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Detailed Chapter 7 द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद का विश्व RBSE Solutions for Class 11 History
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Class 11 History Chapter 7 द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद का विश्व RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 History Chapter 7 पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 History Chapter 7 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. प्रथम विश्व युद्ध के फलस्वरूप विश्व शांति के लिए कौन सी अंतर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना हुई?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए 1920 ई. में राष्ट्र संघ (League of Nations) की स्थापना की गई थी.
In simple words: पहले विश्व युद्ध के बाद, पूरी दुनिया में शांति लाने के लिए 1920 में लीग ऑफ नेशंस नाम की संस्था बनाई गई.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के नाम और उनकी स्थापना का वर्ष सटीक रूप से याद रखें.
प्रश्न 2. शीत युद्ध कौन-कौन सी दो महाशक्तियों के मध्य हुआ?
Answer: शीत युद्ध विश्व की दो सबसे बड़ी ताकतों, यानी अमेरिका और सोवियत रूस, के बीच हुआ था.
In simple words: शीत युद्ध दो महाशक्तियों- अमेरिका और सोवियत रूस के बीच लड़ा गया था.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध के प्रमुख देशों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक मुख्य अवधारणा है.
प्रश्न 3. न सी पुस्तक लिखी?
Answer: इस प्रश्न का उत्तर स्रोत में उपलब्ध नहीं है.
In simple words: जानकारी उपलब्ध नहीं है.
🎯 Exam Tip: यदि प्रश्न अधूरा या जानकारी अनुपलब्ध हो, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं.
सहयोग की तीव्र आवश्यकता है?
Answer: ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने फुल्टन में कहा था कि दुनिया में आज़ादी की भावना को बनाए रखने और ईसाई सभ्यता को बचाने के लिए ब्रिटिश और अमेरिकी देशों के बीच गहरा सहयोग बहुत ज़रूरी है.
In simple words: चर्चिल ने कहा था कि दुनिया में आज़ादी और ईसाई सभ्यता को बचाने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका का साथ आना ज़रूरी है.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण नेताओं के उद्धरणों और उनके ऐतिहासिक संदर्भ को याद रखें.
प्रश्न 5. रियो दी जेनेरियो में पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित पृथ्वी सम्मेलन किस ईस्वी वर्ष में हुआ?
Answer: रियो दी जेनेरियो में पर्यावरण को बचाने के लिए पृथ्वी सम्मेलन 1992 ई. में आयोजित किया गया था.
In simple words: पृथ्वी सम्मेलन 1992 में रियो दी जेनेरियो में हुआ था, जो पर्यावरण को बचाने के लिए था.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के नाम, वर्ष और मुख्य उद्देश्य हमेशा याद रखें.
प्रश्न 6. किसने कहा कि किसी आतंकवादी को उसके तात्कालिक लक्ष्य के संदर्भ में ठीक तरह से परिभाषित किया जा सकता है?
Answer: बर्गर महोदय ने यह कहा था कि किसी भी आतंकवादी को उसके तुरंत के लक्ष्य (Immediate objective) के अनुसार ठीक से समझाया जा सकता है.
In simple words: बर्गर महोदय ने बताया कि आतंकवादी को उसके तत्काल के लक्ष्यों से परिभाषित कर सकते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी विशेष अवधारणा से जुड़े विद्वानों के नाम और उनके विचारों को याद रखें.
प्रश्न 7. गुट निरपेक्ष आंदोलन के सत्रहवें शिखर सम्मेलन का आयोजन स्थल कौन सा देश है?
Answer: गुट निरपेक्ष आंदोलन का सत्रहवां शिखर सम्मेलन वेनेजुएला देश में आयोजित किया गया था.
In simple words: गुट निरपेक्ष आंदोलन का 17वां सम्मेलन वेनेजुएला में हुआ था.
🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों के महत्वपूर्ण सम्मेलनों और उनके स्थानों की जानकारी रखें.
प्रश्न 8. 'ब्रिक्स' राष्ट्र समूह के पाँच सदस्य राष्ट्र कौन-कौन से हैं?
Answer: ब्रिक्स (BRICS) समूह के पाँच सदस्य देश हैं: ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका.
In simple words: ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय समूहों के सदस्य देशों के नाम याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है.
प्रश्न 9. बारहवें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' को अब कौन सी पॉलिसी बनाने का आग्रह किया है?
Answer: बारहवें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' को बदलकर 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) बनाने का आग्रह किया है.
In simple words: प्रधानमंत्री मोदी ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' को बदलकर 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' बनाने को कहा है.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति के प्रमुख बदलावों और उससे जुड़े नेताओं के नामों को ध्यान में रखें.
प्रश्न 10. स
Answer: इस प्रश्न का उत्तर स्रोत में उपलब्ध नहीं है.
In simple words: जानकारी उपलब्ध नहीं है.
🎯 Exam Tip: यदि प्रश्न अधूरा या जानकारी अनुपलब्ध हो, तो उसे स्पष्ट रूप से बताएं.
प्रश्न 1. शीत युद्ध से आप क्या समझते हैं?
Answer: जब दो देश एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते, शक करते हैं, और झूठी बातें फैलाकर साज़िशों की राजनीति में उलझ जाते हैं, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बार-बार चेतावनी देते हैं कि अगर उनके हितों की रक्षा नहीं हुई तो युद्ध हो जाएगा - इसी स्थिति को शीत युद्ध कहते हैं. लुई हाले ने इसे ऐसे समझाया है: "शीत युद्ध परमाणु युग में एक तनावपूर्ण स्थिति है, जो हथियारों वाले युद्ध से बिल्कुल अलग, लेकिन उससे ज़्यादा खतरनाक है." असल में, शीत युद्ध दो अलग-अलग विचारों का टकराव था. अमेरिका और सोवियत रूस जैसी दो बड़ी शक्तियों के बीच यह युद्ध लंबे समय तक चला, जिसका मुख्य कारण दोनों का दुनिया की एकमात्र महाशक्ति बनना था.
In simple words: शीत युद्ध एक ऐसी स्थिति थी जहाँ दो देश (अमेरिका और रूस) बिना सीधे लड़ाई किए, एक-दूसरे पर शक करते थे और प्रोपेगंडा फैलाकर अपना दबदबा बढ़ाना चाहते थे.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें और उसके पीछे के मुख्य कारणों को ध्यान में रखें.
प्रश्न 2. ऋग्वेद के दसवें मण्डल का वह मंत्र लिखिए, जिसमें कहा गया है कि अकेला खाने वाला पापी होता है।
Answer: ऋग्वेद के दसवें मंडल में यह कहा गया है:
मोघमन्नं विन्दते अप्रचेताः
सत्यं ब्रवीमि वध इत्स तस्य।
नार्यमणं पुष्यति नो सखायं
केवलाधो भवति केवलादी।।
इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति अकेले भोजन करता है और दूसरों को भोजन से वंचित रखता है, वह वास्तव में पाप करता है. ऐसा स्वार्थी व्यक्ति न तो खुद को खुश रख पाता है और न ही अपने दोस्तों को.
In simple words: ऋग्वेद में बताया गया है कि जो व्यक्ति अकेले खाता है और दूसरों को नहीं खिलाता, वह पापी होता है. ऐसा करने वाला व्यक्ति न खुद खुश रहता है और न ही अपने दोस्तों को खुश रख पाता है.
🎯 Exam Tip: धार्मिक ग्रंथों के महत्वपूर्ण श्लोकों और उनके अर्थों को याद करना परीक्षाओं के लिए उपयोगी हो सकता है.
प्रश्न 3. किन्हीं दस राष्ट्रों के नाम लिखिए जिनका निर्माण सोवियत संघ के विखण्डन के फलस्वरूप हुआ।
Answer: सोवियत संघ के टूटने के बाद जो नए देश बने, वे ये हैं:
1. आर्मीनिया
2. अजरबैजान
3. बेलारूस
4. एस्टोनिया
5. जॉर्जिया
6. कजाखिस्तान
8. लातविया
In simple words: सोवियत संघ के टूटने से कई नए देश बने, जैसे आर्मीनिया, अजरबैजान, बेलारूस, एस्टोनिया, जॉर्जिया, कजाखिस्तान और लातविया.
🎯 Exam Tip: सोवियत संघ के विघटन के बाद बने नए देशों के नाम याद रखें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है.
प्रश्न 4. गुट निरपेक्ष आन्दोलन का दसवाँ, ग्यारहवाँ, तेरहवाँ, चौदहवाँ और सोलहवाँ शिखर सम्मेलन कब वे कहाँ हुआ ?
Answer: गुट निरपेक्ष आंदोलन के ये शिखर सम्मेलन इन स्थानों और वर्षों में हुए थे:
दसवाँ शिखर सम्मेलन: 1992 ई. में इण्डोनेशिया में
ग्यारहवाँ शिखर सम्मेलन: 1995 ई. में कोलम्बिया में
तेरहवाँ शिखर सम्मेलन: 2003 ई. में मलेशिया में
चौदहवाँ शिखर सम्मेलन: 2006 ई. में क्यूबा में
सोलहवाँ शिखर सम्मेलन: 2012 ई. में ईरान में
In simple words: गुट निरपेक्ष आंदोलन के कुछ बड़े सम्मेलन इस प्रकार थे: 1992 में इंडोनेशिया, 1995 में कोलंबिया, 2003 में मलेशिया, 2006 में क्यूबा और 2012 में ईरान में.
🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों के महत्वपूर्ण सम्मेलनों की तिथियां और स्थान याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है.
प्रश्न 5. भारत एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र है फिर भी सोवियत रूस के विखण्डन तक इसका झुकाव सोवियत संघ की तरफ रहा, बताइए क्यों ?
Answer: भारत गुटनिरपेक्ष देश होने के बावजूद सोवियत संघ के विघटन तक उसका साथ देता रहा, इसके कई कारण थे:
1. 1971 में जब पाकिस्तान भारत को युद्ध की धमकी दे रहा था और चीन भी पाकिस्तान के साथ खड़ा होने को तैयार था, और अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष में कुछ नहीं किया, तब भारत का झुकाव सोवियत संघ की ओर हुआ. इससे सोवियत संघ के साथ दोस्ती और सहयोग ज़रूरी हो गया.
2. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू शुरुआत से ही साम्यवाद की ओर झुके हुए थे.
3. अमेरिका ने कश्मीर के मामले में हमेशा पाकिस्तान का समर्थन किया और बड़े पैमाने पर उसे सैनिक मदद दी, यह भी भारत के सोवियत संघ की ओर झुकने का एक कारण था.
In simple words: भारत गुटनिरपेक्ष था, पर सोवियत संघ की ओर झुका रहा क्योंकि 1971 के युद्ध में सोवियत संघ ने मदद की, नेहरू जी साम्यवाद के प्रति झुके थे, और अमेरिका कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता था.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति के ऐतिहासिक झुकावों और उनके कारणों को समझने के लिए प्रमुख घटनाओं और नेताओं की भूमिका को ध्यान में रखें.
प्रश्न 6. पूँजीवाद वे साम्यवाद में मूलभूत अन्तर क्या है ? तर्क सहित बताइए।
Answer: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था और साम्यवाद में मुख्य अंतर यह है:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था: इस व्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर चीजें बनाई जाती हैं, और उत्पादन के साधनों पर लोगों का अपना मालिकाना हक होता है. इसमें लोग अपने फायदे के लिए मुकाबला करते हुए साधनों का इस्तेमाल करते हैं.
साम्यवाद: दूसरी ओर, साम्यवाद एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था है जिसमें उत्पादन और चीजों को बांटने के साधनों पर समाज (सरकार के माध्यम से) का नियंत्रण होता है. इसका लक्ष्य सबको बराबर चीजें देना होता है.
In simple words: पूँजीवाद में लोग अपना फायदा देखते हैं और चीजों पर उनका अपना हक होता है, जबकि साम्यवाद में सरकार या समाज चीजों पर नियंत्रण रखता है ताकि सबको बराबर मिल सके.
