Chapter-wise Worksheets for Class 7 Hindi: All Chapters
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Practice Class 7 Hindi Worksheets: All Chapters
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वसन्त भाग - II
कहानी से - मिठाई वाला
Question 1. मिठाई वाला अलग-अलग चीजें क्यों बेचता था और वह महीनों बाद क्यों आता था?
Answer: मिठाई वाला अलग-अलग चीजें इसलिए बेचता था क्योंकि वह बच्चों के प्रति असीम स्नेह रखता था और उन्हीं के बहाने वह अपने बच्चों की झलक पाना चाहता था। वह बच्चों को खिलौने, मुरली और मिठाइयाँ बहुत सस्ते दामों पर बेचता था। वह महीनों बाद इसलिए आता था क्योंकि उसका उद्देश्य धन कमाना नहीं, बल्कि बच्चों के बीच रहकर संतोष पाना था। जब चीजें समाप्त हो जाती थीं और बच्चों का कुतूहल बढ़ जाता था, तब वह कुछ समय बाद नए रूप में आता था।
In simple words: मिठाई वाला बच्चों से बहुत प्यार करता था और उनसे मिलने के लिए अलग-अलग चीजें लेकर महीनों बाद आता था।
Exam Tip: उत्तर लिखते समय मिठाई वाले के संवेदनशील और परोपकारी स्वभाव पर विशेष ध्यान दें।
Question 2. मिठाईवाले में वे कौन से गुण थे जिनकी वजह से बच्चे तो क्या, बड़े भी उसकी ओर खिंचे चले आते थे?
Answer: मिठाईवाले के निम्नलिखित गुणों के कारण बच्चे और बड़े उसकी ओर आकर्षित होते थे -
1. उसका मधुर और मृदु स्वर में गाना तथा फेरी लगाना।
2. बच्चों की पसंद की चीजें बहुत सस्ते दामों पर उपलब्ध कराना।
3. उसका व्यवहार बहुत ही स्नेहपूर्ण और मिलनसार था।
4. वह किसी से अधिक मुनाफा कमाने की लालसा नहीं रखता था, बल्कि बच्चों को खुश देखकर प्रसन्न होता था।
In simple words: उसकी मीठी आवाज, सस्ता सामान और बच्चों के प्रति प्रेम भरा व्यवहार सभी को आकर्षित करता था।
Exam Tip: पॉइंट बनाकर उत्तर लिखने से परीक्षा में अच्छे अंक मिलते हैं।
Question 3. खिलौने वाले के आने पर बच्चों की क्या प्रतिक्रिया होती थी?
Answer: खिलौने वाले के आने पर बच्चों में हलचल मच जाती थी। वे अपनी खेल-κूद छोड़कर उसकी ओर दौड़ पड़ते थे। बच्चे खिलौने देखकर पुलकित हो उठते थे और अपने माता-पिता से पैसे मांगकर तुरंत खिलौने खरीदने लगते थे। उनके चेहरों पर एक विशेष प्रकार की प्रसन्नता और चमक दिखाई देती थी।
In simple words: खिलौने वाला आते ही बच्चे अपने खेल छोड़कर उसकी तरफ दौड़ पड़ते थे और खुशी से झूम उठते थे।
Exam Tip: बच्चों के स्वाभाविक उत्साह का वर्णन अपने शब्दों में करें।
Question 4. 'अब इस बार ये पैसे न लूँगा' - कहानी के अंत में मिठाई वाले ने ऐसा क्यों कहा?
