RBSE Solutions Class 11 History Chapter 5 प्रथम विश्व युद्ध

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Detailed Chapter 5 प्रथम विश्व युद्ध RBSE Solutions for Class 11 History

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Class 11 History Chapter 5 प्रथम विश्व युद्ध RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 History Chapter 5 पाठ्य पुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 History Chapter 5 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व नवोदित दो शक्तियों का नाम लिखिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध से पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान दो नई शक्तिशाली देश के रूप में उभरे थे।
In simple words: Before World War I, the United States and Japan became two important new powers.

🎯 Exam Tip: When asked about new powers before a major event, focus on countries undergoing rapid development or expansion at that time.

 

Question 2. मित्र राष्ट्रों के नाम लिखिए।
Answer: मित्र राष्ट्रों में इंग्लैण्ड, फ्रांस, रूस, सर्बिया, जापान, पुर्तगाल, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका, रोमानिया, यूनान, श्याम, साइबेरिया, क्यूबा, पनामा, ब्राजील और ग्वाटेमाला जैसे कई देश शामिल थे।
In simple words: The Allied Powers included many countries like England, France, Russia, and the United States.

🎯 Exam Tip: Remember a few key nations from each major alliance to easily answer questions about their composition.

 

Question 4. ट्रिपल एंतात में सम्मिलित देशों के नाम लिखिए।
Answer: ट्रिपल एंतात में फ्रांस, रूस और इंग्लैण्ड (ब्रिटेन) देश शामिल थे।
In simple words: The Triple Entente consisted of France, Russia, and England.

🎯 Exam Tip: Distinguish between the Triple Alliance and the Triple Entente; they were the two main opposing blocs before WWI.

 

Question 5. शांति सम्मेलन में सम्मिलित प्रमुख व्यक्तियों के नाम लिखिये।
Answer: पेरिस शांति सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति विल्सन, इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री लायर्ड जार्ज, फ्रांस के प्रधानमंत्री क्लीमेन्शू और इटली के प्रधानमंत्री ओरलेण्डो जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे।
In simple words: Key figures at the Paris Peace Conference were leaders like President Wilson from America and Prime Minister Lloyd George from England.

🎯 Exam Tip: Knowing the main leaders involved in peace negotiations helps illustrate the diverse interests at play.

 

Question 6. शांति सम्मेलन में देशी राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में भारत के किस राजा ने भाग लिया?
Answer: शांति सम्मेलन में देशी राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में भारत के बीकानेर राज्य के महाराजा गंगा सिंह ने भाग लिया था।
In simple words: Maharaja Ganga Singh of Bikaner represented Indian princely states at the peace conference.

🎯 Exam Tip: When discussing India's role in international events, remember the participation of princely states alongside British India.

 

Question 7. बोल्शेविक का अर्थ बताइये।
Answer: रूसी भाषा में बहुमत को 'बोलशिन्स्वो' कहते हैं। इसी शब्द से 'बोल्शेविक' शब्द बना है।
In simple words: "Bolshevik" means "majority" in Russian.

🎯 Exam Tip: Understanding the meaning of key terms like 'Bolshevik' helps in grasping the historical context of the Russian Revolution.

 

Question 8. रासपुटिन कौन था?
Answer: रासपुटिन एक साधु था जिसने रूसी प्रशासन में बहुत ज़्यादा दखलअंदाजी की थी।
In simple words: Rasputin was a mystic who had significant influence in the Russian government.

🎯 Exam Tip: Rasputin's influence highlights the instability and corruption within the Russian monarchy before the revolution.

 

Question 9. लेनिन का पूरा नाम लिखिये।
Answer: लेनिन का पूरा नाम ब्लादिमिर इलिच उलियानोफ था।
In simple words: Lenin's full name was Vladimir Ilyich Ulyanov.

🎯 Exam Tip: Knowing the full names of historical figures helps in accurate identification and recall.

 

Question 10. गैपों के बारे में क्रांतिकारियों की भरणा क्या थी?
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: Always look for specific details about the perceptions and roles of key figures like Gapon in revolutionary movements.

 

Question 1. मोरक्को संकट से आप क्या समझते हैं?
Answer: फ्रांस और जर्मनी के बीच उत्तरी अफ्रीका में मोरक्को को लेकर दुश्मनी बढ़ गई थी। 1904 में, फ्रांस और ब्रिटेन ने एक गुप्त समझौता किया, जिससे फ्रांस को मोरक्को में अपनी कॉलोनी बनाने का मौका मिल गया। जर्मनी ने फ्रांस के खिलाफ मोरक्को को भड़काया, जिससे युद्ध जैसी स्थिति बन गई। इसी घटना को मोरक्को संकट कहते हैं।
In simple words: The Morocco Crisis happened when France and Germany clashed over control of Morocco, leading to a risk of war.

🎯 Exam Tip: The Morocco Crisis shows how colonial competition between European powers often led to international tensions before World War I.

 

Question 2. रूस द्वारा बाल्कन में रुचि के क्या कारण थे?
Answer: रूस की बाल्कन क्षेत्र में रुचि के कई कारण थे:
1. बाल्कन क्षेत्र के कई राज्य तुर्की के अधीन थे।
2. तुर्की और ऑस्ट्रिया के इलाकों में स्लाव लोग रहते थे, जो मूल रूप से रूसी जाति के थे। रूस तुर्क साम्राज्य को तोड़कर एक बड़ा स्लाव राज्य बनाना चाहता था।
3. इन स्लाव लोगों ने रूस के समर्थन से एक आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य स्लाव बहुल सर्बिया राज्य को आज़ाद कराना था।
4. ऑस्ट्रिया ने इस आंदोलन का विरोध किया।
5. ऑस्ट्रिया ने स्लाव राज्यों बोस्निया और हर्जेगोविना को अपने कब्ज़े में ले लिया।
6. इस कारण ऑस्ट्रिया और सर्बिया एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।
7. रूस को सर्बिया की रक्षा के लिए बाल्कन की राजनीति में दखल देना पड़ा।
In simple words: Russia wanted to protect fellow Slavic people in the Balkans, gain influence, and weaken the Ottoman Empire, which caused tension with Austria.

🎯 Exam Tip: Understanding Russia's pan-Slavic ambitions in the Balkans is key to explaining the complex web of alliances and rivalries that led to WWI.

 

Question 3. प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण लिखिये।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा कारण ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर हमला करना था। 28 जून 1914 को बोस्निया के प्रमुख शहर सेराजेवो में सर्बिया के कुछ गरमपंथियों ने ऑस्ट्रिया के युवराज फर्डिनेंड और उनकी पत्नी को गोली मारकर मार दिया। इस घटना के बाद, ऑस्ट्रिया ने सर्बिया को कड़ी सज़ा देने का फैसला किया और सर्बिया से कुछ शर्तें मानने को कहा।
सर्बिया ने ज़्यादातर शर्तें मान लीं, लेकिन दो शर्तों को मानने से मना कर दिया। इन शर्तों में ऑस्ट्रिया के अधिकारियों द्वारा सर्बिया में जांच-पड़ताल में हिस्सा लेने की मांग शामिल थी। सर्बिया ने कहा कि हेग के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के किसी भी फैसले को स्वीकार करेगा, लेकिन ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के जवाब को गलत मानकर 28 जुलाई 1914 को युद्ध की घोषणा कर दी।
In simple words: The immediate cause of World War I was Austria-Hungary's attack on Serbia after the assassination of Archduke Franz Ferdinand by Serbian nationalists.

🎯 Exam Tip: The assassination of Archduke Franz Ferdinand is the crucial spark that ignited WWI, but remember to also mention Austria's ultimatum and Serbia's partial refusal as part of the immediate chain of events.

 

Question 5. 'खूनी रविवार की घटना का रूस के इतिहास में महत्व बताये।
Answer: 22 जनवरी 1905 को रविवार के दिन, लगभग डेढ़ लाख मज़दूरों ने पादरी गैपोन के नेतृत्व में ज़ार के सामने अपनी राजनीतिक और औद्योगिक मांगों को पूरा करवाने के लिए प्रदर्शन किया। वे शांति से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन ज़ार के सैनिकों ने उन निहत्थे लोगों पर हमला करके 130 लोगों को मार दिया। 10/05 (10 अक्टूबर 1905) की यह खूनी रविवार की घटना रूसी इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस घटना के बाद, ज़ार ने 30 अक्टूबर 1905 को शासन में सुधारों की घोषणा की।
In simple words: Bloody Sunday was a massacre of peaceful Russian protestors in 1905, which weakened public trust in the Tsar and led to some political reforms, sparking the 1905 Revolution.

🎯 Exam Tip: The "Bloody Sunday" event is crucial because it showed the Tsar's brutality and undermined public faith in him, contributing significantly to future revolutionary movements.

 

Question 6. रूसीकरण की नीति से आप क्या समझते हैं ?
Answer: रूस की जनता कई जातियों के मिश्रण से बनी थी, जैसे अहूदी, पोल, फिन, उजबेक, तातार, कजाक, आर्मीनियन और रूसी लोग। रूसी लोग ज़्यादा ताकतवर होने के कारण शासक बन गए थे। उन्होंने अल्पसंख्यक जातियों के प्रति कोई हमदर्दी नहीं दिखाई। जार अलेक्जेंडर प्रथम के समय से ही 'रूसीकरण' की नीति अपनाई गई। इसके तहत ये काम किए गए:
1. "एक ज़ार, एक धर्म" का नारा दिया गया।
2. गैर-रूसी लोगों पर ज़ुल्म किया गया।
3. उनकी भाषाओं पर पाबंदी लगा दी गई।
4. उनकी संपत्ति छीन ली गई।
इसी कारण गैर-रूसी लोगों में बहुत गुस्सा फैल गया और वे ज़ारशाही के खिलाफ हो गए।
In simple words: Russianization was a policy to force non-Russian people to adopt Russian culture, language, and religion, which led to widespread discontent among minorities.