🎯 Exam Tip: पूँजीवाद और साम्यवाद की परिभाषाओं और उनके मुख्य सिद्धांतों को उदाहरणों के साथ याद करें.
प्रश्न 8. एजेण्डा 21 के बारे में आप क्या जानते हैं ? सन्दर्भ सहित बताइए।
Answer: एजेण्डा 21 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो जून 1992 में ब्राजील के रियो दी जेनेरियो में हुए 'पर्यावरण व विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (जिसे पृथ्वी सम्मेलन भी कहते हैं) में तैयार किया गया था. इस सम्मेलन में 150 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था.
एजेण्डा 21, आठ सौ पन्नों का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है. इसमें उन सभी बातों को गहराई से बताया गया है जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है और जिन पर दुनिया के देशों को ध्यान देना चाहिए. इस दस्तावेज़ में विकासशील देशों से जैव विविधता (पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं की विविधता) को बचाने की उम्मीद भी की गई है.
In simple words: एजेण्डा 21 एक दस्तावेज़ है जो 1992 के पृथ्वी सम्मेलन में बना था. इसमें बताया गया है कि पर्यावरण को कैसे नुकसान हो रहा है और सभी देशों को इसे बचाने के लिए क्या करना चाहिए.
🎯 Exam Tip: पृथ्वी सम्मेलन, एजेण्डा 21 और जैव विविधता जैसे प्रमुख पर्यावरणीय अवधारणाओं को उनके महत्व और उद्देश्यों के साथ समझें.
प्रश्न 9. देशों के वैदेशिक सम्बन्धों के सन्दर्भ में मोदी प्रयोग का मूल तत्व क्या है?
Answer: देशों के बाहरी संबंधों के मामले में 'मोदी प्रयोग' का मुख्य आधार 'विकास' है. मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने साफ किया कि दुनिया के देशों के बीच भले ही किसी मुद्दे पर असहमति हो, लेकिन विकास के मुद्दे पर वे निश्चित रूप से सहमत होंगे. इसलिए, सभी देशों को विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए.
In simple words: मोदी प्रयोग का मतलब है कि देशों के आपसी संबंधों में 'विकास' सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि सभी देश विकास के लिए एक साथ आएं, भले ही उनके दूसरे मुद्दों पर मतभेद हों.
🎯 Exam Tip: भारत की वर्तमान विदेश नीति के मुख्य सिद्धांतों और 'विकास' जैसे केंद्रीय तत्वों को याद रखें.
प्रश्न 10. आतंकवाद के आधुनिक व संस्थागत रूप से आप क्या समझते हैं?
Answer: आतंकवाद का आधुनिक रूप-आज की दुनिया में आतंकवादी कुछ खास लोगों के बजाय बेगुनाह बच्चों और महिलाओं जैसे आम लोगों को अपना निशाना बनाते हैं. यह आतंकवाद का सबसे क्रूर और घिनौना रूप है. इसके बड़े उदाहरण हैं: 1999 में काठमांडू से भारतीय विमान का अपहरण, 2001 में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला, और 28 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए बम विस्फोट. संस्थागत आतंकवाद वह है जब किसी देश की सरकार या कोई संगठन आतंकवाद को बढ़ावा देता है, उसे फंडिंग करता है, या आतंकवादियों को ट्रेनिंग देकर अपने राजनीतिक लक्ष्यों को पाने के लिए इस्तेमाल करता है. यह आतंकवाद का एक ढाँचागत स्वरूप होता है, जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा और भय फैलाने का काम योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है.
In simple words: आधुनिक आतंकवाद में बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया जाता है, जैसे मुंबई और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले. संस्थागत आतंकवाद तब होता है जब कोई सरकार या बड़ा संगठन योजना बनाकर आतंकवादियों का समर्थन करता है.
🎯 Exam Tip: आतंकवाद के विभिन्न रूपों और उनके प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरणों को याद रखें.
प्रश्न 1. विभिन्न चरणों का वर्णन करते हुए शीत युद्ध की प्रमुख घटनाएँ बताइए।
Answer: शीत युद्ध की स्थिति दुनिया के मंच पर दो विरोधी विचारों के कारण उभरी: एक पूँजीवादी विचार जिसका नेतृत्व अमेरिका कर रहा था और दूसरा साम्यवादी विचार जिसका नेतृत्व रूस कर रहा था. इन दोनों महाशक्तियों के बीच यह शीत युद्ध 1917 ई. से शुरू होकर सोवियत संघ के टूटने (1990 ई.) तक चला. इसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
1. प्रथम चरण (1917 से 1945 ई.):
• 1917 ई. में हुई बोल्शेविक क्रांति से रूस में साम्यवादी शासन शुरू हुआ.
• सोवियत सेनाओं द्वारा पूर्वी यूरोपीय देशों पर अपना कब्ज़ा जमाने, जर्मनी द्वारा इटली में आत्मसमर्पण की शर्तों पर रूस का अलग विचार रखने, और जापान पर बमबारी का रूस द्वारा विरोध करने से शीत युद्ध की शुरुआत हुई.
2. द्वितीय चरण (1946 से 1953 ई.):
• 1948 ई. में सोवियत रूस ने पश्चिमी जर्मनी को पूर्वी जर्मनी से अलग कर दिया.
• 1949 ई. में अमेरिका के नेतृत्व में नाटो (NATO) संगठन बना, ताकि सोवियत संघ नाटो के किसी भी सदस्य पर हमला न करे.
• 1949 ई. में साम्यवादी चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ में सदस्यता देने को लेकर अमेरिका और रूस में विवाद बढ़ा.
• अमेरिका द्वारा दक्षिण कोरिया का समर्थन करने से यह तनाव और बढ़ गया.
3. तृतीय चरण (1953 से 1958 ई.):
• 1953 में रूस ने परमाणु परीक्षण किया.
• अमेरिका के आइजनहावर ने रूस के फैलाव को रोकने के लिए सीटो (SEATO) संगठन बनाया.
• जवाब में सोवियत संघ और उसके पूर्वी यूरोपीय साथी देशों ने 1955 ई. में वारसा पैक्ट पर हस्ताक्षर किए.
• अमेरिकी सीनेट ने साम्यवादी रूस के हमले के खिलाफ राष्ट्रपति को खास अधिकार दिए.
• रूस ने 1956 में मिस्र पर हुए हमले की आलोचना की, जिससे दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ा.
4. चतुर्थ चरण (1959 से 1962 ई.):
• 1 मई 1960 को अमेरिका का एक जासूसी विमान सोवियत संघ की सीमा में जासूसी करते हुए पकड़ा गया.
• 1963 ई. में दोनों महाशक्तियों ने हॉटलाइन समझौता किया, जिसमें तय हुआ कि युद्ध या संकट में वे फोन और रेडियो से संपर्क में रहेंगे.
• 1968 ई. में परमाणु अप्रसार संधि पर अमेरिका और रूस ने हस्ताक्षर किए.
• 1971 ई. में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के बीच जर्मनी की समस्या पर समझौता हुआ.
• 1971 ई. के भारत-पाक युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का और सोवियत संघ ने भारत का साथ दिया.
• 1973, 1974, और 1977 ई. में तीन यूरोपीय सुरक्षा सम्मेलन हुए, जिनमें आपसी सहयोग और शांति बढ़ाने पर जोर दिया गया.
6. षष्ठम व अंतिम चरण (1980 से 1990 ई.):
• 1983 ई. में सोवियत संघ ने दक्षिण कोरिया के विमान को गिराया, तो अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.
• 1986 ई. में सोवियत संघ ने प्रतिबंधों को तोड़कर परमाणु परीक्षण किया. अमेरिका ने रूस को चेतावनी दी.
• 1989 ई. में जर्मनी का फिर से एकीकरण हो गया.
इस तरह लगातार चले शीत युद्ध के कारण सोवियत संघ आर्थिक रूप से कमजोर हो गया और अमेरिका से मुकाबला करने की ताकत खो बैठा. इसलिए, राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव के समय 1990 में सोवियत संघ के टूटने के साथ ही शीत युद्ध खत्म हो गया.
In simple words: शीत युद्ध अमेरिका और सोवियत रूस के बीच विचारों का टकराव था, जो 1917 से 1990 तक चला. इसमें कई चरण थे, जैसे परमाणु परीक्षण, सैन्य गठबंधनों का बनना और विभिन्न देशों के बीच समर्थन. आखिर में सोवियत संघ के कमज़ोर पड़ने के साथ यह युद्ध खत्म हो गया.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध के सभी चरणों और प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से याद रखना महत्वपूर्ण है. नेताओं, संधियों और वर्षों को सटीक रूप से याद करें.
प्रश्न 2. वे कौन सी परिस्थितियाँ थीं, जिनके कारण गुट निरपेक्ष आन्दोलन प्रारम्भ हुआ?
Answer: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस दो महाशक्तियों के रूप में उभरे. उस समय नए स्वतंत्र हुए देश अपनी पहचान बचाने के लिए किसी भी बड़ी शक्ति के साथ नहीं जुड़ना चाहते थे. इसलिए, जो देश किसी भी गुट में शामिल नहीं होना चाहते थे, वे गुटनिरपेक्ष देश कहलाए. गुटनिरपेक्ष आंदोलन 1961 ई. में शुरू हुआ और आज भी काम कर रहा है. गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शुरू होने के मुख्य कारण ये थे:
1. शीत युद्ध का प्रारंभ: दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस के बीच चली दुश्मनी ने तीसरे विश्व युद्ध का डर पैदा कर दिया. इस कारण आंदोलन से जुड़े देशों को उस समय ज़्यादा सक्रिय होना पड़ा.
2. महाशक्तियों का डर: दोनों महाशक्तियों ने भले ही सीधे हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उनकी कूटनीतिक चालों और कागजी बमों ने नए स्वतंत्र देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर वे किसी एक महाशक्ति के प्रभाव में आ गए तो दूसरी महाशक्ति उन्हें खत्म कर देगी.
3. संप्रभुता की रक्षा: किसी भी देश की संप्रभुता तभी साबित होती है जब वह अपने फैसले खुद ले सके. अगर कोई देश किसी खास गुट में शामिल होता है, तो उसकी संप्रभुता कम हो जाती है. इसलिए, संप्रभुता बचाने के लिए गुटनिरपेक्ष रहना नए स्वतंत्र देशों के लिए सबसे अच्छा रास्ता था.
4. राजनीतिक व सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा: हर देश की अपनी खास सामाजिक और राजनीतिक परंपराएँ होती हैं. देश उन परंपराओं को बनाए रखने की कोशिश करता है ताकि उसकी पहचान बनी रहे. यह तभी मुमकिन है जब वह देश गुटनिरपेक्ष रहे, यानी किसी महाशक्ति के प्रभाव में न रहे.
5. संसाधनों की रक्षा: अगर किसी देश को किसी महाशक्ति से सैनिक या कोई और मदद मिलती है, तो वह गुटनिरपेक्ष देश इस बात को सहन नहीं करना चाहता था कि मदद देने वाला देश उसके विरोधी गुट का सदस्य है.
7. सुविधापूर्ण स्थिति: गुट से निरपेक्ष रहने वाले देशों के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की विश्व राजनीति में गुटनिरपेक्षता बहुत सुविधाजनक हो गई थी कि वे अलग संगठन बनाकर अपना विकास करें. इस प्रकार इन्हीं कारणों से गुट निरपेक्ष आन्दोलन का जन्म हुआ.
In simple words: गुटनिरपेक्ष आंदोलन इसलिए शुरू हुआ क्योंकि नए स्वतंत्र देश शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और रूस में से किसी गुट में शामिल नहीं होना चाहते थे. वे अपनी संप्रभुता और परंपराएं बचाना चाहते थे और तीसरे विश्व युद्ध के डर से बचना चाहते थे.
🎯 Exam Tip: गुटनिरपेक्ष आंदोलन के उदय के कारणों को गहराई से समझें, विशेष रूप से शीत युद्ध के संदर्भ में और नव-स्वतंत्र राष्ट्रों के लिए इसकी प्रासंगिकता पर जोर दें.
