RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य

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Detailed Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. नारु रोग का रोगजनक है
(क) जीवाणु
(ख) कृमि,
(ग) विषाणु
(घ) प्रोटोजोआ
Answer: (ख) कृमि
In simple words: नारु रोग एक प्रकार के कीड़े (कृमि) के कारण होता है। यह कृमि दूषित पानी से हमारे शरीर में प्रवेश करता है।

🎯 Exam Tip: रोगजनकों को याद करते समय उनके प्रकार (जैसे जीवाणु, विषाणु, कृमि) के साथ उनका सही नाम भी याद रखें.

 

Question 2. स्वस्थ शरीर का सामान्य रक्तचाप होता है
(क) 120/80
(ख) 100/60
(ग) 140/100
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) 120/80
In simple words: एक स्वस्थ इंसान का रक्तचाप आमतौर पर 120/80 होता है। ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक होता है जब दिल धड़कता है, और नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक होता है जब दिल आराम करता है।

🎯 Exam Tip: रक्तचाप के सामान्य मान को हमेशा याद रखें क्योंकि यह शरीर के महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक है.

 

Question 3. तम्बाकू किस कुल का पादप है
(क) मालवेसी
(ख) लिलीएसी
(ग) सोलेनेसी
(घ) फेबेसी ।
Answer: (ग) सोलेनेसी
In simple words: तम्बाकू एक पौधे की प्रजाति है जो 'सोलेनेसी' परिवार से संबंधित है। इसी परिवार में आलू और टमाटर भी आते हैं।

🎯 Exam Tip: पौधों के वैज्ञानिक वर्गीकरण में कुल (family) महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब विशिष्ट गुणों वाले पौधों को पहचानना हो.

 

Question 4. मदिरा का मुख्य घटक है
(क) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)
(ख) \( \text{CH}_3\text{OH} \)
(ग) \( \text{CH}_3\text{COOH} \)
(घ) \( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \)
Answer: (क) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)
In simple words: शराब का मुख्य हिस्सा एथिल अल्कोहल होता है, जिसका रासायनिक सूत्र \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \) है। यही तत्व शरीर पर नशा करता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न रासायनिक घटकों के सूत्रों और उनके सामान्य नामों को याद रखना विज्ञान के प्रश्नों में मदद करता है.

 

Question 5. आयोडीन की कमी से रोग होता है
(क) रतौंधी
(ख) रिकेटस
(ग) बांझपन
(घ) घेघा
Answer: (घ) घेघा
In simple words: आयोडीन की कमी होने पर गले में थायराइड ग्रंथि बढ़ जाती है, जिससे घेघा रोग होता है। शरीर को सही से काम करने के लिए आयोडीन बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: खनिज तत्वों की कमी से होने वाले रोगों और उनके लक्षणों को विशेष रूप से याद रखें.

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. अफीम के पादप का वैज्ञानिक नाम क्या है?
Answer: अफीम के पौधे का वैज्ञानिक नाम पैपेवर सोमनिफेरम है। यह नाम पौधे की प्रजाति और उसके गुणों को दर्शाता है।
In simple words: अफीम के पौधे का वैज्ञानिक नाम पैपेवर सोमनिफेरम है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पौधों के वैज्ञानिक नाम याद रखने से आपको जीव विज्ञान में अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं.

 

Question 7. वसीय यकृत रोग का कारण क्या है?
Answer: शराब (अल्कोहल) के बहुत ज्यादा सेवन से वसीय यकृत रोग हो जाता है। इसमें लीवर (यकृत) में वसा जमा होने लगती है, जिससे उसका काम प्रभावित होता है।
In simple words: शराब पीने से लीवर में वसा जमा हो जाती है, जिससे वसीय यकृत रोग होता है।

🎯 Exam Tip: किसी भी बीमारी के कारण को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब वह किसी हानिकारक आदत से जुड़ी हो.

 

Question 8. तम्बाकू में कौन सा हानिकारक तत्व पाया जाता है?
Answer: तम्बाकू में निकोटिन नाम का एक बहुत हानिकारक तत्व पाया जाता है। निकोटिन एक नशीला पदार्थ है जो शरीर को इसका आदी बना देता है।
In simple words: तम्बाकू में निकोटिन नाम का जहरीला तत्व होता है।

🎯 Exam Tip: पदार्थों में पाए जाने वाले मुख्य हानिकारक तत्वों के नाम और उनके प्रभावों को याद रखें.

 

Question 9. रक्तचाप मापने वाले यंत्र का नाम क्या है?
Answer: रक्तचाप को मापने के लिए जिस यंत्र का उपयोग किया जाता है, उसका नाम रक्तचापमापी (स्फाइग्नो मैनोमीटर) है। यह मशीन सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों दबावों को मापती है।
In simple words: रक्तचाप मापने के यंत्र को रक्तचापमापी या स्फाइग्नो मैनोमीटर कहते हैं।

🎯 Exam Tip: चिकित्सा उपकरणों के नाम और उनके उपयोग को जानना सामान्य विज्ञान के लिए आवश्यक है.

 

Question 10. नारु रोग के रोगजनक का नाम लिखो।
Answer: नारु रोग फैलाने वाले कृमि (कीड़े) का वैज्ञानिक नाम ड्रेकनकुलस मेडीनेन्सिस (Dracunculus medinensis) है। यह कृमि दूषित जल के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है।
In simple words: नारु रोग का कीड़ा ड्रेकनकुलस मेडीनेन्सिस कहलाता है।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट रोगों के लिए उनके रोगजनक जीवों के सटीक वैज्ञानिक नाम याद रखें, क्योंकि यह उत्तर की सटीकता को बढ़ाता है.

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. संतुलित भोजन व कुपोषण से क्या तात्पर्य है?
Answer: संतुलित भोजन वह होता है जिसमें शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व सही मात्रा में मौजूद हों। इसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और पानी जैसे घटक शामिल होते हैं। कुपोषण तब होता है जब लंबे समय तक भोजन में किसी एक या अधिक जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे शरीर कमजोर हो जाता है।
In simple words: संतुलित भोजन में सभी जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जबकि कुपोषण पोषक तत्वों की कमी से होता है।

🎯 Exam Tip: संतुलित भोजन के घटकों और कुपोषण की परिभाषा को स्पष्ट रूप से लिखें, क्योंकि यह मूलभूत अवधारणा है.

 

Question 13. पीने योग्य जल के क्या गुण होने चाहिए?
Answer: पीने वाले पानी में कोई भी हानिकारक छोटे जीव नहीं होने चाहिए। पानी का pH मान संतुलित होना चाहिए, जो आमतौर पर 7 के आसपास होता है। पानी में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन घुली होनी चाहिए, ताकि वह ताज़ा रहे। साथ ही, पानी में आंखों से दिखने वाले कोई भी कण या पेड़-पौधे के हिस्से नहीं होने चाहिए।
In simple words: पीने का पानी साफ होना चाहिए, उसमें कोई कीटाणु या गंदगी नहीं होनी चाहिए, और उसका pH संतुलित होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: स्वच्छ जल के गुणों को बिंदुवार लिखना आपको पूरे अंक दिलाने में मदद करेगा, क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं.

