CBSE Class 10 Hindi Worksheet Set 06

Chapter-wise Worksheets for Class 10 Hindi: All Chapters

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Practice Class 10 Hindi Worksheets: All Chapters

Access the complete worksheet PDF for Class 10 Hindi below. Regular practice with these targeted academic tasks builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school examinations.

साखी - कबीर

प्र. 1. कबीर के दोहों को साखी क्यों कहा जाता है?
Answer: 'साखी' शब्द 'साक्षी' (प्रत्यक्ष ज्ञान) का तद्भव रूप है। कबीर के दोहे प्रत्यक्ष ज्ञान और अनुभव पर आधारित होते हैं। संत कबीर ने समाज में जो कुछ अपनी आँखों से देखा और अनुभव किया, उसे अपने दोहों के माध्यम से सत्य के रूप में प्रस्तुत किया। इसलिए उनके दोहों को 'साखी' कहा जाता है, जो जीवन के यथार्थ का प्रत्यक्ष प्रमाण देते हैं।
In simple words: कबीर के दोहे उनके प्रत्यक्ष जीवन अनुभव और ज्ञान पर आधारित होते हैं, इसलिए उन्हें साखी कहा जाता है।

Exam Tip: 'साखी' शब्द के मूल अर्थ 'साक्षी' (प्रत्यक्षदर्शी) को अवश्य लिखें, क्योंकि यह इस प्रश्न का मुख्य कीवर्ड है।

 

प्र. 2. कबीर के अनुसार निंदक कौन होता है? उन्होंने उसे अपना सबसे बड़ा शुभचिंतक क्यों माना है?
Answer: कबीर के अनुसार निंदक वह व्यक्ति है जो हमारी कमियों, बुराइयों और गलतियों को सबके सामने उजागर करता है। कबीर ने उसे अपना सबसे बड़ा शुभचिंतक इसलिए माना है क्योंकि निंदक हमारी गलतियों को बताकर हमें संभलने का अवसर देता है। उसकी आलोचना सुनकर हम बिना किसी साबुन और पानी के अपने स्वभाव को सुधार सकते हैं और अपने चरित्र को निर्मल बना सकते हैं।
In simple words: निंदक हमारी कमियाँ बताकर हमें सुधारने का मौका देता है, इसलिए वह हमारा सच्चा हितैषी है।

Exam Tip: 'बिन साबुन पानी बिना, निर्मल करै सुभाय' पंक्ति का संदर्भ देकर उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाएं।

 

प्र. 3. कबीर के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति किस प्रकार की जा सकती है?
Answer: कबीर के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति बाहरी आडंबरों, पूजा-पाठ, तीर्थाटन या योग-साधना से नहीं होती है। ईश्वर को पाने के लिए सच्चे प्रेम, भक्ति, अहंकार के त्याग और मन की पवित्रता की आवश्यकता होती है। जब मनुष्य अपने अंदर के अज्ञान और द्वेष को मिटाकर सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करता है, तभी उसे परमात्मा की प्राप्ति होती है।
In simple words: दिखावे को छोड़कर सच्चे प्रेम और निर्मल मन से ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।

Exam Tip: बाह्य आडंबरों का विरोध और आंतरिक शुद्धता पर कबीर के विचार का उल्लेख करना अनिवार्य है।

 

प्र. 4. कबीर ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलने हेतु क्या आवश्यक मानते हैं?
Answer: कबीर ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलने हेतु अहंकार (घमंड) का त्याग, मन की पवित्रता, गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा और सांसारिक मोह-माया से मुक्ति को अत्यंत आवश्यक मानते हैं। उनके अनुसार भक्ति का मार्ग तलवार की धार के समान तीखा और कठिन है, जिस पर वही चल सकता है जो अपने स्वार्थ और अहंकार को पूरी तरह त्याग दे।
In simple words: भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए अहंकार का त्याग और दृढ़ संकल्प सबसे जरूरी है।

