RBSE Solutions Class 10 Social Science Chapter 2 संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० त

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Class 10 Social Science Chapter 2 संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० त RBSE Solutions PDF

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. गुलाम वंश का अन्य नाम क्या है?
Answer: गुलाम वंश को यामिनी या इल्बरी वंश के नाम से भी जाना जाता है। इस वंश के शासकों को 'गुलाम' इसलिए कहा जाता था क्योंकि उनमें से कई पहले गुलाम थे जिन्हें बाद में शासक बनाया गया।
In simple words: गुलाम वंश को यामिनी या इल्बरी वंश भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इतिहास में राजवंशों के वैकल्पिक नाम याद रखें, क्योंकि प्रश्न किसी भी नाम से पूछा जा सकता है।

 

प्रश्न 2. रजिया सुल्तान ने याकूत को किस पद पर नियुक्त किया था?
Answer: रजिया सुल्तान ने याकूत को अमीर अखूर के पद पर नियुक्त किया था, जिसका अर्थ अश्वशाला का प्रधान होता है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और विश्वसनीय पद था।
In simple words: रजिया सुल्तान ने याकूत को घुड़सवारों का मुख्य अधिकारी बनाया था, जिसे अमीर अखूर कहते थे।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पदों और उनके अर्थों को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

प्रश्न 3. 'लौह एवं रक्त' की नीति को लागू करनेवाला शासक कौन था?
Answer: 'लौह एवं रक्त' की कठोर नीति को लागू करने वाला शासक बलबन था। इस नीति का उद्देश्य विद्रोहियों को कुचलना और राज्य में अनुशासन बनाए रखना था।
In simple words: बलबन ने 'लौह एवं रक्त' की कड़ी नीति अपनाई थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण शासकों और उनकी नीतियों को उनके नाम के साथ याद करें।

 

प्रश्न 4. बाबरनामा का फ़ारसी में अनुवाद किसने किया था?
Answer: बाबरनामा का फ़ारसी में अनुवाद अब्दुर्ररहीम खानखाना ने किया था। यह मूल रूप से बाबर द्वारा तुर्की भाषा में लिखी गई थी, जिसमें उसके जीवन और साम्राज्य का विवरण है।
In simple words: अब्दुर्ररहीम खानखाना ने बाबरनामा को फ़ारसी भाषा में बदला था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक ग्रंथों के लेखकों और अनुवादकों के नाम याद रखें।

 

प्रश्न 5. "अँड ट्रंक रोड' किस शासक ने बनवाई थी?
Answer: 'ग्रैंड ट्रंक रोड' का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था। यह एक बहुत पुरानी और महत्वपूर्ण सड़क है जिसे व्यापार और यात्रा के लिए बनाया गया था, जो आज भी भारत के एक बड़े हिस्से को जोड़ती है।
In simple words: यह सड़क शेरशाह सूरी ने बनवाई थी ताकि लोग आसानी से सफर कर सकें।

🎯 Exam Tip: प्रमुख इमारतों या सड़कों के निर्माणकर्ता शासकों के नाम और उनके योगदान को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 7. हेमू ने कौन-सी उपाधि धारण की थी?
Answer: हेमू ने राजा विक्रमजीत की उपाधि धारण की थी। यह उपाधि उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक कौशल को दिखाती थी।
In simple words: हेमू ने राजा विक्रमजीत की उपाधि ली थी।

🎯 Exam Tip: युद्धों के बाद या महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए शासकों द्वारा धारण की गई उपाधियों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 8. विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध कब हुआ था?
Answer: विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी का युद्ध 1576 ई० में हुआ था। यह युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच लड़ा गया था, जिसमें दोनों पक्षों ने बहादुरी से संघर्ष किया।
In simple words: हल्दीघाटी का मशहूर युद्ध 1576 ई० में हुआ था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक युद्धों की तारीखें और उनमें शामिल प्रमुख हस्तियां याद रखें।

 

प्रश्न 9. अकबर ने कौन-से धर्म का प्रवर्तन किया था?
Answer: अकबर ने दीन-ए-इलाही नामक एक नए धर्म का प्रवर्तन किया था। इस धर्म में सभी प्रमुख धर्मों की अच्छी बातों को शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य शांति और एकता फैलाना था।
In simple words: अकबर ने 'दीन-ए-इलाही' नाम का एक नया धर्म शुरू किया था।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा शुरू किए गए नए धर्मों या दर्शनों का उद्देश्य और सिद्धांत जानना आवश्यक है।

 

प्रश्न 10. बहमनी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
Answer: बहमनी साम्राज्य का संस्थापक हसन था, जिसे जफरशाह के नाम से भी जाना जाता था। उसने दक्षिण में एक स्वतंत्र मुस्लिम राज्य की नींव रखी थी।
In simple words: बहमनी साम्राज्य को हसन (जफरशाह) ने बनाया था।

🎯 Exam Tip: साम्राज्यों और राजवंशों के संस्थापक राजाओं के नाम हमेशा याद रखें।

 

प्रश्न 11. 'अकालतख्त' का निर्माण सिखों के किस गुरु ने करवाया था?
Answer: 'अकालतख्त' का निर्माण सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोविन्द सिंह ने करवाया था। यह सिख धर्म में न्याय और धार्मिक शक्ति का प्रतीक है, जहाँ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं।
In simple words: सिखों के गुरु हरगोविन्द सिंह ने 'अकालतख्त' बनवाया था।

🎯 Exam Tip: सिख गुरुओं के योगदान और उनके द्वारा स्थापित महत्वपूर्ण स्थानों को याद करें।

 

प्रश्न 12. शिवाजी का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?
Answer: शिवाजी का राज्याभिषेक रायगढ़ के दुर्ग में हुआ था। इस भव्य समारोह ने उन्हें एक स्वतंत्र मराठा साम्राज्य के शासक के रूप में स्थापित किया।
In simple words: शिवाजी का राज्याभिषेक रायगढ़ किले में हुआ था।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के स्थान और तारीखें याद रखना बहुत फायदेमंद होता है।

 

प्रश्न 14. 'अमर सिंह का फाटक' कहाँ पर है?
Answer: 'अमर सिंह का फाटक' दिल्ली के लाल किले में स्थित है। यह फाटक एक ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है, जहाँ अमर सिंह राठौर ने मुगल दरबार में अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था।
In simple words: 'अमर सिंह का फाटक' दिल्ली के लाल किले में है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक इमारतों के महत्वपूर्ण हिस्सों और उनसे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को याद रखें।

 

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. मुहम्मद तुगलक की पाँच योजनाओं के नाम लिखिए।
Answer: मुहम्मद तुगलक की पाँच मुख्य योजनाएँ इस प्रकार थीं: दोआब क्षेत्र में कर बढ़ाना, देवगिरी को अपनी नई राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन करना, खुरासान पर सैन्य आक्रमण करना और कराचल की ओर सैन्य अभियान चलाना। इन सभी योजनाओं का उद्देश्य साम्राज्य को मजबूत करना था, हालाँकि कुछ सफल नहीं हो पाईं।
In simple words: मुहम्मद तुगलक की मुख्य योजनाएँ थीं: दोआब में कर बढ़ाना, देवगिरी को राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा चलाना, खुरासान और कराचल पर हमला करना।

🎯 Exam Tip: शासकों की प्रमुख नीतियों या योजनाओं को उनके नाम के साथ बिंदुवार याद रखें।

 

प्रश्न 2. 'सिकंदरी गज' के बारे में बताइए।
Answer: सिकंदर लोदी ने 'सिकंदरी गज' नामक एक माप इकाई शुरू की थी, जो लगभग 30 इंच की होती थी। यह गज लंबे समय तक भूमि की माप के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा, जिससे भूमिकर (लगान) को सही ढंग से वसूलना आसान हो गया। यह भूमि प्रशासन में एक महत्वपूर्ण सुधार था।
In simple words: सिकंदर लोदी ने 'सिकंदरी गज' नाम का एक 30 इंच का पैमाना चलाया था, जिससे जमीन मापने और लगान वसूलने में आसानी हुई।

🎯 Exam Tip: मध्यकालीन प्रशासन में हुए प्रमुख सुधारों और उनके प्रभावों को याद रखें, खासकर भूमि माप प्रणालियों से संबंधित।

 

प्रश्न 3. फरीद को शेर खाँ की उपाधि किसने एवं क्यों दी?
Answer: फरीद को 'शेर खाँ' की उपाधि दक्षिणी बिहार के तत्कालीन शासक बहार खाँ ने दी थी। यह उपाधि इसलिए दी गई क्योंकि फरीद ने निहत्थे होकर अपनी बहादुरी से एक शेर को मार गिराया था। इस घटना से प्रभावित होकर बहार खाँ ने उसे यह सम्मान दिया, जिसके बाद फरीद शेरशाह सूरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
In simple words: दक्षिणी बिहार के शासक बहार खाँ ने फरीद को 'शेर खाँ' की उपाधि दी थी, क्योंकि उसने बिना हथियार के एक शेर को मार दिया था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक उपाधियों और उन्हें दिए जाने के पीछे की कहानियों को याद रखना परीक्षा में मदद कर सकता है।

