RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 11 Biology. Our expert-created answers for Class 11 Biology are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण RBSE Solutions for Class 11 Biology

For Class 11 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 11 Biology solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण solutions will improve your exam performance.

Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Biology Chapter 29 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Biology Chapter 29 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. जन्तु विज्ञान की वह शाखा जो वर्गीकरण एवं विकासीय संबंधों पर आधारित है।
(क) कार्यिकी
(ख) औतिकी
(ग) आकारिकी
(घ) वर्गिकी
Answer: (घ) वर्गिकी
In simple words: जन्तु विज्ञान की वह शाखा जो जीवों को समूहों में बांटने और उनके विकास के रिश्तों को समझने पर आधारित है, उसे वर्गिकी कहते हैं। यह जीवों को पहचानने और उनके बीच के संबंधों को समझने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy) जीवों की पहचान, नामकरण और वर्गीकरण का अध्ययन है, जो विकासीय संबंधों पर आधारित होता है।

 

प्रश्न 2. जन्तु वर्गीकरण की सबसे छोटी मूल इकाई है।
(क) वंश
(ख) संघ
(ग) जाति
(घ) कुल
Answer: (ग) जाति
In simple words: जीवों के वर्गीकरण में, 'जाति' सबसे छोटा और सबसे बुनियादी समूह है। एक ही जाति के जीव आपस में बहुत मिलते-जुलते हैं और बच्चे पैदा कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण पदानुक्रम में, जाति (Species) सबसे निचली और सबसे विशिष्ट इकाई है, जो समान गुणों वाले जीवों को दर्शाती है।

 

प्रश्न 3. वर्गीकरण का सही अनुक्रम है।
(क) वंश, जाति व उपजाति
(ख) वंश, गण व वर्ग
(ग) वर्ग, वंश व जाति
(घ) गण, वंश व वर्ग
Answer: (क) वंश, जाति व उपजाति
In simple words: वर्गीकरण में, जीवों को पहले बड़े समूह 'वंश' में रखा जाता है, फिर 'जाति' में और अंत में 'उपजाति' में। यह उन्हें क्रम से समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण का सही क्रम सामान्यतः जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश, जाति होता है। यहां दिए गए विकल्पों में, सबसे बारीक अनुक्रम वंश, जाति और उपजाति है।

 

प्रश्न 4. आधुनिक वर्गिकी का जनक है।
(क) डी. कोण्डेली
(ख) हुकर
(ग) हचिन्सन
(घ) लिनीयस
Answer: (घ) लिनीयस
In simple words: कैरोलस लिनीयस को आज के वर्गीकरण विज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने जीवों को नाम देने और समूह बनाने के तरीके बताए, जो आज भी इस्तेमाल होते हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक वर्गिकी के जनक कैरोलस लिनीयस ने द्विपद नाम पद्धति (Binomial Nomenclature) की शुरुआत की थी।

 

प्रश्न 5. निम्न में से किसमें कम से कम समानता होती है।
(क) वर्ग
(ख) वंश
(ग) जाति
(घ) कुल
Answer: (क) वर्ग
In simple words: वर्गीकरण के समूहों में, 'वर्ग' एक बड़ा समूह होता है। इसमें शामिल जीवों में 'जाति' या 'वंश' जैसे छोटे समूहों की तुलना में बहुत कम समानताएं पाई जाती हैं।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण पदानुक्रम में, जैसे-जैसे हम जगत से जाति की ओर बढ़ते हैं, जीवों के बीच समानता बढ़ती जाती है, और जाति से जगत की ओर बढ़ने पर समानता कम होती जाती है।

RBSE Class 11 Biology Chapter 29 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. कोशिकीय स्तर का संगठन कौनसे संघ में पाया जाता है?
Answer: कोशिकीय स्तर का संगठन प्रोटोजोआ (Protozoa) संघ में पाया जाता है। इस स्तर पर कोशिकाएं स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं और ऊतक नहीं बनाती हैं।
In simple words: प्रोटोजोआ संघ के जीवों में शरीर का संगठन सिर्फ कोशिकाओं के स्तर पर होता है।

🎯 Exam Tip: कोशिकीय स्तर का संगठन सबसे सरल प्रकार का शारीरिक संगठन है, जहाँ कोशिकाएँ अलग-अलग कार्य करती हैं लेकिन ऊतक नहीं बनातीं।

 