Answer: कहानी के अंत में रोहिणी द्वारा पैसे देने पर मिठाई वाले ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि रोहिणी और चुन्नू-मुन्नू को देखकर उसे अपने ही मरे हुए बच्चों की याद आ गई थी। रोहिणी ने उसे माँ का दर्जा देते हुए स्नेह से मिठाइयाँ दी थीं, जिससे उसका दुखी मन पिघल गया और उसने ममता के वशीभूत होकर उन बच्चों से पैसे लेने से मना कर दिया।
In simple words: रोहिणी और बच्चों का अपनेपन वाला व्यवहार देखकर उसे अपने बच्चों की याद आ गई और उसने पैसे नहीं लिए।
Exam Tip: मिठाई वाले की भावुकता और मार्मिक स्थिति को उत्तर में मुख्य रूप से दर्शाएं।
दोहे से - रहीम के दोहे
नीचे लिखे दोहों की सपसंग व्याख्या कीजिए।
Question 5. जल परै जल जात बहि, तजि मीनन को मोह। रहिमन मछरी नीर को, ततु न छाँड़ति छोह।।
Answer: सन्दर्भ: यह दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक 'वसन्त भाग - 2' में संकलিত 'रहीम के दोहे' से लिया गया है। इसके रचयिता रहीम जी हैं।
व्याख्या: रहीम जी कहते हैं कि जब पानी से भरा बर्तन खाली किया जाता है, तो पानी तो मछली के मोह को छोड़कर तुरंत बह जाता है, लेकिन बेचारी मछली पानी के प्रति अपना प्रेम और लगाव नहीं छोड़ पाती और पानी के बिना तड़प-तड़प कर प्राण त्याग देती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सच्चा प्रेम करने वाला प्रेमी अपने प्रिय से अलग होने पर भी उसके प्रति अपना प्रेम नहीं छोड़ता।
In simple words: पानी तो बह जाता है पर मछली पानी से सच्चा प्रेम करती है और उसके बिना मर जाती है।
Exam Tip: संदर्भ प्रसंग सहित व्याख्या में प्रसंग लिखना अनिवार्य है।
Question 6. तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति-संचहि सुजान।।
Answer: सन्दर्भ: यह दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक 'वसन्त भाग - 2' में संकलित 'रहीम के दोहे' से लिया गया है। इसके रचयिता रहीम दास जी हैं।
व्याख्या: रहीम जी कहते हैं कि जिस प्रकार पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना पानी खुद नहीं पीते, उसी प्रकार सज्जन लोग भी अपनी संपत्ति केवल अपने लिए नहीं जोड़ते, बल्कि उनका उपयोग दूसरों की भलाई और परोपकार के लिए करते हैं। सज्जनों का धन हमेशा समाज के कल्याण के लिए होता है।
In simple words: जैसे पेड़ और तालाब दूसरों की भलाई करते हैं, वैसे ही समझदार लोग भी परोपकार के लिए धन इकट्ठा करते हैं।
Exam Tip: 'परकाज' (परोपकार) और 'सुजान' (सज्जन) शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें।
कहानी से - चिया की बच्ची
Question 7. किन बातों से ज्ञात होता है कि माघवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह दुखी नहीं था?
Answer: माघवदास के जीवन की संपन्नता इन बातों से ज्ञात होती है कि उसके पास सुंदर संगमरमर की कोठी थी, चारों तरफ शानदार बगीचा था, और उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। परंतु वह दुखी और अकेला था क्योंकि उसकी कोठी में और जीवन में कोई स्नेह करने वाला या अपना जन नहीं था। उसके पास सब कुछ था लेकिन मन की शांति और प्रेम का अभाव था, जो उसे भीतर से अकेला और असंतुष्ट बनाता था।
In simple words: माधवदास के पास बड़ा मकान और धन था, लेकिन प्यार करने वाला कोई नहीं था इसलिए वह अंदर से दुखी और अकेला था।
Exam Tip: बाहरी भौतिक सुख और आंतरिक मानसिक अकेलेपन के अंतर को स्पष्ट करें।
Question 8. माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए?
Answer: माधवदास बार-बार चिड़िया से इसलिए कहता था क्योंकि वह उस सुंदर और चंचल चिड़िया को अपने पास रोके रखना चाहता था। वह अपनी अकेलेपन की जिंदगी में उस पक्षी का साथ पाना चाहता था। माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा नहीं कह रहा था; उसके मन में स्वार्थ था। वह उस स्वतंत्र चिड़िया को सोने के पिंजरे में कैद करके अपने मनोरंजन का साधन बनाना चाहता था।
In simple words: माधवदास स्वार्थी था, वह चिड़िया को फंसाकर अपने पास पिंजरे में रखना चाहता था।
Exam Tip: माधवदास के कथन के पीछे छिपे स्वार्थ को उजागर करें।
Question 9. इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?