 

प्रश्न 4. विजयनगर साम्राज्य का परिचय दीजिए।
Answer: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना संगम के पाँच बेटों ने की थी, जिनमें हरिहर और बुक्का सबसे प्रसिद्ध थे। उन्होंने 1336 ई० में तुंगभद्रा नदी के उत्तरी तट पर इस राज्य की नींव रखी थी। वे वारंगल के काकतीय शासकों के सामंत थे। यह जल्द ही दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली राज्य बन गया। हरिहर ने 1346 ई० तक होयसल के सभी प्रदेशों को विजयनगर के अधिकार में ले लिया। बुक्का, हरिहर का उत्तराधिकारी बना और उसने 1377 ई० तक शासन किया। उसने अपने साम्राज्य को पूरे दक्षिण भारत, रामेश्वरम, तमिल और चेर प्रदेशों तक फैलाया, जिससे विजयनगर एक विशाल साम्राज्य बन गया।
In simple words: विजयनगर साम्राज्य की शुरुआत हरिहर और बुक्का ने 1336 में तुंगभद्रा नदी के किनारे की थी। यह जल्दी ही दक्षिण भारत का एक बहुत मजबूत राज्य बन गया, जिसे बुक्का ने और फैलाया।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण साम्राज्यों की स्थापना, संस्थापक और विस्तार की मुख्य घटनाओं को एक क्रम में याद रखें।

 

प्रश्न 6. बन्दा बैरागी कौन था?
Answer: बन्दा बैरागी का असली नाम माधोदास था, जिनका जन्म 1670 ई० में एक राजपूत परिवार में हुआ था। वह गोदावरी नदी के किनारे एक आश्रम में रहते थे। जब गुरु गोविंद सिंह दक्षिण की यात्रा पर थे, तब बन्दा उनसे मिले और खुद को गुरु का शिष्य (बन्दा) कहा, जिससे वे बन्दा बैरागी के नाम से जाने गए। गुरु के आदेश पर वे पंजाब गए और वजीर खाँ को हराकर सरहिंद पर कब्जा कर लिया। सरहिंद की जीत से उत्साहित होकर सिखों ने अमृतसर, कलांनौर, बटाला और पठानकोट पर भी अधिकार कर लिया। इससे पंजाब में मुगलों का शासन खत्म हो गया। बाद में नए मुगल बादशाह फारुखसियर ने सफदर खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना बन्दा के खिलाफ भेजी। बन्दा को डेरा बाबा में लंबे समय तक घेरे रहने के बाद आत्मसमर्पण करना पड़ा। उन्हें दिल्ली ले जाकर सैकड़ों साथियों के साथ मौत के घाट उतार दिया गया, लेकिन उनकी बहादुरी और निष्ठा हमेशा याद रखी गई।
In simple words: बन्दा बैरागी का असली नाम माधोदास था। वह गुरु गोविंद सिंह के शिष्य बने और पंजाब में सिखों का नेतृत्व किया। उन्होंने मुगलों के खिलाफ कई जीत हासिल कीं, लेकिन बाद में उन्हें पकड़कर मार दिया गया।

🎯 Exam Tip: धार्मिक नेताओं और सैन्य नायकों की भूमिका, उनके संघर्ष और उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं पर विशेष ध्यान दें।

 

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के बारे में बताइए।
Answer: दिल्ली सल्तनत का प्रशासन मुख्य रूप से सुल्तान, अमीर और केंद्रीय विभागों पर आधारित था। इसका विवरण इस प्रकार है:
(i) **सुल्तान:** सुल्तान की उपाधि तुर्की शासकों ने शुरू की थी। राज्य की सारी शक्ति सुल्तान के हाथ में होती थी। वह मुख्य न्यायाधीश, राजनीति और महत्वपूर्ण धार्मिक मामलों का प्रमुख होता था।
(ii) **अमीर:** सुल्तान की शक्ति पर अमीर वर्ग का बहुत प्रभाव होता था। अमीरों को दो वर्गों में बांटा गया था: तुर्क अमीर और गैर-तुर्क अमीर।
(iii) **केंद्रीय शासन:** सल्तनत काल में एक मंत्रिपरिषद होती थी जिसे मजलिस-ए-खलअत कहा जाता था। इसके चार मुख्य स्तंभ थे:
(iv) **वजीर:** यह प्रधानमंत्री होता था और सभी वित्तीय मामलों का प्रभारी होता था।
(v) **आरिजे मुमालिक:** यह सेना का मंत्री होता था और सैनिकों की भर्ती व रखरखाव का काम देखता था।
(vi) **दीवाने इंशा:** यह शाही पत्र व्यवहार और राजसी आदेशों को जारी करने का काम संभालता था।
(vii) **दीवाने रियासत:** इसका काम विदेश मंत्री की तरह होता था और बाहरी राज्यों से संपर्क बनाए रखता था।
(viii) **सद्र-उस-सुदूर:** यह धर्म विभाग का प्रमुख होता था और धार्मिक मामलों व दान-दक्षिणा का प्रबंधन करता था।
(ix) **काजी-उल-कुजात:** यह न्याय विभाग का प्रमुख होता था और अदालती मामलों को देखता था।
(x) **बरीद-ए-मुमालिक:** यह सूचना विभाग का प्रमुख होता था, जो राज्य भर में गुप्तचरों और संवाददाताओं का नेतृत्व करता था।
In simple words: दिल्ली सल्तनत में राजा सबसे शक्तिशाली होता था, और उसकी मदद के लिए अमीर और कई विभाग होते थे। इन विभागों में प्रधानमंत्री (वजीर), सेना प्रमुख (आरिजे मुमालिक), न्याय प्रमुख (काजी) और गुप्तचर प्रमुख (बरीद-ए-मुमालिक) जैसे लोग काम करते थे।

🎯 Exam Tip: मध्यकालीन प्रशासन के विभिन्न पदों, उनके कार्यों और महत्व को बिंदुवार और व्यवस्थित तरीके से याद करें।

 

प्रश्न 2. सवाई जयसिंह के योगदान को स्पष्ट करें।
Answer: सवाई जयसिंह एक महान शासक और विद्वान थे, जिन्होंने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 1725 ई० में नक्षत्रों की गति की सटीक गणना करने के लिए एक शुद्ध सारणी बनवाई। उन्होंने ज्योतिष विद्या पर 'जयसिंह कारिका' नामक एक ग्रंथ भी लिखा। जयसिंह ने भारत में ज्योतिष के अध्ययन के लिए पाँच प्रमुख वेधशालाएँ (जंतर-मंतर) बनवाईं। ये वेधशालाएँ जयपुर, दिल्ली, मथुरा, बनारस और उज्जैन में स्थित थीं। जयपुर का जंतर-मंतर इन सभी में सबसे बड़ी वेधशाला है, जिसे जुलाई 2010 ई० में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया। सवाई जयसिंह ने आमेर की जगह जयपुर को कछवाहा राजवंश की नई राजधानी बनाया। उन्होंने 1740 ई० में राजसूय, वाजपेय और अश्वमेध जैसे यज्ञ भी करवाए। यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों के रहने के लिए उन्होंने जलमहलों का निर्माण करवाया था।
In simple words: सवाई जयसिंह ने तारों की गणना के लिए सारणियां और ज्योतिष पर ग्रंथ लिखे। उन्होंने जयपुर, दिल्ली सहित पाँच जगहों पर बड़ी वेधशालाएँ (जंतर-मंतर) बनवाईं और जयपुर शहर बसाया। उन्होंने कई यज्ञ भी करवाए और ब्राह्मणों के लिए जलमहल भी बनवाए।

