NCERT Solutions Class 11 History Chapter 01 Writing and City Life (लेखन कला और शहरी जीवन) in Hindi

NCERT Solutions for Class 11 History: Chapter 01 लेखन कला और शहरी जीवन

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Question 1: आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे?

Answer:

प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे। इस कथन की पुष्टि मेसोपोटामिया की भौगोलिक परिस्थितियों से होती है। यहाँ पूर्वोत्तर भाग में हरे-भरे तथा ऊँचे-नीचे मैदान हैं, जहाँ अच्छी फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है। पशुपालन के लिए घास के विस्तृत क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में शहरों के लिए भरण-पोषण का साधन बनने की क्षमता थी। दजला-फरात नदियाँ उपजाऊ बारीक मिट्टी लाती थीं जिससे यहाँ पर्याप्त अनाज पैदा होता था। खाद्य उत्पादन बढ़ने पर वस्तु-विनिमय की प्रक्रिया शुरू हो गई। फलस्वरूप गाँवों का आकार बढ़ने लगा। जीवन के स्थायी बनने पर कृषक समुदाय अस्तित्व में आए जो झोपड़ियाँ बनाकर साथ-साथ रहने लगे। इस प्रकार गाँव अस्तित्व में आए।

मुख्य बिंदु:

• मेसोपोटामिया की भौगोलिक स्थिति और पर्याप्त वर्षा ने कृषि तथा पशुपालन को बढ़ावा दिया।
• दजला-फरात नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी से खाद्य उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
• खाद्य उत्पादन बढ़ने से व्यापार और बस्तियों का विकास हुआ जिससे शहरीकरण की नींव पड़ी।

आम गलतियाँ:

• शहरीकरण के कारणों में केवल व्यापार को मुख्य कारण मान लेना और कृषि की भूमिका को भूल जाना।
• दजला और फरात नदियों के योगदान को स्पष्ट रूप से न लिखना।
• गाँवों से शहरों के विकास की क्रमिक प्रक्रिया को न समझाना।

Exam Tips:

a) उत्तर में भौगोलिक और कृषि संबंधी कारकों का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) खाद्य उत्पादन से वस्तु-विनिमय और फिर शहरीकरण की इस शृंखला को चरणबद्ध तरीके से समझाएँ।
c) मेसोपोटामिया की नदियों और उपजाऊ मैदानों के प्रभाव को मुख्य बिंदुओं के रूप में प्रस्तुत करें।

 

Question 2: आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन सी बातों शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं?
(क) अत्यंत उत्पादक खेती, (ख) जल-परिवहन,
(ग) धातु और पत्थर की कमी, (घ) श्रम विभाजन,
(ङ) मुद्राओं का प्रयोग, (च) राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य कर दिया।

Answer:

निम्नलिखित आवश्यक दशाओं की वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था: (क) अत्यंत उत्पादक खेती - शहरीकरण तभी संभव हो सकता है जब खेती में इतनी उपज होती हो कि वह शहर में रहने वाले लोगों का पेट भरने में समर्थ हो सके। जिस स्थान पर शहर का विकास होता है, उस स्थान पर ज़मीन का प्राकृतिक स्वरूप उपजाऊ होना अत्यंत आवश्यक है। (ख) जल-परिवहन - जल परिवहन शहरीकरण के लिए बहुत आवश्यक है। कांस्यकालीन सभ्यताओं में जल-परिवहन, खाद्यत्रा तथा अन्य सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का एक सस्ता तथा सुरक्षित साधन था। खाद्यात्र तथा अन्य सामान से भरी नौकाएँ नदी की धारा के साथ चलती थीं। फलस्वरूप व्यय नहीं करना पड़ता। प्राचीन मेसोपोटामिया की नहरें और प्राकृतिक जल-धाराएँ छोटी-बड़ी बस्तियों के बीच परिवहन के अच्छे साधनों के रूप में कार्य करती थीं। शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न बातें निम्नलिखित हैं: (ग) धातु तथा पत्थर की कमी - धातु तथा पत्थर की कमी ने मेसोपोटामिया में प्रारंभिक शहरीकरण को प्रोत्साहित किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्नत व्यापार की अवस्था शहरीकरण का एक महत्वपूर्ण कारण है। ये बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं। (घ) श्रम विभाजन - औद्योगिक और व्यापारिक विकास में श्रम-विभाजन की अहम् भूमिका थी। शहरीकरण की प्रक्रिया से श्रम विभाजन को प्रोत्साहन मिलता है। (ङ) मुद्राओं का प्रयोग - शहरीकरण के विकास के कारण मुद्राओं के प्रचलन को प्रोत्साहन मिला। मुद्राओं के प्रचलन ने साहूकारों, विभिन्न व्यवसायियों, व्यापार और सरकार के काम को सरल बना दिया। (च) राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया - शहरीकरण की प्रक्रिया ने राजाओं की सैन्य-शक्ति की आधार शिला रखी। शहरीकरण के साथ ही साथ कानून व्यवस्था की देखभाल और श्रम विभाजन पर नियंत्रण अति आवश्यक हो गया। जिसके परिणाम स्वरूप राजा की सैन्य-शक्ति में वृद्धि होने लगी।

मुख्य बिंदु:

• अत्यंत उत्पादक खेती और जल-परिवहन शहरीकरण के प्रारंभिक विकास के लिए आवश्यक दशाएँ थीं।
• धातु तथा पत्थर की कमी, श्रम विभाजन और मुद्राओं का प्रयोग शहरीकरण के परिणाम स्वरूप उत्पन्न हुए।
• राजाओं की सैन्य-शक्ति ने शहरी व्यवस्था और श्रम को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आम गलतियाँ:

• प्रारंभिक आवश्यक दशाओं और शहरीकरण के बाद उत्पन्न होने वाली अवस्थाओं में अंतर न कर पाना।
• सभी बिन्दुओं को एक ही श्रेणी में मिला देना।
• प्रत्येक कारक के तार्किक कारण को ठीक से स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रश्न के दोनों भागों (प्रारंभिक दशाएँ और परिणाम) को अलग-अलग headings के तहत लिखें।
b) कृषि और जल-परिवहन को मुख्य प्रेरक बल के रूप में दर्शाएँ।
c) धातुओं की कमी और व्यापार के विस्तार को परिणाम के रूप में समझाएँ।

 

Question 3: यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए खतरा थे?

Answer:

पशुचारकों को जब अनाज, धातु के औजारों आदि की जरूरत पड़ती थी तब वे अपने पशुओं तथा उनके पनीर, चमड़ा तथा मांस आदि के बदले वे चीजें प्राप्त करते थे। बाड़े में रखे जाने वाले पशुओं के गोबर से बनी खाद भी किसानों के लिए बहुत उपयोगी थी। फिर भी, किसानों तथा गड़रियों के बीच कई बार झगड़े हो जाते थे। गड़रिए कई बार अपनी भेड़-बकरियों को पानी पिलाने के लिए भूए खेतों से गुजार कर ले जाते थे जिससे किसान की फसल को नुकसान पहुँचाता था। ये गड़रिए खानाबदोश होते थे और कई बार किसानों के गाँवों पर हमला बोलकर उनका इकट्ठा किया माल लूट लेते थे। दूसरी तरफ, कई बार ऐसा भी होता था कि बस्तियों में रहने वाले लोग भी इन पशुचारकों का रास्ता रोक देते थे तथा उन्हें अपने पशुओं को नदी-नहर तक नहीं जाने देते थे।

मुख्य बिंदु:

• पशुचारक और किसानों के बीच वस्तु-विनिमय और खाद के आदान-प्रदान का आपसी संबंध था।
• मवेशियों द्वारा फसल नष्ट करने और लूटपाट के कारण अक्सर दोनों के बीच संघर्ष होता था।
• बस्तियों के लोग भी पशुचारकों को पानी और चरागाहों तक पहुँचने से रोक देते थे।

