- कुछ चीजों को मना करना (नकारात्मक) और कुछ अच्छी चीजों को करना (सकारात्मक)।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के दोनों पक्षों के तहत आने वाले विशिष्ट कार्यक्रमों को याद रखें।

 

Question 28. असहयोग आन्दोलन के नकारात्मक पक्ष का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
Answer: असहयोग आंदोलन के नकारात्मक पक्ष का प्रमुख उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ असहयोग करके सरकारी तंत्र को ठप्प करना था। इसका मतलब था सरकार के हर काम में बाधा डालना।
In simple words: असहयोग आंदोलन का नकारात्मक मकसद यह था कि ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करके उसके कामकाज को रोक दिया जाए।

🎯 Exam Tip: आंदोलन के विभिन्न पक्षों के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

 

Question 29. असहयोग आन्दोलन के नकारात्मक पक्ष के किन्हीं दो कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
Answer: असहयोग आंदोलन के नकारात्मक पक्ष के दो प्रमुख कार्यक्रम थे:
1. सरकारी पदों एवं उपाधियों का त्याग करना
2. चुनावों का बहिष्कार करना।
In simple words: असहयोग आंदोलन में लोगों को सरकारी नौकरी और सम्मान छोड़ने और चुनाव में हिस्सा न लेने को कहा गया था।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के नकारात्मक कार्यक्रमों के उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 30. असहयोग आन्दोलन के किन्हीं दो रचनात्मक कार्यक्रमों का नाम लिखिए?
Answer: असहयोग आंदोलन के दो रचनात्मक कार्यक्रम थे:
1. राष्ट्रीय स्कूलों एवं कॉलेजों की स्थापना
2. अस्पृश्यता का अंत।
In simple words: असहयोग आंदोलन में राष्ट्रीय स्कूल और कॉलेज बनाना और छुआछूत को खत्म करना जैसे अच्छे काम किए गए।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के सकारात्मक या रचनात्मक कार्यक्रमों के उदाहरणों को भी याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 32. कौन से राष्ट्रवादी आन्दोलन में जनता ने निर्भीकता के साथ भाग लिया था ?
Answer: असहयोग आंदोलन में जनता ने निर्भीकता के साथ भाग लिया था। इस आंदोलन ने लोगों में आत्मविश्वास पैदा किया।
In simple words: असहयोग आंदोलन में लोगों ने बिना डरे बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के आंदोलनों ने भारतीय जनता में साहस और आत्मविश्वास कैसे पैदा किया, इसे समझें।

 

Question 33. 17 नवम्बर, 1921 को बम्बई में 'प्रिंस ऑफ वेल्स' का स्वागत हड़ताल से क्यों किया गया था ?
Answer: 17 नवम्बर, 1921 को बम्बई में 'प्रिंस ऑफ वेल्स' का स्वागत हड़ताल से किया गया था। यह अली बंधुओं की गिरफ्तारी के प्रति विरोध प्रकट करने के लिए किया गया था।
In simple words: 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के मुंबई आने पर हड़ताल हुई थी, क्योंकि अली भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों के भारत आगमन पर हुए विरोधों के कारणों को जानें।

 

Question 34. सन् 1922 में महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन क्यों स्थगित कर दिया ?
Answer: महात्मा गांधी ने सन् 1922 में असहयोग आंदोलन चौरी-चौरा हत्याकांड के कारण स्थगित कर दिया था। इस घटना में हिंसा भड़क गई थी, जो गांधीजी के अहिंसक सिद्धांतों के खिलाफ थी।
In simple words: गांधीजी ने चौरी-चौरा की घटना में हिंसा होने के कारण 1922 में असहयोग आंदोलन रोक दिया था।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के निलंबन के कारणों और चौरी-चौरा घटना के महत्व को याद रखें।

 

Question 35. चौरी-चौरा हत्याकांड कब व कहाँ हुआ ?
Answer: चौरी-चौरा हत्याकांड 5 फरवरी, 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा ग्राम में हुआ था। यह एक हिंसक घटना थी।
In simple words: चौरी-चौरा हत्याकांड 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा गांव में हुआ था।

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा घटना की सही तारीख और स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 36. गाँधीजी के अहिंसा सिंद्धात का राष्ट्रवादी आन्दोलन में प्रयोग का एक आदर्श उदाहरण लिखिए ?
Answer: गांधीजी के अहिंसा सिद्धांत का राष्ट्रवादी आंदोलन में प्रयोग का एक आदर्श उदाहरण यह है कि उन्होंने चौरी-चौरा हत्याकांड के कारण असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिया। उन्होंने हिंसा को स्वीकार नहीं किया।
In simple words: चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन रोक दिया था, यह उनके अहिंसा के सिद्धांत का एक बड़ा उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के अहिंसा दर्शन के वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों को समझें।

 

Question 37. असहयोग आन्दोलन वापस लेने के पीछे गाँधीजी का क्या विचार था ?
Answer: असहयोग आंदोलन वापस लेने के पीछे गांधीजी का विचार था कि आंदोलन हिंसक होता जा रहा है। उन्हें लगा कि सत्याग्रहियों को अभी और अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है ताकि वे अहिंसक रूप से संघर्ष कर सकें।
In simple words: गांधीजी ने सोचा कि आंदोलन में हिंसा बढ़ रही है और लोगों को अभी अहिंसा का सही तरीका सीखने की जरूरत है, इसलिए उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के रणनीतिक निर्णयों के पीछे के कारणों को जानें।

 

Question 38. गाँधीजी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र का नाम लिखिए ?
Answer: गांधीजी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र का नाम 'यंग इंडिया' था। इस पत्र के माध्यम से वे अपने विचारों का प्रचार करते थे।
In simple words: गांधीजी एक साप्ताहिक अखबार निकालते थे जिसका नाम 'यंग इंडिया' था।

🎯 Exam Tip: गांधीजी और अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों के नाम याद रखें।

 

Question 40. असहयोग आन्दोलन से भारतीय लघु उद्योगों के विकास का मार्ग किस प्रकार प्रशस्त हुआ ?
Answer: असहयोग आंदोलन में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया। इसी कारण भारतीय लघु उद्योगों के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे स्थानीय उत्पादन बढ़ा।
In simple words: असहयोग आंदोलन में विदेशी चीजें छोड़ दी गईं और स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल बढ़ा, जिससे भारत के छोटे उद्योग आगे बढ़े।

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के आर्थिक प्रभावों और स्वदेशी आंदोलन के महत्व को समझें।

 

Question 41. 1928 की कलकत्ता कांग्रेस के अध्यक्ष कौन थे ?
Answer: 1928 की कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू थे। इस अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हुए थे।
In simple words: 1928 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष पंडित मोतीलाल नेहरू थे।

🎯 Exam Tip: कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशनों और उनके अध्यक्षों के नाम याद रखें।

 

Question 42. 1928 का कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन किस मुद्दे पर विभाजित था ?
Answer: 1928 का कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन स्वतंत्रता बनाम औपनिवेशिक स्वराज्य के प्रश्न पर विभाजित था। कुछ नेता तुरंत पूर्ण स्वतंत्रता चाहते थे, जबकि कुछ औपनिवेशिक स्वराज्य के पक्ष में थे।
In simple words: 1928 के कलकत्ता अधिवेशन में नेता इस बात पर बंटे हुए थे कि क्या तुरंत पूरी आजादी (स्वतंत्रता) चाहिए या ब्रिटिश राज के अंदर ही कुछ हद तक आजादी (औपनिवेशिक स्वराज्य) मिल जाए।

🎯 Exam Tip: कांग्रेस के भीतर विभिन्न वैचारिक मतभेदों और उनके कारणों को समझें।

 

Question 43. पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कांग्रेस के किस अधिवेशन में की गयी ?
Answer: पूर्ण स्वराज्य की घोषणा कांग्रेस के 1929 के लाहौर अधिवेशन में की गयी थी। इस अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
In simple words: कांग्रेस ने 1929 में लाहौर में हुए अधिवेशन में कहा था कि अब उन्हें पूरी आजादी (पूर्ण स्वराज्य) चाहिए।

🎯 Exam Tip: पूर्ण स्वराज्य की घोषणा से संबंधित अधिवेशन, वर्ष और अध्यक्ष को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 44. दिसम्बर 1929 में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव लाहौर में कांग्रेस ने किसकी अध्यक्षता में पारित किया?
Answer: दिसम्बर 1929 में पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव लाहौर में कांग्रेस ने पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पारित किया था। यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।
In simple words: 1929 में लाहौर में, कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में पूरी आजादी (पूर्ण स्वराज्य) का प्रस्ताव पास किया।

🎯 Exam Tip: कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के महत्व और उसके प्रमुख निर्णय को स्पष्ट रूप से जानें।

 

Question 45. दिसम्बर 1929 के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में क्या तय किया गया ?
Answer: दिसम्बर 1929 के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में औपनिवेशिक स्वराज्य के स्थान पर पूर्ण स्वराज्य की मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया था। यह तय किया गया कि भारत का लक्ष्य अब पूर्ण स्वतंत्रता है।
In simple words: 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में यह फैसला लिया गया कि अब भारत को पूरी तरह से आजाद होना है, न कि सिर्फ ब्रिटिश राज के अंदर कुछ आजादी।

🎯 Exam Tip: लाहौर अधिवेशन के प्रमुख निर्णय को उसके ऐतिहासिक संदर्भ में समझें।

 

Question 47. कांग्रेस के किस अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था ?
Answer: कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह निर्णय भारतीय जनता में राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए था।
In simple words: कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में तय किया था कि 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व और इसके चुनाव के कारणों को जानें।

 

Question 48. स्वतंत्र भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को क्यों लागू किया गया था ?
Answer: स्वतंत्र भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था क्योंकि 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इस दिन को हमेशा याद रखने के लिए, स्वतंत्र भारत में संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया।
In simple words: भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, क्योंकि 26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।

🎯 Exam Tip: भारतीय संविधान के लागू होने की तिथि और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझें।

 