🎯 Exam Tip: शासकों के वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य योगदान को उनके नाम और समय-सीमा के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 3. 'हल्दीघाटी युद्ध' पर निबंध लिखिए।
Answer: हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच लड़ा गया एक ऐतिहासिक और भीषण युद्ध था। मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह कर रहे थे, जबकि महाराणा प्रताप की सेना स्वयं महाराणा प्रताप के नेतृत्व में थी। महाराणा प्रताप ने गोगुंदा और खमनौर की पहाड़ियों के बीच स्थित हल्दीघाटी नामक तंग घाटी में अपना पड़ाव डाला था। यह घाटी इतनी संकरी थी कि इसमें एक बार में केवल एक व्यक्ति ही प्रवेश कर सकता था। सैनिकों की संख्या कम होने के बावजूद, महाराणा प्रताप के लिए यह स्थान मोर्चाबंदी के लिए बहुत अच्छा था। उनके पहाड़ों से परिचित सैनिक आसानी से छिपकर आक्रमण कर सकते थे। युद्ध के दौरान, महाराणा प्रताप की नजर मुगल सेनापति मानसिंह पर पड़ी। उनके वफादार घोड़े चेतक ने स्वामी का संकेत समझा और मानसिंह के हाथी 'मरदाना' पर चढ़ गया। चेतक ने अपने पैर हाथी के सिर पर रखे और महाराणा प्रताप ने अपने भाले से मानसिंह पर जोरदार प्रहार किया। मानसिंह तो हाथी के हौदे में छिप गया, लेकिन उसके पीछे बैठा अंगरक्षक मारा गया और हौदे की छतरी का एक खंभा टूट गया। उसी समय, हाथी की पूंछ में बंधे एक जहरीले खंजर से चेतक का पैर कट गया। इसी दौरान, मुगल शाही सेना ने प्रताप को चारों तरफ से घेर लिया। बड़ी सादड़ी के झाला मन्ना ने राणा के पास पहुँचकर उनसे निवेदन किया कि वे राजचिह्न उतारकर उसे दे दें और युद्ध के मैदान से चले जाएँ, क्योंकि मेवाड़ की भलाई इसी में थी। राणा ने चेतक के घायल होने की स्थिति को देखते हुए यह स्वीकार कर लिया। राजचिह्न बदलते ही, सैकड़ों मुगल तलवारें झाला मन्ना पर टूट पड़ीं और झाला मन्ना इन प्रहारों का बहादुरी से सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। महाराणा प्रताप का वफादार घोड़ा चेतक बलीचा गाँव में एक छोटे नाले को पार करते हुए स्वर्ग सिधार गया। महाराणा प्रताप जो किसी भी स्थिति में नहीं रोते थे, वे चेतक की मृत्यु पर अपनी आँखों में आँसू नहीं रोक पाए।
In simple words: हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच 1576 में हुआ था। प्रताप ने संकरी घाटी में मोर्चाबंदी की। चेतक घोड़े पर सवार होकर प्रताप ने मानसिंह पर हमला किया, लेकिन चेतक घायल हो गया। झाला मन्ना ने प्रताप को बचाने के लिए उनकी जगह ली और शहीद हो गए। चेतक की मृत्यु पर प्रताप बहुत दुखी हुए।

🎯 Exam Tip: हल्दीघाटी युद्ध जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत विवरण, प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका और उनके त्याग को क्रमबद्ध तरीके से याद करें।

 

प्रश्न 4. मराठों के उदय में शिवाजी का योगदान बताइए।
Answer: मराठा साम्राज्य के उदय में शिवाजी महाराज का योगदान बहुत महत्वपूर्ण था। 12 साल की छोटी उम्र में ही शिवाजी को अपने पिता से पूना की जागीर मिली थी। सबसे पहले, 1646 ई० में 19 साल की उम्र में उन्होंने कुछ मावले युवकों की मदद से पूना के पास तोरण दुर्ग पर कब्जा कर लिया। उसी साल, 1646 ई० में उन्होंने बीजापुर के सुल्तान से रायगढ़, चाकन और 1647 ई० में बारामती, इन्द्रपुर, सिंहगढ़ तथा पुरंदर के दुर्ग भी छीन लिए। 1656 ई० में शिवाजी ने कोंकण में कल्याण और जावली के दुर्गों पर भी अधिकार कर लिया और रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया। शिवाजी के साम्राज्य विस्तार की नीति से नाराज होकर बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई० में अपने सेनापति अफजल खाँ को उन्हें दबाने के लिए भेजा। संधि की बातचीत के दौरान अफजल खाँ ने धोखा देने की कोशिश की, जिस पर शिवाजी ने अपने बघनखे (बाघ के नाखून से बना हथियार) से उसका पेट फाड़ दिया। 1663 ई० में दक्कन के मुगल वायसराय शाइस्ता खाँ को औरंगजेब ने शिवाजी को रोकने के लिए नियुक्त किया। शाइस्ता खाँ ने पूना पर अधिकार कर लिया, लेकिन शिवाजी ने रात में उसके शिविर पर हमला किया, जिसमें उसका एक बेटा मारा गया और उसकी तीन उंगलियाँ कट गईं। 1664 ई० में शिवाजी ने मुगलों के अधीन सूरत को लूटा। इन सभी गतिविधियों से क्रोधित होकर औरंगजेब ने अपने मंत्री आमेर के राजा मिर्जा जयसिंह और दिलेर खान को भेजा। मुगल सेना ने उनके कई किले जीत लिए। मजबूर होकर शिवाजी ने जयसिंह के साथ 1665 ई० में पुरंदर की संधि की। 1666 ई० में शिवाजी को आगरा किले में नजरबंद कर लिया गया, लेकिन नवंबर 1666 ई० में वे अपने बेटे शम्भाजी के साथ गुप्त रूप से कैद से निकल भागे और अपने घर सुरक्षित पहुँच गए। अगले साल, औरंगजेब ने शिवाजी को 'राजा' की उपाधि दी और बरार की जागीर दी, जिससे मराठा साम्राज्य को और मजबूती मिली।
In simple words: शिवाजी ने छोटी उम्र में ही किले जीतकर मराठा साम्राज्य बनाया। उन्होंने बीजापुर के अफजल खाँ और मुगल सेनापति शाइस्ता खाँ को हराया। उन्होंने सूरत को लूटा और पुरंदर की संधि की। बाद में वे आगरा से भाग निकले और औरंगजेब ने उन्हें राजा की उपाधि दी, जिससे मराठों का उदय हुआ।

🎯 Exam Tip: शिवाजी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, उनके सैन्य अभियानों और विभिन्न संधियों को उनके योगदान के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 5. गुरुनानक देव का परिचय देते हुए सिख धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: गुरुनानक देव का जन्म 15 अप्रैल, 1469 ई० को हुआ था। उनका विवाह सुलखनी के साथ हुआ था और वे अध्यात्म में गहरी रुचि रखते थे। नानक देव ने 'मानुष की जात सबै एक' (सभी मनुष्य एक हैं) के सिद्धांत का प्रचार किया और इसके लिए पूरे भारत की यात्रा की, जिसे 'उदासियाँ' कहा जाता है। उनकी शिक्षाएँ सिख धर्म की नींव बनीं। सिख धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ इस प्रकार हैं:
(i) **एक ईश्वर में विश्वास:** नानक देव ने एक ही ईश्वर में विश्वास करने और उसके नाम की महानता का जाप करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है और सर्वशक्तिमान है।
(ii) **शुभ कर्म और समानता:** उन्होंने मनुष्य को अच्छे कर्म करने पर बल दिया और जाति, पाति, ऊँच-नीच के भेद-भाव का विरोध करते हुए समाज सुधार का काम किया।
(iii) **सेवा और सत्संग:** उन्होंने 'लंगर प्रथा' का प्रचलन किया, जहाँ सभी लोग साथ बैठकर भोजन करते थे, जो समानता का प्रतीक था। साथ ही, सत्संग के केंद्र 'मंझियाँ' की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया।
In simple words: गुरुनानक देव ने 'सभी मनुष्य एक हैं' का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं में एक ईश्वर में विश्वास, अच्छे कर्म करना, जाति-भेदभाव का विरोध करना और 'लंगर' व सत्संग जैसी प्रथाएँ शामिल थीं।

🎯 Exam Tip: धार्मिक गुरुओं के जन्म, जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी शिक्षाओं को बिंदुवार तरीके से याद करें, खासकर उनके मुख्य सिद्धांतों को।

 

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (More questions solved)

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. भारत में अरबों द्वारा पहला समुद्री आक्रमण कब और कहाँ हुआ?
Answer: भारत में अरबों द्वारा पहला समुद्री आक्रमण उमरा खलीफा के समय 636 ई० में 'ढाणे' नामक स्थान पर हुआ था। यह आक्रमण समुद्री मार्ग से किया गया था।
In simple words: अरबों ने भारत पर पहला समुद्री हमला 636 ई० में उमरा खलीफा के समय ढाणे में किया था।

🎯 Exam Tip: भारत पर हुए पहले विदेशी आक्रमणों की तारीख, स्थान और आक्रमणकारियों के नाम याद रखें।

 

प्रश्न 2. कुतुबुद्दीन ऐबक को दूसरे किस नाम से पुकारा जाता था?
Answer: कुतुबुद्दीन ऐबक को 'लाख बख्श' के नाम से भी पुकारा जाता था। उसे यह उपाधि इसलिए मिली थी क्योंकि वह बहुत दानवीर था और लाखों में दान करता था।
In simple words: कुतुबुद्दीन ऐबक को 'लाख बख्श' भी कहते थे क्योंकि वह बहुत दान करता था।

