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Detailed Chapter 19 तंतु विज्ञान RBSE Solutions for Class 11 Home Science
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Class 11 Home Science Chapter 19 तंतु विज्ञान RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
Question 1. (i) जान्तव रेशा है -
(अ) कपास
(ब) ऊन
(स) लिनन
(द) कपोक
Answer: (ब) ऊन
In simple words: जान्तव रेशे वो होते हैं जो जानवरों से मिलते हैं, और ऊन एक ऐसा ही रेशा है जो भेड़ों से प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: जान्तव रेशे जानवरों से प्राप्त होते हैं, जैसे ऊन और रेशम। वानस्पतिक रेशे पौधों से मिलते हैं, जैसे कपास और लिनन।
Question 1. (ii) सर्वाधिक लम्बा रेशा है –
(अ) रेशम
(ब) कपास
(स) ऊन
Answer: (अ) रेशम
In simple words: रेशम प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रेशों में सबसे लम्बा होता है, जिससे लंबे धागे बनते हैं।
🎯 Exam Tip: रेशम अपनी लम्बाई, चमक और कोमलता के लिए जाना जाता है, जबकि कपास और ऊन छोटे रेशे होते हैं।
Question 1. (iv) लिनन रेशा है –
(अ) जान्तव
(ब) वानस्पतिक
(स) खनिज
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) वानस्पतिक
In simple words: लिनन का रेशा सन के पौधे से मिलता है, इसलिए इसे वानस्पतिक रेशा कहते हैं क्योंकि यह पेड़-पौधों से प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: पौधों से मिलने वाले रेशे वानस्पतिक होते हैं (जैसे कपास, लिनन), जबकि जानवरों से मिलने वाले रेशे जान्तव होते हैं (जैसे ऊन, रेशम)।
Question 2. मिश्रित रेशे किसे कहते है?
Answer: मिश्रित रेशे वे होते हैं जो दो या दो से ज़्यादा तरह के रेशों को मिलाकर बनाए जाते हैं। इन रेशों को साथ में कातकर या अलग-अलग धागों को एक साथ बुनकर बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, टैरिकॉट और कॉट्स वूल ऐसे ही मिश्रित रेशे हैं.
In simple words: जब दो या ज़्यादा तरह के रेशों को मिलाकर एक नया रेशा बनाते हैं, तो उसे मिश्रित रेशा कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मिश्रित रेशे बनाने का मुख्य उद्देश्य विभिन्न रेशों की अच्छी विशेषताओं को एक साथ लाना है ताकि नया रेशा ज़्यादा मजबूत या आरामदायक बन सके।
Question 3. ऊनी वस्त्रों पर पानी का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer:
• ऊनी रेशा प्राकृतिक रेशों में सबसे कमज़ोर होता है। जब यह गीला होता है, तो इसकी ताकत 25% तक कम हो जाती है।
• गीला होने पर ऊन सिकुड़कर मोटी हो जाती है, इसलिए ऊनी कपड़ों को ज़्यादा देर तक गीला नहीं रखना चाहिए।
• नमी, गर्मी और दबाव के कारण ऊनी रेशों के शल्क खुल जाते हैं। सूखने पर ये आपस में जुड़ने लगते हैं।
In simple words: ऊनी कपड़े गीले होने पर कमज़ोर और मोटे हो जाते हैं, और नमी से रेशे आपस में चिपक सकते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊनी वस्त्रों को धोते समय सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि गीली अवस्था में वे आसानी से खराब हो सकते हैं और सिकुड़ सकते हैं।
Question 5. फ्लीस ऊन किसे कहते हैं?
Answer: फ्लीस ऊन वह ऊन होती है जिसे जानवरों के शरीर से हाथ या मशीन से काटा जाता है। ऊन निकालने से पहले जानवरों को कीटाणुनाशक घोल से नहलाया जाता है. यह ऊन अलग-अलग शारीरिक भागों से काटी जाती है.
In simple words: फ्लीस ऊन जानवरों के शरीर से सीधे काटी गई ऊन होती है, जिसे साफ़ करके निकाला जाता है।
🎯 Exam Tip: फ्लीस ऊन ताज़ी कटी हुई ऊन होती है जो सीधे जानवरों से मिलती है, और इसका उपयोग ऊनी वस्त्र बनाने में होता है।
Question 6. रेशम पर अम्ल व क्षार का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: तेज़ अम्ल से रेशम के रेशे खराब हो जाते हैं। हालाँकि, कार्बनिक और हल्के अम्ल रेशों की चमक बढ़ाते हैं। रेशम के रेशे उदासीन या हल्के क्षार से प्रभावित नहीं होते हैं।
In simple words: तेज़ अम्ल रेशम को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि हल्के अम्ल और क्षार से रेशम ज़्यादा प्रभावित नहीं होता।
🎯 Exam Tip: रेशम एक नाज़ुक रेशा है, इसलिए इसे धोते समय हमेशा हल्के डिटर्जेंट का उपयोग करें और तेज़ रसायनों से बचें।
Question 7. जान्तव रेशे कौन-कौन से हैं?
Answer: जान्तव रेशे वो होते हैं जो जानवरों से प्राप्त होते हैं, जैसे ऊन और रेशम।
In simple words: ऊन और रेशम जान्तव रेशे हैं क्योंकि वे जानवरों से आते हैं।
🎯 Exam Tip: जान्तव रेशों का मुख्य घटक प्रोटीन होता है, जो उन्हें जानवरों से प्राप्त होने के कारण विशेष गुण देता है।
Question 8. रेयॉन को मानवीकृत रेशा क्यों कहा जाता है? यह रासायनिक रेशों से किस प्रकार भिन्न होता है?
Answer: रेयॉन को मानवीकृत रेशा कहा जाता है क्योंकि यह रेशम की तरह चमकदार होता है, इसलिए इसे कृत्रिम रेशम (Artificial silk) भी कहते हैं। इसे बनाने के लिए रासायनिक पदार्थों के साथ प्रकृति से मिलने वाले बाँस और लकड़ी की लुग्दी, और कपास के सेल्युलोज का उपयोग किया जाता है। रेयॉन का रेशा बनाने के लिए प्राकृतिक चीज़ों को रासायनिक पदार्थों में मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है। इस घोल को स्पिनरैट के छोटे छिद्रों से निकालकर मनचाही लम्बाई और मोटाई के रेशे बनाए जाते हैं। यह रेशा कच्चे माल, इस्तेमाल किए गए रसायन और बनाने के तरीकों के हिसाब से अलग-अलग तरह का होता है, जैसे नाइट्रोसेल्युलोज रेयॉन.
