RBSE Solutions Class 11 Chemistry Chapter 11 p - ब्लॉक तत्त्व

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Class 11 Chemistry Chapter 11 p - ब्लॉक तत्त्व RBSE Solutions PDF

 

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौनसा लुईस अम्ल है -
(अ) PCI3
(ब) AICI3
(स) NCI3
(द) AsCl3
Answer: (ब) AICI3
In simple words: लुईस अम्ल ऐसे पदार्थ होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को स्वीकार कर सकते हैं। ऐलुमिनियम क्लोराइड (\( AlCl_3 \)) में ऐलुमिनियम का अष्टक अपूर्ण होता है, इसलिए यह इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करके लुईस अम्ल की तरह काम करता है।

🎯 Exam Tip: लुईस अम्ल वे यौगिक होते हैं जिनमें केंद्रीय परमाणु का अष्टक अपूर्ण होता है या उसके पास खाली कक्षक होते हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार किए जा सकें।

 

Question 2. निम्न में से किस तत्त्व की +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी है –
(अ) In
(ब) Ga
Answer: (ब) Ga
In simple words: समूह 13 के तत्वों में, गैलियम (\( Ga \)) की +3 ऑक्सीकरण अवस्था इंडियम (\( In \)) की तुलना में अधिक स्थिर होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि समूह में नीचे जाने पर +3 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता घटती है।

🎯 Exam Tip: समूह 13 में नीचे जाने पर 'अक्रिय युग्म प्रभाव' (inert pair effect) के कारण +1 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती है और +3 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता घटती जाती है।

 

Question 4. निम्न में से कौन बोरेक्स मनका परीक्षण नहीं देगा -
(अ) मैंगनीज लवण
(ब) बेरियम लवण
(स) निकल लवण
(द) कोबाल्ट लवण
Answer: (ब) बेरियम लवण
In simple words: बोरेक्स मनका परीक्षण संक्रमण धातुओं के लवणों द्वारा रंगीन मनके (beads) बनाने के लिए किया जाता है। बेरियम एक संक्रमण धातु नहीं है, इसलिए यह यह परीक्षण नहीं देगा।

🎯 Exam Tip: बोरेक्स मनका परीक्षण मुख्य रूप से संक्रमण धातु आयनों की पहचान के लिए उपयोग होता है, जो रंगीन मेटाबोरेट बनाते हैं।

 

Question 5. निम्न में से शुष्क बर्फ का सूत्र कौनसा है?
(अ) CO2
(ब) CO
(स) SiO2
(द) Al2O3
Answer: (अ) CO2
In simple words: शुष्क बर्फ कार्बन डाइऑक्साइड गैस का जमा हुआ या ठोस रूप होता है।

🎯 Exam Tip: शुष्क बर्फ को "ठोस कार्बन डाइऑक्साइड" भी कहते हैं और यह सीधे ठोस से गैस में बदल जाती है (ऊर्ध्वपातन)।

 

Question 6. अर्द्ध चालक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है -
(अ) कार्बन
(ब) सिलिकन
(स) लेड
(द) टिन
Answer: (ब) सिलिकन
In simple words: सिलिकॉन का उपयोग अर्धचालक के रूप में किया जाता है क्योंकि यह कुछ खास स्थितियों में बिजली का संचालन करता है, जो इसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए उपयोगी बनाता है।

🎯 Exam Tip: सिलिकॉन और जर्मेनियम सबसे आम अर्धचालक हैं जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है।

 

Question 8. बोरॉन का कौनसा यौगिक बुलेट प्रूफ वस्त्र बनाने में प्रयुक्त होता है?
Answer: बोरॉन फाइबर का उपयोग बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य सुरक्षात्मक वस्त्र बनाने के लिए किया जाता है।
In simple words: बोरॉन के रेशों का उपयोग बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: बोरॉन फाइबर अपनी उच्च शक्ति और हल्के वजन के कारण सुरक्षात्मक अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण होते हैं।

 

Question 9. ऐलुमिनियम के दो वयस्कों के नाम व सूत्र दीजिए।
Answer: ऐलुमिनियम के दो मुख्य अयस्क हैं:
1. बॉक्साइड (\( Al_2O_3 \cdot 2H_2O \))
2. क्रायोलाइड (\( Na_3AlF_6 \))
In simple words: ऐलुमिनियम के दो मुख्य अयस्क बॉक्साइड और क्रायोलाइड हैं।

🎯 Exam Tip: बॉक्साइड ऐलुमिनियम का सबसे महत्वपूर्ण अयस्क है, जिससे अधिकतर ऐलुमिनियम धातु निकाली जाती है।

 

Question 10. AICI3 की चतुष्फलकीय द्विलक संरचना बनाइये।
Answer: ऐलुमिनियम क्लोराइड (\( AlCl_3 \)) गैसीय अवस्था में \( Al_2Cl_6 \) के रूप में एक द्विलक (dimer) संरचना बनाता है। इस संरचना में दो ऐलुमिनियम परमाणु दो क्लोरीन परमाणुओं द्वारा जुड़े होते हैं, जो सेतु बंध बनाते हैं। प्रत्येक ऐलुमिनियम परमाणु की समन्वय संख्या 4 होती है। Al Al Cl Cl Cl Cl Cl Cl 206 Pm 221 pm 101° 79° 118°
In simple words: \( AlCl_3 \) गैस अवस्था में दो अणुओं के जुड़ने से एक खास ढाँचा बनाता है, जहाँ क्लोरीन परमाणु दो ऐलुमिनियम परमाणुओं को जोड़ते हैं।

🎯 Exam Tip: \( AlCl_3 \) का द्विलक निर्माण उसके इलेक्ट्रॉन-न्यून स्वभाव को पूरा करने के लिए होता है, जिससे केंद्रीय ऐलुमिनियम परमाणु का अष्टक पूरा हो सके।

 

Question 11. डाइबोरेन की संरचना दीजिए।
Answer: डाइबोरेन (\( B_2H_6 \)) की संरचना में दो बोरॉन परमाणु और छह हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। इसमें दो हाइड्रोजन परमाणु ब्रिज बनाते हुए बोरॉन परमाणुओं को जोड़ते हैं। यह एक 'केला बंध' (banana bond) का उदाहरण है, जहाँ 3 केंद्र-2 इलेक्ट्रॉन बंध होते हैं। B B H H H H H H
In simple words: डाइबोरेन में दो बोरॉन होते हैं जो चार हाइड्रोजन से सीधे जुड़े होते हैं, और दो हाइड्रोजन दोनों बोरॉन परमाणुओं के बीच एक पुल बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: डाइबोरेन की संरचना में 3-केंद्र-2-इलेक्ट्रॉन बंध (केला बंध) होते हैं, जो इसे इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक बनाते हैं।

 

Question 12. बोरॉन तथा ऐलुमिनियम के दो - दो उपयोग दीजिए।
Answer:
बोरॉन के उपयोग:

  • बोरॉन का मुख्य उपयोग बोरोसिलिकेट, इनेमल और कांच बनाने वाले उद्योगों में होता है।
  • बोरॉन-10 (\( ^5B^{10} \)) समस्थानिक का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रण छड़ें बनाने के लिए किया जाता है।
ऐलुमिनियम के उपयोग:
  • ऐलुमिनियम का उपयोग बिजली के तार बनाने में होता है।
  • इसकी मिश्र धातु ड्यूरेलुमिन का उपयोग हवाई जहाज के निर्माण में किया जाता है।
In simple words: बोरॉन को कांच और इनेमल बनाने में इस्तेमाल करते हैं, और इसके एक प्रकार को परमाणु रिएक्टरों में भी लगाते हैं। ऐलुमिनियम से बिजली के तार और हवाई जहाज बनते हैं।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण तत्वों के मुख्य उपयोगों को याद रखना परीक्षा में अंक दिलाने में सहायक होता है।

 