🎯 Exam Tip: शासकों को दी गई उपाधियाँ और उनके पीछे के कारणों को जानना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 3. कुतुबमीनार किस सूफी संत की स्मृति में बनवाया गया?
Answer: कुतुबमीनार का निर्माण प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबददीन बख्तियार काकी की स्मृति में करवाया गया था। यह उनकी याद में बनाया गया एक बहुत बड़ा और भव्य स्मारक है।
In simple words: कुतुबमीनार सूफी संत ख्वाजा कुतुबददीन बख्तियार काकी की याद में बनाया गया था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक इमारतों के पीछे की प्रेरणा या जिन व्यक्तियों की याद में उन्हें बनाया गया है, उनके नाम याद रखें।

 

प्रश्न 4. कुतुबमीनार को किसने बनवाया?
Answer: कुतुबमीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू करवाया था और इसे इल्तुतमिश ने पूरा किया था। यह दिल्ली की एक बहुत प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारत है, जो अपनी वास्तुकला के लिए जानी जाती है।
In simple words: कुतुबमीनार को कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनाना शुरू किया था, और इल्तुतमिश ने इसे खत्म किया।

🎯 Exam Tip: किसी भी बड़ी इमारत के निर्माण की शुरुआत और उसे पूरा करने वाले शासकों के नाम दोनों याद रखें।

 

प्रश्न 6. बलबन की लौह और रक्त की नीति क्या थी?
Answer: बलबन ने शत्रुओं और विद्रोहियों के प्रति 'लौह और रक्त' की नीति अपनाई थी। इस नीति के तहत, पुरुषों को मार दिया जाता था और बच्चों तथा स्त्रियों को गुलाम बना लिया जाता था। इसका उद्देश्य राज्य में कठोर नियंत्रण स्थापित करना और किसी भी विरोध को पूरी तरह कुचल देना था।
In simple words: बलबन ने दुश्मनों के लिए 'लौह और रक्त' की नीति अपनाई थी, जिसमें पुरुषों को मारकर और स्त्रियों-बच्चों को गुलाम बनाकर विद्रोहियों को खत्म किया जाता था।

🎯 Exam Tip: शासकों की नीतियों के नाम और उनके मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें।

 

प्रश्न 7. अमीर खुसरो ने अलाउद्दीन को कैसी पदवियों से विभूषित किया है?
Answer: अमीर खुसरो ने अपनी रचना 'खजाइनुल फुतूह' में अलाउद्दीन खिलजी को 'विश्व का सुल्तान' और 'जनता का चरवाहा' जैसी उपाधियों से नवाजा था। इन उपाधियों से अलाउद्दीन की शक्ति, न्याय और प्रजा के प्रति उसकी चिंता को दर्शाया गया है।
In simple words: अमीर खुसरो ने अलाउद्दीन को 'विश्व का सुल्तान' और 'जनता का चरवाहा' कहा था।

🎯 Exam Tip: कवियों और इतिहासकारों द्वारा शासकों को दी गई उपाधियों और उनके संदर्भों को याद करें।

 

प्रश्न 8. अलाउद्दीन खिलजी ने कौन-कौन सी उपाधि धारण की थी?
Answer: अलाउद्दीन खिलजी ने खलीफा की सत्ता को स्वीकार करते हुए स्वयं 'यास्मिन उल खिलाफत' और 'नासिरी अमीर उल मुमिनिन' की उपाधियाँ धारण की थीं। ये उपाधियाँ उसकी इस्लामी दुनिया में धार्मिक और राजनीतिक सर्वोच्चता की स्वीकृति को दर्शाती हैं।
In simple words: अलाउद्दीन खिलजी ने 'यास्मिन उल खिलाफत' और 'नासिरी अमीर उल मुमिनिन' जैसी उपाधियाँ ली थीं।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा धारण की गई धार्मिक और राजनीतिक उपाधियों को उनके अर्थ सहित याद रखें।

 

प्रश्न 9. फिरोज तुगलक ने दिल्ली में किस तरह की खेती को प्रोत्साहित किया?
Answer: फिरोज तुगलक ने दिल्ली में खरबूजों और अंगूरों की खेती को बहुत बढ़ावा दिया था। उसने कई नए बाग भी लगवाए, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और लोगों को आर्थिक लाभ मिला।
In simple words: फिरोज तुगलक ने दिल्ली में खरबूजों और अंगूरों की खेती को बढ़ावा दिया और कई बाग लगवाए।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा कृषि विकास और नए फसल पैटर्न को बढ़ावा देने के प्रयासों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 10. तैमूरलंग ने भारत पर कब और किसके शासन काल में आक्रमण किया और किसे अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया?
Answer: तैमूरलंग ने भारत पर 1398 ई० में नासिरूद्दीन महमूद के शासन काल में आक्रमण किया था। दिल्ली को जीतने के बाद, तैमूर ने खिज्र खाँ को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया, जिससे दिल्ली सल्तनत और कमजोर हो गई।
In simple words: तैमूरलंग ने 1398 में नासिरूद्दीन महमूद के समय भारत पर हमला किया और खिज्र खाँ को अपना प्रतिनिधि बनाया।

🎯 Exam Tip: प्रमुख आक्रमणों की तारीख, उस समय के शासक और आक्रमणकारी द्वारा नियुक्त प्रतिनिधियों के नाम याद रखें।

 

प्रश्न 11. बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध कब, कहाँ हुआ? यह युद्ध बाबर ने किस पद्धति से लड़ा था?
Answer: बाबर और राणा सांगा के बीच 1527 ई० में खानवा नामक स्थान पर युद्ध हुआ था। बाबर ने यह युद्ध 'तुलुगमा' नामक एक खास युद्ध पद्धति से लड़ा था। इस पद्धति में सेना को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर दुश्मन को चारों तरफ से घेर लिया जाता था, जिससे दुश्मन के लिए बचना मुश्किल हो जाता था।
In simple words: बाबर और राणा सांगा के बीच खानवा में 1527 में लड़ाई हुई थी। बाबर ने इस लड़ाई में सेना को घेरने की 'तुलुगमा' चाल का इस्तेमाल किया।

🎯 Exam Tip: प्रमुख युद्धों की तारीख, स्थान, मुख्य पक्ष और इस्तेमाल की गई सैन्य रणनीतियों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 13. विश्व प्रसिद्ध मयूर सिहांसन (तख्ते ताऊस) किसने बनवाया था?
Answer: विश्व प्रसिद्ध मयूर सिंहासन (तख्ते ताऊस) को मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। यह शाही दरबार के लिए बनाया गया एक बहुत ही महंगा और खूबसूरत सिंहासन था, जिसमें कई कीमती रत्न जड़े हुए थे।
In simple words: मयूर सिंहासन को बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था।

🎯 Exam Tip: मुगल काल की प्रमुख स्थापत्य कला और उनके निर्माणकर्ताओं के नाम याद रखें।

 

प्रश्न 14. जहाँगीर के दरबार में कौन-सा ब्रिटिश दूत आया था?
Answer: जहाँगीर के दरबार में ब्रिटिश दूत कैप्टन हॉकिन्स और सर टामस रो आए थे। ये दोनों व्यापारिक और कूटनीतिक उद्देश्यों से मुगल दरबार में आए थे, जिससे भारत और ब्रिटेन के संबंध स्थापित हुए।
In simple words: जहाँगीर के दरबार में कैप्टन हॉकिन्स और सर टामस रो नाम के ब्रिटिश दूत आए थे।

🎯 Exam Tip: यूरोपीय यात्रियों और दूतों के नाम, वे किस शासक के दरबार में आए और उनके यात्रा के उद्देश्य को याद रखें।

 

प्रश्न 15. 'पुरंदर की संधि' किसके-किसके बीच हुआ था?
Answer: पुरंदर की संधि जून 1665 ई० में शिवाजी महाराज और मुगल सेनापति राजा जय सिंह के बीच हुई थी। इस संधि में कई महत्वपूर्ण शर्तें थीं, जिसने शिवाजी और मुगल साम्राज्य के संबंधों को प्रभावित किया।
In simple words: पुरंदर की संधि 1665 में शिवाजी और राजा जय सिंह के बीच हुई थी।

🎯 Exam Tip: प्रमुख ऐतिहासिक संधियों की तारीख, मुख्य पक्ष और उनके महत्वपूर्ण प्रावधानों को याद रखें।

 

