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Detailed Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण RBSE Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. प्राथमिक समंक हैं
(अ) मौलिक समंक
(ब) पहली बार एकत्रित किये जाने वाले समंक
(स) पहले से अस्तित्व में न होने वाले समंक बाल समक
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: प्राथमिक समंक वे डेटा होते हैं जो बिल्कुल नए होते हैं, पहली बार इकट्ठे किए जाते हैं, और पहले से कहीं मौजूद नहीं होते हैं। ये सभी विकल्प प्राथमिक समंक की सही पहचान बताते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंक की परिभाषा को याद रखें, जिसमें मौलिकता और पहली बार संग्रहण मुख्य बिंदु हैं।
प्रश्न 2. द्वितीयक समंक संकलित किये जाते हैं
Answer: इस प्रश्न के विकल्प स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं हैं। द्वितीयक समंक वे डेटा होते हैं जो पहले से किसी और द्वारा किसी अन्य उद्देश्य के लिए एकत्र किए जा चुके होते हैं और प्रकाशित भी हो चुके होते हैं। अनुसन्धानकर्ता केवल उनका उपयोग करता है।
In simple words: सेकेंडरी डेटा को पहले ही कोई और इकट्ठा कर चुका होता है. जांच करने वाला व्यक्ति बस इसे इस्तेमाल करता है.
🎯 Exam Tip: एमसीक्यू प्रश्नों में, यदि विकल्प अनुपलब्ध हों, तो प्रश्न की प्रकृति को समझते हुए सबसे सटीक सामान्य उत्तर देने का प्रयास करें।
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. संकलन के दृष्टिकोण से समंक कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: संकलन के दृष्टिकोण से समंक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। इन दो प्रकारों में प्राथमिक समंक और द्वितीयक समंक शामिल हैं। प्राथमिक समंक वे होते हैं जो पहली बार सीधे इकट्ठा किए जाते हैं, जबकि द्वितीयक समंक वे होते हैं जो पहले से किसी और द्वारा इकट्ठे किए जा चुके होते हैं।
In simple words: डेटा इकट्ठा करने के तरीके से, समंक दो तरह के होते हैं: प्राथमिक समंक और द्वितीयक समंक।
🎯 Exam Tip: समंकों के प्रकार बताते समय, उनके मुख्य भेदों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
प्रश्न 2. प्राथमिक समंक क्या है?
Answer: प्राथमिक समंक वे समंक होते हैं जिन्हें अनुसन्धानकर्ता खुद अपनी नई बनाई गई योजना के तहत अपने अनुसन्धान के लक्ष्य के लिए पहली बार इकट्ठा करता है। यह डेटा बिल्कुल मौलिक होता है और पहले से कहीं मौजूद नहीं होता।
In simple words: प्राथमिक समंक वह डेटा है जिसे जांच करने वाला व्यक्ति पहली बार अपने काम के लिए खुद इकट्ठा करता है।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंक की परिभाषा में 'अनुसन्धानकर्ता द्वारा पहली बार संकलन' और 'मौलिकता' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
प्रश्न 3. द्वितीयक समंक क्या है?
Answer: द्वितीयक समंक वे समंक होते हैं जिन्हें किसी और अनुसन्धानकर्ता ने पहले ही इकट्ठा कर लिया होता है, और जब कोई दूसरा व्यक्ति अपने उद्देश्य के लिए उन्हीं समंकों का उपयोग करता है तो उन्हें द्वितीयक समंक कहा जाता है। ये समंक मौलिक नहीं होते क्योंकि इन्हें पहले ही एकत्र किया जा चुका होता है।
In simple words: द्वितीयक समंक वह डेटा है जिसे किसी और ने पहले इकट्ठा किया था, और कोई दूसरा इसे अपने काम के लिए इस्तेमाल करता है।
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंक की परिभाषा में 'पहले से संकलित' और 'किसी अन्य द्वारा प्रयोग' जैसे शब्दों पर जोर दें।
प्रश्न 4. प्राथमिक समंक मौलिक समंक क्यों कहे जाते हैं?
Answer: प्राथमिक समंकों को मौलिक समंक इसलिए कहा जाता है क्योंकि अनुसन्धानकर्ता उन्हें अपनी जांच के लिए बिल्कुल नए सिरे से, शुरुआत से अंत तक खुद इकट्ठा करता है। ये समंक किसी और के द्वारा पहले से एकत्र नहीं किए गए होते हैं, इसलिए ये पूरी तरह से नए और मूल होते हैं।
In simple words: प्राथमिक समंक मौलिक होते हैं क्योंकि जांच करने वाला उन्हें पहली बार खुद इकट्ठा करता है।
🎯 Exam Tip: मौलिकता के पीछे का कारण 'पहली बार संग्रहण' और 'किसी अन्य द्वारा पूर्व-संकलित न होना' है।
प्रश्न 5. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान क्या है?
Answer: प्रश्नावली प्रश्नों की वह सूची है जिसे सूचकों द्वारा भरा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग जानकारी एकत्र करने के लिए किया जाता है, खासकर जब सीधा संपर्क संभव न हो।
In simple words: प्रश्नावली सवालों की एक लिस्ट होती है जिसे लोग खुद भरकर जानकारी देते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली को प्रश्नों की सूची के रूप में परिभाषित करें, जो सूचकों द्वारा भरी जाती है।
प्रश्न 7. दैव प्रतिदर्श क्या है?
Answer: 'दैव प्रतिदर्श' समग्र (पूरी जनसंख्या) में से कुछ नमूने चुनने का वह तरीका है, जिसमें समग्र की हर एक इकाई के चुने जाने की संभावना बराबर होती है। यह विधि पूरी तरह से निष्पक्ष होती है क्योंकि चुनाव में किसी भी तरह का पक्षपात शामिल नहीं होता।
In simple words: दैव प्रतिदर्श वह तरीका है जिससे सैंपल चुना जाता है, जिसमें सबको चुने जाने का बराबर मौका मिलता है।
🎯 Exam Tip: दैव प्रतिदर्श की मुख्य विशेषता 'प्रत्येक इकाई को समान अवसर' और 'निष्पक्षता' है।
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. प्रकाशित एवं अप्रकाशित स्रोतों में क्या अन्तर है?
Answer:
प्रकाशित स्रोत: कई अनुसन्धान संस्थाएँ, शोध संगठन और कंपनियाँ अलग-अलग विषयों पर मौलिक डेटा इकट्ठा करती हैं और उन्हें समय-समय पर प्रकाशित करवाती रहती हैं। इन प्रकाशित समंकों में सरकारी प्रकाशन, समितियों की रिपोर्टें, और आयोगों की रिपोर्टें शामिल होती हैं, जो सभी के लिए उपलब्ध होती हैं।
अप्रकाशित स्रोत: कभी-कभी सरकार या अन्य संस्थाएँ और व्यक्ति महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी इकट्ठा तो कर लेते हैं लेकिन उसे प्रकाशित नहीं करते हैं। ऐसी अप्रकाशित जानकारी को कार्यालय की फाइलों, रजिस्टरों, या अनुसन्धानकर्ता की डायरी जैसी जगहों से प्राप्त किया जा सकता है। यह डेटा अक्सर व्यक्तिगत या गुप्त कारणों से सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
In simple words: प्रकाशित स्रोत वह जानकारी है जो छपी हुई है, जैसे सरकारी रिपोर्ट. अप्रकाशित स्रोत वह जानकारी है जो इकट्ठी तो हुई है पर छपी नहीं है, जैसे किसी की डायरी.
🎯 Exam Tip: प्रकाशित और अप्रकाशित स्रोतों के बीच के मुख्य अंतर को उनके सार्वजनिक होने की स्थिति और पहुँच के आधार पर समझाएँ।
प्रश्न 2. प्राथमिक एवं द्वितीयक समंकों में कोई तीन अन्तर लिखिए।
Answer: प्राथमिक एवं द्वितीयक समंकों में मुख्य रूप से निम्नलिखित अंतर हैं:
• प्रकृति: प्राथमिक समंक सांख्यिकीय तरीकों के लिए कच्चे माल की तरह होते हैं, जो सीधे इकट्ठा किए जाते हैं। इसके विपरीत, द्वितीयक समंक सांख्यिकीय प्रक्रिया से एक बार गुजर चुके होते हैं और तैयार माल की तरह होते हैं। यह डेटा अपनी मूल स्थिति में होता है।
• संग्रहकर्ता: प्राथमिक समंक को अनुसन्धानकर्ता या उसके प्रतिनिधि द्वारा खुद इकट्ठा किया जाता है। जबकि, द्वितीयक समंकों को अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा पहले ही इकट्ठा और प्रकाशित किया जा चुका होता है।
• योजना: प्राथमिक समंकों को एक नई योजना बनाकर शुरू से इकट्ठा किया जाता है। वहीं, द्वितीयक समंक पहले से ही उपलब्ध होते हैं, यानी वे किसी प्रकाशन, रिपोर्ट, या रिकॉर्ड में पहले से ही मौजूद होते हैं।
In simple words: प्राथमिक डेटा कच्चा होता है और पहली बार इकट्ठा होता है, जबकि द्वितीयक डेटा पहले से इकट्ठा किया गया तैयार डेटा होता है.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक समंकों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए उनकी मौलिकता, संग्रहणकर्ता और संग्रहण की प्रक्रिया पर ध्यान दें।
प्रश्न 4. द्वितीयक समंकों का अर्थ उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: द्वितीयक समंक वे समंक होते हैं जिन्हें किसी अन्य व्यक्ति या संस्था ने पहले ही इकट्ठा कर लिया हो और प्रकाशित भी कर दिया हो। अनुसन्धानकर्ता केवल इन समंकों का अपनी जांच के लिए उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई अनुसन्धानकर्ता सरकार द्वारा कृषि, श्रम, या रोजगार से संबंधित पहले से एकत्र किए गए और प्रकाशित समंकों का उपयोग करता है, तो ये द्वितीयक समंक कहलाते हैं। यह एक आसान और कम खर्चीला तरीका हो सकता है डेटा प्राप्त करने का।
In simple words: द्वितीयक समंक वह डेटा होता है जो किसी और ने पहले ही इकट्ठा और छाप दिया हो. जब हम उस डेटा को इस्तेमाल करते हैं, तो वह द्वितीयक समंक कहलाता है. जैसे, सरकारी कृषि रिपोर्टों का इस्तेमाल करना.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंक को परिभाषित करते समय 'पूर्व-संकलित' और 'पुनः उपयोग' जैसे शब्दों का प्रयोग करें और एक सरल उदाहरण दें।
प्रश्न 5. एक अच्छी प्रश्नावली के क्या गुण हैं? कोई तीन गुण लिखिए?
Answer: एक अच्छी प्रश्नावली में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:
1. प्रश्नावली का आकार छोटा होना चाहिए और उसमें प्रश्नों की संख्या कम होनी चाहिए, ताकि भरने वाले को दिक्कत न हो।
2. प्रश्न सरल और आसानी से समझ में आने वाले होने चाहिए, जिससे सूचक सही उत्तर दे सकें।
3. प्रश्नों के उत्तर सही दिए जा सकने वाले होने चाहिए। ये प्रश्न बहुविकल्पीय या सामान्य विकल्प वाले भी हो सकते हैं।
In simple words: अच्छी प्रश्नावली छोटी होनी चाहिए, प्रश्न आसान होने चाहिए और जवाब सीधे दिए जा सकें ऐसे होने चाहिए.
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली के गुणों को बताते समय 'सरलता', 'स्पष्टता' और 'संक्षिप्तता' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दें।
प्रश्न 6. प्रश्नावली तथा अनुसूची में कोई तीन अन्तर लिखिए।
Answer: प्रश्नावली तथा अनुसूची में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:
1. प्रश्नावली को सूचक खुद भरते हैं, जबकि अनुसूची को प्रगणक (जानकारी इकट्ठा करने वाला व्यक्ति) सूचना देने वाले से पूछताछ करके भरता है।
2. प्रश्नावली डाक या ईमेल द्वारा सूचक को भेजी जाती है, जबकि अनुसूची को प्रगणक खुद सूचना देने वाले के पास व्यक्तिगत रूप से लेकर जाता है।
3. प्रश्नावली में अनुसन्धानकर्ता का सूचना देने वाले से सीधा व्यक्तिगत संपर्क नहीं होता है, जबकि अनुसूची में व्यक्तिगत संपर्क जरूरी होता है।
In simple words: प्रश्नावली में लोग खुद जवाब भरते हैं, पर अनुसूची में कोई और सवाल पूछकर भरता है. प्रश्नावली दूर से भेजी जाती है, जबकि अनुसूची में इंसान खुद आकर सवाल पूछता है.