प्रश्न 3. इतिहास के अन्त का सिद्धान्त किसने दिया ? तर्क सहित बताइए कि यह सिद्धान्त अप्रासंगिक सिद्ध क्यों हुआ?
Answer: इतिहास के अंत का सिद्धांत अमेरिका के राजनेता और अर्थशास्त्री फ्रांसिस फुकुयामा ने दिया था.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद शीत युद्ध का अंत सोवियत संघ के टूटने के रूप में सामने आया. सोवियत संघ के टूटने के बाद दुनिया एकध्रुवीय हो गई, जिसमें अमेरिका का दबदबा हो गया. सोवियत संघ के पतन के बाद समाजशास्त्रियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि दुनिया ने अब पश्चिम के उदारवादी लोकतंत्र को पूरी तरह से अपना लिया है. फ्रांसिस फुकुयामा ने तो बहुत विश्वास के साथ यह तक कह दिया कि अब 'इतिहास का अंत हो गया है'. लेकिन यह सिद्धांत अब प्रासंगिक नहीं रहा, क्योंकि:
1. इतिहास न तो कभी खत्म होता है और न ही उसमें से ऐसी अच्छी चीजें मिटती हैं जिनसे इंसानियत का भला हो.
2. दुनिया ने 'इतिहास के अंत' की बात को कभी नहीं माना.
3. बहुत से विचारकों का कहना है कि दुनिया में जो सबसे अच्छा है, वह अभी आना बाकी है.
4. दार्शनिकों ने फुकुयामा की बात पर 'इतिहास का अंत' घोषित नहीं किया, बल्कि उनकी घोषणा का ही अंत कर दिया.
5. फुकुयामा ने इस बात को अनदेखा कर दिया कि सोवियत संघ का पतन हुआ है, साम्यवाद का नहीं.
6. साम्यवादी विचार आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है.
7. पश्चिमी देश जिस लोकतंत्र की बात करते हैं, वह लगातार परमाणु हथियारों के ढेर पर पनप रहा है. ऐसे लोकतंत्र की रक्षा नहीं हो सकती है.
In simple words: इतिहास के अंत का सिद्धांत फ्रांसिस फुकुयामा ने दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उदारवादी लोकतंत्र की जीत हो गई है. लेकिन यह सिद्धांत अब गलत साबित हो गया है क्योंकि इतिहास हमेशा बदलता रहता है, साम्यवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, और पश्चिमी लोकतंत्र भी परमाणु हथियारों पर टिका है.
🎯 Exam Tip: 'इतिहास के अंत' के सिद्धांत को स्पष्ट करें और उसके खंडन के प्रमुख तर्कों को याद रखें, खासकर शीत युद्ध के बाद के संदर्भ में.
प्रश्न 4. रियो दी जेनेरियो सम्मेलन 1992 में पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित किन विषयों पर विचार-विमर्श हुआ?
Answer: जून 1992 में ब्राजील के रियो दी जेनेरियो में 'पर्यावरण व विकास' पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हुआ, जिसे पृथ्वी सम्मेलन भी कहते हैं. इसमें 150 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस सम्मेलन में पर्यावरण बचाने से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से बातचीत हुई:
1. जलवायु परिवर्तन संबंधी मुद्दा: इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर एक संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों ने माना कि वे 2000 ई. तक खतरनाक गैसों का उत्सर्जन 1990 के स्तर पर लाने की कोशिश करेंगे. इस लक्ष्य को पाने के लिए विश्व बैंक की ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी से वित्तीय सहायता ली जाएगी.
2. जैव विविधता की रक्षा: इस सम्मेलन में शामिल देशों से यह भी उम्मीद की गई कि वे विश्व बैंक की ग्लोबल एनवायरनमेंट फैसिलिटी से वित्तीय सहायता लेकर जैव विविधता (जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों की विविधता) को बचाएं.
3. एजेण्डा 21: इस सम्मेलन में आठ सौ पन्नों का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ 'एजेण्डा 21' तैयार किया गया. इसमें उन सभी बातों को गहराई से बताया गया है जिनसे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है और जिन पर दुनिया के देशों को ध्यान देना चाहिए.
4. एजेण्डा 21 लागू करने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक अनुदान: पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा के दौरान विकासशील देशों ने सबूतों से साबित किया कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिए विकसित देश ज़्यादा जिम्मेदार हैं. इसलिए, विकसित देशों को एजेण्डा 21 लागू करने के लिए विकासशील देशों को आर्थिक मदद देना तय हुआ.
5. पर्यावरण प्रदूषण रोकने की पहल न करने पर विकसित देशों की आलोचना: सम्मेलन में विकसित देशों के प्रतिनिधियों ने एक तरफ बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर गहरी चिंता जताई, लेकिन पर्यावरण प्रदूषण रोकने से जुड़ी संधियों पर हस्ताक्षर करते समय कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. इस पर विकासशील देशों के समूह 77 ने विकसित देशों की आलोचना करते हुए कहा कि वे पर्यावरण प्रदूषण रोकने की अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं.
In simple words: रियो सम्मेलन 1992 में पर्यावरण बचाने के लिए कई मुद्दों पर बात हुई, जैसे जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की रक्षा, एजेण्डा 21 को लागू करना, और विकसित देशों को पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार ठहराना.
🎯 Exam Tip: रियो सम्मेलन के प्रमुख विषयों को विस्तृत रूप से याद रखें और विकसित तथा विकासशील देशों की भूमिका पर ध्यान दें.
प्रश्न 5. आतंकवाद को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से मुख्य रूप से कौन-कौन से कन्वेन्शन्स प्रस्तुत किए गए? विस्तार से
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ वह सबसे बड़ी संस्था है जहाँ आतंकवाद से पीड़ित देश मदद के लिए आवेदन कर सकते हैं. आतंकवाद के खिलाफ इस संस्था ने अंतर्राष्ट्रीय कानून इस तरह बनाए हैं कि कोई भी देश किसी भी रूप में आतंकवाद को बढ़ावा न दे. लेकिन इस कानून को किसी भी देश पर तुरंत लागू नहीं किया जा सकता. दुनिया को आतंकवाद से छुटकारा दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने समय-समय पर अपनी विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और समझौतों की शर्तें तैयार करवाई हैं. इस तरह के कुछ दस्तावेज़ और समझौते ये हैं:
1. विमानों से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए 1963 ई. में टोक्यो में एक कन्वेंशन प्रस्तुत किया गया.
2. 1970 ई. में हेग में प्रस्तुत कन्वेंशन में विमानों पर गैर-कानूनी कब्जे को रोकने के प्रावधान थे.
3. 1973 ई. के न्यूयॉर्क कन्वेंशन में अपराधियों को दंडित करने का प्रावधान था.
4. संयुक्त राष्ट्र की महासभा में 1979 ई. में लोगों को बंधक बनाने के खिलाफ एक कन्वेंशन प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह प्रावधान था कि शामिल देश अपराधियों को संबंधित देश को सौंपेंगे.
5. 1988 ई. में रोम में समुद्री नौकायन की सुरक्षा से संबंधित एक कन्वेंशन प्रस्तुत किया गया.
6. 1993 ई. में महासभा के 48वें अधिवेशन में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि आतंकवाद मानवाधिकारों की प्राप्ति में बाधा है.
7. 1994 ई. में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते आतंकवाद को खत्म करने के उपायों पर महासभा द्वारा एक घोषणा की गई.
8. संयुक्त राष्ट्र संघ के कर्मचारियों पर हमलों के खिलाफ एक कन्वेंशन संघ की महासभा में 1994 ई. में रखा गया.
9. आतंकवाद को पैसे से मदद करने वाले अपराधियों को संबंधित राज्यों को सौंपने का एक कन्वेंशन 1999 ई. में संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्तुत किया गया.
10. सितंबर 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के विरोध में संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद ने एक निंदा प्रस्ताव पारित किया.
इस तरह संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को जड़ से खत्म करने की कोशिश की है. लेकिन इसकी पूरी तरह समाप्ति के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा.
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ ने आतंकवाद रोकने के लिए कई समझौते और कन्वेंशन बनाए, जैसे विमानों, समुद्री नौकायन, बंधक बनाने और आतंकवादियों को फंडिंग रोकने के लिए. इसका लक्ष्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है, जिसके लिए दुनिया को एक होना होगा.
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के आतंकवाद विरोधी प्रयासों, विशेषकर प्रमुख कन्वेंशनों और उनके वर्षों को याद रखें.
प्रश्न 6. सार्क के उद्देश्यों और सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
Answer: सार्क (SAARC) की स्थापना 1985 ई. में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई थी. इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे सात देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने आपसी सहयोग और विकास के लिए 'साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन' नामक संघ बनाया था. सार्क का मुख्यालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में है. अफगानिस्तान इस संगठन का आठवाँ सदस्य देश है. सार्क के नवंबर 2014 तक अट्ठारह शिखर सम्मेलन हो चुके हैं और उन्नीसवां सम्मेलन 2016 ई. में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुआ.
सार्क संगठन के उद्देश्य:
1. दक्षिण एशिया के लोगों का जीवन बेहतर बनाना और उनका कल्याण करना.
2. दक्षिण एशियाई देशों में आपसी भरोसे और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ाना.
3. दक्षिण एशिया क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को तेज़ी से करना.
1. सहयोग, समानता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के आधार पर आपसी हितों का सम्मान करना और एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दखल न देना.
2. सहयोग का यह तरीका सिर्फ दोतरफा या बहुपक्षीय सहयोग की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनका पूरक भी होगा.
3. यह सहयोग किसी भी स्थिति में दोतरफा या बहुपक्षीय जिम्मेदारियों का विरोध नहीं करेगा.
In simple words: सार्क 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के आपसी सहयोग और विकास के लिए बना था. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों का कल्याण, आत्मनिर्भरता बढ़ाना, सामाजिक-आर्थिक विकास करना और देशों की संप्रभुता का सम्मान करना है.
🎯 Exam Tip: सार्क के स्थापना वर्ष, सदस्य देशों, मुख्यालय और प्रमुख उद्देश्यों को विस्तार से याद रखें.
प्रश्न 7. क्या आप मानते हैं कि भारत विश्वशान्ति का अग्रदूत है ? कारण सहित उत्तर दीजिए।
Answer: हाँ, हम मानते हैं कि भारत विश्वशांति का अग्रदूत है. भारत की सभ्यता और संस्कृति बहुत पुरानी है और इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराएँ बहुत गौरवशाली रही हैं. प्राचीन काल से ही भारत के संबंध दूसरे देशों के साथ शांति और दोस्ती पर आधारित रहे हैं. हमारे पुराने ग्रंथों, वेदों और उपनिषदों में भी दुनिया के कल्याण और शांति की कामना की गई है, जिसकी सुंदर अभिव्यक्ति अथर्ववेद के इस श्लोक में मिलती है:
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा काश्चिद दुःख भाग भवेत्।।
अर्थात, सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी का कल्याण हो और किसी को कोई दुःख न हो.
विश्व शांति का मतलब पूरी पृथ्वी पर अहिंसा स्थापित करना है. इसमें देश अपनी मर्जी से या अपनी सरकार की व्यवस्था के ज़रिए एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, ताकि देशों के बीच मतभेद न हों और भविष्य के युद्धों को रोका जा सके. भारत ने विश्व शांति की दिशा में इस तरह योगदान दिया है:
1. भारत ने शुरू से ही अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाले संगठन संयुक्त राष्ट्र संघ को पूरा समर्थन दिया और संयुक्त राष्ट्र की घोषणा पर हस्ताक्षर करके उसका संस्थापक सदस्य बना.
2. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब अमेरिका और रूस महाशक्ति बनकर उभरे, तो स्वतंत्र भारत ने किसी भी गुट का साथ न देकर गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई.
3. पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विश्व में शांति स्थापित करने के लिए पाँच सूत्रीय मंत्र दिए थे, जिन्हें 'पंचशील का सिद्धांत' भी कहते हैं. ये इस प्रकार थे:
• एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करना.