Question 49. सविनय अवज्ञा आन्दोलन की रणनीति क्या थी ?
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन की रणनीति यह थी कि भारतीय सभी स्तरों पर सरकार की अवज्ञा करें। इसका उद्देश्य सरकार के संचालन को कठिन और असंभव बनाना था, जिससे ब्रिटिश शासन कमजोर पड़े।
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन की योजना थी कि लोग ब्रिटिश सरकार के हर नियम को मानें नहीं, ताकि सरकार काम न कर पाए।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन की मुख्य रणनीतियों और उनके प्रभावों को जानें।

 

Question 50. देश की एकजुटता के लिए गाँधीजी को कौन-सा शक्तिशाली प्रतीक दिखाई दिया ?
Answer: देश की एकजुटता के लिए गांधीजी को नमक एक शक्तिशाली प्रतीक दिखाई दिया था। नमक एक ऐसी चीज थी जिसका इस्तेमाल हर कोई करता था, चाहे वह अमीर हो या गरीब।
In simple words: गांधीजी को लगा कि नमक पूरे देश को एक साथ जोड़ सकता है।

🎯 Exam Tip: गांधीजी द्वारा चुने गए प्रतीकों और उनके सामाजिक महत्व को समझें।

 

Question 51. नमक कानून तोड़ने के लिए गाँधीजी ने कहाँ की यात्रा की थी ?
Answer: नमक कानून तोड़ने के लिए गांधीजी ने दांडी की यात्रा की थी। यह यात्रा साबरमती आश्रम से शुरू होकर दांडी तक गई थी।
In simple words: गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी की यात्रा की थी।

🎯 Exam Tip: दांडी मार्च के उद्देश्य, मार्ग और प्रभाव को याद रखें।

 

Question 52. गाँधीजी की दांडी यात्री कब व कहाँ से प्रारम्भ हुई ?
Answer: गांधीजी की दांडी यात्रा 11 मार्च, 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से प्रारम्भ हुई थी। इस यात्रा में हजारों लोगों ने भाग लिया था।
In simple words: गांधीजी की दांडी यात्रा 11 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम, अहमदाबाद से शुरू हुई थी।

🎯 Exam Tip: दांडी मार्च की सटीक तारीख और शुरुआती बिंदु को याद रखें।

 

Question 54. नमक कानून तोड़ते समय गाँधीजी ने क्या कहा था ?
Answer: नमक कानून तोड़ते समय गांधीजी ने कहा था कि, 'सत्याग्रहियों की तब तक पराजय नहीं होती, जब तक वे सत्य का परित्याग न कर दें।' यह बात उन्होंने सत्याग्रहियों का मनोबल बढ़ाने के लिए कही थी।
In simple words: नमक कानून तोड़ते समय गांधीजी ने कहा था कि सत्याग्रही तब तक नहीं हारते, जब तक वे सच का साथ नहीं छोड़ते।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के प्रेरक उद्धरणों और उनके ऐतिहासिक संदर्भ को याद रखें।

 

Question 55. सविनय अवज्ञा आन्दोलन कब प्रारम्भ हुआ ?
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन 12 मार्च, 1930 को दांडी यात्रा के समय गांधीजी ने प्रारम्भ किया था। यह आंदोलन नमक कानून तोड़ने के साथ शुरू हुआ।
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन 12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा के साथ शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की तिथि और उसके तात्कालिक कारण को याद रखें।

 

Question 56. गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का कार्यक्रम निर्धारित करते हुए क्या कहा था ?
Answer: गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का कार्यक्रम निर्धारित करते हुए कहा था कि गाँव-गाँव को नमक बनाने के लिए निकल पड़ना चाहिए। उन्होंने बहनों से शराब, अफीम और विदेशी कपड़े की दुकानों पर धरना देने को कहा था, और विदेशी वस्त्रों को जला देने का आह्वान किया था।
In simple words: गांधीजी ने कहा था कि लोग गांवों में खुद नमक बनाएं, औरतें शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरना दें, और विदेशी कपड़े जला दें।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रमों और उनके प्रतीकात्मक महत्व को समझें।

 

Question 57. प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन कब व कहाँ हुआ ?
Answer: प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन 12 नवम्बर, 1930 को लंदन में हुआ था। यह सम्मेलन भारतीय संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिए बुलाया गया था।
In simple words: पहला गोलमेज सम्मेलन 12 नवंबर 1930 को लंदन में हुआ था।

🎯 Exam Tip: गोलमेज सम्मेलनों की तिथियों, स्थानों और उनके उद्देश्यों को याद रखें।

 

Question 58. प्रथम गोलमेन सम्मेलन के समय ब्रिटेन का प्रधानमंत्री कौन था ?
Answer: प्रथम गोलमेज सम्मेलन के समय ब्रिटेन का प्रधानमंत्री रेम्जे मैकडोनाल्ड था। उसने भारतीय संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिए यह सम्मेलन आयोजित किया था।
In simple words: पहले गोलमेज सम्मेलन के दौरान रेम्जे मैकडोनाल्ड ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे।

🎯 Exam Tip: गोलमेज सम्मेलनों के समय ब्रिटिश प्रधानमंत्री का नाम याद रखें।

 

Question 59. महात्मा गाँधी का स्वदेशी और खादी का प्रचार करवाने के पीछे क्या उद्देश्य था ?
Answer: महात्मा गांधी का स्वदेशी और खादी का प्रचार करवाने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना था। वे चाहते थे कि भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो।
In simple words: गांधीजी स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देना चाहते थे ताकि भारत अपने दम पर खड़ा हो सके और दूसरों पर निर्भर न रहे।

🎯 Exam Tip: गांधीजी के आर्थिक विचारों और स्वदेशी आंदोलन के महत्व को समझें।

 

Question 60. गाँधी इरविन समझौता कब हुआ ? इस समझौते की मुख्य बात क्या थी ?
Answer: गांधी-इरविन समझौता 5 मार्च, 1931 को दिल्ली में हुआ था। इस समझौते की मुख्य बातें ये थीं कि हिंसात्मक अपराधों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाएगा, सत्याग्रहियों की जब्त संपत्ति लौटाई जाएगी, कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेगी और गांधीजी सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस ले लेंगे।
In simple words: गांधी-इरविन समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ था। इसमें तय हुआ था कि कैदियों को रिहा किया जाएगा और कांग्रेस दूसरे गोलमेज सम्मेलन में शामिल होगी।

🎯 Exam Tip: गांधी-इरविन समझौते की सटीक तिथि, स्थान और प्रमुख शर्तों को विस्तार से याद रखें।

 

Question 62. मेकडोनाल्ड के साम्प्रदायिक निर्णय में क्या प्रमुख प्रावधान किया गया था ?
Answer: मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक निर्णय में भारत की दलित जातियों के लिए पृथक् निर्वाचन का प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य दलितों को हिंदुओं से अलग करना था।
In simple words: मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक फैसले में दलित जातियों के लिए अलग चुनाव की व्यवस्था की गई थी।

🎯 Exam Tip: सांप्रदायिक पंचाट के प्रावधानों और भारतीय राजनीति पर इसके प्रभावों को समझें।

 

Question 63. कांग्रेस ने कौन-से गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया था ?
Answer: कांग्रेस ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया था। गांधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में इस सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
In simple words: कांग्रेस ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

🎯 Exam Tip: कांग्रेस की गोलमेज सम्मेलनों में भागीदारी और उसके कारणों को जानें।

 

Question 64. पूना समझौता कब व किसके मध्य हुआ ?
Answer: पूना समझौता 25 सितम्बर, 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के मध्य हुआ था। यह समझौता दलितों के लिए पृथक निर्वाचन सीटों को लेकर हुआ था।
In simple words: पूना समझौता 25 सितंबर 1932 को गांधीजी और अंबेडकर के बीच हुआ था।

🎯 Exam Tip: पूना समझौते की तिथि और प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं को याद रखें।

 

Question 65. कांग्रेस ने कब व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन प्रारम्भ किया था ?
Answer: कांग्रेस ने 17 अक्टूबर, 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन प्रारम्भ किया था। यह ब्रिटिश सरकार के युद्ध प्रयासों के खिलाफ एक सांकेतिक विरोध था।
In simple words: कांग्रेस ने 17 अक्टूबर 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की तिथि और उसके पीछे के कारणों को जानें।

 

Question 66. व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन के प्रथम सत्याग्रही कौन थे ?
Answer: व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे थे। उन्होंने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से विरोध किया था।
In simple words: विनोबा भावे व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने विरोध किया।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के प्रमुख सत्याग्रहियों के नाम याद रखें।

 

Question 67. गाँधीजी ने सामूहिक के स्थान पर व्यक्तिगत सत्याग्रह क्यों प्रारम्भ किया ?
Answer: सन् 1940 में गांधीजी ने सामूहिक के स्थान पर व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारम्भ किया क्योंकि वे ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारतीयों की भावना व्यक्त करना चाहते थे, किन्तु ब्रिटिश सरकार की संकट की स्थिति से अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहते थे।
In simple words: गांधीजी ने 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह इसलिए शुरू किया क्योंकि वे ब्रिटिश सरकार को गुस्सा नहीं दिलाना चाहते थे, लेकिन फिर भी अपनी बात रखना चाहते थे।

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत सत्याग्रह के रणनीतिक कारणों और गांधीजी के विचार प्रक्रिया को समझें।

 

Question 69. भारत छोड़ो आन्दोलन कब प्रारम्भ हुआ ?
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त, 1942 को प्रारम्भ हुआ था। यह गांधीजी द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण राष्ट्रव्यापी आंदोलन था।
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की सटीक तिथि और उसके महत्व को याद रखें।

 

Question 70. गाँधीजी के 'करो या मरो' नारे से क्या अभिप्राय था ?
Answer: गांधीजी के 'करो या मरो' नारे से अभिप्राय था कि भारतीयों द्वारा स्वतंत्रता के लिए हर संभव प्रयत्न किया जाना चाहिए किन्तु यह कार्यवाही हिंसात्मक न हो। यह नारा आजादी के लिए निर्णायक संघर्ष का आह्वान था।
In simple words: 'करो या मरो' का मतलब था कि आजादी के लिए सब कुछ करो, लेकिन हिंसा मत करो।

