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Detailed Chapter 2 सम्बन्ध एवं फलन RBSE Solutions for Class 11 Mathematics
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Class 11 Mathematics Chapter 2 सम्बन्ध एवं फलन RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 11 Maths Chapter 2 सम्बन्ध एवं फलन Ex 2.4
Question 1. कारण सहित निम्न फलनों का एकैकी, बहु-एकी, अन्तर्केपी अथवा आच्छादक रूप में वर्गीकरण कीजिए :
(i) f: Q → Q, f(x) = 3x + 7
(ii) f: C → R, f(x + iy) = x
(iii) f: R [-1, 1], f(x) = sin x
(iv) f: N → Z, f(x) = |x|
Answer:
(i) **फलन एकैकी और आच्छादक है।**
माना \( x_1, x_2 \in Q \)
यदि \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( 3x_1 + 7 = 3x_2 + 7 \)
\( \implies 3x_1 = 3x_2 \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
अतः फलन एकैकी है।
आच्छादक के लिए,
माना \( y \in Q \)
\( y = 3x + 7 \)
\( \implies 3x = y - 7 \)
\( \implies x = \frac{y-7}{3} \)
चूँकि \( y \in Q \) के प्रत्येक मान के लिए \( x \in Q \) प्राप्त होता है, अतः फलन आच्छादक है।
(ii) **फलन बहु-एकी और आच्छादक है।**
एकैकी के लिए:
माना \( x_1 + iy_1 \) और \( x_2 + iy_2 \) दो अलग-अलग सम्मिश्र संख्याएँ हैं।
\( f(x + iy_1) = x \)
\( f(x + iy_2) = x \)
यहाँ, \( f(x + iy_1) = f(x + iy_2) \) होने पर भी, अवयव \( x + iy_1 \) और \( x + iy_2 \) अलग हो सकते हैं (जैसे \( x + i(1) \) और \( x + i(2) \))।
अतः फलन बहु-एकी है।
आच्छादक के लिए:
माना \( y \in R \) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
हम \( x + iy' \) चुन सकते हैं, जहाँ \( x = y \), ताकि \( f(x + iy') = y \) हो।
इसका मतलब है कि R के प्रत्येक अवयव का पूर्व-प्रतिबिम्ब सम्मिश्र संख्या C में मौजूद है।
अतः फलन आच्छादक है।
(iii) **फलन बहु-एकी और आच्छादक है।**
एकैकी के लिए:
माना \( 0, \pi \in R \)
\( 0 \ne \pi \)
लेकिन \( f(0) = \sin 0 = 0 \)
और \( f(\pi) = \sin \pi = 0 \)
\( \implies f(0) = f(\pi) \)
यहाँ अलग-अलग अवयवों का एक ही प्रतिबिंब है।
अतः फलन बहु-एकी है।
आच्छादक के लिए:
माना \( y \in [-1, 1] \) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
तब \( x = \sin^{-1} y \)
प्रत्येक \( y \in [-1, 1] \) के लिए \( x \in R \) में विद्यमान है।
अतः फलन आच्छादक है।
(iv) **फलन एकैकी और अन्तर्केपी है।**
एकैकी के लिए:
माना \( x_1, x_2 \in N \)
यदि \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( |x_1| = |x_2| \)
\( \implies x_1 = x_2 \) (क्योंकि \( x_1, x_2 \in N \) धनात्मक हैं)
अतः फलन एकैकी है।
अन्तर्केपी के लिए:
सहप्रांत \( Z \) में ऋणात्मक संख्याएँ (जैसे -1, -2, ...) मौजूद हैं।
लेकिन \( f(x) = |x| \) हमेशा एक धनात्मक संख्या होगी।
इसका मतलब है कि सहप्रांत \( Z \) के ऋणात्मक अवयवों का प्रान्त \( N \) में कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं है।
अतः फलन अन्तर्केपी है।
In simple words: एकैकी फलन में हर अलग इनपुट का अलग आउटपुट होता है। बहु-एकी में अलग इनपुट का एक जैसा आउटपुट हो सकता है। आच्छादक फलन में कोडोमेन के हर मान के लिए डोमेन में एक इनपुट होता है। अंतर्केपी में कोडोमेन में कुछ मान ऐसे होते हैं जिनका कोई इनपुट नहीं होता। हमने हर फलन को इन्हीं नियमों के आधार पर बांटा है।
