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Detailed Chapter 20 निर्धनता RBSE Solutions for Class 11 Economics
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Class 11 Economics Chapter 20 निर्धनता RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता की परिभाषा के लिए न्यूनतम कैलोरी मापन कौन-सा है?
(a) 2100 कैलोरी
(b) 2400 कैलोरी
(c) 2250 कैलोरी
(d) 2500 कैलोरी
Answer: (b) 2400 कैलोरी
In simple words: ग्रामीण इलाकों में, एक व्यक्ति को गरीब तब नहीं माना जाता जब उसे हर दिन कम से कम 2400 कैलोरी भोजन मिलता है। यह गरीबी मापने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: हमेशा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए कैलोरी मापदंडों को अलग-अलग याद रखें, क्योंकि वे अलग-अलग होते हैं।
Question 2. वर्ष 2011-12 में तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार भारत में निर्धनता का प्रतिशत क्या था?
Answer: [Due to missing options in the source, a precise MCQ answer cannot be provided. Please refer to the source document for full question and options.]
In simple words: वर्ष 2011-12 में तेंदुलकर समिति के अनुमानों के हिसाब से भारत में गरीबी का प्रतिशत एक खास संख्या पर था, जो यह बताता है कि कितने लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर समिति के अनुमान भारतीय गरीबी मापने में महत्वपूर्ण हैं। इन अनुमानों के मुख्य आंकड़े और वर्ष याद रखना जरूरी है।
Question 3. वर्ष 2011-12 में तेंदुलकर अनुमान के अनुसार निम्न राज्यों में से किस राज्य में निर्धनता अनुपात सर्वाधिक था?
(a) बिहार
(b) छत्तीसगढ़
(c) झारखण्ड
(d) केरल
Answer: (b) छत्तीसगढ़
In simple words: तेंदुलकर समिति के 2011-12 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे ज्यादा लोग गरीब थे। मतलब, इस राज्य में गरीबी का प्रतिशत सबसे ऊंचा था।
🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय गरीबी के आंकड़ों को याद रखें, खासकर उन राज्यों के लिए जहां गरीबी का अनुपात सबसे अधिक या सबसे कम रहा है।
Question 4. न्यूनतम उपयोग आवश्यकता पूर्ति के आधार पर निर्धनता की परिभाषा निम्न में से कौन-सी है?
(a) निर्धनता का सापेक्ष मापन
(b) निर्धनता का निरपेक्ष मापन
(c) दोनों
(d) दोनों नहीं
Answer: (b) निर्धनता का निरपेक्ष मापन
In simple words: अगर किसी व्यक्ति को अपनी रोजमर्रा की सबसे जरूरी चीजें (जैसे भोजन, कपड़े) भी नहीं मिल पातीं, तो इस स्थिति को निरपेक्ष गरीबी कहते हैं। यह गरीबी मापने का एक तरीका है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष और निरपेक्ष गरीबी के बीच का अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है। निरपेक्ष गरीबी न्यूनतम आवश्यकताओं पर केंद्रित होती है।
Question 5. निर्धनता का क्षमता माप (Capacity Measurement of Poverty) के अनुसार निर्धनता की परिभाषा में कौन-सा मानक समाहित है?
(a) पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का अनुपात
(b) अकुशल प्रसव अनुपात
(c) महिला निरक्षरता अनुपात
(d) ये सभी
Answer: (d) ये सभी
In simple words: गरीबी को क्षमता माप के हिसाब से देखने पर, हम तीन चीजों को शामिल करते हैं: 5 साल से छोटे कम वजन वाले बच्चों की संख्या, बिना किसी खास मदद के जन्म देने वाली माताओं की संख्या, और कितनी महिलाएं पढ़-लिख नहीं पातीं। ये सभी मिलकर गरीबी का पूरा चित्र दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: क्षमता माप गरीबी को केवल आय से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच जैसे कई पहलुओं से देखता है। इसके मुख्य संकेतकों को याद रखें।
Question 6. विश्व बैंक के अनुसार निर्धनता का मापन क्या है?
Answer: विश्व बैंक के अनुसार, गरीबी को मापने का तरीका प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 1.25 अमेरिकी डॉलर से कम उपभोग व्यय पर आधारित है। यदि कोई व्यक्ति एक दिन में इतनी राशि से कम खर्च करता है, तो उसे गरीब माना जाता है।
In simple words: विश्व बैंक कहता है कि जो व्यक्ति एक दिन में 1.25 अमेरिकी डॉलर से कम खर्च करता है, वह गरीब है।
🎯 Exam Tip: विश्व बैंक द्वारा निर्धारित अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के मापदंडों को याद रखें, क्योंकि यह दुनिया भर में गरीबी मापने का एक मानक है।
Question 7. निम्न में से निर्धनता निवारण का मजदूरी रोजगार कार्यक्रम कौन-सा नहीं है?
(a) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम
(b) जवाहर रोजगार योजना
(c) ट्राईसेम
(d) काम के बदले अनाज योजना
Answer: (c) ट्राईसेम
In simple words: ट्राईसेम (TRYSEM) एक ऐसा कार्यक्रम था जो युवाओं को खुद का रोजगार शुरू करने के लिए ट्रेनिंग देता था। यह मजदूरी कमाने वाला रोजगार कार्यक्रम नहीं था, बल्कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाला था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से समझें कि वे मजदूरी रोजगार, स्वरोजगार या सामाजिक सहायता में से किस श्रेणी में आते हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निर्धनता को परिभाषित करने के लिये कैलोरी मापन आवश्यकता क्या है?
Answer: भारत में, गरीबी को "कैलोरी उपभोग" से जोड़ा गया है, जिसका अर्थ है कि भोजन के माध्यम से मिलने वाली कैलोरी की मात्रा के आधार पर गरीबी मापी जाती है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित कैलोरी से कम उपभोग करता है, तो उसे गरीब माना जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि लोगों को न्यूनतम ऊर्जा मिल रही है।
In simple words: भारत में गरीबी को खाने से मिलने वाली ऊर्जा (कैलोरी) की मात्रा से जोड़ा जाता है। कम कैलोरी मिलना गरीबी का संकेत है।
🎯 Exam Tip: कैलोरी मापदंड भारत में गरीबी रेखा तय करने का एक प्रमुख तरीका रहा है। इसके शहरी और ग्रामीण अंतरों को विशेष रूप से उल्लेख करें।
Question 2. वर्ष 2011-12 में तेन्दुलकर अनुमानों के अनुसार देश में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता अनुपात क्या था?
Answer: वर्ष 2011-12 में तेंदुलकर समिति के अनुमानों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गरीबी अनुपात 13.7 प्रतिशत था, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 25.7 प्रतिशत था। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक थी।
In simple words: 2011-12 में तेंदुलकर समिति के हिसाब से शहरों में 13.7% और गांवों में 25.7% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर समिति के अनुमानों के तहत शहरी और ग्रामीण गरीबी के प्रतिशत को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर तुलनात्मक प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
Question 3. निर्धनता निवारण के लिये अपनाये गए स्वरोजगार के किन्हीं दो कार्यक्रमों का नाम लिखिए।
Answer: निर्धनता निवारण के लिए अपनाए गए दो प्रमुख स्वरोजगार कार्यक्रम हैं:
1. ग्रामीण युवकों के लिये स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम (TRYSEM)
2. प्रधानमन्त्री रोजगार योजना (PMRY)
ये कार्यक्रम लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करते हैं।
In simple words: गरीबी हटाने के लिए दो स्वरोजगार कार्यक्रम हैं TRYSEM (ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग) और PMRY (प्रधानमंत्री रोजगार योजना)।
🎯 Exam Tip: स्वरोजगार कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जबकि मजदूरी रोजगार कार्यक्रम वेतनभोगी काम प्रदान करते हैं। दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें।
Question 4. राज्यों का निर्धनता अनुपात के साथ नाम लिखिए।
Answer: 2011-12 में तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार कुछ प्रमुख राज्यों के निर्धनता अनुपात इस प्रकार थे:
3. बिहार: 33.74 प्रतिशत
4. उड़ीसा: 32.59 प्रतिशत
5. मध्य प्रदेश: 31.65 प्रतिशत
यह आंकड़े दिखाते हैं कि इन राज्यों में गरीबी का स्तर काफी ऊंचा था, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं उजागर होती हैं।
In simple words: 2011-12 में बिहार में 33.74%, उड़ीसा में 32.59% और मध्य प्रदेश में 31.65% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: भारत में विभिन्न राज्यों के गरीबी अनुपातों की जानकारी रखें, खासकर उन राज्यों के जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर या नीचे हैं।
Question 5. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
Answer: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के प्रमुख घटक हैं: वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, अक्षमता (विकलांग) पेंशन तथा परिवार लाभ योजना। ये घटक समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
In simple words: इस कार्यक्रम में बूढ़े लोगों, विधवाओं, विकलांगों और गरीब परिवारों को पैसे मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है। इसके सभी चार मुख्य घटकों के नाम और उनके उद्देश्य याद रखें।
Question 6. निर्धनता की क्षमता मापन को परिभाषित कीजिए।
Answer: निर्धनता की क्षमता मापन के तहत गरीबी को मापने के लिए तीन मुख्य संकेतकों का उपयोग किया जाता है: पाँच वर्ष से कम उम्र के कम वजन वाले बच्चों का अनुपात, अकुशल प्रसव अनुपात और महिला निरक्षरता अनुपात। यह विधि गरीबी को केवल आय के बजाय मानवीय क्षमताओं और जीवन की गुणवत्ता के आधार पर देखती है।
In simple words: क्षमता माप गरीबी को बच्चों के वजन, प्रसव के तरीके और महिलाओं की शिक्षा देखकर मापता है, सिर्फ पैसे से नहीं।
🎯 Exam Tip: क्षमता माप (Capability Measurement) गरीबी के बहुआयामी स्वरूप को समझने में मदद करता है। इसके तीनों प्रमुख संकेतकों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. वर्ष 2011-12 में निर्धनता की परिभाषा योजना आयोग के अनुसार क्या है?
Answer: वर्ष 2011-12 में योजना आयोग ने गरीबी रेखा को ग्रामीण क्षेत्र के लिए 916 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और शहरी क्षेत्र के लिए 1000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह के रूप में परिभाषित किया था। इसका मतलब है कि यदि किसी व्यक्ति का मासिक खर्च इन सीमाओं से कम है, तो उसे गरीब माना जाता था।
In simple words: 2011-12 में योजना आयोग के अनुसार, गांवों में जो लोग महीने में 916 रुपये से कम और शहरों में 1000 रुपये से कम खर्च करते थे, वे गरीब माने जाते थे।
🎯 Exam Tip: योजना आयोग द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा के इन विशिष्ट मौद्रिक मूल्यों को, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए, याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।
Question 8. रिसाव प्रभाव (Trickle down effect) क्या है?
Answer: रिसाव प्रभाव वह सिद्धांत है जिसमें देश में तेजी से आर्थिक विकास होने पर आय में वृद्धि होती है, और यह बढ़ी हुई आय धीरे-धीरे रिसकर निर्धन वर्ग तक पहुँचती है। इस सिद्धांत का मानना है कि जैसे-जैसे अमीर लोग अमीर होते हैं, उनका खर्च बढ़ता है, जिससे गरीबों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
In simple words: रिसाव प्रभाव का मतलब है कि जब देश में खूब तरक्की होती है, तो अमीर लोगों की कमाई बढ़ती है और वह कमाई धीरे-धीरे नीचे तक गरीब लोगों तक पहुँचती है।
🎯 Exam Tip: रिसाव प्रभाव आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के बीच संबंध को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसकी मूल धारणा और सीमाओं को स्पष्ट रखें।
Question 9. किन्हीं तीन भारतीय अर्थशास्त्रियों के नाम लिखिए जिन्होंने भारत में निर्धनता के सम्बन्ध में अध्ययन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है?