In simple words: रेयॉन को कृत्रिम रेशम भी कहते हैं क्योंकि इसे प्राकृतिक चीज़ों (जैसे लकड़ी) और रसायनों को मिलाकर बनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: मानवीकृत रेशे प्राकृतिक स्रोतों से बनते हैं लेकिन रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा संशोधित किए जाते हैं, जबकि पूरी तरह से रासायनिक रेशे प्रयोगशाला में पूरी तरह से कृत्रिम पदार्थों से बनते हैं।
Question 9. जूट, हेम्प, कपोक के बारे में संक्षेप में लिखिए।
Answer:
जूट (Jute): जूट के रेशे जूट के पौधे के तने से प्राप्त होते हैं। भारत में कपास के बाद इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होता है। जूट के पौधे के तने को काटकर पानी में गलाया जाता है, जिससे उसकी ऊपरी छाल गल जाती है। इसके रेशे लिनन के रेशों की तरह अलग-अलग हो जाते हैं। छूने में ये चिकने और रेशम की तरह चमकदार होते हैं, लेकिन कड़े और खुरदरे होते हैं। इसलिए इन रेशों से कपड़े नहीं बनाए जाते। इनका उपयोग टाट, बोरी, रस्सी, दरियाँ, गलीचे आदि बनाने में होता है। पैकिंग में जूट के रेशों का इस्तेमाल ज़्यादा होता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक रूप से कीड़े-मकोड़ों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता होती है।
हेम्प (Hemp): हेम्प का रेशा गहरे भूरे रंग का होता है। यह रेशा सीधा और चमकदार होता है, लेकिन रूखा, कड़ा और खुरदुरा होता है। हेम्प का रेशा काफी मजबूत और टिकाऊ होता है। इसका उपयोग घरेलू चीज़ें, जैसे गलीचे, कैनवास, रस्से, टोकरी, डोरी, बेल्ट आदि बनाने में होता है। हेम्प के रेशे गाढ़े और गर्म क्षार से खराब हो जाते हैं।
कपोक (Kapok): कपोक कपास जैसा होता है, लेकिन यह कताई के लिए ठीक नहीं होता क्योंकि इसके रेशों में ऐंठन नहीं होती। इस कारण इसके धागे नहीं बनाए जा सकते। इस रेशे में नमी को रोकने का गुण होता है, इसलिए इसका उपयोग हवाई जहाजों में ध्वनि अवरोधक के रूप में होता है। यह तकिए और गद्दे भरने के भी काम आता है। कपोक के रेशे जल्दी सूख जाते हैं।
In simple words: जूट, हेम्प और कपोक तीनों पौधों से मिलने वाले रेशे हैं। जूट और हेम्प बोरी, रस्सी जैसे मोटे सामान बनाने में काम आते हैं, जबकि कपोक नमी सोखने वाले गुण के कारण तकिए और गद्दे में भरा जाता है।
🎯 Exam Tip: इन तीनों रेशों के मुख्य गुणों (जैसे चमक, कड़ापन, उपयोग) और उनके पौधों के स्रोत को याद रखें।
Question 10. लिनन के रेशे के संगठन, संरचना एवं विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
लिनन (Linen): ये रेशे सन (Flax) के पौधे के तने और डंठल से मिलते हैं। पौधा पकने पर इसे जड़ समेत उखाड़कर बण्डल बनाकर सुखाया जाता है। सूखने पर बीज और पत्ते अलग करके तनों के बण्डलों को पानी में गलने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया में खमीरीकरण होने से रेशों को जोड़ने वाले पदार्थ गोंद, पैक्टिन, मोम आदि नष्ट हो जाते हैं और रेशे अलग हो जाते हैं। बण्डल सूखने के बाद रेशों को धोकर नमी वाले वातावरण में सुखाया जाता है, जिससे उनकी कोमलता और लचीलापन बना रहे। इसके बाद, रेशों को समानांतर रखकर पूनियाँ बनाई जाती हैं, और ज़रूरत के हिसाब से रंगाई व कताई की जाती है।
भौतिक विशेषताएँ –
• लिनन में 70% सेल्युलोज और शेष 30% पैक्टिन, पानी व अन्य अशुद्धियाँ होती हैं।
• सूक्ष्मदर्शी से देखने पर ये रेशे बेलनाकार, गोल, चमकदार और बाँस की तरह गाँठ लिए होते हैं।
• लिनन का रेशा प्राकृतिक रेशों में रेशम के बाद सबसे लम्बा होता है।
• लिनन के रेशे में तनाव झेलने की क्षमता कम होती है, इसलिए ये खींचने पर जल्दी टूट जाते हैं।
• लिनन का रेशा कम लचीला होता है, जिससे इसके बने कपड़ों में सलवटें पड़ जाती हैं।
• लिनन गर्मी को दूर करता है क्योंकि यह ताप का अच्छा सुचालक है।
• यह नमी को जल्दी सोखकर कपड़े को सुखा देता है, इसलिए लिनन के तौलिये और रूमाल अच्छे होते हैं।
• यह रेशा कोमल और चमकीला होता है, जिससे इस पर धूल और मिट्टी नहीं जमती और धब्बे आसानी से साफ हो जाते हैं।
• यह रेशा गीला होने पर मजबूत हो जाता है, इसलिए इसे आसानी से धोया जा सकता है।
• इस पर जीवाणु और कीटाणु आसानी से नहीं पनपते हैं।
• लिनन के रेशे प्रकाश और धूप से जल्दी प्रभावित नहीं होते, लेकिन लम्बे समय तक रोशनी में रखने पर ये धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं।
• लिनन से तौलिये, चादर, पर्दे, मेज़पोश आदि बनाए जाते हैं।
रासायनिक विशेषताएँ –
• लिनन का रेशा गाढ़े अम्ल से नष्ट हो जाता है।
• इस पर क्षार का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन तेज़ क्षार वाले साबुन से ज़्यादा समय तक धोने पर सफेद कपड़ों में पीलापन आ जाता है।
• लिनन की सतह कड़ी होने के कारण इसे आसानी से रंगा नहीं जा सकता और रंग जल्दी उतर भी जाते हैं।
• लिनन पर तेज़ ब्लीच से रेशे खराब हो जाते हैं। इस पर केवल घरेलू विरंजक ही काम आते हैं।
• यह पसीने को बहुत जल्दी सोख लेता है, लेकिन इसे तुरंत धोना चाहिए क्योंकि पसीना अम्लीय होता है।
In simple words: लिनन सन के पौधे से मिलता है, ये मजबूत और नमी सोखने वाले होते हैं, लेकिन खींचने और मोड़ पड़ने पर टूट सकते हैं। यह गर्मी में ठंडक देते हैं और आसानी से धोए जा सकते हैं।
🎯 Exam Tip: लिनन की मुख्य पहचान इसकी नमी सोखने की क्षमता और गर्मी में आराम देने वाला गुण है। इसकी कम लचीलेपन और रंग चढ़ने की कठिनाई को भी ध्यान में रखें।
Question 11. वस्त्रोपयोगी रेशों का वर्गीकरण लिखिए।
Answer:
| वानस्पतिक | जान्तव | धात्विक | मानवकृत रेशा | रासायनिक रेशा |
|---|---|---|---|---|
| (i) कपास | (i) रेशम | (i) एस्बेस्टस | (i) रेयॉन | (i) नायलॉन |
| (ii) लिनन | (ii) ऊन | (ii) ज़री (सोना, चांदी) | (ii) पॉलिस्टर | |
| (iii) जूट | (iii) तांबे के तार | |||
| (iv) हेम्प |