• एक-दूसरे के खिलाफ हमलावर कार्रवाई न करना.
• एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दखल न देना.
• समानता और आपसी फायदे की नीति का पालन करना.
• शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखना.
In simple words: हाँ, भारत विश्व शांति का अग्रदूत है क्योंकि इसकी पुरानी परंपराएं शांति और दोस्ती पर टिकी हैं. इसने संयुक्त राष्ट्र का समर्थन किया, गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई, और पंचशील जैसे सिद्धांत दिए, जो सभी देशों को शांति से रहने का रास्ता दिखाते हैं.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों, जैसे गुटनिरपेक्षता और पंचशील, को उनके ऐतिहासिक संदर्भ और विश्व शांति में योगदान के साथ याद रखें. संस्कृत श्लोक और उसका अर्थ भी महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 1. शीत युद्ध शब्द का प्रयोग सबसे पहले किस लेखक ने किया?
(क) वाटर लिपमैन ने
(ख) लुई हॉले ने
(ग) फिशर ने
(घ) जार्ज ऑरवैल ने
Answer: (घ) जार्ज ऑरवैल ने
In simple words: सबसे पहले ब्रिटिश लेखक जार्ज ऑरवैल ने 'शीत युद्ध' शब्द का इस्तेमाल किया था।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी अवधारणा या शब्द के जनक के बारे में प्रश्न आए, तो व्यक्ति का नाम और उसकी राष्ट्रीयता दोनों याद रखें.
प्रश्न 2. रूस में बोल्शेविक क्रांति किस वर्ष हुई?
(क) 1912 ई.
(ख) 1917 ई.
(ग) 1920 ई.
(घ) 1914 ई.
Answer: (ख) 1917 ई.
In simple words: रूस में बोल्शेविक क्रांति साल 1917 में हुई थी, जिससे वहाँ बड़ा बदलाव आया.
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं के वर्ष हमेशा सटीक याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं.
प्रश्न 3. 1949 ई. में अमेरिका के नेतृत्व में कौन सा सैन्य बल निर्मित हुआ?
(क) ब्रिक्स
(ख) नाटो
(ग) सीटो
(घ) सार्क
Answer: (ख) नाटो
In simple words: साल 1949 में अमेरिका ने 'नाटो' नाम का एक सैनिक संगठन बनाया था.
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और उनके गठन के वर्ष तथा संस्थापक देशों को याद रखें.
प्रश्न 4. 1968 ई. में परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देश थे -
(क) अमेरिका-रूस
(ख) ब्रिटेन-फ्रांस
(ग) भारत-पाक
(घ) इटली-जर्मनी
Answer: (क) अमेरिका-रूस
In simple words: परमाणु अप्रसार संधि पर सबसे पहले अमेरिका और रूस ने साल 1968 में दस्तखत किए थे.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों के मुख्य हस्ताक्षरकर्ता देशों को हमेशा ध्यान में रखें.
प्रश्न 6. 'द स्कोप ऑफ न्यूट्रैलिज्म' के लेखक हैं -
(क) श्वार्जानबर्गर
(ख) लिपमैन
(ग) लुई हाले
(घ) फिशर
Answer: (क) श्वार्जानबर्गर
In simple words: 'द स्कोप ऑफ न्यूट्रैलिज्म' किताब श्वार्जानबर्गर ने लिखी थी.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं, इन्हें याद रखना चाहिए.
प्रश्न 7. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का कौन सा शिखर सम्मेलन भारत में हुआ है?
(क) तेरहवाँ
(ख) सातवाँ
(ग) दूसरा
(घ) ग्यारहवाँ
Answer: (ख) सातवाँ
In simple words: गुटनिरपेक्ष आंदोलन का सातवाँ बड़ा सम्मेलन भारत में आयोजित किया गया था.
🎯 Exam Tip: प्रमुख आंदोलनों और संगठनों के उन सम्मेलनों को विशेष रूप से याद रखें जो आपके देश में हुए हों.
प्रश्न 8. 1997 ई. में विश्व पर्यावरण व ग्रीन हाउस सम्मेलन किस स्थान पर आयोजित हुआ?
(क) रूस में
(ख) आस्ट्रेलिया में
(ग) क्यूबा में
(घ) जापान में
Answer: (घ) जापान में
In simple words: साल 1997 में पर्यावरण और ग्रीन हाउस गैसों पर बड़ी बैठक जापान में हुई थी.
🎯 Exam Tip: पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मेलनों और उनके स्थानों व वर्षों को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है.
प्रश्न 10. ब्रिक्स समूह के आठवें सम्मेलन का आयोजन स्थल कहाँ है?
(क) जापान
(ख) भारत
(ग) इटली
(घ) श्रीलंका
Answer: (ख) भारत
In simple words: ब्रिक्स देशों का आठवाँ सम्मेलन भारत में आयोजित किया गया था.
🎯 Exam Tip: अंतरराष्ट्रीय समूहों के सम्मेलनों की मेजबानी करने वाले देशों और उनके वर्षों को याद रखें.
सुमेलन संबंधी प्रश्न
प्रश्न 1. मिलान कीजिए –
Answer:
उत्तरमालाः
1. (घ)
2. (ग)
3. (ख)
4. (क)
5. (च)
6. (ड़)
In simple words: ऊपर दिए गए सम्मेलन नंबरों को उनके सही मिलान वाले विकल्पों से जोड़ा गया है.
🎯 Exam Tip: मिलान वाले प्रश्नों में, पहले वे विकल्प चुनें जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर बाकी को अनुमान से पूरा करें.
प्रश्न 2. मिलान कीजिए –
| प्रमुख सम्मेलन | स्थान |
|---|---|
| 1. प्रथम पृथ्वी सम्मेलन | (ग) रियो दि जेनेरियो (ब्राजील) |
| 2. विश्व पर्यावरण व ग्रीन हाउस सम्मेलन | (क) जापान |
| 3. संयुक्त राष्ट्र जलवायु समझौता सम्मेलन | (ख) कनाडा |
| 4. जलवायु परिवर्तन सम्मेलन | (ङ) पेरिस |
| 5. प्रथम आसियान शिखर सम्मेलन | (घ) इण्डोनेशिया |
| 6. प्रथम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन | (ज) रूस |
| 7. प्रथम सार्क शिखर सम्मेलन | (च) बांग्लादेश |
| 8. प्रथम गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन | (छ) यूगोस्लाविया |
1. प्रथम पृथ्वी सम्मेलन - (ग) रियो दि जेनेरियो (ब्राजील)
2. विश्व पर्यावरण व ग्रीन हाउस सम्मेलन - (क) जापान
3. संयुक्त राष्ट्र जलवायु समझौता सम्मेलन - (ख) कनाडा
4. जलवायु परिवर्तन सम्मेलन - (ङ) पेरिस
5. प्रथम आसियान शिखर सम्मेलन - (घ) इण्डोनेशिया
6. प्रथम ब्रिक्स शिखर सम्मेलन - (ज) रूस
7. प्रथम सार्क शिखर सम्मेलन - (च) बांग्लादेश
8. प्रथम गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन - (छ) यूगोस्लाविया
In simple words: यह तालिका प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को उनके आयोजन स्थलों के साथ सही ढंग से जोड़ती है.
🎯 Exam Tip: इस तरह के मिलान वाले प्रश्नों में, एक सम्मेलन और उसका स्थान याद करने से आप कई अन्य विकल्पों को आसानी से हल कर सकते हैं.
प्रश्न 1. शीत युद्ध शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने और क्यों किया?
Answer: 'शीत युद्ध' शब्द का प्रयोग सबसे पहले ब्रिटिश लेखक जार्ज ऑरवैल ने किया था. उन्होंने इसका इस्तेमाल देशों के बीच कड़वाहट भरे संबंधों को बताने के लिए किया था. यह लड़ाई सीधी नहीं, बल्कि विचारों और दबाव की थी.
In simple words: जार्ज ऑरवैल ने 'शीत युद्ध' शब्द का इस्तेमाल किया. उन्होंने इसका उपयोग देशों के बीच तनावपूर्ण और बिना सीधी लड़ाई वाले रिश्तों को समझाने के लिए किया.
🎯 Exam Tip: किसी भी महत्वपूर्ण अवधारणा के जनक और उसके पीछे के तर्क को समझें, यह आपको विषय की गहराई को समझने में मदद करेगा.
प्रश्न 2. शीत युद्ध की कोई एक परिभाषा लिखिए।
Answer: लुई हॉले ने शीत युद्ध को इस तरह परिभाषित किया है: "शीत युद्ध परमाणु युग की एक तनावपूर्ण स्थिति है, जो हथियारों की सीधी लड़ाई से अलग है, लेकिन उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है." यह एक ऐसा समय था जब देश सीधे नहीं लड़ रहे थे, पर हमेशा युद्ध का डर बना रहता था.
In simple words: लुई हॉले के अनुसार, शीत युद्ध परमाणु युग की एक बहुत तनाव भरी स्थिति थी, जो सीधी लड़ाई से अलग पर उससे ज़्यादा डरावनी थी.
🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को याद करते समय, प्रमुख शब्दों और विचारों पर ध्यान दें, साथ ही परिभाषा देने वाले व्यक्ति का नाम भी याद रखें.
प्रश्न 3. 1917 ई. में रूस में कौन सी ऐतिहासिक घटना घटित हुई?
Answer: साल 1917 में रूस में बोल्शेविक क्रांति हुई थी. इस क्रांति को शीत युद्ध की शुरुआत का एक बड़ा कारण भी माना जाता है, क्योंकि इसने रूस में साम्यवादी शासन की नींव रखी.
In simple words: साल 1917 में रूस में बोल्शेविक क्रांति हुई. इसे शीत युद्ध की शुरुआत का एक कारण भी माना जाता है.
🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक घटनाओं को उनके समय-काल और उनके प्रभावों के साथ याद रखें, खासकर वे घटनाएँ जो बड़े वैश्विक परिवर्तनों का कारण बनीं.
प्रश्न 4. 1949 ई. में अमेरिका के नेतृत्व में कौन सा सैन्य बल स्थापना हुई?
Answer: साल 1949 में अमेरिका के नेतृत्व में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना हुई थी. यह एक सैन्य संगठन था जिसका उद्देश्य साम्यवाद के फैलाव को रोकना था.
In simple words: साल 1949 में अमेरिका ने 'नाटो' नाम का एक सैनिक संगठन बनाया.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध के दौरान बने प्रमुख सैन्य गठबंधनों और उनके उद्देश्यों को समझना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 5. स्टालिन के पश्चात् रूस का नेतृत्व किस नेता के हाथ में आया?
Answer: साल 1953 में स्टालिन की मौत के बाद रूस का नेतृत्व निकिता ख्रुश्चेव (खुश्चेव) के हाथों में आया. उन्होंने स्टालिन की नीतियों में कुछ बदलाव किए थे.
In simple words: स्टालिन के बाद निकिता ख्रुश्चेव ने रूस की कमान संभाली थी.
🎯 Exam Tip: किसी भी देश के राजनीतिक इतिहास में नेताओं के उत्तराधिकार और उनके द्वारा अपनाई गई नीतियों को ध्यान में रखना चाहिए.
प्रश्न 6. दक्षिणी-पूर्वी एशिया संधि संगठन (सीटो) की स्थापना किसने और किस उद्देश्य से की?
Answer: दक्षिणी-पूर्वी एशिया संधि संगठन (सीटो) की स्थापना अमेरिका के नेता आइजनहावर ने साल 1954 में की थी. इसका मुख्य उद्देश्य एशिया में रूसी प्रभाव को फैलने से रोकना था. यह एक सुरक्षा समझौता था.
In simple words: अमेरिका के नेता आइजनहावर ने 1954 में 'सीटो' बनाया था. इसका लक्ष्य एशिया में रूस के प्रभाव को रोकना था.
🎯 Exam Tip: सैन्य संगठनों के गठन के पीछे की रणनीतिक सोच और उनके प्रभाव को समझना ज़रूरी है.
