RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण

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Detailed Chapter 17 भोजन परिरक्षण RBSE Solutions for Class 11 Home Science

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Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Home Science Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

 

Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें-
(i) निम्न में से अर्द्धविकारी भोज्य पदार्थ है -
(a) दूध
(b) अनाज
(c) आलू
(d) दालें
Answer: (c) आलू
In simple words: ऐसे खाद्य पदार्थ जो तुरंत खराब नहीं होते लेकिन बहुत लंबे समय तक भी नहीं चलते, उन्हें अर्द्धविकारी कहते हैं. आलू इनमें से एक है.

🎯 Exam Tip: अर्द्धविकारी भोज्य पदार्थों के उदाहरणों को याद रखें, जैसे आलू, प्याज और गोभी, क्योंकि ये आमतौर पर पूछे जाते हैं.

 

Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें-
(ii) भोज्य पदार्थों के परिरक्षण में, प्रशीतन विधि का उचित तापक्रम होता है –
(a) 4°-10°C
(b) 15°-20°C
(c) 20°-25°C
Answer: (a) 4°-10°C
In simple words: खाने की चीज़ों को ठंडा करके सुरक्षित रखने के लिए 4 डिग्री से 10 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सही होता है. यह तापमान सूक्ष्मजीवों को बढ़ने से रोकता है, जिससे खाना खराब नहीं होता.

🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए सही तापमान याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्रशीतन (refrigeration) के लिए.

 

Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें-
(iii) भोज्य पदार्थों को नष्ट कर देते हैं -
(a) जीवाणु
(b) विषाणु
(c) खमीर
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: जीवाणु, विषाणु और खमीर जैसे सूक्ष्मजीव सभी खाने की चीज़ों को खराब कर सकते हैं. ये चीज़ें उनमें बढ़कर उनके स्वाद, बनावट और पोषण को बिगाड़ देते हैं.

🎯 Exam Tip: भोजन खराब करने वाले मुख्य कारकों जैसे जीवाणु, फफूंद, विषाणु और खमीर को पहचानना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 1. निम्न प्रश्नों के सही उत्तर चुनें-
(iv) भोज्य पदार्थों को अति उच्च-ताप से रक्षित करने के लिए उचित तापक्रम है –
(a) 100°C
(b) 100° - 150°C
(c) 100° - 170°C
(d) 200°C
Answer: (a) 100°C
In simple words: खाद्य पदार्थों को बहुत ज़्यादा गर्मी से बचाने के लिए 100 डिग्री सेल्सियस का तापमान सही होता है. यह तापमान ज़्यादातर सूक्ष्मजीवों को खत्म कर देता है, जिससे भोजन सुरक्षित रहता है.

🎯 Exam Tip: उच्च ताप परिरक्षण (जैसे पाश्चुरीकरण) में आमतौर पर 100°C के आसपास का तापमान उपयोग किया जाता है. इसे ध्यान में रखें.

 

प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पर्ति कीजिए

Question 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
1. निर्जलीकरण की मुख्य विधियां __________ एवं __________ हैं।
2. कटे हुए सेब का भूरा रंग __________ परिवर्तन द्वारा होता है।
3. भोज्य पदार्थों के रंग, आकार, गंध में अवांछनीय परिवर्तनों को __________ कहते हैं।
4. खाद्य पदार्थों का संग्रहण एयर टाइट बैग में करना __________ कहलाता है।
5. माँस को वसा की परत से सील बंद करने की प्रक्रिया __________ कहलाती है।
Answer:
1. निर्जलीकरण की मुख्य विधियां कृत्रिम एवं प्राकृतिक हैं।
2. कटे हुए सेब का भूरा रंग जैव-रासायनिक परिवर्तन द्वारा होता है।
3. भोज्य पदार्थों के रंग, आकार, गंध में अवांछनीय परिवर्तनों को भोजन संदूषण कहते हैं।
4. खाद्य पदार्थों का संग्रहण एयर टाइट बैग में करना निर्वात पैकिंग कहलाता है।
5. माँस को वसा की परत से सील बंद करने की प्रक्रिया पोटिंग कहलाती है।
In simple words: ये खाली स्थान भोजन को खराब होने से बचाने के तरीकों और खराब होने की पहचान से जुड़े हैं. निर्जलीकरण, जैव-रासायनिक क्रियाएं, भोजन खराब होना, वैक्यूम पैकिंग और पोटिंग सभी भोजन को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: रिक्त स्थान भरते समय, आपको भोजन परिरक्षण के तरीकों और खाद्य संदूषण से संबंधित शब्दावली की सटीक जानकारी होनी चाहिए.