🎯 Exam Tip: 'करो या मरो' नारे के पीछे के अर्थ और इसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझें।

 

Question 71. भारत छोड़ो आन्दोलन में भारत के किन-किन दलों ने भाग नहीं लिया ?
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन में मुस्लिम लीग एवं भारतीय साम्यवादी दलों ने भाग नहीं लिया था। इन दलों के अपने अलग-अलग राजनीतिक उद्देश्य थे।
In simple words: मुस्लिम लीग और भारतीय साम्यवादी दल ने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया था।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन में भाग न लेने वाले प्रमुख राजनीतिक दलों के नाम और उनके कारणों को जानें।

 

Question 72. समाजवादी कांग्रेस के किन्हीं दो नेताओं का नाम लिखिए जिन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार का विरोध किया था? ।
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार का विरोध करने वाले समाजवादी कांग्रेस के दो प्रमुख नेता थे:
1. जयप्रकाश नारायण
2. राम मनोहर लोहिया।
In simple words: जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया ने भारत छोड़ो आंदोलन में ब्रिटिश सरकार का विरोध किया था।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं और उनके योगदानों को याद रखें।

 

Question 73. भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व बताइए।
Answer: यद्यपि भारत छोड़ो आंदोलन अपने तात्कालिक लक्ष्य में सफल नहीं हो सका परन्तु इसने भारत में ऐसी अभूतपूर्व जागृति उत्पन्न कर दी कि अब भारत पर लंबे समय तक ब्रिटिश शासन असंभव हो गया। इसने स्वतंत्रता की नींव रखी।
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन तुरंत सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने लोगों में इतनी जागरूकता जगाई कि ब्रिटिश शासन का भारत में टिके रहना नामुमकिन हो गया।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन के दीर्घकालिक महत्व और उसके परिणामों को समझें।

 

प्रश्न 2. रौलट सत्याग्रह से आप क्या समझते हैं? अथवा रौलट एक्ट के विरुद्ध भारतीय जनमानस की प्रतिक्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रिटिश सरकार ने रौलट एक्ट पास किया था, जिसके तहत किसी भी भारतीय को दो साल तक बिना मुकदमे के नजरबंद रखा जा सकता था. इसमें उनके नागरिक अधिकार सीमित कर दिए गए थे और स्वशासन के संघर्ष को रोकने की कोशिश की गई थी. इस कानून का पूरे देश में बहुत विरोध हुआ और इसे रौलट सत्याग्रह कहा गया. इस कानून को 'न अपील, न वकील, न दलील' वाला कानून भी कहा जाता था.
In simple words: रौलट एक्ट एक कठोर कानून था जो अंग्रेजों ने भारतीयों को बिना मुकदमे के कैद करने के लिए बनाया था. इसके विरोध में गांधीजी ने सत्याग्रह शुरू किया, जिसे रौलट सत्याग्रह कहते हैं.

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट के मुख्य प्रावधानों को याद रखें और गांधीजी के नेतृत्व में हुए इसके विरोध को 'रौलट सत्याग्रह' के रूप में पहचानें.

 

प्रश्न 3. खिलाफत की समस्या क्या थी ? महात्मा गाँधी ने खिलाफत आन्दोलन का समर्थन क्यों किया ?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की जर्मनी के साथ था और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहा था. भारतीय मुसलमानों को डर था कि युद्ध के बाद अंग्रेज तुर्की के खिलाफ कठोर कार्यवाही करेंगे और खलीफा (जो मुसलमानों का धार्मिक नेता था) का अपमान करेंगे. अंग्रेजों ने पहले आश्वासन दिया था कि वे तुर्की के साथ प्रतिशोध की नीति नहीं अपनाएंगे, लेकिन युद्ध के बाद उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए, जिससे भारतीय मुसलमान बहुत नाराज हुए और उन्होंने खिलाफत आंदोलन शुरू किया. इसका मकसद खलीफा के पद को बचाए रखना था.
महात्मा गांधी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि उन्हें यह हिंदू-मुस्लिम एकता बढ़ाने का एक बड़ा मौका लगा. उन्होंने सोचा कि इससे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन का आधार मजबूत होगा. इस आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को गति दी और हिंदू-मुस्लिमों में एकता स्थापित करने में मदद की.
In simple words: खिलाफत आंदोलन तुर्की के खलीफा के सम्मान को बचाने के लिए शुरू हुआ था क्योंकि अंग्रेजों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया था. गांधीजी ने इसका समर्थन किया ताकि हिंदू और मुसलमान एक होकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ सकें.

🎯 Exam Tip: खिलाफत आंदोलन को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू-मुस्लिम एकता के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में याद रखें.

 

प्रश्न 4. गाँधीजी ने स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग की नीति क्यों अपनायी ?
Answer: गांधीजी का मानना था कि भारत में ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से ही चल रहा है. उनका विचार था कि अगर भारतीय अपना सहयोग वापस ले लें, तो एक साल के भीतर ही ब्रिटिश शासन खत्म हो जाएगा और हमें स्वराज्य मिल जाएगा. उन्होंने असहयोग आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का सुझाव दिया.
गांधीजी ने लोगों से ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई उपाधियों और पदों को छोड़ने, सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों का बहिष्कार करने, तथा विदेशी सामान का बहिष्कार करने को कहा. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना, स्वदेशी चीजों का प्रचार, अपनी पंचायतों का गठन, चरखा और हथकरघा को बढ़ावा देने और अस्पृश्यता को खत्म करने पर जोर दिया, ताकि अंग्रेज हम पर निर्भर न रह पाएं.
In simple words: गांधीजी ने असहयोग आंदोलन की नीति इसलिए अपनाई क्योंकि उनका मानना था कि ब्रिटिश शासन हमारे सहयोग से ही चलता है. अगर हम सहयोग करना बंद कर दें, तो अंग्रेज भारत छोड़कर चले जाएंगे और हमें आजादी मिल जाएगी.

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के दो मुख्य पहलुओं – बहिष्कार (नकारात्मक) और रचनात्मक कार्य (सकारात्मक) – को समझें.

 

प्रश्न 5. असहयोग आन्दोलन के रचनात्मक पक्षों का उल्लेख कीजिए।
Answer: असहयोग आंदोलन के रचनात्मक पहलू इस आंदोलन को सफल बनाने और इसके परिणामों को स्थायी बनाने में बहुत मददगार साबित हुए. इनमें निम्नलिखित काम शामिल थे:
1. राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना करना, ताकि भारतीय बच्चे ब्रिटिश शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर न रहें.
2. आपसी विवादों को सुलझाने के लिए निजी पंचायतों का गठन करना, ताकि लोग सरकारी अदालतों पर निर्भर न रहें.
3. स्वदेशी चीजों का खूब प्रचार-प्रसार करना, ताकि लोग विदेशी सामान खरीदना बंद कर दें और देश के उद्योग बढ़ें.
4. अस्पृश्यता (छुआछूत) को खत्म करना, ताकि समाज में एकता बनी रहे.
5. चरखा और हथकरघा को बढ़ावा देना, जिससे लोगों को रोजगार मिले और हम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें.
In simple words: असहयोग आंदोलन में सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि देश को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय स्कूल खोले गए, आपसी झगड़े सुलझाने के लिए पंचायतें बनीं, स्वदेशी चीजों को बढ़ावा मिला और छुआछूत जैसी बुराइयों को खत्म करने की कोशिश की गई.

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यों को याद रखें, क्योंकि ये आंदोलन की दूरगामी सफलता और भारतीय समाज पर इसके सकारात्मक प्रभावों को दर्शाते हैं.

 

प्रश्न 6. गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन को वापिस लेने का फैसला क्यों किया ?
Answer: गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुई चौरी-चौरा कांड की घटना के कारण किया. 5 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा गांव में असहयोग आंदोलन के तहत एक जुलूस निकाला जा रहा था, जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की.
गुस्साई भीड़ ने पुलिसवालों को खदेड़कर थाने में आग लगा दी, जिससे 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई. इस हिंसक घटना से गांधीजी बहुत दुखी हुए, क्योंकि उनका आंदोलन अहिंसक सिद्धांतों पर आधारित था. हिंसा के प्रयोग के कारण, गांधीजी को लगा कि लोग अभी पूरी तरह से अहिंसक तरीके से संघर्ष के लिए तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्होंने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया.
In simple words: गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को चौरी-चौरा कांड के बाद वापस ले लिया क्योंकि इस घटना में हिंसा भड़क गई थी, जो उनके अहिंसक आंदोलन के सिद्धांतों के खिलाफ था.

🎯 Exam Tip: चौरी-चौरा कांड की तारीख और स्थान को याद रखें, और यह भी कि इस घटना ने गांधीजी को असहयोग आंदोलन वापस लेने के लिए कैसे मजबूर किया.

 

प्रश्न 7. असहयोग आन्दोलन को अचानक स्थगित किए जाने पर विभिन्न नेताओं की क्या प्रतिक्रिया रही ?
Answer: चौरी-चौरा कांड के कारण गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक बंद करने से कांग्रेस के कई नेता बहुत नाराज हुए. उन्होंने इसे राष्ट्रीय अपमान माना और इसका विरोध किया.
पं. मोतीलाल नेहरू और लाला लाजपत राय ने जेल से गांधीजी को चिट्ठी लिखकर कहा कि "एक जगह के पाप के लिए पूरे देश को सजा देना गलत है." सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि "जिस समय जनता का उत्साह अपने चरम पर था, उस समय आंदोलन वापस लेना एक राष्ट्रीय अनर्थ से कम नहीं था." चितरंजन दास, सी. राजगोपालाचारी, जवाहरलाल नेहरू और अली बंधुओं ने भी गांधीजी के इस फैसले की आलोचना की.
In simple words: असहयोग आंदोलन अचानक बंद होने पर कई नेता नाराज हुए, क्योंकि उन्हें लगा कि यह देश के लिए एक बड़ा नुकसान था और आंदोलन को गलत समय पर रोका गया.

🎯 Exam Tip: आंदोलन को अचानक रोकने पर प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाओं को याद रखें, खासकर मोतीलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस के बयानों को.

