Download NCERT Solutions for Class 11 History Chapter 07 आधुनिकीकरण के रास्ते
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Question 1: मेजी पुनर्स्थापना से पहले की वे अहम घटनाएँ क्या थीं, जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को संभव किया?
Answer:
मेजी पुनर्स्थापना से पहले की वे अहम घटनाएँ जिन्होंने जापान के तीव्र आधुनिकीकरण को संभव किया, उनमें शोगुन शासन प्रणाली का पतन और आंतरिक असंतोष मुख्य रूप से जिम्मेदार थे। तोकुगावा शोगुन के शासनकाल में राजनीतिक व्यवस्था अत्यंत दुर्बल हो चुकी थी। रिक्त राजकोष, स्वामिभक्त सेवकों का अभाव और रक्षा व्यवस्था की कमजोरी के कारण शोगुन शासन व्यवस्था दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही थी। इसके अलावा, पश्चिमी राज्यों के जापान में प्रवेश के दौरान देश में चहुंओर आंतरिक असंतोष फैल गया था। जापान के अनेक सामंत तोकुगावा शोगुन के परिवार के विरुद्ध हो गए थे। शोगुन ने अपने दण्डात्मक कार्यों से अन्य सामंत परिवारों को कष्ट पहुँचाया था। जापान के एक कानून के अनुसार सामंतों को राजाज्ञा के बिना किले बनाने का अधिकार छीन लिया गया था तथा जहाज बनाने तथा सिक्के ढलवाने का अधिकार भी उनसे छीन लिया गया था। चौसू सामंतों तथा शोगुन सामंतों के बीच संघर्ष, कृषक वर्ग का असंतोष तथा जापान की पृथकता का प्रभाव जैसी घटनाओं ने जापान में तीव्र आधुनिकीकरण की पृष्ठभूमि तैयार की।
मुख्य बिंदु:
• तोकुगावा शोगुन की कमजोर शासन व्यवस्था और रिक्त राजकोष के कारण आंतरिक असंतोष का प्रसार हुआ।
• सामंतों की शक्ति को सीमित करने और उनके अधिकारों को छीनने से आंतरिक संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई।
• कृषक वर्ग पर अत्यधिक करों का बोझ होने के कारण किसानों में व्यापक असंतोष व्याप्त था।
आम गलतियाँ:
• केवल मेजी पुनर्स्थापना की घटनाओं का वर्णन करना और उससे पहले की पृष्ठभूमियों को छोड़ देना।
• शोगुन और सामंतों के आपसी संघर्ष के कारणों को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• कृषक वर्ग की स्थिति और उनके विद्रोहों की भूमिका को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) उत्तर लिखते समय तोकुगावा शोगुन के पतन के कारणों को बिंदुओं के रूप में दर्शाएँ ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।
b) आंतरिक असंतोष और सामंती व्यवस्था के बीच के टकराव को मुख्य रूप से रेखांकित करें।
c) जापान की पृथकता की नीति और उसके प्रभावों का संक्षेप में उल्लेख करना न भूलें।
Question 2: जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोज़मर्रा की जिंदगी में किस तरह बदलाव आए? चर्चा कीजिए।
Answer:
जापान के विकास के साथ-साथ वहाँ की रोज़मर्रा की जिंदगी में क्रांतिकारी बदलाव आए। जापान का एक आधुनिक समाज में रूपांतरण होने से लोगों की दिनचर्या में कई बदलाव आए। पैतृक परिवार व्यवस्था में कई पीढ़ियाँ परिवार के मुखिया के नियंत्रण में रहती थीं, लेकिन जैसे-जैसे लोग समृद्ध हुए, परिवार के बारे में नए विचार फैलने लगे। नया घर (जिसे जापानी अंग्रेजी शब्द का उपयोग करते हुए होम कहते हैं) का संबंध मूल परिवार से था, जहाँ पति-पत्नी साथ रह कर कमाते तथा घर बसाते थे। पारिवारिक जीवन की इस नयी समझ ने नए तरह के घरेलू उत्पादों, नए किस्म के पारिवारिक मनोरंजन तथा नए प्रकार के घर की माँग पैदा की। जापान के विकास के साथ-साथ नवीन घरेलू उत्पादों जैसे- कुकर, टोस्टर आदि का प्रयोग होने लगा। ट्रामों के आने से आवागमन की क्रियाएँ सुलभ हो गईं। सन् 1899 ई. में फिल्मों का निर्माण होने लगा। 1925 ई. में पहला रेडियो स्टेशन खोला गया। 1920 के दशक में निर्माण कम्पनियों ने प्रारंभ में 200 येन देने के बाद लगातार 10 साल के लिए 12 येन माहवार की किश्तों पर लोगों को सस्ते मकान मुहैया कराए।
