CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions

Class 7 Sanskrit Solved Question Papers: CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions

Review targeted exam resources with the CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions. Built according to official CBSE standards for the 2026-27 academic year, these downloadable Class 7 Sanskrit question papers support effective revision and performance tracking.

Download Class 7 Sanskrit Question Paper PDF

Access the complete question paper PDF for Class 7 Sanskrit below. Regular practice with these targeted exam papers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final evaluations.

This is a CBSE Class 7 Sanskrit annual exam question paper with answers, set for 53 marks in 1 hour 45 minutes and made up of 14 questions in 4 sections. It is based on the current NCERT syllabus and covers unseen Sanskrit passages with comprehension, synonyms and antonyms, upasarga and dhatu, kttva and tumun pratyayas, telling time in Sanskrit, framing questions and sentences, translation of verses and prose into Hindi, verb forms (dhaturupani), noun forms (shabdarupani) and letter writing. Attempt it in exam conditions without looking at the answers, then open the answers and teacher's notes below to check your work.

Question Paper

Time Allowed: 1 hour 45 minutes
Maximum Marks: 53

General Instructions

1. सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है। (All questions are compulsory.)
2. प्रश्न-पत्र में क, ख, ग, घ चार खण्ड हैं। (The paper has four sections A, B, C and D.)
3. सभी प्रश्नों के अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं। (Marks are shown against each question.)
4. प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए, जहाँ हिन्दी अर्थ माँगा गया हो वहाँ हिन्दी में लिखिए। (Answer in Sanskrit; where a Hindi meaning is asked, write in Hindi.)

खण्ड-क: अपठित गद्यांश (Unseen Passages)

प्रत्येक उपप्रश्न 1 अंक का

Q1. अधोलिखितम् अपठितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत -
मानवजीवनं संसारे बहुमूल्यम् अस्ति। अस्मिन् जीवने नरः साक्षात् परमं सुखं प्राप्नोति। मानवस्य जीवनस्य चत्वारः भागाः सन्ति - ब्रह्मचर्यः, गार्हस्थ्यः, वानप्रस्थः, संन्यासश्च। ब्रह्मचर्यस्य द्वितीयं नाम छात्रजीवनम् अस्ति। छात्रः तु सदैव मानवः भवति। सः प्रतिक्षणं नूतनां शिक्षां प्राप्नोति। छात्रस्य विद्याध्ययनकालः वस्तुतः एकः विशिष्टः कालः भवति।
(क) किं जीवनं संसारे बहुमूल्यम् अस्ति?
(ख) मानवस्य जीवनस्य कति भागाः सन्ति?
(ग) ब्रह्मचर्यस्य द्वितीयं नाम किम् अस्ति?
(घ) 'अविशिष्टः' अस्य किं विलोमपदम् अत्र प्रयुक्तम्? (क) कालः (ख) नूतनाम् (ग) विशिष्टः (घ) वस्तुतः
(ङ) 'नूतनाम्' अस्य किं विशेष्यपदम् अत्र प्रयुक्तम्? (क) प्रतिक्षणम् (ख) बहुमूल्यम् (ग) शिक्षाम् (घ) कालः [5 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) मानवजीवनं संसारे बहुमूल्यम् अस्ति। (मानव-जीवन)
(ख) मानवस्य जीवनस्य चत्वारः भागाः सन्ति।
(ग) ब्रह्मचर्यस्य द्वितीयं नाम छात्रजीवनम् अस्ति।
(घ) (ग) विशिष्टः - अविशिष्ट का विलोम विशिष्ट (विशेष) है, जो गद्यांश की अन्तिम पंक्ति में आया है।
(ङ) (ग) शिक्षाम् - 'नूतनाम्' विशेषण है और वह 'शिक्षाम्' (विशेष्य) की विशेषता बताता है।

