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Detailed Chapter 19 अनोखी परीक्षा RBSE Solutions for Class 11 Hindi
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Class 11 Hindi Chapter 19 अनोखी परीक्षा RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. महात्मा अपना गुरु किसे मानते थे?
(क) कुदरत को
(ख) शिष्य को
(ग) ईश्वर को
(घ) भाइयों को
Answer: (क) कुदरत को
In simple words: महात्मा ने प्रकृति को ही अपना सबसे बड़ा गुरु माना था। वे मानते थे कि प्रकृति से ही सब कुछ सीखा जा सकता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, पाठ में दिए गए सीधे उत्तर को पहचानना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. बड़ा भाई बकरे को लेकर कहाँ गया?
Answer: बड़ा भाई बकरे को लेकर पहाड़ के पास एक सुनसान गुफा में चला गया। वह उसे ऐसी जगह ले गया जहाँ उसे कोई देख न सके।
In simple words: बड़ा भाई बकरे को पहाड़ी की तलहटी में स्थित एक सुनसान गुफा में ले गया था।
🎯 Exam Tip: कहानी के प्रमुख स्थानों और पात्रों की गतिविधियों को याद रखना चाहिए।
Question 2. महात्मा जब मौन धारण कर लेता तो क्या करता था?
Answer: जब महात्मा मौन व्रत रखते थे, तो वे अपने होंठ भी नहीं खोलते थे। यह दिखाता है कि वे अपनी बातों पर अटल रहते थे।
In simple words: मौन व्रत के समय महात्मा अपने होंठ भी बिल्कुल नहीं खोलते थे।
🎯 Exam Tip: मौन व्रत का अर्थ सिर्फ न बोलना नहीं, बल्कि पूरी तरह से शांत रहना है।
Question 3. महात्मा ने अनुमति क्यों नहीं दी?
Answer: महात्मा ने बकरे को मारने की इजाजत नहीं दी क्योंकि वे बकरे की हत्या को एक बहुत बुरा काम मानते थे। वे किसी जीव को मारने के पक्ष में नहीं थे।
In simple words: महात्मा ने बकरे को मारने की अनुमति नहीं दी क्योंकि यह एक गलत काम था।
🎯 Exam Tip: चरित्र के नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए उत्तर दें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. महात्मा क्या डींग हाँकता था?
Answer: महात्मा अपनी बड़ाई खुद ही करते रहते थे। वे कहते थे कि पूरी दुनिया में उनसे बड़ा संत न तो कभी हुआ है और न कभी होगा। वे खुद को बहुत महान समझते थे।
In simple words: महात्मा अपनी तारीफ करते हुए कहते थे कि उनसे बड़ा संत कोई नहीं है और न कभी होगा।
🎯 Exam Tip: 'डींग हाँकना' मुहावरे का अर्थ समझते हुए उत्तर देना चाहिए।
Question 2. महात्मा ने भाइयों की परीक्षा कैसे ली?
Answer: महात्मा ने भाइयों को एक-एक बकरा देकर कहा कि वे उसे ऐसी जगह पर काटें जहाँ कोई भी उन्हें ऐसा करते हुए देख या सुन न सके। उन्होंने कहा कि इस काम के बारे में किसी चींटी को भी पता नहीं चलना चाहिए। यह एक मुश्किल शर्त थी।
In simple words: महात्मा ने भाइयों को बकरा देकर कहा कि उसे ऐसी गुप्त जगह पर मारो जहाँ कोई भी न देखे और न सुने।
🎯 Exam Tip: कहानी में दिए गए मुख्य घटनाक्रम और शर्तों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 3. छोटा भाई बौडम क्यों निकला?
Answer: छोटा भाई एक ऐसी सुनसान जगह की तलाश में तीन दिन और तीन रात भटकता रहा जहाँ बकरे की बलि देते हुए उसे कोई न देख या सुन सके। उसे ऐसी जगह नहीं मिली क्योंकि उसे हर जगह ईश्वर की उपस्थिति महसूस होती थी। इसलिए वह बकरे की बलि नहीं दे सका, और इस तरह वह महात्मा की शर्त पूरी नहीं कर पाया।
In simple words: छोटा भाई बकरा मारने के लिए ऐसी गुप्त जगह नहीं ढूँढ पाया जहाँ कोई उसे न देखे, इसलिए वह बौडम नहीं निकला बल्कि उसे आत्मज्ञान हुआ।
🎯 Exam Tip: 'बौडम' शब्द के वास्तविक अर्थ (मूर्ख) से विपरीत, छोटे भाई के आध्यात्मिक ज्ञान को स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. महात्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Answer: महात्मा औघड़ साधु थे, जिनके चरित्र की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. अघोर संप्रदाय का साधु: वे अघोर संप्रदाय के अनुयायी थे, जिन्हें सामान्य भाषा में 'औघड़' कहा जाता है।
2. विचित्र व्यवहार: महात्मा का व्यवहार बहुत अजीब था, कभी वे पागल जैसे लगते थे। वे किसी को अपना शिष्य नहीं बनाते थे, पर जब मन करता तो किसी को भी शिष्य बना लेते थे।
3. हठी और सनकी: वे बहुत हठी और सनकी स्वभाव के थे। कभी सूर्य को जल चढ़ाते थे तो कभी धूल उछाल देते थे। कभी माला जपते थे तो कभी तोड़कर फेंक देते थे।
4. क्रोधी: महात्मा बहुत क्रोधी भी थे। जब दोनों भाई बकरा और तलवार लेकर उनके पास आए तो वे बहुत गुस्सा हो गए थे।
5. गुरु की तलाश: महात्मा एक योग्य गुरु की तलाश में थे, जो उन्हें छोटे भाई के रूप में मिला।
महात्मा का चरित्र भारतीय साधुओं की कई खूबियों को दर्शाता है।
In simple words: महात्मा एक औघड़ साधु थे जो अजीब, हठी, क्रोधी स्वभाव के थे और हमेशा एक गुरु की तलाश में रहते थे। वे कभी किसी को अपना शिष्य नहीं बनाते थे, पर बाद में छोटे भाई को अपना गुरु मान लेते हैं।
🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण करते समय, पात्र के स्वभाव की मुख्य विशेषताओं को क्रमवार और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. छोटे भाई ने महात्मा को शिष्य बनने से क्यों मना कर दिया?