प्रश्न 3. ऐसे प्राणी जिनमें कोरक रन्ध्र से गुदा का निर्माण होता है, वह क्या कहलाते हैं?
Answer: ऐसे प्राणी जिनमें कोरक रन्ध्र से गुदा का निर्माण होता है, वे ड्यूटेरोस्टोमिया (Deuterostomia) कहलाते हैं। इन जीवों में भ्रूणीय विकास के दौरान पहले गुदा बनती है, फिर मुख।
In simple words: जिन जीवों में जन्म के समय पहले गुदा बनती है, उन्हें ड्यूटेरोस्टोमिया कहते हैं।

🎯 Exam Tip: ड्यूटेरोस्टोमिया में कोरक रन्ध्र (ब्लास्टोपोर) से गुदा का विकास होता है, जबकि प्रोटोस्टोमिया में इससे मुख का विकास होता है।

 

प्रश्न 4. जन्तुओं में वास्तविक देhगुहा कौनसे संघ से प्रारंभ होती है?
Answer: जन्तुओं की वास्तविक देहगुहा संघ एनेलिडा (Annelida) से प्रारंभ होती है। वास्तविक देहगुहा शरीर को आंतरिक अंगों के लिए जगह देती है।
In simple words: एनेलिडा संघ के जीवों से ही वास्तविक देहगुहा (शरीर के अंदर की खाली जगह) बनना शुरू होती है।

🎯 Exam Tip: वास्तविक देहगुहा (सीलोम) एक तरल-भरी गुहा होती है जो शरीर की दीवार और आहारनाल के बीच स्थित होती है, और यह मिजोडर्म से आस्तरित होती है।

 

प्रश्न 5. जीव विज्ञान का जनक कौन है?
Answer: अरस्तु जीव विज्ञान के जनक हैं। उन्होंने जीवों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
In simple words: अरस्तु को जीव विज्ञान का पिता कहा जाता है।

🎯 Exam Tip: अरस्तु को जीव विज्ञान के साथ-साथ जन्तु विज्ञान का भी जनक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने जन्तुओं के वर्गीकरण और अध्ययन पर काफी काम किया।

 

प्रश्न 6. विज्ञान की वह शाखा कौनसी है, जिसमें प्राणियों का अध्ययन किया जाता है?
Answer: विज्ञान की वह शाखा जिसमें प्राणियों का अध्ययन किया जाता है, उसे प्राणी विज्ञान (Zoology) कहते हैं। यह जीवों के जीवन, संरचना और व्यवहार को समझती है।
In simple words: प्राणियों का अध्ययन करने वाली विज्ञान की शाखा को प्राणी विज्ञान या जूलॉजी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राणी विज्ञान जीव विज्ञान की एक बड़ी शाखा है जो सभी प्रकार के जन्तुओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।

 

प्रश्न 7. द्विपदनाम पद्धति में दो पद क्रमश: किन समूहों को प्रकट करते हैं?
Answer: द्विपदनाम पद्धति में प्रथम पद वंश एवं दूसरा पद जाति को प्रकट करते हैं। यह नामकरण की एक विश्वव्यापी प्रणाली है।
In simple words: वैज्ञानिक नाम के पहले हिस्से को वंश और दूसरे हिस्से को जाति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: द्विपद नाम पद्धति कैरोलस लिनीयस द्वारा दी गई थी और यह जीवों के नामकरण के लिए सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत है।

 

प्रश्न 8. भारतीय कौवे का वैज्ञानिक नाम लिखिए।
Answer: भारतीय कौवे का वैज्ञानिक नाम कोर्वस स्प्लेन्डेन्स स्प्लेन्डेन्स है। यह इसका विशिष्ट वैज्ञानिक पहचान है।
In simple words: भारतीय कौवे का वैज्ञानिक नाम कोर्वस स्प्लेन्डेन्स स्प्लेन्डेन्स है।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नाम हमेशा इटैलिक्स में लिखे जाते हैं, जिसमें वंश का नाम बड़े अक्षर से और जाति का नाम छोटे अक्षर से शुरू होता है।

 

प्रश्न 9. पंच जगत वर्गीकरण में स्तनधारियों को कौनसे वर्ग में रखा गया है?
Answer: पंच जगत वर्गीकरण में स्तनधारियों को 'एनीमैलिया' (Animalia) जगत के 'कॉर्डेटा' (Chordata) संघ के 'मैमेलिया' (Mammalia) वर्ग में रखा गया है। स्तनधारी वे जन्तु हैं जो अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं।
In simple words: स्तनधारियों को पंच जगत वर्गीकरण में एनीमैलिया जगत के मैमेलिया वर्ग में रखा जाता है।