Answer: भारत में गरीबी के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन भारतीय अर्थशास्त्री हैं:
1. सुरेश तेन्दुलकर
2. डॉ. सी. रंगराजन
ये अर्थशास्त्री भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण और गरीबी के अनुमानों के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: सुरेश तेंदुलकर और डॉ. सी. रंगराजन जैसे अर्थशास्त्रियों ने भारत में गरीबी को समझने और मापने में बहुत मदद की है।
🎯 Exam Tip: भारत में गरीबी पर काम करने वाले प्रमुख अर्थशास्त्रियों और उनके योगदानों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 लघु उत्तरीय प्रश्न
Question 1. निर्धनता मापन के विभिन्न मानकों को लिखिए।
Answer: निर्धनता मापन के विभिन्न मानक निम्नलिखित हैं:
1. न्यूनतम "कैलोरी उपभोग" द्वारा: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी उपभोग से कम प्राप्त करने वालों को गरीब माना जाता है।
2. योजना आयोग के अनुसार मौद्रिक मूल्य द्वारा: वर्ष 2011-12 में ग्रामीण क्षेत्र के लिए 816 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और शहरी क्षेत्र के लिए 1000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह गरीबी रेखा निर्धारित की गई थी।
3. विश्व बैंक के अनुसार: प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1.25 अमेरिकी डॉलर से कम उपभोग व्यय करने वाले को गरीब माना जाता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय मानक है।
4. निर्धनता का क्षमता माप (Capability Measurement of Poverty) द्वारा: इसमें पांच वर्ष से कम उम्र के कम वजन वाले बच्चों का अनुपात, अकुशल प्रसव अनुपात तथा महिला निरक्षरता अनुपात जैसे सूचक शामिल हैं। यह गरीबी को बहुआयामी तरीके से देखता है।
In simple words: गरीबी को मापने के कई तरीके हैं: कैलोरी खाना, पैसे खर्च करना, विश्व बैंक का डॉलर मानक और लोगों की क्षमताओं को देखना (जैसे बच्चों का वजन या महिलाओं की पढ़ाई)।
🎯 Exam Tip: गरीबी मापने के विभिन्न मापदंडों को उनके मुख्य बिंदुओं के साथ याद रखें, और प्रत्येक मानदंड के पीछे की अवधारणा को समझें।
Question 2. निर्धनता रेखा के मापन में कैलोरी उपभोग पद्धति व निर्धनता रेखा पद्धति की क्या कमियां हैं?
Answer: निर्धनता रेखा के मापन में कैलोरी उपभोग पद्धति की प्रमुख कमियाँ ये हैं कि यह गरीबी को पूरी तरह से वर्गीकृत नहीं करती। केवल भोजन के आधार पर गरीबी मापना सही नहीं है, क्योंकि गरीबी सामाजिक और आर्थिक कारकों जैसे बीमारी, अशिक्षा, बेरोजगारी और भूख से भी प्रभावित होती है। निर्धनता रेखा पद्धति में, गरीबी रेखा से नीचे के सभी गरीबों को समान माना जाता है, जबकि उनकी वास्तविक स्थिति अलग-अलग होती है। गरीबी को केवल एक संख्या से परिभाषित करना हमेशा सटीक नहीं होता।
In simple words: कैलोरी और गरीबी रेखा के तरीके से गरीबी को पूरी तरह से नहीं मापा जा सकता, क्योंकि ये सिर्फ खाने और पैसों पर ध्यान देते हैं। बीमारी, पढ़ाई की कमी और काम न मिलना जैसे और भी कारण हैं जो लोगों को गरीब बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: कैलोरी-आधारित और आय-आधारित गरीबी रेखा के तरीकों की आलोचनाओं को समझें। यह दर्शाता है कि गरीबी एक जटिल घटना है जिसे केवल एक कारक से नहीं मापा जा सकता।
Question 3. सापेक्ष गरीबी की परिभाषा दीजिए।
Answer: सापेक्ष गरीबी का अर्थ है अन्य देशों या समाज के अन्य वर्गों की तुलना में गरीबी। जब किसी देश या समूह के लोगों का जीवन स्तर दूसरे देशों या समूहों की तुलना में कम होता है, तो उन्हें सापेक्ष रूप से गरीब माना जाता है। इस मापन में आय वितरण और उसकी असमानता पर विचार किया जाता है। यह विकसित देशों में गरीबी मापने का एक सामान्य तरीका है, क्योंकि वहां निरपेक्ष गरीबी कम होती है।
In simple words: सापेक्ष गरीबी का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति या देश दूसरों के मुकाबले गरीब होता है। इसमें देखा जाता है कि लोगों के पास कितनी आमदनी है और क्या वह दूसरों से कम है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष गरीबी और निरपेक्ष गरीबी के बीच के अंतर को स्पष्ट रखें। सापेक्ष गरीबी तुलनात्मक होती है और आय असमानता पर केंद्रित होती है।
Question 5. आर्थिक विकास निर्धनता निवारण में किस प्रकार उपयोगी है?
Answer: आर्थिक विकास गरीबी को कम करने में बहुत सहायक है। जब देश में तेजी से आर्थिक विकास होता है, तो उद्योगों और कृषि क्षेत्रों में अधिक रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इससे मजदूरों की संख्या में वृद्धि होती है और बेरोजगारी कम होती है। जैसे-जैसे अधिक लोगों को काम मिलेगा, उनकी आय बढ़ेगी और गरीबी का स्तर अपने आप कम होने लगेगा। यह एक मजबूत अर्थव्यवस्था के माध्यम से जीवन स्तर में सुधार लाता है।
In simple words: आर्थिक विकास से गरीबी कम होती है क्योंकि जब देश आगे बढ़ता है, तो ज्यादा नौकरियां मिलती हैं। लोगों को काम मिलने से उनकी कमाई बढ़ती है और वे गरीबी से बाहर आ जाते हैं।
🎯 Exam Tip: आर्थिक विकास गरीबी उन्मूलन के लिए एक मूलभूत रणनीति है। यह कैसे रोजगार सृजन, आय वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार लाता है, इसे उदाहरणों के साथ समझाएँ।
Question 6. निर्धनता एक बहुआयामी अवधारणा है। स्पष्ट करें।
Answer: गरीबी को केवल एक ही चीज़ से परिभाषित नहीं किया जा सकता है। यह सिर्फ पैसे की कमी नहीं है, बल्कि यह वह स्थिति है जब व्यक्ति को पर्याप्त भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी चीजें नहीं मिल पातीं। सामाजिक तौर पर भी यह शक्तिहीनता, राजनीतिक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व की कमी और अवसरों की कमी से जुड़ी है। मानव विकास रिपोर्ट ने भी गरीबी को बहुआयामी माना है, जिसमें लंबा जीवन न होना, शिक्षा की कमी और निम्न जीवन स्तर शामिल हैं।
In simple words: गरीबी का मतलब सिर्फ पैसे की कमी नहीं है। इसमें खाना, घर, पढ़ाई और सेहत जैसी जरूरी चीजें भी शामिल हैं। यह कई चीजों से मिलकर बनती है, इसलिए इसे बहुआयामी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: गरीबी की बहुआयामी प्रकृति को समझने के लिए आय के अलावा अन्य सामाजिक-आर्थिक संकेतकों (शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा) का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 7. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन वर्ग में कौन आते हैं?
Answer: भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन वर्ग में मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसान, खेतिहर मजदूर और आकस्मिक श्रमिक शामिल हैं। इन लोगों के पास अक्सर अपनी कृषि के लिए पर्याप्त जमीन नहीं होती, और उन्हें नियमित रोजगार भी नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आय बहुत कम रहती है। वे अक्सर मौसमी बेरोजगारी का सामना करते हैं।
In simple words: गांवों में छोटे किसान, खेत में काम करने वाले मजदूर और कभी-कभी काम करने वाले लोग गरीब होते हैं। उनके पास अक्सर अपनी जमीन नहीं होती या काम पक्का नहीं होता, इसलिए उनकी कमाई कम होती है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण गरीबी के प्रमुख समूहों को पहचानें और उन कारणों को समझें जो उन्हें गरीबी में धकेलते हैं, जैसे भूमिहीनता, अनियमित रोजगार और कम मजदूरी।
Question 9. राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
Answer: राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के प्रमुख उद्देश्य हैं: शहरों में रहने वाले बेघर लोगों को बुनियादी सुविधाएं जैसे आवास उपलब्ध कराना, शहरी गरीबी को कम करना, और शहरी गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाना। इसका लक्ष्य लाभदायक और कुशल रोजगार के अवसर प्रदान करना, कौशल विकास, उद्यमिता विकास और ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। यह मिशन शहरी बेरोजगारी और अल्प-रोजगार को कम करने में मदद करता है।
In simple words: इस मिशन का लक्ष्य शहर में गरीबों को घर, काम और बेहतर जीवन देना है। यह उन्हें हुनर सिखाकर और पैसे दिलाकर मदद करता है।
🎯 Exam Tip: शहरी आजीविका मिशन के प्रमुख उद्देश्यों को समझें, विशेष रूप से शहरी गरीबों के जीवन स्तर में सुधार, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर इसका ध्यान।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. निर्धनता के मापन उसकी मापन समस्यायें लिखित।
Answer: गरीबी को मापने का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है जो हर जगह और हर समय समान रूप से लागू हो। समाज, स्थान और समय के साथ गरीबी की परिभाषा बदलती रहती है। गरीबी का अनुमान लगाने के लिए एक निश्चित आय स्तर तय किया जाता है, जिसे गरीबी रेखा कहते हैं, और इस स्तर से कम आय वाले व्यक्ति को गरीब माना जाता है। महंगाई के कारण समय-समय पर इस आय स्तर को संशोधित करना पड़ता है। भारत में गरीबी को मुख्य रूप से "कैलोरी उपभोग" से जोड़ा गया है, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्रों में 2100 कैलोरी से कम उपभोग करने वालों को गरीब माना जाता है। वर्ष 2011-12 में योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए 816 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह और शहरी क्षेत्र के लिए 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह को गरीबी रेखा के रूप में परिभाषित किया। हालांकि, केवल कैलोरी या आय पर आधारित मापन में कुछ कमियां हैं, क्योंकि यह गरीबी के कई अन्य पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, और सामाजिक असुरक्षा को अनदेखा कर देता है।
In simple words: गरीबी को मापने का एक ही तरीका नहीं है। यह समय और जगह के साथ बदलता है। भारत में इसे कैलोरी खाने या एक तय पैसे से कम कमाने पर मापा जाता है। लेकिन इसमें बीमारी, पढ़ाई या घर जैसी और भी चीजें शामिल नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: गरीबी मापन की समस्याओं पर चर्चा करते समय, केवल मापदंडों का उल्लेख न करें, बल्कि यह भी बताएं कि वे क्यों अपर्याप्त हैं (जैसे बहुआयामी गरीबी का अनदेखा करना)।
Question 2. भारत में निर्धनता की समस्या के आकार व क्षेत्रीय वितरण की व्याख्या करो।
Answer: भारत में गरीबी की समस्या का आकार कई अर्थशास्त्रियों द्वारा अलग-अलग समय पर प्रस्तुत किया गया है। 1967-68 में, बी.एस. मिन्हास के अनुसार 37.1 प्रतिशत, पी.के. वर्धन के अनुसार 54.0 प्रतिशत, दांडेकर व रथ के अनुसार 40.0 प्रतिशत, और आहलूवालिया के अनुसार 56.5 प्रतिशत आबादी गरीब थी। इन सभी अनुमानों में अंतर था क्योंकि उन्होंने गरीबी की अलग-अलग परिभाषाएँ ली थीं, लेकिन सभी ने यह दिखाया कि 1960 के दशक में देश में गरीबी का अनुपात काफी ऊंचा था। गरीबों की एक बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में थी, खासकर सीमांत किसानों और खेतिहर मजदूरों के बीच। राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन के आंकड़ों के आधार पर, योजना आयोग के अनुसार 1973-74 में ग्रामीण गरीबी अनुपात 56.4 प्रतिशत और शहरी गरीबी अनुपात 49.0 प्रतिशत था।
| राज्य | ग्रामीण | शहरी | संयुक्त |
|---|---|---|---|
| बिहार | 34.06 | 31.23 | 33.74 |
| छत्तीसगढ़ | 44.61 | 24.75 | 39.93 |
| झारखण्ड | 40.84 | 24.83 | 36.96 |
| मध्य प्रदेश | 35.74 | 21.00 | 31.65 |
| उत्तर प्रदेश | 30.40 | 26.06 | 29.43 |
| उड़ीसा | 35.69 | 17.29 | 32.59 |
स्रोत: योजना आयोग, भारत सरकार
वर्ष 1993-94 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 50.1 प्रतिशत थी जो 2011-12 में घटकर 25.7 प्रतिशत रह गई, जबकि शहरी गरीबी 1993-94 में 31.8 प्रतिशत से कम होकर 13.7 प्रतिशत हो गई। कुल मिलाकर, संयुक्त गरीबी अनुपात 1993-94 में 45.3 प्रतिशत से घटकर 2011-12 में 21.9 प्रतिशत हो गया। इससे ग्रामीण गरीबी में तेज कमी देखने को मिली। राज्यों में गरीबी का वितरण अलग-अलग है; तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार 2011-12 में छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक गरीबी थी, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में 44.61 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 24.75 प्रतिशत लोग गरीब थे।
In simple words: भारत में बहुत से लोग गरीब थे, खासकर गांवों में। 1960 के दशक में आधे से ज्यादा लोग गरीब थे। धीरे-धीरे गरीबी कम हुई, खासकर 1993 से 2012 के बीच। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अभी भी गरीबी ज्यादा थी, लेकिन बिहार और उड़ीसा में भी गरीबी का प्रतिशत अधिक था।
🎯 Exam Tip: गरीबी की समस्या के आकार और क्षेत्रीय वितरण का वर्णन करते समय, प्रमुख अर्थशास्त्रियों के अनुमानों और शहरी-ग्रामीण विभाजन के साथ-साथ राज्यों के विशिष्ट आंकड़ों का भी उल्लेख करें।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. निर्धनता का क्षमता माप के अनुसार गरीबी मापन के लिये कितने सूचकों का प्रयोग किया जाता है?