 

Question 3. ब्लान्चिंग को परिभाषित कीजिए
Answer: ब्लान्चिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सब्जियों और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों को बहुत कम समय के लिए गर्म पानी या भाप में रखा जाता है, फिर तुरंत ठंडा किया जाता है. यह एन्जाइम की क्रिया को रोककर भोजन को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करता है. यह प्रक्रिया सब्जियों के रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: ब्लान्चिंग मतलब सब्ज़ियों को थोड़े समय के लिए गरम पानी में डालकर तुरंत ठंडा करना, ताकि वे ताज़ी रहें और खराब न हों.

🎯 Exam Tip: ब्लान्चिंग की परिभाषा में 'गर्म करना' और 'तुरंत ठंडा करना' दोनों महत्वपूर्ण चरणों का उल्लेख करें, साथ ही इसके उद्देश्य (एंजाइम निष्क्रिय करना) को भी बताएं.

 

Question 4. भोजन परिरक्षण को समझाइए।
Answer: भोजन परिरक्षण का मतलब है खाद्य पदार्थों को सूक्ष्म जीवों (जैसे जीवाणु, फफूंद), कीड़े-मकोड़ों से बचाना और उनकी पौष्टिकता को लंबे समय तक बनाए रखना. इस प्रक्रिया से भोजन को सुरक्षित रूप में संरक्षित किया जाता है ताकि इसे लंबे समय तक उपयोग किया जा सके. यह भोजन की बर्बादी को कम करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है.
In simple words: भोजन परिरक्षण मतलब खाने को खराब होने से बचाना, ताकि वह लंबे समय तक अच्छा रहे और हमें पूरा पोषण दे.

🎯 Exam Tip: भोजन परिरक्षण की परिभाषा में उसके उद्देश्य (सूक्ष्म जीवों से बचाव, पौष्टिकता बनाए रखना) और परिणाम (लंबे समय तक सुरक्षित रखना) को अवश्य शामिल करें.

 

Question 5. रसाकर्षण प्रक्रिया को समझाइए।
Answer: रसाकर्षण (Osmosis) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जब भोज्य पदार्थों में पर्याप्त नमक मिलाया जाता है, तो नमक भोजन में मौजूद नमी को अपने अंदर खींच लेता है. इससे भोजन में मुक्त पानी कम हो जाता है, जिससे सूक्ष्मजीवों का बढ़ना मुश्किल हो जाता है. साथ ही, जीवाणुओं की कोशिकाओं में मौजूद तरल पदार्थ अपनी अधिक सांद्रता को कम करने के लिए जीवाणु कोशिका से बाहर आ जाते हैं. यह प्रक्रिया भोजन को खराब होने से बचाती है क्योंकि सूक्ष्मजीवों को बढ़ने के लिए पानी की आवश्यकता होती है.
In simple words: जब खाने में नमक डालते हैं, तो नमक पानी को खींच लेता है. इससे सूक्ष्मजीव बढ़ नहीं पाते और खाना खराब होने से बच जाता है.

🎯 Exam Tip: रसाकर्षण की व्याख्या करते समय, नमक द्वारा पानी खींचने और सूक्ष्मजीवों की कोशिकाओं से पानी बाहर निकलने की प्रक्रिया पर जोर दें, जो भोजन परिरक्षण में इसकी भूमिका है.

