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Detailed Chapter 10 अपरदन के कारक RBSE Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 10 अपरदन के कारक RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. वह भूदृश्य जो नदी के निक्षेपण से बनता है-
(अ) गार्ज
(ब) जलोढ़ पंख
(स) जल गर्तिका
(द) जल प्रपात
Answer: (ब) जलोढ़ पंख
In simple words: नदी द्वारा लाई गई मिट्टी और पत्थरों के जमाव से जो खास तरह का भूभाग बनता है, उसे जलोढ़ पंख कहते हैं। यह आमतौर पर पहाड़ों के नीचे मैदानी इलाकों में बनता है।
🎯 Exam Tip: निक्षेपण का मतलब है जमाव। नदी के बहने के साथ आने वाली मिट्टी और कंकड़ जब जमा हो जाते हैं, तो जलोढ़ पंख जैसी आकृतियाँ बनती हैं।
Question 3. पवन द्वारा जो अपरदनात्मक स्थलाकृति नहीं है, वह है-
(अ) स्तूप
(ब) छत्रक शिला
(स) इन्सेल बंगे
(द) ज्यूगेन
Answer: (अ) स्तूप
In simple words: हवा के कटाव से कई तरह की जमीन की आकृतियाँ बनती हैं, लेकिन 'स्तूप' हवा के कटाव से नहीं बनता, बल्कि यह हवा द्वारा मिट्टी जमा करने से बनता है।
🎯 Exam Tip: 'अपरदन' का अर्थ है कटाव, जबकि 'निक्षेपण' का अर्थ है जमाव। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कौन सी स्थलाकृति कटाव से बनती है और कौन सी जमाव से।
Question 4. कौन-सा भूरूप हिमानी अपरदन से निर्मित नहीं है?
(अ) फियोर्ड
(ब) हिम सोपान
(स) हिम-श्रृंग
(द) एस्कर
Answer: (द) एस्कर
In simple words: हिमानी (बर्फ की नदी) के कटाव से कई भू-आकृतियाँ बनती हैं, जैसे फियोर्ड, हिम सोपान, और हिम-श्रृंग। लेकिन एस्कर हिमानी के जमाव से बनता है, कटाव से नहीं।
🎯 Exam Tip: हिमानी अपरदन और निक्षेपण से बनने वाली स्थलाकृतियों में अंतर को स्पष्ट रूप से याद करें। एस्कर एक निक्षेपणात्मक स्थलाकृति है।
Question 5. मरुप्रदेश में लहरदार उभार को कहते हैं
(अ) बालू का कगार,
(ब) उर्मिका
(स) बरखान
(द) लोयस
Answer: (ब) उर्मिका
In simple words: रेगिस्तान में रेत की सतह पर जो छोटी-छोटी लहरदार आकृतियाँ दिखती हैं, उन्हें उर्मिका कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मरुस्थलीय क्षेत्रों में हवा और रेत की क्रिया से कई विशिष्ट स्थलाकृतियाँ बनती हैं, जैसे बालुका स्तूप, बरखान, लोयस और उर्मिका। इनकी परिभाषाएँ याद रखें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. जलोढ़ शंकु कैसे बनते हैं?
Answer: जलोढ़ शंकु तब बनते हैं जब नदियाँ पहाड़ों से मैदानों में उतरती हैं। इस जगह पर पानी की गति कम हो जाती है, जिससे नदी अपने साथ लाए हुए रेत, बजरी और मिट्टी को एक शंकु (कोन) के आकार में जमा कर देती है। इस जमाव को जलोढ़ शंकु कहते हैं।
In simple words: जब नदी पहाड़ों से नीचे आती है, तो वह अपने साथ मिट्टी जमा करती है, जिससे शंकु के आकार की आकृति बनती है, जिसे जलोढ़ शंकु कहते हैं।
🎯 Exam Tip: जलोढ़ शंकु नदी के निक्षेपण (जमाव) का परिणाम है और यह पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के मिलन बिंदु पर बनता है।
Question 7. गार्ज किसे कहते हैं?
Answer: गार्ज नदी द्वारा बनी एक बहुत ही संकरी और गहरी घाटी होती है, जिसके दोनों किनारे खड़े और सीधे होते हैं। यह तब बनती है जब नदी बहुत तेजी से बहती है और कठोर चट्टानों को काटती हुई अपना रास्ता बनाती है।
In simple words: गार्ज एक बहुत गहरी और पतली नदी घाटी होती है जिसकी दीवारें सीधी ऊपर की ओर खड़ी होती हैं।
🎯 Exam Tip: गार्ज अपरदन (कटाव) से बनी एक प्रमुख नदी स्थलाकृति है, जो अक्सर पहाड़ी और चट्टानी इलाकों में पाई जाती है।
Question 8. सर्क में जल भरने से बनने वाली झील का नाम बताओ।
Answer: हिमानी (ग्लेशियर) वाले क्षेत्रों में जब सर्क के गहरे बेसिन में बर्फ पिघलने के बाद पानी भर जाता है, तो उससे जो झील बनती है, उसे टॉर्न या टार्न झील कहते हैं।
In simple words: जब सर्क नाम की कटोरे जैसी जगह में पानी भर जाता है, तो उसे टार्न झील कहते हैं।
🎯 Exam Tip: टॉर्न झीलें हिमानी अपरदन से बनी स्थलाकृति सर्क से जुड़ी होती हैं और अक्सर ऊँचे पहाड़ों में पाई जाती हैं।
Question 9. अण्डों की टोकरी स्थलाकृति का नाम बताइये।
Answer: हिमानी क्षेत्रों में, जब हिमानी के निक्षेपण (जमाव) की प्रक्रिया से गोलाश्म मृतिका (Glacial Till) के ढेर जमा होते हैं, और ये ढेर अण्डों की टोकरी के समान दिखाई देते हैं, तो इस स्थलाकृति को डुमलिन कहते हैं।
In simple words: अण्डों की टोकरी जैसी दिखने वाली जमीन की आकृति को डुमलिन कहते हैं, जो ग्लेशियर द्वारा मिट्टी जमा करने से बनती है।
🎯 Exam Tip: डुमलिन हिमानी निक्षेपण का एक उदाहरण है और यह हिमानी द्वारा लाए गए पदार्थों के जमाव से बनती है।
Question 10. यारडंग किसे कहते हैं?
Answer: मरुस्थलीय क्षेत्रों में जब हवा कोमल और कठोर चट्टानों की लंबवत परतों को इस तरह काटती है कि नुकीले और ऊबड़-खाबड़ भू-आकार बन जाते हैं, तो उन आकृतियों को यारडंग कहते हैं। इसमें कठोर चट्टानें हवा के कटाव का सामना करती हैं और खड़ी रह जाती हैं, जबकि कोमल चट्टानें कट जाती हैं।
In simple words: रेगिस्तान में हवा कठोर और नरम चट्टानों को काटकर नुकीले आकार बनाती है, जिन्हें यारडंग कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यारडंग हवा के अपरदन का एक उदाहरण है, जो कठोर और नरम चट्टानों के विभिन्न प्रतिरोध के कारण बनता है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. गोखुर झील कैसे बनती है?
Answer: गोखुर झील नदियों की वृद्धावस्था में बनती है। जब नदी मैदानों में धीमी गति से बहती है, तो वह बहुत घुमावदार मोड़ (विसर्प) बनाती है। समय के साथ, नदी इन मोड़ों के अंदर के भाग को काटती जाती है और बाहर के भाग में मिट्टी जमा करती जाती है। धीरे-धीरे एक मोड़ का अंदरूनी हिस्सा इतना कट जाता है कि नदी सीधे बहने लगती है और पुराना घुमावदार मोड़ मुख्य धारा से अलग हो जाता है। यह अलग हुआ, घोड़े की नाल या गाय के खुर के आकार का हिस्सा ही गोखुर झील कहलाता है, जिसमें पानी भरा रहता है।
In simple words: जब नदी बहुत मुड़-मुड़कर बहती है, तो कभी-कभी वह एक मोड़ को काटकर सीधा रास्ता ले लेती है। इससे जो पुराना मोड़ अलग हो जाता है और उसमें पानी भर जाता है, उसे गोखुर झील कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गोखुर झील नदी के विसर्पों (मोड़ों) के कटने और अलग होने से बनती है, यह नदी अपरदन और निक्षेपण दोनों प्रक्रियाओं का एक उदाहरण है।
Question 12. लैगून कैसे बनती है?
Answer: लैगून तब बनती है जब समुद्र तट पर बनने वाली रोधिकाएँ (बालू या पत्थर की लंबी दीवारें) किसी खाड़ी या छोटे इनलेट के मुहाने को समुद्र से पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद कर देती हैं। इससे तट और रोधिका के बीच का समुद्री जल मुख्य समुद्र से अलग हो जाता है और एक खारे पानी की झील बन जाती है, जिसे लैगून कहते हैं। यह समुद्री लहरों के जमाव कार्य के बाद बनती है और तट को सुरक्षा भी प्रदान करती है।
In simple words: जब समुद्र की लहरें रेत या पत्थर की दीवार बनाकर किसी खाड़ी को समुद्र से अलग कर देती हैं, तो अंदर जो पानी भर जाता है, उसे लैगून कहते हैं।
🎯 Exam Tip: लैगून समुद्री निक्षेपण (जमाव) का एक उदाहरण है और यह अक्सर तटों पर पाई जाती हैं, जहाँ पानी का प्रवाह सीमित होता है।
Question 13. छत्रक शिला किसे कहते हैं?