🎯 Exam Tip: पंच जगत वर्गीकरण आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिसमें मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंगी, प्लांटी और एनीमैलिया शामिल हैं।

 

प्रश्न 10. सजीवों की आकारिकी संरचना, कोशिकीय परिवर्धन विकास, जीवों के अवशेष एवं सजीवों में विविधता तथा उनमें अन्तर्सम्बन्ध का अध्ययन किस विज्ञान में किया जाता है?
Answer: सजीवों की आकारिकी संरचना, कोशिकीय परिवर्धन विकास, जीवों के अवशेष एवं सजीवों में विविधता तथा उनमें अन्तर्सम्बन्ध का अध्ययन वर्गिकी (Taxonomy) में किया जाता है। यह विज्ञान जीवों को पहचानता और वर्गीकृत करता है।
In simple words: जीवों की बाहरी बनावट, विकास, पुराने अवशेष और उनके बीच के रिश्तों का अध्ययन वर्गिकी विज्ञान में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: वर्गिकी जीवों के वर्गीकरण के सिद्धांतों और व्यवहार का अध्ययन करती है, जिसमें उनकी पहचान, नामकरण और वर्गीकरण शामिल है।

 

प्रश्न 11. त्रिस्तरीय जन्तुओं का ऐसा संघ जिसमें देहगुहा का अभाव होता है।
Answer: त्रिस्तरीय जन्तुओं का ऐसा संघ जिसमें देहगुहा का अभाव होता है वह है, संघ प्लेटीहैल्मीन्थीज (Platyhelminthes)। इन जीवों में शरीर चपटा होता है और कोई वास्तविक शरीर गुहा नहीं होती।
In simple words: प्लेटीहैल्मीन्थीज संघ के त्रिस्तरीय जीवों में शरीर की खाली जगह (देहगुहा) नहीं होती।

🎯 Exam Tip: प्लेटीहैल्मीन्थीज अगुहीय (acoelomate) जन्तुओं का एक उदाहरण है, जिनमें मिजोडर्म से उत्पन्न एक गुहा का पूर्णतः अभाव होता है।

 

प्रश्न 12. जन्तुओं के शरीर में पायी जाने वाली तीन जनन स्तरों का नाम लिखिए।
Answer: जन्तुओं के शरीर में पायी जाने वाली तीन जनन स्तरों के नाम निम्न हैं:

  • एक्टोडर्म
  • मीसोडर्म
  • एण्डोडर्म
ये स्तर भ्रूणीय विकास के दौरान विभिन्न अंगों और ऊतकों का निर्माण करते हैं।
In simple words: जीवों के शरीर में एक्टोडर्म, मीसोडर्म और एण्डोडर्म नाम की तीन मुख्य परतें होती हैं, जिनसे शरीर के अंग बनते हैं।

🎯 Exam Tip: इन तीनों जनन स्तरों से शरीर के सभी ऊतकों और अंगों का विकास होता है, जैसे एक्टोडर्म से त्वचा और तंत्रिका तंत्र, मीसोडर्म से मांसपेशियाँ और हड्डियाँ, और एण्डोडर्म से पाचन तंत्र।

RBSE Class 11 Biology Chapter 29 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. जाति की आधुनिक परिभाषा लिखिए।
Answer: वर्गीकरण में जाति सबसे छोटी मूल इकाई होती है। जॉन रे ने सबसे पहले जाति को परिभाषित किया था। उनके अनुसार, एक ही प्रकार के जनक से उत्पन्न जीव एक ही जाति के होते हैं। लीनियस और अन्य वैज्ञानिकों ने जाति को केवल संरचना के आधार पर तय किया। मेयर के अनुसार, लैंगिक प्रजनन या अंतरा-प्रजनन (interbreeding) द्वारा संतान उत्पन्न करने वाले जीव एक ही जाति के होते हैं। किसी जाति विशेष के सदस्यों में निम्न समानताएँ होती हैं:

  • इनमें आकारिकी समानताएँ होती हैं।
  • ये आपस में जनन करके सन्तान उत्पन्न करते हैं एवं इनकी सन्तति में भी संतान उत्पन्न करने की क्षमता होती है।
  • ऐसे सभी जीवों की उत्पत्ति समान पूर्वजों से होती है।
जाति को जैविक रूप से परिभाषित किया जाता है कि एक समूह के सदस्य जो आपस में प्रजनन कर सकें और उर्वर संतान उत्पन्न कर सकें।
In simple words: जाति वह जीवों का समूह है जो दिखने में एक जैसे होते हैं, आपस में बच्चे पैदा कर सकते हैं, और जिनके बच्चे भी आगे बच्चे पैदा कर सकें।

