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Detailed Chapter 23 रंगाई एवं छपाई RBSE Solutions for Class 11 Home Science
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Class 11 Home Science Chapter 23 रंगाई एवं छपाई RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 11 Home Science Chapter 23 रंगाई एवं छपाई
RBSE Class 11 Home Science Chapter 23 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर चुनें –
(i) विकसित रंग, एजोइक रंग, स्वतः प्रत्यक्ष रंग के प्रकार हैं -
(अ) क्रोम रंग
(ब) प्रत्यक्ष रंग
(स) गंधक रंग
(द) क्षारीय रंग
Answer: (ब) प्रत्यक्ष रंग
In simple words: विकसित रंग, एजोइक रंग और स्वतः प्रत्यक्ष रंग सभी 'प्रत्यक्ष रंग' के ही प्रकार हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'प्रत्यक्ष रंग' कपड़े पर सीधा लगाए जाते हैं और उन्हें किसी अतिरिक्त रसायन की आवश्यकता नहीं होती है।
Question 1. (ii) रंजक एवं वर्णक संबंधित है –
(अ) प्राकृतिक रंग
(ब) कत्रिम रंग
Answer: (ब) कृत्रिम रंग
In simple words: रंजक और वर्णक दोनों ही कृत्रिम रंगों से जुड़े हुए होते हैं, जो रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: रंजक घुलनशील होते हैं और रेशों में प्रवेश करते हैं, जबकि वर्णक अघुलनशील होते हैं और रेशों की सतह पर चिपकते हैं।
Question 1. (iv) रोलर छपाई में नमूने अंकित होते हैं –
(अ) लकड़ी के ठप्पे पर
(ब) रोलरों पर
(स) दोनों पर
(द) स्क्रीन पर
Answer: (ब) रोलरों पर
In simple words: रोलर छपाई की विधि में कपड़ों पर डिज़ाइन बनाने के लिए रोलर्स का इस्तेमाल किया जाता है।
🎯 Exam Tip: रोलर छपाई एक तेज़ और बड़े पैमाने पर छपाई की विधि है, जहाँ डिज़ाइन धातु के रोलर्स पर उकेरे जाते हैं।
Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
1. रंगाई एवं छपाई......... परिसज्जा की विधि है।
2. प्राकृतिक रंग.........से प्राप्त होते हैं।
3. कृत्रिम रंग.........से प्राप्त किए जाते हैं।
4. प्राकृतिक एवं कृत्रिम सैल्युलोज के रेशों से बने वस्त्रों को रंगगने हेतु.........रंग उपयुक्त होते हैं।
5. बाटिक क्रिया में.........मोम उपयोग में लाते हैं।
Answer:
1. रंगों की
2. वनस्पति, प्राणिज एवं खनिज स्रोत
3. कोलतार
4. गंधक
5. रंग से बचाने के लिए।
In simple words: रंगाई और छपाई कपड़ों को सुंदर बनाने के तरीके हैं। प्राकृतिक रंग पौधों, जानवरों और खनिजों से मिलते हैं, जबकि कृत्रिम रंग कोलतार से बनते हैं। गंधक रंग सेल्युलोज रेशों के लिए अच्छे होते हैं और बाटिक में मोम का इस्तेमाल रंग को फैलने से रोकने के लिए होता है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, वाक्य के अर्थ और संदर्भ को ध्यान से समझें, ताकि सही शब्द का चयन हो सके।
Question 3. संश्लेषित रंग की खोज किसने और कब की?
Answer: संश्लेषित रंगों की खोज 1856 में हेनरी विलियम परकीन ने की थी। उन्होंने एनीलीन से कुनैन बनाते समय गलती से इन रंगों की खोज की। इन रंगों को कोलतार रंग भी कहा जाता है।
In simple words: हेनरी विलियम परकीन ने 1856 में गलती से संश्लेषित रंगों को खोजा था।
🎯 Exam Tip: संश्लेषित रंगों की खोज ने वस्त्र उद्योग में क्रांति ला दी, जिससे रंगों की विविधता और पक्केपन में वृद्धि हुई।
Question 5. रंगों की रंगाई के प्रकार लिखो।
Answer: रंगाई के मुख्य प्रकार इस प्रकार हैं:
1. रेशों की रंगाई:
• टॉप रंगाई
• स्टॉक रंगाई
• ड्रॉप रंगाई।
2. धागे की रंगाई
3. तैयार वस्त्र की रंगाई:
• जिग रंगाई
• क्रास रंगाई
• बाँधकर रंगाई
• रील रंगाई
• संयुक्त रंगाई
• निरन्तर मशीन द्वारा रंगाई
• बाटिक।
In simple words: रंगाई के कई तरीके होते हैं, जैसे रेशों को रंगना, धागों को रंगना, और बने हुए कपड़ों को रंगना।
🎯 Exam Tip: रंगाई की विधि का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि किस प्रकार का कपड़ा है और अंतिम उत्पाद कैसा चाहिए।
Question 6. तैयार वस्त्र की रंगाई के कोई 5 तरीकों के नाम लिखो।
Answer: तैयार वस्त्र की रंगाई के पाँच तरीके हैं:
1. जिग रंगाई
2. क्रास रंगाई
3. बाँधकर रंगाई
4. रील रंगाई
5. संयुक्त रंगाई
In simple words: तैयार कपड़ों को रंगने के लिए जिग, क्रास, बाँधकर, रील और संयुक्त जैसी कई विधियाँ अपनाई जाती हैं।
🎯 Exam Tip: तैयार वस्त्र की रंगाई विधियों के नाम याद रखें, क्योंकि ये कपड़ों को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण होती हैं।
Question 7. द्विपक्षी छपाई क्या है?