(a) चार
(b) तीन
(c) दो
(d) पाँच
Answer: (b) तीन
In simple words: गरीबी को क्षमता माप के हिसाब से मापने के लिए तीन मुख्य बातों को देखा जाता है।
🎯 Exam Tip: क्षमता माप के तहत उपयोग किए जाने वाले तीन मुख्य संकेतकों को याद रखें (बच्चों का वजन, प्रसव, महिला निरक्षरता)।
Question 2. भारत में निर्धनता के आरम्भिक अनुमान प्रस्तुत किये गए
(a) बी. एस. मिन्हास द्वारा
(b) पी. के. वर्धन द्वारा
(c) एम. एस. आहलूवालिया द्वारा
(d) ये सभी द्वारा
Answer: (d) ये सभी द्वारा
In simple words: भारत में गरीबी का पहला अनुमान बी. एस. मिन्हास, पी. के. वर्धन और एम. एस. आहलूवालिया जैसे कई लोगों ने दिया था।
🎯 Exam Tip: भारत में गरीबी के अध्ययन में योगदान देने वाले प्रमुख अर्थशास्त्रियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. बी० एस० मिन्हास के अनुसार वर्ष 1967-68 में देश में निर्धनता थी-
(a) 37.1 प्रतिशत
(b) 54.0 प्रतिशत
(c) 40.0 प्रतिशत
(d) 56.5 प्रतिशत
Answer: (a) 37.1 प्रतिशत
In simple words: बी. एस. मिन्हास के हिसाब से 1967-68 में भारत में लगभग 37.1% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा दिए गए गरीबी के ऐतिहासिक अनुमानों को याद रखें, खासकर बी.एस. मिन्हास जैसे प्रमुख नामों के आंकड़े।
Question 4. यो क्षमता में निर्धनता अनुमान हेतु कार्यदल का गठन किया गया
Answer: [Due to missing options and garbled question text in the source, a precise MCQ answer cannot be provided.]
उत्तर: वर्ष 1989 में।
In simple words: गरीबी का अनुमान लगाने वाली एक टीम 1989 में बनाई गई थी।
🎯 Exam Tip: गरीबी के अनुमानों के लिए गठित महत्वपूर्ण समितियों या कार्यदलों और उनके स्थापना वर्षों को याद रखना उपयोगी है।
Question 5. वर्ष 2011-12 में तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार भारत के ग्रामीण क्षेत्र का निर्धनता का प्रतिशत था
(a) 13.7
(b) 25.7
(c) 21.9
(d) 33.8
Answer: (b) 25.7
In simple words: 2011-12 में तेंदुलकर समिति के हिसाब से भारत के गांवों में 25.7% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर समिति के नवीनतम ग्रामीण और शहरी गरीबी के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीण प्रतिशत को शहरी प्रतिशत से अलग याद रखें।
Question 6. विश्व बैंक द्वारा कितने निर्धनतम देशों के राष्ट्रीय गरीबी रेखा के औसत के आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण किया जाता है?
(a) 10
(b) 20
(c) 15
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) 20
In simple words: विश्व बैंक दुनिया के 20 सबसे गरीब देशों की गरीबी रेखा को देखकर अपनी अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा तय करता है।
🎯 Exam Tip: विश्व बैंक की अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण कैसे होता है, इस प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें सबसे गरीब देशों का औसत शामिल है।
Question 7. भारत सरकार द्वारा सन 2015 में निर्धनता आंकलन पर टास्क फोर्स का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता की
(a) डॉ. अरविन्द पनगड़िया ने
(b) डॉ. सी. रंगराजन ने
(c) डी. टी. लकड़वाला ने।
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) डॉ. अरविन्द पनगड़िया ने
In simple words: 2015 में भारत सरकार ने गरीबी को मापने के लिए एक खास टीम बनाई थी, जिसके मुखिया डॉ. अरविन्द पनगड़िया थे।
🎯 Exam Tip: गरीबी आकलन के लिए गठित विभिन्न समितियों और कार्यदलों के अध्यक्षों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. निर्धनता वृद्धि का कारण है
(a) अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि
(b) अशिक्षा
(c) बेरोजगारी
(d) ये सभी
Answer: (a) अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि
In simple words: गरीबी बढ़ने का एक मुख्य कारण जनसंख्या का बहुत तेजी से बढ़ना है, क्योंकि इससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
🎯 Exam Tip: गरीबी के कारणों को सूचीबद्ध करते समय, जनसंख्या वृद्धि एक प्रमुख कारक है जिस पर जोर दिया जाना चाहिए।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 बहुचयनात्मक प्रश्न
प्रश्न 9. ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रम रोजगार के तहत परिवार को 100 दिन का रोजगार गारन्टी देने के लिये कार्यक्रम आरम्भ हुआ
(अ) नरेगा (NAREGA)
(ब) ट्राईसेम (TRYSEM)
(स) प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY)
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) नरेगा (NAREGA)
In simple words: नरेगा (NAREGA) एक सरकारी कार्यक्रम है जो ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों को 100 दिन का काम देता है ताकि वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकें। यह काम शारीरिक श्रम वाला होता है।
🎯 Exam Tip: यह कार्यक्रम ग्रामीण गरीबों को रोजगार की सुरक्षा देने और उनकी आय बढ़ाने के लिए बनाया गया था, इसलिए इसका नाम और मुख्य उद्देश्य याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 10. वाल्मीकी अम्बेडकर आवास योजना (VAMBAY) आरम्भ हुई थी
(अ) सन् 2006 में
(ब) सन् 2001 में
(स) सन् 2005 में
(द) सन् 1997 में
Answer: (ब) सन् 2001 में
In simple words: वाल्मीकी अम्बेडकर आवास योजना, जिसे VAMBAY भी कहते हैं, साल 2001 में शुरू की गई थी। इस योजना का मकसद शहरों में रहने वाले गरीब लोगों को अच्छे घर देना था।
🎯 Exam Tip: योजनाओं के नाम और उनके शुरू होने का वर्ष हमेशा याद रखें, क्योंकि ये अक्सर वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. निर्धनता किसे कहते हैं?
Answer: निर्धनता वह स्थिति है जब व्यक्ति जीवन की न्यूनतम जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता है। इसका मतलब है कि उसे पर्याप्त भोजन, आवास और कपड़े नहीं मिल पाते हैं।
In simple words: निर्धनता तब होती है जब कोई व्यक्ति अपनी सबसे जरूरी चीजें, जैसे खाना, घर और कपड़े, खरीद नहीं पाता।
🎯 Exam Tip: निर्धनता की परिभाषा में हमेशा "न्यूनतम उपभोग आवश्यकताओं की प्राप्ति न होना" जैसे मुख्य वाक्यांशों का प्रयोग करें।
प्रश्न 2. ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता की परिभाषा के लिये न्यूनतम कैलोरी मापन क्या है?
Answer: ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता की परिभाषा के लिए न्यूनतम कैलोरी मापन 2400 कैलोरी प्रतिदिन है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता के कारण तय किया गया है।
In simple words: गाँवों में गरीबी मापने के लिए, एक व्यक्ति को हर दिन कम से कम 2400 कैलोरी खाना मिलना चाहिए।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए कैलोरी मापन के अलग-अलग आंकड़े याद रखें, क्योंकि ये अक्सर तुलनात्मक रूप से पूछे जाते हैं।
प्रश्न 3. शहरी क्षेत्र में न्यूनतम कैलोरी उपभोग से कम उपभोग करने वाले को गरीब माना गया है?
Answer: शहरी क्षेत्र में न्यूनतम कैलोरी उपभोग से कम उपभोग करने वाले को गरीब माना गया है, जिसके लिए 2100 कैलोरी प्रतिदिन का मापदंड तय किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर कम शारीरिक श्रम होता है।
In simple words: शहरों में, जो लोग हर दिन 2100 कैलोरी से कम खाते हैं, उन्हें गरीब माना जाता है।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कैलोरी मापदंडों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें ताकि कोई भ्रम न हो।
प्रश्न 5. वर्ष 2011-12 में योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्र में कितने रुपये व्यक्ति प्रतिदिन के स्तर पर निर्धनता रेखा को निर्धारित किया?
Answer: वर्ष 2011-12 में योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता रेखा को ₹27.20 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के स्तर पर निर्धारित किया था। इसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन ₹27.20 से कम खर्च करता है, तो उसे गरीब माना जाता है।
In simple words: साल 2011-12 में, योजना आयोग ने गाँवों में गरीबों के लिए हर दिन ₹27.20 खर्च करने की सीमा तय की थी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वर्षों और क्षेत्रों के लिए निर्धनता रेखा के मौद्रिक मूल्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये सटीक जानकारी वाले प्रश्न होते हैं।
प्रश्न 6. वर्ष 2011-12 में योजना आयोग द्वारा शहरी क्षेत्र के लिये कितने रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धनता रेखा के रूप में परिभाषित किया है?
Answer: वर्ष 2011-12 में योजना आयोग द्वारा शहरी क्षेत्र के लिये ₹1000 प्रति व्यक्ति प्रतिमाह निर्धनता रेखा के रूप में परिभाषित किया गया है। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति शहर में एक महीने में ₹1000 से कम खर्च करता है, तो उसे गरीब माना जाता है।
In simple words: साल 2011-12 में, शहरों में गरीबी की सीमा ₹1000 प्रति व्यक्ति प्रति महीना तय की गई थी।
🎯 Exam Tip: यह आंकड़ा मासिक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र का दैनिक था। इस अंतर को ध्यान में रखें और उन्हें ठीक से याद रखें।
प्रश्न 7. निर्धनता अनुपात (Head count ratio) क्या है? स्पष्ट कीजिये।
Answer: निर्धनता अनुपात, जिसे हेड काउंट रेशियो भी कहते हैं, निर्धन लोगों की संख्या का कुल जनसंख्या के साथ अनुपात है। इसे 100 से गुणा करने पर यह ज्ञात होता है कि जनसंख्या का कितने प्रतिशत हिस्सा निर्धन है। यह हमें बताता है कि देश में गरीबी का स्तर कितना है।
In simple words: निर्धनता अनुपात यह बताता है कि कुल आबादी में से कितने प्रतिशत लोग गरीब हैं।
🎯 Exam Tip: निर्धनता अनुपात को परिभाषित करते समय "निर्धन लोगों की संख्या" और "कुल जनसंख्या" के बीच के अनुपात को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
प्रश्न 8. निर्धनता के मापन में अमर्त्य सेन के अनुसार कितने चरणों को अपनाना चाहिये?
