RBSE Solutions Class 11 Chemistry Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

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Class 11 Chemistry Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौनसा क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट ताप के प्रति सबसे अधिक स्थायी है -
(अ) MgCO3
(ब) CaCO3
(स) SrCO3
(द) BaCO3
Answer: (द) BaCO3
In simple words: क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट की स्थिरता नीचे जाने पर बढ़ती है। इसलिए, BaCO3 सबसे अधिक स्थिर है क्योंकि Ba समूह में सबसे नीचे आता है।

🎯 Exam Tip: कार्बोनेटों का तापीय स्थायित्व समूह में नीचे जाने पर बढ़ता है क्योंकि आयनिक त्रिज्या में वृद्धि के कारण ध्रुवण क्षमता कम होती जाती है।

 

Question 2. निम्न में से कौनसा यौगिक साल्वे अमोनिया प्रक्रम में सह उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है –
(अ) कार्बन डाइ ऑक्साइड
(ब) अमोनिया
Answer: (अ) कार्बन डाइ ऑक्साइड
In simple words: साल्वे अमोनिया प्रक्रिया में, जब सोडियम कार्बोनेट बनाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड एक अतिरिक्त उत्पाद के रूप में निकलती है।

🎯 Exam Tip: साल्वे प्रक्रिया के मुख्य उत्पादों और सह-उत्पादों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रक्रिया औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. निम्न में से किसके द्वारा ज्वाला परीक्षण नहीं दिया जाता है –
(अ) Be
(ब) K
(स) Sr
(द) Na
Answer: (अ) Be
In simple words: बेरिलियम ज्वाला परीक्षण नहीं देता है क्योंकि इसके इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करने के लिए बहुत ज़्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

🎯 Exam Tip: ज्वाला परीक्षण का उपयोग उन तत्वों की पहचान के लिए किया जाता है जिनके बाहरी इलेक्ट्रॉन कम ऊर्जा पर उत्तेजित हो सकते हैं, जिससे दृश्य प्रकाश उत्सर्जित होता है।

 

Question 5. निम्नलिखित में से किस धातु का गलनांक न्यूनतम है –
(अ) Na
(ब) K
(स) Rb
(द) Cs
Answer: (द) Cs
In simple words: सीज़ियम का गलनांक सबसे कम होता है क्योंकि इसका धात्विक बंध सबसे कमजोर होता है।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं में, समूह में नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, जिससे धात्विक बंध की शक्ति कम हो जाती है और गलनांक घटता जाता है।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. वर्ग। के तत्त्व क्षार धातु क्यों कहलाते हैं?
Answer: वर्ग I के तत्व क्षार धातु कहलाते हैं क्योंकि ये नरम होते हैं, बिजली के अच्छे सुचालक होते हैं और धात्विक प्रकृति के होते हैं। इसके साथ ही, ये पानी के साथ प्रतिक्रिया करके मजबूत क्षारीय हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं। इन तत्वों को इसी कारण क्षार धातु कहा जाता है।
In simple words: वर्ग I के तत्व पानी से क्रिया करके मजबूत क्षारीय पदार्थ बनाते हैं, इसलिए इन्हें क्षार धातु कहते हैं।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं की मुख्य विशेषताओं में उनकी उच्च प्रतिक्रियाशीलता और क्षारीय ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड बनाने की क्षमता शामिल है।

 

Question 8. क्षार धातुएँ प्रकृति में प्रबल विद्युत धनी हैं, क्यों?
Answer: क्षार धातुएँ प्रकृति में बहुत प्रबल विद्युत धनी होती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। इस एक इलेक्ट्रॉन को थोड़ी सी ऊर्जा देने पर भी वे आसानी से खो देते हैं, जिससे वे सकारात्मक आयन बनाते हैं। यही कारण है कि वे विद्युत धनी कहलाते हैं।
In simple words: क्षार धातुएँ अपने बाहरी इलेक्ट्रॉन को आसानी से खो देती हैं, जिससे वे प्रबल विद्युत धनी बन जाती हैं।

🎯 Exam Tip: धातुओं की विद्युत धनात्मकता उनके आयनीकरण एन्थैल्पी (इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा) से संबंधित होती है; जितनी कम आयनीकरण एन्थैल्पी होती है, उतनी ही अधिक विद्युत धनात्मकता होती है।

 

Question 9. कौनसे धातु आयन हमारे शरीर में रक्त का थक्का जमने के लिए उत्तरदायी है?
Answer: शरीर में रक्त का थक्का जमने के लिए \( \text{Ca}^{++} \) आयन मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं। कैल्शियम आयन रक्त के जमावट तंत्र में कई चरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे चोट लगने पर रक्तस्राव को रोकने में मदद मिलती है।
In simple words: हमारे शरीर में रक्त का थक्का जमने के लिए कैल्शियम आयन बहुत जरूरी होते हैं।

🎯 Exam Tip: कैल्शियम आयन ( \( \text{Ca}^{++} \) ) रक्त के जमावट प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कोफैक्टर के रूप में कार्य करते हैं, जिससे प्रोटीन और एंजाइमों को ठीक से काम करने में मदद मिलती है।

 

Question 10. क्षार धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दीजिये।
Answer: क्षार धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं:
\( \text{3Li } 1\text{s}^22\text{s}^1 \)
\( \text{11Na } 1\text{s}^22\text{s}^22\text{p}^63\text{s}^1 \)
\( \text{19K } 1\text{s}^22\text{s}^22\text{p}^63\text{s}^23\text{p}^64\text{s}^1 \)
\( \text{37Rb } 1\text{s}^22\text{s}^22\text{p}^63\text{s}^23\text{p}^63\text{d}^{10}4\text{s}^24\text{p}^65\text{s}^1 \)
\( \text{55Cs } 1\text{s}^22\text{s}^22\text{p}^63\text{s}^23\text{p}^63\text{d}^{10}4\text{s}^24\text{p}^64\text{d}^{10}5\text{s}^25\text{p}^66\text{s}^1 \)
\( \text{87Fr } [\text{Rn}]7\text{s}^1 \) यहाँ, हर तत्व के अंतिम इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी 's' ऑर्बिटल में होते हैं, जो उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता को निर्धारित करता है।
In simple words: क्षार धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में सबसे बाहरी शेल में सिर्फ एक 's' इलेक्ट्रॉन होता है।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( \text{ns}^1 \) होता है, जहाँ 'n' बाहरी शेल की संख्या दर्शाता है। यह विन्यास उनकी रासायनिक क्रियाशीलता का मुख्य कारण है।

 

Question 11. Na2O2 में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।
Answer: \( \text{Na}_2\text{O}_2 \) में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करने के लिए, हम जानते हैं कि ऑक्सीजन परऑक्साइड में \( -1 \) ऑक्सीकरण अवस्था में होता है। यदि सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था \( \text{x} \) है, तो समीकरण इस प्रकार होगा:
\( 2\text{x} + 2(-1) = 0 \)
\( \implies 2\text{x} - 2 = 0 \)
\( \implies 2\text{x} = 2 \)
\( \implies \text{x} = 1 \)
अतः, \( \text{Na}_2\text{O}_2 \) में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था \( +1 \) होती है। सोडियम हमेशा \( +1 \) ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।
In simple words: \( \text{Na}_2\text{O}_2 \) में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था \( +1 \) होती है, क्योंकि ऑक्सीजन परऑक्साइड में \( -1 \) होता है।

🎯 Exam Tip: परऑक्साइडों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -1 \) होती है, जो सामान्य ऑक्साइडों से अलग है जहाँ ऑक्सीजन \( -2 \) ऑक्सीकरण अवस्था में होता है।

 

Question 12. पोटेशियम की तलना में सोडियम कम क्रियाशील है क्यों?
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर स्रोत में अनुपलब्ध है। क्रियाशीलता की तुलना आयनन एन्थैल्पी, परमाणु आकार और इलेक्ट्रोनेगेटिविटी जैसे कारकों पर आधारित होती है।

 