In simple words: वस्त्र बनाने वाले रेशों को उनके स्रोत के आधार पर कई भागों में बांटा जाता है: पौधों से मिलने वाले (वानस्पतिक), जानवरों से मिलने वाले (जान्तव), खनिजों से मिलने वाले (धात्विक), और मनुष्य द्वारा बनाए गए (मानवकृत और रासायनिक)।
🎯 Exam Tip: रेशों के वर्गीकरण में प्रत्येक श्रेणी के दो-तीन उदाहरण याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्राकृतिक और कृत्रिम रेशों के लिए।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. कपास के रेशे में सर्वाधिक प्रतिशत होता हैं –
(अ) सेल्यूलोज
(ब) ग्लूकोज का
(स) पैक्टिन का
(द) लिग्निन का
Answer: (अ) सेल्यूलोज
In simple words: कपास का मुख्य हिस्सा सेल्यूलोज होता है, जो इसे पौधों से मिलने वाला रेशा बनाता है।
🎯 Exam Tip: कपास का रेशा पूरी तरह से सेल्यूलोज से बना होता है, जो इसकी नमी सोखने और मजबूती का कारण है।
Question 2. लिनन प्राप्त होता है –
(अ) कपास
(ब) जूट के पौधे से
(स) फ्लैक्स के पौधे से
(द) कपोक से
Answer: (स) फ्लैक्स के पौधे से
In simple words: लिनन का रेशा फ्लैक्स नामक पौधे के तने से मिलता है।
🎯 Exam Tip: फ्लैक्स का पौधा लिनन का स्रोत है, जबकि कपास कपास के पौधे से और जूट जूट के पौधे से मिलता है।
Question 3. वस्त्रों की रानी कहलाता है –
(अ) कपास
(ब) रेशम
(स) नायलॉन
(द) पॉलिस्टर
Answer: (ब) रेशम
In simple words: रेशम को उसकी चमक, सुंदरता और कोमलता के कारण वस्त्रों की रानी कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: रेशम कीमती और आरामदायक वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध है, और इसके गुणों के कारण इसे 'वस्त्रों की रानी' की उपाधि मिली है।
Question 4. ऊन प्राप्त होता है –
(अ) भेड़ से
(ब) बकरी से
(स) ऊँट से
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: ऊन भेड़, बकरी और ऊँट जैसे कई जानवरों के बालों से मिलती है।
🎯 Exam Tip: ऊन मुख्य रूप से भेड़ों से मिलती है, लेकिन विशेष प्रकार की ऊन अन्य जानवरों जैसे बकरी (मोहेर), ऊँट (कैमल हेयर) और खरगोश (अंगोरा) से भी प्राप्त होती है।
Question 5. रेयॉन का मुख्य घटक है –
(अ) सेल्यूलोज
(ब) पॉली एस्टर
(स) हेमी सेल्यूलोज
(द) नाइट्रोबेन्जीन
Answer: (अ) सेल्यूलोज
In simple words: रेयॉन बनाने के लिए पेड़-पौधों से मिलने वाले सेल्यूलोज का उपयोग किया जाता है, जो इसका मुख्य तत्व है।
🎯 Exam Tip: रेयॉन को 'मानवीकृत रेशा' कहा जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक सेल्यूलोज को रासायनिक प्रक्रिया से संशोधित करके बनाया जाता है।
रिक्त स्थान भरिए
निम्नलिखित वाक्यों में खाली स्थान भरिए –
Question. 1. कपास का रेशा सान्द्र अम्ल से नष्ट हो जाता है।
Answer: नष्ट
In simple words: तेज़ एसिड कपास के रेशे को खराब कर देता है।
🎯 Exam Tip: कपास एक सेल्यूलोज रेशा है जो तेज़ एसिड से जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसकी देखभाल करते समय ध्यान रखें।
Question. 2. कपोक रेशा गद्दों एवं तकियों को भरने के काम आता है।
Answer: कपोक
In simple words: कपोक एक हल्का और नमी सोखने वाला रेशा है जो गद्दे और तकिए भरने के लिए इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: कपोक की मुख्य विशेषता इसका हल्कापन और नमी सोखने का गुण है, जिससे यह भरने वाले पदार्थ के रूप में उपयोगी होता है।
Question. 3. मृत जानवरों की खाल से उतारी गई ऊन खींची हुई ऊन कहलाती है।
Answer: खींची हुई ऊन
In simple words: मरे हुए जानवरों की खाल से जो ऊन निकालते हैं, उसे खींची हुई ऊन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊन के प्रकारों में फ्लीस ऊन (जीवित जानवरों से कटी) और खींची हुई ऊन (मृत जानवरों से प्राप्त) का अंतर याद रखें।
Question. 4. नायलॉन के वस्त्रों से दाग धब्बे आसानी से छूटते हैं।
Answer: आसानी
In simple words: नायलॉन के कपड़ों से दाग जल्दी साफ हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: नायलॉन की चिकनी सतह के कारण उस पर धूल और दाग कम जमते हैं, जिससे इसे साफ करना आसान होता है।
Question. 5. एस्बेस्टस का उपयोग अग्नि अवरोधक वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है।
Answer: अग्नि अवरोधक
In simple words: एस्बेस्टस का इस्तेमाल ऐसे कपड़े बनाने के लिए होता है जो आग को रोकते हैं।
🎯 Exam Tip: एस्बेस्टस एक खनिज रेशा है जिसका मुख्य गुण आग से बचाव है, इसलिए यह अग्निरोधक सामग्री में उपयोगी है।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. प्राचीन समय के लोग किस से बने वस्त्र प्रयोग करते थे?
Answer: प्राचीन समय में लोग पेड़-पौधों से प्राप्त रेशों और पशुओं के बालों से बने वस्त्र पहनते थे।
In simple words: पुराने समय में लोग कपड़े बनाने के लिए पौधों और जानवरों के बाल का इस्तेमाल करते थे।
🎯 Exam Tip: प्राचीन काल में वस्त्रों का विकास प्राकृतिक सामग्री जैसे पत्तियों, खाल और रेशों से हुआ।
Question 2. रेशा क्या है?
Answer: रेशा या तन्तु (Fiber), बाल जैसी पतली इकाई होती है जिसकी लम्बाई उसकी मोटाई से कई सौ गुना ज़्यादा होती है।
In simple words: रेशा एक बहुत पतला और लंबा धागा जैसा होता है जो कपड़े बनाने में काम आता है।
🎯 Exam Tip: रेशे वस्त्रों की सबसे छोटी इकाई होते हैं और इन्हीं से धागे और फिर कपड़े बनते हैं।
Question 3. वस्त्रोपयोगी रेशों को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: वस्त्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले रेशों को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है –
• प्राकृतिक रेशा
• कृत्रिम रेशा
• विशिष्ट रेशा।
In simple words: कपड़े बनाने वाले रेशे तीन मुख्य प्रकार के होते हैं: प्राकृतिक (जैसे कपास), कृत्रिम (जैसे रेयॉन), और खास तरह के (विशिष्ट)।
🎯 Exam Tip: रेशों के वर्गीकरण को याद रखें: प्राकृतिक रेशे सीधे प्रकृति से मिलते हैं, कृत्रिम रेशे मानव द्वारा बनाए जाते हैं, और विशिष्ट रेशे खास गुणों वाले होते हैं।
Question 4. कपास के पौधे के किस भाग से कपास प्राप्त होता है?