प्रश्न 16. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण के तहत कौन-कौन से नये पद सृजित किए?
Answer: अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए कई नए पद बनाए थे। इनमें दीवान-ए-रियासत (जो व्यापार का नियंत्रक था), शाहना या दण्डाधिकारी (जो बाजार का दरोगा था), मुहतसिब (जो जनसाधारण का रक्षक और नाप-तौल का निरीक्षण करता था) और बरीद-ए-मुमलिक (जो गुप्तचर अधिकारी था) शामिल थे। इन पदों से प्रशासन को मजबूत किया गया।
In simple words: अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार पर नियंत्रण के लिए दीवान-ए-रियासत, शाहना, मुहतसिब और बरीद-ए-मुमलिक जैसे नए पद बनाए थे।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधारों और नए बनाए गए पदों को उनके कार्यों के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 17. किस शासक ने सरकारी एवं सेना की नौकरी को वंशानुगत बना दिया?
Answer: फिरोजशाह तुगलक ने सरकारी और सेना की नौकरी को वंशानुगत बना दिया था। इसका मतलब था कि पिता के बाद पुत्र को ही वह नौकरी मिलती थी, जिससे वंशानुगत अधिकार मजबूत हुए।
In simple words: फिरोजशाह तुगलक ने सरकारी और सेना की नौकरियों को पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाला बना दिया था।

🎯 Exam Tip: मध्यकालीन प्रशासन में हुए प्रमुख परिवर्तनों पर ध्यान दें, खासकर वे जो नियुक्ति और पदोन्नति से संबंधित हों।

 

प्रश्न 18. फिरोजशाह तुगलक ने कौन-कौन से नगर की स्थापना की?
Answer: फिरोजशाह तुगलक ने कई महत्वपूर्ण शहरों की स्थापना की, जिनमें फिरोजाबाद, हिसार, फतेहाबाद, जौनपुर और फिरोजपुर प्रमुख हैं। उसने इन शहरों को अपनी शासन व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को सुविधाएँ देने के लिए बनवाया था।
In simple words: फिरोजशाह तुगलक ने फिरोजाबाद, हिसार, फतेहाबाद, जौनपुर और फिरोजपुर जैसे शहर बनाए।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा स्थापित प्रमुख शहरों और उनके महत्व को याद रखें।

 

प्रश्न 20. अकबर और औरंगजेब के शासन काल में कितने सूबे (प्रांत) थे?
Answer: अकबर के शासनकाल में 15 सूबे (प्रांत) थे, जबकि औरंगजेब के शासनकाल तक इनकी संख्या बढ़कर 21 हो गई थी। यह वृद्धि मुगल साम्राज्य के विस्तार को दर्शाती है।
In simple words: अकबर के समय 15 प्रांत थे, जो औरंगजेब के समय बढ़कर 21 हो गए थे।

🎯 Exam Tip: विभिन्न मुगल शासकों के अधीन साम्राज्य के प्रशासनिक विभाजन (सूबे) की संख्या याद रखें।

 

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. बलबन का राजत्व सिद्धान्त क्या है?
Answer: बलबन का राजत्व सिद्धांत बहुत कठोर था। इस सिद्धांत के अनुसार, राजा पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि होता है और उसे ईश्वर द्वारा दिए गए खास गुण प्राप्त होते हैं। राजा को साधारण जनता से अलग माना जाता था, जिसे शासन करने की दैवीय शक्ति प्राप्त होती है। इसका उद्देश्य राजा की सत्ता को मजबूत और अविवादित बनाना था।
In simple words: बलबन का सिद्धांत था कि राजा भगवान का दूत होता है और उसे शासन करने की शक्ति भगवान से ही मिलती है।

🎯 Exam Tip: शासकों के राजत्व सिद्धांतों और उनके पीछे के मुख्य विचारों को याद करें।

 

प्रश्न 2. अलाउद्दीन खिलजी ने विद्रोहों पर नियंत्रण के लिए कौन से आदेश जारी किए?
Answer: अलाउद्दीन खिलजी ने विद्रोहों को रोकने के लिए चार मुख्य आदेश जारी किए थे:
(i) **अमीर वर्ग की संपत्ति जब्त करना:** उसने अमीर वर्ग की संपत्ति जब्त कर ली ताकि वे विद्रोह के लिए धन इकट्ठा न कर सकें।
(ii) **खालसा भूमि को कृषि योग्य बनाना:** उसने खालसा भूमि को कृषि योग्य बनाया, जिससे राज्य की आय बढ़ी और अमीरों की आर्थिक शक्ति कमजोर हुई।
(iii) **राजस्व में वृद्धि और शराब पर रोक:** उसने राजस्व में वृद्धि की और दिल्ली में शराब (मद्य) पीने पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
(iv) **गुप्तचर प्रणाली का गठन और मेल-मिलाप पर रोक:** उसने एक मजबूत गुप्तचर प्रणाली बनाई और अमीरों के आपस में मेल-मिलाप और दावतों पर भी रोक लगा दी, ताकि कोई षड्यंत्र न रच सके।
In simple words: अलाउद्दीन खिलजी ने विद्रोह रोकने के लिए अमीरों की संपत्ति जब्त की, खालसा भूमि को खेती लायक बनाया, लगान बढ़ाया, दिल्ली में शराब बंद की, गुप्तचर रखे और अमीरों के मिलने-जुलने पर रोक लगा दी।

🎯 Exam Tip: शासकों द्वारा विद्रोहों को दबाने के लिए अपनाई गई नीतियों और उनके प्रभावों को बिंदुवार याद रखें।

 

प्रश्न 3. अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक तथा आर्थिक सुधार के बारे में व्याख्या करें।
Answer: अलाउद्दीन खिलजी ने अपने प्रशासन और अर्थव्यवस्था में कई बड़े सुधार किए। उसने पुलिस, गुप्तचर, डाक व्यवस्था और प्रांतीय प्रशासन में सुधार किए। उसका सबसे महत्वपूर्ण सुधार बाजार नियंत्रण था। उसने चीजों की कीमतें तय कर दी थीं ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। इस व्यवस्था को चलाने के लिए उसने कई नए पद बनाए, जैसे:
* **दीवान-ए-रियासत:** यह व्यापार का मुख्य नियंत्रक होता था।
* **शाहना या दण्डाधिकारी:** यह बाजार का दरोगा होता था और कीमतों पर नजर रखता था।
* **मुहतसिब:** यह आम लोगों का रक्षक था और नाप-तौल का निरीक्षण करता था।
* **बरीद-ए-मुमालिक:** यह गुप्तचर अधिकारी था, जो बाजार में होने वाली हर गतिविधि की खबर सुल्तान तक पहुँचाता था।
इन सुधारों से वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित हुई और राज्य को आर्थिक स्थिरता मिली, जिससे सेना को कम वेतन में भी बनाए रखा जा सका।
In simple words: अलाउद्दीन खिलजी ने पुलिस, गुप्तचर और डाक व्यवस्था जैसे प्रशासन में सुधार किए। उसका सबसे बड़ा सुधार बाजार नियंत्रण था, जिसमें उसने चीजों की कीमतें तय कीं और दीवान-ए-रियासत, शाहना, मुहतसिब और बरीद-ए-मुमलिक जैसे अधिकारी बनाए ताकि बाजार ठीक से चले।

🎯 Exam Tip: अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को विस्तृत रूप से समझें, खासकर बाजार नियंत्रण व्यवस्था और उसमें शामिल अधिकारियों के नामों को।

 

प्रश्न 5. अकबर की धार्मिक नीति के बारे में व्याख्या करें।
Answer: अकबर एक सहिष्णु शासक था और उसने सभी धर्मों के प्रति उदारता दिखाई। उसने हिंदुओं पर से जजिया कर (जो एक धार्मिक कर था) खत्म कर दिया। अकबर ने गोवा से पुर्तगाली मिशनरियों को भी बुलाया। उसने धर्म पर चर्चा के लिए फतेहपुर सीकरी में 1575 ई० में 'इबादतखाना' बनवाया था, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वान चर्चा करते थे। 1581 ई० में उसने 'दीन-ए-इलाही' नामक एक नए धर्म की स्थापना की, जिसमें सभी धर्मों की अच्छी बातें शामिल थीं। अकबर ने सूफी मत के चिश्ती संप्रदाय को भी संरक्षण दिया। उसने लाहौर और आगरा में ईसाइयों के लिए चर्च बनवाए। जैन मुनि हरिविजय सूरि को उसने 'जगद्गुरु' की उपाधि दी। 1583 ई० में उसने 'इलाही संवत' नाम से एक नया कैलेंडर भी जारी किया था। अकबर की यह नीति साम्राज्य में शांति और एकता लाने में सहायक थी।
In simple words: अकबर ने सभी धर्मों के प्रति अच्छा व्यवहार किया। उसने जजिया कर हटा दिया, इबादतखाना बनवाया जहाँ धर्मों पर चर्चा होती थी, 'दीन-ए-इलाही' धर्म शुरू किया और जैन गुरु को सम्मान दिया।

🎯 Exam Tip: अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति के प्रमुख बिंदुओं और उसके प्रभावों को याद रखें, खासकर 'इबादतखाना' और 'दीन-ए-इलाही' जैसी अवधारणाओं को।

 