Answer: द्विपक्षी छपाई वह विधि है जिसमें कपड़े के दोनों तरफ एक साथ रंगीन डिज़ाइन छापे जाते हैं। इस छपाई से ऐसा लगता है जैसे डिज़ाइन कपड़े में बुना हुआ हो। यह छपाई इतनी सफाई से की जाती है कि कपड़े के दोनों ओर डिज़ाइन बिल्कुल समान दिखाई देते हैं।
In simple words: द्विपक्षी छपाई में कपड़े के दोनों तरफ एक ही समय में डिज़ाइन बनाए जाते हैं, जिससे वे बुने हुए जैसे दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विपक्षी छपाई में सटीकता और कुशल कारीगरी बहुत महत्वपूर्ण होती है ताकि दोनों तरफ के डिज़ाइन मेल खाएँ।
Question 8. रंग परिसज्जा से आप क्या समझते हैं? रंग के प्रकार लिखिए।
Answer: रंग परिसज्जा का मतलब है कपड़े को अलग-अलग रंगों से रंगकर उसे सुंदर, आकर्षक और चमकीला बनाना।
रंगों के प्रकार:
1. प्राकृतिक रंग,
2. कृत्रिम अथवा संश्लेषित रंग
इनके अन्य प्रकार हैं:
(i) अम्लीय रंग
(ii) क्षारीय रंग
(iii) ऑक्सीकारक रंग
(iv) क्रोम रंग
(v) प्रत्यक्ष रंग
(vi) गंधक रंग
(vii) प्रसारित रंग
(ix) नेप्योल रंग
(x) बाढ़ रंग।
In simple words: रंग परिसज्जा से कपड़े को रंगों से सुंदर बनाया जाता है, और इसके कई प्रकार होते हैं जैसे प्राकृतिक, कृत्रिम, अम्लीय आदि।
🎯 Exam Tip: रंग परिसज्जा कपड़ों की सुंदरता और बाज़ार मूल्य बढ़ाने में मदद करती है, इसलिए इसके प्रकार और प्रक्रियाएँ समझना महत्वपूर्ण है।
Question 9. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
1. रंजक व वर्णक
2. क्रास रंगाई
3. द्विपक्षी छपाई
Answer:
1. रंजक (Dyes): ये ऐसे पदार्थ हैं जो पानी में घुल जाते हैं। इनसे कपड़ों को आसानी से रंगा जा सकता है। ये थोड़े महंगे होते हैं और कपड़े के रेशों के अंदर तक पहुँचकर उन्हें रंगते हैं।
वर्णक (Pigments): ये ऐसे पदार्थ हैं जो पानी में नहीं घुलते। ये कपड़ों के रेशों की बाहरी सतह पर चिपक जाते हैं। वर्णक से कपड़े को रंगने के लिए किसी चिपकने वाले पदार्थ (बाइंडर) का इस्तेमाल करना पड़ता है।
2. क्रास रंगाई: यह रंगाई की एक विधि है जिसमें कपड़े को एक से अधिक रंगों से रंगा जाता है, जिससे कपड़े में अलग-अलग रंगों का प्रभाव आता है। यह अक्सर उन कपड़ों पर की जाती है जो अलग-अलग रेशों के मिश्रण से बने होते हैं।
3. द्विपक्षी छपाई (Duplex Printing): इस प्रकार की छपाई में कपड़े के दोनों तरफ एक ही डिज़ाइन छापा जाता है। इससे कपड़ा ऐसा लगता है जैसे डिज़ाइन उसमें बुना हुआ हो। यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है ताकि दोनों तरफ के डिज़ाइन बिल्कुल समान दिखें।
In simple words: रंजक पानी में घुलते हैं और कपड़े के अंदर तक रंगते हैं, जबकि वर्णक पानी में नहीं घुलते और सतह पर चिपकते हैं। क्रास रंगाई में कपड़े को कई रंगों से रंगा जाता है। द्विपक्षी छपाई में कपड़े के दोनों तरफ एक ही डिज़ाइन छापा जाता है।
🎯 Exam Tip: रंजक और वर्णक के बीच मुख्य अंतर उनकी घुलनशीलता और कपड़ों पर उनके अनुप्रयोग के तरीके में है। क्रास और द्विपक्षी छपाई वस्त्रों को विशेष प्रभाव देने की महत्वपूर्ण विधियाँ हैं।
Question 10. रंगाई विधि द्वारा परिसज्जा कैसे की जाती है? बंधेज एवं बटिक परिसज्जा को समझाओ।
Answer:
रंगाई द्वारा परिसज्जा: कपड़ों को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए उन्हें रंग के घोल में डुबोकर रंगा जाता है। कपड़ों पर छपाई करने से पहले, उनकी पृष्ठभूमि को रंगीन बनाने के लिए भी रंगाई की जाती है।