🎯 Exam Tip: फलन को वर्गीकृत करते समय, एकैकी के लिए \(f(x_1) = f(x_2) \implies x_1 = x_2\) सिद्ध करें, और आच्छादक के लिए, \(y = f(x)\) से \(x\) को \(y\) के पदों में व्यक्त करें और दिखाएँ कि \(y\) के हर मान के लिए \(x\) मौजूद है।
Question 2. र्या Processing math: 100% B तो A से B में परिभाषित निम्न फलनों के लिए बताइए कि कौनसे एकैकी, आच्छादक अथवा एकैकी
(i) हल- (i) माना \( x_1, x_2 \in A \)
तब \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( \implies \frac{x_1}{2} = \frac{x_2}{2} \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
इसलिए फलन एकैकी है।
पुनः सहप्रांत \( B \) में, यदि \( A = [-1, 1] \), तब \( f(A) = \{\frac{x}{2} | x \in A\} = [-\frac{1}{2}, \frac{1}{2}] \).
यदि \( B \) बड़ा है, जैसे \( B = R \), तो \( B \) में कुछ अवयव ऐसे होंगे जिनका कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं होगा (जैसे 1)।
अतः फलन आच्छादक नहीं है, अर्थात् अन्तर्केपी है।
अतः फलन \( f \) एकैकी-अन्तर्केपी है।
(ii) \( g(x) = |x| \)
माना \( x_1, x_2 \in A \)
यदि \( A = [-1, 1] \), तो \( x_1 = \frac{1}{2} \) और \( x_2 = -\frac{1}{2} \) दो अलग-अलग अवयव हैं।
लेकिन \( g(\frac{1}{2}) = |\frac{1}{2}| = \frac{1}{2} \)
और \( g(-\frac{1}{2}) = |-\frac{1}{2}| = \frac{1}{2} \)
अर्थात् \( g(\frac{1}{2}) = g(-\frac{1}{2}) \).
अतः दो भिन्न-भिन्न अवयवों का एक ही प्रतिबिंब है, इसलिए यह फलन बहु-एकी होगा।
पुनः \( |x| \) सदैव धनात्मक वास्तविक संख्या होती है।
अतः \( g \) का परिसर \( g(A) = \{|x| | x \in A\} \)
यदि \( A = [-1, 1] \), तो \( g(A) = [0, 1] \).
यदि सहप्रांत \( B = R \), तो \( B \) में ऋणात्मक संख्याएँ (जैसे \( -\frac{1}{2}, -1 \)) ऐसी होंगी जिनका कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं है, क्योंकि \( |x| \) कभी ऋणात्मक नहीं हो सकता।
अतः ये अवयव \( B \) समुच्चय में खाली हैं।
इसलिए फलन \( g \) अन्तर्केपी फलन होगा।
अतः फलन \( g \) बहु-एकी-अन्तर्केपी है।
In simple words: हमने दो फलन देखे और उनकी जाँच की कि वे एकैकी या बहु-एकी और आच्छादक या अन्तर्केपी हैं। एक फलन \( f(x) = x/2 \) एकैकी है क्योंकि हर अलग इनपुट का अलग आउटपुट आता है, लेकिन यह अन्तर्केपी है क्योंकि कोडोमेन में कुछ मान ऐसे हैं जिनका कोई इनपुट नहीं है। दूसरा फलन \( g(x) = |x| \) बहु-एकी है क्योंकि जैसे \( 1/2 \) और \( -1/2 \) का आउटपुट एक ही \( 1/2 \) आता है, और यह भी अन्तर्केपी है क्योंकि नेगेटिव संख्याएँ कोडोमेन में होने पर भी उनका कोई इनपुट नहीं मिल सकता।
🎯 Exam Tip: फलन को एकैकी या बहु-एकी, और आच्छादक या अन्तर्केपी में वर्गीकृत करने के लिए परिभाषाओं का ठीक से उपयोग करें। उदाहरणों में, हमेशा डोमेन और कोडोमेन पर ध्यान दें।
Question 3. यदि f: C → C, f(x + iy) = (x – iy) हो तो सिद्ध कीजिए कि f एक एकैकी आच्छादक फलन है।
Answer:
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( f(x_1 + iy_1) = f(x_2 + iy_2) \)
परिभाषा के अनुसार,
\( x_1 - iy_1 = x_2 - iy_2 \)
वास्तविक और काल्पनिक भागों की तुलना करने पर,
\( x_1 = x_2 \)
\( -iy_1 = -iy_2 \implies y_1 = y_2 \)
क्योंकि \( x_1 = x_2 \) और \( y_1 = y_2 \), इसलिए \( x_1 + iy_1 = x_2 + iy_2 \).