Question 13. फुलरीन में उपस्थित छः सदस्य तथा पाँच सदस्यीय वलयों की संख्या बताइए।
Answer: फुलरीन में 20 छह-सदस्यीय वलय और 12 पांच-सदस्यीय वलय होते हैं।
In simple words: फुलरीन में 20 रिंग छह कार्बन परमाणुओं वाली और 12 रिंग पांच कार्बन परमाणुओं वाली होती हैं।

🎯 Exam Tip: \( C_{60} \) फुलरीन, जिसे बकमिन्स्टरफुलरीन भी कहते हैं, की संरचना फुटबॉल जैसी होती है।

 

Question 14. उष्मागतिक रूप में कार्बन का कौनसा अपररूप सर्वाधिक स्थायी है?
Answer: कार्बन के अपररूपों में, ग्रेफाइट ऊष्मागतिक रूप से सबसे अधिक स्थायी होता है। इसका मानक संभवन एन्थैल्पी (\( \Delta_fH^\circ \)) को शून्य माना जाता है।
In simple words: कार्बन का ग्रेफाइट रूप सबसे स्थिर होता है, और इसे बनाने में कोई ऊर्जा नहीं लगती है।

🎯 Exam Tip: कार्बन के विभिन्न अपररूपों की स्थिरता को उनकी मानक संभवन एन्थैल्पी से तुलना करके समझा जा सकता है।

 

Question 15. हीरा तथा ग्रेफाइट में उपस्थित कार्बन का संकरण बताइये।
Answer: हीरे में कार्बन \( sp^3 \) संकरित होता है और इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय (tetrahedral) होती है। ग्रेफाइट में कार्बन \( sp^2 \) संकरित होता है और इसकी ज्यामिति षट्कोणीय (hexagonal) होती है।
In simple words: हीरे में कार्बन के परमाणु \( sp^3 \) हाइब्रिड होते हैं, और ग्रेफाइट में वे \( sp^2 \) हाइब्रिड होते हैं।

🎯 Exam Tip: संकरण का प्रकार तत्व के भौतिक गुणों और रासायनिक व्यवहार को सीधे प्रभावित करता है।

 

Question 17. बोरॉन का गलनांक असाधारण रूप से उच्च क्यों होता है? समझाइए।
Answer: बोरॉन का गलनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि ठोस अवस्था में इसके परमाणुओं के बीच बहुत मजबूत सहसंयोजक बंध होते हैं। इसकी संरचना भी त्रि-आयामी (three-dimensional) होती है, जिससे इसे पिघलाना मुश्किल होता है।
In simple words: बोरॉन का गलनांक बहुत ऊँचा होता है क्योंकि इसके अणु बहुत मजबूत बंधों से कसकर जुड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: उच्च गलनांक अक्सर मजबूत आणविक या सहसंयोजक नेटवर्क संरचनाओं का संकेत होता है।

 

Question 18. समूह – 13 के तत्वों की +1 ऑक्सीकरण अवस्था के स्थायितव के बढ़ते क्रम को लिखिए।
Answer: समूह 13 के तत्वों में, जैसे-जैसे हम वर्ग में नीचे जाते हैं, +1 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता बढ़ती जाती है। इसका क्रम \( Al < Ga < In < Tl \) है।
In simple words: समूह 13 में, नीचे जाने पर तत्वों की +1 ऑक्सीकरण अवस्था ज्यादा स्थिर होती जाती है।

🎯 Exam Tip: 'अक्रिय युग्म प्रभाव' समूह में नीचे के तत्वों में \( ns^2 \) इलेक्ट्रॉनों के बंध बनाने में अनिच्छा के कारण होता है, जिससे +1 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थिर हो जाती है।

 

Question 19. ऐलुमिनियम के उभयधर्मी व्यवहार दर्शाने वाली अभिक्रिया दीजिए।
Answer: ऐलुमिनियम अम्लों और जलीय क्षारों दोनों में घुल जाता है, जो इसका उभयधर्मी (amphoteric) व्यवहार दिखाता है।
अम्ल के साथ अभिक्रिया:
\[ 2Al(s) + 6HCl(aq) \rightarrow 2Al^{3+}(aq) + 6Cl^-(aq) + 3H_2(g) \]
क्षार के साथ अभिक्रिया:
\[ 2Al(s) + 2NaOH(aq) + 6H_2O(l) \rightarrow 2Na^+[Al(OH)_4]^-(aq) + 3H_2(g) \]
इस अभिक्रिया में सोडियम टेट्राहाइड्रॉक्सोऐलुमिनेट (III) बनता है।
In simple words: ऐलुमिनियम अम्ल और क्षार, दोनों से अभिक्रिया करता है। अम्ल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस निकालता है और क्षार से क्रिया करके एक विशेष ऐलुमिनेट यौगिक बनाता है।

🎯 Exam Tip: उभयधर्मी पदार्थ वे होते हैं जो अम्लों और क्षारों दोनों के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं। यह पहचानने के लिए दो अलग-अलग अभिक्रियाएँ देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. बोरॉन \( BF_4^- \) बना सकता है \( BF_6^{3-} \) नहीं, कारण समझाइए।
Answer: बोरॉन \( BF_4^- \) बना सकता है क्योंकि इसमें अधिकतम चार सहसंयोजक बंध बनाने की क्षमता होती है। लेकिन यह \( BF_6^{3-} \) नहीं बना सकता क्योंकि बोरॉन में खाली d-कक्षक नहीं होते हैं, जिससे यह छह बंध नहीं बना पाता। दूसरी ओर, इसी समूह के अन्य तत्वों में d-कक्षक उपलब्ध होते हैं, इसलिए उनकी संयोजकता छह तक हो सकती है और वे \( EF_6^{3-} \) जैसे आयन बना सकते हैं।
In simple words: बोरॉन सिर्फ चार बंध बना सकता है क्योंकि उसके पास खाली d-कक्षक नहीं होते, इसलिए वह छह बंध वाला \( BF_6^{3-} \) नहीं बना पाता।

🎯 Exam Tip: d-कक्षकों की अनुपस्थिति समूह 13 के पहले तत्व बोरॉन को इसके बाद के तत्वों से अलग करती है, जिससे इसकी अधिकतम संयोजकता प्रभावित होती है।

 

Question 21. बोरिक अम्ल को एक दुर्बल अम्ल माना जाता है, क्यों?
Answer: बोरिक अम्ल एक दुर्बल अम्ल है क्योंकि यह सीधे प्रोटॉन (\( H^+ \)) नहीं देता है। इसके बजाय, यह पानी के हाइड्रोक्सिल आयन (\( OH^- \)) से एक इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करता है और लुईस अम्ल के रूप में व्यवहार करता है।
इसकी अभिक्रिया इस प्रकार है:
\[ H_3BO_3 + 2H_2O \rightarrow [B(OH)_4]^- + H_3O^+ \]
In simple words: बोरिक अम्ल कमजोर है क्योंकि यह खुद प्रोटॉन नहीं देता। यह पानी से इलेक्ट्रॉन लेकर अम्ल जैसा व्यवहार करता है।

🎯 Exam Tip: बोरिक अम्ल का लुईस अम्ल व्यवहार एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो इसकी अम्लीय प्रकृति को समझाता है, भले ही यह ब्रोंस्टेड-लोरी अम्ल न हो।

 

Question 23. \( PbI_2 \) बनता है \( PbI_4 \) नहीं। क्यों ?
Answer: लेड (\( Pb \)) \( PbI_2 \) बनाता है, लेकिन \( PbI_4 \) नहीं। इसका कारण यह है कि \( Pb-I \) बंध के बनने से इतनी ऊर्जा नहीं निकलती कि लेड के \( 6s^2 \) इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करके चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन मिल सकें, जो \( PbI_4 \) बनाने के लिए जरूरी हैं। साथ ही, \( Pb^{4+} \) एक मजबूत ऑक्सीकारक होता है और आयोडाइड (\( I^- \)) एक मजबूत अपचायक है। इसलिए, \( I^- \) आसानी से \( Pb^{4+} \) को \( Pb^{2+} \) में कम कर देता है।
In simple words: \( PbI_4 \) इसलिए नहीं बनता क्योंकि \( Pb \) के \( +4 \) ऑक्सीकरण अवस्था को स्थिर करना मुश्किल है, और \( I^- \) उसे \( +2 \) ऑक्सीकरण अवस्था में वापस बदल देता है।