Teacher's Note:
1. गद्यांश को दो बार पढ़कर उत्तर वहीं से खोजिए और उत्तर पूरे वाक्य में लिखिए।
2. विशेषण और विशेष्य का लिङ्ग, वचन और विभक्ति समान होती है, इससे विशेष्य पहचानना आसान हो जाता है।

Q2. अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत -
प्रातः उत्थाय सा अन्वभवत् यत् तस्याः मनः प्रसन्नं नास्ति। मनोविनोदाय सा भ्रमितुं गृहात् बहिः अगच्छत्। भ्रमणकाले सा अपश्यत् यत् मार्गाः सुसज्जिताः सन्ति। सा चिन्तयति किमर्थम् इयं सज्जा? सा अस्मरत् यत् अद्य तु मन्त्री आगमिष्यति। सः अत्र किमर्थम् आगमिष्यति इति विषये तस्याः जिज्ञासा प्रारब्धा। गृहम् आगत्य सा पितरम् अपृच्छत् - 'पितः! मन्त्री किमर्थम् आगच्छति?' पिता अवदत् - 'पुत्रि! नद्याः उपरि नवीनः सेतुः निर्मितः। तस्य उद्घाटनार्थं मन्त्री आगच्छति।'
(क) मन्त्री किमर्थम् आगच्छति?
(ख) कस्याः मनः प्रसन्नं नास्ति?
(ग) सा किमर्थं बहिः अगच्छत्?
(घ) के सुसज्जिताः सन्ति?
(ङ) सा किम् अस्मरत्? [5 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) मन्त्री नद्याः उपरि निर्मितस्य नवीनस्य सेतोः उद्घाटनार्थम् आगच्छति।
(ख) बालिकायाः (पुत्र्याः) मनः प्रसन्नं नास्ति।
(ग) सा मनोविनोदाय (भ्रमितुम्) बहिः अगच्छत्।
(घ) मार्गाः सुसज्जिताः सन्ति।
(ङ) सा अस्मरत् यत् अद्य मन्त्री आगमिष्यति।

Teacher's Note:
1. प्रश्न के कर्ता और क्रिया को देखकर उत्तर उसी वाक्य रचना में संस्कृत में लिखिए।
2. 'किमर्थम्' का उत्तर 'के लिए' वाले शब्द (जैसे उद्घाटनार्थम्, मनोविनोदाय) से दीजिए।

खण्ड-ख: व्याकरण एवं शब्दज्ञान (Grammar and Vocabulary)

Q3. समानार्थकानि पदानि मेलयत - स्तम्भ (क) के पदों का समानार्थक पद नीचे दिए गए शब्दों में से चुनिए -
शब्द-सूची: पठनस्य, समयः, प्रसन्नतया, विस्मयेन, कुटुम्बस्य
(क) आश्चर्येण
(ख) उल्लासेन
(ग) परिवारस्य
(घ) अध्ययनस्य
(ङ) कालः [5 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) आश्चर्येण - विस्मयेन (आश्चर्य = विस्मय)
(ख) उल्लासेन - प्रसन्नतया (खुशी से)
(ग) परिवारस्य - कुटुम्बस्य (परिवार = कुटुम्ब)
(घ) अध्ययनस्य - पठनस्य (पढ़ाई)
(ङ) कालः - समयः (काल = समय)

Teacher's Note:
1. दोनों शब्दों की विभक्ति और वचन समान होने पर ही वे जोड़ी में मिलते हैं, इसे जाँचिए।
2. रोज़ पढ़ने वाले पर्यायवाची शब्दों की सूची बनाकर याद कीजिए।

Q4. मञ्जूषातः विलोमपदानि चित्वा लिखत -
मञ्जूषा: अधुना, मित्रतायाः, लघुचेतसाम्, दुःखिनः, दानवाः
(क) शत्रुतायाः ______
(ख) पुरा ______
(ग) मानवाः ______
(घ) सुखिनः ______
(ङ) उदारचरितानाम् ______ [5 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) शत्रुतायाः - मित्रतायाः (शत्रुता का विलोम मित्रता)
(ख) पुरा - अधुना (पहले का विलोम अब)
(ग) मानवाः - दानवाः (मनुष्य का विलोम दानव)
(घ) सुखिनः - दुःखिनः (सुखी का विलोम दुःखी)
(ङ) उदारचरितानाम् - लघुचेतसाम् (उदार का विलोम संकुचित मन वाले)