Answer: महात्मा ने छोटे भाई के सामने शर्त रखी थी कि वह एक बकरे का सिर ऐसी जगह पर काटेगा, जहाँ कोई भी उसे ऐसा करते हुए न देखे और न सुने। छोटे भाई ने यह आदेश सुना तो वह ऐसी जगह खोजने के लिए तीन दिन और तीन रात भटकता रहा। लेकिन उसे ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ उसे कोई न देख रहा हो। जब वह तलवार उठाता तो उसका हाथ काँपने लगता। उसे महसूस होता था कि सूरज, हवा, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े, बकरा, यहाँ तक कि तलवार और वह खुद भी सब कुछ देख रहे हैं।
वह यह समझ गया था कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और उससे कुछ भी छिपा नहीं है। इस ज्ञान के कारण उसे बकरा मारने का काम असंभव लगा। इसलिए, उसने महात्मा का शिष्य बनने से मना कर दिया क्योंकि वह उनकी शर्त पूरी नहीं कर पाया।
In simple words: छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना कर दिया क्योंकि वह बकरे को ऐसी जगह नहीं काट पाया जहाँ उसे कोई न देखे। उसे लगा कि सब कुछ उसे देख रहा है, जिससे उसे आत्मज्ञान हो गया था।
🎯 Exam Tip: उत्तर में छोटे भाई के आत्मज्ञान की प्रक्रिया और उसके कारण को विस्तार से समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 3. महात्मा ने अपना गुरु किसे बनाया और क्यों? लिखिए।
Answer: महात्मा ने छोटे भाई को अपना गुरु बनाया। छोटा भाई अपने बड़े भाई के साथ महात्मा के शिष्य बनने की इच्छा लेकर आया था। महात्मा ने शर्त रखी थी कि वे बकरे की बलि ऐसी जगह दें जहाँ उन्हें कोई देख न सके। छोटा भाई ऐसी जगह खोजने में तीन दिन और तीन रात भटकता रहा, लेकिन उसे पृथ्वी पर ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ कोई उसे बकरा काटते हुए न देखे। जब भी वह बकरा काटने की कोशिश करता, तो उसे लगता कि सूर्य, वायु, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े, बकरा और तलवार भी उसे देख रहे हैं।
वह यह भी महसूस करता था कि वह खुद भी सब कुछ देख रहा है। उसे समझ आ गया कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और कुछ भी उससे छिपा नहीं है। उसने महात्मा की शर्त पर शिष्य बनने से मना कर दिया। छोटे भाई से यह सब सुनकर महात्मा ने उसके पैर छुए और कहा कि अब उन्हें किसी शिष्य की जरूरत नहीं है। छोटे भाई को पाकर उनकी वर्षों की तपस्या पूरी हो गई थी और उन्हें वह योग्य गुरु मिल गया जिसकी वे तलाश में थे।
In simple words: महात्मा ने छोटे भाई को अपना गुरु बनाया। छोटा भाई बकरे को ऐसी जगह नहीं काट पाया जहाँ कोई उसे न देखे, क्योंकि उसे हर जगह ईश्वर का अनुभव हुआ। महात्मा ने यह देखकर छोटे भाई के आत्मज्ञान को पहचाना और उसे अपना गुरु मान लिया।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय, महात्मा और छोटे भाई के बीच हुए संवाद और छोटे भाई के आत्मज्ञान के महत्व पर जोर दें।
Question 4. छोटे भाई अजीब ऊहापोह में क्यों फँस गया?
Answer: छोटा भाई एक अजीब दुविधा में फँस गया था। वह तीन दिन और तीन रात तक ऐसी सुनसान जगह की तलाश में घूमता रहा जहाँ वह बकरे की बलि दे सके और कोई उसे देख न रहा हो। उसे ऐसी कोई जगह नहीं मिली, जिससे वह बहुत असमंजस में था। जब वह बकरे का सिर काटने के लिए तलवार उठाता तो उसका हाथ काँपने लगता था। उसे लगता था कि सूर्य अपनी तेज़ किरणों से उसे देख रहा है, हवा उसे महसूस कर रही है, पेड़-पौधे अपने पत्तों से उसे देख रहे हैं। पशु-पक्षी और कीड़े-मकोड़े भी उसे देख रहे हैं। बकरा भी उसे देख रहा है।
तलवार और वहाँ के निर्जीव पत्थर भी उसे देख रहे हैं। उसे यह भी महसूस होता था कि वह खुद भी अपनी आँखों से सब कुछ देख रहा है। महात्मा की शर्त के अनुसार जगह खोजते-खोजते उसे यह समझ आ गया कि संसार में कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहाँ उसे कोई न देखे और वह बकरे को मार सके। उसे यह ज्ञान हो गया कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और उसकी नज़र से कोई भी काम छिपा नहीं है। इस ज्ञान के बाद उसकी दुविधा खत्म हो गई और उसने महात्मा का शिष्य बनने का विचार छोड़ दिया।
In simple words: छोटा भाई इस दुविधा में था कि बकरे को कहाँ मारे जहाँ कोई न देखे। उसे लगा कि प्रकृति की हर चीज़ उसे देख रही है, जिससे उसे आत्मज्ञान हुआ कि ईश्वर हर जगह है। इस समझ के बाद उसकी दुविधा खत्म हो गई।
🎯 Exam Tip: 'ऊहापोह' शब्द का अर्थ (दुविधा या असमंजस) समझाते हुए, छोटे भाई के मानसिक संघर्ष और उसके आध्यात्मिक निष्कर्ष को स्पष्ट करें।
Question 5. छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना क्यों कर दिया?
Answer: छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना कर दिया क्योंकि वह महात्मा की शर्त पूरी नहीं कर पाया। शर्त यह थी कि उसे बकरे को ऐसी जगह मारना था जहाँ कोई भी उसे देख या सुन न सके। तीन दिन और तीन रात भटकने के बाद भी उसे ऐसी कोई जगह नहीं मिली। उसे हर जगह ईश्वर की उपस्थिति महसूस हुई - सूर्य, हवा, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीट-पतंग, बकरा, यहाँ तक कि पत्थर और वह खुद भी उसे देख रहे थे।
वह यह समझ गया कि ईश्वर हर जगह व्याप्त है और उससे कुछ भी छिपा नहीं है। इस आत्मज्ञान के कारण उसे बकरे की हत्या करना असंभव लगा। इसलिए उसने महात्मा को अपनी स्थिति बताई और शिष्य बनने से इनकार कर दिया क्योंकि वह शर्त पूरी नहीं कर सका।
In simple words: छोटा भाई महात्मा का शिष्य नहीं बना क्योंकि वह बकरे को मारने की शर्त पूरी नहीं कर सका। उसे लगा कि सब कुछ उसे देख रहा है और ईश्वर हर जगह मौजूद है, जिससे उसे आत्मज्ञान हो गया था।
🎯 Exam Tip: छोटे भाई के निर्णय के पीछे के गहरे आध्यात्मिक कारण को स्पष्ट करें, न कि केवल उसकी असफलता को।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
Question 1. महात्मा अपना गुरु किसे मानते थे?