Question 13. क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुएँ रासायनिक अपचयन विधि से क्यों नहीं प्राप्त किए जा सकते हैं?
Answer: क्षार धातुएँ और क्षारीय मृदा धातुएँ बहुत प्रबल अपचायक एजेंट होती हैं। इसका मतलब है कि वे आसानी से इलेक्ट्रॉन दान कर देती हैं। इसलिए, उनके ऑक्साइड या हैलाइड को किसी भी अन्य तत्व या यौगिक द्वारा कम करना संभव नहीं होता है क्योंकि ये धातुएँ स्वयं ही बहुत अच्छी अपचायक हैं और इससे भी अधिक प्रबल अपचायक उपलब्ध नहीं होते हैं।
In simple words: क्षार धातुएँ और क्षारीय मृदा धातुएँ बहुत अच्छे अपचायक होते हैं, इसलिए उन्हें रासायनिक अपचयन से बनाना मुश्किल है।

🎯 Exam Tip: इन धातुओं को आमतौर पर उनके पिघले हुए लवणों के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है, क्योंकि रासायनिक अपचयन विधि पर्याप्त शक्तिशाली नहीं होती है।

 

Question 14. पोटेशियम कार्बोनेट साल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है? क्यों?
Answer: पोटेशियम कार्बोनेट को साल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है। इसका कारण यह है कि साल्वे विधि में बनने वाला पोटेशियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ( \( \text{KHCO}_3 \) ) पोटेशियम क्लोराइड ( \( \text{KCl} \) ) विलयन में बहुत अधिक घुलनशील होता है। अमोनिया-सोडा प्रक्रिया में, अमोनियम बाईकार्बोनेट सोडियम क्लोराइड के साथ प्रतिक्रिया करके सोडियम बाईकार्बोनेट (जो कम घुलनशील होता है) बनाता है, लेकिन पोटेशियम के साथ ऐसा नहीं होता है।
In simple words: पोटेशियम कार्बोनेट साल्वे विधि से नहीं बन सकता क्योंकि इससे बना \( \text{KHCO}_3 \) \( \text{KCl} \) में बहुत घुलनशील होता है।

🎯 Exam Tip: साल्वे विधि मुख्य रूप से सोडियम कार्बोनेट (सोडा ऐश) के उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है, जो सोडियम बाईकार्बोनेट की कम घुलनशीलता पर आधारित है।

 

Question 15. बिना बझे चने को जब सिलिका के साथ गरम किया जाता है तब क्या अभिक्रिया होती है?
Answer: जब बिना बुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड, \( \text{CaO} \)) को सिलिका (सिलिकॉन डाइऑक्साइड, \( \text{SiO}_2 \)) के साथ उच्च तापमान पर गरम किया जाता है (1270K से अधिक), तो कैल्शियम सिलिकेट ( \( \text{CaSiO}_3 \) ) बनता है। यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिक्रिया है जो धातुकर्म में स्लैग निर्माण के लिए होती है।
\( \text{CaO} + \text{SiO}_2 \xrightarrow{ >1270K } \text{CaSiO}_3 \)
In simple words: जब चूना और सिलिका गर्म होते हैं, तो वे मिलकर कैल्शियम सिलिकेट बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: यह प्रतिक्रिया ब्लास्ट फर्नेस में स्लैग के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कैल्शियम ऑक्साइड, सिलिका से अशुद्धियों को हटाकर कैल्शियम सिलिकेट स्लैग बनाता है।

 

Question 16. क्षार धातुओं के द्वितीय आयनन विभव के मान प्रथम से अधिक क्यों होते हैं?
Answer: क्षार धातुओं के लिए द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभव से काफी अधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पहला इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद, परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन कम हो जाता है, और बचा हुआ आयन ( \( \text{M}^+ \) ) उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेता है। यह आयन अब स्थिर और छोटा हो जाता है। इस स्थिर और छोटे आयन से दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक मजबूती से बंधे होते हैं।
In simple words: पहला इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद, क्षार धातु का आयन बहुत स्थिर हो जाता है, इसलिए दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत मुश्किल होता है और इसके लिए अधिक ऊर्जा चाहिए।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं में पहले इलेक्ट्रॉन के बाद उत्कृष्ट गैस विन्यास बनता है, जो अत्यधिक स्थिर होता है और दूसरे इलेक्ट्रॉन को हटाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

 

Question 17. लीथियम यौगिक सहसंयोजक प्रकृति के क्यों होते हैं?
Answer: लीथियम के यौगिकों में सहसंयोजक प्रकृति अधिक होती है क्योंकि लीथियम आयन ( \( \text{Li}^+ \) ) का आकार अन्य क्षार धातुओं की तुलना में बहुत छोटा होता है। इसका छोटा आकार और उच्च ध्रुवण शक्ति, बड़े ऋणायनों जैसे हैलाइड आयनों को ध्रुवित करने की क्षमता रखता है। इस ध्रुवण के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व दोनों परमाणुओं के बीच साझा हो जाता है, जिससे यौगिकों में सहसंयोजक गुण प्रदर्शित होते हैं।
In simple words: लीथियम का छोटा आकार इसे अन्य परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने देता है, जिससे उसके यौगिक सहसंयोजक होते हैं।

🎯 Exam Tip: फ़ज़ान्स के नियम के अनुसार, छोटे धनायन और बड़े ऋणायन के संयोजन से बनने वाले यौगिकों में सहसंयोजक गुण अधिक होते हैं, जो लीथियम के व्यवहार की व्याख्या करता है।

 

Question 19. हाइड्रोलिथ क्या है? यह जल से कैसे क्रिया करता है?
Answer: हाइड्रोलिथ कैल्सियम हाइड्राइड ( \( \text{CaH}_2 \) ) को कहते हैं। यह एक सफेद, क्रिस्टलीय ठोस है। जब हाइड्रोलिथ पानी के साथ क्रिया करता है, तो यह तेजी से हाइड्रोजन गैस ( \( \text{H}_2 \) ) बनाता है। इस प्रतिक्रिया में कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{Ca(OH)}_2 \) ) भी बनता है। यह प्रतिक्रिया हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
\( \text{CaH}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2 + 2\text{H}_2 \)
In simple words: हाइड्रोलिथ कैल्सियम हाइड्राइड है, जो पानी से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाता है।

🎯 Exam Tip: कैल्सियम हाइड्राइड एक मजबूत अपचायक है और इसे अक्सर पोर्टेबल हाइड्रोजन जनरेटर के रूप में उपयोग किया जाता है।

 

Question 20. NaOH और Mg(OH)2 में से कौनसा प्रबल क्षार है?
Answer: \( \text{NaOH} \) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) और \( \text{Mg(OH)}_2 \) (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) की तुलना में, \( \text{NaOH} \) एक प्रबल क्षार है। इसका कारण यह है कि मैग्नीशियम की तुलना में सोडियम की आयनन एन्थैल्पी कम होती है, जिसका अर्थ है कि सोडियम आसानी से अपने इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है। इसलिए, \( \text{NaOH} \) जलीय विलयन में \( \text{OH}^- \) आयनों को अधिक आसानी से मुक्त करता है, जिससे इसकी क्षारीय शक्ति बढ़ जाती है।
In simple words: \( \text{NaOH} \) एक प्रबल क्षार है क्योंकि सोडियम आसानी से इलेक्ट्रॉन खो देता है और ज़्यादा \( \text{OH}^- \) आयन देता है।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइड क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइड की तुलना में अधिक प्रबल क्षार होते हैं क्योंकि उनकी आयनन एन्थैल्पी कम होती है, जिससे वे आसानी से \( \text{OH}^- \) आयन मुक्त करते हैं।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 21. निम्नलिखित के सन्दर्भ में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातु की तुलना कीजिए –
• आयनन एन्थैल्पी
• परमाण्वीय त्रिज्याएँ।
Answer:

गुणक्षार धातुक्षारीय मृदा धातु
आयनन एन्थैल्पीइनकी आयनन एन्थैल्पी कम होती है क्योंकि इनका आकार बड़ा होता है एवं नाभिकीय आवेश कम होता है।आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत उच्च होती है क्योंकि इनका नाभिकीय आवेश अधिक होता है।
परमाण्वीय त्रिज्याइनका नाभिकीय आवेश अपेक्षाकृत कम होने के कारण परमाण्वीय त्रिज्या अधिक होती है।नाभिकीय आवेश अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण परमाण्वीय त्रिज्या अपेक्षाकृत कम होती है।
क्षार धातुएँ अपने बड़े आकार और कम प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण आसानी से इलेक्ट्रॉन खो देती हैं, जिससे उनकी आयनन एन्थैल्पी कम हो जाती है। इसके विपरीत, क्षारीय मृदा धातुएँ छोटे आकार और अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण इलेक्ट्रॉनों को अधिक कसकर पकड़े रहती हैं।
In simple words: क्षार धातुएँ बड़ी होती हैं और आसानी से इलेक्ट्रॉन खो देती हैं (कम आयनन एन्थैल्पी), जबकि क्षारीय मृदा धातुएँ छोटी होती हैं और इलेक्ट्रॉन कसकर पकड़े रहती हैं (अधिक आयनन एन्थैल्पी)।

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है, जबकि एक ही समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है और आयनन एन्थैल्पी घटती है।

 

Question 23. सोडियम क्लोराइड से प्रारम्भ करके निम्नलिखित को आप कैसे बनायेंगे –
1. सोडियम हाइड्रोक्साइड
2. सोडियम कार्बोनेट।
Answer:
1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH):
औद्योगिक स्तर पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण कास्टनर-कैलनर सेल में सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। इस सेल में मर्करी को कैथोड के रूप में और ग्रेफाइट को एनोड के रूप में उपयोग किया जाता है। जब ब्राइन विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो सोडियम धातु मर्करी कैथोड पर विसर्जित होकर मर्करी के साथ मिलकर सोडियम अमलगम बनाती है। साथ ही, एनोड पर क्लोरीन गैस मुक्त होती है।
रासायनिक अभिक्रियाएँ इस प्रकार होती हैं:
\( 2\text{NaCl} \xrightarrow{ \text{H}_2\text{O} } 2\text{Na}^+ + 2\text{Cl}^- \)
कैथोड पर: \( 2\text{Na}^+ + 2\text{e}^- \xrightarrow{ \text{मर्करी} } 2\text{Na (धातु)} \)
एनोड पर: \( 2\text{Cl}^- \rightarrow \text{Cl}_2 + 2\text{e}^- \)
इस प्रकार बना सोडियम अमलगम फिर जल के साथ क्रिया करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{NaOH} \) ) और हाइड्रोजन गैस ( \( \text{H}_2 \) ) देता है।
\( 2\text{Na-Hg} + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NaOH} + 2\text{Hg}\downarrow + \text{H}_2\uparrow \)
सोडियम अमलगम (Na-Hg) इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती यौगिक है जो पारा के साथ सोडियम के मिश्रण को दर्शाता है।
2. सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3):
सोडियम कार्बोनेट को साल्वे प्रक्रम द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में पहले अमोनिया ( \( \text{NH}_3 \) ), कार्बन डाइऑक्साइड ( \( \text{CO}_2 \) ) और पानी से अमोनियम कार्बोनेट बनाया जाता है। फिर अमोनियम कार्बोनेट से अमोनियम बाईकार्बोनेट बनता है, जो सोडियम क्लोराइड ( \( \text{NaCl} \) ) के साथ प्रतिक्रिया करके सोडियम बाईकार्बोनेट ( \( \text{NaHCO}_3 \) ) और अमोनियम क्लोराइड ( \( \text{NH}_4\text{Cl} \) ) बनाता है। अंत में, सोडियम बाईकार्बोनेट को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट ( \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) ) प्राप्त किया जाता है।
अभिक्रियाएँ इस प्रकार होती हैं:
\( 2\text{NH}_3 + \text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 \)
\( (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 + \text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NH}_4\text{HCO}_3 \)
\( \text{NH}_4\text{HCO}_3 + \text{NaCl} \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl} + \text{NaHCO}_3 \)
\( 2\text{NaHCO}_3 \xrightarrow{ \Delta } \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{CO}_2\uparrow + \text{H}_2\text{O} \)
In simple words: सोडियम हाइड्रोक्साइड को ब्राइन के विद्युत अपघटन से बनाते हैं और सोडियम कार्बोनेट को साल्वे विधि से बनाते हैं, जिसमें कई रासायनिक चरण होते हैं।

🎯 Exam Tip: सोडियम हाइड्रोक्साइड और सोडियम कार्बोनेट दोनों महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन हैं, और उनकी निर्माण प्रक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 25. क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में नीला रंग क्यों देती हैं?
Answer: क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया ( \( \text{NH}_3 \) ) में घुल जाती हैं और यह घोल गहरा नीला रंग दिखाता है। यह नीला रंग अमोनिकृत इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। ये अमोनिकृत इलेक्ट्रॉन प्रकाश के दृश्य क्षेत्र से ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और फिर नीले रंग को उत्सर्जित करते हैं। यह घोल विद्युत का सुचालक भी होता है।
इस प्रक्रिया में, क्षार धातु ( \( \text{M} \) ) अमोनिया के साथ प्रतिक्रिया करके अमोनिकृत धातु आयन और अमोनिकृत इलेक्ट्रॉन बनाती है:
\( \text{M} + (\text{x} + \text{y}) \text{NH}_3 \rightarrow [\text{M}(\text{NH}_3)_\text{x}]^+ + [\text{e}(\text{NH}_3)_\text{y}]^- \)
यह नीला रंग अमोनिया में इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है जो दृश्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं।
In simple words: क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलने पर नीले रंग के इलेक्ट्रॉन बनाती हैं, जिससे घोल नीला दिखता है।

🎯 Exam Tip: अमोनिकृत इलेक्ट्रॉन अनुचुंबकीय होते हैं और ये विलयन को नीला रंग देते हैं। उच्च सांद्रता पर, विलयन का रंग बदलकर कांस्य हो जाता है।

 

Question 26. H2 अणु है लेकिन He₂ अणु अज्ञात है। समझाइए क्यों?
Answer: हाइड्रोजन ( \( \text{H} \) ) परमाणु की बाहरी कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन होता है। जब दो हाइड्रोजन परमाणु एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो वे अपने ऑर्बिटलों का अतिव्यापन करके एक \( \text{H}_2 \) अणु बनाते हैं। इस अतिव्यापन से दोनों परमाणुओं के बीच एक सहसंयोजक बंध बनता है, जिससे उनकी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पूर्ण हो जाती है (डुप्लेट, 2 इलेक्ट्रॉन)।
दूसरी ओर, हीलियम ( \( \text{He} \) ) परमाणु की बाहरी कक्षा में पहले से ही 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो एक स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है। हीलियम में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है जो बंध बना सके। इसलिए, दो हीलियम परमाणु एक-दूसरे के साथ अतिव्यापन करके स्थायी \( \text{He}_2 \) अणु नहीं बनाते हैं।
In simple words: हाइड्रोजन बंध बना सकता है क्योंकि उसके पास एक खाली जगह होती है, लेकिन हीलियम के पास पहले से ही 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह बंध नहीं बनाता है।

🎯 Exam Tip: अणु बनने की प्रवृत्ति परमाणुओं की स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने की क्षमता पर निर्भर करती है। हाइड्रोजन एक इलेक्ट्रॉन साझा करके स्थायी हो जाता है, जबकि हीलियम पहले से ही स्थिर है।

 