Answer: अमर्त्य सेन के अनुसार निर्धनता के मापन में दो चरणों को अपनाना चाहिए। पहला चरण यह ज्ञात करना है कि कौन व्यक्ति कितना गरीब है (कितनी आय है), और दूसरा चरण यह देखना है कि उनकी स्थिति कितनी खराब है (गरीबी की तीव्रता)।
In simple words: अमर्त्य सेन ने कहा कि गरीबी मापने के लिए पहले यह जानना चाहिए कि कौन कितना गरीब है, और फिर यह देखना चाहिए कि उनकी हालत कितनी खराब है।
🎯 Exam Tip: अमर्त्य सेन के दो चरणों को उनकी अवधारणा के साथ स्पष्ट रूप से याद रखें, क्योंकि यह सिद्धांतिक प्रश्न है।
प्रश्न 9. ओलजर, दत्त व रैवेलियन द्वारा गरीबी के अनुमानों के लिये किन मापकों का प्रयोग किया है?
Answer: ओलजर, दत्त व रैवेलियन द्वारा गरीबी के अनुमानों के लिए "गरीबी अन्तराल अनुपात" (Poverty Gap Ratio) तथा "वर्गीकृत गरीबी अन्तराल अनुपात" (Squared Poverty Gap Ratio) जैसे मापकों का प्रयोग किया गया है। ये मापक गरीबी की तीव्रता और उसके वितरण को समझने में मदद करते हैं।
In simple words: ओलजर, दत्त और रैवेलियन ने गरीबी को मापने के लिए "पॉवर्टी गैप रेशियो" और "स्क्वेयर्ड पॉवर्टी गैप रेशियो" का इस्तेमाल किया।
🎯 Exam Tip: इन विशेष मापकों के नामों को सही ढंग से याद रखें, क्योंकि ये विशिष्ट अर्थशास्त्रियों द्वारा दिए गए हैं।
प्रश्न 10. विश्व बैंक के अनुसार निर्धनता मापन क्या है?
Answer: विश्व बैंक के अनुसार, निर्धनता मापन प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 1.25 अमेरिकी डॉलर से कम उपभोग व्यय करने वाले व्यक्तियों को निर्धन माना जाता है। यह एक वैश्विक मापदंड है जिसका उपयोग विभिन्न देशों में गरीबी की तुलना करने के लिए किया जाता है।
In simple words: विश्व बैंक के हिसाब से, जो लोग हर दिन 1.25 डॉलर से कम खर्च करते हैं, वे गरीब हैं।
🎯 Exam Tip: विश्व बैंक का गरीबी मापदंड अंतर्राष्ट्रीय तुलनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए अमेरिकी डॉलर की राशि को याद रखना चाहिए।
प्रश्न 12. सापेक्ष निर्धनता किसे कहते हैं?
Answer: सापेक्ष निर्धनता का अर्थ है जब किसी व्यक्ति या समूह की आय और जीवन स्तर, अपने समाज या अन्य देशों के औसत आय और जीवन स्तर से कम हो। यह तुलनात्मक होती है और आय वितरण की असमानता को दर्शाती है।
In simple words: सापेक्ष निर्धनता का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति अपने आसपास के लोगों या अन्य देशों से कम कमाता है और कम अच्छा जीवन जीता है।
🎯 Exam Tip: सापेक्ष निर्धनता की परिभाषा में "तुलना" और "आय वितरण" जैसे शब्दों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 13. निरपेक्ष निर्धनता किसे कहते हैं?
Answer: निरपेक्ष निर्धनता वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति की आय न्यूनतम जीवन स्तर की जरूरतों (जैसे भोजन, कपड़े, आवास) को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं होती। यह गरीबी का एक मूलभूत माप है जो किसी देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखकर किया जाता है।
In simple words: निरपेक्ष निर्धनता तब होती है जब कोई व्यक्ति इतना गरीब होता है कि वह अपनी सबसे जरूरी चीजों के लिए भी पैसे नहीं कमा पाता।
🎯 Exam Tip: निरपेक्ष निर्धनता को "न्यूनतम आवश्यकताएँ" और "मौलिक जीवन स्तर" से जोड़कर परिभाषित करें।
प्रश्न 14. विकसित देशों में गरीबी मापन के लिये किस अवधारणा का प्रयोग किया जाता है?
Answer: विकसित देशों में गरीबी मापन के लिए सापेक्ष गरीबी अवधारणा का प्रयोग किया जाता है। इन देशों में मूलभूत आवश्यकताएँ आमतौर पर पूरी हो जाती हैं, इसलिए गरीबी को आय असमानता और सामाजिक बहिष्कार के संदर्भ में देखा जाता है।
In simple words: अमीर देशों में, गरीबी मापने के लिए देखा जाता है कि लोग दूसरों के मुकाबले कितने गरीब हैं, इसे सापेक्ष गरीबी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि विकसित देशों में मूलभूत जरूरतें आमतौर पर पूरी होती हैं, इसलिए उनका ध्यान सापेक्ष निर्धनता पर होता है।
प्रश्न 15. भारत में निर्धनता के आरम्भिक अनुमान किन-किन अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तुत किये गए?
Answer: भारत में निर्धनता के आरम्भिक अनुमान बी. एस. मिन्हास, वी. एम. दाण्डेकर, ए. के. रथ, पी. के. वर्धन और एम. एस. आहलूवालिया जैसे अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तुत किए गए थे। इन सभी के अनुमानों में गरीबी की अलग-अलग परिभाषाओं के कारण कुछ भिन्नता थी।
In simple words: भारत में सबसे पहले गरीबी का अनुमान लगाने वाले अर्थशास्त्री बी. एस. मिन्हास, वी. एम. दाण्डेकर, ए. के. रथ, पी. के. वर्धन और एम. एस. आहलूवालिया थे।
🎯 Exam Tip: इन प्रमुख अर्थशास्त्रियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भारत में गरीबी के अध्ययन से संबंधित हैं।
प्रश्न 16. पी. के. वर्धन के अनुसार देश में वर्ष 1967-68 में कितने प्रतिशत आबादी निर्धन थी?
Answer: पी. के. वर्धन के अनुसार, वर्ष 1967-68 में देश की 54.0 प्रतिशत आबादी निर्धन थी। यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा था, जो उस समय देश में व्याप्त व्यापक गरीबी को दर्शाता है।
In simple words: पी. के. वर्धन के मुताबिक, साल 1967-68 में आधे से ज्यादा (54%) लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट अर्थशास्त्री द्वारा दिए गए आंकड़े और वर्ष को ध्यान से याद रखें।
प्रश्न 17. योजना आयोग के अनुसार वर्ष 1973-74 में ग्रामीण एवं शहरी निर्धनता अनुपात क्या था?
Answer: योजना आयोग के अनुसार, वर्ष 1973-74 में ग्रामीण निर्धनता अनुपात 56.4 प्रतिशत था, जबकि शहरी निर्धनता अनुपात 49.0 प्रतिशत था। यह दिखाता है कि उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का स्तर शहरी क्षेत्रों से अधिक था।
In simple words: 1973-74 में, योजना आयोग के अनुसार गाँवों में 56.4% और शहरों में 49.0% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी गरीबी के आंकड़ों की तुलनात्मक समझ रखें।
प्रश्न 19. वर्ष 1993-94 में तेन्दुलकर अनुमानों के अनुसार भारत में निर्धनता अनुपात क्या था?
Answer: वर्ष 1993-94 में तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार, भारत में कुल निर्धनता अनुपात 45.3 प्रतिशत था। यह आंकड़ा भारत में गरीबी के उच्च स्तर को दर्शाता है, जिसके बाद धीरे-धीरे सुधार हुआ।
In simple words: तेंदुलकर के अनुमानों के हिसाब से, 1993-94 में भारत में लगभग 45.3% लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर समिति के अनुमानों को अन्य समितियों के अनुमानों से अलग से याद रखें।
प्रश्न 20. तेन्दुलकर पद्धति के अनुसार वर्ष 2004-05 में ग्रामीण क्षेत्र में कितने रुपये प्रतिमाह प्रति व्यक्ति गरीबी रेखा के रूप में परिभाषित किया है?
Answer: तेंदुलकर पद्धति के अनुसार, वर्ष 2004-05 में ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति प्रतिमाह ₹446.8 को गरीबी रेखा के रूप में परिभाषित किया गया था। इसका मतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो व्यक्ति एक महीने में ₹446.8 से कम खर्च करता था, उसे गरीब माना जाता था।
In simple words: तेंदुलकर ने 2004-05 में गाँवों के लिए हर महीने ₹446.8 की गरीबी रेखा तय की थी।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर समिति के विभिन्न वर्षों के लिए ग्रामीण और शहरी गरीबी रेखा के मौद्रिक मूल्यों को याद रखें।
प्रश्न 21. तेन्दुलकर पद्धति के अनुमानों के आधार पर 2011-12 में देश में कुल कितने लोग निर्धन थे?
Answer: तेंदुलकर पद्धति के अनुमानों के आधार पर वर्ष 2011-12 में देश में कुल 269.3 मिलियन लोग निर्धन थे। यह आंकड़ा उस समय भारत में गरीबों की कुल संख्या को दर्शाता है।
In simple words: तेंदुलकर के अनुमान के अनुसार, 2011-12 में भारत में 26 करोड़ 93 लाख लोग गरीब थे।
🎯 Exam Tip: कुल संख्या (मिलियन में) और प्रतिशत दोनों को याद रखें, क्योंकि प्रश्न किसी भी प्रारूप में पूछा जा सकता है।
प्रश्न 22. विश्व बैंक द्वारा किस आधार पर अन्तर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण किया जाता है?
Answer: विश्व बैंक द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा का निर्धारण 10 निर्धनतम देशों के राष्ट्रीय गरीबी रेखा के औसत के आधार पर किया जाता है। इस मापदंड का उपयोग वैश्विक स्तर पर गरीबी की तुलना करने के लिए किया जाता है ताकि यह पता चल सके कि विभिन्न देशों में गरीबी का स्तर कितना समान या भिन्न है।
In simple words: विश्व बैंक दुनिया के सबसे गरीब 10 देशों की गरीबी रेखा के औसत का इस्तेमाल करके अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा बनाता है।
🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा का आधार और उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से याद रखें।
प्रश्न 23. 2004-05 से 2011-12 के मध्य ग्रामीण गरीबी में तीव्र कमी के लिये किसे उत्तरदायी माना जाता है?
Answer: 2004-05 से 2011-12 के मध्य ग्रामीण गरीबी में तीव्र कमी के लिए ग्राम विकास रणनीति को उत्तरदायी माना जाता है। इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न विकास कार्यक्रमों और नीतियों को लागू किया गया, जिससे आय और रोजगार के अवसर बढ़े।
In simple words: 2004-05 से 2011-12 के बीच गाँवों में गरीबी कम होने का मुख्य कारण ग्राम विकास की योजनाएँ थीं।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण गरीबी में कमी के लिए उत्तरदायी कारकों में सरकारी योजनाओं, कृषि विकास और रोजगार सृजन को शामिल करें।
प्रश्न 24. वर्ष 2004-05 से 2011-12 के मध्य कौन-कौन से उत्तरी पूर्वी राज्यों में निर्धनता अनुपात में वृद्धि हुई है?
Answer: वर्ष 2004-05 से 2011-12 के मध्य असम, मेघालय, मणिपुर और नागालैंड जैसे उत्तरी पूर्वी राज्यों में निर्धनता अनुपात में वृद्धि हुई थी। यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास असमान रहा और गरीबी कम करने के प्रयासों में कुछ चुनौतियाँ थीं।
In simple words: 2004-05 से 2011-12 के बीच असम, मेघालय, मणिपुर और नागालैंड जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में गरीबी बढ़ी।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों में गरीबी के रुझानों को याद रखें, खासकर उन राज्यों को जहाँ स्थिति विपरीत रही हो।
प्रश्न 26. रंगराजन समिति के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता रेखा क्या है?