🎯 Exam Tip: Policies like Russianization often create strong opposition among minority groups, which can fuel nationalist movements and instability.

 

Question 7. बोल्शेविक क्रांति में लेनिन का योगदान लिखिए।
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: Lenin's role in the Bolshevik Revolution was central, often focusing on his leadership, ideological guidance, and strategic decisions in seizing power.

 

Question 9. स्टालिन ने किस प्रकार से रूस की सत्ता प्राप्त की उसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
Answer: 1924 में लेनिन की मृत्यु के बाद, सरकार के सबसे ऊँचे पद के लिए ट्रॉटस्की और स्टालिन के बीच सत्ता की लड़ाई हुई, जिसमें स्टालिन को जीत मिली। स्टालिन बोल्शेविक दल का महासचिव था और सरकार बनने पर उसे राष्ट्रीय जातियों का मंत्री भी बनाया गया। वह रूस में समाजवाद को मज़बूत करने के पक्ष में था। उसके लंबे शासनकाल में सोवियत संघ ने बहुत तरक्की की और दूसरे विश्व युद्ध में जीतकर एक बड़ी शक्ति बन गया।
In simple words: After Lenin's death, Stalin defeated Trotsky in a power struggle to become the leader of the Soviet Union, leading the country through significant development and its victory in World War II.

🎯 Exam Tip: When discussing Stalin's rise, highlight the power struggle after Lenin's death and his key roles as General Secretary and minister, leading to a strong, centralized state.

 

Question 10. पैट्रोग्राड की मजदूर हड़ताल का वर्णन कीजिए।
Answer: 8 मार्च 1917 को, पेट्रोग्राद के कारखानों में महिला मजदूरों ने भरपेट खाना न मिलने के कारण हड़ताल कर दी। अगले दिन पुरुष भी इसमें शामिल हो गए। 10 मार्च को पेट्रोग्राद के सभी कारखाने बंद हो गए। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए भेजे गए सैनिकों ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ दिया। यह संघर्ष तीन दिनों तक चलता रहा। आखिरकार, मजदूरों और सैनिकों ने मिलकर क्रांतिकारी सोवियत (परिषद) का गठन किया और सरकार के असली अधिकार अपने हाथ में ले लिए।
In simple words: In March 1917, women factory workers in Petrograd began a strike for food, which grew into a widespread worker-soldier uprising, leading to the formation of the Soviet and the capture of government power.

🎯 Exam Tip: The Petrograd workers' strike is a pivotal event in the Russian Revolution, showing how popular discontent and military disloyalty can rapidly overthrow an existing regime.

 

RBSE Class 11 History Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रथम विश्व युद्ध के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध मानव इतिहास का अब तक का सबसे विनाशकारी युद्ध था। यह युद्ध 1914 में शुरू हुआ और चार साल, तीन महीने और 11 दिन तक चला। इस महायुद्ध के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
1. उग्र राष्ट्रीयता: फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों की साम्राज्यवादी सोच ने राष्ट्रीयता की भावना को बहुत तेज़ कर दिया। हर देश अपना इलाका बढ़ाना चाहता था और दूसरे देशों को खत्म करने की सोच रखता था, जिससे युद्ध की स्थिति बनी।
4. गुटों का निर्माण: लड़ाई और टकराव की वजह से कई गुट बन गए। 1882 में जर्मनी, ऑस्ट्रिया और इटली ने त्रिगुट बनाया। 1907 में इंग्लैण्ड, रूस और फ्रांस ने त्रिदेशीय संधि की। इन देशों में हथियारों की होड़ बढ़ गई, जिसका नतीजा पहला विश्व युद्ध था।
5. सर्वस्लाव आंदोलन और बाल्कन राजनीति: बाल्कन क्षेत्र के कई राज्य तुर्की के अधीन थे। तुर्की और ऑस्ट्रिया के इलाकों में स्लाव लोग रहते थे, जो मूल रूप से रूसी जाति के थे। इन स्लावों ने रूस के समर्थन से एक आंदोलन शुरू किया, जिसका मकसद स्लाव-बहुल सर्बिया राज्य को आज़ाद कराना था। ऑस्ट्रिया ने इसका विरोध किया और बोस्निया व हर्जेगोविना जैसे स्लाव राज्यों पर कब्ज़ा कर लिया। इस तरह ऑस्ट्रिया और रूस एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।
6. कूटनीतिक संधियाँ: बिस्मार्क ने फ्रांस को हराने के बाद जर्मनी की सुरक्षा के लिए ऑस्ट्रिया और इटली के साथ गुप्त संधियाँ करके त्रिगुट बनाया। फ्रांस ने भी अपनी सुरक्षा के लिए रूस और इंग्लैण्ड के साथ दोस्ती करके 'ट्रिपल एंतात' बनाया। लगातार असुरक्षा और डर ने अफ़वाहों और युद्ध का माहौल बनाया।
7. व्यापारिक और औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा: उपनिवेश स्थापित करने और अपने देश में बनी चीज़ों को बेचने के लिए यूरोपीय देशों में बाज़ारों पर कब्ज़ा करने की होड़ पहले विश्व युद्ध का एक बड़ा कारण थी।
8. समाचार पत्रों की भूमिका: इस समय सभी देशों के अख़बारों ने उग्र राष्ट्रीयता की भावना से भरकर घटनाओं को ऐसे दिखाया जिससे जनता में गुस्सा बढ़ा और शांति से समझौता करना मुश्किल हो गया।
9. अंतर्राष्ट्रीय अराजकता: रूस-जापान युद्ध (1904-05), फ्रांस और जर्मनी के बीच बढ़ते विरोध, 1908-09 में ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया-हर्जेगोविना को अपने साम्राज्य में मिलाना, और बाल्कन युद्धों जैसी घटनाओं ने अंतर्राष्ट्रीय अराजकता को बढ़ाया। इससे सेनाओं को मज़बूत करने की होड़ और तेज़ हो गई।
10. तात्कालिक कारण: पहले विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर हमला करना था। इसके साथ ही कई शक्तियों के बीच युद्ध शुरू हो गया।
In simple words: World War I was caused by extreme nationalism, the formation of opposing alliances like the Triple Entente and Triple Alliance, colonial rivalries, an arms race, and the assassination of Archduke Franz Ferdinand.

🎯 Exam Tip: When listing causes of WWI, remember to group them into long-term factors (nationalism, alliances, imperialism, militarism) and the short-term trigger (assassination of Archduke Franz Ferdinand).

 

Question 4. प्रथम विश्व युद्ध के राजनैतिक परिणामों का उल्लेख कीजिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के राजनीतिक परिणाम निम्नलिखित थे:


  • बोल्शेविक दल की जीत ने केरेन्सकी सरकार को हटा दिया।

  • बोल्शेविकों ने पहली कम्युनिस्ट सरकार बनाई और मार्क्सवाद की साम्यवादी सोच को साकार किया।

  • बोल्शेविक सरकार ने मित्र राष्ट्रों से बिना पूछे जर्मनी के साथ मार्च 1918 में ब्रेस्ट लिटोवस्क की संधि करके रूस को पहले विश्व युद्ध से अलग कर दिया।

  • रूस और जर्मनी के बीच हुई संधि से मित्र राष्ट्र नाराज़ हो गए। उन्होंने बोल्शेविक सरकार के खिलाफ रूस में बढ़े असंतोष को सैन्य मदद दी, जिससे वहाँ गृह युद्ध छिड़ गया।

  • साम्यवादी सोच फैलाने के लिए मार्च 1919 में मास्को में तीसरे (पहले कम्युनिस्ट) इंटरनेशनल या 'कोमिन्टर्न' की स्थापना की गई।

  • रूस में कम्युनिस्ट पार्टी को एकमात्र कानूनी दल घोषित किया गया। इससे नाराज़ लोगों को दबा दिया जाता था।

  • बोल्शेविकों ने 'लाल आतंक' और विरोधी सेनापतियों ने 'श्वेत आतंक' के ज़रिए रूस के लोगों को परेशान किया।

  • क्रांति के कारण रूस एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा।

  • एशिया और अफ्रीका के गुलाम राज्यों ने रूस की क्रांति से प्रेरणा ली।

  • बोल्शेविक क्रांति ने रूस में एक सिद्धांतवादी सर्वसत्तावादी राज्य स्थापित किया।

  • बोल्शेविक क्रांति के बाद दुनिया पूंजीवादी और साम्यवादी दो हिस्सों में बंट गई।


In simple words: World War I led to the collapse of empires, the rise of new nation-states, the establishment of the League of Nations, and the spread of communism, deeply reshaping global politics.

🎯 Exam Tip: When describing political outcomes, remember to cover the fate of monarchies, the emergence of new states, and the shift in international power dynamics.