(क) कुदरत को
(ख) शिष्य को
(ग) ईश्वर को
(घ) भाइयों को
Answer: (क) कुदरत को
In simple words: महात्मा ने प्रकृति को ही अपना सबसे बड़ा गुरु माना था।
🎯 Exam Tip: सीधे प्रश्न का सीधा और सटीक उत्तर दें, जैसा कि कहानी में बताया गया है।
Question 2. औघड़' का अर्थ है -
(क) असामान्य शारीरिक बनावट वाला
(ख) असामान्य मानसिक दशा वाला।
(ग) अघोर सम्प्रदाय का अनुयायी
(घ) उजड्ड और उद्दण्ड
Answer: (ग) अघोर सम्प्रदाय का अनुयायी
In simple words: 'औघड़' का मतलब अघोर संप्रदाय को मानने वाला व्यक्ति होता है।
🎯 Exam Tip: पाठ में आए कठिन शब्दों के अर्थ को याद रखें, क्योंकि वे कहानी को समझने में मदद करते हैं।
Question 3. 'श्लथ और विपर्ण' का तात्पर्य है -
(क) थका हुआ और निस्तेज
(ख) भयभीत और सफेद
(ग) दु:खी और निद्रागस्त
(घ) आहत और पीड़ित
Answer: (क) थका हुआ और निस्तेज
In simple words: 'श्लथ और विपर्ण' का अर्थ है, बहुत थका हुआ और उदास दिखना।
🎯 Exam Tip: कठिन शब्दों के पर्यायवाची या अर्थ को याद रखना भाषा समझने में सहायक होता है।
Question 4. छोटा भाई कैसा था?
(क) डरपोक
(ख) हठी
(ग) आत्म ज्ञानी
(घ) बौडम
Answer: (ग) आत्म ज्ञानी
In simple words: छोटा भाई आत्म ज्ञानी था, उसे सब कुछ का ज्ञान हो गया था।
🎯 Exam Tip: कहानी के अंत में छोटे भाई के चरित्र में आए बदलाव को ध्यान में रखें।
Question 5. संसार में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ छोटे भाई को बकरे का वध करते कोई नहीं देखे-इस अनुभव का आशय यह है कि -
(क) सूर्य किरणों के माध्यम से देख सकता है।
(ख) वायु प्रवाहित होकर देख रही है।
(ग) ईश्वर सर्वत्र व्याप्त है और सब कुछ देखता है।
(घ) ऐसा सोचना बुद्धिमत्ता नहीं है।
Answer: (ग) ईश्वर सर्वत्र व्याप्त है और सब कुछ देखता है।
In simple words: इस अनुभव का मतलब है कि ईश्वर हर जगह है और वह हर चीज़ देखता और सुनता है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, दिए गए कथन के गहरे अर्थ को समझकर सही विकल्प चुनें।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. छोटे भाई का तलवार वाला हाथ काँपने क्यों लगता था?
Answer: बकरे को मारने के लिए जैसे ही छोटा भाई तलवार उठाता था, उसका हाथ काँपने लगता था। उसे लगता था कि कोई न कोई उसे देख रहा है, जिससे वह डर जाता था।
In simple words: बकरा काटने के लिए तलवार उठाते ही छोटे भाई का हाथ काँपने लगता था क्योंकि उसे लगता था कि हर कोई उसे देख रहा है।
🎯 Exam Tip: छोटे भाई के डर के पीछे के आध्यात्मिक कारण को स्पष्ट करें।
Question 2. औघड़ महात्मा ने छोटे भाई के साथ कैसा व्यवहार किया?
Answer: औघड़ महात्मा ने छोटे भाई से बहुत अच्छा व्यवहार किया। उन्होंने उसके पैर छुए और उसे अपना गुरु मान लिया क्योंकि छोटे भाई ने उन्हें आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया था।
In simple words: औघड़ महात्मा ने छोटे भाई के पैर छुए और उसे अपना गुरु मान लिया।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य मोड़ पर महात्मा के व्यवहार में आए बदलाव को ध्यान से लिखें।
Question 3. औघड़ बाबा की क्या विशेषता थी?
Answer: औघड़ बाबा बहुत मनमौजी स्वभाव के थे और आधे पागल जैसे लगते थे। वे अपनी इच्छा के अनुसार ही काम करते थे और किसी की बात नहीं सुनते थे।
In simple words: औघड़ बाबा मनमौजी और आधे पागल जैसे थे।
🎯 Exam Tip: बाबा के चरित्र की मुख्य विशेषताओं को संक्षेप में बताएं।
Question 4. बाबा लोगों को अपना शिष्य क्यों नहीं बनाता था?
Answer: औघड़ बाबा का मानना था कि अगर वे बहुत सारे शिष्य बना लेंगे, तो उनका पंथ कमज़ोर पड़ जाएगा और उसकी गरिमा खत्म हो जाएगी। इसलिए वे अधिक शिष्य नहीं बनाते थे।
In simple words: बाबा का मानना था कि बहुत शिष्य बनाने से उनके पंथ का महत्व कम हो जाएगा।
🎯 Exam Tip: बाबा के दर्शन और विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 6. बड़े भाई ने बाबा की शर्त कैसे पूरी की?
Answer: बड़े भाई ने एक पहाड़ी गुफा में बकरे को ले जाकर उसका वध कर दिया। उसने बकरे का सिर काट दिया, क्योंकि उसे लगा कि उस सुनसान जगह पर कोई उसे देख नहीं रहा था।
In simple words: बड़े भाई ने एक पहाड़ी गुफा में बकरे का वध करके बाबा की शर्त पूरी की।
🎯 Exam Tip: बड़े भाई के व्यावहारिक दृष्टिकोण को उसके कार्यों से जोड़कर समझाएं।
Question 7. छोटा भाई बोडम क्यों निकला?
Answer: छोटा भाई बौडम नहीं निकला। वास्तव में, वह महात्मा की शर्त पूरी नहीं कर सका क्योंकि उसे ऐसी कोई जगह नहीं मिली जहाँ बकरे का वध करते समय कोई उसे देख न रहा हो। उसे हर जगह ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव हुआ, जिससे उसे आत्मज्ञान हो गया था।
In simple words: छोटा भाई बौडम नहीं था, बल्कि उसे आत्मज्ञान हो गया था कि ईश्वर हर जगह मौजूद है, इसलिए वह बकरे को नहीं मार सका।
🎯 Exam Tip: 'बोडम' शब्द के प्रयोग को स्पष्ट करें और छोटे भाई के आध्यात्मिक ज्ञान को उजागर करें।
Question 8. दोनों भाइयों के शिष्य बनने का हठ करने पर बाबा ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया?
Answer: जब दोनों भाई शिष्य बनने के लिए बहुत जिद करने लगे, तो बाबा को गुस्सा आ गया। उस समय उनके पास कोई पत्थर या लकड़ी नहीं थी, इसलिए उन्होंने गुस्से में मुक्कों से ही दोनों भाइयों को मारा।
In simple words: शिष्य बनने की जिद करने पर बाबा ने दोनों भाइयों को मुक्कों से पीटा।
🎯 Exam Tip: बाबा के क्रोधी स्वभाव को इस घटना से जोड़कर बताएं।
Question 9. बड़े भाई के बारे में महात्मा का क्या कहना था?
Answer: महात्मा का मानना था कि बड़े भाई जैसे हजारों शिष्य मिल जाएं जो बकरे का सिर काट सकें, तो भी वे पंथ की गरिमा को कम ही करेंगे। उन्हें ऐसे शिष्य की कोई ज़रूरत नहीं थी जो केवल बाहरी रूप से नियम का पालन करे।
In simple words: महात्मा ने कहा कि बड़े भाई जैसे कई शिष्य भी पंथ की गरिमा को घटाएंगे।
🎯 Exam Tip: महात्मा के आंतरिक और बाहरी ज्ञान के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 10. छोटे भाई को बकरे की गर्दन काटने में सफलता क्यों नहीं मिली?