मुख्य बिंदु:
• पैतृक परिवार व्यवस्था से बदलकर छोटे और आधुनिक 'होम' परिवार की अवधारणा का विकास हुआ।
• घरेलू उत्पादों (कुकर, टोस्टर) और मनोरंजन के साधनों (रेडियो, फिल्म) का दैनिक जीवन में प्रवेश हुआ।
• शहरीकरण और परिवहन साधनों (ट्राम) के विकास से लोगों की जीवनशैली सुलभ और तेज हो गई।
आम गलतियाँ:
• केवल आर्थिक विकास के आँकड़े लिखना और सामाजिक तथा दैनिक जीवन के बदलावों को भूल जाना।
• पारंपरिक परिवार व्यवस्था और आधुनिक 'होम' परिवार के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
• शहरी परिवहन और मनोरंजन के साधनों के विकास के वर्षों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) रोज़मर्रा की जिंदगी के बदलावों को पारिवारिक, घरेलू और मनोरंजन जैसे उप-शीर्षकों में विभाजित करके लिखें।
b) 'होम' (Home) शब्द और उससे जुड़े सामाजिक बदलावों का विशेष रूप से उल्लेख करें।
c) महत्वपूर्ण वर्षों (जैसे 1899, 1925) को उत्तर में हाईलाइट करें ताकि परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़े।
Question 3: पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना चीन राजवंश ने कैसे किया?
Answer:
पश्चिमी ताकतों द्वारा पेश की गई चुनौतियों का सामना चीन राजवंश ने नई नीतियों और सुधारों के माध्यम से किया। चीन ने नई सेना, आधुनिक प्रशासन, शिक्षा के लिए नई नीतियों का निर्माण किया। चीन को उपनिवेशीकरण से बचाने के लिए चीन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना बहुत आवश्यक था। लोगों द्वारा राष्ट्रीय जागरूकता पैदा करने की कोशिश की गई। लियांग किचाउ जैसे प्रसिद्ध चीनी विचारकों का तर्क था कि चीनियों में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करके ही चीन पश्चिम का सफलतापूर्वक विरोध कर सकता था। जिन विद्यार्थियों को 1890 ई. में जापान अध्ययन करने के लिए भेजा गया था उन्होंने जापान के नए विचारों से प्रभावित होकर चीन में गणतंत्र स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1905 ई. के रूस-जापान युद्ध के पश्चात दीर्घकाल से प्रचलित चीनी परीक्षा प्रणाली को खत्म कर दिया गया। पारंपरिक परीक्षा व्यवस्था में साहित्य पर जोर दिया जाता था। सरकारी पदों की नियुक्ति में योग्यता को आधार बनाया गया। प्रशासकों का विचार था कि एक संवैधानिक रूप से चुनी गई सरकार की पश्चिमी शक्तियों द्वारा प्रस्तुत की गई चुनौतियों से भली-भाँति निपट सकती है। संवैधानिक सरकार की स्थापना के लिए स्थानीय विधायिकाओं के गठन की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।
मुख्य बिंदु:
• चीन ने पश्चिमी उपनिवेशीकरण से बचने के लिए प्रशासनिक, सैन्य और शैक्षणिक सुधार किए।
• लियांग किचाउ जैसे विचारकों ने जनता में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने पर जोर दिया।
• पुरानी परीक्षा प्रणाली को समाप्त कर योग्यता आधारित नियुक्ति और संवैधानिक सुधारों को अपनाया गया।
आम गलतियाँ:
• केवल पश्चिमी ताकतों के आक्रमणों का वर्णन करना और चीनी राजवंश द्वारा किए गए सुधारों को छोड़ देना।
• परीक्षा प्रणाली में बदलाव और विदेशों में पढ़ने गए विद्यार्थियों की भूमिका का उल्लेख न करना।
• संवैधानिक सुधारों और विधायिकाओं के गठन के महत्व को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) चीन राजवंश की प्रतिक्रिया और सुधारों को क्रमबद्ध तरीके से बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
b) वैचारिक बदलाव (जैसे राष्ट्रीयता की भावना) और संस्थागत बदलाव (जैसे परीक्षा प्रणाली का अंत) दोनों को स्पष्ट करें।
c) उत्तर में प्रमुख विचारकों (जैसे लियांग किचाउ) का नाम अवश्य शामिल करें।
Question 4: सन यात-सेन के तीन सिद्धांत क्या थे?