 

Question 6. भोजन परिरक्षण के सिद्धान्ता का संक्षिप्त में वर्णन करें।
Answer: भोजन परिरक्षण के मुख्य सिद्धांत इस प्रकार हैं:
• भोज्य पदार्थों की स्वाभाविक क्षति को रोकना: कभी-कभी भोजन में मौजूद प्राकृतिक एंजाइमों की क्रिया और खाद्य तेलों में मौजूद मुक्त वसीय अम्लों के ऑक्सीकरण से भोजन खराब हो जाता है. इसे एंजाइमों को नष्ट या निष्क्रिय करके रोका जा सकता है.
• विशुद्ध रासायनिक क्रियाओं को रोकना या धीमा करना: भोजन में होने वाली अवांछित रासायनिक प्रतिक्रियाओं को धीमा करके या रोककर भोजन को सुरक्षित रखा जाता है.
• यांत्रिक और भौतिक क्षति को रोकना: भोजन की बनावट और भौतिक गुणों को खराब होने से बचाना भी महत्वपूर्ण है.
• कीड़े-मकोड़ों, कीट-पतंगों और चूहों से बचाव: खाद्य पदार्थों को इन बाहरी जीवों से बचाना भी परिरक्षण का एक मुख्य सिद्धांत है, क्योंकि ये भी भोजन को खराब करते हैं. भोजन परिरक्षण का लक्ष्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा बनाए रखना है.
In simple words: भोजन परिरक्षण के मुख्य नियम हैं- खाने को अपने आप खराब होने से रोकना, रासायनिक क्रियाओं को धीमा करना, बाहरी नुकसान से बचाना और कीड़े-मकोड़ों से बचाना.

🎯 Exam Tip: भोजन परिरक्षण के सिद्धांतों को बिंदुवार प्रस्तुत करें, प्रत्येक सिद्धांत के पीछे के मुख्य कारण को संक्षेप में समझाएं.

 

Question 7. भोजन परिरक्षण की विभिन्न विधियों का विस्तार में वर्णन कीजिए।
Answer: भोजन परिरक्षण की विभिन्न विधियां निम्न प्रकार हैं:
1. उच्च जल-स्थैतिक दबाव: यह विधि वनस्पति बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड को उच्च दबाव से निष्क्रिय करती है, जिससे भोजन लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.
4. कम तापमान निष्क्रियता (प्रशीतन): यह सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली विधि है, जिसमें भोजन को ठंडे तापमान पर रखा जाता है. इससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक ​​जाती है और भोजन की आर्द्रता बनी रहती है. जैसे- दूध, दही, फल, सब्जियां, मांस आदि को रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है.
5. निर्वात पैकिंग: इसमें खाद्य पदार्थों को एयर-टाइट बैग या बोतल में पैक किया जाता है, जिससे ऑक्सीजन बाहर निकल जाती है. ऑक्सीजन की कमी से सूक्ष्मजीव बढ़ नहीं पाते और भोजन सुरक्षित रहता है. इसका उपयोग आमतौर पर सूखे मेवों के लिए होता है.
6. नमक द्वारा: नमक भोजन से नमी को सोख लेता है, जिससे सूक्ष्मजीवों को बढ़ने के लिए पानी नहीं मिल पाता. यह रसाकर्षण प्रक्रिया के तहत काम करता है, जहां जीवाणु कोशिकाओं से पानी बाहर आ जाता है. यह विधि मांस और मछली के परिरक्षण में उपयोग होती है.
7. चीनी द्वारा: चीनी भी नमक की तरह ही भोजन से पानी सोखकर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकती है. यह फलों को संरक्षित करने में सहायक है, जैसे जैम, जेली और मुरब्बा बनाने में. चीनी सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय कर देती है.
10. जगिंग (जग में परिरक्षण): इस विधि में मांस को मिट्टी के बर्तन या कैसरॉल में स्ट्यू करके संरक्षित किया जाता है. यह मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक पारंपरिक तरीका है.
In simple words: भोजन को सुरक्षित रखने के कई तरीके हैं, जैसे ज़्यादा दबाव से सूक्ष्मजीवों को खत्म करना, ठंडा रखना, हवा बंद करके पैक करना, नमक या चीनी का इस्तेमाल करना और जगिंग जैसी पुरानी विधियां.