 

Question 14. दूषित जल के दुष्प्रभाव लिखिए।
Answer: दूषित पानी पीने से हम कई तरह की बीमारियों से बीमार हो सकते हैं। गंदे पानी में वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ और कीड़े (कृमि) पाए जाते हैं, जिनसे हैजा और पेचिस जैसे रोग होते हैं। दूषित पानी से वायरल संक्रमण भी फैलते हैं, जिससे हेपेटाइटिस, फ्लू, कोलेरा, टाइफाइड और पीलिया जैसी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। एक समय था जब राजस्थान में बाला नारु रोग एक गंभीर समस्या थी, जिसका कारण ड्रेकनकुलस मेडीनेसिस कृमि था। इसकी मादा कृमि अपने अंडे हमेशा मानव शरीर के बाहर पानी में देती थी, और ऐसे दूषित पानी का उपयोग करने से यह रोग दूसरों में फैल जाता था।
In simple words: गंदा पानी पीने से हैजा, पेचिस, टाइफाइड और नारु रोग जैसी कई बीमारियाँ हो सकती हैं, क्योंकि इसमें हानिकारक कीटाणु होते हैं।

🎯 Exam Tip: दूषित जल से होने वाली बीमारियों के नाम और उनके कारणों को विस्तार से याद रखें, क्योंकि यह स्वास्थ्य जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 15. अफीम के दूध में कौन से एल्केलॉयड पाए जाते हैं?
Answer: अफीम के दूध में मुख्य रूप से निकोटिन, सोमनिफेरिन और पैपेवरिन जैसे एल्केलॉयड पाए जाते हैं। ये पदार्थ अफीम के नशीले और औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
In simple words: अफीम के दूध में निकोटिन, सोमनिफेरिन और पैपेवरिन जैसे एल्केलॉयड होते हैं।

🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों में पाए जाने वाले विशिष्ट रासायनिक यौगिकों (एल्केलॉयड) के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 16. तम्बाकू से होने वाली हानियाँ लिखिए।
Answer: तम्बाकू के लगातार उपयोग से मुंह, जीभ, गले और फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाएं अगर तम्बाकू का सेवन करती हैं, तो गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास धीमा हो जाता है। तम्बाकू में निकोटिन पाया जाता है, जो धमनियों की दीवारों को मोटा कर देता है, जिससे रक्तचाप और हृदय गति बढ़ जाती है। सिगरेट के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) होती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को नुकसान पहुंचाकर शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है।
In simple words: तम्बाकू से कैंसर, बच्चे का धीमा विकास, बढ़ा हुआ रक्तचाप और ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आती है।

🎯 Exam Tip: तम्बाकू के हानिकारक प्रभावों को शारीरिक प्रणालियों के अनुसार वर्गीकृत करके याद करें, जैसे श्वसन, हृदय और प्रजनन प्रणाली.

 

Question 17. सबम्युकस फाइब्रोसिस रोग के लक्षण व कारण लिखिए।
Answer: सबम्युकस फाइब्रोसिस रोग में जबड़े की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिससे मुंह पूरी तरह से नहीं खुल पाता है। मुंह में घाव, छाले और सूजन भी आ जाती है, जो बाद में कैंसर में बदल सकते हैं। इस बीमारी का मुख्य कारण गुटखा का उपयोग करना है। गुटखा में मौजूद रसायन मुंह के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं।
In simple words: इस रोग में जबड़े की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और मुंह में घाव होते हैं, इसका मुख्य कारण गुटखा खाना है।

🎯 Exam Tip: किसी भी रोग के लक्षणों और कारणों को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण होता है, खासकर जब वह किसी विशिष्ट आदत से जुड़ा हो.

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 18. क्वाशिओरकोर रोग क्या है? इसके लक्षण व रोकथाम के उपाय लिखिए।
Answer: क्वाशिओरकोर (Kwashiorkor) एक बीमारी है जो प्रोटीन की कमी से होती है। गरीबी के कारण लोग अपने भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पाते, जिससे वे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। यह रोग मुख्य रूप से छोटे बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है, जिन्हें प्रोटीन की बहुत जरूरत होती है।
क्वाशिओरकोर रोग के मुख्य लक्षण हैं: बच्चों का पेट फूल जाना, भूख कम लगना, चिड़चिड़ा स्वभाव होना, त्वचा पीली, सूखी, काली और धब्बेदार होकर फटने लगना, शरीर का सूखकर कमजोर हो जाना, और आंखें कांतिहीन होकर अंदर धंस जाना। जब प्रोटीन के साथ-साथ शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी नहीं मिलती है, तो इस स्थिति को मेरसमस (Marasmus) कहते हैं, जिसमें शरीर बहुत ज्यादा सूख जाता है।
इस रोग की रोकथाम के लिए, बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं को भरपूर मात्रा में प्रोटीन युक्त भोजन खाना चाहिए। इसके लिए चिकित्सक से सलाह लेना भी बहुत जरूरी है।
In simple words: क्वाशिओरकोर प्रोटीन की कमी से होता है, जिसमें पेट फूलता है और त्वचा खराब होती है। इसे रोकने के लिए प्रोटीन वाला खाना खाना चाहिए। जब ऊर्जा और प्रोटीन दोनों की कमी हो तो मेरसमस होता है।

🎯 Exam Tip: क्वाशिओरकोर और मेरसमस के बीच अंतर को स्पष्ट करें, उनके लक्षणों को बिंदुवार लिखें और रोकथाम के उपायों को शामिल करें.

 

Question 19. समाज में अफीम चलन की प्रथा को आप कैसे रोक सकते हैं?
Answer: समाज में अफीम के चलन को रोकने के लिए कई काम किए जा सकते हैं। सबसे पहले, लोगों को अफीम के नशे से होने वाले बुरे प्रभावों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। खुशी या गम के मौकों पर अफीम देने की प्रथा का विरोध करना चाहिए। जिन माताओं को अपने छोटे बच्चों को सुलाने के लिए अफीम खिलाने की आदत है, उन्हें समझाना चाहिए कि यह बच्चों को अफीम का आदी बना सकता है। स्कूल और दूसरे शिक्षण संस्थानों में अफीम के सेवन के बुरे प्रभावों पर कार्यशालाएं आयोजित करनी चाहिए। नुक्कड़ नाटक और रैलियों के जरिए समाज में अफीम के खिलाफ जागरूकता फैलानी चाहिए।
In simple words: अफीम के बुरे प्रभावों के बारे में लोगों को बताएं, इसे बांटने की प्रथा रोकें, माताओं को बच्चों को अफीम देने से रोकें, और स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाएं।

🎯 Exam Tip: सामाजिक बुराइयों को रोकने के उपायों को व्यवहारिक और व्यापक दृष्टिकोण से लिखें, जिसमें जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी शामिल हो.