Teacher's Note:
1. मञ्जूषा के शब्दों की विभक्ति-वचन देखकर विलोम चुनिए, इससे भ्रम कम होता है।
2. पुरा-अधुना, सुख-दुःख जैसे जोड़े पूरे अर्थ सहित याद रखिए।

Q5. निम्नलिखितेषु उपसर्गं धातुं च पृथक् कुरुत -
(क) प्रभवति = ______ + ______
(ख) विहसति = ______ + ______ [2 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) प्रभवति = प्र (उपसर्ग) + भू (धातु)
(ख) विहसति = वि (उपसर्ग) + हस् (धातु)

Teacher's Note:
1. उपसर्ग शब्द के आरम्भ में आता है और शेष भाग में धातु तथा तिङ् प्रत्यय पहचानिए।
2. 'भवति' में धातु भू ही रहती है, 'भव्' रूप के कारण भ्रमित न हों।

Q6. अधोलिखितानि पदानि धातुं प्रत्ययं च योजयित्वा लिखत -
(क) पठ् + क्त्वा = ______
(ख) हन् + तुमुन् = ______ [2 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) पठ् + क्त्वा = पठित्वा (पढ़कर)
(ख) हन् + तुमुन् = हन्तुम् (मारने के लिए)

Teacher's Note:
1. क्त्वा का 'त्वा' और तुमुन् का 'तुम्' बचता है, अनेक धातुओं में बीच में 'इ' जुड़ता है (पठ् + इ + त्वा)।
2. क्त्वा पूर्वकालिक क्रिया (करके) में और तुमुन् प्रयोजन (के लिए) में आता है।

Q7. समयज्ञानं लिखत - निम्नलिखितं समयं संस्कृते लिखत -
(क) 12:45
(ख) 10:30
(ग) 1:15 [3 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) 12:45 - पादोन-एकवादनम् (एक बजने में पौन घण्टा कम, अर्थात् पौने एक)
(ख) 10:30 - सार्ध-दशवादनम् (साढ़े दस)
(ग) 1:15 - सपाद-एकवादनम् (सवा एक)

Teacher's Note:
1. 'सपाद' का अर्थ सवा, 'सार्ध' का साढ़े और 'पादोन' का पौन या एक चौथाई कम है।
2. संख्या के बाद 'वादनम्' जोड़कर समय बनता है, जैसे दशवादनम् (दस बजे)।

Q8. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत -
(क) अनारिकायाः प्रश्नैः सर्वेषां बुद्धिः चक्रवत् भ्रमति।
(ख) मन्त्री सेतोः उद्घाटनार्थम् आगच्छति।
(ग) संस्कृतमेव सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा। [3 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) कस्याः प्रश्नैः सर्वेषां बुद्धिः चक्रवत् भ्रमति?
(ख) मन्त्री सेतोः किमर्थम् आगच्छति?
(ग) संस्कृतमेव कस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा?

Teacher's Note:
1. रेखांकित पद के स्थान पर उचित प्रश्नवाचक शब्द (कः, का, किम्, कस्य, कस्याः, किमर्थम्) रखिए।
2. बाकी वाक्य ज्यों का त्यों रखिए और अन्त में प्रश्नचिह्न लगाइए।

Q9. अधोलिखितानि पदानि आधृत्य वाक्यानि रचयत -
(क) प्रश्नाः
(ख) नवीनः
(ग) प्रातः [3 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (क) प्रश्नाः - अध्यापकस्य प्रश्नाः सरलाः सन्ति। (शिक्षक के प्रश्न सरल हैं।)
(ख) नवीनः - नद्याः उपरि नवीनः सेतुः निर्मितः। (नदी पर नया पुल बना।)
(ग) प्रातः - प्रातः अहं विद्यालयं गच्छामि। (मैं सुबह विद्यालय जाता हूँ।)
(कोई भी शुद्ध सरल वाक्य मान्य।)