प्रश्न 7. हॉटलाइन समझौता क्या था?
Answer: हॉटलाइन समझौता साल 1963 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुआ था. इस समझौते में यह तय हुआ था कि युद्ध या किसी बड़े संकट के समय दोनों देश सीधे टेलीफोन या रेडियो से एक-दूसरे से बात कर सकेंगे. इसका मकसद गलतफहमी से होने वाले परमाणु युद्ध को रोकना था.
In simple words: हॉटलाइन समझौता 1963 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुआ. इसका उद्देश्य संकट में सीधी बात करके युद्ध टालना था.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध के दौरान तनाव कम करने वाले उपायों को याद रखना चाहिए, क्योंकि वे वैश्विक शांति के प्रयासों को दर्शाते हैं.
प्रश्न 8. 1968 की परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने वाले अग्रणी देश कौन थे?
Answer: साल 1968 की परमाणु अप्रसार संधि पर सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख देश सोवियत संघ रूस और अमेरिका थे. यह संधि परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकने के लिए बनाई गई थी.
In simple words: 1968 की परमाणु अप्रसार संधि पर सबसे पहले रूस और अमेरिका ने हस्ताक्षर किए थे.
🎯 Exam Tip: परमाणु अप्रसार संधियाँ और उनके हस्ताक्षरकर्ता देश अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए इन्हें याद रखना ज़रूरी है.
प्रश्न 9. सोवियत संघ का विघटन किस राष्ट्रपति के शासन काल में हुआ?
Answer: सोवियत संघ का विघटन राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव के शासन काल में हुआ था. उनकी 'ग्लासनोस्त' (खुलेपन) और 'पेरेस्त्रोइका' (पुनर्गठन) जैसी नीतियों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई.
In simple words: सोवियत संघ का अंत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव के समय हुआ.
🎯 Exam Tip: किसी भी बड़े ऐतिहासिक बदलाव में प्रमुख नेताओं की भूमिका को हमेशा ध्यान में रखें.
प्रश्न 10. शीत युद्ध का सर्वाधिक महत्वपूर्ण परिणाम क्या हुआ?
Answer: शीत युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम सोवियत संघ का विघटन था. इससे दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और अमेरिका एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा.
In simple words: शीत युद्ध का सबसे बड़ा नतीजा सोवियत संघ का टूट जाना था.
🎯 Exam Tip: किसी भी बड़ी घटना के दीर्घकालिक प्रभावों और सबसे महत्वपूर्ण परिणामों को समझना परीक्षा में अच्छे अंक लाने में सहायक होता है.
प्रश्न 11. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत ने किस विचारधारा को चुना?
Answer: स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत ने गुटनिरपेक्षता की विचारधारा को चुना. इसका मतलब था कि भारत ने अमेरिका या सोवियत संघ के किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होने का फैसला किया, बल्कि अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखी.
In simple words: आजाद होने के बाद भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई, जिसका मतलब था किसी भी बड़े गुट में शामिल न होना.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों और उनके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 12. रूस में जार के निरंकुश शासन का अंत किस क्रांति के फलस्वरूप हुआ?
Answer: रूस में जार के निरंकुश (तानाशाही) शासन का अंत बोल्शेविक क्रांति के कारण हुआ. इस क्रांति के बाद रूस में साम्यवादी सरकार बनी.
In simple words: रूस में जार का शासन बोल्शेविक क्रांति के कारण खत्म हो गया.
🎯 Exam Tip: प्रमुख क्रांतियों और उनके परिणामों को याद रखें, खासकर जो राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव लाए हों.
प्रश्न 13. गुटनिरपेक्षता के छः प्रत्यय कौन-कौन से हैं?
Answer: गुटनिरपेक्षता के छः मुख्य प्रत्यय (विचार) इस प्रकार हैं:
1. अलगाववाद (विश्व से अलग रहना नहीं, बल्कि गुटों से अलग रहना)
2. अप्रतिबद्धता (किसी भी गुट के प्रति प्रतिबद्ध न होना)
3. तटस्थता (युद्ध में किसी का पक्ष न लेना)
4. तटस्थीकरण (युद्धों को शांत करने में भूमिका निभाना)
5. स्वतंत्र विदेश नीति
6. आर्थिक स्वतंत्रता
In simple words: गुटनिरपेक्षता के मुख्य विचार हैं: गुटों से अलग रहना, किसी के प्रति प्रतिबद्ध न होना, युद्ध में तटस्थ रहना, शांति स्थापित करना, स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक स्वतंत्रता.
🎯 Exam Tip: किसी भी नीति या सिद्धांत के मूल तत्वों को समझना और उन्हें क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 15. भारत और सोवियत संघ के मध्य मैत्री व सहयोग संधि कब हुई?
Answer: भारत और सोवियत संघ के बीच मैत्री और सहयोग संधि साल 1971 में हुई थी. यह संधि दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था.
In simple words: भारत और सोवियत संघ के बीच दोस्ती और सहयोग का समझौता साल 1971 में हुआ.
🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधियों और उनके वर्षों को याद रखें, खासकर जो आपके देश से संबंधित हों.
प्रश्न 16. आई. एस (इस्लामिक स्टेट) आतंकी संगठन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Answer: आई. एस. (इस्लामिक स्टेट) आतंकी संगठन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सभी मुस्लिम आबादी वाले देशों को अपने सीधे नियंत्रण में लेना है. वे एक बड़ा इस्लामी खिलाफत स्थापित करना चाहते हैं और इसके लिए हिंसा का सहारा लेते हैं.
In simple words: आई. एस. संगठन का मुख्य लक्ष्य दुनिया के सभी मुस्लिम देशों को अपने सीधे नियंत्रण में लाना है.
🎯 Exam Tip: आतंकवादी संगठनों के उद्देश्यों और उनकी विचारधारा को समझना वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 17. आई. एस. आतंकी संगठन ने किसे मुसलमानों का खलीफा घोषित कर रखा है?
Answer: आई. एस. आतंकी संगठन ने अपने मुखिया अबूबक्र अल-बगदादी को मुसलमानों का खलीफा घोषित कर रखा था. खलीफा एक इस्लामी नेता होता है जिसे सभी मुसलमानों का धार्मिक और राजनीतिक मुखिया माना जाता है.
In simple words: आई. एस. ने अबूबक्र अल-बगदादी को मुसलमानों का खलीफा माना था.
🎯 Exam Tip: प्रमुख आतंकवादी संगठनों के नेताओं और उनकी उपाधियों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 18. विश्व की सर्वोच्च संस्था का क्या नाम है?
Answer: विश्व की सर्वोच्च संस्था का नाम संयुक्त राष्ट्र संघ है. यह शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए काम करती है और दुनिया के अधिकांश देश इसके सदस्य हैं.
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ दुनिया की सबसे बड़ी संस्था है.
🎯 Exam Tip: संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों, उद्देश्यों और महत्व को समझना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए आवश्यक है.
प्रश्न 19. आधुनिक विश्व की दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
Answer: आधुनिक विश्व की दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ पर्यावरण और आतंकवाद हैं. पर्यावरण परिवर्तन से जलवायु संकट, प्रदूषण और संसाधनों की कमी हो रही है, जबकि आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है.
In simple words: आजकल दुनिया की दो बड़ी समस्याएँ पर्यावरण और आतंकवाद हैं.
🎯 Exam Tip: समसामयिक वैश्विक मुद्दों और चुनौतियों के बारे में जानकारी रखना और उनके समाधान पर विचार करना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 20. प्रारंभ में ब्रिक्स समूह में कितने सदस्य राष्ट्र थे?
Answer: शुरुआत में ब्रिक्स समूह में चार सदस्य राष्ट्र थे- ब्राजील, रूस, भारत और चीन. बाद में दक्षिण अफ्रीका भी इसमें शामिल हो गया, जिससे यह 'ब्रिक्स' बन गया.
In simple words: शुरू में ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत और चीन-ये चार देश थे.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के गठन और उनके विस्तार के चरणों को याद रखना उपयोगी होता है.
प्रश्न 22. सार्क (दक्षेस) के चार्टर में कितनी धाराएँ हैं?
Answer: सार्क (दक्षेस) के चार्टर में दस धाराएँ हैं. ये धाराएँ संगठन के उद्देश्यों, सिद्धांतों, सदस्यता और कार्यप्रणाली को परिभाषित करती हैं.
In simple words: सार्क के नियम पत्र (चार्टर) में दस धाराएँ हैं.
🎯 Exam Tip: किसी भी संगठन के संस्थापक दस्तावेज (चार्टर) की मुख्य विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 23. सार्क के उन्नीसवें सम्मेलन के आयोजन स्थल का नाम लिखिए।
Answer: सार्क के उन्नीसवें सम्मेलन का आयोजन स्थल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद था. हालांकि, यह सम्मेलन बाद में रद्द कर दिया गया था.
In simple words: सार्क का उन्नीसवाँ सम्मेलन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाला था.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के प्रस्तावित स्थल और उनके वास्तविक आयोजन की स्थिति दोनों को याद रखना महत्वपूर्ण हो सकता है.
प्रश्न 24. सार्क के कौन-कौन से सम्मेलन भारत में आयोजित किए गए?
Answer: सार्क के निम्नलिखित सम्मेलन भारत में आयोजित किए गए थे:
- दूसरा सम्मेलन 1986 ई. में
- आठवाँ सम्मेलन 1995 ई. में
- चौदहवाँ सम्मेलन 2007 ई. में
भारत ने इन सम्मेलनों के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया.
In simple words: भारत में सार्क के दूसरे (1986), आठवें (1995) और चौदहवें (2007) सम्मेलन आयोजित हुए.
🎯 Exam Tip: अपने देश में आयोजित महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों की सूची और उनके वर्षों को याद रखें.
प्रश्न 25. 2014 ई. में किसने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली?
Answer: साल 2014 में श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बहुमत हासिल किया था.
In simple words: 2014 में श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी.
🎯 Exam Tip: भारत के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण पद ग्रहण करने वाले व्यक्तियों और उनके कार्यकाल को याद रखना चाहिए.
RBSE Class 11 History Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. शीत युद्ध की भूमिका किस प्रकार बनी?
Answer: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, पूँजीवादी संयुक्त राज्य अमेरिका और साम्यवादी सोवियत रूस के बीच कड़ी होड़ शुरू हो गई. दोनों महाशक्तियों के अलग-अलग विचार, जीवन शैली और राष्ट्रीय हितों के टकराव के कारण युद्ध जैसी स्थिति पैदा हुई, जिसे 'शीत युद्ध' कहा गया. इस टकराव के कुछ मुख्य कारण थे:
1. सोवियत सेनाओं ने पूर्वी यूरोपीय देशों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया.
2. जर्मनी द्वारा इटली में आत्मसमर्पण के समझौते पर रूस की राय बाकी देशों से अलग थी.
3. जापान पर अमेरिकी बमबारी का रूस ने विरोध किया.
इन जैसे कई मुद्दों ने शीत युद्ध की नींव रखी.
In simple words: दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और रूस के अलग-अलग विचारों और हितों के टकराव से शीत युद्ध शुरू हुआ. पूर्वी यूरोप पर सोवियत नियंत्रण और जापान पर बमबारी जैसे मुद्दों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध के कारणों और प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से याद करें, क्योंकि यह विषय इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 3. भारत ने स्वतंत्रता के पश्चात् गुटनिरपेक्षता की नीति को क्यों चुना?
Answer: साल 1947 में भारत को आज़ादी मिली. आजादी के बाद भारत ने किसी भी बड़ी शक्ति के गुट में शामिल न होने का फैसला किया, जिसे गुटनिरपेक्षता कहते हैं. उस समय के भारतीय राजनीतिक नेताओं को पता था कि नए-नए स्वतंत्र हुए भारत के लोग पूँजीवाद और साम्यवाद-दोनों ही अतिवादी विचारों को पसंद नहीं करेंगे. इसलिए भारत ने इन दोनों विचारों से अलग एक तीसरी विचारधारा, गुटनिरपेक्षता को चुना. यह भारत की अपनी पहचान बनाए रखने और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता के लिए ज़रूरी था.