Answer: छोटे भाई को बकरे की गर्दन काटने में सफलता नहीं मिली क्योंकि उसे लगता था कि सूर्य, हवा, पेड़-पौधे, कीट-पतंग, बकरा, पत्थर और वह स्वयं भी सब कुछ देख रहे हैं। उसे कोई ऐसी सुनसान जगह नहीं मिली जहाँ उसे कोई न देख रहा हो, इसलिए वह यह काम नहीं कर सका।
In simple words: छोटे भाई बकरे को नहीं काट पाया क्योंकि उसे हर जगह ईश्वर की उपस्थिति महसूस हो रही थी।
🎯 Exam Tip: छोटे भाई के आत्मज्ञान और सर्वव्यापी ईश्वर की अवधारणा को इस उत्तर में शामिल करें।
Question 11. 'प्रकृति की प्रत्येक वस्तु उसको देख रही है'-ऐसा आभास छोटे भाई को क्यों हो रहा था?
Answer: छोटे भाई को यह आभास इसलिए हो रहा था क्योंकि उसे आत्मज्ञान हो गया था। वह यह जान गया था कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और सृष्टि की हर चीज़ को देखता है। इसलिए उसे लगा कि प्रकृति की कोई भी चीज़ उसे बकरा काटते हुए नहीं देख सकती है।
In simple words: छोटे भाई को आत्मज्ञान हो गया था कि ईश्वर हर जगह है और सब कुछ देखता है, इसलिए उसे लगा कि प्रकृति की हर वस्तु उसे देख रही है।
🎯 Exam Tip: आत्मज्ञान और सर्वव्यापी ईश्वर के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझाएं।
RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. औघड़ महात्मा का स्वभाव कैसा था?
Answer: औघड़ महात्मा का स्वभाव बहुत ही विचित्र था। वे अपनी मर्जी के मालिक थे और कभी-कभी आधे पागल जैसे लगते थे। वे आमतौर पर किसी को अपना शिष्य नहीं बनाते थे, बल्कि अपनी इच्छा से किसी को भी बुलाकर शिष्य बना लेते थे।
In simple words: औघड़ महात्मा का स्वभाव अजीब, मनमौजी और कुछ हद तक पागलपन भरा था।
🎯 Exam Tip: महात्मा के विचित्र स्वभाव की मुख्य बातों को संक्षेप में बताएं।
Question 2. छोटा भाई महात्मा की शर्त पूरी क्यों नहीं कर सका?
Answer: छोटा भाई महात्मा की शर्त पूरी नहीं कर सका क्योंकि वह ऐसी कोई जगह नहीं ढूँढ पाया जहाँ बकरे का सिर काटते हुए उसे कोई देख न सके। उसे यह महसूस होता था कि प्रकृति की हर चीज़, यहाँ तक कि निर्जीव वस्तुएँ भी, उसे देख रही हैं। यह उसका आत्मज्ञान था।
In simple words: छोटा भाई महात्मा की शर्त पूरी नहीं कर सका क्योंकि उसे ऐसी कोई गुप्त जगह नहीं मिली जहाँ वह बकरे को मार सके, क्योंकि उसे हर जगह ईश्वर महसूस होता था।
🎯 Exam Tip: उत्तर में छोटे भाई के आध्यात्मिक दृष्टिकोण को उसकी असफलता का मुख्य कारण बताएं।
Question 3. छोटे भाई तथा बड़े भाई में क्या अन्तर है?
Answer: छोटे भाई और बड़े भाई में मुख्य अंतर यह था कि छोटा भाई आध्यात्मिक सोच वाला था। उसे यह ज्ञान हो गया था कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और सृष्टि के हर कण को देखता है। इसलिए वह महात्मा की शिष्य बनने की शर्त पूरी नहीं कर सका। इसके उलट, बड़ा भाई एक व्यावहारिक और भौतिकवादी सोच वाला व्यक्ति था। उसने एक पहाड़ी की सुनसान गुफा में जाकर बकरे का सिर काटकर महात्मा की शर्त पूरी कर दी। यह दिखाता है कि दोनों की सोच में बहुत अंतर था।
In simple words: छोटा भाई आध्यात्मिक सोच का था जिसे ईश्वर का ज्ञान हुआ, जबकि बड़ा भाई व्यावहारिक सोच का था जिसने शर्त पूरी कर दी।
🎯 Exam Tip: दोनों भाइयों के विचारों और कार्यों के बीच के स्पष्ट अंतर को समझाएं।
Question 4. “ज्यों ही बकरे की मुंडी काटने को उद्यत होता तो राम जाने पत्थर पर भी आँखें उग आतीं।” इस पंक्ति के आधार पर छोटे भाई में विकसित होते आध्यात्मिक भाव का वर्णन कीजिए।
Answer: "पत्थर पर आँखें उग आने" का मतलब है कि छोटे भाई को यह महसूस होने लगा था कि निर्जीव पत्थर भी जीवित हो गया है और उसकी गलत हरकत को खुली आँखों से देख रहा है। छोटे भाई के मन में पत्थर के जीवित होने का यह भाव उसके अंदर पनपते हुए आध्यात्मिक विचारों का ही नतीजा था। उसे पत्थर में भी जीवन और चेतना का अनुभव होने लगा। उसे लगा कि ईश्वर अपनी चेतना और तेज के रूप में इस पत्थर में भी मौजूद है। ईश्वर प्रकृति के हर कण में मौजूद है और अपनी असंख्य आँखों और कानों से सब कुछ देखता और सुनता है। यह अनुभव छोटे भाई को ईश्वर की सर्वव्यापकता का ज्ञान कराता है।
In simple words: छोटे भाई को लगा कि पत्थर पर आँखें उग आई हैं, जिसका मतलब है कि उसे निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन और ईश्वर की उपस्थिति महसूस होने लगी थी। यह उसके अंदर पनपते आध्यात्मिक विचारों का संकेत था।
🎯 Exam Tip: पंक्ति में छिपे प्रतीकात्मक अर्थ को पहचानें और उसे छोटे भाई के आध्यात्मिक विकास से जोड़कर समझाएं।
Question 5. छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना क्यों कर दिया?
Answer: छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना कर दिया क्योंकि वह उनकी शर्त पूरी नहीं कर सका। उसे यह समझ आ गया था कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए किसी गुरु की बाहरी आवश्यकता नहीं होती, बल्कि आत्मज्ञान और प्रबल जिज्ञासा ही महत्वपूर्ण होती है। उसे हर जगह ईश्वर की सर्वव्यापकता का अनुभव हुआ, जिससे उसे लगा कि कोई भी काम ईश्वर से छिपा नहीं है। यह गहन आध्यात्मिक समझ ही उसके शिष्य बनने से इनकार करने का मुख्य कारण था।
In simple words: छोटे भाई ने महात्मा का शिष्य बनने से मना कर दिया क्योंकि उसे आत्मज्ञान हो गया था कि ईश्वर हर जगह है और सच्चा ज्ञान पाने के लिए बाहरी गुरु की नहीं, बल्कि आंतरिक समझ की ज़रूरत होती है।
🎯 Exam Tip: छोटे भाई के आत्मज्ञान और उसके शिष्य बनने से इनकार के बीच सीधा संबंध स्थापित करें।
Question 7. 'अनोखी परीक्षा' आपकी दृष्टि में कैसी कहानी है?