🎯 Exam Tip: +2 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता नीचे जाने पर बढ़ती है, जबकि +4 ऑक्सीकरण अवस्था की स्थिरता घटती है, जिसे 'अक्रिय युग्म प्रभाव' से समझा जा सकता है।

 

Question 24. \( SiCl_4 \) के जल अपघटन की प्रक्रिया को समझाइये।
Answer: \( SiCl_4 \) आसानी से जल अपघटित हो जाता है क्योंकि सिलिकॉन परमाणु के पास खाली d-कक्षक होते हैं। ये खाली कक्षक जल के ऑक्सीजन परमाणु से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करते हैं।
शुरुआत में, \( SiCl_4 \) जल के अणुओं के साथ अभिक्रिया करके \( Si(OH)_4 \) बनाता है, जो बाद में जल के अणुओं को खोकर अंत में \( SiO_2 \) में बदल जाता है।
प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
\[ SiCl_4 + H_2O \rightarrow Cl_3Si-OH + HCl \]
\( \implies \) \[ Cl_3Si-OH + H_2O \rightarrow Cl_2Si(OH)_2 + HCl \]
\( \implies \) \[ Cl_2Si(OH)_2 + H_2O \rightarrow ClSi(OH)_3 + HCl \]
\( \implies \) \[ ClSi(OH)_3 + H_2O \rightarrow Si(OH)_4 + HCl \] अंतिम उत्पाद जल के निष्कासन से \( SiO_2 \) बनता है:
\[ Si(OH)_4 \xrightarrow{-2H_2O} SiO_2 \]In simple words: \( SiCl_4 \) पानी के साथ मिलकर \( Si(OH)_4 \) बनाता है, जो फिर पानी छोड़कर \( SiO_2 \) बन जाता है। सिलिकॉन में खाली जगहें होती हैं, जो उसे पानी से इलेक्ट्रॉन लेने देती हैं।

🎯 Exam Tip: \( SiCl_4 \) का जल अपघटन उसकी खाली d-कक्षकों की उपलब्धता पर निर्भर करता है, जो जल के अणुओं के साथ समन्वय करने में मदद करते हैं।

 

Question 25. हीरा कठोर तथा ग्रेफाइट नर्म व मुलायम होता है, क्यों? समझाइये।
Answer:
हीरा बहुत कठोर होता है क्योंकि इसमें एक त्रि-आयामी क्रिस्टलीय जालक संरचना होती है। प्रत्येक कार्बन परमाणु \( sp^3 \) संकरित होता है और मजबूत सहसंयोजक बंधों द्वारा चार अन्य कार्बन परमाणुओं से चतुष्फलकीय रूप से जुड़ा होता है। कार्बन-कार्बन बंध की लंबाई 154 pm होती है, जिससे यह बहुत मजबूत और कठोर हो जाता है।
ग्रेफाइट नरम और चिकना होता है क्योंकि इसकी परतदार संरचना (layered structure) होती है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु \( sp^2 \) संकरित होता है और तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे षट्कोणीय वलय बनते हैं। ये परतें कमजोर वान्डरवाल बलों द्वारा एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं और आसानी से एक-दूसरे पर फिसल सकती हैं, इसलिए ग्रेफाइट नरम और चिकना होता है।
In simple words: हीरा बहुत कठोर होता है क्योंकि इसके कार्बन परमाणु बहुत मजबूती से एक साथ जुड़े होते हैं। ग्रेफाइट नरम और फिसलन भरा होता है क्योंकि इसके कार्बन परमाणु परतों में होते हैं जो एक-दूसरे पर आसानी से फिसल जाती हैं।

🎯 Exam Tip: कार्बन के अपररूपों के भौतिक गुणों में अंतर उनकी संरचना में कार्बन परमाणुओं के संकरण और बंध के तरीकों के कारण होता है।

 

Question 26. \( CO_2 \) गैस है जबकि \( SiO_2 \) ठोस, कारण सहित समझाइए।
Answer:
कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) एक गैस है क्योंकि कार्बन का आकार छोटा होता है, जिससे यह ऑक्सीजन के साथ दोहरे बंध बना लेता है और अलग-अलग अणु (\( O=C=O \)) बनाता है। इन \( CO_2 \) अणुओं के बीच कमजोर वान्डरवाल बल होते हैं, इसलिए यह गैस के रूप में मौजूद होता है।
इसके विपरीत, सिलिकॉन डाइऑक्साइड (\( SiO_2 \)) एक ठोस है क्योंकि सिलिकॉन का आकार बड़ा होता है और यह ऑक्सीजन के साथ दोहरा बंध नहीं बना पाता। इसके बजाय, यह ऑक्सीजन के माध्यम से एक बड़ी, जटिल त्रि-आयामी नेटवर्क संरचना बनाता है, जिसमें परमाणु मजबूती से एक साथ जुड़े होते हैं। इसलिए, \( SiO_2 \) कमरे के तापमान पर ठोस होता है।
In simple words: \( CO_2 \) गैस है क्योंकि इसके छोटे अणु कमजोर बलों से जुड़े होते हैं। \( SiO_2 \) ठोस है क्योंकि इसके अणु बड़े होते हैं और एक मजबूत, बड़ा नेटवर्क बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: केंद्रीय परमाणु का आकार और उसकी बहुबंध बनाने की क्षमता एक यौगिक की भौतिक अवस्था को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 

Question 27. CO की विषैली प्रकृति समझाइए।
Answer: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बहुत विषैली होती है क्योंकि यह रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर एक बहुत ही स्थिर यौगिक बनाती है, जिसे कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन कहते हैं। यह ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन यौगिक (ऑक्सीहीमोग्लोबिन) से लगभग 300 गुना अधिक स्थिर होता है।
जब CO शरीर में प्रवेश करती है, तो यह हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती है, जिससे शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती। ऑक्सीजन की कमी के कारण व्यक्ति बीमार पड़ जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
यह प्रक्रिया ऐसे होती है:
\[ CO + \text{हीमोग्लोबिन} \xrightarrow{\text{जीवित कोशिका}} \text{कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन} \]
In simple words: CO जहरीली है क्योंकि यह हमारे खून के हीमोग्लोबिन से मजबूती से जुड़ जाती है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और व्यक्ति की जान को खतरा हो जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्बन मोनोऑक्साइड को 'शांत हत्यारा' भी कहा जाता है क्योंकि यह रंगहीन और गंधहीन होती है, जिससे इसकी उपस्थिति का पता लगाना मुश्किल होता है।

 

Question 28. \( SiCl_4 \) को जल अपघटन हो जाता है \( CCl_4 \) का नहीं, कारण सहित समझाइए।
Answer:
कार्बन टेट्राक्लोराइड (\( CCl_4 \)) जल अपघटन नहीं करता है क्योंकि कार्बन परमाणु के पास कोई खाली d-कक्षक नहीं होते हैं। इसलिए, यह जल के ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार नहीं कर सकता। कार्बन का आकार भी छोटा होता है और उसके चारों ओर क्लोरीन परमाणु उसे घेर लेते हैं, जिससे जल के अणुओं के लिए उस पर हमला करना मुश्किल हो जाता है।
दूसरी ओर, सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड (\( SiCl_4 \)) आसानी से जल अपघटित हो जाता है। सिलिकॉन परमाणु के संयोजी कोश में खाली d-कक्षक उपलब्ध होते हैं। ये कक्षक जल के ऑक्सीजन परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं, जिससे अभिक्रिया शुरू होती है। अंत में, \( SiCl_4 \) पूरी तरह से जल अपघटित होकर \( SiO_2 \) बनाता है।
अभिक्रिया के चरण:
\[ SiCl_4 + H_2O \rightarrow Si(OH)Cl_3 + HCl \]
\( \implies \) \[ Si(OH)Cl_3 + H_2O \rightarrow Si(OH)_4 + 3HCl \]
\( \implies \) \[ Si(OH)_4 \rightarrow SiO_2 + 2H_2O \]In simple words: \( CCl_4 \) पानी से क्रिया नहीं करता क्योंकि कार्बन के पास खाली जगह नहीं होती। \( SiCl_4 \) पानी से क्रिया करता है क्योंकि सिलिकॉन के पास खाली d-कक्षक होते हैं, जो उसे पानी से इलेक्ट्रॉन लेने देते हैं।

