RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 11 Hindi. Our expert-created answers for Class 11 Hindi are available for free download in PDF format.

Detailed काव्यांग परिचय छंद RBSE Solutions for Class 11 Hindi

For Class 11 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 11 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these काव्यांग परिचय छंद solutions will improve your exam performance.

Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद RBSE Solutions PDF

Rajasthan Board Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद

छन्द कविता की स्वाभाविक गति का एक नियम-बद्ध रूप है। सामान्य तौर पर जातीय संगीत और भाषा के आधार पर बनी लय की आवृत्ति को छन्द कहा जाता है। छन्द में निश्चित मात्रा या वर्ण की गणना की जाती है। छन्द के सबसे पहले आचार्य पिंगल थे, इसलिए छन्दशास्त्र को 'पिंगलशास्त्र' भी कहते हैं।

चरण-प्रत्येक छन्द चरणों में बंटा होता है। इनको पद या पाद भी कहते हैं। जैसे मनुष्य अपने चरणों पर चलता है, उसी तरह कविता भी चरणों पर चलती है। एक छन्द में ज्यादातर चार चरण होते हैं, जिन्हें आमतौर पर चार पंक्तियों में लिखा जाता है। कुछ छन्दों में, जैसे छप्पय और कुण्डलिया, छह चरण होते हैं। वर्ण और मात्राओं की गिनती करते समय वर्ण चाहे लघु हो या गुरु, उसे एक ही माना जाता है। उदाहरण के लिए, 'रम', 'राम', 'रामा' इन तीनों शब्दों में दो-दो वर्ण होते हैं। मात्रा का मतलब उच्चारण में लगने वाला समय होता है। गुरु में लघु से दुगुना समय लगता है, इसलिए मात्राओं की गिनती करते समय लघु की एक मात्रा और गुरु की दो मात्राएँ मानी जाती हैं। लघु का संकेत खड़ी रेखा '|' और गुरु का संकेत वक्र रेखा 'S' होता है। लघु के लिए 'ल' और गुरु के लिए 'ग' संकेतों का भी इस्तेमाल होता है।

गण-तीन अक्षरों के लघु-गुरु क्रम के समूह को गण कहते हैं। गणों को समझने के लिए नीचे दिया गया सूत्र बहुत उपयोगी है:

  • ‘यमाताराजभानसलग्’
गणलघु-गुरु क्रमसूत्रउदाहरण
4.रगणS I Sराजभाभारती
5.जगणI S Iजभानमिलाप
6.भगणS I Iभानसभारत
7.नगणI I Iनसलकमल
8.सगणI I Sसलगासरिता

• सम, अर्द्धसम और विषम।

जिन छन्दों के चारों चरणों की मात्राएँ या वर्ण एक जैसे होते हैं, उन्हें 'सम' छन्द कहते हैं; जैसे चौपाई, इन्द्रवज्रा आदि। जिन छन्दों में पहले और तीसरे चरण की मात्राएँ या वर्ण एक जैसे हों, और दूसरे व चौथे चरण की मात्राएँ या वर्ण एक जैसे हों, उन्हें 'अर्द्धसम' छन्द कहते हैं; जैसे दोहा, सोरठा आदि। जिन छन्दों में चार से ज्यादा (जैसे छह) चरण हों और वे आपस में एक जैसे न हों, उन्हें विषम छन्द कहते हैं; जैसे छप्पय और कुण्डलिया।

गति-कविता पढ़ते समय जो स्पष्ट और सुखद प्रवाह आता है, उसे गति कहते हैं।

यति-छन्दों में जहाँ पढ़ने में थोड़ा रुकना या ठहरना होता है, उसे यति कहते हैं।

छन्द के प्रकार

मात्रा और वर्ण के आधार पर छन्द मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं-मात्रिक और वर्णवृत्त। मात्रिक छन्दों में केवल मात्राओं की गिनती पर ध्यान दिया जाता है, वर्गों के लघु और गुरु के क्रम का विशेष महत्व नहीं होता। इन छन्दों के प्रत्येक चरण में मात्राओं की संख्या तय होती है। मात्रिक छन्द तीन तरह के होते हैं-सम, अर्द्धसम और विषम।

वर्णवृत्त छन्द-जिन छन्दों की रचना वर्गों की गिनती के आधार पर की जाती है, उन्हें वर्णवृत्त या वर्णिक छन्द कहते हैं। वर्णवृत्तों के भी तीन मुख्य भेद होते हैं-सम, अर्द्धसम, विषम।

कतिपय छंदों के उदाहरणः

(1) दोहा (मात्रिक अर्द्धसम छंद)

लक्षणः

1. विषम (पहले व तीसरे) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं।
2. सम (दूसरे व चौथे) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
3. विषम चरणों के अंत में गुरु-लघु (IS) नहीं होना चाहिए।

उदाहरण:
S I I I I I I I S I | | | I S I

सोरठा (मात्रिक अर्द्धसम छंद)

लक्षणः

1. विषम (पहले व तीसरे) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
2. सम (दूसरे व चौथे) चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं।
3. विषम चरणों में तुक मिलती है।
4. यह छंद दोहा का उल्टा होता है।

उदाहरण:
I I I S I I S I | I S I I I I
अस विचार मति धीर, तजि कुतर्क संसय सकल।
I I I S I I I S I I S I I I I I
भजहु राम रघुवीर, करुनाकर सुन्दर सुखद।

(3) चौपाई (मात्रिक सम छंद)

लक्षणः

1. इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
2. चरण के अंत में गुरु-लघु (SI) नहीं होना चाहिए।
3. चरण के अंत में दो गुरु (SS) या दो लघु (II) होने चाहिए।

उदाहरण:
S I I I I I I I S S I I I I I
मंगल भवन अमंगल हारी,
I I I I I I I I I S S
द्रवहु सुदेशरथ अजिर बिहारी।

