Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान
Access comprehensive textbook solutions for काव्यांग परिचय छंद विधान using the official curriculum guides for Class 12 Hindi. Designed to align with the 2026-27 RBSE standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Download काव्यांग परिचय छंद विधान Textbook Solutions PDF
Access the complete solution PDF for Class 12 Hindi below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.
RBSE Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'कमलिनी कुल वल्लभ की प्रभा' चरण किस छन्द का है?
(क) द्रुत विलम्बित
(ख) सवैया
(ग) छप्पय
(घ) कवित्त
Answer: (क) द्रुत विलम्बित
In simple words: 'कमलिनी कुल वल्लभ की प्रभा' यह पंक्ति द्रुत विलम्बित छंद का एक हिस्सा है।
🎯 Exam Tip: छंदों को पहचानने के लिए उनके विशिष्ट लक्षण, जैसे वर्णों या मात्राओं की संख्या और यति-गति के नियमों को याद रखें।
प्रश्न 2. गीतिका छन्द के प्रत्येक चरण में मात्रायें होती हैं
(क) 24
(ख) 26
(ग) 28
(घ) 23
Answer: (ख) 26
In simple words: गीतिका छंद के हर एक चरण में कुल 26 मात्राएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: मात्रिक छंदों में मात्राओं की संख्या निर्धारित होती है, इसलिए प्रत्येक छंद की मात्रा संख्या को ठीक से याद करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. यति कहते हैं -
(क) छन्द की लय को
(ख) छन्द की पंक्ति में आए विराम को
(ग) मात्राओं के समूह को
(घ) गणों को
Answer: (ख) छन्द की पंक्ति में आए विराम को
In simple words: जब हम कोई छंद पढ़ते हैं, तो जिस जगह पर रुकते हैं या थोड़ा विराम लेते हैं, उसे यति कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यति छंद में उचित ठहराव को दर्शाती है, जो कविता को सही लय और अर्थ प्रदान करने के लिए आवश्यक है। इसे हमेशा ध्यान से समझें।
प्रश्न 5. विषम मात्रिक छन्द वह होता है
(क) जिसकी सभी पंक्तियों में समान मात्राएँ हों
(ख) जिसकी पंक्तियों में असमान मात्राएँ हों।
(ग) जिसके किसी चरण में मात्राओं तथा अन्य में वर्णित का नियम हो
(घ) जिसका अर्थ समझना सरल न हो।
Answer: (ख) जिसकी पंक्तियों में असमान मात्राएँ हों।
In simple words: विषम मात्रिक छंद में हर पंक्ति में मात्राओं की संख्या अलग-अलग होती है, वे एक समान नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: मात्रिक छंदों को सम, अर्धसम और विषम में वर्गीकृत किया जाता है। विषम छंदों में मात्राओं का असमान वितरण होता है, जो इन्हें अन्य से अलग करता है।
प्रश्न 6. रोला और उल्लाला को मिलाकर बनने वाला छन्द है
(क) कुण्डली
(ख) सवैया
(ग) कवित्त
(घ) छप्पय
Answer: (घ) छप्पय।
In simple words: जब रोला और उल्लाला छंद आपस में मिलते हैं, तो छप्पय छंद बनता है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कुछ छंद दो या अधिक छंदों के मेल से बनते हैं, जैसे कुण्डलियाँ (दोहा और रोला) और छप्पय (रोला और उल्लाला)।
प्रश्न 7. द्रुत विलम्बित छन्द में गणों का क्रम होता है
Answer: द्रुत विलम्बित छंद में गणों का क्रम नगण, मगण, मगण तथा रगण (न म म र) होता है।
In simple words: द्रुत विलम्बित छंद में गणों का क्रम नगण, फिर मगण, फिर मगण, और फिर रगण होता है।