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली और अनुसूची के अंतर को स्पष्ट करने के लिए 'भरने वाला', 'संचार का माध्यम' और 'व्यक्तिगत संपर्क' जैसे प्रमुख पहलुओं का उल्लेख करें।
प्रश्न 7. द्वितीयक समंकों के स्रोतों को संक्षेप में लिखिए।
Answer: द्वितीयक समंकों के स्रोत वे जगहें हैं जहाँ से पहले से इकट्ठी की गई जानकारी मिलती है। ये स्रोत दो तरह के होते हैं: प्रकाशित और अप्रकाशित। प्रकाशित स्रोतों में सरकारी रिपोर्टें, अखबार, पत्रिकाएँ, समितियों और आयोगों की रिपोर्टें, व्यापारिक संघों के प्रकाशन और शोध संस्थानों की रिपोर्टें शामिल हैं। अप्रकाशित स्रोतों में वे रिकॉर्ड शामिल हैं जो प्रकाशित नहीं हुए हैं, जैसे निजी डायरी, कार्यालय की फाइलें, और गैर-सरकारी संस्थानों के आंतरिक दस्तावेज। इन सभी स्रोतों से हमें वह डेटा मिलता है जो पहले ही किसी और ने इकट्ठा कर लिया होता है।
In simple words: द्वितीयक समंकों के स्रोत वे जगहें हैं जहाँ से हमें पहले से इकट्ठा किया गया डेटा मिलता है. ये स्रोत छपे हुए (जैसे सरकारी रिपोर्ट) या बिना छपे हुए (जैसे निजी रिकॉर्ड) हो सकते हैं.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंकों के स्रोतों को 'प्रकाशित' और 'अप्रकाशित' में वर्गीकृत करके समझाना हमेशा बेहतर होता है।
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. सांख्यिकीय अनुसन्धान की रीतियों का वर्णन कीजिये।
Answer: सांख्यिकीय अनुसन्धान की रीतियाँ वे तरीके हैं जिनसे किसी समूह के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। यह जानकारी दो मुख्य तरीकों से इकट्ठी की जा सकती है: संगणना रीति और प्रतिदर्श रीति।
• संगणना रीति (Census Method): जब अनुसन्धानकर्ता पूरे समूह की हर एक इकाई से जानकारी इकट्ठा करता है, तो इसे संगणना रीति कहते हैं। जैसे, जनगणना में हर घर और हर व्यक्ति से जानकारी ली जाती है। इस तरीके से मिली जानकारी बहुत सही और विश्वसनीय होती है, पर इसमें बहुत पैसा और समय लगता है।
• प्रतिदर्श रीति (Sample Method): इस तरीके में पूरे समूह में से कुछ खास इकाइयों को चुना जाता है, और फिर उन्हीं चुनी हुई इकाइयों का अध्ययन करके पूरे समूह के बारे में पता लगाया जाता है। जैसे, दुकान में चावल खरीदने से पहले पूरी बोरी की जगह थोड़े से चावल देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगाना। यह तरीका समय और पैसे दोनों बचाता है, लेकिन इसमें बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है, नहीं तो नतीजे गलत हो सकते हैं। यह तरीका सांख्यिकीय नियमितता और बड़े आंकड़ों की जड़ता के नियम पर आधारित है।
In simple words: सांख्यिकीय जांच करने के दो तरीके हैं: संगणना और प्रतिदर्श. संगणना में हर चीज़ की जांच होती है, पर प्रतिदर्श में बस कुछ नमूनों की जांच की जाती है.
🎯 Exam Tip: सांख्यिकीय अनुसन्धान की रीतियों का वर्णन करते समय संगणना और प्रतिदर्श के बीच के मुख्य अंतर और उनके उदाहरणों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 2. समग्र में से प्रतिचयन (Sample) चुनने की कौन सी विधि सर्वोत्तम विधि है
(अ) सविचार प्रतिचयन
(ब) दैव प्रतिचयन
(स) मिश्रित प्रतिचयन
(द) अभ्यंश प्रतिचयन
Answer: (ब) दैव प्रतिचयन
In simple words: दैव प्रतिचयन सैंपल चुनने का सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं होता और सबको चुने जाने का बराबर मौका मिलता है.
🎯 Exam Tip: सर्वोत्तम विधि का चयन करते समय निष्पक्षता और सभी इकाइयों को समान अवसर मिलने वाले सिद्धांत पर ध्यान दें।
प्रश्न 3. जिन समंकों को अनुसन्धानकर्ता नये सिरे से पहली बार संकलित करता है उन्हें कहते हैं
(अ) प्राथमिक समंक
(ब) द्वितीयक समंक
(स) मिश्रित समंक
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) प्राथमिक समंक
In simple words: जब कोई व्यक्ति डेटा को पहली बार खुद इकट्ठा करता है, तो उसे प्राथमिक डेटा कहते हैं.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंक की पहचान 'पहली बार संकलित' और 'नए सिरे से' जैसे शब्दों से होती है।
प्रश्न 4. जब अनुसन्धानकर्ता द्वारा समग्र में से कुछ इकाइयों का चयन अपनी इच्छानुसार जान-बूझकर किया जाता है, उसे कहते हैं
(अ) दैव प्रतिचयन
(ब) सविचार प्रतिचयन
(स) मिश्रित प्रतिचयन
(द) स्तरित प्रतिचयन
Answer: (ब) सविचार प्रतिचयन
In simple words: जब जांच करने वाला अपनी मर्जी से कुछ खास लोगों को चुनता है, तो उसे सविचार प्रतिचयन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: 'इच्छानुसार चयन' या 'जान-बूझकर चुनाव' सविचार प्रतिचयन की मुख्य पहचान है।
प्रश्न 5. अच्छी प्रश्नावली के गुण हैं
(अ) स्पष्ट एवं छोटे प्रश्न
Answer: (अ) स्पष्ट एवं छोटे प्रश्न
In simple words: एक अच्छी प्रश्नावली में सवाल साफ़ और छोटे होने चाहिए ताकि लोग आसानी से समझकर जवाब दे सकें.
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली के प्रश्नों की स्पष्टता और संक्षिप्तता उसे प्रभावी बनाती है, जो अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6. प्राथमिक समंक संकलित किये जाते हैं
(अ) जब उच्च परिशुद्धता की आवश्यकता हो
(ब) जब अनुसन्धान का क्षेत्र विस्तृत हो
(स) जब क्रय खर्चा करना हो
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) जब उच्च परिशुद्धता की आवश्यकता हो
In simple words: जब डेटा बहुत सटीक चाहिए होता है, तब प्राथमिक डेटा इकट्ठा किया जाता है.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंक का उपयोग तब किया जाता है जब डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
प्रश्न 7. द्वितीयक समंकों को प्रयोग करने से पहले निश्चय कर लेना चाहिए
(अ) क्या आँकड़े विश्वसनीय हैं
(ब) क्या आँकड़े अपने उद्देश्य के अनुरूप हैं।
(स) क्या आँकड़े पर्याप्त है।
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: सेकेंडरी डेटा इस्तेमाल करने से पहले ये पक्का कर लेना चाहिए कि वो भरोसेमंद है, हमारे काम का है और पूरा है.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंकों के उपयोग से पहले उनकी विश्वसनीयता, उपयुक्तता और पर्याप्तता का आकलन करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 8. सांख्यिकी अनुसन्धान की रीतियाँ है
(अ) दो।
(ब) चार
(स) तीन
(द) एक
Answer: (अ) दो।
In simple words: सांख्यिकी जांच करने के दो मुख्य तरीके होते हैं.
🎯 Exam Tip: सांख्यिकीय अनुसन्धान की दो प्रमुख रीतियाँ 'संगणना' और 'प्रतिदर्श' हैं, इन्हें याद रखें।
प्रश्न 9. जब समग्र में से कुछ प्रतिनिधि इकाइयों का चयन किया जाता है, वह रीति है
(अ) संगणना रीति
(ब) प्रतिदर्श रीति
(स) स्तरित रीति
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) प्रतिदर्श रीति
In simple words: जब हम किसी बड़ी जनसंख्या में से कुछ खास नमूने चुनते हैं, तो उसे सैंपल तरीका कहते हैं.
🎯 Exam Tip: 'प्रतिनिधि इकाइयों का चयन' प्रतिदर्श रीति की मुख्य पहचान है।
प्रश्न 10. समितियों एवं आयोग की रिपोर्ट है
(अ) प्रकाशित स्रोत
(ब) अप्रकाशित स्रोत
(स) दोनों
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) प्रकाशित स्रोत
In simple words: समितियों और आयोगों की रिपोर्ट छपी हुई जानकारी होती है, इसलिए वे प्रकाशित स्रोत हैं.
🎯 Exam Tip: सरकारी या आधिकारिक निकायों द्वारा जारी की गई अधिकांश रिपोर्टें प्रकाशित स्रोतों के अंतर्गत आती हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 5 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. समग्र को परिभाषित कीजिये?
Answer: अनुसन्धान क्षेत्र में जितनी भी इकाइयाँ (चीजें या लोग) होती हैं, उन सभी के पूरे समूह को 'समग्र' कहते हैं। यह वह पूरा समूह होता है जिससे हम जानकारी लेना चाहते हैं, जैसे किसी शहर के सभी लोग या किसी कक्षा के सभी छात्र।
In simple words: जांच करने वाली सभी चीजों के पूरे समूह को समग्र कहते हैं.
🎯 Exam Tip: समग्र की परिभाषा में 'अनुसन्धान क्षेत्र की सभी इकाइयों' और 'सामूहिक रूप' जैसे शब्दों का उपयोग करें।
प्रश्न 2. प्रतिदर्श को परिभाषित कीजिये?
Answer: प्रतिदर्श, या सैंपल, समग्र का एक छोटा हिस्सा होता है जो पूरे समग्र का सही प्रतिनिधित्व करता है। इसमें समग्र में से चुनी गई कुछ इकाइयाँ शामिल होती हैं, जिनकी जांच करके पूरे समग्र के बारे में निष्कर्ष निकाले जाते हैं। यह एक छोटे पैमाने पर जांच करने का तरीका है।
In simple words: प्रतिदर्श समग्र का एक छोटा हिस्सा होता है जो पूरे समग्र को दिखाता है.
🎯 Exam Tip: प्रतिदर्श की परिभाषा में 'समग्र का प्रतिनिधित्व' और 'कुछ इकाइयों का समूह' मुख्य बिंदु हैं।
प्रश्न 3. प्राथमिक समंकों को एकत्रित करने की दो विधियों के नाम बताइए?
Answer: प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने की दो मुख्य विधियाँ इस प्रकार हैं:
1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान विधि
2. अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान विधि
In simple words: प्राथमिक डेटा इकट्ठा करने के दो तरीके हैं: सीधा खुद जाकर पूछना या दूसरों से जानकारी लेना.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंकों की विधियों में 'प्रत्यक्ष' और 'अप्रत्यक्ष' दोनों प्रकार की रीतियों को याद रखें।
प्रश्न 4. अनुसूची से क्या आशय है?
Answer: अनुसूची प्रश्नों की एक सूची होती है जिसे प्रशिक्षित प्रगणक (जानकारी इकट्ठा करने वाला व्यक्ति) खुद सूचकों (जवाब देने वालों) से पूछताछ करके भरता है। इसमें प्रगणक का व्यक्तिगत संपर्क और बातचीत शामिल होती है, जो प्रश्नावली से अलग है।
In simple words: अनुसूची सवालों की एक लिस्ट है जिसे जांच करने वाला आदमी खुद सवाल पूछकर भरता है.
🎯 Exam Tip: अनुसूची की परिभाषा में 'प्रशिक्षित प्रगणक' और 'पूछताछ करके भरना' जैसे शब्दों का उपयोग करें।
प्रश्न 5. सांख्यिकीय समंकों का मूलभूत प्रक्रिया क्या है?
Answer: सांख्यिकीय समंकों का मूलभूत प्रक्रिया 'समंक' है। यह डेटा सांख्यिकीय विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने का आधार बनता है, जो किसी भी अनुसन्धान की शुरुआत होती है।
In simple words: सांख्यिकीय डेटा की सबसे पहली और मुख्य चीज़ 'डेटा' ही होती है.
🎯 Exam Tip: सांख्यिकीय प्रक्रिया का आधार 'समंक' ही होता है, क्योंकि बिना डेटा के कोई विश्लेषण संभव नहीं है।
प्रश्न 7. प्राथमिक एवं द्वितीयक समंक में कोई एक अन्तर लिखो?