Answer: रंगराजन समिति के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता रेखा प्रति व्यक्ति प्रतिमाह ₹972 निर्धारित की गई है। यह तेंदुलकर समिति द्वारा निर्धारित राशि से अधिक है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत को बेहतर ढंग से दर्शाती है।
In simple words: रंगराजन समिति ने गाँवों के लिए हर महीने ₹972 की गरीबी रेखा तय की है।
🎯 Exam Tip: रंगराजन समिति के आंकड़ों को तेंदुलकर समिति के आंकड़ों से अलग करके याद रखें।
प्रश्न 27. भारत में निर्धनता के लिये उत्तरदायी दो कारण बताइये।
Answer: भारत में निर्धनता के लिए उत्तरदायी दो मुख्य कारण हैं: 1. तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और प्रति व्यक्ति आय कम होती है। 2. अशिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान का अभाव, जिसके कारण लोगों को बेहतर रोजगार नहीं मिल पाता।
In simple words: भारत में गरीबी के दो बड़े कारण हैं - बहुत ज्यादा जनसंख्या और लोगों में पढ़ाई व तकनीकी ज्ञान की कमी।
🎯 Exam Tip: निर्धनता के कारणों को याद करते समय, हमेशा सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय कारकों पर ध्यान दें।
प्रश्न 28. आई आर डी पी (IRDP) का पूरा नाम लिखिए।
Answer: आई आर डी पी (IRDP) का पूरा नाम एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (Integrated Rural Development Programme) है। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिए शुरू किया गया था।
In simple words: IRDP का पूरा नाम इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम है, जिसका मतलब है एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सरकारी योजनाओं के संक्षिप्त और पूर्ण नाम दोनों को याद रखें।
प्रश्न 29. ग्रामीण युवकों के लिये स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम (TRYSEM) किस वर्ष लागू किया गया?
Answer: ग्रामीण युवकों के लिये स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम (TRYSEM) वर्ष 1979 में लागू किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित करके उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद करना था।
In simple words: TRYSEM कार्यक्रम, जो ग्रामीण युवाओं को अपना काम शुरू करने के लिए ट्रेनिंग देता है, 1979 में शुरू हुआ था।
🎯 Exam Tip: योजनाओं के उद्देश्य और उनके शुरू होने के वर्ष को याद रखें।
प्रश्न 30. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) का क्या उद्देश्य था?
Answer: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार का सृजन करना था। इसका लक्ष्य ग्रामीण गरीबों को काम के अवसर प्रदान करके उनकी आय बढ़ाना और उनकी जीवनशैली में सुधार लाना था।
In simple words: NREP का लक्ष्य गाँवों में लोगों को मजदूरी पर काम देना था ताकि वे पैसे कमा सकें।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम जैसे बड़े सरकारी कार्यक्रमों के मुख्य उद्देश्य पर ध्यान दें।
प्रश्न 31. ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (RLEGP) कब आरम्भ किया गया?
Answer: ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (RLEGP) वर्ष 1983 में आरम्भ किया गया था। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन मजदूरों को रोजगार की गारंटी देना था ताकि उन्हें न्यूनतम आय मिल सके।
In simple words: RLEGP, जो गाँवों के भूमिहीन मजदूरों को काम की गारंटी देता है, 1983 में शुरू किया गया था।
🎯 Exam Tip: विभिन्न रोजगार गारंटी योजनाओं के विशिष्ट नाम और उनके शुरू होने के वर्ष याद रखें।
प्रश्न 33. रोजगार आश्वासन योजना (Employment Assurance Scheme) कब प्रारम्भ की गई?
Answer: रोजगार आश्वासन योजना (EAS) वर्ष 1993 ई. में प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को मजदूरी रोजगार के अवसर प्रदान करना था, खासकर सूखाग्रस्त और पिछड़े क्षेत्रों में।
In simple words: रोजगार आश्वासन योजना (EAS) 1993 में शुरू की गई थी, ताकि गाँवों में गरीबों को काम मिल सके।
🎯 Exam Tip: योजनाओं के नाम और उनके शुरू होने की तारीखों को सटीक रूप से याद करें।
प्रश्न 34. सूखाग्रस्त, रेगिस्तानी, जनजातीय व पहाड़ी क्षेत्र में मजदूरी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु कौन-सा कार्यक्रम आरम्भ किया गया था?
Answer: सूखाग्रस्त, रेगिस्तानी, जनजातीय व पहाड़ी क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु रोजगार आश्वासन योजना (EAS) आरम्भ की गई थी। इस योजना का लक्ष्य इन विशेष और कमजोर क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा प्रदान करना था।
In simple words: सूखे, रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों में काम दिलाने के लिए रोजगार आश्वासन योजना (EAS) शुरू की गई थी।
🎯 Exam Tip: विशिष्ट क्षेत्रों के लिए बनाई गई योजनाओं के नाम और उनके मुख्य उद्देश्य याद रखें।
प्रश्न 35. वर्ष 1993 में शिक्षित युवकों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु कौन-सी योजना प्रारम्भ की गयी?
Answer: वर्ष 1993 में शिक्षित युवकों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमन्त्री रोजगार योजना (PMRY) प्रारम्भ की गयी थी। इस योजना का उद्देश्य शिक्षित बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करना था।
In simple words: 1993 में पढ़े-लिखे युवाओं को अपना काम शुरू करने में मदद करने के लिए प्रधानमन्त्री रोजगार योजना (PMRY) शुरू की गई थी।
🎯 Exam Tip: प्रधानमन्त्री रोजगार योजना (PMRY) का लक्ष्य समूह (शिक्षित युवा) और वर्ष (1993) याद रखें।
प्रश्न 36. वर्ष 1997-98 भूतल जल एवं भूमिगत जल की निकासी एवं रखरखाव हेतु कृषकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिये कौन सी योजना प्रारम्भ की गई?
Answer: वर्ष 1997-98 में भूतल जल एवं भूमिगत जल की निकासी एवं रखरखाव हेतु कृषकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए गंगा कल्याण योजना (GKY) प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद करना था।
In simple words: किसानों को जमीन और जमीन के नीचे के पानी को ठीक से इस्तेमाल करने में मदद के लिए 1997-98 में गंगा कल्याण योजना (GKY) शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: कृषि और जल संसाधनों से संबंधित योजनाओं के नाम और उनके उद्देश्यों को याद रखें।
प्रश्न 37. निर्धन वर्ग के सर्वाधिक निर्धनों हेत अन्त्योदय योजना को कब प्रारम्भ किया गया?
Answer: निर्धन वर्ग के सर्वाधिक निर्धनों के लिए अन्त्योदय योजना को वर्ष 2000 में प्रारम्भ किया गया था। इस योजना का उद्देश्य सबसे गरीब परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना था।
In simple words: सबसे गरीब लोगों की मदद के लिए अन्त्योदय योजना साल 2000 में शुरू की गई थी।
🎯 Exam Tip: अन्त्योदय योजना का लक्ष्य समूह (सर्वाधिक निर्धन) और शुरू होने का वर्ष याद रखें।
प्रश्न 38. निर्धनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम कब प्रारम्भ किया गया?
Answer: निर्धनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम 15 अगस्त, 1995 को प्रारम्भ किया गया था। इस कार्यक्रम में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, और विकलांग पेंशन जैसे घटक शामिल थे।
In simple words: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, जो गरीबों को मदद देता है, 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ था।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत की तारीख और उसके मुख्य घटकों को याद रखें।
प्रश्न 40. कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम (CADP) कब लागू किया गया?
Answer: कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम (CADP) सन् 1975 में लागू किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना और कृषि उत्पादन में सुधार करना था।
In simple words: कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रम (CADP), जो सिंचाई वाले खेतों के लिए था, 1975 में लागू हुआ था।
🎯 Exam Tip: कृषि विकास से संबंधित योजनाओं के नाम और उनके शुरू होने के वर्ष पर ध्यान दें।
प्रश्न 41. जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) कब लागू की गई?
Answer: जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) अप्रैल, 1999 में लागू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण करना और ग्रामीण गरीबों को रोजगार के अवसर प्रदान करना था।
In simple words: जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) अप्रैल 1999 में शुरू हुई थी, ताकि गाँवों में काम और संपत्ति बन सकें।
🎯 Exam Tip: जवाहर ग्राम समृद्धि योजना के शुरू होने का महीना और वर्ष याद रखें।
प्रश्न 42. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत केन्द्र व राज्यों के बीच लागत विभाजन अनुपात क्या था?
Answer: स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत केन्द्र व राज्यों के बीच लागत विभाजन अनुपात 75:25 था। इसका मतलब है कि योजना के खर्च का 75% केंद्र सरकार वहन करती थी और 25% राज्य सरकारें।
In simple words: स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना का खर्च केंद्र सरकार 75% और राज्य सरकारें 25% उठाती थीं।
🎯 Exam Tip: केंद्र और राज्य के बीच लागत-साझाकरण अनुपात को याद रखें, खासकर जब यह योजना के नाम से जुड़ा हो।
प्रश्न 43. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना कब प्रारम्भ की गई?
Answer: राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना वर्ष 2004 में प्रारम्भ की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मजदूरी के रूप में अनाज प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना था, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ खाद्य सुरक्षा एक बड़ी समस्या थी।
In simple words: राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना, जहाँ काम के बदले अनाज मिलता था, 2004 में शुरू हुई थी।
🎯 Exam Tip: यह योजना मजदूरी के भुगतान के रूप में अनाज के प्रावधान के लिए जानी जाती है, इस विशेषता को याद रखें।
प्रश्न 44. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम कब पारित किया गया?
Answer: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अधिनियम सितम्बर, 2005 में पारित किया गया था। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई, जिसे बाद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम से जाना गया।
In simple words: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून सितंबर 2005 में बना था।
🎯 Exam Tip: मनरेगा के पूर्ववर्ती अधिनियम के नाम और उसके पारित होने की तारीख को याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 45. निर्धनता दूर करने के कोई दो उपाय बताइये।
Answer: निर्धनता दूर करने के दो मुख्य उपाय हैं: (1) आर्थिक विकास की गति को तेज करना, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें और आय में वृद्धि हो। (2) जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, जिससे संसाधनों पर दबाव कम हो और प्रति व्यक्ति आय में सुधार हो।
In simple words: गरीबी दूर करने के दो तरीके हैं - देश की तरक्की तेज करना और जनसंख्या को कंट्रोल करना।
🎯 Exam Tip: निर्धनता उन्मूलन के उपायों में हमेशा आर्थिक, सामाजिक और जनसांख्यिकीय पहलुओं को शामिल करें।
प्रश्न 1. निर्धनता से क्या तात्पर्य है?
Answer: निर्धनता वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं, जैसे पर्याप्त भोजन, आवास, कपड़े, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने में असमर्थ होता है। यह आय की कमी के कारण उत्पन्न होती है।
In simple words: निर्धनता का मतलब है जब कोई व्यक्ति अपनी सबसे जरूरी चीजों, जैसे खाना और घर, का इंतजाम भी नहीं कर पाता।
🎯 Exam Tip: निर्धनता की परिभाषा में मूलभूत आवश्यकताओं की कमी को स्पष्ट रूप से उजागर करें।
प्रश्न 2. निर्धनता रेखा किसे कहते हैं?
Answer: निर्धनता रेखा एक निश्चित आय या उपभोग स्तर है जिसे यह मानने के लिए निर्धारित किया जाता है कि इस स्तर से कम आय वाले व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। इस रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को गरीब माना जाता है।
In simple words: निर्धनता रेखा एक तय सीमा है; जो लोग इससे कम कमाते हैं, उन्हें गरीब कहते हैं क्योंकि वे अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं कर पाते।
🎯 Exam Tip: निर्धनता रेखा को "निश्चित आय/उपभोग स्तर" के रूप में परिभाषित करें, जिसके नीचे व्यक्ति गरीब माना जाता है।
प्रश्न 3. भारत में निर्धनता को न्यूनतम कैलोरी मापदण्ड के अनुसार किस प्रकार परिभाषित किया है?