आम गलतियाँ:

• केवल पशुचारकों को ही दोषी ठहराना और किसानों द्वारा उनके रास्ते रोकने की बात को नजरअंदाज करना।
• पशुचारकों और किसानों के आर्थिक संबंधों का उल्लेख न करना।
• उत्तर में केवल नकारात्मक पक्षों को लिखना, आपसी व्यापार का जिक्र न करना।

Exam Tips:

a) उत्तर में संघर्ष के कारणों (फसल नष्ट होना, लूटपाट) के साथ-साथ उनके व्यापारिक संबंधों को भी बताएँ।
b) दोनों पक्षों (किसान और पशुचारक) की समस्याओं को संतुलित रूप से प्रस्तुत करें।
c) स्पष्ट करें कि तनाव के बावजूद दोनों एक-दूसरे पर आर्थिक रूप से निर्भर थे।

 

Question 4: आप ऐसा क्यों सोच रहें हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे?

Answer:

कुछ पुराने मंदिर साधारण घरों से अलग किस्म के नहीं होते थे क्योंकि मंदिर भी किसी देवता का घर होता था। परंतु मंदिरों की बाहरी दीवारें विशेष अंतरालों के बाद भीतर तथा बाहर की ओर मुड़ी होती थी। यही मंदिरों की मुख्य विशेषता थी। साधारण घरों की दीवारें ऐसी नहीं होती थीं।

मुख्य बिंदु:

• शुरुआती मेसोपोटामिया के मंदिर देवताओं के आवास माने जाते थे, इसलिए उनकी मूल संरचना साधारण घरों जैसी थी।
• मंदिरों और साधारण घरों में मुख्य अंतर उनकी दीवारों की बनावट में था।
• मंदिरों की बाहरी दीवारों में नियमित अंतराल पर उभार और खाँच (Indentations) होते थे जो सामान्य घरों में नहीं पाए जाते थे।

आम गलतियाँ:

• मंदिरों को पूरी तरह महलों या आधुनिक मंदिरों की तरह विशाल भवन मान लेना।
• मंदिर की विशिष्ट वास्तुकला (दीवारों की बनावट) की अनदेखी करना।
• यह स्पष्ट न कर पाना कि मंदिर को 'देवता का घर' क्यों कहा गया है।

Exam Tips:

a) मंदिर के धार्मिक महत्व और उसके घरेलु स्वरूप के बीच की समानता को समझाएँ।
b) साधारण घरों और मंदिरों की दीवारों के अंतर को मुख्य बिंदु के रूप में लिखें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।

 

Question 5: शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन सी नई संस्थाएँ अस्तित्व में आई? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं।

Answer:

शहरी जीवन शुरू होने के बाद निम्नलिखित नई संस्थाएँ अस्तित्व में आईं: विद्यालय, व्यापार केंद्र, शिल्पकार, मंदिर, लिपिक अथवा पट्टिका लेखक, स्थायी सेना, वस्तुविद्, मूर्तिकार आदि। इनमें से विद्यालय, व्यापार केंद्र, मंदिर, स्थायी सेना और वस्तुविद् जैसी संस्थाएँ सीधे तौर पर राजा की पहल और नियंत्रण पर निर्भर थीं क्योंकि राजा ही बड़े निर्माण कार्यों, मंदिर निर्माण, सेना के रखरखाव और व्यापार के संचालन की व्यवस्था करता था।

मुख्य बिंदु:

• शहरीकरण के बाद समाज में विशेषीकृत संस्थाएँ जैसे विद्यालय, लिपिक वर्ग और स्थायी सेना का उदय हुआ।
• मंदिर और व्यापार केंद्र आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र बने।
• राजा की शक्ति बढ़ने से सेना, बड़े निर्माण और वास्तुकला से जुड़ी संस्थाएँ राजकीय नियंत्रण में आईं।

आम गलतियाँ:

• केवल मंदिरों और विद्यालयों के नाम लिखकर अन्य संस्थाओं को छोड़ देना।
• यह स्पष्ट न करना कि कौन सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं।
• लिपिकों और शिल्पकारों की भूमिका को शहरी विकास में न दर्शाना।

Exam Tips:

a) संस्थाओं की सूची स्पष्ट रूप से बिंदुवार या पैराग्राफ में दें।
b) राजा की भूमिका वाली संस्थाओं को अलग से रेखांकित करें।
c) एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के आधार पर सही शब्दावली (जैसे वस्तुविद्, पट्टिका लेखक) का प्रयोग करें।

 

Question 6: किन पुरानी कहानियों से हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक मिलती है?

Answer:

मेसोपोटामिया यूनानी भाषा का शब्द है जिसका तात्पर्य दो नदियों के बीच के प्रदेश से है। मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक बाइबल के प्रथम भाग 'ओल्ड टेस्टामेंट' के कई संदर्भों में देखने को मिलती है। जैसे कि ओल्ड टेस्टामेंट की बुक ऑफ़ जेनेसिस में शिमार का उल्लेख मिलता है जिसका अर्थ सुमेर हँटी से बनी शहरी की भूमि है। यूरोपीयवासी इस भूमि को अपने पूर्वजों की भूमि मानते हैं और जब इस क्षेत्र में पुरातत्त्वीय खोज की शुरुआत हुई तो ओल्ड टेस्टामेंट को अक्षरशः सिद्ध करने का प्रयास किया गया। 1873 ई. में ब्रिटिश समाचार-पत्र ने ब्रिटिश संग्रहालय द्वारा प्रारंभ किए गए खोज अभियान का खर्च उठाया जिसके तहत मेसोपोटामिया में एक ऐसी पट्टिका की खोज की जानी थी जिस पर बाइबल में उल्लिखित जलप्लावन पृथ्वी पर संपूर्ण जीवन को नष्ट करने वाला था। परंतु परमेश्वर ने जलप्लावन के बाद भी जीवन को पृथ्वी पर सुरक्षित रखने के लिए नोआ नाम के एक मनुष्य को चुना। नोआ ने एक बहुत बड़ी नाव बनाई और उसमें सभी जीव-जंतुओं का एक-एक जोड़ा रख लिया तथा जब जलप्लावन हुआ तो बाकी सब कुछ नष्ट हो गया, पर नाव में रखे सभी जोड़े सुरक्षित बच गए। इसी के जैसे एक और कहानी मेसोपोटामिया के परंपरागत् साहित्य में मिलती है। इस कहानी के मुख्य पात्र को जिसुद्र या उतनापिष्टिम कहा जाता था।

मुख्य बिंदु:

• मेसोपोटामिया की संस्कृति और कहानियों की झलक बाइबल के 'ओल्ड टेस्टामेंट' में मिलती है।
• 'बुक ऑफ़ जेनेसिस' में सुमेर (शहरी भूमि) का उल्लेख इसका प्रमुख प्रमाण है।
• जलप्लावन (प्रलय) की कहानी, जिसमें नोआ और मेसोपोटामिया के उतनापिष्टिम की कथाएँ लगभग समान हैं, सभ्यता की प्राचीनता दर्शाती हैं।

आम गलतियाँ:

• ओल्ड टेस्टामेंट और मेसोपोटामिया के साहित्यों के आपसी संबंधों को स्पष्ट न कर पाना।
• जलप्लावन की कहानी के पात्रों (नोआ और उतनापिष्टिम) के नामों में भ्रम होना।
• ऐतिहासिक खोजों और धार्मिक ग्रंथों के संदर्भों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) उत्तर में 'ओल्ड टेस्टामेंट' और जलप्लावन की कथा का मुख्य रूप से उल्लेख करें।
b) यूनानी शब्द 'मेसोपोटामिया' के अर्थ से उत्तर की शुरुआत करें।
c) पुरातत्वीय खोजों और साहित्यिक साक्ष्यों के महत्व को संक्षेप में समझाएँ।

 

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