अतः फलन \( f \) एकैकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना सहप्रांत C में कोई भी अवयव \( z = a + ib \) है।
हमें एक \( x + iy \) प्रान्त C में खोजना है ताकि \( f(x + iy) = a + ib \) हो।
फलन की परिभाषा के अनुसार,
\( x - iy = a + ib \)
वास्तविक और काल्पनिक भागों की तुलना करने पर,
\( x = a \)
\( -y = b \implies y = -b \)
तो, \( (a + i(-b)) \) प्रान्त C में एक अवयव है जिसका प्रतिबिंब \( a + ib \) है।
यानी, सहप्रांत के प्रत्येक अवयव का प्रान्त में एक पूर्व-प्रतिबिंब मौजूद है।
अतः फलन \( f \) आच्छादक है।
चूँकि फलन \( f \) एकैकी और आच्छादक दोनों है, यह एक एकैकी आच्छादक फलन है।
In simple words: हमने दिखाया कि यह फलन एकैकी है क्योंकि दो अलग-अलग इनपुट का आउटपुट कभी समान नहीं हो सकता। हमने यह भी दिखाया कि यह फलन आच्छादक है क्योंकि कोडोमेन के हर मान के लिए डोमेन में हमेशा एक ऐसा इनपुट मौजूद होता है जो उस मान को आउटपुट देता है। इसलिए, यह फलन एकैकी आच्छादक है।
🎯 Exam Tip: एकैकी सिद्ध करने के लिए \(f(z_1) = f(z_2)\) से शुरू करें और दिखाएं कि \(z_1 = z_2\). आच्छादक के लिए, सहप्रांत के एक सामान्य अवयव \(w\) के लिए एक पूर्व-प्रतिबिंब \(z\) ज्ञात करें, ताकि \(f(z) = w\) हो।
Question 4. निम्न प्रकार के फलनों का एक-एक उदाहरण दीजिए :
(i) एकैकी अन्तर्कपी
(ii Processing math: 100%
Answer:
(i) **एकैकी अन्तर्केपी फलन (One-one into function):**
एक फलन \( f: A \to B \) एकैकी अन्तर्केपी कहलाता है यदि \( f \) एकैकी हो और अन्तर्केपी भी हो। इसका मतलब है कि \( A \) के भिन्न-भिन्न अवयवों के \( B \) में भिन्न-भिन्न प्रतिबिंब हों, और \( B \) में कम से कम एक ऐसा अवयव हो जिसका \( A \) के किसी भी अवयव से कोई प्रतिबिंब न हो।
उदाहरण के लिए: \( f: Z \to Z, f(x) = 2x \)
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1, x_2 \in Z \)
यदि \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( \implies 2x_1 = 2x_2 \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
अतः फलन \( f \) एकैकी है।
**अन्तर्केपी सिद्ध करना:**
सहप्रांत \( Z \) में विषम संख्याएँ (जैसे 1, 3, 5, ...) हैं।
लेकिन \( f(x) = 2x \) हमेशा एक सम संख्या होगी।
इसका मतलब है कि सहप्रांत \( Z \) में विषम संख्याओं का कोई पूर्व-प्रतिबिंब प्रान्त \( Z \) में नहीं है।
अतः फलन \( f \) अन्तर्केपी है।
इस प्रकार, फलन \( f(x) = 2x \) एक एकैकी अन्तर्केपी फलन है।
(ii) **बहु-एकी आच्छादक फलन (Many-one onto function):**
एक फलन \( f: A \to B \) बहु-एकी आच्छादक कहलाता है यदि \( f \) बहु-एकी हो और आच्छादक भी हो। इसका मतलब है कि \( A \) के दो या दो से अधिक अवयवों के \( B \) में एक ही प्रतिबिंब हो, और \( B \) का प्रत्येक अवयव \( A \) के किसी न किसी अवयव का प्रतिबिंब हो।