 

प्रश्न 8. असहयोग आन्दोलन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: असहयोग आंदोलन का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुत महत्व था. इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. **जनता में चेतना और निडरता:** इस आंदोलन ने लोगों में आजादी के लिए लड़ने की भावना भरी और उन्हें निडर बनाया. जनता ब्रिटिश सरकार की सजाओं और यातनाओं का सामना करने के लिए तैयार हो गई थी.
2. **राष्ट्रीय आंदोलन का जन आंदोलन में बदलना:** गांधीजी ने असहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन को कुछ पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित न रखकर गाँव-गाँव तक फैला दिया, जिससे यह एक जन आंदोलन बन गया.
3. **रचनात्मक कार्यक्रमों से देश को लाभ:** आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान चलाए गए, हथकरघा को बढ़ावा मिला, और स्वदेशी का उपयोग बढ़ा, जिससे देश को विशेष लाभ मिला.
In simple words: असहयोग आंदोलन ने लोगों में आजादी के लिए जागरूकता और हिम्मत बढ़ाई. यह आंदोलन सिर्फ शहरों तक सीमित न रहकर पूरे देश में फैल गया और इसने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई अच्छे काम भी किए.

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के तीन मुख्य महत्व - जन जागृति, जन आंदोलन बनना, और रचनात्मक लाभ - को याद रखें.

 

प्रश्न 10. गाँधीजी की नमक यात्रा को स्पष्ट कीजिए ?
Answer: गांधीजी ने नमक कानून को खत्म करने की मांग की थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने नहीं माना. इसके बाद गांधीजी ने 12 मार्च, 1930 को अपने 78 भरोसेमंद साथियों के साथ दांडी यात्रा शुरू की. यह यात्रा साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय शहर दांडी तक 200 मील लंबी थी.
6 अप्रैल, 1930 को गांधीजी दांडी पहुंचे और समुद्री पानी उबालकर नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा. नमक कानून तोड़ते समय गांधीजी ने कहा था कि "सत्याग्रहियों की हार तब तक नहीं होती, जब तक वे सच का साथ नहीं छोड़ते." इसके बाद भारत में कई जगहों पर लोगों ने नमक बनाना शुरू कर दिया, जिससे यह आंदोलन और तेज हो गया.
In simple words: गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए साबरमती से दांडी तक लंबी पैदल यात्रा की. उन्होंने समुद्री पानी से नमक बनाकर अंग्रेजों के बनाए कानून का विरोध किया, जिससे पूरे देश में यह आंदोलन फैल गया.

🎯 Exam Tip: दांडी यात्रा की तारीख (12 मार्च, 1930) और स्थान (साबरमती से दांडी) को याद रखें, और यह भी कि गांधीजी ने क्यों नमक कानून को चुना.

 

प्रश्न 11. सविनय अवज्ञा आन्दोलन की कार्य योजना को बताइए?
Answer: गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनाई, जिसमें निम्नलिखित बातें शामिल थीं:
1. **नमक कानून तोड़ना:** गाँव-गाँव में लोग नमक बनाकर नमक कानून तोड़ेंगे.
2. **विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार:** विदेशी सामानों का बहिष्कार किया जाएगा और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाया जाएगा.
3. **शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरना:** महिलाएं शराब की दुकानों और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगी.
4. **सरकार का असहयोग:** अंग्रेजों को किसी भी तरह का सहयोग नहीं दिया जाएगा.
5. **सरकारी कर्मचारियों द्वारा त्यागपत्र:** सरकारी नौकरी करने वाले लोग अपनी नौकरियों से इस्तीफा देंगे.
6. **सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार:** आम जनता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में नहीं भेजेगी.
7. **चरखा और सूत कातना:** हर घर में चरखा चलाकर सूत बनाया जाएगा.
गांधीजी द्वारा नमक बनाने के बाद यह आंदोलन पूरे जोश के साथ आगे बढ़ा.
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन की योजना में नमक कानून तोड़ना, विदेशी सामान का बहिष्कार करना, शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरना देना, और सरकार का असहयोग करना शामिल था, ताकि अंग्रेजों को झुकाया जा सके.

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन के मुख्य कार्यक्रमों को याद रखें, खासकर नमक कानून तोड़ने और बहिष्कार से जुड़े बिंदुओं को.

 

प्रश्न 13. गाँधी-इरविन समझौते के प्रमुख प्रावधान क्या थे? अथवा दिल्ली समझौता स्पष्ट कीजिए।
Answer: पहले गोलमेज सम्मेलन के असफल होने के बाद, वायसराय लॉर्ड इरविन ने गांधीजी को 19 फरवरी, 1931 को बातचीत के लिए बुलाया. 5 मार्च, 1931 को गांधीजी और इरविन के बीच एक समझौता हुआ, जिसे 'दिल्ली समझौता' भी कहते हैं. इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार थे:
1. उन सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाएगा जिन पर हिंसा के अपराध का आरोप नहीं था.
2. सत्याग्रहियों की जब्त की गई संपत्ति वापस कर दी जाएगी.
3. कांग्रेस दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेगी.
4. महात्मा गांधी सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस ले लेंगे.
5. समुद्र तट से एक निश्चित दूरी पर रहने वाले लोगों को बिना टैक्स दिए नमक इकट्ठा करने का अधिकार होगा.
6. विदेशी कपड़े और शराब की दुकानों पर शांतिपूर्ण धरना देने की अनुमति होगी.
In simple words: गांधी-इरविन समझौता, जिसे दिल्ली समझौता भी कहते हैं, गांधीजी और वायसराय इरविन के बीच हुआ था. इसमें राजनीतिक कैदियों की रिहाई, जब्त संपत्ति की वापसी, और कांग्रेस द्वारा गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने जैसे मुद्दे तय हुए थे, जिसके बदले में गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को रोक दिया.

🎯 Exam Tip: गांधी-इरविन समझौते की तारीख (5 मार्च, 1931) और इसके मुख्य प्रावधानों को याद रखें, क्योंकि यह सविनय अवज्ञा आंदोलन को रोकने का कारण बना.

 

प्रश्न 14. अंग्रेज सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद द्वितीय गोलमेज सम्मेलन सफल क्यों नहीं हो सका ?
Answer: पहला गोलमेज सम्मेलन असफल होने के बाद, अंग्रेजों ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन को सफल बनाने के लिए खूब कोशिशें कीं. उन्होंने गांधीजी को रिहा किया और गांधी-इरविन समझौते के तहत गांधीजी ने सम्मेलन में भाग लेना मान लिया. यह सम्मेलन 7 सितंबर, 1931 को लंदन में हुआ, जिसमें गांधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया.
लेकिन यह सम्मेलन सफल नहीं हो सका क्योंकि इसमें कई गुटों के बीच गहरे मतभेद थे:
1. गांधीजी ने भारत का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया, लेकिन मुस्लिम लीग के जिन्ना और डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इसे चुनौती दी.
2. मुस्लिम लीग के जिन्ना ने मुस्लिम अल्पसंख्यकों के हितों का काम करने का दावा किया और सांप्रदायिक चुनाव की मांग की.
3. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने निचली जातियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया.
इन सभी विरोधों के कारण और सांप्रदायिक मुद्दे पर कोई सहमति न बन पाने के कारण, सम्मेलन में कोई खास फैसला नहीं लिया जा सका.
In simple words: दूसरा गोलमेज सम्मेलन सफल नहीं हुआ क्योंकि गांधीजी, मुस्लिम लीग और डॉ. अंबेडकर जैसे नेताओं के बीच भारत के प्रतिनिधित्व और सांप्रदायिक मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन पाई, जिससे कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका.

🎯 Exam Tip: दूसरे गोलमेज सम्मेलन की असफलता के मुख्य कारणों को याद रखें, विशेष रूप से सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और विभिन्न गुटों के बीच मतभेदों को.

 

प्रश्न 15. मैकडोनाल्ड के साम्प्रदायिक निर्णय एवं पूना समझौता को स्पष्ट कीजिए। अथवा साम्प्रदायिकता व पूना समझौता का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
Answer: **मैकडोनाल्ड का सांप्रदायिक निर्णय (सांप्रदायिक पंचाट):** ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने 16 अगस्त, 1932 को भारत के दलित वर्गों के लिए अलग चुनाव पद्धति की घोषणा की. पहले यह सिर्फ मुसलमानों और सिखों पर लागू थी, लेकिन अब दलितों पर भी इसे लागू किया गया. यह हिंदुओं को बांटने की अंग्रेजों की चाल थी.
**पूना समझौता:** गांधीजी ने दलित वर्ग को अलग चुनाव मंडल दिए जाने का विरोध किया और 20 सितंबर, 1932 को यरवदा जेल (पूना) में आमरण अनशन शुरू कर दिया, जिससे पूरे देश में हलचल मच गई. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलितों के लिए अलग चुनाव मंडल की मांग की थी. मदनमोहन मालवीय, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पुरुषोत्तम दास, सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं ने अंबेडकर से मिलकर दलितों के लिए अलग चुनाव मंडल की मांग न छोड़ने पर जोर दिया. यह अंग्रेजों की 'बांटो और राज करो' नीति का हिस्सा था. 26 सितंबर, 1932 को अंबेडकर दलितों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र की मांग पर सहमत हो गए और गांधीजी के साथ समझौता हुआ. ब्रिटिश सरकार ने इसे मान लिया.
In simple words: मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक निर्णय ने दलितों के लिए अलग चुनाव की व्यवस्था की थी, जिससे गांधीजी नाराज हो गए. इसके बाद गांधीजी और अंबेडकर के बीच पूना समझौता हुआ, जिसमें दलितों के लिए अलग चुनाव की मांग छोड़ दी गई और उन्हें आरक्षित सीटें मिलीं.

🎯 Exam Tip: मैकडोनाल्ड के सांप्रदायिक निर्णय और पूना समझौते की तारीखें और प्रमुख प्रावधानों को याद रखें, खासकर दलितों के लिए अलग चुनाव मंडल के मुद्दे पर.