Exam Tip: 'शीश उतारै भुइ धरै, तौ पैठे घर माहिं' दोहे के भाव को स्पष्ट करते हुए उत्तर लिखें।

 

प्र. 5. कबीर की साखियों में कौन-कौन से जीवन-मूल्य उभरते हैं?
Answer: कबीर की साखियों से निम्नलिखित जीवन-मूल्य उभरते हैं:
1. पाखंड और बाह्य आडंबरों का विरोध तथा सत्य की प्रतिष्ठा।
2. गुरु का महत्व और उनके प्रति आदर भाव।
3. समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का संदेश।
4. अहंकार का त्याग और सादा जीवन उच्च विचार की प्रेरणा।
5. निंदा को सकारात्मक रूप में लेकर अपने चरित्र को सुधारना।
In simple words: कबीर की साखियाँ हमें सच्चाई, सादगी, अहंकार त्याग और प्रेम से जीने की प्रेरणा देती हैं।

Exam Tip: जीवन-मूल्यों को बिंदुओं (Bullets) में लिखने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

पद - मीरा

प्र. 1. अपने आराध्य श्रीकृष्णा के दर्शन पाने के लिए मीरा क्या-क्या उपाय करती हैं?
Answer: अपने आराध्य श्री कृष्ण के दर्शन पाने के लिए मीराबाई निम्नलिखित उपाय करती हैं:
1. वे श्री कृष्ण की चाकरी (नौकरानी) बनने को तैयार हैं ताकि उन्हें रोज दर्शन मिल सकें।
2. वे उनके लिए बाग-बगीचे लगाती हैं और वृंदावन की कुंज-गलियों में उनके नाम का गुणगान करती हैं।
3. वे पीले वस्त्र धारण करके यमुना के तट पर सुबह-सुबह श्री कृष्ण से मिलने पहुँचती हैं।
In simple words: मीराबाई कृष्ण की सेविका बनकर, उनके लिए बाग लगाकर और उनके गुण गाकर दर्शन पाना चाहती हैं।

Exam Tip: मीरा की अनन्य भक्ति और दास्य भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

प्र. 2. भाव भक्ति को जागीर क्यों कहा गया है?
Answer: भाव भक्ति को 'जागीर' (संपत्ति या साम्राज्य) इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार सांसारिक जागीर या संपत्ति राजा या अमीर लोगों के पास होती है और वह अमूल्य होती है, उसी प्रकार प्रभु के प्रति सच्ची प्रेम-भक्ति भी अत्यंत अमूल्य, असीम और स्थाई होती है। यह सामान्य सांसारिक धन से बहुत ऊपर है, जिसे कोई चोर चुरा नहीं सकता और न ही कोई राजा छीन सकता है।
In simple words: सच्ची भक्ति सबसे बड़ी और अमूल्य संपत्ति है, जिसे कोई छीन नहीं सकता।

Exam Tip: भक्ति की तुलना अमूल्य संपत्ति से करते हुए इसकी विशेषता बताएं।

 

प्र. 3. भगवान के नरहरि रूप के विषय में लिखिए।
Answer: भगवान विष्णु का 'नरहरि' (नृसिंह) रूप उनके अवतारों में अत्यंत प्रतापी और अद्भुत रूप माना जाता है। जब भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने और अहंकारी दैत्य हिरण्यकशिपु का वध करने का समय आया, तब भगवान विष्णु आधे शेर (सिंह) और आधे मनुष्य के रूप में खंभा फाड़कर प्रकट हुए थे। मीराबाई ने अपने पदों में इसी नरहरि रूप का स्मरण किया है जिसने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए उसके दुखों का निवारण किया था।
In simple words: नरहरि रूप भगवान विष्णु का वह अवतार है जिसमें वे आधा शेर और आधा मनुष्य बनकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे।

Exam Tip: प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के वध की पौराणिक कथा का संक्षेप में उल्लेख करें।

 

 CLASS 10 (HINDI LITT) WS-7

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