Answer: कपास के पौधे के फूल झड़ने के बाद जो कोए (Pools) बनते हैं, उनके पकने पर उनसे कपास प्राप्त होता है।
In simple words: कपास पौधे के फूलों से बने फल (कोए) के पकने पर मिलती है।
🎯 Exam Tip: कपास पौधे के फल के रेशे होते हैं जो परिपक्व होने पर फट जाते हैं, और फिर उनसे रुई निकाली जाती है।
Question 6. लिनन किस प्रकार के वस्त्र बनाने के लिए उपयोगी रहता है?
Answer: लिनन तौलिये, चादर, पर्दे, मेज़पोश और ऐसे ही अन्य कपड़े बनाने के लिए उपयोगी रहता है।
In simple words: लिनन से तौलिये, चादर और पर्दे जैसे घरेलू कपड़े बनाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: लिनन अपनी नमी सोखने की क्षमता और ठंडेपन के कारण घरेलू और बिस्तर के कपड़ों के लिए आदर्श है।
Question 7. जूट के तन्तुओं से बनाई जाने वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: जूट के रेशों से टाट, बोरी, डोरी, दरियाँ और गलीचे आदि बनाए जाते हैं।
In simple words: जूट से बोरी, रस्सी और दरियाँ जैसी चीज़ें बनती हैं।
🎯 Exam Tip: जूट एक मोटा और मजबूत रेशा है, इसलिए इसका उपयोग मुख्य रूप से पैकेजिंग और घरेलू सजावट के सामान में होता है।
Question 8. रेशम, रेशम कीट की किस अवस्था से प्राप्त होता है?
Answer: रेशम, रेशम कीट की कोकून अवस्था से प्राप्त होता है।
In simple words: रेशम कोकून से मिलता है, जो रेशम कीट अपने चारों ओर बनाता है।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट अपने लार्वा चरण में कोकून बनाता है, और यही कोकून रेशम का स्रोत होता है।
Question 9. रेशम तन्तु का संगठन बताइए।
Answer: रेशम तन्तु में 95% प्राकृतिक गोंद, सैरिसिन और फाइब्रिन प्रोटीन होता है, और शेष 5% मोम, वसा एवं लवण होते हैं।
In simple words: रेशम मुख्य रूप से प्रोटीन (फाइब्रिन और सैरिसिन) से बना होता है, जिसमें थोड़ा मोम और वसा भी होती है।
🎯 Exam Tip: रेशम की प्रोटीन संरचना ही उसे उसकी विशिष्ट चमक और मज़बूती प्रदान करती है।
Question 10. रेशम के तन्तुओं से बने वस्त्र गर्मियों के लिए उपयुक्त क्यों नहीं होते हैं?
Answer: रेशम के तन्तु ताप के कुचालक होते हैं, यानी वे शरीर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते। इसलिए, रेशम के वस्त्र गर्मियों में आरामदायक नहीं होते हैं।
In simple words: रेशम गर्मी को अंदर रखता है, इसलिए गर्मी में पहनने पर ये आरामदायक नहीं होते।
🎯 Exam Tip: ऊन और रेशम जैसे प्रोटीन रेशे ताप के अच्छे कुचालक होते हैं, जबकि कपास और लिनन जैसे सेल्युलोज रेशे गर्मी को बाहर निकालते हैं।
Question 11. ऊन में पाया जाने वाला प्रोटीन कौन-सा होता हैं?
Answer: ऊन में पाया जाने वाला प्रोटीन किरेटिंन (Keratin) प्रोटीन होता है।
In simple words: ऊन में केराटिन नामक प्रोटीन होता है, जो इसे खास बनावट देता है।
🎯 Exam Tip: किरेटिन वही प्रोटीन है जो हमारे बालों और नाखूनों में भी पाया जाता है, यह ऊन को उसकी प्राकृतिक मजबूती और लचीलापन देता है।
Question 12. ऊन के बने वस्त्र सर्दियों के लिए क्यों उपयुक्त रहते हैं?
Answer: ऊन के रेशे ताप के कुचालक होते हैं, जिसका मतलब है कि वे शरीर की गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते। इसके कारण ऊन के बने वस्त्र सर्दियों में शरीर को गर्म रखते हैं और आरामदायक होते हैं।
In simple words: ऊनी कपड़े सर्दियों के लिए अच्छे होते हैं क्योंकि वे गर्मी को अंदर रोककर शरीर को गर्म रखते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊन के रेशों की संरचना में हवा फंस जाती है, जो एक इन्सुलेशन परत बनाती है और शरीर की गर्मी को बनाए रखती है।
Question 13. किसी एक प्राकृतिक रेशे तथा एक कृत्रिम रेशे का नाम बताइए।
Answer: प्राकृतिक रेशा - रेशम; कृत्रिम रेशा - रेयॉन।
In simple words: रेशम प्रकृति से मिलता है, जबकि रेयॉन इंसान बनाता है।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक रेशे (कपास, ऊन, रेशम, लिनन) सीधे प्रकृति से मिलते हैं, जबकि कृत्रिम रेशे (रेयॉन, नायलॉन, पॉलिस्टर) मानव निर्मित होते हैं।
Question 14. एस्बेस्टस का प्रयोग किस प्रकार के वस्त्र बनाने में किया जाता है?
Answer: एस्बेस्टस का प्रयोग अग्नि अवरोधक वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है।
In simple words: एस्बेस्टस का उपयोग ऐसे कपड़े बनाने के लिए होता है जो आग को नहीं पकड़ते।
🎯 Exam Tip: एस्बेस्टस एक खनिज रेशा है जो गर्मी और आग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होता है, इसलिए यह अग्निरोधक कपड़ों और सामग्री में उपयोग होता है।
Question 15. वस्त्रों की सूक्ष्मतम एवं प्रारम्भिक इकाई क्या है?
Answer: वस्त्रों की सूक्ष्मतम एवं प्रारम्भिक इकाई रेशा है।
In simple words: कपड़े की सबसे छोटी और पहली इकाई रेशा होती है।
🎯 Exam Tip: सभी वस्त्र रेशों से बनते हैं, जो धागों में परिवर्तित होकर फिर कपड़े बनते हैं।
Question 16. कपास, लिनन तथा रेयॉन में क्या समानता है?