बाँधकर रंगना या बंधेज रंगाई (Tie and dye process): इसे बंधेज या बाँधनी भी कहते हैं। राजस्थान की बाँधनी और गुजरात का पटोला इस विधि के प्रसिद्ध उदाहरण हैं। इसमें सबसे पहले कपड़े पर डिज़ाइन बनाया जाता है। फिर डिज़ाइन के अनुसार धागों से कपड़े के हिस्सों को कसकर बाँध दिया जाता है। इसके बाद कपड़े को रंग में डुबोया जाता है। जो हिस्से बंधे होते हैं, उन पर रंग नहीं चढ़ता, और बाकी हिस्सों पर रंग चढ़ जाता है। कई रंगों में रंगने के लिए पहले हल्के रंग का इस्तेमाल किया जाता है, फिर सूखने के बाद डिज़ाइन के अनुसार अलग-अलग रंगों में रंगा जाता है।
बटिक (Batik): इस विधि में भी पहले कपड़े पर डिज़ाइन बनाया जाता है। जिन हिस्सों को रंग से बचाना होता है, उन पर ब्रश की मदद से गरम मोम की परत लगाई जाती है और उसे सुखाया जाता है। मोम सूखने के बाद कपड़े को रंग के घोल में डुबोया जाता है। मोम लगे हिस्सों पर रंग नहीं चढ़ता, और बाकी हिस्सों पर चढ़ जाता है। इस प्रक्रिया में मोम सूखने और रंगाई के दौरान कुछ जगहों पर चटक जाता है, जिससे इन दरारों में भी रंग भर जाता है, जो एक खास प्रभाव देता है। दूसरे रंग में रंगने के लिए कपड़े को सुखाने के बाद दोबारा मोम लगाकर फिर रंगा जाता है।
In simple words: रंगाई से कपड़े सुंदर बनते हैं। बंधेज में कपड़े के कुछ हिस्सों को धागे से बाँधकर रंगते हैं ताकि उन पर रंग न चढ़े। बटिक में कपड़े के उन हिस्सों पर मोम लगाते हैं जिन्हें रंगना नहीं होता, और मोम के चटकने से खास पैटर्न बनते हैं।
🎯 Exam Tip: बंधेज और बटिक दोनों ही प्रतिरोधक रंगाई (resist dyeing) की विधियाँ हैं, जहाँ कपड़े के कुछ हिस्सों को रंग लगने से बचाया जाता है ताकि पैटर्न बन सकें। इनके बीच मुख्य अंतर इस्तेमाल की गई प्रतिरोधक सामग्री (धागा बनाम मोम) में है।
Question 11. छपाई किसे कहते हैं? निम्न पर टिप्पणी लिखो –
1. ठप्पा छपाई,
2. स्क्रीन छपाई,
3. स्प्रे प्रिटिंग
Answer:
छपाई (Printing): छपाई का मतलब है कपड़े पर डिज़ाइन (नमूने) बनाना। इसमें कपड़े पर आकार और आकृति के अनुसार रंग के पैटर्न बनाए जाते हैं। छपाई के लिए डिज़ाइन के अनुसार रंगों को चुना जाता है और एक गाढ़ा रंगीन पेस्ट तैयार किया जाता है। विभिन्न रंगों से छपाई के लिए अलग-अलग डिज़ाइन सैम्पल इस्तेमाल किए जाते हैं। छपाई के बाद कपड़े को सुखाकर रंग पक्का किया जाता है।
1. ठप्पा छपाई (Block Printing): इस विधि में डिज़ाइन लकड़ी या धातु के ठप्पों पर बनाए जाते हैं। कपड़े को एक गद्देदार सतह पर फैलाया जाता है। रंग के पेस्ट को डिज़ाइन वाले ठप्पे पर लगाकर, उसे कपड़े पर निश्चित जगह पर हाथ से ज़ोर से दबाया जाता है। रंग सूखने के बाद, दूसरे रंग के लिए नया ठप्पा इस्तेमाल होता है।
2. स्क्रीन छपाई (Screen Printing): इस विधि में एक खास फ्रेम (स्क्रीन) का इस्तेमाल होता है। स्क्रीन के जिन हिस्सों पर रंग नहीं लगाना होता, उन्हें किसी पदार्थ से ढक दिया जाता है। फ्रेम तैयार होने के बाद, उसे कपड़े पर रखकर सावधानी से रंग का पेस्ट लगाया जाता है। ढके हुए हिस्सों पर रंग नहीं जाता, जबकि बाकी हिस्सों पर स्क्रीन से रंग कपड़े पर पहुँच जाता है, जिससे डिज़ाइन बन जाता है।
3. स्प्रे प्रिंटिंग या फुहार छपाई (Spray Printing): इस विधि में मशीन एयर ब्रश या हाथ से ब्रश का उपयोग करके कपड़े पर डिज़ाइन के अनुसार रंग की फुहार मारी जाती है।
In simple words: छपाई कपड़े पर डिज़ाइन बनाने का तरीका है। ठप्पा छपाई में लकड़ी के ठप्पों से डिज़ाइन बनते हैं। स्क्रीन छपाई में एक खास फ्रेम का उपयोग होता है जहाँ कुछ हिस्से ढके होते हैं। स्प्रे प्रिंटिंग में ब्रश या एयर ब्रश से रंग छिड़का जाता है।