Answer: प्राथमिक समंक मौलिक होते हैं और सांख्यिकीय विधियों के लिए कच्चे माल की तरह काम करते हैं। इसके विपरीत, द्वितीयक समंक सांख्यिकीय क्षेत्र में एक बार इस्तेमाल हो चुके होते हैं और निर्मित मान की तरह होते हैं, यानी वे पहले से संसाधित होते हैं। यह अंतर उनकी मौलिकता और प्रसंस्करण स्तर को दर्शाता है।
In simple words: प्राथमिक डेटा नया होता है, जबकि द्वितीयक डेटा पहले से इस्तेमाल किया गया डेटा होता है.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक समंकों के मौलिकता के अंतर को याद रखें, जो सबसे महत्वपूर्ण भेद है।
प्रश्न 8. प्राथमिक समंकों के संकलन की कितनी रीतियाँ है?
Answer: प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने की 5 मुख्य रीतियाँ हैं। इन रीतियों में प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान, अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान, संवाददाताओं से सूचना प्राप्ति, प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्ति और प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना शामिल हैं।
In simple words: प्राथमिक डेटा इकट्ठा करने के 5 तरीके हैं.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक समंकों के संग्रहण की रीतियों की संख्या को याद रखना उपयोगी है।
प्रश्न 9. आर्थर यंग ने कृषि उत्पादन के अध्ययन में किस रीति का प्रयोग किया?
Answer: आर्थर यंग ने कृषि उत्पादन का अध्ययन करने के लिए प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान रीति का प्रयोग किया। इस विधि में उन्होंने खुद जाकर जानकारी इकट्ठा की, जिससे डेटा की सटीकता बढ़ी।
In simple words: आर्थर यंग ने खेती की उपज को जांचने के लिए सीधा खुद जाकर पूछताछ करने का तरीका इस्तेमाल किया.
🎯 Exam Tip: विशेषज्ञों और उनके द्वारा उपयोग की गई विशिष्ट रीतियों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
प्रश्न 10. सूचकों द्वारा प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्ति रीति किसे क्षेत्र के लिए उपयुक्त है?
Answer: सूचकों द्वारा प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्त करने की रीति अनुसन्धान के व्यापक क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त है। जब अनुसन्धान का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और व्यक्तिगत संपर्क संभव नहीं होता, तो यह विधि बहुत प्रभावी होती है।
In simple words: प्रश्नावली से डेटा इकट्ठा करने का तरीका तब अच्छा होता है जब हमें बहुत बड़े इलाके से जानकारी चाहिए होती है.
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली विधि का चुनाव तब करें जब क्षेत्र विस्तृत हो और प्रत्यक्ष संपर्क कठिन हो।
प्रश्न 11. पारिवारिक बजट, सूचना, मत सर्वेक्षण, बेरोजगारी से सम्बन्धित आँकड़ो का संकलन किस रीति से किया जाता है।
Answer: पारिवारिक बजट, सूचना, मत सर्वेक्षण, और बेरोजगारी से संबंधित डेटा इकट्ठा करने के लिए सूचकों द्वारा प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्ति रीति का प्रयोग किया जाता है। यह विधि बड़ी संख्या में लोगों से जानकारी इकट्ठा करने के लिए कुशल और प्रभावी है।
In simple words: घर के बजट, राय और बेरोजगारी के आंकड़े इकट्ठा करने के लिए प्रश्नावली का तरीका इस्तेमाल होता है.
🎯 Exam Tip: विशेष प्रकार के डेटा संग्रह के लिए उपयोग की जाने वाली रीति को याद रखें, जैसे सर्वेक्षण के लिए प्रश्नावली।
प्रश्न 12. सर्वेक्षण के लिए समंक एकत्रित करने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है?
Answer: सर्वेक्षण के लिए डेटा इकट्ठा करने हेतु सूचना देने वाले द्वारा ही प्रश्नावली को भरा जाता है। प्रश्नावली में सूचक अपने जवाब खुद लिखते हैं, जिससे वे अपनी राय और जानकारी सीधे प्रदान कर पाते हैं।
In simple words: सर्वेक्षण के लिए, प्रश्नावली का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जवाब देने वाले लोग खुद भरते हैं.
🎯 Exam Tip: सर्वेक्षण में अक्सर प्रश्नावली का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह बड़े पैमाने पर जानकारी जुटाने का एक प्रभावी तरीका है।
प्रश्न 14. अनुसूची को किसके द्वारा भरा जाता है?
Answer: अनुसूची को प्रगणक द्वारा सूचकों से पूछताछ करके भरा जाता है। प्रगणक खुद सवाल पूछते हैं और उनके जवाबों को अनुसूची में लिखते हैं, जिससे अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है।
In simple words: अनुसूची को जांच करने वाला आदमी, लोगों से पूछकर भरता है.
🎯 Exam Tip: अनुसूची में, डेटा संग्रह में प्रगणक की सक्रिय भूमिका को उजागर करें।
प्रश्न 15. द्वितीयक समंकों के कितने स्रोत है।
Answer: द्वितीयक समंकों के मुख्य रूप से दो स्रोत होते हैं। ये स्रोत प्रकाशित स्रोत और अप्रकाशित स्रोत हैं, जिनसे पहले से इकट्ठा किया गया डेटा प्राप्त होता है।
In simple words: सेकेंडरी डेटा के दो तरह के स्रोत होते हैं.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंकों के स्रोतों को 'प्रकाशित' और 'अप्रकाशित' में वर्गीकृत करना याद रखें।
प्रश्न 16. द्वितीयक समंकों के दो स्रोतों के नाम बताओ?
Answer: द्वितीयक समंकों के दो मुख्य स्रोत हैं:
1. प्रकाशित स्रोत
2. अप्रकाशित स्रोत
In simple words: सेकेंडरी डेटा के दो स्रोत हैं: छपे हुए स्रोत और बिना छपे हुए स्रोत.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक समंकों के प्रमुख दो स्रोतों के नाम सीधे याद रखें।
प्रश्न 17. अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं का प्रकाशन द्वितीयक समंक का कैसा स्रोत है?
Answer: अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का प्रकाशन द्वितीयक समंक का एक प्रकाशित स्रोत है। ये संस्थाएँ नियमित रूप से विभिन्न विषयों पर डेटा इकट्ठा और प्रकाशित करती हैं, जिससे यह जानकारी सभी के लिए उपलब्ध होती है।
In simple words: दुनिया भर की संस्थाओं की छपी हुई किताबें सेकेंडरी डेटा का एक प्रकाशित स्रोत हैं.
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा जारी रिपोर्टें आमतौर पर प्रकाशित स्रोतों के अंतर्गत आती हैं।
प्रश्न 18. सांख्यिकी अनुसन्धान की कितनी रीतियाँ
Answer: सांख्यिकीय अनुसन्धान की दो मुख्य रीतियाँ हैं। ये हैं संगणना रीति और प्रतिदर्श रीति, जिनका उपयोग डेटा इकट्ठा करने और उसका विश्लेषण करने के लिए किया जाता है।
In simple words: सांख्यिकी जांच के दो मुख्य तरीके होते हैं.
🎯 Exam Tip: सांख्यिकीय अनुसन्धान की प्रमुख रीतियों की संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 21. प्रतिदर्श चयन की कितनी रीतियाँ है?
Answer: प्रतिदर्श (सैंपल) चुनने की तीन मुख्य रीतियाँ हैं। इन रीतियों में सविचार प्रतिदर्श, दैव प्रतिदर्श और स्तरित प्रतिदर्श शामिल हैं, जो विभिन्न अनुसन्धान उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती हैं।
In simple words: सैंपल चुनने के तीन तरीके होते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रतिदर्श चयन की तीन मुख्य रीतियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 22. प्रतिदर्श चयन की रीतियों के नाम लिखो?
Answer: प्रतिदर्श चुनने की मुख्य रीतियाँ इस प्रकार हैं:
1. सविचार प्रतिदर्श
2. दैव प्रतिदर्श
3. स्तरित प्रतिदर्श
In simple words: सैंपल चुनने के तरीके हैं: अपनी मर्जी से चुनना, बिना सोचे चुनना और हिस्सों में बांटकर चुनना.
🎯 Exam Tip: प्रतिदर्श चयन की इन तीनों रीतियों के नाम और उनके मुख्य सिद्धांतों को समझें।
प्रश्न 23. समंकों को एकत्रित करने का कार्य कब प्रारम्भ किया जाता है?
Answer: समंकों को इकट्ठा करने का काम सांख्यिकीय अनुसन्धान की पूरी योजना बनाने के बाद शुरू होता है। योजना में अनुसन्धान के उद्देश्य, क्षेत्र और उपयोग की जाने वाली रीति का चुनाव करना शामिल होता है, जिसके बाद डेटा संग्रह का काम शुरू किया जाता है।
In simple words: डेटा इकट्ठा करने का काम तभी शुरू होता है जब जांच की पूरी योजना बन जाती है.
🎯 Exam Tip: डेटा संग्रह की प्रक्रिया को हमेशा अनुसन्धान योजना के बाद शुरू करें ताकि व्यवस्थित परिणाम मिलें।
प्रश्न 24. खेलने की आदत के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए विद्यार्थीयों से खेल के मैदान में जाकर आँकड़े संग्रहित करना कौन से आँकड़े कहलाएंगे।
Answer: खेलने की आदत के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों से खेल के मैदान में जाकर मौलिक रूप से आँकड़े संग्रहित करना प्राथमिक समंक कहलाएगा। यह प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान का एक उदाहरण है।
In simple words: खेल के मैदान में बच्चों से सीधे जानकारी इकट्ठा करना प्राथमिक डेटा कहलाता है.
🎯 Exam Tip: सीधे स्रोत से पहली बार जानकारी इकट्ठा करना हमेशा प्राथमिक समंक होता है।
प्रश्न 25. यदि अनुसन्धानकर्ता सरकार द्वारा कृषि, श्रम, रोजगार के अन्तर्गत संकलित एवं प्रकाशित समंकों को उपयोग करता है तो वे समंक क्या कहलाते हैं।
Answer: यदि अनुसन्धानकर्ता सरकार द्वारा कृषि, श्रम, और रोजगार के तहत इकट्ठा किए गए और प्रकाशित किए गए समंकों का उपयोग करता है, तो वे द्वितीयक समंक कहलाते हैं। यह डेटा पहले ही किसी और उद्देश्य के लिए एकत्र किया जा चुका होता है।
In simple words: अगर जांच करने वाला सरकार के खेती, काम और रोजगार के छपे हुए डेटा को इस्तेमाल करता है, तो उसे सेकेंडरी डेटा कहते हैं.
🎯 Exam Tip: पहले से प्रकाशित सरकारी डेटा का उपयोग करना द्वितीयक समंक का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
Question 26. प्राथमिक समंकों के संकलन की कोई चार रीतियाँ लिखिए?
Answer: प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने की चार मुख्य विधियाँ ये हैं:
1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान विधि: इसमें शोधकर्ता सीधे उन लोगों से बात करता है जिनसे जानकारी चाहिए.
2. अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान विधि: इसमें जानकारी उन लोगों से ली जाती है जो विषय से सीधे जुड़े नहीं होते, बल्कि उन्हें जानते हैं.
3. संवाददाताओं से सूचना प्राप्ति विधि: इसमें स्थानीय लोग या विशेष संवाददाता जानकारी इकट्ठा करके शोधकर्ता को भेजते हैं.
4. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना विधि: इसमें प्रशिक्षित लोग (प्रगणक) लोगों से सवाल पूछकर खुद जानकारी भरते हैं.
In simple words: प्राथमिक जानकारी इकट्ठा करने के मुख्य तरीके हैं लोगों से सीधे बात करना, अप्रत्यक्ष रूप से जानकारी लेना, संवाददाताओं का उपयोग करना, और प्रगणकों से फॉर्म भरवाना.
🎯 Exam Tip: इन विधियों के नामों और उनके पीछे के मूल विचार को याद रखें, क्योंकि यह सांख्यिकी के आधार हैं.
Question 27. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना रीति के दो उदाहरण दीजिये।
Answer: प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरने की विधि के दो उदाहरण इस प्रकार हैं:
1. जनगणना: इसमें सरकार हर घर जाकर हर व्यक्ति की जानकारी इकट्ठा करती है, ताकि देश की आबादी का सही आंकड़ा मिल सके.
2. आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण: इसमें किसी खास क्षेत्र या समूह की आर्थिक और सामाजिक स्थिति जानने के लिए प्रशिक्षित लोग घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करते हैं. ये उदाहरण दर्शाते हैं कि यह विधि बड़े पैमाने पर जानकारी जुटाने में बहुत उपयोगी है.