 

Question 20. विटामिन कुपोषण से होने वाले रोग एवं उनके लक्षण लिखिए।
Answer: विटामिन की कमी से कई रोग हो सकते हैं, जिन्हें विटामिन कुपोषण कहते हैं:

विटामिनरोगलक्षण
राइबोफ्लेविन (B2)राइबोफ्लेविनोसिसतंत्रिकाएं कमजोर होना, मुंह के किनारे और होंठ की त्वचा का फटना, याददाश्त में कमी।
नियासिन (B3)पेलेग्राजीभ और त्वचा पर पपड़ियां पड़ना।
एसकोर्बिक अम्ल (C)स्कर्वीमसूड़ों से खून आना, त्वचा पर चकत्ते (लाल धब्बे) बनना।
केल्सिफिरोल (D)रिकेट्सपैरों की हड्डियां मुड़ जाना, घुटनों का आपस में करीब आ जाना।

विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं, और इनकी कमी से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
In simple words: विटामिन की कमी से कई रोग होते हैं जैसे विटामिन B2 से राइबोफ्लेविनोसिस (कमजोर तंत्रिकाएं), B3 से पेलेग्रा (त्वचा पर पपड़ी), C से स्कर्वी (खून बहते मसूड़े) और D से रिकेट्स (मुड़ी हुई हड्डियां)।

🎯 Exam Tip: विटामिन और उनसे होने वाले रोगों की सूची को एक सारणी (table) के रूप में याद करें, जिससे जानकारी को आसानी से समझा और याद रखा जा सके.

 

Question 21. कोल्डड्रिंक्स से हमारे शरीर में पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों का वर्णन कीजिये।
Answer: कोल्डड्रिंक्स में लीडेन, डीडीटी, मेलेथियन और क्लोरपाइरीफॉस जैसे रसायन होते हैं जो कैंसर, तंत्रिका, प्रजनन संबंधी बीमारियों और प्रतिरक्षा प्रणाली को खराब कर सकते हैं। इनके निर्माण में फास्फोरिक अम्ल का उपयोग होता है, जो सीधे दांतों को नुकसान पहुंचाता है और लोहे तक को गलाने की क्षमता रखता है। इनमें मौजूद एथीलिन ग्लाइकोल पानी को शून्य डिग्री तक जमने नहीं देता, जिसे आम भाषा में मीठा जहर कहते हैं। बोरिक, एरिथोरबिक और बैंजोइल अम्ल मिलकर कोल्डड्रिंक्स को बहुत अम्लीय बना देते हैं, जिससे पेट में जलन, खट्टी डकारें, दिमाग में सनसनी और हड्डियों के विकास में बाधा आती है। कोल्डड्रिंक्स में 0.4 पी.पी.एस. सीसा भी होता है जो तंत्रिका, मस्तिष्क, गुर्दा, लीवर और मांसपेशियों के लिए जहरीला है। अंत में, कोल्डड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा अनिद्रा और सिरदर्द का कारण बनती है।
In simple words: कोल्डड्रिंक्स में हानिकारक रसायन होते हैं जो कैंसर, दांतों को नुकसान, एसिडिटी, तंत्रिका तंत्र की समस्याएं, अनिद्रा और सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करते हैं।

🎯 Exam Tip: कोल्डड्रिंक्स के हानिकारक प्रभावों को उनके रासायनिक घटकों के साथ जोड़कर याद करें, जिससे उत्तर अधिक विस्तृत और सटीक होगा.

 

Question 22. खाद्य पदार्थों में मिलावट पर लेख लिखिए।
Answer: आजकल बाजार में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थों में मिलावट होती है। यह मिलावट हमारे रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों में सबसे ज्यादा होती है। हमारे देश में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार हो गई है। नकली आटा, बेसन, तेल, चायपत्ती, धनिया, घी, दूध, मिर्च और मसाले खुलेआम बिक रहे हैं। अगर कोई व्यक्ति इन मिलावटी चीजों का सेवन करके बीमार हो जाए तो स्थिति और भी खराब हो जाती है, क्योंकि दवाएं भी नकली मिल रही हैं। आजकल दूध के नाम पर लोग यूरिया, डिटर्जेंट, सोडा, पोस्टर कलर और रिफाइंड तेल मिला हुआ दूध पी रहे हैं। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के 25 प्रतिशत लोग मिलावटी और घटिया दूध पी रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। बाजार में मिलने वाले खाद्य तेल, फल और सब्जियों में भी मिलावट होती है। फलों और सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए रासायनिक इंजेक्शन, लेड और कॉपर के घोल का छिड़काव किया जाता है। गोभी को सफेद दिखाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट (\( \text{AgNO}_3 \)) का छिड़काव किया जाता है। बेसन में मक्के का आटा, दाल और चावल पर बनावटी रंगों की पॉलिश की जाती है। मिठाइयों में ऐसे रंगों का उपयोग होता है जो कैंसर पैदा कर सकते हैं और डीएनए में बदलाव ला सकते हैं। नकली दवाओं की समस्या भी गंभीर है; माशेलकर समिति ने नकली दवाओं का धंधा करने वालों को मौत की सजा देने की सिफारिश की है।
भारत में सुरक्षित भोजन के लिए 1954 का अधिनियम (पी.एफ.ए.) एक मुख्य कानून है। इस कानून का नियम 65 खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों और मिलावट को नियंत्रित करता है, लेकिन यह कानून दोषी लोगों को सजा दिलाने में सफल नहीं हो पा रहा है। अक्सर लोग पकड़े जाने के बाद छूट जाते हैं और फिर से वही काम करने लगते हैं। सरकार को नियमों का सख्ती से पालन करवाना चाहिए और न्याय प्रक्रिया को तेज करना चाहिए। जानबूझकर जांच को कमजोर करना, मुकदमों को ठीक से न लड़ना, लापरवाही, धन का गलत उपयोग और राजनीतिक प्रभाव, इन सब पर रोक लगनी चाहिए ताकि मिलावटखोरी को रोका जा सके।
In simple words: खाद्य पदार्थों में मिलावट एक बड़ी समस्या है, जिसमें नकली आटा, दूध, मसाले, फल और सब्जियां शामिल हैं। इससे कई बीमारियां होती हैं, और नकली दवाएं भी एक खतरा हैं। सरकार के नियम होने के बावजूद, मिलावटखोरी को पूरी तरह से रोकना अभी बाकी है।

🎯 Exam Tip: खाद्य मिलावट के विभिन्न प्रकारों, उनके प्रभावों और रोकथाम के लिए कानूनी उपायों का वर्णन करें, साथ ही सामाजिक चेतना पर भी जोर दें.