Answer: कपास, लिनन तथा रेयॉन तीनों का मुख्य अवयव सेल्यूलोज ही है।
In simple words: कपास, लिनन और रेयॉन तीनों में सेल्यूलोज मुख्य घटक के रूप में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: इन तीनों रेशों में सेल्यूलोज की उपस्थिति इनके कुछ गुणों (जैसे नमी सोखना) को निर्धारित करती है, भले ही उनके स्रोत अलग-अलग हों।
Question 17. दो मिश्रित रेशों के नाम लिखिए।
Answer:
• टेरीकॉट
• टैरीसिल्क।
In simple words: टेरीकॉट और टेरीसिल्क दो मिश्रित रेशे हैं जो अलग-अलग रेशों को मिलाकर बनते हैं।
🎯 Exam Tip: मिश्रित रेशे दो या दो से अधिक रेशों के गुणों को जोड़कर बेहतर प्रदर्शन वाले कपड़े बनाते हैं।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. वानस्पतिक एवं जान्तव तन्तु क्या होते हैं? दोनों का एक-एक उदाहरण लिखिए।
Answer:
वानस्पतिक तन्तु: ये तन्तु पौधों से मिलते हैं और पौधों की कोशिकाओं से बनने वाले सेल्यूलोज के बने होते हैं। उदाहरण के लिए, कपास और लिनन।
जान्तव तन्तु: ये तन्तु जानवरों से मिलते हैं। ये प्रोटीन के बने होते हैं। उदाहरण के लिए, ऊन और रेशम।
In simple words: वानस्पतिक रेशे पौधों से (जैसे कपास) और जान्तव रेशे जानवरों से (जैसे ऊन) प्राप्त होते हैं।
🎯 Exam Tip: वानस्पतिक और जान्तव रेशों का मुख्य अंतर उनके स्रोत में है: पौधे (सेल्यूलोज) बनाम जानवर (प्रोटीन)।
Question 3. ऊन की रासायनिक विशेषताएँ बताइए।
Answer:
• ऊनी रेशों पर हल्के अम्ल का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता है।
• क्षार के प्रभाव से ऊनी रेशा पीला और कड़ा हो जाता है।
• मजबूत और गर्म क्षार से ऊनी वस्त्र गल जाते हैं।
• ऊनी रेशों पर अमोनियम कार्बोनेट और बोरेक्स जैसे हल्के क्षार सुरक्षित रहते हैं।
• ऊनी रेशों पर सभी प्रकार के रंग, जैसे-अम्लीय और क्षारीय, आसानी से और पक्के चढ़ते हैं।
• ऊनी वस्त्रों पर ब्लीचिंग पाउडर नुकसानदायक होता है। ज़रूरत पड़ने पर केवल हाइड्रोजन परऑक्साइड जैसे हल्के ब्लीच का उपयोग किया जा सकता है।
• ऊनी वस्त्रों को नमी वाली जगह पर रखने से फफूंदी लग जाती है। कीड़े भी ऊन को नष्ट कर देते हैं। इसलिए इन्हें रखते समय नेप्थलीन कपूर की गोली या नीम की सूखी पत्तियाँ रखकर बंद कर देना चाहिए।
In simple words: ऊन हल्के अम्लों से सुरक्षित रहती है, लेकिन तेज़ क्षार से खराब हो जाती है और गीली जगह पर रखने से फफूंदी लग सकती है।
🎯 Exam Tip: ऊन एक प्रोटीन रेशा है, जो अम्ल के प्रति बेहतर सहनशीलता दिखाता है लेकिन क्षार के प्रति संवेदनशील होता है। इसकी सही देखभाल के लिए कीट और फफूंदी से बचाना ज़रूरी है।
Question 4. खनिज (धात्विक) तन्तु क्या होते हैं? समझाइए।
Answer:
खनिज (धात्विक) तन्तु: प्रकृति में कुछ ऐसे खनिज पदार्थ और धातुएं पाई जाती हैं जिन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा पिघलाकर, खींचकर, बटकर और ऐंठन देकर सूक्ष्म, कोमल और लचीले रेशे तैयार किए जाते हैं। सभी खनिज रेशों से बने वस्त्र भारी होते हैं। इन्हें धोना और साफ रखना भी एक समस्या होती है।
In simple words: खनिज तन्तु धातुओं और खनिजों से बनाए जाते हैं, ये अक्सर भारी होते हैं और इनकी सफाई मुश्किल होती है।
🎯 Exam Tip: खनिज तन्तुओं में एस्बेस्टस और धातुओं के तार शामिल हैं, जो अपने खास गुणों (जैसे आग प्रतिरोधी) के लिए जाने जाते हैं।
Question 6. नायलॉन क्या है? समझाइए। इससे रेशे कैसे बनाए जाते हैं?
Answer: नायलॉन एक प्रकार का रासायनिक रेशा है, जिससे कई तरह के वस्त्र, मोजे, पर्दे, नाइट सूट और अन्य मिश्रित रेशे बनाए जाते हैं। इन रेशों में ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और कार्बन निश्चित अनुपात और संरचना में होते हैं। नायलॉन बनाने के लिए कोलतार से प्राप्त दो रसायनों (एडिपिक एसिड और हेक्सामिथिलीन डाई अमीन) को मिलाकर ऑटोक्लेव (प्रेशर कुकर जैसे यंत्र) में गर्म किया जाता है, जिससे नायलॉन पॉलीमर बनता है। इस पॉलीमर को ठंडा पानी डालकर परत के रूप में जमा लिया जाता है, जिसे फ्लेक्स (Flakes) कहते हैं। इन फ्लेक्स को फिर से पिघलाकर गाढ़ा घोल बनाया जाता है और स्पिनरैट के छिद्रों से रेशों के रूप में निकाला जाता है, जो हवा के संपर्क में आकर सूख जाते हैं।
In simple words: नायलॉन एक मानव निर्मित रेशा है जो कई रसायनों को मिलाकर बनता है। इसे बनाने के लिए तरल पदार्थ को पतले छिद्रों से गुजारकर धागे बनाए जाते हैं जो सूखने पर ठोस हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: नायलॉन अपनी मजबूती, लचीलेपन और दाग-धब्बों के प्रति प्रतिरोध के लिए जाना जाता है, जिससे यह कई वस्त्रों के लिए उपयुक्त है।
Question 7. पॉलिस्टर क्या है? इससे रेशे कैसे बनाए जाते हैं?