Answer: 'अनोखी परीक्षा' विजयदान देथा की एक बहुत ही अच्छी कहानी है जो एक खास मकसद के साथ लिखी गई है। यह लोक कथा हमें बताती है कि ईश्वर इस पूरी सृष्टि के हर कण में मौजूद है। वह अपनी अनगिनत आँखों और कानों से सब कुछ देखता और सुनता है। इस वजह से मनुष्य उससे छिपकर कोई काम नहीं कर सकता। कहानी यह भी सिखाती है कि ईश्वर के हर जगह होने के कारण कोई भी चीज़ बेजान नहीं है। हर चीज़ में ईश्वर की शक्ति और चेतना होती है, और दुनिया में कुछ भी छिपा हुआ या गुप्त नहीं है। यह कहानी हमें नैतिकता और आत्मज्ञान का महत्व सिखाती है।
In simple words: मेरी राय में, 'अनोखी परीक्षा' एक अच्छी और शिक्षाप्रद कहानी है जो बताती है कि ईश्वर हर जगह है और सब कुछ देखता है, इसलिए उससे कुछ भी छिपाना संभव नहीं है।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संदेश और उसके महत्व को अपनी भाषा में स्पष्ट करें।
Question 8. “जिन पेड़ों की जड़ें धरती के सघन अँधियारे में अपने अदीठ प्राणों को अति खोज लेते हैं, उनके अनगिनत पत्तों से भला क्या चीज छिपी रह सकती है?” इस उक्ति में छोटे भाई के आधार पर अंतर्द्वन्द्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस उक्ति में छोटे भाई का मानसिक संघर्ष स्पष्ट होता है। छोटा भाई एक ऐसी सुनसान जगह की तलाश में था जहाँ बकरे का वध करते हुए उसे कोई देख न सके। वह घने जंगल में जाता है और सोचता है कि यहाँ उसे कोई नहीं देखेगा। लेकिन फिर उसके मन में विचार आता है कि अगर पेड़ों की जड़ें गहरे अँधेरे में भी अपना भोजन ढूँढ लेती हैं, तो उनके अनगिनत पत्तों से भला कुछ कैसे छिपा रह सकता है जो ऊपर और प्रकाश में हैं।
उसे लगता है कि ये पेड़ भी उसे देख रहे हैं। इसलिए, यह जगह भी बकरे का वध करने के लिए ठीक नहीं है। इस तरह की दुविधा और आंतरिक संघर्ष उसके मन में लगातार चलता रहता है। उसे हर चीज़ में जीवन और देखने की शक्ति का आभास होता है।
In simple words: छोटे भाई के मन में यह संघर्ष चल रहा था कि अगर पेड़ों की जड़ें अंधेरे में भी अपना भोजन खोज लेती हैं, तो उनके पत्ते भला उसे कैसे नहीं देख सकते। यह उसकी दुविधा थी कि कोई भी काम छिपाया नहीं जा सकता।
🎯 Exam Tip: उद्धृत पंक्ति का अर्थ समझाते हुए, छोटे भाई के मन में चलने वाले नैतिक और आध्यात्मिक संघर्ष को उजागर करें।
Question 9. औघड़ महात्मा की शिष्य बनाने की शर्त आपको कैसी लगती है?
Answer: महात्मा ने शिष्य बनाने के लिए शर्त रखी थी कि भाई बकरे का सिर ऐसी जगह काटें जहाँ कोई उनको देख न सके। पहली नज़र में यह शर्त उन्हें अपने फैसले से रोकने के लिए एक ज़बरदस्ती की लगती है। इससे महात्मा हठी और घमंडी भी लगते हैं। लेकिन गहराई से सोचने पर लगता है कि महात्मा उन भाइयों की योग्यता परखना चाहते थे कि क्या वे सच में शिष्य बनने लायक हैं। वे जानना चाहते थे कि उनके मन में ईश्वर के सर्वव्यापी होने के बारे में क्या विचार हैं। इससे महात्मा की गहरी सोच और समझदारी का पता चलता है। यह शर्त असल में एक अनोखी परीक्षा थी।
In simple words: महात्मा की शिष्य बनाने की शर्त पहली बार में अजीब लगती है, पर असल में यह शिष्यों की आध्यात्मिक समझ और ईश्वर की सर्वव्यापकता पर उनकी आस्था को परखने का एक तरीका थी।
🎯 Exam Tip: शर्त के दो पहलुओं- ऊपरी और गहरे अर्थ- को समझाते हुए अपना विचार व्यक्त करें।
Question 10. ज्ञान की प्राप्ति के लिए गुरु की आवश्यकता को क्या महत्व है?