(4) रोला (मात्रिक सम छंद)

लक्षण:

1. इसके प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ होती हैं।
2. चरण में 11 व 13 मात्राओं के क्रम से यति होती है।

उदाहरण:
S I I I I S I S I I I I S I S S
नन्दन वन था जहाँ, वहाँ मरुभूमि बनी है।

(5) मालिनी (वर्णवृत्त सम छंद)

लक्षणः

1. इसके प्रत्येक चरण में 15 वर्ण होते हैं।
2. प्रत्येक चरण में क्रमशः नगण, नगण, मगण, यगण, यगण गण आते हैं।
3. यति 8 और 7 वर्गों पर होती है।

उदाहरण:
I I I I I I S S S I S I S I S
प्रमुदित मथुरा के, मानवों को बना के,
सकुशल रेह के औ विघ्न-बाधा बचा के।
निज प्रिय सुत दोनों साथ लेके सुखी हो,
जिस दिन पलटेंगे गेह-स्वामी हमारे।

(6) शिखरिणी (वर्णवृत्त सम छंद)

लक्षणः

1. इसके प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं।
2. प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, भगण, नगण, दो तगण और अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं।
3. यति 4, 6, 7 वर्गों पर होती है।

उदाहरण:
S S S S I I I I S S I S S I S S
तारे डूबे, तम टल गयो, छा गयी व्योम लाली।
पक्षी बोले, तमचुर जगे, ज्योति फैली दिशा में।
शाखा डोली, तरुनिचय की, कंज फूले सरों में।
धीरे-धीरे, दिनकर कढ़े तामसी रात बीती।

(7) वसन्ततिलका (वर्णवृत्त सम छंद)

लक्षण:

1. इसके प्रत्येक चरण में 14 वर्ण होते हैं।
2. प्रत्येक चरण में क्रमशः तगण, भगण, जगण, जगण और अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं।

उदाहरण:
S S I S I I I S I S I S S
थे दीख ते पर म वृद्ध नितान्त रोगी
या थी नवागत वधू गृह में दिखती।

महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

 

Question 1. मात्राओं अथवा वर्गों की संख्या या क्रम पर आधारित पद्य के बंध को कहते हैं
(क) मात्रक।
(ख) माप
(ग) छंद
(घ) बंध।
Answer: (ग) छंद
In simple words: कविता में जब हम मात्राओं या अक्षरों की गिनती और उनके क्रम का ध्यान रखते हैं, तो उस नियम को छंद कहते हैं। यह कविता को एक खास लय देता है।

🎯 Exam Tip: छंद की परिभाषा को याद रखें, जिसमें मात्रा, वर्ण, संख्या और क्रम का जिक्र होता है, यह मुख्य बिंदु हैं।

 

Question 2. 'मात्रिक' के अतिरिक्त छंद का दूसरा प्रकार है
(क) अमात्रिक
(ख) आक्षर
(ग) वर्णवृत्त
(घ) व्यांजनिक।
Answer: (ग) वर्णवृत्त
In simple words: छंद दो तरह के होते हैं - एक जिसमें मात्रा गिनी जाती है (मात्रिक छंद) और दूसरा जिसमें अक्षरों को गिना जाता है (वर्णवृत्त छंद)।

🎯 Exam Tip: मात्रिक और वर्णवृत्त छंदों के बीच के अंतर को समझना ज़रूरी है; मात्रिक में मात्राएँ और वर्णवृत्त में वर्ण मुख्य होते हैं।

 

Question 3. यगण का सही सूत्र है
(क) I I S
(ख) I I I
(ग) S S I I
(घ) I S S I
Answer: (घ) I S S I
In simple words: 'यगण' गण बनाने के लिए पहले एक लघु (I) और फिर दो गुरु (S S) वर्णों का क्रम आता है।

🎯 Exam Tip: गणों के सही क्रम को याद करने के लिए "यमाताराजभानसलग्" सूत्र का अभ्यास करें, यह बहुत मददगार होता है।

 

Question 4. निम्नलिखित में सममात्रिक छन्द है
(क) सोरठा
(ख) चौपाई
(ग) दोहा
(घ) बरवै।
Answer: (ख) चौपाई
In simple words: चौपाई एक सममात्रिक छंद है क्योंकि इसके हर चरण में मात्राओं की संख्या बराबर (16-16) होती है।

🎯 Exam Tip: सममात्रिक छंद वह होते हैं जिनके सभी चरणों में मात्राओं की संख्या बराबर होती है, चौपाई इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

 

Question 5. पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए। सिर कर कमल परस बैठाए। सीय अंसीस दीन्ह मन माँही। मगन सनेह देह सुधि नाँहीं।। उपर्युक्त पंक्तियों में छंद है-
(क) दोहा
(ख) रोला
(ग) चौपाई
(घ) बरवै।
Answer: (ग) चौपाई
In simple words: इन पंक्तियों को पढ़ने पर हमें प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ मिलती हैं, जो चौपाई छंद का मुख्य लक्षण है।

🎯 Exam Tip: चौपाई की पहचान के लिए हर चरण में 16 मात्राएँ गिनना सबसे सरल तरीका है; यह अक्सर भक्ति काव्य में इस्तेमाल होता है।

 

Question 6. मरते-मरते अरि के दल में वह भीषण मार मचा निकली थी। झरते-झरते कल कंज कली निज गंध, यहाँ बिखरा मचली थी। इन पंक्तियों में छन्द है-
(क) सुन्दरी सवैया
(ख) मत्तगयंद
(ग) बसंततिलका
(घ) उपेन्द्रवज्रा।
Answer: (क) सुन्दरी सवैया
In simple words: इन पंक्तियों में सुन्दरी सवैया छंद का उपयोग हुआ है, जिसमें एक खास वर्ण क्रम और यति-गति होती है।

🎯 Exam Tip: सवैया छंद के प्रकारों को याद रखने के लिए उनके वर्णों की संख्या और गणों के क्रम पर ध्यान दें।