Answer: भारत में निर्धनता को न्यूनतम कैलोरी मापदण्ड के अनुसार परिभाषित किया गया है, जहाँ योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्र में 2100 कैलोरी प्रतिदिन से कम उपभोग करने वालों को गरीब माना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लोगों को पर्याप्त पोषण मिले।
In simple words: भारत में गरीबी को खाने की कैलोरी के आधार पर मापा जाता है; गाँव में 2400 और शहर में 2100 कैलोरी से कम खाने वाले गरीब माने जाते हैं।
🎯 Exam Tip: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए कैलोरी मापदंडों को सही आंकड़ों के साथ याद रखें।
प्रश्न 4. कैलोरी आधारित तरीका निर्धनता की पहचान के लिये क्यों उपयुक्त नहीं है?
Answer: कैलोरी आधारित तरीका निर्धनता की पहचान के लिए हमेशा उपयुक्त नहीं है, क्योंकि यह केवल भोजन की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करता है और बीमारी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भूख जैसे कई अन्य सामाजिक और आर्थिक कारकों को अनदेखा कर देता है। गरीबी सिर्फ कैलोरी की कमी नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता की कमी भी है।
In simple words: सिर्फ कैलोरी देखकर गरीबी नहीं मापी जा सकती, क्योंकि गरीबी के और भी कई कारण होते हैं जैसे बीमारी, अशिक्षा और बेरोजगारी।
🎯 Exam Tip: कैलोरी मापदंड की सीमाओं को स्पष्ट रूप से बताएं और गरीबी के बहुआयामी स्वरूप पर जोर दें।
प्रश्न 5. निर्धनता अनुपात क्या है? स्पष्ट कीजिये।
Answer: निर्धनता अनुपात, जिसे हेडकाउंट रेशियो भी कहा जाता है, निर्धन लोगों की संख्या का कुल जनसंख्या के साथ अनुपात है। इसे 100 से गुणा करने पर यह प्रतिशत में ज्ञात होता है कि जनसंख्या का कितना प्रतिशत हिस्सा निर्धन है। यह सरकार को गरीबी उन्मूलन नीतियां बनाने में मदद करता है।
In simple words: निर्धनता अनुपात यह बताता है कि कुल आबादी में से कितने प्रतिशत लोग गरीब हैं।
🎯 Exam Tip: निर्धनता अनुपात की परिभाषा में "गरीबों की संख्या" और "कुल जनसंख्या" के अनुपात को स्पष्ट रूप से शामिल करें।
प्रश्न 7. निर्धनता का क्षमता माप (Capability Measurement of Poverty) के अनुसार निर्धनता की परिभाषा में कौन-कौन से मानकों को समाहित किया गया है?
Answer: निर्धनता के क्षमता माप (Capability Measurement of Poverty) के अनुसार गरीबी मापन के लिए तीन सूचकों का प्रयोग किया जाता है। इनमें पाँच वर्ष से कम उम्र के कम वजन वाले बच्चों का अनुपात, अकुशल प्रसव अनुपात और महिला निरक्षरता अनुपात शामिल हैं। ये मानक जीवन की मूलभूत क्षमताओं की कमी को दर्शाते हैं।
In simple words: क्षमता माप के हिसाब से गरीबी मापने के लिए तीन चीजें देखी जाती हैं: छोटे बच्चों का वजन, अकुशल जन्म और महिलाओं की निरक्षरता।
🎯 Exam Tip: क्षमता माप के तीनों सूचकों (बच्चों का वजन, प्रसव, महिला निरक्षरता) को सटीक रूप से याद करें।
प्रश्न 8. निरपेक्ष निर्धनता से क्या तात्पर्य है?
Answer: निरपेक्ष निर्धनता से तात्पर्य किसी एक देश की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए गरीबी मापन से है। इसका अनुमान प्रति व्यक्ति उपभोग की जाने वाली न्यूनतम कैलोरी की मात्रा या न्यूनतम उपभोग स्तर द्वारा लगाया जाता है। भारत में "न्यूनतम कैलोरी उपभोग" से जुड़ी निर्धनता की परिभाषा निरपेक्ष मापन का उदाहरण है।
In simple words: निरपेक्ष निर्धनता का मतलब है जब किसी व्यक्ति की आय इतनी कम हो कि वह अपनी सबसे जरूरी चीजों के लिए भी पैसे नहीं कमा पाए।
🎯 Exam Tip: निरपेक्ष निर्धनता को परिभाषित करते समय "न्यूनतम उपभोग स्तर" या "बुनियादी आवश्यकताओं" की कमी पर जोर दें।
प्रश्न 9. रंगराजन समिति को निर्धनता के सम्बन्ध में दिये गए कार्यों को बताइये।
Answer: रंगराजन समिति को निर्धनता के संबंध में निम्नलिखित कार्य सौंपे गए थे: 1. देश में निर्धनता रेखा को तय करना और निर्धनता के अनुमान लगाना। 2. राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी और राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन द्वारा उपभोग आकलनों में भिन्नता का परीक्षण करना।
In simple words: रंगराजन समिति का काम था कि देश में गरीबी रेखा तय करे और गरीबी का अनुमान लगाए, साथ ही उपभोग के आंकड़ों की जांच भी करे।
🎯 Exam Tip: रंगराजन समिति के मुख्य कार्यों को याद रखें, विशेषकर निर्धनता रेखा के निर्धारण और सांख्यिकी परीक्षण से संबंधित।
प्रश्न 10. भारत सरकार द्वारा 2015 में गठित टास्क फोर्स का क्या उद्देश्य था?
Answer: भारत सरकार द्वारा 2015 में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अरविन्द पनगढ़िया की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स का उद्देश्य निर्धनता आकलन के लिए तरीका सुझाना और उसके अनुरूप निर्धनता निवारण कार्यक्रम सुझाना था। इसका लक्ष्य भारत में गरीबी को प्रभावी ढंग से मापने और उसे कम करने के लिए नई रणनीतियाँ तैयार करना था।
In simple words: 2015 में अरविन्द पनगढ़िया की अध्यक्षता में बनी टास्क फोर्स का मकसद गरीबी मापने और इसे खत्म करने के लिए नए तरीके बताना था।
🎯 Exam Tip: टास्क फोर्स के अध्यक्ष और उसके दो मुख्य उद्देश्यों (आकलन और कार्यक्रम) को याद रखें।
प्रश्न 12. देश में 1970 के दशक में निर्धनता की समस्या की व्यापकता को देखते हुए कौन-कौन से कार्यक्रम अपनाये गए?
Answer: देश में 1970 के दशक में निर्धनता की समस्या की व्यापकता को देखते हुए, सीमान्त किसान व खेतिहर मजदूर विकास एजेंसी, लघु किसान विकास एजेंसी, ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, आरंभिक गहन ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम और काम के बदले अनाज योजना जैसे कार्यक्रम अपनाए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ग्रामीण गरीबी को कम करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना था।
In simple words: 1970 के दशक में गरीबी कम करने के लिए, छोटे किसानों और मजदूरों की मदद के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए गए, जैसे काम के बदले अनाज योजना।
🎯 Exam Tip: 1970 के दशक में लागू किए गए प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के नाम याद रखें।
प्रश्न 13. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम क्या है?
Answer: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (National Rural Employment Programme-NREP) 1980 में आरम्भ किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार सृजित करना था ताकि ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। इस कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक कार्यों का निर्माण किया जाता था।
In simple words: राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम 1980 में शुरू हुआ था, इसका मकसद गाँवों में लोगों को मजदूरी पर काम देना था।
🎯 Exam Tip: NREP का पूरा नाम, शुरू होने का वर्ष और मुख्य उद्देश्य (मजदूरी रोजगार सृजन) याद रखें।
प्रश्न 14. निर्धनता निवारण हेतु पिछड़े क्षेत्रों व प्राकृतिक हानियों से बचाने हेतु चलाये गए सूखा प्रवण क्षेत्र विकास कार्यक्रम एवं मरूक्षेत्र विकास कार्यक्रम में क्या-क्या कार्य किये गए?
Answer: निर्धनता निवारण हेतु पिछड़े क्षेत्रों व प्राकृतिक हानियों से बचाने के लिए सूखा प्रवण क्षेत्र विकास कार्यक्रम (DPAP) 1973 में लागू किया गया, जिसमें कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना, पशुपालन, जल संरक्षण, वन रोपण व चारागाह विकास के कार्य शामिल थे। मरूक्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत मरुक्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन, उत्पादक रोजगार, आय वृद्धि, मरुस्थल के फैलाव को रोकने व भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के कार्यक्रम सम्पन्न किए गए।
In simple words: सूखे और मरुस्थल वाले इलाकों में गरीबी कम करने के लिए ऐसे कार्यक्रम चलाए गए, जिनमें पानी बचाने, पेड़ लगाने और खेती-बाड़ी सुधारने का काम किया गया।
🎯 Exam Tip: दोनों कार्यक्रमों के नाम, शुरू होने का वर्ष और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखें।
प्रश्न 15. निर्धनता उन्मूलन के किन्हीं पांच प्रमुख कार्यक्रमों के नाम बताइये।
Answer: निर्धनता उन्मूलन के पांच प्रमुख कार्यक्रम हैं: 1. एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP), 2. प्रधानमन्त्री रोजगार योजना (PMRY), 3. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (NREP), 4. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (SJGSY), और 5. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)। ये सभी कार्यक्रम विभिन्न तरीकों से गरीबी को कम करने का प्रयास करते हैं।
In simple words: गरीबी हटाने के लिए कुछ मुख्य कार्यक्रम हैं: IRDP, PMRY, NREP, SJGSY और मनरेगा।
🎯 Exam Tip: प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के नाम याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे पूछे जाते हैं।
प्रश्न 16. “जवाहर ग्राम समृद्धि योजना” (JGSY) क्या है?
Answer: जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) अप्रैल 1999 में लागू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ उत्पादक सामुदायिक संपत्ति का निर्माण करना और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर प्रदान करना था। इसकी लागत केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में विभाजित थी।
In simple words: जवाहर ग्राम समृद्धि योजना 1999 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद गाँवों में सामुदायिक संपत्ति बनाना और लोगों को काम देना था, जिसका खर्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाते थे।
🎯 Exam Tip: JGSY के शुरू होने का वर्ष, उद्देश्य और लागत विभाजन अनुपात को याद रखें।
प्रश्न 17. प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का क्या उद्देश्य था?
Answer: प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य 10वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक 500 या उससे अधिक आबादी वाले सभी गाँवों को पक्की सड़क से जोड़ना था। इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा मजबूत हुआ और कनेक्टिविटी बढ़ी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
In simple words: प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का मकसद बड़े गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ना था ताकि यातायात आसान हो।
🎯 Exam Tip: प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का मुख्य उद्देश्य (गाँवों को सड़क से जोड़ना) और उसका प्रभाव याद रखें।
प्रश्न 18. भारत में निर्धनता निवारण के कोई पाँच बिन्दु बताइये।
Answer: भारत में निर्धनता निवारण के पाँच मुख्य बिन्दु हैं: 1. जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण, 2. स्वरोजगार को बढ़ावा देना, 3. कृषि विकास पर बल देना, 4. सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार, और 5. औद्योगिक विकास पर बल देना। इन उपायों से दीर्घकालिक रूप से गरीबी कम की जा सकती है।
In simple words: भारत में गरीबी हटाने के लिए जनसंख्या कंट्रोल करना, लोगों को अपना काम शुरू करने में मदद करना, खेती और उद्योगों को बढ़ाना, और राशन व्यवस्था सुधारना जरूरी है।
🎯 Exam Tip: निर्धनता निवारण के बिन्दुओं को याद करते समय, उन्हें विभिन्न आर्थिक और सामाजिक पहलुओं से जोड़ें।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA-II)
प्रश्न 1. ग्रामीण तथा शहरी परिवारों के लिये कैलोरी मानदण्ड किस प्रकार निर्धारित किया जाता है?
