RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 9 बच्चों के सामान्य रोग

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RBSE Class 11 Home Science Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(i) शरीर के तापमान में वृद्धि होती है -
(अ) बुखार होने से
(ब) खाना नहीं पचने से
(स) स्नान नहीं करने से
(द) स्वच्छ नहीं रहने से
Answer: (अ) बुखार होने से
In simple words: जब शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है, तो यह बुखार का संकेत होता है। बुखार होने पर शरीर गर्म हो जाता है।

🎯 Exam Tip: शरीर के तापमान में वृद्धि का सबसे आम कारण बुखार है, जो किसी संक्रमण या बीमारी का संकेत देता है।

 

Question 1. (ii) रोग की अवस्था में बालक
(अ) खेलता है
(ब) सुस्त व थका हुआ होता है
(स) खुश रहता है
Answer: (ब) सुस्त व थका हुआ होता है
In simple words: जब कोई बच्चा बीमार होता है, तो वह खेलने के बजाय सुस्त और थका हुआ महसूस करता है। उसका मन किसी काम में नहीं लगता।

🎯 Exam Tip: बीमार बच्चे में चिड़चिड़ापन, भूख न लगना और ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं, जो बीमारी का पता लगाने में मदद करते हैं।

 

Question 1. (iii) अतिसार होने का कारण है -
(अ) कब्ज
(ब) उल्टी
(स) अतिसार
(द) पेट में कीड़े होना
Answer: (स) अतिसार
In simple words: इस प्रश्न में, अतिसार होने का कारण पूछा गया है और विकल्पों में 'अतिसार' ही एक विकल्प है, जिसका अर्थ दस्त या डायरिया होता है।

🎯 Exam Tip: अतिसार (दस्त) का मतलब है कि बार-बार पतला मल आना, जो आमतौर पर संक्रमण या दूषित भोजन से होता है।

 

Question 1. (iv) संक्रमण से होने वाला रोग है -
(अ) जुकाम
(ब) कब्ज
(स) पीलिया
(द) पोलियो
Answer: (अ) जुकाम
In simple words: जुकाम एक संक्रामक बीमारी है जो वायरस के कारण होती है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है। यह आम तौर पर खांसी और छींकने से फैलता है।

🎯 Exam Tip: संक्रमण से होने वाले रोग वे होते हैं जो बैक्टीरिया, वायरस या अन्य कीटाणुओं के कारण होते हैं और फैल सकते हैं। जुकाम इसका एक सामान्य उदाहरण है।

 

Question 1. (v) गलतुण्डिका में शरीर का कौन-सा भाग प्रभावित होता है?
(अ) कान
(ब) गला
(स) आँख
(द) मुँह
Answer: (ब) गला
In simple words: गलतुण्डिका रोग में गले के दोनों तरफ की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है, जिससे खाना निगलने और बोलने में दिक्कत होती है। यह रोग सीधे गले को प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: गलतुण्डिका (टॉन्सिलिटिस) एक ऐसी स्थिति है जहाँ गले में स्थित टॉन्सिल सूज जाते हैं, जिससे गले में दर्द और निगलने में कठिनाई होती है।

 

Question 2. रिक्त स्थान भरो –
1. ज्वर में शरीर का तापमान सामान्य.........से अधिक हो जाता है।
2. .........में गले के दोनों ओर की ग्रन्थियों में सूजन आ जाती है।
3. अत्यधिक जुकाम से..................ोने की सम्भावना रहती है।
4. .........बीमारी में कृमि आँतों की दीवार से चिपककर खून चूसते हैं।
5. शिशु का पाचन संस्थान कमजोर होन.........ोने का संकेत है।
Answer:
1. ज्वर में शरीर का तापमान सामान्य 98.4° फारेनहाइट से अधिक हो जाता है।
2. गलतुण्डिका में गले के दोनों ओर की ग्रन्थियों में सूजन आ जाती है।
3. अत्यधिक जुकाम से निमोनिया होने की सम्भावना रहती है।
4. अंकुशकृमि बीमारी में कृमि आँतों की दीवार से चिपककर खून चूसते हैं।
5. शिशु का पाचन संस्थान कमजोर होना भूख न लगना व दूध उलटने का संकेत है।
In simple words: जब शरीर में बुखार होता है, तो तापमान 98.4° फारेनहाइट से बढ़ जाता है। गले की सूजन गलतुण्डिका में होती है। बहुत अधिक जुकाम से निमोनिया हो सकता है। अंकुशकृमि आँतों में खून चूसते हैं। भूख न लगना या दूध उलटना कमजोर पाचन का लक्षण है।

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के सन्दर्भ को ध्यान से समझें और सही शब्द या वाक्यांश का चयन करें जो वाक्य को पूरा करता हो और सही जानकारी देता हो।

 