Answer: इस कहानी का अन्य उपयुक्त शीर्षक 'स्वतंत्रता का मूल्य' या 'स्वाभिमानी चिड़िया' दिया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस कहानी में एक नन्हीं चिड़िया के माध्यम से स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाया गया है। चिड़िया के लिए सोने का पिंजरा और सुख-सुविधाएं किसी काम की नहीं हैं, उसके लिए अपनी खुली हवा में उड़ना ही सबसे बड़ा सुख है।
In simple words: इसका शीर्षक 'स्वतंत्रता का मूल्य' भी हो सकता है क्योंकि इसमें आजादी के महत्व को बताया गया है।
Exam Tip: शीर्षक ऐसा दें जो कहानी के मूल भाव को सटीक रूप से व्यक्त करे।
कविता से - एक तिनका
Question 10. 'एक तिनका' कविता में किस घटना की चर्चा की गई है, जिससे घमंड नहीं करने का संदेश मिलता है?
Answer: कविता में उस घटना की चर्चा की गई है जब कवि को अपनी अष्ट-ऐश्वर्य और प्रतिष्ठा का बहुत घमंड था। एक दिन जब वह शान से खड़ा था, तब कहीं से उड़कर एक छोटा सा तिनका उसकी आँख में आ गिरा। उस छोटे से तिनके ने कवि के सारे अहंकार को पलभर में चूर-चूर कर दिया। इससे यह संदेश मिलता है कि मनुष्य को कभी भी अपनी ताकत या धन पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी चीज भी बड़े से बड़े अभिमानी का घमंड तोड़ सकती है।
In simple words: आँख में एक छोटा सा तिनका पड़ने पर कवि का सारा घमंड टूट गया, जिससे सीख मिलती है कि कभी अभिमान नहीं करना चाहिए।
Exam Tip: तिनके की महत्ता और मानवीय अहंकार की दुर्बलता को उत्तर में दर्शाएं।
Question 11. आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी की क्या दशा हुई?
Answer: आँख में तिनका पड़ने के बाद घमंडी व्यक्ति की स्थिति दयनीय हो गई। उसकी आँख लाल हो गई और दर्द के मारे बेहाल हो उठा। वह बेचैन होकर सिहर उठा और उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। उसका सारा अकड़ और अहंकार एक पल में गायब हो गया और वह उस छोटे से तिनके से मुक्ति पाने के लिए तड़पने लगा।
In simple words: आँख में तिनका जाने से घमंडी दर्द से बेचैन हो गया और उसकी सारी हेकड़ी निकल गई।
Exam Tip: मनुष्य की विवशता और तिनके के प्रभाव का वर्णन करें।
Question 12. घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आस-पास लोगों ने क्या किया?
Answer: घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आस-पास के लोग दौड़े चले आए। उन्होंने कपड़े की मूठ (बाटी) बनाकर उसकी आँख में डाली और तिनके को निकालने का असफल प्रयास करने लगे। लोगों के इस प्रयास से किसी तरह उसकी आँख से वह तिनका निकला, जिससे उसे राहत मिली।
In simple words: लोगों ने कपड़े की मूठ बनाकर उसकी आँख से तिनका निकाला।
Exam Tip: तिनका निकालने के पारंपरिक तरीके (कपड़े की मूठ) का उल्लेख करें।
निबंध से - खानपान की बदलती तस्वीर
Question 13. खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का क्या मतलब है? अपने घर के उदाहरण देकर इसकी व्याख्या करें?
Answer: खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का तात्पर्य है कि अब लोग किसी एक क्षेत्र विशेष के भोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश-विदेश के विभिन्न व्यंजनों को अपना रहे हैं। उदाहरण के लिए, हमारे घर में उत्तर भारतीय दाल-रोटी के साथ-साथ दक्षिण भारतीय इडली-डोसा, पाश्चात्य नूडल्स और चाउमीन भी बड़े चाव से बनाए और खाए जाते हैं। यह मेल-जोल ही खानपान की मिश्रित संस्कृति है।
In simple words: विभिन्न राज्यों और देशों के खाने का आपस में मिल जाना ही खानपान की मिश्रित संस्कृति है।
Exam Tip: अपने दैनिक जीवन का उदाहरण देकर उत्तर को अधिक प्रभावी बनाएं।
Question 14. खानपान में बदलाव के कौन से फायदे हैं? फिर लेखक इस बदलाव को लेकर चिंतित क्यों है?