प्रश्न 6. औरंगजेब की धार्मिक नीति के बारे में व्याख्या करें।
Answer: औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था और उसकी धार्मिक नीति अपने पूर्वजों, विशेषकर अकबर से काफी अलग थी। उसके शासनकाल में उसने हिंदू व्यापारियों पर लगाए जाने वाले कर को 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। 1669 ई० में उसने मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया और 1679 ई० में हिंदुओं पर फिर से जजिया कर लगा दिया। औरंगजेब की इस कठोर धार्मिक नीति के कारण उसके शासनकाल में कई विद्रोह हुए। 1668 ई० में गोकुल के नेतृत्व में जाटों ने और 1672 ई० में सतनामियों ने विद्रोह किया। सिखों के गुरु तेगबहादुर ने भी औरंगजेब के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके कारण उन्हें मार दिया गया। यह नीति साम्राज्य में असंतोष का कारण बनी।
In simple words: औरंगजेब एक कट्टर शासक था। उसने हिंदू व्यापारियों पर कर बढ़ाया, मंदिर तोड़ने का आदेश दिया और फिर से जजिया कर लगाया। इस कारण जाटों, सतनामियों और सिखों ने विद्रोह किया, और गुरु तेगबहादुर को भी मार दिया गया।

🎯 Exam Tip: औरंगजेब की धार्मिक नीति के मुख्य बिंदुओं, उसके परिणामों और प्रमुख विद्रोहों को याद रखें।

 

प्रश्न 7. बीकानेर के रायसिंह की उपलब्धियों के बारे में व्याख्या करें।
Answer: रायसिंह बीकानेर के एक महत्वपूर्ण शासक थे, जिन्होंने 1589-94 ई० के दौरान अपने प्रधानमंत्री कर्मचंद की देखरेख में जूनागढ़ (बीकानेर) किले का निर्माण करवाया। उन्होंने वहाँ एक प्रशस्ति (शिलालेख) भी लगवाई, जिसे 'रायसिंह प्रशस्ति' के नाम से जाना जाता है। रायसिंह एक साहित्यकार भी थे; उन्होंने 'रायसिंह महोत्सव', 'वैधक वंशावली', 'ज्योतिष रत्नमाला' जैसे ग्रंथ लिखे और ज्योतिष ग्रंथों की भाषा पर 'बाल बोधिनी' नामक टीका भी लिखी। रायसिंह के शासनकाल में बीकानेर में अकाल पड़ा था, जिस दौरान उन्होंने जगह-जगह सदाव्रत (मुफ्त भोजन वितरण केंद्र) खोले और पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था की। बीकानेरी चित्रकला की शुरुआत भी रायसिंह के शासनकाल में ही मानी जाती है।
In simple words: रायसिंह ने जूनागढ़ किला बनवाया और 'रायसिंह प्रशस्ति' लिखवाई। वह एक विद्वान थे जिन्होंने कई ग्रंथ लिखे। अकाल के समय उन्होंने लोगों और पशुओं के लिए मदद की, और बीकानेरी चित्रकला की शुरुआत उनके समय में हुई।

🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय शासकों के स्थापत्य, साहित्यिक और जन कल्याणकारी कार्यों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 8. पुरंदर की संधि में क्या प्रावधान थे?
Answer: पुरंदर की संधि, जो जून 1665 ई० में शिवाजी और राजा जयसिंह के बीच हुई थी, में कई महत्वपूर्ण प्रावधान थे:
(i) **किले सौंपना:** शिवाजी को अपने 35 में से 23 किले मुगलों को सौंपने पड़े, जिससे उनके नियंत्रण में केवल 12 किले रह गए।
(ii) **मुगल सेवा:** शिवाजी ने मुगलों को आवश्यकता पड़ने पर सेना सहायता देने का वादा किया।
(iii) **आगरा दरबार में उपस्थिति:** शिवाजी को आगरा में मुगल दरबार में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
(iv) **सूबेदार बनवाने का भरोसा:** राजा जयसिंह ने शिवाजी को दक्षिण के मुगल सूबों का सूबेदार बनवाने का भरोसा दिया, जिससे शिवाजी को राजनीतिक लाभ मिल सके।
In simple words: पुरंदर की संधि में शिवाजी को 23 किले मुगलों को देने पड़े, उन्हें मुगलों की मदद करनी थी, आगरा दरबार में जाना था और जयसिंह ने उन्हें दक्षिण का सूबेदार बनवाने का वादा किया था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख संधियों के प्रावधानों को बिंदुवार याद रखें, क्योंकि वे अक्सर शासकों और उनके साम्राज्यों की शक्ति को दर्शाते हैं।

 

प्रश्न 9. महाराजा रणजीत सिंह के बारे में व्याख्या करें।
Answer: महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 1780 ई० में गुजरांवाला में हुआ था। उनके दादा सुकरचकिया मिसल के एक वीर नेता थे। 18वीं शताब्दी के अंत में सिख मिसलें कमजोर हो रही थीं, जिसका फायदा रणजीत सिंह ने उठाया। उन्होंने जल्दी ही अपनी शक्ति के बल पर मध्य पंजाब में एक राज्य स्थापित कर लिया। रणजीत सिंह ने 1799 ई० में लाहौर पर और 1805 ई० में अमृतसर की नंगी मिसल पर कब्जा कर लिया। 1803 में उन्होंने अकालगढ़ पर दो बार कब्जा किया। 1804 ई० में उन्होंने गुजरात के साहिब सिंह को पराजित किया। 1808 ई० में रणजीत सिंह ने सतलज नदी पार करके फरीदकोट, मलेरकोला और अंबाला को जीत लिया। 1818 ई० में मुल्तान और 1834 ई० में पेशावर पर भी कब्जा किया। 1839 ई० में रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई। उन्होंने एक मजबूत सिख साम्राज्य बनाया जो उत्तर-पश्चिम भारत में फैला हुआ था।
In simple words: महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 1780 में हुआ था। उन्होंने सिख मिसलों को एकजुट करके पंजाब में एक मजबूत राज्य बनाया। उन्होंने लाहौर, अमृतसर, मुल्तान और पेशावर सहित कई इलाकों पर कब्जा किया और 1839 में उनकी मृत्यु हो गई।

🎯 Exam Tip: महाराजा रणजीत सिंह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शासकों के प्रारंभिक जीवन, प्रमुख विजयों और साम्राज्य विस्तार को कालक्रमानुसार याद रखें।

 

प्रश्न 10. गुरु रामदास के बारे में व्याख्या करें।
Answer: गुरु रामदास सिखों के चौथे गुरु थे, जिन्होंने सिख धर्म के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने धार्मिक केंद्रों की संख्या बढ़ाई और 500 बीघा जमीन पर एक विशाल सरोवर बनवाया, जिसे बाद में अमृतसर कहा गया। सिखों का प्रसिद्ध नगर अमृतसर उन्हीं के नाम से जाना जाता है। उनके समय में पंजाब के शक्तिशाली और समृद्ध किसान सिख धर्म के अनुयायी बने। गुरु रामदास के कहने पर अकबर ने हरिद्वार यात्रा पर लगने वाला कर हटा दिया था। अकबर के साथ मित्रता रखकर रामदास ने सिखों की संख्या में वृद्धि की। गुरु रामदास ने गरीबों को दान देने की 'मसन्द प्रथा' का प्रचलन किया। उनके अनुयायी उन्हें 'गुरु सतगुरु' और 'सच्चा पातशाह' भी कहने लगे, जिससे उनकी धार्मिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई।
In simple words: गुरु रामदास ने कई धार्मिक केंद्र बनाए और अमृतसर में एक बड़ा सरोवर बनवाया। उनके समय में कई किसान सिख धर्म से जुड़े। उन्होंने अकबर से दोस्ती की और दान देने की 'मसन्द प्रथा' शुरू की। लोग उन्हें 'सच्चा पातशाह' भी कहते थे।

🎯 Exam Tip: सिख गुरुओं के धार्मिक, सामाजिक और स्थापत्य योगदान को उनके नाम और समय-सीमा के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 11. गुरु अर्जुन देव सिक्ख धर्म के सच्चे संगठनकर्ता थे। व्याख्या करें।
Answer: गुरु अर्जुन देव सिखों के पाँचवें गुरु थे और उन्हें सिख धर्म का सच्चा संगठनकर्ता माना जाता है। उन्होंने धार्मिक अधिकारों के साथ-साथ राजनीतिक अधिकार को भी गुरु को दिया। उन्होंने जहांगीर के विद्रोही पुत्र खुसरो को आशीर्वाद दिया था, जिससे जहांगीर नाराज हो गया और उन्हें प्राणदंड दिया। गुरु अर्जुन देव ने 'आदिग्रन्थ' का संकलन किया, जो सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है। उन्होंने 'मसन्द प्रथा' को एक निश्चित स्वरूप प्रदान किया और धन इकट्ठा करने के लिए विदेशों में अनुयायी भेजे, जिससे सिख धर्म आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना। गुरु अर्जुन देव का बलिदान सिख समुदाय के लिए एक बड़ा मोड़ था, जिसने सिखों में सैन्य शक्ति के रूप में शक्तिशाली बनने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी शहादत सिख धर्म के इतिहास में एक युगांतकारी घटना थी, जिसने शांतिप्रिय सिखों को संघर्ष प्रेमी बना दिया।
In simple words: गुरु अर्जुन देव सिखों के पाँचवें गुरु थे। उन्होंने 'आदिग्रन्थ' बनाया और सिख धर्म को मजबूत किया। जहांगीर ने उन्हें मार डाला, जिससे सिख समुदाय और मजबूत और संघर्षशील बन गया।