🎯 Exam Tip: छपाई की ये विधियाँ कपड़ों पर अलग-अलग कलात्मक प्रभाव और पैटर्न बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं। हर विधि की अपनी विशिष्टताएँ और अनुप्रयोग हैं।
Question. रंगाई की प्रक्रिया की जाती है -
(अ) रेशों पर
(ब) धागों पर
(स) तैयार वस्त्र पर
(द) इन सभी पर
Answer: (द) इन सभी पर
In simple words: रंगाई की प्रक्रिया रेशों, धागों और तैयार कपड़ों तीनों पर की जा सकती है।
🎯 Exam Tip: रंगाई का चुनाव कपड़े की अवस्था (रेशा, धागा या वस्त्र) पर निर्भर करता है, जिससे रंग की गहराई और पक्केपन को नियंत्रित किया जा सके।
Question 2. छपाई से सम्बन्धित नहीं है –
(अ) ब्लॉक
(ब) रंग
(स) रेशे
(द) मोम
Answer: (स) रेशे
In simple words: छपाई की प्रक्रिया में ब्लॉक, रंग और मोम का इस्तेमाल होता है, लेकिन रेशे सीधे तौर पर छपाई से संबंधित नहीं होते।
🎯 Exam Tip: छपाई में डिज़ाइन बनाने के लिए माध्यम और सामग्री (ब्लॉक, रंग, मोम) का उपयोग होता है, जबकि रेशे कपड़े की मूल सामग्री होते हैं।
Question 3. क्रॉस रंगाई की जाती है -
(अ) सूती वस्त्र पर
(ब) कॉटस बल पर
(स) रेशम पर
(द) रेयॉन पर
Answer: (ब) कॉटस बल पर
In simple words: क्रॉस रंगाई मुख्य रूप से उन कपड़ों पर की जाती है जो कई तरह के धागों या रेशों से मिलकर बने होते हैं, जैसे कॉटन बल।
🎯 Exam Tip: क्रॉस रंगाई का उपयोग मिश्रित रेशों वाले कपड़ों में अलग-अलग रंगों के प्रभाव लाने के लिए किया जाता है।
Question 4. वर्णक है -
(अ) घुलनशील रंग
(ब) अघुलनशील रंग
(स) चिपकाने वाला पदार्थ
(द) बिखरने वाले रंग
Answer: (ब) अघुलनशील रंग
In simple words: वर्णक वे रंगीन पदार्थ होते हैं जो पानी में नहीं घुलते।
🎯 Exam Tip: वर्णक कपड़ों की सतह पर एक बाइंडर (चिपकाने वाले पदार्थ) की मदद से लगाए जाते हैं, क्योंकि वे रेशों के अंदर प्रवेश नहीं करते।
Question. रिक्त स्थान भरिए -
निम्नलिखित वाक्यों में खाली स्थान भरिए -
1. सेल्युलोजिक रेशों से बने वस्त्रों को रंगने के लिए...........रंग उपयुक्त होते हैं।
2...........रंग जल में बहुत कम मात्रा में घुलते हैं।
3. द्विपक्षी छपाई में नमूने वस्त्र के.........छापे जाते हैं।
4. स्क्रीन बनाने के लिए रेशम या नायलॉन के वस्त्र को.........में कसा जाता है।
5. स्टैंसिल छपाई...........छपाई का लघु रूप है।
Answer:
1. गंधक
2. बिखरने वाले
3. दोनों ओर
4. लकड़ी के छोटे फ्रेम
5. स्क्रीना
In simple words: सेल्युलोजिक रेशों के लिए गंधक रंग अच्छे होते हैं। कुछ रंग पानी में कम घुलते हैं। द्विपक्षी छपाई में डिज़ाइन कपड़े के दोनों तरफ छपते हैं। स्क्रीन बनाने के लिए कपड़े को छोटे लकड़ी के फ्रेम में कसते हैं, और स्टैंसिल छपाई स्क्रीन छपाई का ही एक छोटा रूप है।
🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, आपको वस्त्रों, रंगों और छपाई की विभिन्न तकनीकों से संबंधित प्रमुख शब्दों का ज्ञान होना चाहिए।
Question. सुमेलन
स्तम्भ A तथा स्तम्भ B का मिलान कीजिए –
स्तम्भA स्तम्भ B
1. रंजक (a) अघुलनशीन पदार्थ
2. वर्णक (b) उदासीन रंग
3. बाटिक (c) घुलनशील पदार्थ
4. कपास (d) बंधेज
5. बाँधनी (e) मोम
Answer:
1. (c) घुलनशील पदार्थ
2. (a) अघुलनशीन पदार्थ
3. (e) मोम
4. (b) उदासीन रंग
5. (d) बंधेज
In simple words: रंजक घुलनशील होते हैं, वर्णक अघुलनशील। बाटिक में मोम का उपयोग होता है। कपास उदासीन रंग को सोखती है और बाँधनी एक प्रकार की बंधेज रंगाई है।
🎯 Exam Tip: मिलान करते समय, पहले उन जोड़ियों को पहचानें जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी विकल्पों को खत्म करने की विधि का उपयोग करें।
Question 1. वस्त्र परिसज्जा का सर्वाधिक आकर्षक विधि कौन-सा है?