Answer: खानपान में बदलाव के कई फायदे हैं जैसे - अलग-अलग संस्कृतियों से परिचय होना, समय की बचत होना, और स्वाद में विविधता मिलना। इसके बावजूद लेखक चिंतित इसलिए है क्योंकि इस आधुनिकता के चक्कर में हम अपने पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक स्थानीय व्यंजनों को भूलते जा रहे हैं, जो हमारी सेहत और संस्कृति दोनों के लिए हानिकारक है।
In simple words: नए खानपान से विविधता मिलती है, लेकिन लेखक इस बात से चिंतित है कि हम अपने पारंपरिक और शुद्ध भोजन को छोड़ रहे हैं।
Exam Tip: फायदों के साथ-साथ लेखक की चिंता के कारणों (पारंपरिक खानपान का लुप्त होना) को स्पष्ट करें।
Question 15. खानपान के मामले में स्थानीयता का अर्थ है?
Answer: खानपान के मामले में स्थानीयता का अर्थ उन विशिष्ट व्यंजनों से है जो किसी खास क्षेत्र, राज्य या संस्कृति की पहचान होते हैं और वहीं की स्थानीय सामग्री से पारंपरिक तरीके से बनाए जाते हैं। जैसे - दक्षिण भारत में इडली-डोसा, पंजाब की मक्के की रोटी और सरसों का साग, या बंगाल के रसगुल्ले। ये चीजें उस स्थान की सांस्कृतिक धरोहर होती हैं।
In simple words: स्थानीयता का मतलब किसी खास जगह के पारंपरिक और प्रसिद्ध पकवान हैं।
Exam Tip: स्थानीय व्यंजनों के कुछ प्रसिद्ध उदाहरण दें।
निबंध से - नीलकंठ
Question 16. मोर-मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए?
Answer: मोर-मोरनी के नाम उनके शारीरिक गुणों और विशेषताओं के आधार पर रखे गए थे। नीली गरदन और भव्य सुंदरता के कारण नर मोर का नाम 'नीलकंठ' रखा गया, तथा उसकी छाया के समान साथ रहने वाली और अत्यंत सादगीपूर्ण तथा डरी हुई रहने वाली मादा मोरनी का नाम 'राधा' रखा गया।
In simple words: नीली गरदन के कारण मोर का नाम नीलकंठ और उसकी संगिनी का नाम राधा रखा गया।
Exam Tip: दोनों नामों के पीछे के कारणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 17. जालीघर के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का किस प्रकार स्वागत हुआ?
Answer: जालीघर के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का स्वागत अत्यंत आक्रामक और अपमानजनक तरीके से हुआ। वहाँ पहले से ही रहने वाले जीव-जंतुओं जैसे खरगोशों, तोतों और कबूतरों ने मिलकर उन पर आक्रमण कर दिया। विशेष रूप से बंदर कुब्जा और अन्य जीवों ने उन्हें परेशान किया और उनके प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार दिखाया।
In simple words: जालीघर के पुराने जीवों ने नए मोर के बच्चों पर हमला करके उनका स्वागत किया।
Exam Tip: जालीघर के अन्य पशु-पक्षियों के व्यवहार का वर्णन करें।
Question 18. लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं?
Answer: लेखिका महादेवी वर्मा को नीलकंठ की कई चेष्टाएँ बहुत पसंद थीं, जैसे - उसका मेघगर्जन के समय अपनी सुंदर और लंबी पूँछ को मंडलाकार फैलाकर मेघों के सामने नृत्य करना, उसका गरिमामय चलना, लेखिका के बुलाने पर उसके पास चले आना, और अन्य जीवों की रक्षा करना। उसकी हर मुद्रा में एक राजकुमार जैसी भव्यता और कलात्मकता दिखाई देती थी।
In simple words: नीलकंठ का मेघों को देखकर नाचना और उसका सुंदर चलना लेखिका को बहुत अच्छा लगता था।
Exam Tip: नीलकंठ के नृत्याभिनय और उसके शालीन स्वभाव का जिक्र अवश्य करें।
Question 19. जालीघर में रहनेवाले सभी जीव एक-दूसरे के मित्र बन गए थे, पर कुब्जा के साथ ऐसा संभव क्यों नहीं हो पाया?