 

Question 7. बालकी बिसाल बिकराल ज्वाल-जाल मानो, लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है। कैथों व्योम वीथिका भरे है भूरि, धूमकेतु, वीर रस वीर तरवारि-सी उघारी है। इन पंक्तियों में छन्द है-
(क) सुन्दरी सवैया
(ख) मनहर कवित्त
(ग) मत्तगयंद
(घ) इन्द्रवज्रा।
Answer: (ख) मनहर कवित्त
In simple words: इन पंक्तियों में 'मनहर कवित्त' छंद का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें 31 वर्ण होते हैं और 16 व 15 वर्णों पर यति होती है।

🎯 Exam Tip: कवित्त छंदों में वर्णों की संख्या और यति-स्थान को ध्यान से देखें, यह इनकी पहचान के मुख्य तरीके हैं।

 

Question 8. अवधि शिला का उर पर था गुरुभार। तिल तिल काट रही थी दृग जलधार।। इन पंक्तियों में छन्द है-
(क) कुण्डलिया
(ख) रोला।
(ग) हरिगीतिका
(घ) बरवै।
Answer: (ख) रोला।
In simple words: यह पंक्तियाँ रोला छंद का उदाहरण हैं, जहाँ प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं और 11 व 13 मात्राओं पर यति होती है।

🎯 Exam Tip: रोला छंद की पहचान के लिए 24 मात्राएँ और 11-13 के क्रम में यति को याद रखना चाहिए।

 

Question 9. नीला अनन्त नभ निर्मल हो गया था। थी छा गयी ककुम में असिता सिता भी। उत्फुल्ल सी प्रकृति थी प्रतिभात होती।। इन पंक्तियों में छन्द है
(क) मालिनी।
(ग) बसन्ततिलका
(घ) उपेन्द्रवज्रा।
Answer: (ग) बसन्ततिलका
In simple words: इन पंक्तियों में 'बसंततिलका' छंद है, जिसमें 14 वर्ण होते हैं और एक विशेष गणों का क्रम होता है, जो इसे मधुरता प्रदान करता है।

🎯 Exam Tip: वसंततिलका छंद की पहचान के लिए उसके 14 वर्ण और तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु वर्णों के क्रम को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. नव उज्ज्वल जलधार, हार हीरक सी सोहति।। बिच-बिच छहरति बूंद, मध्य मुक्ता मनि पोहति।। इस पद्य में छन्द है
(क) रोला
(ख) दोहा
(ग) हरिगीतिका
(घ) बरवै।
Answer: (क) रोला
In simple words: इन पंक्तियों में 'रोला' छंद का प्रयोग हुआ है, जिसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, जिससे एक विशेष लय बनती है।

🎯 Exam Tip: छंद की पहचान करते समय, मात्राओं की गिनती करें और यति-विराम के स्थानों पर ध्यान दें, इससे सही छंद पहचानने में मदद मिलेगी।

 

Question 11. लो उदित होता रवि गगन में, अरुण आभा आ रही। अरविन्द पर मकरन्द की अब, नव छटा है छा रही। इस पद्य में छन्द है
(क) सवैया
(ख) रोला
(ग) हरिगीतिका
(घ) उपेन्द्रवज्रा।
Answer: (ग) हरिगीतिका
In simple words: यह पंक्तियाँ 'हरिगीतिका' छंद का उदाहरण हैं, जिसमें प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं और 16 तथा 12 मात्राओं पर यति होती है।

🎯 Exam Tip: हरिगीतिका छंद के प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं और अंत में 'रगण' या एक लघु और एक गुरु वर्ण होता है, जो इसकी खास पहचान है।

 

Question 12. बड़ा कि छोटी कुछ काम कीजै, परन्तु पूर्वापर सोचे लीजै। बिना विचारे यदि काम होगा, कभी न अच्छा परिणाम होगा। इसमें छन्द है
(क) इन्द्रवज्रा
Answer: (क) इन्द्रवज्रा
In simple words: इन पंक्तियों में इन्द्रवज्रा छंद का उपयोग हुआ है, जिसमें प्रत्येक चरण में 11 वर्ण होते हैं और एक विशेष गण क्रम का पालन किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इन्द्रवज्रा छंद की पहचान के लिए 11 वर्णों का क्रम, जिसमें तगण, तगण, जगण और दो गुरु वर्ण हों, याद रखें।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. छंद की परिभाषा लिखिए।
Answer: जिस शब्द-योजना में वर्णों या मात्राओं और यति-गति (रुकने और प्रवाह) का विशेष नियम होता है, उसे छंद कहते हैं। यह कविता को एक निश्चित लय और सुंदरता देता है।
In simple words: छंद कविता के नियमों को कहते हैं, जिसमें अक्षरों और मात्राओं की गिनती तय होती है, जिससे कविता में ताल और लय आती है।

🎯 Exam Tip: छंद की परिभाषा लिखते समय 'वर्ण', 'मात्रा', 'यति' और 'गति' जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 2. मात्रा किसे कहते हैं?
Answer: वर्ण के उच्चारण में जो समय लगता है, उसे 'मात्रा' कहते हैं। यह समय छोटा या लंबा हो सकता है, जिसके आधार पर वर्ण लघु या गुरु होता है।
In simple words: अक्षर बोलने में जितना समय लगता है, उसे मात्रा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मात्रा की परिभाषा में 'वर्ण के उच्चारण का समय' वाक्यांश को ज़रूर शामिल करें।

 

Question 3. यति क्या है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: छंद को पढ़ते समय नियमानुसार जिस निश्चित स्थान पर कुछ देर रुकना या ठहराव होता है, उसे यति कहते हैं। यह कविता में विराम चिन्हों की तरह काम करती है।
In simple words: छंद पढ़ते समय जहाँ थोड़ा रुकते हैं, उसे यति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: यति को 'विराम' या 'ठहराव' के रूप में परिभाषित करना चाहिए, जो छंदों में एक निश्चित स्थान पर होता है।