🎯 Exam Tip: भोजन परिरक्षण की विभिन्न विधियों के नाम और प्रत्येक विधि के पीछे के मुख्य सिद्धांत (जैसे तापमान, नमी, ऑक्सीजन का नियंत्रण) को विस्तार से समझाएं.

 

सुमेलन

Question. स्तम्भ A तथा स्तम्भ B के शब्दों का मिलान कीजिए
Answer:
1. (d) जैव उत्प्रेरक
2. (e) सोलर ड्रायर
3. (a) रेफ्रिजरेटर
4. (b) रसाकर्षण
5. (c) अचार
In simple words: यह मिलान सही जोड़ों को दर्शाता है. जैव उत्प्रेरक (एंजाइम) भोजन खराब करते हैं, सोलर ड्रायर धूप से सुखाने के लिए है, रेफ्रिजरेटर ठंडा रखता है, रसाकर्षण नमक से जुड़ा है और अचार सिरके से बनता है.

🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, प्रत्येक शब्द या अवधारणा को उसकी सही परिभाषा या संबंधित वस्तु से सावधानी से मिलाएं. सामान्य गलतियों से बचें.

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 17 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 1. संक्रमित भोजन के सेवन से क्या प्रभाव होगा?
Answer: संक्रमित भोजन के सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है.
In simple words: खराब खाना खाने से तबीयत खराब हो जाएगी, जैसे पेट में दर्द, उल्टी या दस्त.

🎯 Exam Tip: संक्रमित भोजन के सेवन से होने वाले सामान्य स्वास्थ्य प्रभावों (जैसे फूड पॉइजनिंग) का उल्लेख करना सुनिश्चित करें.

 

Question 2. भोज्य पदार्थों के संरक्षण का क्या उद्देश्य है?
Answer: भोज्य पदार्थों के संरक्षण का मुख्य उद्देश्य उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, ताकि उन्हें बाद में उपयोग किया जा सके. इसका एक और उद्देश्य भोजन की पौष्टिकता, स्वाद और बनावट को बनाए रखना है, जिससे भोजन की बर्बादी कम हो और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो.
In simple words: खाने को बचाने का मकसद है उसे लंबे समय तक अच्छा रखना, ताकि बाद में इस्तेमाल कर सकें और वह खराब न हो.

🎯 Exam Tip: संरक्षण के उद्देश्य में 'लंबे समय तक सुरक्षित रखना' और 'बाद में उपयोग करना' जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल करें.

 

Question 3. भोज्य पदार्थों को समय के आधार पर वर्गीकृत कीजिए।
Answer: भोज्य पदार्थों को खराब होने के समय के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
विकारी भोज्य पदार्थ: ये बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं, जैसे दूध, मांस, मछली और हरी सब्जियां.
अर्द्ध विकारी भोज्य पदार्थ: ये कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक सुरक्षित रहते हैं, जैसे आलू, प्याज और गोभी.
अविकारी भोज्य पदार्थ: ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जैसे अनाज, दालें और सूखे मेवे. इस वर्गीकरण से खाद्य भंडारण और परिरक्षण की योजना बनाने में मदद मिलती है.
In simple words: खाने की चीज़ों को खराब होने के समय के हिसाब से तीन तरह में बांटा जाता है: जल्दी खराब होने वाले, थोड़े समय में खराब होने वाले और लंबे समय तक ठीक रहने वाले.

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के तीनों प्रकार (विकारी, अर्द्ध-विकारी, अविकारी) और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण याद रखें.