🎯 Exam Tip: केंद्रीय परमाणु में खाली d-कक्षकों की उपस्थिति जल अपघटन अभिक्रियाओं में एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि वे जल के इलेक्ट्रॉन युग्म को स्वीकार करने के लिए साइट प्रदान करते हैं।

 

Question 29. सिलिकॉन की एक इकाई का सूत्र लिखिए।
Answer: सिलिकॉन एक बहुलक होता है जिसमें \( Si-O-Si \) बंधों की एक श्रृंखला होती है। प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु पर ऐल्किल या ऐरिल समूह जुड़े होते हैं। ये यौगिक जल-प्रतिरोधी (hydrophobic) प्रकृति के होते हैं। सिलिकॉन की सामान्य पुनरावर्ती इकाई \( R_2SiO \) होती है।
उदाहरण के लिए, एक सीधी श्रृंखला वाले सिलिकॉन का सामान्य सूत्र इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
\[ \Huge(-O- \underset{R}{\overset{R}{\text{Si}}} -)_{\text{n}} \]
In simple words: सिलिकॉन का मूल सूत्र \( R_2SiO \) है, जहाँ \( R \) एक कार्बन समूह है, और इसमें सिलिकॉन-ऑक्सीजन की लंबी चेन होती है।

🎯 Exam Tip: सिलिकॉन की संरचना में \( Si-O \) बंध की उच्च तापीय स्थिरता इसे कई औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाती है।

 

सारणी: समूह 13 के तत्त्वों की रासायनिक अभिक्रियाशीलता

रासायनिक अभिक्रिया का प्रकारसामान्य अभिक्रिया समीकरण
(M = B, Al, Ga, In या Tl)
विशिष्ट टिप्पणी
हैलोजनीकरण\( 2M + 3X_2 \rightarrow 2MX_3 \)थैलियम \( TlX \) भी देता है।
ऑक्सीकरण\( 4M + 3O_2 \rightarrow 2M_2O_3 \)थैलियम \( Tl_2O \) भी देता है।
सल्फर के साथ\( 2M + 3S \rightarrow M_2S_3 \)थैलियम \( Tl_2S \) भी देता है।
नाइट्रोजन के साथ\( 2M + N_2 \rightarrow 2MN \)B तथा Al के साथ अभिक्रिया उच्च ताप पर होती है।
अम्लों के साथ\( 2M + 6H^+ \rightarrow 2M^{3+} + 3H_2 \)अभिक्रिया Al, Ga तथा In के साथ होती है। Tl इस अभिक्रिया में \( Tl^+ \) आयन बनाता है।
क्षारों के साथ\( 2M + 2OH^- + 2H_2O \rightarrow 2MO_2^- + 3H_2 \)अभिक्रिया Al तथा Ga के साथ होती है। बोरोन \( H_3BO_3 \) बनाता है।

 

Question 30. श्रृंखलन का गुण किस तत्त्व में अधिकतम होता है?
Answer: श्रृंखलन (catenation) का गुण कार्बन में सबसे अधिक होता है। श्रृंखलन वह क्षमता है जिसमें एक ही तत्व के परमाणु आपस में जुड़कर लंबी खुली या बंद श्रृंखलाएँ बनाते हैं। कार्बन के परमाणुओं के छोटे आकार और मजबूत कार्बन-कार्बन बंध के कारण यह गुण सबसे ज्यादा होता है।
वर्ग में नीचे जाने पर परमाणुओं का आकार बढ़ने और विद्युतऋणात्मकता घटने के कारण श्रृंखलन की प्रवृत्ति कम हो जाती है। इसलिए, श्रृंखलन का क्रम इस प्रकार है: \( C >> Si > Ge = Sn \).
In simple words: कार्बन में श्रृंखलन का गुण सबसे ज्यादा होता है, जिसका मतलब है कि कार्बन के परमाणु आपस में जुड़कर बहुत लंबी चेन और रिंग बना सकते हैं। जैसे-जैसे हम वर्ग में नीचे जाते हैं, यह गुण कम होता जाता है।

🎯 Exam Tip: कार्बन की श्रृंखलन की अद्वितीय क्षमता ही उसके विभिन्न अपररूपों और असंख्य कार्बनिक यौगिकों के निर्माण का आधार है।

 

Question 31. \( Be_2C \) तथा \( Al_4C_3 \) में कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था बताइये।
Answer:
\( Be_2C \) में बेरिलियम (\( Be \)) की ऑक्सीकरण अवस्था \( +2 \) होती है। चूंकि यौगिक उदासीन है, इसलिए कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -4 \) होगी (\( 2 \times (+2) + C = 0 \implies C = -4 \)).
\( Al_4C_3 \) में ऐलुमिनियम (\( Al \)) की ऑक्सीकरण अवस्था \( +3 \) होती है। चूंकि यौगिक उदासीन है, इसलिए कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -4 \) होगी (\( 4 \times (+3) + 3C = 0 \implies 12 + 3C = 0 \implies 3C = -12 \implies C = -4 \)).
दोनों यौगिकों में कार्बन कार्बाइड आयन के रूप में \( C^{4-} \) मौजूद है।
In simple words: \( Be_2C \) और \( Al_4C_3 \) दोनों में, कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -4 \) होती है। बेरिलियम और ऐलुमिनियम की स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे निकाला जाता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था निकालते समय, पहले ज्ञात तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं का उपयोग करें और फिर यौगिक की कुल उदासीनता को ध्यान में रखते हुए अज्ञात तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करें।

 

Question 32. \( Tl (+1) \) एवं \( (+3) \) ऑक्सीकरण अवस्था क्यों प्रदर्शित करते हैं?
Answer: थैलियम (\( Tl \)) समूह 13 का एक तत्व है, जिसका बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( ns^2np^1 \) है। यह \( +1 \) और \( +3 \) दोनों ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाता है। हालांकि, थैलियम में \( +1 \) ऑक्सीकरण अवस्था \( +3 \) ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थायी होती है।
इसका कारण 'अक्रिय युग्म प्रभाव' (inert pair effect) है। इस प्रभाव के कारण, \( s \)-कक्षक में मौजूद इलेक्ट्रॉन युग्म बंध बनाने में हिस्सा नहीं लेता, या बहुत कम हिस्सा लेता है। इसलिए, केवल \( p \)-कक्षक का एक इलेक्ट्रॉन निकलकर \( +1 \) ऑक्सीकरण अवस्था बनाता है, जो अधिक स्थिर होती है, खासकर समूह में नीचे के तत्वों के लिए।
In simple words: थैलियम \( +1 \) और \( +3 \) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाता है। \( +1 \) अवस्था अधिक स्थिर है क्योंकि 'अक्रिय युग्म प्रभाव' के कारण \( s \)-कक्षक के इलेक्ट्रॉन बंध बनाने में भाग नहीं लेते।

🎯 Exam Tip: अक्रिय युग्म प्रभाव भारी p-ब्लॉक तत्वों की एक विशेषता है, जहाँ निम्न ऑक्सीकरण अवस्था समूह ऑक्सीकरण अवस्था से अधिक स्थिर हो जाती है।