Question 3. पेट में कीड़े की बीमारी के बारे में बताइए।
Answer: पेट में कीड़े होना बच्चों में एक सामान्य समस्या है। बच्चों के पेट में मुख्यतः तीन प्रकार के कीड़े पाए जा सकते हैं:
1. गोल कृमि: ये कीड़े लगभग 8 इंच तक लंबे होते हैं और आँतों में रहते हैं। ये दूषित भोजन या पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। इनके कारण बच्चों को अपच, पेट दर्द और पेट फूलना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
2. सूत्र कृमि: ये छोटे और सफेद रंग के होते हैं, जो मुख्य रूप से बच्चों में पाए जाते हैं। ये गुदा मार्ग में खुजली, रात को बिस्तर में पेशाब करना और बार-बार शौच की इच्छा जैसे लक्षण पैदा करते हैं।
3. अंकुश कृमि: ये छोटे कृमि होते हैं जो आँतों की दीवार से चिपककर खून चूसते हैं। इससे बच्चे में खून की कमी (रक्ताल्पता), कमजोरी, शारीरिक विकास में रुकावट और पाचन शक्ति में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इनकी उपस्थिति से बच्चे को भूख भी कम लगती है।
In simple words: बच्चों के पेट में गोल कृमि, सूत्र कृमि और अंकुश कृमि जैसे कीड़े होते हैं। ये दूषित खाने या पानी से आते हैं। इनके कारण पेट दर्द, खुजली और खून की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: पेट के कीड़ों के लक्षण और प्रकार को स्पष्ट रूप से समझाएं। रोकथाम के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. रोगों के प्रारम्भिक लक्षण क्या हैं?
Answer: बच्चों में रोगों के कुछ प्रारंभिक लक्षण इस प्रकार हैं:
* व्यवहार में परिवर्तन: बीमार बच्चा चिड़चिड़ा, जिद्दी और ज्यादा रोता है।
* भूख कम लगना: बीमारी के दौरान बच्चे की भूख कम हो जाती है और वह दूध या खाना ठीक से नहीं पीता।
* शौच में अनियमितता: बीमार बच्चे को या तो पतला मल आता है, या कब्ज हो जाता है, जिससे कभी-कभी पूरा दिन मल त्याग नहीं होता।
* शरीर के तापमान में परिवर्तन: बुखार या सर्दी-जुकाम होने पर शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।
* क्रियाशीलता में परिवर्तन: रोगी बच्चा सुस्त, थका हुआ और बेचैन महसूस करता है।
* त्वचा में परिवर्तन: अलग-अलग बीमारियों में त्वचा में अलग-अलग बदलाव दिखते हैं, जैसे त्वचा सूखी, खुरदरी, लाल या दानेदार हो जाना। कभी-कभी पीलापन भी आ सकता है।
* भार में कमी: बीमार बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से वजन नहीं बढ़ा पाता।
* निद्रा में परिवर्तन: शिशु को नींद कम आती है और वह सोते-सोते जाग जाता है।
In simple words: जब बच्चा बीमार होता है, तो उसके व्यवहार में बदलाव आता है, भूख कम लगती है, शौच ठीक से नहीं होता, शरीर गर्म रहता है, वह सुस्त रहता है, त्वचा बदल सकती है, वजन कम हो सकता है और नींद कम आती है।

🎯 Exam Tip: बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि समय पर इलाज किया जा सके और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके।

 

Question 6. कब्ज के कारण व उपचार बतलाइए।
Answer: कब्ज के कारण और उपचार निम्नलिखित हैं:
कब्ज के कारण:
* तरल पदार्थों का कम सेवन करना।
* रेशायुक्त पदार्थों (फाइबर) का कम मात्रा में खाना।
* आँतों का कमजोर होना।
* शिशु को ऊपर के दूध द्वारा पोषित करना, जिसमें फाइबर कम हो सकता है।
उपचार:
* बच्चे के भोजन में नियमितता रखें।
* बच्चे को समय पर मल त्याग के लिए प्रेरित करें।
* बच्चे के आहार में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा दें, जैसे फलों का रस और सब्जियों का सूप।
* यदि दो दिन तक मल त्याग न हो तो डॉक्टर की सलाह पर ग्लिसरीन की बत्ती या एनीमा का उपयोग करें। यह हमेशा चिकित्सक के परामर्श से ही करना चाहिए।
In simple words: कब्ज कम पानी पीने, कम रेशे वाले भोजन और कमजोर आँतों से होता है। इसके इलाज के लिए बच्चे को खूब पानी दें, रेशेदार भोजन खिलाएँ और डॉक्टर की सलाह लें।

🎯 Exam Tip: कब्ज को रोकने और ठीक करने के लिए पर्याप्त पानी पीना और फाइबर युक्त भोजन खाना बहुत महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।

 