🎯 Exam Tip: सिख गुरुओं के महत्वपूर्ण कार्यों, उनके बलिदान और उनके प्रभाव को याद रखें, खासकर 'आदिग्रन्थ' के संकलन और सैन्यीकरण के संदर्भ में।

 

प्रश्न 12. सिक्खों के गुरु हरगोविन्द सिंह के बारे में व्याख्या करें।
Answer: गुरु हरगोविन्द सिंह सिखों के छठे गुरु थे और उन्होंने सिख पंथ में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। 1699 ई० में उन्होंने 'अकाल तख्त' का निर्माण करवाया, जो सिख धर्म में राजनीतिक प्रभुता का प्रतीक बनकर उभरा। जहाँगीर ने गुरु अर्जुन देव पर आर्थिक जुर्माना लगाया था और उसे उनके पुत्र गुरु हरगोविन्द सिंह से वसूल करना चाहा। जब गुरु हरगोविन्द सिंह ने जुर्माना देने से इनकार कर दिया, तो उन्हें ग्वालियर के किले में बंदी बना लिया गया। हालाँकि, गुरु हरगोविन्द सिंह ने सिख पंथ को एक सैनिक स्वरूप देना शुरू कर दिया था, जिससे वे बाहरी आक्रमणों और अत्याचारों का सामना कर सकें। उनके नेतृत्व में सिख समुदाय ने सैन्य प्रशिक्षण लेना शुरू किया, जिससे वे अपने धर्म और सम्मान की रक्षा कर सकें।
In simple words: गुरु हरगोविन्द सिंह सिखों के छठे गुरु थे। उन्होंने 'अकाल तख्त' बनवाया और सिखों को सैनिक बनाया। जहांगीर ने उन्हें जेल में डाल दिया था, लेकिन फिर भी उन्होंने सिखों को मजबूत किया।

🎯 Exam Tip: सिख गुरुओं द्वारा किए गए सैन्य और धार्मिक परिवर्तनों को याद रखें, खासकर उन गुरुओं के जिन्होंने सिख धर्म को एक सैन्य शक्ति में बदला।

 

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

 

प्रश्न 1. शेरशाह सूरी के शासन तथा उसकी उपलब्धियों के बारे में व्याख्या करें।
Answer: शेरशाह सूरी का मूल नाम फरीद था और वह हसन खाँ का पुत्र था, जो जौनपुर राज्य के अंतर्गत सासाराम का जमींदार था। शेरशाह ने अपनी रणनीतिक और सैन्य क्षमता से मुगल सम्राट हुमायूँ को दो महत्वपूर्ण युद्धों में हराया: 1539 ई० में चौसा का युद्ध और 1540 ई० में कन्नौज या बिलग्राम का युद्ध। इन जीतों के बाद हुमायूँ को भागना पड़ा और दिल्ली की सल्तनत शेरशाह के अधिकार में आ गई। उसने अपने साम्राज्य का विस्तार पश्चिम में कन्नौज से लेकर पूर्व में असम की पहाड़ियों तक और उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक किया। 1544 ई० में मालदेव को हराकर उसने अजमेर, जोधपुर और मेवाड़ पर भी अधिकार कर लिया। उसी साल, कालिंजर के युद्ध के दौरान बारूद में विस्फोट होने से शेरशाह की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद अयोग्य उत्तराधिकारियों के कारण सूर साम्राज्य का पतन हो गया।

शेरशाह के सुधार और निर्माण कार्य बहुत प्रसिद्ध हैं। उसने भूमि माप और लगान की व्यवस्था को सुधारा। उसने गल्लाबख्शी (बंटाई), नश्क (कनकूत) और नकदी (जब्ती) जैसी प्रणालियाँ चलाईं। उसने चार बड़ी सड़कें और कई सराय (विश्रामगृह) बनवाईं। उसकी सबसे लंबी सड़क बंगाल के सोनार गाँव से लेकर पेशावर तक थी, जिसे आज भी 'ग्रैंड ट्रंक रोड' के नाम से जाना जाता है। उसने मुद्रा प्रणाली में भी सुधार किया और तांबे के 380 ग्रेन के दाम वाले और चांदी के 178 ग्रेन के दाम वाले रुपये जारी किए। उसने सासाराम में एक झील के बीच अपना मकबरा भी बनवाया।
In simple words: शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराकर दिल्ली पर कब्जा किया और एक बड़ा साम्राज्य बनाया। उसने भूमि नापने की व्यवस्था सुधारी, कई सड़कें (जैसे ग्रैंड ट्रंक रोड) और सराय बनवाईं, और मुद्रा प्रणाली में भी सुधार किया। सासाराम में उसने अपना मकबरा बनवाया था।

🎯 Exam Tip: शेरशाह सूरी के प्रशासनिक सुधारों और निर्माण कार्यों को बिंदुवार याद रखें, खासकर भूमि राजस्व, सड़कों और मुद्रा पर उसके योगदान को।

 

प्रश्न 2. हम्मीर देव चौहान के साम्राज्य विस्तार और उसके द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्धों के बारे में व्याख्या करें।
Answer: हम्मीर देव चौहान रणथम्भौर के एक शक्तिशाली शासक थे। सिंहासन पर बैठते ही उन्होंने अपने साम्राज्य को बढ़ाने की नीति अपनाई। उन्होंने भीमरस के राजा अर्जुन को हराकर मण्लगढ़ से कर वसूल किया। दक्षिण की ओर अपने अभियान में, उन्होंने परमार शासक भोज को पराजित किया। इसके बाद वे चित्तौड़, आबू, वर्धनपुर (काठियावाड़), पुष्कर और चंपा होते हुए वापस रणथम्भौर पहुँचे। रणथम्भौर लौटने के बाद, विजय के उपलक्ष्य में उन्होंने 'कोटियजन यज्ञ' का आयोजन करवाया। हम्मीर ने कुल 17 युद्ध लड़े थे, जिनमें से 16 युद्धों में उन्हें विजय प्राप्त हुई थी। उनकी यह दिग्विजय नीति उन्हें एक महान योद्धा और साम्राज्य निर्माता के रूप में स्थापित करती है।
In simple words: हम्मीर देव चौहान रणथम्भौर के राजा थे। उन्होंने कई राजाओं को हराया और अपने साम्राज्य को बढ़ाया। विजय के बाद उन्होंने एक बड़ा यज्ञ करवाया और कुल 17 में से 16 युद्ध जीते थे।

🎯 Exam Tip: क्षेत्रीय शासकों के साम्राज्य विस्तार, उनके प्रमुख युद्धों और उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों को याद रखें।

 

Question 3. राव चन्द्रसेन कहाँ का राजा था? अकबर और उसके बीच होने वाले युद्ध के बारे में व्याख्या करें।
Answer: राव चन्द्रसेन मारवाड़ का शासक था। उसके दो बड़े भाई अकबर से नाराज़ होकर उनकी शरण में चले गए और शाही मदद माँगी। अकबर इसी मौके का इंतजार कर रहा था। मई 1564 ई० में अकबर ने हुसैन कुली खाँ के नेतृत्व में अपनी सेना जोधपुर भेजी और वहाँ के किले पर कब्ज़ा कर लिया। मारवाड़ के राजा चन्द्रसेन जोधपुर से भागकर भाद्राजून चले गए। 1570 ई० में जब अकबर ने नागौर दरबार लगाया, तो चन्द्रसेन वहाँ गए। लेकिन अकबर का व्यवहार और अपने प्रतिद्वंद्वी उदय सिंह को देखकर वे दरबार छोड़कर वापस आ गए। अकबर को यह पता चला, तो उसने बीकानेर के रायसिंह को जोधपुर का अधिकारी नियुक्त कर दिया। अकबर ने चन्द्रसेन को दबाने के लिए भाद्राजून में अपनी सेना भेजी। चन्द्रसेन वहाँ से अपने भतीजे कल्ला के पास सोजत पहुँचे, लेकिन मुगल सेना ने उनका पीछा वहाँ भी किया। चन्द्रसेन फिर बाड़मेर पहुँचे और अंत में सारण के पहाड़ों में संचियाय नामक जगह पर पहुँचे, जहाँ 11 जनवरी, 1581 को उनकी मृत्यु हो गई। चन्द्रसेन ने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और जीवन भर संघर्ष करते रहे।
In simple words: राव चन्द्रसेन मारवाड़ के राजा थे। उनके भाइयों ने अकबर से मिलकर उनके खिलाफ मदद माँगी। अकबर ने जोधपुर पर कब्ज़ा कर लिया। चन्द्रसेन ने अकबर की अधीनता नहीं मानी और जीवन भर मुगलों से लड़ते रहे। उनकी मृत्यु 1581 में हुई।