🎯 Exam Tip: वर्णिक छंदों में गणों का क्रम बहुत महत्वपूर्ण होता है। प्रत्येक वर्णिक छंद के अपने निश्चित गण क्रम होते हैं जिन्हें याद रखना चाहिए।
प्रश्न 8. निम्नलिखित में सही कथन है
(क) मात्रिक छंदों में वर्गों का ध्यान रखा जाता है
(ख) मात्रिक छंदों में मात्राओं की गणना की जाती है
(ग) वर्णिक छंदों में मात्राओं की गणना की जाती है
(घ) विषम छंदों के सभी चरणों में मात्रायें समान होती हैं।
Answer: (ख) मात्रिक छंदों में मात्राओं की गणना की जाती है
In simple words: मात्रिक छंदों में हम अक्षरों की संख्या नहीं बल्कि उनमें लगी मात्राओं की गिनती करते हैं।
🎯 Exam Tip: मात्रिक और वर्णिक छंदों के बीच का मुख्य अंतर यह है कि मात्रिक छंद मात्राओं की गणना पर आधारित होते हैं, जबकि वर्णिक छंद वर्णों की संख्या और गणों के क्रम पर आधारित होते हैं।
प्रश्न 9. कुण्डलियाँ छन्द में प्रथम और अन्तिम शब्द
(क) एक ही होता है
(ख) अलग-अलग होते हैं
(ग) अन्तिम शब्द पहले शब्द का पर्यायवाची होता है
(घ) अन्तिम शब्द पहले शब्द का विलोम होता है।
Answer: (क) एक ही होता है
In simple words: कुण्डलियाँ छंद की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत और अंत एक ही शब्द से होता है।
🎯 Exam Tip: कुण्डलियाँ छंद की यह विशिष्ट पहचान है कि जिस शब्द से छंद शुरू होता है, उसी शब्द पर उसका अंत भी होता है, जो इसे याद रखने में मदद करता है।
प्रश्न 10. वर्णिक छन्द -
(क) द्रुत विलम्बित
(ख) वंशस्थ
(ग) सवैया
(घ) हरि गीतिका।
Answer: (घ) हरि गीतिका।
In simple words: हरिगीतिका एक मात्रिक छंद है, जबकि बाकी सभी विकल्प वर्णिक छंद के उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: छंदों के प्रकारों को याद रखना महत्वपूर्ण है कि कौन सा मात्रिक है और कौन सा वर्णिक है, क्योंकि इनके नियम अलग-अलग होते हैं।
RBSE Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. कुण्डलियाँ छन्द के लक्षण लिखकर उदाहरण दीजिए।
Answer: कुण्डलियाँ मात्रिक विषम छन्द है। इसमें छ: चरण होते हैं। इसके पहले दो चरण दोहा के होते हैं तथा बाद के चार चरण रोला के होते हैं। कुण्डलियाँ का आरम्भ तथा अन्त एक ही शब्द से होता है। दोहा का अन्तिम चरण ही रोला का पहला चरण होता है। इसके प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण:
लाठी में गुन बहुत हैं, सदा राखिए संग।
गहरे नद नाले जहाँ, तहाँ बचावै अंग ॥
कह गिरधर कवि राय, सुनो हो धुर के साथी।
सब हथियारन छौंड़ि, हाथ में लीजे लाठी ॥
सो तेरे आधीन, जगत को सिरजन हारौ।
सदा रचावै रास संग श्रीनन्ददुलारौ॥
मन मूरख जो चहै, कहैं तेरी मन बाधा।
प्यारे निश दिन जपौ क्यों न फिर राधा-राधा ॥
In simple words: कुण्डलियाँ छंद में कुल छह पंक्तियाँ होती हैं। इसकी पहली दो पंक्तियाँ दोहा छंद की होती हैं और बाकी चार रोला छंद की। यह जिस शब्द से शुरू होता है, उसी शब्द पर खत्म भी होता है। इसकी हर पंक्ति में 24 मात्राएँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: कुण्डलियाँ छंद की दो मुख्य पहचान-जिस शब्द से शुरू, उसी से खत्म और दोहा तथा रोला का मेल-को याद रखें। उदाहरण के साथ लक्षण लिखना पूरे अंक दिलाता है।
प्रश्न 2. मत्त गयन्द सवैया तथा दुर्मिल सवैया का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: मत्त गयन्द सवैया और दुर्मिल सवैया दोनों ही सम वर्णवृत्त छंद के प्रकार हैं। सवैया छंद के कई भेदों में ये प्रमुख हैं।