Answer: वस्त्र परिसज्जा की सर्वाधिक आकर्षक विधि रंगाई एवं छपाई है। रंगाई और छपाई से कपड़े बहुत सुंदर और प्रभावशाली दिखते हैं।
In simple words: कपड़ों को सबसे आकर्षक बनाने के लिए रंगाई और छपाई का इस्तेमाल किया जाता है।
🎯 Exam Tip: रंगाई और छपाई वस्त्रों के सौंदर्य मूल्य और बाजार में उनकी मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 2. घुलनशीलता के आधार पर रंग के प्रकार बताइए।
Answer: घुलनशीलता के आधार पर रंग कई प्रकार के होते हैं, जैसे: रंजक, वर्णक, प्रत्यक्ष रंग, बिखरने वाले रंग, मोरडेन्ट, गंधक रंग और वाटरेज रंग। ये सभी अलग-अलग तरह से पानी में घुलते या प्रतिक्रिया करते हैं।
In simple words: रंग पानी में कैसे घुलते हैं, इसके आधार पर उनके कई प्रकार होते हैं, जैसे रंजक, वर्णक और गंधक रंग।
🎯 Exam Tip: रंगों की घुलनशीलता यह तय करती है कि वे किस प्रकार के रेशों पर और किस विधि से लगाए जा सकते हैं।
Question 3. प्राप्ति स्रोत के आधार पर रंगों के प्रकार लिखिए।
Answer: प्राप्ति स्रोत के आधार पर रंग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
1. प्राकृतिक रंग
2. कृत्रिम या संश्लेषित रंग
In simple words: रंग दो तरह से मिलते हैं - प्राकृतिक स्रोतों से या फिर प्रयोगशाला में बनाए गए कृत्रिम तरीकों से।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक रंग पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, जबकि कृत्रिम रंग अधिक विविधता और स्थिरता प्रदान करते हैं।
Question 4. रंगहीन रंग का प्रयोग कब किया जाता है?
Answer: रंगहीन रंगों का प्रयोग आमतौर पर विरंजन (bleaching) के समय किया जाता है। विरंजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कपड़े से उसका प्राकृतिक रंग या कोई दाग हटाने के लिए इन रंगों का उपयोग होता है, जिससे कपड़ा सफेद या हल्का हो जाता है।
In simple words: रंगहीन रंगों का उपयोग कपड़ों को साफ और सफेद करने के लिए विरंजन प्रक्रिया में होता है।
🎯 Exam Tip: विरंजन प्रक्रिया में रंगहीन रंगों का सही उपयोग कपड़ों को बिना नुकसान पहुँचाए उनकी सफेदी बनाए रखने में मदद करता है।
Question 5. गंधक रंग किस प्रकार के रेशों को रंगने के काम आते हैं?
Answer: गंधक रंग प्राकृतिक और कृत्रिम सैल्युलोज रेशों को रंगने के काम आते हैं। ये रंग सूती, लिनन और रेयॉन जैसे रेशों के लिए बहुत उपयुक्त होते हैं, क्योंकि ये उन्हें गहरा और पक्का रंग देते हैं।
In simple words: गंधक रंग प्राकृतिक और कृत्रिम सैल्युलोज रेशों, जैसे सूती और रेयॉन को रंगने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: गंधक रंग अपनी अच्छी रंग स्थिरता और गहरे रंगों के लिए जाने जाते हैं, खासकर सेल्युलोजिक वस्त्रों पर।
Question 6. क्षारीय रंग किस प्रकार के वस्त्रों को रंगने में प्रयुक्त होते हैं?