Teacher's Note:
1. छोटा और शुद्ध वाक्य बनाइए, जिसमें दिया गया शब्द ठीक रूप में हो।
2. 'नवीनः' विशेषण है, इसलिए इसके साथ पुल्लिङ्ग एकवचन विशेष्य (जैसे सेतुः) लीजिए।

खण्ड-ग: अनुवाद (Translation)

Q10. निम्नलिखित-श्लोकानां हिन्दी-अर्थं लिखत -
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः।
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता।
विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्याविहीनः पशुः॥
अथवा
क्षमावशीकृतिर्लोके क्षमया किं न साध्यते।
शान्तिखड्गः करे यस्य किं करिष्यति दुर्जनः॥
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्॥ [4 marks]

View Answer & Explanation

Answer: पहला श्लोक: विद्या मनुष्य का सबसे अधिक सुन्दर रूप है और छिपा हुआ गुप्त धन है। विद्या भोग, यश और सुख देने वाली है तथा गुरुओं की भी गुरु है। विदेश जाने पर विद्या ही बन्धु (सहायक) है, विद्या सबसे बड़ी देवता है। राजाओं के यहाँ विद्या का सम्मान होता है, धन का नहीं, इसलिए विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है।
अथवा दूसरा श्लोक: संसार में क्षमा से सबको वश में किया जा सकता है, क्षमा से क्या नहीं सधता? जिसके हाथ में शान्तिरूपी तलवार है, उसका दुष्ट व्यक्ति क्या बिगाड़ेगा? सत्य से पृथ्वी धारण की जाती है, सत्य से सूर्य तपता है, सत्य से वायु बहती है; सब कुछ सत्य में ही स्थित है।

Teacher's Note:
1. हर पंक्ति का अर्थ क्रम से लिखिए और मुख्य शब्द (विद्या, क्षमा, सत्य) अवश्य दीजिए।
2. अर्थ शब्दशः नहीं बल्कि भाव सहित सरल हिन्दी में लिखिए, जिससे पूरे अंक मिलें।

Q11. अधोलिखितस्य गद्यांशस्य हिन्दी-अर्थं लिखत -
परन्तु अधुना निखिले संसारे कलहस्य अशान्तेः च वातावरणम् अस्ति। मानवाः परस्परं न विश्वसन्ति। ते परस्य कष्टं स्वकीयं कष्टं न गणयन्ति। अपि च समर्थाः देशाः असमर्थान् देशान् प्रति उपेक्षाभावं प्रदर्शयन्ति, तेषां उपरि स्वकीयं प्रभुत्वं स्थापयन्ति। संसारे सर्वत्र विद्वेषस्य, शत्रुतायाः, हिंसायाः च भावना दृश्यते। देशानां विकासः अवरुद्धः भवति।
अथवा
विश्वस्य उपलब्धासु भाषासु संस्कृतभाषा प्राचीनतमा भाषा अस्ति। भाषेयं अनेकासाम् भाषाणां जननी मता। प्राचीनयोः ज्ञानविज्ञानयोः निधिः अस्यां सुरक्षितः। संस्कृतस्य महत्त्वविषये केनापि कथितम् - 'भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा'। इयं भाषा अतीव वैज्ञानिकी। केचन कथयन्ति यत् संस्कृतमेव सङ्गणकस्य कृते सर्वोत्तमा भाषा। [4 marks]