 

प्रश्न 16. व्यक्तिगत सत्याग्रह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: सन् 1940 में गांधीजी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतीयों की भावना दिखाना चाहते थे, लेकिन वे द्वितीय विश्व युद्ध के संकट का अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने 17 अक्टूबर, 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू किया. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक नैतिक विरोध था. यह आंदोलन पवनार (वर्धा के पास) से शुरू हुआ, और विनोबा भावे पहले सत्याग्रही बने. जवाहरलाल नेहरू ने उनका अनुसरण किया.
यह व्यक्तिगत सत्याग्रह पूरे देश में फैल गया. ब्रिटिश सरकार ने लगभग 30,000 व्यक्तिगत सत्याग्रहियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया. इनमें विनोबा भावे, जवाहरलाल नेहरू, राजगोपालाचारी, अरुणा आसफ अली और सरोजिनी नायडू जैसे प्रमुख नेता शामिल थे. द्वितीय विश्व युद्ध के कारण, अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने पर ब्रिटिश सरकार ने व्यक्तिगत सत्याग्रहियों को जेल से रिहा कर दिया. बाद में कांग्रेस कार्यसमिति ने युद्ध के संकट को देखते हुए व्यक्तिगत सत्याग्रह को रोक दिया.
In simple words: व्यक्तिगत सत्याग्रह 1940 में गांधीजी द्वारा शुरू किया गया एक प्रतीकात्मक विरोध था, ताकि सरकार को बिना बड़े पैमाने की हिंसा के भारतीय भावनाओं से अवगत कराया जा सके. विनोबा भावे इसके पहले सत्याग्रही थे.

🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत सत्याग्रह की तारीख (17 अक्टूबर, 1940) और पहले सत्याग्रही (विनोबा भावे) को याद रखें, साथ ही इसके प्रतीकात्मक महत्व को भी समझें.

 

प्रश्न 17. भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक बहुत महत्वपूर्ण कदम था, जिसने कई बड़े प्रभाव डाले:
1. **जन-जागृति:** इस आंदोलन ने लोगों में ऐसी गहरी जागरूकता पैदा की कि अंग्रेजों के लिए भारत पर लंबे समय तक शासन करना असंभव हो गया. इसने देश के कई हिस्सों में ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी.
2. **स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि:** इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता के लिए रास्ता तैयार किया. ब्रिटिश सरकार को यह साफ हो गया कि वे अब ज्यादा समय तक भारत पर राज नहीं कर पाएंगे.
3. **समझौता वार्ताओं की शुरुआत:** इस आंदोलन और इससे पैदा हुई जागरूकता के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने भारत की समस्या हल करने के लिए भारतीयों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की.
4. **विश्व जनमत पर प्रभाव:** द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अमेरिका और इंग्लैंड में भी जनता भारतीयों के पक्ष में आ गई. आखिरकार, ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ना ही पड़ा.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन ने भारतीयों में आजादी की एक नई लहर पैदा की, अंग्रेजों को एहसास कराया कि उनका राज खत्म होने वाला है, और दुनिया भर से भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाया.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन के महत्व को याद रखें, विशेष रूप से इसके द्वारा उत्पन्न जन-जागृति और ब्रिटिश शासन पर पड़े प्रभावों पर ध्यान दें.

 

प्रश्न 18. भारत छोड़ो आन्दोलन की प्रमुख कमियों का उल्लेख कीजिए। अथवा भारत छोड़ो आन्दोलन अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सका। क्यों ?
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन की कुछ प्रमुख कमियां थीं, जिनके कारण यह अपने तुरंत लक्ष्य को पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाया:
1. **व्यापक तैयारियों की कमी:** इस आंदोलन के लिए कोई व्यवस्थित योजना नहीं थी. गांधीजी का मानना था कि जनता के आंदोलन की चेतावनी से सरकार तुरंत समझौता कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जनता हतप्रभ रह गई और आंदोलन नेतृत्वहीन हो गया.
2. **प्रशासन का सहयोग:** देशी रियासतों के राजा, सेना, पुलिस, उच्च अधिकारी और कर्मचारी सभी ने आंदोलन के दौरान सरकार के प्रति वफादारी निभाई. इससे सरकार का काम आराम से चलता रहा और उस पर पर्याप्त दबाव नहीं बन पाया.
3. **संसाधनों का अभाव:** आंदोलनकारियों के पास गुप्तचर व्यवस्था या संचार के साधन नहीं थे. उनके पास जो शक्ति और साधन थे, वे सरकार की तुलना में बहुत कम थे, जिससे आंदोलन अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सका.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन में योजना की कमी थी, नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, और सरकारी अधिकारी अंग्रेजों के प्रति वफादार रहे. इन सब कारणों से यह आंदोलन तुरंत सफल नहीं हो पाया.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की कमियों को याद रखें, जैसे कि योजना का अभाव और सरकारी तंत्र का असहयोग, जो इसकी तत्काल सफलता में बाधा बने.

 

प्रश्न 19. 'मुस्लिम लीग' भारतीय साम्यवादी एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारत छोड़ो आन्दोलन से अलग क्यों रहे ? बताइए।
Answer: मुस्लिम लीग, भारतीय साम्यवादी और डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत छोड़ो आंदोलन से अलग रहे, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
1. **मुस्लिम लीग:** मुस्लिम लीग इस आंदोलन से पूरी तरह अलग रही क्योंकि उसका मानना था कि इस आंदोलन का लक्ष्य भारत में हिंदू साम्राज्य स्थापित करना था, जो मुसलमानों के लिए हानिकारक होता. वे मुसलमानों के लिए एक अलग देश, पाकिस्तान चाहते थे.
2. **भारतीय साम्यवादी:** भारतीय साम्यवादियों ने मुस्लिम लीग का समर्थन किया और अंग्रेजों के युद्ध प्रयासों का साथ दिया, जिसे उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए एक गलत नीति माना.
3. **डॉ. भीमराव अंबेडकर:** डॉ. अंबेडकर का मानना था कि आंदोलन के बजाय दलितों के अधिकारों के लिए राजनीतिक समाधान ढूंढना ज्यादा जरूरी है. वह दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की मांग कर रहे थे, जिसे उन्होंने आंदोलन में शामिल होने से अधिक महत्वपूर्ण समझा.
In simple words: मुस्लिम लीग अलग थी क्योंकि उन्हें लगा कि आंदोलन हिंदू राज लाएगा. भारतीय साम्यवादी भी अलग थे और अंग्रेजों का समर्थन कर रहे थे. डॉ. अंबेडकर दलित अधिकारों के लिए अलग रास्ता चाहते थे, इसलिए वे भी शामिल नहीं हुए.

🎯 Exam Tip: विभिन्न राजनीतिक गुटों (मुस्लिम लीग, साम्यवादी, अंबेडकर) के भारत छोड़ो आंदोलन से अलग रहने के कारणों को याद रखें, खासकर उनके अलग-अलग हितों और प्राथमिकताओं के संदर्भ में.

 

प्रश्न 21. गाँधी 'सहयोगी' से 'असहयोगी' क्यों बन गये?
Answer: शुरुआत में गांधीजी ब्रिटिश सरकार के पूरे सहयोगी थे. उन्हें ब्रिटिश नागरिकता, उनकी उदारता और न्यायप्रियता पर पूरा भरोसा था. इसी भरोसे के कारण गांधीजी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों से ब्रिटिश सरकार की तन, मन और धन से सहायता करने की अपील की थी.
लेकिन युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार के विश्वासघात, उसकी दमनकारी नीतियों और भारतीय भावनाओं के प्रति उसकी उदासीनता ने गांधीजी को बदल दिया. रौलट विधेयक, जलियांवाला बाग हत्याकांड, पंजाब में माइकल ओ. डायर की दमनकारी नीति, मार्शल लॉ और हंटर कमेटी की पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट जैसी घटनाओं ने उन्हें असहयोगी बना दिया. इसके अलावा खिलाफत के मुद्दे पर ब्रिटिश सरकार के धोखेबाजी भरे कदमों ने भी गांधीजी को सहयोगी से असहयोगी बनने पर मजबूर किया.
In simple words: गांधीजी पहले ब्रिटिश सरकार के सहयोगी थे, लेकिन रौलट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत के मुद्दे पर अंग्रेजों के धोखेबाजी और दमनकारी नीतियों के कारण वे असहयोगी बन गए.

🎯 Exam Tip: गांधीजी के सहयोगी से असहयोगी बनने के पीछे के प्रमुख कारणों को याद रखें, जैसे रौलट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत आंदोलन.

 

प्रश्न 22. असहयोग आन्दोलन के अन्तर्गत रचनात्मक कार्यक्रम का महत्व स्पष्ट कीजिए?
Answer: असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण थे क्योंकि इन्होंने आंदोलन के परिणामों को स्थायी बनाया. इसके महत्व को इस प्रकार समझा जा सकता है:
1. इन रचनात्मक कार्यक्रमों ने आंदोलन को केवल विरोध तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाए.
2. राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना की गई. आपसी विवादों को सुलझाने के लिए निजी पंचायतों का गठन किया गया, और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का प्रयास किया गया. राष्ट्रीय हित के अनुकूल शिक्षा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान भी बनाए गए.
3. स्वदेशी चीजों, चरखा और हथकरघा को बढ़ावा देकर गरीबी और बेरोजगारी से लड़ने की कोशिश की गई. इससे भारत की अर्थव्यवस्था को विदेशी गुलामी से मुक्त करने में मदद मिली.
In simple words: असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यों ने आंदोलन को मजबूत बनाया. इससे राष्ट्रीय स्कूल बने, आपसी विवाद सुलझाने के लिए पंचायतें बनीं, और गरीबी-बेरोजगारी से लड़ने के लिए स्वदेशी और चरखे को बढ़ावा मिला.

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों के महत्व को याद रखें, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा, सामाजिक सुधार और आर्थिक आत्मनिर्भरता में उनके योगदान को.