Answer:
पॉलिस्टर (Polyester): पॉलिस्टर एक रासायनिक रेशा है जो एस्टर्स का पॉलीमर है। पॉलिस्टर का रेशा बनाने की विधि नायलॉन के समान ही होती है। इसके निर्माण के लिए डाईकार्बोक्सिलिक अम्ल और डाईहाइड्रिक एल्कोहल की क्रिया कराई जाती है, जिससे ये दोनों पदार्थ पॉलीमराइज्ड (Polymerized) होकर पॉलीमरइजिंग पात्र (Polymerizing vessel) द्वारा रिबन के आकार में निकलते हैं। रिबन को चिप्स के आकार में काटकर एक होपर (Hopper) में भेजा जाता है जहाँ से ये मेल्टस्पिनिंग टैंक (Melt Spinning Tank) में मिश्रित करने के लिए डाला जाता है। इस प्रकार प्राप्त गर्म घोल को हवा के संपर्क के साथ स्पिनरैट के छिद्रों द्वारा प्रवाहित किया जाता है।
पॉलिस्टर की विशेषताएँ व उपयोगिताएँ
• पॉलिस्टर से बने वस्त्रों में खिंचाव झेलने की क्षमता (Breaking tenacity), लचीलापन (Plasticity), और वापस अपनी शेप में आने की क्षमता (Resiliency) बहुत अच्छी होती है।
• पॉलिस्टर के वस्त्र ज़्यादा गर्मी पर सिकुड़ते और पिघलने लगते हैं और एक काले अवशेष में बदल जाते हैं।
• पॉलिस्टर के वस्त्रों में सलवटें नहीं पड़तीं, इसलिए इस्त्री करने की ज़रूरत नहीं होती।
• पॉलिस्टर एक मजबूत रेशा है। इसे अन्य रेशों के साथ मिलाकर विभिन्न प्रकार के वस्त्र बनाए जाते हैं।
In simple words: पॉलिस्टर एक रासायनिक रेशा है जो एस्टर्स से बनता है। यह मजबूत, लचीला और सिकुड़न-मुक्त होता है, जिससे यह कई तरह के कपड़ों में इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: पॉलिस्टर अपनी स्थायित्व, शिकन-प्रतिरोध और कम पानी सोखने के गुण के कारण लोकप्रिय है, जिससे यह 'धोओ और पहनो' (wash and wear) कपड़ों के लिए उपयुक्त है।
RBSE Class 11 Home Science Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. हमारे लिए वस्त्रों का क्या महत्त्व है? वस्त्रों के इतिहास पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
Answer: मनुष्य के जीवन की तीन मुख्य ज़रूरतों में से एक कपड़ा है। वस्त्र एक ऐसी चीज़ है जिसका संबंध हर व्यक्ति से हमेशा रहता है। प्राचीन समय में मनुष्य अपने शरीर को ढकने और धूप, वर्षा, सर्दी आदि से बचाने के लिए जानवरों की खाल, पेड़ों के पत्ते आदि का उपयोग करते थे। धीरे-धीरे मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ वस्त्र बनाने की कला का भी विकास हुआ। पुराने समय में पहने जाने वाले कपड़े आज के कपड़ों से अलग होते थे। आजकल हम गर्मी में सूती कपड़े, सर्दियों में ऊनी कपड़े और बारिश से बचने के लिए खास तरह के कपड़े पहनते हैं। हम घर पर अलग-अलग कपड़े पहनते हैं और खास अवसरों जैसे शादी-समारोह पर अलग कपड़े पहनते हैं।
इसी तरह, अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े लोग जैसे पुलिस, फायरमैन, डॉक्टर, नर्स, विद्यार्थी आदि खास तरह के कपड़े पहनते हैं। एक कहावत है कि 'कपड़े ही व्यक्ति को बनाते हैं' जो काफी हद तक सही है। कपड़ों का मानव मन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अवसर के हिसाब से सही कपड़े पहनने पर व्यक्ति में आत्मविश्वास आता है और उसका व्यक्तित्व भी निखरता है। वस्त्र हमारे शरीर की सुरक्षा के अलावा घर के कामों में भी इस्तेमाल होते हैं, जैसे फर्श की दरी, कालीन आदि। सुंदर और आकर्षक डिज़ाइनों से बने सोफा सेट कवर, कुरान कवर, बैडशीट, तकिया के गिलाफ, परदे आदि के इस्तेमाल से घर की सुंदरता और आकर्षण बढ़ता है। साफ-सफाई और नहाने-धोने आदि कामों के लिए भी तौलिया, झाड़न आदि कई तरह के वस्त्रों का उपयोग होता है। इसका मतलब है कि मानव जीवन की विभिन्न गतिविधियों से वस्त्रों का गहरा संबंध है।
In simple words: वस्त्र मनुष्य की बुनियादी ज़रूरत हैं, जो शरीर को मौसम से बचाते हैं और सामाजिक भूमिका निभाते हैं। उनका उपयोग ऐतिहासिक रूप से विकसित हुआ है, और आज वे सुरक्षा, व्यावसाय और घर की सुंदरता के लिए आवश्यक हैं।
🎯 Exam Tip: वस्त्रों के महत्व को तीन मुख्य बिंदुओं में विभाजित करें: सुरक्षा, सामाजिक/व्यक्तिगत पहचान, और व्यावहारिक उपयोग (घरेलू)। उनके ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है।
Question 2. कपास का विवरण देते हुए, इसके तन्तु की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताएँ लिखिए।
Answer:
कपास (Cotton): यह रेशा कपास के पौधे से प्राप्त होता है। यह सभी वानस्पतिक रेशों में सबसे अच्छा होता है। कपास के पौधे गर्मियों में उगाए जाते हैं। कपास के पौधों में फूल खिलते हैं और पककर झड़ जाते हैं, तो उनमें से कोए (Pools) निकलते हैं। कोए पकने पर फट जाते हैं और कपास के रेशे बीजों के चारों ओर चिपके हुए दिखाई देते हैं। इसी अवस्था में कोए को तोड़कर इकट्ठा किया जाता है और उनसे रुई निकालकर सूत बनाकर कपड़े बनाए जाते हैं।
भौतिक विशेषताएँ:
• कपास के रेशे में 80-90 प्रतिशत तक सेल्यूलोज होता है।
• सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखने पर कपास का तन्तु चपटा, बलखाए फीते की तरह दिखाई देता है।
• कपास के रेशे की लम्बाई अन्य रेशों से लगभग 1/2 से 2 1/2 इंच कम होती है।
• कपास के रेशे की सतह खुरदुरी होती है और इसमें चिकनाहट या चमक नहीं होती।
• कपास का रेशा बहुत मजबूत होता है और गीला होने पर इसकी मजबूती और बढ़ जाती है।
• कपास के रेशे में प्रत्यास्थता (Elasticity) नहीं होती, इसलिए इसे खींचकर बढ़ा नहीं सकते और यह जल्दी सिकुड़ जाता है।
• कपास का रेशा ज़्यादा खींचने पर टूट जाता है।
• कपास का रेशा नमी को जल्दी सोखता है, और इसकी गर्मी में इस तन्तु से बने वस्त्र पसीने को सोखकर ठंडक देते हैं। जैसे-तौलिया, अंत: वस्त्र आदि।
• कपास का तन्तु मजबूत होने के कारण धुलाई के समय रगड़ने, पीटने से वस्त्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
रासायनिक विशेषताएँ –
• कपास का रेशा गाढ़े अम्ल से नष्ट हो जाता है।
• इस रेशे पर क्षार का प्रभाव नहीं पड़ता है, इसलिए इसे साफ करने के लिए क्षारीय पदार्थ का उपयोग किया जाता है।