Answer: छत्रक शिला मरुस्थलीय क्षेत्रों में पवन के अपरदन (कटाव) से बनती है। जब हवा अपने साथ रेत के कणों को लेकर बहती है, तो वह चट्टानों के निचले हिस्सों को ज्यादा काटती है क्योंकि रेत के कण जमीन के पास ज्यादा होते हैं। इससे चट्टान का निचला हिस्सा पतला हो जाता है और ऊपरी हिस्सा चौड़ा रहता है, जिससे वह मशरूम या सांप की छतरी जैसी आकृति ले लेती है। ऐसी आकृति को छत्रक शिला कहते हैं। इस प्रकार की स्थलाकृतियों पर हवा, वर्षा और तापमान जैसी मौसमी स्थितियों का प्रभाव पड़ता है।
In simple words: रेगिस्तान में हवा जब चट्टानों के नीचे के हिस्से को ज्यादा काट देती है और ऊपर का हिस्सा बड़ा रह जाता है, तो वह छाते या मशरूम जैसी दिखती है, जिसे छत्रक शिला कहते हैं।
🎯 Exam Tip: छत्रक शिला पवन अपरदन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें चट्टानों के विभिन्न हिस्सों पर हवा के कटाव की दर अलग-अलग होती है।
Question 14. अंधी घाटी क्या है?
Answer: अंधी घाटी एक ऐसी घाटी होती है जहाँ नदी का पानी जमीन की सतह के नीचे चला जाता है, और उसके आगे की नदी घाटी सूखी रह जाती है। यह अक्सर चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में होता है जहाँ पानी विलयन छिद्रों (सिंकहोल) में समा जाता है। जब नदी एक विलयन छिद्र पर अचानक खत्म हो जाती है और लंबे समय तक ऐसा ही रहता है, तो नदी अपनी घाटी को आसपास के मैदान से नीचे काट देती है। इस स्थिति में, नदी का अंत एक विलयन छिद्र पर होता है, और यह घाटी अंधी घाटी कहलाती है।
In simple words: अंधी घाटी वह होती है जहाँ नदी का पानी अचानक जमीन के अंदर चला जाता है और उसके आगे का रास्ता सूखा रह जाता है।
🎯 Exam Tip: अंधी घाटियाँ भूमिगत जल अपरदन की विशेषता हैं और ये चूना पत्थर के क्षेत्रों में पानी के रिसाव के कारण बनती हैं।
Question 15. सर्क किसे कहते हैं?
Answer: सर्क हिमानी (ग्लेशियर) वाले क्षेत्रों में पहाड़ों के ढलानों पर बर्फ के कटाव से बनने वाली एक कटोरे या कुर्सी के आकार की स्थलाकृति है। यह एक अर्धवृत्ताकार या अर्धचंद्राकार गड्ढे जैसी दिखती है, जहाँ ग्लेशियर का शीर्ष भाग होता है। सर्क के निचले हिस्से में अक्सर पिघली हुई बर्फ जमा होती है। इनकी ऊपरी ढलानें बहुत सीधी होती हैं, जबकि नीचे का तलहटी हिस्सा गहरा होता है। पीछे की दीवार, अपरदन के कारण धीरे-धीरे पीछे हटती रहती है।
In simple words: सर्क पहाड़ों में बर्फ के कटाव से बनी एक कटोरे जैसी आकृति होती है जहाँ ग्लेशियर शुरू होते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्क हिमानी अपरदन का एक प्रमुख उदाहरण है और अक्सर ऊँचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है जहाँ ग्लेशियर सक्रिय होते हैं।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 16. नदी निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: नदी के रूप में बहते हुए जल को प्रवाहित जल कहते हैं। यह बहता हुआ जल अपनी घाटी के किनारों और तल को काटकर, कुरेदकर तथा अपने साथ शैल सामग्री को बहाकर ले जाता है। यह सामग्री फिर दूसरे स्थानों पर जमा भी करता है। इस तरह प्रवाहित जल में अपघर्षण (घिसना), सन्निघर्षण (आपस में टकराना) और प्रवासन (बहाकर ले जाना) की तीन प्रक्रियाएँ होती हैं। इन प्रक्रियाओं से नदी के कटाव (अपरदन) और जमाव (निक्षेपण) से दो मुख्य प्रकार की स्थलाकृतियाँ बनती हैं:
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ:
(अ) गार्ज: यह खड़े किनारों वाली एक संकरी और गहरी घाटी होती है।
(ब) केनियन: यह गार्ज से भी अधिक संकरी और गहरी घाटी होती है।
(स) जलप्रपात: यह तब बनता है जब पानी बहुत तेजी से एक ऊँची ढलान से नीचे गिरता है।
(द) क्षिप्रिकाएँ: नदी मार्ग के वे हिस्से जहाँ पानी ऊपर उठी कठोर चट्टानों के कारण उछलते हुए बहता है।
(य) जल गर्तिका: ये नदी की तली में पानी के बहाव से छेदन क्रिया द्वारा बने गड्ढे होते हैं।
(र) संरचनात्मक पीठिकाएँ: ये कठोर और नरम चट्टानों की क्षैतिज परतों के कारण घाटी के किनारों पर बनी सीढ़ीदार आकृतियाँ हैं।
(व) नदी विसर्प: ये नदी के बहुत घुमावदार मोड़ होते हैं, जहाँ नदी सांप की तरह बहती हुई दिखती है।
(ङ) समप्राय मैदान: यह नदी द्वारा निर्मित एक सपाट, कम ढलान वाला मैदान होता है जिस पर कोई बड़ी आकृति नहीं होती।
(ii) निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ:
(अ) जलोढ़ शंकु: यह नदी द्वारा पहाड़ों से मैदानों में प्रवेश करते समय पहाड़ी ढलान पर शंकु के आकार में मलबे का जमाव होता है।
(ब) जलोढ़ पंख: यह नदी द्वारा पहाड़ों से मैदानों में प्रवेश करते समय मलबे का पंखे जैसा आकार में जमाव होता है।
(स) डेल्टा: नदी के मुहाने पर जलोढ़ मिट्टी के जमाव से बनी त्रिभुजाकार आकृति को डेल्टा कहते हैं।
(द) प्राकृतिक तटबंध: ये बाढ़ के पानी के उतर जाने के बाद नदी के दोनों किनारों पर बनी रेतीली मिट्टी की दीवारें होती हैं।
(थ) बाढ़ के मैदान: बाढ़ के समय नदी द्वारा मिट्टी जमा करने से बने समतल मैदान को बाढ़ का मैदान कहते हैं।
(२) गोखुर झील: जब नदी अपने विसर्पित मार्ग को छोड़कर सीधा बहती है और उसका घुमावदार भाग जलपूर्ण होकर अलग हो जाता है, तो उसे गोखुर झील कहते हैं।
In simple words: नदी जब बहती है, तो वह जमीन को काटती भी है और मिट्टी जमा भी करती है। काटने से गार्ज और झरने बनते हैं, और जमा करने से डेल्टा, जलोढ़ पंख और गोखुर झील जैसी आकृतियाँ बनती हैं।
🎯 Exam Tip: नदी द्वारा बनाई गई स्थलाकृतियों को अपरदन और निक्षेपण के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें और प्रत्येक का एक-दो उदाहरण याद रखें।
Question 17. हिमानी निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: हिमानी (ग्लेशियर) द्वारा निर्मित स्थलाकृतियाँ हिमनदी के उत्पाटन (उखाड़ने), अपघर्षण (घिसने) और सन्निघर्षण (टकराने) तथा हिम निक्षेपण (जमाव) से बनती हैं। ये दो मुख्य प्रकार की होती हैं:
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ:
(अ) यू-आकार की घाटी: हिमानी नदी द्वारा बनी घाटियों को घिसकर खड़ी दीवारों और चौड़े, सपाट तल वाली यू-आकार की घाटी में बदल देती है।
(ब) लटकती घाटी: यह मुख्य गहरी हिमानी घाटी में उसकी सहायक हिमानी की घाटी ऊपर लटकती हुई दिखती है।
(स) हिम गह्वर (सर्क): यह हिमानी द्वारा आराम कुर्सी जैसी आकृति में बना गड्ढा होता है।
(द) टार्न: यह सर्क रूपी बेसिन में पानी भरने से बनी झील होती है।
(य) नूनाटक: हिम क्षेत्रों में उभरे हुए टीले जो बर्फ से ढके नहीं होते, उन्हें नूनाटक कहते हैं।
(र) कॉल: यह दो पास-पास के सर्कों के मिलने से बना एक आर-पार का रास्ता होता है।
(ल) श्रृंग व पुच्छ: हिमानी क्षेत्रों में ऐसी चट्टानें जिनके सामने की ढलान सीधी और ऊबड़-खाबड़ होती है, जबकि पीछे की ढलान सपाट और कम ढलान वाली होती है।
(व) मेषशिला: यह हिमानी द्वारा अपरदित भेड़ की पीठ जैसी दिखने वाली चट्टान होती है।
(श) फियोर्ड: यह हिमानी द्वारा बनी घाटियों के समुद्र के पानी से भर जाने से बने कटे-कटे तट होते हैं।
(ii) निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ:
(अ) हिमोढ़: हिमानी द्वारा जमा किए गए कंकड़-पत्थर और गोलाश्म के ढेर को हिमोढ़ कहते हैं। ये हिमानी के किनारों, उसके आखिरी भाग या तल पर जमा होते हैं।
(ब) एस्कर: यह हिमानी द्वारा बहाकर लाई गई रेत और बजरी के जमाव से बने लंबे, पतले और लहरदार कटक होते हैं।
(स) केम: ये हिमानी द्वारा लाई गई रेत और बजरी के जमाव से बने तीव्र ढलान वाले टीले होते हैं।
(द) केटील: ये हिमानी द्वारा पिघलने वाली बर्फ के टुकड़ों से बने गड्ढे होते हैं, जिनमें बाद में पानी भर जाता है।