Answer: ग्रामीण और शहरी परिवारों के लिए कैलोरी मानदण्ड उनकी कार्यप्रणाली और कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। रहने का स्थान, आयु और लिंग भी इसे प्रभावित करते हैं। योजना आयोग ने ग्रामीण क्षेत्र में 2400 कैलोरी और शहरी क्षेत्र में 2100 कैलोरी उपभोग से कम उपभोग प्राप्त करने वालों को गरीब माना है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक शारीरिक श्रम के कारण अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।
In simple words: ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए कैलोरी की जरूरत अलग-अलग होती है, क्योंकि उनका काम और जीवनशैली अलग होती है। गाँवों में ज्यादा मेहनत होती है, इसलिए उन्हें ज्यादा कैलोरी की जरूरत होती है।
🎯 Exam Tip: कैलोरी मानदण्ड निर्धारित करने वाले विभिन्न कारकों (कार्यप्रणाली, स्थान, आयु, लिंग) और ग्रामीण-शहरी अंतर को स्पष्ट रूप से बताएं।
प्रश्न 3. भारत में निर्धनता रेखा निश्चित करने वाली कार्य विधि समझाइए।
Answer: भारत में निर्धनता रेखा निश्चित करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है: 1. उपभोग सीमा को अनुमानित करते समय केवल निजी उपभोग व्यय को ध्यान में रखा जाता है, सार्वजनिक व्यय को नहीं। 2. खाद्य पदार्थों के उपभोग हेतु कैलोरी प्रति व्यक्ति उपभोग का अनुमान लगाया जाता है। 3. गैर-खाद्य पदार्थ मदों (जैसे कपड़े, जूते) के उपभोग पर भी ध्यान दिया जाता है। 4. विभिन्न उपभोग वर्गों में लोगों की संख्या को रिकॉर्ड किया जाता है। 5. जनगणना के आधार पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्धन और गैर-निर्धन जनसंख्या को अलग-अलग प्रदर्शित किया जाता है।
In simple words: भारत में गरीबी रेखा तय करने के लिए लोग कितना खर्च करते हैं (खाने और दूसरी चीजों पर), कितनी कैलोरी खाते हैं, और कितने लोग गरीब हैं, ये सब देखा जाता है।
🎯 Exam Tip: निर्धनता रेखा निर्धारण की कार्यविधि के सभी प्रमुख बिन्दुओं को याद रखें, विशेषकर निजी उपभोग और कैलोरी मानदण्ड।
प्रश्न 4. भारत में निर्धनता के आरम्भिक अनुमानों में विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने किन-किन तथ्यों को प्रस्तुत किया?
Answer: भारत में निर्धनता के आरम्भिक अनुमानों में वी. एस. मिन्हास, वी. एम. दाण्डेकर, एन. के. रथ, पी. के. वर्धन और एम. एस. आहलूवालिया ने कुछ मुख्य तथ्य प्रस्तुत किए। इन्होंने बताया कि 1960 के दशक में देश में निर्धनता अनुपात काफी ऊँचा था। इन अर्थशास्त्रियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनों की संख्या अधिक थी, जिसमें सीमान्त व छोटे किसान और खेतिहार मजदूर प्रमुख रूप से शामिल थे। शहरी गरीबी को ग्रामीण गरीबी का उत्प्रवाह (outflow) माना गया, क्योंकि ग्रामीण लोग रोजगार की तलाश में शहरों में आते थे।
In simple words: भारत में गरीबी के शुरुआती अनुमानों में अर्थशास्त्रियों ने बताया कि 1960 के दशक में बहुत गरीबी थी, खासकर गाँवों में किसानों और मजदूरों के बीच। उन्होंने कहा कि शहर की गरीबी गाँवों से आती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अर्थशास्त्रियों के योगदान और उनके द्वारा प्रस्तुत प्रमुख तथ्यों को याद रखें, खासकर ग्रामीण-शहरी गरीबी के संदर्भ में।
प्रश्न 5. भारत में तेन्दुलकर पद्धति से राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण संगठन के परिवार व्यय संमकों के आधार गरीबी अनुमानों को तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिये।
Answer: तेंदुलकर पद्धति ने राष्ट्रीय सेम्पल सर्वेक्षण संगठन के परिवार व्यय समंकों के आधार पर गरीबी अनुमान प्रस्तुत किए। इसके अनुसार, 1973-74 में निर्धनता प्रतिशत 55 था जो 2004-05 में घटकर 218% रह गया। कार्यक्रम की सफलता से निर्धन वर्ग के आय स्तर में इजाफा हुआ जिससे उनका पोषण स्तर भी सुधरा। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद वांछित परिणामों में आशातीत वृद्धि नहीं हुई, और इसकी विफलता के कई कारण भी थे।
In simple words: तेंदुलकर पद्धति ने बताया कि 1973-74 में 55% लोग गरीब थे, जो 2004-05 में 218% कम हो गए। इससे गरीबों की आय और पोषण सुधरा, लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिली।
🎯 Exam Tip: तेंदुलकर पद्धति के गरीबी अनुमानों में प्रतिशत में कमी और उसके प्रभावों को याद रखें।
प्रश्न 6. भारत में तेन्दुलकर अनुमानों के अनुसार वर्ष 2011-12 में प्रमुख राज्यों में निर्धनता को तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: तेंदुलकर अनुमानों के अनुसार वर्ष 2011-12 में भारत के प्रमुख राज्यों में गरीबी की दरें (प्रतिशत में) इस प्रकार थीं:
| राज्य | ग्रामीण | शहरी | संयुक्त |
|---|---|---|---|
| बिहार | 34.06 | 31.23 | 33.74 |
| छत्तीसगढ़ | 44.61 | 24.75 | 39.93 |
| झारखण्ड | 40.84 | 24.83 | 36.96 |
| मध्य प्रदेश | 35.74 | 21.00 | 31.65 |
| उत्तर प्रदेश | 30.40 | 26.06 | 29.43 |
| उड़ीसा | 35.69 | 17.29 | 32.59 |
इस तालिका से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा गरीबी थी, और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की तुलना में आमतौर पर अधिक था।
In simple words: साल 2011-12 में तेंदुलकर के अनुमानों के हिसाब से, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड जैसे राज्यों में बहुत गरीबी थी, और गाँवों में शहरों से ज्यादा गरीब लोग थे।
🎯 Exam Tip: राज्यों के नाम, उनके ग्रामीण, शहरी और संयुक्त गरीबी प्रतिशत को तालिका के रूप में प्रस्तुत करें ताकि जानकारी स्पष्ट हो।
प्रश्न 7. क्या निर्धनता और बेरोजगारी के बीच कोई सम्बन्ध है? समझाइए।
Answer: हाँ, निर्धनता और बेरोजगारी के बीच गहरा संबंध है। बेरोजगारी या अल्प रोजगार (जब पर्याप्त काम न मिले) सीधे तौर पर निर्धनता का कारण बनता है। जब लोगों के पास काम नहीं होता या कम पैसे वाला काम होता है, तो वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आय नहीं कमा पाते। शहरी क्षेत्रों में कई गरीब लोग बेरोजगार या अनियमित मजदूर होते हैं, जिनके पास रोजगार सुरक्षा नहीं होती। इसीलिए सरकार ने अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार प्रधान कार्यक्रम चलाए, जैसे "काम के बदले अनाज" और मनरेगा, ताकि उन्हें काम और आय मिल सके।
In simple words: हाँ, गरीबी और बेरोजगारी आपस में जुड़े हैं। जब लोगों को काम नहीं मिलता या कम काम मिलता है, तो वे गरीब रह जाते हैं। सरकार भी इसी वजह से काम दिलाने वाली योजनाएँ चलाती है।
🎯 Exam Tip: निर्धनता और बेरोजगारी के संबंध को समझाते समय, रोजगार सुरक्षा की कमी और सरकारी रोजगार योजनाओं के संदर्भ में व्याख्या करें।
प्रश्न 8. आय के असमान वितरण के सन्दर्भ में निर्धनता का संक्षिप्त वर्णन करें।
Answer: भारत में आय के असमान वितरण को निर्धनता की व्यापकता का एक प्रमुख कारण माना जाता है। देश में प्रगतिशील कर प्रणाली और अन्य उपायों के बावजूद, आय और धन की असमानता बढ़ती जा रही है। इसका मतलब है कि धन कुछ ही लोगों के हाथों में सिमट रहा है, जबकि बड़ी आबादी के पास पर्याप्त आय नहीं है। मानव विकास सूचकांक 2007-08 के अनुसार, 20% धनी लोगों का आय या व्यय में 453% योगदान था, जो इस असमानता को दर्शाता है।
In simple words: भारत में गरीबी का एक बड़ा कारण यह है कि पैसा कुछ ही लोगों के पास ज्यादा है और बाकी लोगों के पास बहुत कम। यह आय का असमान बंटवारा गरीबी को बढ़ाता है।
🎯 Exam Tip: आय के असमान वितरण को परिभाषित करते समय "कुछ लोगों के पास अधिक धन" और "बहुसंख्यक आबादी के पास कम आय" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें।
प्रश्न 10. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Answer: स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना अप्रैल 1999 में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धनता निवारण के लिए शुरू की गई थी। इस योजना में पहले से चल रहे सभी स्वरोजगार कार्यक्रमों को शामिल किया गया, जैसे समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम और ग्रामीण युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्यम स्थापित करना था, जहाँ व्यक्तिगत और सामूहिक समूहों को कम ब्याज दरों पर बैंक ऋण और आर्थिक सहायता दी जाती थी। योजना का खर्च केंद्र (75%) और राज्य (25%) सरकारें वहन करती थीं।
In simple words: स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना 1999 में शुरू हुई थी, जिसमें गरीबों को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे और ट्रेनिंग मिलती थी।
🎯 Exam Tip: योजना के शुरू होने का वर्ष, मुख्य उद्देश्य (स्वरोजगार), और लागत विभाजन अनुपात को याद रखें।
प्रश्न 11. सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 1 सितंबर 2001 को ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दूर करने के लिए शुरू की गई थी। इसके मुख्य उद्देश्य थे: 1. अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना। 2. मूलभूत आवश्यकताओं के विकास पर बल देना, जिसके तहत 100 करोड़ मानव दिवसों का निर्माण करना था। 3. क्षेत्रीय आर्थिक तथा सामाजिक दशाओं में सुधार लाना। इस योजना की लागत केंद्र (87.5%) और राज्य (12.5%) सरकारों द्वारा वहन की जाती थी।
In simple words: सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना 2001 में शुरू हुई थी। इसका मकसद गाँवों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देना, गाँव का विकास करना और गरीबों की हालत सुधारना था।
🎯 Exam Tip: योजना के शुरू होने की तारीख, तीनों मुख्य उद्देश्यों और लागत विभाजन अनुपात को याद रखें।
Question 13. “राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना” को समझाइये।
Answer: भारत में "काम के बदले अनाज" योजना 150 सबसे पिछड़े जिलों में शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना था। यह कार्यक्रम उन सभी गरीब ग्रामीण लोगों के लिए था जो शारीरिक श्रम करके मजदूरी का काम करना चाहते थे। इस योजना में जल संरक्षण, सूखे से बचाव और भूमि विकास जैसे कार्यक्रम शामिल थे। मजदूरों को मजदूरी नकद राशि और अनाज दोनों के रूप में दी जाती थी। यह योजना वर्ष 2004 में शुरू की गई थी। अनाज देने से लोगों को पोषण भी मिलता है, जो सिर्फ पैसे से अधिक उपयोगी हो सकता है।
In simple words: "काम के बदले अनाज" योजना 2004 में पिछड़े जिलों में शुरू हुई। इसका लक्ष्य गरीब ग्रामीणों को काम देना था, जिससे उन्हें नकद और अनाज दोनों मिलते थे।
🎯 Exam Tip: जब भी किसी योजना के बारे में पूछा जाए, तो उसका उद्देश्य, लक्षित समूह, और मुख्य विशेषताएँ ज़रूर बताएँ।
Question 14. भारत में निर्धनता से मुक्ति पाने के लिए रोजगार सृजन करने वाले कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
Answer: भारत में गरीबी खत्म करने के लिए रोजगार बनाने वाले कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि गरीबी और बेरोजगारी सीधे जुड़े हुए हैं। भारत एक विकासशील देश है, जहाँ बेरोजगारी की समस्या बहुत बड़ी है। जब लोगों को काम मिलता है, तो उनकी गरीबी कम हो जाती है। इसीलिए सरकार ने रोजगार सृजन कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों के तहत, सरकार स्वरोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण देती है। रोजगार से आय बढ़ती है, जिससे जीवन स्तर में सुधार आता है।
In simple words: रोजगार कार्यक्रम गरीबी हटाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि बेरोजगारी भारत में एक बड़ी समस्या है। काम मिलने से लोगों की आय बढ़ती है और गरीबी कम होती है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, समस्या (बेरोजगारी), समाधान (रोजगार कार्यक्रम), और उनका प्रभाव (गरीबी में कमी) तीनों बिंदुओं को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 15. निर्धनता उन्मूलन में स्वरोजगार के अवसर' और 'कीमतों में गिरावट' की भूमिका का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer:
• स्वरोजगार के अवसर: लोगों को स्वरोजगार के अधिक अवसर खोजने चाहिए। उद्यमिता से जुड़ी शिक्षा और अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान खोलने चाहिए। बेरोजगारों को व्यापारिक संपत्ति खरीदने के लिए कम ब्याज पर ऋण मिलना चाहिए, और छोटे उद्योगों को स्थापित करने में मदद करनी चाहिए। इससे लोगों को अपनी आजीविका कमाने का मौका मिलता है।
• कीमतों में गिरावट: गरीबी हटाने के लिए कीमतों में गिरावट एक ज़रूरी बात है। जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो आम लोग अपनी मूलभूत ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाते, जिससे उनका जीवन स्तर गिर जाता है। कीमतों में गिरावट तभी आ सकती है जब खाने-पीने और अन्य ज़रूरी चीज़ों का उत्पादन बढ़े और ये चीजें गरीबों को सही कीमत पर मिलें। स्थिर कीमतें गरीबी को बढ़ने से रोकती हैं।
In simple words: स्वरोजगार के अवसर और कीमतों में कमी, दोनों ही गरीबी मिटाने में मदद करते हैं। स्वरोजगार से लोग अपना काम शुरू कर पाते हैं, और कम कीमतें यह सुनिश्चित करती हैं कि गरीब अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें।
🎯 Exam Tip: जब दो अलग-अलग कारकों की भूमिका पूछी जाए, तो प्रत्येक कारक को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें और यह भी बताएं कि वे गरीबी को कैसे प्रभावित करते हैं।
RBSE Class 11 Economics Chapter 20 निबंधात्मक प्रश्न
Question 2. निर्धनता रेखा पर विवाद की पृष्ठभूमि में रंगराजन समिति को कौन-कौन से कार्य सौंपे गए तथा समिति ने निर्धनता आंकलन के लिये बनाये तरीकों में किन-किन बातों को सम्मिलित किया गया?