Question 27. ऑक्साइड, परऑक्साइड और सुपर ऑक्साइड क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer:
1. ऑक्साइड: इन यौगिकों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -2 \) होती है। उदाहरण के लिए, \( \text{Na}_2\text{O} \), \( \text{Fe}_2\text{O}_3 \), \( \text{BaO} \) । ये सबसे सामान्य प्रकार के ऑक्सीजन यौगिक हैं।
2. परऑक्साइड: इन यौगिकों में परऑक्साइड आयन ( \( [\text{O}-\text{O}]^{2-} \) ) होता है, जहाँ ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -1 \) होती है। ये प्रतिचुम्बकीय होते हैं और प्रबल सुपर ऑक्सीकारक होते हैं। उदाहरण के लिए, \( \text{Na}_2\text{O}_2 \), \( \text{BaO}_2 \)।
3. सुपर ऑक्साइड: इन यौगिकों में सुपर ऑक्साइड आयन ( \( [\text{O}_2]^- \) ) होता है, जहाँ ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -\frac{1}{2} \) होती है। ये अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण अनुचुम्बकीय और रंगीन होते हैं। उदाहरण के लिए, \( \text{LiO}_2 \) (पीला), \( \text{NaO}_2 \) (पीला), \( \text{KO}_2 \) (नारंगी), \( \text{RbO}_2 \) (भूरा) और \( \text{CsO}_2 \) (नारंगी)।
In simple words: ऑक्साइड में ऑक्सीजन \( -2 \), परऑक्साइड में \( -1 \) और सुपर ऑक्साइड में \( -\frac{1}{2} \) ऑक्सीकरण अवस्था में होता है।

🎯 Exam Tip: इन विभिन्न ऑक्साइडों में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था को ध्यान से याद रखें, क्योंकि यह उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता और गुणों को प्रभावित करता है।

 

Question 29. LiF जल में लगभग अविलय होता है जबकि LiCl न सिर्फ जल में, बल्कि एसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए।
Answer: लीथियम फ्लोराइड ( \( \text{LiF} \) ) जल में लगभग अविलेय होता है क्योंकि \( \text{Li}^+ \) और \( \text{F}^- \) दोनों आयनों का आकार बहुत छोटा होता है, जिससे \( \text{LiF} \) की जालक एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है। इसकी जलयोजन एन्थैल्पी (जो आयनों को घेरने वाले पानी के अणुओं द्वारा जारी की गई ऊर्जा है) जालक एन्थैल्पी से अधिक नहीं होती है, इसलिए \( \text{LiF} \) पानी में नहीं घुलता है।
इसके विपरीत, लीथियम क्लोराइड ( \( \text{LiCl} \) ) पानी में और एसीटोन जैसे कम ध्रुवीय विलायकों में भी विलेय होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि \( \text{Cl}^- \) आयन का आकार \( \text{F}^- \) की तुलना में बड़ा होता है। \( \text{Li}^+ \) आयन अपनी छोटी आकार और उच्च ध्रुवण क्षमता के कारण \( \text{Cl}^- \) आयन को ध्रुवित करता है, जिससे \( \text{LiCl} \) में आंशिक आयनिक और सहसंयोजक गुण दोनों होते हैं। यह सहसंयोजक प्रकृति इसे कार्बनिक विलायकों में विलेय बनाती है।
In simple words: \( \text{LiF} \) पानी में नहीं घुलता क्योंकि उसके आयन बहुत छोटे होते हैं और कसकर जुड़े होते हैं, जबकि \( \text{LiCl} \) घुल जाता है क्योंकि \( \text{Cl}^- \) बड़ा होता है और \( \text{Li}^+ \) उसे ध्रुवित कर पाता है।

🎯 Exam Tip: आयनिक यौगिकों की घुलनशीलता को जालक एन्थैल्पी और जलयोजन एन्थैल्पी के बीच के संतुलन से समझा जा सकता है; उच्च जलयोजन एन्थैल्पी उच्च जालक एन्थैल्पी पर हावी होकर घुलनशीलता को बढ़ाती है।

 

Question 30. Na2CO3 का विलयन क्षारीय होता है, क्यों?
Answer: सोडियम कार्बोनेट ( \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) ) का विलयन क्षारीय होता है क्योंकि जब इसे पानी में घोला जाता है, तो यह जल-अपघटन (हाइड्रोलिसिस) से गुजरता है। इस प्रक्रिया में, यह एक प्रबल क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड, \( \text{NaOH} \)) और एक दुर्बल अम्ल (कार्बनिक अम्ल, \( \text{H}_2\text{CO}_3 \)) बनाता है।
\( \text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NaOH} + \text{H}_2\text{CO}_3 \)
क्योंकि प्रबल क्षार \( \text{NaOH} \) पूरी तरह से आयनित होता है, यह बड़ी संख्या में \( \text{OH}^- \) आयन उत्पन्न करता है। वहीं, दुर्बल अम्ल \( \text{H}_2\text{CO}_3 \) कम आयनित होता है और कम \( \text{H}^+ \) आयन बनाता है। परिणामस्वरूप, विलयन में \( \text{OH}^- \) आयनों की सांद्रता \( \text{H}^+ \) आयनों की सांद्रता से अधिक हो जाती है, जिससे विलयन क्षारीय हो जाता है।
या इसे ऐसे भी समझ सकते हैं:
\( \text{CO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{HCO}_3^- + \text{OH}^- \)
कार्बोनेट आयन पानी से \( \text{H}^+ \) आयन लेकर \( \text{OH}^- \) आयनों की सांद्रता बढ़ाता है।
In simple words: \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) पानी में घुलने पर ज्यादा \( \text{OH}^- \) आयन बनाता है और कम \( \text{H}^+ \) आयन, इसलिए घोल क्षारीय हो जाता है।

🎯 Exam Tip: लवणों के जल-अपघटन को समझकर, हम उनके विलयनों की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का अनुमान लगा सकते हैं। प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से बना लवण क्षारीय होता है।

 

Question 31. निम्नलिखित के उपयोग लिखिए -
1. चूना पत्थर
2. सोडियम कार्बोनेट।
Answer:
1. चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट, CaCO3):
चूना पत्थर के कई उपयोग हैं:
• इसका उपयोग भवन निर्माण सामग्री के रूप में, जैसे सीमेंट, मोर्टार और संगमरमर में किया जाता है।
• यह आयरन के निष्कर्षण में गालक (flux) के रूप में प्रयोग होता है।
• इसे उच्च गुणवत्ता वाले कागज के निर्माण में भी इस्तेमाल किया जाता है।
• च्यूइंगम में एक घटक के रूप में और सौंदर्य प्रसाधनों में एक पूरक के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
• यह प्रति-अम्ल (Antacid) के रूप में अम्लता को कम करने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
2. सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3):
सोडियम कार्बोनेट (धुलाई का सोडा) के विभिन्न उपयोग हैं:
• यह जल को मृदु (soft) करने में मदद करता है।
• कपड़े धोने के साबुन बनाने में उपयोग होता है।
• काँच, बोरेक्स, साबुन और कास्टिक सोडा जैसे विभिन्न उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण है।
• प्रयोगशाला में गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण के लिए एक अभिकर्मक (reagent) के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
In simple words: चूना पत्थर इमारतें बनाने और पेट की जलन कम करने में काम आता है, जबकि सोडियम कार्बोनेट पानी साफ करने और साबुन बनाने में इस्तेमाल होता है।

🎯 Exam Tip: इन यौगिकों के औद्योगिक और घरेलू उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दैनिक जीवन और विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं।

 