🎯 Exam Tip: जाति की आधुनिक जैविक अवधारणा मेयर द्वारा दी गई थी, जो प्रजनन अलगाव (reproductive isolation) पर जोर देती है।

 

प्रश्न 3. जीवों के द्विजगत वर्गीकरण को परिभाषित कीजिए।
Answer: द्विजगत वर्गीकरण कैरोलस लिनीयस ने प्रस्तुत किया था। इसमें जीव जगत को दो मुख्य जगतों में विभाजित किया। इन्हें (क) पादप जगत एवं (ख) जन्तु जगत कहते हैं।

  • पादप जगत: इसमें हरे पौधे, बहुकोशिकीय समुद्री घास, कवक रंगहीन एककोशिकीय जीव और जीवाणु रखे गए। इस जगत में सभी पादपों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया की जाती है।
  • जन्तु जगत: इसमें जीवों द्वारा भोजन का निर्माण नहीं किया जाता है। इसमें बहुकोशिकीय जन्तु और एककोशिकीय प्रोटोजोआ जन्तु रखे गए।
यह वर्गीकरण सबसे पुराने वर्गीकरणों में से एक है।
In simple words: द्विजगत वर्गीकरण में कैरोलस लिनीयस ने सभी जीवों को दो बड़े समूहों में बांटा: पादप (पौधे) और जन्तु (जानवर)।

🎯 Exam Tip: द्विजगत वर्गीकरण सरल है लेकिन इसमें कुछ जीवों जैसे कवक और प्रोटिस्टा को वर्गीकृत करना मुश्किल हो जाता है, जिससे बाद में अन्य वर्गीकरण प्रणालियाँ विकसित हुईं।

 

प्रश्न 4. जीवों के जगत प्रोटिस्टा के कोई दो विशेष लक्षण लिखिए।
Answer: जगत प्रोटिस्टा के दो विशेष लक्षण निम्न हैं:

  • इस जगत के जीव स्वयंपोषी एवं विषमपोषी दोनों प्रकार के होते हैं। वे अपना भोजन खुद बना सकते हैं या दूसरों से ले सकते हैं।
  • इनकी कोशिका में केंद्रक, माइटोकोन्ड्रिया, अंतप्रद्रव्यी जालिका, लवक व कशाभ आदि कोशिकांग उपस्थित होते हैं। ये सभी यूकेरियोटिक जीव होते हैं।
प्रोटिस्टा एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीवों का समूह है।
In simple words: प्रोटिस्टा जगत के जीव या तो खुद भोजन बनाते हैं या दूसरों से लेते हैं, और उनकी कोशिकाओं में असली केंद्रक व कई छोटे अंग होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटिस्टा एकल-कोशिका वाले यूकेरियोटिक जीव होते हैं और इन्हें पादप, जन्तु और कवक तीनों के पूर्वज माना जाता है।

 

प्रश्न 5. वर्गीकरण के पदानुक्रमों को उदाहरण के साथ व्यवस्थित क्रम में लिखिए।
Answer: मानव के वर्गीकरण को निम्न पदानुक्रमित तरीके से लिखा गया है:

  • संघ – कॉर्डेटा (Chordata)
  • वर्ग – मैमेलिया (Mammalia)
  • गण – प्राइमेट्स (Primates)
  • कुल – होमोनिडी (Hominidae)
  • वंश – होमो (Homo)
  • जाति – सेपियन्स (sapiens)
यह क्रम दिखाता है कि कैसे जीव को बड़े समूह से छोटे, अधिक विशिष्ट समूह में बांटा जाता है।
In simple words: मानव का वर्गीकरण संघ कॉर्डेटा से शुरू होकर वर्ग मैमेलिया, गण प्राइमेट्स, कुल होमोनिडी, वंश होमो और जाति सेपियन्स तक जाता है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण पदानुक्रम में प्रत्येक स्तर पर जीवों की समानताएँ बढ़ती जाती हैं और सबसे निचला स्तर (जाति) सबसे अधिक विशिष्ट होता है।

 

प्रश्न 7. कुटगुहा वाले एवं अगुहीय जन्तुओं में अन्तर स्पष्ट करें।
Answer: कुटगुहा एवं अगुहीय जन्तुओं में मुख्य अंतर निम्न प्रकार हैं:

कुटगुहा जन्तु (Pseudocoelomates)अगुहीय जन्तु (Acoelomates)
1. इन जन्तुओं में मिथ्या देहगुहा पाई जाती है, जो मिजोडर्म द्वारा पूरी तरह से आस्तरित नहीं होती।1. इन जन्तुओं में देहगुहा (Coelom) नहीं पाई जाती है। शरीर ठोस होता है।
2. ये स्यूडोसीलोमेट कहलाते हैं।2. ये एसीलोमेट कहलाते हैं।
3. उदाहरण-एस्कैल्मेन्थीज जैसे एस्केरिस।3. उदाहरण-प्लेटीहैल्मिन्थीज, जैसे-फेसियोला व टेनिया।
कुटगुहा वाले जन्तुओं में देहगुहा पूरी तरह से मिजोडर्म द्वारा ढकी नहीं होती, जबकि अगुहीय जन्तुओं में कोई गुहा नहीं होती।
In simple words: कुटगुहा वाले जीवों में नकली शरीर गुहा होती है, जबकि अगुहीय जीवों में शरीर गुहा होती ही नहीं है।

🎯 Exam Tip: देहगुहा का विकास और प्रकार जन्तु वर्गीकरण के महत्वपूर्ण आधार हैं। वास्तविक देहगुहा मिजोडर्म से आस्तरित होती है, जबकि कुटगुहा में ऐसा नहीं होता।

 

प्रश्न 8. देहगुहा के आधार पर वर्गीकृत संघों के नाम लिखिए।
Answer: देहगुहा के आधार पर वर्गीकृत संघों के नाम निम्न प्रकार हैं:

  • प्लेटीहैल्मिन्थीस (Platyhelminthes): इनमें सीलोम (वास्तविक देहगुहा) नहीं पाई जाती है। अतः इन्हें एसीलोमेट (Acoelomate) कहते हैं।
  • निमेटोफैल्मिन्थीस (Nemathelminthes): इनमें कुटगुहा पाई जाती है। यह देहगुहा मिजोडर्म से पूर्णतः आस्तरित नहीं होती। अतः ये कुटगुहिक या स्यूडोसिलोमेट (Pseudocoelomate) कहलाते हैं।
  • एनेलिडा, आर्थोपोडा, मोलस्का, इकाइनोडर्मेटा एवं कॉर्डटा (Annelida, Arthropoda, Mollusca, Echinodermata & Chordata): इनमें देहगुहा मीसोडर्म के विपाटन से बनती है और पूरी तरह से मिजोडर्म से आस्तरित होती है। अतः ये गुहिक या सीलोमेट (Coelomate) कहलाते हैं।
देहगुहा की उपस्थिति या अनुपस्थिति जीवों के शरीर के संगठन की जटिलता को दर्शाती है।
In simple words: शरीर में गुहा (खाली जगह) के हिसाब से जीवों को अगुहीय (गुहा नहीं), कुटगुहिक (नकली गुहा), और गुहिक (असली गुहा) में बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: वास्तविक देहगुहा आंतरिक अंगों को सुरक्षा, सहारा और गति प्रदान करती है तथा शरीर को गति में भी मदद करती है।

RBSE Class 11 Biology Chapter 29 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 2. जीवों के नामकरण पद्धति हेतु अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा मान्य नियम बताइए।
Answer: जीवों के नामकरण पद्धति हेतु अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा मान्य प्रमुख नियम निम्न हैं:

  • जातियों के नामकरण के लिए द्विपद या त्रिपद नाम की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • प्रत्येक जाति के नाम में वंश का नाम बड़े अक्षर (Capital letter) से तथा जाति का छोटे अक्षर (Small letter) से शुरू किया जाना चाहिए।
  • ये वैज्ञानिक नाम सदैव तिरछे अक्षरों (italics) में प्रिन्ट होने चाहिए तथा हाथ से लिखी लिपि में लिखे नाम सदैव रेखांकित (underlined) होने चाहिए।
  • जन्तु जगत में दो वंशों के अन्तर्गत एक जाति तथा एक वंश के अन्तर्गत दो जातियों के नाम समान नहीं होने चाहिए।
  • वंश एवं जाति के नामकरण में ग्रीक या लैटिन भाषा का प्रयोग करना चाहिए तथा यदि इन भाषाओं का उपयोग नहीं किया गया है तो ऐसे शब्दों का अन्त लैटिन स्वरूप करना चाहिए।
  • यदि किसी वंश या जाति का नाम यदि भिन्न-भिन्न वैज्ञानिक भिन्न रख दें तो सर्वप्रथम प्रकाशित नाम ही मान्य होगा।
  • जन्तु के नाम के बाद उस जाति के खोजकर्ता अथवा प्रथम नामकर्ता वैज्ञानिक का नाम संक्षेप में लिखा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए कुछ वैज्ञानिक नाम यहाँ दिए गए हैं:
साधारण नामवैज्ञानिक नाम
1. मनुष्य (Man)होमो सेपियन्स (Homo sapiens)
2. शेर (Tiger)पेन्थेरा टिग्रीस (Panthera tigris)
6. कोबरा (Cobra)नाजा नाजा (Naja naja)
7. मेढक (Frog)राना टिग्रीना (Rana tigrina)
8. चूहा (Rat)रेट्स रेट्स (Rattus rattus)
9. गाय (Cow)बोस इन्डीक (Bos indicus)
10. काले मुँह वाला लंगूर (Monkey)प्रेसबाईटस ऐन्टेलस (Presbytes entellus)
11. भूरे मुँह को बन्दर (Man)मकाका मुलाटा (Macaca mulatta)
ये नियम विश्व स्तर पर जीवों के नामकरण में एकरूपता सुनिश्चित करते हैं।
In simple words: जीवों के वैज्ञानिक नाम रखने के लिए खास नियम होते हैं, जैसे वंश का नाम बड़े अक्षर से और जाति का नाम छोटे से शुरू करना, नाम तिरछे लिखना, और खोजकर्ता का नाम साथ जोड़ना।

🎯 Exam Tip: ये नियम (ICZN - International Code of Zoological Nomenclature) जीवों के नामकरण में भ्रम से बचने और एक सार्वभौमिक प्रणाली बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

प्रश्न 3. नामांकित चित्र द्वारा देहगुहा निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
Answer: देहगुहा (Coelom) वह स्थान है जो देह भित्ति (body wall) तथा आहारनाल (alimentary canal) के बीच स्थित होती है, जो द्रव से भरी होती है। इसमें सभी आन्तरिक अंग (visceral organs) होते हैं। सीलोम भ्रूणीय परिवर्धन के समय मीसोडर्म (Mesoderm) के विपाटन (splitting) से बनती है। सीलोम के आधार पर जन्तुओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  • एसीलोमेट (Acoelomates): गैस्ट्रुलेशन (gastrulation) के समय कुछ जन्तुओं में ब्लास्टोसील सिकुड़कर समाप्त हो जाती है और एक्टोडर्म एवं एण्डोडर्म स्तर पास आ जाते हैं। इन दोनों स्तरों के बीच मीसोग्लीया (Mesogloea) भर जाने के कारण शरीर में गुहा नहीं पाई जाती है। ऐसे जन्तुओं को अगुहीय जन्तु कहते हैं। उदाहरण-चपटे कृमि (प्लेटीहैल्मिन्थीज), जैसे फेशियोला, टीनिया आदि।
    एक्टोडर्म मीसोग्लीया एण्डोडर्म

    चित्र: अगुहीय (Acoelomate)

  • कूटगुहिक (Pseudocoelomates): वे जन्तु जिनमें देहगुहा मीसोडर्म (Mesoderm) से आस्तरित नहीं होती है। ऐसे जन्तुओं को कूटगुहिक प्राणी कहते हैं। अर्थात् इन जन्तुओं में मिथ्या देहगुहा या स्यूडोसीलोम पाई जाती है। उदाहरण-एस्कैल्मिन्थीज (Aschelminthes) जैसे एस्केरिस।
    एक्टोडर्म गुहा (ब्लास्टोसील) मीसोडर्म एण्डोडर्म

    चित्र: कूटगुहिक (Pseudocoelomate)