Answer:
सन यात-सेन आधुनिक चीन के संस्थापक माने जाते हैं। वे एक गरीब परिवार से थे। सन यात-सेन के नेतृत्व में 1911 ई. में मांचू साम्राज्य को समाप्त कर चीनी गणतंत्र की स्थापना की गई। सन यात-सेन के तीन सिद्धांत निम्नलिखित थे: 1. गणतांत्रिक सरकार की स्थापना- अन्य साम्राज्यवादीयों को हटाना और गणतंत्र की स्थापना करना। 2. समाजवाद, जो पूँजी का नियमन करे तथा भूस्वामित्व में समानता लाए। 3. राष्ट्रवाद का अर्थ था मांचू वंश जिसे विदेशी राजवंश के रूप में माना जाता था- को सत्ता से हटाना। साथ ही साथ अन्य साम्राज्यवादीयों को हटाना। सन यात-सेन के विचार कुओमींतांग के राजनीतिक दर्शन का आधार बने।
मुख्य बिंदु:
• सन यात-सेन को आधुनिक चीन का संस्थापक माना जाता है जिन्होंने 1911 में मांचू साम्राज्य को समाप्त किया।
• पहला सिद्धांत राष्ट्रवाद था, जिसका उद्देश्य मांचू राजवंश और विदेशी साम्राज्यवादियों को हटाना था।
• दूसरा सिद्धांत लोकतंत्र (गणतंत्र की स्थापना) और तीसरा सिद्धांत समाजवाद (पूँजी और भूस्वामित्व का नियमन) था।
आम गलतियाँ:
• तीनों सिद्धांतों (राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद) के सही अर्थ को आपस में मिला देना।
• मांचू वंश और विदेशी साम्राज्यवाद के संदर्भ को स्पष्ट न करना।
• सन यात-सेन के राजनीतिक दल 'कुओमींतांग' का उल्लेख करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) सन यात-सेन के तीनों सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से 1, 2, 3 नंबर डालकर लिखें।
b) प्रत्येक सिद्धांत का संक्षिप्त अर्थ (जैसे राष्ट्रवाद = मांचू शासन का अंत) जरूर दें।
c) यह एक अति महत्वपूर्ण प्रश्न है, अतः इसे संक्षिप्त और सटीक रूप में याद रखें।
Question 5: कोरिया ने 1997 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना किस प्रकार किया?
Answer:
कोरिया ने वर्ष 1997 में अपने बढ़ते व्यापार घाटे, वित्तीय संस्थाओं द्वारा खराब प्रबंधन, संगीप्रियों तथा अन्य के द्वारा लापरवाह व्यवसाय संचालन के बीच विदेशी मुद्रा संकट का सामना किया। संकट की वजह से दुनियाभर में आर्थिक मंदी की आशंका पैदा होने लगी। कारिगाई वित्तीय संस्थाओं ने अपने अल्पकालिक दायित्वों का सामना करने के लिए कोरियाई सरकार ने अपने सीमित विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग किया।
मुख्य बिंदु:
• वर्ष 1997 में कोरिया को बढ़ते व्यापार घाटे और वित्तीय संस्थाओं के खराब प्रबंधन के कारण मुद्रा संकट का सामना करना पड़ा।
• संगीप्रियों के लापरवाह व्यवसाय संचालन ने इस आर्थिक संकट को और अधिक गंभीर बना दिया।
• संकट से निपटने के लिए सरकार ने अपने सीमित विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करके अल्पकालिक दायित्वों को पूरा किया।
आम गलतियाँ:
• संकट के मूल कारणों (व्यापार घाटा और वित्तीय कुप्रबंधन) को ठीक से स्पष्ट न करना।
• कोरियाई सरकार द्वारा उठाए गए कदमों (विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग) का उल्लेख न करना।
• उत्तर को अत्यधिक लंबा या अप्रासंगिक विवरणों से भर देना।
Exam Tips:
a) संकट के कारण और उसके समाधान को दो छोटे पैराग्राफ या बिंदुओं में विभाजित करके लिखें।
b) 'विदेशी मुद्रा संकट' और 'व्यापार घाटा' जैसे आर्थिक शब्दों का सही प्रयोग करें।
c) वर्ष 1997 की घटना को सटीक रूप से याद रखें।
Question 6: क्या पड़ोसियों के साथ जापान के युद्ध और उससे पर्यावरण का विनाश तीव्र आधुनिकीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ?