 

Question 23. खनिज कुपोषण से होने वाली हानियों का वर्णन कीजिये।
Answer: शरीर के लिए कई खनिज तत्व बहुत जरूरी होते हैं, और इनकी कमी से विभिन्न प्रकार के रोग हो सकते हैं:
1. **आयोडीन तत्व:** थायराइड ग्रंथि में थायरोक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन जरूरी है। इसकी कमी से थायरोक्सिन हार्मोन कम बनता है, जिससे गलगंड (घेघा) रोग हो जाता है।
2. **कैल्शियम तत्व:** कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर और आसानी से टूटने वाली हो जाती हैं।
3. **लौह तत्व:** यह रक्त में हीमोग्लोबिन का एक हिस्सा है। इसकी कमी से रक्तहीनता (एनीमिया) होती है और चेहरा पीला पड़ जाता है।
4. **फास्फोरस तत्व:** फास्फोरस कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है। इसकी कमी से हड्डियां और दांत दोनों कमजोर हो जाते हैं।
5. **सोडियम तत्व:** सोडियम की कमी से मांसपेशियों में खिंचाव, तंत्रिकाओं द्वारा संदेशों का संचरण, शरीर के तरल पदार्थों का संतुलन और कई अन्य कोशिकीय कार्य प्रभावित होते हैं।
6. **पोटेशियम तत्व:** पोटेशियम की कमी से भी मांसपेशियों में खिंचाव, तंत्रिकाओं द्वारा संदेशों का संचरण, शरीर के तरल पदार्थों का संतुलन और विभिन्न कोशिकीय क्रियाओं के संचालन में बाधा आती है।
In simple words: खनिज तत्वों की कमी से कई रोग होते हैं, जैसे आयोडीन की कमी से घेघा, कैल्शियम की कमी से कमजोर हड्डियां, लोहे की कमी से एनीमिया, और सोडियम-पोटेशियम की कमी से मांसपेशी और तंत्रिका संबंधी समस्याएं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक खनिज तत्व के कार्य और उसकी कमी से होने वाले विशिष्ट रोग को उसके लक्षण के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. आयोडीन की कमी से किस ग्रन्थि की क्रिया मंद पड़ जाती है?
(अ) थायराइड ग्रन्थि
(ब) पीयूष ग्रन्थि
(स) एड्रीनल ग्रन्थि
(द) जनन ग्रन्थि
Answer: (अ) थायराइड ग्रन्थि
In simple words: शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड ग्रंथि का काम धीमा हो जाता है, जिससे हार्मोन नहीं बन पाते।

🎯 Exam Tip: विभिन्न ग्रंथियों के कार्य और उन्हें प्रभावित करने वाले तत्वों को स्पष्ट रूप से याद रखें.

 

Question 3. जल कितनी अवस्थाओं में पाया जाता है?
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
Answer: (स) तीन
In simple words: पानी तीन मुख्य रूपों में मिलता है: ठोस (बर्फ), द्रव (पानी) और गैस (भाप)।

🎯 Exam Tip: पदार्थों की तीनों अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) के उदाहरणों को याद रखना एक बुनियादी वैज्ञानिक अवधारणा है.

 

Question 4. मदिरा (शराब) के प्रभाव से होने वाला मुख्य रोग है
(अ) वसीय यकृत
(ब) नारु रोग
(स) रिकेट्स
(द) मधुमेह
Answer: (अ) वसीय यकृत
In simple words: शराब ज्यादा पीने से लीवर में चर्बी जमा हो जाती है, जिससे वसीय यकृत रोग होता है।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष आदत या पदार्थ के अत्यधिक सेवन से होने वाले प्रमुख रोगों को याद रखें.

 

Question 5. निम्न में से जंक फूड है
(अ) बर्गर
(ब) पिज्जा
(स) चिप्स
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: बर्गर, पिज्जा और चिप्स सभी जंक फूड हैं क्योंकि इनमें पोषण कम और कैलोरी, वसा और नमक ज्यादा होता है।

🎯 Exam Tip: जंक फूड के उदाहरणों को पहचानना और उनके हानिकारक प्रभावों को जानना स्वास्थ्य जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 8. कोल्डड्रिंक्स के निर्माण के समय कौनसे अम्ल का उपयोग किया जाती है, जो दाँतों पर सीधा प्रभाव डालता है?
(अ) गंधक का अम्ल
(ब) फास्फोरिक अम्ल
(स) नाइट्रिक अम्ल
(द) टारट्रिक अम्ल
Answer: (ब) फास्फोरिक अम्ल
In simple words: कोल्डड्रिंक्स में फास्फोरिक अम्ल मिलाया जाता है जो दांतों की परत को कमजोर करके उन्हें नुकसान पहुंचाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में उपयोग किए जाने वाले रसायनों और उनके प्रभावों को याद रखें.

 

Question 9. सफेदी के लिए गोभी पर निम्न में से छिड़काव किया जाता है
(अ) सिल्वर नाइट्रेट
(ब) लेड व कॉपर विलयन
(स) लेड क्रोमेट
(द) फास्फोरस का विलयन
Answer: (अ) सिल्वर नाइट्रेट
In simple words: गोभी को सफेद और ताजा दिखाने के लिए उस पर सिल्वर नाइट्रेट का छिड़काव किया जाता है, जो एक प्रकार की मिलावट है।

🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए उपयोग किए जाने वाले सामान्य रसायनों और उनके खतरनाक प्रभावों को जानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 10. नकली दवाओं का धंधा करने वालों को मृत्युदण्ड देने की सिफारिश किस समिति ने की?
(अ) आशेलकर समिति
(ब) माशेलकर समिति
(स) राशेलकर समिति
(द) काशेलकर समिति
Answer: (ब) माशेलकर समिति
In simple words: नकली दवाओं के व्यापार को रोकने के लिए माशेलकर समिति ने सुझाव दिया था कि इसे करने वालों को मौत की सजा दी जाए।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सरकारी समितियों और उनके प्रमुख सुझावों को याद रखें, खासकर जब वे जनहित के मुद्दों से संबंधित हों.

 

Question 2. पैरों की हड्डियाँ मुड़ जाना एवं घुटने पास-पास आ जाना, विटामिन की कमी से होने वाले किस रोग के लक्षण हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: पैरों की हड्डियों का मुड़ जाना और घुटनों का आपस में करीब आ जाना विटामिन D की कमी से होने वाले रिकेट्स रोग के लक्षण हैं। विटामिन D हड्डियों के सही विकास और मजबूती के लिए बहुत आवश्यक है।
In simple words: विटामिन D की कमी से बच्चों में रिकेट्स होता है, जिससे हड्डियाँ कमजोर होकर मुड़ जाती हैं और घुटने पास आ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी से होने वाले रोगों के विशिष्ट शारीरिक लक्षणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर रिकेट्स जैसे आम रोग के लिए.

 

Question 3. संतुलित भोजन किसे कहते हैं?
Answer: संतुलित भोजन वह होता है जिसमें हमारे शरीर के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मौजूद होते हैं। यह भोजन शरीर को ऊर्जा, विकास और रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।
In simple words: संतुलित भोजन में शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं।

🎯 Exam Tip: संतुलित भोजन की परिभाषा को सरल और स्पष्ट शब्दों में लिखें, क्योंकि यह स्वस्थ जीवनशैली की आधारभूत अवधारणा है.

 

Question 4. कुपोषण को परिभाषित कीजिए।
Answer: कुपोषण उस स्थिति को कहते हैं जब लंबे समय तक हमारे भोजन में एक या एक से अधिक जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। यह कमी शरीर के सामान्य कार्यों को बाधित करती है और बीमारियों का कारण बनती है।
In simple words: कुपोषण का मतलब है जब शरीर को लंबे समय तक पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: कुपोषण की परिभाषा देते समय 'लंबे समय तक' और 'एक या अधिक पोषक तत्व' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें.