उदाहरण के लिए: \( f: R \to R^+, f(x) = x^2 \)
**बहु-एकी सिद्ध करना:**
माना \( -1, 1 \in R \)
\( -1 \ne 1 \)
लेकिन \( f(-1) = (-1)^2 = 1 \)
और \( f(1) = (1)^2 = 1 \)
\( \implies f(-1) = f(1) \)
अर्थात् दो अलग-अलग अवयवों का एक ही प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
अतः फलन \( f \) बहु-एकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना \( y \in R^+ \) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
\( y = x^2 \implies x = \pm \sqrt{y} \)
क्योंकि \( y \in R^+ \) (धनात्मक वास्तविक संख्या) है, इसलिए \( \pm \sqrt{y} \) हमेशा एक वास्तविक संख्या होगी जो प्रान्त \( R \) में मौजूद है।
अतः \( R^+ \) के प्रत्येक अवयव का पूर्व-प्रतिबिंब प्रान्त \( R \) में विद्यमान है।
इसलिए फलन \( f \) आच्छादक है।
इस प्रकार, फलन \( f(x) = x^2 \) एक बहु-एकी आच्छादक फलन है।
(iii) **न एकैकी न आच्छादक फलन (Neither one-one nor onto function):**
एक फलन जो न एकैकी हो और न ही आच्छादक।
उदाहरण के लिए: \( f: R \to R, f(x) = x^2 \). यह फलन बहु-एकी है (जैसा कि ऊपर बताया गया है)।
**न आच्छादक सिद्ध करना:**
सहप्रांत \( R \) में ऋणात्मक संख्याएँ (जैसे -1, -2, ...) मौजूद हैं।
लेकिन \( f(x) = x^2 \) का मान हमेशा गैर-ऋणात्मक होगा (\( x^2 \ge 0 \))।
इसका मतलब है कि सहप्रांत \( R \) में ऋणात्मक संख्याओं का कोई पूर्व-प्रतिबिंब प्रान्त \( R \) में नहीं है।
अतः फलन \( f \) आच्छादक नहीं है, यह अन्तर्केपी है।
चूँकि यह फलन न एकैकी है (बहु-एकी है) और न आच्छादक है (अन्तर्केपी है), यह "न एकैकी न आच्छादक" फलन का उदाहरण है।
In simple words: हमने अलग-अलग तरह के फलनों के उदाहरण देखे हैं। एकैकी अन्तर्केपी फलन में, हर इनपुट का अलग आउटपुट आता है, लेकिन कोडोमेन में कुछ मान ऐसे होते हैं जिनके लिए कोई इनपुट नहीं मिलता। बहु-एकी आच्छादक फलन में, एक से ज्यादा इनपुट का एक ही आउटपुट आ सकता है, लेकिन कोडोमेन के हर मान के लिए कम से कम एक इनपुट जरूर होता है। तीसरा उदाहरण \( f(x)=x^2 \) है जो न एकैकी है और न ही आच्छादक, क्योंकि अलग-अलग इनपुट का आउटपुट समान हो सकता है (जैसे 1 और -1 दोनों का स्क्वायर 1 है), और कोडोमेन में सभी मानों के लिए इनपुट नहीं मिलता (जैसे कोई भी रियल नंबर का स्क्वायर नेगेटिव नहीं हो सकता)।
🎯 Exam Tip: फलन के प्रकारों के उदाहरण देते समय, एकैकी, बहु-एकी, आच्छादक और अन्तर्केपी की स्पष्ट परिभाषाओं का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है। विशिष्ट डोमेन और कोडोमेन के लिए फलन के व्यवहार को दर्शाने के लिए सरल उदाहरणों का उपयोग करें।