(य) डुमलिन: ये अंडाकार या टोकरी जैसी दिखने वाली आकृतियाँ होती हैं, जो हिमानी मृतिका के जमाव से बनती हैं।
(र) हिमानी अवक्षेप मैदान: यह हिमानी द्वारा लाए गए मलबे का दूर तक फैलाव होता है, जहाँ ढलान कम होने पर मलबे का बड़े क्षेत्र में जमाव हो जाता है।
In simple words: ग्लेशियर (हिमानी) जब बहते हैं, तो वे जमीन को काटते और तोड़ते हैं, जिससे यू-आकार की घाटियाँ और सर्क बनते हैं। जब वे मिट्टी और पत्थरों को जमा करते हैं, तो हिमोढ़, एस्कर और डुमलिन जैसी आकृतियाँ बनती हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानी द्वारा निर्मित अपरदनात्मक और निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों की सूची को अच्छी तरह से तैयार करें, साथ ही प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण भी दें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 2. निम्न में से जो नदी निर्मित स्थलाकृति है, वह है-
(अ) एस्कर
(ब) भृगु
(स) यारडंग
(द) गोखुर झील
Answer: (द) गोखुर झील
In simple words: नदी के बहने से गोखुर झील बनती है। यह तब होता है जब नदी अपने घुमावदार रास्ते को छोड़कर सीधा बहने लगती है, और पुराना घुमावदार हिस्सा अलग होकर झील बन जाता है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि कौन सी स्थलाकृति किस कारक (जैसे नदी, हिमानी, पवन) से बनती है। गोखुर झील नदी के कार्यों का परिणाम है।
Question 3. नदी निर्मित अपरदनात्मक स्थलाकृति है-
(अ) केम
(ब) केनियन
(स) लूप
(द) ज्यूजेन
Answer: (ब) केनियन
In simple words: केनियन एक बहुत गहरी और संकरी घाटी होती है जो नदी के कटाव से बनती है। यह नदी द्वारा जमीन को काटने का एक उदाहरण है।
🎯 Exam Tip: अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ कटाव से बनती हैं, जबकि निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ जमाव से। केनियन एक प्रमुख अपरदनात्मक नदी स्थलाकृति है।
Question 4. मेहराब है-
(अ) सागरीय लहर निर्मित स्थलाकृति
(ब) वायु निर्मित स्थलाकृति
(स) हिमानी जात स्थलाकृति
(द) नदी जात स्थलाकृति
Answer: (अ) सागरीय लहर निर्मित स्थलाकृति
In simple words: मेहराब एक ऐसी प्राकृतिक आकृति है जो समुद्र की लहरों द्वारा चट्टानों को काटने से बनती है, खासकर तटवर्ती इलाकों में।
🎯 Exam Tip: मेहराब समुद्री लहरों के अपरदन का एक उदाहरण है, जहाँ लहरें चट्टानों में कमजोर हिस्सों को काटकर गुफाएँ और फिर मेहराब बनाती हैं।
Question 6. पवनकृत स्थलाकृति है-
(अ) कन्दरा
(ब) लूप
(स) तिपहल शिला
(द) टेरा रोसा
Answer: (स) तिपहल शिला
In simple words: तिपहल शिला एक ऐसी चट्टान होती है जिसके तीन चिकने किनारे होते हैं। यह हवा के कटाव से बनती है, जहाँ हवा चट्टानों को घिसती है और उन्हें एक खास आकार देती है।
🎯 Exam Tip: पवनकृत स्थलाकृतियाँ हवा के कटाव और जमाव दोनों से बनती हैं। तिपहल शिला हवा के अपरदन का उदाहरण है।
Question 7. हिमानीकृत स्थलाकृति है-
(अ) भूस्तम्भ
(ब) लेपिज
(स) नोडुल्स
(द) सर्क
Answer: (द) सर्क
In simple words: सर्क एक कटोरे जैसी आकृति होती है जो ग्लेशियर (हिमानी) द्वारा पहाड़ों को काटने से बनती है।
🎯 Exam Tip: सर्क हिमानी अपरदन की एक विशिष्ट स्थलाकृति है, जिसे अक्सर हिमनद का स्रोत क्षेत्र माना जाता है।
Question 8. भूमिगत जल निर्मित स्थलाकृति नहीं है-
(अ) युवाला
(ब) आश्चताश्म
(स) छत्रक शिला
(द) विलय रंध्र
Answer: (स) छत्रक शिला
In simple words: युवाला, आश्चताश्म और विलय रंध्र जमीन के नीचे के पानी से बनते हैं, लेकिन छत्रक शिला हवा के कटाव से बनती है।
🎯 Exam Tip: भूमिगत जल से बनने वाली स्थलाकृतियाँ अक्सर चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं, जहाँ पानी चट्टानों को घोलता है।
Question 9. चूना प्रदेशों में घुलन क्रिया से निर्मित लाल व भूरी मिट्टियों को कहते हैं-
(अ) लेपिज
(ब) टेरा रोसा
(स) सकुण्ड
Answer: (ब) टेरा रोसा
In simple words: चूना पत्थर वाले इलाकों में, जब पानी चट्टानों को घोलता है, तो जो लाल और भूरी मिट्टी बच जाती है, उसे टेरा रोसा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: टेरा रोसा चूना पत्थर के अपरदन से जुड़ी एक विशिष्ट मिट्टी का प्रकार है, जो अपने लाल रंग के लिए जानी जाती है।
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-
(क)
| स्तम्भ (अ) (स्थलाकृति) | स्तम्भ (ब) (स्थलाकृति का कारक) |
|---|---|
| (i) द्वीपाभगिरी | (अ) भूमिगत जलजात |
| (ii) लघुनिवेशिका | (ब) वायुजात |
| (iii) क्षिप्रिको | (स) हिमानी जात |
| (iv) डुमलिन | (द) सागरीय लहरजात |
| (v) निश्रुतस्य | (य) नदी जात |
Answer: (i) ब, (ii) द, (iii) य, (iv) स, (v) अ।
In simple words: द्वीपाभगिरी हवा से बनती है, लघुनिवेशिका समुद्री लहरों से, क्षिप्रिका नदी से, डुमलिन ग्लेशियर से और निश्रुतस्य जमीन के नीचे के पानी से बनता है।
🎯 Exam Tip: स्थलाकृतियों को उनके निर्माण के कारक (जैसे नदी, पवन, हिमानी, भूमिगत जल, सागरीय लहरें) के साथ याद रखने से ऐसे प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पृथ्वी सतह पर स्थलाकृतियों का निर्माण किसके द्वारा होता है?
Answer: पृथ्वी की सतह पर ज़मीन के रूपों का निर्माण धरती के अंदरूनी और बाहरी ताकतों के एक-दूसरे पर असर डालने से होता है। यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
In simple words: धरती पर नए ज़मीन के आकार अंदर और बाहर की शक्तियों के मेल से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: जब पृथ्वी की सतह पर स्थलाकृतियों के निर्माण के कारकों का उल्लेख करें, तो आंतरिक और बाह्य दोनों शक्तियों का ज़िक्र करना न भूलें।
Question 2. अनावृतिकरण का कार्य किसके द्वारा किया जाता है?
Answer: अनावृतिकरण का काम बाहरी ताकतों, जैसे अपक्षय (चट्टानों का टूटना), अपरदन (सामग्री का हटना), और सामूहिक स्थानान्तरण (ढलान से सामग्री का खिसकना) के ज़रिए होता है। ये प्रक्रियाएँ मिलकर ज़मीन की सतह को बदलती हैं।
In simple words: बाहरी ताकतें चट्टानों को तोड़ती हैं, मिट्टी हटाती हैं और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं, जिससे ज़मीन की ऊपरी परत का रूप बदलता है।
🎯 Exam Tip: अनावृतिकरण की प्रक्रियाओं में अपक्षय, अपरदन और सामूहिक स्थानान्तरण तीनों को शामिल करें ताकि पूरा उत्तर मिल सके।
Question 3. अपरदन के कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: अपरदन के मुख्य कारक नदी, समुद्री लहरें, हवा, हिमनद (ग्लेशियर) और भूमिगत जल हैं। ये सभी प्राकृतिक तत्व ज़मीन की ऊपरी सतह को हटाने और नई स्थलाकृतियाँ बनाने में मदद करते हैं।
In simple words: नदी, समुद्र की लहरें, हवा, बर्फ और ज़मीन के अंदर का पानी- ये सब ज़मीन को घिसते और नया आकार देते हैं।
🎯 Exam Tip: अपरदन के सभी पाँच प्रमुख कारकों का उल्लेख करें - नदी, सागरीय तरंगें, पवनें, हिमानी और भूमिगत जल।
Question 4. नदी जन्य अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ कौन-कौनसी हैं?
Answer: नदी से बनने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियों में मुख्य रूप से गार्ज, केनियन, जलप्रपात (वॉटरफॉल), क्षिप्रिकाएँ (रैपिड्स), जल गर्तिकाएँ (पॉटहोल्स), संरचनात्मक पीठिकाएँ, नदी विसर्प (मींडर्स) और समप्राय मैदान (पेनीप्लेन) शामिल हैं। ये सभी नदी के कटाव से बनते हैं।
In simple words: नदी अपने बहाव से कई आकार बनाती है, जैसे गहरी घाटियाँ, झरने और घुमावदार रास्ते।
🎯 Exam Tip: नदी द्वारा निर्मित प्रमुख अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के नाम याद रखें और प्रत्येक की एक संक्षिप्त परिभाषा भी तैयार रखें।
Question 5. केनियन किसे कहते हैं?