In simple words: इस विधि के दो बड़े उदाहरण हैं जनगणना और आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण, जहाँ प्रशिक्षित लोग घर-घर जाकर जानकारी भरते हैं.
🎯 Exam Tip: जनगणना एक प्रमुख उदाहरण है, जिसमें प्रशिक्षित कर्मी घर-घर जाकर डेटा एकत्र करते हैं, जिससे यह विधि बड़े सर्वेक्षणों के लिए बहुत प्रभावी बनती है.
Question 28. एक अच्छी प्रश्नावली के दो गुण लिखिए
Answer: एक अच्छी प्रश्नावली के दो मुख्य गुण ये हैं:
1. प्रश्न सरल और समझने में आसान होने चाहिए: प्रश्नों की भाषा इतनी सीधी होनी चाहिए कि कोई भी उन्हें आसानी से समझ सके और सही जवाब दे सके. इससे जानकारी सही मिलती है.
2. सही उत्तर दिए जा सकने वाले प्रश्न हों: प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न होने चाहिए जिनके स्पष्ट और सटीक उत्तर दिए जा सकें, भले ही वे हाँ/नहीं या बहुविकल्पीय हों. इससे डेटा का विश्लेषण आसान हो जाता है.
In simple words: एक अच्छी प्रश्नावली में प्रश्न सरल और समझने में आसान होने चाहिए, और उनके जवाब स्पष्ट रूप से दिए जा सकने चाहिए.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि स्पष्ट और सीधे प्रश्न ही सटीक उत्तर पाने की कुंजी हैं, जो आपके शोध को विश्वसनीय बनाते हैं.
Question 29. प्रश्नावली तथा अनुसूची में कोई दो। अन्तर लिखिए?
Answer: प्रश्नावली और अनुसूची में दो मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
1. प्रश्नावली सूचक (जानकारी देने वाला) खुद भरता है, जबकि अनुसूची को प्रगणक (जानकारी इकट्ठा करने वाला) जानकारी देने वाले से पूछकर भरता है. इससे जानकारी भरने का तरीका अलग हो जाता है.
2. प्रश्नावली एक कम खर्चीली विधि है क्योंकि इसमें सिर्फ छपाई और डाक का खर्च आता है, जबकि अनुसूची में प्रगणकों को प्रशिक्षित करने और भेजने का खर्च ज्यादा होता है, इसलिए यह अधिक खर्चीली प्रणाली है.
In simple words: प्रश्नावली में लोग खुद जवाब लिखते हैं, यह सस्ती है; अनुसूची में प्रगणक जवाब भरते हैं, यह महंगी है.
🎯 Exam Tip: दोनों के बीच का मुख्य अंतर यह है कि प्रश्नावली आत्म-प्रशासित होती है, जबकि अनुसूची प्रगणक-सहायता प्राप्त होती है.
Question 30. द्वितीयक समंकों के प्रयोग में कौन-सी सावधानियाँ रखनी चाहिए? कोई दो बताओ।
Answer: द्वितीयक समंकों (पहले से मौजूद डेटा) का उपयोग करते समय दो मुख्य सावधानियाँ रखनी चाहिए:
1. मूल अनुसन्धान का उद्देश्य और क्षेत्र: हमें यह देखना चाहिए कि जिस उद्देश्य और क्षेत्र के लिए यह डेटा पहले इकट्ठा किया गया था, वह हमारे वर्तमान शोध के उद्देश्य और क्षेत्र से मेल खाता है या नहीं. यदि मेल नहीं खाता, तो डेटा उपयोगी नहीं होगा.
2. मूल अनुसन्धानकर्ता की योग्यता और निष्पक्षता: यह जानना महत्वपूर्ण है कि जिसने यह डेटा इकट्ठा किया था, वह योग्य, ईमानदार और निष्पक्ष था या नहीं. यदि मूल स्रोत विश्वसनीय नहीं है, तो डेटा भी अविश्वसनीय हो सकता है. इन बातों की जांच करने से यह पक्का हो जाता है कि डेटा हमारे लिए सही और भरोसेमंद है.
In simple words: द्वितीयक डेटा का उपयोग करते समय, हमें यह जांचना चाहिए कि डेटा हमारे उद्देश्य के लिए सही है और उसे इकट्ठा करने वाला व्यक्ति विश्वसनीय था.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक डेटा के उपयोग से पहले हमेशा उसकी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता की जांच करें, क्योंकि यह आपके शोध की सटीकता को प्रभावित कर सकता है.
Question 31. संगणना अनुसन्धान विधि के दो गुण बताइए?
Answer: संगणना अनुसन्धान विधि के दो मुख्य गुण इस प्रकार हैं:
1. विस्तृत सूचनाएँ: इस विधि से पूरे समूह के बारे में बहुत विस्तृत और गहरी जानकारी मिलती है, क्योंकि इसमें हर इकाई का अध्ययन किया जाता है. यह पूरी तरह से जानकारी जुटाने में मदद करता है.
2. उच्च स्तर की शुद्धता: इस विधि से इकट्ठा की गई जानकारी बहुत सटीक और विश्वसनीय होती है, क्योंकि कोई भी इकाई नहीं छोड़ी जाती. इससे परिणामों में गलती की संभावना कम हो जाती है.
In simple words: संगणना विधि से विस्तृत और सटीक जानकारी मिलती है, क्योंकि इसमें हर एक चीज़ का अध्ययन किया जाता है.
🎯 Exam Tip: संगणना विधि की मुख्य विशेषताओं के रूप में उसकी व्यापकता और उच्च सटीकता को याद रखें.
Question 32. दैव प्रतिचयन रीति के दो गुण बताइए।
Answer: दैव प्रतिचयन (यादृच्छिक प्रतिचयन) विधि के दो गुण इस प्रकार हैं:
1. सरल विधि: यह डेटा इकट्ठा करने की एक बहुत ही सरल विधि है, जिसमें किसी जटिल योजना की आवश्यकता नहीं होती. इससे इसे लागू करना आसान हो जाता है.
2. कम खर्चीली: इस विधि में संगणना विधि की तुलना में कम पैसा और समय लगता है, क्योंकि इसमें पूरे समूह के बजाय सिर्फ एक हिस्से का अध्ययन किया जाता है. इसकी सादगी इसे व्यवहारिक बनाती है.
In simple words: दैव प्रतिचयन एक आसान और कम खर्चीली विधि है.
🎯 Exam Tip: यादृच्छिक प्रतिचयन की सादगी और लागत-प्रभावशीलता इसे बड़े अध्ययनों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बनाती है.
Question 33. सविचार प्रतिदर्श रीति की परिभाषा दीजिये?
Answer: सविचार प्रतिदर्श रीति वह विधि है जिसमें अनुसन्धानकर्ता अपनी समझ, ज्ञान और अनुभव के आधार पर सोच-समझकर प्रतिदर्श (नमूना) का चयन करता है. इसमें प्रत्येक इकाई को चुने जाने का समान अवसर नहीं मिलता, बल्कि शोधकर्ता अपनी विशेषज्ञता के अनुसार सबसे उपयुक्त इकाइयों को चुनता है. यह विधि तब उपयोगी होती है जब शोधकर्ता को विशेष प्रकार की जानकारी चाहिए.
In simple words: सविचार प्रतिदर्श रीति में शोधकर्ता अपनी बुद्धि और अनुभव से नमूना चुनता है.
🎯 Exam Tip: इस विधि में शोधकर्ता का व्यक्तिगत निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो नमूने की प्रासंगिकता और सटीकता को प्रभावित कर सकता है.
Question 34. लॉटरी रीति क्या है?
Answer: लॉटरी रीति दैव प्रतिचयन की एक विधि है. इसमें अध्ययन किए जाने वाले पूरे समूह की सभी इकाइयों के नाम छोटी-छोटी पर्चियों पर लिखे जाते हैं या उन्हें छोटी गोलियों में रखा जाता है. फिर इन पर्चियों या गोलियों को अच्छी तरह मिलाया जाता है और किसी निष्पक्ष व्यक्ति से एक-एक करके जितनी संख्या में नमूने चाहिए, उतनी पर्चियां या गोलियां उठवाई जाती हैं. यह विधि सुनिश्चित करती है कि हर इकाई को चुने जाने का बराबर मौका मिले.
In simple words: लॉटरी रीति में, सभी नाम पर्चियों पर लिखकर, उन्हें मिलाकर, एक निष्पक्ष व्यक्ति द्वारा नमूना चुना जाता है.
🎯 Exam Tip: यह विधि यादृच्छिक प्रतिचयन सुनिश्चित करती है और पक्षपात की संभावना को कम करती है, जिससे नमूना समूह का निष्पक्ष प्रतिनिधित्व करता है.
Question 35. स्तरित प्रतिदर्श रीति क्या है?
Answer: स्तरित प्रतिदर्श रीति एक ऐसी विधि है जो सविचार प्रतिचयन और दैव प्रतिचयन दोनों का मिला-जुला रूप है. इस विधि में सबसे पहले पूरे समूह को उसकी कुछ खास विशेषताओं (जैसे आयु, लिंग, आय) के आधार पर अलग-अलग छोटे-छोटे भागों (स्तर या समूह) में बाँट दिया जाता है. उसके बाद, हर एक भाग से दैव प्रतिचयन (यादृच्छिक रूप से) विधि का उपयोग करके कुछ इकाइयों का चयन किया जाता है. यह तरीका सुनिश्चित करता है कि नमूने में सभी महत्वपूर्ण उप-समूहों का सही प्रतिनिधित्व हो.
In simple words: स्तरित प्रतिदर्श में, पूरे समूह को पहले छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, फिर हर हिस्से से यादृच्छिक रूप से कुछ लोगों को चुना जाता है.
🎯 Exam Tip: स्तरित प्रतिचयन विधि तब उपयोगी होती है जब जनसंख्या में विभिन्न प्रकार के समूह हों और आप चाहते हैं कि हर समूह का प्रतिनिधित्व नमूने में हो.
Rbse Class 11 Economics Chapter 5 निबंधात्मक प्रश्न
Answer: प्राथमिक और द्वितीयक समंकों (डेटा) में मुख्य अंतर और प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने की विधियाँ इस प्रकार हैं:
प्राथमिक एवं द्वितीयक समंकों में अन्तर:
• प्रकृति: प्राथमिक समंक मौलिक होते हैं, जैसे सांख्यिकी के लिए कच्चा माल, क्योंकि इन्हें पहली बार इकट्ठा किया जाता है. वहीं, द्वितीयक समंक तैयार माल की तरह होते हैं क्योंकि वे पहले से ही मौजूद होते हैं.
• संग्रहकर्ता: प्राथमिक समंक शोधकर्ता या उसके प्रतिनिधि द्वारा इकट्ठा किए जाते हैं. जबकि द्वितीयक समंक अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा पहले से ही इकट्ठे और प्रकाशित होते हैं.
• योजना: प्राथमिक समंक एक नई योजना के तहत शुरू से ही तैयार किए जाते हैं. द्वितीयक समंक पहले से उपलब्ध होते हैं, जैसे किसी रिपोर्ट या दस्तावेज़ में.
• उद्देश्य: प्राथमिक समंक हमेशा शोधकर्ता के खास उद्देश्य के लिए होते हैं. द्वितीयक समंकों का उपयोग करने से पहले उन्हें अपने उद्देश्य के अनुकूल बनाना पड़ता है, क्योंकि वे किसी और उद्देश्य के लिए बने होते हैं.
• समय और धन: प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने में ज्यादा समय, पैसा और मेहनत लगती है. द्वितीयक समंकों को इकट्ठा करने में समय और पैसे की बचत होती है क्योंकि वे पहले से उपलब्ध होते हैं.
• उपलब्धता: प्राथमिक समंक सीधे शोध क्षेत्र की इकाइयों से इकट्ठा किए जाते हैं. द्वितीयक समंक अन्य लोगों या संस्थाओं द्वारा पहले से इकट्ठे किए गए होते हैं.
• अप्रकाशित स्रोत: कभी-कभी सरकारी या अन्य संस्थाएं महत्वपूर्ण विषयों पर सामग्री जमा करती हैं लेकिन उसे प्रकाशित नहीं करतीं. ऐसी अप्रकाशित सामग्री कार्यालयों की फाइलों, रजिस्टरों या शोधकर्ता की डायरी से मिल सकती है.
प्राथमिक समंकों को एकत्रित करने की विधियाँ:
1. प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुसन्धान विधि: इसमें शोधकर्ता सीधे उन लोगों से मिलकर जानकारी इकट्ठा करता है जिनसे उसे डेटा चाहिए.
2. अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान विधि: इसमें शोधकर्ता विषय से जुड़े लोगों से बात करके जानकारी लेता है, न कि सीधे जानकारी देने वाले से.