Question 6. यदि N = {1, 2, 3, 4.,.....}, O = {1, 3, 5, 7, ....., E = {2, 4, 6, 8,.....} तथा f1, f2, निम्न प्रकार परिभाषित फलन हो : f₁ : N → 0, f1(x) = 2x - 1; f2: N → E, f2(x) = 2x तो सिद्ध कीजिए कि f₁ तथा f₂ एकैकी आच्छादक है।
Answer:
**फलन \( f_1: N \to O, f_1(x) = 2x - 1 \) के लिए:**
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1, x_2 \in N \)
यदि \( f_1(x_1) = f_1(x_2) \)
\( 2x_1 - 1 = 2x_2 - 1 \)
\( \implies 2x_1 = 2x_2 \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
अतः फलन \( f_1 \) एकैकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना \( y \in O \) (विषम संख्याओं का समुच्चय) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
\( y = 2x - 1 \)
\( \implies y + 1 = 2x \)
\( \implies x = \frac{y+1}{2} \)
चूँकि \( y \) एक विषम संख्या है, इसलिए \( y+1 \) हमेशा एक सम संख्या होगी।
अतः \( \frac{y+1}{2} \) हमेशा एक प्राकृतिक संख्या (\( N \)) होगी।
इसलिए, सहप्रांत \( O \) के प्रत्येक अवयव \( y \) के लिए, प्रान्त \( N \) में एक \( x \) मौजूद है।
अतः फलन \( f_1 \) आच्छादक है।
चूँकि \( f_1 \) एकैकी और आच्छादक दोनों है, यह एक एकैकी आच्छादक फलन है।
**फलन \( f_2: N \to E, f_2(x) = 2x \) के लिए:**
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1, x_2 \in N \)
यदि \( f_2(x_1) = f_2(x_2) \)
\( 2x_1 = 2x_2 \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
अतः फलन \( f_2 \) एकैकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना \( y \in E \) (सम संख्याओं का समुच्चय) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
\( y = 2x \)
\( \implies x = \frac{y}{2} \)
चूँकि \( y \) एक सम संख्या है, इसलिए \( \frac{y}{2} \) हमेशा एक प्राकृतिक संख्या (\( N \)) होगी।
इसलिए, सहप्रांत \( E \) के प्रत्येक अवयव \( y \) के लिए, प्रान्त \( N \) में एक \( x \) मौजूद है।
अतः फलन \( f_2 \) आच्छादक है।
चूँकि \( f_2 \) एकैकी और आच्छादक दोनों है, यह एक एकैकी आच्छादक फलन है।
In simple words: हमने दो फलन लिए। पहला फलन \( f_1(x) = 2x - 1 \) प्राकृतिक संख्याओं को विषम संख्याओं में बदलता है। हमने दिखाया कि यह एकैकी है क्योंकि अलग-अलग प्राकृतिक संख्याओं का परिणाम हमेशा अलग विषम संख्या होती है। यह आच्छादक भी है क्योंकि किसी भी विषम संख्या को \( 2x-1 \) के रूप में लिखा जा सकता है जहाँ \( x \) एक प्राकृतिक संख्या होगी। दूसरा फलन \( f_2(x) = 2x \) प्राकृतिक संख्याओं को सम संख्याओं में बदलता है। यह भी एकैकी है क्योंकि अलग-अलग प्राकृतिक संख्याओं का परिणाम हमेशा अलग सम संख्या होती है। यह आच्छादक भी है क्योंकि किसी भी सम संख्या को \( 2x \) के रूप में लिखा जा सकता है जहाँ \( x \) एक प्राकृतिक संख्या होगी।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले एकैकी और फिर आच्छादक दोनों गुणों को अलग-अलग सिद्ध करें। विषम/सम संख्याओं के गुणों का उपयोग करें ताकि दिखा सकें कि \(x\) हमेशा डोमेन में होगा।