View Answer & Explanation

Answer: पहला गद्यांश: परन्तु अब सारे संसार में झगड़े और अशान्ति का वातावरण है। मनुष्य आपस में विश्वास नहीं करते। वे दूसरे के कष्ट को अपना कष्ट नहीं मानते। साथ ही समर्थ देश असमर्थ देशों के प्रति उपेक्षा का भाव दिखाते हैं और उन पर अपना प्रभुत्व स्थापित करते हैं। संसार में सब जगह द्वेष, शत्रुता और हिंसा की भावना दिखाई देती है। देशों का विकास रुक जाता है।
अथवा दूसरा गद्यांश: संसार की उपलब्ध भाषाओं में संस्कृत सबसे प्राचीन भाषा है। यह भाषा अनेक भाषाओं की माता मानी जाती है। प्राचीन ज्ञान और विज्ञान का खजाना इसमें सुरक्षित है। संस्कृत के महत्त्व के विषय में किसी ने कहा है कि भारत की प्रतिष्ठा के दो आधार हैं, संस्कृत और संस्कृति। यह भाषा अत्यन्त वैज्ञानिक है। कुछ लोग कहते हैं कि संस्कृत ही कम्प्यूटर के लिए सबसे अच्छी भाषा है।

Teacher's Note:
1. वाक्य-वाक्य करके अनुवाद कीजिए और कठिन शब्दों (उपेक्षा, प्रभुत्व, निधि) का अर्थ पहले सोच लीजिए।
2. कोई वाक्य छूटने पर अंक कटते हैं, इसलिए अन्त में मूल गद्यांश से मिलान कर लीजिए।

खण्ड-घ: धातुरूप, शब्दरूप एवं पत्रलेखन (Verb Forms, Noun Forms, Letter)

Q12. 'भू' धातु (लोट्लकारे) अथवा 'पश्य' धातु (लट्लकारे) धातुरूपाणि लिखत। [3 marks]

View Answer & Explanation

Answer: भू धातु, लोट् लकार (परस्मैपदी):
प्रथम पुरुष: भवतु, भवताम्, भवन्तु
मध्यम पुरुष: भव, भवतम्, भवत
उत्तम पुरुष: भवानि, भवाव, भवाम
अथवा पश्य धातु, लट् लकार:
प्रथम पुरुष: पश्यति, पश्यतः, पश्यन्ति
मध्यम पुरुष: पश्यसि, पश्यथः, पश्यथ
उत्तम पुरुष: पश्यामि, पश्यावः, पश्यामः

Teacher's Note:
1. तीनों पुरुषों के एकवचन, द्विवचन और बहुवचन क्रम से लिखिए, कुल नौ रूप।
2. लोट् में आज्ञा का भाव होता है और उत्तम पुरुष में रूप 'आनि, आव, आम' पर समाप्त होते हैं।

Q13. 'मुनि' शब्दः इकारान्तः (पुँल्लिङ्गः) अथवा 'लता' शब्दः आकारान्तः (स्त्रीलिङ्गः) - अस्य शब्दरूपाणि लिखत। [4 marks]

View Answer & Explanation

Answer: मुनि (इकारान्त पुल्लिङ्ग) - एकवचन, द्विवचन, बहुवचन:
प्रथमा: मुनिः, मुनी, मुनयः
द्वितीया: मुनिम्, मुनी, मुनीन्
तृतीया: मुनिना, मुनिभ्याम्, मुनिभिः
चतुर्थी: मुनये, मुनिभ्याम्, मुनिभ्यः
पञ्चमी: मुनेः, मुनिभ्याम्, मुनिभ्यः
षष्ठी: मुनेः, मुन्योः, मुनीनाम्
सप्तमी: मुनौ, मुन्योः, मुनिषु
सम्बोधन: हे मुने!, हे मुनी!, हे मुनयः!
अथवा लता (आकारान्त स्त्रीलिङ्ग):
प्रथमा: लता, लते, लताः
द्वितीया: लताम्, लते, लताः
तृतीया: लतया, लताभ्याम्, लताभिः
चतुर्थी: लतायै, लताभ्याम्, लताभ्यः
पञ्चमी: लतायाः, लताभ्याम्, लताभ्यः
षष्ठी: लतायाः, लतयोः, लतानाम्
सप्तमी: लतायाम्, लतयोः, लतासु
सम्बोधन: हे लते!, हे लते!, हे लताः!