Answer: जालीघर के अन्य सभी जीव आपसी प्रेम और मेल-जोल से रहते थे, लेकिन कुब्जा स्वभाव से बहुत ईर्ष्यालु और झगड़ालू थी। वह नीलकंठ के साथ किसी अन्य को नहीं देखना चाहती थी और विशेषकर राधा से अत्यधिक द्वेष रखती थी। अपने इस कुटिल और हिंसक स्वभाव के कारण वह किसी की भी मित्र नहीं बन पाई और अंततः अकेली रही।
In simple words: कुब्जा बहुत ईर्ष्यालु और झगड़ालू थी, इसलिए वह किसी से दोस्ती नहीं कर पाई।
Exam Tip: कुब्जा के स्वभाव की ईर्ष्या और आक्रामकता को मुख्य कारण बताएं।
साक्षात्कार से - धनराज
Question 20. साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।
Answer: साक्षात्कार को पढ़कर धनराज पिल्लै की एक अत्यंत संघर्षशील, सादगीपूर्ण, दृढ़ निश्चयी और जमीन से जुड़े हुए इंसान की छवि उभरती है। उनके जीवन से पता चलता है कि उन्होंने गरीबी और कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी मेहनत और लगन से हॉकी के खेल में सर्वोच्च शिखर को छुआ। वे अपनी सफलता के बाद भी अहंकार से दूर और बहुत विनम्र स्वभाव के व्यक्ति हैं।
In simple words: धनराज पिल्लै एक बहुत ही मेहनती, साधारण और संघर्ष करके आगे बढ़ने वाले विनम्र खिलाड़ी के रूप में सामने आते हैं।
Exam Tip: उनके व्यक्तित्व के मुख्य गुण - संघर्ष, सादगी और विनम्रता को रेखांकित करें।
Question 21. धनराज पिल्लै ने जमीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफर का वर्णन कीजिए।
Answer: धनराज पिल्लै का शुरुआती जीवन बेहद गरीबी में बीता। उनके पास हॉकी खेलने के लिए ढंग की स्टिक भी नहीं होती थी, वे अपने साथियों की पुरानी स्टिक से अभ्यास करते थे। बड़े भाई के सहयोग और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर वे जूनियर हॉकी से राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचे। उन्होंने अपनी अटूट लगन, बेहतरीन खेल कौशल और कभी हार न मानने वाले जज्बे के बल पर भारतीय हॉकी टीम के कप्तान का पद संभाला और देश का नाम रोशन किया। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि लगन और मेहनत से साधारण व्यक्ति भी असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है।
In simple words: अत्यंत गरीबी से उठकर अपनी कड़ी मेहनत और हॉकी के प्रति समर्पण के कारण वे भारतीय टीम के कप्तान बने।
Exam Tip: उनके संघर्ष से लेकर शीर्ष तक पहुँचने की कहानी को संक्षेप में लिखें।
Question 22. 'मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से संभालने की सीख दी है' - धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?
Answer: इस कथन का अर्थ यह है कि जब इंसान को जीवन में बहुत प्रसिद्धि और सफलता मिलती है, तो उसके सिर पर अहंकार चढ़ने का खतरा रहता है। धनराज की माँ ने उन्हें सिखाया था कि सफलता मिलने के बाद भी कभी घमंडी नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने पैरों को जमीन पर रखना चाहिए और सभी के साथ विनम्रता से पेश आना चाहिए। प्रसिद्धि का बोझ अहंकार से नहीं, बल्कि सादगी से संभालना चाहिए।
In simple words: इसका मतलब है कि बड़ी सफलता मिलने पर भी इंसान को घमंड नहीं करना चाहिए और हमेशा विनम्र रहना चाहिए।
Exam Tip: माँ के संस्कारों और खिलाड़ी की विनम्रता के महत्व को स्पष्ट करें।
निबंध से - वीर कुँवर सिंह
Question 23. वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?