मत्त गयन्द सवैया (मालती सवैया): इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में सात मगण (मात्रा क्रम 511) और अंत में दो गुरु (55) वर्ण होते हैं। इस प्रकार एक चरण में कुल 23 वर्ण होते हैं।
दुर्मिल सवैया: इसमें भी चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में आठ सगण (मात्रा क्रम 115) होते हैं। इस प्रकार एक चरण में कुल 24 वर्ण होते हैं। दोनों सवैया छंदों के अंत में गुरु वर्ण आता है।
In simple words: मत्त गयन्द सवैया में सात मगण और दो गुरु वर्ण होते हैं, कुल 23 वर्ण। दुर्मिल सवैया में आठ सगण होते हैं, कुल 24 वर्ण। यह इनके गणों और कुल वर्णों की संख्या का मुख्य अंतर है।
🎯 Exam Tip: वर्णिक छंदों में गणों की संख्या और उनके क्रम को याद रखना आवश्यक है। सवैया के विभिन्न भेदों को उनके विशिष्ट गण संयोजन और वर्ण संख्या से पहचानें।
प्रश्न 3. छप्पय छन्द का एक उदाहरण देकर उसके लक्षण लिखिए।
Answer: छप्पय एक मात्रिक विषम छन्द है। इसमें छ: चरण होते हैं। इसके पहले चार चरण रोला छंद के होते हैं और अंतिम दो चरण उल्लाला छंद के होते हैं। पहले चार चरणों (रोला) में 11, 13 की यति से 24-24 मात्राएँ होती हैं। बाद के दो चरणों (उल्लाला) में 15, 13 की यति से 28-28 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण:
होता जिनको व्यसन बात कोरी करने का
सीखे हो जो पाठन गौरों से डरने का ॥
जिनको किंचित खेदन हो जीने मरने का
सत्पथ से हो स्वप्न न पग पीछे धरने का॥
मातृ प्रेम वश ठान लें, कार्य क्षेत्र प्रदेश की .
है फिर उनके हाथ में, स्वाधीनता स्वदेश की॥
In simple words: छप्पय छंद में छह पंक्तियाँ होती हैं। इसकी पहली चार पंक्तियाँ रोला छंद की और आखिरी दो उल्लाला छंद की होती हैं। रोला में 24 मात्राएँ (11, 13 पर यति) और उल्लाला में 28 मात्राएँ (15, 13 पर यति) होती हैं।
🎯 Exam Tip: छप्पय छंद की संरचना (रोला + उल्लाला) और प्रत्येक भाग की मात्रा संख्या तथा यति स्थानों को सटीक रूप से याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. गण कितने होते हैं? प्रत्येक का नाम लिखकर शब्दों का उदाहरण लिखिए।
Answer: छन्द शास्त्र के अनुसार, तीन वर्णों के समूह को गण कहा जाता है। वर्णिक छन्दों में गणों पर विचार किया जाता है। कुल आठ गण होते हैं। उनके नाम और उदाहरण निम्नलिखित हैं:
| क्रमांक | गणों का नाम | मात्राएँ (लघु \(I\), गुरु \(S\)) | सूत्रगत उदाहरण | अन्य उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| 1. | य गण | \(I S S\) | यमाता | यशोदा |
| 2. | म गण | \(S S S\) | मातारा | वाचा जी |
| 3. | त गण | \(S S I\) | ताराज | नाराज |
| 4. | र गण | \(S I S\) | राजभा | साहसा |
| 5. | ज गण | \(I S I\) | जभान | किताब |
| 6. | भ गण | \(S I I\) | मानस | भारत |
| 7. | न गण | \(I I I\) | नसल | दमन |
| 8. | स गण | \(I I S\) | सलगा | पशुता |
In simple words: गण तीन वर्णों का समूह होता है। छन्दों में कुल आठ गण होते हैं- यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, और सगण।
🎯 Exam Tip: गणों को याद रखने के लिए 'यमाताराजभानसलगम्' सूत्र बहुत उपयोगी है। यह सूत्र प्रत्येक गण के पहले अक्षर और अगले दो अक्षरों से उसका मात्रा क्रम बताता है।
प्रश्न 5. शुभ तथा अशुभ गणों के नाम लिखिए। शुभ-अशुभ गणों के काव्य में प्रयोग का क्या नियम है?