Question 5. सिद्ध कीजिए कि f: R → R, f(x) = cos x एक बहु-एकी अन्तक्षेपी फलन है। f के प्रान्त तथा सहप्रान्त को इस प्रकार परिवर्तित कीजिए कि f हो जाए : (i) एकैकी अन्तर्कपी (ii) बहु-एकी आच्छादक (iii) एकैकी आच्छादक।
Answer:
**फलन \( f: R \to R, f(x) = \cos x \) की प्रारंभिक वर्गीकरण:**
**बहु-एकी सिद्ध करना:**
माना \( 0, 2\pi \in R \)
\( 0 \ne 2\pi \)
लेकिन \( f(0) = \cos 0 = 1 \)
और \( f(2\pi) = \cos 2\pi = 1 \)
\( \implies f(0) = f(2\pi) \)
अर्थात् दो अलग-अलग अवयवों का एक ही प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
अतः फलन \( f \) बहु-एकी है।
**अन्तर्केपी सिद्ध करना:**
सहप्रांत \( R \) में \( \cos x \) की सीमा \([-1, 1]\) के बाहर की संख्याएँ (जैसे 2 या -3) मौजूद हैं।
इन संख्याओं का प्रान्त \( R \) में कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं है, क्योंकि \( \cos x \) का मान कभी 2 या -3 नहीं हो सकता।
अतः फलन \( f \) अन्तर्केपी है।
इसलिए, \( f(x) = \cos x \) (जब \( f: R \to R \)) एक बहु-एकी अन्तर्केपी फलन है।
**फलन \( f \) को एकैकी अन्तर्केपी बनाने के लिए:**
(i) **एकैकी अन्तर्केपी (One-one into function):**
हमें एक ऐसा प्रान्त चुनना होगा जिसमें \( \cos x \) एकैकी हो, और सहप्रांत ऐसा हो जिसमें कुछ अवयवों का प्रतिबिंब न हो।
**उदाहरण:** \( f: [0, \pi/2] \to R, f(x) = \cos x \)
इस प्रान्त में, \( \cos x \) एकैकी है (जैसे-जैसे \( x \) बढ़ता है, \( \cos x \) घटता है, तो कोई दो अलग-अलग \( x \) का समान \( \cos x \) नहीं होता)।
सहप्रांत \( R \) में \( [-1, 1] \) के बाहर की संख्याएँ मौजूद हैं जिनका कोई प्रतिबिंब नहीं होगा।
(ii) **बहु-एकी आच्छादक (Many-one onto function):**
हमें एक ऐसा प्रान्त चुनना होगा जिसमें \( \cos x \) बहु-एकी हो, और सहप्रांत ऐसा हो जिसके प्रत्येक अवयव का प्रतिबिंब हो।
**उदाहरण:** \( f: [0, 2\pi] \to [-1, 1], f(x) = \cos x \)
इस प्रान्त में, \( \cos x \) बहु-एकी है (जैसे \( \cos 0 = \cos 2\pi = 1 \))।
सहप्रांत \([-1, 1]\) है, और \( [0, 2\pi] \) में \( \cos x \) के सभी मान \([-1, 1]\) के बीच आते हैं, और हर मान का प्रतिबिंब होता है।
(iii) **एकैकी आच्छादक (One-one onto function):**
हमें एक ऐसा प्रान्त और सहप्रांत चुनना होगा जहाँ \( \cos x \) एकैकी और आच्छादक दोनों हो।
**उदाहरण:** \( f: [0, \pi] \to [-1, 1], f(x) = \cos x \)
इस प्रान्त में, \( \cos x \) एकैकी है (जैसे-जैसे \( x \) बढ़ता है, \( \cos x \) घटता है, तो कोई दो अलग-अलग \( x \) का समान \( \cos x \) नहीं होता)।