 

Question 4. गति क्या है?
Answer: प्रत्येक छंद की अपनी एक खास लय होती है। उस लय के कारण छंद को पढ़ने में मधुरता और प्रवाह आता है। छंद की इसी लय को 'गति' कहते हैं। यह कविता को संगीत के करीब लाती है।
In simple words: छंद को पढ़ने में जो खास लय और बहाव आता है, उसे गति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: गति को 'छंद की लय' या 'प्रवाह' के रूप में समझाना चाहिए, जिससे पढ़ने में मधुरता आती है।

 

Question 5. तुक से आप क्या समझते हो?
Answer: छंद के चरणों की अंतिम ध्वनि की समानता को तुक कहते हैं। यह समानता कविता को सुनने में सुंदर बनाती है और उसे एक विशेष संगीत देती है।
In simple words: कविता की पंक्तियों के आखिर में जब एक जैसी आवाज़ वाले शब्द आते हैं, उसे तुक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: तुक की परिभाषा में 'अंतिम ध्वनि की समानता' मुख्य है, जो कविता को आकर्षक बनाती है।

 

Question 6. तुकांत छंद और अतुकांत छंद किसे कहते हैं?
Answer: जिन छंदों के चरणों की अंतिम ध्वनियाँ मिलती हैं, उन्हें तुकांत छंद कहते हैं। वहीं, जिनकी तुक नहीं मिलती है, उन्हें अतुकांत छंद कहते हैं। तुकांत छंद कविता में संगीतमयता बढ़ाते हैं, जबकि अतुकांत छंद मुक्त काव्य में पाए जाते हैं।
In simple words: जिन छंदों की पंक्तियों के अंत में एक जैसी आवाज़ होती है, वे तुकांत छंद हैं। जिनकी आवाज़ नहीं मिलती, वे अतुकांत छंद हैं।

🎯 Exam Tip: तुकांत और अतुकांत छंदों को उनकी अंतिम ध्वनियों की समानता या असमानता के आधार पर परिभाषित करें।

 

Question 8. छंद के कितने प्रकार हैं?
Answer: छंद मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
(i) वर्णिक छंद
(ii) मात्रिक छंद
कुछ विद्वान इन्हें 'मुक्तक' और 'उभय' छंदों को भी शामिल करते हैं, पर मुख्य भेद यही दो हैं।
In simple words: छंद दो तरह के होते हैं: वर्णिक छंद (जहाँ अक्षरों की गिनती होती है) और मात्रिक छंद (जहाँ मात्राओं की गिनती होती है)।

🎯 Exam Tip: छंद के मुख्य प्रकारों (वर्णिक और मात्रिक) को स्पष्ट रूप से लिखें और उनके बीच का बुनियादी अंतर भी समझें।

 

Question 9. चौपाई में कितने चरण होते हैं? प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
Answer: चौपाई में चार चरण होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में सोलह-सोलह मात्राएँ होती हैं। यह एक सममात्रिक छंद है जिसमें हर चरण के अंत में दो गुरु या दो लघु वर्ण होते हैं।
In simple words: चौपाई में चार पंक्तियाँ होती हैं और हर पंक्ति में 16 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: चौपाई के लिए 'चार चरण' और 'प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ' ये दो मुख्य बिंदु हैं।

 

Question 10. दोहा के चरणों में कितनी मात्राएँ होती हैं?
Answer: दोहा के पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है।
In simple words: दोहा छंद में पहली और तीसरी पंक्ति में 13 मात्राएँ होती हैं, और दूसरी व चौथी पंक्ति में 11 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: दोहा की मात्राओं का क्रम (13-11, 13-11) याद रखना बहुत ज़रूरी है।

 

Question 11. रोला छंद में कुल कितनी मात्राएँ होती हैं?
Answer: रोला छंद के प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। इसमें 11 और 13 मात्राओं पर यति (विराम) होता है। यह भी एक सममात्रिक छंद है।
In simple words: रोला छंद की हर पंक्ति में कुल 24 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: रोला छंद की मुख्य पहचान '24 मात्राएँ' और '11-13 पर यति' है।

 

Question 12. उपेन्द्रवज्रा छन्द की परिभाषा दीजिए।
Answer: जिस छंद के प्रत्येक चरण में जगण, तगण, जगण तथा अंत में दो गुरु के क्रम से 11 वर्ण होते हैं, उसे उपेन्द्रवज्रा छन्द कहते हैं। यह एक समवर्ण छंद है।
In simple words: उपेन्द्रवज्रा छंद में हर पंक्ति में 11 अक्षर होते हैं, जिनमें एक खास क्रम में जगण, तगण और दो गुरु वर्ण आते हैं।

🎯 Exam Tip: उपेन्द्रवज्रा की पहचान के लिए 11 वर्ण और जगण, तगण, जगण तथा दो गुरु के क्रम को याद रखना चाहिए।

 

Question 13. बसन्ततिलका छंद में कुल कितने वर्ण होते हैं?
Answer: बसन्ततिलका छंद के चारों चरणों में तगण, भगण, जगण, जगण तथा दो गुरु के क्रम से 14 वर्ण होते हैं। यह भी एक समवर्ण छंद है।
In simple words: बसन्ततिलका छंद की हर पंक्ति में 14 अक्षर होते हैं, जिनमें गणों का एक तय क्रम होता है।

🎯 Exam Tip: बसन्ततिलका छंद के लिए '14 वर्ण' और 'तगण, भगण, जगण, जगण, गुरु-गुरु' का क्रम इसकी मुख्य पहचान है।

 