In simple words: आजादी के बाद भारत ने गुटनिरपेक्षता को चुना. भारत किसी भी बड़ी ताकत के गुट में शामिल नहीं होना चाहता था. नेताओं को लगा कि भारतीय जनता पूँजीवाद और साम्यवाद दोनों को पसंद नहीं करेगी, इसलिए उन्होंने एक अलग रास्ता चुना.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों और उनके पीछे के ऐतिहासिक और राजनीतिक तर्कों को समझना परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 4. शीत युद्ध गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के जन्म के लिए किस प्रकार उत्तरदायी सिद्ध हुआ?
Answer: शीत युद्ध के समय दुनिया की दो महाशक्तियों, अमेरिका और रूस, के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी, जिससे दुनिया में बहुत संकटपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी. हालाँकि, इन महाशक्तियों ने सीधे हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उनकी कूटनीतिक लड़ाइयों ने नए-नए आजाद हुए देशों को इतना डरा दिया कि उन्हें लगने लगा कि अगर वे किसी एक महाशक्ति के प्रभाव में आते हैं, तो दूसरी महाशक्ति उन्हें तबाह कर देगी. ऐसी हालत में, गुटों से अलग रहना ही सबसे अच्छा विकल्प था. इसी वजह से गुटनिरपेक्ष आंदोलन का जन्म हुआ और नए स्वतंत्र देशों ने गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई.
In simple words: शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और रूस की आपसी होड़ ने दुनिया में डर का माहौल बना दिया था. नए आजाद हुए देश किसी एक ताकत के साथ नहीं जुड़ना चाहते थे, क्योंकि उन्हें दूसरी ताकत से खतरा महसूस होता था. इसलिए उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन शुरू किया, ताकि वे तटस्थ रह सकें.
🎯 Exam Tip: गुटनिरपेक्ष आंदोलन के उदय के पीछे शीत युद्ध के प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है.
प्रश्न 5. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की दो प्रमुख संस्थाएँ कौन-कौन सी हैं। इनके क्या कार्य हैं?
Answer: गुटनिरपेक्ष आंदोलन की दो प्रमुख संस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
1. **समन्वयन ब्यूरो:** यह संस्था गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों के बीच बातचीत के विषयों को तय करती है. यह भी तय करती है कि ये देश वैश्विक मंच पर अपनी बात सामूहिक रूप से कैसे रखें. इस समय समन्वयन ब्यूरो में 66 सदस्य हैं.
2. **कॉन्फ्रेंस या सम्मेलन:** इसके तहत दो तरह के निकाय (समूह) आते हैं:
• **मंत्री स्तरीय सम्मेलन:** इसमें सदस्य देशों के विदेश मंत्री भाग लेते हैं.
• **राज्याध्यक्षों या शासनाध्यक्षों का सम्मेलन:** इसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
In simple words: गुटनिरपेक्ष आंदोलन की दो मुख्य संस्थाएँ हैं- समन्वयन ब्यूरो और कॉन्फ्रेन्स (सम्मेलन). समन्वयन ब्यूरो सदस्य देशों के बीच बातचीत के विषय तय करता है, और कॉन्फ्रेंस में मंत्री व राज्याध्यक्ष अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी भी संगठन की कार्यप्रणाली को समझने के लिए उसकी प्रमुख संस्थाओं और उनके कार्यों को जानना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 7. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रयास किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. शुरुआत में (1960 के दशक तक) पर्यावरण उसके लिए बड़ी प्राथमिकता नहीं था. 1960 के दशक में पहली बार समुद्री प्रदूषण पर कुछ सहमति बनी.
2. 1970 के दशक में, संयुक्त राष्ट्र संघ ने पश्चिमी अफ्रीका में रेगिस्तान के फैलाव को रोकने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया.
3. 1972 में स्टॉकहोम में पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हुआ, जो पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण बिंदु बना.
4. बाद में, देशों ने मिलकर 'संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम' (यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम) को अपनाया.
5. 1980 के दशक में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह विचार किया कि लंबे समय तक चलने वाला विकास हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए.
6. 1980 के दशक में ही, ओजोन परत के नुकसान और जहरीले पदार्थों के उत्सर्जन से जुड़े कई समझौते हुए.
In simple words: संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण बचाने के लिए कई काम किए हैं. उन्होंने समुद्री प्रदूषण, रेगिस्तान का फैलाव, ओजोन परत के नुकसान जैसे मुद्दों पर कार्यक्रम और समझौते किए हैं, और 'संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम' भी शुरू किया है.
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, कार्यक्रमों और समझौतों के नाम और उनके वर्षों को याद रखें.
प्रश्न 8. जापान में हुए विश्व पर्यावरण व ग्रीन हाउस सम्मेलन का प्रमुख मुद्दा क्या था? इसके लिए क्या समाधान निश्चित हुआ?
Answer: दिसंबर 1997 में जापान के क्योटो शहर में विश्व पर्यावरण व ग्रीन हाउस सम्मेलन (क्योटो प्रोटोकॉल) आयोजित हुआ था. इस सम्मेलन का मुख्य मुद्दा वातावरण को गर्म करने वाली गैसों (ग्रीन हाउस गैसों) के उत्सर्जन को कैसे नियंत्रित किया जाए, यह था. इस समस्या को हल करने के लिए, वहां मौजूद कई देशों ने अपने लिए इन गैसों के उत्सर्जन की एक सीमा तय की थी. यह भी तय हुआ कि 2008 से 2012 के बीच यूरोपीय यूनियन के देश 8 प्रतिशत, अमेरिका 7 प्रतिशत और जापान 6 प्रतिशत तक उत्सर्जन कम करेंगे.
In simple words: 1997 में जापान में हुए पर्यावरण सम्मेलन का मुख्य मुद्दा ग्रीन हाउस गैसों को कम करना था. इसका समाधान यह निकला कि यूरोपीय यूनियन, अमेरिका और जापान जैसे देश तय सीमा तक उत्सर्जन कम करेंगे.
🎯 Exam Tip: क्योटो प्रोटोकॉल जैसे प्रमुख पर्यावरण समझौतों के मुख्य उद्देश्य और देशों द्वारा किए गए वादों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 9. आई. एस. (इस्लामिक स्टेट) आतंकी संगठन पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: आई. एस. (इस्लामिक स्टेट) एक कुख्यात आतंकवादी संगठन है, जिसे आई. एस. आई. एस. (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) और आई. एस. आई. एल. (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांत) के नाम से भी जाना जाता है. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सभी मुस्लिम आबादी वाले देशों को अपने सीधे नियंत्रण में लेना है और एक बड़ा इस्लामी खिलाफत स्थापित करना है. यह संगठन अपनी विचारधारा को फैलाने और अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अत्यधिक हिंसा और क्रूरता का उपयोग करता है.
In simple words: आई. एस. एक खतरनाक आतंकी संगठन है. इसे आई. एस. आई. एस. या आई. एस. आई. एल. भी कहते हैं. इसका लक्ष्य दुनिया के मुस्लिम देशों को अपने नियंत्रण में लेना है और यह हिंसा का इस्तेमाल करता है.
🎯 Exam Tip: आतंकवादी संगठनों के नाम, उनके अन्य नाम और उनके मुख्य उद्देश्यों को याद रखना चाहिए.
प्रश्न 11. गुजराल सिद्धान्त क्या था?
Answer: आई. के. गुजराल, एच. डी. देवगौड़ा के बाद प्रधानमंत्री बने थे. प्रधानमंत्री बनने से पहले विदेश मंत्री रहते हुए, उन्होंने विदेश नीति से जुड़े पाँच सिद्धांतों वाला एक 'गुजराल सिद्धान्त' दिया था. इस सिद्धांत के अनुसार, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और भूटान जैसे छोटे देशों से भारत बराबरी की उम्मीद नहीं करेगा. गुजराल सिद्धांत के मुताबिक, दक्षिण एशिया के देश अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ गलत गतिविधियों के लिए नहीं करेंगे, एक-दूसरे की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करेंगे, किसी के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देंगे और अपने झगड़ों को शांति से सुलझाएँगे.
In simple words: गुजराल सिद्धान्त पूर्व विदेश मंत्री आई. के. गुजराल ने दिया था. इसमें पाँच मुख्य सिद्धांत थे, जैसे छोटे पड़ोसी देशों से भारत बराबरी की उम्मीद नहीं करेगा, पड़ोसी एक-दूसरे के खिलाफ जमीन का इस्तेमाल नहीं करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे.
🎯 Exam Tip: भारत की विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांतों, जैसे गुजराल सिद्धांत, को उनके मुख्य बिंदुओं के साथ याद रखें.
प्रश्न 12. स्टिंग किसने और क्यों किया?
Answer: चीन अपनी 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत एशिया में एकमात्र महाशक्ति बनने की दौड़ में है. इसके लिए वह भारत को चारों तरफ से समुद्र के रास्ते घेरने की 'मोतियों की माला' (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स) नीति पर चलता है. 'मोतियों' का मतलब दक्षिणी चीन सागर से लेकर मलक्का-स्ट्रेट, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर तक के रणनीतिक ठिकाने हैं, जैसे- बंदरगाह, हवाई पट्टियाँ और निगरानी अड्डे. भारत चीन की इस नीति का लगातार विरोध करता रहा है, ताकि चीन भारत को घेर न सके.
In simple words: चीन अपनी 'मोतियों की माला' नीति से भारत को समुद्र के रास्ते घेरने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत वह बंदरगाह और हवाई अड्डे बना रहा है. भारत इस पर आपत्ति जता रहा है.
🎯 Exam Tip: भू-राजनीतिक रणनीतियों और उनके प्रभावों को समझना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए आवश्यक है.
प्रश्न 13. मेकांग गंगा परियोजना क्या है?
Answer: मेकांग गंगा परियोजना के तहत 'मेकांग गंगा सहयोग' नाम का एक समूह बनाया गया था, जिसमें छह देश शामिल थे. भारत और लाओस के अलावा, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम भी इसके सदस्य थे. इस समूह के मंच पर सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, पर्यटन, शिक्षा और संस्कृति जैसे विषयों पर सहयोग की एक नई परंपरा शुरू हुई. इसका उद्देश्य इन देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना था.
In simple words: मेकांग गंगा परियोजना एक ऐसा समूह है जिसमें भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के पाँच अन्य देश शामिल हैं. इसका लक्ष्य व्यापार, पर्यटन और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे की मदद करना है.
🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय सहयोग पहलों और उनके उद्देश्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 15. सार्क की स्थापना में किन सात राष्ट्राध्यक्षों का योगदान रहा ?
Answer: सार्क की स्थापना 1985 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई थी. दक्षिण एशिया में आपसी सहयोग और विकास के लिए सात देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने मिलकर 'साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन' (सार्क) बनाया था. ये सात राष्ट्राध्यक्ष थे:
1. भारत के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी
2. पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक
3. बांग्लादेश के राष्ट्रपति हुसैन इरशाद
4. नेपाल के नरेश बीरेन्द्र शाह
5. भूटान के नरेश जिग्मे सिग्मे वाँगचुक
6. श्रीलंका के राष्ट्रपति जूलियस रिचर्ड जयवर्द्धने
7. मालदीव के राष्ट्रपति मौमून गयूम
In simple words: सार्क की स्थापना 1985 में ढाका में हुई थी. भारत के राजीव गांधी, पाकिस्तान के जिया उल हक, बांग्लादेश के हुसैन इरशाद, नेपाल के बीरेंद्र शाह, भूटान के जिग्मे सिग्मे वांगचुक, श्रीलंका के जूलियस रिचर्ड जयवर्द्धने और मालदीव के मौमून गयूम ने इसमें योगदान दिया.
🎯 Exam Tip: किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संगठन के संस्थापक देशों और उनके नेताओं को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है.