Answer: छन्द शास्त्र में गणों को शुभ और अशुभ दो भागों में बांटा गया है।
शुभ गण: मगण, नगण, मगण तथा यगण (म न म य) को शुभ गण माना जाता है।
अशुभ गण: जगण, रगण, सगण तथा तगण (ज र स त) को अशुभ गण माना जाता है।
काव्य में प्रयोग का नियम: वर्णवृत्त छन्दों की रचना में शुभ-अशुभ गणों के प्रयोग पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। हालांकि, किसी मात्रिक छन्द को अशुभ गण से शुरू करने पर पूरा छन्द अशुभ हो सकता है। यह रचयिता पर भी प्रभाव डालता है। परन्तु ईश्वर या देवता आदि से सम्बन्धित रचनाओं में इसका ध्यान नहीं रखा जाता है।
In simple words: मगण, नगण, मगण और यगण शुभ माने जाते हैं, जबकि जगण, रगण, सगण और तगण अशुभ। वर्णिक छंदों में शुभ-अशुभ का नियम उतना जरूरी नहीं, पर मात्रिक छंदों में अशुभ गण से शुरुआत करने से छंद में दोष आ सकता है।
🎯 Exam Tip: शुभ और अशुभ गणों का ज्ञान छंदों की रचना और विश्लेषण में सहायक होता है, खासकर मात्रिक छंदों में जहाँ प्रारंभिक गण का महत्व अधिक होता है।
प्रश्न 6. हरिगीतिका छन्द के लक्षण उदाहरण सहित लिखिए।
Answer: हरिगीतिका एक सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 28-28 मात्राएँ होती हैं, और 16 तथा 12 मात्राओं पर यति होती है। इस छंद के अंत में लघु और गुरु ( \(I S\)) आते हैं और प्रत्येक चरण में तुक मिलती है।
उदाहरण:
हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी।
आओ विचारें आज मिलकर, ये समस्यायें सभी॥
देखें कहीं पूर्वज हमारे, स्वर्ग से आकर हमें।
आसूं बहावें शोक से, इस देश में पाकर हमें॥
In simple words: हरिगीतिका एक बराबर मात्रा वाला छंद है, जिसमें हर पंक्ति में 28 मात्राएँ होती हैं। 16 और 12 मात्राओं पर रुकना होता है और अंत में एक लघु और एक गुरु वर्ण होता है।
🎯 Exam Tip: हरिगीतिका के लक्षणों को याद रखने के लिए कुल मात्राओं (28), यति स्थानों (16, 12) और अंत में लघु-गुरु के क्रम पर ध्यान दें।
प्रश्न 7. मनहरण कवित्त के लक्षण लिखकर उदाहरण दीजिए।
Answer: मनहरण कवित्त एक मुक्तक वर्णिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं। इसमें 16 तथा 15 वर्णों पर यति होती है। कभी-कभी 8, 8, 8, 7 वर्णों पर भी यति होती है। इस छंद के अंत में गुरु वर्ण (S) आता है।
उदाहरण:
मीठे-मीठे बोल बोलि, ठगी पहिलें तौ तब
अब जिय जारत, कहौ धौं कौन न्याय है।
सुनी है कै नाहीं, यह प्रगट कहावति जू
काहू कलपाय है, सु कैसे कल पाय है॥
एक और उदाहरण:
निकल के निज सुन्दर सम से।
जब लगे ब्रज में हरि घूमने ॥
तब लगी करने अनुरंजिता।
नगर को पद-पंकज लालिमा ॥
In simple words: मनहरण कवित्त एक वर्णिक छंद है जिसमें हर पंक्ति में 31 वर्ण होते हैं। इसमें 16 और 15 वर्णों पर ठहराव होता है, और पंक्ति के अंत में गुरु वर्ण आता है।
🎯 Exam Tip: कवित्त एक लोकप्रिय वर्णिक छंद है। इसकी पहचान के लिए कुल वर्णों की संख्या (31) और यति स्थानों (16, 15) को याद रखें।