 

Question 5. बोल्शेविक दल के उत्कर्ष में लेनिन की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Answer: विश्व में पहली साम्यवादी सरकार बनाने का श्रेय लेनिन को जाता है। लेनिन का जन्म 22 अप्रैल 1870 को रूस के सिम्बिस्क शहर में वोल्गा नदी के पास हुआ था। 8 मई 1887 को ज़ार अलेक्जेंडर तृतीय की हत्या के आरोप में लेनिन के भाई को फांसी दी गई। इस घटना से दुखी होकर लेनिन ने ज़ारशाही को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने ये काम किए:
1. 1903 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के बंटवारे के बाद लेनिन ने बोल्शेविक दल बनाया।
2. लेनिन ने पार्टी की संगठनात्मक संरचना को मज़बूत किया और अधिवेशनों के ज़रिए पार्टी पर अपनी पकड़ मज़बूत बनाई तथा विरोधियों को खत्म किया।
3. 1900-1917 के बीच ज़्यादातर समय लेनिन विदेशों में रहे। इस दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों में बोल्शेविकों का एक नेटवर्क बनाया।
4. 23 अक्टूबर 1917 को लेनिन के नेतृत्व में सशस्त्र क्रांति के ज़रिए बोल्शेविक दल ने सत्ता पर कब्ज़ा करने का फैसला किया और इसे लागू करने के लिए पोलित ब्यूरो की नियुक्ति की।
5. पेट्रोग्राद सोवियत के अध्यक्ष ट्रॉटस्की ने सोवियत की सैनिक क्रांतिकारी समिति नियुक्त की। इसके बावजूद, 7 नवंबर 1917 को लेनिन के कुशल नेतृत्व और मज़बूत संगठन के बल पर बोल्शेविक दल सत्ता हासिल करने में सफल रहा।
6. 8 नवंबर को लेनिन की अध्यक्षता में नई सरकार का पहला मंत्रिमंडल (काउन्सिल ऑफ़ पीपुल्स कमिस्सार) बनाया गया।
In simple words: Lenin's leadership, strategic formation of the Bolshevik party, and his call for an armed revolution were crucial in the Bolsheviks' successful seizure of power in 1917.

🎯 Exam Tip: When outlining Lenin's role, emphasize his organizational skills, ideological clarity, and decisive actions during critical moments of the revolution.

 

RBSE Class 11 History Chapter 5 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 History Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. “मैं विश्व युद्ध को नहीं देखूंगा परन्तु तुम देखोगे और उसका प्रारंभ पूर्व से होगा।" यह कथन किसका है?
(क) रासपुटिन
(ख) बिस्मार्क
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: When encountering quotes in MCQs, identify the speaker by associating them with their historical context and known statements.

 

Question 2. प्रथम विश्व युद्ध कितने वर्ष तक चला?
(a) 9
(b) 5
(c) 4
(d) 3
Answer: (c) 4
In simple words: World War I lasted for four years.

🎯 Exam Tip: Remember the duration of major historical events for quick recall in MCQs.

 

Question 3. प्रथम विश्व युद्ध में कितने राष्ट्रों ने भाग लिया ?
(a) 50
(b) 20
(c) 30
(d) 40
Answer: (c) 30
In simple words: About 30 countries participated in the First World War.

🎯 Exam Tip: While the exact number might vary slightly by source, remember the approximate scale of global participation in major conflicts.

 

Question 4. सेन्ट जर्मन की संधि किन-किन देशों के मध्य हुई?
(a) आस्ट्रिया-मित्र राष्ट्र
(b) फ्रांस-जर्मनी
(c) तुर्की-इंग्लैण्ड
(d) रूस-अमेरिका
Answer: (a) आस्ट्रिया-मित्र राष्ट्र
In simple words: The Treaty of Saint-Germain was signed between Austria and the Allied Powers.

🎯 Exam Tip: Treaties ending major wars are important; know which countries were involved in each specific treaty.

 

Question 5. प्रथम विश्व युद्ध कब समाप्त हुआ?
(a) 28 जुलाई 1918
(b) 11 नवम्बर 1918
(c) 3 नवम्बर 1919
(d) 7 नवम्बर 1917
Answer: (b) 11 नवम्बर 1918
In simple words: World War I ended on November 11, 1918.

🎯 Exam Tip: Remembering the exact date of the armistice for WWI is important, as it marks a significant global historical moment.

 

Question 7. 1905 ई. में कृषक प्रतिनिधियों का सम्मेलन जिसमें रूसी कृषक संघ बनाने का निर्णय लिया गया, किस स्थान पर हुआ?
(a) सेण्ट पीटर्सवर्ग
(b) लेनिनग्राद
(c) पैट्रोग्राड
(d) मास्को में
Answer: (d) मास्को में
In simple words: The conference of peasant representatives where the Russian Peasant Union was formed in 1905 took place in Moscow.

🎯 Exam Tip: Keep track of important historical locations associated with key events like conferences and movements.

 

Question 8. बोल्शेविक सरकार में ट्रॉटस्की को कौन-सा पद प्राप्त हुआ?
(a) विदेशमंत्री
(b) गृहमंत्री
(c) राष्ट्रिक जातियों का मंत्री
(d) प्रधानमंत्री
Answer: (a) विदेशमंत्री
In simple words: Trotsky became the Foreign Minister in the Bolshevik government.

🎯 Exam Tip: Knowing the key positions held by prominent figures in a new government helps understand their influence and responsibilities.

 

Question 9. चेका संगठन का अध्यक्ष कौन था?
(a) फेलिक्स केरजिंस्की
(b) स्टालिन
(c) केरेन्सकी
(d) राइकाव
Answer: (a) फेलिक्स केरजिंस्की
In simple words: Felix Dzerzhinsky was the head of the Cheka organization.

🎯 Exam Tip: Associate key figures with the organizations they led, especially those like the Cheka, which played a crucial role in maintaining power.

 

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

मिलान कीजिए -

 

Question 1. मिलान कीजिए – अ: 1. कोप्टिकिन, 2. कार्ल मार्क्स, 3. गुशकाव, 4. स्टालिन, 5. बिस्मार्क, 6. गैपों, 7. रासपुटिन, 8. लेनिन, 9. जार निकोलस द्वितीय, 10. मिल्यूकाव ब: (क) गुप्त संधियों का जन्मदाता, (ख) पादरी, (ग) पवित्र साधु, (घ) रूस का अंतिम जार, (ङ) डेमोक्रेटिक दल का नेता, (च) समाजवाद का जनक, (छ) अक्टूबरिस्ट दल का नेता, (ज) शून्यवाद का विचारक, (झ) राष्ट्रिक जातियों का मंत्री, (ञ) बोल्शेविक दल का महानायक
Answer:
1. कोप्टिकिन - (ज) शून्यवाद का विचारक
2. कार्ल मार्क्स - (च) समाजवाद का जनक
3. गुशकाव - (छ) अक्टूबरिस्ट दल का नेता
4. स्टालिन - (झ) राष्ट्रिक जातियों का मंत्री
5. बिस्मार्क - (क) गुप्त संधियों का जन्मदाता
6. गैपों - (ख) पादरी
7. रासपुटिन - (ग) पवित्र साधु
8. लेनिन - (ञ) बोल्शेविक दल का महानायक
9. जार निकोलस द्वितीय - (घ) रूस का अंतिम जार
10. मिल्यूकाव - (ङ) डेमोक्रेटिक दल का नेता
In simple words: Match the historical figures with their correct roles or descriptions, like Karl Marx with the founder of socialism or Rasputin with the holy man.

🎯 Exam Tip: For matching questions, connect each person to their most distinctive contribution or title to ensure accuracy.

 

RBSE Class 11 History Chapter 5 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्षेत्रफल की दृष्टि से यूरोप का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा था?
Answer: क्षेत्रफल के हिसाब से रूस यूरोप का सबसे बड़ा राज्य था।
In simple words: Russia was the largest state in Europe by area.

🎯 Exam Tip: When comparing geographical size, ensure you recall the largest entities within the specified region.

 

Question 2. 1871 ई. के युद्ध में पराजय के कारण फ्रांस को कौन-से क्षेत्र जर्मनी को देने पड़े?
Answer: 1871 के युद्ध में हारने के बाद फ्रांस को अपने दो उपजाऊ और औद्योगिक क्षेत्र, आल्सेस और लारेन, जर्मनी को देने पड़े।
In simple words: After losing the 1871 war, France had to give Alsace and Lorraine, two rich regions, to Germany.

🎯 Exam Tip: Remember significant territorial changes that resulted from major wars, as they often led to future conflicts.

 

Question 3. 1882 ई. में किन देशों ने त्रिगुट का निर्माण किया?
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: Clearly identify the founding members of key alliances like the Triple Alliance (Germany, Austria-Hungary, Italy) along with their formation year.

 

Question 5. बाल्कन क्षेत्र में बुल्गेरिया सबसे अधिक असंतुष्ट राज्य क्यों था?
Answer: बाल्कन क्षेत्र में बुल्गारिया सबसे ज़्यादा नाखुश राज्य था क्योंकि सर्बिया, यूनान जैसे देशों ने उससे बहुत बड़ा इलाका छीन लिया था।
In simple words: Bulgaria was the most discontented state in the Balkans because Serbia and Greece had taken away large parts of its territory.

🎯 Exam Tip: Discontent over territorial losses often fueled nationalist movements and subsequent conflicts in regions like the Balkans.

 

Question 6. सर्बिया की प्रमुख गुप्त क्रांतिकारी संस्थाएँ कौन-कौन सी थीं?
Answer: सर्बिया की प्रमुख गुप्त क्रांतिकारी संस्थाएँ 'काला हाथ' और 'संगठन या मृत्यु' थीं।
In simple words: Serbia's main secret revolutionary groups were the Black Hand and Organization or Death.

🎯 Exam Tip: Identify and remember the names of clandestine organizations, especially those that played a role in triggering major historical events.

 

Question 7. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने रूस पर कब आक्रमण किया?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने 1 अगस्त 1914 को रूस पर हमला किया।
In simple words: Germany attacked Russia on August 1, 1914, during World War I.