Question 14. मालिनी छंद में कितने वर्ण होते हैं?
Answer: मालिनी छंद के प्रत्येक चरण में 15 वर्ण होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में क्रमशः नगण, नगण, मगण, यगण और यगण गण आते हैं, तथा 8 और 7 वर्णों पर यति होती है।
In simple words: मालिनी छंद में हर पंक्ति में 15 अक्षर होते हैं, जिन्हें नगण, नगण, मगण, यगण, यगण गणों के क्रम से पहचाना जाता है।

🎯 Exam Tip: मालिनी छंद को 15 वर्णों और उसके विशिष्ट गण क्रम (नगण, नगण, मगण, यगण, यगण) से पहचानना सबसे आसान है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. चौपाई छन्द का लक्षण और उदाहरण: लिखिए।
Answer: चौपाई छन्द में चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। इसके अंत में जगण (I S I) अथवा तगण (S S I) नहीं आना चाहिए। चौपाई में गुरु-लघु का एक खास क्रम होता है जिससे इसमें संगीतात्मकता आती है।
उदाहरण:
S I I I I I I I S S \( = 16 \) मात्राएँ।
गोपद जल बूढ़हिं घट जोनी
I I I I S I I S I S S \( = 16 \) मात्राएँ
सहज छमा बरु छाँड़हिं छोनी।
मसक फेंक मकु मेरु उड़ाई।।
होइ न नृप मदु भरतहिं भाई।
प्रस्तुत उदाहरण के प्रत्येक चरण में सोलह मात्राएँ हैं, अतः यह चौपाई छन्द है।
In simple words: चौपाई में चार पंक्तियाँ होती हैं और हर पंक्ति में 16 मात्राएँ होती हैं। यह एक बहुत ही सीधा-सादा और लयबद्ध छंद है।

🎯 Exam Tip: चौपाई के लक्षण (चार चरण, 16 मात्राएँ) और एक उदाहरण को याद रखना परीक्षा में पूरे अंक दिला सकता है।

 

Question 2. दोहा छन्द का लक्षण और उदाहरण: दीजिए।
Answer: दोहा एक मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले तथा तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं, और दूसरे व चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। आखिरी वर्ण लघु होना चाहिए। यह हिंदी साहित्य का सबसे लोकप्रिय छंद है।
उदाहरण:
I I I S I I I S I S I S I I S I \( = 13 + 11 \) मात्राएँ।
लसत मंजुमुनि मण्डली, मध्य सीय-रघुचंदु।
ज्ञान सभा जनु तनु धरें, भगति सच्चिदानंदु।
प्रस्तुत छंद के प्रथम तथा तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ हैं। अतः दोहा छन्द है।
In simple words: दोहा छंद में चार पंक्तियाँ होती हैं। पहली और तीसरी में 13 मात्राएँ, दूसरी और चौथी में 11 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: दोहा छंद की पहचान के लिए 13-11 मात्राओं के क्रम को याद रखना ज़रूरी है, साथ ही एक प्रसिद्ध उदाहरण भी।

 

Question 3. सोरठा छन्द का लक्षण और उदाहरण: लिखिए।
Answer: सोरठा एक मात्रिक अर्द्धसम छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं, और द्वितीय व चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। प्रथम तथा तृतीय चरण के अंत में गुरु-लघु का प्रयोग होता है और प्रायः तुक भी मिलती है। यह दोहा का उल्टा छंद होता है।
यथा-
I I S S I I S I I I I
मैं लखि नारी ज्ञानु, करि राखौ निरधार यह। \( = 11-13 \) मात्राएँ।
बहई रोग निदानु, वहै वैदु औसधि बाहै।। (बिहारी लाल)
दोहा-मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रथम तथा तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में अन्त में गुरु-लघु रहता है; यथा
I I S S I I S I S I I I S I
तुलसी पावस के समै, परयौ कोकिलनु मौनु। \( = 13 + 11 \) मात्राएँ। अब तो दादुर बोलिहैं, हमें पूछिहै कौनु। (तुलसीदास)
इस छंद के प्रथम तथा तृतीय चरणों में 11-11 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरणों में 13-13 मात्राएँ हैं, अत: यह सोरठा छन्द है।
In simple words: सोरठा में पहली और तीसरी पंक्ति में 11 मात्राएँ होती हैं, जबकि दूसरी और चौथी में 13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे के बिल्कुल उलट होता है।

🎯 Exam Tip: सोरठा की पहचान के लिए 11-13 मात्राओं का क्रम और दोहे से इसके विपरीत संबंध को याद रखें।

 

Question 4. रोला तथा दोहा छन्दों का उदाहरण: सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
**रोला-** रोला सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। 11 तथा 13 मात्राओं पर यति होती है।
**उदाहरण:**
I I I I S S I I S I I I I I S S \( = 24 \) मात्राएँ
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।।
झुके कूल सों जल परसन जित मनहुँ सुहाये।।
किधों मुकुर में लखत उझकि सब निज-निज सोभा।
कै प्रनवत जिय जानि परम पावन फल लोभा।।
प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होने से यह रोला छन्द है।

**दोहा-** दोहा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 13-13 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। इसके दूसरे और चौथे चरण के अन्त में गुरु-लघु वर्ण आते हैं।
**यथा-**
I I I I S I I S I S I I S I S I
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। \( = 13 + 11 \) मात्राएँ।
सौंह करै, भौंहनु हँसै, दैन कहे नटि जाय।। (बिहारीलाल)
In simple words: रोला में हर पंक्ति में 24 मात्राएँ होती हैं, जबकि दोहा में पहली-तीसरी में 13 और दूसरी-चौथी में 11 मात्राएँ होती हैं। रोला सममात्रिक है, दोहा अर्द्धसममात्रिक है।

🎯 Exam Tip: रोला और दोहा के अंतर को उनके मात्रा क्रम (रोला: 24; दोहा: 13-11) और यति स्थान से स्पष्ट करें, एक-एक उदाहरण भी दें।

 