प्रश्न 9. गीतिका छन्द की परिभाषा लिखकर उदाहरण दीजिए।
Answer: गीतिका सममात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं, और 14 तथा 12 मात्राओं पर यति होती है। इस छंद के अंत में गुरु-लघु (S I) आते हैं।
उदाहरण:
वीर व्रतधारी उठो किस, नींद में तुम सो रहे।
अब न अत्याचारियों के, बार जाते हैं सहे॥
बस अभी कस लो कमर दो, कर विनाश अनीति का।
हाँ, बढ़े रण में चलो गा, छन्द हरि गुण गीतिका॥
In simple words: गीतिका एक बराबर मात्रा वाला छंद है। इसकी हर पंक्ति में 26 मात्राएँ होती हैं, जिनमें 14 के बाद और 12 के बाद रुकना होता है। पंक्ति के अंत में गुरु और लघु वर्ण होते हैं।
🎯 Exam Tip: गीतिका छंद की परिभाषा में मात्रा संख्या (26) और यति स्थान (14, 12) प्रमुख लक्षण हैं। उदाहरण के साथ इन लक्षणों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 10. निम्नलिखित पंक्तियों में मात्राओं की गणना करके छन्द का नाम लिखिए।
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारै आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावे।
खान-पान सम्मान, राग रंग मनहिं न भावे॥
कह गिरधर कवि राय, दुःख कछु टरै न टारे।
खटकत है जिय माँहि, कियो जो बिना बिचारे॥
Answer:
पंक्तियों में मात्रा गणना:
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। \( (I S \quad I S S \quad I S \quad I \quad S S I \quad I S S \quad I) \) = 24 मात्राएँ
काम बिगारै आपनो जग में होत हँसाय॥ \( (S S \quad I S I \quad S S I \quad S S \quad I S S \quad I) \) = 24 मात्राएँ
यति 11, 13 पर
यह छंद दोहा है।
In simple words: जब हम इन पंक्तियों की मात्राएँ गिनते हैं, तो पहली और दूसरी पंक्ति में 24-24 मात्राएँ आती हैं, और 11वीं व 13वीं मात्रा पर रुकना होता है। यह दोहा छंद के लक्षण हैं।
🎯 Exam Tip: छंद की पहचान करने के लिए मात्रा गणना सबसे महत्वपूर्ण है। यति और मात्रा संख्या के आधार पर छंद का नाम निश्चित किया जा सकता है।
Question 12. मात्रिक तथा वर्णिक छन्दों में अन्तर लिखिए।
Answer: मात्रिक और वर्णिक छंदों में मुख्य अंतर यह है कि मात्रिक छंद में हर चरण में मात्राओं की संख्या तय होती है, जबकि वर्णिक छंद में हर चरण में वर्णों (अक्षरों) की संख्या और उनका क्रम तय होता है। मात्रिक छंद में सम छंदों के हर चरण में मात्राएँ एक जैसी होती हैं, जबकि विषम छंदों में अलग-अलग मात्राएँ होती हैं। वर्णिक छंदों को वर्णवृत्त भी कहते हैं, और इनमें तीन वर्णों के समूह को 'गण' कहा जाता है। हर चरण में गणों का क्रम पहले से निश्चित होता है।
उदाहरण के लिए, मात्रिक छंद में हमें मात्राएँ गिननी होती हैं, जैसे 'हे प्रभो आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए' में 26 मात्राएँ होती हैं। वहीं, वर्णिक छंद में 'दिवस का अवसान समीप था' में 12 वर्ण होते हैं।
In simple words: मात्रिक छंद में हम स्वरों की गिनती करते हैं, जबकि वर्णिक छंद में हम अक्षरों की गिनती और उनके क्रम को देखते हैं.