🎯 Exam Tip: Knowing the exact dates of key declarations and attacks helps in establishing the timeline of the war.

 

Question 8. प्रथम विश्व युद्ध में सम्मिलित धुरी राष्टों के नाम लिखिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध में शामिल धुरी राष्ट्र थे- जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, बुल्गारिया और तुर्की।
In simple words: The Central Powers in World War I included Germany, Austria-Hungary, Bulgaria, and Turkey.

🎯 Exam Tip: Clearly differentiate between the Allied Powers (Triple Entente) and the Central Powers (Triple Alliance members and allies) when asked about war participants.

 

Question 9. किस घटना के पश्चात् अमेरिका ने प्रथम विश्व युद्ध में प्रवेश किया?
Answer: 6 अप्रैल 1917 को जर्मनी द्वारा अमेरिका के जहाज़ डुबोने की घटना के बाद अमेरिका पहले विश्व युद्ध में शामिल हो गया।
In simple words: America joined World War I after Germany sank its ships on April 6, 1917.

🎯 Exam Tip: The sinking of civilian ships by German U-boats (unrestricted submarine warfare) was the main reason for America's entry into WWI.

 

Question 10. पेरिस शांति सम्मेलन में कितने देशों को आमंत्रित किया गया?
Answer: पेरिस शांति सम्मेलन में 32 देशों को बुलाया गया था।
In simple words: Thirty-two countries were invited to the Paris Peace Conference.

🎯 Exam Tip: The number of invited nations highlights the broad international involvement in shaping the post-war world order.

 

Question 12. पेरिस शांति सम्मेलन में किन चार बड़े राष्ट्रों की परिषद का निर्माण किया गया?
Answer: पेरिस शांति सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस और इटली राष्ट्रों की परिषद बनाई गई थी। इन चार देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए.
In simple words: पेरिस शांति सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस और इटली ने मिलकर एक परिषद बनाई थी।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि पेरिस शांति सम्मेलन में चार प्रमुख देश- अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस और इटली- शामिल थे।

 

Question 13. सेब्रे की संधि किन देशों के मध्य हुई?
Answer: सेब्रे की संधि तुर्की और मित्र राष्ट्रों के बीच हुई थी। इस संधि से तुर्की के साम्राज्य का विभाजन हो गया था.
In simple words: यह संधि तुर्की और मित्र देशों के बीच हुई थी।

🎯 Exam Tip: संधियों के नाम और वे किन देशों के बीच हुईं, यह अक्सर पूछा जाता है; इन्हें ठीक से याद करें।

 

Question 14. अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा योगदान क्या था?
Answer: अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा योगदान 'राष्ट्रसंघ की स्थापना' था। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में ऐसे युद्धों को रोकना और शांति बनाए रखना था.
In simple words: विश्व युद्ध का सबसे बड़ा नतीजा 'राष्ट्रसंघ' का बनना था, जिसका लक्ष्य दुनिया में शांति लाना था।

🎯 Exam Tip: राष्ट्रसंघ की स्थापना को प्रथम विश्व युद्ध के एक प्रमुख परिणाम के रूप में याद रखें, खासकर अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में।

 

Question 15. रूस का समाज किन तीन श्रेणियों में बँटा हुआ था?
Answer: रूस का समाज कुलीन वर्ग, मध्यम वर्ग और सर्वहारा वर्ग (जो श्रमिक और किसान थे) - इन तीन श्रेणियों में बँटा हुआ था। यह विभाजन समाज में बड़ी असमानता दिखाता था.
In simple words: रूस का समाज तीन हिस्सों में बंटा था - अमीर (कुलीन), मध्यम वर्ग और गरीब मजदूर-किसान (सर्वहारा)।

🎯 Exam Tip: समाज के वर्गीकरण को उसके आर्थिक और सामाजिक स्थिति के आधार पर समझने का प्रयास करें।

 

Question 16. किसका कहना था कि-“जार दुनिया में किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं है।"
Answer: यह कथन पीटर महान का था, जिन्होंने कहा था कि "जार दुनिया में किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं है।" यह कथन जार की पूर्ण सत्तावादी और निरंकुश शासन व्यवस्था को दर्शाता है.
In simple words: पीटर महान ने कहा था कि जार को किसी को भी जवाब देने की ज़रूरत नहीं है।

🎯 Exam Tip: ऐसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कथन और उन्हें कहने वाले व्यक्ति का नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है।

 

Question 17. मार्च 1917 की रूसी क्रांति का आरंभ किस घटना के साथ हुआ?
Answer: मार्च 1917 ई. की रूसी क्रांति का आरंभ पेट्रोग्राद में हुई मजदूर हड़ताल के साथ हुआ। यह हड़ताल भोजन की कमी और युद्ध से उपजे असंतोष के कारण हुई थी.
In simple words: 1917 की रूसी क्रांति पेट्रोग्राद में मजदूरों की हड़ताल से शुरू हुई थी।

🎯 Exam Tip: किसी भी क्रांति की शुरुआत के तात्कालिक कारण को हमेशा याद रखें।

 

Question 18. 'दास कैपिटल' किसकी रचना है?
Answer: 'दास कैपिटल' कार्ल मार्क्स की रचना है। यह समाजवाद के सिद्धांतों पर आधारित एक महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक पुस्तक है.
In simple words: 'दास कैपिटल' को कार्ल मार्क्स ने लिखा था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख पुस्तकों और उनके लेखकों के नाम को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर इतिहास और राजनीति विज्ञान में।

 

Question 20. सोशल डेमोक्रेटिक दल का विभाजन कब हुआ ? विभाजन के परिणामस्वरूप इसके दो दल कौन-से बने ?
Answer: सोशल डेमोक्रेटिक दल का विभाजन 1903 ई. में हुआ था। इसके परिणामस्वरूप दो दल बने - बोल्शेविक दल और मेन्शेविक दल। बोल्शेविक दल लेनिन के नेतृत्व में था और अधिक क्रांतिकारी था, जबकि मेन्शेविक दल थोड़ा नरम था.
In simple words: सोशल डेमोक्रेटिक दल 1903 में बोल्शेविक और मेन्शेविक दलों में बँट गया।

🎯 Exam Tip: रूसी क्रांति के संदर्भ में बोल्शेविक और मेन्शेविक दलों के विभाजन और उनके नेताओं को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 21. 'चेका' को किसने संगठित किया?
Answer: 'चेका' को लेनिन ने संगठित किया था। यह बोल्शेविक सरकार की गुप्त पुलिस थी, जिसका काम क्रांति विरोधियों को दबाना था.
In simple words: लेनिन ने 'चेका' नाम की गुप्त पुलिस बनाई थी।

🎯 Exam Tip: चेका के गठन और उसके उद्देश्य को रूसी क्रांति के संदर्भ में याद रखें।

 

Question 22. लेनिन की मृत्यु कब हुई?
Answer: लेनिन की मृत्यु 1924 ई. में हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद स्टालिन ने सत्ता संभाली.
In simple words: लेनिन की मृत्यु 1924 में हुई।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तियों की जन्म और मृत्यु की तिथियाँ याद रखना सहायक होता है।

 

Question 23. स्टालिन का पूरा नाम क्या था?
Answer: स्टालिन का पूरा नाम जोसेफ विसरियोनोविच जुगविली था। उन्होंने बाद में 'स्टालिन' नाम अपनाया, जिसका अर्थ 'स्टील जैसा' होता है.
In simple words: स्टालिन का पूरा नाम जोसेफ विसरियोनोविच जुगविली था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख नेताओं के मूल और अपनाए गए नामों को जानना इतिहास को बेहतर समझने में मदद करता है।

 

Question 24. स्टालिन ने किसके सहयोग से ट्रॉटस्की को पराजित कर सर्वोच्च सत्ता अर्जित की?
Answer: स्टालिन ने कमेनेव और जिनोवेव के सहयोग से ट्रॉटस्की को हराकर सर्वोच्च सत्ता प्राप्त की थी। ये दोनों बोल्शेविक दल के प्रमुख सदस्य थे.
In simple words: स्टालिन ने सत्ता पाने के लिए ट्रॉटस्की को हराने में कमेनेव और जिनोवेव की मदद ली।

🎯 Exam Tip: सत्ता संघर्षों में शामिल प्रमुख व्यक्तियों और उनके गठबंधनों को ध्यान में रखें।

 

RBSE Class 11 History Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व एशिया व अफ्रीका महाद्वीप में यूरोप के किन देशों के उपनिवेश स्थापित थे?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध से पहले, एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में यूरोप के इन देशों ने अपने उपनिवेश स्थापित किए थे:
1. एशिया में भारत, श्रीलंका, बर्मा और मलाया पर इंग्लैण्ड का अधिकार था। फारस (ईरान), अफगानिस्तान, तिब्बत और नेपाल इंग्लैण्ड के प्रभाव क्षेत्र में थे.
2. हिन्द-चीन (वियतनाम, लाओस, कंबोडिया) और इंडोनेशिया पर फ्रांस का अधिकार था.
In simple words: युद्ध से पहले, एशिया और अफ्रीका में इंग्लैण्ड (जैसे भारत पर) और फ्रांस (जैसे हिन्द-चीन पर) के उपनिवेश थे।

🎯 Exam Tip: उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के उदाहरणों को हमेशा विशिष्ट देशों और उनके उपनिवेशों के साथ याद रखें।

 