Question 32. निम्नलिखित तथ्यों को समझाइये –
1. BeO जल में अविलेय है जबकि BeSO4 विलेय है।
2. BaO जल में विलेय है जबकि BaSO4 अविलेय है।
Answer:
1. BeO जल में अविलेय है जबकि BeSO4 विलेय है:
बेरिलियम ऑक्साइड ( \( \text{BeO} \) ) जल में अविलेय होता है क्योंकि \( \text{Be}^{2+} \) और \( \text{O}^{2-} \) आयनों का आकार बहुत छोटा होता है। इस छोटे आकार के कारण \( \text{BeO} \) की जालक एन्थैल्पी (जो आयनों को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा है) बहुत अधिक होती है, और यह इसकी जलयोजन एन्थैल्पी (जो पानी में घुलने पर मुक्त होती है) से अधिक होती है।
इसके विपरीत, बेरिलियम सल्फेट ( \( \text{BeSO}_4 \) ) जल में विलेय है। \( \text{Be}^{2+} \) आयन छोटा होता है जबकि \( \text{SO}_4^{2-} \) आयन बड़ा होता है। \( \text{BeSO}_4 \) की जालक एन्थैल्पी इसकी जलयोजन एन्थैल्पी से कम होती है, क्योंकि \( \text{Be}^{2+} \) आयन की उच्च जलयोजन एन्थैल्पी होती है।
2. BaO जल में विलेय है जबकि BaSO4 अविलेय है:
बेरियम ऑक्साइड ( \( \text{BaO} \) ) जल में विलेय होता है क्योंकि \( \text{Ba}^{2+} \) आयन का आकार \( \text{Be}^{2+} \) से बड़ा होता है। \( \text{BaO} \) की जालक एन्थैल्पी इसकी जलयोजन एन्थैल्पी से कम होती है।
इसके विपरीत, बेरियम सल्फेट ( \( \text{BaSO}_4 \) ) जल में अविलेय है। \( \text{BaSO}_4 \) में \( \text{Ba}^{2+} \) और \( \text{SO}_4^{2-} \) दोनों आयन बड़े होते हैं। इन बड़े आयनों के कारण \( \text{BaSO}_4 \) की जालक एन्थैल्पी का मान इसकी जलयोजन एन्थैल्पी से बहुत अधिक हो जाता है, जिससे यह पानी में नहीं घुलता है।
In simple words: यौगिक की पानी में घुलनशीलता उसके आयनों को जोड़ने वाली ताकत (जालक एन्थैल्पी) और पानी के अणुओं द्वारा आयनों को घेरने वाली ताकत (जलयोजन एन्थैल्पी) पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: घुलनशीलता को जालक एन्थैल्पी और जलयोजन एन्थैल्पी के बीच संतुलन के आधार पर समझाएं। सामान्यतः, यदि जलयोजन एन्थैल्पी जालक एन्थैल्पी से अधिक होती है, तो यौगिक विलेय होता है।

 

Question 33. निम्नलिखित के मध्य क्रियाओं के सन्तुलित समीकरण लिखिये –
1. Be2C एवं जल
2. KO2 एवं जल
3. लीथियम एवं नाइट्रोजन।
Answer:
1. Be2C एवं जल:
बेरिलियम कार्बाइड ( \( \text{Be}_2\text{C} \) ) जल के साथ अभिक्रिया करके बेरिलियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{Be(OH)}_2 \) ) और मेथेन गैस ( \( \text{CH}_4 \) ) बनाता है।
\( \text{Be}_2\text{C} + 4\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{Be(OH)}_2 + \text{CH}_4 \)
2. KO2 एवं जल:
पोटेशियम सुपरऑक्साइड ( \( \text{KO}_2 \) ) जल के साथ अभिक्रिया करके पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{KOH} \) ), हाइड्रोजन परऑक्साइड ( \( \text{H}_2\text{O}_2 \) ) और ऑक्सीजन गैस ( \( \text{O}_2 \) ) बनाता है।
\( 2\text{KO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{KOH} + \text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_2 \)
3. लीथियम एवं नाइट्रोजन:
लीथियम ( \( \text{Li} \) ) नाइट्रोजन गैस ( \( \text{N}_2 \) ) के साथ अभिक्रिया करके लीथियम नाइट्राइड ( \( \text{Li}_3\text{N} \) ) बनाता है। यह क्षार धातुओं में लीथियम का एक अनूठा गुण है।
\( 6\text{Li} + \text{N}_2 \rightarrow 2\text{Li}_3\text{N} \)
In simple words: बेरिलियम कार्बाइड पानी से मेथेन बनाता है, पोटेशियम सुपरऑक्साइड पानी से ऑक्सीजन बनाता है, और लीथियम नाइट्रोजन से लीथियम नाइट्राइड बनाता है।

🎯 Exam Tip: इन संतुलित रासायनिक समीकरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर विशिष्ट उत्पादों और उन स्थितियों के साथ जिनमें प्रतिक्रियाएं होती हैं।

 

Question 34. विकर्ण सम्बन्ध क्या है? बेरीलियम किस प्रकार एल्यूमिनियम से समानता दर्शाता है?
Answer: विकर्ण सम्बन्ध: विकर्ण सम्बन्ध आवर्त सारणी में दूसरे आवर्त के तत्वों (जैसे लीथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तीसरे आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन) के बीच रासायनिक गुणों में समानता को दर्शाता है। यह समानता तत्वों के आकार और विद्युत ऋणात्मकता में समानता के कारण होती है।
बेरिलियम (Be) और एल्यूमिनियम (Al) के बीच समानताएँ:
1. बेरिलियम और एल्यूमिनियम दोनों के यौगिकों में सहसंयोजक गुण होते हैं, इसलिए वे कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
2. बेरिलियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{Be(OH)}_2 \) ) और एल्यूमिनियम हाइड्रॉक्साइड ( \( \text{Al(OH)}_3 \) ) दोनों उभयधर्मी होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।
3. बेरिलियम और एल्यूमिनियम दोनों ही हाइड्रोजन से सीधे प्रतिक्रिया करके हाइड्राइड नहीं बनाते हैं।
4. दोनों तत्वों के हैलाइड ( \( \text{BeCl}_2 \) और \( \text{AlCl}_3 \) ) ब्रिज्ड क्लोराइड संरचना बनाते हैं।
5. दोनों धातुओं पर ऑक्साइड की एक पतली, निष्क्रिय परत बन जाती है, जो उन्हें आगे ऑक्सीकरण से बचाती है।
In simple words: विकर्ण सम्बन्ध तब होता है जब एक आवर्त में एक तत्व अपने अगले आवर्त में विकर्ण पर स्थित तत्व से मिलता-जुलता होता है। बेरिलियम एल्यूमीनियम के समान है क्योंकि उनके यौगिकों में सहसंयोजक गुण होते हैं और वे उभयधर्मी होते हैं।

🎯 Exam Tip: विकर्ण सम्बन्ध छोटे परमाणु आकार और उच्च ध्रुवण शक्ति के कारण उत्पन्न होता है, जिससे गुणों में समानता आती है।

 

Question 35. लीथियम अपने वर्ग के अन्य तत्त्वों से समानता नहीं रखता, इसका क्या कारण है?
Answer: लीथियम अपने वर्ग के अन्य तत्वों (सोडियम, पोटेशियम, रुबिडियम, सीजियम) से कई मायनों में भिन्न गुण प्रदर्शित करता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. अत्यधिक छोटा आकार: लीथियम परमाणु और उसके आयन ( \( \text{Li}^+ \) ) का आकार अन्य क्षार धातुओं की तुलना में बहुत छोटा होता है। यह छोटा आकार इसकी उच्च आयनिक आवेश घनत्व का कारण बनता है।
2. उच्च ध्रुवण क्षमता: \( \text{Li}^+ \) आयन की उच्च ध्रुवण क्षमता होती है, जिसका मतलब है कि यह बड़े ऋणायनों के इलेक्ट्रॉन बादल को आसानी से विकृत कर सकता है। परिणामस्वरूप, लीथियम के यौगिकों में सहसंयोजक गुण अधिक होते हैं।
3. उच्च आयनन ऊर्जा: लीथियम की आयनन ऊर्जा अन्य क्षार धातुओं की तुलना में अधिक होती है, जिससे यह सबसे कम विद्युत धनी प्रकृति प्रदर्शित करता है।
4. d-कक्षकों की अनुपस्थिति: लीथियम में \( \text{d} \) -कक्षक अनुपस्थित होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातुओं में \( \text{d} \) -कक्षक उपलब्ध होते हैं। इस कारण लीथियम अधिकतम चार संयोजकता ही प्रदर्शित कर सकता है।
In simple words: लीथियम का आकार बहुत छोटा होता है और उसमें \( \text{d} \) -कक्षक नहीं होते हैं, इसलिए यह अपने वर्ग के बाकी तत्वों से अलग व्यवहार करता है।