Answer:
आधुनिकीकरण की जापानी नीति ने ही जापान को पड़ोसियों के साथ युद्धों में उलझा दिया तथा उसके पर्यावरण को समाप्त कर दिया। मेजी पुनर्स्थापना के लगभग 40 वर्षों के अंतराल में जापान ने सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की। वहीं के तत्कालीन सम्राटों ने विदेशियों को जंगली समझकर उनकी जंगली विशेषताओं को नजरअंदाज नहीं किया बल्कि उसने स्वयं सीखने की कोशिश की। 'फूकोकु क्योहे' अर्थात् 'समृद्ध देश, मजबूत सेना' के नारे के साथ सरकार ने अपनी नई नीति की घोषणा की। इस नई नीति का उद्देश्य था अपनी अर्थव्यवस्था और सेना को मजबूत बनाना। मेजी सुधारों के तहत अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण पर अत्यधिक जोर दिया गया। सरकार ने उद्योगों के विकास के लिए विदेशों से भी सहायता ली। सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कपास की नवीन किस्मों को विकसित करने की कोशिश की। संचार तथा यातायात के आधुनिक संसाधनों आर्थिक क्रांति में अहम भूमिका निभाई। 20वीं शताब्दी के प्रथम दशक तक जापान की गणना विश्व के सर्वोच्च औद्योगिक देशों में होने लगी। जापान ने बाजार की खोज में 19वीं शताब्दी में औपनीवेशिक दौड़ में शामिल हो गया। परिणामस्वरूप उसे 1894-95 ई. में चीन के साथ तथा 1904-05 ई. में रूस के साथ युद्ध करना पड़ा। औद्योगीकरण के कारण 1920 तक जापान की जनसंख्या लगभग 5-5 करोड़ हो गई। प्रथम विश्व युद्ध के बाद जापान की अर्थव्यवस्था लगातार विकास की ओर अग्रसर होने लगी। जापान रेनोन, सूती वस्त्र तथा कच्चे रेशम का सबसे बड़ा निर्यातक देश बन गया। लोहा-इस्पात उद्योग के क्षेत्र में भी जापान ने अभूतपूर्व विकास किया। औद्योगिक विकास ने लकड़ी की माँग में वृद्धि की इससे पेड़ों की कटाई हुई। फलस्वरूप पर्यावरण पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान में औद्योगिक विकास और तीव्र हो गया जिसकी वजह से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। अतः यह कथन सत्य है कि पड़ोसियों के साथ जापान के युद्ध और उसके पर्यावरण का विनाश तीव्र आधुनिकीकरण की जापानी नीति के चलते हुआ।
मुख्य बिंदु:
• 'फूकोकु क्योहे' (समृद्ध देश, मजबूत सेना) की नीति के कारण जापान ने सैन्य और आर्थिक ताकत पर जोर दिया।
• बाजारों की खोज और औपनिवेशिक विस्तार के कारण जापान चीन (1894-95) और रूस (1904-05) के साथ युद्धों में उलझा।
• तीव्र औद्योगीकरण और वनों की कटाई के कारण पर्यावरण का भारी विनाश हुआ और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा.
आम गलतियाँ:
• केवल युद्धों का वर्णन करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को छोड़ देना।
• 'फूकोकु क्योहे' की अवधारणा और उसके उद्देश्यों को स्पष्ट न करना।
• आर्थिक प्रगति और उससे उत्पन्न समस्याओं के बीच के संबंध को न समझा पाना।
Exam Tips:
a) इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में आर्थिक प्रगति, पड़ोसी देशों से युद्ध और पर्यावरण विनाश- इन तीनों पहलुओं को अलग-अलग पैराग्राफ में लिखें।
b) जापानी नारे 'फूकोकु क्योहे' को जरूर उद्धृत करें।
c) औद्योगीकरण के सकारात्मक (आर्थिक विकास) और नकारात्मक (पर्यावरण विनाश) दोनों पक्षों का संतुलन बनाए रखें।
Question 7: क्या आप मानते हैं कि माओ त्सेतुंग और चीन की साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफलता प्राप्त की?