🎯 Exam Tip: Remember that 'मात्रा' refers to the sound duration of vowels, while 'वर्ण' refers to the letters themselves, which helps distinguish between the two types of meters.
Question 13. कविता में छंद का क्या महत्व है स्पष्ट कीजिए।
Answer: कविता में छंद का बहुत महत्व है। छंद के कारण कविता में एक खास तरह की ध्वनि, लय और संगीत पैदा होता है। इससे कविता और ज्यादा सुन्दर और मन को भाने वाली बन जाती है। आचार्य अभिनव गुप्त का मानना था कि छंद रस और भावों को अच्छे से व्यक्त करने में मदद करता है। रामचंद्र शुक्ल ने भी छंद को ध्वनि की सुन्दरता के लिए बहुत जरूरी बताया है। छंद की वजह से कविता याद करना आसान हो जाता है। यह कविता में सही शब्दों को चुनने और वाक्यों को सही तरीके से बनाने में भी मदद करता है।
In simple words: छंद से कविता में सुन्दरता, लय और संगीत आता है. यह कविता को आसानी से याद रखने में मदद करता है और भावनाओं को अच्छे से बताता है.
🎯 Exam Tip: Highlight that Chhand brings rhythm, musicality, and enhances memorability, making the poem more impactful and aesthetically pleasing.
Question 14. निम्नलिखित क्या हैं तथा कविता में उनका क्या महत्व है यति तथा गति।
Answer: यति – कविता में छंद का प्रयोग करते समय जिस जगह पर थोड़ी देर के लिए रुकना पड़ता है, उसे यति कहते हैं। यह कविता की रचना के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह पढ़ने में ठहराव और लय बनाए रखती है। गति – छंद को पढ़ते समय जो प्रवाह या लय महसूस होती है, उसे गति कहते हैं। गति से कविता में मधुरता और संगीत के गुण आ जाते हैं। यदि किसी चरण में शब्दों का क्रम बदल दिया जाए, तो गति भी बिगड़ जाती है और कविता पढ़ने में अच्छी नहीं लगती।
In simple words: 'यति' का मतलब है कविता पढ़ते समय रुकना, और 'गति' का मतलब है कविता की चाल या प्रवाह. दोनों कविता को सुन्दर और संगीतमय बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: Explain Yati as a pause and Gati as the flow, emphasizing how both are crucial for the musicality and emotional impact of poetry.
Question 15. भूपति भगीरथ के रथ की सुपुण्य पथ
जन्हु तप जोगफल फैल की फहर है॥
छेम की छहर गंगा रावरी लहर
कलिकाल को कहर जम जाल को जहर है॥
उपर्युक्त पद्यांश में कौन-सा छंद है? नाम तथा लक्षण लिखिए।
Answer: उपर्युक्त पद्यांश में मनहरण कवित्त छंद है।
लक्षण: मनहरण कवित्त एक सम वर्णवृत्त छंद है। इसके हर चरण में 31 वर्ण होते हैं। इसमें 16 वर्णों पर पहली यति (ठहराव) और फिर 15 वर्णों पर दूसरी यति होती है।
In simple words: यह मनहरण कवित्त छंद है, जिसमें हर पंक्ति में 31 अक्षर होते हैं, और 16 तथा 15 अक्षर पर रुकना पड़ता है.
🎯 Exam Tip: When identifying a chhand, always state its name and then list its key characteristics like the number of lines, total matras/varnas, and yati (pauses).