Question 7. बच्चों में भूख न लगना व दूध उलटने की बीमारी को संक्षिप्त में बताइए।
Answer: बच्चों में भूख न लगना और दूध उलटना एक आम समस्या है जो कई बार चिंता का कारण बन सकती है।
भूख न लगना: यदि बच्चा बहुत थका हुआ रहता है और उसे नींद बहुत आती है, तो यह भूख न लगने का एक मुख्य कारण हो सकता है। सबसे पहले, बच्चे की भूख न लगने के पीछे का सही कारण पता लगाना चाहिए। अगर कारण पता न चले या समस्या गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए और उचित दवा देनी चाहिए।
दूध उलटना (उल्टी): दूध उलटना आमतौर पर कोई गंभीर बीमारी नहीं है। जब शिशुओं को दूध पिलाने के बाद तुरंत उठाया जाता है या उन्हें डकार दिलाने के लिए कंधे से लगाया जाता है, तो वे अक्सर थोड़ा दूध उलट देते हैं। यह आमतौर पर पाचन तंत्र के अपरिपक्व होने के कारण होता है।
* कारण: शिशु का पाचन संस्थान कमजोर होना, दूध पीते समय पेट में अधिक हवा चली जाना, दूध में प्रोटीन और वसा की अधिक मात्रा होना, और शिशु द्वारा अधिक दूध पी लेना इसके मुख्य कारण हैं।
* उपचार: शिशु को स्तनपान सही तरीके से कराएं ताकि पेट में हवा न जाए। दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना बहुत जरूरी है। बच्चे को दूध पिलाने के बाद तुरंत पेट के बल न लिटाएं, बल्कि कुछ देर तक सीधा रखें।
In simple words: बच्चों को भूख कम लगने का कारण थकान हो सकता है; डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। दूध उलटना अक्सर पाचन की कमजोरी या दूध पीते समय हवा निगलने से होता है। सही तरीके से दूध पिलाना और डकार दिलाना इसका उपाय है।

🎯 Exam Tip: भूख न लगने और दूध उलटने की समस्या को हल्के में न लें; अगर यह लगातार बनी रहे, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा सबसे अच्छा होता है।

 

Question 8. बच्चों के पेट में कितने प्रकार के कीड़े पाये जाते हैं?
Answer: बच्चों के पेट में मुख्य रूप से तीन प्रकार के कीड़े पाए जाते हैं:
* गोलकृमि
* सूत्रकृमि
* अंकुशकृमि
In simple words: बच्चों के पेट में तीन तरह के कीड़े हो सकते हैं: गोलकृमि, सूत्रकृमि और अंकुशकृमि। ये सभी पेट में रहकर बच्चे को बीमार कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीनों प्रकार के कीड़ों के कारण होने वाले लक्षणों को जानना महत्वपूर्ण है ताकि सही समय पर पहचान और उपचार हो सके।

 

Question 10. आँख दुखने के कारण व इससे बचाव के उपायों का वर्णन करो।
Answer: आँख दुखना बच्चों में एक आम आँख का रोग है जो अक्सर साफ-सफाई की कमी के कारण होता है।
कारण:
* आस-पास का वातावरण अस्वच्छ या गंदा होना।
* कम रोशनी में काम करना या पढ़ाई करना।
* धूल, मिट्टी, गंदगी या किसी बाहरी कण का आँख में चले जाना।
* आँख साफ करने के लिए गंदे हाथों या गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करना।
उपचार:
* सबसे पहले, आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखें।
* बच्चों को मिट्टी में खेलने न दें और अगर खेलें तो हाथ धोना सिखाएं।
* पानी उबालकर ठंडा करके आँखों को साफ करें।
* बच्चों को अधिक मीठा खाने से बचें, क्योंकि यह आँखों की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है।
* आँख में दर्द या संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और उनकी बताई दवा का इस्तेमाल करें। आँखों की किसी भी समस्या को घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश न करें।
In simple words: आँख दुखने का मुख्य कारण गंदगी और साफ-सफाई की कमी है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई रखें, गंदे हाथों से आँखें न छुएं और धूल-मिट्टी से बचाएं। अगर आँख में दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

🎯 Exam Tip: आँखों की स्वच्छता बनाए रखना और गंदे हाथों से आँखों को छूने से बचना आँख के संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

 

Question 11. आक्षेप व ज्वर के बारे में विस्तार पूर्वक समझाओ।
Answer: आक्षेप और ज्वर दोनों ही बच्चों में होने वाली महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
आक्षेप (दौरे): आक्षेप शिशुओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसमें बच्चे का शरीर काँपने लगता है, ऐंठता है, दाँत भिंच जाते हैं, चेहरा पीला पड़ जाता है, और मुट्ठियाँ भिंच जाती हैं। बच्चा बेहोश भी हो सकता है। यह शरीर की मांसपेशियों का अचानक और अनियंत्रित संकुचन होता है।
आक्षेप के कारण:
* मस्तिष्क में संक्रमण या क्षति।
* बच्चों को मेनिन्जाइटिस (दिमागी बुखार) होना।
* तेज बुखार, जैसे मलेरिया या निमोनिया के कारण।
* मिर्गी रोग होना।
* मस्तिष्क में जन्मजात रोग होना।
* आमाशय में आंत्रशोथ (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) होना।
ज्वर (बुखार): ज्वर शरीर की वह अवस्था है जब शरीर का तापमान सामान्य (लगभग 98.4° फारेनहाइट) से अधिक हो जाता है। इसका एहसास छूने मात्र से हो जाता है। बुखार किसी बीमारी का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
ज्वर के कारण:
* शारीरिक रूप से कमजोर होना।
* जुकाम या खांसी होना।
* मलेरिया या टाइफाइड जैसे संक्रमण होना।
* टॉन्सिल बढ़ना।
In simple words: आक्षेप बच्चों में होने वाले दौरे हैं, जिसमें शरीर काँपता है और बच्चा बेहोश हो सकता है, जो मस्तिष्क या तेज बुखार के कारण होते हैं। ज्वर या बुखार तब होता है जब शरीर का तापमान सामान्य से बढ़ जाता है, जो जुकाम, मलेरिया या टॉन्सिल जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है।