Answer: निर्धनता रेखा पर चल रहे विवाद को देखते हुए, वर्ष 2012 में डॉ. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह बनाया गया। इस समिति को देश में निर्धनता रेखा तय करने, निर्धनता का अनुमान लगाने, राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी और राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन द्वारा उपभोग के आंकड़ों में अंतर की जांच करने का काम सौंपा गया। समिति ने गरीबी का आकलन करने के लिए कुछ खास तरीके अपनाए, जिनमें ये बातें शामिल थीं:
1. निर्धनता रेखा में पोषण, कपड़े, मकान, किराया, परिवहन, शिक्षा और अन्य गैर-खाद्य खर्चों को मापने के मानदंड शामिल किए गए। पोषण के मानदंडों के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा सुझाए गए कैलोरी, प्रोटीन और वसा के मानदंडों का उपयोग किया गया।
2. पोषण पर खर्च के अनुमान के लिए, उन व्यक्तियों को गरीब माना गया जो 2011-12 में ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 25-30 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 15-20 प्रतिशत थे।
3. समिति के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रति माह 972 रुपये और शहरी क्षेत्रों में प्रति माह 1407 रुपये को निर्धनता रेखा माना गया। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 32.4 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 46.9 रुपये को निर्धनता रेखा माना गया। पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में 4860 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 7035 रुपये को निर्धनता रेखा माना गया।
4. समिति द्वारा अपनाई गई विधि से 2009-10 में निर्धनता 38.2 प्रतिशत थी और 2011-12 में 29.5 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस अवधि में निर्धनता में 8.7 प्रतिशत की कमी आई। तेंदुलकर के अनुमानों के अनुसार, देश में 2009-10 में निर्धनता 29.8 प्रतिशत थी, जो 2011-12 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गई। यह समिति का महत्वपूर्ण योगदान था, जिससे निर्धनता की गणना में अधिक स्पष्टता आई।
In simple words: रंगराजन समिति को गरीबी रेखा तय करने का काम मिला था। समिति ने गरीबी मापने के लिए कई बातों पर ध्यान दिया, जैसे खाना, कपड़े, शिक्षा, और स्वास्थ्य पर कितना खर्च होता है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग खर्च की सीमाएं तय कीं और बताया कि गरीबी कैसे कम हुई।
🎯 Exam Tip: रंगराजन समिति के कार्यों को सूचीबद्ध करते समय, उनके द्वारा अपनाए गए मुख्य मानदंडों और निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़े याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. सरकार द्वारा निर्धनता उन्मूलन हेतु चलायी गयी योजनाओं का संक्षिप्त विवरण दीजिये।
Answer: भारत सरकार ने गरीबी को कम करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। नीचे कुछ प्रमुख योजनाओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
ii. समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (IRDP): यह कार्यक्रम 1978 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को उत्पादक संपत्ति, जैसे सिंचाई के साधन, बीज, उर्वरक, डेयरी पशु और कुटीर उद्योग के उपकरण उपलब्ध कराना था। इससे गरीबों की आय में वृद्धि होनी थी। 1999 में, इस कार्यक्रम को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में शामिल कर लिया गया।
iii. स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (SJGSY): यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी खत्म करने के लिए अप्रैल 1999 में शुरू की गई थी। इसमें पहले से चल रही सभी स्वरोजगार योजनाओं को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे उद्यम स्थापित करना था, जिसमें व्यक्तियों और स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज पर बैंक ऋण और आर्थिक सहायता दी जाती थी। योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें 75:25 के अनुपात में बांटती थीं।
iv. रोजगार आश्वासन योजना (EAS): यह योजना 2 अक्टूबर 1993 को शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सूखे, रेगिस्तानी, जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीण गरीब परिवारों को मजदूरी रोजगार के अवसर प्रदान करना था, खासकर तब जब काम की बहुत कमी होती थी। इस योजना में केंद्र और राज्यों के बीच लागत का बंटवारा 75:25 था।
v. प्रधानमन्त्री ग्रामोदय योजना (PMGY): यह योजना 2000-01 के बजट में 5000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ लागू की गई थी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, प्राथमिक शिक्षा, पीने का पानी, आवास और ग्रामीण सड़कों के विकास के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना था।
vii. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना (NREGS): यह अधिनियम सितंबर 2005 में पारित किया गया और फरवरी 2006 में लागू हुआ। इस योजना के तहत, ग्रामीण परिवारों को, जो मजदूरी का काम चाहते हैं, एक वर्ष में 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई। 2009 में, इसका नाम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कर दिया गया। यह योजना ग्रामीण लोगों को काम का अधिकार देती है।
viii. राष्ट्रीय काम के बदले अनाज योजना (National Food for Work Programme): यह कार्यक्रम 2004 में भारत के 150 सबसे पिछड़े जिलों में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य रोजगार के अवसर पैदा करना था। इस योजना में शारीरिक श्रम करने वाले ग्रामीण गरीबों को जल संरक्षण, सूखा सुरक्षा और भूमि विकास जैसे कार्यक्रमों में काम मिलता था। मजदूरी का भुगतान नकद और अनाज दोनों के रूप में किया जाता था।
ix. स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना (SJSRY): यह योजना 1997 में शहरी क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिए शुरू की गई थी। इसके दो मुख्य भाग थे - शहरी क्षेत्रों में मजदूरी रोजगार और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार कार्यक्रम। इस योजना की लागत केंद्र और राज्यों के बीच 75:25 के अनुपात में बांटी जाती थी। ये सभी योजनाएं गरीबी को कम करने और लोगों को बेहतर जीवन जीने में मदद करने के लिए बनाई गई हैं।
In simple words: सरकार ने गरीबी कम करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें ग्रामीण विकास कार्यक्रम, स्वरोजगार योजनाएं, रोजगार गारंटी योजनाएं, प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना और शहरी रोजगार योजनाएं शामिल हैं। ये सभी योजनाएं लोगों को काम और बेहतर सुविधाएं देकर गरीबी हटाने की कोशिश करती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न योजनाओं का विवरण देते समय, उनके शुरू होने का वर्ष, मुख्य उद्देश्य, और प्रमुख घटक या लाभों को संक्षिप्त रूप से लिखें। केंद्र-राज्य भागीदारी अनुपात जैसे विवरण भी महत्वपूर्ण होते हैं।
Question 5. निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रमों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
Answer: गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम धीरे-धीरे सफल हो रहे हैं। उनकी कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
1. कार्यक्रमों की सफलता के कारण गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों के प्रतिशत में कमी आई है। जैसे, 1973-74 में गरीबी का प्रतिशत 55 था, जो 2004-05 में घटकर 21.8% रह गया।
2. कार्यक्रमों की सफलता से गरीब वर्ग की आय में वृद्धि हुई है, जिससे उनका पोषण स्तर भी बेहतर हुआ है।
हालांकि, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम अच्छी नीयत से शुरू किए गए थे, लेकिन उनके अपेक्षित परिणाम पूरी तरह से नहीं मिले। इसकी विफलता के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
3. इन कार्यक्रमों की प्रगति में आम जनता का कोई सीधा जुड़ाव नहीं था। लोग अक्सर इन योजनाओं के बारे में जानते ही नहीं थे।
4. इन कार्यक्रमों को सरकार का तो समर्थन मिला, लेकिन आम जनता ने इसे पूरी तरह से नहीं अपनाया। जनभागीदारी की कमी एक बड़ी बाधा थी।
5. कार्यक्रम चलाने वाले अधिकारी अक्सर गरीब लोगों की बजाय धनी, शिक्षित और साधन-संपन्न लोगों का समर्थन करते थे। इससे गरीबों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता था।
6. गांवों के स्थानीय और अमीर लोगों ने कार्यक्रम अधिकारियों के साथ मिलकर वितरण प्रणाली को अपने पक्ष में कर लिया। इसके कारण गरीब वर्ग इन कार्यक्रमों के लाभों से वंचित रह गया।
7. दूरदराज के क्षेत्रों के गरीब लोग और गांवों के भीतरी हिस्सों में रहने वाले ग्रामीण इन कार्यक्रमों के लाभों से वंचित रह जाते थे, क्योंकि उन तक पहुंचना मुश्किल था।
8. कुछ लोग "गरीब" शब्द की परिभाषा समझने में असमर्थ थे। इससे वे उन सुविधाओं से वंचित रह जाते थे, जबकि जो गरीब नहीं थे, वे इन कार्यक्रमों का भरपूर लाभ उठा लेते थे। परिभाषा की स्पष्टता न होने से सही लोगों तक मदद नहीं पहुंची।
9. साख (क्रेडिट) और विपणन (मार्केटिंग) जैसी सुविधाएं देने वाली संस्थाओं से गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। ऋण की कमी ने कई प्रयासों को विफल कर दिया।
निष्कर्ष: सरकार ने गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों पर बहुत खर्च किया, लेकिन उस अनुपात में अच्छे परिणाम नहीं मिले। स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्पष्ट किया था कि गरीबों को मिलने वाली सहायता का केवल 15% ही उन तक पहुंच पाता था, बाकी सब बिचौलिए खा जाते थे। इसलिए, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है ताकि वे सही मायने में लोगों तक पहुंच सकें।
In simple words: गरीबी हटाने के कार्यक्रमों से कुछ फायदा हुआ है, जैसे गरीबी थोड़ी कम हुई और लोगों की आय बढ़ी। लेकिन इन कार्यक्रमों को पूरी सफलता नहीं मिली क्योंकि लोग ठीक से शामिल नहीं हुए, अधिकारियों ने सही लोगों की मदद नहीं की, और बिचौलिए बीच में फायदा उठा गए।
🎯 Exam Tip: किसी भी कार्यक्रम के मूल्यांकन में, उसकी सफलता के साथ-साथ उसकी कमियों और विफलताओं के कारणों को भी स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है। ठोस उदाहरण और निष्कर्ष के साथ अपनी बात को मज़बूत करें।
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