RBSE Class 11 History Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. शीत युद्ध की परिभाषा देते हुए इसके परिणामों की विवेचना कीजिए।
Answer: शीत युद्ध तब होता है जब दो देश एक-दूसरे पर अविश्वास, संदेह और दुष्प्रचार करते हैं, और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बार-बार धमकी देते हैं कि अगर उनके हितों की रक्षा नहीं हुई तो युद्ध हो जाएगा. यह स्थिति शीत युद्ध कहलाती है.
**शीत युद्ध की परिभाषा:**
लुई हाले ने शीत युद्ध को इस प्रकार परिभाषित किया है: "शीत युद्ध परमाणु युग में एक तनावपूर्ण स्थिति है, जो हथियारों की सीधी लड़ाई से पूरी तरह अलग है, लेकिन उससे भी ज़्यादा भयानक है."
**शीत युद्ध के दूरगामी परिणाम:**
लंबे समय तक चले इस शीत युद्ध के कई बड़े और दूरगामी परिणाम हुए, जो इस प्रकार हैं:
1. **शक्ति संतुलन में बदलाव:** शीत युद्ध से पहले शक्ति संतुलन सीधा सैन्य बल पर आधारित था, लेकिन शीत युद्ध के बाद यह आतंक के संतुलन में बदल गया. यह चिंता का विषय था कि कौन सी महाशक्ति अपने खतरनाक कामों से दुनिया को कितना ज़्यादा डरा सकती है.
2. **शांतिपूर्ण समाप्ति:** किसी को नहीं पता था कि शीत युद्ध कब भयानक रूप ले लेगा. इसका सबसे अच्छा नतीजा यह था कि यह तीसरा विश्व युद्ध न बनकर केवल शीत युद्ध के रूप में ही समाप्त हो गया.
3. **जन-धन की हानि:** शीत युद्ध के दौरान हुए सीधे युद्धों में जितनी जान-माल की हानि हुई, वह किसी विश्व युद्ध की तुलना में कम नहीं थी.
4. **सोवियत संघ का विघटन:** लगातार शीत युद्ध की स्थिति के कारण सोवियत संघ की आर्थिक व्यवस्था कमजोर हो गई और धीरे-धीरे एक कमजोर राष्ट्र बन गया. इसका फायदा छोटे-छोटे देशों ने उठाया और अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी. नतीजतन, सोवियत संघ का विघटन हो गया.
5. **संयुक्त राष्ट्र संघ पर प्रभाव:** संयुक्त राष्ट्र संघ को शीत युद्ध से गहरा आघात पहुँचा. यह संस्था जिसे दुनिया के कल्याण के लिए काम करना था, वह दो महाशक्तियों की अधूरी इच्छाओं को पूरा करने का केंद्र बनकर रह गई.
6. **मानवता को क्षति:** शीत युद्ध के दौरान, खासकर यूरोप और अमेरिका में जन्मी पीढ़ियों का विकास डर, संदेह और अनिश्चितता के माहौल में हुआ, जिससे मानवता सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ने से वंचित रह गई.
In simple words: शीत युद्ध वह स्थिति है जब देश सीधे नहीं लड़ते, पर अविश्वास और धमकियों का माहौल रहता है. इसके बड़े नतीजे हुए: शक्ति संतुलन बदल गया, युद्ध तो नहीं हुआ पर काफी नुकसान हुआ, सोवियत संघ टूट गया, संयुक्त राष्ट्र का काम प्रभावित हुआ, और लोगों में डर का माहौल बना रहा.
🎯 Exam Tip: शीत युद्ध की परिभाषा के साथ उसके परिणामों को क्रमबद्ध और स्पष्ट बिंदुओं में लिखें. हर परिणाम के साथ उसकी संक्षिप्त व्याख्या करें.
प्रश्न 2. सोवियत संघ के विघटन के क्या कारण थे?
**अथवा**
रूस के साम्यवादी शासन का अन्त किस प्रकार हुआ?
Answer: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ रूस एक महाशक्ति बनकर उभरा, लेकिन सात दशकों तक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहने के बाद सोवियत संघ का विघटन हो गया. इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
1. **खराब आर्थिक नीति:** सोवियत संघ ने जो आर्थिक मॉडल अपनाया था, उसमें 1960 के दशक के बाद दिक्कतें आने लगीं. भारी उद्योगों पर ज़्यादा जोर देने से उपभोक्ता वस्तुओं की कमी हो गई. सोवियत नागरिकों को ज़रूरी चीजें सही दाम पर नहीं मिल पाईं, और बाज़ारवाद की बुराइयाँ फैलने लगीं.
2. **विदेशी मुद्रा कमाने की लालसा:** 1970 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की मांग बढ़ने पर सोवियत संघ का ध्यान तकनीकी विकास से हटकर तेल बेचने और विदेशी मुद्रा कमाने पर चला गया. इस बीच, अमेरिका जैसे देश तकनीकी विकास में बहुत आगे निकल गए.
3. **आर्थिक असंतुलन:** शीत युद्ध के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ दोनों को अपने सहयोगी देशों को सहायता और निवेश के लिए बहुत पैसा खर्च करना पड़ता था. इससे सोवियत संघ का आर्थिक संतुलन बिगड़ गया और वह धीरे-धीरे एक कमजोर राष्ट्र बन गया.
4. **सत्ता में बदलाव:** लेनिन के समय 'एक दल की तानाशाही' स्टालिन के समय 'एक व्यक्ति की तानाशाही' में बदल गई थी. इससे सोवियत संघ की जनता में बहुत गुस्सा था. जब सोवियत संघ के विघटन का मौका आया, तो लोगों ने अपनी माँगें उठानी शुरू कर दीं.
5. **मिखाइल गोर्वाच्योव की नीतियाँ:** 1988 में मिखाइल गोर्वाच्योव ने सोवियत संघ का नेतृत्व संभाला. उनकी 'पेरेस्त्रोइका' (पुनर्गठन) और 'ग्लासनोस्त' (खुलेपन) की नीतियाँ पूंजीवाद की ओर झुकी हुई थीं. इन नीतियों का राजनीतिक नतीजा यह हुआ कि युद्ध और देशों की स्वतंत्रता के लिए विद्रोह शुरू हो गए.
6. **नए स्वतंत्र राष्ट्रों का उदय:** मिखाइल गोर्वाच्योव की नीतियों के कारण 1988 में आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई छिड़ गई. 1990 में लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया ने और 1991 में जॉर्जिया तथा यूक्रेन ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी. 1993 में स्वतंत्र चेक और स्लोवाक राज्य भी बने. इस तरह यूरोप के देश साम्यवादी बंधन से मुक्त होते चले गए, और तानाशाही पर आधारित साम्यवादी व्यवस्था खत्म हो गई.
In simple words: सोवियत संघ के टूटने के कई कारण थे: उसकी खराब आर्थिक नीति, तकनीकी विकास पर ध्यान न देना, शीत युद्ध के कारण आर्थिक बोझ, स्टालिन की तानाशाही से जनता में गुस्सा, और गोर्वाच्योव की नीतियों ने नए देशों को आजादी दिलाई, जिससे साम्यवादी शासन का अंत हो गया.
🎯 Exam Tip: सोवियत संघ के विघटन के कारणों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं में बाँटकर याद रखना आसान होगा.
प्रश्न 3. गुटनिरपेक्षता का अनुसरण किया। 1961 ई. में गुट निरपेक्ष आन्दोलन अस्तित्व में आया। नव स्वतन्त्र राष्ट्रों द्वारा गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाने के पीछे निम्नलिखित कारण थे -
1. **अस्तित्व की रक्षा:** नए आजाद हुए देश अपनी पहचान बचाने के लिए किसी भी बड़ी ताकत का सहारा नहीं लेना चाहते थे. इसलिए उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन शुरू किया.
2. **तीसरे विश्व युद्ध का डर:** अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध से तीसरे विश्व युद्ध का डर बढ़ गया था. नए आजाद हुए देशों को लगा कि तटस्थ रहना ही सबसे अच्छा है.
3. **'रुको और देखो' की नीति:** नए स्वतंत्र देश गुटों से अलग रहकर बिना किसी दबाव के अपनी 'रुको और देखो' की नीति पर आसानी से चल सकते थे. इस तरह कोई भी महाशक्ति उन पर नियंत्रण नहीं कर पाती.
4. **संप्रभुता की रक्षा:** किसी भी देश की संप्रभुता तभी साबित होती है जब वह अपने अंदरूनी और बाहरी मामलों में स्वतंत्र निर्णय ले सके. अगर कोई देश किसी खास गुट में शामिल होता है, तो उसकी संप्रभुता कम हो जाती है. इसलिए देशों ने अपनी संप्रभुता बचाने के लिए गुटनिरपेक्ष रहना सही समझा.
5. **राजनीतिक व सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा:** हर देश की अपनी अच्छी सामाजिक और राजनीतिक परंपराएँ होती हैं. इन परंपराओं को बनाए रखने के लिए नए स्वतंत्र देशों को गुटों से अलग रहना ज़्यादा सही लगा.
6. **आर्थिक संसाधनों की रक्षा:** अगर कोई देश मुश्किल में किसी महाशक्ति से मदद लेता है, तो उसे इसकी दोगुनी कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे वह अपनी संपत्ति खो देता है. इसलिए नए देशों ने सोच-समझकर गुटनिरपेक्षता को चुना.
7. **आपसी आर्थिक सहयोग की ज़रूरत:** नए स्वतंत्र देशों के लिए यह उम्मीद बनाए रखना ज़रूरी था कि उन्हें कहीं से भी आर्थिक मदद मिल सके. कोई भी गुटनिरपेक्ष देश इसलिए किसी देश की सहायता का तिरस्कार नहीं करना चाहता था कि वह उसके विरोधी गुट का सदस्य है.
Answer: गुटनिरपेक्षता की नीति नए स्वतंत्र राष्ट्रों ने अपने अस्तित्व की रक्षा, तीसरे विश्व युद्ध के डर से बचने, अपनी संप्रभुता बनाए रखने, अपनी राजनीतिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने, आर्थिक संसाधनों को बचाने और आपसी आर्थिक सहयोग की ज़रूरत के कारण अपनाई थी. यह आंदोलन 1961 में शुरू हुआ और इसका उद्देश्य किसी भी बड़ी शक्ति के सैन्य गुट में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना था.
In simple words: नए आजाद हुए देशों ने गुटनिरपेक्षता को चुना ताकि वे अपनी पहचान बचा सकें, तीसरे विश्व युद्ध के डर से बच सकें, अपनी स्वतंत्रता बनाए रख सकें, अपनी संस्कृति की रक्षा कर सकें, आर्थिक नुकसान से बच सकें और सभी से आर्थिक मदद ले सकें.
🎯 Exam Tip: गुटनिरपेक्षता के पीछे के कारणों को याद करते समय, प्रत्येक कारण के महत्व और नए स्वतंत्र राष्ट्रों के लिए उसकी प्रासंगिकता पर ध्यान दें.