Answer: केनियन एक बहुत गहरी और संकरी घाटी होती है, जिसे नदी का पानी बनाता है। यह गार्ज से भी ज़्यादा पतली और गहरी होती है।
In simple words: केनियन नदी द्वारा बनी बहुत गहरी और पतली घाटी होती है।
🎯 Exam Tip: केनियन की परिभाषा में 'गार्ज से अधिक संकरी व गहरी' वाक्यांश का प्रयोग करके इसे गार्ज से अलग पहचान दें।
Question 7. नदी विसर्प क्या होता है?
Answer: नदी विसर्प का मतलब है जब नदी अपने रास्ते में ढलान के हिसाब से टेढ़े-मेढ़े या साँप जैसे आकार में बहती है। यह घुमावदार रास्ता ही नदी विसर्प कहलाता है।
In simple words: नदी जब साँप की तरह घूम-घूम कर बहती है, तो उसे नदी विसर्प कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नदी विसर्प की परिभाषा में 'घुमावदार स्वरूप' या 'साँप की भाँति बहना' जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें।
Question 8. पेनीप्लेन क्या होता है?
Answer: पेनीप्लेन एक समतल ज़मीन का इलाका होता है जो तब बनता है जब हिमनद, नदी, हवा, भूमिगत जल और समुद्र की लहरों जैसी बाहरी ताकतें, धरती के ऊँचे-नीचे हिस्सों को घिसकर एक समान और सपाट मैदान में बदल देती हैं।
In simple words: जब प्रकृति की ताकतें ज़मीन को घिस-घिस कर एक सपाट मैदान बना देती हैं, तो उसे पेनीप्लेन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पेनीप्लेन की परिभाषा में 'अन्तर्जात प्रक्रमों द्वारा उत्पन्न स्थलरूपों का बाह्य कारकों द्वारा समतल स्वरूप में बदलना' यह मुख्य बिंदु है।
Question 9. नदी से निर्मित निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
Answer: नदी द्वारा बनी निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों में जलोढ़ शंकु, जलोढ़ पंख, डेल्टा, प्राकृतिक तटबंध, बाढ़ के मैदान और गोखुर झील शामिल हैं। ये सभी नदी द्वारा लाए गए मलबे के जमाव से बनते हैं।
In simple words: नदी अपने साथ लाई मिट्टी और पत्थरों को जमा करके जलोढ़ शंकु, डेल्टा और गोखुर झील जैसे आकार बनाती है।
🎯 Exam Tip: नदी द्वारा निर्मित निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।
Question 10. डेल्टा किसे कहते हैं?
Answer: डेल्टा एक त्रिभुज के आकार का क्षेत्र होता है जो तब बनता है जब नदी समुद्र में मिलने से पहले अपने साथ लाए हुए जलोढ़ (मिट्टी और रेत) को अपने मुहाने पर जमा कर देती है।
In simple words: जब नदी समुद्र में मिलती है, तो वह अपनी मिट्टी को जमा करके एक त्रिभुज जैसा आकार बनाती है, जिसे डेल्टा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: डेल्टा की परिभाषा में 'नदी के मुहाने पर', 'जलोढ़क का निक्षेपण' और 'त्रिभुजाकार आकृति' मुख्य शब्द हैं।
Question 11. प्राकृतिक तटबंध का निर्माण कैसे होता है?
Answer: प्राकृतिक तटबंध तब बनते हैं जब नदी में बाढ़ आती है और पानी कम होने के बाद, नदी के किनारों पर महीन रेत और मिट्टी जमा हो जाती है। यह जमाव नदी के दोनों ओर एक ऊँची दीवार जैसा बन जाता है।
In simple words: बाढ़ के बाद नदी के किनारों पर मिट्टी जमा होकर जो ऊँचे बाँध जैसे बन जाते हैं, उन्हें प्राकृतिक तटबंध कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक तटबंध का निर्माण बाढ़ के दौरान नदी द्वारा लाए गए अवसादों के किनारों पर जमाव से होता है - इस बात पर जोर दें।
Question 12. बाढ़ का मैदान किसे कहते हैं?
Answer: बाढ़ का मैदान नदी का वह हिस्सा होता है जहाँ नदी बाढ़ के समय अपने साथ लाई मिट्टी और गाद को जमा करती है। इस तरह से बना सपाट क्षेत्र ही बाढ़ का मैदान कहलाता है।
In simple words: जब नदी में बाढ़ आती है और वह अपने साथ लाई मिट्टी को फैला देती है, तो वह क्षेत्र बाढ़ का मैदान कहलाता है।
🎯 Exam Tip: बाढ़ के मैदान की परिभाषा में 'बाढ़ के समय जलोढ़ को निक्षेपण' की प्रक्रिया को उजागर करें।
Question 14. सागरीय लहरों द्वारा निर्मित अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ कौन-कौनसी हैं?
Answer: समुद्री लहरों से बनने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियों में मुख्य रूप से भृगु (क्लिफ), लघु निवेशिका (खाड़ी), कन्दरा (गुफाएँ), वात छिद्र (ब्लोहोल), मेहराब (आर्क), गुहा स्तम्भ (स्टैक) और तरंग घर्षित वेदिका (वेव-कट प्लेटफॉर्म) शामिल हैं।
In simple words: समुद्र की लहरें कटाव करके समुद्री किनारे पर चट्टानें, गुफाएँ और मेहराब जैसे आकार बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: सागरीय लहरों द्वारा निर्मित अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के सभी प्रमुख उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 15. लघु निवेशिका किसे कहते हैं?
Answer: लघु निवेशिका (खाड़ी) एक अंडे के आकार की छोटी खाड़ी होती है जो तट के किनारे कठोर और नरम चट्टानों वाले क्षेत्रों में नरम चट्टानों के कटाव से बनती है।
In simple words: लघु निवेशिका एक छोटी, अंडे जैसी खाड़ी होती है जो समुद्र किनारे की नरम चट्टानों के कटने से बनती है।
🎯 Exam Tip: लघु निवेशिका की परिभाषा में 'तट के समानान्तर कठोर व कोमल शैलों वाले क्षेत्रों में कोमल शैलों के कटाव से बनी अण्डाकार आकृति' को मुख्य बिंदु के रूप में याद रखें।
Question 16. गुहा स्तम्भ किसे कहते हैं?
Answer: जब समुद्री लहरों से बनी प्राकृतिक मेहराब की छत टूट जाती है, तो समुद्र में जो खम्भे जैसी संरचना बच जाती है, उसे गुहा स्तम्भ कहते हैं।
In simple words: जब समुद्र की मेहराब की छत टूट जाती है, तो उसका बचा हुआ खम्भा गुहा स्तम्भ कहलाता है।
🎯 Exam Tip: गुहा स्तम्भ मेहराब के टूटने से बनता है - यह संबंध स्पष्ट करें।
Question 17. सागरीय लहरों की निक्षेपण प्रक्रिया से बनने वाली स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
Answer: समुद्री लहरों के जमाव से बनने वाली स्थलाकृतियों में पुलिन (बीच), कस्प पुलिन, स्पिट, रोधिका, अपतट रोधिका, हुक, लूप, संयोजन रोधिका, लैगून व खाड़ी रोधिका और टोम्बोलो शामिल हैं।
In simple words: समुद्र की लहरें मिट्टी और रेत जमा करके पुलिन, स्पिट और लैगून जैसी चीजें बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: सागरीय लहरों द्वारा निर्मित प्रमुख निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के उदाहरणों को याद रखें।
Question 18. कस्प पुलिन से क्या तात्पर्य है?
Answer: कस्प पुलिन समुद्र की ओर फैला हुआ बजरी और कंकड़-पत्थर से बना एक त्रिकोणीय समुद्र तट होता है।
In simple words: कस्प पुलिन समुद्र की ओर फैला हुआ, कंकड़-पत्थर से बना त्रिकोणीय बीच होता है।
🎯 Exam Tip: कस्प पुलिन की पहचान 'त्रिकोण के रूप में' और 'कंकड़-पत्थर, बजरी निर्मित' से होती है।
Question 19. अपतट रोधिका क्या है?
Answer: अपतट रोधिका एक बाँध या दीवार होती है जो तट से कुछ दूरी पर, लेकिन उसके समानांतर बनती है।
In simple words: अपतट रोधिका एक समुद्र किनारे से दूर, उसके समांतर बनी दीवार होती है।
🎯 Exam Tip: अपतट रोधिका तट से 'दूर' और 'समानान्तर' होती है - यह मुख्य विशेषता है।
Question 21. शुष्क स्थलाकृतियाँ किन क्रियाओं का परिणाम हैं? अथवा पवनजात स्थलाकृतियों के निर्माण में सहायक कारक कौन-से हैं?