 

Question 33. बोरॉन इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक क्यों बनाता है?
Answer: बोरॉन इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक बनाता है क्योंकि इसका आकार अपने वर्ग में सबसे छोटा होता है और इसका आवेश घनत्व अधिक होता है। इसके बाहरी कोश में केवल तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब यह तीन सहसंयोजक बंध बनाता है, तो इसके पास केवल छह इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे इसका अष्टक अपूर्ण रहता है। अष्टक पूरा न होने के कारण, यह इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक बनाता है और इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार करने की प्रवृत्ति रखता है।
In simple words: बोरॉन छोटे आकार का होता है और उसके पास बंध बनाने के लिए पर्याप्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए वह ऐसे यौगिक बनाता है जिनमें इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि वे इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकते हैं।

 

Question 35. समूह – 14 में नीचे की ओर जाने पर श्रृंखलन की प्रवृत्ति कम हो जाती है, क्यों?
Answer: समूह 14 में जैसे-जैसे हम वर्ग में नीचे जाते हैं, श्रृंखलन की प्रवृत्ति कम होती जाती है। इसका मुख्य कारण है कि परमाणुओं का आकार बढ़ जाता है और उनकी विद्युतऋणात्मकता कम हो जाती है। बड़े परमाणुओं के बीच के बंध कमजोर होते हैं और वे आसानी से टूट जाते हैं, जिससे लंबी श्रृंखलाएँ बनाना मुश्किल हो जाता है।
In simple words: जैसे-जैसे आप समूह 14 में नीचे जाते हैं, तत्व बड़े होते जाते हैं और उनके बंध कमजोर हो जाते हैं, इसलिए वे लंबी चेन बनाने में कम सक्षम होते हैं।

🎯 Exam Tip: श्रृंखलन की प्रवृत्ति तत्व के अपने ही परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक बंध बनाने की क्षमता से संबंधित होती है, और यह बंध ऊर्जा और आकार पर निर्भर करती है।

 

Question 36. सिलिकॉन क्या है? इसका निर्माण कैसे किया जाता है?
Answer:
सिलिकॉन (Silicones) वे बहुलक होते हैं जिनमें \( Si-O-Si \) बंधों की एक श्रृंखला होती है। प्रत्येक सिलिकॉन परमाणु पर ऐल्किल या ऐरिल समूह जुड़े होते हैं। ये यौगिक जल-प्रतिरोधी (hydrophobic) प्रकृति के होते हैं। सिलिकॉन की सामान्य पुनरावर्ती इकाई \( R_2SiO \) होती है।
सिलिकॉन की एक इकाई का सूत्र:
\[ \Huge(-O- \underset{R}{\overset{R}{\text{Si}}} -)_{\text{n}} \]
या O Si CH3 CH3 O Si CH3 CH3 O n
इसका निर्माण:
सिलिकॉन के निर्माण के लिए ऐल्किल या ऐरिल प्रतिस्थापित सिलिकॉन क्लोराइड (\( [R_nSiCl_{(4-n)}] \)) जैसे प्रारंभिक पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
1. मेथिल क्लोराइड को \( 573 K \) पर कॉपर की उपस्थिति में सिलिकॉन से क्रिया कराने पर विभिन्न मेथिल-प्रतिस्थापित क्लोरोसिलेन बनते हैं, जैसे \( MeSiCl_3, Me_2SiCl_2, Me_3SiCl \) और थोड़ी मात्रा में \( Me_4Si \) (यहाँ \( Me = CH_3 \))।
\[ 2CH_3Cl + Si \xrightarrow{Cu, 570K} (CH_3)_2SiCl_2 \]
\( \implies \) विभिन्न \( R_nSiCl_{4-n} \) यौगिक बनते हैं।
2. डाइमेथिल डाइक्लोरोसिलेन (\( (CH_3)_2SiCl_2 \)) का जल अपघटन और संघनन बहुलकीकरण द्वारा श्रृंखला बहुलक सिलिकॉन बनते हैं।
\[ nHO - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - OH + nHO - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - CH_3 \xrightarrow{\text{बहुलकीकरण \\ -nH_2O}} \] \[ \Huge \left[ -O - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - O - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - \right]_{\text{n}} \]
श्रृंखला की लंबाई को नियंत्रित करने के लिए (\( (CH_3)_3SiCl \)) का उपयोग किया जाता है।
\[ CH_3 - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - Cl \xrightarrow{+H_2O \\ -HCl} CH_3 - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - OH \] \[ CH_3 - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - OH + HO - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - CH_3 \xrightarrow{-H_2O} CH_3 - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - O - \underset{CH_3}{\overset{CH_3}{\text{Si}}} - CH_3 \]
क्रॉस-बंध वाले सिलिकॉन (\( (CH_3)SiCl_3 \)) के जल अपघटन से बनते हैं।
\[ (CH_3)SiCl_3 + 3H_2O \xrightarrow{\text{जल अपघटन}} CH_3Si(OH)_3 + 3HCl \] \[ nCH_3 - \underset{OH}{\overset{OH}{\text{Si}}} - OH \xrightarrow{\text{संघनन बहुलकीकरण \\ -(n-1)H_2O}} \text{क्रॉस-बंधी सिलिकॉन} \]
क्रॉस-बंधी सिलिकॉन की संरचना:
O Si O O O Si O O O CH3 CH3
In simple words: सिलिकॉन वे खास बहुलक हैं जिनमें सिलिकॉन और ऑक्सीजन के बंधों की लंबी चेन होती है और हर सिलिकॉन पर कार्बन समूह जुड़े होते हैं। इन्हें बनाने के लिए, खास सिलिकॉन क्लोराइड को पानी से अभिक्रिया कराकर संघनन किया जाता है, जिससे लंबी या क्रॉस-बंध वाली चेन बनती हैं।

🎯 Exam Tip: सिलिकॉन की प्रकृति (सीधी श्रृंखला, चक्रीय, या क्रॉस-बंधी) प्रारंभिक मोनोमर के प्रकार और संघनन स्थितियों पर निर्भर करती है।

 

Question 37. वाटर गैस तथा प्रोड्यूसर गैस के सूत्र दीजिए।
Answer:
वाटर गैस:
यह कार्बन मोनोऑक्साइड (\( CO \)) और हाइड्रोजन (\( H_2 \)) का मिश्रण होती है। इसे लाल-गर्म कोक पर भाप प्रवाहित करके बनाया जाता है।
\[ C(s) + H_2O(g) \xrightarrow{\text{472-1273 K}} CO(g) + H_2(g) \]
प्रोड्यूसर गैस:
यह कार्बन मोनोऑक्साइड (\( CO \)) और नाइट्रोजन (\( N_2 \)) का मिश्रण होती है। इसे लाल-गर्म कोक पर हवा (जिसमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन होती है) प्रवाहित करके बनाया जाता है।
\[ 2C(s) + O_2(g) + 4N_2(g) \xrightarrow{\text{1273 K}} 2CO(g) + 4N_2(g) \] ये दोनों गैसें महत्वपूर्ण औद्योगिक ईंधन हैं, क्योंकि इनमें मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाती है और ऊर्जा छोड़ती है।
In simple words: वाटर गैस \( CO \) और \( H_2 \) का मिश्रण है, जो कोक पर भाप डालने से बनती है। प्रोड्यूसर गैस \( CO \) और \( N_2 \) का मिश्रण है, जो कोक पर हवा डालने से बनती है।

🎯 Exam Tip: इन गैसों का उपयोग ईंधन के रूप में और रासायनिक संश्लेषण के लिए प्रारंभिक सामग्री के रूप में होता है।

 