 

प्रश्न 24. महात्मा गाँधी ने 'भारत छोड़ो आन्दोलन' क्यों आरंभ किया?
Answer: महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन निम्नलिखित कारणों से शुरू किया:
1. **क्रिप्स मिशन की असफलता:** भारतीय जनता को विश्वास हो गया था कि क्रिप्स मिशन भारत भेजने का ब्रिटिश सरकार का सिर्फ एक राजनीतिक खेल था. इसकी असफलता ने भारत में निराशा का माहौल पैदा कर दिया और भारत-ब्रिटिश संबंधों पर बुरा असर पड़ा.
2. **आर्थिक कठिनाइयाँ:** द्वितीय विश्व युद्ध के बुरे प्रभावों के कारण देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी, जिससे जनता में असंतोष था.
3. **विस्थापित भारतीयों से बुरा व्यवहार:** बर्मा पर जापान की जीत के बाद, जो भारतीय वहां से विस्थापित होकर भारत आ रहे थे, उनके साथ ब्रिटिश सरकार अपमानजनक व्यवहार कर रही थी.
4. **ब्रिटिशों पर अविश्वास:** भारतीयों को ब्रिटिशों पर विश्वास नहीं रहा था, क्योंकि जापान सिंगापुर, मलाया और बर्मा तक अंग्रेजों को हरा चुका था. पूरे देश में जापान के हमले का डर था. इस डर को कम करने, निराशा दूर करने और जनता में उत्साह भरने के लिए आंदोलन जरूरी था.
5. **पूर्वी बंगाल में भय और आतंक:** पूर्वी बंगाल में डर और आतंक का माहौल था, जहां ब्रिटिश सरकार ने कई किसानों की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया था.
In simple words: गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन इसलिए शुरू किया क्योंकि क्रिप्स मिशन फेल हो गया था, देश की आर्थिक हालत खराब थी, विस्थापित भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा था, और अंग्रेजों पर से लोगों का भरोसा उठ गया था.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने के पीछे के प्रमुख कारणों को याद रखें, विशेष रूप से क्रिप्स मिशन की असफलता और द्वितीय विश्व युद्ध के प्रभावों को.

 

प्रश्न 2. रॉलेट एक्ट क्या था ? गाँधीजी द्वारा रॉलेट एक्ट का विरोध एवं ब्रिटिश सरकार की दमनकारी. नीति का वर्णन कीजिए ?
Answer: **रौलट एक्ट:** ब्रिटिश सरकार ने मार्च 1919 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में भारतीय सदस्यों के भारी विरोध के बावजूद रौलट एक्ट पास किया. इस कानून के तहत, ब्रिटिश सरकार राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने और राजनीतिक कैदियों को दो साल तक बिना मुकदमे के जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया था.
**गांधीजी का विरोध और ब्रिटिश दमनकारी नीति:** इस कानून का पूरे देश में भारी विरोध हुआ और इसे 'रौलट सत्याग्रह' के नाम से जाना गया. इस देशव्यापी हड़ताल में हिंदू, मुसलमान और सिखों के बीच एकता देखी गई, जिससे ब्रिटिश सरकार चिंतित हो गई.
गांधीजी के आह्वान पर रौलट एक्ट के विरोध में लोगों द्वारा किए गए आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कठोर दमनकारी नीति अपनाई. अमृतसर में कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और गांधीजी के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई. 10 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में रौलट एक्ट के विरोध में एक शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने गोलियां चलाईं. इससे उत्तेजित होकर लोगों ने बैंकों, डाकखानों और रेलवे स्टेशनों पर हमला किया. इस स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने अमृतसर में मार्शल लॉ लगा दिया और जनरल डायर ने सेना का नेतृत्व संभाला.
13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग में बैसाखी मेले के दौरान रौलट एक्ट का शांतिपूर्ण विरोध करने के लिए एक सभा हुई. जनरल डायर के आदेश पर सैनिकों ने निहत्थी भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें हजारों लोग मारे गए और घायल हुए. इस घटना के बाद ब्रिटिश सेना ने पंजाब के 5 शहरों में सैनिक शासन लगा दिया, और आम जनता को कोड़े मारना, किसानों पर गोली चलाना, और बिजली-पानी बंद करना जैसी बर्बरता की गई. इन घटनाओं ने भारतीयों के मन में अंग्रेजों के प्रति भारी असंतोष पैदा किया.
In simple words: रौलट एक्ट अंग्रेजों का एक कठोर कानून था जिससे वे भारतीयों को बिना मुकदमे के जेल में डाल सकते थे. गांधीजी ने इसका विरोध किया, जिसके जवाब में ब्रिटिश सरकार ने जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी दमनकारी नीतियां अपनाईं.

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट के प्रावधानों और गांधीजी के विरोध की रणनीति को याद रखें, साथ ही ब्रिटिश सरकार की दमनकारी प्रतिक्रियाओं, विशेषकर जलियांवाला बाग हत्याकांड को भी समझें.

 

प्रश्न 3. सविनय अवज्ञा आन्दोलन किन परिस्थितियों में चलाया गया ? अथवा नमक आन्दोलन प्रारम्भ होने के पीछे कौन-कौन सी परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं ?
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक आंदोलन निम्नलिखित परिस्थितियों के कारण शुरू किए गए थे:
1. **साइमन कमीशन की असफलता:** ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रवादी गतिविधियों को देखते हुए सर जॉन साइमन के नेतृत्व में एक आयोग बनाया था, जिसका काम भारत में संवैधानिक सुधारों पर सुझाव देना था. लेकिन इस आयोग में कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था, इसलिए 1928 में जब यह भारत आया, तो "साइमन कमीशन वापस जाओ" के नारों के साथ इसका विरोध किया गया. यह कमीशन भारतीयों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा.
2. **गांधीजी की ग्यारह मांगें:** 31 जनवरी, 1930 को गांधीजी ने भारतीयों के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने के लिए वायसराय लॉर्ड इरविन को ग्यारह मांगें भेजीं, जिनमें नमक पर लगे कर को खत्म करना एक मुख्य मांग थी. यह पत्र एक चेतावनी की तरह था.
वायसराय इरविन ने गांधीजी की शर्तें मानने से मना कर दिया, जिससे कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का फैसला किया. गांधीजी ने अपने 78 साथियों के साथ 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक नमक यात्रा शुरू की और समुद्री पानी उबालकर नमक बनाकर कानून तोड़ा.
3. **आर्थिक कारण:** 1929 की आर्थिक महामंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर कृषि पर बुरा असर पड़ा था. कृषि उत्पादों की कीमतें बहुत गिर गई थीं और औपनिवेशिक सरकार ने लगान बढ़ा दिया था, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचकर लगान चुकाना मुश्किल हो गया. व्यापारी वर्ग भी औपनिवेशिक सरकार के व्यापार नियमों से परेशान था. इन सभी कारणों ने आंदोलन का रास्ता साफ किया.
In simple words: साइमन कमीशन की असफलता, गांधीजी की ग्यारह मांगों को न मानना, और 1929 की आर्थिक मंदी जैसी स्थितियों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक आंदोलन को शुरू करने के लिए माहौल तैयार किया.

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू होने के पीछे के प्रमुख कारणों को याद रखें, खासकर साइमन कमीशन, गांधीजी की 11 मांगें और आर्थिक मंदी को.

 

प्रश्न 4. भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के क्या कारण थे ? इस आन्दोलन के महत्त्व को भी स्पष्ट कीजिए।
Answer: **भारत छोड़ो आंदोलन की असफलता के कारण:**
1. **सुसंगठित योजना का अभाव:** इस आंदोलन के पीछे कोई व्यवस्थित योजना नहीं थी. गांधीजी को उम्मीद थी कि सरकार चेतावनी पर समझौता कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जनता हतप्रभ रह गई और आंदोलन बिना नेतृत्व के हो गया.
2. **भारतीयों द्वारा पूर्ण सहयोग का अभाव:** देशी रियासतों के राजा, सेना, पुलिस और उच्च सरकारी अधिकारियों ने आंदोलन के दौरान सरकार के प्रति वफादारी निभाई. इससे ब्रिटिश शासन बिना रुकावट चलता रहा.
3. **सरकार की दमनकारी नीति:** आंदोलनकारियों की तुलना में सरकार की शक्ति कहीं अधिक थी. सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए दमनचक्र का सहारा लिया और इसमें सफल रही.
**भारत छोड़ो आंदोलन का महत्व:**
1. **जन-जागृति:** इस आंदोलन ने भारतीयों में ऐसी गहरी जागरूकता पैदा की कि अंग्रेजों के लिए भारत पर लंबे समय तक शासन करना असंभव हो गया. इसने देश के कई हिस्सों में ब्रिटिश शासन को हिला दिया.
2. **स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि:** इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता के लिए रास्ता तैयार किया. ब्रिटिश शासन को यह साफ हो गया कि वे अब ज्यादा समय तक भारत पर राज नहीं कर पाएंगे.
3. **समझौता वार्ताओं की शुरुआत:** इस आंदोलन और इससे पैदा हुई चेतना के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने भारत की समस्या हल करने के लिए भारतीयों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की.
4. **विश्व जनमत पर प्रभाव:** द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अमेरिका और इंग्लैंड में भी जनता भारतीयों के पक्ष में आ गई. आखिरकार, ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ना ही पड़ा.
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन इसलिए असफल रहा क्योंकि इसमें योजना की कमी थी, नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, और सरकारी अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया. लेकिन इसका महत्व यह था कि इसने लोगों में आजादी की गहरी भावना जगाई और अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया.

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की असफलता के कारणों और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से समझें, खासकर जन-जागृति और ब्रिटिश शासन पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को.