Answer: सूखे रेगिस्तानी इलाकों में जो ज़मीन के आकार बनते हैं, वे हवा के बहाव, कटाव, घर्षण और धूल-मिट्टी के जमाव का नतीजा होते हैं। हवा इन इलाकों में चट्टानों को काटती है, छाँटती है और उनके टुकड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर जमा करती है।
In simple words: रेगिस्तानी ज़मीन के आकार हवा के कटने, घिसने और मिट्टी जमा करने से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: शुष्क स्थलाकृतियों के निर्माण में पवन की अपवाहन, अपघर्षण, सन्निघर्षण और निक्षेपण क्रियाओं का उल्लेख करें।
Question 12. पवन से निर्मित होने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
Answer: हवा से बनने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियों में वातगर्त, द्वीपाभगिरी, छत्रकशिला (मशरूम रॉक), भू-स्तम्भ, तिपहलशिला, अश्मिक जालिका, ज्यूगेन और यारडंग शामिल हैं। ये सभी हवा के कटाव से बनते हैं।
In simple words: हवा के कटाव से वातगर्त, छत्रकशिला और भू-स्तम्भ जैसे ज़मीन के रूप बनते हैं।
🎯 Exam Tip: पवन द्वारा निर्मित अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।
Question 23. वातगर्त किसे कहते हैं?
Answer: रेगिस्तानी इलाकों में जब हवा ढीली और टूटी हुई चट्टानों या मिट्टी को उड़ाकर ले जाती है, तो ज़मीन पर जो गहरा गड्ढा बन जाता है, उसे वातगर्त कहते हैं।
In simple words: हवा जब रेगिस्तान की मिट्टी उड़ाकर गड्ढा बना देती है, तो उसे वातगर्त कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वातगर्त की परिभाषा में 'पवन द्वारा ढीली व असंगठित शैलों को उड़ाकर ले जाने' और 'गर्त बनने' पर केंद्रित रहें।
Question 24. द्वीपाभगिरी से क्या तात्पर्य है? अथवा इन्सेलबर्ग किसे कहते हैं?
Answer: रेगिस्तानी इलाकों में जो कठोर चट्टानों के टीले अपरदन (घिसाव) के बाद भी बचे रह जाते हैं, उन्हें द्वीपाभगिरी या इन्सेलबर्ग कहते हैं। ये टीले रेगिस्तान के विशाल मैदान में द्वीप या पहाड़ की तरह दिखते हैं।
In simple words: रेगिस्तान में घिसने के बाद भी बचे हुए कठोर चट्टानों के टीलों को द्वीपाभगिरी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: द्वीपाभगिरी को 'कठोर शैलों के अवशिष्ट टीले' के रूप में परिभाषित करें जो अपरदन के बाद बचे रहते हैं।
Question 25. ज्यूजेन से क्या तात्पर्य है?
Answer: ज्यूजेन रेगिस्तानी इलाकों में बनने वाले ज़मीन के आकार हैं, जो तब बनते हैं जब हवा कठोर और नरम चट्टानों की परतों को एक के बाद एक घिसती है, जिससे दवात जैसी आकृति बन जाती है।
In simple words: रेगिस्तान में हवा जब कठोर और नरम चट्टानों को घिसती है, तो दवात जैसी आकृति बनती है, जिसे ज्यूजेन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ज्यूजेन की परिभाषा में 'क्षैतिज क्रम में बिछी कठोर व कोमल शैलों की परतों' और 'दवातनुमा आकृतियों' को शामिल करें।
Question 27. बालुका स्तूपों से क्या तात्पर्य है?
Answer: रेगिस्तानी इलाकों में हवा द्वारा उड़ाई गई मिट्टी के जमाव से जो छोटे-छोटे टीले बनते हैं और जो हवा के साथ अपनी जगह बदलते रहते हैं, उन्हें बालुका स्तूप कहते हैं।
In simple words: रेगिस्तान में हवा से बनी छोटी-छोटी रेत की ढेरियों को बालुका स्तूप कहते हैं, जो हवा के साथ चलती रहती हैं।
🎯 Exam Tip: बालुका स्तूप की पहचान 'वायु द्वारा उड़ायी गयी मृदा के निक्षेपण' और 'छोटे-छोटे गतिशील टीले' के रूप में करें।
Question 28. हिमानीजात स्थलाकृतियों का निर्माण कैसे होता है?
Answer: ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में ज़मीन के आकार ग्लेशियरों के उखाड़ने (उत्पाटन), घिसने (अपघर्षण), टकराने (सन्निघर्षण) और बर्फ के जमाव से बनते हैं।
In simple words: ग्लेशियर ज़मीन को तोड़कर, घिसकर और बर्फ जमा करके नए ज़मीन के आकार बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानीजात स्थलाकृतियों के निर्माण में हिमानी के उत्पाटन, अपघर्षण, सन्निघर्षण और हिम निक्षेपण को मुख्य कारकों के रूप में स्पष्ट करें।
Question 29. हिमानी के अपरदन से निर्मित स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
Answer: ग्लेशियर के कटाव से बनने वाली स्थलाकृतियों में यू-आकार की घाटी, लटकती घाटी, हिम गह्वर (सर्क), टार्न (सर्क झील), नूनाटक, कॉल, श्रृंग व पुच्छ, मेषशिला और फियोर्ड शामिल हैं।
In simple words: ग्लेशियर घिसकर यू-आकार की घाटी, सर्क और फियोर्ड जैसे ज़मीन के रूप बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानी द्वारा निर्मित अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।
Question 30. हिमानी निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ कौन-सी हैं?
Answer: ग्लेशियर के जमाव से बनने वाली स्थलाकृतियों में हिमोढ़ (मोरेन), एस्कर, केम, केटील, डुमलिन और हिमानी अवक्षेप मैदान शामिल हैं।
In simple words: ग्लेशियर मिट्टी और पत्थर जमा करके हिमोढ़, एस्कर और डुमलिन जैसे आकार बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानीजात निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों की सूची प्रदान करें।
Question 31. हिमोढ़ से क्या तात्पर्य है?
Answer: हिमोढ़ का मतलब है ग्लेशियर द्वारा जमा किए गए कंकड़, पत्थर और चट्टानों के ढेर। ये जमाव ज़्यादातर ग्लेशियर के किनारों, उसके आखिरी हिस्से या तल पर मिलते हैं।
In simple words: हिमोढ़ ग्लेशियर द्वारा जमा किए गए पत्थरों और मिट्टी का ढेर होता है, जो किनारों पर पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: हिमोढ़ को 'हिमानी द्वारा निक्षेपित कंकड़, पत्थर व गोलाश्मों का जमाव' के रूप में परिभाषित करें, और उसके स्थान का भी उल्लेख करें।
Question 32. हिमानी अवक्षेप मैदान से क्या तात्पर्य है?
Answer: हिमानी अवक्षेप मैदान वह सपाट ज़मीन का क्षेत्र है जहाँ ग्लेशियर का पिघला हुआ पानी अपने साथ लाई मिट्टी और पत्थरों को दूर तक फैला देता है, खासकर उन जगहों पर जहाँ ज़मीन की ढलान कम हो जाती है।
In simple words: जब ग्लेशियर का पिघला पानी मिट्टी-पत्थर फैलाकर एक बड़ा सपाट मैदान बनाता है, तो उसे हिमानी अवक्षेप मैदान कहते हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानी अवक्षेप मैदान की परिभाषा में 'हिम जल प्रवाह से मलबे का दूर तक प्रवाहन' और 'ढाल कम होने पर बड़े क्षेत्र में फैलाव' पर ध्यान दें।
Question 34. कार्ट प्रदेश से क्या तात्पर्य है?
Answer: कार्ट प्रदेश उस क्षेत्र को कहते हैं जहाँ चूने की चट्टानें होती हैं और भूमिगत जल के कारण कई अनोखी स्थलाकृतियाँ बनती हैं। 'कार्ट' शब्द यूगोस्लेविया के 'क्रास' शब्द से आया है, जिसका मतलब चूने का क्षेत्र होता है।
In simple words: कार्ट प्रदेश वह जगह है जहाँ चूने की चट्टानें होती हैं और पानी से बनी खास तरह की ज़मीन दिखती है।
🎯 Exam Tip: कार्ट प्रदेश की परिभाषा में 'चूने के प्रदेश' और 'यूगोस्लेव भाषा के क्रास शब्द' के मूल को शामिल करें।
Question 35. चूना प्रदेशों में बनने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
Answer: चूना प्रदेशों में अपरदन से बनने वाली स्थलाकृतियों में टेरा रोसा, लेपिज, घोलरंध्र, विलय रंध्र, डोलाइन, सकुण्ड, राजकुण्ड, धंसती निवेशिका और अंधी घाटी शामिल हैं।
In simple words: चूना प्रदेशों में पानी के कटाव से टेरा रोसा, लेपिज और डोलाइन जैसे आकार बनते हैं।
🎯 Exam Tip: चूना प्रदेशों की अपरदनात्मक स्थलाकृतियों के सभी प्रमुख उदाहरणों को सूचीबद्ध करें।
Question 36. चूना प्रदेशों में बनने वाली निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ कौन-सी हैं?
Answer: चूना प्रदेशों में जमाव से बनने वाली स्थलाकृतियों में आश्चताश्म (स्टेलैग्टाइट), निश्चताश्म (स्टेलैग्माइट), गुहा स्तम्भ, ड्रिपस्टोन और नोडुल्स शामिल हैं।
In simple words: चूना प्रदेशों में चूने के जमाव से स्टेलैग्टाइट, स्टेलैग्माइट और गुहा स्तम्भ जैसे आकार बनते हैं।
🎯 Exam Tip: चूना प्रदेशों की निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें।
Question 37. धंसती निवेशिका से क्या तात्पर्य है?