🎯 Exam Tip: आक्षेप और ज्वर दोनों ही गंभीर हो सकते हैं, खासकर बच्चों में। किसी भी बच्चे को आक्षेप या तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

 

Question 12. गलतुण्डिका व आँखों का दुखना बीमारी के लक्षण बताइए।
Answer: गलतुण्डिका और आँख दुखने की बीमारियों के लक्षण निम्नलिखित हैं:
गलतुण्डिका के लक्षण:
* गले के दोनों ओर की ग्रंथियों में सूजन आ जाती है, जिसे टॉन्सिल कहते हैं।
* गले में तेज दर्द होता है, खासकर कुछ निगलते समय।
* बुखार आ सकता है।
* थकान और कमजोरी महसूस होती है।
* खाने-पीने में कठिनाई होती है।
आँख दुखने के लक्षण:
* आँखें लाल और सूजी हुई दिखाई देती हैं।
* आँखों में चिपचिपापन, जलन और दर्द महसूस होता है।
* आँखों से कीचड़ या पानी निकलता है।
* सोने के बाद आँखें चिपक जाती हैं।
* रोशनी से परेशानी हो सकती है।
In simple words: गलतुण्डिका में गले में सूजन और दर्द होता है, जबकि आँख दुखने में आँखें लाल और सूजी हुई दिखती हैं, उनमें जलन और चिपचिपापन होता है।

🎯 Exam Tip: गलतुण्डिका में गले का निरीक्षण और आँख दुखने में आँखों की स्थिति को देखकर लक्षणों का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

 

Question 13. कब्ज व अतिसार बीमारी के उपचार लिखिए।
Answer: कब्ज और अतिसार (दस्त) दोनों ही बच्चों में आम पाचन समस्याएं हैं, जिनके उपचार अलग-अलग होते हैं।
कब्ज का उपचार:
* बच्चे के भोजन में नियमितता बनाए रखें।
* बच्चे को नियमित रूप से समय पर शौच जाने के लिए प्रेरित करें।
* बच्चे के आहार में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा दें, जैसे फलों का रस और सब्जियों का सूप।
* यदि दो दिन तक शौच न हो तो डॉक्टर की सलाह पर ग्लिसरीन की बत्ती या एनीमा का प्रयोग करें। यह हमेशा चिकित्सक के परामर्श से ही करना चाहिए।
अतिसार (दस्त) का उपचार:
* ऊपरी दूध को कुछ समय के लिए बंद कर दें या पतला करके दें।
* बच्चे को ठोस आहार नहीं देना चाहिए जब तक दस्त कम न हों।
* दूध के बर्तन, बोतल और निपल की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें ताकि संक्रमण न फैले।
* चावल का माँड़ या जौ का पानी दिया जा सकता है, जो पाचन में आसान होता है।
* जल और लवणों की कमी को पूरा करने के लिए 1 लीटर उबले पानी में एक चुटकी नमक और एक मुट्ठी चीनी मिलाकर घोल (ORS) बनाएं और बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाएं।
* शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
* बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाकर उचित उपचार कराएं।
In simple words: कब्ज के लिए बच्चे को तरल पदार्थ और फाइबर दें, और नियमित शौच के लिए प्रेरित करें। दस्त के लिए तरल पदार्थ, चावल का माँड़, ORS दें और साफ-सफाई का ध्यान रखें। दोनों के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

🎯 Exam Tip: कब्ज और अतिसार दोनों में पर्याप्त तरल पदार्थ और सही आहार बहुत महत्वपूर्ण हैं। अतिसार में निर्जलीकरण (पानी की कमी) से बचने के लिए ORS का उपयोग करें।

 

Question 14. टीकाकरण के महत्त्व को लिखिए।
Answer: टीकाकरण बच्चों को कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। यह शिशु के शरीर में बीमारियों से लड़ने की शक्ति (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पैदा करता है। टीके लगाने से बच्चा बीमारियों जैसे पोलियो, खसरा, टेटनस, डिप्थीरिया, काली खांसी आदि से सुरक्षित रहता है। यह केवल बच्चे को ही नहीं, बल्कि समुदाय में बीमारी फैलने से भी रोकता है, जिससे समाज में स्वास्थ्य का स्तर बेहतर होता है। सही समय पर टीकाकरण करवाना बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए बहुत आवश्यक है।
In simple words: टीकाकरण बच्चों को खतरनाक बीमारियों से बचाता है। यह शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है और उन्हें स्वस्थ रखता है। यह पूरे समुदाय को बीमारियों से बचाता है।

🎯 Exam Tip: टीकाकरण बच्चों को बीमारियों से बचाने की एक सरल और सुरक्षित विधि है, और सभी बच्चों को उनके निर्धारित समय पर टीके लगवाना चाहिए।

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 9 बहुविकल्पीय प्रश्न

 

Question 1. कौन-सा किसी रोग का लक्षण नहीं है –
(अ) भूख कम लगना
(ब) गोद न छोड़ना
(स) अच्छी नींद सोना
(द) उदास रहना
Answer: (स) अच्छी नींद सोना
In simple words: अच्छी नींद आना बीमारी का लक्षण नहीं होता, बल्कि यह स्वस्थ होने का संकेत है। बीमारी में अक्सर भूख कम लगती है और बच्चा सुस्त या उदास रहता है।