• कपास के रेशे पर ब्लीच का प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए सूती वस्त्रों पर विरंजक का उपयोग कर सकते हैं।
• कपास के रेशे की गर्मी सहने की क्षमता सबसे ज़्यादा होती है, लेकिन लगातार सूरज की रोशनी में रहने पर यह कमज़ोर पड़ने लगता है और पीला पड़ जाता है।
• कपास के रेशे पर अन्य रंग जल्दी नहीं चढ़ते।
• नम, गर्म और प्रकाशहीन जगह पर ज़्यादा समय तक रखे जाने से कपास के रेशों में फफूंद लग जाती है, जिससे चित्तीदार धब्बे बन जाते हैं और अंततः सड़ जाते हैं।
In simple words: कपास पौधे से मिलने वाला एक मजबूत रेशा है जो नमी सोखता है और गर्मी में ठंडक देता है। यह अम्ल से खराब होता है लेकिन क्षार से नहीं।
🎯 Exam Tip: कपास की भौतिक विशेषताओं में इसकी मजबूती (गीली अवस्था में और भी), नमी सोखने की क्षमता और कम लचीलापन शामिल हैं। रासायनिक रूप से, यह क्षार को सहता है लेकिन तेज़ अम्ल से खराब होता है।
Question 4. ऊन क्या है? विभिन्न प्रकार के ऊन का विवरण देते हुए इसे तैयार करने की विधि बताइए।
Answer: ऊन जानवरों से मिलने वाला एक प्राकृतिक प्रोटीनयुक्त रेशा है। यह ज्यादातर भेड़ के बालों से मिलती है, लेकिन ऊँट, खरगोश, हिरण और बकरी के बालों से भी ऊन प्राप्त की जाती है। ऊन बनाने के लिए, सबसे पहले जानवरों को कीटाणुनाशक घोल से नहलाया जाता है। इसके बाद, उनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों से ऊन को हाथों या मशीनों से काटा जाता है। इस काटी हुई ऊन को फ्लीस ऊन (Fleece Wool) कहते हैं। यह काम बसंत ऋतु में किया जाता है। मरे हुए जानवरों से ऊन निकालने के लिए उनके शरीर पर रासायनिक पदार्थ लगाया जाता है और बालों को खींचकर निकाला जाता है, जिसे खींची हुई ऊन (Pulled Wool) कहते हैं। इस ऊन को अम्ल से धोकर नमी वाले वातावरण में सुखाया जाता है, जिससे यह मुलायम और लचीली बनी रहे। इसके बाद, ऊन पर जैतून का तेल छिड़ककर कार्डिंग की प्रक्रिया से रेशों को समानांतर करके पूनियाँ बनाई जाती हैं, फिर जरूरत के हिसाब से उनकी रंगाई और कताई की जाती है।
In simple words: ऊन जानवरों से मिलने वाला एक प्राकृतिक रेशा है, खासकर भेड़ से। इसे बनाने के लिए जानवरों को साफ करके उनके बाल काटे जाते हैं, फिर ऊन को साफ करके धागे में बदला जाता है।
🎯 Exam Tip: ऊन के स्रोत और उत्पादन प्रक्रिया के मुख्य चरणों को क्रमबद्ध तरीके से समझाना महत्वपूर्ण है, साथ ही फ्लीस ऊन और पुल्ड ऊन के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करें।
Question 5. ऊन की भौतिक विशेषताएँ लिखिए।
Answer: ऊन की भौतिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ऊन का रेशा एक प्रोटीन-प्रधान रेशा है जो केराटिन (Keratin) नामक प्रोटीन से बना होता है।
2. ऊनी रेशों में सल्फर (गंधक) भी पाया जाता है।
3. सूक्ष्मदर्शी से देखने पर ऊनी रेशा बहुकोशिकीय, टेढ़ा-मेढ़ा दिखता है और इसके दोनों किनारे नुकीले होते हैं, बीच में कुछ गोलाकार भी होता है।
4. ऊनी रेशे की कोमलता, रंग और चमक जानवर की जाति और उसके शरीर के उस हिस्से पर निर्भर करती है जहाँ से ऊन निकाली गई है।
5. ऊनी रेशा प्राकृतिक रेशों में सबसे कमजोर होता है। गीला होने पर इसकी मजबूती 25% तक कम हो जाती है, इसलिए इसे रगड़कर नहीं धोना चाहिए।
6. नमी, गर्मी और दबाव के कारण ऊनी रेशे फूलकर और खुलकर फैल जाते हैं, और सूखने पर आपस में जुड़ने लगते हैं।
7. ऊनी रेशों में लचीलापन होता है, जिससे दबाने या खींचने के बाद वे वापस अपने मूल आकार में आ जाते हैं। इस वजह से इनमें सलवटें नहीं पड़ती हैं।
8. ऊनी रेशा सूखी गर्मी को सहन नहीं कर पाता है। इसलिए ऊनी कपड़ों पर इस्त्री करते समय नरम-पतला कपड़ा डालना चाहिए।
9. ऊनी कपड़े पानी को जल्दी सोख लेते हैं।
10. ऊनी रेशा आसानी से आग नहीं पकड़ता है। इसी कारण ऊन से बने कंबल आग बुझाने में मदद करते हैं।
11. छोटे रेशों से ऊनी वस्त्र और लंबे रेशों से वस्टेड (Worsted) वस्त्र बनाए जाते हैं।
12. ऊनी रेशों में प्रोटीन तंतु होने के कारण उनमें हवा भरी रहती है, जिससे वे आसपास की हवा से ज्यादा गर्म रहते हैं और ऊनी कपड़ों का गर्म रखने का गुण बढ़ जाता है।
In simple words: ऊन के रेशे प्रोटीन से बने होते हैं, टेढ़े-मेढ़े और कमजोर होते हैं खासकर जब गीले हों। इनमें लचीलापन होता है और ये गर्मी को रोकते हैं, इसलिए सर्दियों में अच्छे होते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊन की भौतिक विशेषताओं को क्रमवार और स्पष्ट रूप से बताएं। मुख्य बिंदुओं जैसे प्रोटीन संरचना, नमी का प्रभाव, लचीलापन और ताप प्रतिरोधकता पर विशेष ध्यान दें।
Question 6. रेयॉन तन्तु की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताएँ बताइए।
Answer: रेयॉन तंतु की भौतिक और रासायनिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
**भौतिक विशेषताएँ:**
1. रेयॉन को किसी भी विधि से बनाया जाए, इसका मूल आधार पौधों में पाया जाने वाला सेलूलोज (Cellulose) ही रहता है।
2. यह एक मानव निर्मित रेशा है, इसलिए इसकी लंबाई अपनी इच्छा अनुसार रखी जा सकती है। लंबे रेशों को फिलामेंट कहते हैं। इनसे बहुत सुंदर, रेशम जैसी चिकनी और मुलायम कपड़े बनते हैं। छोटे रेशों को स्टेपल कहते हैं, जिनसे रोयेदार कपड़े बनाए जाते हैं।
3. रेयॉन का रेशा ऊन से अधिक मजबूत होता है, लेकिन सिल्क से एक तिहाई कम मजबूत होता है। यह सूखा होने पर ज्यादा मजबूत होता है, लेकिन गीली अवस्था में इसकी मजबूती 40-70% तक कम हो जाती है। इसलिए इन कपड़ों को रगड़-रगड़ कर नहीं धोना चाहिए।
4. एसीटेट रेयॉन से बने कपड़े पानी देर से सोखते हैं और ऊपर से ही गीले होते हैं। पानी इनमें अंदर तक नहीं जाता, इसलिए ये जल्दी सूख जाते हैं। इस रेयॉन से पानी वाले स्थानों के पर्दे, छाते और बरसाती आदि बनाए जाते हैं।
5. क्यूप्रामोनियम रेयॉन ताप का अच्छा चालक होता है, इसलिए गर्मी में ठंडक देता है। इससे बने कपड़े हल्के होते हैं।
6. विस्कॉस रेयॉन भी गर्मी में पहना जा सकता है, लेकिन इसके धागे मोटे होने के कारण कपड़े भारी होते हैं।