 

Question 4. विकारी भोज्य पदार्थों के उदाहरण लिखिए।
Answer: विकारी भोज्य पदार्थों के उदाहरण हैं: दूध, दही, मांस, मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां, पके हुए फल और अंडे. ये खाद्य पदार्थ कमरे के तापमान पर बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं क्योंकि इनमें नमी और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है, जो सूक्ष्मजीवों के विकास के लिए अनुकूल होती है.
In simple words: दूध, दही, मांस और हरी सब्ज़ियां जल्दी खराब होने वाले खाने के उदाहरण हैं.

🎯 Exam Tip: विकारी भोज्य पदार्थ वे होते हैं जिनमें नमी की मात्रा अधिक होती है और वे सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल होते हैं, जिससे वे जल्दी खराब होते हैं.

 

Question 6. भोजन को खराब करने वाले दो जैविक कारकों के नाम लिखिए।
Answer: भोजन को खराब करने वाले दो मुख्य जैविक कारक हैं:
जीवाणु: ये सूक्ष्मजीव भोजन में वृद्धि करके उसे सड़ा देते हैं और उसमें बदबू पैदा करते हैं.
फफूंद: ये भी सूक्ष्मजीव हैं जो भोजन पर सफेद या हरे रंग की परत के रूप में उगते हैं और उसे खराब कर देते हैं. ये जैविक कारक खाद्य पदार्थों में रासायनिक परिवर्तन करके उन्हें खाने योग्य नहीं रहने देते हैं.
In simple words: भोजन को खराब करने वाले दो मुख्य जीव जीवाणु और फफूंद हैं.

🎯 Exam Tip: जैविक कारक वो जीवित जीव होते हैं जो भोजन को खराब करते हैं; जीवाणु और फफूंद सबसे आम उदाहरण हैं.

 

Question 7. ब्लांचिंग के लिए उपयुक्त तापक्रम कितना होता है?
Answer: ब्लान्चिंग के लिए उपयुक्त तापक्रम लगभग 100°C होता है. इस तापमान पर खाद्य पदार्थों को थोड़े समय के लिए गर्म किया जाता है, जो एंजाइमों को निष्क्रिय करने और सूक्ष्मजीवों को कम करने के लिए पर्याप्त होता है. यह प्रक्रिया सब्जियों के रंग, स्वाद और पोषण को बनाए रखने में मदद करती है.
In simple words: ब्लान्चिंग के लिए 100°C का तापमान सही होता है, ताकि एन्ज़ाइम निष्क्रिय हो जाएं.

🎯 Exam Tip: ब्लान्चिंग का विशिष्ट तापमान (100°C) और उसका उद्देश्य (एंजाइम निष्क्रिय करना) दोनों महत्वपूर्ण हैं.

 

Question 8. सिरका द्वारा किस पदार्थ का संरक्षण किया जाता है?
Answer: सिरका द्वारा मुख्य रूप से अचार का संरक्षण किया जाता है. सिरका में मौजूद एसिटिक एसिड सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकता है और भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है. इसका उपयोग सब्जियों, फलों और मांस के परिरक्षण में भी किया जाता है, जिससे उन्हें खट्टा और स्वादिष्ट बनाया जाता है.
In simple words: सिरका से अचार को सुरक्षित रखा जाता है.

🎯 Exam Tip: सिरका एक अम्लीय परिरक्षक है, और अचार इसका सबसे आम उदाहरण है.

 

Question 9. चीनी द्वारा परिरक्षण किए जाने वाले दो भोज्य पदार्थों के नाम लिखिए।
Answer: चीनी द्वारा परिरक्षण किए जाने वाले दो मुख्य भोज्य पदार्थ हैं:
जैम: फलों को चीनी के साथ पकाकर गाढ़ा किया जाता है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.
मुरब्बा: फलों को चीनी की चाशनी में संरक्षित किया जाता है. चीनी, रसाकर्षण प्रक्रिया से नमी को सोख लेती है, जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक ​​जाती है और भोजन खराब नहीं होता है.
In simple words: जैम और मुरब्बा चीनी का उपयोग करके संरक्षित किए जाने वाले दो खाने के उदाहरण हैं.