सहप्रांत \([-1, 1]\) है, और \( [0, \pi] \) में \( \cos x \) के सभी मान \([-1, 1]\) के बीच आते हैं, और हर मान का प्रतिबिंब होता है।
In simple words: फलन \( f(x) = \cos x \) स्वाभाविक रूप से बहु-एकी और अन्तर्केपी होता है क्योंकि इसके मान दोहराते हैं और इसकी एक सीमित सीमा होती है। इसे एकैकी अन्तर्केपी बनाने के लिए, हमें इसका डोमेन छोटा करना होगा (जैसे \( [0, \pi/2] \)) ताकि मान दोहराएं नहीं, और कोडोमेन बड़ा रखना होगा। बहु-एकी आच्छादक बनाने के लिए, डोमेन को थोड़ा बड़ा रखना होगा (जैसे \( [0, 2\pi] \)) ताकि मान दोहराएं, और कोडोमेन को ठीक इसकी सीमा \([-1, 1]\) के बराबर रखना होगा। इसे एकैकी आच्छादक बनाने के लिए, डोमेन को \( [0, \pi] \) लेना होगा ताकि मान दोहराएं नहीं, और कोडोमेन को भी ठीक इसकी सीमा \([-1, 1]\) के बराबर रखना होगा।
🎯 Exam Tip: त्रिकोणमितीय फलनों के लिए प्रान्त और सहप्रांत को बदलकर उनके गुणों को बदलना एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। सुनिश्चित करें कि आप प्रत्येक वर्गीकरण के लिए उपयुक्त अंतरालों का चयन करें।
Question 7. 'यदि फलन f वास्तविक संख्याओं के समुच्चय R से R में निम्न प्रकार परिभाषित है तो कारण सहित उनका एकैकी, बहु-एकी, अन्तक्षेपी अथवा आच्छादक के रूप में वर्गीकरण कीजिए :
(i) f(x) = x²
(ii) f(x) = x³
(iii) f(x) = x3 + 3
Answer:
(i) **\( f(x) = x^2 \): बहु-एकी अन्तर्केपी फलन**
**बहु-एकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1 = 1 \) और \( x_2 = -1 \).
\( x_1 \ne x_2 \)
लेकिन \( f(1) = (1)^2 = 1 \)
और \( f(-1) = (-1)^2 = 1 \)
\( \implies f(1) = f(-1) \)
अतः फलन बहु-एकी है।
**अन्तर्केपी सिद्ध करना:**
सहप्रांत \( R \) में ऋणात्मक संख्याएँ (जैसे -1, -2, ...) मौजूद हैं।
लेकिन \( f(x) = x^2 \) का मान हमेशा गैर-ऋणात्मक होगा (\( x^2 \ge 0 \))।
इसका मतलब है कि सहप्रांत \( R \) में ऋणात्मक संख्याओं का कोई पूर्व-प्रतिबिंब प्रान्त \( R \) में नहीं है।
अतः फलन अन्तर्केपी है।
(ii) **\( f(x) = x^3 \): एकैकी आच्छादक फलन**
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1, x_2 \in R \)
यदि \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( x_1^3 = x_2^3 \)
\( \implies x_1 = x_2 \) (वास्तविक संख्याओं के लिए घनमूल अद्वितीय होता है)
अतः फलन एकैकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना \( y \in R \) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
\( y = x^3 \)
\( \implies x = y^{1/3} \)
चूँकि \( y \) एक वास्तविक संख्या है, इसका घनमूल \( y^{1/3} \) भी हमेशा एक वास्तविक संख्या होगा जो प्रान्त \( R \) में मौजूद है।
अतः फलन आच्छादक है।
(iii) **\( f(x) = x^3 + 3 \): एकैकी आच्छादक फलन**
**एकैकी सिद्ध करना:**
माना \( x_1, x_2 \in R \)
यदि \( f(x_1) = f(x_2) \)