Question 3. औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा ने किस प्रकार प्रथम विश्व युद्ध को निमंत्रण दिया?
Answer: 19वीं शताब्दी में यूरोप में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ, जिससे उन्हें कच्चे माल और तैयार उत्पादों के लिए नए बाजारों की ज़रूरत पड़ी। इस वजह से वे उपनिवेश बनाने लगे। बढ़ती आबादी और सेना की ज़रूरतों ने भी उन्हें उपनिवेश बनाने के लिए उकसाया। इंग्लैण्ड और फ्रांस ने सबसे ज्यादा उपनिवेश बनाए।
1890 के बाद जर्मनी ने भी उपनिवेश पाने की कोशिशें शुरू कीं। रूस और ऑस्ट्रिया ने भी अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया। इटली भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हो गया। इस औपनिवेशिक होड़ के कारण देशों के बीच नफरत और अविश्वास बढ़ा, जिससे वे सब प्रथम विश्व युद्ध में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए.
In simple words: देशों को ज्यादा माल बेचने और कच्चा माल पाने के लिए उपनिवेश चाहिए थे। इस होड़ ने देशों के बीच दुश्मनी बढ़ाई, जिससे पहला विश्व युद्ध छिड़ गया।

🎯 Exam Tip: औपनिवेशिक प्रतिस्पर्धा को प्रथम विश्व युद्ध के मुख्य कारणों में से एक के रूप में विस्तार से समझाएं, जिसमें विभिन्न देशों के उदाहरण शामिल हों।

 

Question 4. शांति सम्मेलन कब हुआ? इसमें पराजित राष्ट्रों की मित्र राष्ट्रों के साथ हुई संधियों का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध खत्म होने के बाद स्थायी शांति लाने के लिए 1919 ई. में पेरिस में शांति सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में हारे हुए देशों के साथ मित्र राष्ट्रों ने कई संधियाँ कीं, जो इस प्रकार थीं:
1. सेन्ट जर्मन की संधि: यह ऑस्ट्रिया के साथ हुई। इसमें ऑस्ट्रिया को दक्षिणी टिरोल, ट्रेन्टिनो, इस्ट्रिया और डालमेशिया के कुछ द्वीप इटली को देने पड़े.
2. ट्रियानो संधि: यह हंगरी के साथ हुई। हंगरी को गेर मेम्यार लोगों पर अपना अधिकार छोड़ना पड़ा। हंगरी की सेना को घटाकर 35 हजार सैनिक कर दिया गया और उसकी नौसेना को भी भंग कर दिया गया.
3. न्यली संधि: यह बुल्गेरिया के साथ हुई। बुल्गेरिया को प्रथम विश्व युद्ध और बाल्कन युद्धों में जीते गए सभी प्रदेश वापस लौटाने पड़े। उसकी सैनिक संख्या घटाकर 33 हजार कर दी गई और उसे 5 लाख डॉलर क्षतिपूर्ति के रूप में देने पड़े.
4. सेब्रे की संधि: यह तुर्की के साथ हुई। इसके अनुसार डोडेकनीज द्वीप समूह और रोड्स के प्रदेश इटली को दिए गए.
5. वर्साय की संधि: यह जर्मनी के साथ हुई। इसमें जर्मनी को अपने कई महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र फ्रांस को देने पड़े.
In simple words: प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1919 में पेरिस में शांति सम्मेलन हुआ। इसमें हारे हुए देशों से कई संधियाँ करवाई गईं, जैसे ऑस्ट्रिया से सेन्ट जर्मन, हंगरी से ट्रियानो, बुल्गेरिया से न्यली, तुर्की से सेब्रे और जर्मनी से वर्साय की संधि।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक संधि के मुख्य प्रावधानों और उससे जुड़े देशों को ध्यान से याद रखें। यह युद्ध के परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. रौलट एक्ट क्या था ? भारतीयों ने इसका विरोध किस प्रकार किया ?
Answer: रौलट एक्ट 1919 में ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय विरोधी क्रांतिकारी गतिविधियों को दबाने के लिए पास किया गया था। इस कानून के माध्यम से ब्रिटिश सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के गिरफ्तार कर सकती थी और उसके मौलिक अधिकारों का हनन करती थी।
इंग्लैण्ड ने प्रथम विश्व युद्ध में भारत से सहयोग के बदले संवैधानिक सुधारों का वादा किया था, लेकिन युद्ध के बाद अंग्रेजों ने भारतीयों का दमन करना शुरू कर दिया। अंग्रेजों ने भारतीयों के खिलाफ निम्नलिखित नीतियां अपनाईं:
1. रौलट एक्ट द्वारा इंग्लैण्ड ने भारतीयों के मौलिक अधिकारों को दबा दिया.
2. भारतीय प्रेस पर सख्त नियम लागू किए गए.
3. 1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम में भारतीयों को स्वशासन का कोई प्रावधान नहीं दिया गया.
4. तुर्की में मुस्लिमों के खलीफा पद को हटा दिया गया, जिसके विरोध में भारतीय मुसलमानों ने खिलाफत आंदोलन शुरू किया.
5. ब्रिटिश सरकार ने अकाल और महामारी के समय भी भारतीयों को पर्याप्त सहायता न देकर उनका आर्थिक शोषण किया.
In simple words: रौलट एक्ट एक कठोर कानून था जिससे अंग्रेज किसी को भी बिना मुकदमे के गिरफ्तार कर सकते थे। भारतीय लोगों ने इस कानून का बहुत विरोध किया, क्योंकि यह उनके अधिकारों को छीन रहा था।

🎯 Exam Tip: रौलट एक्ट के मुख्य प्रावधानों और भारतीयों द्वारा किए गए विरोध के तरीकों को याद रखें, क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

 

Question 7. रूसी साम्राज्य की विदेश नीति के क्या उद्देश्य थे ?
Answer: रूसी साम्राज्य दुनिया के कुल भू-भाग के 1/6 हिस्से पर फैला हुआ था। एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक फैला होने के कारण रूस के संबंध कई देशों से थे। रूस की विदेश नीति के मुख्य उद्देश्य ये थे:
1. सीमाओं की सुरक्षा करना.
2. काला सागर में बिना रोक-टोक जहाजों का आवागमन सुनिश्चित करना.
3. कमजोर राज्यों को जीतकर उनमें अपना हिस्सा प्राप्त करना.
4. मध्य एशिया में ब्रिटेन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को रोकना.
5. पूर्वी एशिया में जापानी साम्राज्य के विस्तार को रोकते हुए अपना प्रभुत्व बनाए रखना.
In simple words: रूस अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखना चाहता था, काला सागर में व्यापार करना चाहता था, कमजोर राज्यों पर कब्जा करना चाहता था और एशिया में ब्रिटेन और जापान के प्रभाव को रोकना चाहता था।

🎯 Exam Tip: किसी भी साम्राज्य की विदेश नीति को समझने के लिए उसके भौगोलिक स्थिति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर ध्यान दें।

 

Question 8. बोल्शेविक सरकार को सत्ता में आने के पश्चात् किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
Answer: लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक दल ने 7 नवंबर 1917 ई. को सत्ता हासिल की। 8 नवंबर 1917 ई. को लेनिन की अध्यक्षता में नई सरकार बनी। इस नई बोल्शेविक सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें राजनीतिक दलों के विरोध के साथ-साथ अन्य चुनौतियाँ भी शामिल थीं:
पुराने समर्थक और सैन्य अधिकारी बोल्शेविक सरकार से असंतुष्ट थे.
In simple words: सत्ता में आने के बाद बोल्शेविक सरकार को दूसरे दलों के विरोध और पुराने समर्थकों व सेना के असंतोष जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

🎯 Exam Tip: किसी भी नई सरकार के शुरुआती चुनौतियों को समझना उस दौर की राजनीतिक स्थिति को जानने में मदद करता है।

 

Question 9. रूसी क्रांति ने आर्थिक असमानता को किस प्रकार दूर किया ?
Answer: क्रांति से पहले रूस में बहुत आर्थिक असमानता थी। कुलीन वर्ग बहुत अमीर था, जबकि गरीब लोगों (सर्वहारा) के पास कोई अधिकार नहीं थे और उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब थी। क्रांति के बाद रूसी जनता की आर्थिक स्थिति में सुधार हुए और आर्थिक असमानता कम हुई। ये सुधार इस प्रकार थे:
1. जागीरदारों से भूमि लेकर सरकार ने किसानों में बांटने की प्रक्रिया शुरू की.
2. उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया, यानी उन्हें सरकार के नियंत्रण में ले लिया गया.
3. निजी व्यापार को सीमित किया गया और उत्पादन से जुड़े श्रम को ज्यादा महत्व दिया गया.
4. आय के असमान वितरण को नियंत्रित किया गया.
5. श्रमिकों और किसानों की काम करने की स्थिति और जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए.
In simple words: रूसी क्रांति ने जमीन अमीरों से लेकर गरीबों को दी, उद्योगों को सरकारी बनाया, निजी व्यापार कम किया, आय की असमानता घटाई और मजदूरों-किसानों की हालत सुधारी।

🎯 Exam Tip: आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए बोल्शेविकों द्वारा उठाए गए कदमों को याद रखें, जैसे भूमि सुधार और राष्ट्रीयकरण।

 