Question 38. क्या होगा जब फार्मिक अम्ल को सान्द \( H_2SO_4 \) की उपस्थिति में गर्म किया जाए? रासायनिक समीकरण दीजिए।
Answer: जब फार्मिक अम्ल (\( HCOOH \)) को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (\( H_2SO_4 \)) की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह निर्जलीकरण (dehydration) से गुजरता है और कार्बन मोनोऑक्साइड (\( CO \)) तथा जल (\( H_2O \)) का निर्माण होता है। सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल यहाँ एक निर्जलीकारक एजेंट के रूप में कार्य करता है।
अभिक्रिया का समीकरण:
\[ HCOOH \xrightarrow{\text{सान्द्र } H_2SO_4 \\ \text{373 K}} CO + H_2O \]In simple words: जब फार्मिक अम्ल को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गरम करते हैं, तो फार्मिक अम्ल से पानी निकल जाता है और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है।

🎯 Exam Tip: सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल एक शक्तिशाली निर्जलीकारक एजेंट है और कार्बनिक संश्लेषण में कई निर्जलीकरण अभिक्रियाओं में इसका उपयोग किया जाता है।

 

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न

3. सिलिकॉन

1. जीओलाइट:

2. सिलिकॉन:

 

Question 40. निम्नलिखित से आप क्या समझते हैं –
Answer:
सिलिकॉन:
सिलिकॉन वे यौगिक होते हैं जिनमें ऐल्किल या फेनिल समूह सिलिकॉन परमाणु की बची हुई संयोजकता स्थितियों पर होते हैं. ये पानी से दूर रहने वाले (हाइड्रोफोबिक) गुण के होते हैं. सामान्यतः सिलिकॉन में Si-O-Si बन्ध होता है और इसकी पुनरावर्ती इकाई \( (R_2SiO_2) \) होती है.

संयोजन बहुलकीकरण
\( \text{CH}_3 \)
\( \text{nHO}-\text{Si}-\text{OH} + \text{HO}-\text{Si}-\text{CH}_3 \)
\( \text{CH}_3 \)
\( \downarrow \text{ (-H}_2\text{O)} \)
\( \begin{array}{c} \text{CH}_3 \\ | \\ \text{--O}-\text{Si}-\text{O--} \\ | \\ \text{CH}_3 \end{array} \)

सिलिकेट:
सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO2) को क्षार, क्षारीय ऑक्साइड या कार्बोनेट के साथ बहुत ज़्यादा तापमान पर गर्म करने पर सिलिकेट बनते हैं. ये सिलिकॉन-ऑक्सीजन बन्ध वाले जटिल ठोस होते हैं.
\( SiO_2 + CaO \rightarrow CaSiO_3 \)
\( SiO_2 + Na_2CO_3 \rightarrow Na_2SiO_3 + CO_2 \) सोडियम और पोटैशियम के सिलिकेट पानी में घुलते हैं, जिन्हें 'वाटर ग्लास' कहते हैं. प्रकृति में बहुत सारे सिलिकेट खनिज मिलते हैं. इनके कुछ मुख्य उदाहरण फेल्डस्पार, जीओलाइट, श्वेत अभ्रक (mica) और एस्बेस्टस हैं. सिलिकेट की मूल संरचनात्मक इकाई \( SiO_4^{4-} \) होती है, जिसमें एक सिलिकॉन परमाणु चार ऑक्सीजन परमाणुओं से चतुष्फलकीय रूप में जुड़ा होता है. सिलिकेट में या तो अलग-अलग इकाइयाँ होती हैं या कई इकाइयाँ आपस में जुड़ी होती हैं. हर सिलिकेट इकाई 1, 2, 3 या 4 ऑक्सीजन परमाणुओं को कोनों से साझा करती है. सिलिकॉन-ऑक्सीजन बन्ध वाले ठोस यौगिकों को सिलिकेट कहते हैं. ये सिलिकॉन के ऑक्सी लवण होते हैं. इस आधार पर सिलिकेट कई प्रकार के होते हैं, जैसे - श्रृंखला (Chain), वलय (Ring), परत (Layer) और त्रिविमीय (Three Dimensional) सिलिकेट. सिलिकेट की संरचना पर मौजूद ऋण आवेश को धातु आयनों से संतुलित किया जाता है. जब सिलिकेट में चारों कोने दूसरी चतुष्फलकीय इकाइयों से साझा होते हैं, तो एक त्रिविमीय जालक बनता है.
Si O- O- O- O- (a) \( SiO_4^{4-} \) ऋणायन की चतुष्फलकीय संरचना
Si O O O O (b) \( SiO_4^{4-} \) इकाई का प्रदर्शन

रासायनिक अभिक्रियाशीलता की प्रवृत्तिः
1. वर्ग 13 के तत्वों की त्रिसंयोजी अवस्था में केंद्रीय परमाणु के चारों ओर 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक होते हैं. जैसे BF3, BCl3 आदि में B पर इलेक्ट्रॉन की कमी के कारण ये लुईस अम्ल की तरह काम करते हैं. ये अमोनिया से एक इलेक्ट्रॉन युग्म लेकर उपसहसंयोजक यौगिक बनाते हैं. केंद्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन बढ़ने से लुईस अम्लीय प्रवृत्ति कम हो जाती है. BF3 आसानी से NH3 से एक इलेक्ट्रॉन युग्म लेकर \( BF_3 \leftarrow NH_3 \) उपसहसंयोजक यौगिक बनाता है.
NH₃ F B F F F F B \( \text{B}-\text{F} + \text{NH}_3 \rightarrow \) \( \text{BF}_3 \leftarrow \text{NH}_3 \)
बोरॉन के विभिन्न ट्राइहैलाइडों की लुईस अम्ल शक्ति का क्रम \( BF_3 < BCl_3 < BBr_3 < BI_3 \) होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि \( BF_3 \) में F के छोटे आकार के कारण उसके एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और B के खाली p-कक्षक के बीच सबसे ज़्यादा पश्च बन्धन होता है.
2. वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आकार बढ़ने के कारण इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, इसलिए लुईस अम्ल गुण भी कम होता जाता है.
3. \( AlCl_3 \) में द्विलक (Dimer) बनाने की प्रवृत्ति होती है. इसलिए यह \( Al_2Cl_6 \) के रूप में पाया जाता है. \( AlCl_3 \) का द्विलक चतुष्फलकीय और स्थिर होता है, जिसमें हैलोजन परमाणु सेतु के रूप में मौजूद होता है, जो धातु का अष्टक पूरा करता है. लेकिन B के छोटे आकार के कारण \( BCl_3 \) द्विलक नहीं बनाता है.
Cl Al Cl Al Cl Cl Cl 206 Pm 101° 79° 221 Pm 118°
4. ज़्यादातर त्रिसंयोजी यौगिक \( (MCl_3) \) सहसंयोजी होते हैं, इसलिए वे आसानी से पानी में घुल जाते हैं और चतुष्फलकीय प्रजातियाँ \( [M(OH)_4]^- \) बनाते हैं, जिनमें M, \( sp^3 \) संकरित होता है. B के अलावा अन्य तत्व \( [M(H_2O)_6]^{3+} \) भी बनाते हैं. इसलिए \( AlCl_3 \) के अम्लीय जल-अपघटन से अष्टफलकीय आयन \( [Al(H_2O)_6]^{3+} \) बनता है, जिसमें Al की संकरण अवस्था \( sp^3d^2 \) होती है. बोरॉन में ऐसे यौगिक नहीं बन पाते हैं क्योंकि इसमें d कक्षक नहीं होते हैं.
रासायनिक अभिक्रिया का प्रकारसामान्य अभिक्रिया समीकरण (M = B, Al, Ga, In या Tl)विशिष्ट टिप्पणी
हैलोजनीकरण\( 2M + 3X_2 \rightarrow 2MX_3 \)थैलियम TlX भी देता है.
ऑक्सीकरण\( 4M + 3O_2 \rightarrow 2M_2O_3 \)थैलियम \( Tl_2O \) भी देता है.
सल्फर के साथ\( 2M + 3S \rightarrow M_2S_3 \)थैलियम \( Tl_2S \) भी देता है.
नाइट्रोजन के साथ\( 2M + N_2 \rightarrow 2MN \)B तथा Al के साथ अभिक्रिया उच्च ताप पर होती है.
अम्लों के साथ\( 2M + 6H^+ \rightarrow 2M^{3+} + 3H_2 \)अभिक्रिया Al, Ga तथा In के साथ होती है. Tl इस अभिक्रिया में \( Tl^+ \) आयन बनाता है.
क्षारों के साथ\( 2M + 2OH^- + 2H_2O \rightarrow 2MO_2^- + 3H_2 \)अभिक्रिया Al तथा Ga के साथ होती है. बोरोन \( H_3BO_3 \) बनाता है.