🎯 Exam Tip: जब किसी शासक की नीतियों या युद्धों के बारे में पूछा जाए, तो उसके प्रमुख कार्यों, विरोधियों और परिणामों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।

 

Question 4. अमरसिंह राठौर एक पराक्रमी व निडर शासक था। व्याख्या करें।
Answer: अमरसिंह राठौर एक बहुत बहादुर और निडर शासक थे। उनकी तरह कई राजपूत युवक उनके साथ जुड़ गए थे। राजा गजसिंह ने अपनी पासवान अनारा के कहने पर अमर सिंह को उनके राज्याधिकार से हटाकर देश से निकाल दिया। अमर सिंह राठौर मुगल बादशाह शाहजहाँ की सेवा में चले गए। शाहजहाँ उनकी बहादुरी से खुश होकर उन्हें 'राव' की उपाधि दी। एक बार अमर सिंह राठौर 15 दिनों तक मुगल दरबार से दूर रहे। बादशाह ने उनसे इसकी वजह पूछी, तो अमर सिंह ने गर्व से जवाब दिया कि वे शिकार पर गए थे, इसलिए दरबार नहीं आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ तक जुर्माने की बात है, उनकी तलवार ही उनकी संपत्ति है। जुर्माना वसूलने के लिए बख्शी सलावत खाँ को उनके पास भेजा गया। अमर सिंह ने जुर्माना देने से मना कर दिया। बादशाह ने उन्हें तुरंत दरबार में हाज़िर होने का आदेश दिया। अमर सिंह राठौर ने आदेश का पालन किया और दीवाने खास में बादशाह का अभिवादन किया। वहाँ पहुँचते ही सलावत खाँ ने उन्हें 'आँवार' (अशिष्ट) कहा। अमर सिंह ने यह शब्द सुनते ही अपनी तलवार खींच ली। उन्होंने सलावत खाँ का सिर काट दिया और अन्य दरबारियों को भी चोट पहुँचाई। इसके बाद वे शाहजहाँ के निवास स्थान लाल किले में बुखारा द्वार से घुसे। राठौरों की संख्या मुगल सेना के सामने बहुत कम थी, फिर भी सभी राठौर बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हो गए। लाल किले के बुखारा द्वार को उसी दिन ईंटों से बंद कर दिया गया और उस दिन से वह द्वार 'अमर सिंह का फाटक' के नाम से प्रसिद्ध हो गया। अमर सिंह राठौर का साहस और स्वाभिमान आज भी याद किया जाता है।
In simple words: अमरसिंह राठौर एक बहादुर और निडर शासक थे। राजा गजसिंह ने उन्हें राज्य से निकाल दिया, तो वे शाहजहाँ के दरबार में चले गए। जब एक दरबारी ने उनका अपमान किया, तो उन्होंने उसे मार दिया। वे कम संख्या में होने के बावजूद मुगल सेना से बहादुरी से लड़े और शहीद हो गए।

🎯 Exam Tip: किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व के बारे में बताते समय, उनकी मुख्य विशेषताओं (जैसे बहादुरी), महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके परिणामों को शामिल करें।

 

Question 5. बहमनी साम्राज्य के बारे में व्याख्या करें।
Answer: दक्षिण में बहमनी राज्य और राजवंश की शुरुआत मुहम्मद तुगलक के एक अधिकारी हसन (ज़फरशाह) ने 1347 ई० में की थी। हसन ने दक्षिण के अमीरों की सहानुभूति प्राप्त की और तुगलक के खिलाफ फैले विद्रोह का फायदा उठाकर अपना राज्य स्थापित किया। वह फारस के बहादुर योद्धा बहमन के वंशज थे। उन्होंने अल्लाउद्दीन बहमनशाह की उपाधि धारण की। उन्होंने गुलबर्गा को अपनी राजधानी बनाया। जब उनकी मृत्यु हुई, तब तक बहमनी राज्य उत्तर में पेनगंगा से दक्षिण में कृष्णा नदी और पश्चिम में गोवा से पूर्व में भोगिर तक फैल गया था। विजयनगर की पश्चिमी सीमा बहमनी राज्य से टकराती थी, इसलिए दोनों साम्राज्यों के बीच लगातार संघर्ष चलता रहा। मुदगल और रायचूर जैसे दो सीमांत किलों पर अधिकार को लेकर भी युद्ध हुए। बहमनी के नए सुल्तान अहमद ने गुलबर्गा से राजधानी हटाकर बीदर को राजधानी बनाया। बहमनी राज्य में मुस्लिम बहमनी आकर बस गए, जिसके कारण दक्षिणी और अबीसीनियाई सुन्नी मुस्लिम नाराज़ हो गए। 13वें सुल्तान मुहम्मद तृतीय ने अपने राज्य के सेवक महमूद गाँवा को फाँसी दे दी। गाँवा की मृत्यु के बाद बहमनी राज्य का पतन शुरू हो गया। अंतिम सुल्तान महमूद के शासनकाल में बहमनी साम्राज्य पाँच स्वतंत्र राज्यों में बँट गया: बरार, बीदर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीजापुर। इन राज्यों के सूबेदारों ने खुद को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
In simple words: बहमनी साम्राज्य की शुरुआत 1347 में हसन (ज़फरशाह) ने की थी। उन्होंने गुलबर्गा को राजधानी बनाया। इस साम्राज्य का विस्तार हुआ, लेकिन विजयनगर से उनके युद्ध चलते रहे। बाद में, महमूद गाँवा की मृत्यु के बाद यह साम्राज्य कमज़ोर पड़ गया और पाँच छोटे स्वतंत्र राज्यों में बँट गया।

🎯 Exam Tip: साम्राज्य के बारे में बताते समय, उसके संस्थापक, राजधानी, विस्तार और पतन के प्रमुख कारणों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 6. सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के बारे में व्याख्या करें।
Answer: गुरु गोविन्द सिंह, गुरु तेग बहादुर के पुत्र थे, और वे सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु बने। पंजाब में औरंगज़ेब के अत्याचारों का विरोध करने के लिए, उन्होंने शस्त्र और शास्त्र (हथियार और ज्ञान) दोनों की शिक्षा के लिए शिक्षण केंद्र बनाए। इससे सिक्ख समुदाय मजबूत बना। उन्होंने लाहौर के सूबेदार को 'नदौण के युद्ध' में हराया। सिक्खों को संगठित करने, उनकी बुरी प्रथाओं को हटाने और उनमें नई चेतना जगाने के उद्देश्य से उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की। खालसा पंथ में, पाँच बलिदानी भक्तों (पंज प्यारों) द्वारा 'पाहुल' (अमृत) छकाने की नई प्रथा शुरू की गई। खालसा पंथ के सिक्खों के लिए पाँच 'ककार' (कड़ा, केश, कच्छा, कृपाण, और कंघा) रखना ज़रूरी बनाया गया। औरंगज़ेब से युद्ध की आशंका के कारण, उन्होंने 1699 ई० में ही आनंदपुर साहिब में एक सैनिक केंद्र खोला। 1705 ई० में मुगलों के हमले के कारण उन्हें आनंदपुर छोड़ना पड़ा। आनंदपुर में उनके दोनों छोटे पुत्रों जोरावर सिंह और फतहसिंह को कैद करके सरहिंद के किले में दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया, लेकिन उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। चमकौर के युद्ध में उनके अन्य दो पुत्र अजीत सिंह और जुझार सिंह भी शहीद हो गए। खुदराना के संघर्ष में चालीस सिक्खों ने बहादुरी से लड़ते हुए शहादत दी, जिन्हें बाद में 'मुक्ता' कहा गया और उस स्थान को 'मुक्तासर' कहा गया। गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्खों को एक मजबूत सैन्य शक्ति में बदल दिया।
In simple words: गुरु गोविन्द सिंह सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने औरंगज़ेब के खिलाफ संघर्ष किया और सिक्खों को सैनिक शिक्षा दी। उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की और 'पंज ककार' को अनिवार्य किया। उनके कई पुत्र युद्ध में शहीद हुए, लेकिन उन्होंने सिक्खों को एक मजबूत और धार्मिक समुदाय बनाया।

🎯 Exam Tip: गुरु गोविन्द सिंह के योगदान को बताते समय खालसा पंथ की स्थापना, पाँच ककार, और मुगलों के साथ उनके संघर्ष को प्रमुखता दें।

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