\( x_1^3 + 3 = x_2^3 + 3 \)
\( \implies x_1^3 = x_2^3 \)
\( \implies x_1 = x_2 \)
अतः फलन एकैकी है।
**आच्छादक सिद्ध करना:**
माना \( y \in R \) सहप्रांत का कोई भी अवयव है।
\( y = x^3 + 3 \)
\( \implies x^3 = y - 3 \)
\( \implies x = (y - 3)^{1/3} \)
चूँकि \( y \) एक वास्तविक संख्या है, \( (y - 3) \) भी वास्तविक होगा, और इसका घनमूल \( (y - 3)^{1/3} \) भी हमेशा एक वास्तविक संख्या होगा जो प्रान्त \( R \) में मौजूद है।
अतः फलन आच्छादक है।
(iv) **\( f(x) = x^3 - x \): न एकैकी न आच्छादक फलन**
\( f(x) = x(x^2 - 1) = x(x - 1)(x + 1) \)
**बहु-एकी सिद्ध करना:**
\( f(0) = 0(0-1)(0+1) = 0 \)
\( f(1) = 1(1-1)(1+1) = 0 \)
\( f(-1) = -1(-1-1)(-1+1) = 0 \)
यहाँ, \( 0, 1, -1 \) अलग-अलग अवयव हैं, लेकिन \( f(0) = f(1) = f(-1) = 0 \).
अतः फलन बहु-एकी है।
**आच्छादक नहीं है (अन्तर्केपी):**
यदि हम \( y = 2 \) लेते हैं, तो \( x^3 - x = 2 \implies x^3 - x - 2 = 0 \). इस समीकरण का केवल एक वास्तविक हल है (लगभग \( x \approx 1.52 \)).
लेकिन \( f(x) \) के ग्राफ़ को देखने पर, यह \( R \) में ऊपर और नीचे दोनों तरफ जाता है। इसकी सीमा \( R \) है।
*स्वतः सुधार: OCR का पिछला भाग बताता है कि यह "न एकैकी ना आच्छादक" है, लेकिन इसका ग्राफ R से R पर आच्छादक होता है। इसलिए, यह बहु-एकी आच्छादक फलन है।*
**सही विश्लेषण:** फलन \( f(x) = x^3 - x \) का ग्राफ \( R \) पर निरंतर है और \( \lim_{x \to \infty} f(x) = \infty \) तथा \( \lim_{x \to -\infty} f(x) = -\infty \). इसलिए, यह \( R \) पर आच्छादक है।
चूंकि यह बहु-एकी है और आच्छादक है, यह एक बहु-एकी आच्छादक फलन है।
In simple words: हमने तीन फलनों को देखा। \( f(x) = x^2 \) बहु-एकी है क्योंकि अलग-अलग प्लस और माइनस नंबर का स्क्वायर एक ही आता है (जैसे \( 1^2 \) और \( (-1)^2 \) दोनों 1 होते हैं)। यह अन्तर्केपी है क्योंकि नेगेटिव नंबर किसी के स्क्वायर नहीं हो सकते। \( f(x) = x^3 \) एकैकी और आच्छादक दोनों है क्योंकि हर अलग नंबर का क्यूब अलग होता है, और किसी भी नंबर का क्यूब हो सकता है। \( f(x) = x^3 + 3 \) भी एकैकी और आच्छादक है, यह \( x^3 \) जैसा ही व्यवहार करता है, बस ग्राफ 3 यूनिट ऊपर खिसक जाता है। \( f(x) = x^3 - x \) बहु-एकी है क्योंकि 0, 1 और -1 का आउटपुट सभी 0 होता है। यह आच्छादक है क्योंकि इसका ग्राफ सभी वास्तविक संख्याओं को कवर करता है।
🎯 Exam Tip: वास्तविक फलनों को वर्गीकृत करते समय, हमेशा डोमेन और कोडोमेन \(R\) पर विचार करें। \(f(x)=x^n\) जैसे फलनों के लिए, यदि \(n\) विषम है तो फलन एकैकी आच्छादक होता है, और यदि \(n\) सम है तो बहु-एकी अन्तर्केपी (जब तक कि कोडोमेन को सीमित न किया जाए) होता है।
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