 

Question 5. नियासिन (B3) की कमी से होने वाले रोग का एक लक्षण लिखिए।
Answer: नियासिन (विटामिन B3) की कमी से होने वाले रोग पेलेग्रा का एक मुख्य लक्षण जीभ और त्वचा पर पपड़ियां आना है। यह त्वचा में सूजन और खुजली का कारण भी बनता है।
In simple words: नियासिन की कमी से जीभ और त्वचा पर पपड़ियां आ जाती हैं।

🎯 Exam Tip: विटामिन की कमी से होने वाले रोगों के प्रमुख और पहचानने योग्य लक्षणों को याद रखें.

 

Question 6. मांसपेशी संकुचन एवं तंत्रिकीय आवेग का संचरण किस तत्व द्वारा सम्पन्न होता है?
Answer: मांसपेशी संकुचन और तंत्रिकीय आवेगों (तंत्रिका संदेशों) का संचरण मुख्य रूप से सोडियम तत्व द्वारा होता है। सोडियम आयन तंत्रिका कोशिकाओं और मांसपेशियों में विद्युत संकेतों के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और तंत्रिका संदेश सोडियम तत्व की मदद से आगे बढ़ते हैं।

🎯 Exam Tip: शरीर की महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में शामिल प्रमुख खनिज तत्वों और उनकी भूमिकाओं को याद रखें.

 

Question 7. बाला या नारु रोग के रोगजनक कृमि का नाम लिखिए।
Answer: बाला या नारु रोग को फैलाने वाले कृमि (कीड़े) का वैज्ञानिक नाम ड्रेकनकुलस मेडीनेंसिस है। यह कृमि दूषित पानी के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है।
In simple words: बाला या नारु रोग का कीड़ा ड्रेकनकुलस मेडीनेंसिस कहलाता है।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट रोगों के लिए उनके रोगजनक जीवों के सटीक वैज्ञानिक नाम याद रखें, क्योंकि यह उत्तर की सटीकता को बढ़ाता है.

 

Question 9. रक्तचाप किसे कहते हैं ?
Answer: रक्तचाप उस दबाव को कहते हैं जो बहता हुआ रक्त हमारी रक्तवाहिनियों (नसों) की दीवारों पर डालता है। यह दबाव हृदय के धड़कने और आराम करने के दौरान मापा जाता है।
In simple words: रक्तचाप वह दबाव है जो खून नसों की दीवारों पर डालता है।

🎯 Exam Tip: रक्तचाप की परिभाषा देते समय 'दबाव' और 'रक्तवाहिनियों की दीवारों' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें.

 

Question 10. किन मरीजों को पोटेशियम युक्त भोजन करना चाहिए?
Answer: ऐसे मरीजों को पोटेशियम युक्त भोजन करना चाहिए जिनका रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ा हुआ रहता है। पोटेशियम रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।
In simple words: जिन मरीजों का रक्तचाप ज्यादा होता है, उन्हें पोटेशियम वाला खाना खाना चाहिए।

🎯 Exam Tip: उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए आहार संबंधी सुझावों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर पोटेशियम की भूमिका को.

 

Question 11. रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़कर 140 मि.ग्रा./डे.ली. से अधिक होने वाला व्यक्ति किस रोग से ग्रसित होता है?
Answer: यदि किसी व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज का स्तर 140 मि.ग्रा./डे.ली. से अधिक हो जाता है, तो वह व्यक्ति मधुमेह (डायबिटीज) रोग से ग्रसित होता है। यह स्थिति शरीर में इंसुलिन की कमी या उसके ठीक से काम न करने के कारण होती है।
In simple words: खून में ग्लूकोज 140 मि.ग्रा./डे.ली. से ज्यादा होने पर व्यक्ति को मधुमेह रोग होता है।

🎯 Exam Tip: रक्त शर्करा के सामान्य और असामान्य स्तरों को याद रखें, क्योंकि यह मधुमेह के निदान और प्रबंधन में महत्वपूर्ण है.

 

Question 12. सत्यानासी के बीजों को किस खाद्य तेल में मिलावट के रूप में काम लिया जाता है?
Answer: सत्यानासी के बीजों को अक्सर सरसों के तेल में मिलावट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। सत्यानासी के बीज सस्ते होते हैं और उनका रंग सरसों के बीज जैसा होता है, जिससे मिलावट करना आसान हो जाता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
In simple words: सत्यानासी के बीज सरसों के तेल में मिलावट के लिए उपयोग किए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाले सामान्य मिलावटी तत्वों और उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को याद रखें.

 

Question 13. नशीले पदार्थ हेरोइन को किस पादप से प्राप्त किया जाता है?
Answer: नशीले पदार्थ हेरोइन को पेपेवर सोम्नीफेरम नामक पौधे से प्राप्त किया जाता है, जिसे अफीम का पौधा भी कहते हैं। इस पौधे के फल से अफीम निकाली जाती है, जिससे हेरोइन जैसे उत्पाद बनते हैं।
In simple words: हेरोइन नशीला पदार्थ पेपेवर सोम्नीफेरम पौधे से मिलता है।

🎯 Exam Tip: नशीले पदार्थों के स्रोतों और उनके वैज्ञानिक नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मादक द्रव्यों के सेवन के बारे में जागरूकता बढ़ाता है.

 

Question 14. सामान्य स्वस्थ मनुष्य के रुधिर में भोजन पूर्व ग्लूकोज का स्तर कितना होता है?
Answer: एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के खून में भोजन से पहले ग्लूकोज का स्तर 70-100 मिग्रा/डे.ली. होता है। भोजन के बाद यह स्तर कुछ समय के लिए बढ़ सकता है, लेकिन फिर सामान्य हो जाता है।
In simple words: स्वस्थ आदमी के खून में खाने से पहले ग्लूकोज 70-100 मिग्रा/डे.ली. होता है।

🎯 Exam Tip: रक्त शर्करा के सामान्य मान को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब खाली पेट मापा जाता है, क्योंकि यह स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है.

 

Question 15. पीने योग्य जल का pH मान कितना होता है?
Answer: पीने योग्य जल का pH मान 7 होता है, जो इसे उदासीन बनाता है। यह मान सुनिश्चित करता है कि पानी न तो ज्यादा अम्लीय हो और न ही ज्यादा क्षारीय, जिससे वह पीने के लिए सुरक्षित रहे।
In simple words: पीने वाले पानी का pH मान 7 होता है, जिसका मतलब है कि वह उदासीन है।

🎯 Exam Tip: pH स्केल पर विभिन्न पदार्थों के मान और पीने योग्य पानी के लिए आदर्श मान को याद रखें.

 

Question 2. तम्बाकू, मदिरा व अफीम के सेवन से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले कुप्रभावों को समझाइये (प्रत्येक के दो-दो)। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer:
**तम्बाकू के कुप्रभाव:**
• तम्बाकू के लगातार सेवन से मुंह, जीभ, गले और फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।
• सिगरेट के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) होती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को नष्ट करके शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर देती है।
**मदिरा (शराब) के कुप्रभाव:**
• शराब पीने से व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) प्रभावित होता है।
• इसके अधिक सेवन से वसीय यकृत रोग हो जाता है, जिससे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के निर्माण पर बुरा असर पड़ता है।
**अफीम के कुप्रभाव:**
• अफीम का सेवन व्यक्ति को उसका आदी बना देता है, जिससे उसे इसकी लत लग जाती है।
• अफीम के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है और अंत में उसकी अकाल मृत्यु हो सकती है।
In simple words: तम्बाकू से कैंसर और ऑक्सीजन की कमी होती है। शराब से याददाश्त कमजोर होती है और लीवर खराब होता है। अफीम से व्यक्ति को लत लगती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिससे अकाल मृत्यु हो सकती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न नशीले पदार्थों के प्रभावों को बिंदुवार और उनके विशिष्ट हानिकारक परिणामों के साथ याद रखें, खासकर जब तुलनात्मक अध्ययन पूछा जाए.