Answer: क्षारीय रंग ऊनी, रेशमी और सैल्यूलोजिक वस्त्रों को रंगने में प्रयुक्त होते हैं। ये रंग अक्सर गहरे और चमकीले रंग देने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
In simple words: क्षारीय रंग ऊन, रेशम और सैल्युलोजिक कपड़ों को रंगने में इस्तेमाल होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्षारीय रंग अपनी चमक और रंगीनता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन कुछ रेशों पर इनका पक्कापन कम हो सकता है।
Question 7. दो प्राणिज रंगों के उदाहरण लिखिए।
Answer: दो प्राणिज रंगों के उदाहरण हैं:
• कॉक निपल रंग
• टाटा रियल।
In simple words: जानवरों से मिलने वाले दो रंगों के नाम कॉक निपल रंग और टाटा रियल हैं।
🎯 Exam Tip: प्राणिज रंग प्राचीन काल से ही कपड़ों और अन्य सामग्रियों को रंगने के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं।
Question 10. स्टॉक रंगाई क्या है –
Answer: स्टॉक रंगाई एक विधि है जिसमें रेशों को बड़े-बड़े टैंकों में डालकर ऊँचे तापमान पर रंगा जाता है। यह रंगाई रेशे की शुरुआती अवस्था में ही की जाती है, ताकि रंग पूरे रेशे में अच्छी तरह से समा जाए।
In simple words: स्टॉक रंगाई में कच्चे रेशों को बड़े टैंकों में गरम करके रंगा जाता है।
🎯 Exam Tip: स्टॉक रंगाई गहरे और समान रंग प्राप्त करने के लिए उपयुक्त है, क्योंकि रेशे रंग को पूरी तरह सोख लेते हैं।
Question 11. पटोला किस राज्य की रंगाई के रूप में प्रसिद्ध है?
Answer: पटोला रंगाई गुजरात राज्य में प्रसिद्ध है। यह एक जटिल बंधेज रंगाई तकनीक है जहाँ रेशों को बुनाई से पहले ही रंग दिया जाता है, जिससे सुंदर और महंगे कपड़े बनते हैं।
In simple words: पटोला रंगाई गुजरात राज्य की मशहूर रंगाई विधि है।
🎯 Exam Tip: पटोला अपनी जटिलता, जीवंत रंगों और दोनों तरफ समान पैटर्न के लिए जाना जाता है, जो इसे एक अनूठी और मूल्यवान वस्त्र कला बनाता है।
Question 12. जयपुर की कौन-सी रंगाई प्रसिद्ध है?
Answer: जयपुर की बाँधनी रंगाई प्रसिद्ध है। बाँधनी बंधेज रंगाई की एक विधि है जहाँ कपड़े के कुछ हिस्सों को धागे से बाँधकर रंगते हैं, जिससे खास पैटर्न बनते हैं।
In simple words: जयपुर में बाँधनी रंगाई बहुत प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: बाँधनी रंगाई राजस्थान की एक पारंपरिक कला है, जिसमें छोटे-छोटे गांठें लगाकर कपड़े पर सुंदर डिज़ाइन बनाए जाते हैं।
Question 13. छपाई की दो विधियों के नाम लिखिए।
Answer: छपाई की दो विधियाँ हैं:
1. ठप्पा छपाई (Block Printing)
2. स्क्रीन छपाई (Screen Printing)
In simple words: ठप्पा छपाई और स्क्रीन छपाई, छपाई के दो मुख्य तरीके हैं।
🎯 Exam Tip: ये दोनों विधियाँ कपड़ों पर डिज़ाइन बनाने के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं, हर विधि की अपनी अनूठी प्रक्रिया और परिणाम होते हैं।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 23 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. रंगाई की विभिन्न अवस्थाओं का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: रंगाई की विभिन्न अवस्थाओं को मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. रेशों की रंगाई:
(i) टॉप रंगाई
(ii) ड्रॉप रंगाई: इस विधि में कृत्रिम रेशों को बनाते समय रसायनों के घोल में रंग मिलाया जाता है, फिर स्पिनरेट के छिद्रों से निकालकर रंगीन तंतु बनाए जाते हैं।
(iii) स्टॉक रंगाई: इस रंगाई के लिए रेशों को बड़े-बड़े टैंकों में डालकर ऊँचे तापमान पर रंगा जाता है।