3. स्थानीय लोगों एवं संवाददाताओं से सूचना प्राप्ति: इसमें शोधकर्ता स्थानीय लोगों या विशेष संवाददाताओं को नियुक्त करता है जो समय-समय पर जानकारी भेजते रहते हैं.
4. सूचकों द्वारा प्रश्नावलियाँ भरवाकर सूचना प्राप्ति: इसमें शोधकर्ता प्रश्नों की सूची (प्रश्नावली) डाक या ईमेल से लोगों को भेजता है और उनसे भरकर वापस भेजने का अनुरोध करता है.
5. प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना: इसमें प्रशिक्षित प्रगणक सीधे लोगों से मिलते हैं, उनसे प्रश्न पूछते हैं और खुद अनुसूचियाँ (फॉर्म) भरते हैं.
In simple words: प्राथमिक डेटा नया और हमारे उद्देश्य के लिए होता है, जिसे हम खुद इकट्ठा करते हैं; द्वितीयक डेटा पुराना और दूसरों द्वारा इकट्ठा किया गया होता है. नए डेटा को इकट्ठा करने के कई तरीके हैं, जैसे सीधे पूछना, अप्रत्यक्ष रूप से पूछना, या प्रश्नावली भेजना.
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक डेटा के बीच के स्पष्ट अंतर को समझें, और प्रत्येक प्रकार के डेटा संग्रह के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न विधियों को याद रखें.
Question 4. द्वितीयक समंकों का प्रयोग करते समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
Answer: द्वितीयक समंकों (सेकेंडरी डेटा) का उपयोग करते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि इनमें गलतियाँ हो सकती हैं. बिना सोचे-समझे इनका उपयोग खतरनाक हो सकता है. इसलिए, इनका प्रयोग करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
1. मूल शोध का उद्देश्य और क्षेत्र: यह जांच लें कि डेटा पहले किस उद्देश्य और किस क्षेत्र के लिए इकट्ठा किया गया था. यदि वह हमारे वर्तमान शोध के उद्देश्य और क्षेत्र से मेल नहीं खाता है, तो उसका उपयोग करना सही नहीं होगा.
2. मूल शोधकर्ता की योग्यता: यह सुनिश्चित करें कि जिसने डेटा इकट्ठा किया था, वह योग्य, ईमानदार और निष्पक्ष था. यदि शोधकर्ता विश्वसनीय नहीं है, तो डेटा भी विश्वसनीय नहीं होगा.
3. डेटा संग्रह की विधि: यह भी देखें कि डेटा इकट्ठा करने के लिए किस विधि का उपयोग किया गया था. क्या वह विधि विश्वसनीय थी? इस पर विचार करने के बाद ही डेटा का उपयोग करें.
4. इकाइयों की परिभाषा: यह पक्का कर लें कि मूल शोध में उपयोग की गई इकाइयों की परिभाषा हमारे शोध में उपयोग की गई इकाइयों की परिभाषा के समान है. यदि परिभाषाएं अलग हैं, तो डेटा का उपयोग करना ठीक नहीं होगा.
5. सटीकता का स्तर: यह जांचें कि प्रकाशित डेटा में सटीकता का स्तर क्या था. यदि सटीकता का स्तर उच्च था, तो डेटा का उपयोग किया जा सकता है. कम सटीकता वाले डेटा से बचना चाहिए.
6. समय की जांच: यह देखें कि डेटा कब इकट्ठा किया गया था. यदि यह किसी विशेष संकट या असाधारण समय में इकट्ठा किया गया था, तो सामान्य समय के शोध में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए.
7. डेटा की पर्याप्तता: यह भी सुनिश्चित करें कि डेटा हमारे शोध के लिए पर्याप्त है या नहीं. अधूरा डेटा गलत नतीजे दे सकता है. इन सावधानियों का पालन करके द्वितीयक डेटा का प्रभावी और विश्वसनीय तरीके से उपयोग किया जा सकता है.
In simple words: द्वितीयक डेटा का उपयोग करते समय, हमें यह जांचना चाहिए कि डेटा का उद्देश्य, स्रोत, इकट्ठा करने का तरीका, सटीकता, और समय हमारे शोध के लिए सही हैं या नहीं.
🎯 Exam Tip: हमेशा द्वितीयक डेटा का मूल्यांकन उसकी प्रासंगिकता, सटीकता और विश्वसनीयता के लिए करें, क्योंकि ये कारक आपके शोध निष्कर्षों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं.
Question 6. एक अच्छी प्रश्नावली के मुख्य गुण कौन-से हैं?
Answer: एक अच्छी प्रश्नावली में ये मुख्य गुण होने चाहिए ताकि उससे सही और पूरी जानकारी मिल सके:
1. परिचय: प्रश्नावली की शुरुआत में शोधकर्ता को अपना परिचय देना चाहिए, शोध का उद्देश्य स्पष्ट करना चाहिए और जानकारी को गुप्त रखने का आश्वासन देना चाहिए.
2. प्रश्नों की संख्या कम: प्रश्नावली में प्रश्नों की संख्या कम होनी चाहिए ताकि जवाब देने वाले को बोरियत न हो और वह आसानी से पूरे जवाब दे सके.
3. प्रश्न सरल और स्पष्ट: प्रश्न सीधे, सरल और स्पष्ट होने चाहिए ताकि उन्हें आसानी से समझा जा सके और कोई गलतफहमी न हो.
4. प्रश्नों का उचित क्रम: प्रश्न एक तार्किक और उचित क्रम में होने चाहिए, जिससे जवाब देने वाले को सोचने में आसानी हो.
5. संक्षिप्त उत्तर: प्रश्न ऐसे होने चाहिए जिनके उत्तर संक्षिप्त और सटीक रूप से दिए जा सकें, जिससे समय की बचत हो.
6. संवेदनशील प्रश्नों से बचें: प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न नहीं होने चाहिए जो जवाब देने वाले के आत्म-सम्मान या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाएं.
7. शोध से संबंधित प्रश्न: सभी प्रश्न केवल शोध के उद्देश्य से संबंधित होने चाहिए. अनावश्यक प्रश्न नहीं पूछने चाहिए.
8. पर्याप्त स्थान: प्रश्नावली में हर प्रश्न के उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए.
9. योग्यता के अनुसार प्रश्न: प्रश्न जवाब देने वाले की शैक्षिक योग्यता और ज्ञान के स्तर के अनुसार होने चाहिए ताकि उन्हें जवाब देने में कोई कठिनाई न हो. एक अच्छी प्रश्नावली डेटा संग्रह को आसान और अधिक प्रभावी बनाती है.
In simple words: एक अच्छी प्रश्नावली में कम, सरल और स्पष्ट प्रश्न होते हैं, जो सही क्रम में होते हैं, जवाब देने वाले की योग्यता के अनुसार होते हैं, और व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाते.
🎯 Exam Tip: एक प्रभावी प्रश्नावली की पहचान उसकी सादगी, प्रासंगिकता और प्रतिक्रिया देने वाले के लिए उसकी सुलभता है; ये गुण उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सुनिश्चित करते हैं.
Question 8. संगणना तथा प्रतिदर्श प्रणाली में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
Answer: संगणना और प्रतिदर्श प्रणाली में मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किए गए हैं:
| क्रम सं. | अन्तर का आधार | संगणना विधि | प्रतिदर्श विधि |
|---|---|---|---|
| 1 | क्षेत्र | इसका उपयोग शोध के सीमित क्षेत्र में किया जाता है. | इसका उपयोग शोध के विस्तृत क्षेत्र के लिए किया जा सकता है. |
| 2 | सम्पर्क | इसमें समूह की हर इकाई से संपर्क किया जाता है और जानकारी ली जाती है. | इसमें सिर्फ चुनी गई इकाइयों से ही जानकारी इकट्ठा की जाती है. |
| 3 | व्यय | इसमें पैसा, मेहनत और समय ज्यादा लगता है. | इसमें अपेक्षाकृत कम पैसा, मेहनत और समय लगता है. |
| 4 | उपयोगिता | जहाँ समूह की इकाइयाँ अलग-अलग हों, वहाँ यह विधि ज्यादा उपयोगी होती है. | जहाँ सभी इकाइयाँ एक जैसी हों, वहाँ यह विधि ज्यादा उपयोगी होती है. |
संगणना और प्रतिदर्श दोनों ही डेटा संग्रह के महत्वपूर्ण तरीके हैं, और शोध के उद्देश्य, बजट, और समय सीमा के आधार पर इनका चुनाव किया जाता है.
In simple words: संगणना में पूरे समूह का अध्ययन किया जाता है, यह महंगा और लंबा होता है. प्रतिदर्श में समूह के एक हिस्से का अध्ययन किया जाता है, यह सस्ता और तेज होता है.
🎯 Exam Tip: संगणना और प्रतिदर्श के बीच के मूल अंतरों को समझें, विशेषकर उनके दायरे, लागत, और सटीकता के संदर्भ में, ताकि आप उचित विधि का चुनाव कर सकें.
Question 9. दैव प्रतिदर्श के गुण-दोष बताइए।
Answer: दैव प्रतिदर्श (Random Sampling) के गुण और दोष इस प्रकार हैं:
गुण (लाभ):
1. पक्षपात की संभावना नहीं: इस विधि में किसी भी तरह के व्यक्तिगत पक्षपात की कोई संभावना नहीं होती, क्योंकि हर इकाई को चुने जाने का समान अवसर मिलता है.
2. समय और धन की बचत: यह विधि पूरे समूह का अध्ययन करने की तुलना में कम पैसा, मेहनत और समय बचाती है.
3. प्रतिनिधित्व: यह विधि सांख्यिकीय नियमों पर आधारित है, इसलिए चुने गए नमूने में पूरे समूह के सभी गुण पाए जाते हैं, जिससे यह पूरे समूह का अच्छा प्रतिनिधित्व करता है.
4. सरल विधि: यह एक आसान विधि है जिसे समझना और लागू करना सीधा है.
5. जांच संभव: इस विधि से प्राप्त नमूनों की जांच दूसरे नमूनों से की जा सकती है, जिससे परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है.
दोष (हानियाँ):
1. विशेष इकाइयों के लिए अनुपयुक्त: यदि कुछ खास इकाइयों को उनके महत्व के कारण नमूने में शामिल करना जरूरी हो, तो यह विधि उपयुक्त नहीं रहती.
2. छोटे या विषम समूह के लिए समस्या: यदि समूह का आकार छोटा हो या उसमें बहुत विविधता हो, तो इस विधि से लिए गए नमूने पूरे समूह का ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं कर पाते हैं.
3. स्वतंत्रता की आवश्यकता: यह विधि तभी उपयोगी रहती है जब समूह की सभी इकाइयाँ एक-दूसरे से स्वतंत्र हों और एक-दूसरे पर निर्भर न हों.
In simple words: दैव प्रतिदर्श निष्पक्ष होता है, समय और पैसा बचाता है, और समूह का अच्छा प्रतिनिधित्व करता है. लेकिन यह विशेष मामलों या छोटे, विषम समूहों के लिए हमेशा सही नहीं होता.
🎯 Exam Tip: यादृच्छिक प्रतिचयन के मुख्य लाभ (निष्पक्षता, दक्षता) और सीमाओं (विषम या छोटे समूहों के लिए कम उपयुक्तता) को समझें.
Question 10. दैव प्रतिदर्श की कोई दो रीतियों को समझाइए?
Answer: दैव प्रतिदर्श (Random Sampling) की दो प्रमुख विधियाँ इस प्रकार हैं:
1. लॉटरी रीति: इस विधि में, अध्ययन किए जाने वाले पूरे समूह की सभी इकाइयों के नाम या नंबर छोटी पर्चियों पर लिखे जाते हैं. इन पर्चियों को अच्छी तरह मिलाकर एक बॉक्स या जार में रखा जाता है. फिर, बिना देखे एक निष्पक्ष व्यक्ति द्वारा जितनी संख्या में नमूने चाहिए, उतनी पर्चियां उठाई जाती हैं. इस तरह, हर इकाई को चुने जाने का बराबर मौका मिलता है.
2. ढोल घुमाकर चयन विधि: यह भी लॉटरी रीति की तरह ही है. इसमें सभी इकाइयों के नाम या नंबर एक ढोल में डालकर उसे घुमाया जाता है. ढोल के रुकने पर, एक-एक करके जितनी संख्या में नमूने चाहिए, उतनी पर्चियां या नंबर निकाले जाते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि चयन पूरी तरह से यादृच्छिक हो और किसी भी पक्षपात से मुक्त हो. ये दोनों विधियाँ हर सदस्य को चयन का समान अवसर देती हैं.