प्रश्न 5. शीत युद्ध के दौर में भारत की स्थिति का वर्णन करो।
Answer: जिस समय दुनिया में शीत युद्ध चल रहा था, भारत अंग्रेजों के अधीन एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण उपनिवेश था। ब्रिटिश शासन के तहत, भारतीय लोग अपने देश को आजाद कराने की कोशिश कर रहे थे। शीत युद्ध के समय भारत के राजनीतिक माहौल में कुछ बदलाव आए:
1. भारत की स्वतंत्रता: भारत 1947 में ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ। आजादी के बाद भारत के लिए यह तय करना मुश्किल था कि वह किसी गुट में शामिल हो या नहीं।
2. पूंजीवादी और साम्यवादी व्यवस्था पर अविश्वास: आजादी के बाद भारत, अमेरिका के पूंजीवादी और रूस के साम्यवादी- इन दोनों महाशक्तियों के गुटों में शामिल नहीं होना चाहता था। इसका मुख्य कारण भारतीय धर्म और संस्कृति थी, जिसमें गलत तरीकों से पवित्र लक्ष्यों को प्राप्त करने की मनाही थी।
3. राजनीतिक नेतृत्व की सोच (गुटनिरपेक्षता): उस समय के भारतीय राजनीतिक नेताओं का मानना था कि भारत के समझदार लोग पूंजीवाद और साम्यवाद- इन दोनों विचारों को पसंद नहीं करेंगे। इसलिए, उन्होंने एक तीसरी अलग विचारधारा, गुटनिरपेक्षता को चुना।
इस तरह, भारत ने शीत युद्ध की स्थिति से बचने के लिए गुटनिरपेक्षता का रास्ता अपनाया। बाद में, आजाद हुए दूसरे देशों ने भी भारत की तरह ही इस नीति का पालन किया, ताकि उनकी परंपराएं बनी रहें और उनकी अपनी पहचान बनी रहे।
In simple words: शीत युद्ध के समय भारत ब्रिटिश शासन से आजाद हो रहा था। भारत ने किसी भी महाशक्ति के गुट में शामिल न होकर गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई, क्योंकि वह अपनी पहचान और मूल्यों को बचाना चाहता था।
🎯 Exam Tip: जब भारत की स्थिति के बारे में पूछा जाए, तो आजादी के बाद भारत द्वारा अपनाई गई गुटनिरपेक्षता की नीति और उसके पीछे के कारणों का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6. गुट निरपेक्ष आन्दोलन की सफलताएँ एवं विफलताओं की विवेचना कीजिए।
Answer: गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सफलताएँ:
1. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की लोकप्रियता इस बात से साबित होती है कि 1961 में हुए पहले शिखर सम्मेलन में 25 देशों ने भाग लिया था, जबकि 2012 में हुए सोलहवें शिखर सम्मेलन में इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 120 हो गई।
2. गुटनिरपेक्षता ने देशों को भविष्य के युद्धों से बचाया।
3. गुटनिरपेक्षता के कारण शीत युद्ध का तनाव कम हुआ।
4. जर्मनी, कोरिया, चीन, इंडो-चीन, कांगो जैसे क्षेत्रों में फैली अशांति को गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने शांत किया।
5. भारत, जो इस आंदोलन के संस्थापक देशों में से एक था, ने 1954 में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया। इसे 1963 में आंशिक परीक्षण निषेध संधि के रूप में स्वीकार किया गया।
6. विकासशील देशों ने गुटनिरपेक्षता अपनाकर आर्थिक सहयोग की मांग की।
7. गुटनिरपेक्ष देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में बड़ी शक्तियों की मनमानी को रोकने की कोशिश की।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन की विफलताएँ:
1. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की एक बड़ी विफलता यह है कि गुटनिरपेक्ष देशों ने इस नीति का पूरी ईमानदारी से पालन नहीं किया।
2. सहयोग पाने के लिए गुटनिरपेक्ष देशों ने दोनों महाशक्तियों के साथ गलत समझौते किए।
3. इस आंदोलन ने अपने सदस्य देशों के लिए आर्थिक सुरक्षा की कोई नीति नहीं बनाई।
4. इस आंदोलन के सदस्य देशों में सामूहिक सुरक्षा की भावना की कमी रही।
5. इस आंदोलन के संस्थापक देश शीत युद्ध के दौरान बड़ी शक्तियों की आक्रामक नीतियों में कोई बड़ा सुधार नहीं करा पाए।
6. चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया और अरब-इजरायल संघर्ष में गुटनिरपेक्ष देश कोई भूमिका नहीं निभा पाए।
7. अल्जीरिया, अंगोला, मोजाम्बिक जैसे देशों में खून-खराबे को रोकने में यह आंदोलन असफल रहा।
8. नेपाल में विरोधी गतिविधियों को रोकने में भी गुटनिरपेक्ष आंदोलन असफल रहा।
In simple words: गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने दुनिया को बड़े युद्धों से बचाया और देशों को अपनी पहचान बनाए रखने में मदद की। हालांकि, यह कुछ मामलों में, जैसे सदस्यों द्वारा पूरी तरह से नीति का पालन न करने या आर्थिक सुरक्षा न दे पाने में विफल रहा।
🎯 Exam Tip: गुटनिरपेक्ष आंदोलन की सफलताओं और विफलताओं को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें। ध्यान रखें कि प्रत्येक बिंदु एक अलग विचार प्रस्तुत करे।
प्रश्न 7. गुट निरपेक्षता का अर्थ एवं उद्देश्य बताते हुए वर्तमान समय में इसकी प्रसांगिकता बताइये।
Answer: गुटनिरपेक्षता का अर्थ: दूसरे विश्व युद्ध के बाद, जब दुनिया में दो बड़ी शक्तियां- संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत रूस- उभरीं, तो किसी भी देश का इन दोनों में से किसी भी गुट का सदस्य न होना गुटनिरपेक्षता कहलाया। यह आंदोलन 1961 में शुरू हुआ।
गुटनिरपेक्षता के उद्देश्य:
1. अंतरराष्ट्रीय शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बनाए रखना।
2. सैनिक गुटों और गठबंधनों का विरोध करना।
3. स्थायी शांति को बढ़ावा देना।
4. पूर्ण नि:शस्त्रीकरण का समर्थन करना।
5. राष्ट्रों के बीच समानता के आधार पर शोषण-मुक्त आर्थिक संबंध स्थापित करना।
6. राष्ट्रों के आंतरिक मामलों में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और हस्तक्षेप न करना।
वर्तमान समय में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रासंगिकता:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन आज भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि:
1. इसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्वतंत्र विदेश नीति का विचार दिया। इसने दुनिया को पूरी तरह से दो गुटों में बंटने से रोका, विचारधाराओं पर आधारित गुटों के विस्तार और प्रभाव को कम किया, और शीत युद्ध के तनाव को कम करके विश्व शांति में योगदान दिया।
2. इस आंदोलन ने आपसी बातचीत और जोरदार प्रचार के माध्यम से उपनिवेशवाद को खत्म करने में मदद की।
3. इसने जातीय समानता को हासिल करने और गरीब देशों के आर्थिक विकास में भी काफी योगदान दिया।
In simple words: गुटनिरपेक्षता का मतलब है दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका या रूस के किसी भी गुट में शामिल न होना। इसका उद्देश्य शांति बनाए रखना, हथियारों की दौड़ रोकना, और आर्थिक समानता लाना है। यह आज भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया को एकतरफा होने से रोकता है और विकासशील देशों को एक मंच देता है।
🎯 Exam Tip: गुटनिरपेक्षता की परिभाषा और उद्देश्यों को याद रखें, और फिर वर्तमान विश्व में इसकी प्रासंगिकता पर तार्किक बिंदुओं के साथ चर्चा करें।
प्रश्न 8. पर्यावरण संरक्षण में संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु किये गये प्रयासों का विस्तार से वर्णन करो।
Answer: पर्यावरण आधुनिक दुनिया की एक गंभीर समस्या है। पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान के बावजूद, दुनिया के देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय चर्चा का मुख्य विषय बनाया है। पर्यावरण संरक्षण के संबंध में दुनिया के देशों द्वारा किए गए कुछ प्रयास इस प्रकार हैं:
1. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम:
- 1972 में, स्टॉकहोम में पर्यावरण संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ का सम्मेलन हुआ।
- 1970 के दशक में संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिमी अफ्रीका में रेगिस्तान के फैलाव को रोकने के लिए एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
- 1980 के दशक में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पर्यावरण और विकास से संबंधित मुद्दों पर विचार किया।
- 1980 के दशक में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच ओजोन परत के नुकसान और जहरीले पदार्थों के उत्सर्जन से जुड़े कई समझौते हुए।
2. 1992 का पृथ्वी सम्मेलन:
- ब्राजील के रियो डी जनेरियो में जून 1992 में 'पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' हुआ, जिसे पृथ्वी सम्मेलन भी कहते हैं। इसमें 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की रक्षा, और पर्यावरण प्रदूषण रोकने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
3. एजेंडा 21:
- इस सम्मेलन में आठ सौ पन्नों का एक ऐतिहासिक दस्तावेज 'एजेंडा 21' तैयार किया गया। इस दस्तावेज में उन कई बिंदुओं को गहराई से रेखांकित किया गया जिन पर दुनिया के देशों को ध्यान देना चाहिए ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। इसमें विकासशील देशों से जैव विविधता की रक्षा की भी उम्मीद की गई थी।
4. विश्व पर्यावरण और ग्रीन हाउस सम्मेलन:
- यह सम्मेलन 1997 में जापान के क्योटो शहर में आयोजित हुआ। इसमें मुख्य रूप से वातावरण को गर्म करने वाली गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने पर विचार किया गया। देशों ने वातावरण को गर्म करने वाली गैसों के उत्सर्जन की एक सीमा तय की।
5. जोहान्सबर्ग पृथ्वी सम्मेलन:
- 2002 में दक्षिण अफ्रीका में हुए इस सम्मेलन में पुराने मुद्दों पर फिर से चर्चा की गई।
6. संयुक्त राष्ट्र जलवायु समझौता सम्मेलन:
- कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में 2005 में आयोजित इस सम्मेलन में जलवायु संबंधी मुद्दों पर बातचीत की गई।
7. जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2015:
- पेरिस में हुए इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों को कम करने के लिए लंबी चर्चा के बाद वैश्विक तापमान को रोकने के लिए एक सर्वमान्य समझौता हुआ।
In simple words: दुनिया में पर्यावरण को बचाने के लिए कई बड़े सम्मेलन हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कई कार्यक्रम चलाए और देशों के बीच समझौते करवाए हैं ताकि प्रदूषण कम हो, जलवायु परिवर्तन रोका जा सके, और पृथ्वी को हरा-भरा रखा जा सके।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का वर्णन करते समय, प्रमुख सम्मेलनों (जैसे पृथ्वी सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल) और संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रमों को उनके वर्ष और मुख्य उद्देश्यों के साथ उल्लेख करें।
प्रश्न 9. भारत आसियान संबंधों की विवेचना कीजिए। अथवा लुक ईस्ट पॉलिसी पर एक लेख लिखो।
Answer: आसियान राष्ट्र वे देश हैं जो दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) से जुड़े हैं। इस संघ में इस समय 10 सदस्य राष्ट्र हैं। भारत ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापारिक और सामरिक संबंधों को मजबूत करने के लिए बहुत मेहनत की है।
1. भारत ने वियतनाम के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग, व्यापार-वाणिज्य, और संस्कृति व कला से संबंधित कई समझौते किए।
2. रक्षा क्षेत्र में इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक सुविधाओं से संबंधित समझौता हुआ।
3. मेकांग गंगा समूह का गठन हुआ। इसके सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, शिक्षा, और संस्कृति जैसे विषयों पर सहयोग की नई शुरुआत हुई।
4. भारत-आसियान संबंधों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सामूहिक रूप से आह्वान किया गया। यह समझौता 2004 में किया गया था।
5. 2004 के समझौते के तहत यह भी तय हुआ कि मुक्त व्यापार के लिए अच्छी स्थितियां बनाई जाएंगी।
6. नवंबर 2014 तक भारत-आसियान सम्मेलनों की बारह बैठकें हो चुकी थीं।
7. भारत-आसियान संबंध विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।
8. म्यांमार में हुए 12वें भारत-आसियान सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने 'लुक ईस्ट पॉलिसी' की जगह 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को अपनाने का आग्रह किया, ताकि संबंधों को नई गति मिल सके।
In simple words: भारत और आसियान देशों के बीच दोस्ती बढ़ रही है। भारत ने व्यापार, रक्षा, और संस्कृति में इन देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए कई समझौते किए हैं, और अब 'लुक ईस्ट पॉलिसी' को 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' में बदलकर इन संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है।
🎯 Exam Tip: भारत-आसियान संबंधों पर लिखते समय, प्रमुख समझौतों, सहयोग के क्षेत्रों (व्यापार, रक्षा, संस्कृति), और 'लुक ईस्ट' से 'एक्ट ईस्ट' पॉलिसी में बदलाव का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
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