Answer: धंसती निवेशिका का मतलब है चूने की सतह पर कई छोटे-छोटे छेद, जहाँ पानी ज़मीन के अंदर चला जाता है। यह एक डूबने वाले बेसिन जैसा दिखता है।
In simple words: धंसती निवेशिका वह जगह है जहाँ चूने की ज़मीन में छेद होते हैं और पानी नीचे चला जाता है।
🎯 Exam Tip: धंसती निवेशिका की परिभाषा में 'चूने की सतह पर असंख्य छिद्रों' और 'जल का धंसना' को मुख्य बिंदु के रूप में समझाएँ।
Question 38. नोडल्स किसे कहते हैं?
Answer: नोडल्स चट्टानों के छेदों में खनिज घोल के जमाव को कहते हैं। ये घोल सूखकर ठोस गांठें बन जाते हैं।
In simple words: नोडल्स चट्टानों के छेदों में जमे हुए खनिज घोल की गांठें होती हैं।
🎯 Exam Tip: नोडल्स को 'शैल छिद्रों में खनिज घोल के जमाव' के रूप में परिभाषित करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 लघूतात्मक प्रश्न Type I
Question 1. अपरदन के कारकों के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: अपरदन के कारक - जैसे नदी, समुद्री लहरें, हवा, हिमनद और भूमिगत जल - पृथ्वी की सतह को आकार देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सभी कारक मिलकर ज़मीन के ऊँचे-नीचे हिस्सों को समतल बनाते हैं और नई स्थलाकृतियाँ भी बनाते हैं। यह ज़रूरी नहीं कि सभी कारक एक ही गति से काम करें, लेकिन उनका सामूहिक प्रभाव धरती के रूप को लगातार बदलता रहता है।
In simple words: अपरदन के कारक (नदी, हवा, बर्फ़ आदि) धरती की ज़मीन को काटते-छाँटते हैं और उसे नया आकार देते हैं।
🎯 Exam Tip: अपरदन के कारकों की भूमिका को उनके सामूहिक प्रभाव और स्थलाकृति परिवर्तन में उनकी महत्ता के संदर्भ में स्पष्ट करें।
Question 2. क्षिप्रिका व जल गर्तिका में क्या अन्तर होता है?
Answer:
| क्षिप्रिका | जल गर्तिका |
|---|---|
| 1. नदी मार्ग के वे भाग जहाँ ऊपर उठी कठोर शैलों के कारण नदी उछलती हुई बहती है उन्हें क्षिपिका कहते हैं। | 1. नदी की तली में जल के वेग की छेदन क्रिया से निर्मित गर्तों को जल गर्तिका कहते हैं। |
| 2. क्षिप्रिका प्रपात का एक छोटा एवं सामान्य रूप होती है। | 2. अधिक बड़ी गर्तिकाएँ अवनमन कुण्डों का निर्माण करती हैं। |
| 3. क्षिप्रिका में ऊँचाई प्रपात की अपेक्षा कम होती है। | 3. जल गर्तिकाओं से नदी का तल गहरा होता जाता है। |
| 4. क्षिप्रिकाएँ प्रायः लम्ब तल पर होती हैं। | 4. गर्तिकाएँ प्रायः आधार तल पर निर्मित होती हैं। |
In simple words: क्षिप्रिका वह जगह है जहाँ नदी कठोर चट्टानों पर उछलकर बहती है, जबकि जल गर्तिका नदी के तल में पानी के दबाव से बने गड्ढे होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्षिप्रिका और जल गर्तिका के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी परिभाषा, आकार और निर्माण प्रक्रिया पर ध्यान दें।
Question 3. जलोढ़ शंकु और जलोढ़ पंख में क्या अन्तर होता है?
Answer:
| जलोढ़ शंकु | जलोढ़ पंख |
|---|---|
| 1. जलोढ़ शंकु में ढाल अधिक मिलती है। | 1. जलोढ़ पंख में ढाल कम पाया जाता है। |
| 2. यह नदी के पर्वतों से मैदान में प्रवेश करते समय पर्वतीय ढाल पर शंकु के आकार में मलबे का जमाव होता है। | 2. यह नदी के पर्वत से मैदान में प्रवेश करते समय मलबे के पंखेनुमा आकार में जमाव होते हैं। |
| 3. जलोढ़ शंकु की स्थिति में सरिता का अधिक विभाजन नहीं होता है। | 3. जलोढ़ पंख की स्थिति में सरिता का अनेक भागों में विभाजन हो जाता है। |
In simple words: जलोढ़ शंकु पहाड़ से मैदान में आते ही नदी द्वारा जमा की गई मिट्टी का ऊँचा, शंकु जैसा ढेर होता है, जबकि जलोढ़ पंख एक सपाट, पंखे जैसा जमाव होता है।
🎯 Exam Tip: जलोढ़ शंकु और जलोढ़ पंख के अंतर को ढाल, आकार और नदी के विभाजन के आधार पर समझाएँ।
Question 4. शुष्क क्षेत्रों की स्थलाकृतियाँ क्या होती हैं?
Answer: सूखे रेगिस्तानी इलाकों में ज़मीन के आकार हवा के कटाव और जमाव की प्रक्रियाओं से बनते हैं। हवा इन इलाकों से मिट्टी उड़ाती है, चट्टानों को घिसती है और फिर उन्हें कहीं और जमा करती है। इस तरह बनी ज़मीन के रूपों को पवनजात, मरुस्थलीय या शुष्क स्थलाकृतियाँ कहते हैं।
In simple words: शुष्क इलाकों में हवा मिट्टी को काटती, घिसती और जमा करती है, जिससे खास तरह के ज़मीन के आकार बनते हैं।
🎯 Exam Tip: शुष्क स्थलाकृतियों की परिभाषा में पवन की अपरदनात्मक और निक्षेपणात्मक क्रियाओं के संयुक्त प्रभाव को उजागर करें।
Question 5. बालुका स्तूपों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: बालुका स्तूप रेत के छोटे-छोटे ढेर होते हैं जो हवा द्वारा एक जगह से दूसरी जगह ले जाई गई रेत के जमाव से बनते हैं। ये ज़्यादातर सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में पाए जाते हैं। बालुका स्तूप गोल, अर्धचंद्राकार या घुमावदार हो सकते हैं और इनकी ऊँचाई कुछ मीटर से लेकर 20 मीटर तक हो सकती है। ये टीले हवा के अनुसार अपनी जगह बदलते रहते हैं।
In simple words: बालुका स्तूप हवा द्वारा बनी रेत की टीले होते हैं, जो अलग-अलग आकार के होते हैं और अपनी जगह बदलते रहते हैं।
🎯 Exam Tip: बालुका स्तूपों की व्याख्या में उनके निर्माण (हवा द्वारा निक्षेपण), स्थान (शुष्क/अर्ध-शुष्क क्षेत्र) और विभिन्न आकारों (गोल, नवचंद्राकार) का उल्लेख करें।
Question 6. जलोढ़ निर्मित मैदान व हिमोढ अवक्षेप मैदान में क्या अन्तर होता है?
Answer:
| जलोढ़ मैदान | हिमोढ़ मैदान |
|---|---|
| 1. इस प्रकार के मैदानों का निर्माण प्रवाहित जल के निक्षेपण से होता है। | 1. इस प्रकार के मैदानों का निर्माण हिमानी निक्षेपण से होता है। |
| 2. जलोढ़ मैदान काँप मिट्टी के मैदान होते हैं। | 2. हिमोढ़ मैदान बर्फ निर्मित मैदान होते हैं। |
| 3. जलोढ़ मैदान नदियों के द्वारा निक्षेपित मृदा से बने होने के कारण कृषि के दृष्टिकोण से उपजाऊ होते हैं। | 3. हिमोढ़ मैदान बर्फ से बने होने के कारण उपजाऊ नहीं होते हैं। |
In simple words: जलोढ़ मैदान नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बनते हैं और उपजाऊ होते हैं, जबकि हिमोढ़ मैदान ग्लेशियरों द्वारा लाई गई बर्फ से बनती है और कम उपजाऊ होती है।
🎯 Exam Tip: जलोढ़ और हिमोढ़ मैदान के अंतर को उनके निर्माण के कारक (जल बनाम हिमानी), मिट्टी के प्रकार और कृषि उपयोगिता के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 7. भूमिगत जल निर्मित स्थलाकृतियों से क्या तात्पर्य है?
Answer: भूमिगत जल निर्मित स्थलाकृतियों का मतलब उन ज़मीन के रूपों से है जो पृथ्वी की ऊपरी सतह के नीचे चट्टानों के छेदों और दरारों में मौजूद पानी के कारण बनते हैं। चूना पत्थर वाले क्षेत्रों में, यह पानी घुलन क्रिया द्वारा सतह के ऊपर और नीचे कई अनोखे आकार बनाता है। ऐसे क्षेत्रों को कार्ट प्रदेश कहते हैं, और यहाँ बनने वाली स्थलाकृतियों को कार्ट स्थलाकृतियाँ कहा जाता है।
In simple words: भूमिगत जल ज़मीन के अंदर की चट्टानों में छेद और दरारें बनाकर अलग-अलग तरह की आकृतियाँ बनाता है, खासकर चूना पत्थर वाले इलाकों में।
🎯 Exam Tip: भूमिगत जल निर्मित स्थलाकृतियों की परिभाषा में 'पृथ्वी की ऊपरी सतह के नीचे', 'चूने पत्थर वाली चट्टानों' और 'घुलन क्रिया' पर बल दें।
Question 8. घोल रन्ध्र और विलयन रन्ध्र में क्या अन्तर है?