Question 16. नहीं माँगते भीख, भीख है घृणित महज्जन।
नहीं चाहते दया, दया का निर्बल जीवन॥
पुरस्कार भी नहीं, दास जिस पर हैं मरते।
हम मनुष्य हैं, स्वत्व-न्याय की इच्छा करते॥
यह है स्वतन्त्रता स्वत्व शुचि, दान न किसी नरेश का।
इस जन्म सिद्ध अधिकार को, समझो दिया सुदेश का॥
उपर्युक्त में कौन-सा छन्द है? छन्द का नाम लिखकर उसके लक्षण भी लिखिए।
Answer: उपर्युक्त पद्य में छप्पय छंद है।
लक्षण: छप्पय एक मात्रिक विषम छंद है। इसमें कुल छह चरण होते हैं। पहले चार चरण रोला छंद के होते हैं और आखिरी दो चरण उल्लाला छंद के होते हैं। पहले चार चरणों में 24-24 मात्राएँ होती हैं और उनमें 11, 13 मात्राओं पर यति होती है। बाद के दो चरणों में 28-28 मात्राएँ होती हैं और उनमें 15, 13 मात्राओं पर यति होती है।
In simple words: यह छप्पय छंद है. इसमें छह पंक्तियाँ होती हैं, जिनमें से शुरू की चार पंक्तियों में 24-24 मात्राएँ और आखिर की दो में 28-28 मात्राएँ होती हैं.
🎯 Exam Tip: For complex meters like Chhappay, remember to break down its structure into its constituent parts (Rola and Ullala) and specify the matra/yati count for each section.
Question 17. सब जानते सर्वज्ञ हो फिर, नाथ तुमसे क्या कहें?
लख दीन भारत दुर्दशा हा, अश्रुधाराएँ बहें।
छन्द का नाम लिखिए।
Answer: छन्द का नाम- 'हरिगीतिका' है।
In simple words: यह हरिगीतिका छंद है.
🎯 Exam Tip: Quickly identify the distinct features (like specific rhyming or meter) that characterize common chhands to name them accurately.
Question 18. वीर व्रतधारी उठो किस, नींद में सो रहे।
अब न अत्याचारियों के, बार जाते हैं सहे॥
उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा छंद है? छन्द का नाम लक्षणों सहित लिखिए।
Answer: उपर्युक्त पंक्तियों में गीतिका छंद है।
लक्षण: गीतिका एक मात्रिक सम छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 26-26 मात्राएँ होती हैं। इस छंद में चार चरण होते हैं। इसमें 14 और 12 मात्राओं पर यति होती है। हर चरण के अंत में लघु और गुरु वर्ण आते हैं।
In simple words: यह गीतिका छंद है. इसकी हर पंक्ति में 26 मात्राएँ होती हैं और 14, 12 मात्राओं पर रुकना होता है.
🎯 Exam Tip: Note the specific matra count (26) and yati pattern (14, 12) for Geetika chhand; these are its defining characteristics.
Question 19. आवै आसपास पहुपन की सुवास सोई।
सौंध के सुगंध माँझ सने रहियत हैं॥
सोभा को समाज, सेनापति सुख-साज, आज।
आबत बसंत रितुराज कहियत हैं।
उपर्युक्त पद्यांश में वर्गों की गणना करके छन्द का नाम लिखिए।
Answer: उपर्युक्त पद्यांश में वर्गों की गणना इस प्रकार है:
आवै आसपास पहुपन की सुवास सोई। = 16 वर्ण
सौंध के सुगंध माँझ सने रहियत हैं। = 15 वर्ण
सोभा को समाज, सेनापति सुख साज आज = 16 वर्ण
आबत बसंत रितुराज कहियत है। = 15 वर्ण
एक चरण में कुल 16 \( + \) 15 \( = \) 31 वर्ण हैं। यह मनहरण कवित्त छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 16, 15 वर्णों पर यति से 31 वर्ण होते हैं। अंत में एक गुरु वर्ण आता है। यह एक सम वर्णवृत्त छंद है।
In simple words: इस कविता की हर पंक्ति में 31 अक्षर हैं (16 पर पहला ठहराव, 15 पर दूसरा). यह मनहरण कवित्त छंद है.
🎯 Exam Tip: For Varnik chhands, counting the number of varnas (letters) in each line and noting the yati points is key to correct identification.
Question 20. यह पुण्य भूमि प्रसिद्ध है, इसके निवासी आर्य हैं।
छन्द का नाम लिखिए।
Answer: उपर्युक्त छंद में 16, 12 की यति से 28 मात्राएँ हैं। इसमें हरिगीतिका छंद है। हरिगीतिका एक मात्रिक सम छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं तथा 16, 12 पर यति होती है। यह एक तुकान्त छंद है।
In simple words: यह हरिगीतिका छंद है. इसकी हर पंक्ति में 28 मात्राएँ होती हैं और 16, 12 मात्राओं पर रुकना पड़ता है.