Answer: ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता बहुत महत्वपूर्ण होती है। गुरु शिष्य को शिक्षा देता है और सही राह दिखाता है। भारत में, खासकर आध्यात्मिक क्षेत्र में, शिष्य के दिल में ज्ञान को जगाने के लिए गुरु का होना बहुत ज़रूरी माना गया है। गुरु के बिना ज्ञान प्राप्त करना कठिन होता है। गुरु शिष्य को ज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन करता है और रास्ते में आने वाली बाधाओं के बारे में बताता है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से शिष्य ज्ञान के रास्ते की मुश्किलों को आसानी से पार करके अपने लक्ष्य तक पहुँच पाता है। गुरु सही दिशा देता है और ज्ञान को सरल बनाता है।
In simple words: ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु बहुत ज़रूरी होता है, क्योंकि वह सही रास्ता दिखाता है और ज्ञान की राह में आने वाली मुश्किलों को दूर करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: गुरु के महत्व को विभिन्न बिन्दुओं में स्पष्ट करें और भारतीय परंपरा में उसकी भूमिका को उजागर करें।
Question 1. ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु की आवश्यकता तथा शिष्य के मन में जिज्ञासा के होने में से किसका महत्त्व अधिक है? तर्कपूर्ण विवेचना कीजिए।
Answer: ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु की आवश्यकता और शिष्य के मन में जिज्ञासा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जिज्ञासा का महत्व अधिक है।
गुरु का महत्व: शिष्य शिक्षा ग्रहण करने वाला होता है, और गुरु शिक्षा देने वाला व रास्ता दिखाने वाला होता है। भारत में, खासकर आध्यात्मिक क्षेत्र में, ज्ञानोदय के लिए गुरु का होना ज़रूरी है। गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिलता। गुरु शिष्य को ज्ञान के रास्ते पर ले जाता है। वह उसे रास्ते की बाधाओं से बचाता है और सतर्क करता है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से शिष्य ज्ञान की बाधाओं को आसानी से पार करके लक्ष्य पा लेता है।
जिज्ञासा का महत्व: ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु का महत्व है, लेकिन उसके बिना भी ज्ञान मिल सकता है। इसके लिए सबसे ज़रूरी बात यह है कि शिष्य के मन में सीखने की तीव्र इच्छा हो। जिज्ञासा के बिना शिष्य ज्ञान नहीं पा सकता। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य द्वारा शिष्य बनाने से मना करने पर भी एकलव्य ने अपनी लगन और जिज्ञासा से अर्जुन से भी बेहतर धनुर्धर बन सकता था। ज्ञान प्राप्त करने के लिए जिज्ञासा पहली शर्त है। ज्ञान के इच्छुक व्यक्ति में लगन, अभ्यास और मेहनत भी होनी चाहिए। यदि उसमें ये गुण हैं तो वह बिना गुरु के भी ज्ञान पा सकता है। इन गुणों की कमी होने पर कोई भी योग्य गुरु उसे ज्ञानी नहीं बना सकता।
निष्कर्ष: गुरु मार्गदर्शक होता है, पर जिज्ञासा ज्ञान की कुंजी है। जिज्ञासा के बिना गुरु भी ज्ञान नहीं दे सकता, और जिज्ञासा हो तो व्यक्ति खुद ही सीखने के नए रास्ते ढूँढ सकता है। इसलिए, जिज्ञासा का महत्व अधिक है।
In simple words: ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु और शिष्य की जिज्ञासा दोनों ज़रूरी हैं, पर जिज्ञासा ज़्यादा महत्वपूर्ण है। शिष्य में सीखने की तीव्र इच्छा हो तो वह गुरु के बिना भी ज्ञान पा सकता है, जबकि जिज्ञासा के बिना गुरु भी ज्ञान नहीं दे सकता।
🎯 Exam Tip: दोनों कारकों का महत्व बताते हुए, जिज्ञासा को अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध करने के लिए तर्कों और उदाहरणों का उपयोग करें।
Question 2. “छोटा भाई तो निपट बौड़म ही निकला” क्या लेखक के इस कथन से सहमत हैं? यदि नहीं तो क्यों?
Answer: मैं लेखक के इस कथन से सहमत नहीं हूँ कि छोटा भाई 'निपट बौड़म' निकला। 'बौड़म' का अर्थ मूर्ख होता है, और छोटा भाई मूर्ख या अज्ञानी नहीं था। गुरु के निर्देश के अनुसार उसे बकरे का सिर ऐसी सुनसान जगह पर काटना था, जहाँ उसे ऐसा करते कोई न देखे-सुने। यदि वह केवल बाहरी चीज़ों को देखता, तो उसे पहाड़ की गुफा, घने जंगल या अन्य ऐसी जगह मिल जाती जहाँ कोई उसे बकरा काटते हुए नहीं देखता। अपने बड़े भाई की तरह वह यह काम आसानी से कर लेता और खुद को बुद्धिमान साबित कर सकता था।
छोटा भाई आत्मज्ञान से भरा हुआ था। उसके दिल में आध्यात्मिकता जाग चुकी थी। वह यह जान गया था कि इस दुनिया की हर चीज़ में ईश्वर है। हर चीज़ में ईश्वर का तेज और चेतना है। ईश्वर की अनगिनत अदृश्य आँखें हैं, जिनसे कुछ भी छिपा नहीं है। उसके अनगिनत कान छोटी से छोटी आवाज़ भी सुन लेते हैं। इस आत्मज्ञान के कारण ही छोटे भाई को कोई ऐसी जगह नहीं मिली जहाँ कोई उसे बकरा काटते हुए न देखे। इस स्थिति में उसे 'बौड़म' कहना गलत होगा, बल्कि वह ज्ञानी था।
In simple words: मैं लेखक से सहमत नहीं हूँ। छोटा भाई मूर्ख नहीं था, बल्कि उसे आत्मज्ञान हो गया था कि ईश्वर हर जगह है। इसलिए वह बकरे को नहीं मार सका, क्योंकि उसे लगा कि ईश्वर उसे देख रहा है।
🎯 Exam Tip: प्रश्न के कथन पर अपनी असहमति स्पष्ट करें और छोटे भाई के आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत करें।
Question 3. 'अनोखी परीक्षा' कहानी से सच्चे गुरु की खोज में क्या सहायता मिलती है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'अनोखी परीक्षा' कहानी सच्चे गुरु की पहचान करने में बहुत मदद करती है। इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि सच्चा गुरु वही है जो शिष्य को सही रास्ता दिखा सके। कहानी बताती है कि जो गुरु खुद अज्ञानी है और संदेह व भ्रम में है, वह शिष्य को सही राह नहीं दिखा सकता और उसे ईश्वर से नहीं मिला सकता। जिस गुरु ने ईश्वर की सर्वव्यापकता को नहीं समझा, वह शिष्य को परमात्मा से कैसे मिला सकता है? जो गुरु शिष्य को धोखा देता है और अनुचित शर्तें रखता है, वह सच्चा गुरु नहीं हो सकता।
महात्मा को छोटे भाई में अपना गुरु मिल गया क्योंकि छोटे भाई ने प्रकृति की हर वस्तु में ईश्वर की उपस्थिति को समझा और आत्मज्ञान प्राप्त किया। इससे महात्मा को यह समझ आया कि सच्चा गुरु वही है जो शिष्य के मन में दिव्य ज्ञान पैदा करे। अतः, कहानी यह सिखाती है कि सच्चा गुरु वही है जो शिष्य को आध्यात्मिक मार्ग पर ले जाए, न कि केवल बाहरी नियमों का पालन करवाए।
In simple words: 'अनोखी परीक्षा' कहानी सिखाती है कि सच्चा गुरु वही होता है जो शिष्य को आत्मज्ञान और ईश्वर की सर्वव्यापकता का ज्ञान दे सके, न कि वह जो खुद भ्रम में हो या अनुचित शर्तें रखे।
🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य संदेश को सच्चे गुरु की विशेषताओं से जोड़कर समझाएं और उदाहरण दें।
Question 4. 'अनोखी परीक्षा' कहानी में इसके रचयिता द्वारा क्या संदेश दिया गया है?