In simple words: दैव प्रतिदर्श के दो तरीके हैं लॉटरी विधि (पर्ची निकालकर) और ढोल घुमाकर विधि (ढोल में नाम डालकर निकालना), दोनों में सबको चुने जाने का बराबर मौका मिलता है.
🎯 Exam Tip: इन विधियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक तत्व को नमूने में चुने जाने का समान और स्वतंत्र अवसर मिले, जिससे नमूना निष्पक्ष रहे.
Question 11. प्राथमिक समंक संकलन की अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान विधि में, जब शोध का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और जानकारी देने वाले लोगों से सीधे मिलना संभव नहीं होता, तो इस विधि का उपयोग किया जाता है. इसमें शोधकर्ता सीधे उन लोगों से जानकारी नहीं लेता जो समस्या से जुड़े होते हैं, बल्कि उन व्यक्तियों या पक्षों से मौखिक पूछताछ करके जानकारी इकट्ठा करता है जो उस स्थिति से अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित होते हैं. उदाहरण के लिए, मजदूरों की आय की जानकारी सीधे मजदूरों से न पूछकर मिल मालिकों से ली जाती है. यह विधि तब बहुत उपयोगी होती है जब सीधी बातचीत मुश्किल हो.
रीति की उपयुक्तता (कहाँ उपयोगी):
यह विधि इन स्थितियों में उपयुक्त रहती है:
1. जहाँ शोध का क्षेत्र बहुत विस्तृत हो.
2. जहाँ जानकारी देने वालों से सीधे संपर्क करना संभव न हो.
3. जब संबंधित व्यक्ति जानकारी देने में झिझकते हों या अज्ञानता के कारण जानकारी देने में असमर्थ हों.
4. जहाँ संबंधित व्यक्तियों से जानकारी मिलने में पक्षपातपूर्ण व्यवहार की संभावना हो.
5. जहाँ संबंधित व्यक्तियों से प्रश्न पूछना ठीक न हो.
6. जहाँ शोध की जानकारी को गुप्त रखना हो.
गुण (लाभ):
1. कम खर्चीली: यह विधि सीधे व्यक्तिगत अनुसन्धान से कम खर्चीली होती है.
2. सरल और सुविधाजनक: यह विधि सरल और जानकारी इकट्ठा करने में सुविधाजनक होती है.
3. विस्तृत क्षेत्र के लिए उपयुक्त: यह विधि बड़े और विस्तृत शोध क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
4. गुप्त सूचनाएं: इस विधि से गुप्त सूचनाएं भी मिल जाती हैं.
5. विशेषज्ञों का लाभ: इस विधि में विशेषज्ञों की सेवाओं का लाभ मिल जाता है.
दोष (हानियाँ):
1. कम शुद्धता: इस विधि से प्राप्त जानकारी में उच्च स्तर की शुद्धता नहीं होती है, क्योंकि यह सीधे स्रोत से नहीं ली जाती.
2. एकरूपता का अभाव: इकट्ठा की गई जानकारी में एकरूपता की कमी पाई जा सकती है, क्योंकि यह विभिन्न अप्रत्यक्ष स्रोतों से आती है.
3. पक्षपात की संभावना: जानकारी देने वालों के पक्षपातपूर्ण व्यवहार की संभावना रहती है, जिससे जानकारी प्रभावित हो सकती है.
In simple words: अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान में, जानकारी सीधे लोगों से न लेकर उनसे जुड़े दूसरों से पूछी जाती है. यह बड़े और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अच्छा है, लेकिन इसमें शुद्धता कम हो सकती है.
🎯 Exam Tip: अप्रत्यक्ष मौखिक अनुसन्धान तब सबसे अच्छा होता है जब सीधे संपर्क संभव न हो या जानकारी संवेदनशील हो, लेकिन इसमें डेटा की सटीकता कम हो सकती है.
Question 13. सूचकों द्वारा प्रश्नावालियाँ भरवाकर सूचना प्राप्ति विधि को विस्तार से समझाइए।
Answer: सूचकों द्वारा प्रश्नावली भरवाकर सूचना प्राप्ति विधि में, शोधकर्ता सबसे पहले डेटा इकट्ठा करने के लिए प्रश्नों की एक सूची (प्रश्नावली) तैयार करता है. इस प्रश्नावली को छपवाकर उन लोगों के पास डाक द्वारा या व्यक्तिगत रूप से भेजा जाता है जिनसे जानकारी चाहिए. शोधकर्ता उन्हें जानकारी गुप्त रखने का आश्वासन भी देता है. जवाब देने वाले (सूचक) प्रश्नावली को भरकर एक तय तारीख तक शोधकर्ता को वापस भेज देते हैं. यह तरीका बहुत बड़े क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठा करने के लिए खास तौर पर उपयोगी है.
रीति के गुण (लाभ):
1. विस्तृत क्षेत्र के लिए उपयुक्त: यह विधि भौगोलिक रूप से फैले हुए बड़े क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठा करने के लिए बहुत उपयुक्त है.
2. कम धन, समय और श्रम: इसमें व्यक्तिगत रूप से मिलने की तुलना में कम पैसा, समय और मेहनत लगती है.
3. मौलिक सूचनाएं: इस विधि से इकट्ठा की गई जानकारी मौलिक होती है, क्योंकि यह सीधे प्राथमिक स्रोतों से आती है.
रीति के दोष (हानियाँ):
1. अशुद्ध परिणाम: कभी-कभी प्रश्नावली को सही तरीके से नहीं भरा जाता या लोग गलत जानकारी देते हैं, जिससे परिणाम अशुद्ध हो सकते हैं.
2. रुचि का अभाव: कई सूचक प्रश्नावली भरने में रुचि नहीं लेते हैं, या उसे अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे प्रतिक्रिया दर कम हो सकती है.
3. अपरिप्याप्त और अपूर्ण सूचनाएं: यदि सूचक प्रश्नों को ठीक से नहीं समझते या कुछ सवालों के जवाब नहीं देते, तो जानकारी अधूरी या अपर्याप्त हो सकती है. इसलिए, इस विधि का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
In simple words: प्रश्नावली विधि में, लोगों को प्रश्न भेजे जाते हैं ताकि वे खुद भरकर वापस भेजें. यह बड़े क्षेत्रों के लिए सस्ता और अच्छा है, लेकिन जवाब गलत या अधूरे हो सकते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली विधि बड़े पैमाने पर डेटा इकट्ठा करने के लिए किफायती है, लेकिन कम प्रतिक्रिया दर और डेटा की गुणवत्ता के मुद्दों का प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है.
Question 14. प्राथमिक समंक संकलन की "प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना" विधि पर टिप्पणी कीजिये।
Answer: प्रगणकों द्वारा अनुसूचियाँ भरना प्राथमिक समंकों को इकट्ठा करने की एक विधि है जिसमें प्रशिक्षित प्रगणक (जानकारी इकट्ठा करने वाले कर्मी) सीधे जानकारी देने वाले (सूचक) से मिलते हैं. प्रगणक सूचक से सवाल पूछते हैं और उनके जवाबों को पहले से तैयार अनुसूची (फॉर्म) में खुद भरते हैं. इस विधि की सफलता के लिए प्रगणकों का ईमानदार, अनुभवी, व्यवहार कुशल और मेहनती होना बहुत जरूरी है. उन्हें शोध क्षेत्र की भाषा, रीति-रिवाजों और संस्कृति का भी ज्ञान होना चाहिए. यह विधि तब बहुत प्रभावी होती है जब उच्च स्तर की सटीकता की आवश्यकता होती है.
रीति की उपयुक्तता (कहाँ उपयोगी):
यह विधि अत्यंत विस्तृत क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त है. आमतौर पर, इस विधि का उपयोग सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर डेटा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है. उदाहरण के लिए, भारत की जनगणना में इसी विधि का प्रयोग होता है, जहाँ घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जाती है.
रीति के गुण (लाभ):
1. व्यापक क्षेत्र से सूचना: इस विधि से बड़े और विविध भौगोलिक क्षेत्रों से जानकारी इकट्ठा की जा सकती है.
2. सही सूचना: प्रशिक्षित प्रगणक व्यक्तिगत संपर्क करके सही और सटीक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि वे प्रश्नों को समझा सकते हैं और गलतफहमी दूर कर सकते हैं.
3. मौलिक और निष्पक्ष डेटा: इस विधि से इकट्ठा की गई जानकारी मौलिक और आमतौर पर निष्पक्ष होती है.
4. उच्च परिशुद्धता: इकट्ठा किए गए डेटा में उच्च स्तर की सटीकता होती है, जो इसे विश्वसनीय बनाती है.
रीति के दोष (हानियाँ):
1. अधिक खर्चीली: यह विधि बहुत महंगी होती है क्योंकि इसमें प्रगणकों को नियुक्त करने, प्रशिक्षित करने और उनके वेतन का खर्च शामिल होता है.
2. समय लेने वाली: बड़े पैमाने पर जानकारी इकट्ठा करने में यह विधि बहुत समय लेती है.
3. प्रगणक का पक्षपात: यदि प्रगणक प्रशिक्षित न हों या पक्षपाती हों, तो उनके व्यक्तिगत विचार या गलतियाँ डेटा को प्रभावित कर सकती हैं. इस विधि का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए.
In simple words: प्रगणक अनुसूची विधि में प्रशिक्षित लोग घर-घर जाकर लोगों से सवाल पूछते और फॉर्म भरते हैं. यह बड़े सरकारी सर्वे के लिए अच्छी है, क्योंकि डेटा सटीक मिलता है, लेकिन यह महंगी और समय लेने वाली है.
🎯 Exam Tip: प्रगणक अनुसूची विधि बड़े पैमाने पर और उच्च सटीकता वाले डेटा संग्रह के लिए प्रभावी है, लेकिन इसमें लागत और समय के साथ-साथ प्रगणक प्रशिक्षण का प्रबंधन करना भी महत्वपूर्ण है.
Question 1. द्वितीयक समंकों के प्रमुख स्रोत बताइए। इनका प्रयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
Answer: द्वितीयक समंक (Secondary Data) वे होते हैं जो किसी और व्यक्ति या संस्था द्वारा पहले से ही इकट्ठा और प्रकाशित किए जा चुके हैं. शोधकर्ता अपने उद्देश्य के लिए बस उनका उपयोग करता है. द्वितीयक समंकों के प्रमुख स्रोतों को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
(क) प्रकाशित स्रोत:
सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं विभिन्न विषयों पर समय-समय पर डेटा इकट्ठा करती हैं और उन्हें प्रकाशित करती रहती हैं. इन प्रकाशित डेटा का उपयोग दूसरे लोग अपने शोध के लिए कर सकते हैं. प्रकाशित स्रोतों के कुछ उदाहरण ये हैं:
• अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन: विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय सरकारें और संस्थाएं (जैसे अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, संयुक्त राष्ट्र संघ) समय-समय पर रिपोर्ट और सूचनाएं प्रकाशित करती हैं.
• सरकारी प्रकाशन: केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और स्थानीय सरकारें विभिन्न विभागों के माध्यम से अलग-अलग विषयों पर आंकड़े प्रकाशित करती रहती हैं. ये आंकड़े बहुत विश्वसनीय होते हैं, जैसे रिजर्व बैंक का बुलेटिन, उद्योगों का वार्षिक सर्वेक्षण, पंचवर्षीय योजनाएं और भारतीय कृषि के आंकड़े.
• अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन: नगरपालिका, जिला परिषद्, और पंचायत जैसी अर्द्ध-सरकारी संस्थाएं भी समय-समय पर आंकड़े प्रकाशित करती हैं. ये आंकड़े अक्सर स्वास्थ्य, शिक्षा और जन्म-मृत्यु से संबंधित होते हैं.
• समितियों और आयोगों के प्रतिवेदन: सरकार द्वारा बनाई गई विभिन्न समितियां और आयोग अपनी रिपोर्टें प्रकाशित करते हैं, जिनमें महत्वपूर्ण आंकड़े होते हैं (जैसे वित्त आयोग, योजना आयोग).
• व्यापारिक संघों के प्रकाशन: बड़े व्यापारिक संघ भी अपने शोध और सांख्यिकी विभागों द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़े प्रकाशित करते रहते हैं (जैसे टाटा, बिरला, रिलायंस).
• अनुसन्धान संस्थाओं के प्रकाशन: विभिन्न विश्वविद्यालय और शोध संस्थान भी अपने शोध परिणामों को प्रकाशित करते रहते हैं (जैसे भारतीय सांख्यिकीय संस्थान).