Question 10. ट्रॉटस्की कौन था ? उसने बोल्शेविक सरकार में क्या भूमिका निभाई ?
Answer: ट्रॉटस्की पेट्रोग्राद क्रांतिकारी सोवियत (परिषद) का अध्यक्ष था। बाद में वह बोल्शेविक सरकार में विदेश मंत्री बना। विदेशी सेनाओं का सामना करने के लिए ट्रॉटस्की ने लाल सेना का नेतृत्व किया, जिससे बोल्शेविक सरकार को जीत मिली।
1924 में लेनिन की मृत्यु के बाद, सरकार के सर्वोच्च पद के लिए ट्रॉटस्की और स्टालिन के बीच सत्ता संघर्ष हुआ, जिसमें स्टालिन सफल रहा। ट्रॉटस्की को 1927 में पार्टी से निकाल दिया गया। रूस छोड़ने के बाद, ट्रॉटस्की ने कुस्तुन्तुनिया के पास रहकर अपनी आत्मकथा लिखी, बोल्शेविक क्रांति का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और स्टालिनवाद की आलोचना की.
In simple words: ट्रॉटस्की बोल्शेविक सरकार में विदेश मंत्री था और उसने लाल सेना का नेतृत्व करके सरकार को जिताया। लेनिन की मृत्यु के बाद स्टालिन ने उसे हरा दिया और पार्टी से बाहर निकाल दिया।

🎯 Exam Tip: ट्रॉटस्की की भूमिका को लाल सेना के प्रमुख और लेनिन के बाद सत्ता संघर्ष के एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में याद रखें।

 

Question 11. टिप्पणी लिखिए -
1. लाल सेना
2. श्वेत सेना
3. चेका।
Answer:
1. लाल सेना:
बोल्शेविक पार्टी ने विदेशी सेनाओं और जार निकोलस द्वितीय के पुराने सेनापतियों का सामना करने के लिए एक शक्तिशाली सेना बनाई थी, जिसे लाल सेना के नाम से जाना जाता था। ट्रॉटस्की के नेतृत्व में लाल सेना अत्यधिक प्रभावशाली हो गई थी.
2. श्वेत सेना:
विदेशी सेनाओं और जार निकोलस द्वितीय के पूर्व सेनापतियों द्वारा मित्र राज्यों के सहयोग से बोल्शेविकों का विनाश करने के लिए श्वेत सेना स्थापित की गई थी.
3. चेका:
रूस में बोल्शेविकों ने क्रांति विरोधियों को दबाने के लिए एक गुप्त न्यायालय बनाया था, जिसे 'चेका' कहते थे। इस न्यायालय का अध्यक्ष फेलिक्सकेरे जिस्की था। इसके नेतृत्व में हजारों क्रांति विरोधियों को पकड़कर मार दिया गया था। चेका ने आतंक और निर्मम कार्यों से विरोधियों को पूरी तरह खत्म कर दिया था.
In simple words: लाल सेना बोल्शेविकों की सेना थी। श्वेत सेना उनके विरोधियों की सेना थी, जिसे विदेशी देशों का समर्थन मिला था। चेका बोल्शेविकों की गुप्त पुलिस थी, जिसका काम क्रांति विरोधियों को खत्म करना था।

🎯 Exam Tip: रूसी क्रांति के दौरान प्रमुख सैन्य और गुप्त संगठनों जैसे लाल सेना, श्वेत सेना और चेका के उद्देश्यों और भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 12. स्टालिन के जीवन पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए।
Answer: स्टालिन का जन्म 1879 ई. में रूस के गोरी गाँव में एक चर्मकार परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम जोसेफ विसरियोनोविच जुगश्विली था। उनके पिता चाहते थे कि वे पादरी बनें, लेकिन उन्हें मार्क्सवाद में रुचि थी। वे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी में शामिल हो गए और 1903 ई. में लेनिन के पहले अनुयायियों में से एक बने। 1902-13 ई. के बीच स्टालिन को 6 बार गिरफ्तार करके निर्वासित किया गया, लेकिन वे पाँच बार जेल से भागने में सफल रहे।
1913 ई. में उन्हें निर्वासित करके आर्कटिक वृत्त भेज दिया गया, जहाँ से वे मार्च 1917 ई. की क्रांति के बाद मुक्त हुए। रूस आने के बाद, स्टालिन बोल्शेविक पार्टी के महासचिव बने और बाद में उन्हें राष्ट्रिक जातियों का मंत्री भी बनाया गया। लेनिन की मृत्यु के बाद, स्टालिन ने अपने प्रतिद्वंद्वी ट्रॉटस्की को रूस से निर्वासित करके बोल्शेविक सरकार का सर्वोच्च पद हासिल किया। उनके लंबे शासनकाल में सोवियत संघ ने बहुत प्रगति की। 06 मार्च 1953 ई. में स्टालिन की मृत्यु हो गई.
In simple words: स्टालिन एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे। वे लेनिन के समर्थक बने और बाद में बोल्शेविक पार्टी के महासचिव और फिर नेता बने। उन्होंने ट्रॉटस्की को हराकर सत्ता संभाली और सोवियत संघ को आगे बढ़ाया। उनकी मृत्यु 1953 में हुई।

🎯 Exam Tip: स्टालिन के जीवन की प्रमुख घटनाओं, जैसे लेनिन के साथ उनका संबंध, सत्ता संघर्ष और सोवियत संघ में उनकी भूमिका, को याद रखें।

 

RBSE Class 11 History Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 1900 ई. के पश्चात् कौन-सी ऐसी घटनाएँ घटित हुईं जिनके कारण अन्तर्राष्ट्रीय अराजकता का वातावरण बना तथा प्रथम विश्व युद्ध हुआ ?
Answer: 20वीं सदी की शुरुआत के साथ ही दुनिया की राजनीति में एक नया मोड़ आया। यूरोप के अधिकांश देश उपनिवेशवाद और औद्योगीकरण की प्रतिस्पर्धा में उलझ गए। शक्तिशाली देश छोटे-छोटे राज्यों को बाँटकर अपने स्वार्थ पूरे करने लगे। राष्ट्रों की इस नीति से यूरोप में अशांति और अराजकता फैल गई। 1900 ई. के बाद हुई कुछ प्रमुख घटनाएँ, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अराजकता और प्रथम विश्व युद्ध को जन्म दिया, वे इस प्रकार थीं:
1. 1904 – 05 ई. का रूस-जापान युद्ध:
1904-05 ई. में रूस और जापान के बीच हुए युद्ध में रूस की हार हुई। इस युद्ध ने रूस की विदेश नीति और आर्थिक राजनीति को कमजोर किया। इस पराजय के कारण रूस की कमजोरी का फायदा उठाने के लिए जर्मनी ने मोरक्को को लेकर फ्रांस को चुनौती दी, जिससे अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में गंभीर संकट की स्थिति पैदा हो गई.
3. ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया, हर्जेगोविना पर आक्रमण कर राज्य में मिलाना:
1908-09 ई. में ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया और हर्जेगोविना को अपने साम्राज्य में मिलाने से एक बड़ा संकट पैदा हो गया। इसके परिणामस्वरूप रूस और इटली के साथ ऑस्ट्रिया के संबंध बिगड़ गए.
4. बाल्कन युद्ध:
1912-13 ई. के बाल्कन युद्धों ने भी अंतर्राष्ट्रीय वातावरण को बहुत तनावपूर्ण बना दिया। इन युद्धों के कारण सैन्य शक्ति बढ़ाने और हथियारों की होड़ बहुत बढ़ गई.
5. ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर आक्रमण:
28 जुलाई 1914 ई. को ऑस्ट्रिया द्वारा सर्बिया पर आक्रमण किए जाने के साथ ही प्रथम विश्व युद्ध शुरू हो गया, जिसके गंभीर परिणाम हुए। इस प्रकार, इन घटनाओं ने पूरी दुनिया में अराजकता और तनाव की स्थिति पैदा की, जिसने पूरे विश्व को प्रथम महायुद्ध की आग में झोंक दिया.
In simple words: 1900 के बाद, रूस-जापान युद्ध, ऑस्ट्रिया का बोस्निया पर कब्जा, बाल्कन युद्ध और ऑस्ट्रिया का सर्बिया पर हमला जैसी घटनाओं ने दुनिया में अशांति और तनाव फैला दिया। इन्हीं कारणों से पहला विश्व युद्ध शुरू हुआ।

🎯 Exam Tip: प्रथम विश्व युद्ध के कारणों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें, जिनमें रूस-जापान युद्ध, बाल्कन युद्ध और प्रमुख शक्तियों के बीच तनाव शामिल हैं।

 

Question 2. वर्साय की संधि जर्मनी के लिए अपमानजनक क्यों थी?
Answer: 1919 ई. में पेरिस में हुए शांति सम्मेलन में हारे हुए और मित्र राष्ट्रों के बीच कई संधियाँ हुईं, जिनमें वर्साय की संधि सबसे महत्वपूर्ण थी। यह संधि जर्मनी और मित्र राष्ट्रों के बीच हुई थी। इस संधि के प्रावधानों ने जर्मनी को आर्थिक और सैनिक दोनों तरह से बहुत नुकसान पहुँचाया। वर्साय संधि की कठोर और अपमानजनक शर्तों ने जर्मनी के अस्तित्व पर गहरा प्रहार किया। ये शर्तें निम्नलिखित थीं:
1. जर्मनी को अल्सास-लारेन के प्रांत फ्रांस को वापस देने पड़े.
2. जर्मनी की खनिज से भरपूर 'सार घाटी' 15 वर्षों के लिए फ्रांस को उपयोग करने के लिए दी गई.
3. जर्मनी के कब्जे वाले श्लेसविग' प्रांत में जनमत संग्रह करवाकर उसे डेनमार्क को दिया गया.
4. जर्मनी के डेन्जिंग बंदरगाह को राष्ट्रसंघ के संरक्षण में छोड़ना पड़ा.
5. जर्मनी के समुद्रपार के सभी उपनिवेशों पर मित्र राष्ट्रों का अधिकार मान लिया गया.
6. जर्मनी में अनिवार्य सैनिक सेवा खत्म कर दी गई और उसकी थल सेना की संख्या एक लाख निर्धारित की गई.
7. जर्मनी को वायु सेना रखने का अधिकार खत्म कर दिया गया.
8. जर्मनी की नौ सैनिक शक्ति को भी सीमित कर दिया गया.
9. जर्मनी को 1921 ई. तक 5 अरब डॉलर की युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में देने के लिए मजबूर किया गया.
10. जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ी.
In simple words: वर्साय की संधि जर्मनी के लिए अपमानजनक थी क्योंकि इससे उसे अपने प्रांत, उपनिवेश और सेना गँवानी पड़ी, साथ ही उसे भारी जुर्माना भरना पड़ा और युद्ध की पूरी जिम्मेदारी लेनी पड़ी।