🎯 Exam Tip: चीनी का उपयोग फलों से बने उत्पादों जैसे जैम और मुरब्बा को संरक्षित करने में किया जाता है, क्योंकि यह नमी को कम करके सूक्ष्मजीवों को रोकती है.

 

Question 10. पॉटिंग विधि द्वारा किस खाद्य का संरक्षण किया जाता है?
Answer: पॉटिंग विधि द्वारा मुख्य रूप से मांस का संरक्षण किया जाता है. इस विधि में मांस को वसा की एक परत से सील बंद करके मिट्टी के बर्तन या जग में रखा जाता है. वसा की परत हवा के संपर्क को रोकती है, जिससे मांस खराब नहीं होता और लंबे समय तक सुरक्षित रहता है. यह एक पारंपरिक परिरक्षण विधि है.
In simple words: पॉटिंग विधि से मांस को बचाया जाता है, जिसमें मांस को वसा से ढककर बंद किया जाता है.

🎯 Exam Tip: पॉटिंग विधि में मांस को वसा की परत से सील करना मुख्य सिद्धांत है, जो हवा के संपर्क को रोककर परिरक्षण करता है.

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

 

Question 2. भोज्य पदार्थों के खराब होने के कारकों को बताइए।
Answer: भोज्य पदार्थों के खराब होने के मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
भोजन का स्वतः खराब होना: अधिक नमी, अधिक तापमान और भोजन में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम (जो फलों और सब्जियों को सड़ाते हैं) भोजन को स्वतः खराब कर देते हैं.
जैव-रासायनिक कारक: सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाली रासायनिक क्रियाएं, जैसे एंजाइमेटिक प्रतिक्रियाएं, भोजन के स्वाद, रंग और गंध को बदल देती हैं.
कीड़े-मकोड़े एवं पक्षी: ये भोजन को खाकर और अपने अवशेषों (जैसे मल-मूत्र, बाल) से उसे दूषित और विषाक्त करके खराब करते हैं.
सूक्ष्म जीव: जीवाणु, फफूंद, विषाणु और खमीर जैसे सूक्ष्मजीव भोजन में बढ़कर उसे सड़ा देते हैं, जिससे उसका स्वाद और पौष्टिकता कम हो जाती है. इन सभी कारकों को नियंत्रित करके भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
In simple words: भोजन के खराब होने के कई कारण हैं, जैसे ज़्यादा नमी, गर्मी, उसमें मौजूद प्राकृतिक एंजाइम, छोटे जीव (कीड़े, पक्षी) और सूक्ष्मजीव (जीवाणु, फफूंद).

🎯 Exam Tip: भोजन खराब करने वाले कारकों को जैविक, रासायनिक और भौतिक श्रेणियों में बांटकर याद रखें, साथ ही प्रत्येक का एक संक्षिप्त स्पष्टीकरण भी दें.

 

Question 3. उन सूक्ष्म जीवों के नाम लिखिए जो भोजन को खराब कर देते हैं।
Answer: वे सूक्ष्मजीव जो भोजन को खराब कर देते हैं, निम्नलिखित हैं:
फफूंदी (Fungus/Molds): ये भोजन पर सफेद, हरे या काले धब्बे के रूप में उगते हैं और उसे सड़ाते हैं.
जीवाणु (Bacteria): ये भोजन में तेजी से बढ़ते हैं, जिससे उसमें दुर्गंध और विषाक्त पदार्थ पैदा होते हैं.
विषाणु (Virus): ये सीधे तौर पर भोजन को सड़ाते नहीं हैं, लेकिन संक्रमित भोजन से बीमारी फैला सकते हैं.
खमीर (Yeast): ये आमतौर पर शर्करा युक्त भोजन में वृद्धि करते हैं और किण्वन (fermentation) करके भोजन को खराब करते हैं, जैसे फलों के रस और जैम. ये सूक्ष्मजीव भोजन में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और उसके पोषक तत्वों का उपयोग करके उसे खाने योग्य नहीं रहने देते हैं.
In simple words: भोजन को खराब करने वाले मुख्य सूक्ष्मजीव फफूंद, जीवाणु, विषाणु और खमीर हैं.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक सूक्ष्मजीव का नाम और वह किस प्रकार भोजन को खराब करता है, यह स्पष्ट रूप से बताएं. अंग्रेजी नाम भी याद रखें.