Answer:
| घोल रन्ध्र | विलयन रन्ध्र |
|---|---|
| 1. इनका आकार छोटा होता है। | 1. इनका आकार बड़ा होता है। |
| 2. इनका निर्माण कार्बन डाइ-ऑक्साइड के साथ जल के सक्रिय घोलन के कारण होता है। | 2. इनका निर्माण घोल रन्ध्रों के आपस में मिल जाने से होता है। |
| 3. घोल रन्ध्रों की चूना प्रदेशों में अधिक संख्या मिलती है। | 3. विलयन रन्ध्रों की संख्या कम मिलती है। |
In simple words: घोल रन्ध्र छोटे होते हैं और पानी में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के घुलने से बनते हैं। विलयन रन्ध्र बड़े होते हैं और तब बनते हैं जब कई छोटे घोल रन्ध्र आपस में मिल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: घोल रन्ध्र और विलयन रन्ध्र के अंतर को उनके आकार, निर्माण प्रक्रिया और संख्या के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 9. शिखरिका एवं विदर में क्या अन्तर है?
Answer: चूना प्रदेशों में अपरदन की प्रक्रिया से जो नुकीले और कटे-फटे ज़मीन के आकार बनते हैं, उन्हें लेपिज कहते हैं। लेपिज में जो ऊँचे, नुकीले कटक (रिज) होते हैं, उन्हें शिखरिका कहते हैं। वहीं, इन ऊँचे कटकों के बीच जो गड्ढे या गर्तनुमा हिस्से होते हैं, उन्हें विदर कहते हैं।
In simple words: शिखरिका चूना पत्थर वाले इलाकों में बनी नुकीली ऊँची धारियाँ होती हैं, और विदर इन धारियों के बीच के गड्ढे होते हैं।
🎯 Exam Tip: शिखरिका को 'तीक्ष्ण कटक' और विदर को 'गर्तनुमा भाग' के रूप में परिभाषित करते हुए उनके संबंध को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 लघूतात्मक प्रश्न Type II
Question 2. पवनकृत निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए। अथवा मरुस्थलीय क्षेत्रों में बालू के जमाव से किन स्थलाकृतियों का निर्माण होता है?
Answer: मरुस्थलीय क्षेत्रों में, जहाँ बहुत ज़्यादा तापमान और कम नमी होती है, हवा मिट्टी और रेत को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर जमा करती है। इस जमाव से कई तरह की स्थलाकृतियाँ बनती हैं, जिन्हें निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ कहते हैं। हवा के जमाव से बनने वाली कुछ प्रमुख आकृतियाँ इस प्रकार हैं:
1. बालुका स्तूप - ये रेत के छोटे-छोटे, गतिशील ढेर होते हैं जो हवा के साथ अपनी जगह बदलते रहते हैं।
2. उर्मिकाएँ - ये समुद्र की लहरों की तरह, मरुस्थलों की रेतीली सतह पर बनने वाले छोटे-छोटे ज़मीन के आकार होते हैं।
3. बालुका प्रवाह - ये रेत की लंबी, गतिशील लकीरें होती हैं जो ज़मीन की बनावट के सहारे बनती हैं।
4. बालुका कगार - ये रेत की लंबी, चौड़ी और ऊँची पहाड़ियाँ होती हैं।
5. लोयस - ये हवा द्वारा उड़ाए गए बहुत छोटे धूल के कणों के जमाव से बनते हैं।
In simple words: रेगिस्तान में हवा रेत और धूल जमा करके रेत के टीले (बालुका स्तूप), छोटी लहरें (उर्मिकाएँ), लंबी रेत की दीवारें और लोयस जैसे आकार बनाती है।
🎯 Exam Tip: पवनकृत निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों का वर्णन करते समय बालुका स्तूप, उर्मिकाएँ, बालुका प्रवाह, बालुका कगार और लोयस के बारे में विस्तार से बताएँ।
Question 3. हिमानीकरण के प्रभावों का विवेचन कीजिए।
Answer: हिमानीकरण (ग्लेशियर के बनने और चलने की प्रक्रिया) के पृथ्वी पर कई बड़े प्रभाव पड़ते हैं:
1. यह पुराने ज़मीन के रूपों को बदलता है और नए बनाता है।
2. यह समुद्र के स्तर को बदलता है।
3. इसके कारण ज़मीन और समुद्र के हिस्से ऊपर-नीचे होते हैं (उन्मज्जन और निमज्जन)।
4. यह ज़मीन के नए-नए नज़ारे बनाता है।
5. यह नदियों की घाटी को भी नए आकार देता है।
6. इससे कई तरह की झीलें बनती हैं।
In simple words: ग्लेशियर ज़मीन और समुद्र के रूपों को बदलते हैं, नए ज़मीन के आकार बनाते हैं, और झीलें बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: हिमानीकरण के प्रभावों को समझाते समय भू-आकृति परिवर्तन, समुद्र तल पर प्रभाव और झीलों के निर्माण जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल करें।
Question 4. सकुण्ड व राजकुण्ड में अन्तर स्पष्ट कीजिए। अथवा सकुण्ड व राजकुण्ड को स्पष्ट कीजिए। अथवा युवाला व पोल्जे को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सकुण्ड (युवाला) और राजकुण्ड (पोल्जे) चूना प्रदेशों में भूमिगत जल की क्रिया से बनने वाली अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ हैं। ये दोनों मुख्य रूप से घुलन क्रिया के कारण बनती हैं। इनके बीच के अंतर नीचे दिए गए हैं:
| सकुण्ड (युवाला) | राजकुण्ड (पोल्जे) |
|---|---|
| 1. सकुण्ड कई डोलाइनों के लगातार घुलने और आपस में मिल जाने से बनते हैं। | 1. राजकुण्ड चूना पत्थर वाली चट्टानों के नीचे की ओर टूटने और धंसने वाले हिस्सों में घुलने से बनते हैं। |
| 2. सकुण्ड का व्यास आमतौर पर एक किलोमीटर तक होता है। | 2. राजकुण्ड का व्यास कई वर्ग किलोमीटर में फैला होता है। |
| 3. इनकी दीवारें सीधी खड़ी होती हैं जो ऊपरी सतह से जुड़ी होती हैं। | 3. इनकी तली या फर्श सपाट होती हैं और दीवारें सीधी खड़ी होती हैं। |
| 4. इन्हें पोल्जे (पोलिये) के नाम से भी जाना जाता है। |
In simple words: सकुण्ड छोटे गड्ढे होते हैं जो कई डोलाइन के मिलने से बनते हैं, जबकि राजकुण्ड बड़े, सपाट तल वाले गड्ढे होते हैं जो ज़मीन के धंसने से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: सकुण्ड और राजकुण्ड के अंतर को उनके निर्माण प्रक्रिया, आकार और तल की विशेषताओं के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 5. आश्चताश्म व निश्चताश्म में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: आश्चताश्म (स्टेलैग्टाइट) और निश्चताश्म (स्टेलैग्माइट) दोनों चूना प्रदेशों में भूमिगत जल के जमाव से बनने वाली स्थलाकृतियाँ हैं। ये चूने में पानी के घुलने से बनती हैं। इनके बीच के अंतर नीचे दिए गए हैं:
| आश्चताश्म | निश्चुताश्म |
|---|---|
| 1. यह चूना प्रदेशों में गुफा की ऊपरी छत से नीचे की ओर बढ़ती हुई स्थलाकृति है। | 1. यह चूना प्रदेशों में गुफा की फर्श या निचली सतह से ऊपर की ओर बढ़ती हुई स्थलाकृति है। |
| 2. यह गुफाओं की ऊपरी सतह से नीचे की ओर लटकती हुई स्थलाकृति है। | 2. यह गुफा की निचली सतह से ऊपर की ओर उठती हुई स्थलाकृति है। |
| 3. इसका नुकीला भाग नीचे की ओर होता है। | 3. इसका नुकीला भाग ऊपर की ओर होता है। |
| 4. यह स्थलाकृति छत से टपकते जल से चूने के जमाव से बनती है। | 4. यह स्थलाकृति टपकते जल के गुरुत्वाकर्षण से जमीन पर गिरकर बनती है। |
| 5. इसे स्टेलैग्टाइट कहा जाता है। | 5. इसे स्टेलैग्माइट भी कहते हैं। |
In simple words: आश्चताश्म (स्टेलैग्टाइट) गुफा की छत से नीचे लटकते हैं, जबकि निश्चताश्म (स्टेलैग्माइट) गुफा के फर्श से ऊपर बढ़ते हैं।
🎯 Exam Tip: आश्चताश्म और निश्चताश्म के अंतर को उनकी स्थिति (छत से/फर्श से), दिशा (नीचे की ओर/ऊपर की ओर) और निर्माण प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. सागरीय लहरों से निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए। अथवा तरंगों से निर्मित धरातलीय स्वरूपों को स्पष्ट कीजिए। अथवा तटीय स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: हवा के प्रहार से समुद्र की सतह पर उठने वाली हलचल को लहरें कहते हैं। ये लहरें समुद्र तट पर पानी की तेज़ गति, घर्षण और पानी के दबाव के साथ-साथ मिट्टी और रेत के जमाव से कई तरह की अपरदनात्मक और निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ बनाती हैं।
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ
(अ) वात छिद्र - समुद्री किनारे की गुफाओं की छत पर जब ज्वारीय लहरें छेद कर देती हैं, तो उन्हें वात छिद्र कहते हैं।
(ब) मेहराब - यह तब बनता है जब समुद्र तट पर दो तरफ से बनी गुफाएँ आपस में मिल जाती हैं।