 

प्रश्न 5. असहयोग आन्दोलन के कारण, कार्यक्रम एवं महत्व का उल्लेख कीजिए।
Answer: **असहयोग आंदोलन के प्रमुख कारण:**
1. **मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों से असंतोष:** प्रथम विश्व युद्ध में भारतीयों ने अंग्रेजों की मदद की थी, और अंग्रेजों ने भी प्रशंसा करते हुए लोकतंत्र के विस्तार का वादा किया था. लेकिन 1918 में प्रकाशित सुधार योजनाओं से भारतीय असंतुष्ट और निराश हुए.
2. **आर्थिक कठिनाइयाँ:** 1917 से 1920 के दौरान भारतीयों को कई आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा. युद्ध के कारण कृषि विकास पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे अनाज की कीमतें बढ़ गईं. अंग्रेजों का बिहार के चंपारण और गुजरात के खेड़ा किसानों के प्रति दमनकारी व्यवहार भी एक कारण था.
3. **रौलट विधेयक और सत्याग्रह:** 1919 में रौलट एक्ट पास किया गया, जो भारतीयों को बिना मुकदमे के दो साल तक जेल में बंद रखने की अनुमति देता था. इसका पूरे देश में विरोध हुआ और गांधीजी ने सत्याग्रह शुरू करने का सुझाव दिया.
4. **जलियांवाला बाग हत्याकांड:** 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में हुए इस अमानवीय हत्याकांड ने लोगों में भारी असंतोष पैदा किया, जिससे असहयोग आंदोलन का जन्म हुआ. जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर बिना चेतावनी के गोलियां चलाईं, जिससे हजारों लोग मारे गए.
5. **सरकार की दमनकारी नीति और अमानवीय व्यवहार:** पंजाब में मार्शल लॉ के दौरान हुए अत्याचारों और अपमानों ने लोगों को सरकार के खिलाफ कर दिया.
6. **हंटर कमेटी की रिपोर्ट से निराशा:** जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए गठित हंटर कमेटी की रिपोर्ट ने अधिकारियों के क्रूर कार्यों पर पर्दा डालने की कोशिश की, जिससे सभी राष्ट्रवादी क्रोधित हुए.
7. **खिलाफत आंदोलन और मुस्लिम असंतोष:** तुर्की के खलीफा के प्रति ब्रिटिश सरकार की क्रूर नीति से भारतीय मुसलमान नाराज थे. उन्होंने खिलाफत सम्मेलन आयोजित किया, और गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए इसे एक उपयुक्त अवसर समझा.
**असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम:**
असहयोग आंदोलन में दो प्रकार के कार्यक्रम थे: नकारात्मक और रचनात्मक.
**नकारात्मक कार्यक्रम:**
1. सरकारी पदों और उपाधियों का त्याग करना.
2. सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार करना.
3. चुनावों का बहिष्कार करना.
4. न्यायालयों का बहिष्कार करना.
5. विदेशी माल का बहिष्कार करना.
**रचनात्मक कार्यक्रम:**
1. राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना करना.
2. आपसी विवादों के हल के लिए निजी पंचायतों का गठन करना.
3. स्वदेशी का व्यापक प्रचार-प्रसार करना.
4. अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत करना.
5. चरखा और हथकरघा को प्रोत्साहन देना.
**असहयोग आंदोलन का महत्व:**
1. **जनता में चेतना और निडरता:** इस आंदोलन ने जनता को निर्भीक बनाया और उन्हें ब्रिटिश शासन द्वारा दी जाने वाली सजा और यातनाओं को भुगतने के लिए तैयार किया.
2. **राष्ट्रीय आंदोलन का जन आंदोलन में बदलना:** गांधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को कुछ गिने-चुने लोगों की विरासत से निकालकर सर्वसाधारण तक पहुँचाया.
3. **आंदोलन के परिणामों को स्थायित्व प्रदान करना:** रचनात्मक कार्यक्रमों (राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं, स्वदेशी, चरखा आदि) के माध्यम से आंदोलन को स्थायी लाभ मिला.
4. **सामाजिक विषमता दूर करना:** आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों ने सामाजिक विषमता (जैसे छुआछूत) को खत्म करने और राष्ट्रीय हित के अनुकूल शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया.
In simple words: असहयोग आंदोलन मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों, आर्थिक कठिनाइयों, रौलट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी घटनाओं के कारण शुरू हुआ. इसमें सरकारी चीजों का बहिष्कार और स्वदेशी को बढ़ावा देना मुख्य कार्यक्रम थे. इस आंदोलन ने लोगों में आजादी की भावना जगाई और इसे पूरे देश में फैलाया.

🎯 Exam Tip: असहयोग आंदोलन के कारण, कार्यक्रम और महत्व के प्रत्येक बिंदु को याद रखें. यह एक महत्वपूर्ण विस्तृत उत्तर वाला प्रश्न है.

 

Question 5. असहयोग आन्दोलन के कारण, कार्यक्रम एवं महत्व का उल्लेख कीजिए।
Answer: असहयोग आंदोलन शुरू होने के मुख्य कारण और इसके कार्यक्रम तथा महत्व नीचे दिए गए हैं:

असहयोग आन्दोलन के कारण:
1. **माण्टेस्यू - चेम्सफोर्ड सुधारों से असंतोष:** प्रथम विश्व युद्ध में भारतीयों ने अंग्रेजों की मदद की थी। अंग्रेजों ने कहा था कि युद्ध दुनिया में लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति विल्सन के 14 सिद्धांतों से उम्मीद जगी थी कि युद्ध के बाद स्वशासी संस्थाएँ बनेंगी, लेकिन जुलाई 1918 में प्रकाशित सुधार योजनाओं से भारतीय लोग असंतुष्ट और निराश हुए।
2. **आर्थिक कठिनाइयाँ:** साल 1917 और 1920 के दौरान भारतीयों को कई आर्थिक परेशानियाँ झेलनी पड़ीं। युद्ध के कारण कृषि पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे अनाज की कीमतें बहुत बढ़ गईं। अंग्रेजों का व्यवहार बिहार के चंपारण और गुजरात के खेड़ा किसानों के प्रति बहुत सख्त था।
3. **रौलट विधेयक:** रौलट विधेयक 1919 में पास किए गए थे। विधानमंडल में गैर-सरकारी सदस्यों ने इनका विरोध किया, लेकिन सरकारी बहुमत से एक विधेयक पास हो गया। जब संवैधानिक विरोध का कोई असर नहीं हुआ, तो गाँधीजी ने सत्याग्रह शुरू करने का सुझाव दिया।
4. **जलियाँवाला बाग हत्याकांड:** 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में एक भयानक हत्याकांड हुआ। जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थे पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों पर तब तक गोलियाँ चलाईं, जब तक उनके कारतूस खत्म नहीं हो गए। इस पूरे कांड में घायलों को बाग में तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। जनरल डायर ने यह हत्याकांड जानबूझकर लोगों में आतंक और भय फैलाने के लिए किया था। इस घटना से लोगों में ब्रिटिश शासन के प्रति बहुत गुस्सा भर गया, जो असहयोग आंदोलन के रूप में सामने आया।
5. **सरकार की दमनकारी नीति और अमानवीय व्यवहार:** पंजाब में मार्शल लॉ लागू होने पर प्रशासन ने लोगों पर जो अत्याचार किए, उसका उदाहरण दुनिया में कहीं नहीं मिलता। लोगों को कई तरह के अपमान और तिरस्कार सहने पड़े, जिससे असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई।
6. **हण्टर कमेटी की रिपोर्ट से निराशा:** पंजाब की घटनाओं की जांच के लिए जनता के दबाव पर ब्रिटिश सरकार ने लार्ड हंटर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। हंटर कमेटी ने अधिकारियों के कठोर कार्यों पर पर्दा डालने की कोशिश की। हत्याकांड की जांच के लिए बनी 'हंटर कमेटी' की कार्यवाही से सभी राष्ट्रवादी बहुत क्रोधित थे। महात्मा गाँधी भी हंटर कमेटी की पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट से बहुत निराश हो गए।
7. **हिन्दू-मुस्लिम एकता के समर्थक:** अंग्रेजों ने भारतीयों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए कई प्रयास किए थे। हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन गाँधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए भरपूर कोशिशें कीं, जिससे अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति सफल नहीं हो सकी। गाँधीजी ने खिलाफत आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता का एक अच्छा मौका समझा।

असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम:
(I) **रचनात्मक कार्यक्रम**
1. राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना करना
2. आपसी विवादों को सुलझाने के लिए निजी पंचायतों का गठन करना

(II) **नकारात्मक पक्ष**
1. सरकारी पदों एवं उपाधियों का त्याग करना
2. सरकारी स्कूलों तथा कॉलेजों का बहिष्कार करना
3. चुनावों का बहिष्कार करना
4. न्यायालयों का बहिष्कार करना
5. विदेशी माल का बहिष्कार करना आदि।

असहयोग आन्दोलन का महत्व:
1. **जनता में चेतना एवं निर्भीकता का संचार होना:** इस आंदोलन ने जनता को निडर बना दिया। जनता ब्रिटिश शासन द्वारा दी जाने वाली सजा और यातनाओं को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार हो गई।
2. **राष्ट्रीय आन्दोलन को जन आन्दोलन में परिवर्तित करना:** असहयोग आंदोलन के ज़रिए गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आंदोलन में बदल दिया। अब तक देशभक्ति और राष्ट्रवाद कुछ गिने-चुने लोगों की विरासत समझी जाती थी, लेकिन महात्मा गाँधी और असहयोग आंदोलन के प्रभाव से यह आम लोगों तक पहुँच गया।
3. **आन्दोलन के परिणामों को स्थायित्व प्रदान करना:** आंदोलन के दौरान रचनात्मक कार्यक्रमों जैसे राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं का संचालन, स्वदेशी (विदेशी के स्थान पर), चरखा और हथकरघा आदि से देश को विशेष लाभ मिला। इसने आंदोलन के परिणामों को स्थायी बनाया।
4. **सामाजिक विषमता, गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने का प्रयास:** आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों से एक ओर सामाजिक विषमता खत्म हुई, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय हित के अनुकूल शिक्षा देने की कोशिश की गई। इस तरह असहयोग आंदोलन ने अपने कार्यक्रमों से भारतीय जनता को एकजुट होकर अंग्रेजी शासन का विरोध करने का काम किया।
In simple words: असहयोग आंदोलन 1919-1922 में महात्मा गाँधी के नेतृत्व में चला। इसके मुख्य कारणों में जलियाँवाला बाग हत्याकांड और रौलट एक्ट जैसे ब्रिटिश अत्याचार शामिल थे। आंदोलन में सरकारी संस्थानों, स्कूलों और विदेशी सामान का बहिष्कार किया गया, जबकि खादी और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया गया। इसने जनता में साहस भरा और इसे एक जन आंदोलन बना दिया।