बोरॉन, अधातु के समान अभिक्रियाएँ देता है. इस प्रकार अपने समूह के अन्य सदस्यों से अलग होता है. बोरॉन अनेक धातुओं के साथ अभिक्रिया करके बोराइड बनाता है जबकि इस समूह के अन्य तत्व इस प्रकार की अभिक्रिया नहीं देते हैं.
वायु के प्रति अभिक्रियाशीलता:
क्रिस्टलीय बोरॉन अक्रियाशील होता है, लेकिन वायु के संपर्क में आने पर Al की सतह पर \( Al_2O_3 \) की पतली परत बन जाती है, जिससे आगे अभिक्रिया रुक जाती है. अक्रिस्टलीय B तथा Al को वायु के साथ गर्म करने पर ये \( O_2 \) से क्रिया करके क्रमशः \( B_2O_3 \) तथा \( Al_2O_3 \) बनाते हैं. इसी प्रकार वर्ग के अन्य तत्व भी वायु की ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके \( E_2O_3 \) प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं.
13वें वर्ग के सभी तत्व उच्च ताप पर नाइट्रोजन के साथ क्रिया करके नाइट्राइड बनाते हैं -
\( 2E (s) + N_2 (g) \rightarrow 2EN (s) \)
वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर ऑक्साइडों की अम्लीय प्रवृत्ति कम होती है, यानि क्षारीय प्रवृत्ति बढ़ती है, जैसे - \( B_2O_3 \) अम्लीय होता है जो क्षारीय ऑक्साइड (धातु-ऑक्साइड) से क्रिया करके धात्विक बोरेट बनाता है. ऐलुमिनियम तथा गैलियम के ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं, जबकि इंडियम तथा थैलियम के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं.
कार्बन (अपररूप):
कार्बन में अपररूपता दर्शाने का गुण पाया जाता है.
अपररूपता:
अधात्विक तत्वों का वह गुण जिसमें कोई तत्व प्रकृति में दो या दो से ज़्यादा अलग-अलग रूपों में पाया जाता है. इन रूपों को अपररूप कहते हैं और इस गुण को अपररूपता कहते हैं. अपररूपों के भौतिक गुण अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनकी ज़्यादातर रासायनिक अभिक्रियाएँ समान होती हैं. कार्बन के दो प्रकार के अपररूप होते हैं - क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय.
हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन के दो मुख्य क्रिस्टलीय अपररूप हैं. कार्बन का तीसरा क्रिस्टलीय अपररूप फुलरीन है, जिसकी खोज एच.डब्ल्यू. क्रोटो, ई. स्मैले तथा आर.एफ. कर्ल ने 1985 में की थी, जिसके लिए इन्हें 1996 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था.
हीरा:
हीरा सबसे कठोर ठोस पदार्थ है. इसका घनत्व, गलनांक और अपवर्तनांक ज़्यादा होता है. हीरे में मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए यह विद्युत का कुचालक होता है. यह अक्रिय होता है लेकिन ज़्यादा तापमान (975K) पर ऑक्सीजन में जलकर \( CO_2 \) बनाता है. हीरे का उपयोग धार तेज करने के लिए अपघर्षण (Abrasive) के रूप में, रूपदा (Dies) बनाने में और प्रकाश विद्युत लैंप में टंगस्टन तंतु बनाने में किया जाता है.
हीरा की संरचना
ग्रेफाइट:
ग्रेफाइट गहरे भूरे रंग का होता है और इसकी परतदार संरचना (layered structure) होती है. ये परतें वान्डरवाल बलों से जुड़ी होती हैं और दो परतों के बीच की दूरी 340 pm होती है. प्रत्येक परत में कार्बन परमाणु षट्कोणीय वलय के रूप में व्यवस्थित होते हैं, जिसमें C – C बन्ध की लम्बाई 141.5 pm होती है. इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु \( sp^2 \) संकरित होता है और तीन पास के कार्बन परमाणुओं से तीन सिग्मा बन्ध बनाता है. चौथा इलेक्ट्रॉन -बन्ध बनाता है. ये इलेक्ट्रॉन परतों के बीच घूमते रहते हैं, इसलिए ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है और इसे आसानी से तोड़ा जा सकता है. इसी कारण ग्रेफाइट मुलायम (soft) और चिकना (slippery) होता है.
ग्रेफाइट की संरचना 340
ग्रेफाइट में धात्विक चमक होती है और यह कार्बन का स्थायी अपररूप है. ज़्यादा तापमान पर जिन मशीनों में स्नेहक के रूप में तेल का प्रयोग नहीं हो सकता, उनमें ग्रेफाइट को सूखे स्नेहक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
फुलरीन्स:
फुलरीन कार्बन का एक और रूप है, जिसकी खोज एच.डब्ल्यू. क्रोटो, ई. स्मैले और आर.एफ. कर्ल ने 1985 में की थी. इस खोज के लिए उन्हें 1996 में नोबेल पुरस्कार मिला था. हीलियम, आर्गन आदि उत्कृष्ट गैसों की उपस्थिति में ग्रेफाइट को विद्युत आर्क (Electric arc) में गर्म करने पर फुलरीन बनता है. वाष्पित और छोटे C अणुओं को ठंडा करने पर एक काली चीज़ मिलती है जिसमें मुख्य रूप से \( C_{60} \), कुछ मात्रा में \( C_{70} \) और बहुत कम मात्रा में 350 या ज़्यादा समसंख्या (even number) में कार्बन फुलरीन होते हैं. फुलरीन कार्बन का सबसे शुद्ध रूप है, क्योंकि इसमें कोई भी झूलता बन्ध (dangling bonds) नहीं होता है. फुलरीन की संरचना पिंजरानुमा होती है. \( (C_{60}) \) अणु का आकार सॉकर बॉल (फुटबॉल) जैसा होता है. इसलिए इसे बकमिन्स्टर फुलरीन (Buckminster) या बकी बॉल (Bucky ball) भी कहते हैं.
फुलरीन की संरचना
फुलरीन की संरचना में बीस वलय, छः सदस्यीय (षट्कोणीय) और बारह वलय, पाँच सदस्यीय (पंचकोणीय) होती हैं. एक छः सदस्यीय वलय छः या पाँच सदस्यीय वलय के साथ जुड़ा होता है, जबकि पाँच सदस्यीय वलय सिर्फ छः सदस्यीय वलय के साथ जुड़ा होता है. फुलरीन के सभी कार्बन परमाणु समान होते हैं और \( sp^2 \) संकरित होते हैं. इसका हर कार्बन परमाणु अन्य तीन कार्बन परमाणुओं के साथ तीन बन्ध बनाता है और चौथा इलेक्ट्रॉन पूरे अणु पर फैला रहता है, इसलिए फुलरीन में ऐरोमैटिक गुण होता है. फुलरीन के गेंद के आकार के अणु में 60 कोने (vertices) होते हैं और हर कोने पर एक कार्बन परमाणु होता है जिस पर एकल और द्विबन्ध दोनों होते हैं, जिनकी C - C बन्ध लम्बाई क्रमशः 143.5 pm और 138.3 pm होती है. फुलरीन एक सममित अणु है और इसके यौगिक विद्युत का संचालन करते हैं. ऊष्मागतिक रूप से कार्बन का सबसे स्थिर अपररूप ग्रेफाइट है, इसलिए इसकी मानक संभवन ऊष्मा \( (\Delta_fH^\circ) \) को शून्य माना जाता है और हीरा व फुलरीन के लिए ये मान क्रमशः 1.90 और 38.1 kJ mol-1 होते हैं. कार्बन के अन्य रूप कार्बन ब्लैक, कोक और चारकोल हैं, जो ग्रेफाइट तथा फुलरीन के अशुद्ध रूप होते हैं. जब हाइड्रोकार्बन को वायु की सीमित मात्रा में जलाया जाता है तो कार्बन ब्लैक मिलता है और लकड़ी या कोयले को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने पर चारकोल और कोक मिलते हैं.
In simple words: यह प्रश्न विभिन्न कार्बन अपररूपों जैसे सिलिकॉन, सिलिकेट, हीरा, ग्रेफाइट और फुलरीन की विशेषताओं और रासायनिक व्यवहार को पूछता है, साथ ही समूह 13 के तत्वों की रासायनिक अभिक्रियाशीलता की व्याख्या करता है.