🎯 Exam Tip: वर्साय की संधि के प्रावधानों को विस्तार से याद करें, क्योंकि यह संधि जर्मनी के लिए बहुत कठोर थी और द्वितीय विश्व युद्ध का एक अप्रत्यक्ष कारण भी बनी।

 

Question 3. प्रथम विश्व युद्ध से भारत के राजनैतिक वातावरण में क्या परिवर्तन आया ?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत इंग्लैण्ड का एक बड़ा और महत्वपूर्ण उपनिवेश था। भारत का सीधे तौर पर युद्ध से संबंध नहीं था, लेकिन इंग्लैण्ड ने युद्ध शुरू होते ही भारत को उसमें शामिल कर लिया। भारत के लिए यह युद्ध केवल इंग्लैण्ड के हित के लिए था। 1914 ई. में प्रथम विश्व युद्ध की घोषणा से देश के राजनीतिक माहौल में बड़ा बदलाव आया। भारत की राजनीतिक संस्था कांग्रेस में उस समय दो दल थे - उदारवादी और उग्रवादी, और दोनों ब्रिटिश सरकार की नीतियों के बारे में अलग-अलग विचार रखते थे।
1. इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र को बचाने के लिए जर्मनी की हार को ज़रूरी बताया और भारत से मदद माँगी। कांग्रेस के उदारवादी नेताओं को लगा कि इंग्लैण्ड लोकतंत्र के लिए लड़ रहा है और युद्ध के बाद भारत को भी लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। यह सोचकर भारत ने पूरी निष्ठा से इंग्लैण्ड की सहायता करने का निश्चय किया.
2. जनवरी 1915 ई. के बाद गाँधीजी भारतीय राजनीति में ब्रिटिश सरकार के सहयोगी के रूप में सामने आए। उन्होंने भारतीयों को ब्रिटिश सरकार की सहायता करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भी यह महसूस किया कि अंग्रेज सिद्धांतों की रक्षा के लिए यह युद्ध लड़ रहे हैं.
3. उग्रवादी नेताओं के विचार इस संबंध में अलग थे। वे गाँधी जी और उदारवादियों की तरह अंग्रेजों का साथ नहीं देना चाहते थे। तिलक और एनीबेसेन्ट का मानना था कि अंग्रेज इस समय परिस्थितियों के कारण भारतीयों से मदद माँग रहे हैं, लेकिन युद्ध के बाद वे फिर से अपनी पुरानी नीति पर चलेंगे.
इन विरोधाभासों के बावजूद भी भारत की शोषित जनता ने अपने सभी संसाधनों के साथ इंग्लैण्ड का साथ दिया। भारत ने इस युद्ध के लिए 10 करोड़ पौंड युद्ध कोष में दिए और अपनी सेनाओं पर प्रतिवर्ष 30 करोड़ पौंड खर्च किए, लेकिन इंग्लैण्ड से भारतीयों को बदले में अकाल, महामारी, आर्थिक शोषण, प्रेस पर कठोर नियम और अन्य दमनकारी नीतियाँ मिलीं। युद्ध के बाद अंग्रेजों के कार्यों से यह साफ हो गया कि तिलक और एनीबेसेन्ट का आकलन बिल्कुल सही था। अंग्रेजों ने भारतीयों को प्रथम विश्व युद्ध में उनके बलिदानों के बदले में दमन और विश्वासघात दिया.
In simple words: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत ने अंग्रेजों का साथ दिया, यह सोचकर कि उन्हें स्वतंत्रता मिलेगी। लेकिन युद्ध के बाद अंग्रेजों ने वादे पूरे नहीं किए, बल्कि दमन बढ़ा दिया, जिससे भारतीयों में गुस्सा और असंतोष बढ़ा।

🎯 Exam Tip: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों की भूमिका और ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया को विस्तार से समझें।

 

Question 4. प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व यूरोपीय राज्यों की स्थिति का वर्णन कीजिए?
Answer: प्रथम विश्व युद्ध से पहले यूरोपीय राज्यों की स्थिति इस प्रकार थी:
1. इंग्लैण्ड:
इस समय इंग्लैण्ड यूरोप में सबसे समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र था। उसके पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ नौसेना थी। इंग्लैण्ड का व्यापार विश्व के हर हिस्से में फैला हुआ था। इस समय इंग्लैण्ड की रुचि यूरोप की आंतरिक राजनीति में नहीं थी.
2. जर्मनी:
यूरोप के बीच में स्थित जर्मनी के सम्राट विलियम द्वितीय के नेतृत्व में वह यूरोप का अधिनायक बनना चाहता था। जर्मनी भी एक शक्तिशाली राज्य बन चुका था, लेकिन उसके पास उपनिवेशों की संख्या कम थी, इसलिए वह इंग्लैण्ड को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानता था.
3. रूस:
क्षेत्रफल की दृष्टि से रूस यूरोप का सबसे बड़ा राज्य था। यहाँ निरंकुश जारशाही थी। इस समय रूस की रुचि बाल्कन प्रदेश में थी, जहाँ बड़ी संख्या में उसके अपने स्लाव लोग रहते थे। रूस ओटोमन साम्राज्य को खत्म करके एक बड़ा स्लाव राज्य बनाना चाहता था, जिसमें ऑस्ट्रिया सबसे बड़ी बाधा थी.
4. फ्रांस:
फ्रांस इस समय जर्मनी से अल्सेस-लारेन क्षेत्र वापस लेकर अपने पुराने गौरव को पाना चाहता था। फ्रांस ने हिन्द-चीन, इंडोनेशिया और अफ्रीका में अपने कई उपनिवेश स्थापित कर रखे थे.
5. ऑस्ट्रिया:
यूरोप में ऑस्ट्रिया बाल्कन क्षेत्र में रूस और सर्बिया के साथ उलझा हुआ था। 1908-09 ई. में ऑस्ट्रिया ने बोस्निया-हर्जेगोविना क्षेत्र को अपने राज्य में मिला लिया, जिससे रूस, सर्बिया और इटली आदि देशों से ऑस्ट्रिया के संबंध बिगड़ गए.
In simple words: युद्ध से पहले, इंग्लैण्ड समुद्री शक्ति में सबसे आगे था। जर्मनी एक बड़ी शक्ति बनना चाहता था और इंग्लैण्ड को प्रतिद्वंद्वी मानता था। रूस बाल्कन क्षेत्र में प्रभाव चाहता था। फ्रांस जर्मनी से बदला लेना चाहता था। ऑस्ट्रिया रूस और सर्बिया से उलझा हुआ था।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक यूरोपीय शक्ति की महत्वाकांक्षाओं, सैन्य क्षमताओं और क्षेत्रीय हितों को याद रखें, क्योंकि ये सभी प्रथम विश्व युद्ध के कारणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 5. पेरिस शांति सम्मेलन (1919 ई.) में हुई संधियों का विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: पेरिस शांति सम्मेलन (1919 ई.) में हुई संधियाँ निम्नलिखित थीं:
1. सेन्ट जर्मन संधि:
मित्र राष्ट्रों ने ऑस्ट्रिया-हंगरी के साम्राज्य को भंग करके ऑस्ट्रिया के साथ 'सेन्ट जर्मन' की संधि की। इसके द्वारा इटली को ऑस्ट्रिया के दक्षिणी टिरोल, ट्रेन्टिनो, इस्ट्रिया और डालमेशिया के तटवर्ती द्वीप मिले.
2. ट्रियानो संधि:
मित्र राष्ट्रों ने हंगरी के साथ ट्रियानो की संधि की। हंगरी ने गैर-हंगेरियन लोगों पर अपना अधिकार छोड़ दिया। हंगरी की सेना घटाकर 35 हजार कर दी गई और उसकी नौसेना को भंग कर दिया गया.
3. न्यली संधि:
मित्र राष्ट्रों ने बुल्गारिया के साथ न्यली की संधि की। बुल्गारिया को प्रथम विश्व युद्ध और बाल्कन युद्धों में जीते गए सभी प्रदेश वापस लौटाने पड़े। उसकी सैनिक संख्या घटाकर 33 हजार कर दी गई और उसे 5 लाख डॉलर युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में देने पड़े.
4. सेब्रे की संधि:
मित्र राष्ट्रों ने तुर्की के साथ सेब्रे की संधि की। इसके तहत डोडेकनीज द्वीप समूह, रोड्स के प्रदेश इटली को दिए गए.
5. वर्साय संधि:
मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के साथ वर्साय की संधि की। इसके अनुसार:
• अल्सेस-लारेन के प्रदेश फ्रांस को वापस मिले.
• खनिज पदार्थों से भरपूर सार घाटी 15 वर्षों के लिए फ्रांस को दी गई.
• जर्मन कब्जे वाले श्लेसविग को जनमत संग्रह के आधार पर डेनमार्क को दिया गया.
• जर्मनी के सारे उपनिवेशों पर मित्र राष्ट्रों का अधिकार मान लिया गया.
• जर्मनी ने अनिवार्य सैनिक सेवा समाप्त कर दी.
• जर्मनी की सैन्य संख्या अधिकारियों सहित एक लाख निर्धारित की गई और वायु सेना व नौसेना सीमित कर दी गई.
• जर्मनी द्वारा राइन नदी के पूर्वी भाग में किलेबंदी प्रतिबंधित की गई.
• जर्मनी को 5 अरब डॉलर की युद्ध क्षतिपूर्ति 1921 ई. तक देनी पड़ी.
• जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध की जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ी.
In simple words: पेरिस शांति सम्मेलन में कई संधियाँ हुईं। सेन्ट जर्मन संधि से ऑस्ट्रिया को इटली को क्षेत्र देने पड़े। ट्रियानो संधि से हंगरी की सेना कम हुई। न्यली संधि से बुल्गारिया को क्षेत्र लौटाने पड़े। सेब्रे संधि से तुर्की को इटली को क्षेत्र देने पड़े। वर्साय संधि जर्मनी के लिए सबसे कठोर थी, जिसमें उसे क्षेत्र, सेना और पैसे गंवाने पड़े।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक संधि के नाम, उससे प्रभावित देश और उसके प्रमुख प्रावधानों को विस्तार से याद रखें। ये संधियाँ युद्ध के बाद के यूरोपीय मानचित्र और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 6. प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक परिणाम निम्नलिखित थे:
1. आर्थिक विनाश:
1918 ई. में युद्ध खत्म होने के बाद पता चला कि इस महायुद्ध में 10 खरब रुपये सीधे तौर पर खर्च हुए और जानमाल का भी बहुत नुकसान हुआ.
2. जनशक्ति का विनाश:
प्रथम विश्व युद्ध में 80 लाख सैनिक मारे गए और लगभग 2 करोड़ लोग घायल हुए थे। इस विनाशकारी युद्ध में प्रतिदिन 7 हजार लोग मारे गए। बड़ी संख्या में लोग मारे गए, भुखमरी और गरीबी फैल गई.
3. युद्ध ऋण:
महायुद्ध में बहुत ज्यादा खर्च हुआ, जिससे दुनिया में सरकारों के कर्ज बहुत बढ़ गए। 1914 ई. में दोनों पक्षों पर कुल 8 हजार करोड़ का कर्ज था, जो 1918 ई. तक बढ़कर पाँच गुना यानी 40 हजार करोड़ हो गया। इस महायुद्ध में लगभग 13 हजार दो सौ करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। इस भारी नुकसान के कारण कीमतें और मजदूरी बढ़ी, उत्पादन घटा, मुद्रा की कीमत गिरी और व्यापार व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा हो गई.
5. मुद्रा प्रसार:
प्रथम विश्व युद्ध में अरबों रुपये खर्च हुए, और ये रुपये किसी उत्पादक काम में नहीं, बल्कि विनाश के लिए इस्तेमाल हुए। इस स्थिति में सभी देशों ने अपने बढ़ते खर्चों को पूरा करने और कर्ज चुकाने के लिए बड़ी मात्रा में कागजी मुद्रा जारी कर दी, जिससे कीमतों में बहुत वृद्धि हो गई। कागजी मुद्रा का मूल्य बाजार में बहुत गिर गया। इस मुद्रास्फीति ने बचत को खत्म करके आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया.
In simple words: प्रथम विश्व युद्ध से बहुत पैसा बर्बाद हुआ, लाखों लोग मरे, देशों पर भारी कर्ज चढ़ गया और महंगाई बहुत बढ़ गई।