 

संतुलित भोजन के लाभ

 

Question. संतुलित भोजन के क्या लाभ हैं?
Answer:
• अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन खाना बहुत जरूरी है।
• संतुलित भोजन शरीर को मजबूत बनाता है, जिससे यह बीमारियों से लड़ पाता है।
• यह रोगों से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
• संतुलित भोजन दिमाग को तेज और स्वस्थ रखता है।
• संतुलित भोजन से शरीर में थकान नहीं होती और शरीर हमेशा स्वस्थ रहता है।
In simple words: संतुलित भोजन हमें स्वस्थ रखता है, शरीर को मजबूत बनाता है, बीमारियों से बचाता है, दिमाग तेज करता है और थकान दूर रखता है।

🎯 Exam Tip: संतुलित भोजन के लाभों को बिंदुवार और स्पष्ट रूप से लिखें, जिससे यह उत्तर संगठित और पढ़ने में आसान हो.

 

Question 4. कुपोषण किसे कहते हैं? प्रोटीन कुपोषण का वर्णन कीजिए।
Answer: कुपोषण वह स्थिति है जब लंबे समय तक भोजन में एक या अधिक जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
प्रोटीन कुपोषण तब होता है जब भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता। प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग को क्वाशिओरकोर (Kwashiorkor) कहते हैं। यह मुख्य रूप से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरों को प्रभावित करता है।
क्वाशिओरकोर के लक्षण हैं: बच्चों का पेट फूल जाना, भूख कम लगना, चिड़चिड़ा स्वभाव, त्वचा का पीला, सूखा, काला और धब्बेदार होकर फटना। जब प्रोटीन के साथ-साथ भोजन में पर्याप्त ऊर्जा भी कम होती है, तो शरीर सूखकर छोटा हो जाता है और आंखें कांतिहीन होकर अंदर धंस जाती हैं; इस स्थिति को मेरसमस (Marasmus) कहते हैं।
In simple words: कुपोषण पोषक तत्वों की कमी है। प्रोटीन की कमी से क्वाशिओरकोर (पेट फूलना, त्वचा खराब होना) और प्रोटीन व ऊर्जा दोनों की कमी से मेरसमस (शरीर सूखना) होता है।

🎯 Exam Tip: कुपोषण, प्रोटीन कुपोषण, क्वाशिओरकोर और मेरसमस की परिभाषाओं और उनके लक्षणों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें.

 

Question 5. निम्नलिखित खनिज तत्वों के कार्य लिखिए
• फास्फोरस
• लौह तत्व
• पोटेशियम।।
Answer:
**फास्फोरस:** यह कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है। यह ऊर्जा उत्पादन में भी सहायक है।
**लौह तत्व:** यह रक्त में हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक होता है, जो ऑक्सीजन को शरीर में ले जाता है, और ऊतकों में ऑक्सीजन के उपयोग में मदद करता है।
**पोटेशियम:** यह मांसपेशियों के संकुचन, तंत्रिका संदेशों के संचरण, शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन और विभिन्न कोशिकाओं के कार्यों में मदद करता है।
In simple words: फास्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत करता है। लोहा खून बनाने और ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है। पोटेशियम मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के काम को सही रखता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक खनिज तत्व के कार्य को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप में लिखें, क्योंकि यह शरीर क्रिया विज्ञान की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है.

 

Question 7. मोटापा (Obesity) से जुड़े रोगों के नाम लिखिए तथा मोटापे के प्रमुख कारण लिखिए।
Answer: मोटापे से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ इस प्रकार हैं:

  • हृदय रोग
  • मधुमेह
  • नींद के दौरान साँस लेने में समस्या
  • कैंसर और जोड़ों का दर्द

मोटापे के मुख्य कारण:

  • बहुत ज़्यादा तैलीय या चर्बी वाला भोजन खाना।
  • शारीरिक गतिविधियाँ कम होने के कारण शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा हो जाना।
  • जंक फूड और बनावटी खाने का ज़्यादा सेवन करना।
  • कम व्यायाम और एक जगह बैठे रहने वाली जीवनशैली।
  • मोटापा तब होता है जब शरीर में ऊर्जा के सेवन और उसके उपयोग के बीच संतुलन नहीं बन पाता है।
  • थायराइड ग्रंथि का ठीक से काम न करना (हाइपोथायरायडिज्म)।

मोटापा शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव डालता है, इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ज़रूरी है।
In simple words: मोटापा कई बीमारियाँ जैसे दिल की बीमारी और शुगर का कारण बन सकता है। यह ज़्यादा खाने, कम चलने और गलत खान-पान से होता है।

🎯 Exam Tip: मोटापे से संबंधित बीमारियों और कारणों को सूचीबद्ध करते समय, उन्हें स्पष्ट रूप से अलग-अलग श्रेणियों में बाँटें ताकि उत्तर संगठित लगे।

 

Question 8. रक्तचाप (Blood Pressure) किसे कहते हैं? निम्न रक्तचाप को समझाइए।
Answer: रक्तचाप (Blood Pressure) का अर्थ है, रक्तवाहिकाओं में बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाला गया दबाव। यह दबाव रक्त के प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) वह स्थिति है जहाँ धमनियों और नसों में रक्त का प्रवाह बहुत कम होता है। जब रक्त का दबाव कम हो जाता है, तो मस्तिष्क, हृदय और गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं। इस कारण ये अंग सामान्य रूप से काम नहीं कर पाते और धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त भी हो सकते हैं।
In simple words: रक्तचाप खून का नसों पर पड़ने वाला दबाव है। निम्न रक्तचाप तब होता है जब यह दबाव बहुत कम हो जाए, जिससे शरीर के अंगों को ज़रूरी खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

🎯 Exam Tip: रक्तचाप की परिभाषा देते समय, "वाहिनियों की दीवारों पर बहते रक्त द्वारा डाला गया दबाव" जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें। निम्न रक्तचाप के प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 10. वायरल संक्रमण के कारण होने वाले पाँच रोगों के नाम लिखिए एवं नारु रोग को रोकने एवं जल जनित रोगों से बचाव के उपाय लिखिए।
Answer: वायरल संक्रमण से होने वाले पाँच मुख्य रोग इस प्रकार हैं:

  • हेपेटाइटिस
  • फ्लू
  • हैजा
  • टाइफाइड
  • पीलिया

नारु रोग और अन्य जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए हमें पानी को छानकर, उबालकर और ठंडा करके पीना चाहिए। नदियों और तालाबों में नहाना और कपड़े धोना मना होना चाहिए, और इनकी समय-समय पर सफाई भी ज़रूरी है। स्वच्छ जल का उपयोग करके हम इन बीमारियों से बच सकते हैं।
In simple words: वायरल संक्रमण से हेपेटाइटिस, फ्लू, हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियाँ होती हैं। नारु रोग और पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए उबला और छाना हुआ पानी पीना चाहिए तथा जल स्रोतों को साफ रखना चाहिए