🎯 Exam Tip: स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है। बीमारी में बच्चे अक्सर चिड़चिड़े होते हैं और उन्हें ठीक से नींद नहीं आती।

 

Question 2. अतिसार की स्थिति में –
(अ) बच्चे को ऊपरी दूध पिलाना चाहिए।
(ब) बच्चे को ठोस आहार देना चाहिए।
(स) चावल का मांड व जौ का पानी देना चाहिए।
(द) ये सभी।
Answer: (स) चावल का मांड व जौ का पानी देना चाहिए।
In simple words: दस्त होने पर बच्चे को चावल का मांड या जौ का पानी देना सबसे अच्छा है क्योंकि यह हल्का होता है और शरीर को ऊर्जा देता है। ऊपरी दूध और ठोस आहार देने से दस्त बढ़ सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अतिसार में बच्चे के शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए चावल का माँड़ या ORS जैसे तरल पदार्थ देना महत्वपूर्ण है, जबकि ठोस आहार से बचना चाहिए।

 

Question 3. बच्चे द्वारा दूध पलटने का कारण हो सकता है –
(अ) पाचन संस्थान कमजोर होना
(ब) शिशु द्वारा अधिक मात्रा में दूध पी लेना
(स) दूध में अधिक प्रोटीन व वसा होना
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: बच्चे का दूध उलटना कई कारणों से हो सकता है, जैसे कमजोर पाचन, बहुत ज्यादा दूध पी लेना या दूध में ज्यादा प्रोटीन और वसा होना। ये सभी कारण मिलकर बच्चे को दूध पलटने पर मजबूर कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चे का दूध उलटना आमतौर पर सामान्य होता है, लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा हो या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 

Question 5. बच्चों के शरीर में कीड़ों के प्रवेश का कारण हो सकता है –
(अ) दूषित भोजन
(ब) दूषित पानी
(स) गन्दी आदतें
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: बच्चों के पेट में कीड़े दूषित भोजन, गंदे पानी और साफ-सफाई न रखने जैसी आदतों से आ सकते हैं। ये सभी कारक कीड़ों के प्रवेश के लिए जिम्मेदार होते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों को कीड़ों से बचाने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना, स्वच्छ भोजन और पानी देना सबसे महत्वपूर्ण है।

 

Question. रिक्त स्थान भरिए
निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए -
1. रोगग्रस्त बालक का व्यवहार...........व ........हो जाता है।
2. ..........से तात्पर्य नियमित रूप से मल त्याग न होना, कम होना तथा कड़ा होना है।
3. ..........कृमि छोटे आकार का कृमि है जो आँतों में पाया जाता है।
4. .............गले से सम्बन्धित रोग है।
5. .............में बच्चे का शरीर काँपता है, ऐंठने लगता हैं, दाँत भिंच जाते हैं।
Answer:
1. रोगग्रस्त बालक का व्यवहार चिड़चिड़ाजिद्दी हो जाता है।
2. कब्ज से तात्पर्य नियमित रूप से मल त्याग न होना, कम होना तथा कड़ा होना है।
3. अंकुश कृमि छोटे आकार का कृमि है जो आँतों में पाया जाता है।
4. गलतुण्डिका गले से सम्बन्धित रोग है।
5. आक्षेप में बच्चे का शरीर काँपता है, ऐंठने लगता हैं, दाँत भिंच जाते हैं।
In simple words: जब बच्चा बीमार होता है, तो वह चिड़चिड़ा और जिद्दी हो जाता है। कब्ज का मतलब है कि मल का ठीक से न निकलना। अंकुश कृमि छोटे कीड़े होते हैं जो आँतों में रहते हैं। गलतुण्डिका गले की बीमारी है। आक्षेप में बच्चे का शरीर काँपने लगता है।

🎯 Exam Tip: वाक्य को ध्यान से पढ़कर समझें कि किस शब्द या वाक्यांश की आवश्यकता है ताकि वाक्य का अर्थ पूरा और सही हो।

 

Question. सुमेलन
स्तम्भ A को स्तम्भ B से मिलान कीजिए
स्तम्भ A
1. गलतुण्डिका रोग
2. निमोनिया रोग
स्तम्भ B.
(a) फेफड़ा
(b) मस्तिष्क
Answer:
1. गलतुण्डिका रोग - गला (यह टॉन्सिल से संबंधित है, जो गले में होते हैं)।
2. निमोनिया रोग - फेफड़ा
3. आक्षेप - मस्तिष्क (आक्षेप का संबंध मस्तिष्क की गतिविधि से है)।
4. कब्ज - पाचन संस्थान
5. आँख दुखना - आँख का रोग
In simple words: गलतुण्डिका गले को, निमोनिया फेफड़ों को, आक्षेप मस्तिष्क को, कब्ज पाचन को और आँख दुखना आँखों को प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: मिलान करते समय, प्रत्येक रोग के मुख्य अंग या प्रणाली को पहचानना महत्वपूर्ण है, जिस पर वह रोग असर डालता है।