🎯 Exam Tip: असहयोग आन्दोलन के कारणों, कार्यक्रम और महत्व पर लिखते समय, सभी मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से अलग-अलग भागों में बाँटें और उदाहरणों के साथ व्याख्या करें।

 

Question 6. सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारणों, कार्यक्रम एवं प्रभाव पर प्रकाश डालिए।
Answer: सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण, कार्यक्रम और प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारण:
1. **औपनिवेशिक स्वराज्य की माँग पर ध्यान न देना:** नेहरू रिपोर्ट, 1928 में भारत के लिए औपनिवेशिक स्वराज्य (डोमिनियन स्टेटस) की मांग की गई थी। कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार से नेहरू रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करने को कहा और चेतावनी दी कि यदि एक साल के भीतर ब्रिटिश सरकार ने औपनिवेशिक स्वराज्य की मांग स्वीकार नहीं की, तो वह पूर्ण स्वराज्य की मांग रखेगी। ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के सुझावों और चेतावनी पर कोई ध्यान नहीं दिया।
2. **देश में बढ़ता असंतोष:** सभी लोग ब्रिटिश सरकार से असंतुष्ट थे। लाहौर षड्यंत्र मामले के कारण भी ब्रिटिश सरकार के प्रति भारत में असंतोष बढ़ता जा रहा था।
3. **गाँधीजी की ग्यारह शर्तों पर ध्यान न देना:** 14-16 फरवरी, 1930 को साबरमती में कांग्रेस कार्यकारिणी ने गाँधीजी को सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने का पूरा अधिकार दे दिया था। फिर भी, गाँधीजी ने सरकार को एक और मौका दिया। उन्होंने अपने साप्ताहिक पत्र 'यंग इंडिया' में एक लेख में वायसराय लॉर्ड इरविन से ग्यारह शर्तों को मानने के लिए कहा। ब्रिटिश सरकार ने इन मांगों पर ध्यान देना तो दूर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। ऐसी स्थिति में आंदोलन शुरू करना ज़रूरी हो गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत गाँधीजी ने 12 मार्च, 1930 को दांडी यात्रा से की।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के प्रमुख कार्यक्रम:
* गाँव-गाँव में नमक बनाने के लिए निकल पड़ना चाहिए।
* महिलाओं को शराब, अफीम और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरना देना चाहिए।
* विदेशी वस्त्रों को जला देना चाहिए।
* विदेशी माल का बहिष्कार किया जाना चाहिए।
* सरकारी नौकरियों से त्यागपत्र देना चाहिए।
* सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।
* किसानों को लगान देने से मना करना चाहिए।
इस आंदोलन में सभी कार्यक्रमों को बहुत उत्साह के साथ अपनाया गया। इसमें महिलाओं और किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के प्रभाव:
1. **राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक बनाना:** असहयोग आंदोलन की तुलना में इस आंदोलन में जनता ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
2. **भारतीय राष्ट्रीय चेतना का प्रसार:** नमक जैसे साधारण मुद्दे को लेकर चलाया गया यह आंदोलन उम्मीद से भी ज़्यादा सफल रहा। इसने भारतीय राष्ट्रीय चेतना को बहुत बढ़ावा दिया।
3. **राष्ट्रीय आंदोलन में सभी वर्गों का समावेश:** इस आंदोलन में मध्यम वर्ग, मजदूर वर्ग और किसान सभी शामिल थे। इस तरह यह हर व्यक्ति का आंदोलन बन गया।
4. **अहिंसा की शक्ति का व्यावहारिक प्रयोग:** सविनय अवज्ञा आंदोलन राष्ट्रवाद की भावना जगाने में सफल रहा। अब जनता ब्रिटिश सरकार की नीतियों के खिलाफ सविनय अवज्ञा और अहिंसक आंदोलन चलाने में कुशल हो गई थी। इसलिए आंदोलन के दौरान जनता ने दमन की प्रतिक्रिया में कोई हिंसक कार्यवाही नहीं की।
5. **किसानों में नई चेतना का जन्म:** सविनय अवज्ञा आंदोलन में किसानों ने सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। किसानों ने ज़मींदारों और ब्रिटिश अधिकारियों को लगान देना बंद कर दिया।
In simple words: सविनय अवज्ञा आंदोलन गाँधीजी ने पूर्ण स्वराज्य के लिए शुरू किया था, जब ब्रिटिश सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना। इसमें नमक कानून तोड़ना, विदेशी सामान का बहिष्कार और सरकारी व्यवस्था का विरोध शामिल था। इस आंदोलन से भारत में राष्ट्रीय चेतना बढ़ी और सभी वर्गों के लोग एकजुट हुए।

🎯 Exam Tip: सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारणों, कार्यक्रमों और प्रभावों का वर्णन करते समय, प्रत्येक बिंदु को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और उसके महत्व पर प्रकाश डालें।

 

Question 8. भारत छोड़ो आन्दोलन के कारणों, कार्यक्रम और प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत छोड़ो आंदोलन के कारण, कार्यक्रम और प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण:
1. **क्रिप्स मिशन की असफलता:** भारतीय जनता को यह विश्वास हो गया था कि 1942 में क्रिप्स मिशन को भारत भेजना सिर्फ एक राजनीतिक चाल थी। इसका उद्देश्य ब्रिटेन द्वारा युद्ध में अपने सहयोगियों को खुश करना और अपनी असफलता का दोष भारतीय जनता पर डालना था। क्रिप्स मिशन की असफलता के कारण भारत में निराशा का माहौल बन गया।
2. **खराब आर्थिक दशा:** दूसरे विश्व युद्ध के बुरे प्रभावों के कारण देश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी।
3. **विस्थापित भारतीयों के साथ अपमानजनक व्यवहार:** बर्मा पर जापान की जीत के बाद जो भारतीय विस्थापित होकर भारत आ रहे थे, उनके साथ ब्रिटिश सरकार द्वारा अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा था।
4. **पूर्वी बंगाल में भय और आतंक का राज:** इस समय पूर्वी बंगाल में भय और आतंक का माहौल था। ब्रिटिश सरकार ने वहाँ अनेक किसानों की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया था।
5. **ब्रिटिश रक्षा व्यवस्था पर अविश्वास:** इस समय जापान ने सिंगापुर, मलाया, बर्मा तक अंग्रेजों को हरा दिया था। ऐसी स्थिति में भारतीयों को ब्रिटिश रक्षा व्यवस्था पर विश्वास नहीं रहा था। अतः भारतीय यह सोचने लगे थे कि यदि अंग्रेज भारत छोड़कर चले जाएं तो शायद भारत पर जापान का हमला हो सकता है। पूरे देश में जापान के हमले के भय को कम करने, निराशा के माहौल को खत्म करने और जनता में उत्साह भरने के लिए अब आंदोलन ज़रूरी हो गया था।

भारत छोड़ो आन्दोलन का कार्यक्रम:
2. **8 अगस्त 1942 का भारत छोड़ो प्रस्ताव:** वर्धा प्रस्ताव के अनुसार 7 अगस्त को बम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का अधिवेशन हुआ। इस समिति ने काफी विचार-विमर्श के बाद 'भारत छोड़ो प्रस्ताव' पास किया, जिसमें कहा गया कि भारत में ब्रिटिश शासन को तुरंत खत्म करना भारत और मित्र राष्ट्रों के आदर्शों के लिए बहुत ज़रूरी है।
3. **'करो या मरो' का नारा:** गाँधीजी ने अपने भाषण में भारतीयों को 'करो या मरो' का नारा दिया। इससे साफ था कि अब निर्णायक मौका आ गया था।
4. **आन्दोलन की प्रगति एवं शासन द्वारा दमन:** आंदोलन की प्रगति और शासन द्वारा दमन को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया गया है:
* आंदोलन की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को सरकार ने गिरफ्तार कर लिया।
* स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों तथा महिलाओं ने हिंसात्मक संघर्षों में भाग लिया।
* व्यापक जन विद्रोह हुआ।
* समानांतर सरकारें स्थापित हुईं।
* समाजवादी कांग्रेस ने भूमिगत रहकर आंदोलन का संचालन किया।
* सरकार ने कठोर दमनकारी कार्यवाही की।
उपरोक्त गतिविधियाँ भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम में शामिल थीं।

भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रभाव:
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता के लिए एक बहुत बड़ा प्रयास था। इस आंदोलन से भारत में ब्रिटिश शासन पूरी तरह से हिल गया। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित थे:
1. **जन जागृति:** इस आंदोलन के कारण अंग्रेजों ने भारत नहीं छोड़ा, लेकिन इसने भारत में ऐसी जन जागृति पैदा कर दी कि ब्रिटेन के लिए भारत पर लंबे समय तक शासन करना असंभव हो गया। इस आंदोलन ने देश के कई हिस्सों में ब्रिटिश शासन को अंदर तक हिला दिया।
2. **स्वतंत्रता की पृष्ठभूमि तैयार करना:** इस आंदोलन ने भारत की स्वतंत्रता के लिए एक नींव तैयार की। ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट हो गया कि अब वे अधिक समय तक भारत में शासन नहीं कर पाएंगे।
3. **समझौता वार्ताओं की शुरुआत:** इस आंदोलन और इससे पैदा हुई चेतना के दबाव के कारण ही ब्रिटिश सरकार ने भारत की समस्या हल करने के लिए भारतीयों के साथ समझौता वार्ताओं की प्रक्रिया शुरू कर दी।
4. **विश्व जनमत पर प्रभाव:** दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और इंग्लैंड में भी जनमत भारतीयों के पक्ष में हो गया। सरकार को अंत में भारत छोड़ना ही पड़ा।
In simple words: भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू हुआ क्योंकि क्रिप्स मिशन विफल हो गया, आर्थिक स्थिति खराब थी, और भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा था। गाँधीजी ने 'करो या मरो' का नारा दिया। इस आंदोलन में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन इसने जनता में नई चेतना जगाई और भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी।

🎯 Exam Tip: भारत छोड़ो आंदोलन के विस्तृत उत्तर के लिए कारणों, कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रभावों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है ताकि पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकें।

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