🎯 Exam Tip: रोगों के नाम सटीक रूप से लिखें और जल जनित रोगों से बचाव के उपायों को सूचीबद्ध करते समय स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग करें।

 

Question 11. मदिरा सेवन से मानव स्वास्थ्य पर होने वाले कोई चार कुप्रभाव लिखिए।
Answer: मदिरा (शराब) पीने से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले चार बुरे प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • शराब पीने वाले व्यक्ति की सामाजिक इज़्ज़त कम हो जाती है और उसकी आर्थिक स्थिति भी कमज़ोर पड़ जाती है।
  • शराब के सेवन से व्यक्ति की याददाश्त कम हो जाती है और उसका तंत्रिका तंत्र (Nervous System) प्रभावित होता है।
  • ज़्यादा शराब पीने से वसीय यकृत (फैटी लीवर) रोग हो जाता है, जिससे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट बनने पर बुरा असर पड़ता है।
  • शराब (Alcohol) रक्त के ज़रिए लीवर में पहुँचती है और फिर लीवर इसे एसीटल्डिहाइड (\( CH_3CHO \)) में बदल देता है, जो एक ज़हरीला पदार्थ होता है।
  • शराब पीने से शरीर का तालमेल और नियंत्रण कमज़ोर हो जाता है, जिससे काम करने की क्षमता कम हो जाती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

अल्कोहल का नियमित सेवन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
In simple words: शराब पीने से व्यक्ति की सामाजिक इज़्ज़त और आर्थिक स्थिति खराब होती है, याददाश्त कम होती है, लीवर खराब होता है और शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।

🎯 Exam Tip: मदिरा सेवन के प्रभावों को लिखते समय, शारीरिक और सामाजिक-आर्थिक दोनों पहलुओं को शामिल करें। रासायनिक नाम जैसे एसीटल्डिहाइड (\( CH_3CHO \)) को सही ढंग से लिखें।

 

Question 13. बाला या नारू रोग के रोगजनक का नाम बताइए एवं इस रोग का संचरण एवं बचाव लिखिए।
Answer: बाला या नारू रोग का कारण ड्रेकनकुलस मेडीनेसिस (Dracunculus medinensis) नामक कृमि है। इस कृमि की मादा अपने अंडे हमेशा पानी में देती है, जो मानव शरीर से बाहर होता है। जब दूषित पानी का उपयोग किया जाता है, तो यह रोग दूसरे लोगों में फैल जाता है। रोग से बचाव के उपाय इस प्रकार हैं:

  • पानी को छानकर, उबालकर और ठंडा करके पीना चाहिए।
  • तालाबों, नदियों और अन्य जल स्रोतों में नहाना और कपड़े धोना मना होना चाहिए।
  • समय-समय पर इन जल स्रोतों की सफाई भी करनी चाहिए।

साफ पानी पीने और जल स्वच्छता बनाए रखने से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
In simple words: बाला या नारू रोग ड्रेकनकुलस मेडीनेसिस नाम के कीड़े से होता है। यह दूषित पानी से फैलता है। इसे रोकने के लिए साफ और उबला हुआ पानी पीना चाहिए और जल स्रोतों को गंदा नहीं करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: रोगजनक का वैज्ञानिक नाम सही लिखें। संचरण और बचाव के उपायों को बिंदुवार समझाएँ, खासकर स्वच्छ पानी के महत्व पर जोर दें।

 

Question 14. लोग अफीम का उपयोग क्यों करते हैं? अफीम के डोडे (फल भित्ति) उबालकर पीने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: लोग शांति और आनंद महसूस करने के लिए अफीम का उपयोग करते हैं। अफीम के डोडे (फल भित्ति) को उबालकर पीने से शरीर पर निम्नलिखित बुरे प्रभाव पड़ते हैं:

  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (बीमारियों से लड़ने की शक्ति) कम हो जाती है।
  • इसके कारण व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है।
  • आखिरकार, व्यक्ति की समय से पहले मृत्यु हो सकती है।

अफीम का सेवन एक गंभीर लत है जो व्यक्ति के जीवन को खतरे में डाल सकती है।
In simple words: लोग शांति पाने के लिए अफीम का सेवन करते हैं। अफीम के डोडे को उबालकर पीने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है, व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है और उसकी जान भी जा सकती है।

🎯 Exam Tip: अफीम के सेवन के कारणों के साथ-साथ उसके गंभीर शारीरिक प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से बताएँ। यह लत के खतरों को उजागर करता है।

 

Question 15. डॉक्टर के पर्चे पर लिखी जाने वाली निद्राकारी व दर्द निवारक नशीली दवाओं का नाम लिखिए एवं इनके दुरुपयोग से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: डॉक्टर के पर्चे पर लिखी जाने वाली निद्राकारी और दर्द निवारक नशीली दवाओं में प्रोपोक्सिफिन जैसी दवाएँ शामिल हैं। इन दवाओं के गलत इस्तेमाल से शरीर पर कई गंभीर प्रभाव पड़ते हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • यकृत (लीवर) और गुर्दों (किडनी) की काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।
  • व्यक्ति की मानसिक एकाग्रता (ध्यान लगाने की क्षमता) कम हो जाती है।
  • भूख कम लगती है और वज़न भी घट जाता है।
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (बीमारियों से लड़ने की शक्ति) कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है।
  • शरीर की काम करने की क्षमता और सोचने-समझने के कौशल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इन दवाओं का सही मात्रा में ही उपयोग करना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि गलत इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है।
In simple words: डॉक्टर की पर्ची पर लिखी निद्रा और दर्द कम करने वाली दवाओं जैसे प्रोपोक्सिफिन का गलत इस्तेमाल करने से लीवर और किडनी खराब हो सकती हैं, दिमाग की एकाग्रता कम हो सकती है, भूख और वज़न घट सकता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।

🎯 Exam Tip: दवाओं के नाम और उनके दुरुपयोग के प्रभावों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें। शारीरिक अंगों पर पड़ने वाले प्रभावों को विशेष रूप से उल्लेख करें।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. व्यसन किसे कहते हैं? नशीले पदार्थों को मानव पर क्या प्रभाव पड़ता है? विस्तार से समझाइए।
Answer: व्यसन (Addiction) का मतलब है कि जब कोई व्यक्ति किसी पदार्थ जैसे तम्बाकू, अल्कोहल या ड्रग्स पर शारीरिक या मानसिक रूप से निर्भर हो जाता है, तो उसे व्यसन कहते हैं। नशीले पदार्थों का मानव पर प्रभाव: नशीले पदार्थों में गुटखा, तम्बाकू, शराब, अफीम, कोकीन, भांग, चरस, गांजा, हशीश, एलएसडी और अन्य दवाओं का गलत इस्तेमाल शामिल है। इनके उपयोग से मानव पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:

  • सभी नशीले पदार्थों का इस्तेमाल मनुष्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। लगातार सेवन से व्यक्ति हमेशा के लिए बीमार हो जाता है।
  • नशा करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे इन पदार्थों का आदी हो जाता है और ज़्यादा मात्रा में इनका सेवन करने लगता है।
  • विभिन्न नशीले पदार्थों के उपयोग से कैंसर, वसीय यकृत (फैटी लीवर) और गुर्दों की खराबी जैसे कई खतरनाक रोग हो जाते हैं।
  • नशीले पदार्थों के उपयोग से व्यक्ति को आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह का नुकसान होता है।
  • नशीले पदार्थों के उपयोग से शारीरिक तालमेल और नियंत्रण में कमी आती है, जिससे काम करने की क्षमता घटती है और दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है।
  • परिवारों में अलगाव बढ़ता है और अपराध करने की प्रवृत्ति में भी बढ़ोतरी होती है।
  • इससे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने के साथ-साथ उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुँचती है।
  • व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वह बार-बार बीमार पड़ता है और अंत में उसकी समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है।

नशीले पदार्थों का सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह समाज और परिवार पर भी बुरा असर डालता है।
In simple words: व्यसन का मतलब है किसी नशीले पदार्थ पर निर्भर हो जाना। इन पदार्थों को लेने से कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारियाँ होती हैं, याददाश्त कम होती है, पैसे का नुकसान होता है और समाज में इज़्ज़त घट जाती है।

🎯 Exam Tip: व्यसन की परिभाषा स्पष्ट करें और नशीले पदार्थों के प्रभावों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं में बाँटकर लिखें ताकि एक विस्तृत उत्तर बन सके।

 

प्रमुख खनिज तत्व, स्रोत एवं कार्य

क्र. सं.तत्व का नामप्रमुख स्रोतप्रमुख कार्य
1.सोडियमसामान्य नमक, मछली, मांस, अंडे, दूधमांसपेशी संकुचन, तंत्रिकीय आवेश संचरण, शरीर का विद्युत अपघटन, संतुलन बनाना
2.पोटेशियमसभी खाद्य पदार्थों मेंमांसपेशी संकुचन, तंत्रिकीय आवेश संचरण, शरीर का विद्युत अपघटन, संतुलन बनाना, विभिन्न कोशिकीय क्रियाओं का संचालन
3.कैल्शियमदूध, अंडे, हरी सब्जियाँविटामिन डी के साथ हड्डियाँ एवं दांतों को मज़बूती प्रदान करना
4.फास्फोरसदूध, हरी सब्जियां, बाजरा, रागी, सूखे मेवे, यकृत तथा वृक्ककैल्शियम से मिलकर हड्डियाँ तथा दांतों को मज़बूती प्रदान करना
5.लौह तत्वयकृत, वृक्क, अंडे, मांस, रक्त, बाजरा, रागी, दही, सब्जियां, गाजर, गुड़रुधिर में हीमोग्लोबिन का निर्माण ऊतक ऑक्सीकरण
6.आयोडीननमक, समुद्री भोजन, हरे पत्तों वाली सब्जियां, लवण, जलीय मछली, जामुन, काला नमकथायरोक्सिन हार्मोन के निर्माण में

 

Question 3. डॉक्टर का मशवरा है कि हमें प्रतिदिन कम से कम 8 गिलास पानी पीना चाहिए। सही मात्रा में पानी पीने के क्या लाभ हैं?
Answer: हमें रोज़ सही मात्रा में पानी ज़रूर पीना चाहिए। जो लोग ज़्यादा शारीरिक काम करते हैं, उन्हें और भी ज़्यादा पानी पीना चाहिए। सही मात्रा में पानी पीने के कई फायदे हैं:

  • बीमारियाँ होने का खतरा कम हो जाता है।
  • पर्याप्त पानी पीने से शरीर में बेकार की चर्बी जमा नहीं होती।
  • सही मात्रा में पानी पीने से शरीर में किसी भी तरह की एलर्जी होने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही, फेफड़ों में संक्रमण, अस्थमा और आँतों की बीमारियाँ भी नहीं होतीं।
  • नियमित रूप से खूब पानी पीने से पथरी होने का खतरा भी कम हो जाता है।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीने वाले लोगों को सर्दी और ज़ुकाम जैसी बीमारियाँ भी कम घेरती हैं।

पर्याप्त पानी पीने से शरीर के सभी अंग ठीक से काम करते हैं और हम स्वस्थ रहते हैं।
In simple words: रोज़ सही मात्रा में पानी पीने से बीमारियाँ दूर रहती हैं, शरीर में चर्बी नहीं जमती, एलर्जी और संक्रमण का खतरा कम होता है, पथरी नहीं बनती और सर्दी-ज़ुकाम भी कम होता है।

🎯 Exam Tip: पानी पीने के लाभों को बिंदुवार स्पष्ट करें। हर लाभ को एक छोटी और समझने योग्य वाक्य में लिखें।

 

Question 4. उच्च रक्तचाप क्या है? इसके कारण तथा बचाव के उपाय बतलाइये।
Answer: उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) वह स्थिति है जब धमनियों और नसों में रक्त का दबाव सामान्य से बहुत ज़्यादा हो जाता है। उच्च रक्तचाप के कारण: चिंता, गुस्सा, ईर्ष्या, भ्रम, बार-बार ज़रूरत से ज़्यादा भोजन करना, मैदे से बने खाद्य पदार्थ, चीनी, मसाले, तेल, घी, अचार, मिठाइयाँ, मांस, चाय, सिगरेट और शराब का सेवन, आलस्य भरा जीवन और व्यायाम की कमी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। बचाव के उपाय:

  1. उच्च रक्तचाप के मरीज़ों को ताजे फल जैसे पोटेशियम-युक्त भोजन खाना चाहिए।
  2. डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का प्रयोग बंद कर देना चाहिए।
  3. भोजन में कैल्शियम (दूध) और मैग्नीशियम की मात्रा संतुलित रखनी चाहिए।
  4. खूब रेशेदार भोजन खाना चाहिए।
  5. संतृप्त वसा (मांस, वनस्पति घी) की मात्रा कम करनी चाहिए।
  6. रोज़ाना नियमित व्यायाम करना चाहिए। रोज़ 30 मिनट तेज़ी से पैदल चलना सबसे अच्छा व्यायाम है।
  7. रोज़ाना योग, ध्यान और प्राणायाम करना चाहिए।
  8. धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।
In simple words: उच्च रक्तचाप तब होता है जब खून का दबाव बहुत बढ़ जाता है। यह तनाव, गलत खान-पान और कम व्यायाम से होता है। इसे रोकने के लिए फल-सब्ज़ियाँ खाएँ, जंक फूड छोड़ें, व्यायाम करें और शराब-सिगरेट से दूर रहें।

🎯 Exam Tip: उच्च रक्तचाप की परिभाषा संक्षिप्त रखें। कारणों और बचाव के उपायों को अलग-अलग सूचियों में स्पष्ट रूप से बताएँ ताकि उत्तर व्यवस्थित दिखे।

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RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य

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FAQs

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Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 1 भोजन एवं मानव स्वास्थ्य in multiple languages like Hindi and English?

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