🎯 Exam Tip: लीथियम के असंगत व्यवहार को समझने के लिए उसके छोटे आकार, उच्च आयनन ऊर्जा और \( \text{d} \) -कक्षकों की अनुपस्थिति जैसे विशिष्ट गुणों पर ध्यान दें।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 36. वर्ग । तथा वर्ग ।। धातुओं के गुण बताइए। बेरोलियम हाइड्राइड की संरचना को समझाइये।
Answer:
वर्ग I (क्षार धातु) के गुण:
क्षार धातुएँ आवर्त सारणी के समूह 1 में स्थित होती हैं और इनमें लीथियम (Li), सोडियम (Na), पोटेशियम (K), रुबिडियम (Rb), सीज़ियम (Cs), और फ्रांसियम (Fr) शामिल हैं।
1. परमाणु एवं आयनिक त्रिज्या: क्षार धातुओं की परमाणु त्रिज्या अपने-अपने आवर्त में सबसे अधिक होती है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु और आयनिक त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि कोशों की संख्या बढ़ती जाती है।
2. घनत्व: ये धातुएँ अपने बड़े आकार और हल्के होने के कारण पानी से हल्की होती हैं। समूह में नीचे जाने पर घनत्व बढ़ता है, हालांकि पोटेशियम का घनत्व सोडियम से कम होता है।
\( \text{Li} < \text{K} < \text{Na} < \text{Rb} < \text{Cs} \)
3. गलनांक एवं क्वथनांक: क्षार धातुओं के गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं क्योंकि उनके संयोजी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिससे धात्विक बंध दुर्बल होते हैं। समूह में नीचे जाने पर गलनांक और क्वथनांक घटते जाते हैं।
4. आयनन एन्थैल्पी: इनकी आयनन एन्थैल्पी बहुत कम होती है क्योंकि ये आसानी से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेते हैं। समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी कम होती जाती है।
5. ज्वाला परीक्षण: क्षार धातुएँ और उनके लवण ऑक्सीकारक ज्वाला को विशेष रंग प्रदान करते हैं क्योंकि ज्वाला की ऊर्जा उनके बाहरी इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करती है। जब ये इलेक्ट्रॉन अपनी मूल अवस्था में लौटते हैं, तो दृश्य क्षेत्र में विकिरण उत्सर्जित करते हैं। उदाहरण: Li (किरमिजी लाल), Na (पीला), K (बैंगनी), Rb (बैंगनी), Cs (नीला)।
6. प्रकाश विद्युत प्रभाव: धातु की सतह पर प्रकाश गिरने से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन प्रकाश विद्युत प्रभाव कहलाता है। K और Cs की आयनन एन्थैल्पी बहुत कम होती है, इसलिए ये प्रकाश विद्युत प्रभाव दर्शाते हैं।
7. अपचायक गुण: क्षार धातुओं के मानक इलेक्ट्रोड विभव के मान उच्च ऋणात्मक होते हैं, इसलिए ये प्रबल अपचायक होते हैं। लीथियम सबसे प्रबल अपचायक है क्योंकि \( \text{Li}^+ \) का छोटा आकार इसकी जलयोजन एन्थैल्पी को बहुत अधिक बढ़ा देता है।
8. ऑक्सीकरण अवस्था: सभी क्षार धातुएँ एक संयोजी धनायन ( \( \text{M}^+ \) ) बनाती हैं क्योंकि वे एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेती हैं।
9. रंगहीन तथा प्रतिचुम्बकीय आयन: सभी क्षार धातु धनायनों में उत्कृष्ट गैस विन्यास होने के कारण सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, इसलिए ये रंगहीन और प्रतिचुम्बकीय होते हैं।

क्षारीय मृदा धातुओं (वर्ग II) के गुण:
क्षारीय मृदा धातुएँ आवर्त सारणी के समूह 2 में स्थित होती हैं और इनमें बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca), स्ट्रॉन्शियम (Sr), बेरियम (Ba) और रेडियम (Ra) शामिल हैं।
1. परमाणु तथा आयनिक त्रिज्या: क्षार धातुओं की तुलना में क्षारीय मृदा धातुओं की परमाणु और आयनिक त्रिज्या कम होती है क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर ये त्रिज्याएँ बढ़ती हैं।
2. घनत्व: वर्ग 2 के तत्वों का घनत्व, वर्ग 1 के तत्वों की तुलना में अधिक होता है क्योंकि इनका आकार छोटा होता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर घनत्व में कोई नियमित पैटर्न नहीं होता है; Be से Ca तक घनत्व कम होता है, फिर बढ़ता है।
3. गलनांक तथा क्वथनांक: क्षारीय मृदा धातुओं के गलनांक और क्वथनांक क्षार धातुओं की तुलना में उच्च होते हैं क्योंकि इनका आकार छोटा होता है और धात्विक बंध प्रबल होता है। समूह में नीचे जाने पर गलनांक और क्वथनांक का मान कम होता जाता है।
4. आयनन एन्थैल्पी: क्षारीय मृदा धातुओं की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इनका आकार छोटा होता है। हालाँकि, इनकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी की तुलना में कम होती है क्योंकि दो इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद ये भी उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर लेते हैं।

तत्त्व\( \Delta\text{H}_1 \text{(kJ mol}^{-1}) \)\( \text{H}_2 \text{(kJ mol}^{-1}) \)
Na (वर्ग I)4964562
Mg (वर्ग II)7371450

बेरीलियम हाइड्राइड की संरचना:
बेरीलियम हाइड्राइड ( \( \text{BeH}_2 \) ) एक सहसंयोजक यौगिक है। इलेक्ट्रॉन न्यूनता के कारण यह बहुलकी संरचना प्रदर्शित करता है। बेरिलियम हाइड्राइड में बेरिलियम परमाणु \( \text{sp} \) संकरित होता है और दो हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है। यह एक श्रृंखला जैसी संरचना बनाता है जहां प्रत्येक बेरिलियम परमाणु दो ब्रिजिंग हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
In simple words: वर्ग I धातुएँ बड़ी और बहुत प्रतिक्रियाशील होती हैं, जबकि वर्ग II धातुएँ छोटी और कम प्रतिक्रियाशील होती हैं। बेरिलियम हाइड्राइड एक श्रृंखला जैसी संरचना बनाता है।

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं और क्षारीय मृदा धातुओं के गुणों की तुलना करते समय, परमाणु आकार, आयनन एन्थैल्पी, गलनांक और क्वथनांक जैसे मुख्य मापदंडों पर ध्यान केंद्रित करें। बेरिलियम हाइड्राइड की बहुलकी संरचना को उसके इलेक्ट्रॉन न्यूनता गुण से जोड़ना याद रखें।

 

Question 35. लीथियम अपने वर्ग के अन्य तत्त्वों से समानता नहीं रखता, इसका क्या कारण है?
Answer: लीथियम अपने समूह के अन्य तत्त्वों से कुछ अलग व्यवहार दिखाता है. इसके मुख्य कारण ये हैं:

  • लीथियम परमाणु और इसके आयन \( (Li^+) \) का आकार बहुत छोटा होता है।
  • \( Li^+ \) आयन में ध्रुवीकरण करने की क्षमता बहुत ज़्यादा होती है, जिसकी वजह से लीथियम के यौगिकों में सहसंयोजक गुण अधिक पाए जाते हैं।
  • लीथियम की आयनन ऊर्जा (इलेक्ट्रॉन निकालने की ऊर्जा) बहुत ज़्यादा होती है, और यह विद्युत धनी प्रकृति में सबसे कम होता है।
  • इसमें 'd' कक्षक नहीं होते, इसलिए यह ज़्यादा से ज़्यादा चार सहसंयोजकता ही दिखा सकता है।
इस अनोखे व्यवहार के कारण लीथियम कई रासायनिक अभिक्रियाओं में अपने समूह के बाकी तत्त्वों से भिन्न होता है, जैसे नाइट्राइड बनाना.
In simple words: लीथियम अपने परिवार के बाकी सदस्यों से थोड़ा अलग है क्योंकि यह बहुत छोटा है और इसके इलेक्ट्रॉन बहुत मज़बूती से जुड़े होते हैं.