2. धागों की रंगाई: धागों की लच्छियों को छड़ (Rod) पर लटकाकर रंग के टैंक में घुमाया जाता है। यह रंगाई भी पक्की मानी जाती है।
3. तैयार वस्त्र की रंगाई:
(i) जिग रंगाई
(ii) क्रॉस रंगाई
(iii) रील रंगाई
(v) निरन्तर मशीन द्वारा रंगाई
(vi) बाँधकर रंगाई
(vii) बटिक
In simple words: रंगाई को रेशों, धागों और तैयार कपड़ों को रंगने की अवस्थाओं में बांटा गया है, जिनमें टॉप, ड्रॉप, स्टॉक, जिग, क्रॉस, रील, बाँधकर और बटिक जैसी विधियाँ शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: रंगाई की हर अवस्था कपड़े की बनावट और वांछित रंग प्रभाव के अनुसार चुनी जाती है, जिससे कपड़े में रंग की एकरूपता और पक्केपन को नियंत्रित किया जा सके।
Question 2. जिग रंगाई का विवरण दीजिए।
Answer: जिग रंगाई में, जिग यंत्र की सहायता से कपड़े के धागों और बंडलों को गाइड रोल पर चढ़ाकर रंगा जाता है। इन रोलों के ज़रिए कपड़े को कुछ समय के अंतराल पर बार-बार रंग के घोल में डुबोया जाता है। इस विधि से बहुत कम समय में किसी भी गहरे या हल्के रंग में कपड़े को रंगा जा सकता है।
In simple words: जिग रंगाई एक मशीन से की जाती है, जिसमें कपड़े को रोलर पर चढ़ाकर बार-बार रंग में डुबोया जाता है, जिससे यह तेज़ी से रंग जाता है।
🎯 Exam Tip: जिग रंगाई बड़े कपड़ों को रंगने के लिए उपयुक्त होती है, जहाँ रंग की एकरूपता और दक्षता महत्वपूर्ण होती है।
Question 3. निम्नलिखित का संक्षिप्त विवरण दीजिए –
1. रील रंगाई
2. संयुक्त रंगाई
3. निरन्तर मशीन द्वारा रंगाई
Answer:
1. रील रंगाई: इस विधि में कपड़े को एक रील पर लपेटकर रंग के घोल में डुबोया जाता है। रील घूमने से कपड़ा बार-बार रंग में आता है, जिससे रंग पूरे कपड़े में समान रूप से फैलता है। यह अक्सर बुने हुए और बिना बुने हुए कपड़ों के लिए इस्तेमाल की जाती है।
2. संयुक्त रंगाई: यह रंगाई की एक विधि है जहाँ एक ही कपड़े पर अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, या दो या दो से अधिक अलग-अलग रंगाई प्रक्रियाओं को एक साथ उपयोग किया जाता है ताकि कपड़े पर विशेष प्रभाव या मल्टी-टोन रंग बन सकें।
3. निरन्तर मशीन द्वारा रंगाई: यह एक आधुनिक और तेज़ रंगाई विधि है जिसमें एक लंबी कपड़े की पट्टी को लगातार रंगाई और सुखाने की प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इससे बड़े पैमाने पर कपड़ों की रंगाई बहुत कम समय में की जा सकती है, और रंग की एकरूपता भी अच्छी रहती है।
In simple words: रील रंगाई में कपड़ा रील पर लपेटकर रंगा जाता है। संयुक्त रंगाई में कई रंगों या प्रक्रियाओं का उपयोग होता है। निरन्तर मशीन द्वारा रंगाई एक तेज़ प्रक्रिया है जहाँ कपड़ा लगातार रंगा और सुखाया जाता है।
🎯 Exam Tip: इन रंगाई विधियों का चयन उत्पादन की मात्रा, कपड़े के प्रकार और वांछित अंतिम परिणाम के आधार पर किया जाता है।
Question 4. रोलर छपाई का विवरण दीजिए।
Answer: रोलर छपाई एक ऐसी विधि है जिसमें बड़े-बड़े धातु के रोलरों पर डिज़ाइन उकेरे जाते हैं। जब कपड़ा इन रोलरों के बीच से गुजरता है, तो डिज़ाइन कपड़े पर छप जाते हैं। अलग-अलग रेशों के लिए अलग-अलग रोलर लगाए जाते हैं। इस विधि से बहुत कम समय में हज़ारों मीटर कपड़े पर कई रंगों वाले डिज़ाइन छापे जा सकते हैं।
In simple words: रोलर छपाई में डिज़ाइन वाले बड़े रोलर्स से कपड़े पर तेज़ी से पैटर्न छापे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: रोलर छपाई अपनी गति और उच्च उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है, जिससे यह बड़े पैमाने के वस्त्र उत्पादन के लिए आदर्श है।
Question 5. द्विपक्षी एवं बटाय छपाई क्या है?