• पत्र-पत्रिकाएं: समाचार-पत्र और पत्रिकाएं भी द्वितीयक समंकों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो विभिन्न विषयों पर उपयोगी आंकड़े प्रकाशित करते हैं (जैसे इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड).
(ख) अप्रकाशित स्रोत:
कभी-कभी सरकारी या अन्य संस्थाएं, विश्वविद्यालय और व्यक्तिगत शोधकर्ता महत्वपूर्ण विषयों पर सामग्री इकट्ठा तो कर लेते हैं लेकिन किसी कारणवश उसे प्रकाशित नहीं कराते. ऐसी अप्रकाशित सामग्री कार्यालयों की फाइलों, रजिस्टरों या शोधकर्ता की डायरी आदि से प्राप्त की जा सकती है. ये स्रोत भी द्वितीयक समंक का हिस्सा होते हैं.
द्वितीयक समंकों का प्रयोग करते समय सावधानियाँ:
द्वितीयक समंकों का उपयोग करते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि इनमें गलतियाँ हो सकती हैं और ये हमारे उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं भी हो सकते हैं. मुख्य सावधानियाँ ये हैं:
1. उद्देश्य और क्षेत्र की जांच: यह सुनिश्चित करें कि मूल शोध का उद्देश्य और भौगोलिक क्षेत्र आपके वर्तमान शोध से मेल खाता हो.
2. शोधकर्ता की विश्वसनीयता: मूल शोधकर्ता की योग्यता, ईमानदारी और निष्पक्षता की जांच करें.
3. डेटा संग्रह विधि: देखें कि मूल डेटा किस विधि से इकट्ठा किया गया था और क्या वह विधि विश्वसनीय थी.
4. इकाइयों की परिभाषा: सुनिश्चित करें कि मूल शोध में उपयोग की गई इकाइयों की परिभाषा आपके शोध की इकाइयों से समान हो.
5. सटीकता का स्तर: डेटा की सटीकता के स्तर की जांच करें; कम सटीक डेटा से बचें.
6. संग्रह का समय: यह देखें कि डेटा कब इकट्ठा किया गया था, और क्या वह वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक है (उदाहरण के लिए, असामान्य समय में एकत्र किया गया डेटा सामान्य स्थितियों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता).
7. डेटा की पर्याप्तता: यह सुनिश्चित करें कि आपके शोध के लिए डेटा पर्याप्त और पूर्ण है. अधूरा डेटा भ्रामक हो सकता है.
In simple words: द्वितीयक डेटा प्रकाशित (जैसे सरकारी रिपोर्ट, पत्रिकाएँ) और अप्रकाशित (जैसे निजी डायरी) दोनों तरह के होते हैं. इनका उपयोग करते समय, हमें यह जांचना चाहिए कि डेटा हमारे उद्देश्य के लिए सही है, सटीक है, और विश्वसनीय स्रोत से आया है.
🎯 Exam Tip: द्वितीयक डेटा के विविध स्रोतों को पहचानें और उन महत्वपूर्ण सावधानियों को समझें जो इसके प्रभावी और विश्वसनीय उपयोग के लिए आवश्यक हैं, क्योंकि यह सीधे आपके शोध की गुणवत्ता को प्रभावित करता है.
Question 2. संगणना अनुसन्धान का आशय स्पष्ट कीजिये तथा इसके गुण-दोष बताइए।
Answer: संगणना अनुसन्धान का मतलब है जब किसी समस्या से संबंधित पूरे समूह की हर एक इकाई से जरूरी सांख्यिकीय जानकारी इकट्ठी की जाती है. उदाहरण के लिए, यदि किसी स्कूल के 500 विद्यार्थियों में से हर एक की मासिक आय के आंकड़े इकट्ठा किए जाएं, तो इसे संगणना अनुसन्धान कहेंगे. भारत की जनगणना इसी विधि का एक बड़ा उदाहरण है, जहाँ देश के हर व्यक्ति की जानकारी इकट्ठा की जाती है.
संगणना अनुसन्धान की उपयुक्तता (कहाँ उपयोगी):
यह विधि इन स्थितियों में सबसे उपयुक्त रहती है:
1. जब हर इकाई का गहरा अध्ययन जरूरी हो.
2. जब जानकारी में बहुत उच्च स्तर की सटीकता चाहिए हो.
3. जब शोध का क्षेत्र सीमित हो.
4. जब शोधकर्ता के पास पर्याप्त पैसा और संसाधन हों.
संगणना अनुसन्धान के गुण (लाभ):
• उच्च स्तर की शुद्धता: इस विधि से इकट्ठा किए गए आंकड़े बहुत विश्वसनीय और सटीक होते हैं, क्योंकि इसमें कोई भी इकाई छूटती नहीं है, जिससे परिणामों में गलती की संभावना कम हो जाती है.
• अधिक विश्वसनीयता: इस विधि में पूरे समूह की सभी इकाइयों से जानकारी ली जाती है, इसलिए प्राप्त आंकड़े बहुत ज्यादा भरोसेमंद होते हैं. यह बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए आधार प्रदान करती है.
• इकाइयों की भिन्नता में उपयुक्तता: यह विधि उन समूहों के लिए उपयुक्त है जहाँ इकाइयाँ एक-दूसरे से बहुत अलग हों और जहाँ प्रतिदर्श प्रणाली का उपयोग संभव न हो, क्योंकि संगणना विधि हर इकाई का हिसाब रखती है.
संगणना अनुसन्धान के दोष (हानियाँ):
• अधिक खर्चीली: इस विधि में पैसा, समय और मेहनत बहुत ज्यादा लगती है, क्योंकि इसमें हर इकाई का अध्ययन करना होता है. इस कारण इसका उपयोग ज्यादातर सरकारें ही करती हैं.
• प्रशिक्षित प्रगणकों का अभाव: यदि जानकारी इकट्ठा करने वाले (प्रगणक) प्रशिक्षित न हों, तो इस विधि से सही नतीजे नहीं मिल पाते हैं.
• कुछ परिस्थितियों में असंभव: जब शोध का क्षेत्र बहुत बड़ा और जटिल हो और सभी इकाइयों से संपर्क करना संभव न हो, तो इस विधि का उपयोग करना असंभव हो जाता है. ऐसे में यह विधि व्यवहारिक नहीं होती.
In simple words: संगणना में पूरे समूह का अध्ययन होता है, यह बहुत सटीक और विश्वसनीय जानकारी देता है, खासकर जब समूह की इकाइयाँ अलग-अलग हों. लेकिन यह महंगा, समय लेने वाला और प्रशिक्षित लोगों के बिना मुश्किल होता है.
🎯 Exam Tip: संगणना विधि व्यापक और अत्यधिक सटीक डेटा के लिए सबसे उपयुक्त है, विशेष रूप से जब नीति-निर्माण जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए हर इकाई की जानकारी आवश्यक हो, लेकिन यह संसाधन-गहन भी है.
Question 3. प्रतिदर्श अनुसन्धान का आशय स्पष्ट कीजिये तथा इसके गुण-दोष बताइए।
Answer: प्रतिदर्श अनुसन्धान (Sampling Research) का मतलब है कि पूरे समूह (समग्र) की सभी इकाइयों का अध्ययन नहीं किया जाता, बल्कि उसमें से कुछ प्रतिनिधि इकाइयों को बिना किसी पक्षपात के चुना जाता है. फिर इन चुनी हुई इकाइयों का अध्ययन करके जो नतीजे निकलते हैं, उन्हें पूरे समूह पर लागू किया जाता है. चुनी गई इकाइयों को ही प्रतिदर्श (Sample) कहते हैं, जो पूरे समूह की एक छोटी तस्वीर होती है. उदाहरण के लिए, यदि हमें किसी शहर के 10 हजार परिवारों की औसत आय जाननी हो, तो हम 10 हजार में से 1000 प्रतिनिधि परिवार चुनकर उनकी आय के आंकड़े इकट्ठा करते हैं और उन आंकड़ों के आधार पर पूरे 10 हजार परिवारों की औसत आय का अनुमान लगाते हैं. इससे समय और संसाधनों की बचत होती है.
इस पद्धति का आधार यह है कि पूरे समूह से ली गई प्रतिनिधि इकाइयों में आमतौर पर वही विशेषताएं होती हैं जो पूरे समूह में होती हैं. इसलिए, हर इकाई का अध्ययन करने की जरूरत नहीं होती. जैसे, अनाज मंडी में गेहूं की गुणवत्ता जानने के लिए पूरी ढेर को पलटने-पलटने की जरूरत नहीं होती, बल्कि उसमें से एक मुट्ठी गेहूं लेकर उसकी गुणवत्ता का अनुमान लगाया जा सकता है. यह प्रतिदर्श प्रणाली का महत्व और आधार है.
प्रतिदर्श प्रणाली के गुण (लाभ):
• कम खर्चीली: यह विधि संगणना की तुलना में कम खर्चीली होती है, क्योंकि इसमें पूरे समूह के बजाय सिर्फ एक छोटे हिस्से का अध्ययन किया जाता है.
• गहन अनुसन्धान संभव: इस विधि का उपयोग करके कम इकाइयों का गहराई से अध्ययन किया जा सकता है, जिससे ज्यादा विस्तृत जानकारी मिलती है.
• अधिक वैज्ञानिक: यह विधि ज्यादा वैज्ञानिक मानी जाती है, क्योंकि नमूनों की जांच दूसरे नमूनों से भी की जा सकती है, जिससे परिणामों की सटीकता बढ़ती है.
• गलती की पहचान: इसमें सिर्फ सीमित हिस्सों का अध्ययन किया जाता है, इसलिए गलतियों को पहचानना और ठीक करना आसान होता है.
• विश्वसनीय निष्कर्ष: इस विधि के आधार पर निकाले गए नतीजे आमतौर पर पूरी तरह से विश्वसनीय और सही होते हैं, बशर्ते नमूना सही तरीके से चुना गया हो.
• उपयुक्तता: कुछ खास स्थितियों में, जैसे समय की कमी या पैसे की कमी होने पर, प्रतिदर्श विधि ही ज्यादा उपयुक्त रहती है.
प्रतिदर्श प्रणाली के दोष (हानियाँ):
• सही प्रतिदर्श के चयन में कठिनाई: सांख्यिकीय शोध से सही नतीजे निकालने के लिए यह बहुत जरूरी है कि नमूना पूरे समूह की सभी विशेषताओं को दर्शाता हो. व्यवहार में ऐसा सही नमूना चुनना मुश्किल होता है.
• पक्षपात की संभावना: इस विधि में शोधकर्ता के पक्षपातपूर्ण व्यवहार की बहुत संभावना रहती है. शोधकर्ता नमूने के रूप में उन इकाइयों को चुन सकता है जो उसे पसंद हों, जिससे नतीजे पक्षपाती हो सकते हैं.
• भ्रामक निष्कर्ष: यदि नमूने के चुनाव में थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाती है, तो नतीजे गलत या भ्रामक हो सकते हैं, जिससे पूरे शोध का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है.
• सरलता का अभाव: यह विधि जितनी आसान दिखती है, उतनी सरल नहीं होती. यदि शोधकर्ता को नमूना चयन की पूरी तकनीक का ज्ञान न हो, तो उसके द्वारा लिए गए नमूने के आधार पर निकाले गए नतीजे न तो सही होंगे और न ही विश्वसनीय.
• विषम समूह के लिए अनुपयुक्त: यदि समूह की इकाइयां एक-दूसरे से बहुत अलग और अस्थिर हों, तो प्रतिदर्श विधि उपयुक्त नहीं मानी जाती है, क्योंकि ऐसी स्थिति में नमूना पूरे समूह का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर पाता है. इन चुनौतियों को समझते हुए ही प्रतिदर्श विधि का उपयोग करना चाहिए.
In simple words: प्रतिदर्श अनुसन्धान में, बड़े समूह में से कुछ चुने हुए प्रतिनिधि लोगों का अध्ययन करके पूरे समूह के बारे में जानकारी निकाली जाती है. यह सस्ता और तेज है, लेकिन सही नमूना चुनना मुश्किल हो सकता है और इसमें पक्षपात का खतरा रहता है.
🎯 Exam Tip: प्रतिदर्श विधि बड़े समूहों के लिए कुशल और लागत प्रभावी है, लेकिन नमूना चयन की सटीकता और पक्षपात से बचने के लिए उचित रणनीतियों का पालन करना महत्वपूर्ण है.