🎯 Exam Tip: लीथियम के असंगत व्यवहार के मुख्य कारणों में उसका छोटा आकार, उच्च ध्रुवण क्षमता और 'd' कक्षकों का अभाव शामिल हैं.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 36. वर्ग । तथा वर्ग ।। धातुओं के गुण बताइए। बेरोलियम हाइड्राइड की संरचना को समझाइये।
Answer:
वर्ग 1 की धातुएँ (क्षार धातुएँ) - सामान्य गुण:
ये बहुत प्रतिक्रियाशील धातुएँ होती हैं, जिनके बाहरी कोश में सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन होता है जिसे ये आसानी से खो देती हैं। ये मुलायम होती हैं, बिजली की अच्छी सुचालक होती हैं, और पानी के साथ प्रतिक्रिया करके मज़बूत क्षारीय हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। इनके परमाणु आकार बड़े होते हैं, और इनकी आयनन ऊर्जा कम होती है। ये रंगीन ज्वाला परीक्षण देती हैं। वर्ग में नीचे जाने पर इनकी क्रियाशीलता बढ़ती है।
वर्ग 2 की धातुएँ (क्षारीय मृदा धातुएँ) - सामान्य गुण:
ये भी प्रतिक्रियाशील होती हैं, जिनके बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये वर्ग 1 की धातुओं की तुलना में थोड़ी कठोर होती हैं और इनकी आयनन ऊर्जा वर्ग 1 की धातुओं से ज़्यादा होती है क्योंकि इनका आकार छोटा होता है और नाभिकीय आवेश ज़्यादा होता है। ये भी क्षारीय यौगिक बनाती हैं और ज़्यादातर रंगीन ज्वाला परीक्षण देती हैं (बेरीलियम और मैग्नीशियम को छोड़कर)।
बेरीलियम हाइड्राइड \( (BeH_2) \) की संरचना:
बेरीलियम हाइड्राइड एक सहसंयोजक यौगिक है जो अन्य आयनिक हाइड्राइडों से अलग होता है। बेरीलियम में इलेक्ट्रॉन की कमी होती है, इसलिए यह बहुलक (polymeric) संरचना बनाता है। इस संरचना में, बेरीलियम परमाणु हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सेतु बंध (bridge bonds) बनाते हैं, जिससे एक लंबी चेन जैसी संरचना बनती है। यह जल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है।
In simple words: वर्ग 1 की धातुएँ बहुत क्रियाशील, मुलायम और क्षारीय होती हैं. वर्ग 2 की धातुएँ भी क्रियाशील होती हैं पर थोड़ी कठोर होती हैं. बेरीलियम हाइड्राइड में बेरीलियम के पास इलेक्ट्रॉन कम होते हैं, इसलिए यह एक लंबी चेन जैसी संरचना बनाता है.

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं और क्षारीय मृदा धातुओं के गुणों को याद करते समय, उनकी प्रतिक्रियाशीलता, आयनन ऊर्जा, और ज्वाला परीक्षण जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें। BeH2 की सहसंयोजक और बहुलकी प्रकृति महत्वपूर्ण है।

 

Question 37. जैव द्रवों में Na, K, Mg तथा Ca के महत्त्व को समझाइये।
Answer:
सोडियम \( (Na) \) और पोटेशियम \( (K) \) का जैविक महत्त्व:
सोडियम \( (Na^+) \) और पोटेशियम \( (K^+) \) आयन हमारे शरीर के तरल पदार्थों के बहुत ज़रूरी हिस्से हैं। ये कोशिका झिल्ली के आर-पार पानी और पोषक तत्वों (जैसे शर्करा और एमीनो अम्ल) के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। सोडियम आयन मुख्य रूप से कोशिकाओं के बाहर पाए जाते हैं, जबकि पोटेशियम आयन ज़्यादातर कोशिकाओं के अंदर होते हैं। तंत्रिका आवेगों को भेजने में भी ये बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह 'सोडियम-पोटेशियम पंप' शरीर में आयनों का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है, जो ऊर्जा का उपयोग करता है।
मैग्नीशियम \( (Mg) \) और कैल्शियम \( (Ca) \) का जैविक महत्त्व:
मैग्नीशियम \( (Mg) \) शरीर में कई एन्जाइमों के काम करने के लिए ज़रूरी है, खासकर वे जो ऊर्जा (ATP) के उत्पादन और उपयोग में शामिल होते हैं। यह पौधों में क्लोरोफिल का एक मुख्य हिस्सा भी है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए ज़रूरी है। कैल्शियम \( (Ca) \) हमारे शरीर में सबसे ज़्यादा मात्रा में पाया जाने वाला खनिज है, जिसका 99% हिस्सा हड्डियों और दाँतों में होता है। यह मांसपेशियों के काम करने, रक्त का थक्का जमने और तंत्रिका संकेतों को भेजने में भी महत्वपूर्ण है। कैल्शियम आयन हड्डियों और दाँतों को मज़बूती देते हैं।
In simple words: सोडियम और पोटेशियम शरीर में पानी और पोषक तत्वों का संतुलन बनाते हैं. मैग्नीशियम ऊर्जा बनाने में मदद करता है, और कैल्शियम हड्डियों और दाँतों को मज़बूत बनाता है, साथ ही मांसपेशियों के काम और खून जमने में भी ज़रूरी है.

🎯 Exam Tip: सोडियम-पोटेशियम पंप का कार्य, मैग्नीशियम का क्लोरोफिल में स्थान, और कैल्शियम का हड्डियों तथा रक्त जमने में महत्त्व, ये प्रमुख जैविक भूमिकाएँ हैं जिन्हें याद रखना चाहिए।

 

Question 38. औद्योगिक स्तर पर सोडियम कार्बोनेट बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: औद्योगिक स्तर पर सोडियम कार्बोनेट \( (Na_2CO_3) \) को साल्वे प्रक्रम द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में, सबसे पहले अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की प्रतिक्रिया से अमोनियम कार्बोनेट \( ((NH_4)_2CO_3) \) और फिर अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट \( (NH_4HCO_3) \) बनाया जाता है। फिर, अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की सोडियम क्लोराइड \( (NaCl) \) से प्रतिक्रिया कराई जाती है, जिससे सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट \( (NaHCO_3) \) और अमोनियम क्लोराइड \( (NH_4Cl) \) प्राप्त होता है। अंतिम चरण में, सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट को गरम करके सोडियम कार्बोनेट, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी प्राप्त किया जाता है।
रासायनिक अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
\( 2NH_3 + CO_2 + H_2O \rightarrow (NH_4)_2CO_3 \)
\( (NH_4)_2CO_3 + CO_2 + H_2O \rightarrow 2NH_4HCO_3 \)
\( NH_4HCO_3 + NaCl \rightarrow NH_4Cl + NaHCO_3 \)
\( 2NaHCO_3 \xrightarrow{\Delta} Na_2CO_3 + CO_2\uparrow + H_2O \)
इस प्रक्रिया में अमोनिया को पुनर्चक्रित किया जाता है, जिससे यह विधि अधिक कुशल बन जाती है।
In simple words: सोडियम कार्बोनेट को साल्वे विधि से बनाते हैं. इसमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड और नमक का उपयोग करके पहले सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनाया जाता है, जिसे गरम करने पर सोडियम कार्बोनेट मिल जाता है.

🎯 Exam Tip: साल्वे प्रक्रम की सभी रासायनिक अभिक्रियाओं और प्रमुख चरणों को क्रम से याद रखें, विशेषकर अमोनिया के पुनर्चक्रण का महत्व।

 