  • प्रगुही (Coelomates): वे जन्तु जिनमें वास्तविक देहगुहा (सीलोम) होती है। यह देहगुहा मीसोडर्म द्वारा पूरी तरह से आस्तरित होती है। प्रगुही जन्तुओं को दो उपप्रकारों में बांटा गया है:
    (अ) शाइजोसीलोमेट्स (Schizocoelomates): इसमें आद्यान्त्र बनने के बाद एण्डोडर्म से दो कोशिकाएँ उभित होती हैं, जिन्हें टीलोब्लास्ट या 4d कोशिकाएँ कहते हैं। इसकी वृद्धि द्वारा पट्टिका का निर्माण होता है। यह पट्टिका भविष्य की मीसोडर्म का निर्माण करती है। इस पट्टी के विपाटन (splitting) से मध्य में एक गुहा का निर्माण होता है। इस गुहा को दीर्णगुहा या शाइजोसील (Schizocoel) कहते हैं। इस प्रकार के जन्तुओं को शाइजोसीलोमेट्स कहते हैं। उदाहरण: एनेलिडा, आर्थोपोडा, मोलस्का।
    (ब) एन्टेरोसीलोमेट्स (Enterocoelomates): इसमें आद्यान्त्र से दो पार्श्व कोष्ठ उभार के रूप में उद्गमित होते हैं। यह कोष्ठ भविष्य की मीसोडर्म का निर्माण करते हैं। कोष्ठ वृद्धि करने के बाद पृथक् होकर सीलोम का निर्माण करते हैं। इसे एन्टेरोसीलोम (Enterocoelom) कहते हैं। इस प्रकार के जन्तुओं को एन्टेरोसीलोमेट्स कहा जाता है। उदाहरण: इकाइनोडर्मेटा, हेमीकॉर्डेटा व कॉर्डेटा।
    एक्टोडर्म मीसोडर्म सीलोम एण्डोडर्म

    चित्र: प्रगुही (Coelomate)

देहगुहा की उपस्थिति जीवों में शरीर संगठन की जटिलता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो विभिन्न शारीरिक कार्यों के लिए जगह प्रदान करती है।
In simple words: देहगुहा शरीर की एक अंदरूनी खाली जगह है जो अंगों को रखती है। यह तीन तरह की होती है: अगुहीय (कोई गुहा नहीं), कूटगुहिक (नकली गुहा), और प्रगुही (असली गुहा)।

🎯 Exam Tip: देhगुहा जीवों के आंतरिक अंगों को सुरक्षा, सहारा और गति प्रदान करती है, तथा परिवहन और अपशिष्ट निष्कासन में भी भूमिका निभाती है।

 

प्रश्न 4. जन्तुओं के वर्गीकरण में सममिति किस प्रकार सहायक हैं, स्पष्ट कीजिए।
Answer: जन्तुओं के वर्गीकरण में सममिति (Symmetry) एक महत्वपूर्ण आधार है। जन्तुओं की बाह्य आकृति के आधार पर सममिति को तीन भागों में बांटा गया है:

  • असममिति (Asymmetry): कुछ जन्तुओं के शरीर की आकृति इस प्रकार की होती है कि उसे किसी भी हिस्से से दो बराबर भागों में नहीं बांटा जा सकता। ऐसे जन्तु असममित (Asymmetrical) कहलाते हैं। उदाहरण: अमीबा व बहुत से स्पंज।
  • अरीय सममिति (Radial symmetry): कुछ जन्तुओं जैसे नाइडेरिया, टीनोफोरा व इकाइनोडर्मेटा में एक छाते, घण्टी या तश्तरी की तरह अरीय सममिति मिलती है। इनमें शरीर के केंद्रीय अक्ष से होकर गुजरने वाले किसी भी तल द्वारा दो समान भाग बनाए जा सकते हैं।
  • द्विपार्श्व सममिति (Bilateral symmetry): कुछ अन्य जन्तुओं में अधर व पृष्ठ तल तो पाए जाते हैं, साथ ही इनमें अग्र व पश्च सिरों का अंतर भी स्पष्ट होता है। ऐसे जीवों को सिर्फ एक ही तल या अक्ष से दो बराबर भागों में बांटा जा सकता है। उदाहरण: कीट जन्तु, हैल्मिन्थ, आर्थोपोड, मोलस्का व कॉर्डेटा।
सममिति जीवों के अनुकूलन और जीवन शैली को समझने में मदद करती है।
In simple words: सममिति का मतलब है कि शरीर को कितने बराबर हिस्सों में बांटा जा सकता है। यह तीन तरह की होती है: असममित (बांटा नहीं जा सकता), अरीय (कई तरह से बांटा जा सकता है), और द्विपार्श्व (एक ही तरह से दो बराबर हिस्सों में बांटा जा सकता है)। यह जीवों को वर्गीकृत करने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: सममिति का प्रकार अक्सर जन्तु की गतिशीलता, भोजन प्राप्त करने के तरीके और पर्यावरण के साथ उसके संबंध को दर्शाता है।

 

प्रश्न 5. जन्तुओं के वर्गीकरण के प्रमुख आधारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: जन्तुओं के वर्गीकरण के प्रमुख आधार निम्न प्रकार हैं:

  • शारीरिक संगठन का स्तर (Level of Body Organization): जीव कोशिकीय स्तर (जैसे स्पंज), ऊतक स्तर (जैसे नाइडेरिया), अंग स्तर (जैसे प्लेटीहैल्मिन्थीज), या अंग तंत्र स्तर (जैसे कॉर्डेटा) का संगठन दिखा सकते हैं।
  • सममिति (Symmetry): यह शरीर को केंद्रीय अक्ष के सापेक्ष कैसे व्यवस्थित किया गया है, इस पर आधारित है। यह असममित (जैसे स्पंज), अरीय सममित (जैसे नाइडेरिया), या द्विपार्श्व सममित (जैसे कीट, मानव) हो सकती है।
  • जनन स्तरों की संख्या (Number of Germ Layers): जीव द्विस्तरीय (डिप्लोब्लास्टिक, दो जनन परतें: एक्टोडर्म और एण्डोडर्म) या त्रिस्तरीय (ट्रिप्लोब्लास्टिक, तीन जनन परतें: एक्टोडर्म, मीसोडर्म और एण्डोडर्म) हो सकते हैं।
  • देहगुहा की प्रकृति (Nature of Coelom): देहगुहा शरीर की गुहा होती है। जन्तु अगुहीय (गुहा अनुपस्थित), कूटगुहिक (झूठी गुहा), या प्रगुही (वास्तविक गुहा) हो सकते हैं।
  • खंडीकरण (Segmentation): कुछ जन्तुओं का शरीर बाहरी और आंतरिक रूप से खंडों में बंटा होता है (जैसे एनेलिडा)।
  • पृष्ठरज्जु की उपस्थिति (Presence of Notochord): पृष्ठरज्जु एक कठोर, लचीली छड़ होती है जो कुछ जन्तुओं के भ्रूणीय अवस्था में या जीवन भर मौजूद होती है (कॉर्डेट्स का मुख्य लक्षण)।
ये आधार वैज्ञानिकों को जीवों के विकासवादी संबंधों को समझने और उन्हें व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।
In simple words: जन्तुओं को उनके शरीर के बनने के तरीके (कोशिकाओं, ऊतकों का स्तर), उनके शरीर के बराबर हिस्सों में बांटने का तरीका (सममिति), उनकी परतों की संख्या, शरीर में खाली जगह (गुहा) का होना, शरीर के टुकड़े होना, और रीढ़ की हड्डी जैसी संरचना होने के आधार पर बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के इन आधारों को समझना जीवों के विकासवादी संबंधों और उनकी शारीरिक जटिलता को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

तालिका 29.1 : जन्तु जगत के वर्गीकरण की रूपरेखा

जन्तु
(एक कोशिकीय, सुकेन्द्रीय)
उदाहरण-संघ प्रोटोजोआ जन्तु
(बहुकोशकीय, सुकेन्द्रकीय)

शाखा
पैराजोआ
संघ-पौरीफेरा (कोशकीय स्तर, स्पष्ट मुख व पाचन गुहा का अभाव)
यूमेटाजोआ
(ऊतक, अंग, अंगतंत्र स्तर, मुख व पाचन गुहा उपस्थित)

कोटि
रेडिएटा
उत्तकीय स्तर / अरीय सममिति, द्विस्तरीय
उदाहरण : संघ-निडेरिया / सीलेन्ट्रेटा
बाइलेटेरिया
अंग / अंग तंत्र स्तर / द्विपार्श्व सममिति / त्रिस्तरीय

उपकोटि
अगुहीय
(देहगुहा रहित)
संघ-प्लेटीहैल्मिन्थीज
कूटगुहीय
(कूट देहगुहा)
संघ-निमेटोडा/
निमेटहैल्मिन्थीज
गुहीय (यूसीलोमैटा)
(वास्तविक देहगुहा)
महासंघ
खण्ड-प्रोटोस्टोमिया खण्ड-ड्यूटेरोस्टोमिया
शाइजोसीलोमेटा
मुख कोरक रन्ध्र या निकट से,
सर्पिल विदलन
संघ-एनेलिडा
संघ-आर्थोपोडा
संघ-मोलस्का
एन्टरोसीलोमेटा
गुदा कोरक रन्ध्र या निकट से,
अरीय विदलन
संघ-इकाईनोडर्मेटा
संघ-हेमीकोर्डटा
संघ-कोर्डेटा

Free study material for Biology

RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 11 Biology textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Biology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Biology Class 11 Solved Papers

Using our Biology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Biology are as per latest RBSE curriculum.

Are the Biology RBSE solutions for Class 11 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 11 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Biology. You can access RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Biology RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 29 जन्तुओं का वर्गीकरण in printable PDF format for offline study on any device.