RBSE Class 11 Home Science Chapter 9 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. बच्चों के स्वास्थ्य के सम्बन्ध में कैसे जागरूक रहा जा सकता है?
Answer: बच्चों के स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक रहने के लिए हमें उन्हें होने वाले सामान्य रोगों के लक्षणों की जानकारी रखनी चाहिए। शुरुआती लक्षणों को पहचानने से समय पर इलाज मिल सकता है। माता-पिता को बच्चों के व्यवहार, खाने-पीने और सोने में होने वाले किसी भी बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
In simple words: बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए हमें उनकी आम बीमारियों के लक्षणों को जानना चाहिए।

🎯 Exam Tip: बच्चों में बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जानकारी रखना उन्हें स्वस्थ रखने का पहला कदम है।

 

Question 2. किसी रोग के दो प्रारम्भिक लक्षण बताइए।
Answer: किसी रोग के दो प्रारंभिक लक्षण ये हो सकते हैं:
* चिड़चिड़ा स्वभाव: बच्चा सामान्य से अधिक चिड़चिड़ा या परेशान रहने लगता है।
* दूध न पीना: शिशु को भूख कम लगती है या वह दूध पीने में अरुचि दिखाता है।
In simple words: बीमारी के शुरुआती दो लक्षण हैं बच्चे का चिड़चिड़ा होना और दूध या खाना न खाना।

🎯 Exam Tip: चिड़चिड़ापन और भूख न लगना बच्चों में कई बीमारियों के सामान्य शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

 

Question 3. अतिसार रोग के दो कारण लिखिए।
Answer: अतिसार (दस्त) रोग के दो मुख्य कारण हैं:
* बच्चे को आहार देने के समय में अनियमितता: गलत समय पर या बार-बार खाना खिलाने से पाचन बिगड़ सकता है।
* बच्चे को ठंडा व बासी दूध देना: बासी या ठंडा दूध पीने से पेट खराब हो सकता है और संक्रमण हो सकता है। यह सूक्ष्मजीवों के विकास का कारण बन सकता है।
In simple words: दस्त होने के दो कारण हैं गलत समय पर खाना देना और बच्चे को ठंडा या बासी दूध पिलाना।

🎯 Exam Tip: बच्चों को हमेशा ताजा और गुनगुना भोजन दें, और भोजन के समय का ध्यान रखें ताकि पाचन ठीक रहे।

 

Question 4. अतिसार की स्थिति में बच्चे में जल की कमी को रोकने के लिए क्या उपाय करना चाहिए?
Answer: अतिसार (दस्त) की स्थिति में बच्चे में पानी की कमी (निर्जलीकरण) को रोकने के लिए, जल और लवणों की पूर्ति बहुत जरूरी है। इसके लिए, 1 लीटर उबले पानी में एक चुटकी नमक और मुट्ठी भर चीनी मिलाकर घोल बना लेना चाहिए (यह ORS जैसा ही होता है)। इस घोल को बच्चे को थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाना चाहिए ताकि उसके शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर बना रहे।
In simple words: दस्त होने पर बच्चे में पानी की कमी रोकने के लिए, 1 लीटर उबले पानी में नमक और चीनी मिलाकर बना घोल थोड़ी-थोड़ी देर में पिलाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: दस्त में पानी की कमी सबसे खतरनाक होती है, इसलिए तुरंत ORS (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्ट) या घर पर बने नमक-चीनी के घोल का सेवन शुरू करना चाहिए।

 

Question 6. कब्ज के दो कारण लिखिए।
Answer: कब्ज के दो मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
* तरल पदार्थों का कम मात्रा में सेवन करना: पानी और अन्य तरल पदार्थ कम पीने से मल सूख जाता है।
* शिशु का ऊपरी दूध द्वारा पोषित होना: कुछ ऊपरी दूध में फाइबर कम होता है और वे बच्चे के पाचन तंत्र के लिए भारी हो सकते हैं, जिससे कब्ज हो सकता है।
In simple words: कब्ज के दो कारण हैं: कम पानी पीना और शिशु को ऐसा दूध पिलाना जिसमें फाइबर कम हो या जो पचने में भारी हो।

🎯 Exam Tip: कब्ज से बचने के लिए बच्चों को पर्याप्त पानी और रेशायुक्त भोजन देना बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 7. कब्ज में बच्चे को किस प्रकार का आहार देना चाहिए?
Answer: कब्ज की स्थिति में बच्चे को ऐसे आहार देने चाहिए जिनमें तरल पदार्थ और फाइबर अधिक हों। बच्चे के आहार में तरल पदार्थों जैसे-जल, फलों का रस तथा सब्जियों के सूप की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। ये पदार्थ मल को नरम करने और पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं, जिससे कब्ज से राहत मिलती है।
In simple words: कब्ज में बच्चे को ज्यादा पानी, फलों का रस और सब्जियों का सूप देना चाहिए ताकि मल नरम हो और आसानी से निकल सके।

🎯 Exam Tip: फाइबर और पानी से भरपूर आहार कब्ज के उपचार और रोकथाम दोनों में बहुत प्रभावी होता है।

 

Question 8. बच्चे को भूख न लगने के कोई दो कारण बताइए।
Answer: बच्चे को भूख न लगने के दो संभावित कारण ये हो सकते हैं:
* बच्चे में कोई पाचन विकार होना: यदि बच्चे का पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो उसे भूख कम लग सकती है।
* बच्चा अत्यधिक थका हुआ हो: अत्यधिक थकान के कारण बच्चा सुस्त हो सकता है और उसे खाने का मन नहीं करता। शरीर की ऊर्जा की कमी से भूख का एहसास कम हो जाता है।
In simple words: बच्चे को भूख न लगने के दो कारण हो सकते हैं: पाचन में दिक्कत होना या बच्चे का बहुत ज्यादा थका हुआ होना।