Question 39. क्षार धातुओं के रासायनिक गुणों का वर्णन कीजिए तथा इनमें Li की आयनन ऊर्जा सर्वाधिक है फिर भी यह प्रबलतम अपचायक है, क्यों?
Answer:
क्षार धातुओं के रासायनिक गुण:
क्षार धातुएँ बहुत क्रियाशील होती हैं, इसलिए ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाई जातीं।
1. ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड का निर्माण: ये ऑक्सीजन और पानी के साथ क्रिया करके ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। लीथियम मोनोऑक्साइड \( (Li_2O) \), सोडियम परॉक्साइड \( (Na_2O_2) \) और पोटेशियम, रुबिडियम, सीज़ियम सुपरऑक्साइड \( (MO_2) \) बनाते हैं। ये ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं, और समूह में नीचे जाने पर इनकी क्षारीयता बढ़ती जाती है।
\( M_2O + H_2O \rightarrow 2M^+ + 2OH^- \)
\( M_2O_2 + 2H_2O \rightarrow 2M^+ + 2OH^- + H_2O_2 \)
\( 2MO_2 + 2H_2O \rightarrow 2M^+ + 2OH^- + H_2O_2 + O_2 \)
2. जल के साथ क्रियाशीलता: ये धातुएँ जल के साथ तेज़ी से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस \( (H_2) \) और अपने हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। इस क्रिया में बहुत गर्मी निकलती है। लीथियम की जल से क्रिया धीमी होती है, जबकि अन्य क्षार धातुओं की तेज।
\( 2M + 2H_2O \rightarrow 2M^+ + 2OH^- + H_2 \)
3. डाई-हाइड्रोजन से क्रियाशीलता: लगभग 673K पर ये हाइड्रोजन के साथ क्रिया करके आयनिक हाइड्राइड बनाती हैं। लीथियम को हाइड्राइड बनाने के लिए 1073K ताप की ज़रूरत होती है।
\( 2M + H_2 \rightarrow 2M^+H^- \)
4. हैलोजन के साथ क्रियाशीलता: ये हैलोजन के साथ तेज़ी से क्रिया करके आयनिक हैलाइड \( (MX) \) बनाती हैं। लीथियम हैलाइडों में सहसंयोजक गुण थोड़ा ज़्यादा होता है, खासकर लीथियम आयोडाइड \( (LiI) \)।
\( 2M + X_2 \rightarrow 2M^+X^- \)
5. द्रव अमोनिया में विलेयता: क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुल जाती हैं, और यह घोल गहरा नीला हो जाता है। यह नीला रंग अमोनिया में घुले मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है। ये विलयन बिजली के सुचालक होते हैं।
\( M + (x+y)NH_3 \rightarrow [M(NH_3)_x]^+ + [e(NH_3)_y]^- \)
6. ऑक्सो-अम्लों के लवण: क्षार धातुएँ कार्बोनेट, नाइट्रेट और सल्फेट जैसे ऑक्सो-अम्लों के लवण बनाती हैं। ये ज़्यादातर पानी में घुलनशील और गरम करने पर स्थिर होते हैं, लेकिन लीथियम के कार्बोनेट और नाइट्रेट अन्य क्षार धातुओं की तुलना में कम स्थिर होते हैं।

लीथियम का प्रबलतम अपचायक होना:
हालांकि लीथियम की आयनन ऊर्जा सबसे ज़्यादा है (जिसका मतलब है कि इससे इलेक्ट्रॉन निकालना मुश्किल होना चाहिए), फिर भी यह सबसे प्रबल अपचायक है। इसका कारण इसकी उच्च जलयोजन एन्थैल्पी है। लीथियम आयन \( (Li^+) \) का आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए यह पानी के अणुओं से मज़बूती से जुड़ता है और बहुत ज़्यादा ऊर्जा छोड़ता है (जलयोजन ऊर्जा)। यह ऊर्जा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की भरपाई कर देती है, जिससे लीथियम आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ पाता है और प्रबल अपचायक के रूप में काम करता है।
In simple words: क्षार धातुएँ बहुत क्रियाशील होती हैं, ऑक्सीजन, पानी, हाइड्रोजन और हैलोजन से क्रिया करती हैं. लीथियम इलेक्ट्रॉन निकालने में सबसे मुश्किल होता है, फिर भी वह सबसे अच्छा अपचायक है क्योंकि पानी में घुलने पर बहुत ऊर्जा छोड़ता है.

🎯 Exam Tip: क्षार धातुओं के विभिन्न रासायनिक गुणों को याद रखें और लीथियम के असंगत व्यवहार को इसकी उच्च जलयोजन एन्थैल्पी और छोटे आकार से जोड़कर समझाएँ।

 

Question 40. वर्ग। के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना वर्ग ।। के संगत यौगिकों में विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए – 1. नाइट्रेट 2. सल्फेट 3. कार्बोनेट।
Answer:
वर्ग 1 (क्षार धातु) और वर्ग 2 (क्षारीय मृदा धातु) के यौगिकों में विलेयता और तापीय स्थायित्व के आधार पर तुलना:

1. नाइट्रेट:
वर्ग 1: क्षार धातुओं के नाइट्रेट पानी में अच्छी तरह घुल जाते हैं और समूह में नीचे जाने पर इनकी विलेयता बढ़ती है। गरम करने पर, ये नाइट्राइट और ऑक्सीजन गैस देते हैं (जैसे \( 2NaNO_3 \xrightarrow{\Delta} 2NaNO_2 + O_2 \)), लेकिन लीथियम नाइट्रेट \( (LiNO_3) \) गरम करने पर लीथियम ऑक्साइड \( (Li_2O) \), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड \( (NO_2) \) और ऑक्सीजन \( (O_2) \) देता है \( (4LiNO_3 \rightarrow 2Li_2O + 4NO_2 + O_2) \)।
वर्ग 2: क्षारीय मृदा धातुओं के नाइट्रेट भी पानी में घुलनशील होते हैं। लीथियम की तरह, ये भी गरम करने पर संबंधित ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन गैस देते हैं। वर्ग में नीचे जाने पर इनका तापीय स्थायित्व बढ़ता जाता है। उदाहरण के लिए, \( 2Mg(NO_3)_2 \xrightarrow{\Delta} 2MgO + 4NO_2 + O_2 \).

2. सल्फेट:
वर्ग 1: क्षार धातुओं के सल्फेट बहुत स्थिर होते हैं और पानी में अच्छी तरह घुल जाते हैं। समूह में नीचे जाने पर इनकी विलेयता थोड़ी बढ़ती है।
वर्ग 2: क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेटों की विलेयता वर्ग 1 के सल्फेटों से अलग होती है। बेरीलियम सल्फेट \( (BeSO_4) \) और मैग्नीशियम सल्फेट \( (MgSO_4) \) पानी में घुलनशील होते हैं, लेकिन कैल्शियम सल्फेट \( (CaSO_4) \), स्ट्रॉन्शियम सल्फेट \( (SrSO_4) \) और बेरियम सल्फेट \( (BaSO_4) \) की विलेयता समूह में नीचे जाने पर घटती जाती है। इनका तापीय स्थायित्व भी सामान्यतः उच्च होता है।

3. कार्बोनेट:
वर्ग 1: क्षार धातुओं के कार्बोनेट पानी में घुलनशील होते हैं (सिवाय \( Li_2CO_3 \) के, जो कम घुलनशील है)। समूह में नीचे जाने पर इनकी विलेयता बढ़ती है। ये उच्च तापमान पर भी स्थिर होते हैं। \( Li_2CO_3 \) अन्य क्षार धातुओं के कार्बोनेट की तुलना में कम स्थिर होता है और गरम करने पर विघटित होकर \( Li_2O \) और \( CO_2 \) देता है \( (Li_2CO_3 \xrightarrow{\Delta} Li_2O + CO_2) \)।
वर्ग 2: क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट पानी में बहुत कम घुलनशील होते हैं और वर्ग 1 के कार्बोनेट की तुलना में ज़्यादा अस्थिर होते हैं। इन्हें गरम करने पर ये आसानी से ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में विघटित हो जाते हैं (जैसे \( CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2\uparrow \))। समूह में नीचे जाने पर इनका तापीय स्थायित्व बढ़ता जाता है।
In simple words: वर्ग 1 के नाइट्रेट, सल्फेट और कार्बोनेट पानी में ज़्यादा घुलते हैं और गरम करने पर ज़्यादा स्थिर रहते हैं. वर्ग 2 के यौगिकों में घुलनशीलता और स्थिरता कम होती है, खासकर भारी धातुओं में. लीथियम और बेरीलियम जैसे छोटे परमाणु वाले यौगिकों की स्थिरता कम होती है.

🎯 Exam Tip: इस तुलना में, छोटे आयनों (जैसे \( Li^+ \) और \( Be^{2+} \)) की ध्रुवण क्षमता और जलयोजन ऊर्जा के प्रभावों को याद रखें, जो उनकी विलेयता और तापीय स्थायित्व को प्रभावित करते हैं। वर्ग में नीचे जाने पर परिवर्तनों पर ध्यान दें।

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