7. एसीटेट रेयॉन ताप का कुचालक होता है, इसलिए गर्म कपड़ों में अस्तर लगाने के काम आता है।
8. बहुत ज्यादा गर्मी से रेयॉन का रेशा पिघल जाता है। नमी, ताप और दबाव के साथ (जैसे-भाप वाली इस्त्री से) इसमें खास चमक आ जाती है।
**रासायनिक विशेषताएँ:**
1. अम्ल का रेयॉन पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। गर्म, हल्के और तेज अम्ल से रेशे खराब हो जाते हैं।
2. यह क्षार को सहन कर लेता है, लेकिन क्षार के तेज घोल से रेशे कमजोर हो जाते हैं और कपड़ों की चमक भी कम हो जाती है।
3. रेयॉन पर रंग बहुत अच्छे से चढ़ते हैं। इसे किसी भी रंग से सुंदर और आकर्षक डिजाइन में रंगा जा सकता है।
4. रेयॉन का रेशा ब्लीच से प्रभावित होता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड इसके लिए एक अच्छा विरंजक है।
5. रेयॉन के रेशे पर बैक्टीरिया और कीटाणुओं का कोई असर नहीं होता, लेकिन नमी होने पर कपड़ों पर फफूंद लग जाती है।
In simple words: रेयॉन एक मानव निर्मित रेशा है जो सेलूलोज से बनता है। यह मजबूत होता है, चमकता है, और आसानी से रंग जाता है। यह गर्मी में ठंडा रहता है लेकिन गीला होने पर कमजोर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: रेयॉन की भौतिक और रासायनिक विशेषताओं को अलग-अलग शीर्षकों के तहत सूचीबद्ध करें। प्रत्येक विशेषता को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से समझाएं, उदाहरण के साथ जहां आवश्यक हो।
Question 7. नायलॉन तन्तु की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताएँ लिखिए।
Answer: नायलॉन तंतु की भौतिक और रासायनिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
**भौतिक विशेषताएँ:**
1. नायलॉन के वस्त्र आरामदायक नहीं होते हैं।
2. ताप का कुचालक होने के कारण नायलॉन के वस्त्र सर्दियों के लिए उपयुक्त रहते हैं।
3. अधिक ताप पर ये रेशे पिघलकर दानों के रूप में जम जाते हैं।
4. नायलॉन के रेशे में लचीलापन होता है, इसलिए इससे मोजे जैसे वस्त्र बनाए जाते हैं।
5. सामान्य ताप पर ये न तो फैलते हैं और न ही सिकुड़ते हैं।
6. नायलॉन में रेशे को एक निश्चित आकार और आकृति में हीट-सेट कर देने पर वस्त्र हमेशा अपना आकार, क्रीज और प्लीट बनाए रखते हैं।
7. नायलॉन के वस्त्रों की सतह चिकनी होती है, इसलिए इन पर धूल नहीं जम पाती और इन्हें आसानी से धोया जा सकता है।
**रासायनिक विशेषताएँ:**
1. इसके कई प्रकार होते हैं; जैसे- नायलॉन, डेक्रॉन, एक्रेलिक आदि।
2. नायलॉन पर अम्ल का हानिकारक प्रभाव पड़ता है, जैसे सल्फ्यूरिक अम्ल, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल से यह रेशा खराब हो जाता है।
3. नायलॉन का रेशा क्षार से अप्रभावित रहता है, इसलिए इसे किसी भी साबुन से धोया जा सकता है।
4. रंगों के लिए नायलॉन के वस्त्रों में अच्छी समानता रहती है और इन पर सुंदर रंग खिल उठते हैं।
5. हल्के रंग के वस्त्रों पर धूप और प्रकाश का प्रभाव पड़ता है।
6. नायलॉन के वस्त्रों पर फफूंद और कीड़े नहीं लगते हैं।
7. नायलॉन के वस्त्रों का उपयोग पर्दे और रात के परिधान बनाने के लिए किया जाता है, और दूसरे रेशों के साथ मिलाकर इनका बहुमुखी उपयोग भी किया जाता है।
In simple words: नायलॉन मजबूत, लचीला और चिकना होता है, धूल नहीं पकड़ता और आसानी से धुल जाता है। यह सर्दी में गर्म रहता है लेकिन गर्मी में पिघल सकता है। अम्ल इसे नुकसान पहुँचाते हैं पर क्षार नहीं।
🎯 Exam Tip: नायलॉन की विशेषताओं को भौतिक और रासायनिक गुणों में वर्गीकृत करें। इसकी मजबूती, लचीलापन, ताप के प्रति प्रतिक्रिया, और अम्ल व क्षार के प्रति संवेदनशीलता को स्पष्ट करें।
Question 8. मिश्रित रेशे क्या होते हैं? विभिन्न प्रकार के मिश्रित रेशों के संगटक बताते हुए किन्हीं तीन मिश्रित रेशों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: **मिश्रित रेशे (Mixed Fibers):** दो या दो से अधिक प्रकार के रेशों को मिलाकर बनाए गए नए प्रकार के रेशों को मिश्रित रेशे कहते हैं। इसी तरह, दो प्रकार के रेशों की कताई एक साथ करके मिश्रित धागा बनाया जाता है, या दो प्रकार के रेशों वाले अलग-अलग धागों को एक साथ बुनकर मिश्रित वस्त्र बनाए जाते हैं। जैसे- टेरीकॉट, कॉट्सवूल, टेरीवूल, खादी सिल्क आदि। मिश्रित वस्त्रों की आसान देखभाल, कम कीमत और बेहतर विशेषताओं के कारण ये आजकल बहुत प्रचलन में हैं।
मिश्रित रेशों के संघटक इस प्रकार हैं:
| मिश्रित रेशा | संघटक |
|---|---|
| टेरीकॉट | टेरीलिन + कॉटन |
| कॉटस वूल | कॉटन + वूल |
| टेरी वूल | कॉटन + वूल |
1. **टेरीकॉट (Terry-cot):** इस मिश्रित वस्त्र में टेरीलिन और कॉटन दोनों की विशेषताएँ होती हैं। सूती रेशों के गुण जैसे ठंडक, पसीना सोखना और आरामदायक महसूस होना इसमें मिलते हैं। टेरीलिन के कारण ये वस्त्र टिकाऊ, सुंदर, चमकदार और सिकुड़न-रोधी होते हैं। ये 'धोओ और पहनो' (wash and wear) प्रकार के होते हैं क्योंकि इन पर इस्त्री करने की जरूरत नहीं होती।
2. **टेरी सिल्क (Terry-Silk):** ऐसे मिश्रित वस्त्रों में टेरीलिन के कारण मजबूती, टिकाऊपन और सिकुड़न-प्रतिरोधकता होती है, जबकि सिल्क के कारण ये चमकदार और आकर्षक होते हैं।
3. **टेरी वूल (Terry-wool):** ऐसे वस्त्रों में टेरीलिन की मौजूदगी के कारण ये सलवट-रोधी, सिकुड़न-प्रतिरोधी, मजबूत, रगड़ और घर्षण-रोधी होते हैं। ऊनी रेशों की मौजूदगी के कारण इनमें लचीलापन, सुंदरता और गर्म होने का गुण भी पाया जाता है।
In simple words: मिश्रित रेशे दो या दो से ज्यादा रेशों को मिलाकर बनते हैं, जिससे उनमें दोनों रेशों के अच्छे गुण आ जाते हैं। जैसे टेरीकॉट, टेरी सिल्क और टेरी वूल, ये कपड़े टिकाऊ, सुंदर और संभालने में आसान होते हैं।
🎯 Exam Tip: मिश्रित रेशों की परिभाषा दें और उनके प्रचलन के कारणों को बताएं। विभिन्न प्रकार के मिश्रित रेशों के नाम, उनके घटक और उनकी प्रमुख विशेषताओं का स्पष्ट विवरण दें।
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