Answer:
हाँ जी, यह कथन सत्य है कि माओ त्सेतुंग और चीन की साम्यवादी दल ने चीन को मुक्ति दिलाने और मौजूदा कामयाबी की बुनियाद डालने में सफलता प्राप्त की। 1921 ई. में साम्यवादी दल की स्थापना की गई जो अपने प्रारंभिक चरण में ही एक शक्तिशाली दल के रूप में उभरने लगा। एक समय चीन में दो सरकारों का आधिपत्य रहा। एक थी राष्ट्रवादी दल (कुओमींतांग) तथा दूसरी सरकार का अध्यक्ष सैनिक जनरल च्यांग काईशेक था। इसका मुख्यालय बीजिंग में था। लोग दोहरी मार झेल रहे थे। कर तथा खाद्य वस्तुओं के कारण मँहगाई थी, ये दोनों समस्याएँ जनता को परेशान कर रही थी। चीनी साम्यवादी पार्टी के प्रमुख नेता माओ त्सेतुंग की कोशिशों के फलस्वरूप वह पार्टी एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बन गई। उन्होंने किसान संगठन तथा भूमि अधिग्रहण करके फिर से नए नियमों के अनुसार वितरण किया। उन्होंने स्वतंत्र सरकार तथा सैन्य संगठन पर जोर दिया। माओ त्सेतुंग एक शोषणमुक्त राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे। अक्टूबर 1943 में चीन में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के नाम से जनतंत्नीय सरकार की स्थापना कर दी गई। माओ त्सेतुंग ऐसे समाजवादी व्यक्तियों का निर्माण करना चाहते थे, जिन्हें पितृभूमि, काम, जनता, विज्ञान तथा जनसंपत्ति पाँचों से बहुत प्यार हो। उन्होंने महिलाओं के लिए 'ऑल चाइना डेमोक्रेटिस वीमेन्स फेडरेशन' और विद्यार्थियों के लिए 'ऑल चाइना स्टूडेंट्स फेडरेशन' का निर्माण किया।
मुख्य बिंदु:
• 1921 में साम्यवादी दल की स्थापना हुई और माओ त्सेतुंग के नेतृत्व में यह एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरा।
• किसानों को संगठित करके भूमि अधिग्रहण और उसका पुनः वितरण करने से साम्यवादी दल को जनसमर्थन मिला।
• अक्टूबर 1949 (1943) में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई और सामाजिक सुधारों (महिला व छात्र संगठन) को लागू किया गया।
आम गलतियाँ:
• कुओमींतांग (राष्ट्रवादी दल) और साम्यवादी दल के संघर्ष को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• माओ त्सेतुंग द्वारा किए गए सामाजिक और कृषि सुधारों का उल्लेख न करना।
• पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के संदर्भ को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत सीधे 'हाँ' में उत्तर देते हुए करें और फिर ऐतिहासिक घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण दें।
b) च्यांग काईशेक और माओ त्सेतुंग के नेतृत्व के अंतर को स्पष्ट करें।
c) महिलाओं और छात्रों के संगठनों के योगदान को उत्तर में विशेष रूप से शामिल करें।
Question 8: क्या साउथ कोरिया की आर्थिक वृद्धि ने इसके लोकतंत्रीकरण में योगदान दिया?
Answer:
साउथ कोरिया (दक्षिण कोरिया) की आर्थिक वृद्धि ने इसके लोकतंत्रीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दक्षिण कोरिया ने आरंभ से लेकर अंत तक विश्व के सबसे तेजी से विकास करने वाले देशों में से एक था। यह विकसित देशों में सर्वाधिक तीव्र गति से विकास करने वाले देशों में था। वर्ष 2020 में दक्षिण कोरिया विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा निर्यातक तथा दसवाँ सबसे बड़ा आयातक था। दक्षिण कोरिया मूल एशियाई चीतों वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है तथा एकमात्र देश है जिसे नॉक्ट इलैवन समूह में शामिल किया गया था। इस अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि और तीव्र औद्योगीकरण के कारण वहाँ एक मजबूत मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिसने राजनीतिक स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र की स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिससे अंततः देश में लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया सफल हुई।
मुख्य बिंदु:
• दक्षिण कोरिया विश्व में सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है।
• तीव्र आर्थिक वृद्धि और निर्यात-आधारित विकास ने देश को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान दिलाई।
• आर्थिक समृद्धि के फलस्वरूप समाज में जागरूक मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिसने लोकतंत्र की स्थापना में अहम भूमिका निभाई।
आम गलतियाँ:
• केवल आर्थिक आँकड़े (निर्यात, आयात) लिखना और उसके लोकतांत्रिक परिणामों का विश्लेषण न करना।
• आर्थिक विकास और लोकतंत्रीकरण के आपसी संबंध को स्पष्ट न कर पाना।
• दक्षिण कोरिया की वैश्विक स्थिति का गलत उल्लेख करना।
Exam Tips:
a) आर्थिक वृद्धि के तथ्यों को देने के बाद उसे लोकतंत्र और मध्यम वर्ग के उदय से अवश्य जोड़ें।
b) वर्ष 2020 के व्यापारिक आँकड़ों और 'एशियाई चीतों' जैसी शब्दावली का प्रयोग करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।
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