Answer:
द्विपक्षी छपाई: यह वस्त्र छपाई की वह विधि है जिसमें कपड़े के दोनों तरफ एक साथ डिज़ाइन छापे जाते हैं। इससे कपड़ा ऐसा लगता है जैसे डिज़ाइन उसमें बुना हुआ हो।
बटाय छपाई: छपाई की इस विधि में कपड़े की पृष्ठभूमि और डिज़ाइन दोनों एक साथ छपते हैं। इसमें आमतौर पर एक ही प्रक्रिया में कपड़े का आधार रंग और पैटर्न दोनों बनाए जाते हैं।
In simple words: द्विपक्षी छपाई में कपड़े के दोनों तरफ एक जैसा डिज़ाइन छपता है, जबकि बटाय छपाई में कपड़े का मुख्य रंग और डिज़ाइन दोनों एक साथ बनते हैं।
🎯 Exam Tip: द्विपक्षी छपाई में कपड़ों की सुंदरता और पहनने की क्षमता बढ़ती है, जबकि बटाय छपाई से उत्पादन प्रक्रिया में समय की बचत होती है।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 23 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. रंगों के प्रकार उनकी उपादेयता समझाते हुए लिखिए।
Answer: रंगों के प्रकार – रंग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
1. प्राकृतिक रंग: ये रंग प्राकृतिक स्रोतों जैसे वनस्पति (पौधे), प्राणिज (जानवर) और खनिज पदार्थों से प्राप्त होते हैं। इनकी उपादेयता पर्यावरण के अनुकूल होने और सूक्ष्म रंगों में होती है।
• क्रोम रंग: ये सबसे पक्के रंग होते हैं। ऊनी वस्त्रों को अम्लीय रंग से रंगने के बाद रंग पक्का करने के लिए क्रोमेट घोल में उबाला जाता है।
• प्रत्यक्ष रंग: इन्हें रंगने के लिए किसी बंधक की आवश्यकता नहीं होती। ये तीन प्रकार के होते हैं- स्वत: प्रत्यक्ष रंग, विकसित रंग, और एजोइक रंग।
2. कृत्रिम अथवा संश्लेषित रंग: सन् 1856 में हेनरी विलियम परकीन ने एनीलीन से कुनैन बनाते समय इन रंगों की खोज की थी। इन्हें कोलतार रंग भी कहते हैं। ये रंग कई प्रकार के होते हैं:
• गंधक रंग: ये प्राकृतिक और कृत्रिम सेल्युलोज रेशों के लिए उपयोग होते हैं।
• प्रसारित रंग: इनका प्रयोग नायलॉन, एक्रीलिक, पॉलिस्टर जैसे संश्लेषित तंतुओं को रंगने के लिए किया जाता है।
• रंगहीन रंग: इनका प्रयोग विरंजन के समय किया जाता है।
• नेप्थोल रंग: ये नायलॉन, पॉलिस्टर, सूती और रेयॉन के तंतुओं को गहरे और पक्के रंग देते हैं। इन्हें रंगने के लिए बंधकों का प्रयोग किया जाता है।
• बाढ़ रंग: इनसे सूती, लिनन, रेयान तंतुओं को रंगा जाता है। बंधकों के साथ नायलॉन, पॉलिम्टर और एक्रीलिक वस्त्रों को भी रंगा जा सकता है। ये महंगे और अघुलनशील होते हैं।
In simple words: रंग दो प्रकार के होते हैं: प्राकृतिक (पौधों, जानवरों, खनिजों से) और कृत्रिम (रासायनिक)। प्राकृतिक रंग पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं, जबकि कृत्रिम रंग (जैसे क्रोम, गंधक, नेप्थोल) कपड़ों को विभिन्न प्रकार के पक्के और चमकीले रंग देते हैं।
🎯 Exam Tip: रंगों की उपादेयता उनके स्रोत, रासायनिक संरचना और उन रेशों के प्रकार पर निर्भर करती है जिन पर वे सफलतापूर्वक लगाए जा सकते हैं।
Question 2. प्राकृतिक रंगों का उदाहरण सहित वर्गीकरण कीजिए।
Answer: प्राकृतिक रंगों को रंजक और वर्णक के रूप में जाना जाता है। इन्हें उनके स्रोत के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. वानस्पतिक रंग (पेड़-पौधों के विभिन्न भाग):
• छाल से: जैसे कत्था
• तने से: जैसे हल्दी
• पत्तियों से: जैसे मेहंदी
• फूलों से: जैसे पलास, केसर, टेसू, हरसिंगार
• फलों से: जैसे हरड़, बहेड़ा, वस्पा, कीकर, जामुन, अखरोट, अनार
2. खनिज रंग:
• लौह चूर्ण: भूरा रंग
• क्रोम-पीला
• क्रोम-नारंगी
• क्रोम-हरा
• पर्शियन ब्लू
3. प्राणिज रंग:
• मछली: जैसे टाटा रियल, परपल
• कीट: जैसे काकनियल कीट से कॉकनियल रंग, कैक्टस कीड़ा से सिंदूरी लाल, नारंगी रंग।
In simple words: प्राकृतिक रंग पौधों (पत्तियों, फूलों, फलों से), खनिजों (जैसे क्रोम-पीला, भूरा) और जानवरों (जैसे मछली, कीटों से) से मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक रंग पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और विशिष्ट, अक्सर मिट्टी जैसे, रंग प्रदान करते हैं, जो रासायनिक रंगों से भिन्न होते हैं।
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