🎯 Exam Tip: प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक परिणामों को समझने के लिए, उसके विनाश, जनहानि, कर्ज और मुद्रास्फीति जैसे पहलुओं पर ध्यान दें।

 

Question 7. प्रथम विश्व युद्ध के सामाजिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।
Answer: प्रथम विश्व युद्ध के सामाजिक परिणाम निम्नलिखित थे:
1. अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान का प्रयास:
प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह समस्या पैदा हुई कि दुनिया में स्थायी रूप से बस चुके अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा कैसे की जाए। शांति सम्मेलन में पोलैण्ड, चेकोस्लोवाकिया आदि देशों से उनके राज्य में स्थायी रूप से रहने वाले नागरिकों (अल्पसंख्यक जातियों) की भाषा, धर्म, संस्कृति आदि की रक्षा की गारंटी माँगी गई, लेकिन इन देशों ने ऐसी गारंटी देने से मना कर दिया। परिणामस्वरूप अल्पसंख्यक जातियों की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका और उनमें अपनी अलग पहचान की भावना बनी रही.
2. महिलाओं की स्थिति में सुधार:
प्रथम विश्व युद्ध में महिलाओं की भूमिका अपनी पारंपरिक भूमिकाओं के अलावा आर्थिक उत्पादन के कार्यों में भी बढ़ गई। इस स्थिति में महिलाओं ने कारखानों और दुकानों आदि जगहों पर काम किया, जिन पर अब तक पुरुष अपना अधिकार समझते थे। इसके बाद हर देश में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व और अधिकार देने की बात उठने लगी.
3. प्रजातियों (नस्लों) की समानता:
19वीं सदी तक यूरोपीय देशों में यह भावना थी कि वे एशिया और अफ्रीका की प्रजातियों (नस्लों) से बेहतर हैं। लेकिन युद्ध की आवश्यकता के लिए एशिया और अफ्रीका के राज्यों से भी सैनिक यूरोप भेजे गए, जिन्होंने युद्ध में यूरोपीय नस्लों के बराबर ही साहस और वीरता दिखाई। इस तरह यूरोपीय नस्ल की श्रेष्ठता और उत्कृष्टता की भावना का विचार गलत साबित हुआ.
4. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का विकास:
महायुद्ध से उत्पन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ बनाई गईं। नशीले पदार्थों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाया गया। श्रमिकों के कल्याण और राजनीतिक समस्याओं को हल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ और राष्ट्र संघ की स्थापना की गई.
In simple words: युद्ध के बाद अल्पसंख्यकों की समस्याएँ बढ़ीं, महिलाओं को ज़्यादा अधिकार मिले, नस्लीय श्रेष्ठता का विचार खत्म हुआ और अंतर्राष्ट्रीय शांति संस्थाएँ बनीं।

🎯 Exam Tip: प्रथम विश्व युद्ध के सामाजिक परिणामों को याद रखें, जैसे अल्पसंख्यकों के अधिकार, महिलाओं की भूमिका में बदलाव और नस्लीय विचारों पर प्रभाव।

 

Question 8. रूसी क्रांति से पूर्व कृषकों व मजदूरों की स्थिति का वर्णन करो।
Answer: रूसी क्रांति से पहले कृषकों और मजदूरों की स्थिति इस प्रकार थी:
1. रूसी क्रांति से पूर्व कृषकों की स्थिति:
उनके पास बहुत कम या कोई भूमि नहीं थी।
• एक तिहाई किसान भूमिहीन थे। ये किसान जमींदारों की भूमि पर काम करते थे.
• किसानों को कई प्रकार के कर देने पड़ते थे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी.
• 1861 ई. के कृषि दासों की मुक्ति के नियम से भी किसानों की खराब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ.
• किसानों ने भूमिकर में कमी और सुविधा अधिकारों की मांग की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया.
• 1905 ई. में मास्को में किसान प्रतिनिधियों द्वारा 'रूसी कृषक संघ' का गठन हुआ.
• 1906 ई. के कानून को 'कम्यून' से अपनी भूमि अलग करने का अधिकार दिया गया.
• लेकिन इससे भूमिहीन किसानों को कोई फायदा नहीं मिला। परिणामस्वरूप किसान शासन व्यवस्था के विरोधी हो गए.
2. रूसी क्रांति से पूर्व मजदूरों की स्थिति –
• औद्योगिक क्रांति के कारण रूस में उद्योगों का विकास हुआ.
• भूमिहीन किसान रोजगार पाने के लिए शहरों के औद्योगिक केंद्रों पर पहुँचे.
• पूंजीपतियों और उद्योगपतियों ने इन श्रमिकों का बहुत अधिक शोषण किया.
• कठिन जीवन-निर्वाह और कम मजदूरी के कारण श्रमिकों की दशा बहुत दयनीय हो गई.
• 1885 ई. के बाद कुछ श्रमिक कानून बनाए गए, लेकिन इनसे मजदूरों को कोई फायदा नहीं मिला.
• सरकार की नीतियाँ भी उद्योगपतियों के पक्ष में थीं.
• समाजवादी दल ने इस स्थिति का फायदा उठाकर श्रमिकों में समाजवादी सिद्धांतों का प्रचार किया.
• 1902-03 ई. से ही मजदूरों की हड़तालें शुरू हो गईं.
• श्रमिक पूंजीवादी व्यवस्था और जारशाही को खत्म करके सर्वहारा वर्ग का शासन स्थापित करना चाहते थे.
• यहीं से रूसी क्रांति शुरू हुई, जिसने जारशाही शासन को खत्म कर दिया.
In simple words: क्रांति से पहले, किसान गरीब थे, भूमिहीन थे और भारी करों से दबे थे। मजदूर भी शहरों में शोषण का शिकार थे, उन्हें कम मजदूरी मिलती थी और उनकी हालत दयनीय थी। इन्हीं हालातों के कारण क्रांति हुई।

🎯 Exam Tip: रूसी क्रांति के कारणों को समझने के लिए, किसानों और मजदूरों की खराब आर्थिक और सामाजिक स्थिति को विस्तार से याद रखें।

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