Teacher's Note:
1. आठों विभक्तियाँ (सम्बोधन सहित) और तीनों वचन क्रम से लिखने पर ही पूरे अंक मिलते हैं।
2. मुनि में पञ्चमी और षष्ठी एकवचन समान (मुनेः) तथा लता में समान (लतायाः) होते हैं, इसे याद रखिए।

Q14. पितरं प्रति लिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तशब्दैः पूरयत -
मञ्जूषा: मातरम्, वार्षिक-परीक्षायाः, अस्तु, ज्ञात्वा, परीक्षायाम्
परीक्षाभवनतः
तिथिः ......
आदरणीयाः पितृचरणाः,
सादरं प्रणामाः।
अत्र कुशलं तत्र (1) ______। समाचारः अयम् अस्ति यत् मम (2) ______ परिणामः उद्घोषितः। भवान् (3) ______ प्रसन्नः भविष्यति यत् अहं (4) ______ प्रथमं स्थानं प्राप्तवान्। सफलता-समाचारं (5) ______ भ्रातॄन् भगिनीश्च श्रावयतु भवान्।
पूज्यायाः मातृचरणयोः मम प्रणामाः सन्तु।
भवताम् ______
नाम ______ [5 marks]

View Answer & Explanation

Answer: (1) अस्तु - अत्र कुशलं तत्र अस्तु (आप वहाँ कुशल हों)
(2) वार्षिक-परीक्षायाः - मम वार्षिक-परीक्षायाः परिणामः
(3) ज्ञात्वा - भवान् ज्ञात्वा प्रसन्नः भविष्यति
(4) परीक्षायाम् - अहं परीक्षायां प्रथमं स्थानं प्राप्तवान्
(5) मातरम् - सफलता-समाचारं मातरं भ्रातॄन् भगिनीश्च श्रावयतु भवान्

Teacher's Note:
1. हर रिक्त स्थान का अर्थ पढ़कर वाक्य में व्याकरण (विभक्ति और क्त्वा रूप) के अनुसार शब्द चुनिए।
2. अन्त में पूरा पत्र एक बार पढ़कर देखिए कि वाक्य सही बन रहे हैं।

Download CBSE Question Papers: Class 7 Sanskrit

Previous Year Question Papers: Class 7 Sanskrit

Explore downloadable past papers for Class 7 Sanskrit. Utilizing the CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions ensures complete preparedness by offering clear insights into historical question styles and marking expectations.

Boost Your Exam Score with Past Papers

Practicing past question sets under timed home conditions helps refine pacing and time management skills, ensuring you complete your Sanskrit examination comfortably within the official duration.

Enhance Practice with Sample Papers & Solutions

Pair your past paper revision with our official Class 7 Sanskrit sample papers and online practice modules to achieve total curriculum mastery.

FAQs

Where can I download the official PDF for CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions?

The CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions is available for download on StudiesToday.com. It includes complete set with all sections so that Class 7 students can practice with the exact same paper that came in the CBSE exams.

Are the solutions for CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions based on the official CBSE marking scheme?

Yes, the solutions for CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions are prepared by subject matter experts as per official marking scheme. Class 7 students will understand the structure of answers and 'step-marks' methodology Sanskrit.

How does solving CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions help in preparing for the 2026 exams?

Solving previous year papers like CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions is important to understand repeat themes and question difficulty levels of Sanskrit. It helps Class 7 students to test their time management skills too.

Can I access CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions in different languages?

Yes, where applicable, CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions is available in both English and Hindi mediums. All students from Class 7 can access Sanskrit study material in their preferred language.

Is there a charge to download the CBSE Class 7 Sanskrit solved papers?

No, all previous year question papers on StudiesToday, including CBSE Class 7 Sanskrit Question Paper Set 20 with Solutions, are provided free of charge in mobile-friendly PDF.