🎯 Exam Tip: भूख न लगना कई बार किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।

 

Question 9. बच्चे द्वारा दूध उलटने का कोई एक कारण लिखिए।
Answer: बच्चे द्वारा दूध उलटने का एक मुख्य कारण यह है कि बच्चे द्वारा दूध पीते समय अधिक मात्रा में पेट के अन्दर वायु चली जाना। जब बच्चा दूध पीते समय हवा निगल लेता है, तो पेट में गैस बन जाती है, जिससे उसे असहज महसूस होता है और वह दूध उलट देता है।
In simple words: बच्चे का दूध उलटना इसलिए हो सकता है क्योंकि वह दूध पीते समय पेट में बहुत ज्यादा हवा निगल लेता है।

🎯 Exam Tip: दूध पिलाते समय बच्चे को सही स्थिति में रखें और उसे डकार दिलाना न भूलें ताकि पेट की हवा निकल जाए।

 

Question 10. गोल कृमि किस प्रकार बच्चे के पेट में पहुंच जाते हैं?
Answer: गोलकृमि बच्चे के पेट में दूषित भोजन, जल और कच्ची साग-सब्जी के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं। इन चीजों में गोलकृमि के अंडे या लार्वा हो सकते हैं, जिन्हें खाने या पीने से बच्चे संक्रमित हो जाते हैं। जब ये अंडे शरीर में जाते हैं, तो वे आँतों में विकसित होकर कृमि बन जाते हैं।
In simple words: गोलकृमि दूषित खाने, गंदे पानी और बिना धोई कच्ची सब्जियों के जरिए बच्चे के पेट में पहुँच जाते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों को गोलकृमि से बचाने के लिए, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, भोजन को ठीक से पकाएं और साफ पानी पिलाएं।

 

Question 12. ज्वर का अनुमान कैसे लगाया जाता है?
Answer: ज्वर (बुखार) का अनुमान ग्रस्त बच्चे के शरीर को छूकर ही लगाया जा सकता है। जब किसी बच्चे को बुखार होता है, तो उसका शरीर सामान्य से अधिक गर्म महसूस होता है। हालाँकि, सही तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का उपयोग करना चाहिए।
In simple words: बुखार का पता बच्चे के शरीर को छूकर लगाया जा सकता है, क्योंकि बुखार में शरीर गर्म हो जाता है।

🎯 Exam Tip: यद्यपि हाथ से छूकर बुखार का अनुमान लगाया जा सकता है, सटीक तापमान जानने के लिए हमेशा थर्मामीटर का उपयोग करें।

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. प्रवाहिका रोग क्या है?
Answer: प्रवाहिका रोग, जिसे दस्त या डायरिया भी कहते हैं, तब होता है जब शिशु दिन में चार से अधिक बार मल त्याग करता है। इस स्थिति में उसका मल ढीला, जलयुक्त, हरा, झागदार और दुर्गन्धपूर्ण होता है। गुदा मार्ग भी लाल हो सकता है और उसमें पीड़ा महसूस हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, ये सभी लक्षण प्रवाहिका रोग को दर्शाते हैं। यह अक्सर पेट के संक्रमण के कारण होता है।
In simple words: प्रवाहिका एक बीमारी है जिसमें बच्चा दिन में कई बार पतला, पानी जैसा और बदबूदार मल त्याग करता है, जिससे गुदा में दर्द भी हो सकता है।

🎯 Exam Tip: प्रवाहिका में पानी की कमी (निर्जलीकरण) होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए तुरंत ORS का सेवन शुरू करना चाहिए।

 

Question 2. कब्ज से आप क्या समझते हैं?
Answer: कब्ज से तात्पर्य है कि नियमित रूप से मल त्याग न होना, मल का कम आना या मल का कड़ा होना। कभी-कभी मल इतना कड़ा होता है कि बच्चे को शौच करने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ता है, जिससे वह रोता-चिल्लाता है। यह स्थिति पाचन तंत्र में पानी की कमी या फाइबर की कमी के कारण हो सकती है, जिससे मल सूख जाता है और निकालने में मुश्किल होती है।
In simple words: कब्ज का मतलब है कि मल का नियमित रूप से न आना, कम या कड़ा होना, जिससे बच्चे को शौच करते समय दर्द होता है।

🎯 Exam Tip: कब्ज से राहत पाने के लिए पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त भोजन खाना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. सर्दी-खांसी क्यों हानिकारक हैं?
Answer: बच्चों में सामान्य सर्दी और खांसी मुख्य रोग हैं, खासकर बदलते मौसम में और सर्दियों में। अगर इनमें लापरवाही बरती जाए, तो ये गंभीर रूप ले सकते हैं और निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसे बड़े रोगों को जन्म दे सकते हैं। इसलिए, इन्हें केवल साधारण रोग समझकर इनकी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, समय पर उचित उपचार कराना चाहिए ताकि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके। सर्दी-खांसी से फेफड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
In simple words: सर्दी-खांसी हानिकारक हो सकती है क्योंकि लापरवाही बरतने पर ये निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकती हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों में सर्दी-खांसी के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें और यदि वे कुछ दिनों में ठीक न हों, तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