(स) गुहा स्तम्भ - जब मेहराब की छत टूट जाती है, तो बचा हुआ खम्भा गुहा स्तम्भ कहलाता है।
(द) तरंग घर्षित वेदिका - यह एक समतल चबूतरा होता है जो समुद्री चट्टानों के पीछे हटने से बनता है।
(ii) निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ
(अ) पुलिन - यह समुद्र तट पर लहरों द्वारा मिट्टी और रेत के जमाव से बनता है।
(ब) कस्प पुलिन - यह समुद्र की ओर फैला हुआ कंकड़-पत्थर और बजरी से बना त्रिकोणीय समुद्र तट होता है।
(स) स्पिट - यह लहरों द्वारा समुद्र की ओर जीभ के आकार में बनाया गया जमाव है।
(द) रोधिका - यह तरंगों या धाराओं द्वारा बनाया गया कटक या बाँध है।
(य) अपतट रोधिका- यह तट से दूर, लेकिन उसके समानांतर बनी बाँध या दीवार है।
(र) हुक - यह स्पिट का आधा-चंद्राकार घुमावदार जमाव है।
(ल) लूप - जब हुक घूमकर तट से मिल जाता है तो लूप जैसा आकार बनता है।
(व) संयोजक रोधिका - यह दो द्वीपों को जोड़ने वाला बाँध या दीवार है।
(म) लैगून एवं खाड़ी रोधिका - किसी खाड़ी के दोनों छोरों पर बनी दीवार या बाँध है जो खाड़ी को बंद कर देती है, जिससे लैगून बनता है।
(न) टोम्बोलो - यह द्वीपों को तट से जोड़ने वाली रोधिका है।
In simple words: समुद्र की लहरें कटकर (अपरदनात्मक) चट्टानों को गुफाओं, मेहराबों और खंभों में बदलती हैं। वे मिट्टी जमा करके (निक्षेपणात्मक) पुलिन, स्पिट और लैगून जैसे किनारे बनाती हैं।
🎯 Exam Tip: सागरीय लहरों द्वारा निर्मित अपरदनात्मक और निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियों के प्रमुख उदाहरणों और उनके निर्माण की प्रक्रियाओं को चित्र सहित समझाना बहुत प्रभावी होता है।
Question 2. वायु निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए। अथवा शुष्क प्रदेशों के भू-आकारों का वर्णन कीजिए। अथवा मरुस्थलीय क्षेत्रों में बनने वाली स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: रेगिस्तानी इलाकों में, हवा के कटाव और जमाव की क्रियाओं से कई तरह के ज़मीन के आकार बनते हैं। हवा इन क्षेत्रों से मिट्टी उड़ाती है, चट्टानों को घिसती है, और फिर उन मिट्टी-पत्थरों को कहीं और जमा करती है, जिससे नई स्थलाकृतियाँ बनती हैं।
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ
(अ) वातगर्त - ये गड्ढे तब बनते हैं जब हवा ढीली और टूटी हुई चट्टानों या मिट्टी को उड़ाकर ले जाती है।
(ब) द्वीपाभगिरी - ये कठोर चट्टानों के ऊँचे टीले होते हैं जो रेगिस्तान के विशाल मैदान में द्वीप या पहाड़ की तरह दिखते हैं, क्योंकि उनके आसपास की नरम चट्टानें हवा से कट चुकी होती हैं।
In simple words: हवा रेगिस्तानी इलाकों में कटाव (वातगर्त, द्वीपाभगिरी) और जमाव (बालुका स्तूप, उर्मिकाएँ) से अलग-अलग तरह के ज़मीन के आकार बनाती है।
🎯 Exam Tip: वायु निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन करते समय अपरदनात्मक और निक्षेपणात्मक दोनों प्रकार की आकृतियों के प्रमुख उदाहरणों को शामिल करें।
Question 2. वायु निर्मित स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: मरुस्थलीय क्षेत्रों में हवा के अपरदन (कटाव) और निक्षेपण (जमाव) से कई तरह की जमीन की आकृतियाँ बनती हैं। हवा इन इलाकों में चट्टानों को काटती है, तोड़ती है और उनके छोटे कणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर जमा करती है। इस प्रक्रिया से मरुस्थलीय या सूखे इलाकों में दो प्रकार की स्थलाकृतियाँ बनती हैं:
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ (जो कटाव से बनती हैं):
(अ) वातगर्त: ये ऐसे गड्ढे होते हैं जो हवा द्वारा ढीली और बिखरी हुई चट्टानों को उड़ा ले जाने से बनते हैं।
(ब) द्वीपाभगिरी: ये मरुस्थल में कठोर चट्टानों के ऊँचे टीले होते हैं जो दूर से किसी द्वीप या पहाड़ जैसे दिखते हैं।
(व) यारडंग: ये नरम और कठोर चट्टानों की लंबी, सीधी परतों के कटाव से बने नुकीले भू-आकार होते हैं।
(ii) निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ (जो जमाव से बनती हैं):
(अ) बालुका स्तूप: ये रेत के छोटे, गतिशील ढेर होते हैं जो हवा के साथ अपनी जगह बदलते रहते हैं।
(ब) उर्मिकाएँ: ये समुद्र की लहरों की तरह दिखने वाले छोटे-छोटे उभार होते हैं जो मरुस्थल की रेतीली सतह पर बनते हैं।
(स) बालु का प्रवाह: ये हवा के कारण रेत के लंबे, गतिशील टीले होते हैं जो किसी रुकावट के सहारे बनते हैं।
(द) बालुका कगार: ये रेत की लंबी और चौड़ी चोटियों वाली आकृतियाँ होती हैं।
(य) लोयस: हवा द्वारा उड़ाई गई बारीक धूल के जमाव को लोयस कहते हैं।
In simple words: हवा रेगिस्तान में चट्टानों को काटकर और रेत-धूल जमा करके कई तरह की जमीन की आकृतियाँ बनाती है, जिनमें हवा से बने गड्ढे, रेत के टीले और लहरदार सतहें शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: For questions on wind-formed landforms, clearly distinguish between erosional (अपरदनात्मक) and depositional (निक्षेपणात्मक) features and provide distinct examples for each.
Question 3. भूमिगत जल से बनने वाली स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों में जो पानी जमा होता है, उसे भूमिगत जल कहते हैं। खासकर चूना-पत्थर वाली चट्टानों के क्षेत्रों में, यह भूमिगत जल घुलने की क्रिया से सतह के ऊपर और नीचे कई तरह की जमीन की आकृतियाँ बनाता है। चूने के इस क्षेत्र को 'कार्स्ट प्रदेश' कहा जाता है। 'कार्स्ट' शब्द यूगोस्लाविया के 'क्रास' शब्द से आया है, जिसका अर्थ है 'चूने का क्षेत्र'। इसी नाम पर दुनिया भर के चूना-पत्थर वाले इलाकों में बनी आकृतियों को कार्स्ट स्थलाकृति कहा जाता है। यहाँ पानी के कटाव और जमाव से अलग-अलग तरह की आकृतियाँ बनती हैं:
(i) अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ (कटाव से बनीं):
(अ) टेरा रोसा: ये घुलने की क्रिया से बनी लाल और भूरी रंग की मिट्टी होती हैं।
(ब) लेपिज: ये किसी बिस्तर जैसी दिखने वाली नुकीली और कटी हुई भू-आकृतियाँ होती हैं।
(स) गर्त, विलय रंध्र व डोलाइन: ये भूमिगत जल की घुलन क्रिया से निर्मित गड्ढे होते हैं, जिनमें विलय रंध्र (बड़े छेद) और डोलाइन (घोल से बने बेसिन) शामिल हैं।
(व) धंसती निवेशिका: चूने की सतह पर जहाँ बहुत सारे छिद्रों से पानी जमीन में समा जाता है, उसे धंसती निवेशिका कहते हैं।
(श) अन्धी घाटी: चूने वाले क्षेत्रों में जब कोई नदी डोलाइन या ऐसे ही छिद्रों से जमीन के नीचे चली जाती है, तो उसके आगे की घाटी सूखी रह जाती है, जिसे अन्धी घाटी कहते हैं।
(ii) निक्षेपणात्मक स्थलाकृतियाँ (जमाव से बनीं):
(अ) आश्चताश्म (स्टेलैग्टाइट): यह गुफा की छत से नीचे लटकने वाली ठोस और नुकीली आकृति होती है, जो छत से रिसने वाले पानी के वाष्पीकरण से बनती है।
(ब) निश्चताश्म (स्टेलैग्माइट): यह गुफा के फर्श पर बनने वाली खंभे जैसी आकृति होती है, जो छत से टपकने वाले पानी से बनती है।
(स) गुहा स्तम्भ: जब आश्चताश्म और निश्चताश्म आपस में मिल जाते हैं, तो एक खंभे जैसी आकृति बनती है, जिसे गुहा स्तम्भ कहते हैं।
(द) ड्रिपस्टोन: यह गुफा की निचली सतह पर परदे जैसा चूने का खंभा होता है।
(य) नोडुल्स: ये चट्टानों के छिद्रों में खनिज घोल के जमाव से बनने वाले छोटे गोले होते हैं।
In simple words: जमीन के नीचे का पानी, खासकर चूना-पत्थर वाले इलाकों में, चट्टानों को घोलकर और उनसे निकले पदार्थों को जमा करके कई आकृतियाँ बनाता है, जिनमें गड्ढे, सूखी घाटियाँ और गुफाओं में लटकने वाले या ऊपर उठने वाले खंभे शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: When describing landforms made by underground water (karst topography), clearly categorize them into erosional and depositional types and provide clear, distinct examples for each.
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