Answer: वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने हमें सबसे अधिक प्रभावित किया -
1. उनका असीम साहस और वीरता, जिससे उन्होंने वृद्ध अवस्था में भी अंग्रेजों को धूल चटाई।
2. उनकी उदारता और देशभक्ति की भावना।
3. उनका स्वाभिमानी स्वभाव, जिसके तहत उन्होंने कभी भी विदेशी शासन के आगे घुटने नहीं टेके।
4. समाज के सभी वर्गों के प्रति उनका समान भाव और न्यायप्रियता।
In simple words: उनकी बहादुरी, देशप्रेम, उदारता और कभी हार न मानने वाला स्वाभिमान हमें बहुत प्रभावित करता है।
Exam Tip: उनके व्यक्तित्व के प्रमुख गुणों को बिंदुओं में लिखकर व्याख्या करें।
Question 24. कुँवर सिंह के बचपन में किन कामों में मज़ा आता था? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?
Answer: कुँवर सिंह को बचपन में घुड़सवारी करने, तलवारबाजी करने, कुश्ती लड़ने और शारीरिक खेलों में बहुत मज़ा आता था। हाँ, उनके इन बचपन के शौक़ों ने उन्हें आगे चलकर एक महान स्वतंत्रता सेनानी बनने में बहुत मदद की। इन्हीं अभ्यासों के कारण उनका शरीर बलिष्ठ हुआ और युद्ध कौशल में वे पारंगत हुए, जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध बहुत काम आया।
In simple words: बचपन के घुड़सवारी और तलवारबाजी के शौक ने उन्हें आगे चलकर कुशल स्वतंत्रता सेनानी बनने में बहुत मदद की।
Exam Tip: बचपन के खेल और उनके क्रांतिकारी जीवन के संबंध को स्पष्ट करें।
Question 25. पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?
Answer: पाठ के कई प्रसंगों से यह बात सिद्ध होती है -
1. जब अंग्रेजों की गोली लगने के बाद उन्होंने अपने ही हाथ से अपना घायल हाथ काटकर गंगा में प्रवाहित कर दिया, जो उनके अपार साहस का प्रतीक है।
2. वे गरीबों और जरूरतमंदों की हमेशा मदद करते थे, जो उनकी उदारता को दर्शाता है।
3. उम्र के ढलने के बावजूद देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से डटकर मुकाबला करना उनके स्वाभिमानी होने का प्रमाण है।
In simple words: गोली लगने पर अपना हाथ खुद काट लेना और उम्र के आखिरी पड़ाव पर भी लड़ना उनके साहस और स्वाभिमान को दिखाता है।
Exam Tip: हाथ काटने वाली घटना का उल्लेख करना न भूलें, यह उनके अदम्य साहस को दिखाता है।
नीचे लिखे गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
पुराने जमाने से ही भारतीय समाज में नारी किसी न किसी पर आश्रित रहती आई है, इसलिए नारी को पराश्रिता कहा जाता है। बचपन में नारी माता-पिता के आश्रय में रहती है, विवाह के बाद पति के संरक्षण में तथा बुढ़ापे में बच्चों की आश्रित बनती है। प्राचीन काल से उसकी स्थिति हर रूप में पराधीन रही है। उसकी दीनदशा का कारण पर की सम्पत्ति पर अधिकार न होना था। धन पुरुष कमाता है, अतः धन पर पुरुष का अधिकार ज्यादा होता है। आधुनिक काल में नारी की स्थिति में परिवर्तन हुआ। नारी घर से बाहर निकली, शिक्षा और बाहरी वातावरण के प्रभाव से उसमें आत्मविश्वास बढ़ा, तभी वह आज सभी क्षेत्रों में पुरुष से टक्कर ले रही है और सभी क्षेत्रों में सफलता के झंडे गाड़ रही है, जहाँ वह निर्णय लेने में सक्षम हो गई है, वहीं परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी संभालने लगी है। इन सबके बावजूद भारतीय नारी पर और परिवार का भी विशेष ध्यान रखकर दोहरी भूमिका में खरी उतर रही है।
Question 26. पुराने समय में भारतीय नारी को 'पराश्रिता' क्यों कहा जाता था?