 

Question 4. गलतुण्डिका रोग के लक्षण लिखिए।
Answer: गलतुण्डिका रोग (टॉन्सिलिटिस) के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
* गले के दोनों ओर की ग्रंथियों (टॉन्सिल) में सूजन आ जाती है।
* गले में तेज दर्द होता है, खासकर कुछ निगलते समय।
* बुखार आ सकता है, जिसके साथ ठंड भी लग सकती है।
* आवाज में बदलाव या भारीपन महसूस हो सकता है।
* थकान और कमजोरी महसूस होती है।
* छोटे बच्चों में भूख कम लगना और चिड़चिड़ापन भी दिख सकता है।
In simple words: गलतुण्डिका रोग में गले के दोनों ओर सूजन, गले में तेज दर्द, बुखार और खाना निगलने में कठिनाई होती है।

🎯 Exam Tip: गलतुण्डिका के लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज कराना चाहिए ताकि संक्रमण न बढ़े और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. यदि कोई बच्चा रोगों के प्रारम्भिक लक्षणों में से कुछ का प्रदर्शन करता है तो क्या करना चाहिए?
Answer: यदि कोई बच्चा रोगों के प्रारंभिक लक्षणों में से कुछ दिखाता है, तो सबसे पहले उसकी क्रियाओं और व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों को ध्यान से देखना और नोट करना चाहिए। इसके बाद, तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। जब तक शिशु को डॉक्टर के पास नहीं ले जाया जाता, तब तक घर पर कुछ उपाय किए जा सकते हैं:
* बुखार होने पर: बच्चे का तापमान समय-समय पर नोट करें।
* दर्द का पता लगाएं: यदि शिशु को कहीं दर्द है, तो यह पता लगाने की कोशिश करें कि दर्द पेट, कान, आँख, पैर या हाथ कहाँ पर है। हल्के से छूकर पता करें कि क्या बच्चा किसी जगह पर प्रतिक्रिया दे रहा है।
* दूध पीने में अरुचि: यदि शिशु दूध पीने में रुचि नहीं दिखा रहा है, तो उसे जबरदस्ती दूध न पिलाएँ।
* पानी पिलाना: रोगी शिशु को उबालकर ठंडा किया हुआ पानी पिलाएँ ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।
* व्यक्तिगत स्वच्छता और भोजन: रोगी शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता और भोजन की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। उसके कपड़े, बिस्तर और बर्तन साफ रखें।
* घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें: सर्दी, खांसी या अन्य सामान्य रोगों के लिए केवल घरेलू उपचार पर अधिक समय तक निर्भर न रहें, बल्कि जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। समय पर डॉक्टरी सलाह लेना बहुत जरूरी है।
In simple words: यदि बच्चा बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाए, तो उसके व्यवहार पर ध्यान दें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर के पास जाने तक बुखार नोट करें, दर्द का पता लगाएं, जबरदस्ती दूध न पिलाएं और उबला पानी पिलाएं।

🎯 Exam Tip: बच्चों में बीमारी के शुरुआती संकेतों को अनदेखा न करें; जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लेना गंभीर समस्याओं को रोकने में मदद करता है।

 

Question 2. बच्चों के शरीर में कीड़ों के प्रवेश के कारण तथा उपचार बताइए।
Answer: बच्चों के शरीर में कीड़ों का प्रवेश आमतौर पर स्वच्छता की कमी और दूषित वातावरण के कारण होता है।
बच्चों के शरीर में कीड़ों के प्रवेश के कारण:
* गंदे हाथों से भोजन करना, बनाना और परोसना।
* दूषित जल और भोजन का सेवन करना, जिसमें कीड़ों के अंडे या लार्वा हो सकते हैं।
* बच्चों का मिट्टी में खेलना, क्योंकि मिट्टी में कीड़ों के अंडे मौजूद हो सकते हैं।
* बच्चों द्वारा मिट्टी खाना, जो सीधे संक्रमण का कारण बनता है।
* मल त्याग के बाद हाथों को ठीक से न धोना।
उपचार:
* घर और आस-पास के वातावरण में साफ-सफाई बनाए रखें। नियमित रूप से सफाई करें।
* बच्चों को मिट्टी खाने से रोकें।
* पीने के लिए हमेशा पानी उबालकर ठंडा करके पिलाएँ।
* बच्चों को अधिक मीठा खाने से बचाएँ, क्योंकि कुछ कीड़े मीठे वातावरण में पनपते हैं।
* मल परीक्षण करवाएँ और डॉक्टर के परामर्श के अनुसार दवा दें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न दें।
In simple words: बच्चों के शरीर में कीड़े गंदे हाथों, दूषित खाने-पानी और मिट्टी में खेलने से जाते हैं। इन्हें रोकने के लिए साफ-सफाई रखें, उबला पानी पिलाएं, मिट्टी खाने से रोकें और डॉक्टर की सलाह पर दवा दें।

🎯 Exam Tip: पेट के कीड़ों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और पर्यावरण की सफाई सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।

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