🎯 Exam Tip: इस तरह के विस्तृत प्रश्नों के लिए, मुख्य बिंदुओं को उप-शीर्षकों में बांटकर और जहाँ आवश्यक हो, समीकरणों या संरचनाओं का उपयोग करके उत्तर दें. यह जानकारी को व्यवस्थित और समझने में आसान बनाता है.

 

Question 41. निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण करते हुए सन्तुलित कीजिए –
(i) ZnO+ CO →
(ii) C + H2O →
(iii) B2H6+ O2 →
(iv) H3BO3 \( \xrightarrow{\text{A}} \)
(v) Al + NaOH →
(vi) BF3 + NH3 →
Answer:
(i) \( ZnO + CO \rightarrow Zn + CO_2 \)
(ii) \( C + H_2O \rightarrow CO + H_2 \)
(iii) \( B_2H_6 + 3O_2 \rightarrow B_2O_3 + 3H_2O \)
(iv) \( 2H_3BO_3 \xrightarrow{\text{Heat}} B_2O_3 + 3H_2O \)
(v) \( 2Al + 2NaOH + 2H_2O \rightarrow 2Na[Al(OH)_4] + 3H_2 \)
(vi) \( BF_3 + NH_3 \rightarrow F_3B \leftarrow NH_3 \)
In simple words: इन रासायनिक समीकरणों में, हमने अभिकारकों को सही उत्पादों में बदल दिया और सुनिश्चित किया कि समीकरण के दोनों ओर परमाणुओं की संख्या बराबर हो.

🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरणों को संतुलित करते समय, सबसे पहले बड़े अणुओं और फिर अलग-अलग परमाणुओं को संतुलित करने का प्रयास करें. ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को आमतौर पर अंत में संतुलित किया जाता है.

 

Question 42. इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक क्या होते हैं? क्या BCl3 तथा SiCl4 इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक हैं? समझाइये।
Answer:
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक वे सहसंयोजक यौगिक होते हैं जिनमें केंद्रीय परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है. यानी, वे लुईस अम्ल की तरह व्यवहार करते हैं क्योंकि उनका अष्टक अधूरा होता है. वे अपने खाली कक्षक में इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकते हैं. BCl3 और SiCl4 इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक हैं.
BCl3 में बोरॉन परमाणु पर खाली p कक्षक और अधूरे अष्टक के कारण यह इलेक्ट्रॉन न्यून होता है. इसलिए इसमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बहुत ज़्यादा होती है और यह एक मजबूत इलेक्ट्रॉन ग्राही की तरह काम करता है.
इसी तरह, SiCl4 हैलाइड आयनों के साथ हेक्सा हैलो संकुल बनाते हैं जिससे Si की उपसहसंयोजन संख्या 4 से बढ़कर 6 हो जाती है. इसका मतलब है कि SiCl4 हैलाइड आयनों से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक और एक मजबूत लुईस अम्ल की तरह व्यवहार करता है.
In simple words: इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिकों में केंद्रीय परमाणु के पास पूरे 8 इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं, इसलिए वे इलेक्ट्रॉन लेने की कोशिश करते हैं. BCl3 और SiCl4 ऐसे यौगिक हैं क्योंकि उनके केंद्रीय परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन कम होते हैं और वे इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिकों को पहचानते समय, केंद्रीय परमाणु के संयोजी इलेक्ट्रॉनों और उसके आसपास के बन्धों की संख्या पर ध्यान दें. यदि केंद्रीय परमाणु के पास 8 से कम संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं, तो वह इलेक्ट्रॉन न्यून होगा.

 

Question 43. निम्नलिखित को कारण सहित समझाइए –
1. लेड (+2) क्लोराइड \( Cl_2 \) से क्रिया कर \( PbCl_4 \) देता है.
2. लेड (+4) क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यधिक स्थायी है.
3. सान्द्र HNO3 का परिवहन ऐलुमिनियम के पात्र द्वारा किया जा सकता है.
4. ग्रेफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है.
Answer:
1. लेड (+2) क्लोराइड \( (PbCl_2) \) क्लोरीन \( (Cl_2) \) से क्रिया करके \( PbCl_4 \) देता है क्योंकि लेड में \( +2 \) ऑक्सीकरण अवस्था \( +4 \) ऑक्सीकरण अवस्था से ज़्यादा स्थिर होती है.
2. लेड (+4) क्लोराइड \( (PbCl_4) \) ऊष्मा के प्रति अत्यधिक अस्थायी है क्योंकि लेड में \( +4 \) ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में \( +2 \) ऑक्सीकरण अवस्था ज़्यादा स्थिर होती है. ऊष्मा देने पर \( PbCl_4 \), \( PbCl_2 \) में अपघटित हो जाता है.
3. सान्द्र नाइट्रिक अम्ल \( (HNO_3) \) को ऐलुमिनियम के पात्र द्वारा सुरक्षित रूप से ले जाया जा सकता है क्योंकि सान्द्र \( HNO_3 \), ऐलुमिनियम की सतह पर एक निष्क्रिय ऑक्साइड की परत बना देता है. यह ऑक्साइड परत ऐलुमिनियम को आगे की अभिक्रिया से बचाती है.
4. ग्रेफाइट का उपयोग शुष्क स्नेहक के रूप में किया जाता है क्योंकि इसकी परतदार संरचना होती है. ये परतें वान्डरवाल बलों से जुड़ी होती हैं और एक दूसरे पर आसानी से फिसल सकती हैं. परतों के बीच की दूरी 340 pm होती है. प्रत्येक परत में कार्बन परमाणु षट्कोणीय वलय के रूप में व्यवस्थित होते हैं, जिसमें C – C बन्ध की लम्बाई 141.5 pm होती है. इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु \( sp^2 \) संकरित होता है और तीन निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं से तीन सिग्मा बन्ध बनाता है. चौथा इलेक्ट्रॉन -बन्ध बनाता है. ये इलेक्ट्रॉन परतों के बीच घूमते रहते हैं और गतिशील होते हैं, जिससे ग्रेफाइट मुलायम (soft) और चिकना (slippery) होता है, जो इसे शुष्क स्नेहक के लिए उपयोगी बनाता है.
In simple words: इस प्रश्न में, हम लेड क्लोराइडों की स्थिरता, ऐलुमिनियम के साथ नाइट्रिक अम्ल की प्रतिक्रिया और ग्रेफाइट के शुष्क स्नेहक के रूप में उपयोग के पीछे के कारणों को समझते हैं, जो उनकी रासायनिक और भौतिक गुणों पर आधारित हैं.

🎯 Exam Tip: "कारण सहित समझाइए" प्रकार के प्रश्नों के लिए, हमेशा दिए गए कथन के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत या रासायनिक गुण को स्पष्ट रूप से बताएं. ऑक्सीकरण अवस्थाओं की स्थिरता, निष्क्रियता और संरचनात्मक विशेषताओं पर ध्यान दें.

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