🎯 Exam Tip: Harigeetika is characterized by 28 matras per line with a 16,12 yati. Ensure the bar covers only the digits that actually repeat, not any non-repeating digits before them.
Question 21. निम्नलिखित में छंद का नाम लिखिए तथा उसके लक्षण भी बताइए –
अरुण करुण बिम्ब।
वह निर्धूम, भस्म रहित ज्वलन पिण्ड।
विकल विवर्तनों से
विरल प्रवर्तनों से
श्रमित नमित-सा
पश्चिम के व्योम में है आज निरवलम्ब-सा।
Answer: उपर्युक्त छंद में कवि ने लय और प्रवाह पर ध्यान दिया है। इसके चरण छोटे-बड़े हैं तथा इसकी रचना मात्रिक अथवा वर्णिक छंदों के नियमों से हटकर स्वतंत्र रूप से की गई है। यह अंग्रेजी के 'ब्लैंक वर्स' (Blank Verse) से प्रभावित है। इसको 'मुक्त छंद' तथा कभी-कभी 'केंचुआ छंद' भी कहा जाता है। इसमें कहीं-कहीं तुक भी मिलती है।
In simple words: यह मुक्त छंद है. इसमें कोई तय मात्रा या अक्षर का नियम नहीं होता, कवि सिर्फ लय और भाव पर ध्यान देता है.
🎯 Exam Tip: Identify Mukt Chhand by its lack of strict metrical rules, variable line lengths, and focus on rhythmic flow rather than fixed patterns.
Question 22. उदयाचल से किरण-धेनुएँ
हाँक ला रहा
वह प्रभात का ग्वाला।
उपर्युक्त में छंद का नाम लक्षणों सहित लिखिए।
Answer: उपर्युक्त पद्य में मुक्त छंद है। निराला जी ने इस छंद का आरम्भ किया था। इसमें चरण छोटे-बड़े होते हैं तथा उनमें तुक (Rhyme) नहीं होती है। कभी-कभी तुक भी मिलती है, परन्तु इसकी मुख्य विशेषता लय की प्रधानता होती है। इसी कारण इसमें ध्वन्यात्मकता (musicality) बनी रहती है।
In simple words: यह मुक्त छंद है, जिसकी शुरुआत निराला जी ने की थी. इसकी पंक्तियाँ छोटी-बड़ी होती हैं और लय पर जोर दिया जाता है.
🎯 Exam Tip: When analyzing free verse (Mukt Chhand), focus on the overall rhythm, imagery, and emotional impact rather than strict metrical counts.
Question 23. निम्नलिखित में छंद का नाम तथा लक्षण लिखिए
Answer: यहाँ मुक्त छंद का वर्णन किया गया है।
लक्षण: मुक्त छंद किसी भी मात्रिक छंद के मात्रा सम्बन्धी नियमों या वर्णवृत्त के गण सम्बन्धी नियमों पर आधारित नहीं होता है। यह एक ऐसा छंद है जिसमें कवि केवल लय और ध्वन्यात्मकता पर ही ध्यान देता है।
In simple words: मुक्त छंद में कवि कोई कठोर नियम नहीं मानते, वे सिर्फ कविता की लय और आवाज पर ध्यान देते हैं.
🎯 Exam Tip: Remember that Mukt Chhand breaks traditional metrical rules to achieve a natural, conversational flow, often seen in modern poetry.
Free study material for Hindi
Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान
Accessing काव्यांग परिचय छंद विधान Solutions
Access structured RBSE textbook solutions for काव्यांग परिचय छंद विधान. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 12 Hindi, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Concept-Driven Answers for Class 12 Hindi
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 12 Hindi text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Maximizing Study Efficiency
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 12 Hindi.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Hindi are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 12 Hindi काव्यांग परिचय छंद विधान in printable PDF format for offline study on any device.