अथवा
'अनोखी परीक्षा' कहानी में व्यक्त आध्यात्मिक विचारों पर प्रकाश डालिए।
Answer: 'अनोखी परीक्षा' विजयदान देथा की एक लोककथा है, जिसे कहानीकार ने एक खास संदेश देने के लिए लिखा है। कहानी का मुख्य विचार यह है कि ईश्वर इस पूरी सृष्टि के हर कण में मौजूद है। वह अपनी अनगिनत आँखों और कानों से सब कुछ देखता और सुनता है। उससे छिपकर मनुष्य कोई काम नहीं कर सकता। ईश्वर के हर जगह होने के कारण कोई भी चीज़ बेजान नहीं है। हर चीज़ में ईश्वर की शक्ति और चेतना होती है, और दुनिया में कुछ भी छिपा हुआ या गुप्त नहीं है।
कहानी के पात्र औघड़ महात्मा ने शिष्य बनाने के लिए दो भाइयों के सामने शर्त रखी कि वे बकरे का वध ऐसी जगह करें जहाँ कोई उन्हें न देखे। बड़ा भाई तो शर्त आसानी से पूरी कर देता है, लेकिन छोटा भाई दुविधा में फँस जाता है। जब वह बकरे का सिर काटने के लिए तलवार उठाता है, तो उसका हाथ काँपने लगता है। उसे लगता है कि सूर्य, हवा, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीट-पतंग, पत्थर, बकरा और तलवार-सब उसे देख रहे हैं। उसे यह भी महसूस होता है कि वह खुद भी सब कुछ देख रहा है।
हताश होकर वह महात्मा को सब कुछ बताता है और शिष्य बनने से इनकार कर देता है। महात्मा उसके पैर छूकर उसे अपना गुरु मान लेते हैं। छोटे भाई के मन में आत्मज्ञान जाग चुका था। उसकी चेतना आध्यात्मिकता से भर गई थी। कहानीकार इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि ईश्वर सृष्टि के हर पदार्थ में व्याप्त है। संसार में कोई भी जीवित या निर्जीव वस्तु ऐसी नहीं है जिसमें ईश्वर न हो, या उसकी चेतना और तेज न हो। ईश्वर की असंख्य अदृश्य आँखें और अनगिनत कान हैं, जो संसार की हर गतिविधि को देखते और सुनते हैं। उससे कुछ भी छिपा या गुप्त नहीं है। कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहाँ वह मौजूद न हो और सब कुछ देख-सुन न रहा हो।
इस कहानी में यही आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया गया है। कहानीकार ने यह संदेश भी दिया है कि आत्मज्ञान अपनी लगन और जिज्ञासा से ही मिलता है। तरह-तरह की शर्तें थोपने वाले गुरु सच्चे नहीं होते, वे शिष्य को संदेह और भ्रम में डालते हैं। ज्ञान प्राप्त करने के लिए ऐसे गुरु की कोई ज़रूरत नहीं होती।
In simple words: 'अनोखी परीक्षा' कहानी का मुख्य संदेश है कि ईश्वर हर जगह मौजूद है और सब कुछ देखता है। मनुष्य उससे कुछ भी छिपा नहीं सकता। आत्मज्ञान ही सच्ची सीख है, और यह अपनी लगन से मिलती है, न कि कठोर शर्तें रखने वाले गुरुओं से।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में कहानी के मुख्य विचार- ईश्वर की सर्वव्यापकता और आत्मज्ञान के महत्व- को विस्तार से समझाएं।
साहित्यिक परिचय
हिन्दी कहानी साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर विजयदान देथा राजस्थान के कहानीकार हैं। पुरातन परिवेश को नए सन्दर्भ में प्रस्तुत कर कहानियाँ लिखना विजयदान देथा की कहानी कला की विशेषता है। आपने अपनी अखण्ड साहित्य साधना से, प्रकाशित और अप्रकाशित अपनी कहानियों द्वारा हिन्दी कथा साहित्य को समृद्धि प्रदान की है। आपकी कहानियों में राजस्थानी धरती की सोंधी गन्ध है। आपकी भाषा सरल, सरस और विषयानुकूल है तथा शैली रोचक है। उसमें मुहावरों और लोकोक्तियों का सफल प्रयोग हुआ है। कृतियाँ- आपने अनेक कहानियाँ लिखी हैं। आपकी प्रसिद्ध कहानी 'दुविधा' पर हिन्दी फिल्म 'पहेली' नाम से बन चुकी है।
पाठ-सार
एक औघड़ महात्मा थे। वे बहुत अजीब और मनमौजी थे। कुछ लोग उन्हें आधा पागल भी कहते थे। फिर भी लोग उनका आदर करते थे। वे उनके सामने श्रद्धा से सिर झुकाते थे। वे किसी को अपना शिष्य नहीं बनाते थे, जबकि बहुत लोग उनके शिष्य बनना चाहते थे। वे चाहते तो राह चलते किसी को भी शिष्य बना लेते, पर जब बहुत ज़्यादा मनाने पर भी धक्का देकर भगा देते थे।
एक बार दो भाई उनके शिष्य बनने की इच्छा से आए। महात्मा ने उन्हें स्पष्ट मना कर दिया, पर वे दोनों अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने महात्मा के पैर पकड़ लिए और कहा कि वे तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक वे उन्हें अपना शिष्य नहीं बना लेते।
तब महात्मा को गुस्सा आया। उन्होंने एक शर्त पर उन्हें अपना शिष्य बनाना मान लिया। उन्होंने कहा कि वे एक बकरा लें और उसे ऐसी जगह पर मारें जहाँ कोई उन्हें देख न रहा हो। फिर वे तलवार से उसका सिर काटकर ले आएँ, तभी वे उन्हें अपना शिष्य मानेंगे।
दोनों भाइयों ने एक कसाई से दो बकरे खरीदे। वे घर से अपने पुरखों की चमकीली तलवारें भी ले गए। अब वे किसी सुनसान जगह की तलाश में निकले। बड़ा भाई एक पहाड़ी पर स्थित एक शांत गुफा में चला गया। वहाँ उसे कोई नहीं देख रहा था। उसने तलवार से बकरे का सिर काट दिया और खून से सनी तलवार के साथ महात्मा के पास पहुँचा। महात्मा ने उसे अपने पास बिठा लिया। बड़ा भाई खुश था कि रात पूरी होने पर महात्मा उसे अपना शिष्य बना लेंगे।
छोटा भाई भी तलवार और बकरा लेकर निकला। वह तीन दिन तक पहाड़ी जंगल आदि में भटकता रहा, पर उसे कोई ऐसी जगह नहीं मिली जहाँ कोई उसे देख न रहा हो। उसे लगता था कि सूर्य उसे देख रहा है, हवा उसे महसूस कर रही है। पेड़-पौधे, कीट-पतंग, रेत के कण-कण, बकरा, तलवार आदि भी उसे देख रहे हैं। उसे यह भी लगता था कि वह खुद भी अंधा नहीं है और सब कुछ देख रहा है। उसने महात्मा का शिष्य बनने का विचार छोड़ दिया। उसे लगा कि ऐसी शर्त पूरी करना असंभव है। वह महात्मा के पास गया और सारी बात बता दी।