Question 5. बरवै तथा सोरठा छन्दों में उदाहरण: सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
**बरवै-** बरवै मात्रिक छंद है। इसके चार चरण होते हैं। प्रथम तथा तृतीय चरण में 12-12 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं। द्वितीय तथा चतुर्थ चरण के अंत में ISI के क्रम के वर्ण आते हैं।
**यथा-**
S S I I I I I I I S I I
बंदो पुनि पुनि गुरु के, पदे जलजात। \( = 12 + 7 \) मात्राएँ।
जिने प्रताप तें मन के, तिमिरि बिलात।। (रहीम)।

**सोरठा-** सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छंद है। इसके चार चरण होते हैं। इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 11-11 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। पहले और तीसरे चरण के अंत में प्रायः तुक मिलती है।
**यथा-**
S I I I I S I I S S I I I I
बंदहुँ गुरु पद कंज, कृपा सिन्धु नर रूप हरि।। \( = 11 + 13 \) मात्राएँ
महामोह तम पुंज, जासु वचन रबिकर निकर।। (तुलसीदास)
In simple words: बरवै में पहली-तीसरी पंक्ति में 12 मात्राएँ और दूसरी-चौथी में 7 मात्राएँ होती हैं, जबकि सोरठा में पहली-तीसरी में 11 और दूसरी-चौथी में 13 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: बरवै (12-7) और सोरठा (11-13) की मात्राओं के क्रम को याद रखना उनके बीच का मुख्य अंतर है।

 

Question 6. हरिगीतिका छन्द का लक्षण और उदाहरण: दीजिए।
Answer: हरिगीतिका चार चरणों का सम मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं। इसमें 16 तथा 12 मात्राओं पर यति होती है। इस छंद के प्रत्येक चरण के अंत में 'रगण' का प्रयोग होता है। चरण के अंत में एक लघु तथा एक गुरु वर्ण होता है।
उदाहरण:
I I S I S S S I I I I S S I S \( = 28 \) मात्राएँ।
खग वृन्द सोता है अत: कल, कल नहीं होता यहाँ। बस मंद मारुत का गमन ही, मौन खोता है यहाँ। इस भाँति धीरे से परस्पर, कह सजगता की कथा।
यों दीखते हैं, वृक्ष से ही, विश्व के प्रहरी यथा।। यहाँ प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होने से हरिगीतिका छन्द है।
In simple words: हरिगीतिका में चार पंक्तियाँ होती हैं, हर पंक्ति में 28 मात्राएँ होती हैं, और 16 व 12 मात्राओं पर रुकते हैं।

🎯 Exam Tip: हरिगीतिका की पहचान के लिए '28 मात्राएँ', '16-12 पर यति' और 'रगण या लघु-गुरु का अंत' जैसे लक्षण याद रखें।

 

Question 7. बरवै छन्द की परिभाषा और उदाहरण: लिखिए।
Answer: बरवै चार चरणों वाला अर्द्ध सम मात्रिक छंद है। इसके प्रथम तथा तृतीय चरण में 12-12 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं। अंत में जगण (I S I) का प्रयोग होता है। बरवै छंद का उपयोग अधिकतर छोटे और मधुर काव्यों में होता है।
उदाहरण:
I I S S I I S I I I I S I \( = 12 + 7 = 19 \) मात्राएँ (यह 12 और 7 का जोड़ है, कुल मात्राएँ 19 होती हैं)
पुनि पुनि बंदौ गुरु के पद जलजात।
जिन प्रताप ते मन के, तिमिर विलात।
इस छन्द के प्रथम तथा तृतीय चरण में 12 तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 7 मात्राएँ होने से बरवै छन्द है।
In simple words: बरवै छंद में पहली और तीसरी पंक्ति में 12 मात्राएँ और दूसरी व चौथी पंक्ति में 7 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: बरवै की पहचान के लिए 12-7 मात्राओं का क्रम और जगण के अंत में प्रयोग को याद रखें।

 

Question 8. इन्द्रवज्रा छन्द की परिभाषा तथा उदाहरण: लिखिए।
Answer: इन्द्रवज्रा समवर्ण छंद है। इसके प्रत्येक चरण में तगण, तगण, जगण तथा गुरु, गुरु इस प्रकार 11 वर्ण होते हैं। यह छंद अपनी तीव्र गति और प्रभाव के लिए जाना जाता है।
उदाहरण:
तगण तगण जगण गुरु गुरु (त त ज गा गा इन्द्रवज्रा-स्मरण सूत्र)
S S I S I S I I S S
आया नहीं काम स्वदेश के जो।।
गाया नहीं गान स्वतन्त्रता का।। \( = 11 \) वर्ण
जीता नहीं है यह सत्य मानो।
In simple words: इन्द्रवज्रा में हर पंक्ति में 11 अक्षर होते हैं, जिनमें तगण, तगण, जगण और दो गुरु वर्ण एक खास क्रम में आते हैं।

🎯 Exam Tip: इन्द्रवज्रा छंद के लिए 11 वर्णों का क्रम और गणों का सही संयोजन (तगण, तगण, जगण, गुरु, गुरु) याद रखना मुख्य है।

उपेन्द्रवज्रा छंद का उदाहरण:

जगण तगण जगण गुरु गुरु (ज त ज गा गा उपेन्द्रवज्रा-स्मरण सूत्र)
I S I S S I I S I S S \( = 11 \) वर्ण
गया उजाला अब शाम आई।
दिशा दिशा में छवि श्याम छाई।
हुए सभी मौन विहंग देखो।
उगे शनैः तारक वृंद देखो।

 