Question 4. सांख्यिकीय अनुसन्धान की रीतियों का वर्णन कीजिये। दोषों के साथ वर्णन कीजिये।
Answer: सांख्यिकीय अनुसन्धान की रीतियाँ डेटा इकट्ठा करने के तरीके हैं। इनमें से कुछ प्रमुख रीतियाँ निम्नलिखित हैं:
(1) दैव प्रतिदर्श (Random Sampling):
यह नमूने चुनने का एक अच्छा तरीका माना जाता है, क्योंकि इसमें शोधकर्ता का पक्षपात शामिल नहीं होता है। समूह की हर इकाई को नमूने में चुने जाने का समान अवसर मिलता है। यह चयन आकस्मिक रूप से होता है। शोधकर्ता अपनी इच्छा से इकाइयों का चयन नहीं करता है। इस विधि में, नमूने में शामिल होने का हर इकाई को समान मौका मिलता है।
दैव प्रतिदर्श विधि से नमूने चुनने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित रीतियों का प्रयोग किया जाता है:
- लॉटरी रीति
- ढोल घुमाकर
- आँख बन्द करके चयन
- निश्चित क्रम की व्यवस्थित रीति
- दैव संख्याओं की तालिकाओं के चयन से
दैव प्रतिदर्श के गुण:
- इस विधि में पक्षपात की कोई सम्भावना नहीं रहती है।
- यह धन, श्रम और समय की बचत करती है।
- यह विधि सांख्यिकीय नियमितता नियम और बड़े अंकों की जड़ता नियम पर आधारित है। इसलिए, चुने गए नमूने में मुख्य समूह के सभी गुण पाए जाते हैं।
- यह एक बहुत सरल तरीका है।
- इस विधि से प्राप्त नमूनों की जाँच दूसरे नमूनों से की जा सकती है।
- यह विधि बहुत सरल है।
- यह बहुत कम खर्चीली है।
- जब नमूने में विशेष इकाइयों को शामिल करना ज़रूरी हो, तो यह विधि उपयुक्त रहती है।
- यदि नमूने के लिए पहले से ही माप तय कर लिए जाएँ, तो नमूने का चयन सही हो जाता है।
दैव प्रतिदर्श के दोष:
- यदि कुछ खास इकाइयों को उनके महत्व के कारण नमूने में शामिल करना ज़रूरी हो, तो यह विधि उपयुक्त नहीं रहती है।
- यदि मुख्य समूह का आकार छोटा हो या उसमें बहुत विविधता हो, तो इस विधि द्वारा लिए गए नमूने पूरे समूह का प्रतिनिधित्व ठीक से नहीं कर पाते हैं।
- यह विधि तभी उपयुक्त रहती है जब मुख्य समूह की सभी इकाइयाँ स्वतंत्र हों।
- शोधकर्ता के पक्षपातपूर्ण रवैये का प्रभाव हो सकता है।
- यह एक वैज्ञानिक विधि नहीं है।
- कई बार इस विधि से गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं।
- इस विधि द्वारा लिए गए नमूनों की सच्चाई की कोई गारंटी नहीं होती है।
(2) स्तरित प्रतिदर्श (Stratified Sampling):
इस विधि में, सबसे पहले मुख्य समूह को अलग-अलग विशेषताओं के आधार पर कई हिस्सों में बाँट दिया जाता है। इसके बाद, प्रत्येक हिस्से से दैव प्रतिदर्श विधि के आधार पर नमूना चुना जाता है। इस तरह, यह विधि सविचार प्रतिदर्श और दैव प्रतिदर्श दोनों का मिला-जुला रूप है। उदाहरण के लिए, यदि एक स्कूल में 400 विद्यार्थी हैं और उनके बौद्धिक स्तर का अध्ययन करना है, तो पहले 400 विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी और अनुत्तीर्ण के आधार पर चार वर्गों में बाँटा जाएगा। यदि प्रथम श्रेणी में 100, द्वितीय श्रेणी में 150, तृतीय श्रेणी में 100 और अनुत्तीर्ण 50 विद्यार्थी हैं, तो 40 विद्यार्थी चुनने के लिए प्रत्येक वर्ग से 10% विद्यार्थियों का चुनाव किया जाएगा। इस प्रकार, प्रत्येक श्रेणी से क्रमशः 10, 15, 10 और 5 विद्यार्थी चुने जाएँगे।
स्तरित प्रतिदर्श के गुण:
- यह विधि उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ असमानता और विविधता हो।
- इस विधि में सविचार प्रतिदर्श और दैव प्रतिदर्श दोनों विधियों के लाभ मिलते हैं।
- यह नमूना पूरे मुख्य समूह का पूरी तरह से प्रतिनिधित्व करता है।
In simple words: सांख्यिकीय शोध में डेटा इकट्ठा करने के कई तरीके हैं। दो मुख्य नमूना लेने की विधियाँ हैं: दैव प्रतिदर्श और स्तरित प्रतिदर्श। दैव प्रतिदर्श में, हर वस्तु को चुने जाने का बराबर मौका मिलता है, जिससे निष्पक्षता आती है। स्तरित प्रतिदर्श में, पूरे समूह को छोटे-छोटे समान हिस्सों में बाँटा जाता है, फिर हर हिस्से से कुछ नमूने चुने जाते हैं, जिससे सभी तरह के समूहों का प्रतिनिधित्व होता है।
🎯 Exam Tip: जब शोध विधियों की व्याख्या करें, तो हर विधि को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और फिर उसके फायदे और नुकसान अलग-अलग बताएँ ताकि पूरे अंक मिलें।
Question 5. प्रश्नावली किसे कहते हैं? प्रश्नावली व अनुसूची में क्या अंन्तर है? एक प्रश्नावली बनाते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए? अथवा एक अच्छी प्रश्नावली के गुणों का वर्णन कीजिये।
Answer:
प्रश्नावली से आशय (Meaning of Questionnaire):
प्रश्नावली सांख्यिकीय अनुसन्धान के लिए चुने गए विषय से संबंधित प्रश्नों की एक सूची होती है। यह प्रश्नावली डाक द्वारा उन लोगों को भेजी जाती है जो जानकारी देने वाले हैं, और वे स्वयं प्रश्नों के उत्तर देते हैं। प्रश्नावली और अनुसूची दोनों में ही कई प्रश्न होते हैं। मुख्य अंतर यह है कि प्रश्नावली में प्रश्नों के उत्तर जानकारी देने वाले को स्वयं देने होते हैं, जबकि अनुसूची में प्रगणक (जाँच करने वाला) जानकारी देने वाले से प्रश्न पूछकर उत्तर भरता है।
प्रश्नावली व अनुसूची में अन्तर (Difference between Questionnaire and Schedule):
- प्रश्नावली का उपयोग बड़े क्षेत्रों के लिए किया जाता है, जबकि अनुसूची का क्षेत्र सीमित होता है।
- प्रश्नावली का उपयोग केवल शिक्षित जानकारी देने वालों के लिए किया जा सकता है, जबकि अनुसूची का उपयोग शिक्षित और अशिक्षित दोनों तरह के लोगों के लिए किया जा सकता है।
- प्रश्नावली में प्रश्नों के उत्तर जानकारी देने वाले स्वयं लिखते हैं, जबकि अनुसूची में प्रगणक उत्तर लिखते हैं।
- प्रश्नावली डाक द्वारा जानकारी देने वालों को भेजी जाती है, जबकि प्रगणक अनुसूची को स्वयं जानकारी देने वालों के पास लेकर जाते हैं।
- प्रश्नावली द्वारा डेटा इकट्ठा करने में कम पैसा और समय लगता है, जबकि अनुसूची में अधिक पैसा और समय लगता है।
- प्रश्नावली में जानकारी देने वाले अपने विवेक से उत्तर देते हैं, जबकि अनुसूची में प्रगणक उन्हें प्रश्न समझने में मदद करते हैं।
एक अच्छी प्रश्नावली के गुण अथवा प्रश्नावली बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें (Qualities of a good questionnaire or points to consider when making one):
एक अच्छी प्रश्नावली बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- परिचय (Introduction): शोधकर्ता को प्रश्नावली के साथ अपना परिचय देना चाहिए, शोध का उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताना चाहिए, और यह भी आश्वासन देना चाहिए कि जानकारी देने वालों की सूचनाएँ पूरी तरह गुप्त रखी जाएँगी।
- प्रश्नों की कम संख्या (Small number of questions): प्रश्नावली में प्रश्नों की संख्या कम होनी चाहिए ताकि जानकारी देने वाले आसानी से उत्तर दे सकें। इसका मतलब यह नहीं है कि इतने कम प्रश्न हों कि शोध का उद्देश्य ही पूरा न हो सके।
- प्रश्न सरल व स्पष्ट (Simple and clear questions): प्रश्न सरल और स्पष्ट होने चाहिए ताकि जानकारी देने वाला उन्हें आसानी से समझ सके और सही उत्तर दे सके। दोहरे अर्थ वाले प्रश्न नहीं पूछने चाहिए।
- प्रश्नों की प्रकृति (Nature of questions): प्रश्न निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं:
- एक विकल्प वाले प्रश्न (Single-option questions): जिनका उत्तर हाँ/नहीं, सही/गलत, स्त्री/पुरुष आदि में होता है।
- बहु-विकल्पीय प्रश्न (Multiple-choice questions): ये ऐसे प्रश्न होते हैं जिनके कई संभावित उत्तर हो सकते हैं। संभावित उत्तर प्रश्नावली में दिए होते हैं। जानकारी देने वाला उनमें से सही उत्तर पर निशान लगा देता है।
- विशिष्ट प्रश्न (Specific questions): ये प्रश्न जानकारी देने वाले से विशेष जानकारी प्राप्त करने के लिए होते हैं। उदाहरण के लिए, "आपकी आय क्या है?", "आपकी शैक्षिक योग्यता क्या है?", "आपके कितने लड़के-लड़कियाँ हैं?" आदि।
- खुले प्रश्न (Open-ended questions): ये ऐसे प्रश्न होते हैं जिनमें जानकारी देने वाले को किसी समस्या के संबंध में अपने विचार व्यक्त करने होते हैं। जैसे- "आपके विचार में जातीय आधार पर जनगणना उचित है?", "आपके विचार में सांसदों और विधायकों को सांसद/विधायक निधि देना उचित है?"
- वर्जित प्रश्न (Forbidden questions): प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न नहीं पूछने चाहिए जिनसे जानकारी देने वाले के आत्म-सम्मान, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। जैसे- गुप्त बीमारी, पति-पत्नी संबंध। प्रश्न ऐसे भी नहीं होने चाहिए जिनसे जानकारी देने वाले के मन में संदेह, उत्तेजना या विरोध पैदा हो।
- प्रश्न अनुसन्धान से सम्बन्धित (Questions related to research): प्रश्नावली में पूछे जाने वाले प्रश्न पूरी तरह से अनुसन्धान से संबंधित होने चाहिए।
- प्रश्नावली का गठन (Formulation of questionnaire): प्रश्नावली का गठन उचित प्रकार का होना चाहिए, जिससे जानकारी देने वाले को उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।
- सत्यता की जाँच (Checking truthfulness): प्रश्नावली में ऐसे प्रश्न भी होने चाहिए जिनसे परस्पर उत्तरों की जाँच हो सके।
- आवश्यक निर्देश (Necessary instructions): प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रश्नावली के शुरू या अंत में आवश्यक निर्देश देने चाहिए जिससे जानकारी देने वालों को प्रश्नों के सही उत्तर देने में मदद मिले।
- योग्यतानुसार प्रश्न (Questions according to ability): प्रश्न जानकारी देने वाले की योग्यता के अनुसार होने चाहिए जिससे उन्हें प्रश्नों के उत्तर देने में कोई कठिनाई न हो।
In simple words: प्रश्नावली एक सूची होती है जिसमें जानकारी इकट्ठा करने के लिए प्रश्न होते हैं। यह अनुसूची से अलग है क्योंकि प्रश्नावली को लोग खुद भरते हैं, जबकि अनुसूची को जाँच करने वाले भरते हैं। एक अच्छी प्रश्नावली में प्रश्न कम, सरल, स्पष्ट और किसी को ठेस न पहुँचाने वाले होने चाहिए। इसमें परिचय, निर्देश और सही जगह होनी चाहिए ताकि लोग आसानी से उत्तर दे सकें।
🎯 Exam Tip: प्रश्नावली और अनुसूची के बारे में लिखते समय, उनके उद्देश्यों, कौन उन्हें भरता है, और किस प्रकार के दर्शकों के लिए वे उपयुक्त हैं, इसमें स्पष्ट अंतर करें। निष्पक्षता और गोपनीयता जैसे नैतिक विचारों को उजागर करना भी महत्वपूर्ण है।
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Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Economics chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Economics Class 11 Solved Papers
Using our Economics solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Economics are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Economics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Economics. You can access RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 5 आँकड़ों का संग्रहण in printable PDF format for offline study on any device.