Answer: पुराने समय में भारतीय नारी को 'पराश्रिता' इसलिए कहा जाता था क्योंकि वह जीवन के हर चरण में किसी न किसी पर निर्भर रहती थी। बचपन में माता-पिता पर, विवाह के बाद पति पर और बुढ़ापे में बच्चों के सहारे पर जीवित रहती थी, उसका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व या आर्थिक अधिकार नहीं होता था।
In simple words: पुराने समय में औरतें जीवनभर दूसरों पर निर्भर रहती थीं, इसलिए उन्हें पराश्रिता कहा जाता था।
Exam Tip: गद्यांश की पहली पंक्ति से उत्तर को सटीक रूप से लिखें।
Question 27. प्राचीन काल में भारतीय नारी की दीन-हीन दशा का मुख्य कारण क्या था?
Answer: प्राचीन काल में भारतीय नारी की दीन-हीन दशा का मुख्य कारण उसका संपत्ति पर अधिकार न होना था। चूँकि धन कमाने का कार्य पुरुष करता था, इसलिए धन और संपत्ति पर पुरुषों का ही अधिकार माना जाता था और नारियों को आर्थिक रूप से कमजोर और परवश रहना पड़ता था।
In simple words: संपत्ति पर अधिकार न होना और आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर रहना ही उनकी दीन दशा का मुख्य कारण था।
Exam Tip: आर्थिक निर्भरता और संपत्ति के अधिकार के अभाव को मुख्य कारण बताएं।
Question 28. आधुनिक नारी पुरुष के बराबर कैसे बनी?
Answer: आधुनिक काल में जब नारी घर की चारदीवारी से बाहर निकली, शिक्षा प्राप्त की और बाहरी दुनिया के संपर्क में आई, तो उसमें आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। इसी शिक्षा और आत्मविश्वास के बल पर आज आधुनिक नारी हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है और पुरुष के बराबर बन गई है।
In simple words: शिक्षा प्राप्त करने और बाहर निकलकर आत्मविश्वास बढ़ाने से आधुनिक नारी पुरुषों के बराबर आ गई है।
Exam Tip: शिक्षा और आत्मविश्वास की भूमिका को उत्तर में मुख्य रूप से शामिल करें।
Question 29. आज की भारतीय नारी किस प्रकार की दोहरी भूमिका निभा रही है?
Answer: आज की भारतीय नारी घर से बाहर निकलकर नौकरी और व्यवसाय के माध्यम से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही है, और साथ ही घर-परिवार की देखरेख तथा बच्चों के पालन-पोषण की अपनी पारंपरिक जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही है। इस प्रकार वह दोनों मोर्चों पर एक साथ दोहरी भूमिका निभा रही है।
In simple words: आज की औरतें घर-बाहर दोनों संभालती हैं - वे नौकरी भी करती हैं और परिवार की देखभाल भी करती हैं।
Exam Tip: आधुनिक कामकाजी महिला की दोहरी जिम्मेदारी (घर और दफ्तर) का सुंदर वर्णन करें।
Question 30. नारी के नौकरी करने का क्या परिणाम हुआ?
Answer: नारी के नौकरी करने से यह परिणाम हुआ कि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गई। अब वह अपने फैसले स्वयं लेने में सक्षम हो गई है और परिवार की आर्थिक तंगी को दूर करने में बड़ा योगदान दे रही है, जिससे समाज में उसकी स्थिति और सम्मान में वृद्धि हुई है।
In simple words: नौकरी करने से औरतें आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो गईं और अपने फैसले खुद लेने लगीं।
Exam Tip: आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता को मुख्य परिणाम के रूप में बताएं।
Question 31. गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा?
Answer: इस गद्यांश का उचित शीर्षक 'भारतीय नारी: दशा और दिशा' या 'नारी सशक्तिकरण' होगा।
In simple words: इस गद्यांश का शीर्षक 'नारी सशक्तिकरण' या 'बदला हुआ महिला जीवन' हो सकता है।
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