Question 9. बसंततिलका छन्द का लक्षण और उदाहरण: लिखिए।
Answer: बसंततिलका समवर्ण वृत्त छंद है। इसके प्रत्येक चरण में तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु के क्रम से 14 वर्ण होते हैं। यह छंद अपनी मधुरता और लयात्मकता के लिए प्रसिद्ध है।
उदाहरण:
तगण भगण जगण जंगण गुरु-गुरु (त भ ज ज गा गा बसंततिलका-स्मरण सूत्र)
S S I I I I I S I S S
आओ यहाँ मधुर-सी कुछ बात छेड़ो।
भूलो सभी विगत की कटु भावनाएँ।
आए नई मधुमई ऋतु वाटिका में।
कूकें वही पिक भर्ती रस से यहाँ।
In simple words: बसंततिलका छंद में हर पंक्ति में 14 अक्षर होते हैं, जिनमें खास क्रम में तगण, भगण, जगण, जगण और दो गुरु वर्ण आते हैं।

🎯 Exam Tip: बसंततिलका की पहचान के लिए 14 वर्णों का क्रम और गणों का सही संयोजन (तगण, भगण, जगण, जगण, गुरु, गुरु) महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. मत्तगयंद (सवैया) छन्द की परिभाषा और उदाहरण: लिखिए।
Answer: मत्तगयंद छन्द समवर्ण वृत्त है। इसके चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में सात भगण और दो गुरु वर्णों के क्रम से 23 वर्ण होते हैं। यह सवैया छंद का एक लोकप्रिय प्रकार है।
उदाहरण:
भगण भगण भगण भगण भगण भगण भगण गुरु गुरु
S I I S I I S I I S I I S I I S S
या लेकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर कौ तजि डारौं।
आठहुँ सिद्धि नव निधि को सुख नंद की धेनु चराइ बिसारीं।
आँखिनु ते रसखान कबों व्रज के वन बाग तड़ाग निहारौं।
कोटिक हूँ कलधौत के धाम करील की कुंजने ऊपर बारौं।
In simple words: मत्तगयंद सवैया छंद में हर पंक्ति में 23 अक्षर होते हैं, जिनमें सात भगण और अंत में दो गुरु वर्णों का क्रम होता है।

🎯 Exam Tip: मत्तगयंद सवैया के लिए '23 वर्ण' और 'सात भगण व दो गुरु' का क्रम याद रखें। यह सवैया छंदों में सबसे अधिक प्रयोग होने वाला है।

 

Question 11. सुन्दरी सवैया की परिभाषा उदाहरण:सहित दीजिए।
Answer: सुन्दरी सवैया एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में आठ सगण (I I S) और अंत में एक गुरु (S) वर्ण होता है। इस प्रकार प्रत्येक चरण में कुल 25 वर्ण होते हैं। यह छंद अपनी मधुरता और गति के लिए जाना जाता है।
उदाहरण:
S S I I S I I S I I S I I S I I S I I S I I S I S
मरते-मरते अरि के दल में वह भीषण मार मचा निकली थी।
झरते-झरते कल कंज कली निज गंध यहाँ बिखरा मचली थी।
भरते-भरते यश जीवन में शुभ दीपक-सी कुछ रात जली थी।
गिरते-गिरते रण में अरि को चकचौंध गई बन के बिजली थी।
In simple words: सुन्दरी सवैया छंद में हर पंक्ति में 25 अक्षर होते हैं, जिनमें आठ सगण और अंत में एक गुरु वर्ण होता है।

🎯 Exam Tip: सुन्दरी सवैया की पहचान के लिए '25 वर्ण' और 'आठ सगण व एक गुरु' के क्रम को याद रखना ज़रूरी है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. छंद किसे कहते हैं?
Answer: कविता लिखने का एक खास तरीका जिसमें वर्णों (अक्षरों) या मात्राओं (उच्चारण में लगने वाला समय) की संख्या और उनके क्रम का एक तय नियम होता है, उसे छंद कहते हैं। छंद कविता को एक ताल और लय देते हैं। आमतौर पर, हर छंद में चार चरण (पंक्तियाँ) होते हैं, लेकिन कुछ छंदों में छह चरण भी हो सकते हैं।
छंदों को मुख्य रूप से दो प्रकार में बांटा गया है:
1. वर्णिक या वर्णवृत्त छंद: इनमें अक्षरों की संख्या तय होती है, मात्राओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता।
2. मात्रिक छंद: इनमें हर चरण में मात्राओं की संख्या तय होती है, अक्षरों की संख्या पर ध्यान नहीं दिया जाता।
In simple words: छंद कविता को एक नियम में बाँधता है, जहाँ अक्षरों या मात्राओं की गिनती और उनका क्रम तय होता है, जिससे कविता में सुंदरता और लय आती है।

🎯 Exam Tip: छंद की परिभाषा देते समय मात्रा और वर्णों के नियम का उल्लेख करना और इसके मुख्य भेदों को बताना महत्वपूर्ण होता है।

 

Question 2. निम्नलिखित छन्दों में से किसी एक छन्द का नाम बताइए और उसका लक्षण लिखिए।
12 7 \( II S II SS II S II S I \)
Answer: दिए गए मात्रा क्रम (पहले और तीसरे चरण में 12 मात्राएँ, तथा दूसरे और चौथे चरण में 7 मात्राएँ) के आधार पर यह बरवै छंद है।
बरवै छंद के लक्षण: यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 12-12 मात्राएँ होती हैं, और दूसरे तथा चौथे चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं। इसके अंत में जगण \( (I S I) \) का प्रयोग होता है।
उदाहरण:
अब जीवन की है कपि, आस न कोय।
कनगुरिया की मुदरी, कंगन होय।।
In simple words: बरवै छंद एक ऐसा छंद है जहाँ हर पंक्ति में मात्राओं की संख्या तय होती है, जिससे कविता पढ़ने में अच्छी लगती है। पहले और तीसरे में 12, दूसरे और चौथे में 7 मात्राएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: जब छंद का नाम नहीं दिया हो, तो मात्राओं या वर्णों की संख्या के पैटर्न से छंद को पहचानें और उसके लक्षण व उदाहरण दोनों लिखें।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 3. सोरठा तथा दोहा छन्दों का सोदाहरण अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: दोहा और सोरठा दोनों ही मात्रिक छंद हैं, लेकिन उनमें कुछ मुख्य अंतर हैं:

  • **सोरठा छंद:** इसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं, जबकि दूसरे और चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। इसके पहले और तीसरे चरण के अंत में गुरु-लघु का प्रयोग होता है और अक्सर तुक भी मिलती है। यह दोहा का ठीक उलटा होता है।

यथा- \( II SS IISI II \)
उदाहरण:
मैं लखि नारी ज्ञानु, करि राखौ निरधार यह। \( = 11-13 \) मात्राएँ।
बहई रोग निदानु, वहै वैदु औसधि बाहै।। (बिहारी लाल)
  • **दोहा छंद:** इसमें भी चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं, और दूसरे तथा चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। इसके दूसरे और चौथे चरण के अंत में गुरु-लघु रहता है। यह हिंदी काव्य का एक बहुत ही आम छंद है।

यथा- \( IIS SIIS IS IS SIII SI \)
उदाहरण:
तुलसी पावस के समै, परयौ कोकिलनु मौनु। \( = 13 +11 \) मात्राएँ।
अब तो दादुर बोलिहैं, हमें पूछिहै कौनु।। (तुलसीदास)
In simple words: दोहा और सोरठा दोनों में मात्राएँ गिनी जाती हैं, पर सोरठा में पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं, जबकि दोहा में पहले और तीसरे में 13-13 मात्राएँ होती हैं। सोरठा दोहा का उल्टा रूप है।

🎯 Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय दोनों छंदों के लक्षणों और मात्राओं के क्रम को विस्तार से बताना चाहिए और उदाहरण जरूर देना चाहिए।

 

Question 4. रोला तथा दोहा छन्दों का उदाहरण: सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: रोला और दोहा दोनों ही मात्रिक छंद हैं, पर इनमें कुछ खास अंतर होते हैं:

  • **रोला छंद:** यह एक सम मात्रिक छंद है जिसमें चार चरण होते हैं। इसके हर चरण में कुल 24 मात्राएँ होती हैं। इसमें 11 और 13 मात्राओं पर थोड़ा ठहराव (यति) होता है।

उदाहरण:
\( III ISS II ISI II II SS = 24 \) मात्राएँ।
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।।
झुके कूल सों जल परसन जित मनहुँ सुहाये।।
किधों मुकुर में लखत उझकि सब निज-निज सोभा।
कै प्रनवत जिय जानि परम पावन फल लोभा।।
यहाँ हर चरण में 24 मात्राएँ हैं, इसलिए यह रोला छंद है।
  • **दोहा छंद:** यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं, और दूसरे तथा चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। इसके दूसरे और चौथे चरण के अंत में गुरु-लघु वर्ण आते हैं।

यथा- \( IIII SII SI S IIS IS ISI \)
उदाहरण:
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय। \( = 13 +11 \) मात्राएँ।
सौंह करै, भौंहनु हँसै, दैन कहे नटि जाय।। (बिहारीलाल)
In simple words: रोला में हर चरण में 24 मात्राएँ होती हैं और 11 व 13 पर रुकना होता है, जबकि दोहा में पहले-तीसरे में 13-13 और दूसरे-चौथे में 11-11 मात्राएँ होती हैं, और अंत में गुरु-लघु होता है।

🎯 Exam Tip: रोला और दोहा छंदों के अंतर को स्पष्ट करते समय उनकी मात्राओं की संख्या और यति (ठहराव) के नियमों पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 5. बरवै तथा सोरठा छन्दों में उदाहरण: सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: बरवै और सोरठा दोनों ही मात्रिक छंद हैं, लेकिन उनमें निम्नलिखित अंतर हैं:

  • **बरवै छंद:** यह एक मात्रिक छंद है जिसमें चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 12-12 मात्राएँ होती हैं, जबकि दूसरे और चौथे चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं। दूसरे और चौथे चरण के अंत में लघु-गुरु \( (I S I) \) का क्रम आता है।

यथा- \( S S II II II S II IISI \)
उदाहरण:
बंदो पुनि पुनि गुरु के, पदे जलजात। \( = 12 +7 \) मात्राएँ।
जिने प्रताप तें मन के, तिमिरि बिलात।। (रहीम)।
  • **सोरठा छंद:** यह एक अर्द्धसम मात्रिक छंद है जिसमें भी चार चरण होते हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं, और दूसरे तथा चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। इसके पहले और तीसरे चरण के अंत में अक्सर तुक मिलती है। यह दोहा छंद का उल्टा रूप माना जाता है।

यथा- \( S II II I S IIS S I II S I II \)
उदाहरण:
बंदहुँ गुरु पद कंज, कृपा सिन्धु नर रूप हरि।। \( = 11 +13 \) मात्राएँ
महामोह तम पुंज, जासु वचन रबिकर निकर।। (तुलसीदास)
In simple words: बरवै में पहले-तीसरे में 12-12 और दूसरे-चौथे में 7-7 मात्राएँ होती हैं, जबकि सोरठा में पहले-तीसरे में 11-11 और दूसरे-चौथे में 13-13 मात्राएँ होती हैं। सोरठा दोहे का उलटा होता है।

🎯 Exam Tip: बरवै और सोरठा के बीच अंतर बताते समय, उनकी मात्रा-गणना और यति-गति के नियमों को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

Free study material for Hindi

RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद

Students can now access the RBSE Solutions for काव्यांग परिचय छंद prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for काव्यांग परिचय छंद

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Hindi Class 11 Solved Papers

Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for काव्यांग परिचय छंद to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Hindi are as per latest RBSE curriculum.

Are the Hindi RBSE solutions for Class 11 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 11 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Hindi RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Hindi काव्यांग परिचय छंद in printable PDF format for offline study on any device.