 

Question 4. खराब भोजन की पहचान किन बिन्दुओं के आधार पर की जा सकती है?
Answer: खराब भोजन की पहचान निम्न बिन्दुओं के आधार पर की जा सकती है:
स्वाद और रंग में परिवर्तन: खराब भोजन का स्वाद कड़वा, खट्टा या बेस्वाद हो जाता है और उसका प्राकृतिक रंग बदल जाता है, जैसे सब्ज़ियां पीली पड़ना या मांस का रंग बदलना.
महक और पौष्टिकता में कमी: खराब भोजन से अक्सर अप्रिय, तेज गंध आती है. साथ ही, उसकी पोषण गुणवत्ता कम हो जाती है, क्योंकि सूक्ष्मजीव पोषक तत्वों का उपयोग कर लेते हैं.
सफेद रूई के फोहे जैसी अभिवृद्धि: ब्रेड, अचार या अन्य खाद्य पदार्थों पर फफूंद के कारण सफेद, हरे या काले रंग की रूई जैसी परत दिखाई देती है. इन संकेतों से भोजन के खराब होने का आसानी से पता लगाया जा सकता है और ऐसे भोजन को खाने से बचना चाहिए.
In simple words: खराब खाना स्वाद और रंग में बदल जाता है, उसमें बदबू आती है, उसकी पौष्टिकता कम हो जाती है और कभी-कभी उस पर फफूंद जैसी चीज़ें उग जाती हैं.

🎯 Exam Tip: खराब भोजन की पहचान के लिए हमेशा दृश्य (रंग, फफूंद), घ्राण (गंध) और स्वाद परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित करें. ये प्रमुख संकेतक हैं.

 

RBSE Class 11 Home Science Chapter 17 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 2. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए –
1. भोजन का स्वतः ही खराब हो जाना,
2. जैव-रासायनिक परिवर्तन,
3. भोजन का कीड़े-मकोड़ों एवं पक्षियों द्वारा नष्ट करना।
Answer:
1. भोजन का स्वतः ही खराब हो जाना: भोज्य पदार्थों में उपस्थित प्राकृतिक एंजाइम कभी-कभी भोजन को अपने आप खराब कर देते हैं. जैसे, फलों और सब्जियों में पाए जाने वाले एंजाइम उन्हें पकने के बाद भी सड़ाना जारी रखते हैं, खासकर जब वे ज़्यादा पक जाते हैं. यह प्रक्रिया फल और सब्जियों को अंततः खराब कर देती है. इसे रोकने के लिए ब्लान्चिंग जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है.
2. जैव-रासायनिक परिवर्तन: ताजे फल और सब्जियों में सामान्य तापमान पर समय के साथ कई रासायनिक परिवर्तन होते रहते हैं. इन परिवर्तनों के लिए भोजन में उपस्थित जैव-उत्प्रेरक (एंजाइम) ही जिम्मेदार होते हैं. उदाहरण के लिए, जब फल और सब्जियां ज़्यादा पक जाती हैं, तो उनमें अरुचिकर गंध आने लगती है. ये परिवर्तन भोजन की गुणवत्ता को कम करते हैं और उसे खराब कर देते हैं.
3. भोजन का कीड़े-मकोड़ों एवं पक्षियों द्वारा नष्ट करना: कीड़े-मकोड़े (जैसे घुन, बीटल), पक्षी और चूहे भोजन को खाकर और उसे दूषित करके नष्ट करते हैं. ये अनाज, मेवे, तिल और बीजों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. पक्षी जितना भोजन खाते हैं, उससे कहीं ज़्यादा खराब उसे अपने मल-मूत्र, बाल और अन्य अवशेषों से विषाक्त करके कर देते हैं. यह दूषित भोजन मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है. खाद्य पदार्थों को इन जीवों से बचाना परिरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
In simple words: भोजन अपने आप भी खराब होता है, उसमें रासायनिक बदलाव आते हैं और कीड़े-मकोड़े व पक्षी भी उसे खराब कर देते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक बिंदु (स्वतः खराब होना, जैव-रासायनिक परिवर्तन, कीड़े-मकोड़ों द्वारा नुकसान) को अलग-अलग समझाएं और उनके पीछे के मुख्य कारण बताएं.