शब्दार्थ-
(पृष्ठ सं. 115)
औघड़ = अघोरी। महात्मा = साधु। नीम पागल = आधा पागल। धोबे = अंजलि। मनके = मोती। घूरा = कूड़े का ढेर। योनि = शरीर। खोमी = कमी। दण्डवत् = जमीन पर लेटकर। निमित्त = खातिर। बन्दगी = स्तुति। ठेठ= अन्त। मेहर = दया। पिराता = तंग-परेशान करता।
(पृष्ठ सं. 116)
चेला = शिष्य। जचना = ठीक लगना। अंज्ञान = अपरिचित। ढाणी = बस्ती। बन्दा = मनुष्य। अदेर = बिना देर किए। मर्तबा = बार। बेशी = ज्यादा। भीष्म प्रतिज्ञा = अटल प्रतिज्ञा। झख झख मारना = विवश होना। मुनासिब = उचित। अरदास = प्रार्थना। ठौर = स्थान। भनक पड़ना = पता चलना। मुताबिक = अनुसार। वेवक्त = असमय। धोक देना = प्रणाम करना। बिफस्ना = नाराज होना। जघन्य = निन्दनीय॥ कुदरत = प्रकृति। झीना = पतला। दुश्वार = कठिन। मर्म = रहस्य। ताकना = देखना। कलम करना = काटना। निवारण = दूर होना। महेर-मया = दया। सलट गया = पूरा हो गया। सतर्क = सावधान। आदमजाद् = मनुष्य। मुजब = अनुसार, अनुरूप। ठौर = स्थान। आकांक्षा = इच्छा। बौडम = अनाड़ी, अज्ञानी। अदीठ= अदृश्य। पारखी = पक्षी। पुख्ता = मजबूत। औझरी = आमाशय। ऊहापोह = अनिश्चय। आँखें टिमकारना = आँखें झपकाना। उद्यत = तैयार॥
(पृष्ठ सं. 118)
गोपनीय = छिपा हुआ। प्रतिरूप = स्वरूप। क्षत-विक्षत = घायल, निराश। श्लथ = थका हुआ। विवर्ण = निस्तेज। रिरियाना = चिरौरी करना। देवदूत = ऊहापोह। हिदायत = निर्देश। अहमियत = महत्त्व। साध= इच्छा। अजाने = बिना जाने।
महत्वपूर्ण गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ
1. एक था औघड़ महात्मा। मन-मौजी और नीम-पागल। इच्छा होती तो उगते सूरज के सामने आँखें मूंदकर सात बार जल चढ़ाता और कभी-कभी उसकी किरणों पर सात धोबे धूल उछाल देता। कभी माला जपने बैठता तो सात दिन और सात रातों तक उठता ही नहीं और कभी माला के मनके तोड़कर घूरे के हवाले कर देता। कभी कहता कि मनुष्य योनि के बावजूद वह गधे की जिन्दगी जी रहा है और कभी डींग हाँकता कि उससे बड़ा संन्त तो जन्मा है और न कोई जन्मेगा। कई बार मौन व्रत धारण कर लेता तो होंठ ही नहीं
Answer:
यह गद्यांश 'अनोखी परीक्षा' कहानी से लिया गया है, जिसके लेखक विजयदान देथा हैं। इसमें महात्मा के विचित्र स्वभाव का वर्णन किया गया है।
लेखक बताते हैं कि एक अघोरी साधु था जिसका स्वभाव बहुत अजीब था। वह अपनी मर्ज़ी का मालिक था और कुछ हद तक पागल जैसा था। जब उसका मन करता, तो सुबह उगते सूरज को सात बार जल चढ़ाता था और कभी-कभी उसकी किरणों पर मुट्ठी भर धूल उछाल देता था। कभी वह सात दिन और सात रातों तक माला जपता रहता था, और कभी माला के दानों को तोड़कर कूड़े के ढेर पर फेंक देता था। कभी वह कहता था कि मनुष्य के रूप में वह गधे की ज़िन्दगी जी रहा है, और कभी अपनी बड़ाई करते हुए कहता था कि उससे बड़ा महात्मा न तो कभी पैदा हुआ है और न कभी होगा। कई बार वह मौन व्रत धारण कर लेता था और अपने होंठ भी नहीं खोलता था। कभी वह भद्दी गालियाँ भी देता था। उसके ऐसे अजीब व्यवहार के बावजूद लोग उसका आदर करते थे।
In simple words: यह गद्यांश औघड़ महात्मा के अजीब और मनमौजी स्वभाव को बताता है। वे कभी पूजा करते तो कभी गुस्से में चीज़ें फेंक देते, और कभी अपनी बड़ाई करते थे। फिर भी लोग उनका सम्मान करते थे।
🎯 Exam Tip: सप्रसंग व्याख्या में पहले संदर्भ (पाठ और लेखक), फिर प्रसंग (गद्यांश का विषय), और अंत में सरल भाषा में व्याख्या लिखें।
2. गुरु के पास उस वक्त न तो पत्थर थे और न कोई बाँकी टेढ़ी लकड़ी। सो मुक्कों से ही धमाधम पीटते-पीटते उसके ही हाथ दुख चले पर भाइयों ने चूं तक नहीं की। दोनों तरफ मामला पूरा खिंच गया। आखिर औघड़ सन्त को ही हार स्वीकार करनी पड़ी। मुस्कुराते हुए धीमे से बोला, "मुझे क्यों खामखाह परेशान कर रहे हो? अधिक शिष्य बनाने पर बड़े से बड़े पंथ का भी पतन होने में देर नहीं लगती।
Answer:
यह गद्यांश 'अनोखी परीक्षा' कहानी से लिया गया है, जिसके लेखक विजयदान देथा हैं। इसमें शिष्य बनने की जिद पर अड़े भाइयों और औघड़ महात्मा के बीच की घटना का वर्णन है।
लेखक बताते हैं कि औघड़ महात्मा बहुत हठी स्वभाव के थे और वे किसी को अपना शिष्य नहीं बनाते थे। एक बार उनसे भी ज़्यादा हठी दो भाई उनके शिष्य बनने आए और उनके पैर पकड़कर कहा कि वे शिष्य बने बिना सात जन्मों तक उनके पैर नहीं छोड़ेंगे। शिष्यों ने महात्मा के पैर कसकर पकड़े हुए थे। उस समय महात्मा के पास उन्हें पीटने के लिए न तो पत्थर थे और न ही साधुओं जैसी कोई टेढ़ी लकड़ी। इसलिए, उन्होंने शिष्य बनने की ज़िद करने वाले भाइयों को मुक्कों से ही पीटना शुरू कर दिया। वे पीटते-पीटते थक गए और उनके हाथ दुखने लगे, लेकिन शिष्यों ने उफ तक नहीं की। वे पैर पकड़े रहे और महात्मा उन्हें पीटते रहे। आखिर में उस औघड़ साधु को ही हार माननी पड़ी। उन्होंने मुस्कुराते हुए धीरे से कहा, "तुम मुझे बेवजह क्यों परेशान कर रहे हो? ज़्यादा शिष्य बनाना ठीक नहीं होता, उससे बड़े-से-बड़े पंथ का भी पतन हो जाता है।"
In simple words: यह अंश बताता है कि जब दो भाई महात्मा के शिष्य बनने के लिए पैर पकड़कर जिद करने लगे, तो महात्मा ने उन्हें मुक्कों से पीटा। लेकिन जब वे नहीं माने, तो महात्मा को हार माननी पड़ी और उन्होंने कहा कि ज़्यादा शिष्य बनाने से पंथ का पतन होता है।
🎯 Exam Tip: व्याख्या में पात्रों के संवाद और उनकी मनोदशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
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