 

Question 3. सूक्ष्म जीव किस प्रकार भोज्य पदार्थों को हानि पहुँचाते हैं? समझाइए।
Answer: फफूंद, जीवाणु, विषाणु और खमीर जैसे सूक्ष्मजीव भोज्य पदार्थों में प्रवेश करने के बाद तेजी से बढ़ते हैं. ये अपनी वृद्धि के लिए भोजन में मौजूद पोषक तत्वों का उपयोग करते हैं, जिससे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है. हम इन बहुत छोटे जीवों को अपनी आँखों से नहीं देख सकते, लेकिन सूक्ष्मदर्शी से इनकी पहचान की जा सकती है. ये सूक्ष्मजीव भोजन में जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं, जिसे खाने से व्यक्ति बीमार हो जाता है और उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इस तरह, सूक्ष्मजीव भोजन को पूरी तरह से खराब कर देते हैं.
अनाजों को खराब करने वाले सभी सूक्ष्मजीवों में फफूंद का एक महत्वपूर्ण स्थान है. फफूंद के बढ़ने से भोज्य पदार्थों का तापमान बढ़ जाता है और उनमें दुर्गंध आने लगती है. इससे भोजन की पौष्टिकता और स्वाद भी कम हो जाता है. सूक्ष्मजीवों को वायु की आवश्यकता के अनुसार वायवीय (ऑक्सीजन की आवश्यकता), अवायवीय (ऑक्सीजन के बिना) और विकल्पी अवायवीय (दोनों तरह से जीवित रहने वाले) वर्गों में बांटा जा सकता है. इसी तरह, उनकी गर्मी सहन करने की क्षमता के आधार पर उन्हें शीतरागी (ठंडे तापमान में बढ़ने वाले), मध्यतापरागी (मध्यम तापमान में बढ़ने वाले) और तापरागी (गर्म तापमान में बढ़ने वाले) श्रेणियों में भी बांटा जाता है. सूक्ष्मजीवों की यह विविधता उन्हें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों और वातावरण में पनपने में मदद करती है.
In simple words: सूक्ष्मजीव भोजन में बढ़ते हैं, उसके पोषक तत्व खा लेते हैं और ज़हर छोड़ते हैं, जिससे खाना खराब हो जाता है और हमें बीमार कर सकता है. फफूंद खासकर अनाज को खराब करती है.

🎯 Exam Tip: सूक्ष्मजीवों द्वारा भोजन को खराब करने के तरीकों (पोषक तत्वों का उपयोग, विषाक्त पदार्थ छोड़ना) और उनके वर्गीकरण (वायवीय/अवायवीय, तापरागी) को विस्तार से समझाएं.

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RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 17 भोजन परिरक्षण prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Home Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 17 भोजन परिरक्षण

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Home Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Home Science Class 11 Solved Papers

Using our Home Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 17 भोजन परिरक्षण to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Home Science are as per latest RBSE curriculum.

Are the Home Science RBSE solutions for Class 11 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Home Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 11 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Home Science. You can access RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Home Science RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Home Science Chapter 17 भोजन परिरक्षण in printable PDF format for offline study on any device.